Sahil Adeem with Molana Tariq Jamil at Jamia Al Hasanain — Transcript

मौलाना तारिक जामिल और साहिल अदीम की मुलाकात में रिश्तों में मोहब्बत और दीन की अहमियत पर गहन चर्चा।

Key Takeaways

  • रिश्तों में इजहार मोहब्बत आवश्यक है, जिससे बाउंडिंग मजबूत होती है।
  • माफी मांगना और झुक जाना रिश्तों को सुधारने का रास्ता है।
  • दीन की दावत का मकसद लोगों को जन्नत की राह पर ले जाना होना चाहिए।
  • गुस्सा और विवादों में संयम रखना जरूरी है।
  • नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवन से सीख लेकर व्यवहार करना चाहिए।

Summary

  • मौलाना तारिक जामिल ने रिश्तों में इजहार मोहब्बत की अहमियत पर जोर दिया।
  • मां-बाप, बीवी और रिश्तेदारों की सेवा और सम्मान की बात की गई।
  • नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवन से सीख लेकर दीन की दावत का सही तरीका बताया।
  • मोहब्बत का इजहार रिश्तों को मजबूत करने का आधार है।
  • गुस्सा और झगड़ों में माफी मांगने की सलाह दी गई।
  • दीन की बात करते हुए लोगों को जीतने और जन्नत की तरफ ले जाने की प्रेरणा दी।
  • मौलाना ने अपने अनुभव साझा किए और युवा वर्ग को सही मार्गदर्शन दिया।
  • साहिल अदीम के साथ हुई बातचीत में दीन की गहराई और व्यवहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई।
  • मुलाकात में सामाजिक व्यवहार, रिश्तों की अहमियत और दीन की दावत के मूल सिद्धांत समझाए गए।
  • मौलाना ने मुसलमानों को संयम और मोहब्बत से जीवन जीने की प्रेरणा दी।

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00:01
Speaker A
किसने अपने बाप मां के कपड़े धोए? अच्छा बहुत थोड़े हैं। उनके लिए खाना किसने बनाया?
00:15
Speaker A
माशा्लाह माशा्लाह माशा्लाह और उनको दबाया किसने? वाह वाह वाह माशा्लाह माशा्लाह माशा्लाह माशा्लाह और चाय बना के किसने पिलाई वालदैन को अच्छा शादीशुदा कितने हैं?
00:44
Speaker A
थोड़े से हैं। तो बेगम की खिदमत किसने की? उनकी उसकी तारीफ की हो। अच्छा कोई आपस में लड़े हुए की सुलह कराई हो। माशा्लाह माशा्लाह वाह वाह वाह वाह और अपनी मस्जिद के गश्त में शिरकत की हो किसी को वसूल करके जमात में भेजा
01:28
Speaker A
हो माशा्लाह माशा्लाह माशा किसी बीमार का हाल पूछा हो जाके वाह माशा्लाह माशा्लाह अपने रिश्तेदारों से मिलने गए हो। अल्लाह के नबी का फरमान है अल्लाह के रास्ते का कदम सबसे आला है। और उसके बाद सबसे आला कदम वो है जो रिश्तेदारों को
01:58
Speaker A
मिलने के लिए उठाया गया हो। तो यह बहुत बड़ी बंदगी और इबादत है। तो बड़ी खुशी हुई। आपकी कारगजारी मांबाप से इजहार मोहब्बत किया हो बीवी से किया हो देखो बेटा मोहब्बत का इज़हार रिश्तों का पानी है। सिर्फ इस बात
02:35
Speaker A
पे इख्तेफा कर लेना कि यह मेरी बीवी है, यह मेरी मां है, यह मेरा बेटा है। यह मेरा बाप है। और आप इज़हार ना करें। तो बाउंडिंग नहीं होती। आप बैठे थे हमारे नबी तो एक सहाबी भी बैठे थे। सामने से एक और सहाबी
02:57
Speaker A
गुजरे। तो आपने वह सबी कहने लगे या रसूल अल्लाह मुझे इस आदमी से बहुत मोहब्बत है। गौर से सुनो। आपने कहा फरमाया हां ठीक है। आपने फरमाया कभी तूने इसको बताया है कि मुझे तुमसे मोहब्बत? कहा जी नहीं कहा जाओ
03:16
Speaker A
उसको बता के आओ। यह कितना बड़ा उसूल यहां से निकलता है। तुम सिर्फ रफा यद के मसलों में लड़ते रहते हो। ये कितना बड़ा उसूल है सीखने का के जाओ उसको बता के आओ। और आपने हजरत आयशा से कैसे इजहार
03:38
Speaker A
मोहब्बत किया। या आयश या आयशा ने कहा या आयशो पहला लफज़ ही इश्क का है। या आयशो निक नेम सुभान अल्लाह। मैं तो इसी का ही मजा लेने लग गया हूं। या आयशो अल्लाह की कसम आपकी बीवियां आप पर
04:01
Speaker A
कुर्बान हो जाएंगी। बीवियां नहीं मां बाप भाई बहन सब कुर्बान हो जाएंगे। मोहब्बत का इजहार करो। आपने यहां आयशा नहीं कहा। आयशा तो नाम था। आयशो लाड इनहु मौत अन उरी की जजती जन ऐश जब से मुझे पता चला है तू जन्नत में
04:30
Speaker A
मेरी बीवी है तो मुझे तो मरना भी अच्छा लगने लग गया है। और व्लाह सिर्फ इजहार मोहब्बत वरना जो काबास अदना तक पहुंचा हो वो कैसे दाएं बाएं उनका कोई ख्याल होगा एक हदीस भी याद आ गई माली फसा
04:54
Speaker A
रबिन मुझे औरतों की कोई रब नहीं ये इजहार मोहब्बत जरूरी है दोस्तों से मांबा से बहन भाइयों से बीवी से कभी कोई सख्त बोल निकल भी जाए इंसान है खासतौर पे मियां बीवी के रिश्ते में फ़ौरन माफी मांगो फ़ौरन झुक
05:17
Speaker A
जाओ तो आप अल्लाह के भी महबूब बन जाओगे और अल्लाह के बंदों के भी महबूब बन जाओगे और रिश्तेदारों में भी महबूब बन जाओगे वालदैन हर रिश्ते का पानी इज़हार मोहब्बत हर रिश्ते का पानी इजहार मोहब्बत तो जिस खेती को रोजाना पानी चाहिए
05:47
Speaker A
उसे छछ महीने पानी ना मिले तो खुश तो हो जाएगी ना इसलिए आप लोगों के घर जाने से पहले जो आपकी छुट्टियां होती है तो उसके मुताबिक मैं कुछ थोड़ी आपसे बात करता हूं। यह मुआशरत है जो हमारे मदारिस में नहीं
06:05
Speaker A
पढ़ाई जाती ना सुनाई जाती है ना बताई जाती है। अब आप लोग जो अल्लाह के नाम पर जमा है आपको भी नहीं बताया जाता कि मेरे नबी ने जिंदगी गुजारने के लिए क्या तरीका इख्तियार तरह अल्लाहू अकबर तुम्हें रोशन रास्ते पे
06:30
Speaker A
छोड़ के जा रहा लहा कनहार उसमें रात है ही नहीं उसमें रात भी आती है तो दिन में बदल जाती है। सुभान अल्लाह। तो दिन की रोशनी का सफर कितना आसान होता है। अब तो यह मोटरवे बन गए।
06:47
Speaker A
हमने तो खड्डे वाली सड़कों में रात को तबलीग में इतने सफर किए हुए हैं। हर वक्त आगे आने वाली गाड़ी से डर लग रहा होता था वे ठुक ना जावे आके। लहा का ला इ्ला हालिक जो इससे इधर उधर होगा वो
07:07
Speaker A
हलाक हो जाएगा। बेटा खुश मिजाजी पैदा करो। चेहरे पे मुस्कुराहट रखो। इब्तम का फ़ व अ का सदका। जरा अपने भाई को मुस्कुरा के मिलना भी सदका है। कितनी बड़ी बात फरमा। बीवी के मुंह में लुकमा डालना सदका
07:30
Speaker A
है। मां बाप की खिदमत तो फिर कितनी बड़ी चीज। बहन भाइयों के आगे झुक जाना। उनसे मुंह मारी नहीं करनी जिल्लत बर्दाश्त कर तो ये नौजवान हैं साहिल अदीम तो परसों हमारी मुलाकात हुई मैं वहीं था लाहौर में
07:56
Speaker A
इन्होंने जो अल्फाज़ कहे थे उससे बढ़कर इज़हार मोहब्बत किया। मैं तो शर्मिंदा ही हो रहा था। फिर जिन्होंने मुझसे फिर जो इन्होंने मुझसे एक घंटा बात की ना वो इतनी बुरमगज़ थी और थोड़ी इनकी रफ्तार वो फरारी की तरह
08:20
Speaker A
है। तो मैंने इनसे कहा कि Toyota बन के बोलना है। फरारी बनके नहीं बोलना। तो लेकिन वो इतनी पुरमगज़ थी। मेरा जी चाहा कि आप इस पहलू से भी दीन की बात सुने। आपको नफा होगा इंशा्लाह। वैसे तो शेख के बाद
08:36
Speaker A
मैंने कल भी इनसे परसों जब मुलाकात हुई तो यही कहा था कि जितने भी इस वक्त के स्पीकर्स बल्कि कैमरे में मुझे बताना चाहिए जितने भी इस वक्त मुसलमानों के दाई हैं इस्लाम के दाई हैं इस वक्त सोशल
08:47
Speaker A
मीडिया पे स्पेशली आपको नजर आते होंगे मगर अपने अपने इलाकों में भी वो मिशन पूरा कर रहे हैं। अल्लाह उनको उनकी उम्र दराज करे। वो इस तने की छाया की ख्बियां हैं। यह आपके सामने जो हम सबको अल्लाह ताला नेमत
09:03
Speaker A
