मेंढक और राजकुमारी की अनोखी कहानी | रोचक लोककथा | #hind… — Transcript

मेंढक और राजकुमारी की अनोखी लोककथा, जिसमें मेंढक एक राजकुमारी से शादी करना चाहता है और अद्भुत घटनाएं घटती हैं।

Key Takeaways

  • सच्चे दिल से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
  • बाहरी रूप से भिन्नता के बावजूद प्रेम और परिवार की अहमियत होती है।
  • धैर्य और आत्मविश्वास से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।
  • अहंकार और संदेह से रिश्ते टूट सकते हैं।
  • लोककथाएं सामाजिक और नैतिक मूल्यों को सरल रूप में प्रस्तुत करती हैं।

Summary

  • एक गरीब पति-पत्नी को संतान की इच्छा होती है और उनकी पत्नी मेंढक के रूप में बच्चा जन्म लेती है।
  • मेंढक बोल सकता है और अपने माता-पिता के साथ रहता है, जो उसे स्वीकार करते हैं।
  • मेंढक राजा के महल जाकर उसकी तीन बेटियों में से एक से शादी करना चाहता है।
  • राजा और उसकी बेटियां मेंढक से शादी करने को तैयार नहीं होते।
  • मेंढक अपनी हंसी से महल को हिला देता है और राजा को शादी के लिए मजबूर करता है।
  • राजकुमारी मेंढक से शादी के लिए राजी नहीं होती और उसे चोट पहुंचाने की कोशिश करती है।
  • मेंढक राजकुमारी को वापस राजा के पास छोड़ देता है और दूसरी बेटी मांगता है।
  • राजा फिर भी शादी के लिए तैयार नहीं होता, जिससे मेंढक अपनी तेज आवाज़ से बाढ़ और तबाही मचाता है।
  • कहानी में मेंढक की असाधारण शक्तियों और राजा के डर का चित्रण है।
  • यह लोककथा मेहनत, परिवार, और असाधारण घटनाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देती है।

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00:00
Speaker UNKNOWN
बहुत पुरानी बात है। एक पहाड़ की चोटी पर एक गरीब पति-पत्नी रहते थे।
00:06
Speaker UNKNOWN
रोटी कमाने के लिए वे आलू, टमाटर की खेती करते थे।
00:10
Speaker UNKNOWN
उन्होंने अपनी खेती पहाड़ से नीचे मैदानों में बना रखी थी।
00:15
Speaker UNKNOWN
दोनों पति-पत्नी बहुत मेहनती थे।
00:18
Speaker UNKNOWN
धीरे-धीरे उनकी उम्र बढ़ रही थी और ताकत कम होती जा रही थी।
00:23
Speaker UNKNOWN
वे दोनों संतान की बहुत इच्छा रखते थे।
00:27
Speaker UNKNOWN
एक दिन दोनों आपस में बात कर रहे थे, कितना अच्छा होता अगर हमें भी एक बच्चा होता।
00:34
Speaker UNKNOWN
जब हम बूढ़े हो जाते तो वह हमारे खेतों की रखवाली करता और राजा को लगान भी चुकाता।
00:40
Speaker UNKNOWN
बुढ़ापे में वह हमें हर तरह से आराम देता और हम अपनी झुकी हुई कमर को कुछ देर आंगन में चूल्हे के पास आराम से बैठकर सीधा कर पाते।
00:50
Speaker UNKNOWN
उन दोनों ने सच्चे दिल से नदी और पहाड़ों के देवता से प्रार्थना की।
00:56
Speaker UNKNOWN
थोड़े दिनों बाद किसान की पत्नी गर्भवती हुई।
00:59
Speaker UNKNOWN
9 महीने बाद उसे बच्चा हुआ, लेकिन वह आदमी का बच्चा नहीं।
01:05
Speaker UNKNOWN
बल्कि एक मेंढक था, जिसकी लाल आंखें चमक रही थी।
01:09
Speaker UNKNOWN
बूढ़ा बोला,
01:10
Speaker UNKNOWN
यह कैसी अजीब बात है।
01:12
Speaker UNKNOWN
यह तो मेंढक है।
01:14
Speaker UNKNOWN
इसकी लाल आंखें देखो कैसी चमक रही है।
01:17
Speaker UNKNOWN
इसे घर में रखने का क्या फायदा।
01:20
Speaker UNKNOWN
चलो इसे बाहर फेंक आते हैं।
01:22
Speaker UNKNOWN
लेकिन पत्नी का मन उसे फेंकने को नहीं हुआ।
01:26
Speaker UNKNOWN
उसने कहा,
01:28
Speaker UNKNOWN
भगवान हम पर दयालु नहीं है।
01:30
Speaker UNKNOWN
उन्होंने हमें बच्चे की जगह एक मेंढक दिया है, लेकिन अब तो यही मेंढक हमारा बच्चा है।
01:36
Speaker UNKNOWN
इसलिए हमें इसे फेंकना नहीं चाहिए।
01:38
Speaker UNKNOWN
मेंढक मिट्टी और तालाबों में रहते हैं।
01:40
Speaker UNKNOWN
हमारे घर के पीछे जो छोटा तालाब है, उसमें इसे छोड़ आओ वही रह जाएगा।
01:45
Speaker UNKNOWN
बूढ़े ने मेंढक को उठाया।
01:47
Speaker UNKNOWN
जब वह उसे ले जाने लगा तो मेंढक बोला,
01:50
Speaker UNKNOWN
मां, पिताजी मुझे तालाब में मत डालिए।
01:52
Speaker UNKNOWN
मैं आदमियों के घर में पैदा हुआ हूं।
01:55
Speaker UNKNOWN
और मुझे आदमियों की तरह ही रहना चाहिए।
01:58
Speaker UNKNOWN
जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो मेरी शक्ल बिल्कुल आप जैसी हो जाएगी।
02:02
Speaker UNKNOWN
और मैं भी आदमी बन जाऊंगा।
02:04
Speaker UNKNOWN
बूढ़ा हैरान हो गया।
02:05
Speaker UNKNOWN
उसने अपनी पत्नी से कहा,
02:07
Speaker UNKNOWN
यह कितनी अद्भुत बात है।
02:09
Speaker UNKNOWN
यह तो बिल्कुल हमारी तरह बोलता है।
02:11
Speaker UNKNOWN
लेकिन जो कुछ उसने कहा है वह हमारे लिए तो अच्छा ही है।
02:15
Speaker UNKNOWN
उसकी पत्नी ने कहा,
02:17
Speaker UNKNOWN
भगवान ने जैसे-तैसे तो हमें यह दिन दिखाए हैं।
02:20
Speaker UNKNOWN
अगर यह बोलता है तो जरूर कोई अच्छा बच्चा होगा।
02:23
Speaker UNKNOWN
हो सकता है कि इस समय किसी के श्राप से मेंढक बन गया हो।
02:27
Speaker UNKNOWN
नहीं,
02:28
Speaker UNKNOWN
इसे आप घर में ही रहने दीजिए।
02:30
Speaker UNKNOWN
वे दोनों पति-पत्नी ने मेंढक को अपने साथ ही रख लिया।
02:34
Speaker UNKNOWN
3 साल बीत गए।
02:36
Speaker UNKNOWN
इस बीच मेंढक ने देखा कि उसके माता-पिता कितनी मेहनत करते थे।
02:40
Speaker UNKNOWN
एक दिन उसने अपनी बूढ़ी मां से कहा,
02:43
Speaker UNKNOWN
मां, मेरे लिए आटे की एक रोटी बना दो।
02:46
Speaker UNKNOWN
मैं कल राजा के पास जाऊंगा।
02:48
Speaker UNKNOWN
और उसके सुंदर महल में जाकर उससे मिलूंगा।
02:51
Speaker UNKNOWN
उसकी तीन सुंदर बेटियां हैं।
02:53
Speaker UNKNOWN
उससे कहूंगा कि वह अपनी एक बेटी की शादी मुझसे कर दे।
02:58
Speaker UNKNOWN
मैं उन तीनों में से उससे शादी करूंगा।
03:01
Speaker UNKNOWN
जो सबसे ज्यादा दयावान हो।
03:04
Speaker UNKNOWN
और तुम्हारे काम में सबसे ज्यादा मदद कर सके।
03:08
Speaker UNKNOWN
बेटे, ऐसी मजाक की बात मत किया करो।
03:10
Speaker UNKNOWN
मां ने कहा,
03:11
Speaker UNKNOWN
क्या तुम समझते हो कि तुम्हारे जैसे छोटे और भद्दे जानवर के साथ कोई अच्छा आदमी अपनी सुंदर सी बेटी का हाथ देगा।
03:17
Speaker UNKNOWN
तुम जैसों को तो कोई भी पैर से दबाकर कुचल देगा।
03:20
Speaker UNKNOWN
मां,
03:21
Speaker UNKNOWN
तुम रोटी तो बनाओ।
03:23
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने कहा,
