**Worst Dam Disaster in Human History Kept Secret for 30 Years — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/worst-dam-disaster-secret-30-years/

1975 में चीन के बेंचाऊ डैम के टूटने से हुई तबाही और इसे 30 साल तक छुपाए जाने की कहानी।

## Key Takeaways

- डैम डिजाइन और मेंटेनेंस की कमी से बड़ी प्राकृतिक आपदा हुई।
- प्राकृतिक आपदाओं के साथ मानव निर्मित त्रुटियां तबाही को बढ़ा सकती हैं।
- सरकारी गुप्तता और सूचना छुपाने से पीड़ितों की मदद और जागरूकता प्रभावित होती है।
- सही इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

## What the video covers

- 7 अगस्त 1975 को हिनान प्रांत में बेंचाऊ डैम के टूटने से भारी तबाही हुई।
- टाइफून नीना की वजह से डैम के रिजर्वायर में पानी का दबाव बढ़ गया था।
- डैम के स्पिलवे गेट्स जंग और कचरे की वजह से जाम हो चुके थे, जिससे पानी बाहर नहीं निकल पाया।
- डैम मिट्टी से बना था, जो पानी के ओवरफ्लो से कमजोर हो जाता है।
- डैम की डिजाइन में कमी थी, केवल 5 स्पिलवे गेट्स बनाए गए जबकि 12 होने चाहिए थे।
- चैन शिंग नामक हाइड्रोलॉजिस्ट ने इस कमी की चेतावनी दी थी लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
- डैम टूटने से 600 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी एक सुनामी की तरह नीचे बस्तियों में पहुंचा।
- टूटने के बाद डैम नेटवर्क में 62 अन्य डैम भी टूट गए, जिससे व्यापक तबाही हुई।
- सरकार ने इस दुर्घटना को 30 साल तक छुपाया और जिम्मेदारी केवल टाइफून नीना पर डाली।
- 1990 के दशक में अन्य डैम हादसों और दबाव के कारण 2005 में इस राज को सार्वजनिक किया गया।

## Chapters

1. 00:00 बेंचाऊ डैम पर टाइफून नीना का प्रभाव और आपदा की शुरुआत
2. 01:05 स्पिलवे गेट्स का जाम और आपदा नियंत्रण प्रयास
3. 02:11 बेंचाऊ डैम का निर्माण और डिजाइन की कमियां
4. 03:17 चैन शिंग की चेतावनी और सरकारी अनदेखी
5. 05:27 टाइफून नीना की बारिश और डैम पर दबाव
6. 06:30 डैम टूटने की घटना और तत्काल प्रभाव
7. 07:37 डैम टूटने के बाद का डोमिनो प्रभाव
8. 09:56 सरकारी गुप्तता और बाद के वर्षों में खुलासे

Answers

## Questions about this video

बेंचाऊ डैम क्यों टूटा?

बेंचाऊ डैम के डिजाइन में कमी थी, केवल 5 स्पिलवे गेट्स बनाए गए जबकि 12 होने चाहिए थे। टाइफून नीना की भारी बारिश से डैम पर दबाव बढ़ा और जाम स्पिलवे गेट्स के कारण पानी बाहर नहीं निकल पाया, जिससे डैम टूट गया।

सरकार ने इस आपदा को क्यों छुपाया?

चीन सरकार ने इस आपदा की जिम्मेदारी केवल टाइफून नीना पर डालकर इसे 30 साल तक गुप्त रखा ताकि अपनी छवि और राजनीतिक दबाव से बचा जा सके।

डैम टूटने से कितनी तबाही हुई?

