**Who Destroyed Micromax? 🔥 — Transcript & Summary | SozAI**
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Micromax की कहानी, कैसे यह ब्रांड Nokia और Samsung को टक्कर देकर नंबर वन बना और फिर मार्केट से गायब हो गया।

## Key Takeaways

- भारत की जरूरतों को समझकर प्रोडक्ट बनाना सफलता की कुंजी थी।
- ड्यूल सिम और लंबी बैटरी वाले फोन ने Micromax को बाजार में अलग पहचान दी।
- मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ने ब्रांड को तेजी से बढ़ने में मदद की।
- तकनीकी नवाचार और आरएडी में कमी ने कंपनी को चीनी ब्रांड्स के मुकाबले कमजोर किया।
- बाजार में बदलाव और प्रतिस्पर्धा के कारण Micromax का बाजार हिस्सा गिर गया।

## What the video covers

- Micromax ने 2014 में ₹21,000 करोड़ की वैल्यूएशन के साथ भारत में बड़ा नाम बनाया।
- कंपनी की शुरुआत 1999 में टेलीकॉम डिवाइसेस बनाने से हुई थी, मोबाइल फोन में 2008 में एंट्री की।
- Micromax ने भारत के ग्रामीण और छोटे शहरों की जरूरतों को समझकर लंबे बैटरी वाले फीचर फोन बनाए।
- ड्यूल सिम फोन लाकर कंपनी ने बाजार में बड़ा बदलाव किया और तेजी से मार्केट शेयर बढ़ाया।
- 2010 में पहला Android स्मार्टफोन लॉन्च किया, जो अफोर्डेबल था और ग्राहकों को पसंद आया।
- 2014 में Micromax भारत का नंबर वन स्मार्टफोन ब्रांड बन गया, अक्षय कुमार और ह्यू जैकमैन जैसे स्टार्स के साथ।
- कंपनी की स्ट्रेटजी में प्रोडक्ट फीचर्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क दोनों शामिल थे, जिससे मार्केट में पकड़ मजबूत हुई।
- लेकिन कंपनी के पास खुद की टेक्नोलॉजी और आरएडी कमजोर थी, जबकि चीनी ब्रांड्स तेजी से टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे थे।
- 2017 तक विदेशी और चीनी ब्रांड्स ने बाजार पर कब्जा कर लिया और Micromax का मार्केट शेयर गिर गया।
- Micromax ने कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टीवी और लैपटॉप्स में भी एंट्री की, लेकिन मोबाइल मार्केट में वापसी मुश्किल रही।

## Chapters

1. 00:00 Micromax की शुरुआत और शुरुआती सफलता
2. 00:57 कंपनी की शुरुआती चुनौतियाँ और बदलाव
3. 02:28 राहुल शर्मा का ग्रामीण भारत का अनुभव और नया आइडिया
4. 03:59 पहला फीचर फोन और मार्केट में प्रवेश
5. 05:29 डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटजी और बाजार में पकड़
6. 07:00 ड्यूल सिम फोन और बाजार में तेजी से वृद्धि
7. 10:13 स्मार्टफोन में प्रवेश और भारत का नंबर वन ब्रांड बनना
8. 11:53 Canv 2 लॉन्च और प्रीमियम फीचर्स
9. 13:28 2014-15 का पीक और ब्रांड प्रमोशन
10. 15:05 तकनीकी कमजोरियाँ और चीनी प्रतिस्पर्धा

Answers

## Questions about this video

Micromax ने मोबाइल मार्केट में कैसे अपनी पहचान बनाई?

Micromax ने भारत के ग्रामीण और छोटे शहरों की जरूरतों को समझकर लंबे बैटरी वाले फीचर फोन और ड्यूल सिम फोन लॉन्च किए, जिससे उसे बाजार में तेजी से लोकप्रियता मिली।

Micromax का बाजार में पतन क्यों हुआ?

Micromax के पास खुद की तकनीकी नवाचार और आरएडी की कमी थी, जबकि चीनी ब्रांड्स तेजी से टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे थे, जिससे कंपनी का बाजार हिस्सा गिर गया।

Micromax ने स्मार्टफोन बाजार में कब और कैसे प्रवेश किया?

