क्या यीशु सच में जीवित है ? यीशु का पुनरुत्थान सच है या कहानी ? Is jesus Rose from death #Easter

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00:00
Speaker A
क्या आपने कभी ऐसा कुछ सुना है जिसे सुनकर आपकी आत्मा तक हिल जाए?
00:05
Speaker A
कोई व्यक्ति जिसे क्रूस पर लटका कर मार दिया गया, जिसकी पसली छेदी गई,
00:10
Speaker A
जिसके शरीर से रक्त और पानी बह निकला, जिसे एक अंधेरी कब्र में रख दिया गया और जिसकी कब्र पर भारी पत्थर लुढ़का दिया गया।
00:17
Speaker A
क्या वह तीन दिन बाद जीवित हो सकता है?
00:20
Speaker A
यदि यह सत्य है तो यह इतिहास का सबसे बड़ा सत्य है।
00:25
Speaker A
और यदि यह झूठ है तो यह अब तक का सबसे बड़ा मजाक है।
00:30
Speaker A
यही प्रश्न सदियों से पूरी मानव जाति को दो भागों में बांटता आ रहा है।
00:35
Speaker A
एक और वे हैं जो कहते हैं कि यीशु सच में मृतकों में से जी उठा।
00:40
Speaker A
और दूसरी ओर वे जो इसे एक कल्पना, एक छलावा या एक साजिश मानते हैं।
00:45
Speaker A
यरूशलेम में हलचल थी, अफवाहें तेजी से फैल रही थी।
00:49
Speaker A
कब्र खाली थी।
00:51
Speaker A
कुछ कह रहे थे कि उसके चेलों ने उसका शरीर चुरा लिया।
00:55
Speaker A
कुछ कह रहे थे कि यह यहूदियों की साजिश थी।
00:59
Speaker A
और कुछ कह रहे थे वह सच में जी उठा है। यदि यह सत्य था तो इसका अर्थ यह था कि मृत्यु की शक्ति टूट चुकी थी, अनंत जीवन संभव हो चुका था और परमेश्वर ने अपने पुत्र के माध्यम से संसार को उद्धार दे दिया था।
01:42
Speaker A
लेकिन यहूदी अगुओं के लिए यह स्वीकार करना असंभव था।
01:58
Speaker A
इसलिए उन्होंने रोमी सैनिकों को धन देकर यह अफवाह फैलाई कि चेलों ने उसका शरीर चुरा लिया।
02:05
Speaker A
लेकिन यह कहानी स्वयं में असंगत थी।
02:08
Speaker A
रोमी सैनिक पहरा दे रहे थे और उनकी गलती की सजा मृत्यु थी।
02:12
Speaker A
फिर भी यदि वे सो गए होते तो यह कैसे जानते कि शरीर किसने चुराया?
02:18
Speaker A
और फिर उन घटनाओं ने दुनिया को हिला दिया।
02:21
Speaker A
यीशु के अनुयायियों ने दावा किया कि उन्होंने उसे जीवित देखा।
02:25
Speaker A
मरियम मगदलीनी ने कहा कि वह उसे मिली।
02:29
Speaker A
पत्रस और यूहन्ना ने कहा कि उन्होंने उसे देखा।
02:32
Speaker A
और 500 से अधिक लोगों ने एक साथ यह गवाही दी कि उन्होंने यीशु को पुनर्जीवित अवस्था में देखा।
02:38
Speaker A
क्या इतने सारे लोग एक ही समय में भ्रम का शिकार हो सकते थे?
02:41
Speaker A
अगर यीशु का शरीर सच में चुराया गया था तो फिर इतने वर्षों बाद भी वह मिला क्यों नहीं?
02:48
Speaker A
लेकिन इससे भी अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह था कि उसके अनुयायी जो पहले डर के कारण छिप गए थे, अचानक साहसी बन गए।
02:55
Speaker A
वे यातनाएं सहने लगे, सताए गए,
02:58
Speaker A
जेलों में डाले गए,
03:00
Speaker A
मारे गए,
03:02
Speaker A
लेकिन वे डटे रहे।
03:04
Speaker A
पत्रस को उल्टा क्रूस पर लटका कर मार दिया गया।
03:08
Speaker A
पौलोस को तलवार से मार दिया गया।
03:10
Speaker A
याकूब को पत्थरवाह कर दिया गया।
03:12
Speaker A
लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि पुनरुत्थान झूठ था।
03:15
Speaker A
क्या कोई झूठ के लिए अपनी जान देता है?