अता की है। अल्लाह ताला इनको सेहत दे। अल्लाह ताला इनकी उम्र दराज करे। मैं बाहर के मुल्कों में ज्यादातर रहा हूं। वहां पर हमारी सबकी पहचान जो है ना माशा्लाह मौलाना जमील है और इस बारे में आप जब सफर करेंगे तो आपको पता चलेगा
09:19
Speaker A
के जिस तरीके से हमारी इज्जत अफजाई बगैर कुछ किए ही हो जाती है स्पेशली उन मवाके पे जहां पे हम अल्लाह और उसके रसूल की बात करने की कोशिश करते हैं। तो हमें नहीं पता होता कि उनके दिल इस तरह के अखलाक ने पहले
09:36
Speaker A
ही नरम किए हुए हैं। तो यह कभी भी ना भूलना कि जिस उस्ताद की जो नक्शे कदम है उसकी ग्रेस क्या होती है? वो ग्रेस जो है ना वो जो तहरीम है वो ना पामा पामाल होने पाए। मुझे पता है आपकी
09:55
Speaker A
उम्र इतनी है कि 10 अगले 10 12 सालों में आपको बहुत गुस्सा आने वाला है। लोगों ने आपको बहुत उकसाना है कि किसी तरीके से आप कहीं ना कहीं आपे से बाहर हो। और यह आपकी मोहब्बत का भी तकाजा होगा और गैरत का भी
10:11
Speaker A
तकाजा होगा कि आप गले को आएंगे लोगों के नाहक के ऊपर हठ धर्म होके लोगों ने आपके ऊपर इस तरह के मलामतें और तोहमत लगानी है आप पे इस तरह के इल्जाम लगाने हैं। मगर याद रखिएगा कि मैं जब भी किसी ऐसे मौके पे
10:30
Speaker A
होता हूं और तौर पे फेल होता हूं। मगर जब भी मौके पे होता हूं तो पैमाना तारी जमील ही होते की अगर इस तरीके से इस अखलाक से बात की जाए कि लोगों को हराने की बजाय जिताने का मकसद
10:42
Speaker A
हो। मैं बहुत छोटा था मेरे एक शेख थे वो उर्दन के थे। तो वो मेरी इस तरह शेख ने अभी कहा ना कि मेरी स्पीड जरा तेज है। मेरी बचपन से ही तेज थी। तो उन्होंने मुझे बुलाया और उन्होंने कहा कि तुझे पता है
10:57
Speaker A
कि अल्लाह के नबी ससल्लम का मक्के में उस वक्त जब पूरी दुनिया काफिर थी और पूरी दुनिया अपने आप को सबसे बड़ा मुबल्ला समझती थी अपने दीन का। वो ऐसेसे लिसानी महारत रख चुके थे कि उनकी लिखा लिखी हुई
11:15
Speaker A
बातें या कहे हुए अशार लोगों को गूंगा करते थे तो लोगों को अजबी कहते थे। उस मौके पर अल्लाह के नबी ने अकेले तने तन्हा अकेला एक मुसलमान पूरी दुनिया काफिर उस वक्त जो मिशन ले चलना था तो खुद सोचो कि
11:31
Speaker A
हम पे तो बहुत ही आसान इम्तहान आया है। हमें तो इतना आसान इम्तहान आया कि हमारे घर वाले तक मुसलमान थे पहले से हमारे दोस्त अहबाब मुसलमान थे। ज्यादातर लोग अपने आप को सच या झूठ के साए में इस्लाम
11:43
Speaker A
ही का टैग लगा के चलते थे। बल्कि जब आप अल्लाह रसूल की बात करेंगे कुरान की आयत या हदीस सुनाएंगे तो वह शर्मिंदगीगी में आपसे बात करेंगे कि हां हम इस पैमाने पर पूरा नहीं उतरे बात आप ठीक कर रहे अल्लाह
11:54
Speaker A
के नबी सल्लम के साथ ये मामला नहीं था ये गौर से समझे और उस मौके पे भी अल्लाह के नबी ससल्लम का ब्रांड क्या मशहूर था उन दुश्मनों में क्या ब्रांड मशहूर था कि इस शख्स से बच के रहना जैसे ही ये अपना मुंह
12:09
Speaker A
खोलेगा तुम्हें इससे इश्क हो जाएगा इस बात को वो कहते थे। यह जादूगर है। मक्के में एक जादूगर चल रहा है। जो भी आता था मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह सल्लल्लाहु अल वसल्लम के सामने वो यह समझता था कि मेरा वकार बुलंद हो गया है। क्योंकि
12:25
Speaker A
मोहब्बत आपको होती ही उससे है जो आप आपकी वकार में इजाफा कर देता है। आपको उस बंदे की बात करने सुनने में अपनी एहसास बरतरी का एहसास होता है। ये उसूल याद रखिएगा। ये मैं छोटा था तो मुझे बताया गया था
12:44
Speaker A
के ये ब्रांड ना भूली मोहम्मद का ब्रांड है ये तू अपने इलाके का जादूगर नहीं मशहूर ना के तेरी जुबान से लोगों को तेरे से इश्क हो जाए इससे कम दावत का कोई उसूल नहीं सो अगर तूने अपनी दावत करनी है तो
13:02
Speaker A
अपने आप को जितना मर्जी बढ़ा जता के बता लोगों को कम कर मगर अल्लाह की दावत करनी है तो फिर लोगों को जिता ये ना हो जाए कि तुझ जीत के आ जाए और वो जहन्नुम की तरफ चला जाए। यह कोई जीत
13:15
Speaker A
नहीं है। ऐसा कोई मारका नहीं आना आपके लाइफ में आपकी जिंदगी में कि जहां पे आप अपने आपके या दोस्तों के सामने ये जता के आए कि मैंने उसको इस मनाज़रे में डिबेट में हरा दिया। उसका मतलब पता है क्या? वो जहन्नुम
13:29
Speaker A
वासिल हो गया। यह बेसिक उसूल है। कि अगर आपका मकसद दावत था तो उसको जन्नत की तरफ लेके आना था। वह चाहे यह समझे कि वह आपसे बढ़तर है या कमतर है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप तो
13:45
Speaker A
अल्लाह के लिए कर रहे थे। यह दो लिखारी साथ बैठे हुए थे। ये बता रहे थे कि कौन असल में जीता है कौन असल में हारा है। अगर अगले बंदे को आपने जहन्नुम से खींच के जन्नत का रुख कर दिया तो ये दोनों लिखेंगे
13:58
Speaker A
हां ये जीत गया। दुनिया में वाकई में अल्लाह की कसम पसपाई होगी। रुसवाई भी होगी। यह हो ही नहीं सकता। शाफई रहम्लाह ने इरशाद फरमाया कि अगर राह हमवार है तो समझ लो इस्लाम की राह नहीं है। ये मैं आपके बचपन के आपकी ट्रेनिंग की
14:14
Speaker A
अपनी मैनुअल बता रहा हूं कि ये किसी गलत तवकात में ना इस्लाम में आ जाना। इस्लाम में कोई आसानी है। कोई असाइश नहीं मिलनी। आपको हर जगह से तो मिलनी है। अभी शेख ने कहा ना अपने रिश्तेदार अगर आपके खिलाफ
14:27
Speaker A
नहीं हो रहे तो पहला लिटमस टेस्ट ही फेल हो रहा है। बहरहाल ये तो मेरा इब्तदाई इसलिए था। मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है। मैं आपको खाली ये काफी सारे मवाके मैं ढूंढ रहा था। अल्लाह ताला ने पहली
14:41
Speaker A
दफा मतलब आपशार के सोर्स पे मुझे पहुंचा दिया। वरना अ मैं जितना मैं आपको ना एक जिस जहां पे शेख ने बात खत्म की है वहीं से मैं शुरू करते हुए एक थोड़ा सा तमीद थोड़ी बांध दूं अल्लाह
14:59
Speaker A
के नबी सल्लम ने जब इरशाद फरमाया था ना कि तुम में से कोई शख्स मोमिन नहीं हो सकता जब तक के तू अल्लाह और उसके रसूल को अपने आप अपने नफ्स अपने मां-बाप अपने बीवी बच्चे अपने किसी भी माल से अज़ नहीं
15:16
Speaker A
रखता। ये सबको पता है ना इस बात का। तो उमर खब ने क्या कहा था? उस वक्त दिल की सफाई देखी कि या रसूल अल्लाह मैं आपको हर चीज़ से अज़ रखता हूं। अपने नफ़्स से अज़ज़ नहीं रखता। तो अल्लाह के नबी ने इरशाद
15:28
Speaker A
फरमाया कि ओ उमर तो फिर तू ईमान की तकमील पे नहीं पहुंचा। अगली ही मुलाकात पे उमर खत्ताब ने क्या कहा कि या रसूल अल्लाह अब मैं आपको अपने नफ़्स से भी ज्यादा अज़ज़ रखता हूं। यह पहले इस मुलाकात और दो मुलाकातों
15:42
Speaker A
के बीच में हजरत उमर खब र ने क्या किया था? यह है जिधर जिस उम्र में आप पहुंच चुके हैं ना वो ये सफर आपने पूरा करना है। ये एक रात में हो जाता है अल्लाह की कसम। करने पर आए
15:59
Speaker A
तो यह नफसियात की ट्रेनिंग है जो हमारे नबी सल्लम ने कयामत वाले दिन पैदा होने वाले बच्चे तक की है और अल्लाह की कसम सबसे बड़ा ऐतराज है इस वक्त गैर मुस्लिमों का कि तुम्हारा रब अपनी तारीफें करता रहता
16:14
Speaker A
करवाता है तुम्हारा नबी अपनी तारीफें करवाने को दीन कहता है अल्लाह की कसम यह ऐतराज करेंगे वो आपने इस बारे में बड़ी तफसील से सोचना है अकेले में सोचना है अपनी-अपनी गार हरा में जाके कि इसका मतलब क्या था? ये नफसियात की
16:31
Speaker A
ट्रेनिंग है। मोहब्बत का लफज़ समझे। जिस तरह शेख ने स्टार्ट में आते ही क्या कहा?
