लालची भाभी और चालाक देवर: रोमांचक लोककथा | #HindiStory … — Transcript

लालची भाभी और चालाक देवर की लोककथा, जिसमें ईमानदारी और चतुराई से न्याय मिलता है।

Key Takeaways

  • ईमानदारी और सरलता के साथ भी चतुराई जरूरी है।
  • लालच से कभी भी सफलता नहीं मिलती।
  • धैर्य और समझदारी से कठिनाइयों का सामना किया जा सकता है।
  • सही समय पर सही निर्णय लेना महत्वपूर्ण होता है।
  • परिवार में न्याय और सम्मान बनाए रखना चाहिए।

Summary

  • एक गांव में दो भाई रहते थे, जिनमें बड़ा भाई और भाभी लालची थे।
  • छोटा भाई ईमानदार और सरल था, लेकिन अंदर से चतुर था।
  • छोटा भाई अपने हिस्से की संपत्ति लेकर अलग हो गया, लेकिन बड़े भाई ने उसे ठगा।
  • बूढ़ा बैल छोटे भाई को अमीर बनने का उपाय बताता है।
  • छोटा भाई बैल की सलाह पर अमीर जमींदार के मक्का के खेत में जाकर चालाकी से धन कमाता है।
  • जमींदार ने बैल को मार दिया, लेकिन छोटा भाई ने चतुराई से उसे दफनाया।
  • छोटा भाई ने चांदी के सिक्के कमाए और बड़े भाई को तुलाधार दिया।
  • बड़ा भाई और भाभी लालच में आकर छोटे भाई के धन को पाने की योजना बनाते हैं।
  • छोटा भाई अपने काम में व्यस्त रहता है और बड़े भाई से मिलने जाता है।
  • कहानी में ईमानदारी, चतुराई और न्याय की सीख दी गई है।

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00:00
Speaker UNKNOWN
बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक परिवार रहता था।
00:05
Speaker UNKNOWN
उस परिवार में दो भाई रहते थे।
00:07
Speaker UNKNOWN
उनके माता-पिता का देहांत हो चुका था।
00:10
Speaker UNKNOWN
घर की देखभाल करने वाला और खाना बनाने वाला कोई नहीं था। इसलिए बड़े भाई की शादी जल्दी हो गई थी।
00:18
Speaker UNKNOWN
वे खेती-बाड़ी करते थे और गाय-भैंस भी पालते थे।
00:22
Speaker UNKNOWN
उनके पास पैतृक संपत्ति काफी थी, लेकिन बड़ा भाई और उसकी पत्नी भाभी बहुत लालची थे।
00:30
Speaker UNKNOWN
वे हमेशा छोटे भाई को ठगने की कोशिश करते थे।
00:34
Speaker UNKNOWN
भाभी की बातों में आकर बड़ा भाई भी छोटे भाई को धोखा देने में लग गया।
00:40
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई बहुत ईमानदार, सीधा-साधा और सरल स्वभाव का था।
00:46
Speaker UNKNOWN
वह हमेशा बड़े भाई और भाभी का आदर करता था और सोच समझकर ही बोलता था।
00:53
Speaker UNKNOWN
बड़ा भाई और भाभी उसकी इस सादगी को उसकी कमजोरी समझते थे, लेकिन अंदर से वह बहुत चतुर था।
01:00
Speaker UNKNOWN
बड़ा भाई और भाभी सिर्फ बातों से ही नहीं, बल्कि रोजाना उस पर अत्याचार करने से भी पीछे नहीं हटते थे।
01:09
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई से जब यह अत्याचार और दबाव बर्दाश्त नहीं हुआ, तो वह अपनी गौशाला में चला गया।
01:16
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि अब अच्छा होगा कि वह अपना हिस्सा लेकर अलग रहे।
01:21
Speaker UNKNOWN
उसने हिम्मत करके बड़े भाई और भाभी से कहा,
01:26
Speaker UNKNOWN
