**World War 1 in Islam..... — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/world-war-1-islam/

वर्ल्ड वॉर वन ने मुसलमानों की ताकत को तोड़ा और खिलाफत खत्म कर दी, यूरोप की ताकत बढ़ी और मुसलमान पिछड़ गए।

## Key Takeaways

- वर्ल्ड वॉर वन ने मुसलमानों की राजनीतिक और सैन्य ताकत को कमजोर कर दिया।
- यूरोप की तकनीकी प्रगति और नई खोजों ने मुसलमानों को पिछड़ाया।
- उस्मानिया खिलाफत मुसलमानों की आखिरी बड़ी ताकत थी जो युद्ध में कमजोर पड़ गई।
- ब्रिटिश और यहूदियों की साजिशों ने मुसलमानों की एकता को तोड़ा।
- विश्व युद्ध ने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक बदलाव और क्षेत्रीय कब्जे को जन्म दिया।

## What the video covers

- वर्ल्ड वॉर वन मुसलमानों के इतिहास की सबसे बुरी जंग थी जिसने उनकी ताकत तोड़ दी।
- मुसलमानों की ताकत 1400 साल पहले मदीना से बढ़ी और 800 साल तक दुनिया में राज किया।
- यूरोप में प्रिंटिंग प्रेस की खोज ने मुसलमानों को टेक्नोलॉजी में पीछे छोड़ दिया।
- स्पेन, इंडोनेशिया और हिंदुस्तान जैसे महत्वपूर्ण इलाके मुसलमानों से छिन गए।
- उस्मानिया खिलाफत वर्ल्ड वॉर वन से पहले मुसलमानों की आखिरी बड़ी ताकत थी।
- सुल्तान अब्दुल हमीद ने फस्तीन को यहूदियों को नहीं दिया, जिससे ब्रिटिश और यहूदियों ने खिलाफत को कमजोर किया।
- हंगरी के प्रिंस की हत्या से वर्ल्ड वॉर वन शुरू हुई, यूरोप दो बड़े गुटों में बंट गया।
- यूरोप की शक्तिशाली देशों की लड़ाई पूरी दुनिया में फैल गई, इसलिए इसे विश्व युद्ध कहा गया।
- उस्मानिया खिलाफत ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी लेकिन अंततः कमजोर पड़ गई।
- ब्रिटिश ने अरबों को खरीदकर खिलाफत के खिलाफ बगावतें करवाईं, जिससे मुसलमानों की स्थिति और खराब हुई।

## Chapters

1. 00:00 वर्ल्ड वॉर वन और मुसलमानों की कमजोरी
2. 02:35 यूरोप की तकनीकी प्रगति और मुसलमानों का पिछड़ना
3. 05:08 उस्मानिया खिलाफत की स्थिति और सुल्तान अब्दुल हमीद
4. 07:27 यूरोप में युद्ध की शुरुआत और प्रिंस की हत्या
5. 11:55 यूरोप के दो गुट और विश्व युद्ध का विस्तार
6. 14:03 उस्मानिया खिलाफत की लड़ाई और ब्रिटिश साजिशें
7. 17:52 अरबों की बगावत और मुसलमानों की हार
8. 19:09 युद्ध के बाद की नई दुनिया और मुसलमानों की स्थिति

Answers

## Questions about this video

वर्ल्ड वॉर वन ने मुसलमानों की ताकत पर क्या प्रभाव डाला?

वर्ल्ड वॉर वन ने मुसलमानों की ताकत को बहुत कमजोर कर दिया और उस्मानिया खिलाफत जैसी आखिरी बड़ी मुसलमान ताकत को खत्म कर दिया।

मुसलमानों ने प्रिंटिंग प्रेस को क्यों हराम माना?

मुसलमानों ने प्रिंटिंग प्रेस को इसलिए हराम माना क्योंकि अरबी भाषा को इससे लिखना स्वीकार नहीं किया गया, जिससे वे तकनीकी प्रगति में पीछे रह गए।

उस्मानिया खिलाफत के कमजोर होने की मुख्य वजह क्या थी?

उस्मानिया खिलाफत के कमजोर होने की मुख्य वजह यूरोप की साजिशें, ब्रिटिश और यहूदियों का दबाव, और अंदरूनी बगावतें थीं।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

वर्ल्ड वॉर वन। [संगीत] मुसलमानों की तारीख की सबसे बुरी जंग। [संगीत] इस एक जंग ने हमेशा के लिए मुसलमानों की ताकत तोड़ दी। इसी एक जंग में खिलाफत दुनिया से खत्म कर दी। लेकिन क्यों?

00:30

Speaker A

आखिर हम मुसलमान ये जंग इतनी बुरी तरह से क्यों हारे? [संगीत] इसके पीछे मुसलमानों का अपना ही हाथ है। आज से 1400 साल पहले मदीना से आहिस्ता-आहिस्ता मुसलमानों की ताकत बढ़ने लगी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद अगले

01:02

Speaker A

800 साल तक मुसलमान दुनिया हमेशा बढ़ती रही और आखिर 800 साल के बाद मुसलमान दुनिया अपने सबसे बड़े साइज तक पहुंची। और इस पूरे इलाके में कहीं ना कहीं मुसलमानों का ही राज था। लेकिन आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के 800

01:23

Speaker A

साल बाद दुनिया में मुसलमानों के हालात आहिस्ता-आहिस्ता खराब होने लगे। [चीखने की आवाज़] और यहां से मुसलमानों की तबाही की उल्टी गिनती शुरू हुई। यहां पर अचानक दुनिया में दो ऐसे काम हुए। जिनकी वजह से मुसलमान आज तक दुनिया से

01:42

Speaker A

पीछे रह गए हैं। इन दो में से एक काम तो हमारी अपनी ही गलतियों की वजह से हुआ था। और दूसरे काम में बेचारे मुसलमानों की कोई गलती नहीं थी। पहला काम अचानक यूरोप में एक मशीन इजाद हुई।

01:59

Speaker A

प्रिंटिंग प्रेस। ये इतनी जबरदस्त मशीन थी। जिससे आसानी से यूरोप में लाखों किताबें प्रिंट होने लगीं। लेकिन जब इस मशीन का मुसलमानों को पता चला, मुसलमानों ने इस मशीन को ही हराम कह दिया। अरबी कभी भी इससे नहीं लिखी जा सकती।

02:16

Speaker A

तो अब एक तरफ यूरोप में लाखों किताबें प्रिंट होने लगीं और दूसरी तरफ मुसलमान उसी तरह अपने हाथों और कलम से थोड़ी सी किताबें लिखते रहे। इसीलिए आहिस्ता-आहिस्ता [संगीत] पहली बार यूरोप मुसलमानों से साइंस और टेक्नोलॉजी में आगे निकलने लगा।