16:35
Speaker A
ये अल्लाह के नबी सल्लम की सुन्नत है जो उन्होंने निभाई कि खुदबे फजर की नमाज़ के फ़ौरन बाद अल्लाह के नबी तवातिर से क्या सवाल करते थे? कि किसने सदका किया है? किसने बीमार की इयाज़त की है? तो अबू
16:51
Speaker A
बकर सिद्दीक का हाथ खड़ा होता था। तो उमर खब ने कहा कि अभी फजर का वक्त है। आपने कहां बीमार की इज़दत की? तो उन्होंने नाम बताया कि आपको पता नहीं है कि कौन बीमार है। आपने कहां सदका किया? फला आदमी का पता
17:04
Speaker A
नहीं है आपको। तो आ तालिब ने उस फरमाया कि हर खैर से पहले अबू बकर है। कि अभी हम स्टार्ट करते हैं और व तक पहुंच चुका होता है। ये क्यों मैं आपको बता रहा हूं?
17:19
Speaker A
क्योंकि यह जो आपको अभी दर्स स्टार्ट जिस चीज से हुआ है ना यह उसी हदीस का एक जुज़ है। यह वो जूज़ है जिसकी मैं आपको अभी बता दूं नफ़्सियात की ट्रेनिंग लेनी जरूरी है। आपकी उम्र में बता रहा हूं मैं आपको।
17:32
Speaker A
जिस-जिस किस्म के थपड़े मैं खा रहा हूं अल्लाह की कसम एहसास भी नहीं होता मुझे। मेरे अपने अहबाब और मेरे खानदान वाले कह रहे होते हैं कि तू क्या बेहिस हो गया है। तुझे क्यों तकलीफ नहीं हो रही?
17:45
Speaker A
सरेआम तेरे पर तोते लगे और चुप करके बैठा रहे। मोहब्बत का लफज़ समझे। उसके बाद सिर्फ दो नकाती एजेंडा मैं आपको बताऊंगा। अभी पहला नखता मोहब्बत का है। मोहब्बत का जो मतलब है ना आपकी उम्र में समझ आ जाएगा
17:58
Speaker A
आपको। मोहब्बत का मतलब है उस हदीस के तनाज़ुर में बता रहा हूं मैं आपको। तुम में से कोई शख्स मोमिन नहीं है। जब तक कि वो अल्लाह और उसके रसूल को अपने नफ़्स और अपने तमामतर अटैचमेंट्स जो कि बीवी बच्चे हो
18:11
Speaker A
मां-बाप हो उससे ज्यादा अजीज ना रखे का मतलब समझे। मोहब्बत अरबी में जिस इसका जो मसदर है ना इसमें तकलीफ का अंसर जरूरी है। अरबी में इस लफज़ की नफसियात के पीछे उर्दू का तर्जुमा ये बनता है कि मैं अगर
18:28
Speaker A
आपके लिए आपके लिए आपकी बेहतरी के लिए अपने आप को तकलीफ में डालते हुए अपनी तकमील समझूं तब मैं आपसे मोहब्बत करता हूं। यह गौर से मैं तीन रिपीट करूंगा ताकि कोई बंदे को कसर ना रह जाए। आपसे मैं कहूं ना
18:46
Speaker A
कि साहिल साहिल अदीम से मोहब्बत करते हैं और आपने सर भी हिला दिए तो वो झूठ होगा। क्योंकि आप मुझे जानते भी नहीं है। आप मेरे लिए कोई अच्छी बात कर दे या तारीफ कर दे मोहब्बत नहीं है। जब तक आप
19:00
Speaker A
मेरे लिए मेरी बेहतरी के लिए खुद को अपनी तकलीफ में डाल के उसके अंदर एहसास तकमील ना महसूस करना शुरू कर दें। यह हर मां बाप को अपने बच्चों के लिए अल्लाह ताला ने बच्चे देते इसलिए कि उसको
19:14
Speaker A
पता चले कि मोहब्बत का असल मतलब क्या है? जब मां रातों को उठती है और बच्चा अपनी हिरस में अपनी तलब में सोती हुई थकी हुई मां को थप्पड़ मार के उठाता है कि मुझे भूख लगी है दूध पिला। चीखें मारता है। तो
19:27
Speaker A
मां को तकलीफ नहीं होती। मां को दूध पिला के तकमील होती है। याद रखिएगा ये मैं आपको क्यों बता रहा हूं? अल्लाह की कसम इस्लाम की राह में रोड़े आएंगे आपकी राह में। वो जो तकलीफ है उसमें अगर आपको एहसास तकमील नहीं हो रहा
19:44
Speaker A
तो अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत शुरू भी नहीं होगी। अगर आपकी राह में रोड़े नहीं आ रहे तो फिर आप लोगों को खुश कर रहे हैं। अल्लाह को खुश नहीं कर रहे। यह वो दौर ही नहीं है जिसमें आप इस्लाम की बात करें और
19:55
Speaker A
लोग आपके पीछे ना पड़ जाए। यह वाहिद वक्त आया है कि अल्लाह के नबी ने जब इस्लाम प्रेजेंट किया था अबू बकर सिद्दीक उमर बिन खब अली बिन अब तालिब ये सब आफतों की और तीरों की छाया में आ गए थे
20:11
Speaker A
हर रोज के मसाइल थे हर किस्म का बंदा उनके खिलाफ था और आजकल का इस्लाम अमेरिका यूरोप में प्रेजेंट होता है हर किस्म का जॉर्ज बुश और डोनल्ड ट्रंप बाहें खोल के इफ्तारियां कराता है हमें उधर फर्क है याद याद रखिएगा हक बाततिल को
20:30
Speaker A
कभी पसंद नहीं आ सकता। हक बाततिल को कभी पसंद नहीं आ सकता और बाततिल की ताकत को तो कभी भी पसंद नहीं आ सकता। उसके लिए तो उसकी ताकत खींचने के है कि प्रेजेंट क्यों हो गया? तो तकलीफ तो
20:47
Speaker A
आएगी। अगर आपको तकलीफ नहीं आ रही तो अपना पपस दोबारा से चेक करें। यह बुखारी दोबारा से खोलें जो आपके हाथ में है। क्यों? इमाम मालिक ने कहा के निजाम जिस तरीके से अल्लाह के नबी पहली दफा लेके आए थे
21:01
Speaker A
मुसलमान आखरी दफा भी उसी तरीके से ही लेके आएंगे। इसके अलावा निजाम नहीं आ सकता इस्लाम का। याद रखिएगा इसका मतलब है कि जो रास्ता जिस तकलीफों का जिन मसायब का जिन मसाइल का अल्लाह के नबी सल्ला अल
21:17
Speaker A
वसल्लम ने एक-एक करके खुद अपने जिस्म पे अपनी रूह पे अपने ज़हन पे, अपनी नफसियात पे सही थी। अगर आप नहीं सह रहे तो या तो रास्ता गलत है या आपकी अप्रोच गलत है। यह वो हदीस है जिसमें मैं आपको बता
21:31
Speaker A
रहा हूं कि तुम में से कोई शख्स भी मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि वो अपने आप से बढ़कर मोहब्बत ना इसका मतलब है कि अपने ऊपर तकलीफ को मुसर्रत से सहे कि मैं तो आज मुकम्मल हो रहा हूं। जब मैं अल्लाह और उसके रसूल
21:46
Speaker A
की राह में तकलीफ में आ रहा हूं। इसलिए मैं बता रहा हूं आपको। अल्लाह की कसम हजारों नहीं लाखों ऐसी औरतें पाकिस्तान में हैं। मर्द ऐसे पाकिस्तान में है। आपकी उम्रों के जो कल रात को चार-चार पांचप घंटे रातों को कयाम किया
22:03
Speaker A
सिर्फ फस्तीन के लिए। उन्होंने सिर्फ और सिर्फ दुआएं मांगते रहे रोते रहे। घुटने लड़खड़ा रहे थे उनके उस उज़्र से कि इतनी देर तक वो नमाज़ में रहे। हमसे उठा नहीं जा रहा। यह याद रखिएगा जिन हालात में हम हैं हम
22:21
Speaker A
