**Why Allah Chose Arabia for Islam? | Ep 2 - The World’s First AI-Visualized Seerah Series! — Transcript & Summary | SozAI**
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इस वीडियो में बताया गया है कि अल्लाह ने इस्लाम के लिए अरब को क्यों चुना और पैगंबर मोहम्मद की जिंदगी को समझने के लिए अरब की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण।

## Key Takeaways

- अरब की ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को समझना पैगंबर मोहम्मद की जिंदगी को समझने के लिए आवश्यक है।
- मक्का को अल्लाह ने अपने घर काबा के लिए चुना, जो इस्लाम की पवित्र भूमि है।
- इस्लाम दीन इब्राहिमी है क्योंकि यह नबी इब्राहिम की दुआ और मार्गदर्शन पर आधारित है।
- अरब मुस्तरेबा समूह से पैगंबर मोहम्मद की नस्ल जुड़ी है, जो बाद में अरब संस्कृति का हिस्सा बने।
- अल्लाह की बरकत और हुक्म की समझ इस्लाम के मूल सिद्धांतों में शामिल है।

## What the video covers

- पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी को समझने के लिए अरब की भूगोल और इतिहास को जानना जरूरी है।
- अरब लोगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: अरब बायदा (प्राचीन अरब), अरब अरेबा (असली अरब) और अरब मुस्तरेबा (अरब बने लोग)।
- मक्का को अल्लाह ने अपने घर काबा के लिए चुना, जो एक वीरान और कठोर जगह है, जहां खेती और पानी की कमी थी।
- इस्लाम को दीन इब्राहिमी कहा जाता है क्योंकि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नबी इब्राहिम अल सलाम की दुआ का नतीजा हैं।
- नबी इब्राहिम अल सलाम ने बुतपरस्ती के खिलाफ संघर्ष किया और अल्लाह के नबी होने का संदेश फैलाया।
- कुरैश कबीले की शुरुआत फेहर से हुई, जो बाद में मक्का के प्रमुख बने।
- अरब मुस्तरेबा ने अरबी भाषा और संस्कृति में असली अरबों को भी पीछे छोड़ दिया।
- हजर अली सलाम और इस्माइल अल सलाम की कहानी से जमजम के कुएं और काबा के निर्माण की पृष्ठभूमि समझाई गई।
- इस्लाम की जड़ें नबी इब्राहिम की दुआ और उनके परिवार की कुर्बानी में हैं।
- अल्लाह के हुक्म और बरकत का महत्व इस्लाम की स्थापना में प्रमुख है।

## Chapters

1. 00:00 परिचय और पैगंबर मोहम्मद का संदर्भ
2. 01:58 सीरतु नबी की शुरुआत और इतिहास
3. 04:00 अरब लोगों की तीन श्रेणियाँ
4. 05:33 अरब मुस्तरेबा और कुरैश कबीले का उदय
5. 09:24 नबी इब्राहिम की कहानी और बुतपरस्ती का विरोध
6. 11:24 हजर अली सलाम और इस्माइल की यात्रा
7. 18:33 काबा का निर्माण और जमजम का कुआं
8. 25:09 इब्राहिम की दुआ और इस्लाम की स्थापना
9. 30:36 अल्लाह का हुक्म और बरकत का महत्व

Answers

## Questions about this video

अल्लाह ने इस्लाम के लिए अरब को क्यों चुना?

अल्लाह ने मक्का को अपने घर काबा के लिए इसलिए चुना क्योंकि यह एक वीरान और कठोर जगह थी, जो इस्लाम की स्थापना के लिए उपयुक्त थी। इसके अलावा, अरब लोग नबी इब्राहिम की दुआ और वंश से जुड़े थे।

इस्लाम को दीन इब्राहिमी क्यों कहा जाता है?

इस्लाम को दीन इब्राहिमी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह नबी इब्राहिम अल सलाम की दुआ और मार्गदर्शन पर आधारित है, जिन्होंने बुतपरस्ती का विरोध किया और एक ईश्वर की पूजा की स्थापना की।

अरब लोगों की तीन मुख्य श्रेणियाँ कौन-कौन सी हैं?

अरब लोगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: अरब बायदा (प्राचीन अरब जो खत्म हो गए), अरब अरेबा (असली अरब जो यमन के इलाके से थे), और अरब मुस्तरेबा (जो अरब नहीं थे लेकिन बाद में अरब बन गए)।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

यह बात है मोहम्मद इकरा। पढ़ो अपने रब के नाम से। पढ़ो। सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। हेराक्लियस के इस शानदार महल में दहिया अल कलबी का इस्तकबाल पूरे एहतराम के साथ किया जाए, जो हमारे लिए अरब से पैगंबर मोहम्मद का पैगाम लाए हैं।

00:23

Speaker A

और इस खत को पढ़ने के बाद मुझे यकीन है यही वो मोहम्मद हैं जिनका जिक्र हमारी किताबों में है। मैं और आप मुसलमान होने का दावा करते हैं। पर एक सवाल का जवाब दीजिए कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस दीन

00:37

Speaker A

को फैलाया। उसके बावजूद भी इस्लाम को दीन इब्राहिमी क्यों कहा जाता है? ये कैसा खुदा है जो तुम्हारा इम्तिहान पर इम्तिहान लेता है? इब्राहिम वापस लौट जाओ। जरा सोच कर देखिए। रोम के पास ताकत है, परर्शिया के पास दौलत है। दुनिया में

00:53

Speaker A

कितने हरेभरे इलाके हैं। लेकिन उसके बावजूद भी अल्लाह सुभाना ताला ने अपने घर काबा के लिए मक्का को ही क्यों चुना?