मैं अब आपके साथ नहीं रह सकता।
01:28
Speaker UNKNOWN
मुझे मेरी पैतृक संपत्ति का हिस्सा दे दीजिए।
01:32
Speaker UNKNOWN
मैं अकेला रहूंगा।
01:33
Speaker UNKNOWN
जैसे किसी को बिना कुछ किए ही मनचाही चीज मिल जाए, वैसे ही उन्होंने तुरंत छोटे भाई का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
01:40
Speaker UNKNOWN
उन्होंने छोटे भाई को जितना हो सके उतना ठगा।
01:44
Speaker UNKNOWN
उन्होंने उसे कोने में एक छोटा सा बंजर खेत दिया, जहां कुछ भी नहीं उगता था।
01:49
Speaker UNKNOWN
रहने के लिए गौशाला के पास एक छोटी सी झोपड़ी दी, जिसकी सारी छत बरसात में टपकती थी।
01:56
Speaker UNKNOWN
जुताई के लिए उन्हें हल-बैल देने थे, लेकिन उन्होंने एक बूढ़ा बैल दिया, जो एक कदम भी नहीं चल पाता था।
02:03
Speaker UNKNOWN
गाय-बछड़े भी कुछ नहीं दिए।
02:05
Speaker UNKNOWN
खाने-पीने के लिए एक बोरा मक्का और बीज के लिए एक तुलाधार मक्का दिया।
02:10
Speaker UNKNOWN
बड़े भाई और भाभी ने जो कुछ भी दिया, छोटे भाई ने उस पर कोई आपत्ति नहीं की।
02:15
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि सहन करना ही सबसे अच्छा उपाय है और उसने अपने मन को समझाया।
02:22
Speaker UNKNOWN
खुद को बुरी तरह ठगा हुआ पाकर भी उसने बड़े भाई और भाभी से कुछ नहीं कहा।
02:28
Speaker UNKNOWN
लेकिन मन ही मन सोचा, मैं इसका बदला जरूर लूंगा।
02:31
Speaker UNKNOWN
एक दिन बूढ़ा बैल गौशाला में उदास बैठा था।
02:34
Speaker UNKNOWN
बूढ़े बैल ने बहुत देर तक छोटे भाई को देखा।
02:38
Speaker UNKNOWN
फिर बोला,
02:39
Speaker UNKNOWN
मालिक, मैं बूढ़ा हो चुका हूं।
02:42
Speaker UNKNOWN
मैं कुछ नहीं कर सकता।
02:44
Speaker UNKNOWN
मैं आपको एक उपाय बताता हूं।
02:47
Speaker UNKNOWN
उसके बाद आप अमीर बन जाएंगे।
02:50
Speaker UNKNOWN
बूढ़े बैल की बात सुनकर छोटे भाई के मन में आशा की किरण जागी।
02:56
Speaker UNKNOWN
जैसे उसके जीवन में उजाला छा गया हो।
03:00
Speaker UNKNOWN
उसके चेहरे पर कुछ चमक दिखाई दी।
03:03
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने बैल से कहा,
03:06
Speaker UNKNOWN
क्या मैं भी गांव के सबसे अमीर जमींदार जैसा बन सकता हूं?
03:11
Speaker UNKNOWN
बूढ़े बैल ने सिर हिलाया,
03:14
Speaker UNKNOWN
कान हिलाए,
03:16
Speaker UNKNOWN
और फिर बोला,
03:17
Speaker UNKNOWN
अगर आपने मेरी बात मानी, तो आपके दिन जरूर फिर जाएंगे।
03:23
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने उपाय जानने के लिए उत्सुकता से कहा,
03:26
Speaker UNKNOWN
अच्छा बताओ,
03:28
Speaker UNKNOWN
मुझे क्या करना है?
03:30
Speaker UNKNOWN
अगर यह ऐसा काम है जो मैं कर सकता हूं, तो मैं करने के लिए तैयार हूं।
03:35
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई बैल के पास गया और उसके सिर पर हाथ फेरा।
03:40
Speaker UNKNOWN
तुम मेरे साथी हो।
03:42
Speaker UNKNOWN
मेरे दोस्त हो।
03:44
Speaker UNKNOWN
तुम्हारे अलावा मेरा और कौन है?