03:17
Speaker A
अब प्रश्न यह नहीं कि यीशु की कब्र खाली थी या नहीं।
03:21
Speaker A
प्रश्न यह है कि यीशु आज कहां है?
03:24
Speaker A
यदि पुनरुत्थान सत्य है तो इसका अर्थ यह है कि वह आज भी जीवित है।
03:28
Speaker A
और यदि वह जीवित है तो वह आपको बुला रहा है।
03:31
Speaker A
अब निर्णय आपका है, क्या आप इसे एक ऐतिहासिक सत्य के रूप में स्वीकार करेंगे?
03:35
Speaker A
क्या आप इसे मात्र एक कथा मानेंगे?
03:38
Speaker A
या क्या आप इसे अपने जीवन का आधार बनाएंगे?
03:41
Speaker A
यीशु ने कहा, मैं पुनरुत्थान और जीवन हूं।
03:45
Speaker A
जो मुझ पर विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा।
03:49
Speaker A
अब प्रश्न यह है, क्या आप इस पर विश्वास करते हैं?
03:52
Speaker A
यीशु जीवित है, क्या आप उसे स्वीकार करेंगे?
03:55
Speaker A
इतिहास में कई महापुरुष आए और चले गए।
04:00
Speaker A
राजाओं ने साम्राज्य खड़े किए और धूल में मिल गए।
04:04
Speaker A
योद्धाओं ने युद्ध जीते और समय के प्रवाह में विलीन हो गए।
04:09
Speaker A
लेकिन एक नाम ऐसा है जो समय के साथ और अधिक जीवंत होता गया।
04:14
Speaker A
एक व्यक्ति जिसे क्रूस पर चढ़ाया गया, जिसे मृत्यु की पुष्टि के बाद कब्र में रखा गया।
04:23
Speaker A
और फिर तीन दिन बाद वह जीवित पाया गया।
04:27
Speaker A
यह संसार का सबसे विस्मयकारी दावा है।
04:31
Speaker A
यीशु मसीह का पुनरुत्थान।
04:34
Speaker A
यह केवल एक धार्मिक मान्यता नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक प्रश्न है।
04:39
Speaker A
क्या यह वास्तव में हुआ था?
04:41
Speaker A
या यह केवल एक कल्पना है, एक मनगढ़ंत कहानी?
04:45
Speaker A
इस पर विश्वास करने वाले कहते हैं कि यह इतिहास का सबसे बड़ा सत्य है।
04:50
Speaker A
और इसका प्रमाण केवल आत्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक, भौतिक और तर्कसंगत है।
04:56
Speaker A
लेकिन विरोधी कहते हैं कि यह असंभव है, यह विज्ञान के विरुद्ध है, यह प्राकृतिक नियमों के विपरीत है।
05:02
Speaker A
तो सच्चाई क्या है?
05:05
Speaker A
क्या यीशु मसीह सच में जी उठा था?
05:08
Speaker A
और यदि हां तो इसके प्रमाण क्या हैं?
05:11
Speaker A
पहला प्रमाण।
05:13
Speaker A
खाली कब्र।
05:15
Speaker A
सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण खाली कब्र है।
05:20
Speaker A
यीशु को क्रूस पर चढ़ाने के बाद यहूदियों और रोमी अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि उसका शरीर सुरक्षित रूप से कब्र में रहे।
05:27
Speaker A
अरि मथिया के यूसुफ ने उसे अपनी नई खुदी हुई कब्र में रखा।
05:33
Speaker A
एक भारी पत्थर लुढ़का कर उसे बंद कर दिया गया।
05:37
Speaker A
और रोमी सैनिकों को पहरेदारी के लिए तैनात कर दिया गया।
05:42
Speaker A
लेकिन तीन दिन बाद कब्र खाली थी।
05:46
Speaker A
यहूदियों और रोमी अधिकारियों के पास इस समस्या का केवल एक समाधान था।
05:52
Speaker A
यीशु का शरीर सार्वजनिक रूप से दिखाना।
05:55
Speaker A
यदि उनका शव मौजूद होता तो वे इसे दिखाकर पुनरुत्थान के दावे को जड़ से खत्म कर सकते थे।
06:02
Speaker A
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
06:04
Speaker A
तो सवाल यह है, शरीर गया कहां?
