17 फरवरी 2026 की भौमवती अमावस्या और शतभिषा नक्षत्र पर विशेष पूजा विधि, जो लक्ष्मी कृपा और बाधा नाश के लिए अत्यंत शुभ है।
Key Takeaways
- 17 फरवरी 2026 को भौमवती अमावस्या और शतभिषा नक्षत्र का दुर्लभ योग बन रहा है।
- दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का भोजपत्र पर लेखन और पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
- इस दिन वैदिक विद्वानों के साथ महाप्रयोग में भाग लेकर लक्ष्मी कृपा और बाधा नाश संभव है।
- इस उपाय से संपत्ति, संतान और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ इस पूजा में सम्मिलित होना अत्यंत लाभकारी है।
Summary
- 17 फरवरी 2026 को भौमवती अमावस्या का दुर्लभ योग बन रहा है, जो मंगलवार के दिन अमावस्या होने पर बनता है।
- इस दिन शतभिषा नक्षत्र भी उपस्थित रहेगा, जो इस योग को और भी विशेष बनाता है।
- मार्कंडेय पुराण और दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र में इस योग के महत्व और उपाय का वर्णन है।
- भोजपत्र पर दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र लिखकर पूजा करने से दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट दूर होते हैं।
- इस उपाय से शत्रु बाधा समाप्त होती है, संपत्ति और संतान की प्राप्ति होती है।
- 17 फरवरी 2026 की रात्रि को वैदिक विद्वानों के साथ महाप्रयोग किया जाएगा, जिसमें वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ा जा सकता है।
- इस महाप्रयोग में सम्मिलित होकर भक्त अपने जीवन की दरिद्रता और दुखों से मुक्ति पा सकते हैं।
- यदि स्वयं सामर्थ्य हो तो यह उपाय किसी विद्वान ब्राह्मण से भी करवाया जा सकता है।
- संपर्क नंबर उपलब्ध है जिससे यंत्र घर तक भेजने की सुविधा भी दी जाएगी।
- इस योग का महत्व समय और ग्रहों की गणना के अनुसार अत्यंत उच्च माना गया है।




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