03:48
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई भावुक हो गया।
03:50
Speaker UNKNOWN
बूढ़ा बैल बोला,
03:52
Speaker UNKNOWN
अगर तुम मेरा कहा हुआ काम करने की प्रतिज्ञा करते हो, तभी मैं तुम्हें उपाय बताऊंगा।
03:59
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने बैल की बात सुनकर थोड़ी चिंता की और बैल को बार-बार कहा,
04:05
Speaker UNKNOWN
ठीक है।
04:06
Speaker UNKNOWN
मैं प्रतिज्ञा करता हूं।
04:09
Speaker UNKNOWN
मैं तीन बार प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं वही करूंगा जो तुम कहोगे।
04:15
Speaker UNKNOWN
तब बैल ने उसे कान में उपाय के बारे में बताया।
04:18
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई का चेहरा काला पड़ गया।
04:21
Speaker UNKNOWN
वह कुछ बोल नहीं पाया और जमीन पर धम से बैठ गया।
04:25
Speaker UNKNOWN
बैल बोला,
04:27
Speaker UNKNOWN
तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा।
04:30
Speaker UNKNOWN
मैंने अपनी इच्छा से कहा है।
04:33
Speaker UNKNOWN
फिर तुमने प्रतिज्ञा भी की है।
04:36
Speaker UNKNOWN
अगर तुम प्रतिज्ञा तोड़ोगे, तो तुम्हें भयानक पाप लगेगा।
04:41
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई प्रतिज्ञा से डर गया।
04:44
Speaker UNKNOWN
वह अच्छी तरह जानता था कि प्रतिज्ञा तोड़ना नहीं चाहिए।
04:49
Speaker UNKNOWN
मन न होते हुए भी वह बूढ़े बैल को लेकर चल पड़ा।
04:56
Speaker UNKNOWN
थोड़ी देर बाद वे गांव के सबसे अमीर जमींदार के मक्का के खेत में पहुंचे।
05:01
Speaker UNKNOWN
खेत के बीच में पहुंचकर छोटे भाई ने सोचा,
05:04
Speaker UNKNOWN
अब क्या करूं?
05:06
Speaker UNKNOWN
बैल ने आठ-दस मक्के खाए और दूर से ऐसा दिखाया जैसे उसने मक्का के पौधों को बहुत नुकसान पहुंचाया हो।
05:13
Speaker UNKNOWN
बैल बोला,
05:15
Speaker UNKNOWN
जल्दी करो।
05:17
Speaker UNKNOWN
अगर किसी ने देखा तो काम बिगड़ जाएगा।
05:21
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने बैल को उसकी बताई जगह पर ले जाकर छोड़ दिया।
05:26
Speaker UNKNOWN
बूढ़ा बैल तुरंत मर गया।
05:29
Speaker UNKNOWN
उसने मुश्किल से बैल को चार पैरों पर खड़ा किया और उसके मुंह में एक खड़ा मक्का ऐसे ठूंस दिया जैसे वह खा रहा हो।
05:37
Speaker UNKNOWN
उसके बाद वह जल्दी से मक्का के खेत के ऊपर एक ऊंची पहाड़ी पर पहुंच गया।
05:41
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई वहां से जमींदार बाबा के बारे में चिल्लाया,
05:45
Speaker UNKNOWN
मक्का।
05:47
Speaker UNKNOWN
बैल खा गया।
05:49
Speaker UNKNOWN
मक्का।
05:51
Speaker UNKNOWN
बैल खा गया।
05:53
Speaker UNKNOWN
हाथ में लाठी लेकर लालची जमींदार बाबा मक्का के खेत की ओर दौड़े।
05:59
Speaker UNKNOWN
उन्होंने देखा कि बैल मक्का खा रहा था और मक्का के पौधे भी टूटे हुए थे।
06:06
Speaker UNKNOWN
यह देखकर जमींदार बाबा अपना गुस्सा रोक नहीं पाए और हाथ की लाठी से जोर से बैल को मारा।
06:13
Speaker UNKNOWN
बैल लुढ़क कर गिर पड़ा।
06:16
Speaker UNKNOWN
जमींदार ने किसी के देखने के डर से इधर-उधर देखा।
06:21
Speaker UNKNOWN
बैल को गिरा हुआ देखकर उन्हें यकीन हो गया कि बैल मर गया है।
06:26
Speaker UNKNOWN
तभी ऊपर पहाड़ी से बैल मारा।
06:31
Speaker UNKNOWN
बैल मारा।
06:33
Speaker UNKNOWN
चिल्लाता हुआ छोटा भाई जमींदार बाबा की ओर दौड़ता हुआ आता दिखाई दिया।
06:40
Speaker UNKNOWN
वह चीख रहा था,
06:41
Speaker UNKNOWN
सावधान।
06:43
Speaker UNKNOWN
बैल मत मारो।
06:45
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई कुछ ही देर में वहां पहुंच गया।
06:49
Speaker UNKNOWN
जमींदार क्या करें?
06:52
Speaker UNKNOWN
क्या न करें?