01:03

Speaker A

और क्या सच में कौमे आदत, कौमे समूद के लोग इतने लंबे-लंबे कद के थे कि उनके आगे पहाड़ भी छोटे लगते थे? इब्राहिम अल सलाम को अल्लाह के दोस्त होने का दर्जा मिला हुआ है। उसके बावजूद भी क्यों अल्लाह सुभाना ताला ने उनकी दुआ को

01:20

Speaker A

रिजेक्ट कर दिया? इब्राहिम इसे आग में फेंक दो। ऐसी मिसाल कायम करो कि फिर कोई दोबारा ऐसा करने की सोच भी ना सके। अगर आप इनमें से एक सवाल का जवाब भी नहीं जानते ना तो इसका मतलब यह है कि आप अल्लाह

01:34

Speaker A

के नबी से मोहब्बत करने का दावा तो करते हैं लेकिन उनको जानने की कोशिश नहीं करते। मुद नबी उी ऐसा कौन सा वसवसा है जो तुम्हें अपने नबी को जानने से, उनको पहचानने से [संगीत] रोकता है? अस्सलाम वालेकुम। ये हमारी सीरतु नबी सीरीज

01:58

Speaker A

के सफर का दूसरा कदम है मुद नबी [संगीत] उी अली [संगीत] वसल्लम। पिछले एपिसोड में हमने जाना कि कौन थे वो पहले शख्स जिन्होंने सीरतु नबी को लिखा। कैसे [संगीत] आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी को पढ़ना हर इंसान पर फर्ज है और कौन सी किताबों से हम सही तरीके से सीरतु नबी को पढ़ सकते हैं।

02:23

Speaker A

मोहम्मद मेरे ख्याल में अंग्रेजी में वन ऑफ द बेस्ट बुक है। ये वन ऑफ द बेस्ट बुक है। आज इस एपिसोड में नबी-ए पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

02:37

Speaker A

की जिंदगी को गहराई से समझने के लिए हमें [संगीत] इस कैनवस को समझना होगा जिस पर यह तस्वीर बनी है। यानी हमें अरेबिया को समझना होगा। अपने आप से कुछ सवाल करने होंगे कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह सुभाना

02:53

Speaker A

ताला ने मक्का में ही क्यों पैदा किया? अरब लोग कौन थे और वो कहां से आए? इसके अलावा रोम, परर्शिया [संगीत] दुनिया के हरेभरे मुल्कों को छोड़कर अल्लाह सुभाना ताला ने अपने घर काबा के लिए मक्का को ही

03:08

Speaker A

क्यों चुना? एक ऐसी जगह जहां ना खेती होती है, ना पानी बहता है। जहां सूरज आसमान से आग बरसाता है और सन्नाटा कानों को चीर कर रख देता है। इसके अलावा आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऐसा क्यों कहा कि मैं [संगीत] नबी

03:26

Speaker A

इब्राहिम अल सलाम की दुआ का नतीजा हूं। हम इब्राहिम अल सलाम की दुआ हैं। इब्राहिम कवा इस्माइल या अल्लाह जैसे तूने मुझसे और मेरे बेटे इस्माइल से कुर्बानी ली, मेरी औलाद में से एक उम्मत पैदा कर जो मेरी तरह

03:44

Speaker A

कुर्बानी पेश करें। इन सब सवालों के जवाब अगर हमारे पास होंगे तो नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी को समझना हमारे लिए और आसान हो जाएगा। तो चलिए सबसे पहले हम ये समझते हैं कि असल में अरब लोग थे कौन? हिस्टोरियंस ने अरब

04:00

Speaker A

को तीन कैटेगरीज में डिवाइड किया है। सबसे पहले हैं अरब बायदा, यानी वो लोग जो अरब के इलाके में रहते थे इस्लाम आने से हजारों साल पहले लेकिन गुजरते वक्त के साथ वो खत्म हो गए। उनका नामोनिशान भी बाकी नहीं

04:14

Speaker A

रहा। जैसे कौमे आद, कौमे समूद, कौमे तसम [संगीत] जिनका जिक्र हमें कुरान मजीद में भी मिलता है। क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे परवरदिगार ने कौमे आद के साथ क्या किया जो इरम कहलाते थे दराज कद मानंद सुतूनों के

04:28

Speaker A

और समूद के साथ क्या किया जो वादी कुरा में चट्टाने तराशते थे। दूसरे हैं अरब अरेबा, यानी प्योर ओरिजिनल अरब्स। यह यमन के इलाके से ताल्लुक रखते हैं और कहतानी की औलाद हैं। [संगीत] इनको ही असली अरब कहा जाता है। हिस्टोरियंस ने

04:48

Speaker A

जब इनकी लीनियज को ट्रेस किया तो पता चला कि ये नूह अली सलाम के बेटे साम की कौम से बिलोंग करते हैं। जिनको हम सेमेटिक पीपल भी कहते हैं। और फिर इसी साम की कौम से हजरत इस्माइल अल सलाम भी पैदा हुए। और इन

05:03

Speaker A

अरब आरबा को लेकर एक कहानी भी है कि कहतानी की एक औलाद हुई। उस औलाद का नाम उन्होंने रखा मेरे बेटे का नाम होगा याहरूब। याहरूब बहुत प्यारा नाम है। वक्त गुजरता गया। कहतानी की औलाद यारुब इतने मशहूर हो गए। इतने बड़े-बड़े

05:21

Speaker A

उन्होंने कारनामे कर दिए कि लोग कहतानी के कबीले को यारुब के कबीले के नाम से पहचानने लगे। धीरे-धीरे धीरे-धीरे वक्त गुजरता चला गया और यारुब का नाम बदलकर अरब हो गया। वो देखो जिया यारुब कबीले के लोग जा रहे

05:37

Speaker A

हैं। अरे यार तो पुराना नाम है। अब उन्हें अरब कबीले वाले कहते हैं। लेकिन जैसा मैंने कहा कि यह कहानी है। कितनी सच्ची, कितनी झूठी यह सिर्फ अल्लाह ही जानता है। आप तो बस इतना याद रखिए कि वो लोग जो यमन और साउथ अरेबिया के इलाकों

05:53

Speaker A

में रहते थे और जिनके बारे में हमें हिस्टोरिकल एविडेंस मिलता है, उन्हें ही कहतानी अरब यानी असली अरब कहा जाता है। तो ओस और खदज, कुजाहा यह सारे कबीले असल में असली अरब हैं। [संगीत] जिनके बारे में हम

06:07

Speaker A

सीरतु नबी में आगे जाकर पढ़ेंगे। तीसरी कैटेगरी है अरब मुस्तरेबा, यानी वह लोग जो अरब नहीं थे लेकिन गुजरते [संगीत] वक्त के साथ वो अरब बन गए। यह अरब मुस्तरेबा हमारे लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट ग्रुप है। क्योंकि यह इस्माइल अल सलाम की नस्ल से