Micromax ने 2010 में अपना पहला Android स्मार्टफोन लॉन्च किया जो अफोर्डेबल था, और 2012 में Canv 2 जैसे फीचर्स के साथ स्मार्टफोन पेश कर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

Micromax एक ऐसा ब्रांड था जो कभी Nokia और Samsung से भी बड़ा बन गया था। 2014 में इसकी वैल्यूएशन करीब ₹21,000 करोड़ पहुंच चुकी थी और बॉलीवुड के अक्षय कुमार से लेकर हॉलीवुड स्टार ह्यू जैकमैन तक इसके एड्स में दिखाई देते थे। हर दुकान के

00:15

Speaker A

सेल्फ पर सिर्फ Micromax के ही फोन नजर आते थे। मानो इंडिया में इस ब्रांड को टक्कर देने वाला कोई बचा ही नहीं था। लेकिन अगले दो-तीन साल में ही यह ब्रांड मार्केट से पूरी तरह से गायब हो गया। लोग

00:26

Speaker A

कहते हैं कि चाइनीस ब्रांड्स ने इसे खत्म कर दिया। लेकिन अंदर की सच्चाई कुछ और ही है। तो आखिर Micromax के साथ में हुआ क्या था? चलिए हम डिटेल में जानते हैं। तो दोस्तों, Micromax की शुरुआत मोबाइल फोन बनाने से नहीं हुई थी। यह कंपनी शुरू

00:42

Speaker A

में Nokia जैसे टेलीकॉम कंपनियों के लिए डिवाइसेस बनाती थी। जैसे पीसीओ, बिलिंग मशीनें और ऐसे वायरलेस पब्लिक फोन सिस्टम जिनमें सिम डालकर बिना लैंडलाइन के भी कॉल किया जा सकता था। असल में यह बात है 1999 के आसपास की। जब चार दोस्त राहुल शर्मा,

00:57

Speaker A

राकेश अग्रवाल, सुमित अरोड़ा और विकास जैन ने मिलकर Micromax सॉफ्टवेयर की शुरुआत की थी। लेकिन यह बिजनेस ज्यादा लंबे टाइम तक नहीं चलने वाला था। क्योंकि 2004-5 के बीच इंडिया में एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। मोबाइल फोन सस्ते होने लगे। कॉल रेट्स

01:11

Speaker A

तेजी से गिरने लगी और धीरे-धीरे पीसीओ से हटकर लोग अपने खुद के मोबाइल फोन खरीदने लगे। यानी कि जिस प्रॉब्लम को Micromax सॉल्व कर रहा था, वह प्रॉब्लम ही खत्म होने लगी। जिससे Micromax का बिजनेस धीरे-धीरे नीचे जाने लगा। और अब कंपनी के

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Speaker A

सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि अब आगे क्या किया जाए? और फिर यहीं से Micromax की स्टोरी में टर्निंग पॉइंट आता है। एक्चुअली 2007 में राहुल वेस्ट बंगाल के एक गांव में जाते हैं जहां ना रोड बनी थी

01:37

Speaker A

और ना ही इलेक्ट्रिसिटी अवेलेबल थी। लेकिन वहीं उन्होंने एक पीसीओ बूथ देखा जो बिना बिजली के ही चल रहा था। जब उन्होंने वहां के लोगों से पूछा तो पता चला कि वह एक ट्रक की बैटरी से चलता था और हर रात उस

01:48

Speaker A

बैटरी को 12 कि.मी. दूर ले जाकर चार्ज कराया जाता ताकि अगले दिन लोग टेलीफोन का यूज कर सकें। यानी कम्युनिकेशन पॉसिबल तो था लेकिन बहुत मुश्किल से। और दोस्तों यही वो मोमेंट था जहां राहुल को समझ आया कि

02:01

Speaker A

इंडिया जैसे देश में लोगों को फैंसी फीचर्स नहीं बल्कि रिलायबल कम्युनिकेशन चाहिए। और यहीं से एक आईडिया ने जन्म लिया कि अगर एक ऐसा मोबाइल फोन बनाया जाए जो कई दिनों तक बिना चार्ज किए चल सके तो वह

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Speaker A

लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकता है। इसके बाद राहुल जब दिल्ली लौटे तो उन्होंने यह आईडिया अपने पार्टनर्स के सामने भी रखा लेकिन उस समय मार्केट पर Nokia, Samsung और Motorola जैसी बड़ी कंपनियों का राज था जिसके सामने Micromax कुछ भी नहीं था। ऊपर