सबसे पहले हमें यह देखना पड़ेगा। इमाम जाफर सादिक ने कहा कि सूरज की पहली किरण सुबह के वक्त अगर कौम का मसला आपके सामने नहीं लेके आती तो आप तो मुसलमान हुए ही नहीं अभी। ये एक हदीस है। उसका उसकी शरा बता
22:38
Speaker A
रहा हूं आपको कि तुम में से कोई शख्स मुसलमान हो ही नहीं सकता। जब तक अल्लाह और उसके रसूल को अपने आप से अपने अहलोल से ज्यादा महबूब ना रखे। जब तक मैं आपके लिए यह ढूंढूंगा नहीं कि आपकी बेहतरी कहां है
22:52
Speaker A
और उस रास्ते में तमामतर तकलीफ का तजिया नहीं करूंगा और उन तकलीफ को पूरी बाहें खोल के अपनाऊंगा नहीं और उसके अंदर एहसास तकमील नहीं लाऊंगा। अल्लाह की कसम मुझे आपसे मोहब्बत नहीं है। मैं अपनी आसानी में आपको बेहतरी कर
23:06
Speaker A
रहा हूं। जहां मुझे मुश्किल आएगी आपकी बेहतरी बंद कर दूंगा। जिधर जिधर मुझे तकलीफ आना शुरू हो गई आपकी बेतरी का भी टूटी बंद और उधर भी होगा आप भी समझ जाएंगे यार बेचारा और क्या-क्या करे मगर अपनी
23:18
Speaker A
बेटी के लिए अपने बेटे के लिए तो मुझे कोई रात नहीं पता चलती कोई दिन नहीं पता चलता पैसे ना भी हो तो पूरे मोहल्ले से उधार लेके पहुंच जाता हूं अस्पताल उस वक्त तो मेरी गैरत नहीं आ
23:31
Speaker A
जाती सो जब तक आपको इस त इस शूर की सतह पे आतेआने में वक्त लगेगा। ऐसे अहबाब, ऐसे अशखास, ऐसे शयू ये वक्त बचा लेते हैं। अल्लाह की कसम आपको उन अल्फाज़ की गहराई नहीं पता जो इनकी उम्र और
23:47
Speaker A
इनके तजुर्बे की वजह से वो गहराई अल्फाज़ में नज़र नहीं। आपकी उम्र नहीं है इतनी। उस फ्लेवर को आप आपके ज़हनों में लॉजिकल स्टैंडिंग तो आ जाती है। दिल में वो सलाहियत नहीं कर सकती। बिकॉज़ वो जो अल्फ़ाज़
23:59
Speaker A
बोलते हैं, उनकी जो तस्वीरें उनकी उम्र से गुजर रही है। जब उन्होंने रिश्तेदार बोला था, आपको रिश्तेदार नज़र नहीं आए। उनको नजर आ रही है। उनको वो तकलीफ पता चल रही है कि यार तू तो मेरा अपना है। उस खून की नस कटने की जो तकलीफ है वो
24:13
Speaker A
उनको पता है। आपके सामने तो उन्होंने खाली अल्फाज़ जारी किए और आपने कांसेप्ट भी समझ लिए। मगर आपका रिश्तेदार अभी तक आपसे कटा नहीं है। जब कटेगा तब मेरे अल्फाज़ याद करना कि उसमें अगर आपको तकलीफ हो रही है तो फिर
24:28
Speaker A
मोहब्बत नहीं थी। तकमील हो रही है तो मोहब्बत थी। हां मैं तो छोडूंगा तो नहीं। तो शेख ने कहा ना किसने मां बाप के कपड़े धोए। सबसे कम हाथ खड़े हुए। क्यों? सबसे ज्यादा तकलीफ उसमें थी। चाय किसने बनाई?
24:40
Speaker A
सबके हाथ खड़े। सबसे कम तकलीफ उसमें थी। और क्या तकलीफ होनी कपड़े धोने में?
24:46
Speaker A
काहिली के अलावा कौन सा लब जो कंबल है जो हमने उठाना था। कपड़े धोने में कौन से कुछ चोटें लग जाती हैं। कंफर्ट ज़ोन से बाहर आना था ना बस। चाय बनाने में मसला नहीं था क्योंकि साथ एक कप अपने लिए भी बनाना
25:01
Speaker A
था। समझ रहे हैं? किसी की तकलीफ में आसानी, किसी की तकलीफ में अपनी तकमील जो है ना वो किसी के लिए जिस मेहनत में जो दिक्कत आती है उस दिक्कत के अंदर तकमील ढूंढनी असल में मोहब्बत है। जिसज दिन आप लोग जो कवारे हैं
25:19
Speaker A
ना आपकी शादी होनी ही उस तकमील में है। मैं बता रहा हूं आपको अल्लाह ताला निशानियां दिखाते हैं सबको। और अपनी बीवियों से अल्लाह की कसम आपने डिमांड करनी है कि शौहर की खिदमत तो इबादत है। आप डिमांड भी वही तक करेंगे। हमारी
25:38
Speaker A
नफ़्सियात में अल्लाह ने रडार ही फिट किया है। हम अपने अंदर झांकते ही नहीं। अल्लाह ताला कहते हैं आसमानों में देख अपने अंदर। ये अपने अंदर देखने का ये मतलब है कि तू देख तो सही ये मशीन है क्या? ये हार्डवेयर
25:48
Speaker A
बनाया क्या अल्लाहजल ने? इस हार्डवेयर को समझ ले। जो आपकी डिमांड है। अल्लाह की कसम वही आली बिन अबी तालिब की डिमांड थी। एक ही मशीन है अल्लाह ताला ने बना। इसीलिए एक ही सवाल है। सोचे आखिरत के मैदान में हम सब खड़े हैं।
26:04
Speaker A
साथ अबू बकर सिद्दीक खड़े हैं। उमर खब खड़े हैं। बिन तालिब खड़े हैं। सवाल और पर्चा एक ही आ रहा है। ताकत में थे तो क्या किया? उनके जवाब हमें अल्लाह की कसम पता है। हमें पता है उन्होंने क्या
26:18
Speaker A
किया? हमारे जवाब के हमें पता है। फरिश्ते ने सवालनामा नहीं बदलना उधर। के या अल्लाह इसको तो टफ इम्तहान मिला था। अल्लाह की कसम उनको ज्यादा टफ इम्तहान मिला था। या अल्लाह इसके सामने तो नबी नहीं आया। अल्लाह की कसम हमारे सामने नबी
26:33
Speaker A
की तमाम वह ऐसेसे सबी बता जिनको 10स भी हदीसे नहीं पहुंची जो इस किताब में लिखी है। यह बहाना भी छोड़ दें। ये जो आपके सामने सही बुखारी पढ़ी है आपके सब ने पूरे के पूरे अरब को तमाम की
26:45
Speaker A
तमाम हदीसों का पता था। उमर बिन खत्ताब के टाइम पे अमार बिन जासिर ने एक हदीस सुनाई। उमर खत्ताब ने कहा इसका गवाह कौन है? तो अमार बिन जासिर ने कहा इसका गवाह कोई भी नहीं। मैं अकेला था जब अल्लाह के नबी ने
26:56
Speaker A
मुझे इरशाद फरमाया। डंडा ले पीछे भाग रहे थे खब और बिन जासिर आगे भाग रहे थे कि तू क्यों ऐसी हदीसे पहुंचा रहा जिसकी कोई वैलिडेशन नहीं बिन जासिर कह रहे मैं कैसे आपको कोई गवाह लेके आऊं झूठ झूठा
27:10
Speaker A
गवाह पैदा करूं जब मैं अकेला था तो फिर मैं अकेला था ये क्यों आपको बता रहा हूं ये दिखाएं ये किताब लोगों को पता चले एहसास क्या होता है ये आपको उस दर्जे पे पहुंचाती है इल्म के जिसमें आधे से ज्यादा
27:23
Speaker A
अरब 1400 साल पहले नहीं पहुंचा हुआ था लोग कई कई महीनों का सफर करके कहते थे कि फला बंदे के पास कोई हदीस है। जत्थे के जत्थे आते थे। आपके पास हदीस है। और वो कहते हां क्यों ऐसा क्या हो
27:34
Speaker A
गया? इतनी बड़ी करेंसी थी। ये जो हमने मुफ्त में मिल गई है ना इसलिए कदर नहीं कर रहे। काश के कुरान ₹1 लाख एक नुस्खा होता। अल्लाह की कसम सब कुरान पे कार बंद होते। जो एटलीस्ट खरीद लेता ये मुफ्त मिल गया