06:54
Speaker UNKNOWN
की स्थिति में थे।
06:56
Speaker UNKNOWN
वह चुपचाप मरे हुए बैल को देखते रहे।
06:59
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने कहा,
07:01
Speaker UNKNOWN
अगर मेरी फसल खाई होती, तो मैं कुछ नहीं कहता।
07:05
Speaker UNKNOWN
लेकिन तुमने मेरा बैल क्यों मारा?
07:08
Speaker UNKNOWN
अब मैं कचहरी में शिकायत करूंगा।
07:11
Speaker UNKNOWN
उस समय गाय या बैल को मारना एक बड़ा पाप और अपराध माना जाता था।
07:18
Speaker UNKNOWN
कचहरी में शिकायत करने पर मृत्युदंड तक हो सकता था।
07:23
Speaker UNKNOWN
जमींदार बाबा ने पहले किसी के देखने के डर से चारों ओर देखा और फिर छोटे भाई की ओर मुड़कर कहा,
07:29
Speaker UNKNOWN
देखो बेटा,
07:32
Speaker UNKNOWN
कचहरी में शिकायत मत करो।
07:35
Speaker UNKNOWN
किसी को मत बताना कि मैंने बैल को मारा है।
07:41
Speaker UNKNOWN
कह देना कि मेरा बैल खुद मर गया।
07:45
Speaker UNKNOWN
वह बूढ़ा था।
07:47
Speaker UNKNOWN
मैं तुम्हें चांदी के ढेर सारे सिक्के दूंगा।
07:52
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने तुरंत विचार किया और कहा,
07:56
Speaker UNKNOWN
अगर आप ऐसा कहते हैं, तो मैं ऐसा ही करूंगा।
08:01
Speaker UNKNOWN
आपको फंसाने से मुझे क्या मिलेगा?
08:04
Speaker UNKNOWN
जमींदार बाबा ने चांदी के सिक्कों का लेन-देन अपने घर में ही किया और वे वहां से चले गए।
08:11
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई बैल के सिर पर हाथ फेरते हुए कहने लगा,
08:16
Speaker UNKNOWN
दोस्त,
08:18
Speaker UNKNOWN
तुमने मुझे क्या सिखाया?
08:21
Speaker UNKNOWN
तुमने मुझे जीवन दिया।
08:23
Speaker UNKNOWN
वह घर गया, फावड़ा लेकर आया और बैल को वहीं घंटों तक खोदता रहा।
08:28
Speaker UNKNOWN
उसने एक बड़ा गढ़ा खोदा।
08:31
Speaker UNKNOWN
अकेले ही उसने मरे हुए बैल को गड्ढे में डाला और दफना दिया।
08:37
Speaker UNKNOWN
फिर छोटा भाई भी घर चला गया।
08:40
Speaker UNKNOWN
शाम को जब अपना बिराना कोई नहीं था, छोटा भाई घर से जमींदार बाबा के महल की ओर चला।
08:48
Speaker UNKNOWN
बाबा महल के छज्जे पर उसका ही इंतजार कर रहे थे।
08:52
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई के पहुंचते ही वे उसे अंदर ले गए।
08:56
Speaker UNKNOWN
उन्होंने अपनी अलमारी में रखे जगमगाते चांदी के सिक्कों का एक बोरा भरा और छोटे भाई की ओर मुड़कर बोले,
09:03
Speaker UNKNOWN
क्या यह एक बोरा तुम्हारे लिए काफी होगा?
09:07
Speaker UNKNOWN
बेटा।
09:09
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने जल्दी से कहा,
09:12
Speaker UNKNOWN
बाबा, मुझे इतना ही बहुत है।
09:15
Speaker UNKNOWN
जमींदार बाबा ने बोरा उठाते हुए कहा, ठीक है, ले जाओ।
09:21
Speaker UNKNOWN
अपने घर गृहस्थी को अच्छे से चलाना।
09:25
Speaker UNKNOWN
चांदी के सिक्कों से भरा वह बोरा लेकर वह घर चला गया।
09:31
Speaker UNKNOWN
एक ही दिन में उसने उस बूढ़े बैल की सलाह से इतनी बड़ी रकम कमा ली।
09:37
Speaker UNKNOWN
उसने बोरा घर की अनाज कोठरी में रखा और वहीं सो गया।
09:43
Speaker UNKNOWN
अगले दिन सुबह छोटा भाई बड़े भाई के पास गया।
09:48
Speaker UNKNOWN
उसने बड़े भाई से एक तुलाधार मांगा।
09:51
Speaker UNKNOWN
बड़ा भाई धूर्त था।
09:53
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा, यह भिखारी एक तुलाधार क्या करेगा?