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Speaker A

से उनके पास मोबाइल बनाने का भी कोई एक्सपीरियंस नहीं था। इसीलिए यह आईडिया सुनते ही सबको बहुत बड़ा रिस्क लगा। लेकिन राहुल शर्मा रुकने वालों में से नहीं थे। उन्होंने अपनी टीम को कन्विंस किया और आखिरकार सभी को इस आईडिया पर काम करने के

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Speaker A

लिए तैयार कर लिया। राहुल और उनकी टीम ने शुरुआत की चाइना की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ काम करके। उन्होंने इंडियंस की प्रॉब्लम को ध्यान में रखकर कई सारे प्रोटोटाइप्स बनवाए और सबसे ज्यादा फोकस किया बैटरी परफॉर्मेंस पर। हालांकि

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Speaker A

इस एक्सपेरिमेंट के टाइम कई बार फोन क्रैश हो जाता। कई बार बैटरी उतनी देर नहीं चलती जितनी वह चाहते थे। लेकिन कुछ महीनों की टेस्टिंग के बाद आखिरकार 2008 में उनका पहला फोन तैयार हो गया। Micromax X1i। यह

03:06

Speaker A

एक बिल्कुल सिंपल फीचर फोन था, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत थी बैटरी। उस समय जहां बाकी फोंस को रोज चार्ज करना पड़ता था, वहीं X1i का स्टैंड बाय टाइम था करीब 23 दिनों का। क्योंकि इसमें 1800 एमAh की

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Speaker A

बैटरी लगी थी जो कि उस टाइम के फोन के हिसाब से काफी बड़ी थी। यह फोन खास करके छोटे कस्बों और गांव के लिए बनाई गई थी। जहां पर लोग इलेक्ट्रिसिटी की प्रॉब्लम से परेशान थे। और दोस्तों Micromax ने इसकी

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Speaker A

प्राइस भी सिर्फ ₹2150 रखी ताकि यह फोन हर किसी तक पहुंच सके। लेकिन असली चैलेंज तो अब शुरू हुआ क्योंकि कोई भी दुकानदार इस फोन को बेचने के लिए तैयार ही नहीं था। प्रॉब्लम यह थी कि Micromax एक नया ब्रांड

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Speaker A

था और मार्केट में पहले से ही Nokia और Samsung जैसे ब्रांड्स मौजूद थे। लेकिन यहां राहुल ने एक स्मार्ट मूव लिया। Micromax पहले से ही टेलीकॉम डिवाइसेस बेचती थी। इसीलिए उनके पास पहले से ही डिस्ट्रीब्यूटर्स का एक बड़ा नेटवर्क था।

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Speaker A

उन्होंने उन्हीं डिस्ट्रीब्यूटर्स को ही कन्वेंस किया जिससे यह फोन आखिरकार मार्केट तक पहुंच गया। अब सबसे बड़ा सवाल था कि क्या लोग इसे खरीदेंगे? इसी डाउट में स्टार्टिंग में सिर्फ 10,000 यूनिट्स ही बनाए गए एक टेस्ट के तौर पर लेकिन जो

04:08

Speaker A

हुआ ना उसने सभी को चौंका दिया। यह सारे फोन सिर्फ 10 दिनों में ही बिक गए। वो भी बिना किसी एडवरटाइजमेंट के सिर्फ वर्ड ऑफ माउथ से। और यहीं से Micromax को समझ आ गया कि अगर आप इंडिया की रियल प्रॉब्लम को

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Speaker A

सॉल्व करते हैं ना तो फिर मार्केट आपको खुद ही एक्सेप्ट कर लेता है। लेकिन दोस्तों राहुल जानते थे कि असली लड़ाई तो अब शुरू होने वाली है क्योंकि उस समय इंडिया की मोबाइल मार्केट पर लगभग पूरा कंट्रोल Nokia का था। Nokia ने 60%

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Speaker A

मार्केट शेयर कैप्चर किया हुआ था। जबकि बचे हुए 40% में Samsung, Motorola, LG और Sony जैसे बड़े ब्रांड्स थे। ऐसे में इनसे सीधा मुकाबला करना Micromax के लिए पॉसिबल ही नहीं था। इसीलिए उन्होंने इंडियन यूजर्स को समझना शुरू किया और यहीं उन्हें