27:50
Speaker A
है। जमीन पे फेंका हुआ है हमने। काश ये 10 ₹1 लाख की बिकती। लोग पैसे जमा कर करके बुखारी देखते फिर मैं देखता किसको एक एक हदीस नहीं याद तकलीफ तकलीफ में जो तकमील है ना वह पूरे काम करवाती
28:04
Speaker A
है इसलिए मैं आपको बता रहा हूं कि मोहब्बत का लफज़ समझ लें मोहब्बत का लफज़ समझ लें तकलीफ के अंदर मुसर्रत लेना किसी की बेहतरी के लिए जो आपको तकलीफ आ रही है उस भाई की बेहतरी के लिए
28:26
Speaker A
बहरहाल दूसरे नुक्त पे आ जाते हैं क्योंकि वक्त की किल्लत है। मेरा जितना भी वक्त नफसियात में क्योंकि मैं तालिब इल्म हूं नफ्सियात का। यह किताब आपके ऊपर से बोझ उठाने की मशीन थी। यह मैनुअल ये जैसे वाशिंग मशीन
28:45
Speaker A
के साथ एक मैनुअल आता है ना। फ्रिज के साथ एक आता है। इंसान के साथ यह मैनुअल आता है। इस मशीन का मैनुअल यह है। ये गौर से समझे। जिसके पास ये मैनुअल है वो कमजोर हुआ हुआ है। वो प्रेशर में है कि अगला
29:00
Speaker A
सोचेगा मैं पता नहीं किस किस्म का पेंडू आदमी हूं। मैं उजाड हूं। मैं गांव से आया हूं। और ये हार्व जेल लम्स से पड़ा हुआ है। और ये ऊपर के दर्जे पे है। मैं इसको ऊपर की तरफ देख रहा हूं। ना वो मुझे नीचे
29:14
Speaker A
की तरफ देख रहा है। अल्लाह की कसम ऐसे ही हो रहा है और कसूर उसका नहीं है। उसकी तो ट्रेनिंग ऐसे हुई हुई है। बाततिल की ट्रेनिंग जितनी मर्जी लो दर्जा ऊपर नहीं जाता। आपको हक की ट्रेनिंग हुई
29:27
Speaker A
हुई थी। और अल्लाह की कसम मेरा मुसलमान मुजाहिद वाकई में बाततिल को ऐसे देख रहा है जैसे पता नहीं कौन से पहाड़ को देख रहा है। यह प्रेशर आपने अपने सर पर खुद डाला हुआ है। जब तक आप असर्टिव होके
29:43
Speaker A
बदतमीजी नहीं करनी। तहजीब कभी नहीं छोड़नी। वरना तो दीन से फारग हो गए। मगर याद रखिएगा घमंड इस्लाम में नहीं है। मगर नाज इस्लाम और ईमान की निशानी है। ये गौर से समझ ले इस बात को। और मुसलमान लड़का स्पेशली पाकिस्तानी
30:02
Speaker A
मुसलमान लड़का स्पेशली मदरसे का वह नाज छोड़ देता है जब वह गैर अल्लाह के सामने गुफ्तगू करता है कि इससे बड़ी गाड़ी और इससे बड़ा घर कोई नहीं है। अल्लाह की कसम यह है वो आपके जन्नत के महल है।
30:19
Speaker A
अल्लाह के नबी ने इरशाद फरमाया था इसलिए मुसलमानों को अल जन हक़ के कि ये ना सोच लेना कि यह हक है जहां पे दुनिया में ये एक इलुजन है। असल में जो तुम्हारा घर है वो जो बड़ी
30:33
Speaker A
कोठी है जो बड़ी गाड़ियां है वो वहां पे है तुम्हारी। वह तुम्हारे पास है और तुम इनके छोटे-छोटे घरों को देख के यह समझ रहे हो कि यह ऊपर हैं और हम नीचे हैं। ये बचपन की ट्रेनिंग में बनता है
30:48
Speaker A
हमारा। ये बचपन से आपके ज़हनों में डाल दिया गया है। उलमा ने नहीं डाला हुआ ये। ये नफसियात है। इस मशीन का मैनुअल ये था। आपने वो वाकया सुना है ना जब एक ईसाई ने ईशाइया दिया था। अबू तालिब
31:04
Speaker A
उनके काफिले को उसने पत्थरों को सजदा करते हुए देख लिया था। याद है आपको वो डायलॉग याद है उस बंदे का कि मैंने सारे बंदे देख लिए हैं, गिन लिए हैं। कोई ना कोई बंदा तो तुम्हारे में मिसिंग
31:19
Speaker A
है। तो अबू तालिब ने कहा नहीं सारे लोग यहीं हैं। यहीं पे हैं। उसने कहा नहीं भाई कुछ तो मामला खराब है। जो वाक्यात और निशानियां मैंने देखी है ना तुम्हारे काफिले के साथ पूरी कायनात किस तरीके से
31:32
Speaker A
सजदा कर रही थी। सारे इधर हैं। तीन दफा उसने पूछा जाहिर है जितने भी लोग थे वो सब के सब मौजूद थे। फिर अचानक अबू तालिब ने कहा कि हां मेरा भतीजा है मगर वो तो भी बच्चा है। वो
31:47
Speaker A
बाहर ऊंटों की रखवाली कर रहा है हमारी। और ईसाई ने ऐसे पकड़ा अपना हाथ की माथे पे कि तूने क्या किया? तू अब बता रहा है मुझे लेके जा। और बाहर लेके गया तो अल्लाह के नबी ससल्लम ऐसे ऐसे बैठे हुए
32:03
Speaker A
थे और वो जिस तरीके से रोया है ना मेरे नबी को देख के तुम्हें पता भी है तुमने किस बंदे को किस काम पे लगाया हुआ है तो अबू तालिब ने कहा इसमें ऐसी क्या बात है ये मेरा अपना बच्चा है मेरे घर का बच्चा
32:14
Speaker A
है हम दिस इज़ इसमें तुम ऐसी क्या खास बात देख रहे हो आप ये वाकया जरा तफसील से पढ़े और अपना आप अपने हवास काबू में रखें तो मुझे बताना अपने आप को समझे। अल्लाह की कसम पाकिस्तानी मुसलमान मदरसे का बच्चा अपनी
32:34
Speaker A
पता नहीं किस एहसास कमतरी में है जब वो इन गैर अल्लाह के पुजारियों के सामने खड़ा होता है। अल्लाह की कसम ये गैर अल्लाह के पुजारी हैं। इनके बुत मैंने खुद देखे हैं। आपको अगर बुत देखने नहीं नजर आ रहे
32:49
Speaker A
या नजर आते हैं और आप घबराते हैं तो फिर आपके भी वो बुत हैं। ये असल में इंस्ट्रक्शन मैनुअल इस मशीन को चलाने का। वो बगैर मैनुअल के चल रहे हैं। आप उनकी मशीन ठीक करने जा रहे हैं। डॉक्टर मरीज से पशेमान है। डॉक्टर
33:06
Speaker A
मरीज के सामने घबरा रहा है। ये माजरा मैं देख रहा हूं इस वक्त पाकिस्तान में। सिर्फ इसलिए वो अंग्रेजी बोलता है। अल्लाह की कसम गलत अंग्रेजी बोलता है पाकिस्तानी। मेरा मजाक उड़ा रहे होते हैं। मैं बाहर स्कूलों में पढ़ो और मैं इधर आके
33:22
Speaker A
देखता हूं। ये तो मुंह टेढ़ा किया होता है। अजीबोगरीब एक्सीडेंट में गलत ग्रामर में बोल रहे होते हैं। ये इनकी इनफरिटी कॉम्प्लेक्स है। अल्लाह की कसम इनके बुत हैं। एक दफा बुत पहचानने की ट्रेनिंग लें। इंसान को देखें
33:36
Speaker A
आपके सामने आठ नौ 10 12 बुत ऐसे नजर आएंगे आपको। इस किताब के अलावा कोई और बुत दिखाने की किताब नहीं है। इससे अगर ये किसी घोड़े को पता चल जाए ना इस किताब में ये जान है। अल्लाह की कसम स्कूलों में
33:48
Speaker A
पढ़ाया करेगा बच्चों को वो। बगैर इस्लाम लाए पढ़ाएगा कि भाई इल्म तो इल्म होता है। लोगों के बुत देखने हैं। अल्लाह की कसम ऐसे भयानक बुत हैं। मुझे नजर आते हैं इसलिए मैं बता रहा हूं आपको। आपको भी नजर