03:24
Speaker UNKNOWN
तुम देखती रहना।
03:26
Speaker UNKNOWN
मैं तुम्हारे लिए एक बहू जरूर लाऊंगा।
03:29
Speaker UNKNOWN
बूढ़ी औरत आखिर राजी हो गई।
03:32
Speaker UNKNOWN
ठीक है, मैं तुम्हारे लिए एक रोटी तो बना दूंगी।
03:34
Speaker UNKNOWN
उसने मेंढक से कहा,
03:36
Speaker UNKNOWN
लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि उसके महल की काम करने वाली नौकरानी तुम्हें भूत-प्रेत समझकर तुम्हारे ऊपर राख ना डाल दे।
03:41
Speaker UNKNOWN
मां,
03:42
Speaker UNKNOWN
तुम बेफिक्र रहो।
03:44
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने जवाब दिया,
03:45
Speaker UNKNOWN
उनकी तो अच्छे लोगों पर भी यह हिम्मत नहीं।
03:49
Speaker UNKNOWN
अगले दिन बूढ़ी औरत ने एक बड़ी सी रोटी बना दी।
03:52
Speaker UNKNOWN
और उसे एक थैले में रख दिया।
03:55
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने थैला अपने कंधे पर लटकाया।
03:59
Speaker UNKNOWN
और कूदता हुआ घाटी के किनारे बसे राजा के महल की ओर चल दिया।
04:05
Speaker UNKNOWN
जब वह महल के दरवाजे के पास पहुंचा।
04:08
Speaker UNKNOWN
तो उसने दरवाजा खटखटाया।
04:10
Speaker UNKNOWN
महाराज, महाराज दरवाजा खोलो।
04:13
Speaker UNKNOWN
राजा ने किसी को दरवाजा खटखटाते सुना और अपने नौकर को बाहर देखने भेजा।
04:19
Speaker UNKNOWN
नौकर हैरान होकर लौटा।
04:21
Speaker UNKNOWN
उसने कहा,
04:22
Speaker UNKNOWN
महाराज, बड़ी अजीब सी बात है।
04:24
Speaker UNKNOWN
एक छोटा सा मेंढक दरवाजे पर खड़ा आपको पुकार रहा है।
04:28
Speaker UNKNOWN
राजा के मंत्री ने कहा,
04:29
Speaker UNKNOWN
महाराज, यह जरूर कोई भूत-प्रेत है।
04:31
Speaker UNKNOWN
इस पर राख डलवा दीजिए।
04:33
Speaker UNKNOWN
राजा राजी नहीं हुआ।
04:35
Speaker UNKNOWN
उसने कहा,
04:36
Speaker UNKNOWN
नहीं,
04:37
Speaker UNKNOWN
रुको।
04:39
Speaker UNKNOWN
यह जरूरी नहीं कि वह कोई भूत-प्रेत ही हो।
04:43
Speaker UNKNOWN
मेंढक पानी में रहते हैं।
04:45
Speaker UNKNOWN
हो सकता है कि वह जल देवता के महल से कोई संदेशा लेकर आया हो।
04:51
Speaker UNKNOWN
जिस तरह देवताओं का स्वागत किया जाता है उसी तरह इसका करो।
04:57
Speaker UNKNOWN
पहले उस पर दूध छिड़क दो।
05:00
Speaker UNKNOWN
इसके बाद मैं खुद देखूंगा कि वह कौन है और मेरे राज्य में किस लिए आया है।
05:06
Speaker UNKNOWN
उसके नौकरों ने ऐसा ही किया।
05:08
Speaker UNKNOWN
मेंढक का उसी तरह सम्मान किया गया जैसे देवताओं का किया जाता है।
05:13
Speaker UNKNOWN
उन्होंने उस पर दूध छिड़का और कुछ दूध हवा में भी उड़ाया।
05:18
Speaker UNKNOWN
उसके बाद राजा खुद दरवाजे पर आ गया और उसने पूछा,
05:22
Speaker UNKNOWN
मेंढक देवता, क्या तुम जल देवता के महल से आ रहे हो।
05:27
Speaker UNKNOWN
हम तुम्हारी क्या सेवा कर सकते हैं।
05:28
Speaker UNKNOWN
मैं जल देवता के महल से नहीं आ रहा हूं।
05:31
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने जवाब दिया,
05:32
Speaker UNKNOWN
मैं तो अपनी ही इच्छा से आपके पास आया हूं।
05:36
Speaker UNKNOWN
आपकी सब लड़कियां शादी के लायक है।
05:39
Speaker UNKNOWN
मैं उनमें से एक से शादी करना चाहता हूं।
05:43
Speaker UNKNOWN
मैं आपका दामाद बनने आया हूं।
05:46
Speaker UNKNOWN
आप मुझे उनमें से किसी एक का हाथ दे दीजिए।
05:50
Speaker UNKNOWN
राजा और उसके सब नौकर मेंढक की इस बात को सुनकर बहुत डर गए।
05:55
Speaker UNKNOWN
राजा बोला,
05:56
Speaker UNKNOWN
तुम कैसी बेतुकी बातें कर रहे हो।
06:00
Speaker UNKNOWN
आईने में जरा अपनी शक्ल तो देखो।
06:03
Speaker UNKNOWN
कितने भद्दे और बदसूरत हो।
06:07
Speaker UNKNOWN
कितने ही बड़े-बड़े महाराजाओं ने मेरी बेटियों से शादी करना चाहा।
06:11
Speaker UNKNOWN
लेकिन मैंने सबको मना कर दिया।
06:15
Speaker UNKNOWN
फिर मैं कैसे एक मेंढक को अपनी बेटी ब्याह दूं।
06:20
Speaker UNKNOWN
जाओ,
06:22
Speaker UNKNOWN
बेकार की बातें मत करो।
06:25
Speaker UNKNOWN
मेंढक बोला,
06:26
Speaker UNKNOWN
इसका मतलब यह है कि आप मुझसे अपनी बेटी की शादी नहीं करेंगे।
06:31
Speaker UNKNOWN
कोई बात नहीं।
06:33
Speaker UNKNOWN
अगर आप मेरी बात इस तरह नहीं मानेंगे तो मैं हंसना शुरू कर दूंगा।
06:38
Speaker UNKNOWN
राजा मेंढक की बात सुनकर गुस्से से लाल हो गया।
06:43
Speaker UNKNOWN
उसने पैर पटक कर कहा,
06:45
Speaker UNKNOWN
मेंढक के बच्चे, तेरा दिमाग खराब हो गया है।
06:49
Speaker UNKNOWN
अगर हंसना ही है तो बाहर निकल जा।
06:52
Speaker UNKNOWN
और जी भर कर हंस।
06:55
Speaker UNKNOWN
लेकिन तब तक मेंढक ने हंसना शुरू कर दिया था।
06:59
Speaker UNKNOWN
उसके हंसने से बड़ी जोर की आवाज हुई।
07:03
Speaker UNKNOWN
धरती कांपने लगी।
07:05
Speaker UNKNOWN
राजा के महल के ऊंचे-ऊंचे खंभे हिलने लगे मानो महल गिरना ही चाहता हो।
07:11
Speaker UNKNOWN
दीवारों में दरार पड़ने लगी।
07:14
Speaker UNKNOWN
सारे आकाश में धूल, रेत, कंकड़ और पत्थर उड़ने लगे।
07:19
Speaker UNKNOWN
सूरज और सारा आकाश अंधेरे से ढक गया।
07:25
Speaker UNKNOWN
चारों ओर धूल ही धूल दिखाई देने लगी।
07:30
Speaker UNKNOWN
राजा के घर सब लोग और नौकर चाकर उछलते फिर रहे थे और अंधेरे में एक दूसरे से टकरा रहे थे।
07:37
Speaker UNKNOWN
किसी को नहीं मालूम था कि वे क्या कर रहे हैं और यह सब क्या हो रहा है।
07:43
Speaker UNKNOWN
आखिर में दुखी होकर राजा ने खिड़की से बाहर अपना सिर निकाला और बोला,
07:48
Speaker UNKNOWN
मेंढक महाशय, अब कृपा करके अपना हंसना बंद कर दीजिए।
07:52
Speaker UNKNOWN
मैं अपनी सबसे बड़ी बेटी की शादी आपके साथ कर दूंगा।
07:55
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने हंसना बंद कर दिया।
07:58
Speaker UNKNOWN
धीरे-धीरे पृथ्वी ने भी कांपना बंद कर दिया और महल, मकान आदि सब अपनी जगह शांत हो गए।
08:04
Speaker UNKNOWN
राजा ने केवल डरकर ही अपनी बेटी मेंढक के हाथों में सौंपी थी।
08:10
Speaker UNKNOWN
उसने दो घोड़े मंगवाए।
08:13
Speaker UNKNOWN
एक अपनी बेटी के लिए और दूसरा उसके दहेज के लिए।
08:18
Speaker UNKNOWN
राजा की बड़ी लड़की मेंढक से शादी करने के लिए बिल्कुल भी राजी नहीं थी।
08:23
Speaker UNKNOWN
उसने अपने पास छिपाकर दो पत्थर के टुकड़े रख लिए।
08:27