06:23

Speaker A

शुरू होते हैं। कहतानी के गुजरने के कई सौ सालों के बाद ये लोग मक्का आए और यह मक्का में अरब के लोगों के साथ रहने लगे। धीरे-धीरे धीरे-धीरे इन्होंने अरबी जबान को सीखा और फिर यह अरबी ही कहलाने लगे।

06:37

Speaker A

जबकि यह असली अरब नहीं थे। तो यहां नोट करने वाली बात यह है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इसी ग्रुप [संगीत] का हिस्सा हैं। मुद नबी उी जब हिस्टोरियंस ने इनकी नस्ब को, इनकी लीनिएज को ट्रेस किया तो पता चला कि आप

06:57

Speaker A

सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की लीनेज सीधे अदनान तक जाती है। यहां तक किसी भी उलेमा को, किसी भी हिस्टोरियंस को कोई कंफ्यूजन नहीं है। अदनान तक जो लीनेज है उसके बारे में हमें सारे सबूत मिलते हैं। अब जरा इस

07:09

Speaker A

चार्ट पर गौर कीजिए। अब यहां जब आप नीचे आएंगे तो यहां पर एक नाम लिखा है फेहर। फेहर का लकाब ही कुरैश था। [संगीत] यहीं से कुरैश कबीले की शुरुआत हुई जो बाद में जाकर मक्का के सरदार बने।

07:21

Speaker A

हाशिम ठीक कहता है। हम पर कोई हाथ नहीं डाल सकता। हम हैं कुरैश। इन अरब मुस्तरेबा के बारे में एक बात बड़ी मजेदार है कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे इन्होंने अपने आप को इतना ज्यादा अरबों के साथ ढाल लिया कि इन लोगों ने असली अरब्स को भी

07:37

Speaker A

लैंग्वेज के मामले में पीछे छोड़ दिया। ये अरबी में, अरबी पोएट्री में, अरबी लैंग्वेज में इतने ज्यादा माहिर हो गए कि पूरे अरेबिया के अंदर इनकी पोएट्री की मिसाले दी जाने लगीं। जब शायर अबू सुफियान के घर जाते हैं, लुत्फ मिलता है, प्यार पाते हैं।

07:55

Speaker A

खूब पीते हैं, खूब खाते हैं। जब शायर अबू सुफियान के घर जाते हैं। अब आते हैं अपने दूसरे सवाल के ऊपर कि कैसे [संगीत] अल्लाह सुभाना ताला का घर काबा इस वीराने में बना और क्यों इस्लाम को दीन इब्राहिमी कहा जाता है। इस सवाल के

08:14

Speaker A

जवाब को जानने के लिए हमें हजारों साल पहले मेसोपोटामिया के शहर बेबिलोन जाना होगा। जिसको आज हम इराक के नाम से भी जानते हैं। उस दिन बाबिल शहर में काफी चहल-पहल थी। इस शहर का एक आदमी खुशी से झूम रहा था।

08:32

Speaker A

मेरे बेटे के होने की खुशी में रखी गई इस दावत में आने के लिए आप सबका शुक्रिया। तुम हमारे खुदाओं के मुजस्समे बनाते हो। हम तुम्हारे बुलाने पर कैसे ना आते?

08:42

Speaker A

बिल्कुल सही कहा तुमने। आज की वजह से ही हम अपने खुदाओं को देख पाते हैं। वैसे क्या नाम रखोगे बेटे का?

08:51

Speaker A

मेरे बेटे का नाम होगा इब्राहिम। बेहद खूबसूरत नाम लावाब। इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने वालिद के सबसे बड़े बेटे थे। इसका मतलब यह था कि उनका रास्ता तय था। वो अपने वालिद के मूर्ति बनाने के कारोबार को संभालते। वालिद की

09:07

Speaker A

कमाई, दौलत को और उनके नाम को आगे बढ़ाते और गुमराही की जिंदगी जीते। मगर अल्लाह को कुछ और ही मंजूर था। अल्लाह सुभाना ताला ने इब्राहिम अल सलाम को बचपन से ही कलबुन सलीम दिया था। यानी उनके दिल

09:24

Speaker A

को इतना पाक रखा था कि उन्होंने कभी किसी बुत की परस्तिश को एक्सेप्ट ही नहीं किया। बल्कि वो बार-बार बार-बार अपने वालिद से सवाल किया करते। अब्बा यह बुतों की पूजा आप क्यों करते हैं? अब्बा यह बुत आपके

09:38

Speaker A

खुदा किस तरह से हो सकते हैं? जबकि आप खुद इनको तराशते हैं। ऐसी बातें नहीं करते इब्राहिम। आओ मेरी मदद करो। अरे कहां चल दिए? मैं कह रहा हूं ए मेरी मदद करो। वक्त रेत की तरह हाथों से फिसलता चला गया।

09:54

Speaker A

इब्राहिम अल सलाम बच्चे से बड़े हो गए। लेकिन आज भी उनके पास वही सवाल थे कि लोग बुतों की इबादत क्यों करते हैं? और फिर अल्लाह सुभाना ताला ने एक दिन इब्राहिम अल सलाम को बताया कि वह अल्लाह के नबी हैं और

10:07

Speaker A

उन्हें हुकुम दिया कि वह लोगों को बुतपरस्ती से रोके क्योंकि अल्लाह सुभाना ताला को शर्क और बुतपरस्ती ना पसंद है। इब्राहिम अल सलाम ने बहुत कोशिश की अपने शहर वालों को, अपने आसपास के लोगों को, अपने खानदान वालों को, अपने अब्बा को सबको

10:23

Speaker A

समझाया पर किसी ने उनकी एक ना सुनी। नौबत यहां तक पहुंच गई कि एक दिन इब्राहिम अल सलाम के वालिद ने गुस्से में आकर उनसे कह दिया काला राबता अन या इब्राहिम ल तनी मलिया यानी तुम्हारी हिम्मत...

