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उपवास की सामर्थ्य || Power of Fasting || Hindi || Ps. Harish Bagle @zindagiwithjesus​

इस वीडियो में उपवास की सामर्थ्य और उसके आध्यात्मिक महत्व को बाइबल के संदर्भ में समझाया गया है।

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Key Takeaways

  • उपवास परमेश्वर के निकट आने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
  • उपवास को गुप्त और हर्षोल्लास के साथ करना चाहिए, न कि उदासी के साथ।
  • निर्बलता में परमेश्वर की सामर्थ्य प्रकट होती है।
  • प्रार्थना और आराधना के बाद उपवास से जीवन में नए द्वार खुलते हैं।
  • उपवास का उद्देश्य केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक निकटता और मार्ग प्रशस्त करना है।

What the video covers

  • उपवास एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक माध्यम है जो हमें परमेश्वर के निकट ले जाता है।
  • पुराने नियम में उपवास शोक और पश्चाताप के साथ होता था, जबकि नए नियम में इसे सेलिब्रेशन के रूप में मनाने की शिक्षा दी गई है।
  • मैथ्यू 6:16-18 के अनुसार उपवास के दौरान बाहरी उदासी नहीं दिखानी चाहिए, बल्कि इसे गुप्त रूप से करना चाहिए।
  • उपवास के दौरान निर्बलता महसूस होती है, लेकिन यही निर्बलता परमेश्वर की सामर्थ्य को सिद्ध करती है।
  • उपवास प्रार्थना और आराधना के बाद एक शक्तिशाली टूल है जो हमारे लिए नए रास्ते खोलता है।
  • उपवास के माध्यम से हम अपने जीवन, परिवार और व्यक्तिगत समस्याओं के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
  • उपवास का उद्देश्य केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि परमेश्वर के सामने दीनता और आत्मिक निकटता प्राप्त करना है।
  • उपवास के साथ प्रार्थना करने से अद्भुत आश्चर्य कर्म होते हैं और परमेश्वर की सहायता मिलती है।
  • उपवास को दूसरों को दिखाने की बजाय गुप्त रूप से करना चाहिए ताकि परमेश्वर ही इसका प्रतिफल दे।
  • वीडियो में विभिन्न बाइबिल उदाहरणों के माध्यम से उपवास की सामर्थ्य को स्पष्ट किया गया है।

Answers

Questions about this video

उपवास का असली अर्थ क्या है?

उपवास केवल भोजन त्यागना नहीं है, बल्कि यह परमेश्वर के निकट आने का एक आध्यात्मिक माध्यम है जो प्रार्थना और आराधना के बाद हमारे लिए नए रास्ते खोलता है।

उपवास करते समय हमें किस प्रकार का व्यवहार रखना चाहिए?

उपवास के दौरान हमें उदासी या निराशा नहीं दिखानी चाहिए, बल्कि इसे गुप्त रूप से और हर्षोल्लास के साथ करना चाहिए ताकि केवल परमेश्वर को इसका ज्ञान हो।

उपवास से हमें क्या लाभ मिलता है?

उपवास से हम परमेश्वर के निकट आते हैं, आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करते हैं, और जीवन की कठिनाइयों में परमेश्वर की सहायता और मार्गदर्शन पाते हैं।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:07
Speaker A
[संगीत]
00:28
Speaker A
[संगीत]
00:41
Speaker A
प्रेज द लॉर्ड। आज की सुबह के लिए प्रभु यीशु मसीह का धन्यवाद हो कि परमेश्वर पिता ने अपना अनुग्रह दिया। उसकी महिमा करने के लिए।
00:56
Speaker A
प्यारों, हम बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर आज बात करेंगे। हम एक सही समय पर, उचित समय पर आज इकट्ठा हैं। परम परमेश्वर के नाम को महिमा देने के लिए।
01:12
Speaker A
ये दिनों, ये जो ये समय जो चल रहा है, ये उपवास का, प्रार्थना का समय चल रहा है। और इस दौरान हमें बहुत सारी बातें परमेश्वर से सीखनी हैं। प्रभु के नजदीक आना है।
01:25
Speaker A
और परमेश्वर का वचन, जो बातें हमें सिखाना, समझाना चाह रहा है, उन सारी बातों को समझना है। इसलिए मेरे प्यारों, आज हमारा विषय रहेगा उपवास की सामर्थ।
01:41
Speaker A
हमारा विषय है उपवास की सामर्थ। पावर ऑफ फास्टिंग। जी हां, द पावर ऑफ फास्टिंग। इस पर हम प्रभु के वचन से बात करेंगे।
02:00
Speaker A
उपवास की सामर्थ्य के विषय में परमेश्वर के वचन से हम लोग चर्चा करेंगे। प्यारों, उपवास एक बहुत महत्वपूर्ण माध्यम है बाइबल में। पुराने नियम में, नए नियम में बहुत सारे
02:13
Speaker A
ऐसे हमें वचन मिलते हैं, ऐसी बातें मिलती हैं जहां हमें ये सारे पद हमें प्रेरित करते हैं कि हमें परमेश्वर के लिए, परमेश्वर के सामने उपवास करना चाहिए।
02:28
Speaker A
और उपवास की प्रार्थना से बड़े अद्भुत आश्चर्य कर्म होते हैं। इसलिए आज हम इन बातों को समझेंगे कि उपवास की सामर्थ्य क्या होता है?
02:47
Speaker A
उपवास शायद सब लोग करते हैं। अधिकतर लोग करते हैं। पर इस उपवास की सामर्थ्य क्या होती है? किस प्रकार से उपवास प्रभावशाली होते हैं?