Speaker UNKNOWN
जो समय पर काम आ सके।
08:31
Speaker UNKNOWN
मेंढक रास्ता दिखाने के लिए आगे-आगे कूदकर चलने लगा।
08:35
Speaker UNKNOWN
और राजा की सबसे बड़ी लड़की उसके पीछे-पीछे चलने लगी।
08:41
Speaker UNKNOWN
सारे रास्ते वह यही कोशिश करती रही कि उसका घोड़ा कुछ और तेज चले और वह भागते हुए मेंढक को अपने पीछे की टापों के नीचे कुचल डाले।
08:48
Speaker UNKNOWN
लेकिन मेंढक कभी इधर को कूदता और कभी उधर को।
08:55
Speaker UNKNOWN
वह इस तरह चक्कर काटता जा रहा था कि उसे कुचलना राजकुमारी को नामुमकिन लग रहा था।
09:01
Speaker UNKNOWN
आखिर में वह इतनी नाराज हो गई कि एक बार जब मेंढक उसके काफी पास चल रहा था।
09:08
Speaker UNKNOWN
उसने छिपाया हुआ पत्थर का टुकड़ा उसके ऊपर दे मारा।
09:13
Speaker UNKNOWN
फिर वह मुड़कर घर की ओर चल दी।
09:16
Speaker UNKNOWN
वह कुछ ही दूर लौटी होगी कि मेंढक ने उसे पुकारा,
09:20
Speaker UNKNOWN
राजकुमारी, रुको।
09:23
Speaker UNKNOWN
मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं।
09:26
Speaker UNKNOWN
उसने पीछे घूमकर देखा कि मेंढक तो जिंदा खड़ा है।
09:31
Speaker UNKNOWN
वह समझ रही थी कि मेंढक उसके पत्थर के नीचे कुचल गया होगा।
09:36
Speaker UNKNOWN
वह हैरान रह गई।
09:37
Speaker UNKNOWN
और उसने घोड़े की लगाम खींच ली।
09:41
Speaker UNKNOWN
मेंढक उससे बोला,
09:43
Speaker UNKNOWN
देखो, हमारे भाग्य में पति-पत्नी होना नहीं लिखा है।
09:48
Speaker UNKNOWN
अब तुम घर लौट जाओ।
09:51
Speaker UNKNOWN
क्योंकि इसी में तुम्हारी खुशी है।
09:54
Speaker UNKNOWN
और उसने घोड़े की लगाम पकड़ ली और राजकुमारी को घर वापस ले चला।
09:59
Speaker UNKNOWN
जब दोनों राजा के महल के पास पहुंचे तो मेंढक ने राजकुमारी को छोड़ दिया।
10:04
Speaker UNKNOWN
और राजा के पास जाकर बोला, महाराज,
10:08
Speaker UNKNOWN
हम दोनों की आपस में बिल्कुल भी नहीं बनती।
10:12
Speaker UNKNOWN
इसलिए मैं इसे वापस छोड़ने आया हूं।
10:17
Speaker UNKNOWN
आप मुझे अपनी दूसरी बेटी दे दीजिए।
10:20
Speaker UNKNOWN
जो मेरे साथ जाने को तैयार हो।
10:24
Speaker UNKNOWN
तुम कितने बदतमीज हो।
10:26
Speaker UNKNOWN
जरा अपनी हैसियत का तो ख्याल करो।
10:29
Speaker UNKNOWN
राजा ने गुस्से से चिल्लाकर कहा,
10:32
Speaker UNKNOWN
तुम मेरी बेटी को वापस लाए हो।
10:35
Speaker UNKNOWN
इसलिए मैं तुम्हें अपनी दूसरी बेटी कभी नहीं दूंगा।
10:40
Speaker UNKNOWN
जानते हो।
10:41
Speaker UNKNOWN
मैं राजा हूं।
10:43
Speaker UNKNOWN
क्या मजाक है।
10:45
Speaker UNKNOWN
तुम इस तरह मेरी बेटियों में से हर एक को देखना चाहते हो।
10:50
Speaker UNKNOWN
राजा यह कहते-कहते गुस्से से कांपने लगा।
10:54
Speaker UNKNOWN
इसका मतलब यह है कि आप राजी नहीं है।
10:57
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने कहा,
10:58
Speaker UNKNOWN
अच्छी बात है।
11:00
Speaker UNKNOWN
तो मैं चिल्लाना शुरू कर दूंगा।
11:03
Speaker UNKNOWN
राजा ने सोचा कि अगर वह चिल्लाता है तो कोई हर्ज नहीं।
11:07
Speaker UNKNOWN
बस उसका हंसना ही खतरनाक है।
11:11
Speaker UNKNOWN
उसने चिढ़ाते हुए कहा,
11:13
Speaker UNKNOWN
जी भर कर चिल्लाओ।
11:16
Speaker UNKNOWN
तुम्हारी जरा-जरा सी धमकियों से मैं नहीं डरने वाला।
11:21
Speaker UNKNOWN
और मेंढक ने चिल्लाना शुरू कर दिया।
11:24
Speaker UNKNOWN
उसकी आवाज इतनी तेज थी मानो रात के समय बड़ी जोर से बिजली कड़क रही हो।
11:30
Speaker UNKNOWN
चारों ओर बिजली की कड़कड़ाहट ही सुनाई दे रही थी और पहाड़ों से नदियों में इतना ज्यादा पानी आने लगा।
11:37
Speaker UNKNOWN
कि कुछ ही पलों में सब नदियों में बाढ़ आ गई।
11:42
Speaker UNKNOWN
धीरे-धीरे सारी जमीन पानी के बहाव में घिरने लगी और पानी चढ़ता-चढ़ता राजा के महल तक आ पहुंचा।
11:49
Speaker UNKNOWN
राजा ने अपनी गर्दन खिड़की से बाहर निकाली और चिल्लाकर कहा,
11:54
Speaker UNKNOWN
मेंढक महाशय, चिल्लाना बंद कीजिए।
11:58
Speaker UNKNOWN
नहीं तो हम सब मारे जाएंगे।
12:01
Speaker UNKNOWN
मैं तुम्हारे साथ अपनी दूसरी बेटी की शादी कर दूंगा।
12:05
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने तुरंत ही चिल्लाना बंद कर दिया।
12:08
Speaker UNKNOWN
और धीरे-धीरे पानी नीचे बैठने लगा।
12:13
Speaker UNKNOWN
राजा ने फिर अपने नौकरों को आदेश दिया।
12:16
Speaker UNKNOWN
कि दो घोड़े अस्तबल से निकालकर लाओ।
12:21
Speaker UNKNOWN
एक राजकुमारी के लिए और दूसरा उसके दहेज के सामान के लिए।
12:27
Speaker UNKNOWN
इसके बाद उसने अपनी दूसरी बेटी को आज्ञा दी कि मेंढक के साथ चली जाए।
12:32
Speaker UNKNOWN
राजा की दूसरी बेटी मेंढक के साथ जाने को राजी नहीं थी।
12:37
Speaker UNKNOWN
उसने भी घोड़े पर चढ़ते समय एक बड़ा सा पत्थर अपने पास छिपाकर रख लिया।
12:42
Speaker UNKNOWN
रास्ते में उसने भी अपने घोड़े के पैरों के नीचे मेंढक को कुचलने की कोशिश की।
12:47
Speaker UNKNOWN
और एक बार वह पत्थर उसके ऊपर फेंककर वह भी बड़ी राजकुमारी की तरह वापस लौटने लगी।
12:53
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसे भी वापस बुलाकर मेंढक ने कहा,
12:57
Speaker UNKNOWN
राजकुमारी, हम दोनों के भाग्य में एक साथ रहना नहीं लिखा है।
13:02
Speaker UNKNOWN
तुम घर वापस जा सकती हो।
13:05
Speaker UNKNOWN
यह कहकर उसके घोड़े की लगाम हाथ में लेकर वह चल दिया।
13:11
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने राजा के हाथ में उसकी मजली बेटी का हाथ पकड़ा दिया।
13:16
Speaker UNKNOWN
और बोला कि अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी मुझसे कर दो।
13:22
Speaker UNKNOWN
इस बार तो राजा के गुस्से का ठिकाना ही ना रहा।
13:26
Speaker UNKNOWN
उसने कहा,
13:27
Speaker UNKNOWN
तुमने मेरी सबसे बड़ी लड़की को लौटा दिया।
13:30
Speaker UNKNOWN
और मैंने तुम पर दया करके अपनी मजली बेटी दे दी।
13:36
Speaker UNKNOWN
अब तुमने उसे भी लौटा दिया और मेरी सबसे छोटी लड़की के साथ शादी करना चाहते हो।
13:41
Speaker UNKNOWN
तुम बहुत बेहूदे हो।
13:43
Speaker UNKNOWN
कोई भी राजा तुम्हारी इस बदतमीजी को बर्दाश्त नहीं कर सकता।
13:48
Speaker UNKNOWN
तुम,
13:50
Speaker UNKNOWN
तुम कानून के खिलाफ चल रहे हो।
13:53
Speaker UNKNOWN
उसके गले में आखिरी शब्द अटक गए।
13:57