34:03
Speaker A
आएंगे। यह कोई करामत तो नहीं है? ये कोई मोजा तो नहीं है? सहाबी ने क्या कहा था? जब वज़र ने ईरान के वज़र ने कहा था कि तू मेरे करोड़ों रुपए के कारपेट पे अपना ₹2 का नेज़ा लेके सुराख
34:17
Speaker A
करके अंदर आ रहा है। वो भी मेरे खुदा के सामने। तुझे तमीज है मेरे खुदा के सामने जाने की तो सबी ने क्या कहा था इस हो में खड़े हो जरा यह है मेरे साहबी का हुलिया अल्लाह की कसम आज भी इस हुलिए को
34:31
Speaker A
पाकिस्तान के तमामतर हैवानों और घरों में यही सवाल पूछा जाता है अल्फाज़ कुछ और होते हैं कि दाढ़ी रख के आ गए हो टोपी रख के आ गए हो पांच ऊपर किए हुए हैं पेंडु आदमी तुम्हें पता भी है तमीज भी इधर आने की तो
34:46
Speaker A
वो जो जुमला साहबी ने कहा था ना वो नफसियात का जुमला था कि अपने खुदा से कह कि उसके खुदा की तरफ से आया हूं। ये आपका बेसिक डिस्पजीशन है लोगों से बात करने की। इन गैर अल्लाह के पुजारियों
35:02
Speaker A
से बात करने की और अल्लाह की कसम आपके अपने घर वाले भी गैर अल्लाह के पुजारी हो सकते हैं। तरीका क्या है वो भी शेख ने बताया। पहले कपड़े धोने पड़ेंगे। अल्लाह की कसम कपड़े धोने पड़ेंगे। कई कई साल याद रखिएगा मां और बाप
35:17
Speaker A
की जो दावत तब्लीग है ना उनकी जो जो ट्रैक बदलने की तकनीक है जो तकनीक है वो आपके आंसुओं में है। मां-बाप के सामने रोएंगे अल्लाह की कसम वगैरह अल्लाह को छोड़ देंगे। बच्चे के आंसुओं में जो ताकत होती है, मैं बाप
35:33
Speaker A
हूं इसलिए बता रहा हूं आपको। लेक्चर ना देना मां-बाप को। मां-बाप के दिलों का रास्ता उनके पैरों में से है बच्चों के लिए। दिल नरम करें। मां बाप के सामने सिर्फ रोया करें। उनको पता चले पूछे बेटा क्या?
35:46
Speaker A
क्यों रोते हो? तो बताएं उनको कि मेरे लिए इतनी बड़ी सजा ये नहीं है कि मुझे अल्लाह दोज़ख में जला रहा हो। मेरे लिए सजा है कि मेरी मां को मेरे सामने दोज़ख में जला रहा हो। इन आंसुओं से मांओं ने गैर अल्लाह के
36:00
Speaker A
और छोटे-छोटे शर्क छोड़ने। हम सबको पता है पाकिस्तानी करते हैं। ये लेक्चर देने की औकात नहीं होती। मां-बाप को बच्चों की इतनी औकात नहीं है कि और बापों को लेक्चर दिया करें। आप अपने छोटों को लेक्चर दिया करें। हम अपने अपने
36:13
Speaker A
हम असरों को लेक्चर दिया करें। मां के पैर में और बाप के पैर में अपने आंसू बहाया करें। ऐसे पिघलेंगे। बहरहाल ये तो मां-बाप की बात है। आपकी जो बेसिक नफ्सियात है। मैं खुलेआम बताने वाला बंदा हूं। मदरसे के
36:32
Speaker A
बच्चों से जितनी उम्मीद है जाहिर है किसी और से उम्मीद नहीं हो सकती। मस्जिद वालों से उम्मीद लगाऊं या मंदिर वालों से मगर अल्लाह की कसम मस्जिदों में बुत घुस चुके हैं हमारे। वो बुत आपने निकालने हैं। पहले अपनी गारा हिरा में तो जाए ना
36:49
Speaker A
हम। पहले अपने बुत मैं तलाश कर लूं। कि भाई मैं मैं किधर का उम्मती बनता फिर रहा हूं। मैं भी तो सोचूं कि मैं किधर किधर कमजोर हो जाता हूं आके और किस एहसास में मैं कमजोर होता हूं। क्या वह एहसास कमती तो
37:04
Speaker A
नहीं है? इसलिए जब भी जब भी कोई दाढ़ी वाला, टोपी वाला, कुल्ले वाला, दीन वाला, बुखारी वाला, कुरान वाला बंदा आए। मैं आपको दूर की बात नहीं बताता हूं। मेरे स्कूल में ना जो मैथमेटिक्स के करिकुलम के हेड है ना उन्होंने कंसलटेंट
37:24
Speaker A
रखे हुए थे इंडिया के थे। अभी की बात बता रहा हूं। उनसे जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि इंडिया में स्कूल में ज्यादा पुरानी बात नहीं 20 साल पुरानी बात है। कोई स्कूल में जब बच्चा इधर-उधर कोई
37:40
Speaker A
शरारत करता था तो हम स्कूल के अंदर यह आम बात थी कि किसी मुसलमान लड़के से पूछ लो किसने की है। मुसलमान झूठ नहीं बोलता। यह इंडियन प्रोफेसर मुझे बता रहा है जो मुसलमान नहीं है। कहता है तुम्हें 20 30 सालों में तुमने
37:57
Speaker A
क्या किया कि जब भी कुछ चोरी होती है हम अब यही सोचते हैं कि मुसलमान लड़के को ढूंढ लो इसी ने की होगी अपना ब्रांड रिपजीिशन करना पड़ेगा ब्रांड रिपजीिशन का मतलब पता है अपनी आइडेंटिटी का जो मारका है ना मारका उसकी
38:12
Speaker A
डेफिनेशन लोगों के अंदर ज़हनों में सलाहियत करने के लिए कंसिस्टेंसी लानी है| 100 बस 100 हर शहर से 100 ऐसे मिसाले कायम होना शुरू हो जाए कि ये किरदार नहीं हिलने देता भाई क्या नाम है आपका मोहम्मद तल्हा
38:24
Speaker A
मोहम्मद तल किरदार नहीं लेता। यह 100 तो इधर बैठे हुए खलीफ। अल्लाह की कसम फैसला के इम्रेशन बदलने के लिए 100 से भी कम की जरूरत होती है। मिसाल लेकिन एक दूसरे के दिलों में रकम करनी जरूरी है। कंसिस्टेंसी
38:36
Speaker A
से तीन चार पांच साल आप तो तीन दिन नमाज़ पढ़े तो पूरा मोहल्ला आपको मौलवी कहना शुरू कर देता है। सोचें जरा। इतनी जल्दी इंसान ताबे होते हैं हक़ के। इतनी जल्दी कंसिस्टेंसी के मुतई होते हैं। यह मेरी बातों को लाइट मत दीजिएगा। मैनुअल
38:57
Speaker A
आपके पास है। अगर फिर भी आप एहसास कंपनी में हैं और लोगों की अंग्रेजी से या लोगों की किसी ऐसी दुनियावी चीज से आप हल्का सा भी घबरा रहे हैं तो आप अभी तैयार नहीं हुए। कोई बुत अंदर छुपाया हुआ है आपने
39:14
Speaker A
अपने अंदर। उस बुत को तोड़ना कोई मुश्किल काम नहीं है। सिर्फ एक सीरा की किताब उठा लें। जिसने सीरा नहीं पढ़ी इसलिए मैं कहता हूं उसको कुरान समझ ही नहीं आ सकता। एक भी आयत दिखाएं मुझे गैर अल्लाह
39:31
Speaker A
के निजाम में मुसलमान कैसे रहे? कोई एक आयत है ऐसी? तो हम कैसे रह रहे हैं? कुरान हम पे अप्लाई कैसे हो रहा? हम तो गैर अल्लाह के इंतजाम में है। इसका मतलब है हम इ्तमाई तौर पर भी एहसास कंपनी में आए हुए
39:46
Speaker A