03:05
Speaker A
इन बातों को आइए आज के वचन के द्वारा हम समझने का प्रयास करेंगे। प्यारों, आराधना और प्रार्थना के बाद उपवास वो माध्यम है जो हमें परमेश्वर के पास ले चलता है।
03:20
Speaker A
हालेलुया। जी हां, आराधना, प्रार्थना के बाद उपवास ही ऐसा एक माध्यम है जो हमें प्रभु की उपस्थिति में, परमेश्वर के सामने, उसके निकट हमें ले चलता है।
03:33
Speaker A
इसलिए उपवास हमारे लिए बहुत मायने रखता है। कई लोग उपवास के मायने शायद अलग समझते हैं। उनको लगता है कि नहीं, एक दिन भर हमारा पेट खाली रखे, खाना ना खाए तो ये उपवास है।
03:47
Speaker A
बहुत सारी बातें हो सकती हैं आपके ख्याल से। लेकिन मैं आपको उपवास कैसे करना ये नहीं बताना चाह रहा हूं। मैं यह बताना चाह रहा हूं कि उपवास एक ऐसा माध्यम है।
04:01
Speaker A
प्रार्थना, आराधना के बाद उपवास एक ऐसा माध्यम है जो हमें परमेश्वर के करीब ले चलता है। अगर सच में हमें प्रभु की उपस्थिति को महसूस करना है, करीब आना है तो हमें भी उपवास करना चाहिए।
04:17
Speaker A
और उपवास के साथ परमेश्वर की उपस्थिति में आना चाहिए। प्रार्थना और आराधना से हम परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं।
04:32
Speaker A
जी हां, प्रार्थना और आराधना से हम परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं। लेकिन उपवास से हम अपने लिए मार्ग बनाते हैं या हम अपने लिए बहुत महत्वपूर्ण द्वार खोल देते हैं।
04:48
Speaker A
उपवास एक ऐसा माध्यम है, मेरे प्यारों। अगर हमें परमेश्वर के सामने कुछ चीजों को रखना है, हमें समझना है कि मेरे जीवन के लिए कुछ मार्ग तैयार करना चाहिए।
05:03
Speaker A
परिवार के लिए एक रास्ता बनना चाहिए। व्यक्तिगत बातों के लिए कुछ रास्ते बनना चाहिए। तो उपवास, उपवास वो माध्यम है जिसके जरिए आप बहुत सारे दरवाजे खोल सकते हैं
05:16
Speaker A
अपने लिए। बहुत सारे काम कर सकते हैं अपने लिए। ये ऐसा माध्यम है उपवास के द्वारा। मेरे प्यारों, पुराण नियम में जो उपवास के बारे में हम देखते हैं।
05:32
Speaker A
पुराण नियम में उपवास शोक और पश्चाताप के साथ होता था। जब भी आप बाइबल पढ़ें तो समझ में आएगा कि कैसे पुराने समय के लोग अपने सिर पर राख डालते थे। माथे पर राख लगाते थे।
05:46
Speaker A
टाट का वस्त्र, जो एक प्रकार का बोरे समान वस्त्र होता था, वो टाट का वस्त्र पहन लेना और दिन भर विलाप करते रहना, पश्चाताप करते रहना। इस प्रकार से वो बैठा करते थे और उपवास किया करते थे।
05:57
Speaker A
ऐसा हमें दिखाई पड़ता है पुराना नियम कि शोक और पश्चाताप के साथ पुराने नियम में उपवास होता था। लेकिन जब हम नए नियम की बात करें तो नया नियम में उपवास जो है, उपवास सेलिब्रेशन है।
06:02
Speaker A
यस, प्रभु यीशु ने हमें सिखाया उपवास एक सेलिब्रेशन के समान मनाओ। विलाप के समान मत बनाओ क्योंकि इसके अपने मायने हैं। इसके अपने एक महत्व है।
06:18
Speaker A
जिन बातों को परमेश्वर आज हमें समझाना चाह रहा है, बस निकालेंगे मति का सुसमाचार अध्याय छः और वचन 16, 17 और 18।
06:32
Speaker A
मैथ्यू चैप्टर सिक्स वर्स 16 टू 18, जहां ऐसा लिखा है, "जब तुम उपवास करो तो कपटियों की नाई तुम्हारे मुंह पर उदासी ना छाई रहे। क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं ताकि लोग उन्हें उपवासी जाने।
06:50
Speaker A
मैं तुमसे सच कहता हूं कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। जब तू उपवास करें तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो ताकि लोग न जानें परंतु तेरा पिता जो गुप्त में है तुझे उपवासी जाने।
07:02
Speaker A
इस दशा में तेरा पिता जो गुप्त में देखता है तुझे प्रतिफल देगा।" वचन सिखा रहा है कि उपवास के दौरान तुम्हारे मुंह पे उदासी ना रहे।
07:16
Speaker A
कई बार लोग यह दर्शाने के लिए कि मैं उपवास करने वाला व्यक्ति हूं, मैंने उपवास रखा है, तो मुंह उतरा हुआ, कपड़े फटे हुए, निराश अवस्था में, पश्चातापी अवस्था में चलो ठीक है।
07:30
Speaker A
लेकिन बाइबल बता रही है अब तू ऐसा ना रहे। नया नियम बता रहा है ऐसा ना रहे। ये सेलिब्रेशन संभाल रहे। ऐसा लिखा है वचन में कि तू अपना मुंह धो, बालों को तेल लगा, अच्छे वस्त्र पहन।
07:42
Speaker A
और ऐसा सेलिब्रेट कर कि तेरा जो उपवास है वो लोगों को पता ना चले। तूने जिन बातों का उपवास किया है वो लोगों को जाहिर ना हो, लोगों को पता ना हो।
07:56
Speaker A
लेकिन तेरा पिता जो तुझे गुप्त में देखता है उस पर जाहिर हो। उपवास भीतरी रूप से होना चाहिए। उपवास बाहरी रूप से नहीं होना चाहिए।
08:12
Speaker A
बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं कि अपने उपवास का ढिंढोरा पीटते हैं। आज मैंने उपवास किया है। आज मेरा उपवास है। मैं तीन दिन कर रहा हूं। मैं 40 दिन कर रहा हूं। मैं एक महीना कर रहा हूं। ऐसे
08:30
Speaker A
बहुत सारे उपवास का ढिंढोरा पीटते हैं। बाइबल बता रही है उपवास क्या कर रहे हो?