डैम टूटने से 600 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे बस्तियों में पहुंचा, जिससे लगभग 26,000 लोग मारे गए और 62 अन्य डैम भी टूट गए।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

7th अगस्त 1975 रात के ठीक 1:30 बजे चाइना के हिनान प्रोविंस में बने बेंचाऊ डैम के कंट्रोल रूम में तब भगदड़ मचना शुरू होती है जब बाहर टाइफून नीना शिद्दत से बारिश बरसा रहा था। यह दुनिया का सबसे खौफनाक

00:17

Speaker A

तूफान था जो पिछले 72 आवर्स से इतना पानी बरसा चुका था जितना इस पूरे इलाके में एक साल में भी नहीं बरसता। वो डैम जिसको चाइनीस ऑफिशियल्स घमंड से आयरन डैम कहते थे, उसमें अब हर गुजरते घंटे कई फीट पानी

00:33

Speaker A

भरता जा रहा था। कंट्रोल रूम में लगे वाटर लेवल गेजेस की सुई डेंजरस रेड जोन को क्रॉस कर चुकी थी और डैम के रिजवायर में पानी का दबाव अपनी आखिरी हदों को तोड़ रहा था। इंजीनियर्स के पास अब सिर्फ एक ही

00:48

Speaker A

रास्ता बचा था कि डैम के सभी स्पिलवे गेट्स को फुल कैपेसिटी पर खोल दिया जाए ताकि पानी बाहर निकल सके। लेकिन जब कंट्रोल रूम में मौजूद इंजीनियर्स ने घबराए हुए हाथों से गेट ओपनिंग लीवर खींचा तो उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई।

01:05

Speaker A

स्पिलवे गेट्स बरसों के जंग और कचरे की वजह से जाम हो चुके थे। जिनको मैकेनिकल गियर्स की मदद से खोलना अब इंपॉसिबल था। अब इस सूरत में कंट्रोल रूम में बैठे इंजीनियर्स ने फौरन लोकल गवर्नमेंट और हायर ऑफिशियल से कांटेक्ट करने की कोशिश

01:21

Speaker A

की। लेकिन बाहर तूफान ने बिजली के खंभों और टेलीग्राफ लाइंस को उखाड़ दिया था। फिर वही हुआ जिसका किसी को भी अंदाजा नहीं था। ज़म टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद। नाजरीन बेंचाऊ डैम की दीवार एक

01:37

Speaker A

जोरदार धमाके से टूट गई। 600 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी सुनामी की तरह आगे बढ़ा और तबाही मचाना शुरू कर दी। लेकिन कौन जानता था कि बेंचाऊ डैम के टूटने से एक ऐसा डोमिनो इफेक्ट शुरू होने वाला है जिसको इमेजिन करना भी मुश्किल था। पर आखिर

01:55

Speaker A

आयरन डैम यानी जमाने का सबसे मजबूत डैम पहली ही आजमाइश में कचरे का ढेर कैसे बन गया? यह जानने के लिए हमें 25 साल पीछे 1950 में जाना पड़ेगा। बेंचाऊ डैम की बुनियाद 1950 में रखी गई थी। यह वह दौर था

02:11

Speaker A

जब चाइना ने हवाई रिवर बेसिन में बार-बार आने वाले सैलाबों को रोकने के लिए एक बहुत बड़ा इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट शुरू किया। प्लान था कि बेंचाऊ डैम पहाड़ों से आने वाले तेज पानी को जमा करेगा और उसके नीचे डाउन स्ट्रीम पर 60 से ज्यादा छोटे-बड़े

02:29

Speaker A

डैम्स बनाए जाएंगे। यानी बेंचाऊ डैम पूरे रीजन के डैम नेटवर्क के लिए एक सेफ्टी वाल्व का काम करेगा। इस डैम नेटवर्क को डिजाइन करने के लिए उस वक्त के सोवियत यूनियन के टॉप डैम बिल्डिंग इंजीनियर्स को बुलवाया गया। मैनचाऊ डैम की ऊंचाई 118

02:47

Speaker A

मीटर रखी गई और इसे बनाने में हजारों मजदूरों ने दिन रात काम किया। आज की मॉडर्न टेक्निक्स के बजाय इस डैम की दीवार को कंक्रीट नहीं बल्कि स्पेशल क्ले से बनाया गया था। जो उस वक्त दुनिया भर में