02:35

Speaker A

और आखिर यूरोप इतना आगे निकल गया कि मुसलमान अब यूरोप का मुकाबला नहीं कर सके। इसीलिए सबसे पहला इलाका जो मुसलमानों के हाथ से निकल गया वो था उंदलस स्पेन। जैसे ही स्पेन मुसलमानों के हाथ से निकल गया, यहां पर मुसलमानों पर उनका दूसरा

02:56

Speaker A

बड़ा अज़ाब आया। अमेरिका। वी विल मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। जैसे ही स्पेन मुसलमानों के हाथ से निकल गया, अचानक उसी साल यूरोप ने पहली बार एक नई दुनिया डिस्कवर की। अमेरिका। जिसने यूरोप के बादशाहों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। क्योंकि अमेरिका से यूरोप

03:22

Speaker A

के बादशाहों को इतना माल, इतना सोना मिला, कि जिसका बेचारे मुसलमान बादशाह सोच भी नहीं सकते थे। और इस तरह दूसरा इलाका जो मुसलमानों के हाथ से निकल गया वो था इंडोनेशिया। मुसलमान दुनिया आहिस्ता-आहिस्ता छोटी होती जा रही थी। लेकिन यहां भी यूरोप रुका नहीं,

03:46

Speaker A

बल्कि अब उसका अगला टारगेट था मुसलमान दुनिया का सबसे इंपॉर्टेंट इलाका इंडिया हिंदुस्तान। [संगीत] और आखिर पूरे इंडिया को ही मुसलमान दुनिया से छीन लिया। [चीखने की आवाज़] और इस तरह इंडिया हिंदुस्तान भी मुसलमानों के हाथों से निकल गए।

04:09

Speaker A

[संगीत] इसके बाद यूरोप ने ये सारे इलाके भी मुसलमानों से छीन लिए। जिसके बाद यह सारे अरब इलाके भी मुसलमानों के हाथों से निकल गए। और आखिर रशिया ने यह सारे इलाके भी मुसलमानों से छीन लिए। मतलब यह कितनी अफसोस की बात है कि आज से

04:29

Speaker A

500 साल पहले ये पूरी मुसलमान दुनिया थी और यहां से आहिस्ता-आहिस्ता टूटते-टूटते आज से 100 साल पहले मुसलमान दुनिया सिर्फ इतनी सी रह गई। तो अब इस मैप को गौर से देखें। वर्ल्ड वॉर वन से पहले दुनिया में

04:44

Speaker A

सिर्फ तीन ही ऐसी कंट्रीज थी जो आजाद थी। ईरान, अफगानिस्तान और मुसलमानों की सबसे बड़ी ताकत उस्मानिया खिलाफत। ईरान और अफगानिस्तान तो उस जमाने [संगीत] में कमजोर कंट्रीज थे। उनके पास ज्यादा कोई ताकत थी ही नहीं। असल में मुसलमानों

05:08

Speaker A

की दुनिया में सिर्फ एक ही आखिरी ताकत थी। उस्मानिया खिलाफत। और वर्ल्ड वॉर वन से पहले दुनिया का सबसे ताकतवर मुसलमान एक ही आदमी था। सुल्तान अब्दुल हमीद। इस वक्त उस्मानिया सल्तनत अपनी आखिरी सांसे ले रही थी। लेकिन सुल्तान अब्दुल

05:28

Speaker A

हमीद अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह उस्मानिया खिलाफत को मुसलमानों की इस आखिरी खिलाफत [गला साफ़ करने की आवाज़] को बचाया जाए। लेकिन ऐसा करना कोई आसान काम नहीं था। क्योंकि [संगीत] यूरोप अब भी मुसलमान

05:42

Speaker A

दुनिया में आहिस्ता-आहिस्ता घुस रहा था। [चीखने की आवाज़] इसीलिए एक दिन सुल्तान अब्दुल हमीद के पास यूरोप के कुछ ताकतवर यहूदी आए और उन्होंने सुल्तान अब्दुल हमीद से कहा कि आपकी खिलाफत वैसे भी एक कमजोर खिलाफत है। लेकिन अगर आप हम यहूदियों को फस्तीन का

06:05

Speaker A

इलाका गिफ्ट कर देंगे तो हम आपके सारे कर्जे माफ कर देंगे। और आपको भी छोड़ देंगे। [संगीत] कुछ तो लेकिन मुसलमानों के खलीफा सुल्तान अब्दुल हमीद ने यहूदियों की इस ऑफर को फाड़ दिया और कहा फस्तीन मेरा नहीं बल्कि दुनिया के

06:26

Speaker A

मुसलमानों का है। और मैं फस्तीन का एक [संगीत] टुकड़ा भी तुम्हें नहीं दूंगा। जो करना है कर लो। [संगीत] यहूदी वापस यूरोप में अपने बादशाह ब्रिटिश एंपायर के पास गए और उनसे कहा अब वक्त आ गया है कि

06:48

Speaker A

मुसलमानों की इस आखिरी ताकत उस्मानिया खिलाफत को तोड़ दिया जाए। इसके कुछ ही अरसे बाद उस्मानिया खिलाफत के अंदर सुल्तान अब्दुल हमीद को जबरदस्ती उनके तख्त से हटा दिया गया। और उनकी जगह एक नया खलीफा बिठाया गया। सुल्तान महमद

07:09

Speaker A

जो सिर्फ एक नाम का खलीफा था और उसके पास ज्यादा कोई ताकत नहीं थी। सुल्तान अब्दुल हमीद के जाने के बाद मुसलमानों के हालात और भी तेजी से खराब होने लगे। [संगीत] तो अब जब मुसलमान अपनी तारीख के सबसे खराब

07:27

Speaker A

और कमजोर टाइम से गुजर रहे थे, अचानक उसी टाइम दुनिया की सबसे बड़ी जंग का वक्त करीब आया। वर्ल्ड वॉर वन। अब मुसलमान दुनिया को थोड़ी देर साइड पर रखें और हम जाते हैं यूरोप की तरफ। मुसलमानों की ताकत तो अब तक बिल्कुल खत्म

07:50

Speaker A

हो चुकी थी। लेकिन वहां यूरोप में एक बहुत बड़ा प्रेशर कुकर बन रहा था। [संगीत] क्योंकि यूरोप की हर कंट्री इस वक्त एक सुपर पावर थी। फ्रांस, यूके, जर्मनी, रशिया और ये सारी कंट्रीज अपने आप को ही दुनिया का सबसे

08:15

Speaker A

बड़ा सुपर पावर समझते थे। [संगीत] लेकिन यहां मसला यह था इतनी ज्यादा ताकतें एक ही जगह पर होंगी तो क्या होगा?