08:48
Speaker A
वो दूसरों को बताने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे हावभाव से, तुम्हारे बाहरी दृष्टिकोण से भी किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि आपने उपवास किया है। बस आपके स्वर्गीय पिता को पता चले कि आपने उपवास किया है।
09:04
Speaker A
इसलिए बाहरी स्वरूप बहुत सेलिब्रेशन का होना चाहिए। लेकिन भीतर वो दीनता वाला होना चाहिए। वो परमेश्वर के पास होना चाहिए। परमेश्वर को पता चलना चाहिए कि आपने उपवास किया है।
09:22
Speaker A
प्यारों, ये होता है उपवास। आज हमें ऐसा उपवास करना है जो लोगों के लिए नहीं, लेकिन जो उपवास परमेश्वर के नजर में रहे और महत्वपूर्ण है।
09:36
Speaker A
इसलिए मैंने कहा यह बहुत महत्वपूर्ण उपवास का विषय है जिसे आज हमें समझने और जानने की आवश्यकता है। अलग-अलग धारणाएं, अलग-अलग बातें आपके अंदर उपवास के प्रति हो सकती हैं।
09:51
Speaker A
उपवास ऐसे करना चाहिए, उपवास वैसे नहीं करना चाहिए। उपवास के दिन यह खाना चाहिए, उपवास के दिन वो नहीं। ऐसे बहुत सारे विषय हो सकते हैं। यह मेरा विषय नहीं है।
10:08
Speaker A
लेकिन बाइबल जो हमें बताती है, हम उन विषयों को समझने और सीखने और जानने का हम लोग प्रयास करें कि उपवास कितनी सामर्थ्य बात है।
10:23
Speaker A
मैंने पहले बताया आपको कि उपवास ही वो माध्यम है जिसके द्वारा आप परमेश्वर के नजदीक आ सकते हो। मतलब प्रार्थना, आराधना के बाद उपवास बहुत पावरफुल टूल है हमारे पास में।
10:40
Speaker A
और प्रार्थना, आराधना से तो हम प्रभु को प्रसन्न करते हैं। लेकिन जैसे हम उपवास करते हैं, उपवास के साथ प्रार्थना करते हैं, आप अपने लिए बहुत सारे दरवाजे खोल देते हो।
10:57
Speaker A
बहुत सारे द्वार खोल देते हो अपने लिए, अपने आशीषों के लिए। इसलिए उपवास बहुत मायने रखता है। मैं एक दो उदाहरण बता के आपको समझाना चाहता हूं कि उपवास क्यों करते हैं?
11:15
Speaker A
या फिर उपवास की सामर्थ्य क्या होती है? इन बातों को हम समझने का प्रयास करेंगे। पहले जान लेते हैं कि हम उपवास क्यों करते हैं।
11:28
Speaker A
आपको लग रहा होगा कि उपवास करने से ये होता है, वो होता है। चलो जानेंगे उसको लेकिन एक्चुअल अर्थ उसका क्या है? थोड़ा समझ लेंगे हम लोग। थोड़ा अलग पर्सपेक्टिव में बताना चाहता हूं आपको मैं।
11:46
Speaker A
मेरे निकालेंगे दूसरा कुरंथियों, उसका अध्याय 12। दूसरा कुरंथियों अध्याय 12 वचन नौ और वचन 10 को हम लोग पढ़ेंगे। जहां इस प्रकार से लिखा गया है, "और उसने मुझसे कहा मेरा अनुग्रह तेरे लिए बहुत है क्योंकि मेरी
11:59
Speaker A
सामर्थ, ध्यान दीजिए यहां पे, मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है। इसलिए मैं बड़े आनंद से अपनी निर्बलताओं पर घमंड करूंगा कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे।
12:13
Speaker A
इस कारण मैं मसीह के लिए निर्बलताओं और निंदाओं में और दरिद्रता में और उपद्रव में और संकटों में प्रसन्न हूं क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं तभी बलवंत होता हूं।"
12:30
Speaker A
वचन समझा रहा है कि परमेश्वर की सामर्थ मेरी निर्बलता में सिद्ध होती है। मेरी, आप किन बातों से निर्बल हो रहे हो ये बात अलग है यहां पे। किन-किन बातों से आप निर्बल हो रहे हो?
12:46
Speaker A
लेकिन जब हम उपवास करते हैं, जब हम भोजन नहीं करते हैं या खाना त्याग देते हैं एक समय के लिए तो यह जो नहीं खाया हुआ जो खाना है हमारा ये आपको निर्बल करेगा।
13:00
Speaker A
आपने आज खाना नहीं खाया तो आप आज कमजोर महसूस करोगे। निर्बल महसूस करोगे। थक जाओगे। है ना? थक जाओगे। सो निर्बल महसूस करेंगे।
13:14
Speaker A
वचन कहता है कि परमेश्वर की सामर्थ्य मेरी निर्बलता में सिद्ध होती है। मतलब मैं जब निर्बलता को महसूस करता हूं तब मैं परमेश्वर की सामर्थ को महसूस करता हूं।
13:26
Speaker A
और दसवा वचन बोलता है कि जब मैं निर्बल होता हूं तभी बलवंत होता हूं। ये किस विषय में कहा जा रहा है? कि जब मैं निर्बल होता हूं तब मैं बलवंत होता हूं। ये किस विषय में?
13:41
Speaker A
कि क्योंकि जब आप निर्बल हो जाते हो, तब आपके अंदर शक्ति नहीं रहती है। तो फिर यहां क्या ऐसा क्यों लिखा गया है कि मैं बलवंत हो जाता हूं। कैसा बलवंत है? यह दरअसल आ...
