Speaker A
ब्रेथ वो है दैट कैन नॉट हैपन इन पास्ट एंड दैट कैन नॉट हैपन इन फ्यूचर। इट इज़ ओनली हैप्पेनिंग नाउ। कुंभक हाइपोक्सिया जो पावरफुल मैकेनिज्म हमारे पास है सेल्फ हीलिंग का, उसको ट्रिगर कर सकता है। जब हम कुंभक करते हैं तो योर हार्ट विल टेक मोर वॉल्यूम ऑफ ब्लड। आयुर्वेद इज द ओनली सिस्टम ऑफ मेडिसिन इन द वर्ल्ड व्हिच लेज़ आउट द अटेनमेंट ऑफ परमानेंट हैप्पीनेस ऑफ प्लेस, दैट इज गॉड और सेल्फ रियलाइजेशन। एटीपी का प्रोडक्शन कम होते ही जो मैंने बताया था ना, आउटर मेंब्रेन का जो चार्ज है, वो चार्ज भी कम हो जाता है। जो आयुर्वेदिक हर्ब्स होती हैं और मेडिसिंस होती हैं, वो लिवर पे बहुत हार्श होते हैं। इसको मैं बोलूंगा कि आधा अधूरा ज्ञान ना बड़ा डेंजरस होता है। सो व्हेन यू आर डूइंग कुंभक, यू आर प्रिवेंटिंग द श्रिंकेज ऑफ जो सिद्ध लोग होते हैं उनकी सोल्स चूज़ कर सकते हैं कि मैं इस टाइप का वूम मैं चूज़ करूंगा ताकि वो उस लाइफ को जी सके जो उनको जीनी आगे। इट्स ऑल फ्रीक्वेंसी मैचिंग। वन वे नहीं होता कुछ भी। एक और कंट्रोवरशियल है कि सेक्सुअल इंटेलिजेंस ऑफ ओल्ड मैन विद यंग गर्ल मेक्स हिम यंगर। टेलीमियर्स का मेन जो फंक्शन होता है, वो डीएनए को डैमेज से बचाना होता है। माइंड का बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। क्लीन थिंकिंग का बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। एक बीमारी को घटाने में भी और एक बीमारी को बढ़ाने में। [संगीत] दिस एपिसोड इज़ ब्रॉट टू यू बाय Neओ पाम्स। ऑन दिस चैनल, माय गोल हैज़ ऑलवेज़ बीन टू प्रमोट कॉन्शियस कन्वर्सेशन्स, व्हिच विल हेल्प यू इन योर लाइफ। इन दिस एपिसोड विथ डॉ. रविंद्र, वी हैव स्पोकन अबाउट सेल्फ हीलिंग, एंटाई एजिंग एंड अ लॉट ऑफ अदर थिंग्स दैट विल ऐड वैल्यू टू योर लाइफ। एंड आल्सो इफ यू आर अ मैन ऑफ टेस्ट हु लव्स टू वेयर प्रीमियम टाइमलेस शर्ट्स, डू चेक आउट द लिंक इन द डिस्क्रिप्शन। कुंभक, हाइपोक्सिया। और कैसे हम अपनी बॉडी को और कैसे हम खुद इस जो पावरफुल मैकेनिज्म हमारे पास है सेल्फ हीलिंग का उसको ट्रिगर कर सकते हैं। तो हिमांशु, आपने बहुत अच्छी बात बोली कि सेल्फ हीलिंग मैकेनिज्म देखिए, जो हमारा शरीर है उसके अंदर इतनी एबिलिटी होती है कि वो हर बीमारी को खुद ठीक कर सकता है। उसको वो राइट एनवायरनमेंट हमें देना होता है। अब राइट एनवायरनमेंट देने के बहुत सारे तरीके हैं। एक तो क्लीन लाइफस्टाइल है ना? क्लीन फूड, क्लीन थॉट्स। ठीक है? मतलब दिनचर्या कहने का मतलब है आपका जो आहार विहार दिनचर्या यह सब बिल्कुल अगर अच्छा है, जो आज के जमाने में बड़ा मुश्किल है लोगों को फॉलो करना है ना, तो इसी सेल्फ हीलिंग पोटेंशियल को इनेबल करने के लिए एक शॉर्टेस्ट वे है उसको हम बोलते हैं ब्रेथोल्ड कुंभक। इसी को मैं थोड़ा सा डिटेल में अब आपको एक्सप्लेन करूंगा। सो पहले मैं इसका थोड़ा सा बैकग्राउंड दे देता हूं यह कैसे मैं इस पे पहुंचा और कैसे क्यों मैंने इसको रिसर्च करना शुरू किया। सो इन 2012 है ना, तो मैंने क्रिया योग की दीक्षा ली। क्रिया योग के अंदर सारा ब्रेथ वर्क होता है बेसिकली। सो उसमें ऑलमोस्ट 114 क्रियाज़ हैं। मतलब डिफरेंट ब्रीथिंग टेक्निक्स एंड पैटर्न्स हैं बेसिकली। तो जब मैंने उसको प्रैक्टिस करना