08:24

Speaker A

यूरोप में हर कोई अपने आप को ही सबका बाप समझता था। और कोई भी दूसरे की बात नहीं मानता था। इसीलिए यहां पर सबको एक ऐसे बहाने की तलाश थी कि दुनिया में ऐसा कुछ हो जाए जिससे वो एक दूसरे को तोड़ सके।

08:42

Speaker A

और आखिर सबको यह बहाना मिल गया। हंगरी का प्रिंस फर्डनेंट। [संगीत] एक दिन ये प्रिंस अपनी गाड़ी में अपनी बीवी के साथ कहीं जा रहा था। [संगीत] रस्ते में अचानक इस प्रिंस की गाड़ी पर कुछ असिंस ने हमला कर दिया। [संगीत]

09:04

Speaker A

और जैसे ही प्रिंस की गाड़ी थोड़ी स्लो हुई, उन्होंने प्रिंस की गाड़ी की तरफ ग्रेनेड्स फेंक दिए। लेकिन ये ग्रेनेड प्रिंस की गाड़ी के बोननेट पर लगकर बाउंस हुआ। [संगीत] और जाकर दूर फट गया। और प्रिंस बच गया।

09:20

Speaker A

व्हाट हैपेंड? [संगीत] प्रिंस का ड्राइवर गाड़ी को तेजी से यहां से दूर भगाने लगा। लेकिन आगे जाकर एक बार फिर असिंस ने प्रिंस की गाड़ी को घेर लिया और आखिर प्रिंस और उसकी बीवी पर गोलियों की बारिश कर दी।

09:35

Speaker A

और इस प्रिंस को मार डाला। यह प्रिंस कोई आम आदमी नहीं था। बल्कि इसी प्रिंस ने आगे जाकर ऑस्ट्रो हंगरी इस पूरे इलाके का बादशाह बनना था। यह देखकर हंगरी के बादशाह ने इस प्रिंस की मौत का इल्जाम

09:55

Speaker A

पास ही एक मुल्क सर्बिया पर लगाया और कहा इन्होंने ही हमारे प्रिंस को बेरहमी से मारा है। इसीलिए अचानक हंगरी ने सर्बिया पर हमला कर दिया। यहां से इसी जगह से अब तक यूरोप में जो प्रेशर कुकर बन रहा था [संगीत]

10:15

Speaker A

वो आखिर फट गया। [संगीत] क्योंकि इसी प्रिंस की मौत से दुनिया की सबसे बड़ी जंग शुरू हुई, वर्ल्ड वॉर वन। [संगीत] क्योंकि जैसे ही हंगरी ने सर्बिया पर हमला किया, सर्बिया ने अपने आप को बचाने के लिए अपने दोस्त को बुलाया। रशिया।

10:41

Speaker A

और उसके दोस्त रशिया ने उल्टा हंगरी पर हमला कर दिया। जब रशिया ने हंगरी पर हमला किया, हंगरी ने भी अपने दोस्त को इस जंग में बुलाया। और हंगरी के इस दोस्त का नाम था जर्मनी। जब जर्मनी इस जंग में आया, यह देखकर

11:01

Speaker A

जर्मनी के सबसे बड़े दुश्मन फ्रांस को भी मजबूरन इस जंग में कूदना पड़ा। और फ्रांस ने जर्मनी पर हमला कर दिया। [संगीत] यह देखकर जर्मनी ने फ्रांस पर हमला कर दिया। [संगीत] जैसे ही जर्मनी ने फ्रांस पर हमला किया,

11:18

Speaker A

फ्रांस को बचाने के लिए उसका दोस्त मैदान में आया। ऑफकोर्स उस जमाने की सबसे बड़ी सुपर पावर [संगीत] द ग्रेट ब्रिटिश एंपायर। [संगीत] और ब्रिटिश एंपायर ने जर्मनी पर हमला कर दिया। यस, ये सब बिल्कुल ऐसा ही था जैसे क्रिकेट खेलते हुए दो बच्चों की

11:43

Speaker A

लड़ाई हो जाए। खत्म, हाथ मत लगाना। और इन बच्चों की वजह से आहिस्ता आहिस्ता बड़े भी इस लड़ाई में आने की गलती छुपाने की कोशिश मत करें। और आखिर बच्चों की यह लड़ाई खानदानों की लड़ाई बन जाती। बहुत हो गया।

11:55

Speaker A

मतलब सिर्फ एक प्रिंस की मौत की वजह से अब पूरा यूरोप ही आपस में लड़ रहा था। और इसी को कहते हैं वर्ल्ड वॉर वन। इस जंग में यूरोप दो ग्रुप्स में डिवाइड हो चुका था। एक तरफ जर्मनी और उसके ये

12:14

Speaker A

सारे दोस्त और दूसरी तरफ ब्रिटिश एंपायर और उसके दोस्त। अब यह लड़ाई थी तो यूरोप [संगीत] के अंग्रेजों के दरमियान। लेकिन यह सिर्फ यूरोप की जंग नहीं थी। क्योंकि यूरोप की इन कंट्रीज ने इससे पहले दुनिया के बहुत सारे इलाकों पर कब्जा किया

12:31

Speaker A

हुआ था और वहां भी यूरोप की फौजें बैठी हुई थीं। इसीलिए ऑटोमेटिकली इन सारे इलाकों में भी यही जंग शुरू हुई। अब समझ आई इसे वर्ल्ड वॉर क्यों कहते हैं?