09:57
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा और भाई को एक तुलाधार दिया।
10:01
Speaker UNKNOWN
लेकिन तुलाधार के ढक्कन पर थोड़ा गोबर लगा दिया।
10:05
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई के वहां से तुलाधार लेकर चले जाने के बाद उसने अपनी पत्नी से कहा,
10:11
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने ऐसा क्या पैदा किया होगा?
10:16
Speaker UNKNOWN
जो वह तुलाधार लेने आया है?
10:19
Speaker UNKNOWN
शायद मक्का या बाजरा जैसा कुछ होगा।
10:23
Speaker UNKNOWN
शायद वह यह दिखाने आया है कि उसने भी कुछ कमाया है।
10:29
Speaker UNKNOWN
उसने कहा,
10:31
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई तुलाधार लेकर सीधा घर गया।
10:36
Speaker UNKNOWN
घर में घुसने के बाद उसने मुख्य दरवाजा बंद कर लिया।
10:41
Speaker UNKNOWN
कोठरी के पास पहुंचकर उसने बोरे से चमकते हुए चांदी के सिक्के बिछी हुई चटाई पर गिरा दिए।
10:47
Speaker UNKNOWN
उसके बाद उसने एक तुलाधार भरते हुए बोरे में खाली कर दिया।
10:53
Speaker UNKNOWN
एक तुलाधार भरते ही उसने एक सिक्का रखा।
10:58
Speaker UNKNOWN
भर जाने के बाद उसने जमीन पर पड़े सिक्के गिने।
11:02
Speaker UNKNOWN
कुल दस सिक्के थे।
11:04
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई दस तुलाधार चांदी के सिक्के पाकर दंग रह गया।
11:10
Speaker UNKNOWN
उसने बोरे का मुंह बांधा और उसे पुरानी जगह पर रख दिया।
11:15
Speaker UNKNOWN
वह वहां से तुलाधार लेकर सीधे अपने भाई के पास आया।
11:21
Speaker UNKNOWN
उसने तुलाधार बड़े भाई को दी।
11:24
Speaker UNKNOWN
तुलाधार का काम छोटा था।
11:28
Speaker UNKNOWN
उसने तुरंत ले लिया।
11:30
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने कहा,
11:32
Speaker UNKNOWN
यह लो,
11:34
Speaker UNKNOWN
तुलाधार।
11:36
Speaker UNKNOWN
बड़ा भाई अंदर चला गया तो छोटा भाई भी चला गया।
11:41
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई का बड़ा भाई और भाभी अंदर मिले।
11:45
Speaker UNKNOWN
उन्होंने तुलाधार के ढक्कन पर देखा।
11:48
Speaker UNKNOWN
गोबर पर चमकता हुआ चांदी का सिक्का चिपका हुआ था।
11:53
Speaker UNKNOWN
उन्होंने यह देखकर लालच में लाड़ टपकाई कि इतने से मक्के में चांदी का सिक्का कहां से आया?
