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Devon Ke Dev Mahadev | Kyun Daksh Prajapati ne diya Sati ko dand? देवों के देव महादेव Episode 1,2,3

देवों के देव महादेव में प्रजापति दक्ष के यज्ञ और सती के प्रति उनके कठोर निर्णय की कथा।

Key Takeaways

  • प्रजापति दक्ष का यज्ञ और मूर्ति स्थापना धार्मिक मत और विचारधारा का प्रतीक है।
  • सती के रुद्राक्ष पहनने को परिवार में विरोधी मत के रूप में देखा जाता है।
  • प्रजापति दक्ष की कर्तव्यपरायणता सती को दंडित करने का कारण बनती है।
  • सप्त ऋषि यज्ञ में शामिल होकर भी दोषपूर्ण मूर्ति स्थापना पर असहमत हैं।
  • यह कथा भविष्य में होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं का संकेत देती है।

What the video covers

  • वीडियो में प्रजापति दक्ष के यज्ञ की तैयारी और मूर्ति स्थापना का वर्णन है।
  • सती और रुद्राक्ष के संदर्भ में पारिवारिक और धार्मिक मतभेद दिखाए गए हैं।
  • प्रजापति दक्ष भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापना को अपने मत का प्रतीक मानते हैं।
  • सती को रुद्राक्ष पहनने से मना किया जाता है, जो विरोधी मत का प्रतीक है।
  • प्रजापति दक्ष की कठोरता और कर्तव्यपरायणता के कारण सती को दंडित करने की संभावना जताई गई है।
  • सप्त ऋषि यज्ञ में शामिल होते हैं, लेकिन कुछ ऋषि दोषपूर्ण मूर्ति स्थापना से असहमत हैं।
  • प्रजापति दक्ष का यज्ञ और मूर्ति स्थापना भविष्य की घटनाओं का संकेत देती है।
  • सामाजिक और धार्मिक नियमों के पालन पर बल दिया गया है।
  • वीडियो में धार्मिक गीत और मंत्रों के माध्यम से माहौल निर्मित किया गया है।
  • सती और प्रजापति दक्ष के बीच भावनात्मक और धार्मिक टकराव को दर्शाया गया है।

Answers

Questions about this video

प्रजापति दक्ष ने सती को दंड क्यों दिया?

प्रजापति दक्ष ने सती को दंड इसलिए दिया क्योंकि उसने रुद्राक्ष पहन लिया था, जो उनके मत के अनुसार वर्जित था। यह उनके धार्मिक और पारिवारिक नियमों का उल्लंघन माना गया।

प्रजापति दक्ष का यज्ञ किस लिए था?

प्रजापति दक्ष का यज्ञ भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापना के लिए था, जो उनके मत और विश्वास का प्रतीक था। यह यज्ञ सामाजिक और धार्मिक नियमों की स्थापना का भी प्रतीक था।

सप्त ऋषि प्रजापति दक्ष के यज्ञ में क्यों असहमत थे?

सप्त ऋषि प्रजापति दक्ष द्वारा स्थापित अधूरी और दोषपूर्ण मूर्ति को स्वीकार नहीं करते थे, इसलिए वे यज्ञ में शामिल होकर भी इस कार्य के भागीदार नहीं बनना चाहते थे।

Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00
Speaker A
अ।
01:49
Speaker A
[संगीत]
02:17
Speaker A
[संगीत]
02:33
Speaker A
[संगीत]
02:54
Speaker A
करपूर गौरम करुणावतारं संसार सारम भुजगेंद्र हारम।
04:28
Speaker A
करपूर गौरम करुणा अवतारम संसार सारम गुज केंद्र हारम।
05:57
Speaker A
सदा वसंतम हदर विंदे सदा वसंतम।
06:39
Speaker A
अरविंद भव भवानी सतम नमामि।
07:30
Speaker A
भव भवानी सतम नमाम।
08:01
Speaker A
[संगीत]
08:30
Speaker A
दीदी दीदी देखो मुझे क्या मिला।
09:06
Speaker A
सती है किसे? अरे पर क्यों? कितना सुंदर है।
09:35
Speaker A
तू जानती भी है यह क्या है?
10:18
Speaker A
यह रुद्राक्ष है।
10:58
Speaker A
हमारे विरोधी मत के लोग पहनते हैं इसे।
11:56
Speaker A
तो क्या हुआ? इसे रख लेने से मैं भी विरोधी मत की नहीं हो जाऊंगी सती।
12:51
Speaker A
रुद्राक्ष को स्पर्श करना भी हमारे लिए वर्जित है।
13:47
Speaker A
यदि ऐसा होता तो पिताजी मुझे अवश्य बताते।
14:32
Speaker A
सती तू इसे फेंक है या नहीं?
14:54
Speaker A
कुछ अपना के त्याग देना सती का स्वभाव नहीं।
15:19
Speaker A
पिताजी के लाड़ प्यार ने बिगाड़ दिया है इसे सती।
16:14
Speaker A
हो सकता है पिताजी ने तुम्हें यह पहले ना बताया हो।
16:47
Speaker A
और इस कारण व तुम्हें क्षमा भी कर दे।
17:11
Speaker A
परंतु इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम्हारी इस भूल से उन्हें कष्ट अवश्य होगा।
17:34
Speaker A
आदिति तुझे यहां रहकर इसके साथ समय नष्ट करना है तो कर।
21:52
Speaker A
वहां पिताजी मूर्ति अभिषेक के लिए हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे।
23:12
Speaker A
[संगीत]
23:44
Speaker A
पिताजी के दुख का कारण मैं बनू ऐसा संभव ही नहीं।
24:17
Speaker A
[संगीत]
24:49
Speaker A
[संगीत]
25:15
Speaker A
[संगीत]
26:03
Speaker A
शवा वायव स्पाय वस् देवो वसता पपय शजन माय रमण।
27:48
Speaker A
पायम देव भाग पूज स्वस्ति प्रजापति रमया।
28:11
Speaker A
[संगीत]
28:29
Speaker A
[संगीत]
29:32
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
30:05
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
31:19
Speaker A
सप्त ऋषि पधार रहे हैं।
31:42
Speaker A
इस शुभ अवसर पर सप्त ऋषियों की उपस्थिति मेरे लिए सम्मान की बात है।
32:47
Speaker A
मूर्ति के अनावरण की अनुमति दे मुनिवर।
33:15
Speaker A
अनुमति है।
35:28
Speaker A
प्रजापति आप अपने देश में सफल।
37:32
Speaker A
[संगीत]
38:16
Speaker A
हो।
39:23
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
40:01
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
40:24
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
40:44
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
41:13
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
41:43
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
42:12
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
42:40
Speaker A
जय प्रजापति दक्ष की।
44:10
Speaker A
जय।
48:29
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
51:44
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
52:13
Speaker A
[संगीत]
52:38
Speaker A
प्रजापति ने यह क्या कर दिया है?
53:05
Speaker A
इस अधूरी मूर्ति की स्थापना कैसे होगी?
53:33
Speaker A
प्रजापति दक्ष की।
54:07
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
54:48
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
55:16
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
55:49
Speaker A
जीवित रहने के लिए भोग तो पशु बक्षी भी करते हैं।
57:43
Speaker A
अपने हित अपने स्वार्थ के लिए वे भी जी लेते हैं।
58:04
Speaker A
मनुष्य एक ऐसा जीव है जिसे ईश्वर ने अपने हित के साथ-साथ संसार की भलाई और औरों के उद्धार के बारे में चिंतन करने की क्षमता प्रदान की है।
58:26
Speaker A
इसी कारण सभी विधि विधान सामाजिक और निजी जीवन व्यतीत करने की हर रीति नीति इसकी स्थापना करके मैंने इस सभ्यता की स्थापना की है।
59:11
Speaker A
किंतु आज जो मैं कार्य संपन्न करने जा रहा हूं वो मेरी कर्तव्य परायणता की पराकाष्ठा होगी।
59:30
Speaker A
उस भव्य मंदिर का निर्माण और उसमें भगवान श्री विष्णु की मूर्ति की स्थापना।
59:54
Speaker A
यह सदैव प्रतीक होगा हमारे मत का, हमारे विश्वास का, हमारी विचारधारा का।
61:17
Speaker A
और इस सत्य का देवों में देव यदि कोई है तो वो भगवान श्री विष्णु।
61:39
Speaker A
केवल भगवान विष्णु ही पूजनीय है।
62:02
Speaker A
केवल भगवान विष्णु ही दर्शनीय है।
62:39
Speaker A
उसके अतिरिक्त और कोई नहीं।
63:07
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
63:39
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
64:11
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
64:39
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
65:34
Speaker A
दक्ष की जय।
66:06
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
66:37
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
67:41
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
68:12
Speaker A
मूर्तिकार तुमने बहुत सुंदर मूर्ति बनाई है।
68:40
Speaker A
तुम्हारी कला और तुम्हारा समर्पण सराहनीय है।
69:09
Speaker A
[संगीत]
69:39
Speaker A
नहीं प्रजापति, इस मूर्ति को बनाने का सौभाग्य ही मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार है।
70:08
Speaker A
प्रणाम।
70:37
Speaker A
[संगीत]
71:15
Speaker A
प्रजापति।
72:02
Speaker A
प्रजापति मूर्ति के प्रस्थान का समय हो चुका है।
72:25
Speaker A
[प्रशंसा]
73:39
Speaker A
[संगीत]
74:26
Speaker A
यदि अनुमान होता कि प्रजापति ऐसी दोषपूर्ण मूर्ति की स्थापना करने वाले हैं तो इसके अनावरण में सम्मिलित ही नहीं होते।
75:03
Speaker A
क्षमा कीजिएगा ऋषि कश, किंतु मैं इस पाप का भागीदार नहीं बन सकता।
75:31
Speaker A
मुझे आज्ञा दीजिए ऋषिवर।
76:03
Speaker A
इस प्रकार प्रजापति दक्ष के इस यज्ञ से आपका चले जाना उचित नहीं है।
76:38
Speaker A
काल के जिस समय खंड पर हम इस प्रक्रिया के साक्षी हैं, अवश्य ही यह भविष्य की किसी महान घटना का संकेतक है।
77:47
Speaker A
[संगीत]
78:10
Speaker A
[संगीत]
78:33
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
79:00
Speaker A
भगवान विष्णु की।
79:27
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
80:18
Speaker A
भगवान विष्णु की जय।
80:41
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
81:08
Speaker A
भगवान विष्णु की।
81:32
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
81:54
Speaker A
भगवान विष्णु की।
82:30
Speaker A
प्रजापति दक्ष की जय।
Topics:देवों के देव महादेवप्रजापति दक्षसतीरुद्राक्षभगवान विष्णुयज्ञमूर्ति स्थापनाहिंदू धर्मधार्मिक कथाSTAR भारत

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