10:44

Speaker A

इब्राहिम हमारे खुदाओं को झुठलाने की अगर तुम इसी रास्ते पर रहे तो मैं तुम्हें पत्थरों से कुचल डालूंगा और तुम मेरी नजर नजरों से दूर हो जाओ। लेकिन इब्राहिम अल सलाम ने नाराज होकर अपने अब्बा को जवाब नहीं दिया बल्कि बड़े

11:04

Speaker A

ही नरम अंदाज से उन्होंने कहा सलाम अलस्तफि रबी इनहु कान हफिया के ए मेरे वालिद आप पर सलामती हो और मैं आपके लिए अपने परवरदिगार से बखशीश मांगूंगा। लेकिन फिर भी ये जालिम बाज ना आए। वहां के बादशाह नमरूद के साथ मिलकर इनके अपने सगे

11:24

Speaker A

वालिद ने इब्राहिम अली सलाम को कत्ल करने की कोशिश [संगीत] की। उनके थ्रू एक ऐसी मिसाल सेट करने की कोशिश करी कि दोबारा से कोई उनके बुतों को झुठला ना सके। जिसके लिए उन्होंने एक बहुत बड़ी आग का इंतजाम

11:37

Speaker A

किया। इतनी बड़ी आग कि उसके ऊपर से अगर परिंदा भी गुजर जाता तो खत्म हो जाता। इसे आग में फेंक दो। ऐसी मिसाल कायम करो कि फिर कोई दोबारा ऐसा करने की सोच भी ना सके। इसे जलाकर राख कर दो।

11:54

Speaker A

फना कर दो। जला दो। जला दो। फना कर दो। जला दो। जला दो। जला दो। किताबों में मेंशन है कि जब इब्राहिम अल सलाम को आग में डाला जा रहा था। तो जिब्रील अल सलाम उनके पास आए और उन्होंने

12:07

Speaker A

उनसे कहा इब्राहिम डू यू नीड एनी हेल्प? क्या तुम्हें कोई मदद चाहिए? इब्राहिम अल सलाम मुस्कुराए और उन्होंने कहा कि अगर अल्लाह ने तुम्हें भेजा है तो जरूर। तो इसके जवाब में जिब्रील अल सलाम ने कहा तो कहिए ना अपने खुदा से कि वो आपकी मदद करे।

12:22

Speaker A

इब्राहिम अल सलाम ने कहा क्या वो देखता नहीं कि मैं किस हाल में हूं। अब देखिए क्योंकि वो अल्लाह के खलील थे। अल्लाह के बहुत क्लोज थे। अल्लाह के हर इम्तिहान में पास हो रहे थे। तो वो यह कह सकते हैं आप

12:34

Speaker A

और मैं नहीं कह सकते। तो इब्राहिम अल सलाम का तवकुल इतना ज्यादा मजबूत था अपने अल्लाह पर कि उन्हें पता था कि मेरा रब मुझे कुछ नहीं होने देगा। और जब उन्हें आग में डाल दिया गया तो यह

12:47

Speaker A

जालिम खुश होकर ढोल बजाने लगे, नाचने गाने लगे। लेकिन कुछ देर बाद अल्लाह ने आग को ठंडा कर दिया। इब्राहिम अल सलाम एज इट इज आग से बाहर आ गए। हमने हुक्म दिया ऐ आग सर्द हो जा और

13:00

Speaker A

इब्राहिम पर सलामती वाली बन जा। लेकिन उसके बाद भी इनमें से कोई ईमान ना लेकर आया सिवाय एक नौजवान के। और यह नौजवान थे इब्राहिम अल सलाम के भतीजे लूत अली सलाम। लूत अल सलाम की और ज्यादा डिटेल्स के बारे में हम जब बात करेंगे जब

13:21

Speaker A

लूत अल सलाम के कस्से की तरफ बढ़ेंगे। अभी हम इब्राहिम अल सलाम पे फोकस करते हैं। तो हुआ ये कि इब्राहिम अल सलाम और लूत अल सलाम दोनों ने बेबीन के शहर को छोड़ दिया। वो अपनी महफूज़ जिंदगियों से निकल कर एक

13:34

Speaker A

मुश्किल सफर की तरफ बढ़ चले। इब्राहिम अल सलाम बेबीलोन से निकल कर हरान गए। वहां से पेलेस्टाइन और फिर इजिप्ट और इन्हीं पैदल चलते हजारों किलोमीटर के सफर के दौरान उन्होंने सारा अल सलाम से शादी की और फिर

13:47

Speaker A

उसके बाद वापस वो पैलेस्टाइन में आकर बस गए। वक्त गुजरता गया। धीरे-धीरे दिन हफ्तों में बदल गए। हफ्ते महीनों में और महीने सालों में बदल गए। पर इब्राहिम अल सलाम और सारा अल सलाम को कोई औलाद ना हुई।

14:01

Speaker A

लेकिन उसके बावजूद भी इब्राहिम अल सलाम ने कभी हिम्मत नहीं हारी। कुरान मजीद में अल्लाह सुान ताला ने यह मेंशन किया है कि उन्होंने कहा रहून तो हजरत इब्राहिम ने कहा कि अल्लाह ताला की रहमत से मायूस तो सिर्फ वही हो सकते

14:17

Speaker A

हैं जो गुमराह हो। धीरे-धीरे इब्राहिम अल सलाम और उनकी पहली बीवी सारा अल सलाम बुढ़ापे को पहुंच गए। सारा अल सलाम ने इब्राहिम अल सलाम को आईडिया दिया कि क्यों ना वो हाजर अल सलाम से शादी कर लें। हाजर अल सलाम असल में

14:33

Speaker A

सारा अल सलाम की गुलाम थी। लेकिन वह एक रॉयल नोबल फैमिली से ताल्लुक रखती थी। पर कुछ ऐसे हालात बने जिसकी वजह से उन्हें इजिप्ट के किंग ने कैद कर लिया। और फिर सारा अल सलाम इब्राहिम अल सलाम जब इजिप्ट

14:45

Speaker A

के किंग से मिले तो सारा अल सलाम से इंप्रेस होकर इजिप्ट के किंग ने उन्हें हाजर अल सलाम तोहफे के तौर पर दे दी। उनकी हैंडमेड हो गई। एक गुलाम हो गई जो उनके घरों के काम किया करती थी। इब्राहिम अली

14:58

Speaker A

सलाम, हाजर अली सलाम और सारा सलाम की मर्जी से यह दूसरा निकाह भी हुआ। जैसे आजकल रिवाज है। औलाद ना होने पर अक्सर इंसान दूसरी शादी कर लिया करता है। बिल्कुल उसी तरह से इब्राहिम अल सलाम ने हाजर अल सलाम से शादी कर ली। [संगीत]