13:53
Speaker A
उपवास की सामर्थ्य क्या होती है? उपवास करने से क्या होता है? ये अपने आप में किस प्रकार से काम करता है? आइए इन बातों को हम लोग समझ लेते हैं। उपवास की सामर्थ क्या होती है? उपवास की सामर्थ को हमें
14:05
Speaker A
समझना होगा। उपवास की सामर्थ क्या होती है? देखो हम जानेंगे सबसे पहले किसी भी बात पर सुनिए किसी भी बात पर विजय पाने के लिए उपवास सामर्थी माध्यम है। आपके लाइफ में क्या चल रहा है? आपके घर में क्या चल
14:22
Speaker A
रहा है? आपके जीवन में क्या चल रहा है? अगर ऐसी कोई बात है जो आपको हराना चाह रही है। जिस पर आप जीत नहीं पा रहे हो। विजय प्राप्त नहीं कर पा रहे हो। मैं बताना चाहता हूं उपवास एक सामर्थी माध्यम है
14:35
Speaker A
किसी भी बात के ऊपर विजय प्राप्त करने के लिए। जी हां, आप जिस किसी बात से गुजर रहे हो, जिस किसी हालात से गुजर रहे हो, कोई प्रॉब्लम नहीं है। आपको विजय मिलेगी अगर आप उपवास प्रार्थना से आगे बढ़ते हो,
14:49
Speaker A
उपवास के साथ आगे बढ़ते हो। राजा यहोशापात था और यहोशापात के ऊपर में मुआबी, अमोनी और दूसरे कई लोगों ने एक साथ आक्रमण कर दिया था। एक साथ आक्रमण की तैयारी बनाई थी और एक विशाल सेना ये तीन चार राज्यों की
15:06
Speaker A
सेना मिला के एक विशाल सेना यहोशापात राजा पर आक्रमण करने के लिए चढ़ाई करने के लिए आ रही थी और जब इसकी खबर यहोशापात को मिलती है तब यहोशापात ने क्या किया यहोशापात राजा का समय जीवन इस समय इतना
15:22
Speaker A
कठिनता में आ गया वो डर गया कि भ अब क्या होगा मेरे लोग मारे जाएंगे मेरा राज्य लूट जाएगा मैं कैसे इन तीन-तीन चारचार राज्य के लोगों के ऊपर में विजय प्राप्त करूं क्योंकि उतनी सेना मेरे पास नहीं है, उतने
15:35
Speaker A
लोग मेरे पास नहीं है, उतनी सामर्थ मेरे पास नहीं है। लेकिन जो उसके पास था उसने उस पर ज्यादा प्रभाव डाला। क्या था? उसके पास पवित्र आत्मा या फिर पवित्र वचनों के द्वारा जो उसे सिखाया गया था, सीखा था वो
15:50
Speaker A
बातें उसके पास में थी और उसने वो बातें किया। चलो पढ़ लेते हैं। हम पढ़ते हैं दूसरा इतिहास अध्याय 20 और वचन तीन और वचन चार में सेकंड क्रोनिकल चैप्टर 20 एंड वर्स थ्री एंड फोर जहां लिखा गया है तब
16:03
Speaker A
यहोशापाट डर गया। इतनी भयंकर सेना थी ये। यहोशापा डर गया और यहोवा की खोज में लग गया और पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया। सो यहूदी यहोवा से सहायता मांगने के लिए इकट्ठे हुए। वरन वे यहूदा के सब नगरों से
16:23
Speaker A
यहोवा से भेंट करने को आए। चल क्या रहा है और ये लोग कर क्या रहे हैं?
16:31
Speaker A
कभी-कभी ये समझ में नहीं आएगा आपको कि चल क्या रहा है? परिस्थितियां कहां जा रही है? आप कर क्या रहे हैं? समझ में नहीं आएगा। लेकिन बस ऐसा ही करना है। सब बातों के विपरीत। दरअसल यहोशापात राजा ने करना
16:44
Speaker A
क्या चाहिए था कि साधारण तौर पर हम बात करें तो उसने दूसरे राजाओं की मदद मांगना चाहिए था। दूसरे सिपाहियों की मदद मांगना चाहिए था और अपने आप को अपने लोगों को ज्यादा मजबूत करके इनका सामना करने के लिए
16:57
Speaker A
तैयार करना चाहिए था। वो सब ना करते हुए लिखा है वचन में यहोशापात परमेश्वर की खोज में लग गया। जी हां, परमेश्वर की खोज में लग गया और पूरे राज्य में उपवास का प्रचार कराया। सब लोग उपवास करो। जाति जाति के
17:14
Speaker A
लोग ये लोग वो लोग सब लोग उपवास करो। उपवास का प्रचार किया और लोग यहूदा में आते गए परमेश्वर को ढूंढने के लिए। प्यारों ये वो टाइम था उपवास। उपवास का प्रचार किया। हथियार नहीं ढूंढा, राजाओं को नहीं ढूंढा लेकिन उपवास को ढूंढा।
17:31
Speaker A
परमेश्वर को ढूंढा। और परमेश्वर ने उसे ऐसा बल दिया, ऐसी सामर्थ्य दिया कि लड़ना भी नहीं पड़ा। यहां तो लड़ना की जरूरत थी लेकिन लड़ना भी नहीं पड़ा। बाइबल साफ शब्द में बताती है। अगर आप पूरा अध्याय पढ़ ले
17:44
Speaker A
पढ़ लेंगे आपको समझ में आएगा कि किस प्रकार से प्रभु ने अद्भुत तरीके से इन लोगों को मार डाला। ये तीन राजाओं को तीन राज्य के लोग जो आ रहे थे ये आपस में लड़ पड़े। मर गए और जब यहोशापात ने ग्रुप
17:59
Speaker A
बनाया आराधना का एक ग्रुप प्रार्थना का एक ग्रुप स्तुति करने वाला एक ग्रुप और ये आराधना स्तुति प्रार्थना उपवास के साथ आगे बढ़ रहे थे क्या देखते हैं पहाड़ के उस पार की सबकी लाशें पड़ी हुई है लिखा है
18:12
Speaker A
वचन में और जब इन लोगों ने उनको लूटना शुरू कर दिया इन इन लाशों के ऊपर जो गहने थे हथियार थे इनके जानवर थे लूटना शुरू किया ऐसा लिखा है इतना था इतना था कि उनको पूरी तरह से लूट भी नहीं पाए वो लोग वो