हैं। यह निजाम कैसे बदलेगा? एक मुसलमान की ब्रांड आइडेंटिटी क्लियर हो जाएगी। ब्रांड आइडेंटिटी सिंपल है। ये है ये मेरा नबी ये उसके इरशादात ये मेरा कुरान, मेरा रब के इशारा ये ब्रांड आइडेंटिटी है। हमारे पास कोई तीसरी किताब है भी नहीं। हमारे पास
40:02
Speaker A
दूसरी भी नहीं है। कुरान ही की शरा बुखारी है। कुरान ही की तफसीर बुखारी है। यह कुरान पाक की किसी भी एक आयत को गैर अल्लाह के अंदर अप्लाई करके दिखाएं। आपको समझ आ जाएगी मैं क्या कह रहा हूं। कोई भी
40:15
Speaker A
एक आयत पकड़े और समझे कि बाततिल का इंतजाम निजाम जारी है। उसमें ये आयत का के अहकाम पूरे कैसे करूं? कर ही नहीं सकते। बहरहाल ये तो एप्लीकेशन की बात है। मैं इस सक्सेस फिलॉसफी और साइकोलॉजी की बात बता रहा हूं। नसियात समझे। अगर आपको
40:33
Speaker A
इस्लाम पे नाज़ नहीं है तो यह काम नहीं हो सकेगा। अपने ईमान पे गुरूर करें ना करें वो अल्लाह आपका और आपका मामला मगर नाज़ करें। यह मेरा और आपका मामला है। ये मेरा और आपका मामला है। मैं कनाडा
40:54
Speaker A
में था ना तो वहां पे ये कादियानियों की बड़े डिबेट्स होती है ना। तो मुझे हमेशा तीसरे चौथे कादनी से मिल कह रहा था यार मुझे एक बात तो बहुत ही अच्छी लगती है आप लोग गलत है या सही है चले वो तो बहस में
41:04
Speaker A
मगर आपको फक्र बहुत है अपने कादियानी होने पे काश मेरे मुसलमान बच्चों को उस तरीके से फक्र होता गोरे के सामने रूस के सामने अमेरिका के सामने इंडिया के सामने काश इस तरह हमें फक्र होता समझ रहे हैं मेरी बात इसलिए ये कभी
41:25
Speaker A
भी ना सोचें एक टैंक की एक छोटी सी गाड़ी से लड़ाई हो रही थी। जब एक मुसलमान इल्म रखते हुए किसी आम इंसान से बात कर रहा होता है। चाहे वो जिस मर्जी कैमब्रिज का प्रोफेसर हो। एक टैंक की लड़ाई हो रही
41:36
Speaker A
होती है एक आम गाड़ी से। इसलिए मेरे खाली लेक्चर से कुछ होना नहीं है। मैं अभी बता दूं। मुझे इस बात का पता है नफसियात इस तरह काम नहीं करती। बार-बार एक दूसरे की तकवियत के लिए एक दूसरे को
41:48
Speaker A
याद कराया करें कि सहाबी ने कहा था अपने रब से क्या है? उसके रब की तरफ से आया हूं। तो आप इन तमाम छोटे-छोटे खुदा है ना उनके खुदा की तरफ से रिप्रेजेंटेटिव बन चुके हैं। ऐसे नहीं खलीफातुल अर्द का
42:00
Speaker A
टाइटल मिलेगा आपको। यह कुरान से मिलेगा। इसके अलावा कोई और किताब नहीं जो खलीफातु बनाती है। वरना हर नौकरी करेंगे उधर बॉस बनने की ख्वाहिश होगी आपकी नफ्सियात है। अल्लाह ताला ने दुनिया का बॉस बना दिया आपको। खुदा की कसम दुनिया का बॉस बना
42:13
Speaker A
दिया। दुनिया के किसी भी सीईओ के सामने तारिक जमील साहब के देख ले। आपको पता चल जाएगा। वो बिछ रहा होगा। उसको पता होगा भाई अंदर से मैं पूरी तरीके से नंगा हो चुका हूं क्योंकि इसको तो पता है सही गलत
42:26
Speaker A
की तमीज यह तो मुझे देख के पहचान लेगा मेरे दूसरे जुमले से इसको पता चलगा किधर किधर मेरा बुत छुपा हुआ है जिस तरीके से शेख के सामने लोगों को अपने बुत नजर आते हैं आपके सामने भी लोगों
42:38
Speaker A
को अपने बुत नजर आने चाहिए ना इतनी आसान सी बात होती है मसला हुआ कि आपने बस अपने शाने झुकने नहीं देने गैर अल्लाह के सामने मैं फिर बता दूं अगर आपने सही तरीके से इस्लाम प्रेजेंट नहीं करना वही अपने तक रखें फिर कोई बात
42:57
Speaker A
नहीं मगर अगर प्रेजेंट करना है तो वीक तरीके से ना प्रेजेंट कर देना हर शहर में पाकिस्तान ने मुझे रोड़े पड़े हैं कि मियां तू तो बयान ऐसा करता है कि तू ही हक है। मैंने कहा मैं बयान करता
43:09
Speaker A
हूं कि यही हक है। मैं ही हक नहीं हूं। यही हक है। अगर तुम्हें मैं हल्की सी भी सरजनिश करूंगा ना तो तुम उसी फ्रैक्चर में से मेरे अंदर दाखिल हो जाओगे। मैं जानता नहीं हूं। इब्लीस की ताकत क्या
43:23
Speaker A
है? किसी भी मौके पर शेक नहीं होना आपने कि हक किसके पास है? हक सिर्फ अल्लाह उसका रसूल है। बस जब आपको पता हो कि अल्लाह और उसके रसूल आपको बैक कर रहे हैं फिर आप टैंक हैं। रौंदते हुए चले जाएंगे आप। मगर लोगों को
43:39
Speaker A
जिताने के लिए हराने के लिए नहीं। समझ रहे मैं आपको एहसास है कमतरी से या आपको मेरे से बेहतर पता है कि आपस में डिस्कशन में लोग एक दूसरे के सामने अपनी कमतरी का एहसास कैसे जाहिर करते हैं दोस्त करते हैं
43:51
Speaker A
एक दूसरे के सामने वहां पे पकड़ लिया करिए यह है वो बुत आइंदा से ये गेम रोज खेला करें एक दूसरे के सामने किधर है मेरे बुत तू शनाख कर क्योंकि दूसरा बंदा अच्छे तरीके से बाहर से देख रहा होता है असली
44:04
Speaker A
दोस्त वही है जो आपके बचपन से ही आपके बुत निकाल दे कि यार यहां पर तो तू इधर सर बस यहां पर तू सजदा कर चुका है अल्लाह हम सबको उस क्लेरिटी से उस शफाफ आईने की तरह हमारे दिलों को कुरान
44:21
Speaker A
से और हदीस से सीरा से और सुन्नत से मुनवर करे। हम सबको उस एहसास के अंदर लेके आए जिस पे हजरत हुजैफा बिन जमान उस एहसास में थे जब उनके भतीजे ने कहा था कि चाचा जी आपने कोई खास मोहब्बत नहीं की अपने नबी
44:36
Speaker A
से। हमारे दौर में होते ना तो हम बताते आपको तो हुजैफा बिन जमान ने आगे से क्या कहा था कि भतीजे बैठ तुझे बताऊं मोहब्बत कैसे की है हमने दूर बैठ के बातें करना आसान होता है और उन्होंने क्या वाकया
44:50
Speaker A
सुनाया था गवा अज़ाब में जब अल्लाह के नबी ससल्लम ने आवाज लगाई थी ना या हुजैफा तो उस वक्त माहौल क्या था और हुजैफा के दिल में क्या गुजरी थी कि अल्लाह ताला ने मुझे कामयाब कर लिया क्यों
45:04
Speaker A
तकलीफ से गुजरना था भाई तकलीफ में कामयाबी की तकमील को मोहब्बत कहते हैं। उस वक्त अबू सुफियान के खेमे में रात के वक्त अकेले जाना था और दुश्मन का कायद बन के जाना था। कबीले का सरदार की एक्टिंग
45:19
Speaker A
करनी थी। सोचे हुजैफा के ऊपर कि हुजैफा रदी अल्लाह ने क्या वाकया सुनाया अपने भतीजे को कि तू तुझे पता भी है मोहब्बत क्या होती है?