12:45

Speaker A

[संगीत] क्योंकि यूरोप की यह जंग पूरी दुनिया में लड़ी जा रही थी। लेकिन अब भी दुनिया में एक ग्रुप इस जंग में बिल्कुल न्यूट्रल था। दुनिया के मुसलमान।

13:06

Speaker A

इस जंग [संगीत] से कोई ताल्लुक नहीं था। लेकिन यूरोप में सबको अच्छी तरह पता था कि अगर जंग हुई तो उस्मानिया सल्तनत यूरोप में सिर्फ एक ही कंट्री का साथ देगी। क्योंकि यूरोप का यह मुल्क उस्मानिया खिलाफत का सबसे अच्छा दोस्त था। जर्मनी

13:25

Speaker A

[संगीत] वर्ल्ड वॉर से बहुत साल पहले ही उस्मानिया खिलाफत और जर्मनी बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे। लेकिन इतनी अच्छी दोस्ती होने के बाद भी वर्ल्ड वॉर वन शुरू होने के 6 महीने बाद भी उस्मानिया खिलाफत वर्ल्ड वॉर वन में शामिल

13:44

Speaker A

नहीं हुई थी। क्योंकि उस्मानिया खिलाफत का अंग्रेजों की इस जंग से कोई ताल्लुक ही नहीं था। लेकिन अचानक एक ऐसा काम हुआ जिससे मजबूरन उस्मानिया खिलाफत को भी वर्ल्ड वॉर वन में कूदना पड़ा। जंग शुरू होने से पहले उस्मानिया खिलाफत

14:03

Speaker A

ने ब्रिटिश एंपायर को दो बड़े-बड़े वॉर शिप्स बनाने का ऑर्डर दिया था। इन दो जहाजों की कीमत 13,000 करोड़ थी। और उस्मानिया खिलाफत ने यह सारे पैसे 13,000 करोड़। ब्रिटिश एंपायर को पहले ही दे दिए थे। लेकिन जैसे ही यह दोनों जहाज

14:27

Speaker A

तैयार हुए अचानक उसी टाइम वर्ल्ड वॉर वन भी शुरू हुई। अब तक उस्मानिया खिलाफत का इस जंग से कोई ताल्लुक नहीं था। लेकिन जंग शुरू होने के बाद जब उस्मानिया ने ब्रिटिश एंपायर से अपने जहाज मांगे। ब्रिटिश एंपायर ने

14:45

Speaker A

बदमाशी से कहा कि नहीं हम तुम्हें यह जहाज नहीं देंगे। गेट दैट [संगीत] शिप्स बल्कि ब्रिटिश एंपायर ने उस्मानिया खिलाफत के पैसों से बने हुए इन वॉर शिप्स को अपनी नेवी में शामिल कर दिया। और इन शिप्स पर

15:00

Speaker A

अपने झंडे लहरा दिए। ये उस्मानिया खिलाफत के मुंह पर एक जोर का थप्पड़ था। हम तुम्हें यह जहाज नहीं देंगे। और उस्मानिया खिलाफत की यह एक सख्त बेइज्जती थी। और उस्मानिया खलीफा के लिए यह बहुत ही एक शर्म की बात थी।

15:18

Speaker A

इसीलिए उस्मानिया खिलाफत के अंदर कुछ लोग ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ होने लगे और लोग उस्मानिया खलीफा पर प्रेशर डालने लगे कि अब वक्त आ चुका है कि हम उस्मानिया खिलाफत में वर्ल्ड वॉर वन में घुस जाए लेकिन उस्मानिया खलीफा अब भी जंग का ऐलान

15:38

Speaker A

नहीं कर रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह पता था कि ये सिर्फ अंग्रेजों की आपस की लड़ाई है। और हम मुसलमानों को इस लड़ाई में नहीं घुसना चाहिए। तो अब उस्मानिया खिलाफत को वर्ल्ड वॉर वन में खींचने के लिए उसके दोस्त जर्मनी ने

15:56

Speaker A

एक बहुत जबरदस्त चाल खेली। [संगीत] जब जर्मनी ने देखा कि ब्रिटिश एंपायर ने उस्मानिया खिलाफत को उसके दो जहाज नहीं दिए। हम तुम्हें यह जहाज नहीं देंगे। यह देखकर जर्मनी ने उस्मानिया खिलाफत से कहा कि क्या हुआ अगर ब्रिटिश एंपायर ने आपको

16:11

Speaker A

जहाज नहीं दिए? मैं आपका दोस्त हूं। मैं आपको दो जहाज गिफ्ट करूंगा और वो भी बगैर पैसों के बिल्कुल फ्री में। इसकी वजह से ऑफ कोर्स उस्मानिया खिलाफत जर्मनी के और भी करीब आ गई। और ब्रिटिश एंपायर से नफरत

16:29

Speaker A

करने लगी। जर्मनी से यह दो वॉरशिप्स उस्मानिया खिलाफत की तरफ रवाना हुई। [संगीत] रास्ते में ब्रिटिश एंपायर ने इन कश्तियों को रोकने की भी कोशिश की। लेकिन किसी तरह ये कश्तियां अपनी जान बचाकर उस्मानिया खिलाफत के कैपिटल इस्तंबोल

16:49

Speaker A

पहुंच गए। [संगीत] मुसलमानों ने इन कश्तियों को वेलकम किया। और इन कश्तियों पर खिलाफत के झंडे लगाए गए। लेकिन इन कश्तियों के आने के बाद भी उस्मानिया खिलाफत वर्ल्ड वॉर वन में शामिल नहीं हुई। क्योंकि उस्मानिया खिलाफत को

17:08

Speaker A

पता था कि अगर वो इस जंग में जाएंगे तो वो बुरी तरह हार जाएंगे। लेकिन यहां से उस्मानिया खिलाफत के अंदर ही एक बहुत ही खतरनाक साजिश शुरू हुई। अब तक उस्मानिया खिलाफत में दो ग्रुप्स बन चुके थे। एक उस्मानिया खिलाफत के प्राइम

17:26

Speaker A

मिनिस्टर का ग्रुप जो वर्ल्ड वॉर वन में शामिल नहीं होना चाहता था। और दूसरा ग्रुप आर्मी चीफ का ग्रुप जो हर हाल में वर्ल्ड वॉर वन के अंदर घुसना चाहता था। मतलब यहां से उस्मानिया खिलाफत के अंदर ही प्राइम

17:41

Speaker A

मिनिस्टर और आर्मी चीफ की लड़ाई शुरू हुई। [संगीत] लेकिन हम सबको अच्छी तरह पता है कि जब भी किसी प्राइम मिनिस्टर और आर्मी चीफ की लड़ाई होती है तो हमेशा आर्मी चीफ ही जीतता है। तो अब प्राइम मिनिस्टर को

17:55

Speaker A

कंट्रोल करने के लिए उस्मानिया आर्मी चीफ ने एक बहुत ही खतरनाक साजिश शुरू की। आर्मी चीफ ने प्राइम मिनिस्टर को बताए बगैर ही जर्मनी के इन दो जहाजों को हुक्म दिया कि जाओ और रशिया पर हमला कर दो। इन

18:09

Speaker A

कश्तियों ने जाकर रशिया के पोर्ट्स पर हमला कर दिया। [संगीत] और जब रशिया को इसका पता चला उन्हें ऑफ कोर्स बहुत सख्त गुस्सा आया। और अब रशिया उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ जंग की तैयारी करने लगा। लेकिन वहां उस्मानिया प्राइम मिनिस्टर को

