**The Untold Story of Zia-ul-Haq's Death | Here is what they are hiding ? — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/untold-story-zia-ul-haq-death/

जनरल जियाउल हक की मौत के रहस्यों और साजिशों की पड़ताल, हादसे के पीछे छुपे सवाल और जांच की अनसुलझी गुत्थियां।

## Key Takeaways

- जनरल जियाउल हक की मौत के पीछे कई साजिशों और रहस्यों का पर्दाफाश जरूरी है।
- अमेरिका और अन्य विदेशी ताकतों के साथ-साथ पाकिस्तान के अंदरूनी तत्वों की भूमिका पर संदेह है।
- तीन जांच आयोगों की रिपोर्ट सार्वजनिक न होना जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
- परवेज मुशर्रफ की जान बचना एक महत्वपूर्ण तथ्य है जो साजिश की गहराई को दर्शाता है।
- हादसे की असली वजह जानने के लिए पूरी सच्चाई को सामने लाना आवश्यक है।

## What the video covers

- जनरल जियाउल हक की मौत हादसा थी या कत्ल, इस वीडियो में इसके विभिन्न पहलुओं की जांच की गई है।
- अमेरिका, सोवियत यूनियन, इसराइल, भारत या पाकिस्तान के अंदरूनी तत्वों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
- 17 अगस्त 1988 को जनरल जिया को बहावलपुर बुलाने के पीछे के कारण और उनके मनोविज्ञान का विश्लेषण।
- हादसे के दिन की घटनाओं का विस्तार से वर्णन, जिसमें टैंकों का प्रदर्शन, जहाज की उड़ान और दुर्घटना शामिल है।
- जहाज में रखे गए तोहफों और आम की पेटियों के संदर्भ में संदिग्ध बातें और जहाज की खराबी या साजिश की संभावना।
- तीन जांच आयोगों द्वारा की गई जांच और उनकी रिपोर्ट्स का सार्वजनिक न होना।
- परवेज मुशर्रफ के हादसे से बचने की कहानी और उनके साथ जहाज में न होने के कारण।
- हादसे के बाद पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक स्थिति में बदलाव।
- तहकीकात में बाधाएं, संदिग्ध गिरफ्तारियां और जांच में गुप्तता।
- अंत में, वीडियो में हादसे के पीछे की साजिशों और असली कारणों को उजागर करने की कोशिश की गई है।

## Chapters

1. 00:00 जियाउल हक की मौत: हादसा या कत्ल?
2. 01:09 परवेज मुशर्रफ की जान बचने की कहानी
3. 02:36 बहावलपुर में टैंकों का प्रदर्शन और जहाज की उड़ान
4. 03:49 जहाज में तोहफे और आम की पेटियों का रहस्य
5. 06:29 पाक वन की उड़ान और हादसे का वक्त
6. 09:31 हादसे के बाद की राजनीतिक स्थिति और जांच
7. 12:03 तहकीकात में बाधाएं और संदिग्ध गिरफ्तारियां
8. 14:39 साजिश के पहलू और असली कारणों की खोज

Answers

## Questions about this video

जनरल जियाउल हक की मौत कैसे हुई थी?

जनरल जियाउल हक की मौत एक विमान दुर्घटना में हुई थी, लेकिन इसके पीछे हादसा था या साजिश, यह आज तक विवादित और अनसुलझा सवाल बना हुआ है।

क्या परवेज मुशर्रफ भी उस विमान में सवार थे?

परवेज मुशर्रफ को भी उस विमान में जाना था लेकिन आखिरी समय पर उनका स्थानांतरण किसी अन्य ब्रिगेडियर को कर दिया गया, जिससे उनकी जान बच गई।

हादसे की जांच रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं हुई?

हादसे की जांच के लिए तीन आयोग बनाए गए थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं हुई, जिससे जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:13

Speaker A

जियाउलक की मौत हादसा था या कत्ल? अगर कत्ल था तो किसने किया? अमेरिका, सोवियत यूनियन, इसराइल, भारत या फिर अपना?

00:25

Speaker A

आम की पेटियों में धमाका हुआ था या ट्रॉफी में से जहरीली गैस लीक हुई थी?