03:01

Speaker A

डैम बनाने के लिए सबसे मशहूर टेक्निक थी। मिट्टी से बना डैम बेशक कंक्रीट जितना ही मजबूत होता है लेकिन इसमें एक मसला होता है कि अगर पानी डैम को ओवरफ्लो करके बाहर निकला तो डैम की आउटर वॉल्स गीली होकर

03:17

Speaker A

कमजोर हो जाएंगी। जब यह बनकर तैयार हुआ तो ऑफिशियल अथॉरिटीज ने इसे टाइबा यानी द आयरन डैम का लकब दिया। उनका दावा था कि यह डैम इतना मजबूत है कि अगले 1000 साल में आने वाले किसी भी बड़े से बड़े तूफान को

03:33

Speaker A

आसानी से झेल सकता है। लेकिन इस पूरे जोश और गरूर के बीच एक ऐसी आवाज थी जिसने इस आयरन डैम के वजूद पर बहुत बड़ा क्वेश्चन मार्क लगा दिया। यह आवाज थी चैन शिंग की जो चाइना के सबसे माहिर और एक्सपर्ट

03:49

Speaker A

हाइड्रोलॉजिस्ट में से एक थे। चैन सिंह ने जब आयरन डैम के ब्लूप्रिंट्स और कैलकुलेशंस का बाकायदा जायजा लिया तो उन्होंने बिना किसी डर के गवर्नमेंट ऑफिशियल्स को वर्न किया कि इस डैम के डिजाइन में एक बहुत ही खौफनाक और भयानक

04:03

Speaker A

कमी रह गई है। चैन शंग की कैलकुलेशंस के मुताबिक डैम में कम से कम 12 स्पिलवे गेट्स होने चाहिए थे ताकि किसी भी इमरजेंसी में पानी को तेजी से निकाला जा सके। उन्होंने वार्निंग दी कि अगर गेट्स कम हुए तो पानी डैम के ऊपर से बहने लगेगा

04:20

Speaker A

और मिट्टी से बना यह डैम कोलैप्स होने में 1 मिनट भी नहीं लगाएगा। लेकिन अफसोस चाइनीस गवर्नमेंट ऑफिशियल्स उन दिनों सोवियत इंजीनियरिंग के घमंड में पागल थे। उन्हें यह बातें फजूल लगने लगीं और उन्होंने चैन शेंग को मायूसी फैलाने वाला

04:37

Speaker A

शख्स करार दे दिया। 12 गेट्स की जगह सिर्फ पांच स्पिलवे गेट्स बनाए और चैन शेंग को इस पूरे प्रोजेक्ट से ही निकाल बाहर किया। लेकिन उनकी दी हुई वार्निंग वक्त के साथ गायब नहीं हुई। 20 साल तक यह आयरन डैम

04:53

Speaker A

अपनी जगह पर खामोश खड़ा रहा। चैन [संगीत] शैंग की दी हुई वार्निंग वक्त की धूल में कहीं खो गई। लेकिन फिर आया अगस्त 1975। जब तबाही ने पेसिफिक ओशन के समंदर में अपना पहला कदम रखा। इस तबाही का नाम था

05:09

Speaker A

टाइफून नेना। 4th अगस्त 1975 को टाइफून नेना चाइना के कोस्टल रीजन से टकराया। स्टैंडर्ड वेदर मॉडल्स के मुताबिक जब भी कोई तूफान समंदर से निकलकर जमीन पर आता है तो उसकी शिद्दत तेजी से कम होने लगती है। वेदर फॉरकास्टिंग टीम्स को भी लग रहा था

05:27

Speaker A

कि हिनान प्रोविंस तक पहुंचते-पहुंचते यह तूफान दम तोड़ देगा। लेकिन जैसे ही यह तूफान हिनान प्रोविंस के इलाके में दाखिल हुआ, वहां नॉर्थ से आने वाली ठंडी हवाओं से इसका टकराव हो गया। इस टकराव की वजह से हुआ यह कि हिनान के पहाड़ों के बीच यह