18:29

Speaker A

तो इस सब का पता ही नहीं था। यह सब तो उसके आर्मी चीफ की साजिश थी। इसीलिए प्राइम मिनिस्टर ने अब उस्मानिया खिलाफत को अंग्रेजों की इस जंग में खामखा तबाह होने से बचाने के लिए रशिया से माफी

18:42

Speaker A

मांगी। हमने एक बड़ी गलती की है। और कहा हम आपकी इस जंग वर्ल्ड वॉर वन में नहीं पड़ना चाहते। तो आप प्लीज हमें इस जंग में ना घसीटें। लेकिन रशिया ने उसकी बात नहीं मानी। और आखिर 1st नवंबर 1914 को रशिया ने

19:03

Speaker A

उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ जंग का [संगीत] ऐलान किया। ये देखकर ऑफ कोर्स रशिया के दोस्तों ने भी ऐसा ही किया। ब्रिटिश एंपायर और फ्रांस ने भी सिर्फ 4 दिन बाद फिफ्थ नवंबर 1914 को उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ जंग का ऐलान

19:18

Speaker A

किया। इस तरह ना चाहते हुए भी सिर्फ एक करप्ट आर्मी चीफ की वजह से उस्मानिया खिलाफत के आखिरी दिन करीब आ चुके थे। [संगीत] तो अब पूरी उस्मानिया खिलाफत के पास सिर्फ एक ही ऑप्शन था जिहाद। जब सब ने उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ जंग

19:41

Speaker A

का ऐलान किया। [संगीत] उसके सिर्फ एक हफ्ते बाद आखिर उस्मानिया खलीफा ने मुसलमान दुनिया के 30 बड़े उलमा स्कॉलर्स की तरफ लोग भेजे और उनसे पूछा कि क्या अब वक्त आ चुका है कि पूरी दुनिया के मुसलमान एक होकर इन अंग्रेजों के खिलाफ

19:59

Speaker A

जंग लड़े जिस पर सारे उलमा ने ये पांच फतवे दिए और इन पांचों फतवों में लिखा था कि हां जिहाद का वक्त आ चुका है। जैसे ये फतवे उस्मानिया खलीफा तक पहुंचे, उन्होंने फौरन हुक्म दिया कि ये फतवे

20:17

Speaker A

उस्मानिया खिलाफत के हर गली, हर चौक ऐ लोगों और हर चौराहे में मुसलमानों के सामने जोर-जोर से पढ़ा जाए। पीर में देनी है ये सुनकर मुसलमान फौज हर तरफ से जंग के लिए खड़ी होने लगी। और लाखों मुसलमान उस्मानिया खिलाफत की फौज

20:37

Speaker A

में शामिल होने लगी। अब यह सिर्फ अंग्रेजों की जंग नहीं बल्कि यहां से यह जंग हमारी पूरी दुनिया के मुसलमानों की भी जंग बन चुकी है। तमाम मुसलमानों पर जंग फर्ज हो चुकी है। उस्मानिया खिलाफत की फौज जंग के लिए तैयार

20:54

Speaker A

हुई। और उनके जज्बों को बढ़ाने के लिए हर तरफ उस्मानिया खिलाफत के तराने बजने लगे। जिनमें सबसे मशहूर तराना यह था। और यह इतना मशहूर तराना था कि इसे आज तक तुर्की में गाया जाता है। [संगीत] उस्मानिया खलीफा के इस जिहाद के फतवे के

21:22

Speaker A

बाद सबसे बड़ा चेंज इंडिया के मुसलमानों में आया। क्योंकि इंडिया के बहुत सारे मुसलमान इस वक्त ब्रिटिश एंपायर की फौज में थे। और जैसे ही उन्होंने खलीफा का फतवा सुना इंडिया के 2000 मुसलमान फौजियों ने ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ ही बगावत कर

21:39

Speaker A

दी [संगीत] और अंग्रेजों के ही दिए हुए हथियारों से अंग्रेजों को ही मारने लगे। [संगीत] जब ब्रिटिश एंपायर और उसके साथियों ने देखा कि उस्मानिया खिलाफत इतने जज्बे से जंग के लिए तैयार हो रही है तो उन्होंने वक्त जाया किए बगैर 5 लाख अंग्रेज फौज को

22:02

Speaker A

जमा होने का हुक्म दिया और उन्हें बड़ी-बड़ी कश्तियों में उस्मानिया के कैपिटल इस्तंबोल की तरफ रवाना किया। जैसे ही ये कश्तियां उस्मानिया कैपिटल [संगीत] के पास पहुंची। इन कश्तियों में अंग्रेज ये देखकर हैरान रह गए कि सामने उस्मानिया सल्तनत की 3 लाख

22:26

Speaker A

की फौज इनका इंतजार कर रही थी। एक तरफ उस्मानिया खिलाफत की 3 लाख मुसलमानों की फौज और दूसरी तरफ 5 लाख अंग्रेजों की फौज। ऐसा लग [संगीत] रहा था कि उस्मानिया खिलाफत आसानी से यह जंग हार जाएगी। लेकिन जैसे ही जंग शुरू हुई

22:49

Speaker A

उस्मानिया फौज इतनी बहादुरी से लड़ी [संगीत] कि कुछ ही देर में हजारों अंग्रेज मरने लगे और आखिर उस्मानिया खिलाफत ने अंग्रेजों की फौज को क्रश कर दिया। लाखों अंग्रेज सोल्जर्स मारे गए। और इस तरह उस्मानिया खिलाफत वर्ल्ड वॉर वन

23:15

Speaker A

में अपनी पहली जंग जीत गई। वैसे ये जंग कोई आम जंग नहीं थी। ये वर्ल्ड वॉर वन की सबसे बड़ी जंगों में से एक थी। और इस जंग में उस्मानिया खिलाफत ने पूरी दुनिया को अपनी ताकत और जज्बा दिखाया था।

23:34

Speaker A

और इस जंग के बाद हर तरफ पूरी मुसलमान दुनिया में जीत का जश्न मनाया जा रहा था। लेकिन ये उस्मानिया खिलाफत की जिंदगी की आखिरी जीत थी। क्योंकि मुसलमान तो जश्न मना रहे थे। लेकिन वहां ब्रिटिश एंपायर में हर तरफ

23:54

Speaker A

गम फैला हुआ था। और अब ब्रिटिश एंपायर खिलाफत से बदला लेने के लिए तड़प रही थी। और यहां से ब्रिटिश एंपायर ने एक ऐसा प्लान बनाना शुरू किया जिसने दुनिया से हमेशा के लिए खिलाफत खत्म [नाक से की जाने वाली आवाज़] कर दी।