00:33

Speaker A

जमीन से मिसाइल फायर हुआ था या पायलट खुदख मिशन पर था? जहाज में कोई खराबी हो गई थी या खराबी पैदा की गई थी?

00:46

Speaker A

हादसे की तहकीकात के लिए तीन कमीशन बने मगर रिपोर्ट कभी सामने ना आ सकी। क्यों?

00:52

Speaker A

यह वो सवालात हैं जिनके जवाब आज तक मोम्मा बने हुए हैं। आज की इस वीडियो में हम एक-एक करके हर सवाल पर से पर्दा उठाएंगे और उस सच को तलाश करेंगे जो आज तक कहीं अंधेरों में भटक रहा है। हम आपको यह

01:09

Speaker A

भी बताएंगे कि जनरल परवेज मुशर्रफ उस हादसे का शिकार होने से कैसे बचें। आगे बढ़ने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर लें और वीडियो पसंद आए तो इसे लाइक और कमेंट भी जरूर करें। तो चलते हैं 17 अगस्त

01:23

Speaker A

1988 के उस दिन जब जनरल जियाउल हक अपनी जिंदगी के आखिरी सफर पर रवाना हुए। जियाउल हक जाना नहीं चाहते थे। मगर मुल्तान में फर्स्ट आर्मर डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल महमूद दुरानी का इसरार था कि वह जरूर आए। टैंकों की मशक

01:48

Speaker A

देखें। उनके साथ गोल्फ खेलें और मुल्तान में उनके मेहमान बने और इसके लिए वह जियाउल हक को पिछले डेढ़ हफ्ते में 16 फोन कॉल्स कर चुके थे। इस पर जनरल जिया ने गुस्से से अपने एडीसी से कहा कि इसका मसला

02:02

Speaker A

क्या है? यह मुझे वहां बुलाने के लिए इतना बेताब क्यों है? जियाउलक के बेटे एजाजुल हक का भी कहना है कि उनके वालिद जाना ही नहीं चाहते थे। वो मुल्क के सदर भी थे और आर्मी चीफ भी। इसलिए उसी तौर पर उनका वहां

02:17

Speaker A

जाना जरूरी नहीं था। फौज के जनरल हेड क्वार्टर से कोई मातह जनरल, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ या तरबियती शोबे का सरबराह भी वहां जा सकता था। लेकिन एक सीनियर ऑफिसर मेजर जनरल महमूद अली दुर्रानी बार-बार इसरार कर रहे थे कि वो वहां जरूर आए। जनरल जियाउलक

02:36

Speaker A

को मेजर जनरल महमूद दुरानी अमेरिका के एम वन अब्राउन टेमको का मुयना करने के लिए बहावलपुर के सहरा में बुलाना चाहते थे। अमेरिका यह टैंक पाकिस्तान को बेचना चाहता था। बिलिखिर जनरल जिया मान गए। उस रोज वो रूटीन के मुताबिक सुबह उठे नाश्ता

02:53

Speaker A

किया और रवानगी की तैयारी में लग गए। उनके बेटे अनवारुल हक ने रात को ही कह दिया था कि वह भी साथ चलेंगे। जियाउल हक ने सुबह जब बेटे के कमरे का दरवाजा खोला तो वह गहरी नींद सो रहा था। जियाउल हक

03:07

Speaker A

ने शायद उसे उठाना मुनासिब नहीं समझा और अकेले ही रवाना हो गए। हालांकि यह वो दौर था जब ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही थी कि जियाउलक की जान को खतरा है और इसी खतरे की वजह से उन्हें फजाई सफर ना करने

03:21

Speaker A

का मशवरा दिया जा रहा था। कुछ इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स ऐसी थी। आईएसआई ने भी उस वक्त के डीजी ने भी उनको इस बात बावर करवाया था कि आप ट्रेवल ना करें। कुछ एक दो तीन माह के लिए खासतौर पर

03:33

Speaker A

जहाज में ट्रेवल ना करें। चकलाला एयरबेस पर उनके लिए C130 हरकुलस जहाज तैयार खड़ा था। उस जहाज को पाक वन भी कहा जाता था। ढाई माह बाद जनरल जिया का उस जहाज में पहला सफर था। उनके साथ अमेरिकी