Speaker UNKNOWN
एक छोटे से मेंढक ने उसे इस तरह नचा रखा था।
14:01
Speaker UNKNOWN
कि वह बहुत ज्यादा परेशान हो रहा था।
14:05
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने शांति से जवाब दिया,
14:07
Speaker UNKNOWN
महाराज, आप इतना नाराज क्यों होते हैं।
14:10
Speaker UNKNOWN
आपकी दोनों बेटियां मेरे साथ शादी करने के लिए राजी नहीं थी।
14:16
Speaker UNKNOWN
इसलिए मैं उन्हें वापस ले आया।
14:19
Speaker UNKNOWN
लेकिन आपकी तीसरी बेटी मुझसे शादी करना चाहती है।
14:22
Speaker UNKNOWN
फिर आप क्यों नहीं राजी हो रहे।
14:26
Speaker UNKNOWN
नहीं,
14:28
Speaker UNKNOWN
कभी नहीं।
14:30
Speaker UNKNOWN
राजा घृणा से चिल्लाया,
14:32
Speaker UNKNOWN
कौन कहता है वह कभी राजी नहीं हो सकती।
14:36
Speaker UNKNOWN
इस दुनिया में कोई भी लड़की एक मेंढक से शादी करने के लिए राजी नहीं हो सकती।
14:42
Speaker UNKNOWN
मैं तुमसे आखिरी बार कह रहा हूं।
14:45
Speaker UNKNOWN
कि अब तुम अपनी राह देखो।
14:48
Speaker UNKNOWN
इसका मतलब यह है कि आप अपनी बेटी की शादी मुझसे नहीं करेंगे।
14:53
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने कहा,
14:54
Speaker UNKNOWN
अच्छी बात है।
14:56
Speaker UNKNOWN
तो मैं कूदना शुरू कर दूंगा।
14:59
Speaker UNKNOWN
राजा वैसे मेंढक की बात से डर तो गया था।
15:03
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसने गुस्से में ही जवाब दिया, तुम उछलो, कूदो, फुदको।
15:07
Speaker UNKNOWN
जो जी में आए सो करो।
15:10
Speaker UNKNOWN
जी भर कर करो।
15:12
Speaker UNKNOWN
मैं तुम्हारी जरा-जरा सी बातों से डरने लगा तो मैं राजा किस बात का।
15:17
Speaker UNKNOWN
और मेंढक ने कूदना शुरू कर दिया।
15:20
Speaker UNKNOWN
जब उसने कूदना शुरू किया तो धरती हिलने लगी।
15:25
Speaker UNKNOWN
ऐसा लग रहा था मानो धरती एक पत्थर हो जो किसी तालाब में लहरों के बीच जा फंसी हो।
15:31
Speaker UNKNOWN
पहाड़ इतनी जोर-जोर से हिलने लगे कि उनमें आपस में ही टक्कर होने लगी।
15:37
Speaker UNKNOWN
पहाड़ों में से पत्थर टूट-टूटकर आकाश में उड़ने लगे।
15:43
Speaker UNKNOWN
सारा आकाश पत्थरों और धूल-मिट्टी से ढक गया और सूरज दिखाई देना बंद हो गया।
15:50
Speaker UNKNOWN
राजा के महल की दीवारें भी इतनी जोर से हिलने लगी कि लग रहा था कि महल अब गिरा कि तब गिरा।
15:57
Speaker UNKNOWN
अब तो हारकर राजा को खड़े होकर यह कहना पड़ा कि वह मेंढक के हाथ में अपनी तीसरी बेटी का हाथ दे देगा।
16:04
Speaker UNKNOWN
मेंढक ने कूदना बंद कर दिया।
16:07
Speaker UNKNOWN
पहाड़ और पृथ्वी अपनी-अपनी जगह पर शांत होकर ठहर गए।
16:13
Speaker UNKNOWN
राजा की तीसरी बेटी अपनी अन्य बहनों की तरह नहीं थी।
16:19
Speaker UNKNOWN
उसके दिल में दया बहुत थी।
16:22
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि यह मेंढक कोई साधारण मेंढक नहीं है बल्कि काफी चतुर लगता है।
16:28
Speaker UNKNOWN
वह मेंढक के साथ जाने को राजी हो गई।
16:32
Speaker UNKNOWN
मेंढक उसे घर ले गया।
16:35
Speaker UNKNOWN
जब मेंढक की मां दरवाजे पर उन्हें लेने आई तो उसे हैरानी का ठिकाना ना रहा।
16:41
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि मेरा भद्दा और छोटा सा बेटा।
16:45
Speaker UNKNOWN
कितनी सुंदर बहू ले आया है।
16:49
Speaker UNKNOWN
लड़की बहुत काम करने वाली थी और रोज अपनी सास के साथ खेत पर काम करने जाती थी।
16:54
Speaker UNKNOWN
बूढ़ी औरत उससे बहुत प्यार करती थी।
16:58
Speaker UNKNOWN
लड़की भी अपनी सास की बहुत इज्जत किया करती थी।
17:02
Speaker UNKNOWN
दोनों बहुत सुखी थे।
17:05
Speaker UNKNOWN
पझर का मौसम आया।
17:08
Speaker UNKNOWN
उन गांवों में हर साल घोड़ों की एक बहुत बड़ी दौड़ हुआ करती थी।
17:14
Speaker UNKNOWN
सैकड़ों गांवों से गरीब और अमीर लोग अपने-अपने तंबू लेकर घुड़दौड़ में आया करते थे।
17:20
Speaker UNKNOWN
और अपने साथ खेतों से नया उगा हुआ अनाज भी लाया करते थे।
17:26
Speaker UNKNOWN
देवताओं को मानने के लिए वे लोग उन छोटे-छोटे पौधों को आग में जलाया करते थे।
17:32
Speaker UNKNOWN
और नाचते-गाते, शराब पीते हुए घोड़ों की दौड़ किया करते थे।
17:39
Speaker UNKNOWN
आमतौर पर वहां लड़के-लड़कियां अपने प्रेमी-प्रेमिका ढूंढने आया करते थे।
17:46
Speaker UNKNOWN
इस बार मेंढक की मां की भी इच्छा थी कि मेंढक भी साथ में जाए।
17:51
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसने अपनी मां से कहा, मां, रास्ते में बहुत से पहाड़ और नदी-नाले पार करने पड़ते हैं।
17:57
Speaker UNKNOWN
तुम ही चली जाओ।
17:59
Speaker UNKNOWN
मैं कहां-कहां जाऊंगा।
18:01
Speaker UNKNOWN
और मेंढक घर पर ही रह गया।
18:04
Speaker UNKNOWN
घर के और सब लोग घुड़दौड़ में चल गए।
18:08
Speaker UNKNOWN
घुड़दौड़ का मेला 7 दिन तक लगा रहता था।
18:12
Speaker UNKNOWN
आखिरी तीन दिनों में घुड़दौड़ हुआ करती थी।
18:16
Speaker UNKNOWN
रोज जो भी आदमी जीत जाता उसकी बड़ी इज्जत होती और लोग उसे अपने यहां बुलाकर दावत दिया करते।
18:23
Speaker UNKNOWN
घुड़दौड़ के तीसरे दिन जब आखिरी दौड़ शुरू होने ही वाली थी।
18:29
Speaker UNKNOWN
एक नौजवान हरे रंग की पोशाक पहने हुए अपने घोड़े पर सवार होकर वहां आया।
18:37
Speaker UNKNOWN
उसका शरीर मजबूत था।
18:39
Speaker UNKNOWN
और वह बहुत सुंदर लगता था।
18:43
Speaker UNKNOWN
उसके कपड़ों पर बहुत सुंदर सुनहरी काम हो रखा था।
18:48
Speaker UNKNOWN
और वे बहुत कीमती रेशम से बने हुए थे।
18:52
Speaker UNKNOWN
उसके घोड़े की जीन पर लाल मोती लगे हुए थे और उसकी बंदूक भी सोने और चांदी की बनी हुई थी।
18:59
Speaker UNKNOWN
जब उसने लोगों से आखिरी घुड़दौड़ में भाग लेने की इजाजत मांगी।
19:04
Speaker UNKNOWN
तो सब उसकी ओर देखने लगे।
19:08
Speaker UNKNOWN
जब घुड़दौड़ शुरू हुई तो उसने दौड़ने की कोई जल्दी नहीं दिखाई।
19:13
Speaker UNKNOWN
यहां तक कि जब और लोग भागना शुरू कर रहे थे वह अपनी जीन ठीक कर रहा था।
19:20
Speaker UNKNOWN
लेकिन जल्दी ही वह उनके साथ हो गया।
19:23
Speaker UNKNOWN
घुड़दौड़ के बीच में भी।
19:26
Speaker UNKNOWN
जिस समय अन्य सब दौड़ने वाले नौजवान एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे वह आराम से चल रहा था।
19:35
Speaker UNKNOWN