24:10

Speaker A

ब्रिटिश एंपायर को अब अच्छी तरह समझ आ चुकी थी कि उस्मानिया खिलाफत को कभी भी बाहर से इस तरह हमलों से नहीं तोड़ा [संगीत] जा सकता। उस्मानिया खिलाफत को सिर्फ और सिर्फ तभी तोड़ा जा सकता है जब इसके अंदर रहने वाले

24:27

Speaker A

मुसलमान आपस में लड़ने लगे। चाहिए कोई जुल्मान और मुसलमान लड़ कर एक दूसरे को इतना कमजोर कर दें कि हम आकर इन्हें आसानी से खत्म [नाक से की जाने वाली आवाज़] कर दें। ये ब्रिटिश एंपायर की पुरानी स्ट्रेटजी थी और

24:43

Speaker A

इसका नाम था डिवाइड एंड रूल। ब्रिटिश एंपायर ने उस्मानिया खिलाफत का मैप खोला। [संगीत] ये थी उस जमाने में उस्मानिया खिलाफत। ब्रिटिश एंपायर ने देखा कि उस्मानिया खिलाफत में दो बड़ी कौमें रहती हैं। एक ऑफकोर्स टर्किश कौम जो इस इलाके में रहती

25:02

Speaker A

थी और दूसरे अरब जो इस सारे इलाके में रहते थे। ब्रिटिश एंपायर ने सोचा कि क्यों ना हम इन अरबों के दिलों में तुर्कों के खिलाफ नफरत पैदा करें। और इन्हें लालच दे कि अगर अरब हम अंग्रेजों के साथ मिलकर इन

25:18

Speaker A

तुर्कों के खिलाफ लड़ेंगे तो हम खिलाफत तुर्कों से छीनकर वापस अरबों को देंगे। तो अब ब्रिटिश एंपायर को एक ऐसे अरब लीडर की जरूरत थी जिसे अपने साथ मिलाकर ब्रिटिश एंपायर उस्मानिया खिलाफत को अंदर से ही तोड़ दे। और आखिर उन्हें यह अरब लीडर मिल

25:39

Speaker A

गया। मक्का का एक अरब स्कॉलर शरीफ हुसैन। [संगीत] अंग्रेजों ने शरीफ हुसैन के साथ एक डील की कि अगर तुम अरब हम अंग्रेजों का साथ दोगे और उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ बगावत करोगे तो हम उस्मानिया खलीफा को हटाकर तुम्हें मुसलमानों का नया खलीफा

25:58

Speaker A

बनाएंगे। शरीफ हुसैन ने अंग्रेजों की ये डील कबूल कर ली। [संगीत] और अंग्रेजों ने शरीफ हुसैन की मदद के लिए अपना बेस्ट सीक्रेट एजेंट अरब की तरफ रवाना किया [संगीत] जिसका नाम था टीई लॉरेंस या जिसे आगे जाकर

26:17

Speaker A

नाम मिला लॉरेंस ऑफ अरेबिया लॉरेंस ऑफ अरेबिया एक बहुत ही चालाक आदमी था [संगीत] और वो इतनी जबरदस्त अरबी बोलता था कि इवन अरब भी उसका मुकाबला नहीं कर सकते थे और वो अरब के हर कबीले की ताकत और कमजोरी

26:36

Speaker A

को अच्छी तरह जानता था। लॉरेंस अरब के गर्म डेजर्ट को क्रॉस करके अरबों के पास पहुंचा। अरबों की तरह कपड़े पहने और बिल्कुल अरब कल्चर में ढल गया। लॉरेंस ऑफ अरेबिया ने अरबों को बहकाना शुरू किया। और उनसे कहा कि उस्मानिया खिलाफत ने तुम

26:58

Speaker A

अरबों पर 400 साल से जुल्म किया है। स्ले [संगीत] सर्व द और तुमसे तुम्हारा सबसे बड़ा हक छीना है। खिलाफत तुम अरब क्यों गुलामी कर रहे हो इन तुर्कों की? [संगीत] ये बातें सुनकर बेचारे गरीब अरबों की गैरत

27:16

Speaker A

जागने लगे। और हर तरफ से अरब उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ खड़े होने लगे। कहा जाता है ब्रिटिश एंपायर लॉरेंस ऑफ़ अरेबिया को आज के हिसाब से हर महीने $1 करोड़ डॉलर्स दिया करती थी। इट मनी ताकि वो इन पैसों से अरब के शेखों को खरीद

27:36

Speaker A

सके। एक करोड़ डॉल वो भी हर महीने। अब यहां क्वेश्चन ये है कि आखिर ब्रिटिश एंपायर इतना सारा पैसा लाती कहां से थी?

27:50

Speaker A

इसका बहुत ही एक सिंपल जवाब है। हम मतलब उस दौर का इंडिया हिंदुस्तान। वर्ल्ड वॉर वन में ब्रिटिश एंपायर का इंडिया पर सख्त कंट्रोल [संगीत] था। इसीलिए जैसे ही वर्ल्ड वॉर वन शुरू हुई, ब्रिटिश आर्मी इंडिया के एक-एक शहर की तरफ

28:09

Speaker A

गई और इंडिया के हर शहर को लूट कर वहां का सारा माल ट्रेनों में भर-भर के इंडिया से ब्रिटिश एंपायर की तरफ भेजती रही। [संगीत] इन रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है ब्रिटिश एंपायर ने इंडिया से 2 लाख भेड़

28:24

Speaker A

बकरियां, 5 लाख टन चावल और आटा और 400 टन चीनी इंग्लैंड की तरफ भेजा। और सिर्फ यही नहीं ओवरऑल ब्रिटिश एंपायर ने 40 लाख टन सामान इंडिया से छीनकर अपने फौजियों की तरफ भेजा। [संगीत] 40 लाख टन इतना ज्यादा माल है कि अगर आज

28:49

Speaker A

इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हो तो उसके लिए आपको 2 लाख कंटेनर ट्रक्स की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा ब्रिटिश एंपायर ने इंडिया के गरीब लोगों पर भारी-भारी टैक्सेस लगाए। और इस तरह सिर्फ कैश में ब्रिटिश एंपायर ने

29:06

Speaker A

इंडिया से 13 बिलियन जमा किए। मतलब हमारे गरीब दादा परदादा से पैसे छीनकर अंग्रेज वर्ल्ड वॉर वन लड़ रहे थे। इंडिया का यह सारा पैसा सीधा अरब की तरफ लॉरेंस ऑफ अरेबिया की जेब में जाने लगा। और यही पैसा लॉरेंस ऑफ अरेबिया अरब के