06:07
Speaker A
पहला, क्या चेलों ने शरीर चुरा लिया?
06:10
Speaker A
लेकिन वे तो भयभीत होकर छिपे हुए थे।
06:13
Speaker A
क्या वे सशस्त्र रोमी सैनिकों को हरा सकते थे?
06:17
Speaker A
अगर उन्होंने चोरी की होती तो क्या वे एक झूठे दावे के लिए अपनी जान कुर्बान कर देते?
06:22
Speaker A
दूसरा, सैकड़ों गवाह।
06:25
Speaker A
अगर कोई घटना एक या दो लोगों के द्वारा देखी जाए तो इसे भ्रम कहा जा सकता है।
06:30
Speaker A
लेकिन अगर एक ही घटना को अलग-अलग समय और स्थानों पर सैकड़ों लोग देखें तो क्या इसे झूठ कहा जा सकता है?
06:36
Speaker A
बाइबल कहती है कि यीशु के पुनरुत्थान के बाद उसने अपने अनुयायियों को दर्शन दिए।
06:43
Speaker A
मरियम मगदलीनी को,
06:45
Speaker A
दो चेलों को इम्माउस के रास्ते पर,
06:48
Speaker A
पत्रस को,
06:49
Speaker A
10 चेलों को बंद कमरे में,
06:51
Speaker A
सभी 11 चेलों को,
06:53
Speaker A
500 से अधिक लोगों को एक साथ,
06:56
Speaker A
पौलोस को,
06:57
Speaker A
कई वर्षों बाद।
06:59
Speaker A
क्या यह संभव है कि 500 से अधिक लोग एक साथ भ्रम का शिकार हो जाएं?
07:03
Speaker A
क्या यह संभव है कि इतने लोगों ने एक साथ एक ही प्रकार का अनुभव किया हो?
07:07
Speaker A
तीसरा प्रमाण।
07:09
Speaker A
चेलों का परिवर्तन।
07:11
Speaker A
पुनरुत्थान से पहले यीशु के चेले भयभीत और निराश थे।
07:16
Speaker A
जब यीशु को गिरफ्तार किया गया तो पत्रस ने तीन बार उसका इनकार किया।
07:20
Speaker A
अन्य चेले छिप गए।
07:22
Speaker A
वे सभी डरे हुए थे।
07:24
Speaker A
लेकिन पुनरुत्थान के बाद वे पूरी दुनिया को यह संदेश देने के लिए निकल पड़े कि यीशु जीवित है।
07:31
Speaker A
पत्रस जिसने यीशु का तीन बार इनकार किया था अब साहस पूर्वक यरूशलेम में खड़े होकर प्रचार करता है।
07:38
Speaker A
तुमने जीवन के कर्ता को मार डाला लेकिन परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया।
07:44
Speaker A
पौलोस जो पहले मसीहियों को सताता था अब कहता है यदि मसीह नहीं जी उठा।
07:50
Speaker A
तो हमारा प्रचार भी व्यर्थ है और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है।
07:54
Speaker A
शिष्य जो पहले डर के मारे छिपे थे अब संसार भर में प्रचार कर रहे थे, सताए जा रहे थे, मारे जा रहे थे।
08:02
Speaker A
लेकिन फिर भी यही कहते रहे।
08:05
Speaker A
हमने उसे जीवित देखा है।
08:07
Speaker A
कोई भी व्यक्ति झूठ के लिए अपनी जान नहीं देता।
08:10
Speaker A
वे सभी यातनाओं और मृत्यु का सामना करने के लिए तैयार थे।
08:15
Speaker A
क्योंकि वे जानते थे कि यह सत्य है।
08:18
Speaker A