18:25
Speaker A
इतना खजाना था और तीन दिन तक बटोरते रहे ऐसा लिखा है बिना लड़े बिना तलवार चढ़ाए एक भी तलवार ने किसी का खून भी टेस्ट नहीं किया होगा इतना कुछ भी नहीं किया तब भी ये लोग मालामाल बन गए और जीत भी गए वजह शुरुआत को
18:43
Speaker A
याद कीजिए जब संकट आते हुए देखा तो यहोशापात परमेश्वर की खोज में लग गया और पूरे लोगों को उपवास का प्रचार किया प्यारों ये है सीक्रेट ये है रहस्य इस जीत का आपके आपके जीवन में कौन से क्षेत्र में
18:58
Speaker A
आप हार रहे हो? ढूंढो और उसको हराने के लिए दूसरे माध्यम को ढूंढना बंद करो। वही करो जो यहोषपात राजा ने किया था। क्या करो? परमेश्वर की खोज करो और उपवास के लिए लोगों को उकसाओ। खुद उपवास करो। अपने
19:14
Speaker A
परिवार के लोगों को, अपने कलीसिया के लोगों को, अपने आसपास के लोगों को, रिश्तेदारों को उपवास के लिए उकसाओ ताकि वे उपवास के साथ प्रभु के सन्मुख आए। प्रभु के करीब आए। प्रार्थना में आए और यह उपवास की प्रार्थना आपको किसी भी बात पर
19:30
Speaker A
विजय प्राप्त करवा के देंगी। सब संभव है। उपवास प्रार्थना के साथ जो परमेश्वर के नजदीक आएगा उसके लिए सब संभव है। प्रभु इतना दयालु है कि कितने ऐसे दुष्ट लोगों पर भी वो दया कर लेता है। जब वे उपवास के
19:44
Speaker A
साथ दीन बन जाते हैं। निर्बल बन जाते हैं। है ना? एक बाइबल उदाहरण है निनवे के लोग। निन्ववे के लोगों ने पाप किया था। उनको तो मरना ही था। उनको मारने के लिए परमेश्वर ने तुम नाश होने वाला एक संदेश पहुंचाया।
19:56
Speaker A
लेकिन जब निनवे के लोगों ने सोचा कि कुछ नहीं होने वाला है। चलो हम सब उपवास करते हैं। लिखा है निन्वे के लोगों ने उपवास किया। बड़ों ने, छोटों ने, महिलाओं ने, बच्चों ने, इवन जानवरों ने सब ने उपवास
20:10
Speaker A
किया और क्या दया परमेश्वर की आई उपवास के बाद निन्ववे के लोगों पर उनके उपवास के बाद परमेश्वर की दया आई और परमेश्वर ने पूरे निनवे नगर को बचा लिया। हालेलुया प्यारों तो आपको क्यों नहीं बचाएगा? आपको क्यों नहीं विजय देगा? आपको क्यों नहीं
20:27
Speaker A
ऊंचा उठाएगा? जब आप प्रार्थना के साथ और उपवास के साथ परमेश्वर के करीबता में आओगे। ये है उपवास की सामर्थ। जी हां। दूसरी सामर्थ को समझ लेंगे। कि उपवास की सामर्थ क्या होती है? दूसरी सामर्थ है कठिन परिस्थिति में उपवास की प्रार्थना
20:44
Speaker A
सहायता प्रदान करती है। जब आपके लाइफ में कठिन समय आएगा, कठिन दौर आएगा और ऐसा कोई नहीं होगा जिसने अपने जीवन में कभी कठिन दौर कठिन समय नहीं देखा होगा। जब कठिन समय आएगा तो ये उपवास की प्रार्थना आपको एक
21:00
Speaker A
अद्भुत मदद पहुंचाएगी। मजबूत सहायता पहुंचाएगी। आपके लिए रास्ते बनाएगी। मैंने पहले ही बताया कि आराधना प्रार्थना से हम परमेश्वर को प्रसन्न करते लेकिन उपवास से हम अपने लिए मार्ग बनाते हैं। जी हां अगर आप किसी भी कठिन परिस्थिति में हो तो
21:18
Speaker A
परमेश्वर आपको उपवास के द्वारा सहायता प्रदान करेगा। वचन के साथ समझेंगे। नेहमाया की पुस्तक निकालेंगे। पहला अध्याय और वचन चार। नेहमाया को पता चल गया था जब उसके लोगों ने आकर बताया कि तुम्हारा शहर जला पड़ा हुआ है। शहरपना टूट पड़ी है और
21:34
Speaker A
लोग मुश्किलों में है। तकलीफों में जी रहे हैं। हम रास्ते पर आ चुके हैं। और ये अपने लोगों के बुरे हाल सुनने के बाद नेमाया का जो हाल था वो यहां लिखा है। पढ़िए मेरे साथ में। चौथा वचन ऐसा कहता है यह बातें
21:48
Speaker A
सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता और स्वयं को परमेश्वर के सन्मुख उपवास करता और प्रार्थना करता रहा। कितने दिन तक मैं उपवास करता रहा। कितने दिन मैं प्रार्थना करता रहा। कितने दिन मैं परमेश्वर के सन्मुख बैठा रहा।
22:09
Speaker A
जब पता चला तो उपवास के साथ प्रभु की उपस्थिति में बैठ गया। क्योंकि ये वो टाइम था जब उनको मदद मिले। जब उनको सहायता मिले यहूदियों को सहायता मिले और वो बैठ गया उपवास प्रार्थना में। बहुत लंबी दिन चली
22:25
Speaker A
ये प्रार्थना। ये उपवास प्रार्थना एक दिन दो दिन एक हफ्ते की नहीं थी। ये बहुत लंबी उसकी व्यक्तिगत उपवास प्रार्थना चली और उसके बाद परमेश्वर ने अपनी सहायता उसके लिए प्रोवाइड किया। और जो अद्भुत सहायता नेहमाया को मिली और नेहेमया जाता है और
22:40
Speaker A
यरूशलेम की शहरपना बनाता है इतना बड़ा काम इतनी बड़ी जोखिम दुश्मन सामने खड़ा फिर भी 52 दिन में शहरपना खड़ी हो गई वजह ये थी क्योंकि पहले नेहम आया उपवास के साथ बैठा हुआ था और वहां से उसको वो मदद मिली
22:57
Speaker A
