इग्नोर करना एक कला है जो आत्मशक्ति और शांति बढ़ाती है, जिससे लोग आपकी असली वैल्यू समझते हैं।
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Key Takeaways
- इग्नोर करना ऊर्जा बचाने और आत्मशक्ति बढ़ाने की कला है।
- हर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं, मौन में भी शक्ति होती है।
- जो आसानी से उपलब्ध नहीं होता, उसकी वैल्यू अधिक होती है।
- अपने भीतर की शांति को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
- इग्नोर करना स्वयं की गरिमा और सम्मान की रक्षा है।
What the video covers
- मौन और इग्नोर करना आत्मा की शांति और ऊर्जा बचाने का माध्यम है।
- हर बात का जवाब देने से व्यक्ति की ऊर्जा खत्म होती है और उसकी उपस्थिति कमजोर पड़ती है।
- इग्नोर करना नफरत या बदले की भावना नहीं, बल्कि जागरूकता और शांति की कला है।
- जो आसानी से उपलब्ध नहीं होता, उसकी वैल्यू लोग करते हैं।
- अपनी ऊर्जा को बचाना और चुनिंदा रूप से देना व्यक्ति को समृद्ध बनाता है।
- हर किसी को समझाने या साबित करने की जरूरत नहीं होती, कुछ लोग समझना ही नहीं चाहते।
- मौन की शक्ति से व्यक्ति की गरिमा और आकर्षण बढ़ता है।
- अपने भीतर के शोर और बाहरी नकारात्मकता को इग्नोर करना सीखना जरूरी है।
- इग्नोर करना स्वयं की रक्षा और चेतना की सुरक्षा है।
- जो व्यक्ति स्थिर और अडिग रहता है, वही असली विजेता और सम्राट होता है।
Chapters
- 00:00मौन और शांति की शुरुआत
- 01:10इग्नोर करने का महत्व और कला
- 02:23अपनी ऊर्जा की रक्षा कैसे करें
- 03:32सबको समझाने की जरूरत नहीं
- 04:51चुनिंदा रूप से देना और अपनी गरिमा
- 06:02मौन की शक्ति और प्रभाव
- 07:19इग्नोर करना स्वयं की रक्षा है
- 08:32भीतर की शांति और स्थिरता
- 09:40मुस्कुराहट और आगे बढ़ना
- 11:07असली विजेता की पहचान
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Speaker A
अपनी आंखें बंद करो। एक गहरी सांस लो और उस सांस को धीरे-धीरे भीतर उतरने दो। आज किसी को जवाब देने की जल्दी मत करो। आज किसी को समझाने की भी जल्दी मत करो। बस कुछ पल के लिए मौन हो जाओ। क्योंकि मौन ही
Speaker A
वह भूमि है जहां मन का शोर उतरता है और आत्मा की सुगंध प्रकट होने लगती है। देखो जीवन में सबसे बड़ी कमजोरी यह नहीं है कि लोग तुम्हें नहीं समझते। सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि तुम हर किसी को अपने बारे में
Speaker A
समझाने लगते हो। तुम हर आवाज पर मुड़ जाते हो। हर तीर को अपने भीतर ले लेते हो। हर उपेक्षा को अपमान मान लेते हो। और फिर अपने ही हाथों अपनी ऊर्जा को नष्ट कर देते हो। जो व्यक्ति हर बात का उत्तर देने लगता
Speaker A
है, वह धीरे-धीरे अपने भीतर का तेज खो देता है। उसकी आंखों की चमक कम होने लगती है। उसकी उपस्थिति हल्की होने लगती है और लोग उसे हल्का समझने लगते हैं। लेकिन एक गहरा रहस्य है जब तक तुम हर किसी को
Speaker A