चौथा प्रमाण।
08:20
Speaker A
प्रारंभिक चर्च की स्थापना।
08:22
Speaker A
यीशु के अनुयायी केवल यह प्रचार ही नहीं कर रहे थे कि वह जीवित है।
08:28
Speaker A
बल्कि उन्होंने एक नया जीवन जीना शुरू कर दिया था।
08:31
Speaker A
वे यहूदियों के सप्त यानी शनिवार की जगह रविवार को आराधना करने लगे क्योंकि यह पुनरुत्थान का दिन था।
08:38
Speaker A
वे एक दूसरे के साथ प्रेम और बलिदान का जीवन जीने लगे।
08:42
Speaker A
मसीही विश्वास का प्रचार रोका नहीं जा सका बल्कि यह पूरे रोमी साम्राज्य में फैलता गया।
08:48
Speaker A
पांचवा प्रमाण।
08:50
Speaker A
यीशु ने स्वयं अपने पुनरुत्थान की भविष्यवाणी की थी।
08:54
Speaker A
यीशु ने अपने शिष्यों से पहले ही कह दिया था।
08:58
Speaker A
मनुष्य का पुत्र मार डाला जाएगा लेकिन तीन दिन बाद जी उठेगा।
09:02
Speaker A
यदि पुनरुत्थान नहीं हुआ होता तो यीशु झूठा सिद्ध होते।
09:07
Speaker A
लेकिन पुनरुत्थान ने साबित कर दिया कि वह वही थे जो उन्होंने कहा था।
09:13
Speaker A
परमेश्वर का पुत्र, संसार का उद्धारकर्ता।
09:16
Speaker A
इतिहास में कोई अन्य घटना इतनी प्रमाणित नहीं जितनी यीशु मसीह का पुनरुत्थान।
09:22
Speaker A
खाली कब्र,
09:24
Speaker A
सैकड़ों प्रत्यक्षदर्शी गवाह,
09:26
Speaker A
शिष्यों का निडर परिवर्तन,
09:28
Speaker A
प्रारंभिक कलीसिया की स्थापना,
09:31
Speaker A
और यीशु की पूर्व भविष्यवाणी।
09:34
Speaker A
यह सभी प्रमाण एक ही सत्य की ओर इशारा करते हैं।
09:38
Speaker A
यीशु सच में मरे हुओं में से जी उठा।
09:41
Speaker A
अब प्रश्न यह है, आप इस सत्य के साथ क्या करेंगे?
09:44
Speaker A
क्या आप इसे मात्र एक कहानी मानेंगे?
09:47
Speaker A
या आप इसे अपने जीवन का आधार बनाएंगे?
09:50
Speaker A
यीशु ने कहा, मैं पुनरुत्थान और जीवन हूं।
09:53
Speaker A
जो मुझ पर विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा।
09:57
Speaker A
अब निर्णय आपका है, क्या आप इस पर विश्वास करते हैं?
10:00
Speaker A
यीशु जीवित है, क्या आप उसे स्वीकार करेंगे?
10:03
Speaker A
इतिहास के किसी भी महानतम सत्य की तरह यीशु मसीह के पुनरुत्थान को भी संदेह और विवादों का सामना करना पड़ा है।
10:09
Speaker A
कुछ लोग कहते हैं कि यह एक झूठ था।
10:12
Speaker A
कुछ इसे एक मनोवैज्ञानिक भ्रम मानते हैं।
10:15
Speaker A
तो कुछ इसे अनुयायियों की साजिश बताते हैं।
10:18
Speaker A
लेकिन क्या इनमें से कोई भी तर्क सच्चाई पर खरा उतरता है?
10:22
Speaker A
क्या सचमुच यीशु का पुनरुत्थान एक मिथक था?
10:27
Speaker A
या इसके पीछे ठोस ऐतिहासिक और तार्किक प्रमाण हैं?