हालेलुया प्यारों हमारे जीवन में परिस्थितियां बहुत बहुत कठिन होती है कई बार बहुत हालात बिगड़ जाते हैं कई बार कुछ नहीं रास्ता सूझता है। कुछ नहीं माध्यम सूझता है। सबसे पावरफुल माध्यम बता रहा हूं मैं। उपवास के साथ उपवास प्रार्थना के साथ परमेश्वर के
23:15
Speaker A
करीब आओ। वहीं से आपको सहायता मिलेगी। एकमात्र यह घटना नहीं है बाइबल में। बहुत सारी घटनाएं हैं। अब वो सब घटनाओं बताने का समय नहीं है। पर बहुत सारी घटनाएं जहां पर उपवास प्रार्थना के द्वारा विजय प्राप्त हुई। एक और बता देता हूं ताकि
23:31
Speaker A
आपका विश्वास और ज्यादा बढ़े और यह एस्तर की पुस्तक में से आपको मिलेगा। एस्तर की पुस्तक में से हामान नाम का एक दुष्ट आदमी था और हामान ने 127 प्रांत के यहूदियों को मारने का उसने षड्यंत्र रचा था। षड्यंत्र
23:47
Speaker A
रचा था और उसके बाद यह हुआ कि बस उन पर सजा होने वाली वो मरने वाले थे और मुर्दा के और एस्तर प्रार्थना करती है और एस्तर राजमहल के अंदर होती है और मुर्द के राजमहल के बाहर होता है और इनकी उपवास
24:02
Speaker A
प्रार्थना चल रही है। देखो एस्तर क्या कहती है? आप थोड़ा समझेंगे वचन को। ये एस्तर चौथा अध्याय और वचन 16 एस्तर चैप्टर फोर एंड वर्स 16 लिखा है कि तू जाकर सुश के सब यहूदियों को इकट्ठा कर। उसने मैसेज
24:18
Speaker A
दिया मुर्द के लिए और तुम सब मिलकर मेरे निमित्त उपवास करो। तीन दिन तीन रात ना तो कुछ खाओ और ना कुछ पियो। मैं भी अपनी सहेलियों सहित उसी रीति से उपवास करूंगी। और ऐसी ही दशा में नियम के विरुद्ध राजा
24:35
Speaker A
के पास भीतर जाऊंगी। यदि नाश हो गई तो हो गई। क्या किया जा रहा है जब सब सब तरफ से ऐसी मुश्किल आई है कि हमारे यहूदी हमारे भाई बहने मारे जाएंगे कैसे बचाएं तो मुर्दगे के लिए मैसेज था कि तू राजमहल के बाहर कुछ
24:52
Speaker A
लोगों को लेकर उपवास में बैठ जा मैं राजमहल के अंदर अपने सहेलियों के साथ उपवास में बैठ जाऊंगी तीन दिन तीन रात का उपवास चल रहा है तीन दिन तीन रात ना कुछ खाया ना कुछ पिया बस परमेश्वर के पास बैठे
25:08
Speaker A
बैठे रहे। ये उपवास की प्रार्थना से इतना बड़ा असर आया जो नेमया के पुस्तक में भी हुआ था कि उपवास की प्रार्थना से वो उपवास की हालातों में राजा के पास जाती है। राजा प्रसन्न होता है। राजा उसकी बात मान लेता
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Speaker A
है और बाद में तमाम यहूदी बचा लिए जाते हैं। इस तरह से उपवास आपके कठिन परिस्थिति में सहायता प्रदान करते हैं जो एस्तर के साथ हुआ था। प्यारों इसलिए उपवास बहुत पावरफुल वेपन है हमारे पास में। ये दूसरी
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Speaker A
बात मैंने बताया आपको। तीसरी बात बता दूं कि उपवास की सामर्थ क्या होती है? अभी तो दो बात देखा। तीसरी बात देखते हैं कि उपवास की सामर्थ्य क्या होती है? उपवास की सामर्थ्य है कि बीमारों की चंगाई के लिए
25:52
Speaker A
उपवास एक सामर्थी हथियार है। जी हां, सामर्थी है। बीमारों की चंगाई के लिए उपवास सामर्थी हथियार है। जब हमारे यहां कोई बीमार पड़ता है। हम बीमार पड़ते हैं। उस हालातों में क्या होता है कि हम डॉक्टर के पास यहां आ जाते हैं। जाना चाहिए अच्छी
26:09
Speaker A
बात है। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि असली चंगाई परमेश्वर की ओर से आती है। आप प्रेयर कर रहे हो, सामान्य प्रार्थना कर रहे हो। ठीक है? लेकिन एक बेहतर प्रार्थना बाइबल सिखाती है जो हमें उपवास के साथ
26:23
Speaker A
करना चाहिए। हम जब बीमारों के लिए उपवास के साथ प्रार्थना करते हैं तो बीमारों की चंगाई भी कुछ उस तरह से आती है। एक अद्भुत तरह से आती है। देखिए एक उदाहरण मैं बताना चाहता हूं। दाऊद अपने लोगों के लिए अपने
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Speaker A
समुदाय के लिए बीमारों के लिए वो प्रार्थना कर रहा था। क्या हुआ था? भजन संहिता उसका 35 अध्याय और वचन 13 साम 35 एंड वर्स 13 लिखा है जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहने रहा और उपवास कर के दुख
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Speaker A
उठाता रहा और मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में लौट आया। वो कहता है जब वे रोगी थे तब मैं टाट पहना रहा। तब मैं उपवास करके दुख उठाता रहा और प्रार्थना करता रहा। उन रोगियों के लिए जब मैंने टांट ओढ़
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Speaker A
के उपवास करके प्रार्थना किया वचन सिखाता है मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में आया मुझे रिजल्ट मिले मैंने चंगाइयां देखी उन लोगों की हालेलुया प्यारों आपके परिवारों में आपके लोगों में कोई बीमार पड़ा हुआ है आप प्रार्थना कर रहे हो अच्छी बात है