04:48

Speaker A

एक बड़ा गैप दिखाई दिया ड्यूल सिम फोंस का जिस पर बड़े ब्रांड्स अभी तक ध्यान नहीं दे रहे थे। इसीलिए Micromax ने ऐसे फोंस लॉन्च किए जिनमें एक साथ दो सिम कार्ड्स यूज किए जा सकते थे और यही मूव कंपनी के

05:01

Speaker A

लिए गेम चेंजर साबित हुआ क्योंकि उस टाइम ज्यादातर लोग एक सिम परमानेंट रखते थे और दूसरा सिम ऑफर के हिसाब से बदलते रहते जिससे लोगों की एक और बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व हो गई। कुछ ही समय में ड्यूल सिम वाले

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Speaker A

फोंस तेजी से पॉपुलर होने लगे और मार्केट का बड़ा हिस्सा कैप्चर करने लगे। लेकिन Micromax यहीं नहीं रुका। उनकी स्ट्रेटजी बिल्कुल सिंपल थी। लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को फोन में बदल दो। कॉल रिकॉर्डिंग चाहिए, फीचर दे दिया, लाउड

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Speaker A

म्यूजिक चाहिए, बड़े स्पीकर्स दे दिए, स्टाइलिश फोन चाहिए, अलग-अलग डिजाइन कर दिया। यानी Micromax हर उस निश को टारगेट कर रहा था जहां बड़े ब्रांड्स अभी तक नहीं पहुंच पाए थे। लेकिन असली चालाक सिर्फ प्रोडक्ट में नहीं बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन

05:41

Speaker A

में भी थी। उस समय बड़े ब्रांड रिटेलर्स को सिर्फ 1-2% ही मार्जिन देते थे। जबकि Micromax ने देना शुरू किया 4-5%। यानी दुकानदार के लिए Micromax फोन बेचना ज्यादा प्रॉफिटेबल हो गया और फिर यहीं से पूरा गेम ही पलट गया। अब दुकानदार खुद ही

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Speaker A

कस्टमर को Micromax रिकमेंड करने लगा और फिर यही सभी फीचर्स और स्ट्रांग डिस्ट्रीब्यूशन का कॉम्बिनेशन Micromax को तेजी से ऊपर ले गया। 2010 आते-आते Micromax इंडिया का तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल ब्रांड बन चुका था और अब सिर्फ Nokia और Samsung ही इससे आगे थे। लेकिन

06:13

Speaker A

दोस्तों, इंडस्ट्री अब एक और बड़े बदलाव की तरफ बढ़ रही थी जिसने Micromax को सिर्फ ग्रो नहीं कराया बल्कि उसे इंडिया का नंबर वन ब्रांड बना दिया। असल में धीरे-धीरे मोबाइल इंडस्ट्री बदल रही थी। Apple का iOS और Google का Android फोन को

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Speaker A

सिर्फ कॉलिंग डिवाइसेस से कहीं ज्यादा पावरफुल बना रहे थे। अब फोन सिर्फ कॉल के लिए नहीं बल्कि इंटरनेट, एप्स और एंटरटेनमेंट का पूरा पैकेज बन चुका था। राहुल को यह बदलाव साफ दिख रहा था और उन्हें समझ आ गया कि अगर Micromax को आगे

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Speaker A

बढ़ना है तो फिर स्मार्टफोन में उतरना ही होगा। लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि उस समय स्मार्टफोन बहुत महंगे थे जो कि आम इंडियन कस्टमर्स के लिए अफोर्ड करना मुश्किल था। और यहीं Micromax को एक बड़ा मौका दिखा अफोर्डेबल स्मार्टफोन बनाने का। 2010 में

06:56

Speaker A

Micromax ने अपना पहला Android फोन लॉन्च किया जिसका नाम था Micromax Android A60 और इसकी कीमत रखी गई थी सिर्फ 6999। अब यह मोबाइल फोन बहुत पावरफुल तो नहीं थी लेकिन उस प्राइस पर Android मिलनी ही बड़ी बात थी। लेकिन दोस्तों असली गेम बदला 2012

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Speaker A

में जब Micromax ने लॉन्च किया Can 2। उस समय बड़ी स्क्रीन ही लग्जरी मानी जाती थी। लेकिन Canv 2 में 5 इंच डिस्प्ले और ड्यूल कोर प्रोसेसर जैसे फीचर्स करीब ₹10,000 में ही दे दिए गए। यानी कि प्रीमियम