पकड़ने की कोशिश करते रहोगे। तब तक कोई भी तुम्हारी कीमत नहीं समझेगा। लोग मूल्य उसे देते हैं जो आसानी से उपलब्ध नहीं होता। जो हर क्षण अपने को नहीं गिरवी रख देता। जो अपनी उपस्थिति को व्यर्थ नहीं करता। जो
Speaker A
जानता है कि कब बोलना है और कब मौन रहना है, कब चलना है और कब ठहर जाना है। इग्नोर करना कोई नफरत नहीं है। इग्नोर करना कोई बदले की भावना नहीं है। इग्नोर करना एक कला है। एक जागरूकता है। एक शांति है। एक
Speaker A
ऐसा आचरण है जिसमें तुम दूसरों की हर प्रतिक्रिया को अपना भोजन नहीं बनने देते। तुम हर ताने पर तड़पते नहीं। हर व्यंग पर बिखरते नहीं। हर उपेक्षा पर रोते नहीं। तुम भीतर खड़े होकर देखते हो और देखते ही
Speaker A
समझ जाते हो कि सामने वाला क्या कर रहा है और तुम क्या नहीं करोगे। यही वह क्षण है जहां तुम्हारी वैल्यू बनती है। क्योंकि जो स्वयं को संभालना जानता है, वह दुनिया को भी संभालना शुरू कर देता है और दुनिया
Speaker A
सबसे पहले उसी को देखती है जो भीतर से स्थिर है जो भीतर से अडिग है जो हर दृश्य में बह नहीं जाता जो हर आवाज में नहीं डोलता। जो हर नजर को परम सत्य नहीं मानता। सोचो यदि हर बार कोई तुम्हें अनदेखा करे
Speaker A
और तुम तुरंत उसके पीछे भाग जाओ तो क्या वह तुम्हें गंभीरता से लेगा? नहीं। वह तो यही समझेगा कि तुम उसकी मुट्ठी में हो कि तुम्हारी शांति उसके हाथ में है कि तुम्हारे मन की डोर उसके इशारे पर नाचती
Speaker A
है और जब किसी के हाथ में तुम्हारी डोर आ जाती है तब तुम्हारी वैल्यू नहीं बचती। वह तुम्हें उपयोग करने लगता है, तलने लगता है और फिर धीरे-धीरे तुम्हें सामान्य समझ लेता है। पर जब तुम रुक जाते हो, जब तुम
Speaker A
बिना क्रोध के पीछे हट जाते हो, जब तुम बिना शोर के अपनी ऊर्जा बचा लेते हो, तब सामने वाला चौंकता है। उसे पहली बार एहसास होता है कि यह व्यक्ति किसी की पकड़ में नहीं आता। यह व्यक्ति हवा की तरह है। इसे
Speaker A
बंद नहीं किया जा सकता। यह व्यक्ति नदी की तरह है। इसे रोका नहीं जा सकता। यह व्यक्ति भीतर से इतना पूर्ण है कि उसे किसी की मान्यता की भूख नहीं। यही कारण है कि मौन का अपना आकर्षण होता है। जो लोग हर
Speaker A
समय बोलते रहते हैं उन्हें लोग जल्दी भूल जाते हैं। लेकिन जो कम बोलते हैं जो बातों को व्यर्थ नहीं करते जो हर क्षण अपने मुंह से नहीं गिरते। उनकी उपस्थिति गहरी लगती है। उनका एक मौन भी असर करता है। उनकी एक
Speaker A
नजर भी रास्ता बदल देती है। उनकी एक चुप्पी भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है। और यह समझो हर किसी को जवाब देना तुम्हारा धर्म नहीं है। हर किसी की गलतफहमी को मिटाना तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं है। हर किसी के मन में जाकर अपना सच
Speaker A
बैठाना तुम्हारा काम नहीं है। कुछ लोग तुम्हें नहीं समझेंगे क्योंकि वे समझना नहीं चाहते। कुछ लोग तुम्हें छोटा दिखाएंगे क्योंकि वे तुम्हारी ऊंचाई से डरते हैं। कुछ लोग तुम्हें अनदेखा करेंगे क्योंकि वे तुम्हारी उपस्थिति का मूल्य अभी नहीं जानते। ऐसे लोगों के सामने खुद
Speaker A
