क्या बच्चों को धर्म पढ़ाएं? | QnA With Pt. Anubhavji Pune | Session - 12B

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Speaker A
सर नेक्स्ट क्वेश्चन है कि हमारे बच्चे हमारी बातें सुनना ही नहीं चाहते और सुनते हैं तो बस अपने फ्रेंड्स की और सोशल मीडिया की, जिसके बिना वो रह नहीं सकते। मेरी बच्ची में धर्म के प्रति वैसी कट्टरता नहीं है जैसी दूसरों दूसरे धर्मों में हम देख रहे हैं आजकल जैसे मूवीज में भी देखते हैं। सच्चाई यह भी है कि दूसरे धर्मों की कट्टरता बढ़ती जा रही है ऐसे में डर है कि वह बह जाएगी तो क्या करें? यह सर थोड़ा पर्टिकुलर क्वेश्चन था मैंने इसको रिफ्रेम कर दिया यह हमें आया था कहीं से स्पेशली आजकल जो जैसे केरला फाइल्स, केरला स्टोरी और वह सब का है डर का जो माहौल है उससे रिलेटेड है।
00:37
Speaker B
राइट इसके ऊपर एक बहुत अच्छा लेख आया था कोई शुद्धोधन जी हैं उन्होंने लिखा था उन्होंने यह बताया कि आप अपने बच्चों को धर्म पढ़ाना बंद कर दो।
00:53
Speaker B
क्योंकि धर्म मतलब एज इन हम जिसे अध्यात्म कहते हैं वह नहीं धर्म एज इन डरना बंद करो सबसे पहले बच्चों को धर्म के नाम पर।
01:47
Speaker B
एंड फॉर दैट मैटर कल शाम को सुमित प्रकाश जी पंडित साहब के प्रवचनों में भी आया था इमोशनल मत हो आप जब तक इमोशनल होंगे तब तक आप शुद्धोधन जी का जो पॉइंट था वह यह था कि अगर जीव धर्म से डरता रहेगा तो वह एक धर्म का सम्मान करेगा तो अंदर ही अंदर दूसरे धर्म का भी सम्मान करेगा।
02:07
Speaker B
क्योंकि धर्म तो धर्म है धर्म से डरना चाहिए हमने डरना सीखा है तो एग्जांपल दिया कि तुम किसी का गला काट के धर्म मानो हम तुम्हें नहीं रोकेंगे हम पटाखे चला के धर्म मानेंगे तुम हमें मत रोकना दोनों मिलकर पृथ्वी का सत्यानाश करेंगे।
02:30
Speaker B
क्योंकि जब अंदर ही अंदर जीव इमोशनल होगा कोर वैल्यूज को समझे बिना विवेक को जागृत रखे बिना जस्ट इमोशन से जुड़ा अगर होगा तो वह कहीं ना कहीं धोखा खाए बिना रहेगा नहीं।
03:27
Speaker B
तो इंपॉर्टेंट एंगल है कि हम उन्हें डिसीसिव बनाएं डिसीजन सॉरी डिसीजन मेकिंग पावर उनके अंदर डेवलप करें ना कि अपनी चीजें उनके ऊपर थोपे।
04:20
Speaker B
और जब डिसीजन मेकिंग पावर होगी तो फिर भटकने के कोई भी चांसेस नहीं है सो जिसको हम एक लाइन में कहें कि इमोशनल वर्सेस विवेक विवेक जागृत हो और इमोशंस बैकफुट पर रहे।
05:02
Speaker B
जब हम अब एक होता है इमोशंस तो होंगे ही क्योंकि हम जीव हैं हमारे इमोशंस कोई खत्म तो नहीं हो जाएंगे बट इमोशनल इंटेलिजेंस किसी भी चीज की गहराई में जाकर उसके अभिप्राय को पकड़ पाने की जो तार्किक शक्ति है वह एक्चुअली बच्चों में डेवलप होनी चाहिए।
05:17
Speaker B
हम भी क्या करते हैं हम इमोशनल होकर अरे मेरे बेटा तो आलू खाता है अरे मेरे बेटा तो यह नहीं कर पाता है देखो उनका तो कर रहा है इनका तो नहीं कर रहा है यह सब इमोशंस उसके ऊपर जब हम थोपते हैं ना तो वह परेशान परेशानी खड़ी होती है लेट्स नॉट कंपेयर लेट्स गिव द फेयर पिक्चर कि ऐसा है एंड दिस इज हाउ इट इज अब आप क्या करना चाहते हो या प्रैक्टिकली आप क्या कर सकते हो यह आप विचार करो।
05:49
Speaker B
