इस वीडियो में मुस्लिम उम्मा की पिछड़ने की वजहों और इस्लाम में इल्म और मेहनत की अहमियत पर चर्चा की गई है।
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Key Takeaways
- मुस्लिम उम्मा को इल्म और मेहनत के रास्ते पर लौटना होगा।
- सिर्फ तिलावत नहीं, तदब्बुर और रिसर्च भी जरूरी है।
- कमजोरी को तकवा समझना गलत है, मजबूत बनना जरूरी है।
- इस्लाम दीन और दुनिया दोनों को साथ चलाने की शिक्षा देता है।
What the video covers
- दुनिया साइंस, टेक्नोलॉजी और स्पेस में आगे है, लेकिन मुस्लिम उम्मा पीछे रह गई है।
- मुस्लिम्स कभी दुनिया को इल्म देने वाले डॉक्टर्स, साइंटिस्ट्स और फिलॉसफर्स थे।
- इल्म को इस्लाम में इबादत माना जाता था, लेकिन आज सिर्फ इतिहास की किताबों में रह गया है।
- इस्लाम कभी पीछे नहीं गया, मुस्लिम्स पीछे रह गए हैं।
- कुरान में पढ़ने (इकरा) का आदेश है, लेकिन आज पढ़ाई छोड़ दी गई है।
- मुस्लिम समाज में रट्टा लगाना बढ़ गया है, रिसर्च और स्किल्स की कमी है।
- दुआ तो होती है लेकिन प्लानिंग और मेहनत नहीं होती।
- नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि मजबूत मोमिन कमजोर मोमिन से बेहतर है।
- कमजोरी को तकवा समझना गलत है।
- इस्लाम दीन और दुनिया दोनों को साथ चलाने की बात करता है।
Full Transcript — Download SRT & Markdown
Speaker A
आज दुनिया साइंस में आगे है, टेक्नोलॉजी में आगे है।
Speaker A
स्पेस में आगे है।
Speaker A
लेकिन एक सवाल जो दिल को चुभता है, मुस्लिम उम्मा पीछे क्यों रह गई?
Speaker A
क्या हम कम अक्ल हैं?
Speaker A
क्या हम काबिल नहीं?
Speaker A
नहीं, मसला और है।
Speaker A
बहुत गहरा।
Speaker A
कभी ये वही उम्मा थी जिन्होंने दुनिया को इल्म दिया।
Speaker A
मुस्लिम्स डॉक्टर्स थे, साइंटिस्ट्स थे, फिलॉसफर्स थे।
Speaker A
इल्म इबादत था और आज?
Speaker A
सिर्फ हिस्ट्री बुक्स में रह गया।
Speaker A
इस्लाम कभी पीछे नहीं गया, मुस्लिम्स पीछे गए हैं।
Speaker A
कुरान कहता है इकरा।
Speaker A
पढ़ो।
Speaker A
लेकिन आज हम पढ़ना छोड़ चुके हैं।
Speaker A
सिर्फ तिलावत रह गई, तदब्बुर चला गया।
Speaker A
आज मुस्लिम सोसाइटीज में रट्टे हैं, रिसर्च नहीं।
Speaker A
डिग्रीज है, स्किल्स नहीं।
Speaker A
दुआ है, प्लानिंग नहीं।
Speaker A
हम अल्लाह से मदद मांगते हैं, लेकिन मेहनत से भागते हैं।
Speaker A
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा था, स्ट्रांग मोमिन कमजोर मोमिन से बेहतर है।
Speaker A
और हमने कमजोरी को तकवा समझ लिया।
Speaker A
हम समझ बैठे या दीन या दुनिया, लेकिन इस्लाम कहता है।
Speaker A
दीन भी, दुनिया भी।
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