को साबित करने में अपनी ऊर्जा मत गवाओ। तुम्हारी ऊर्जा तुम्हारा खजाना है। जो व्यक्ति अपनी ऊर्जा को बचाना सीख जाता है, वह भीतर से समृद्ध हो जाता है, वह समझ जाता है कि हर ध्यान देना दान नहीं होता।
Speaker A
कभी-कभी अनदेखा करना भी साधना है। कभी-कभी चुप रह जाना भी शक्ति है। कभी-कभी हट जाना भी प्रेम है। क्योंकि हर जगह अपनी उपस्थिति थोपना प्रेम नहीं होता। कई बार वह केवल असुरक्षा होती है। तुम्हें वह दिन याद रखना चाहिए। जब तुमने किसी के एक
Speaker A
संदेश का, किसी के एक शब्द का, किसी के एक व्यवहार का पूरा दिन खराब कर दिया था। क्या मिला था तुम्हें? सिर्फ थकान, सिर्फ बेचैनी, सिर्फ मन की टूटन। अब देखो अगर वही क्षण तुमने मौन में बदल दिया होता,
Speaker A
अगर तुमने वहीं से अपनी दृष्टि हटा ली होती, अगर तुमने भीतर कहा होता कि नहीं मैं अपनी शांति किसी के हाथ नहीं दूंगा, तो वही क्षण तुम्हारे व्यक्तित्व को और चमका देता। इग्नोर करने का अर्थ यह नहीं कि तुम कठोर हो जाओ। अर्थ यह है कि तुम
Speaker A
जागरूक हो जाओ। तुम सबको सब कुछ नहीं दोगे। तुम अपनी हंसी भी चुनकर दोगे। अपना समय भी चुनकर दोगे, अपना मन भी चुनकर दोगे, अपनी निकटता भी चुनकर दोगे। क्योंकि जो हर किसी को सब कुछ दे देता है, वह अंत
Speaker A
में स्वयं के लिए खाली रह जाता है और खाली व्यक्ति को दुनिया कभी नहीं पूछती। दुनिया उस व्यक्ति के चरणों में झुकती है जो स्वयं के चरणों में पहले खड़ा हो चुका हो जो जानता हो कि मैं कोई साधारण वस्तु नहीं
Speaker A
हूं। मैं उपयोग होने के लिए नहीं बना हूं। मैं बिकने के लिए नहीं बना हूं। मैं हर दरवाजे पर दस्तक देने के लिए नहीं बना हूं। मैं अपनी गरिमा में जीने के लिए बना हूं। और यही गरिमा तुम्हें सुंदर बनाती
Speaker A
है। तुम्हें रहस्यमय बनाती है। तुम्हें आकर्षक बनाती है। कभी देखा है? पेड़ वही सबसे अधिक फल देता है जो हवा के हर झोंके पर नहीं झुकता। जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। जो शोर में भी मौन खड़ा रहता है।
Speaker A
मनुष्य भी ऐसा ही है जिसके भीतर जड़े गहरी होती हैं। वह बाहर की हवाओं से नहीं टूटता। वह दूसरों के व्यवहार को अपनी पहचान नहीं बनाता। वह देखता है, समझता है और आगे बढ़ जाता है। और यही आगे बढ़ जाना
Speaker A
लोगों को परेशान करता है। क्योंकि वे चाहते थे कि तुम रुक जाओ, तुम रोओ, तुम पूछो, तुम गिड़गिड़ाओ, तुम उनके अभाव में खाली हो जाओ। लेकिन जब तुम चुपचाप मुस्कुराते हुए आगे निकल जाते हो तो वे समझ नहीं पाते। तब उनके भीतर एक हलचल पैदा
Speaker A
होती। तब वे पहली बार तुम्हें महसूस करते हैं क्योंकि जिस चीज को वे कम आंक रहे थे वही चीज उनके हाथ से निकल गई। सुनो जो व्यक्ति तुम्हें बार-बार नजरअंदाज करे उसके लिए बार-बार उपस्थित मत हो जाओ। जो
Speaker A
तुम्हारी कदर ना करे उसके सामने अपनी कद्र मत गिराओ। जो तुम्हारी चुप्पी को कमजोरी समझे उसे अपनी अनुपस्थिति का स्वाद चखने दो। कभी-कभी सबसे गहरा उत्तर कोई उत्तर नहीं होता। कभी-कभी सबसे सुंदर स्पष्टीकरण कोई स्पष्टीकरण नहीं होता। कभी-कभी सबसे