15:16

Speaker A

86 या 87 यानी 86 या 87 इयर्स की उम्र में इब्राहिम अल सलाम को अल्लाह सुभाना ताला ने सबसे पहली औलाद से नवाजा। इस औलाद का नाम उन्होंने रखा इस्माइल अल सलाम। इट इज रिपोर्टेड ही वास 86 इयर्स ओल्ड व्हेन ही

15:33

Speaker A

वास ब्लेस्ड विद इस्माइल [संगीत] अल सलाम। कुछ किताबों में ये भी मेंशन है इवन रहीुल मखतूम के पेज नंबर 50 पर ये मेंशन है के जब हाजर अल सलाम को औलाद हो गई तो ये बात स अल सलाम को बहुत चुभने लगी। उनके अंदर

15:46

Speaker A

हसद पैदा हो गई। और इस हसद के चलते घर में इतनी ज्यादा टेंशन हो गई कि इब्राहिम अल सलाम को हाजर अल सलाम और नन्हे इस्माइल के साथ घर छोड़ना पड़ गया। लेकिन उलमाओं की राय यह है कि क्योंकि हम

16:03

Speaker A

मुसलमान हैं और एज ए मुसलमान हम यह बिलीव करते हैं कि अल्लाह सुभाना ताला ने उन्हें हुकुम दिया कि वो सफर करें इस जमीन पर निकल पड़े उस रास्ते की तरफ जो अल्लाह ने उन्हें बताया था। जाओ वहां हिजाज की उस

16:19

Speaker A

वादी के अंदर वादी गैर जरा व छोड़ दो और जब वो एक सुनसान घाटी में पहुंचे जहां ना इंसान था ना इंसान की परछाई वहां पर जाकर इब्राहिम अल सलाम ने अपनी बीवी हाजर अल सलाम और नन्हे इस्माइल को अकेला छोड़

16:34

Speaker A

दिया और वो कदम बढ़ाकर आगे जाने लगे। हाजर अली सलाम परेशान हो गई। उनके मन में बेइंतहा सवाल उठने लगे कि ये कहां जा रहे हैं? हमें क्यों अकेला छोड़ के जा रहे हैं? वो कुछ कदम उनके पीछे भागी लेकिन वो

16:46

Speaker A

कहां तक भागती? फिर आखिर में उन्होंने उनसे पूछा कि क्या यह अल्लाह का हुक्म है?

16:51

Speaker A

इब्राहिम अल सलाम कुछ ना बोले। उन्होंने बस मुड़कर कहा इशारे में [संगीत] और क्योंकि वो भी एक मोमिना थी और अल्लाह पे बड़ा यकीन करती थी तो हाजिर सलाम ने कहा कि अगर यह अल्लाह का हुक्म है तो आप

17:08

Speaker A

बेफिक्र होके जाइए। वो हमारा ख्याल रख लेगा। अब देखिए ऐसे मौके पर ना इंसान सवाल करता है मेरे साथ ऐसा क्यों हो गया? सारी परेशानियां मुझ पर ही आती हैं। लेकिन इस मौके पर इब्राहिम अल सलाम ने सजदा किया।

17:23

Speaker A

अपनी बीवी अपने बच्चे को छोड़कर चल दिए। क्योंकि उन्हें यकीन था कि उनका रब उनका इम्तिहान ले रहा है। और अल्लाह बंदे की हैसियत और उसकी बर्दाश्त से ज्यादा उसका इम्तिहान नहीं लेता। इब्राहिम अल सलाम के जाने के बाद वो खानेपीने का सामान और पानी

17:37

Speaker A

भी खत्म हो गया। हाजर अल सलाम परेशान हो गई। उन्होंने सफा और मरवा के साथ चक्कर लगाए और फिर इस्माइल अल सलाम की एड़ी से पानी का एक झरना फूट पड़ा। हाजिर सलाम इस पानी को रोकने के लिए बाउंड्री बनाती चली

17:51

Speaker A

जाती और कहती चली जाती जम जम जम जम यानी रुक जा रुक जा और इस तरह इस पानी का नाम जमजम पड़ा यानी रुक जा पानी रुक जा पानी देयर इज ओनली वन हिस्टोरिक नरेशन एस टू आज तक पूरी दुनिया में एक ही हिस्ट्री का

18:09

Speaker A

इवेंट है जिस पर किसी स्कॉलर या हिस्टोरियन में कोई विवाद नहीं है और वो है जमजम के कुएं का सबूत जो हाजरा अल सलाम और इब्राहिम अल सलाम से जुड़ा है। परिकुलर टाइम ऑफ़ हाजर एंड इस्माइल अल सलाम।

18:23

Speaker A

अब क्योंकि वहां पानी आ गया तो आसमान पर जिंदगियां मंडराने लगी। बहुत दूर [संगीत] एक कबीला था जुरहम कबीला। इन्होंने आसमान पर मंडराते परिंदों को देखा। ताज्जुब है इतने सारे परिंदे वहां क्यों मंडरा रहे हैं? हो ना हो वहां जरूर पानी

18:41

Speaker A

है। तो चलो चल कर देखते हैं। जुरहम कबीले की खास बात यह थी कि इन्हें पानी को स्टोर करना आता था। तो ये पानी की तलाश में निकले हुए थे। इन्हें पानी मिल गया। ये हाजर अल सलाम के पास गए और

18:52

Speaker A

इन्होंने उनसे इजाजत ली कि क्या वो यहां रुक सकते हैं? हाजर अल सलाम की इजाजत मिलने के बाद यह कबीला वहीं रहने लगा। और धीरे-धीरे धीरे-धीरे वहां पे एक आबादी बढ़ गई। कुछ लोग हो गए। इस्माइल अल सलाम

19:06

Speaker A

इन्हीं लोगों के साथ जुरम कबीले के साथ रहने लगे और उनकी जुबान जो कि अरबी थी उसे जानने लगे। अब यहां नोट करने वाली बात यह है कि मैंने शुरुआत में बताया था कि जुर्रहम कबीला वो कबीला था जो असली अरब

19:20

Speaker A

कहलाते थे। और इस्माइल अली सलाम क्योंकि अरबी नहीं थे। वो तो अरब मुस्तबा थे। जुरहम के साथ रहते रहते रहते वो भी अरबी के माहिर हो गए। अरबी जबान सीखने लगे और अरबी कहलाने लगे। इस्माइल को देखकर नहीं