10:32
Speaker A
आज हम इन सभी विरोधों को गहराई से परखेंगे।
10:34
Speaker A
और देखेंगे कि क्या वे यीशु के पुनरुत्थान के सत्य को झुठला सकते हैं?
10:39
Speaker A
पहला, शरीर को चुरा लिया गया था।
10:41
Speaker A
क्या यह संभव था?
10:43
Speaker A
यीशु के पुनरुत्थान के खिलाफ पहला तर्क यह दिया जाता है कि उसके अनुयायियों ने उसका शरीर चुरा लिया।
10:49
Speaker A
और यह झूठ फैलाया कि वह जी उठा है।
10:53
Speaker A
लेकिन यह तर्क कई कारणों से सही नहीं लगते हैं।
10:57
Speaker A
वन, रोमी सैनिकों का पहरा।
10:59
Speaker A
यीशु की कब्र पर रोमी सैनिक तैनात थे।
11:02
Speaker A
रोमी सेना अपने अनुशासन के लिए जानी जाती थी।
11:06
Speaker A
और पहरे में चूक की सजा मृत्यु थी।
11:09
Speaker A
क्या यह संभव है कि प्रशिक्षित सैनिकों ने रात में सोते हुए चेलों को शरीर चुराने दिया होगा?
11:15
Speaker A
दूसरी कब्र का भारी पत्थर।
11:18
Speaker A
कब्र के मुंह पर एक विशाल पत्थर रखा गया था जिसे हटाना आसान नहीं था।
11:23
Speaker A
क्या कुछ डरे सहमे चेले सैनिकों को चकमा देकर इतनी आसानी से पत्थर हटा सकते थे?
11:29
Speaker A
तीसरा शिष्यों का साहसिक प्रचार।
11:32
Speaker A
यदि पुनरुत्थान एक झूठ होता तो शिष्य क्यों अपनी जान जोखिम में डालते?
11:38
Speaker A
कोई भी व्यक्ति जानबूझकर एक झूठ के लिए मरने को तैयार नहीं होगा।
11:42
Speaker A
यह तर्क पूरी तरह असंगत है।
11:44
Speaker A
यदि शरीर चुराया गया होता तो यहूदी अगुए या रोमी अधिकारी इसे सार्वजनिक रूप से दिखाकर इस अफवाह को रोक सकते थे।
11:51
Speaker A
लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।
11:53
Speaker A
दूसरा, यीशु सच में मरा नहीं था।
11:56
Speaker A
क्या यह संभव था?
11:58
Speaker A
कुछ लोग दावा करते हैं कि यीशु मरा नहीं था बल्कि वह क्रूस पर बेहोश हो गया था।
12:05
Speaker A
और कब्र की ठंडक से होश में आ गया।
12:09
Speaker A
इसे सून थ्योरी कहा जाता है।
12:11
Speaker A
लेकिन यह तर्क भी कई कारणों से असंभव है।
12:15
Speaker A
वन, क्रूस पर दी जाने वाली सजा घातक थी।
12:18
Speaker A
रोमी सैनिक किसी को अधमरा छोड़ते नहीं थे।
12:21
Speaker A
यीशु की पसली में भाले से छेद किया गया था जिससे रक्त और पानी बह निकला।
12:26
Speaker A
मेडिकल साइंस के अनुसार यह मृत्यु की स्पष्ट पुष्टि है।
12:29
Speaker A
टू, एक घायल व्यक्ति कैसे कब्र से बाहर निकल सकता था?
12:31
Speaker A
यीशु के हाथों और पैरों में कीलों के गहरे घाव थे।
12:34
Speaker A
क्या यह घायल व्यक्ति बिना किसी सहायता के भारी पत्थर को लुढ़का सकता था और सैनिकों को हरा सकता था?