Speaker A
बड़ी जीत बस यह होती है कि तुम शांत बने रहो और शांत बने रहना आसान नहीं है। इसमें बड़ा साहस चाहिए क्योंकि क्रोध तो हर कोई कर लेता है। चीख तो हर कोई सकता है। अपमानित होकर पलट कर वार तो हर कोई कर
Speaker A
सकता है। लेकिन जो भीतर से इतना भरा हुआ हो कि उसे किसी के व्यवहार से अपनी दिशा ना बदलनी पड़े। वही असली साधक है। वही असली विजेता है। वही असली सम्राट है। तुम्हें यह भी समझना होगा कि इग्नोर करना
Speaker A
किसी का अपमान नहीं। यह स्वयं की रक्षा है। यह अपनी चेतना को बचाना है। यह उन दरवाजों को बंद करना है जिनसे भीतर धूल आती है। यह उन रिश्तों से दूरी बनाना है जो तुम्हें लगातार खाली करते हैं। यह उन
Speaker A
लोगों से ऊर्जा वापस लेना है जो तुम्हारी भल मनसाहत को तुम्हारी कमजोरी समझते हैं। जब तुम ऐसा करोगे तो लोग बदलने लगेंगे। कुछ लोग पास आने लगेंगे। कुछ लोग सम्मान करने लगेंगे। कुछ लोग तुम्हारी बात ध्यान से सुनने लगेंगे। क्योंकि अब तुम्हारे
Speaker A
भीतर वह बेचैनी नहीं रही जो हर बार उन्हें बुलाती थी। अब तुम्हारी आंखों में एक ठहराव है। अब तुम्हारे चेहरे पर एक शांति है। अब तुम्हारी चाल में एक गरिमा है। अब तुम्हारी चुप्पी में भी एक आवाज है। और
Speaker A
यही आवाज लोगों को बता देती कि सामने कोई साधारण व्यक्ति नहीं खड़ा। लेकिन याद रखना इग्नोर केवल बाहर वालों के लिए नहीं। कभी-कभी अपने भीतर उठती हल्की-हल्की आवाजों को भी इग्नोर करना पड़ता है। वह आवाज जो कहती है कि अभी दौड़ो, अभी मनाओ,
Speaker A
अभी साबित करो। अभी लड़ो, अभी टूट जाओ। उसे भी सुनना नहीं है। उस आवाज को देखो और गुजर जाने दो। तुम्हारे भीतर जो सच्चा है, वह शांति से बोलता है। वह जल्दबाजी में नहीं चीखता। जो व्यक्ति भीतर के शोर को
Speaker A
इग्नोर करना सीख जाता है, वह बाहर की दुनिया को भी सहजता से देख पाता है। फिर उसे हर संबंध में जकड़न नहीं होती। हर प्रतिक्रिया में डर नहीं होता। हर मौन में असुरक्षा नहीं होती। वह जानता है कि कुछ
Speaker A
लोग आते हैं। कुछ लोग जाते हैं। कुछ लोग मानते हैं। कुछ लोग भूलते हैं। लेकिन मैं किसी के मानने और भूलने से नहीं चलूंगा। मैं अपने केंद्र से चलूंगा। और यही केंद्र ही तुम्हें अनमोल बनाता है। अब एक बात और
Speaker A
सुनो। जो लोग तुम्हें सचमुच महत्व देंगे, वे तुम्हारी चुप्पी से भी समझ जाएंगे। उन्हें तुम्हें हर बार उचक कर दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें तुम्हारे पीछे भागना नहीं पड़ेगा। वे स्वयं तुम्हारी ऊर्जा को महसूस करेंगे। और जो केवल शोर से
Speaker A
आकर्षित होते हैं। उन्हें शोर ही चाहिए। वे तुम्हारे मौन की भाषा नहीं समझ सकते। तो उन पर अपना कीमती समय मत खर्च करो। आज से एक प्रयोग करो। जब कोई तुम्हें बेवजह खींचे, तुरंत जवाब मत दो। जब कोई तुम्हें
Speaker A
उलझाए, तुरंत सफाई मत दो। जब कोई तुम्हें नीचा दिखाए, तुरंत अपना मूल्य सिद्ध मत करो। एक क्षण रुको। एक सांस लो और अपने भीतर देखो। क्या यह उत्तर देने योग्य है?