तो एक टीनेजर के साथ एक बहुत अच्छा लॉजिकल डिस्कशन हम कर सकें लॉजिकली हम बात कर सकें या उसके लॉजिक कॉन्शियस को हम डेवलप कर सकें कि बेटा दुनिया में जहां भी जा अपने विवेक से काम ले मतलब एक बहुत पुरानी कहावत है अगर आपने सुनी हो तो सिखाए पूत दरबार नहीं जाते।
06:35
Speaker B
सुनी है कहावत सिखाए पूत दरबार नहीं जाते कहानी ऐसी है कि एक राजा के यहां पर एक राजपुरोहित काम करते थे उनका देहांत हो गया बेटा छोटा था राजपुरोहित बहुत ईमानदार व्यक्ति थे राजा ने घोषणा कर दी जब इनका बेटा योग्य हो जाएगा तो उसको हम अपने दरबार में राजपुरोहित बना लेंगे ठीक है भाई बेटा बड़ा हुआ बेटे की परवरिश मां ने की यही सपने देखकर कि बेटा राज दरबार जाएगा राज दरबार जाएगा जब राज दरबार जाने का समय आया तो मां ने बताया बेटा देखो राजा जब जाओ तो ऐसे करना राजा जी यह पूछे तो यह बताना ऐसे बैठना ऐसे उठना ऐसे करना सब बातें बताएं राजा जब मैंने जैसा अभी बोला ना जैसे राजा यह पूछे तो यह बताना यह पूछे तो यह बताना।
07:36
Speaker B
तो बच्चे ने प्रश्न पूछ लिया कि अगर इसके अलावा मां राजा ने कुछ और पूछ लिया तो क्या करूं तब क्या होगा तो मां ने बोला कि बस बेटा अब तुम तैयार हो गए राज दरबार जाने के लिए।
08:25
Speaker B
क्योंकि अब तुम्हारा अपना विवेक जागृत हो गया है इससे यह कहावत बनी कि सिखाए पूत दरबार नहीं जाते कितना सिखाओगे बच्चों को कि वह दरबार चले जाएंगे उसके लिए तो उनको अपना विवेक जागृत करना ही पड़ेगा आगे आगे आने वाली 20 साल 10 साल 15 साल की जो जनरेशन है ना उसके लिए आप हर चीज को सिखा नहीं सकते।
09:01
Speaker B
जिस जिस जिस जिस तेजी से वर्ल्ड का कैनवास चेंज हो रहा है ना हम इमेजिन भी नहीं कर सकते कि हम किस चीज को हिट करने वाले हैं उसमें एक्चुअली आपको सिर्फ एक ही चीज काम आने वाली है आपका विवेक दैट्स इट और किसी से प्रभावित नहीं होना अपने विवेक से निर्णय लेना है ना विशेषज्ञों से डिस्कशन कर करना तो पर निर्णय अपने लेना पर दैट मैटर मैं हमारे जैन दर्शन में तो यह ओपननेस है कि मैं आपके सामने जितने विचार रख रहा हूं यह भी जस्ट एक डिस्कशन फोरम है राइट इट इज नॉट कि आपको ऐसा ही करना चाहिए आप अपने विवेक से आप अपनी सिचुएशन से निर्णय लीजिए तो सिखाए पूत दरबार नहीं जाते इसमें सिखाना कि नहीं सिखाना एज अ पैरेंट आपका प्रश्न यही अक्षय है कि अब आप तो कह रहे हो तो फिर नहीं सिखाएं हम नहीं आपका जितना भाव है आपका जितना राग है आप उतना सिखाओगे भी।
10:18
Speaker B
पर आपको यह देखना होगा कि आपको विवेक से उनके अंदर वह चीज को इनफ्यूज करना है रादर देन इमोशनली इमोशनली जितना इनफ्यूज करेंगे तो अल्टीमेटली क्वेश्चन आएगा नरक है कहां पर हर चीज में नरक लगा देते हो हर चीज में नरक जाएंगे अरे उनको यह समझ में आना चाहिए नरक जब होगा तब होगा मुझे वर्तमान में भी तो यह दुख रूप लगता है असंयम का परिणाम वर्तमान में भी तो मुझे दुख देता है ना मेरे अपने अंदर की आकुलता इस समय भी तो वह जॉय जो लग रहा है वह असलियत में मेरे ही जबड़ों से निकलने वाला खून ही तो है यह चीज जैसे ही रियलाइज हो जाएगी वह जीव अपने आप इस वर्ल्ड को झेलने के लिए प्रिपेयर हो जाएगा मेरे पास अभी पूरा कोटेशन नहीं है बट आई थिंक 21st 21 लेसन फॉर द 21st सेंचुरी।