शुरू किया तो मैंने अपने शरीर के अंदर बदलाव देखे, चेंजेस देखे। है ना? चाहे लेट से कोई एक्यूट कंडीशन भी हो गई है। मैं ब्रीथिंग कर रहा हूं, अपना क्रिया कर रहा हूं तो मेरे को लग रहा है कि मेरे को दवाई लेने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। और मैं अपने आप ही थोड़े टाइम में ही ठीक हो, मतलब ठीक होए जा रहा हूं। एक्चुअली में, राइट? और मैंने देखा मेरी क्लेरिटी बहुत बढ़ रही है। मेरी फोटोजेनिक मेमोरी है, जो मेमोरी मेरी काफी बेसिकली शार्प हो रही थी उस टाइम पर। तो मैंने कहा इस एक्टिविटी में कुछ ना कुछ तो है। तो मैंने तब से मैंने इस पे रिसर्च करना शुरू किया। तो मैंने उसमें से स्पिरिचुअल एंगल थोड़ा सा निकाला और उसको मैं साइंटिफिक वे में लेके आया। क्योंकि देखिए क्या होता है कि आयुर्वेद जो है और हमारे जो स्पिरिचुअल टेक्स्ट हैं, वो कई हजारों सालों पहले लिखे गए हैं। है ना? तो आज के समय में कई लोग उसको समझते हैं और कई लोग नहीं समझते। क्योंकि अगर आप किसी से कम्युनिकेट कर रहे हैं और जिस भाषा में वह समझना चाहता है बंदा, उस भाषा में अगर आप नहीं बोलेंगे, आप तो कभी भी अपनी बात को आप समझा नहीं पाएंगे। तो आज के लोग लॉजिक समझते हैं, साइंस समझते हैं। तो मैंने प्राणायाम को ब्रीथिंग को साइंस से जोड़ा। मैंने यह इस्टैब्लिश किया कि जब हम ब्रीथिंग या कोई भी प्राणायाम करते हैं। ठीक है? चाहे कोई भी, चाहे अलोवि-लोम है, चाहे नाड़ी शोधनम है, चाहे डीप ब्रीथिंग है, चाहे कुंभक है, तो उसका फिजियोलॉजिकल इफेक्ट बॉडी में क्या होता है? हमारे शरीर में ऐसा क्या होता है जिससे हमें अच्छा फील होता है, जिससे हमारा शरीर ठीक होने लग जाता है। तो आज हम उसी की बात करेंगे। तो देखिए कुंभक कुंभक है ब्रेथ होल्ड। ठीक है? तो इसको एक्सप्लेन करने से पहले मैं आपको पहले यह बताऊंगा कि हमारे शरीर के अंदर बीमारी बनती कैसे है? यह बहुत जानना बहुत जरूरी है। अब जो मैं चीज बता रहा हूं, आपको सारी बीमारियों का कारण वही है। चाहे वो एक्यूट कंडीशन हो, चाहे वो क्रॉनिक कंडीशन हो। एक्यूट कंडीशन मतलब कि आपकी बॉडी इतनी इम्यून सिस्टम इतना वीक हो जाता है कि कोई भी वायरल इंफेक्शन है या बैक्टीरियल इंफेक्शन है बहुत जल्दी बॉडी को पकड़ लेता है। क्रॉनिक लाइफस्टाइल इश्यूज होते हैं बेसिकली। ठीक है? तो क्रॉनिक कंडीशन के अंदर भी यही रीजन है। होता क्या है? देखिए हमारी बॉडी का बिल्डिंग ब्लॉक क्या है? एक सेल है। हमारी बॉडी इज़ कंपोज्ड ऑफ बिलियंस ऑफ सेल्स। तो सेल के सेंटर में क्या होता है? न्यूक्लियस। वहां पे क्या होता है? माइटोकांड्रिया। अब माइटोकांड्रिया का फंक्शन क्या होता है? माइटोकांड्रिया का फंक्शन होता है एटीपी को बनाना। एटीपी एक सेल की एनर्जी होती है। ठीक है? एडिनोसाइन ट्राई फास्फेट, जिसकी वजह से सेल सिग्नलिंग करता है। नेबरिंग सेल से वह कम्युनिकेट करता है। उन सेल्स को वो कुछ देता है और उन सेल से वो कुछ लेता है। पर इसी एटीपी की वजह से जो सेल का आउटर मेंब्रेन होता है, वहां पे एक फेंसिंग होती है। जैसे आपकी एक जगह है, आप उसको फेंस कर देते हैं। उसमें करंट छोड़ते हैं ताकि कोई भी बाहर का जानवर या अंदर ना आ सके। ऐसे हमारे सेल की भी एक फेंसिंग होती है, जिसको हम बोलते हैं माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल। उसका काम क्या होता है? कोई भी ऐसी चीज जो सेल को नुकसान पहुंचा सकती है, कोई भी टॉक्सिन सेल के अंदर ना घुसे। राइट? तो उस एमएमपी का फंक्शन क्या होता है? सेल को प्रोटेक्टेड रखना। किसी भी तरीके के टॉक्सिन से, किसी भी तरीके के बैक्टीरिया से, किसी भी तरीके के फ्री रेडिकल से बेसिकली। राइट? तो ड्यू टू सम कंडीशंस, कुछ बीमारियां, एक्यूट कंडीशंस, कुछ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स हैं ना? जब टाइम पे हम खाना नहीं खाते हैं, टाइम पे सोते नहीं हैं। राइट? वर्क स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो जाता है। तो बहुत सारे फैक्टर्स हैं जिसकी वजह से क्या होता है? हमारा जो माइटोकांड्रिया है, वो कमजोर होने लग जाता है एक्चुअली में। राइट? अब वो माइटोकांड्रिया कहीं पे भी किसी भी ऑर्गन में, किसी भी टिश्यू के अंदर कमजोर हो सकता है। इट वो डिपेंड करता है आपके जेनेटिक्स पे। जब हम पैदा होते हैं तो हम कुछ जो जींस होती हैं अपनी इन्हेरिट करते हैं एनसेस्टर्स से और कुछ जींस जो होती हैं हमारे लाइफस्टाइल से, जो हम जिनको हम फिनोटाइप्स बोलते हैं, जो हमारे लाइफस्टाइल से बनती हैं बेसिकली। तो डिफेक्टिव स्पेस जहां होगा, वहां के जो सेल्स हैं उनका माइटोकांड्रिया वीक होने लग जाता है। अब माइटोकांड्रिया जब वीक होता है तो एटीपी का प्रोडक्शन जो है वह भी कम हो जाता है। एटीपी का प्रोडक्शन कम होते ही जो मैंने बताया था ना, आउटर मेंब्रेन का जो चार्ज है, जिसको हम एमएमपी बोलते हैं, माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल, वो चार्ज भी कम हो जाता है। नाउ दैट सेल विल बिकम होस्ट टू ऑल द ऑल ऑल टॉक्सिंस। चाहे वो कोई हैवी मेटल है, चाहे वो कोई भी अनयूज्ड मिनरल है या कोई भी बैक्टीरिया है, फंगस है, एनीथिंग, फ्री रेडिकल है, कुछ भी अब उस सेल के अंदर आएगा और उस सेल को बलकी बना देता है बेसिकली। राइट? ऐसे सेल्स को हम बोलते हैं बलकी सेल्स। बॉडी का एक प्रोसेस होता है, उसको हम बोलते हैं माइटोफेजी। आपने ऑटोफेजी सुना होगा। तो माइटोफेजी क्या है? सेलुलर क्लीन अप है। माइटोफेजी प्रोसेस में क्या होता है? जैसे ही ऐसा बलकी सेल बॉडी एनकाउंटर करती है कहीं पे भी तो वो उसकी आउटर मेंब्रेन पे एक प्रोटीन को अटैच करती है। उसको बोलते हैं पिंक वन। वो प्रोटीन पार्किन प्रोटीन को इनवाइट करता है जो सिग्नल देता है ईट मी सिग्नल। और जैसे ही वो सिग्नल आता है तो ऑटोफेगिज्म एक एंजाइम होता है जो सारे फौटी माइटोकांड्रियास को एंगल्फ करके उनको इनकैप्सुलेट कर देता है और डिसइंटीग्रेट करता है उसको दो पार्ट्स में। यूजेबल में और अनयूजेबल पार्ट में। अनयूजेबल पार्ट बॉडी थ्रू आउट कर देती है ड्रेनेज के थ्रू, लिफेटिक ड्रेनेज के थ्रू, और यूजेबल पार्ट से बॉडी क्या करती है? सेल को रिसाइकल कर देती है। तो इसको बोलते हैं हम सेल रिसाइक्लिंग। ये बॉडी का डिफॉल्ट प्रोसेस होता है माइटोफेजी। राइट? बट ड्यू टू मैंने जो बताया सारे फैक्टर्स, चाहे वो स्ट्रेस है, चाहे वो हमारा पुअर लाइफस्टाइल है, चाहे वो कोई क्रॉनिक कंडीशन है जो पहले से हमारे शरीर में चलती हुई आ रही है, कोई भी एक्यूट इशू है, इन सब चीजों की वजह से हमारी माइटोफेजी डिले होती।