05:44

Speaker A

मॉन्सर तूफान अचानक फंस गया और वहां अटक कर इसने ठीक-ठाक तबाही मचाना शुरू कर दी। फिफ्थ अगस्त की दोपहर से हिनान के आसमान से पानी नहीं बल्कि एक अज़ाब बरसना शुरू हुआ। आपको बताता चलूं कि इस इलाके में

06:00

Speaker A

पूरे साल में तकरीबन 800 मि.मी. बारिश होती है। लेकिन टाइफून नीना ने सिर्फ 24 घंटों के अंदर-अंदर 1000 मि.मी. से ज्यादा पानी बरसा दिया। यानी पूरे साल का पानी सिर्फ एक ही दिन में जमीन पर गिर चुका था।

06:16

Speaker A

पीक आवर्स में तो हालत यह थी कि एक-ए [संगीत] घंटे में 190 मि.मी. बारिश रिकॉर्ड की गई। 6th अगस्त की रात तक आयरन डैम के पीछे बना आलीशान रिजवायर छलकने के करीब पहुंच चुका था। रिजवायर में पानी का

06:30

Speaker A

लेवल हर घंटे कई फीट के हिसाब से बढ़ रहा था। आयरन डैम की 20 साल पुरानी दीवार पर अब अरबों टन पानी का शदीद दबाव पड़ने लगा और 12 गेट्स की जगह सिर्फ पांच गेट्स होने का खौफनाक अंजाम अब काफी करीब था। 6th

06:48

Speaker A

अगस्त की आधी रात घना अंधेरा, बिजली की कड़क और बरसता हुआ अज़ाब। आयरन डैम के कंट्रोल रूम में मौजूद स्टाफ के माथे पर पसीना टप टप बरस रहा था। रिजवायर में पानी इतनी तेजी से बढ़ रहा था कि अब वह डैम की

07:04

Speaker A

ऊपरी सतह से सिर्फ चंद इंचेस दूर था। वाटर लेवल गेजेस रेड लाइन को क्रॉस कर चुके थे। इंजीनियर्स को पता था कि अगर अभी के अभी स्पिलवे गेट्स नहीं खोले गए तो पानी दीवार के ऊपर से बहने लगेगा और अगर ऐसा हो गया

07:20

Speaker A

तो मिट्टी से बने इस डैम को तबाह होने में 1 मिनट भी नहीं लगेगा। उन्होंने इमीडिएटली लोकल गवर्नमेंट और मिलिट्री हेड क्वार्टर्स को इमरजेंसी टेलीग्राफ मैसेज भेजने की कोशिश की ताकि स्पिलवे गेट्स खोलने की ऑफिशियल क्लीयरेंस ली जाए। लेकिन

07:37

Speaker A

यहां होता है सबसे बड़ा टेक्निकल कोलैप्स। तूफान की वजह से पूरे इलाके के टेलीग्राफ पोल्स पहले ही जमी बोज हो चुके थे। फोन लाइंस डेड थीं, ट्रांसमिशन लाइंस टूट चुकी थीं। कम्युनिकेशन सिस्टम 100% फेल हो चुका था। उनका बाहर की दुनिया से तमाम राब्ता

07:55

Speaker A

कट चुका था। ज्यादा देर होने के डर से कंट्रोल रूम के स्टाफ ने ऑफिशियल परमिशन का वेट किए बिना ही खुद से गेट्स खोलने का फैसला किया। वह भागते हुए गेट कंट्रोल मैकेनिज्म्स पर गए और हैवी आयरन लीवर को