19:36

Speaker A

लगता कि वो जुर्हम कबीले से नहीं है। सही कहा अम्मी बल्कि इस्माइल की अरबी जबान बाकी बच्चों से भी बेहतर है। कुछ साल के बाद जब इब्राहिम अल सलाम उस जगह वापस लौटे जहां उन्होंने अपनी बीवी और बच्चों को छोड़ा था तो वो ये देखकर

19:48

Speaker A

मुस्कुरा दिए कि वो वादी जो सुनसान थी रेगिस्तान थी। अब वहां पर कुछ जिंदगियां साथ ले रही थी और उस पूरे इलाके पर उनकी बीवी हाजिर अली सलाम का कंट्रोल था। [संगीत] वक्त गुजरता गया। अल्लाह सुभाना ताला ने

20:06

Speaker A

उन्हें एक ख्वाब दिखाया। इस ख्वाब में अल्लाह सुभाना ताला ने इब्राहिम अल सलाम को बताया दिखाया कि वह अपने बेटे इस्माइल अल सलाम को जिबा कर रहे हैं। सुबह इब्राहिम अल सलाम ने इस्माइल अल सलाम को यह बात बताई और इस ख्वाब के बारे में

20:22

Speaker A

कुरान मजीद में भी मेंशन है। जब वो उनके साथ दौड़ धूप की उम्र को पहुंचा तो इब्राहिम ने कहा कि बेटा मैं ख्वाब में देखता हूं कि गोया तुमको ज़बा कर रहा हूं। तो तुम सोच लो कि तुम्हारा क्या इरादा है।

20:36

Speaker A

उन्होंने कहा कि अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है वही कीजिए। अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे साबों में पाइएगा। इस्माइल अल सलाम ने इब्राहिम अल सलाम से कहा के हो सके तो अभी वालिदा को मत बताइएगा। देखते हैं

20:50

Speaker A

अल्लाह क्या मामला करता है। और फिर ये दोनों अपने सफर पर निकल पड़े। [संगीत] उस दिन मक्का की वो रेत चमक रही थी। इब्राहिम अल सलाम और इस्माइल अल सलाम कुर्बानी के मकाम की तरफ तेजी से चल रहे

21:03

Speaker A

थे। इब्राहिम अल सलाम के चेहरे पर हल्के हल्के फिक्र के बादल थे। जैसे सोच रहे हो कि यह कैसा इम्तिहान है। लेकिन उनके कदम अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहे थे। रास्ते में जब ये दोनों मिना के पास

21:18

Speaker A

पहुंचे तो शैतान उनके पास आया। शैतान ने इन दोनों को बरगलाने की कोशिश करी। यह कैसा खुदा है इब्राहिम जो तुम्हारा इम्तिहान पर इम्तिहान लेता है। इतनी सारी मुश्किलें लौट जाओ। इब्राहिम वापस लौट जाओ। मगर इब्राहिम अल सलाम का

21:37

Speaker A

तवकुल बहुत बहुत ज्यादा मजबूत था। उन्हें अपने अल्लाह पर यकीन था। तो उन्होंने अपने बेटे इस्माइल अल सलाम के साथ मिलकर शैतान को कंकड़ियां मारी और उसे वहां से भगा दिया। जब हाजी लोग हज करने जाते हैं तो

21:52

Speaker A

इसी बात को हम वापस से रिनेक्ट करते हैं और शैतान को सात कंकड़ियां मारते हैं। शैतान को भगाकर ये दोनों वापस अपने सफर पर निकल पड़े। कुर्बानी की जगह पहुंचकर इब्राहिम अल सलाम ने इस्माइल अल सलाम को लिटा दिया और एक छुरी निकाल ली। एक लम्हे

22:07

Speaker A

के लिए जैसे सब रुक गया। आसमान ने अपनी सांसे रोक ली। परिंदों ने अपने पर खोल लिए और जमीन ने अपनी निगाहें नीचे कर ली। दूर-दूर तक बस गहरा सन्नाटा। और जैसे ही [संगीत] उन्होंने बेटी की गर्दन पर छुरी चलाई उसी लम्हे एक मेमने की

22:26

Speaker A

चीख गूंज उठी। इब्राहिम अल सलाम ने आंखें खोली और देखा कि सामने इस्माइल अली सलाम खड़े मुस्कुरा रहे हैं। इब्राहिम अल सलाम के लिए वो पल ऐसा था जैसे तूफान के बाद सब थम गया हो। उन्होंने अपने बेटे को दौड़कर

22:39

Speaker A

सीने से लगा लिया और फिर आंसुओं का एक सैलाब उमड़ पड़ा। और हमने कुर्बानी के एक बड़े जानवर से उनका यानी इस्माइल का फिया दिया। कुछ सालों के बाद अल्लाह सुभाना ताला ने तीन फरिश्तों को इब्राहिम अल सलाम के घर

23:01

Speaker A

भेजा। [संगीत] इन तीनों फरिश्तों ने इब्राहिम अल सलाम को मुबारकबाद दी। उन्हें बताया कि उनको उनकी पहली बीवी सारा अल सलाम से एक औलाद होगी। तो अब इब्राहिम अल सलाम के दो बेटे थे। पहले बेटे इस्माइल अल सलाम उनकी दूसरी बीवी हाजर अल सलाम थे।

23:20

Speaker A

[संगीत] उसके 13 साल के बाद उनके दूसरे बेटे पैदा हुए पहली बीवी [संगीत] सारा अल सलाम से। कुछ वक्त गुजरने के बाद अल्लाह सुभाना ताला ने इब्राहिम अल सलाम को हुकुम दिया कि वो ज़म के पानी के पास एक

23:33

Speaker A

घर बनाएं और वो घर अल्लाह का घर काबा होगा। इस्माइल अल सलाम और इब्राहिम अल सलाम दोनों ने मिलकर अल्लाह के इस घर की तामीर को शुरू कर दिया। इब्राहिम अल सलाम ईंटें रखते चले जाते और इस्माइल अल सलाम