और दौड़ के बीच में ही उसने अपने सिर के ऊपर उड़ते हुए तीन कबूतरों का अपनी बंदूक से शिकार किया।
19:43
Speaker UNKNOWN
दौड़ के बीच में ही उसने अपने घोड़े की जीन में से कुछ सोने के सुंदर फूल निकाले और उन्हें अपनी बाईं ओर वाले लोगों के ऊपर फेंक दिया।
19:51
Speaker UNKNOWN
इसी तरह जीन की दाईं ओर से उसने कुछ चांदी के फूल निकाले और उन्हें दाहिनी ओर फेंक दिया।
19:59
Speaker UNKNOWN
ऐसा तो आजकल कभी देखा सुना नहीं गया।
20:03
Speaker UNKNOWN
कितना सुंदर लड़का है।
20:06
Speaker UNKNOWN
उसके कपड़े शरीर पर कितने अच्छे लग रहे हैं।
20:10
Speaker UNKNOWN
घोड़ा तो देखो जैसे देवताओं का हो।
20:14
Speaker UNKNOWN
लेकिन ऐसे सुंदर लड़के के लिए यह तो सोचो कि लड़की कहां मिलेगी।
20:21
Speaker UNKNOWN
सब लड़कियां उसके चारों ओर जमा होकर गाने और नाचने लगी।
20:26
Speaker UNKNOWN
और उसे अपने-अपने घर चलने के लिए कहने लगी।
20:30
Speaker UNKNOWN
लेकिन जैसे ही शाम हुई वह घुड़सवार बिना किसी से कुछ कहे चुपचाप अपने घोड़े पर चढ़कर उस गांव की ओर चल दिया।
20:36
Speaker UNKNOWN
जहां से मेंढक की मां और बहू आए थे।
20:40
Speaker UNKNOWN
सब लोग वहां खड़े-खड़े उसके हरे घोड़े को देखते रहे।
20:44
Speaker UNKNOWN
और उसके चले जाने के बाद उसके पैरों से उड़ती हुई धूल को देखने लगे।
20:50
Speaker UNKNOWN
मेंढक की पत्नी सोचती रही।
20:54
Speaker UNKNOWN
कि वह घुड़सवार कहां से आया था और कहां चला गया।
20:59
Speaker UNKNOWN
वह खुद भी उसकी सुंदरता पर मोहित थी।
21:02
Speaker UNKNOWN
वह खुद भी उसका नाम जानना चाहती थी कि दिन छिपने ही।
21:06
Speaker UNKNOWN
वह इतनी जल्दी क्यों चला गया।
21:10
Speaker UNKNOWN
वह सोचने लगी कि शायद घुड़सवार बहुत दूर रहता हो।
21:14
Speaker UNKNOWN
घर लौटते समय।
21:17
Speaker UNKNOWN
वह भी अन्य औरतों की तरह उसी घुड़सवार के बारे में सोचती रही।
21:23
Speaker UNKNOWN
मेंढक उन लोगों को दरवाजे पर खड़ा मिला।
21:27
Speaker UNKNOWN
उन्होंने जैसे ही घुड़दौड़ की बातें सुनानी शुरू की वह आगे-आगे सब बताने लगा।
21:34
Speaker UNKNOWN
उन लोगों को यह सब सुनकर बड़ा अचरज हुआ कि मेंढक सब बातें पहले से ही जानता है।
21:40
Speaker UNKNOWN
और उस सुंदर घुड़सवार की भी बातें जानता है जिसने आज घुड़दौड़ जीती थी।
21:47
Speaker UNKNOWN
अगले साल फिर पझर के दिनों में घुड़दौड़ हुई।
21:53
Speaker UNKNOWN
मेंढक की पत्नी, मां और पिता फिर घुड़दौड़ में गए।
21:58
Speaker UNKNOWN
जब घुड़दौड़ शुरू हुई तो सब लोग उस हरे घुड़सवार की राह देखने लगे और सोचने लगे।
22:05
Speaker UNKNOWN
कि इस बार जरूर उसका नामता पूछ लेंगे।
22:11
Speaker UNKNOWN
वह कहां रहता है और किस राज्य में रहता है।
22:15
Speaker UNKNOWN
यह पूछे बिना उसे इस बार नहीं जाने देंगे।
22:20
Speaker UNKNOWN
घुड़दौड़ के आखिरी दिन जब आखिरी दौड़ हो रही थी।
22:26
Speaker UNKNOWN
हरा घुड़सवार फिर अपने हरे घोड़े पर बैठकर वहां आया।
22:31
Speaker UNKNOWN
वह एकदम ऐसे आया मानो आकाश से उतरा हो।
22:36
Speaker UNKNOWN
लोग उसे देखकर हैरान रह गए।
22:39
Speaker UNKNOWN
इस बार भी उसके पास अपनी वही सोने-चांदी वाली बंदूक थी।
22:45
Speaker UNKNOWN
लेकिन इस बार उसके शरीर पर पिछली बार से भी ज्यादा सुंदर और कीमती कपड़े थे।
22:52
Speaker UNKNOWN
जब अन्य सब घुड़सवारों ने अपनी दौड़ शुरू कर दी।
22:57
Speaker UNKNOWN
तो उसने आराम से बैठकर चाय पी।
23:01
Speaker UNKNOWN
और पीकर तेजी से उठा और इस बार भी पिछले साल की तरह उसने तीन कबूतर अपनी बंदूक से दौड़ते-दौड़ते ही मार डाले।
23:07
Speaker UNKNOWN
जिस समय वह लोगों के सामने से गुजर रहा था उसने अपने घोड़े की बाईं ओर वाली जीन में से सोने के कुछ फूल निकाले।
23:13
Speaker UNKNOWN
और उन्हें अपनी बाईं ओर वाले लोगों पर उछाल दिया।
23:19
Speaker UNKNOWN
फिर उसने दाईं ओर से चांदी के कुछ फूल निकाले और उन्हें अपनी दाहिनी ओर वाले लोगों पर बिखेर दिया।
23:26
Speaker UNKNOWN
इसके बाद वह बहुत तेजी से आगे की ओर बढ़ा।
23:30
Speaker UNKNOWN
और लोगों को ऐसा लगा मानो वह हरे बादल की सवारी कर रहा हो।
23:36
Speaker UNKNOWN
बस हरे-भरे मैदान में एक हरा बादल उड़ता हुआ नजर आ रहा था।
23:42
Speaker UNKNOWN
और इस बार लोगों ने फिर देखा कि वह घुड़दौड़ में जीत गया था।
23:48
Speaker UNKNOWN
घुड़दौड़ के मैदान में जो भी उस समय मौजूद था।
23:54
Speaker UNKNOWN
वही उस नौजवान पर मोहित हो गया।
23:58
Speaker UNKNOWN
बूढ़े, जवान और लड़कियां सभी उसकी ओर देख रहे थे।
24:04
Speaker UNKNOWN
लोग आपस में फुसफुसा रहे थे कि यह नौजवान कौन है और वह कहां का रहने वाला है।
24:11
Speaker UNKNOWN
कुछ लोग कहने लगे उसने बाईं ओर से सोने के फूल निकाले।
24:16
Speaker UNKNOWN
और उन्हें बाईं ओर उछाल दिया।
24:20
Speaker UNKNOWN
फिर दाईं ओर से चांदी के फूल निकाले और उन्हें दाहिनी ओर फेंक दिया।
24:26
Speaker UNKNOWN
ऐसा तो आजकल कभी देखा सुना नहीं गया।
24:31
Speaker UNKNOWN
कितना सुंदर लड़का है।
24:34
Speaker UNKNOWN
उसके कपड़े शरीर पर कितने अच्छे लग रहे हैं।
24:38
Speaker UNKNOWN
घोड़ा तो देखो जैसे देवताओं का हो।
24:42
Speaker UNKNOWN
लेकिन ऐसे सुंदर लड़के के लिए यह तो सोचो कि लड़की कहां मिलेगी।
24:49
Speaker UNKNOWN
सब लड़कियां उसके चारों ओर जमा होकर गाने और नाचने लगी।
24:54
Speaker UNKNOWN
और उसे अपने-अपने घर चलने के लिए कहने लगी।
24:59
Speaker UNKNOWN
लेकिन दिन छिपने ही उसने फिर बिना किसी से कहे अपने घोड़े पर चढ़कर उस गांव की ओर चल दिया।
25:05
Speaker UNKNOWN
जहां से मेंढक की मां और बहू आए थे।
25:09
Speaker UNKNOWN
सब लोग वहां खड़े-खड़े उसके हरे घोड़े को देखते रहे।
25:13
Speaker UNKNOWN
और उसके चले जाने के बाद उसके पैरों से उड़ती हुई धूल को देखने लगे।
25:19
Speaker UNKNOWN
मेंढक की पत्नी सोचती रही।
25:23
Speaker UNKNOWN
कि वह घुड़सवार कहां से आया था और कहां चला गया।
25:28
Speaker UNKNOWN
वह खुद भी उसकी सुंदरता पर मोहित थी।
25:31
Speaker UNKNOWN
वह खुद भी उसका नाम जानना चाहती थी कि दिन छिपने ही।
25:35
Speaker UNKNOWN
वह इतनी जल्दी क्यों चला गया।
25:39
Speaker UNKNOWN
घर लौटते समय वह भी अन्य औरतों की तरह।
25:42
Speaker UNKNOWN
उसी घुड़सवार के बारे में सोचती रही।
25:47
Speaker UNKNOWN
मेंढक उन लोगों को दरवाजे पर खड़ा मिला।
25:51