12:01
Speaker UNKNOWN
देखो,
12:03
Speaker UNKNOWN
तुमने बहुत धन कमाया है।
12:06
Speaker UNKNOWN
मैं उसे बहका कर सब कुछ निकलवाता हूं।
12:10
Speaker UNKNOWN
हमें भी उसके कहे अनुसार पैसे कमाने चाहिए।
12:15
Speaker UNKNOWN
बड़ा भाई अपनी पत्नी से कह रहा था।
12:19
Speaker UNKNOWN
काफी दिनों से उसकी भाई से मुलाकात नहीं हुई थी।
12:23
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई भी अपने काम में व्यस्त था।
12:27
Speaker UNKNOWN
एक सुबह अपना नित्य कर्म करने के बाद छोटा भाई बड़े भाई के घर निकला।
12:34
Speaker UNKNOWN
लोभी और लालची बड़े भाई ने उसे खूब प्यार किया और कहा,
12:40
Speaker UNKNOWN
इतने दिन तुझे देखा नहीं।
12:44
Speaker UNKNOWN
देखकर लगा कि बीमार पड़ गया है।
12:48
Speaker UNKNOWN
मैं तो तुझे देखने आ ही रहा था।
12:51
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने सिर हिलाकर कहा,
12:54
Speaker UNKNOWN
नहीं,
12:56
Speaker UNKNOWN
बीमार कहा।
12:58
Speaker UNKNOWN
आजकल तो काम से फुर्सत नहीं मिलती।
13:01
Speaker UNKNOWN
कभी बाजार,
13:04
Speaker UNKNOWN
कभी कहीं।
13:06
Speaker UNKNOWN
अच्छा,
13:08
Speaker UNKNOWN
अंदर आ जाओ।
13:10
Speaker UNKNOWN
तुमसे कुछ खास बात करनी है।
13:13
Speaker UNKNOWN
बड़े भाई ने छोटे भाई से कहा।
13:17
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने मन ही मन सोचा, इन्हें तो कभी ऐसा अंदर आओ, बैठो नहीं कहा था।
13:24
Speaker UNKNOWN
इनकी नियत जरूर खराब है।
13:27
Speaker UNKNOWN
नहीं, मैं यहीं बैठूंगा।
13:30
Speaker UNKNOWN
छोटा भाई सीढ़ी पर बैठ गया।
13:33
Speaker UNKNOWN
बड़ा भाई भी छोटे भाई के पास आकर बैठ गया और धीरे से पूछा, भाई,
13:40
Speaker UNKNOWN
इतनी सी तुलाधार में चांदी के सिक्के कहां से लाए?
13:45
Speaker UNKNOWN
तुम्हारे पास तो और भी चांदी के सिक्के हैं।
13:48
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने उसकी बात को हल्के में लिया और हंसकर बोला,
13:52
Speaker UNKNOWN
मेरा बूढ़ा बैल गौशाला में देखा था ना?
13:57
Speaker UNKNOWN
कितने दिन हो गए थे?
13:59
Speaker UNKNOWN
मैंने उसे जमींदार गांव ले जाकर काट दिया।
14:03
Speaker UNKNOWN
सभी को बैल का मांस महे में बेचा।
14:07
Speaker UNKNOWN
उसी के पैसे हैं यह चांदी के सिक्के।
14:10
Speaker UNKNOWN
इतना कहकर छोटा भाई हंस पड़ा।
14:13
Speaker UNKNOWN
बड़े भाई और उसकी पत्नी ने भी सलाह की।
14:17
Speaker UNKNOWN
उन्होंने भी जमींदार गांव ले जाकर बैल काटने का निश्चय किया।
14:23
Speaker UNKNOWN
वह अपनी गौशाला का सबसे बड़ा, अच्छा और मजबूत बैल लेकर जमींदार गांव गया।
14:29
Speaker UNKNOWN
गांव के एक किनारे पर ले जाकर उसने बैल को काटा और मांस के टुकड़े किए।
14:35
Speaker UNKNOWN
एक आदमी भी मांस खरीदने नहीं आया।
14:38
Speaker UNKNOWN
उसने मांस के टुकड़े एक बोरे में बांधे और जमींदारों के घर-घर बांटने लगा।
14:45
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई के बड़े भाई ने बैल काटकर घर-घर मांस बांटने की बात फैल गई।
14:51
Speaker UNKNOWN
जमींदार भी कहते ही पकड़ लिया, बिना मेहनत ही मिल गया की तरह उसे पकड़ लिया और बांध लिया।
14:57
Speaker UNKNOWN
किसी ने एक-दो थप्पड़ भी मारे।
15:00
Speaker UNKNOWN
तभी एक जमींदार बोला, बैल काटकर बेचने वाले इस बदमाश को अब कचहरी ले जाना चाहिए।
15:07
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई के बड़े भाई ने जमींदार समाज के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगी।
15:14
Speaker UNKNOWN
वह बहुत पश्चाताप और विलाप करते हुए रोया।