12:09
Speaker B
हां सॉरी उन्होंने यह बुक लिखी है तो कुछ एक चीजें उसमें इस तरीके की आई हैं कि 21st सेंचुरी के लिए हाउ टू बी प्रिपेयर्ड मतलब कितना फास्ट तरीके से यह चेंज होने वाला है फॉर एग्जांपल चरणानियोग के लेवल पर आज हम डिस्कशन कर रहे हैं कि बाजार के चॉकलेट खाना है कि नहीं खाना है मतलब हम लोग ऐसी बात की एक बार बात कर रहे थे कहीं ऐसा ना हो 100 साल बाद इस बात पर डिस्कशन किया जाए कि एक खाना है कि नहीं खाना है मतलब बहुत तेजी से कैनवास चेंज हो रहा है एंड फॉर दैट मैटर एक्सेप्टेबिलिटी भी आती जा रही है धीरे-धीरे तो यह जब तक हम कोर को नहीं समझेंगे तब तक वह एक्सेप्टेबिलिटी एक्सेप्टेबिलिटी ओपननेस के नाम पर बहुत क्या बोलूं तेज आंधी चल रही है इस मामले में तो अगेन जितना हम इमोशन से जोड़ेंगे उतना वह फ्रेजाइल रहेगा और जितनी उसका विवेक जागृत होगा खुद उसने तर्क से और अपने अनुभव से प्रमाण करके कि मुझे वर्तमान में क्या आकुलता अनाकुलता का उसमें परिणाम है उसके बेसिस पर डिसीजन लेगा जीव तो वह कायम होंगे लंबे समय तक टिकेंगे जड़ें मजबूत हो।
14:00
Speaker B
सो अगेन आई वुड से कि केरला मूवी एंड ऑल से आपको डरने की जरूरत नहीं है आप अपने इमोशंस को हर चीज से मत जोड़ें एक्सट्रीम को ना देखें बट एज अ पैरेंट हमारा जो कर्तव्य बनता है वह यह है कि हम कॉन्शियस को डेवलप करें उनको खुद डिसीजन लेने दें सिखाए पूत दरबार नहीं जाते यह एक्जेक्टली इस पर फिट बैठती है आप खूब विचार करें उनके सामने ऐसी सिचुएशंस प्रेजेंट करें कि बेटा यह सिचुएशन आएगी तो आप कैसे हैंडल करोगे व्हाट्स योर व्यू इन इट आप प्रैक्टिकली तैयार करें बिकॉज़ आई मीन जिसको हम बोलते हैं ना युद्ध क्षेत्र में जाकर तो खून ही बहने वाला है इससे अच्छा है कि आयुधशाला में पसीना बहा लिया जाए तो आप बहुत फ्रैंकली डिस्कशन करें डिस्कशन फोरम्स बनाएं बच्चों के लिए प्रैक्टिकल सिचुएशंस को प्रेजेंट करें कोई न्यूज़ आती है तो लेट्स सी लेट्स डिस्कस अबाउट इट उसके ऊपर डिबेट करते हैं नॉट नेसेसरीली कि आपको अपना कोई व्यू उसमें रखना ही रखना है आप सिर्फ उनके कॉन्शियस को डेवलप करने के लिए क्या डिस्कशन फोरम दे सकते हैं इस पर भी अपने को विचार करना चाहिए बिकॉज़ मैं मुझे पता है आप और भी क्वेश्चंस हैं बट मुझे इसमें एक और बात कहने का भाव आ रहा है कि हमारे पास कोई ऐसा स्वस्थ फोरम नहीं है जहां पर वह व्यक्ति वह बच्चा वह टीनेजर व्यक्ति भाई बहन अपने विचारों को आपके सामने खुलकर रख सकें हम ओपन ही नहीं है उसके साथ डिस्कशन करने के लिए उसके क्या फीलिंग्स चल रहे हैं क्या तो यह फोरम्स भी बनने चाहिए।
15:56
Speaker B
कोई भी टीवी की न्यूज़ हम देखते हैं तो उसके ऊपर उसके क्या व्यूज हैं उसके क्या डिस्कशन है उसकी क्या थॉट प्रोसेस चल रही है उसको हमें रियली सुनना समझना चाहिए विचार करना चाहिए एंड यही एक एक्चुअली तरीका है अपने बच्चों के फ्रेंड्स बनने का हमारे फ्रेंड्स बनने का तरीका यह नहीं हो सकता कि हम सिर्फ उनको गिफ्ट्स देते हैं पार्टीज देते हैं बल्कि हम उनके वैचारिक लेवल पर हम उनके साथ क्या कंट्रीब्यूट कर रहे हैं यह एक्चुअल इंपॉर्टेंट है।

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