27:26
Speaker A
लेकिन जब आप उपवास प्रार्थना कर रहे ये ज्यादा अच्छी बात होंगी ज्यादा इसके परिणाम आएंगे क्यों ना ये इस पावरफुल बात का हम इस्तेमाल करें अपने लोगों की चंगाई के लिए अपने घर की चंगाई के लिए, अपने आसपास के लोगों की चंगाई के लिए जब आप
27:41
Speaker A
उपवास करते हो निश्चय परमेश्वर का हृदय आपकी ओर होता है। निश्चय परमेश्वर उस उपवास प्रार्थना को देखते हुए उन रोगियों को भी चंगा कर देगा। हालेलुया। ये महत्वपूर्ण काम है जो कलीसिया शायद भूल गई है। उपवास में बैठना, उपवास में आना,
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Speaker A
उपवास सभा का आयोजन करना भूल गई है कलीसिया। अब टाइम नहीं है। दूसरी प्रेयर मीटिंग के लिए हजारों लोग आते हैं। लेकिन उपवास प्रार्थना के लिए अक्सर उदासीनता पाई जाती है। लोग प्रार्थना सभा में नहीं आते हैं। प्यारों आइए अपने आप को इन दिनों
28:14
Speaker A
तैयार करके मैं इन दिनों उपवास करूं। उपवास के साथ आगे बढूं। अपने आप को दीन बनाऊं, नम्र बनाऊं और मैं बीमारों के लिए भी प्रार्थना करूं ताकि वे बीमार यीशु के नाम में चंगे किए जाए। यदि मेरी उपवास की
28:25
Speaker A
प्रार्थना है तो उसके फल बहुत ही अद्भुत आने वाले हैं। हालेलुया। एक और बात आखरी बात इस संदेश की मैं बता के समाप्त करना चाहता हूं कि उपवास की सामर्थ क्या होती है? देखिए उपवास की सामर्थ उपवास की
28:39
Speaker A
प्रार्थना सही निर्णय लेने के लिए सहायता करती है। उपवास की प्रार्थना सही निर्णय लेने में आपकी मदद करता है। कभी-कभी जीवन में कुछ निर्णय लेना है। आपको समझ में नहीं आ रहा। किस दिशा में जाऊं? क्या निर्णय लूं? क्या फैसला करूं? कुछ समझ में
28:56
Speaker A
नहीं आ रहा। ऐसे टाइम पे आपको सहायता चाहिए, आपको राइट गाइडेंस चाहिए तो आपको उपवास करना पड़ेगा। उपवास की प्रार्थना से ही आपको मैंने कौन से फैसले लेना है अपने जीवन के लिए, अपने परिवार के लिए, अपने कामों के लिए वो आपको समझ में आएगी। नहीं
29:13
Speaker A
ले पा रहे हो कोई प्रॉब्लम नहीं। बैठो दो दिन दुआ में। उपवास प्रार्थना में बैठो। ये उपवास प्रार्थना आपको सही सलाह देगी कि आपको क्या निर्णय लेना चाहिए। और जो निर्णय तब आप लोगे उपवास प्रार्थना के बाद उससे आपको दोबारा पछताना नहीं पड़ेगा। जी
29:29
Speaker A
हां पछताना नहीं पड़ेगा क्योंकि इस निर्णय में परमेश्वर की सहमति रहेगी। परमेश्वर की उपस्थिति रहेगी। ऐसा एक निर्णय प्रेरितों को लेना था। जब बर्नबास और पौलुस एक साथ सेवा कर रहे थे। लेकिन कुछ कारणों से उनको अलग होना बहुत जरूरी था और कलीसिया बैठी
29:45
Speaker A
है। लोग बैठे उपवास प्रार्थना करने के लिए। प्रभु क्या फैसले करें? क्या निर्णय ले? क्या फैसला लेना चाहिए? तब वो टाइम पे उपवास प्रार्थना के जरिए परमेश्वर ने उनसे बातें किया। मेरे साथ पढ़ेंगे प्रितों के काम उसका 13 अध्याय और वचन दो और तीन बुक
30:01
Speaker A
ऑफ एक्ट्स चैप्टर 13 एंड वर्स सेकंड एंड वर्स थ्री जहां लिखा है जब वे उपवास सहित प्रभु की उपासना कर रहे थे तो पवित्र आत्मा ने कहा मेरे निमित्त बर्नबास और शाऊल को उस काम के लिए अलग करो जिसके लिए
30:17
Speaker A
मैंने उन्हें बुलाया है। तब उन्होंने उपवास और प्रार्थना करके उन पर हाथ रखकर उन्हें विदा किया। कब पता चला? पवित्र आत्मा ने कब बात किया कि दोनों को अलग करो सेवा के लिए जिसको लिए मैंने चुना है। कब
30:32
Speaker A
पता चला? जब ये सब लोग उपवास प्रार्थना कर रहे थे। एक उचित फैसला लेना था सेवकाई के लिए। और उन्होंने फिर वापस उपवास किया। उपवास करके प्रार्थना किया और उनके सिर पर हाथ रख के लिखा है उन्हें विदा किया। वह
30:48
Speaker A
अलग-अलग दिशा में अपनी सेवकाई के लिए निकल पड़े। फैसला लेना हो तो उपवास प्रार्थना करो। हो सकता है आपको अपनी लाइफ में शादी का फैसला लेना है, नौकरी का फैसला लेना है, बच्चों का फैसला लेना है, परिवार का,
31:01
Speaker A
करियर का बहुत सारी चीजों का फैसला लेना है। सबसे बढ़िया माध्यम प्रार्थना, उपवास प्रार्थना। उपवास के साथ बैठो। आप फैसला लेने में पवित्र आत्मा आपकी मदद करेगा और जो फैसला पवित्र आत्मा के जरिए होगा फिर वो तो बहुत अद्भुत होने वाला है और भी
31:17
Speaker A
बातें हैं लेकिन मैंने मात्र चार बातें आपको बताया कि उपवास की सामर्थ क्या होती है जो इस प्रकार से उपवास करेगा इस प्रकार से काम करेगा इस सामर्थ को अपने जीवन में महसूस करेगा मैंने चार बातें बताया कि
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Speaker A