Speaker UNKNOWN
उन्होंने जैसे ही घुड़दौड़ की बातें सुनानी शुरू की वह आगे-आगे सब बताने लगा।
25:58
Speaker UNKNOWN
उन लोगों को यह सब सुनकर बड़ा अचरज हुआ कि मेंढक सब बातें पहले से ही जानता है।
26:04
Speaker UNKNOWN
और उस सुंदर घुड़सवार की भी बातें जानता है जिसने आज घुड़दौड़ जीती थी।
26:11
Speaker UNKNOWN
अगले साल फिर पझर के दिनों में घुड़दौड़ हुई।
26:17
Speaker UNKNOWN
मेंढक की पत्नी, मां और पिता फिर घुड़दौड़ में गए।
26:22
Speaker UNKNOWN
जब घुड़दौड़ शुरू हुई तो सब लोग उस हरे घुड़सवार की राह देखने लगे और सोचने लगे।
26:29
Speaker UNKNOWN
कि इस बार जरूर उसका नामता पूछ लेंगे।
26:35
Speaker UNKNOWN
वह कहां रहता है और किस राज्य में रहता है।
26:39
Speaker UNKNOWN
यह पूछे बिना उसे इस बार नहीं जाने देंगे।
26:44
Speaker UNKNOWN
घुड़दौड़ के आखिरी दिन।
26:46
Speaker UNKNOWN
जब आखिरी दौड़ हो रही थी हरा घुड़सवार फिर अपने हरे घोड़े पर बैठकर वहां आया।
26:51
Speaker UNKNOWN
वह एकदम ऐसे आया मानो आकाश से उतरा हो।
26:56
Speaker UNKNOWN
लोग उसे देखकर हैरान रह गए।
26:59
Speaker UNKNOWN
इस बार भी उसके पास अपनी वही सोने-चांदी वाली बंदूक थी।
27:05
Speaker UNKNOWN
लेकिन इस बार उसके शरीर पर पिछली बार से भी ज्यादा सुंदर और कीमती कपड़े थे।
27:12
Speaker UNKNOWN
जब अन्य सब घुड़सवारों ने अपनी दौड़ शुरू कर दी।
27:17
Speaker UNKNOWN
तो उसने आराम से बैठकर चाय पी और पीकर तेजी से उठा।
27:22
Speaker UNKNOWN
और इस बार भी पिछले साल की तरह उसने तीन कबूतर अपनी बंदूक से दौड़ते-दौड़ते ही मार डाले।
27:29
Speaker UNKNOWN
जिस समय वह लोगों के सामने से गुजर रहा था उसने अपने घोड़े की बाईं ओर वाली जीन में से सोने के कुछ फूल निकाले।
27:35
Speaker UNKNOWN
और उन्हें अपनी बाईं ओर वाले लोगों पर उछाल दिया।
27:40
Speaker UNKNOWN
फिर उसने दाईं ओर से चांदी के कुछ फूल निकाले और उन्हें अपनी दाहिनी ओर वाले लोगों पर बिखेर दिया।
27:47
Speaker UNKNOWN
इसके बाद वह बहुत तेजी से आगे की ओर बढ़ा।
27:51
Speaker UNKNOWN
और लोगों को ऐसा लगा मानो वह हरे बादल की सवारी कर रहा हो।
27:57
Speaker UNKNOWN
बस हरे-भरे मैदान में एक हरा बादल उड़ता हुआ नजर आ रहा था।
28:03
Speaker UNKNOWN
और इस बार लोगों ने फिर देखा कि वह घुड़दौड़ में जीत गया था।
28:09
Speaker UNKNOWN
लड़कियों ने इस बार फिर उसके सामने अपना नाच और गाना रखा।
28:15
Speaker UNKNOWN
और उसे अपने घर चलने के लिए कहने लगी।
28:20
Speaker UNKNOWN
लेकिन दिन छिपने ही उसने फिर बिना किसी से कहे अपने घोड़े को भगाया।
28:25
Speaker UNKNOWN
और मैदान से भाग लिया।
28:29
Speaker UNKNOWN
जब मेंढक की पत्नी और मां घर आई तो उन्हें यह देखकर बड़ा अचरज हुआ।
28:35
Speaker UNKNOWN
कि इस बार फिर मेंढक को सब बातें मालूम थी।
28:40
Speaker UNKNOWN
इस बार लड़की के दिमाग में उथल-पुथल हुई कि जब वह दौड़ में जाता नहीं है।
28:46
Speaker UNKNOWN
तो उसे सब बातें मालूम कैसे हो जाती है।
28:50
Speaker UNKNOWN
उस घुड़सवार को दिन छिपने से पहले ही क्यों जाना पड़ता है।
28:55
Speaker UNKNOWN
वह हमारे घर की तरफ ही क्यों जाता है।
28:59
Speaker UNKNOWN
क्या इस दुनिया में सचमुच ही ऐसा कोई घुड़सवार हो सकता है।
29:04
Speaker UNKNOWN
फिर मेंढक को उसके बारे में सब बातें कैसे मालूम चल जाती है।
29:09
Speaker UNKNOWN
यही सब बातें उसके दिमाग में घूमती रही।
29:13
Speaker UNKNOWN
आखिर में उसने तय किया कि वह इन बातों का पता लगाकर ही रहेगी।
29:18
Speaker UNKNOWN
इस साल फिर घुड़दौड़ आई।
29:21
Speaker UNKNOWN
मेंढक की पत्नी मेले में गई।
29:24
Speaker UNKNOWN
उसने सब काम किए।
29:27
Speaker UNKNOWN
लेकिन आखिरी दिन जब आखिरी घुड़दौड़ होने वाली थी वह अपनी सास से बोली, माताजी।
29:35
Speaker UNKNOWN
मेरे सिर में बहुत जोर का दर्द हो रहा है।
29:39
Speaker UNKNOWN
मैं घर जाना चाहती हूं।
29:42
Speaker UNKNOWN
आप मुझे एक खच्चर दे दीजिए।
29:45
Speaker UNKNOWN
लड़की की सास और ससुर उसका बहुत ख्याल रखते थे।
29:49
Speaker UNKNOWN
उन्होंने उसे खच्चर दे दिया।
29:52
Speaker UNKNOWN
और कहा कि वह घर चली जाए।
29:55
Speaker UNKNOWN
जब वह अपने सास-ससुर की आंखों से ओझल हो गई।
29:59
Speaker UNKNOWN
तो उसने खच्चर को तेजी से घर की ओर दौड़ाया।
30:04
Speaker UNKNOWN
जब वह घर पहुंची।
30:06
Speaker UNKNOWN
तो उसने सबसे पहला काम जो किया वह था मेंढक को ढूंढने का।
30:12
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसे मेंढक कहीं भी दिखाई ना दिया।
30:16
Speaker UNKNOWN
तभी उसे एक कोने में मेंढक की खाल पड़ी दिखाई दी जो उसके पति की ही थी।
30:22
Speaker UNKNOWN
उसने उसे उठा लिया।
30:26
Speaker UNKNOWN
और उसकी आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे।
30:30
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि मैं कितनी भाग्यशाली हूं।
30:33
Speaker UNKNOWN
मेरा पति कितना सुंदर है और कितनी अच्छी घुड़सवारी करता है।
30:39
Speaker UNKNOWN
मैं तो उसके बिल्कुल लायक नहीं हूं।
30:42
Speaker UNKNOWN
आज मुझे कितनी खुशी है।
30:45
Speaker UNKNOWN
वह बार-बार अपने आंसू रोकने की कोशिश करती।
30:50
Speaker UNKNOWN
लेकिन आंसू थे कि रुक ही नहीं रहे थे।
30:53
Speaker UNKNOWN
वह बार-बार मेंढक की खाल को देख रही थी।
30:57
Speaker UNKNOWN
और सोच रही थी कि उसके पति को इतनी गंदी खाल नहीं पहननी चाहिए।
31:03
Speaker UNKNOWN
वह इतने भद्दे रूप में क्यों रहता है।
31:06
Speaker UNKNOWN
क्या वह उसके लायक नहीं है।
31:09
Speaker UNKNOWN
उसे उस खाल से इतनी ज्यादा घृणा हो गई कि उसने उसे जला देने का तय किया।
31:15
Speaker UNKNOWN
वह सोच रही थी कि जब मेंढक यहां आएगा।
31:19
Speaker UNKNOWN
तो इसी बदसूरत रूप में बदल जाएगा।
31:23
Speaker UNKNOWN
इसलिए उसने उसे जला दिया।
31:26
Speaker UNKNOWN
जब उसने खाल जलाई तो सूरज डूब रहा था।
31:30
Speaker UNKNOWN
तभी अचानक वह नौजवान अपने हरे घोड़े पर सवार बादलों की तरह उड़ता हुआ वहां आया।
31:36
Speaker UNKNOWN
जब उसने अपनी पत्नी को खाल जलाते देखा।
31:40
Speaker UNKNOWN
तो उसका रंग डर के मारे पीला पड़ गया।
31:45
Speaker UNKNOWN
और उसने तुरंत घोड़े से उतरकर खाल को आग में जलने से बचा लेना चाहा।
31:50
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसे बहुत देर हो गई थी।