07:25

Speaker A

एक्सपीरियंस वो भी आधे प्राइस में। और दोस्तों, यहीं से Micromax ने मार्केट को पकड़ लिया। इसके बाद कंपनी लगातार Canv सीरीज में नए-नए मॉडल्स लॉन्च करती गई। हर बार थोड़ा बेहतर फोन लेकिन एग्रेसिव प्राइसिंग में। 2013 से 2015 तक Micromax

07:41

Speaker A

अनस्टॉपेबल हो चुका था। कम बजट वाले कस्टमर्स के लिए यही सबसे बेस्ट ऑप्शन बन गया था और हर क्वार्टर कंपनी ऊपर ही जाती गई और फिर आया 2014 जब Micromax ने हिस्ट्री बना दी। जब करीब 22% मार्केट शेयर के साथ में Micromax इंडिया का नंबर

07:56

Speaker A

वन स्मार्टफोन ब्रांड बन गया। यह वही दौर था जब अक्षय कुमार इसके ब्रांड एंबेसडर बने और इस कंपनी के ऐड हर जगह दिखने लगे थे। इसके बाद से ह्यूज जैकमैन जैसे हॉलीवुड स्टार भी इस कैंपेन में नजर आए।

08:08

Speaker A

साथ ही फाइनेंशियली भी कंपनी अपने पीक पर पहुंच चुकी थी। 2014-15 में रेवेन्यू करीब ₹11,000 करोड़ पहुंच गया था और वैल्यूएशन बढ़कर ₹21,000 करोड़ को भी क्रॉस कर चुकी थी। मतलब सब

08:24

Speaker A

कहानी बदलनी शुरू हो गई। क्योंकि ऊपर से तो सब कुछ नॉर्मल लग रहा था लेकिन अंदर ही अंदर मार्केट में एक नया खतरा तेजी से बढ़ रहा था चाइनीज स्मार्टफोन ब्रांड्स का। 2014-15 के दौरान Xiaomi, Oppo और Vivo

08:37

Speaker A

जैसी कंपनियों ने इंडिया में एंट्री लेनी शुरू की। अब स्टार्टिंग में इन्हें ज्यादा सीरियस नहीं लिया गया क्योंकि बजट सेगमेंट में Micromax, लावा और Intel जैसे इंडियन ब्रांड्स पहले से ही मौजूद थे। लेकिन धीरे-धीरे गेम बदलने लगा। चाइनीस ब्रांड

08:50

Speaker A

सेम प्राइस में लेकिन उससे कहीं बेहतर फोंस दे रहे थे बेटर प्रोसेसर, बेटर कैमरा और बिगर बैटरी के साथ और यहीं से Micromax जैसे ब्रांड्स तेजी से पीछे छूटने लगे। और दोस्तों, प्रॉब्लम सिर्फ कंपटीशन में नहीं थी बल्कि Micromax के अपने खुद के बिजनेस

09:05

Speaker A

मॉडल में भी थी। कंपनी खुद फोन डेवलप नहीं करती थी। उसका प्रोडक्शन भी चाइना में होता था। यानी उसके पास स्ट्रांग आरएडी या फिर रियल इनोवेशन ही नहीं था। वहीं दूसरी तरफ चाइनीस ब्रांड्स अपनी टेक्नोलॉजी खुद बना रहे थे और हर कुछ महीनों के गैप में

09:19

Speaker A

पहले से बेहतर फोंस ल्च कर देते थे। धीरे-धीरे यूज़र्स को भी यह फर्क समझ आने लगा जिससे मार्केट शेयर शिफ्ट होने लगा। लेकिन दोस्तों, असली झटका लगना भी बाकी ही था। 2016 के एंड में इंडिया के टेलीकॉम मार्केट में एक ऐसा बदलाव आया जिसने पूरा

09:34

Speaker A

गेम ही बदल दिया। Reliance Jio का लॉन्च। फ्री कॉल्स और फ्री 4G इंटरनेट ने पूरे देश को ऑनलाइन कर दिया था। लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि Jio सिर्फ 4G फस पर ही काम करता था। और यहीं Micromax की सबसे बड़ी गलती

09:47

Speaker A

सामने आई। उस समय तक Micromax के ज्यादातर फोन अभी भी 3G ही थे। कंपनी ने 4G ट्रांजिशन को अंडरएस्टीमेट कर दिया था। और फिर नतीजा यह हुआ कि 3G फस का स्टॉक फंस गया। सेल्स गिर गई और नुकसान शुरू हो गया।