08:09

Speaker A

घुमाने की कोशिश की। लेकिन काफी जोर लगाने पर भी गेट्स ना खुल सके। गेट्स जाम हो चुके थे। बरसों से मेंटेनेंस ना होने, जंग लगने और नीचे जमा होने वाली मिट्टी की वजह से हैवी मैकेनिकल गियर्स ने काम करना बंद

08:25

Speaker A

कर दिया था। अरबों गैलन पानी के शदीद दबाव ने उन गेट्स को बिल्कुल लॉक कर दिया था। पांच गेट्स में से सिर्फ कुछ गेट्स आधे खुल सके लेकिन वह काफी नहीं थे। हर गुजरते सेकंड डैम में जितना पानी दाखिल हो रहा था

08:42

Speaker A

बाहर उसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा निकल पा रहा था। रात के 12:30 बजे पानी ने डैम के टॉप स्ट्रक्चर के ऊपर से बहना शुरू कर दिया। उसके बाद आयरन डैम की मिट्टी आहिस्ता-आहिस्ता पानी के रास्ते में घुलने लगी। यही वह पॉइंट था जब डैम का कोलैप्स

09:00

Speaker A

होना बिल्कुल तय था। अब इंतजार सिर्फ वक्त का था। वो वक्त जिसकी उल्टी गिनती चल पड़ी थी। 7th अगस्त 1975 रात के 1:30 सन्नाटे को चीरते हुए एक ऐसी खौफनाक आवाज आई जैसे पहाड़ के अंदर कोई एटॉमिक बम फट

09:18

Speaker A

गया हो। बेंचाऊ डैम का 400 मीटर लंबा हिस्सा एक ही झटके में जमीबस हो गया हो। रिजवायर में जमा 600 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी 1 मिनट के अंदर बाहर निकल आया। यह कोई आम सैलाब नहीं बल्कि यह 30 फुट ऊंची

09:35

Speaker A

पानी की एक खौफनाक दीवार थी जो 60 किमी प्रति घंटे की स्पीड से नीचे मौजूद हस्ती बस्ती आबादियों को खत्म करने के लिए बढ़ रही थी। इंसान, मकानात, ट्रेंस और बिजली के खंभे सब इस पानी के सामने मिट्टी के खिलौने

09:52

Speaker A

साबित हुए। रात की गहरी नींद में सोते हुए हजारों लोगों को बचने या चीखने तक का मौका नहीं मिला। लेकिन असली खौफ अभी भी बाकी था। बेंचाऊ डैम से निकलने वाली यह ताकतवर पानी की दीवार जब आगे बढ़ी तो रास्ते में

10:07

Speaker A

आने वाले दूसरे डैम्स पर एक के बाद एक जाकर टकराई। सबसे पहले इसने शिमोंटन डैम को अपनी लपेट में लिया जो आयरन डैम के टूटने के ठीक 1 घंटे बाद कोलैप्स हो गया। इसके बाद एक ऐसा खौफनाक डोमिनो इफेक्ट

10:23

Speaker A

शुरू हुआ जिसने पूरे रीजन को ही तबाह कर दिया। टशिंग डैम, बोगो डैम एक के बाद एक टोटल 62 डैम्स ताश के पत्तों की तरह डहते चले गए। कुछ ही घंटों के अंदर-अंदर

10:40

Speaker A

में डूब चुका था। स्वीपिंग और जुमाडियन समेत हजारों बस्तियां हमेशा हमेशा के लिए नक्शे से गायब हो गई। 8th अगस्त 1975 की सुबह जब सूरज निकला तो जमीन पर मंजर किसी अज़ाब का नक्शा पेश कर रहा था। जहां कभी

10:56

Speaker A

हंसती बस्ती आबादियां, खेत और बाजारें थी, वहां अब दूर-दूर तक सिर्फ पानी, मिट्टी और तबाही नजर आ रही थी। पहले ही झटके में तकरीबन 26,000 लोग पानी में डूब कर अपनी जान गवा चुके थे। लेकिन असली ट्रेजडी तो