23:47

Speaker A

ईंटे और पत्थर लालाकर अपने वालिद को देते चले जाते। जिस जगह पर खड़े होकर इब्राहिम अल सलाम इन पत्थरों को रख रहे थे जिससे काबा की दीवारें ऊंची हो [संगीत] सके उस जगह को मकाम इब्राहिम कहा जाता है।

24:02

Speaker A

इब्राहिम अल सलाम के पैरों के निशान आज भी मक्का में मौजूद है। और अल्लाह सुभाना ताला ने कुरान मजीद में हुकुम दिया है कि तवाफ के बाद सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के लिए मकाम इब्राहिम पर जाकर नमाज पढ़ो। जो हम

24:18

Speaker A

आज भी करते हैं। जब आप इंशा्लाह उमरे हज के लिए जाएंगे तो आप अपनी आंखों से हजरत इब्राहिम अल सलाम के पैरों को देखेंगे। वहां जरूर नमाज पढ़ेंगे। इंशा्लाह इंशा्लाह अल्लाह अल्लाह अलहु सल्ल धीरे-धीरे अल्लाह का घर काबा बनकर तैयार

24:45

Speaker A

हो गया। लेकिन अभी भी एक पत्थर की जगह खाली रह गई। इस्माइल अल सलाम ने बहुत कोशिश करी पर कोई ऐसा पत्थर ना मिल सका जो वहां फिट हो सकता हो। और कुछ देर बाद जब इस्माइल अल सलाम सब जगह तलाश करने के बाद

24:57

Speaker A

आए तो उन्होंने देखा कि वहां एक चमचमाता सफेद पत्थर रखा हुआ है। इस्माइल अल सलाम ने अपने वालिद इब्राहिम अल सलाम से पूछा कि अब्बा यह पत्थर कहां से आया? उन्होंने जवाब दिया कि यह हजरे अस्वद है। यानी

25:10

Speaker A

अल्लाह सुभाना ताला ने इस पत्थर को जन्नत से भेजा है। [संगीत] आज साइंटिस्ट ने इस पर रिसर्च की है जिसमें ये बात सामने आई कि यह पत्थर इस दुनिया का पत्थर नहीं है। शायद कोई एस्टेरॉइड है या कोई बाहर का पत्थर है।

25:29

Speaker A

लेकिन ये इस दुनिया में ऐसा कोई पत्थर पाया नहीं जाता। मुस्लिम हम यकीन करते हैं कि अल्लाह सुभाना ताला ने ये पत्थर जन्नत से भेजा था और यह पत्थर जब आया तो यह बिल्कुल सफेद था। लेकिन गुजरते वक्त के

25:41

Speaker A

साथ इंसानों के गुनाहों की वजह से यह पत्थर काला पड़ गया। जिसके बारे में हमें एक हदीस भी मिलती है। अब यहां नोट करने वाली बात यह है कि जब अल्लाह सुभाना ताला का यह घर काबा बनाया जा रहा था तो सिर्फ

25:54

Speaker A

पत्थर नहीं जोड़े जा रहे थे बल्कि आने वाली इंसानियत के फ्यूचर को डिजाइन किया जा रहा था। इब्राहिम अल सलाम पत्थर रखते चले जाते और अल्लाह से दुआ करते चले जाते। इस मौके पर अल्लाह सुभाना ताला से इब्राहिम अल सलाम ने चार दुआएं की जो बहुत

26:12

Speaker A

ज्यादा इंपॉर्टेंट है और जिनकी वजह से आज हम और आप मुसलमान हैं यहां बैठे ये वीडियो देख रहे हैं। सबसे पहली दुआ द दुआ फॉर रिस्क और जब इब्राहिम ने दुआ की कि ऐ परवरदिगार इस जगह को अमन का शहर बना और इसके रहने

26:28

Speaker A

वालों में से जो अल्लाह पर और रोज़ आखिर पर ईमान लाएं उनके खाने को मेवे अता फरमा। यहां पर अल्लाह सुान ताला ने उन्हें करेक्ट किया और उनसे कहा कि मैं सबको रिज़्क दूंगा। चाहे मुझे मानता हो या ना

26:42

Speaker A

मानता हो। इससे पता चलता है कि अल्लाह रहमान भी है और रहीम भी है। उसकी रहमत दुनिया में हर इंसान के लिए है। दूसरी दुआ जब अल्लाह सुभाना ताला ने इब्राहिम अल सलाम को बताया कि अल्लाह ने इब्राहिम अल

26:55

Speaker A

सलाम को लीडर चुन लिया है। लोगों का इमाम बना दिया है। तब इब्राहिम अल सलाम ने कहा कि क्या मेरी औलाद के लिए भी यह हुकुम है?

27:04

Speaker A

मेरी औलाद में से भी पेशवा बनाइयो। फरमाया कि मेरा कौल करार जालिमों के लिए नहीं हुआ करता। इस दुआ का मतलब बिल्कुल साफ था कि इब्राहिम अल सलाम की नस्ल में से होना काफी नहीं। सिर्फ वही लीडर होगा जो ईमान

27:18

Speaker A

वाला होगा जिसको अल्लाह चाहेगा। यही वजह है कि इस्माइल अलैहिस्लाम की नस्ल में से होने के बावजूद भी अबू लहब [संगीत] इस दुनिया में भी जलील हुआ और आखिरत में भी जलील होगा। तीसरी दुआ एक ऐसी दुआ जिसे अल्लाह सुभाना

27:35

Speaker A

ताला ने सिरे से रिजेक्ट कर दिया। जब इब्राहिम अल सलाम ने अल्लाह सुभाना ताला से कहा कि वो उनके फादर उनके अब्बा की मगफिरत कर दें। तब अल्लाह सुभाना ताला ने सूर तौबा की आयत नंबर 114 में फरमाया और

27:47

Speaker A

इब्राहिम का अपने बाप के लिए बखशीश मांगना तो एक वादे के सबब था जो वो उससे कर चुके थे। लेकिन जब उनको मालूम हो गया कि वह अल्लाह का दुश्मन है तो उससे बेजार हो गए। कुछ शक नहीं कि इब्राहिम बड़े नरम दिल और

28:02

Speaker A

मुतहमिल थे। इससे हमें यह पता चलता है कि अल्लाह सुभाना ताला को शर्क इतना नापसंद है कि इस मामले में किसी की सिफारिश काम नहीं आएगी। चौथी और आखिरी दुआ एक ऐसी दुआ जिसका हिस्सा हम भी हैं। ऐ परवरदिगार इन लोगों में इन्हीं में से