Speaker A
क्या यह लड़ने योग्य है? क्या यह तुम्हारी शांति के लायक है? यदि नहीं, तो बस मुस्कुरा दो और आगे बढ़ जाओ। देखना यही मुस्कान सबसे गहरा वार करेगी। किसी पर नहीं तुम्हारी असुरक्षा पर तुम्हारी अधीरता पर तुम्हारी पुरानी आदतों पर और जब
Speaker A
भीतर की यह पुरानी आदतें टूटेंग तब तुम्हारा नया व्यक्तित्व जन्म लेगा जो कम बोलेगा पर बहुत गहरा होगा जो कम मांगेगा पर बहुत समृद्ध होगा जो कम पीछे भागेगा पर बहुत दूर तक जाएगा अब अपनी हथेलियों को हल्का सा खोलो जैसे तुम हर बोझ को छोड़
Speaker A
रहे हो हर आग्रह को छोड़ रहे हर हड़बड़ी को छोड़ रहे हो और अपने भीतर यह वचन दो। मैं हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं रहूंगा। मैं अपनी ऊर्जा की रखवाली करूंगा। मैं अपनी शांति को सस्ता नहीं होने दूंगा। मैं
Speaker A
हर आवाज पर नहीं मुडूंगा। मैं हर उपेक्षा पर नहीं टूटूंगा। मैं मौन को अपनी शक्ति बनाऊंगा। और जो मुझे सच में समझेगा। वह मेरे मौन को भी सुनेगा। यही है वह राह। जहां उपेक्षा तुम्हारी हार नहीं बनती। उपेक्षा तुम्हारी शिक्षा बन जाती है और
Speaker A
मौन तुम्हारी सौंदर्य भाषा बन जाता है। तुम धीरे-धीरे देखोगे लोग तुम्हारे पीछे नहीं। तुम्हारी उपस्थिति के पीछे चल रहे हैं क्योंकि जिसने स्वयं को चुन लिया। दुनिया उसी को चुनने लगती है और जिसने अपनी गरिमा बचा ली उसे फिर कोई छोटा नहीं
Speaker A
कर सकता। अब बस थोड़ा और मौन रहो और इस मौन में अपनी असली ताकत को महसूस करो। क्योंकि अभी जो शांति तुम्हारे भीतर उतर रही है वही आगे चलकर तुम्हारी पहचान बनेगी। वही तुम्हारी आंखों में ठहराव लाएगी। वही तुम्हारी आवाज में वजन लाएगी
Speaker A
और वही लोगों को यह एहसास कराएगी कि तुम वह व्यक्ति हो जिसे नजरअंदाज करना आसान था। पर समझना आसान नहीं और समझने के लिए भी उन्हें अब तुम्हारे आसपास ठहरना पड़ेगा। तभी वे जान पाएंगे कि जिसे वे साधारण समझ रहे थे। वह साधारण कभी था ही
Speaker A
नहीं। साधारण तो उनका देखने का तरीका था। तुम नहीं क्योंकि तुम भीतर से शोर नहीं सागर हो और सागर को समझने के लिए उसके किनारे खड़े रहना काफी नहीं होता। उसकी गहराई में उतरना पड़ता है। लेकिन दुनिया किनारे से ही निर्णय दे देती है। यही उसकी
Speaker A
आदत है और यही तुम्हारा अवसर भी है कि तुम किनारे के निर्णयों से प्रभावित ना हो। क्योंकि जो व्यक्ति अपनी गहराई जानता है उसे किनारे की आवाजें परेशान नहीं करती। याद रखो लोगों को सबसे अधिक तकलीफ तब होती
Speaker A