29:28

Speaker A

शेखों में बांटने लगा। और अरब के शेख लालच में आकर उस्मानिया खिलाफत के खिलाफ बगावत करते रहे। [संगीत] और इस तरह हर तरफ अरब दुनिया में बगावतें शुरू हुई। आखिर अरबों ने उस्मानिया खिलाफत पर पहला सबसे बड़ा हमला किया और यह हमला उन्होंने

29:47

Speaker A

कहीं और नहीं बल्कि इस्लाम की सबसे होली सिटी मक्का पर किया और इसे छीन लिया। इसके बाद उन्होंने मदीना को भी घेर लिया। यह उस्मानिया खिलाफत के लिए एक बहुत बड़ा झजका था। क्योंकि अब उस्मानिया खिलाफत को एक ही टाइम पर दो साइड्स पर जंग लड़नी थी।

30:07

Speaker A

एक जंग अंग्रेजों के खिलाफ और दूसरी जंग अपने ही मुसलमान भाइयों के खिलाफ। इस जगह से इस एग्जैक्ट मोमेंट से उस्मानिया खिलाफत की तबाही शुरू हुई। अरब तेजी से आगे बढ़ने लगे। और अरबों की इस फौज को लीड कौन कर रहा था? वही अंग्रेज

30:27

Speaker A

एजेंट लॉरेंस ऑफ अरेबिया। और आहिस्ता-आहिस्ता यह सारे इलाके उस्मानिया खिलाफत के कंट्रोल से [संगीत] निकल गए। और इस तरह पहली बार अरब बागियों की मदद से अंग्रेज मुसलमानों के एक बहुत बड़े शहर एंटर हुए। और इस शहर का नाम था

30:45

Speaker A

बगदाद। बगदाद वो शहर था जिसे पहली बार उमर बिन खत्ताब रज़ अल्लाह अनहु ने फतह किया था। किसी जमाने में बगदाद इस्लाम की गोल्डन एज का कैपिटल था। [संगीत] और पूरी दुनिया के मुसलमानों का सेंटर था। लेकिन वर्ल्ड वॉर वन में अंग्रेजों ने

31:08

Speaker A

मुसलमानों से यह हीरा बगदाद छीन लिया। अब उस्मानिया खिलाफत तो टूट रही थी। लेकिन दूसरी तरफ अरब जश्न मना रहे थे। कि अब दुनिया में नई खिलाफत अरबों की बनेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अरबों के सारे ख्वाब टूट गए। क्योंकि यहां पर वर्ल्ड वॉर

31:34

Speaker A

वन में एक नए ग्रुप की एंट्री हुई। यहूदी जायनिस्ट। ब्रिटिश एंपायर ने अब तक इंडिया को तो लूट लिया था। लेकिन अब भी उन्हें यह जंग जीतने के लिए और भी ज्यादा पैसों और हथियारों की जरूरत थी। इसीलिए ब्रिटिश एंपायर उस जमाने

31:54

Speaker A

में दुनिया के सबसे बड़े बैंक रथ चाइल्ड की तरफ गई [संगीत] और उनसे कर्जे के लिए भीख मांगने लगे। योर मनी लेंडर्स एंड यू विल गेट योर इंटरेस्ट। रथ चाइल्ड ने कहा ठीक है। हम आपको पैसा देने के लिए तैयार हैं।

32:10

Speaker A

वी आर मनी लेंडर्स। लेकिन हमारी एक छोटी सी शर्त है। वी रिक्वायर एग्रीमेंट कि आप इस जंग में उस्मानिया खिलाफत को तोड़कर हम यहूदियों के लिए फस्तीन में एक नई रियासत बनाएं। टू आवर पीपल अब्सोल्यूट फ्रीडम इजराइल द वर्ल्ड विथ डिग्निटी।

32:28

Speaker A

इसी के साथ ब्रिटिश एंपायर हथियारों के लिए बॉम्ब्स बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के पास गई। और उनसे कहा कि आप थोड़े से पैसों में हमारे लिए बॉम्ब्स बनाएं। लेकिन इस कंपनी का जो हेड था उसने कहा ठीक है

32:42

Speaker A

आपको जितने भी बम चाहिए हम बना देंगे और इसके लिए हम आपसे कोई भी पैसा नहीं लेंगे। हमारी बस एक छोटी सी शर्त है। यू हैव टू डू अ लिटिल एग्रीमेंट विथ मी। कि आप उस्मानिया खिलाफत को तोड़कर हमारे

32:56

Speaker A

लिए फस्तीन में एक नई रियासत बनाएंगे। इजराइल क्योंकि इस कंपनी का मालिक भी एक यहूदी जायनिस्ट था। केन वाइसमैन जो आगे जाकर इजराइल का पहला प्रेसिडेंट भी बना। मतलब वर्ल्ड वॉर वन में दुनिया का सबसे बड़ा बैंक भी यहूदी जाइनेस्ट का था।

33:16

Speaker A

द रिसोर्सेज ऑफ़ द चाइल्ड विल बी अम और दुनिया की सबसे [संगीत] बड़ी बम बनाने वाली कंपनी भी यहूदी जानेस की थी। तो ऑफकोर्स ब्रिटिश एंपायर के पास अब कोई रास्ता नहीं था। आई नीड मनी। ब्रिटिश एंपायर ने वर्ल्ड वॉर वन शुरू

33:32

Speaker A

होने के [संगीत] 3 साल बाद यहूदी जाइनिस के साथ एक डील कर दी। बेल फोर डिक्लेरेशन [संगीत] कि जंग के बाद फस्तीन के इलाके में हम यहूदियों के लिए इजराइल बनाएंगे। इसी के साथ ब्रिटिश एंपायर की एक और डील

33:50

Speaker A

का भी लोगों को पता चला सक्स पिकको एग्रीमेंट। जिसमें अंग्रेजों ने आपस में डील की थी कि जंग खत्म होने के बाद हम कोई अरब खिलाफत नहीं बनाएंगे। बल्कि पूरी अरब दुनिया को हम आपस में ही बांट देंगे। हैव पेस्टाइन

34:05

Speaker A

एंड सीरिया एंड हाफ इराक। थोड़ी अरब दुनिया को फ्रांस कब्जा करेगा और बाकी अरब दुनिया ब्रिटिश एंपायर की होगी। पोजीशन। अब जब अरबों को इन डील्स का पता चला उनके पैरों के नीचे से जमीन ही निकल गई। और

34:21

Speaker A

[संगीत] उन्हें पता चला कि उनके साथ कितना बड़ा धोखा हुआ है। और उन्हें समझ आ गई कि अंग्रेज हमेशा उनसे झूठ बोलते रहे हैं। और वो कभी भी एक अरब खिलाफत नहीं बनाना चाहते थे। दे नॉट सपोर्ट अरब नेशनलिज्म दे सपोर्टेड