45:30
Speaker A
तुझे अब तख्त में मिला है इस्लाम तख्त पे बातें आसान होती हैं। हमें अल्लाह के नबी ने जीरो से तख्त पर पहुंचाया है। हम कुछ नहीं थे। हमें अल्लाह ताला ने तख्त पे पहुंचाया। तुम्हें तो इस्लाम मिला ही तख्त पे कि इस तकलीफों से
45:47
Speaker A
गुजर के तख्त मिला है। हमें ताजपशी हुई है मुसलमानों की। वो तकलीफें हमने लेनी छोड़ दी है। इसलिए जमीन पे पड़े हुए हैं हम। हर एरा गैरा हम पे गुजर जाता है। अल्लाह की कसम आज अमेरिका है। कल नहीं
45:59
Speaker A
होगा। कल कोई और गुजर जाएगा। हमने खुद कुछ नहीं करना। जब तक के यह शान हमारे इस्लाम में चौड़ा नहीं होता कि भाई हक तो हमारे पास था। इसलिए हर वक्त एक दूसरे का फीडबैक बन जाए कि किधर है तू कमजोर भाई? ये किधर किस
46:15
Speaker A
बुत को सजदा करके आया? ये जो तकिया कलाम होना चाहिए आपका कि कौन कौन से बुतों को सजदा करता है? अल्लाह के नबी तो 361 सारे के सारे बुत तोड़ के जा चुके हैं। ये तूने नया कहां से बना लिया?
46:29
Speaker A
सो मेरे बच्चों किसी ऐसे कॉम्प्लेक्स में ना आ जाना कि जो उस बंदे को भी ना पता हो कि आप इस कॉम्प्लेक्स में वो मुफ्त में उसको फूक मिली हुई हो। अगर आपने वो उसको फूक दे दी ना तबी भी
46:44
Speaker A
कर ना बशीरम सुना दिया नज़रम भी सुना दूं। अगर आपकी वजह से उसको भूख मिल रही है कि आप कम है और वो ज्यादा है तो आपने उसके फितने में इजाफा किया है। सूर मुताहिना की आयत याद आई है या
46:57
Speaker A
अल्लाह हमें इन कुफ्फार के लिए फितना ना बना दें। कुफ्फार के लिए मुसलमान कैसे फितना बनता है? जब वो राज करता है और मुसलमान ताबे होते हैं। वो समझता है इनका दीन इस काबिल होता तो यह राज करते
47:10
Speaker A
ना। वो अपने दीन को हक़ और आपके दीन को बातिल समझ बैठता है। इस बात ये नफसियात है हमारी। हम खुद उसका फितना बन जाते हैं। सो अगर आप किसी मुसलमान को स्पेशली पाकिस्तान में जिसका आपका इंटरेक्शन होना है उसको
47:23
Speaker A
आपने दे दिया कि यार तू तो बड़ी चीज है तो वो वाकई ये समझेगा कि इस्लाम बड़ी चीज नहीं है। वो बड़ी चीज है। आपने अल्लाह की कसम उसको फितना आप उसका फितना बन गए। अल्लाह के नबी सल्लम ने मैं खत्म करता
47:38
Speaker A
हूं ये बात हदीस से। इरशाद फरमाया कि मेरी मिसाल ऐसी है तुम्हारे सामने कि तुम लोग आग के अलाव की तरफ बढ़े जा रहे हो और मैं तुम्हें पकड़ पकड़ के आग के अलाव से बचा रहा हूं। ये अल्लाह के नबी ससल्लम के लिए
47:50
Speaker A
नहीं था सिर्फ ये तमाम मुसलमानों के लिए था कि हर मुसलमान को पकड़े और आग के अलाव से बचाएं। अगर आपके अंदर एहसास कमती नहीं हुई अल्लाह की कसम नहीं पकड़ सकेंगे आप। चुप करके देखते रहेंगे। बुरा भी समझेंगे।
48:04
Speaker A
मगर बोल नहीं सकेंगे। जब भी लुकनत आएगी समझ लेना कि कोई बुत है उसी वक्त पकड़ लेना बेशक वह वाला मौका हाथ से चला जाए मगर ऐसा मौका दोबारा ना आने पाए ये ट्रेनिंग अपने अंदर अभी डालनी ये सिर्फ और सिर्फ सोच की ट्रेनिंग
48:20
Speaker A
है जो मैं आपको दे रहा हूं और इतनी उम्र हैं आपकी कि आपको पता चल जाएगा और पता चल भी चुका होगा कि मैं क्या कह रहा हूं। अल्लाह ताला हम सबको अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत की वो वो वाला जज्बा जो हमें
48:32
Speaker A
जानते हो या ना जानते हो हमारे दिलों में डाल दे। या अल्लाह हमें वो वाला जज्बा दे कि जिस पे अल्लाह के रसूल सल्लम के साथ सबी जिस तरीके से जान नछावर करने में एक सेकंड भी नहीं लगाते थे। सोच से पहले दिल
48:44
Speaker A
हाजिर होता था। या अल्लाह हमारा भी दिल वैसा ही कर दे। याद रखिएगा मैं फिर बता दूं आपको। आपके अलावा इस्लाम पाकिस्तान में किसी और जमात से नहीं आना। किसी और तबके से नहीं आना। दीनी तबके से ही आना है।
48:58
Speaker A
दीनी जमातों से ही आना है। उन्होंने मंतक और लॉजिक को सजदा किया हुआ है। आपने लॉजिक के खुदा को सजदा किया हुआ है। ये दो अलग-अलग खुदा चल रहे हैं। तो पूरी ताकत से आए। पूरी ताकत से आए। इस
49:15
Speaker A
ताकत में ना कमी आने देना। इधर ना कोई छींक आ जाए आपको। शिकार के सामने आ गए अचानक आप घबरा जाएं। अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातू सलाम रसूल करीम अजीजम साहिल मेरे बच्चों की तरह है। 42 साल का है। मैं 70 साल का हूं तो यूसुफ 40 साल का
49:44
Speaker A
है। बेटों की तरह है। यह जो इसने मज़मून बयान किया तो सर मुझे चंद वाक्यात याद आए हैं। वह मैं आपको सुना के फिर करता हूं। हजरत हबीब बिन ज़द रज़ अल्लाह ताला अनो को अल्लाह के नबी ने मुसलमा कजाब के पास
50:08
Speaker A
भेजा कि तू ईमान ले आ। तो उस वक्त एक कानून था। अब भी है। के कासिद को कत्ल नहीं किया जाता था। उस कमबख्त ने उनको पकड़ लिया। और कहा क्या मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं? उन्होंने फरमाया है
50:39
Speaker A
कहा रसूल्लाह कहने लगे ला अस्मा मैं अल्लाह का रसूल हूं। मुझे सुनता नहीं है। तो उसने यह हाथ काट दिया। जिंदा का हाथ काटना उसी पे उसी को पता है जिस पे बीत जाता है। फिर कहने लगा मोहम्मद अल्लाह का रसूल हैं।
51:08
Speaker A
कहने लगे हां। मैं अल्लाह का रसूल हूं। कहा मैं सुनता नहीं। तो उसने यह हाथ काट दिए। फिर उसने कहा मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं। मैं अल्लाह का रसूल हूं। कला अस्मा तो उसने पांव काट दिया। खुद काट रहा था
51:32
Speaker A
बदबख्त। उस वक्त तो 150 साल उसकी उम्र थी। फिर उसने यही दोहराया। फिर उन्होंने फरमाया ला अस्मा तो उसने पांव भी काट दिया। दोनों हाथ भी कट गए। दोनों पांव भी कट गए और इतना भी उनकी जुबान से नहीं
51:56
Speaker A
निकला। फिर शुरू हो गया। बोलो मैं अल्लाह का रसूल हूं। मुझे सुनता ही नहीं। तो उसने गोश्त का टुकड़ा उतार दिया खंजर से। फिर कहा मैं अल्लाह का रसूल हूं। मुझे सुनता ही नहीं। फिर एक और टुकड़ा उतार
52:15
Speaker A
दिया। इस तरह करते उनके पूरे जिस्म से उनके गोश को
Topics:मौलाना तारिक जामिलसाहिल अदीमइजहार मोहब्बतरिश्तेइस्लामिक शिक्षादीन की दावतमाफीमोहब्बतनबी मोहम्मदसमाज और रिश्ते

Frequently Asked Questions

इस वीडियो में मौलाना तारिक जामिल ने रिश्तों के बारे में क्या मुख्य बात कही?

मौलाना ने रिश्तों में इजहार मोहब्बत की अहमियत पर जोर दिया और कहा कि बिना मोहब्बत के इजहार के रिश्तों में बाउंडिंग नहीं होती। माफी मांगना और झुक जाना भी जरूरी है।

मौलाना ने दीन की दावत के बारे में क्या सलाह दी?

उन्होंने कहा कि दावत का मकसद लोगों को जन्नत की तरफ ले जाना होना चाहिए, न कि उन्हें हराना। दीन की दावत मोहब्बत और संयम से करनी चाहिए।

साहिल अदीम के साथ मुलाकात में क्या चर्चा हुई?

मौलाना ने साहिल अदीम के साथ दीन की गहराई, व्यवहारिक पहलुओं और मोहब्बत के इजहार पर चर्चा की, जिससे युवाओं को सही मार्गदर्शन मिले।

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