15:18
Speaker UNKNOWN
समाज ने उसे माफ कर दिया।
15:22
Speaker UNKNOWN
लेकिन उसे दंड के रूप में बड़ी रकम चुकानी पड़ी।
15:28
Speaker UNKNOWN
दंड चुकाने के लिए उसने अपनी जमीन बेच दी।
15:32
Speaker UNKNOWN
अनाज उगाने वाली जमीन भी बेच दी और समाज को दंड चुकाया।
15:39
Speaker UNKNOWN
उसके बाद उसकी स्थिति बिगड़ गई।
15:42
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि उसे इस स्थिति में लाने वाला छोटे भाई ने चाल चली है।
15:49
Speaker UNKNOWN
वह छोटे भाई से पहले से भी ज्यादा गुस्सा हो गया और बदला लेने का विचार किया।
15:54
Speaker UNKNOWN
एक दिन उसने अपने घर में छोटे भाई को पकड़ा।
15:59
Speaker UNKNOWN
वे पति-पत्नी मिलकर छोटे भाई को बोरे में कसकर बांध दिया।
16:05
Speaker UNKNOWN
बोरे में डालने के बाद उसने दांत पीसते हुए कहा, अब तुझे जंगल पार की बड़ी नदी के बीच में ले जाकर डुबो दूंगा।
16:13
Speaker UNKNOWN
बोरे में एक बड़ा पत्थर भी बांधा है।
16:17
Speaker UNKNOWN
तुझे डुबो दूंगा और तेरी सारी संपत्ति अपनी बना लूंगा।
16:22
Speaker UNKNOWN
बोरे के अंदर छोटे भाई ने उसकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप बैठा रहा।
16:29
Speaker UNKNOWN
उसका बड़ा भाई थोड़ी-थोड़ी देर में बड़बड़ा रहा था।
16:34
Speaker UNKNOWN
बोरे पर एक रस्सी बांधी।
16:37
Speaker UNKNOWN
उसकी पत्नी ने बोरा उठाने में मदद की।
16:41
Speaker UNKNOWN
उन्होंने छोटे भाई को बोरे में उठाया और बड़ा भाई जंगल के रास्ते पर चल पड़ा।
16:47
Speaker UNKNOWN
चलते-चलते वह थक गया और बिल्कुल थक गया।
16:52
Speaker UNKNOWN
मुश्किल से उसने जंगल पार किया।
16:55
Speaker UNKNOWN
लेकिन भाई को नदी के बीच में ले जाकर डुबोने की हिम्मत उसे नहीं हुई।
17:01
Speaker UNKNOWN
उसने बोरा एक पेड़ की टहनी पर रखा और लंबी सांस ली।
17:06
Speaker UNKNOWN
उसे भूख भी लग रही थी।
17:08
Speaker UNKNOWN
उसने सोचा कि पहले खाना पकाकर खा ले, उसके बाद ही नदी में डुबोएगा।
17:14
Speaker UNKNOWN
वह किनारे की ओर चला।
17:16
Speaker UNKNOWN
नदी के किनारे उसने एक चूल्हा बनाया और खाना पकाने लगा।
17:21
Speaker UNKNOWN
बोरे के अंदर से छोटे भाई ने सड़क पर घोड़े की टापों की आवाज सुनी।
17:27
Speaker UNKNOWN
बोरे के एक छोटे छेद से उसने सोचा कि यह कौन है?
17:31
Speaker UNKNOWN
लालची जमींदार घोड़े पर उसी रास्ते से आ रहा था।
17:36
Speaker UNKNOWN
उसने जमींदार को फंसाने का उपाय तुरंत रच लिया।
17:40
Speaker UNKNOWN
उसने अपने चांदी के सिक्के निकाले, तुलाधार में रखे और छेद से बजाए और गुनगुनाने लगा,
17:46
Speaker UNKNOWN
पैसे बन रहे हैं,
17:49
Speaker UNKNOWN
पैसे बन रहे हैं।
17:51
Speaker UNKNOWN
जंगल के किनारे, नदी के किनारे, गढ़ढे के अंदर पैसे बन रहे हैं।
17:58
Speaker UNKNOWN
पैसे बजने की आवाज के साथ-साथ यह सुनकर कि पैसे बन रहे हैं,
18:05
Speaker UNKNOWN
जमींदार लालच में पास पहुंचा और घोड़े को एक पेड़ की टहनी से बांधकर घोड़े से उतर गया।
18:11
Speaker UNKNOWN
बोरे के पास पहुंचकर जमींदार ने कहा,
18:13
Speaker UNKNOWN
तुम कौन हो और क्या कर रहे हो?
18:17
Speaker UNKNOWN
पैसे बजने की आवाज भी सुनाई दे रही है।
18:20
Speaker UNKNOWN
बोरे के अंदर से आवाज आई,
18:22
Speaker UNKNOWN
मैं भी एक मुसाफिर हूं।
18:25
Speaker UNKNOWN
यह चांदी के सिक्के देने वाला बोरा है।
18:29
Speaker UNKNOWN
मैं भी अभी इसमें घुसकर सिक्के बना रहा हूं।
18:33
Speaker UNKNOWN
बात सुनकर जमींदार बहुत लालची हो गया और बोला,
18:35
Speaker UNKNOWN
मुसाफिर,
18:37
Speaker UNKNOWN
तुम्हारी बारी हो गई ना?