12:40
Speaker A
तीन, यदि यीशु केवल घायल होकर पुनर्जीवित हुआ होता।
12:42
Speaker A
तो चेले उसे एक विजयी राजा के रूप में नहीं बल्कि एक पीड़ित के रूप में देखते।
12:47
Speaker A
लेकिन उन्होंने उसके पुनरुत्थान को महिमा और शक्ति के रूप में प्रचार किया।
12:52
Speaker A
तो बात साफ है कि यह सिद्धांत।
12:55
Speaker A
पूरी तरह अवैज्ञानिक और अव्यवहारिक है।
12:59
Speaker A
यीशु सच में मरा था और उसके पुनरुत्थान के साक्ष्य इसे प्रमाणित करते हैं।
13:04
Speaker A
तीसरा, पुनरुत्थान केवल एक आत्मिक अनुभव था।
13:06
Speaker A
लेकिन क्या यह सच है?
13:08
Speaker A
कुछ आलोचकों का कहना है कि पुनरुत्थान कोई शारीरिक घटना नहीं थी बल्कि यह केवल चेलों की आत्मिक अनुभूति थी।
13:14
Speaker A
लेकिन यह तर्क भी कई स्तरों पर विफल होता है।
13:18
Speaker A
एक, यीशु को छूकर देखा गया।
13:20
Speaker A
थॉमस जो पहले संदेह कर रहा था उसने स्वयं यीशु के घावों को छूकर देखा।
13:26
Speaker A
क्या आत्मिक अनुभव में ऐसा संभव है?
13:29
Speaker A
दो, यीशु ने भोजन किया।
13:31
Speaker A
पुनरुत्थान के बाद यीशु ने चेलों के साथ भोजन किया।
13:34
Speaker A
क्या आत्मिक दर्शन में कोई भोजन कर सकता है?
13:36
Speaker A
तीन, सैकड़ों गवाह।
13:38
Speaker A
पौलोस लिखते हैं कि यीशु ने 500 से अधिक लोगों को एक साथ दर्शन दिए।
13:42
Speaker A
क्या यह संभव है कि सैकड़ों लोग एक साथ एक ही समय में एक आत्मिक अनुभव करें?
13:47
Speaker A
पुनरुत्थान केवल आत्मिक अनुभव नहीं था बल्कि यह एक वास्तविक शारीरिक घटना थी।
13:52
Speaker A
चौथा, पुनरुत्थान की कहानियां बहुत बाद में गढ़ी गई।
13:55
Speaker A
क्या यह सच है?
13:57
Speaker A
कुछ लोग दावा करते हैं कि यीशु का पुनरुत्थान बाद में गढ़ा गया था लेकिन ऐतिहासिक प्रमाण इस दावे को गलत साबित करते हैं।
14:04
Speaker A
वन, सबसे पुराने अभिलेख।
14:06
Speaker A
पहला कुरिन्थियों 15 का 3 से 7 में पौलोस लिखते हैं कि पुनरुत्थान का संदेश उन्हें यीशु के मरने के कुछ वर्षों के भीतर ही मिला था।
14:14
Speaker A
इसका अर्थ है कि पुनरुत्थान की कहानी बाद में नहीं गढ़ी गई बल्कि यह प्रारंभ से ही प्रचारित थी।
14:20
Speaker A
दो, सुसमाचारों की ऐतिहासिकता।
14:22
Speaker A
मरकुस का सुसमाचार यीशु की मृत्यु के 30 से 40 वर्षों के भीतर लिखा गया था।
14:28
Speaker A
यदि पुनरुत्थान की कहानी झूठी होती तो उस वक्त के लोग इसका खंडन कर सकते थे।
14:33
Speaker A
थ्री, कब्र के प्रथम गवाह स्त्रियां थीं।
14:36
Speaker A
प्राचीन यहूदी समाज में स्त्रियों की गवाही को अधिक मान्यता नहीं दी जाती थी।
14:40
Speaker A
यदि पुनरुत्थान की कहानी गढ़ी गई होती तो लेखक स्त्रियों को प्रथम गवाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करते।
14:46
Speaker A
पुनरुत्थान की गवाही प्रारंभ से ही दी जा रही थी।
14:50
Speaker A
और यह कोई बाद में गढ़ी गई कहानी नहीं थी।
14:53
Speaker A
पांचवा, क्या यीशु के अनुयायियों का बदला कोई प्रमाण है?