11:14

Speaker A

अभी शुरू होने वाली थी। तकरीबन 1 करोड़ से ज्यादा लोग इस सैलाब से मुतासिर हुए। लाखों लोग बिना खाने, पीने के साफ पानी और छत के दरख्तों की शाखों और बची कुची छतों पर पानी के बीच फंसे हुए थे। रास्ते और

11:29

Speaker A

रेलवे ट्रैक्स पूरी तरह तबाह हो चुके थे। जिसकी वजह से जमीनी रास्ते से मदद पहुंचाना बिल्कुल नामुमकिन था। एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर्स ने खाना फेंकना शुरू किया। लेकिन ज्यादातर रिलीफ मटेरियल गंदे पानी में गिरकर खराब हो गया। दिन गुजरते

11:46

Speaker A

गए और गर्मी की शिद्दत बढ़ती गई। कीचड़ में हजारों लाशें और जानवर सड़ने लगे और इस गंदे पानी ने एक बहुत ही खौफनाक अज़ाब को जन्म दिया। टाइफाइड और डसेंट्री। पानी से फैलने वाली इन बीमारियों ने फंसे हुए

12:01

Speaker A

लोगों को अपनी लपेट में लेना शुरू कर दिया। लोग पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे थे और गंदा पानी पीने पर मजबूर थे। बीमारियों और कैदसाली की वजह से हर दिन हजारों लोग दम तोड़ने लगे। डूबने से जितनी

12:16

Speaker A

मौतें हुई थी उससे कई गुना ज्यादा मौतें सैलाब के बाद फैलने वाली बीमारियों और भूख की वजह से हुई। अनऑफिशियल एस्टीमेट्स और बाद में आने वाली रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरे हादसे में टोटल जान गवाने वालों की तादाद 2 लाख 300 तक जा पहुंची। इंसानी

12:34

Speaker A

तारीख में डैम कोलैप्स का इतना बड़ा जानी नुकसान पहले कभी नहीं देखा गया। इतने बड़े हादसे के बाद एक्सपेक्टेड था कि न्यूज़ चैनल्स पर हेडलाइंस चलेंगी। दुनिया भर से इमरजेंसी मदद आएगी और इंटरनेशनल लेवल पर इसकी इन्वेस्टिगेशन होगी। लेकिन ऐसा कुछ

12:52

Speaker A

भी नहीं हुआ। उल्टा चाइनीस गवर्नमेंट ने इस पूरे हादसे पर सख्त स्टेट सेंसरशिप लगा दी। मीडिया को सख्त हिदायत दी कि बेंचाऊ डैम और हिनान के सैलाब पर एक लफ्ज भी नहीं छापा जाएगा। न्यूज़पेपर्स, रेडियो और ऑफिशियल रिकॉर्ड से इस हादसे का वजूद ही

13:10

Speaker A

मिटा दिया गया। यहां तक कि इस पूरे इवेंट को टॉप सीक्रेट गवर्नमेंट आर्काइव्स में दफन कर दिया गया। सरकार ने पूरी जिम्मेदारी टाइफून नीना यानी एक कुदरती आफत पर डाल दी। लेकिन अपनी गलती को दुनिया के सामने आने ही नहीं दिया। हिनान के लोग

13:28

Speaker A

जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने पूरे खानदानों को डूबते हुए देखा था उन्हें भी इस ट्रेजडी पर खुलकर बात करने की इजाजत नहीं थी। सबसे हैरानी की बात यह थी कि 30 साल तक दुनिया को पता ही नहीं चला कि 1975

13:43

Speaker A

में इतनी बड़ी ट्रेजडी हुई है। लेकिन इस कहानी से पर्दा तो आखिरकार उठना ही था और वो वक्त आया 20 साल बाद 1995 में। ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक डिटेल्ड इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पब्लिश की जिसमें आयरन डैम डिजास्टर का सच पहली बार दुनिया के सामने

