इस वीडियो में आपको इसी अरावली की कहानी सुनाएंगे कि कैसे तमिलनाडु के एक जमींदार टीएन गोदावरमन की याचिका के आधार पर अरावली के मुस्तकबिल का फैसला सुना दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी या सीईसी की उस परिभाषा को मान्यता दे दी जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचे पहाड़ों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
साल 1995 तमिलनाडु के थिरुमुल पद के रहने वाले एक जमींदार टीएन गोदावरमन ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के खिलाफ एक सिविल पिटीशन दायर की।
31 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात सरकार की अंतरिम अपील के आधार पर एक सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी बनाने के निर्देश दिए।
लेकिन हास्यास्पद बात यह है कि ठीक इसी दिन हरियाणा का माइनिंग विभाग इस संरक्षित वन क्षेत्र की 119.5 एकड़ जमीन पर पत्थर खदान के लिए ऑनलाइन नीलामी करवा रही थी।