है जब वे देख लेते हैं कि तुम उनके बिना भी शांत हो। उनके बिना भी खड़े हो। उनके बिना भी पूरा हो। तब उनकी पकड़ ढीली पड़ने लगती है। क्योंकि वे तुम्हारी जरूरत से नहीं। तुम्हारी निर्भरता से जीते थे। और
Speaker A
जब निर्भरता टूटती है तो उनके भीतर का भ्रम भी टूट जाता है। इसीलिए आज से एक नई आदत डालो। हर जगह अपनी कमी मत दिखाओ। हर व्यक्ति के सामने अपनी जरूरत मत खोलो। हर अस्वीकृति पर अपना दरवाजा मत पीटो। थोड़ा
Speaker A
रुकना सीखो। थोड़ा ठहरना सीखो। थोड़ा हटना सीखो। क्योंकि हटने वाला व्यक्ति हारता नहीं। वह अपने स्थान को पहचानता है। और जो अपने स्थान को पहचान लेता है, वह फिर किसी की दया का मोहताज नहीं रहता। देखो यदि कोई
Speaker A
तुम्हें बार-बार नजरअंदाज कर रहा है तो उसे बार-बार याद मत दिलाओ कि तुम कितने अच्छे हो। अगर कोई तुम्हारी कीमत नहीं समझ रहा तो अपने मूल्य को चिल्लाकर मत बताओ। मूल्य बताया नहीं जाता। मूल्य महसूस कराया जाता है और महसूस वही किया जाता है जो
Speaker A
अपने भीतर स्थिर हो। जिसके भीतर एक सच्ची चुप्पी हो जिसकी आंखों में विनम्रता हो और जिसकी उपस्थिति में वजन हो। इग्नोर करना कभी-कभी प्रेम का सबसे सुंदर रूप बन जाता है। क्योंकि हर बार किसी के पीछे भागना प्रेम नहीं होता। कई बार वह केवल डर होता
Speaker A
है। डर की कहीं खो ना जाऊं। डर की कहीं छोड़ ना दिया जाऊं। डर की कहीं मैं कम ना पड़ जाऊं। लेकिन जैसे ही तुम इस डर को देख लेते हो, तुम मुक्त होने लगते हो। फिर तुम्हारी मुस्कान में मजबूरी नहीं रहती।
Speaker A
फिर तुम्हारी बातों में याचना नहीं रहती। फिर तुम्हारे संबंधों में भी एक गरिमा आ जाती है। अब समझो जो लोग सचमुच तुम्हारे हैं वे तुम्हारे मौन से भी तुम्हें समझ लेंगे। उन्हें तुम्हारे पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें तुम्हारी
Speaker A
परीक्षा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे तुम्हारी शांति को पहचान लेंगे। वे तुम्हारे ठहराव को महसूस कर लेंगे। और जो लोग केवल तुम्हारी प्रतिक्रिया के भूखे हैं, वे तुम्हें बार-बार छेड़ेंगे। वे तुम्हें बार-बार उकसाएंगे, वे तुम्हारी शांति को तोड़ना चाहेंगे। लेकिन तुम अब
Speaker A
पहले जैसे नहीं रहोगे। अब तुम उत्तर देने से पहले देखोगे। अब तुम रुकने से पहले सोचोगे नहीं। अब तुम सीधे अपनी ऊर्जा नहीं बहाओगे। अब तुम अपनी चेतना का दीपक हर हवा के आगे नहीं रखोगे। क्योंकि तुम समझ चुके
Speaker A
हो शांति कोई कमजोरी नहीं। शांति सबसे ऊंची शक्ति है। क्रोध से कोई भयभीत हो सकता है। लेकिन शांति से लोग भीतर तक हिल जाते हैं। क्योंकि शांति के सामने झूठ देर तक टिक नहीं पाता। तुम्हारे जीवन में कुछ