31:53
Speaker UNKNOWN
मेंढक की केवल एक टांग ही बची थी।
31:56
Speaker UNKNOWN
उसने एक ठंडी सांस ली और घर के सामने पड़े एक बड़े पत्थर पर जाकर गिर पड़ा।
32:02
Speaker UNKNOWN
लड़की यह देखकर बहुत डर गई।
32:06
Speaker UNKNOWN
और उसकी सहायता करने के लिए दौड़ी।
32:10
Speaker UNKNOWN
तुम इतने अच्छे आदमी हो।
32:13
Speaker UNKNOWN
और इतनी बढ़िया घुड़सवारी करते हो।
32:17
Speaker UNKNOWN
तुम फिर मेंढक क्यों बने रहना चाहते हो।
32:21
Speaker UNKNOWN
और सब लड़कियों के पति तुम्हारी तरह के आदमी हैं।
32:26
Speaker UNKNOWN
फिर मेरा ही भाग्य क्यों खराब हो।
32:29
Speaker UNKNOWN
क्या तुम नहीं सोचते कि यह मुझे कितना बुरा लगता है।
32:33
Speaker UNKNOWN
लड़के ने जवाब दिया,
32:35
Speaker UNKNOWN
तुम बहुत ज्यादा जल्दी कर दी थी।
32:38
Speaker UNKNOWN
जो कुछ भी तुमने किया है वह बहुत जल्दी कर डाला।
32:42
Speaker UNKNOWN
अभी उसे करने के लिए हमें कुछ दिन रुकना था।
32:47
Speaker UNKNOWN
अब मैं जिंदा नहीं रह सकता।
32:50
Speaker UNKNOWN
और लोग पृथ्वी पर खुश नहीं रह सकते।
32:54
Speaker UNKNOWN
क्या मैंने कुछ गलत काम कर डाला।
32:57
Speaker UNKNOWN
लड़की ने पूछा,
32:59
Speaker UNKNOWN
बोलो, अब मुझे क्या करना चाहिए।
33:02
Speaker UNKNOWN
इसमें तुम्हारी गलती नहीं है।
33:05
Speaker UNKNOWN
मेरा ही दोष है।
33:07
Speaker UNKNOWN
मैं बहुत ज्यादा लापरवाह हो गया था।
33:10
Speaker UNKNOWN
यही वजह थी कि मैं घुड़दौड़ में जा पहुंचा।
33:14
Speaker UNKNOWN
मैं लोगों को अपनी ताकत दिखाना चाहता था।
33:18
Speaker UNKNOWN
लेकिन अब ना तो हम लोग और ना ही दुनिया के लोग सुखी रह सकते हैं।
33:25
Speaker UNKNOWN
मैं कोई साधारण आदमी नहीं हूं।
33:28
Speaker UNKNOWN
बल्कि धरती माता का बेटा हूं।
33:31
Speaker UNKNOWN
अगर मैं और ज्यादा मजबूत हो गया होता तो मैं लोगों की मदद करने के लिए खड़ा हो सकता था।
33:39
Speaker UNKNOWN
मैं ऐसी दुनिया के सपने देखा करता था।
33:44
Speaker UNKNOWN
जिसमें अमीर लोग गरीबों का खून चूसना बंद कर दें और जिसमें अफसर लोग अपने से नीचे के आदमियों को दबाया ना करें।
33:52
Speaker UNKNOWN
मैं चाहता हूं कि सब लोगों के पास राजधानी में जाने के लिए साधन हो।
33:56
Speaker UNKNOWN
और सब लोग आपस में मिलजुलकर अपनी भेड़ों और बकरियों का व्यापार कर सके।
34:01
Speaker UNKNOWN
लेकिन अभी मैं इतना बड़ा नहीं हुआ था और मेरी ताकतें भी अभी बहुत कम थी।
34:07
Speaker UNKNOWN
अभी तक मुझ में इतनी ताकत नहीं पैदा हुई थी कि मैं रात की ठंड को बिना अपनी मेंढक की खाल के सह सकूं।
34:14
Speaker UNKNOWN
इसलिए दिन निकलते ही मैं मर जाऊंगा।
34:18
Speaker UNKNOWN
जब लड़की ने यह सुना तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।
34:23
Speaker UNKNOWN
उसने नौजवान के कमजोर शरीर को अपनी बाहों में संभाल लिया।
34:26
Speaker UNKNOWN
और बोली, तुम नहीं मर सकते।
34:29
Speaker UNKNOWN
मुझे विश्वास नहीं होता कि तुम मर जाओगे।
34:33
Speaker UNKNOWN
नहीं,
34:35
Speaker UNKNOWN
नहीं,
34:37
Speaker UNKNOWN
मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगी।
34:40
Speaker UNKNOWN
लड़की दुख से इतनी बुरी तरह चिल्लाने लगी कि नौजवान ने उसका हाथ अपने कमजोर हाथों में लेकर कहा,
34:45
Speaker UNKNOWN
प्रिय, तुम इतना दुखी मत हो।
34:48
Speaker UNKNOWN
अगर तुम वास्तव में यह चाहती हो कि मैं जिंदा रहूं तो अब भी तुम कुछ कर सकती हो।
34:54
Speaker UNKNOWN
उसने पश्चिम की ओर इशारा किया।
34:57
Speaker UNKNOWN
लेकिन यह सब केवल भगवान की इच्छा और उनकी इजाजत से ही किया जा सकता है।
35:05
Speaker UNKNOWN
मेरा घोड़ा ले लो।
35:07
Speaker UNKNOWN
अभी भी समय है क्योंकि मेरा घोड़ा हवा की तरह भागता है।
35:12
Speaker UNKNOWN
वह तुम्हें पश्चिम दिशा की ओर ले जाएगा।
35:16
Speaker UNKNOWN
जहां लाल-लाल बादलों के बीच एक बहुत बड़ा महल है।
35:22
Speaker UNKNOWN
वहां जाकर भगवान से प्रार्थना करना कहना कि लोगों की भलाई के लिए वह इन तीन बातों को पूरा कर दे।
35:30
Speaker UNKNOWN
उनसे कहना कि यह सब दिन निकलने से पहले ही कर दें।
35:35
Speaker UNKNOWN
देखो, अच्छी तरह याद कर लो।
35:38
Speaker UNKNOWN
पहली बात यह है कि लोग गरीब और अमीर ना कहलाए।
35:44
Speaker UNKNOWN
सबके पास बराबर धन हो।
35:47
Speaker UNKNOWN
दूसरी यह कि अफसर और सरकारी आदमी जैसे राजा आदि जनता को ना दबाए।
35:52
Speaker UNKNOWN
और तीसरे।
35:55
Speaker UNKNOWN
यह कि हमारे पास नगरों तक जाने के लिए सड़कें हो और हम वहां जाकर व्यापार कर सके।
36:01
Speaker UNKNOWN
अगर भगवान तुम्हारी इन बातों को मान जाते हैं।
36:04
Speaker UNKNOWN
तो हम सब सुख से रह सकेंगे और मुझ में इतनी ताकत हो जाएगी।
36:09
Speaker UNKNOWN
कि मैं रात को भी बिना मेंढक की खाल के रह सकूंगा।
36:14
Speaker UNKNOWN
लड़की तुरंत घोड़े पर सवार होकर वहां से चल दी।
36:18
Speaker UNKNOWN
घोड़ा उसे लेकर हवा में उड़ रहा था।
36:22
Speaker UNKNOWN
हवा उसे छूकर भागी जा रही थी।
36:25
Speaker UNKNOWN
और वह बादलों के बीच में होती हुई पश्चिम दिशा की ओर उड़ रही थी।
36:31
Speaker UNKNOWN
आखिर में वह उस महल के सामने आई।
36:36
Speaker UNKNOWN
जो सूरज की तरह लाल-लाल चमक रहा था।
36:41
Speaker UNKNOWN
वह अंदर गई।
36:43
Speaker UNKNOWN
और उसने भगवान से अपनी प्रार्थनाएं कहीं।
36:49
Speaker UNKNOWN
भगवान उसकी बातों की सच्चाई और उसके दुख को देखकर पिघल गए।
36:55
Speaker UNKNOWN
और उन्होंने उसकी बातें मान ली।
36:58
Speaker UNKNOWN
लेकिन दिन निकलने से पहले तुम्हें जाकर यह खबर सब घरों में पहुंचा देनी होगी।
37:04
Speaker UNKNOWN
तब यहां इतनी ज्यादा ठंड पड़नी बंद हो जाएगी।
37:09
Speaker UNKNOWN
और तुम्हारा पति रात को भी बिना मेंढक की खाल के रह सकेगा।
37:15
Speaker UNKNOWN
लड़की खुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी।
37:19
Speaker UNKNOWN
उसने भगवान को धन्यवाद दिया।
37:23
Speaker UNKNOWN
और अपने घोड़े पर चढ़कर घर की ओर चल दी जिससे दिन निकलने से पहले ही।
37:29
Speaker UNKNOWN
वह इस समाचार को घर-घर फैला सके।
37:33
Speaker UNKNOWN
लेकिन जब वह घाटी में घुसी तो उसका राजा पिता किले के दरवाजे पर खड़ा हुआ था।
37:39
Speaker UNKNOWN