18:40
Speaker UNKNOWN
क्या मुझे भी थोड़ी देर के लिए बनाने का मौका मिलेगा?
18:45
Speaker UNKNOWN
मेरी बारी नहीं हुई।
18:47
Speaker UNKNOWN
बोरे से फिर आवाज आई, अगर थोड़ी देर के लिए है, तो मैं दे सकता हूं।
18:52
Speaker UNKNOWN
जमींदार ने बोरा खोला और लड़के को बाहर निकाला।
18:57
Speaker UNKNOWN
उसकी तुलाधार में चमकते हुए चांदी के सिक्के देखकर जमींदार ने खटखटाकर कुछ निगल लिया।
19:04
Speaker UNKNOWN
जमींदार जल्दी से बोरे में घुस गया।
19:07
Speaker UNKNOWN
छोटे भाई ने बोरे का मुंह कसकर बांध दिया।
19:11
Speaker UNKNOWN
लो जमींदार बाबा, ध्यान से चांदी के सिक्के बनाना।
19:16
Speaker UNKNOWN
अगर कोई बुलाए, तो बोलना मत, नहीं तो सिक्के नहीं बनेंगे।
19:21
Speaker UNKNOWN
इतना कहकर वह जमींदार के घोड़े पर चढ़कर घर चला गया।
19:28
Speaker UNKNOWN
बड़े भाई ने खाना पकाया और खाया।
19:32
Speaker UNKNOWN
उसने आराम किया।
19:34
Speaker UNKNOWN
अब उसे बोरा उठाकर नदी के बीच में ले जाकर डुबोने की हिम्मत हुई।
19:41
Speaker UNKNOWN
वह छोटे भाई का बोरा रखने वाली जगह पर आया।
19:46
Speaker UNKNOWN
आदमी के आने का पता चलते ही बोरे के अंदर से जमींदार बोला, ए लड़के,
19:52
Speaker UNKNOWN
पैसे कहां बन रहे हैं?
19:55
Speaker UNKNOWN
अभी तो पैसे बन रहे हैं, अब थोड़ी देर में तुलाधार भर चांदी के सिक्के बनेंगे।
20:01
Speaker UNKNOWN
गुस्से में उसने वह बोरा उठाया और नदी की ओर चला।
20:06
Speaker UNKNOWN
नदी के बीच में पहुंचकर उसने बोरे को पानी में डुबो दिया।
20:11
Speaker UNKNOWN
जमींदार कुछ बोल पाता,
20:14
Speaker UNKNOWN
वह डूब गया और खत्म हो गया।
20:17
Speaker UNKNOWN
कुछ ही देर में वह मर गया।
20:20
Speaker UNKNOWN
भाई घोड़े पर चढ़कर घर लौट आया।
20:23
Speaker UNKNOWN
अब उसके खिलाफ साजिश करने वाला कोई नहीं था।
20:28
Speaker UNKNOWN
वह समाज में संपन्न और प्रतिष्ठित होकर जीवन बिताने लगा।
20:34
Speaker UNKNOWN
उसकी भाभी जीवन भर इस इंतजार में बैठी रही कि उसका पति हाथी पर चढ़कर चांदी के सिक्के लेकर आएगा, लेकिन वह कभी लौटकर नहीं आया।
Topics:लालची भाभीचालाक देवरलोककथामोरल स्टोरीहिंदी कहानीपरिवारिक कहानीईमानदारीचतुराईन्यायहिंदी लोककथा

Frequently Asked Questions

छोटा भाई अपने हिस्से की संपत्ति क्यों लेकर अलग हो गया?

छोटा भाई बड़े भाई और भाभी के अत्याचार और धोखे से तंग आकर अपनी पैतृक संपत्ति का हिस्सा लेकर अलग रहने का फैसला करता है।

बूढ़ा बैल छोटे भाई को क्या सलाह देता है?

बूढ़ा बैल छोटे भाई को अमीर बनने का एक उपाय बताता है, जिसके तहत वह जमींदार के मक्का के खेत में जाकर चालाकी से धन कमाता है।

कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि लालच से बचना चाहिए, ईमानदारी और चतुराई से ही सफलता मिलती है, और परिवार में न्याय और सम्मान बनाए रखना चाहिए।

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