Speaker A
लोग ऐसे भी होंगे जो तुम्हारी उपलब्धता को ही तुम्हारी कमजोरी मान लेंगे। वे सोचेंगे तुम हमेशा वहीं रहोगे। वे सोचेंगे तुम हमेशा सुनोगे। वे सोचेंगे तुम हमेशा लौट आओगे। लेकिन जिस दिन तुम अपनी ऊर्जा को वापस लेना सीख जाओगे। उस दिन वे पहली बार
Speaker A
तुम्हें खोने का अर्थ समझेंगे और यहीं से तुम्हारी वैल्यू शुरू होती है। किसी को दुख देने से नहीं बल्कि अपनी गरिमा बचाने से। गरिमा ही वह चीज है जो व्यक्ति को सुंदर बनाती है। चेहरा नहीं, वस्त्र नहीं, शब्दों का प्रदर्शन नहीं। गरिमा जब तुम
Speaker A
गरिमा के साथ खड़े होते हो तो हवा भी तुम्हें अलग तरह से छूती। लोग भी अलग तरह से देखते हैं और जो तुम्हें पहले अनदेखा करते थे, वे अब तुम्हारी एक झलक के लिए ठहरते हैं। क्योंकि उन्हें समझ आ जाता है
Speaker A
कि यह व्यक्ति भीड़ का हिस्सा नहीं है। यह व्यक्ति अपनी ही ज्योति में जी रहा है। अब एक छोटी सी बात और सुनो। किसी को इग्नोर करने का अर्थ यह नहीं कि तुम पत्थर बन जाओ। अर्थ यह है कि तुम अपने भीतर की नमी
Speaker A
को गलत जगह व्यर्थ ना करो। किसी के लिए अपने आंसू मत बहाओ। जो तुम्हारे आंसू की कद्र ना करे। किसी के लिए अपने सपने मत तोड़ो। जो तुम्हारे सपनों का मूल्य ना समझे। किसी के लिए अपने समय का अपमान मत
Speaker A
करो। जो तुम्हें केवल खाली समय में याद करें। तुम्हारा जीवन कोई मुफ्त वस्तु नहीं है। तुम्हारा समय कोई बाजार की चीज नहीं है। तुम्हारी उपस्थिति एक उत्सव है और उत्सव को हर किसी के दरवाजे पर नहीं ले जाया जाता। जब तुम यह समझ जाते हो तो
Speaker A
तुम्हारे भीतर एक नया आदमी पैदा होता है। वह शांत होता है। वह कम बोलता है। वह अधिक देखता है। वह अधिक महसूस करता है। वह कम प्रतिक्रिया देता है। वह अधिक चयन करता है। वह हर किसी को अपना नहीं मानता। वह हर
Speaker A
संबंध को अपनी सांस नहीं बनाता। और तभी उसका जीवन हल्का होने लगता है। तभी उसकी आंखों से थकान कम होने लगती है। तभी उसके चेहरे पर वह चमक लौटने लगती है। जो बहुत समय से बिखरी हुई थी। अभी भी यदि तुम्हें
Speaker A
कोई नहीं समझ रहा तो परेशान मत हो। समझने की जल्दी मत करो। समय को काम करने दो क्योंकि समय ही सबसे ईमानदार गवाह है। वह किसी को भी ज्यादा देर तक गलत नहीं रहने देता। आज जो तुम्हें नजरअंदाज कर रहा है।
Speaker A
कल वही तुम्हारी कमी महसूस करेगा। आज जो तुम्हें हल्का समझ रहा है, कल वही तुम्हारी मौन उपस्थिति ढूंढेगा। आज जो तुम्हारे पीछे बोल रहा है, कल वही तुम्हारी एक नजर के लिए तरसेगा। लेकिन तब तक तुम्हें अपनी जगह पर टिके रहना है।