जब उसने अपनी बेटी को आते देखा तो वह बोला,
37:41
Speaker UNKNOWN
क्यों बेटी,
37:44
Speaker UNKNOWN
तुम इतनी देर गए यहां क्यों आए हो।
37:48
Speaker UNKNOWN
उसने कहा,
37:50
Speaker UNKNOWN
पिताजी, भगवान ने मुझे एक बहुत ही आश्चर्यजनक वरदान दिया है।
37:55
Speaker UNKNOWN
अब मैं उसे सबको बताने जा रही हूं।
37:58
Speaker UNKNOWN
जल्दी कहा की है।
38:00
Speaker UNKNOWN
राजा बोला,
38:02
Speaker UNKNOWN
यह नहीं हो सकता।
38:04
Speaker UNKNOWN
मैं राजा हूं।
38:07
Speaker UNKNOWN
और तुम्हें सबसे पहले मुझे ही बताना पड़ेगा।
38:11
Speaker UNKNOWN
और उसने आगे बढ़कर घोड़े की लगाम पकड़ ली।
38:16
Speaker UNKNOWN
लड़की जानती थी।
38:18
Speaker UNKNOWN
कि उसका पिता इस तरह नहीं मानेगा।
38:22
Speaker UNKNOWN
लेकिन वह उससे जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहती थी।
38:27
Speaker UNKNOWN
इसलिए उसने सब कुछ सच-सच बता दिया।
38:31
Speaker UNKNOWN
वह बोली,
38:33
Speaker UNKNOWN
भगवान ने मुझसे तीन वादे किए हैं।
38:38
Speaker UNKNOWN
पहला तो यह कि गरीब और अमीर में कोई भेद नहीं रहेगा।
38:44
Speaker UNKNOWN
राजा ने अपना सिर खुजलाया।
38:46
Speaker UNKNOWN
वह बोला, अगर गरीब और अमीर में कोई भेद नहीं रहेगा तो मेरी इज्जत कौन करेगा।
38:52
Speaker UNKNOWN
और तुम्हारी बहनों के लिए दहेज का पैसा कहां से आएगा।
38:56
Speaker UNKNOWN
यह क्या मूर्खता है।
38:58
Speaker UNKNOWN
फिर हमारा काम कौन करेगा।
39:01
Speaker UNKNOWN
हमारी भेड़-बकरी कौन चलाएगा।
39:04
Speaker UNKNOWN
हमारे खेत कौन जोतेगा।
39:07
Speaker UNKNOWN
उसने बड़े ही बेमन से कहा।
39:10
Speaker UNKNOWN
और पूछा कि तीसरा वचन क्या है।
39:14
Speaker UNKNOWN
और तीसरी बात यह है कि यहां से नगरों तक कोई रास्ता बन जाए और हम लोग वहां पर व्यापार कर सके।
39:21
Speaker UNKNOWN
पिताजी,
39:23
Speaker UNKNOWN
जब यह सब बातें हो जाएंगी तो यहां की ठंड बिल्कुल खत्म हो जाएगी।
39:29
Speaker UNKNOWN
और यहां काफी गर्मी पड़ने लगेगी।
39:33
Speaker UNKNOWN
उसके बाद।
39:35
Speaker UNKNOWN
लेकिन राजा ने बीच में ही टोक कर कहा, यह सब बेकार की बातें हैं।
39:40
Speaker UNKNOWN
ऐसा कभी नहीं हो सकता।
39:43
Speaker UNKNOWN
हमारा काम अब बिल्कुल ठीक तरह से चल रहा है।
39:47
Speaker UNKNOWN
हमें शहर जाने की क्या जरूरत है।
39:50
Speaker UNKNOWN
यह कभी भी भगवान के आदेश नहीं हो सकते।
39:54
Speaker UNKNOWN
मुझे इनमें से किसी भी बात पर विश्वास नहीं है।
39:57
Speaker UNKNOWN
मैं तुम्हें इनमें से एक भी शब्द लोगों को नहीं बताने दूंगा।
40:02
Speaker UNKNOWN
पिताजी,
40:04
Speaker UNKNOWN
मैं अब यहां एक क्षण भी नहीं ठहर सकती।
40:08
Speaker UNKNOWN
लड़की ने चिल्लाकर कहा,
40:10
Speaker UNKNOWN
मुझे आप तुरंत जाने दीजिए।
40:13
Speaker UNKNOWN
उसने भागने की कोशिश की।
40:15
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसके पिता ने घोड़े की लगाम नहीं छोड़ी।
40:20
Speaker UNKNOWN
बेचारी लड़की बहुत ज्यादा दुखी हो रही थी।
40:23
Speaker UNKNOWN
और उधर उसका पिता उससे सवाल-जवाब करने पर तुला हुआ था।
40:28
Speaker UNKNOWN
तभी मुर्गा दूसरी बार फिर बोला।
40:30
Speaker UNKNOWN
और इधर उसका पिता उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।
40:35
Speaker UNKNOWN
आखिर में निराश होकर।
40:38
Speaker UNKNOWN
उसने अपने घोड़े को बड़े जोर से कोड़ा लगाया।
40:43
Speaker UNKNOWN
घोड़े ने राजा को एक ओर फेंक दिया।
40:47
Speaker UNKNOWN
और हवा से बातें करने लगा।
40:51
Speaker UNKNOWN
लड़की अभी पहले मकान पर ही पहुंच पाई थी।
40:56
Speaker UNKNOWN
कि मुर्गा तीसरी बार फिर बोला।
41:00
Speaker UNKNOWN
पौं फटने लगी थी।
41:02
Speaker UNKNOWN
और अब तक कुछ ही घरों में वह अपनी बात कह पाई थी।
41:07
Speaker UNKNOWN
लड़की का दिल बैठने लगा।
41:10
Speaker UNKNOWN
पौं फट गई थी।
41:13
Speaker UNKNOWN
और उसका काम अभी आधा भी नहीं हुआ था।
41:18
Speaker UNKNOWN
अब तो बहुत देर हो गई थी।
41:21
Speaker UNKNOWN
अब केवल उसके लिए यही रास्ता रह गया था।
41:26
Speaker UNKNOWN
कि वह घर की ओर जल्दी से कदम बढ़ाए।
41:30
Speaker UNKNOWN
उसने देखा कि उसके ससुर उसके पति के पास खड़े हुए रो रहे हैं।
41:35
Speaker UNKNOWN
और उसकी सास मरे हुए की आत्मा को शांति देने के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही है।
41:42
Speaker UNKNOWN
सब बेकार हो गया था।
41:45
Speaker UNKNOWN
वह अपने पति के शव पर गिर पड़ी।
41:49
Speaker UNKNOWN
और अपने पिता को कोसती हुई जोर-जोर से रोने लगी।
41:54
Speaker UNKNOWN
इस घुड़सवार नौजवान के शव को वहां से।
41:58
Speaker UNKNOWN
कुछ दूर पर ही एक चट्टान पर दफना दिया गया।
42:03
Speaker UNKNOWN
रोज शाम को जाकर वह लड़की उसकी कब्र के पास रोती।
42:08
Speaker UNKNOWN
आखिर में एक दिन वह खुद भी पत्थर में बदल गई।
42:12
Speaker UNKNOWN
उस दिन के बाद लोगों को उसका रोना सुनाई देना बंद हो गया।
42:16
Speaker UNKNOWN
आज भी उस कब्र के पास वह पत्थर की लड़की बनी हुई है।
42:23
Speaker UNKNOWN
बहुत दूर से देखने पर ही आपको मालूम चल जाएगा कि वह कोई लड़की है जिसके बाल बिखरे हुए हैं।
42:30
Speaker UNKNOWN
और वह भगवान से प्रार्थना कर रही है।
42:35
Speaker UNKNOWN
वह अपने पति की कब्र के पास सदा से इसी प्रकार प्रार्थना करती रही है।
42:41
Speaker UNKNOWN
और सदा इसी प्रकार प्रार्थना करती रहेगी।
42:45
Speaker UNKNOWN
कहानी को अंत तक सुनने के लिए बहुत धन्यवाद।
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Frequently Asked Questions

मेंढक और राजकुमारी की कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

कहानी का मुख्य संदेश है कि सच्चे दिल से की गई प्रार्थना पूरी होती है और बाहरी रूप से भिन्नता के बावजूद प्रेम और परिवार की अहमियत होती है।

मेंढक राजा के महल क्यों गया था?

मेंढक राजा के महल अपनी तीन बेटियों में से एक से शादी करने के लिए गया था, ताकि वह अपनी मां-पिता की मदद कर सके।

राजकुमारी ने मेंढक को क्यों चोट पहुंचाने की कोशिश की?

राजकुमारी मेंढक से शादी के लिए राजी नहीं थी और उसने उसे चोट पहुंचाने की कोशिश की ताकि वह उससे पीछा छुड़ा सके।

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