28:18

Speaker A

एक पैगंबर मबूस कीज जो इनको तेरी आयतें पढ़पढ़ कर सुनाया करे और किताब और दानाई सिखाया करे और इनके दिलों को पाक साफ किया करे। बेशक तू गालिब है। साहिब हिकमत है। लेकिन ये दुआ उस वक्त कुबूल नहीं हुई।

28:34

Speaker A

[संगीत] इसहाक अली सलाम की आल से नबियों का सिलसिला चलता रहा। लेकिन इस्माइल अल सलाम की हाल से कोई नबी नहीं आया। और तकरीबन 20 नस्लें गुजरने के बाद जब [संगीत] मक्का में बुत परस्ती अपनी हद को पहुंच गई तब अल्लाह सुभाना ताला ने

28:51

Speaker A

इब्राहिम अल सलाम की इस दुआ को कबूल किया। इस दुआ का जवाब थे आप सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम। मुद नबी उी अब आते हैं अपने आखरी सवाल पर और वो सवाल यह है कि अल्लाह सुभाना ताला ने इस सुनसान

29:10

Speaker A

पड़ी वादी को ही अपने घर काबा के लिए क्यों चुना? तो देखिए इसके पीछे कुछ वजह हैं। सबसे पहली वजह जीरो डिस्ट्रैक्शन ज़ोन। यानी कि रोमन और परर्शियन एंपायर उन जगहों पर कब्जा कर लेते थे जहां से उन्हें

29:23

Speaker A

कुछ हासिल होता था। लेकिन अरब एक ऐसा इलाका था जहां कुछ पैदा ही नहीं होता था। पानी तक के लाले पड़े हुए थे लोगों को तो वहां पर किसी भी एंपायर को कोई इंटरेस्ट नहीं था। [संगीत] इस वजह से यह इलाका

29:34

Speaker A

बिल्कुल न्यूट्रल रहा और जहां पर इस्लाम को आजाद माहौल में फैलने के लिए जगह मिली। अब ये अल्लाह का एक डिवाइन प्लान था। दूसरी वजह जब आप कोई चीज किसी ऐसी जगह बनाते हैं जहां पर पहले से आबादी मौजूद है

29:47

Speaker A

तो गुजरते वक्त के साथ वह चीज असल में उस जगह की हो जाती है। जैसे शाहजहां का बनाया ताजमहल अब आगरा का ताजमहल कहलाता है। राजा मानसिंह का बनाया हुआ किला अब आमेर का किला कहलाता है। तो अगर अल्लाह का घर रोम

30:01

Speaker A

में होता या फिर पर्शिया में होता या फिर किसी और जगह होता तो वो असल में रोमन एंपायर का किला या रोमन एंपायर का मंदिर कहलाता। पर क्योंकि उस जगह में कोई कशिश नहीं थी। कोई वहां रहता नहीं था। कोई

30:14

Speaker A

आबादी नहीं थी। तो कोई भी उस जगह को क्लेम नहीं कर सका। जिसकी वजह से वो घर आज भी बैतुल्लाह यानी अल्लाह का घर कहलाता है। के अब सवाल यह है कि ठीक है जी पढ़ लिया कुछ सीखने को तो मिले अखलाक की तो कोई बात

30:36

Speaker A

पता चले इससे तो देखिए इसमें अखलाकियत की जो बात है वो यह है समझने की सबसे पहले ये समझना बहुत जरूरी है कि बरकत जो है ना वो जगह में नहीं होती बरकत असल में अल्लाह के हुक्म में होती है [संगीत] कितनी बार ऐसा

30:49

Speaker A

होता है ना कि हमें लगता है कि यार अब कोई रास्ता नहीं बचा और कितना वक्त हो गया मेरी दुआएं नहीं कबूल हो रही अल्लाह सुभाना ताला मेरी सुनते ही नहीं है देखो औलाद नहीं हो रही सब जुड़ा जुड़ाया मेरा

30:59

Speaker A

चला गया यहां समझ समझने की बात यह है। बहुत जरूरी बात यह है कि दुआएं Amazon पे मिलने वाला सामान नहीं है। आपने जी क्लिक किया और परसों जाके डिलीवर हो गई या नेक्स्ट डे डिलीवरी हो गई। सेम डे डिलीवरी

31:11

Speaker A

[संगीत] हो गई। आपने दुआ मांगी उसने सुनी। अब उसकी मर्जी वो जब जवाब दे जब उसको ठीक लगेगा। जब सही मौका होगा, जब सही वक्त होगा वो तब जवाब देगा। बिल्कुल इसी तरह इब्राहिम अल सलाम की दुआ दो ढाई हजार साल

31:26

Speaker A

के बाद कुबूल हुई। इसके अलावा 84 साल 85 साल की उम्र तक हर रोज दुआ मांगना अपने रब से आसान काम तो नहीं है? [संगीत] तो जैसे इब्राहिम सलाम ने कहा कि अल्लाह से मायूस हो जाना गुमराहों का काम है। तो जब कभी

31:41

Speaker A

मायूसी छाए ना तो इब्राहिम अल सलाम के बारे में याद कर लिया कीजिएगा। उम्मीद करता हूं आपको वीडियो पसंद आई होगी। बात समझ आई होगी। अगर हो सके तो इस क्यूआर कोड को स्कैन करके आप हमारी कम्युनिटी का

31:54

Speaker A

हिस्सा बनिए। हमें एज ए क्रिएटर सपोर्ट कीजिए ताकि हम और जल्दी और बेहतर और बढ़िया वीडियोस को बना सकें। आपके सपोर्ट से हमें हिम्मत मिलती है। हमें ताकत मिलती है। इसके अलावा कमेंट सेक्शन में मुझे यह जरूर बताइए [संगीत] कि आपका इस वीडियो को

32:09

Speaker A

लेकर क्या फीडबैक है? आपने कुछ सीखा या नहीं सीखा। जजाकुम्लाह खैर। अस्सलाम वालेकुम। मुद [संगीत] नबी उ वाला

Topics: इस्लाम पैगंबर मोहम्मद अरब इतिहास नबी इब्राहिम काबा मक्का इस्लामिक सीरत अरब संस्कृति कुरैश कबीला हजर अली सलाम

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