Speaker A
टिके रहना ही साधना है। बिना शोर के बिना शिकायत के बिना किसी को गाली दिए। बिना बदला सोचे बस अपनी ऊर्जा समेट लो। अपनी दृष्टि साफ रखो। अपने कदम हल्के रखो। अपना मन बड़ा रखो। और अपनी आत्मा को किसी के
Speaker A
सामने निचला मत होने दो। तुम्हें किसी को यह साबित करने की जरूरत नहीं कि तुम कितने खास हो। जो खास होता है वह दिखाने में व्यस्त नहीं रहता। वह अपने स्वभाव में जीता है। वह अपने मौन में खिलता है। वह
Speaker A
अपने कर्म में चमकता है। और वही चमक धीरे-धीरे लोगों को खींचती है। बिना शोर के, बिना आग्रह के, बिना मांग के, आज से जब भी कोई तुम्हें कमा के तो उसकी तरफ भागो मत। अपने भीतर लौट जाओ। जब भी कोई
Speaker A
तुम्हें अनदेखा करे तो अपनी रोशनी कम मत करो। अपनी रोशनी और गहरी करो। जब भी कोई तुम्हारी शांति को तोड़ना चाहे तो और अधिक शांत हो जाओ क्योंकि शांत व्यक्ति हारता नहीं। वह बस अपना खेल बदल देता है। यही है
Speaker A
जीवन की सबसे सुंदर चाह। इग्नोर करना सीखो ताकि तुम्हारी ऊर्जा तुम्हारे पास रहे ताकि तुम्हारी मुस्कान नकली ना हो ताकि तुम्हारा प्रेम भीख ना बने ताकि तुम्हारी उपस्थिति मूल्यवान हो और जब तुम मूल्यवान बनते हो तो दुनिया तुम्हारे आसपास नहीं
Speaker A
तुम्हारे पीछे नहीं तुम्हारे साथ चलना चाहती है। अब गहरी सांस लो और अपने भीतर यह वचन रखो। मैं हर किसी की चाहत नहीं बनूंगा। मैं अपनी शांति का रक्षक बनूंगा। मैं अपनी ऊर्जा को बचाऊंगा। मैं हर उपेक्षा के सामने झुकूंगा नहीं। मैं मौन
Speaker A
को अपना हथियार नहीं अपनी सुगंध बनाऊंगा। और जो मुझे समझेगा वह मेरे मौन में भी मेरा सम्मान देखेगा। बस यही आखिरी समझ काफी है कि जिसने स्वयं को संभाल लिया उसे दुनिया संभाल नहीं सकती। जो भीतर से खड़ा
Speaker A
हो गया उसे बाहर की हवा नहीं गिरा सकती। और जो अपनी वैल्यू खुद जान लेता है उसे किसी से वैल्यू मांगनी नहीं पड़ती। अब शांत रहो। मौन में उतर जाओ। और इस नए जीवन को अपने भीतर जन्म लेने दो। जहां तुम
Speaker A
भागते नहीं, जहां तुम भीख नहीं मांगते, जहां तुम अपने होने को बचाते हो और यहीं से तुम्हारा असली प्रभाव शुरू होता है। यहीं से लोग तुम्हें गंभीरता से लेने लगते हैं। यहीं से तुम्हारी उपस्थिति बोलने लगती है और यहीं से तुम वास्तव में जीना
Speaker A
शुरू करते हो।
Topics:इग्नोर करनामौनआत्मशक्तिऊर्जा संरक्षणगरिमाशांतिमोटिवेशनल स्पीचस्वयं की कदरजागरूकताध्यान