34:38

Speaker A

ब्रिटिश इमरियलिज्म। बल्कि अंग्रेज सिर्फ इन अरबों को यूज़ करके उस्मानिया खिलाफत को तोड़ना चाहते थे। [संगीत] यह देखकर अरबों के लीडर शरीफ हुसैन ने अंग्रेजों की इन डील्स को मानने से इंकार कर दिया और ऐलान किया कि हम फस्तीन में

34:55

Speaker A

कोई इजराइल को नहीं मानेंगे। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी और मुसलमान आपस की जंगों से बहुत कमजोर हो चुके थे। [संगीत] इसीलिए अंग्रेजों ने शरीफ हुसैन को पकड़ कर जेल में बंद कर दिया और अरब में अपना

35:13

Speaker A

एक नया पपेट लीडर बिठाया। सऊद खानदान का शेख अब्दुल अजीज। [संगीत] इसी के साथ ब्रिटिश फौज और आगे बढ़ी और पहली बार जेरूसलम के शहर एंटर हुई। [संगीत] जेरूसलम को इससे 700 साल पहले सुल्तान सलाहाउद्दीन अयूबी ने फतह किया था।

35:33

Speaker A

[संगीत] और तब से लेकर वर्ल्ड वॉर वन तक यह शहर मुसलमानों से कोई नहीं छीन सका था। जेरूसलम को फतह करने के बाद अंग्रेज फौज और आगे बढ़ी और मुसलमानों के एक और बड़े शहर को फतह किया। दमश्क डमास्कस

35:50

Speaker A

जो किसी जमाने में मुसलमानों के एक अज़म लीडर सुल्तान सलाहाउद्दीन का कैपिटल था। और इसी दमशक में सलाहाउद्दीन अयूबी की कब्र भी थी। कहा जाता है दमश फतह करने के बाद अंग्रेजों का एक जनरल सलाहाउद्दीन की कब्र के पास गया और कब्र को लात मारकर हु

36:08

Speaker A

गुरूर से कहा सलाद्दीन उठो सलाहाउद्दीन और देखो हम वापस आ चुके हैं। वी आर बैक आखिर पूरी अरब दुनिया को छीनने के बाद अंग्रेज अब फाइनली मुसलमानों के आखिरी खिलाफत के कैपिटल इस्तंबोल की तरफ बढ़ने लगे। [संगीत] इस्तंबोल वो शहर था जो इससे ऑलमोस्ट 500

36:30

Speaker A

साल पहले एक उस्मानिया सुल्तान सुल्तान महमद ने फतह किया था और अब 500 साल बाद अंग्रेजों ने एक बार फिर ये शहर उसी उस्मानिया खानदान से छीन लिया [संगीत] इस्तंबोल फतह करने वाले पहले सुल्तान का नाम था सुल्तान महमद

36:51

Speaker A

अल्लाहू अकबर और इस्तंबोल खोने वाले पहले आखिरी सुल्तान का नाम भी सुल्तान महमद था। अंग्रेजों की फौज हर तरफ से इस्तंबोल एंटर हुई और आखिर उस्मानिया खानदान ने 4 साल के बाद अंग्रेजों के सामने सरेंडर कर दिया। [संगीत]

37:14

Speaker A

और इस तरह इसके कुछ ही अरसे बाद खिलाफत हमेशा के लिए दुनिया से खत्म [नाक से की जाने वाली आवाज़] कर दी गई। और उस्मानिया खिलाफत के सरेंडर के साथ ही वर्ल्ड वॉर वन खत्म हो गई। और मुसलमानों के हाथ से यह सारे इलाके भी

37:31

Speaker A

निकल गए। इसी दौर में अंग्रेजों ने ईरान पर भी हमला किया और इसे भी छीन लिया। अब यह सुनकर आप हैरान रह जाएंगे कि आज से 500 साल पहले मुसलमानों का दुनिया के इतने बड़े इलाके पर राज था और वहां से

37:49

Speaker A

आहिस्ता-आहिस्ता टूटते-टूटते वर्ल्ड वॉर वन के बाद पूरी मुसलमान दुनिया में सिर्फ एक ही इलाका आजाद था और बाकी पूरी दुनिया अंग्रेजों के गुलाम [संगीत] या पपेट बन चुके थे और इस एक इलाके का नाम था अफगानिस्तान। वर्ल्ड वॉर वन इस्लाम की तारीख की सबसे

38:09

Speaker A

बुरी जंग थी। जिसमें पूरी दुनिया के मुसलमान अंग्रेजों के गुलाम बन चुके थे। [संगीत] लेकिन बहुत जल्द दुनिया के हालात एक बार फिर बदलने वाले थे। क्योंकि इस वर्ल्ड वॉर वन के बाद अब दुनिया में एक नई जंग होने वाली थी।

38:32

Speaker A

वर्ल्ड वॉर वन के दरमियान जर्मनी का एक आम सिपाही लड़ते-लड़ते जख्मी हो गया था और इस लड़के का इलाज जर्मनी के एक हॉस्पिटल में हो रहा था। [संगीत] जैसे ही यह लड़का ठीक हुआ और इसकी आंखें खोली गई। [संगीत]

38:55

Speaker A

सबसे पहले इस लड़के ने पूछा कि मुझे बताओ जंग का क्या हुआ? हाउ डिड द वॉर गो?

39:00

Speaker A

तो उसे बताया गया कि तुम्हारा मुल्क जर्मनी तो बुरी तरह यह जंग हार चुका है। जर्मनी हैज़ लॉस्ट द वॉर। और ब्रिटिश एंपायर ने जर्मनी की कमर हमेशा के लिए तोड़ दी है। द ब्रिटिश हैव डिस्ट्रयड अस। [संगीत]

39:15

Speaker A

जर्मनी ने तो हार मान ली थी। लेकिन जर्मनी का यह लड़का हार मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था। इसी एक लड़के के गुस्से की वजह से आगे जाकर दुनिया की सबसे बड़ी जंग लड़ी गई। वर्ल्ड वॉर टू

39:42

Speaker A

और इस लड़के का नाम एडोल्फ हिटलर यानी [संगीत] सब्सक्राइब

Topics: वर्ल्ड वॉर वन मुसलमान इतिहास उस्मानिया खिलाफत सुल्तान अब्दुल हमीद यूरोप की ताकत प्रिंटिंग प्रेस स्पेन का पतन ब्रिटिश साम्राज्य अरब बगावत विश्व युद्ध


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