14:55
Speaker A
इतिहास गवाह है कि यीशु के पुनरुत्थान के बाद उसके अनुयायी पूरी तरह बदल गए।
15:01
Speaker A
डरपोक चेले साहसी प्रचारक बन गए।
15:04
Speaker A
पत्रस जिसने पहले यीशु का इनकार किया था अब यरूशलेम में खड़े होकर साहस पूर्वक प्रचार करता है।
15:10
Speaker A
वे सताव और मृत्यु का सामना करने के लिए तैयार थे।
15:14
Speaker A
पत्रस को उल्टा क्रूस पर चढ़ाया गया।
15:18
Speaker A
पौलोस को सिर काटकर मार दिया गया।
15:21
Speaker A
याकूब को पत्थरवाह कर दिया गया।
15:23
Speaker A
कोई भी झूठ के लिए अपनी जान नहीं देता।
15:26
Speaker A
यदि पुनरुत्थान झूठ होता तो चेले क्यों अपनी जान देने को तैयार होते?
15:31
Speaker A
यीशु के अनुयायियों का साहसिक परिवर्तन यह सिद्ध करता है कि उन्होंने पुनर्जीवित मसीह को सच में देखा था।
15:37
Speaker A
पुनरुत्थान का विरोध करने वाले तर्क इतिहास, तर्कशास्त्र और प्रमाणों की कसौटी पर टिक नहीं पाते।
15:41
Speaker A
कब्र सच में खाली थी।
15:43
Speaker A
सैकड़ों लोगों ने यीशु को पुनर्जीवित देखा।
15:46
Speaker A
शिष्यों का निडर प्रचार और बलिदान यह प्रमाणित करता है कि पुनरुत्थान सत्य था।
15:51
Speaker A
अब प्रश्न यह है, आप इस सत्य के साथ क्या करेंगे?
15:54
Speaker A
यीशु ने कहा, मैं पुनरुत्थान और जीवन हूं।
15:57
Speaker A
जो मुझ पर विश्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा।
16:01
Speaker A
पुनरुत्थान हमें बताता है कि कोई भी परिस्थिति इतनी अंधकारमय नहीं कि परमेश्वर उसमें प्रकाश ना ला सके।
16:06
Speaker A
अगर आप टूटे हुए हैं तो यीशु पुनरुत्थान की शक्ति से आपको पुनर्स्थापित कर सकता है।
16:10
Speaker A
अगर आप पाप और बंधनों में जकड़े हैं तो यीशु आपको मुक्त कर सकता है।
16:14
Speaker A
अगर आप भय और निराशा में हैं तो यीशु आपको नई आशा और शांति दे सकता है।
16:18
Speaker A
बाइबल कहती है,
16:20
Speaker A
यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है।
16:24
Speaker A
पुरानी बातें बीत गई, देखो सब कुछ नया हो गया।
16:28
Speaker A
क्या आप इस नए जीवन को अपनाना चाहते हैं?
16:31
Speaker A
जब यीशु पुनर्जीवित होकर अपने चेलों के सामने आए।
16:34
Speaker A
तो उनका पहला शब्द था, शांति तुम्हारे साथ हो।
16:37
Speaker A
यीशु के बिना दुनिया में सब कुछ पाने के बाद भी शांति नहीं मिलती।
16:42
Speaker A
लेकिन पुनरुत्थान के माध्यम से यीशु हमें सच्ची शांति और अनंत जीवन की प्रतिज्ञा देता है।
16:47
Speaker A
क्योंकि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
16:50
Speaker A
इसका अर्थ है कि मृत्यु अंतिम सत्य नहीं।
16:53
Speaker A
बल्कि एक नया आरंभ है।
16:56
Speaker A
क्या आप यीशु को अपने जीवन में स्वीकार करेंगे?
16:59
Speaker A
यीशु ने कहा, देखो मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं।
17:02
Speaker A
यदि कोई मेरी आवाज सुनकर द्वार खोलेगा तो मैं उसके पास आऊंगा।
17:07
Speaker A
अब निर्णय आपका है।
17:10
Speaker A
यीशु जीवित है, क्या आप उसे अपनाएंगे?

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