14:02

Speaker A

लाया गया। रिपोर्ट में साफ एक्सपोज किया गया कि अगर हाइड्रोलॉजिस्ट चैन सिंह की वार्निंग को माना गया होता और मेंटेनेंस पर ध्यान दिया गया होता तो आज 2300 लोग जिंदा होते। लेकिन एक एनजीओ की रिपोर्ट से चाइनीस गवर्नमेंट कहां प्रेशर

14:20

Speaker A

में आने वाली थी। पर इसके बाद लाइन से कुछ ऐसे इवेंट्स हुए जिसने बेंचाऊ डैम डिजास्टर को लेकर चाइनीस गवर्नमेंट के गिर्द घेरा तंग करना शुरू कर दिया। सबसे पहली वजह थी थ्री गॉर्जियस डैम। 1990 के एंड में चाइना दुनिया का सबसे बड़ा

14:37

Speaker A

हाइड्रोइिक प्रोजेक्ट थ्री गॉर्जियस डैम बनाने जा रहा था। फॉरेन इन्वेस्टर्स वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल इंजीनियरिंग फर्म्स इस प्रोजेक्ट में बिलियंस ऑफ डॉलर्स इन्वेस्ट करने से पहले डर रहे थे। उनका कहना था कि चाइना के डैम्स का सेफ्टी रिकॉर्ड क्लियर नहीं है और बेंचाऊ डैम का

14:55

Speaker A

रमर अभी भी दुनिया में चल रहा है। दूसरी वजह थी लीक्ड डॉक्यूमेंट्स। 1990 के आखिर में और 2000 के स्टार्ट [संगीत] में चाइना में इंटरनेट आने के बाद गवर्नमेंट की सेंसरशिप में लूप होल्स पैदा हुए। हिनान प्रोविंस के लोकल ऑफिशियल्स, रिटायर्ड

15:12

Speaker A

इंजीनियर्स और विक्टिम्स के घर वालों ने इंटरनल इन्वेस्टिगेटिव डॉक्यूमेंट्स, मेमो फाइल्स और फोटोस स्कैन करके इंटरनेशनल फोरम्स पर लीक करना शुरू कर दिए। इसके अलावा 1998 में चाइना में यंगसी रिवर पर एक खौफनाक सैलाब आया, जिसमें 4,000 से

15:29

Speaker A

ज्यादा लोग मारे गए। इस हादसे ने भी चाइनीस गवर्नमेंट को मजीद प्रेशर में डाल दिया। इन वजूहात ने चाइनीस लीडरशिप को इस पॉइंट पर ला खड़ा किया कि अब इस राज को छुपाना मजीद फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसानदेह होगा। आखिरकार साल 2005 में

15:47

Speaker A

चाइनीस गवर्नमेंट ने ऑफिशियली इस डिजास्टर के डॉक्यूमेंट्स को डीक्लासिफाई किया और दुनिया के सामने माना कि यह सिर्फ कुदरती आफत नहीं थी बल्कि ह्यूमन एोगेंस और सिस्टम फेलियर का सबसे बड़ा नमूना था। आज बेंचाऊ डैम को दोबारा से मॉडर्न टेक्निक्स

16:04

Speaker A

और मैसिव स्पिलवे गेट्स के साथ रिबिल्ड कर दिया गया है। लेकिन रू रिवर के किनारे बने मेमोरियल स्टोंस आज भी उन 2 लाख से ज्यादा बेगुनाह लोगों की याद दिलाते हैं जिनकी जान एक छोटी सी जिद, घमंड और नेग्लिजेंस

16:20

Speaker A

की वजह से चली गई। उम्मीद है ZM टीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे। आप लोगों के प्यार भरे कमेंट्स का बेहद शुक्रिया। मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में।

Topics: बेंचाऊ डैम चीन डैम हादसा टाइफून नीना डैम डिजास्टर हिनान प्रांत डैम डिजाइन कमी स्पिलवे गेट्स चैन शिंग डैम टूटना प्राकृतिक आपदा

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