10:00

Speaker A

2017 आते-आते सिचुएशन पूरी तरह से बदल चुकी थी। विदेशी ब्रांड्स मार्केट का आधे से ज्यादा हिस्सा ले चुके थे और Micromax का शेयर गिरकर सिंगल डिजिट में आ गया था। 2014 में जहां कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹11,000 करोड़ था, वहीं 2018 तक घटकर लगभग

10:17

Speaker A

₹4,300 करोड़ रह गया था। और फिर 2019 आते-आते micromax का मार्केट शेयर 1% के भी नीचे चला गया। यानी वही कंपनी जो कुछ साल पहले तक इंडिया की नंबर वन स्मार्टफोन ब्रांड थी, अब मार्केट से लगभग पूरी तरह

10:31

Speaker A

से गायब हो चुकी थी। वैल्यू्यूएशन भी 21,000 करोड़ से गिरकर सिर्फ 1500 करोड़ तक आ गया और महज 4 साल के अंदर Micromax का पूरा एंपायर बिखर चुका था। 2020 तक आते-आते यह साफ हो चुका था कि स्मार्टफोन

10:44

Speaker A

मार्केट में Micromax की कहानी लगभग खत्म हो चुकी है। लेकिन रुकिएगा इसका मतलब यह नहीं था कि कंपनी बंद हो गई। Micromax ने धीरे-धीरे अपना फोकस बदलना शुरू किया। सबसे पहले उसने अपने पुराने सेगमेंट यानी फीचर फोन पर ध्यान दिया क्योंकि छोटे

10:59

Speaker A

शहरों और गांव में अभी भी कीपैड फस की डिमांड काफी ज्यादा मौजूद थी। लेकिन सिर्फ फीचर फोन से बिजनेस चलाना पॉसिबल नहीं था। इसीलिए कंपनी ने कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में भी एंट्री ली एलईडी टीवीज, मॉनिटर, लैपटॉप्स और दूसरे होम एप्लायंसेस के साथ

11:13

Speaker A

में। और दोस्तों, यहां भी वही स्ट्रेटजी अपनाई गई कम कीमत में ज्यादा फीचर्स। इसी बीच राहुल शर्मा ने एक नया वेंचर शुरू किया RV मोटर्स जो कि इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल्स बनाती है। हालांकि यह Micromax से अलग बिजनेस है लेकिन यह

11:26

Speaker A

दिखाता है कि फाउंडर्स अभी भी नए-नए अपॉर्चुनिटीज एक्सप्लोर कर रहे हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल क्या Micromax स्मार्टफोन मार्केट में कमबैक कर सकता है?

11:35

Speaker A

अब दोस्तों सच तो यह है कि स्मार्टफोन इंडस्ट्री बेहद टफ है। यहां अगर आप कुछ साल पीछे रह जाए ना तो फिर वापसी करना बहुत मुश्किल हो जाता है। हालांकि नामुमकिन तो कुछ भी नहीं है। और दोस्तों इसका एग्जांपल हमें इंडिया में ही देखने

11:48

Speaker A

को मिलता है लावा इंटरनेशनल के साथ में। लावा भी एक समय पर मार्केट से लगभग गायब हो चुका था लेकिन धीरे-धीरे स्ट्रेटजी बदलकर उसने वापसी की। अब भले ही वह मार्केट लीडर नहीं है, लेकिन उसने अपनी एक स्टेबल पोजीशन बना रखी है। इसीलिए

12:02

Speaker A

Micromax के लिए भी कहानी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। अगर कंपनी सही स्ट्रेटजी के साथ वापसी करती है तो फिर उसके पास अभी भी एक मौका है। और शायद आने वाले कुछ सालों में जब आप किसी मोबाइल शॉप

12:14

Speaker A

पर जाएं तो एक बार फिर से Micromax का स्मार्टफोन सेल्फ पर रखा हुआ दिख जाए। वैसे आपने इस ब्रांड के किस फोन का यूज किया है? हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा।

Topics: Micromax भारतीय मोबाइल ब्रांड ड्यूल सिम फोन स्मार्टफोन मार्केट राहुल शर्मा Android फोन चीनी ब्रांड्स मोबाइल इंडस्ट्री बैटरी परफॉर्मेंस भारत मोबाइल मार्केट


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