उपवास की सामर्थ किसी भी बात पर अगर विजय प्राप्त करना है तो उपवास सामर्थी माध्यम है विजय चाहिए चाहिए तो उपवास करो। दूसरी बात कठिन परिस्थिति में सहायता चाहिए। मुश्किल हालात में सहायता चाहिए तो उपवास करो। उपवास प्रार्थना करो। तीसरी बात हमने
31:48
Speaker A
सीखा कि बीमारों की चंगाई चाहिए तो उपवास प्रार्थना करो। उसमें बीमारों की चंगाई आएगी। चौथी बात हमने देखा कि सही निर्णय लेने की मदद चाहिए तो उपवास प्रार्थना करो। ऐसा करने से आप अद्भुत सामर्थ को देख पाओगे जो परमेश्वर ने हमारे लिए रखा है।
32:05
Speaker A
हालेलुया। आओ हम निर्बल हो। हम निर्बल होए प्रभु के सामने चले प्रभु प्रभु से कहे प्रभु मैं निर्बल होता हूं ताकि जब मैं निर्बल हूं तब तेरी सामर्थ मुझ पर प्रकट हो जाए तेरी सामर्थ मुझ पर एक्टिवेट हो
32:18
Speaker A
जाए यस मेरे प्यारों जब हमने पढ़ लिया कि उपवास क्यों करते हैं अपने आप को निर्बल करने के लिए कमजोर करने के लिए तभी तो पवित्र आत्मा की सामर्थ जब हमारी शारीरिक शक्ति घटेगी सांसारिक बातें घटेगी तभी तो
32:31
Speaker A
आत्मा की बातें आत्मिक चीजें हम पर राज करेगी और उसके द्वारा हम बड़े से बड़े कार्य अपने जीवन में कर पाएंगे। आइए मैं आप सबको आज उपवास के लिए आह्वान देता हूं। उपवास के लिए प्रेरित करता हूं। आइए सब
32:44
Speaker A
लोग जो मुझे सुन रहे हैं उपवास के साथ बैठे। उपवास के साथ प्रार्थना में आए और बड़े-बड़े अद्भुत काम हमारे देश में परिवारों में कलीसिया में हम देखने वाले बने। ये मत समझना कि मैं छोटा हूं। मैं अकेली मेरी अकेले की प्रार्थना से क्या
32:58
Speaker A
होगा? वचन कहता है छोटे से छोटा 1000 हो जाएगा। सामर्थी जाति बन जाएगा। वचन कहता है आपकी एक की प्रार्थना बहुत बड़ी प्रार्थना हो सकती है। हालेलुया चलो आइए हम लोग प्रार्थना करेंगे। आइए हम लोग उपवास में आगे बढ़ेंगे। उपवास करने के लिए
33:13
Speaker A
अपने आप को प्रेरित करें और उपवास के साथ परमेश्वर की उपस्थिति में चले। दुआ करेंगे। प्रभु जी आपका हम धन्यवाद करते हैं। पिता परमेश्वर प्रभु हम जानते हैं कि उपवास में बड़ी अद्भुत सामर्थ है। तूने हमें सिखाया उपवास करना है। उपवास के साथ
33:28
Speaker A
दुआ में बैठना है। जो आश्चर्य कर्म यहोशा पात ने पाया। जो आश्चर्य कर्म एस्तर और नेहमाया ने पाया पिता परमेश्वर उसके लिए आपका धन्यवाद करते हैं। जो आश्चर्य कर्म प्रभु जी उपवास के द्वारा दाऊद ने पाया प्रभु जी हम धन्यवाद करते हैं। और जो
33:41
Speaker A
आश्चर्य कर्म नए नियम की कलीसिया ने पाया प्रभु जी उपवास के द्वारा उसके लिए आपको हम धन्यवाद करते हैं। प्रभु [संगीत] आज हमारी बारी है। हम उपवास करें। हम उपवास में आगे बढ़े। परमेश्वर की उपस्थिति में आगे बढ़े। और आज जितने परिवार दुखों में
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Speaker A
गुजर रहे हैं, बीमार है, परेशान है, निर्णय नहीं ले पा रहे हैं, बार-बार हार रहे हैं। प्रभु इन सब बातों में वे विजय प्राप्त करें। इस उपवास की प्रार्थना के द्वारा वे अपने आप को दीन बनाए। अपने आप
34:07
Speaker A
को नम्र करें। अपने आप को परमेश्वर के चरणों में बिठाए और बड़े आश्चर्य कर्म अपने परिवारों में, कलीसिया में जीवन में देखने वाले बने। ऐसी दया प्यारे पिता परमेश्वर हम आपसे मांगते हैं प्रभु जी आइए आशीष दीजिए प्रभु जी और हम सब के उपवास को
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Speaker A
संपन्न कीजिए यीशु राजा और इस उपवास के द्वारा प्रभु ये दिखावे का उपवास ना हो ये कोई ट्रेडिशनली ना हो प्रभु जी लेकिन ये उपवास परमेश्वर को प्रसन्न करने वाला बने और हमारे जीवनों में अद्भुत आश्चर्य कर्म करने वाला बने। हम धन्यवाद स्तुति करते
34:37
Speaker A
हैं। आएगा समय हमारा जीवन आपके हाथ में देते हैं। धन्यवाद करते हैं। उद्धार करता प्रभु यीशु मसीह नासरी के नाम से ये प्रार्थना मांगते हैं। आमीन। आशा करता हूं आज के संदेश [संगीत] के द्वारा आपने आशीष प्राप्त किया है। यदि सचमुच आपने आशीष
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Speaker A
प्राप्त किया है तो इस संदेश को दूसरों के साथ शेयर कीजिए और हमारे दूसरे भी संदेशों को सुनने के लिए हमारे [संगीत] चैनल को सब्सक्राइब करें और नोटिफिकेशन के लिए बेल आइकॉन को दबाइए और हां यीशु पर विश्वास
35:03
Speaker A
करना ना छोड़े। वो आपको आशीष में स्थानों की [संगीत] ओर आगे ले जाएगा। गॉड ब्लेस यू ऑल। [संगीत] [संगीत]
Topics:उपवासप्रार्थनापरमेश्वरबाइबलआध्यात्मिकतामैथ्यू 6निर्बलतासामर्थ्यआराधनाप्रभु यीशु मसीह

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