03:49

Speaker A

सफीर आर्नल्ड राफेल, अमेरिकी ब्रिगेडियर जनरल हरबर्ट एम वसुम और जनरल अख्तर अब्दुल रहमान भी साथ थे। जहाज ने उड़ान भरी और बाहिफाजत पीएएफ एयरबेस बहावलपुर में लैंड कर गया। वहां से सब हेलीकॉप्टर्स में सवार हुए और तहसील टामी वाली पहुंचे। जहां अमकी

04:07

Speaker A

टैंक अपनी परफॉर्मेंस दिखाने के लिए तैयार खड़े थे। लेकिन टैंकों का यह मुजायरा तवक्को के बरक्स बुरी तरह नाकाम साबित हुआ। 2 घंटे की इस तकरीब में किसी टैंक ने टारगेट को हिट ना किया। वहां मौजूद अमेकियों के चेहरे शर्मिंदगी से लटक गए

04:24

Speaker A

क्योंकि उन्होंने अब्रास टैंक के बारे में बड़े-बड़े दावे किए थे। जनरल जिया का मूड भी खराब हो गया। वो वहां से वापस बहावलपुर एयरबेस पहुंचे। ऑफिसेस मेस में दोपहर का खाना खाया और फिर तमाम लोग इस्लामाबाद जाने के लिए C130 यानी पाक वन में सवार

04:42

Speaker A

हो गए। जहाज में कुछ तहाइफ पहले से ही रखवा दिए गए थे। इनमें आमों की वो मशहूर पेटियां भी शामिल हैं जिनका जिक्र आज तक किया जाता है। इसके अलावा तोहफों में एक ट्रॉफी भी थी। यह तहाइफ मुख्तलिफ लोगों की

04:57

Speaker A

जानिब से दिए गए जिनमें बहावलपुर के मेयर, एक सुबई वज़र और दूसरे भी शामिल थे। ट्रॉफीज़ को रखा हुआ था कॉकपिट के अंदर। अमूमन तो तोहफे रखे जाते हैं पीछे। जहाज के जहां आमों की पेटियां भी पड़ी थीं।

05:09

Speaker A

जहाज इस्लामाबाद वापसी के लिए तैयार था। सब सवार हो चुके थे। जनरल जियााउलक के साथ उनके करीबी साथी जनरल अख्तर अब्दुल रहमान बैठे थे। वो जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन थे और जनरल जिया के बाद पाकिस्तान के दूसरे ताकतवर तरीन फौजी

05:26

Speaker A

रहनुमा समझे जाते थे। जनरल जिया की तरह जनरल अख्तर अब्दुल रहमान भी टैंकों का मुजायरा देखने आना तो नहीं चाहते थे मगर फिर फैसला तब्दील करके आ गए। उनके साथ चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मोहम्मद अफजल, अमरी सफीर आर्नल राफेल और पाकिस्तान में अमकी फौजी

05:43

Speaker A

इमदादी मिशन के हेड जनरल हर्बर्ट वासम भी थे। यह सब जहाज में बने एक खुसूसी केबिन में थे। केबिन के पीछे सीटों पर आठ पाकिस्तानी जर्नल बैठे थे। वॉइस चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मिर्जा असलम बेग बाहर रनवे पर खड़े सबको अलविदा कर रहे थे।

06:01

Speaker A

उस रोज फौजी कमान के आला तरीन अफसरों में वो वाहिद अहम जनरल थे जो पाक वन में सवार नहीं हुए। जनरल जिया ने आखिरी लम्हे में उन्हें भी साथ आने की दावत दी। मगर उन्होंने माज़रत कर ली और बताया कि उन्हें

06:15

Speaker A

किसी और मीटिंग में जाना है। फिर वो एक छोटे टर्बो जेट तैयारे में सवार हो गए जो पाक वन के उड़ते ही रवाना होने के लिए तैयार खड़ा था। पाक वन की रवानगी से कब 14 टेक्नशियंस ने तैयारे का मुकम्मल मुयना

06:29

Speaker A

किया और ओके की रिपोर्ट दी। एक सिक्योरिटी तैयार से ने इलाके का आखिरी फ़ज़ाई जायजा लिया और पाक वन को परवास के लिए क्लीयरेंस जारी कर दी। यह एहतियाती कदम कई वर्षों से रूटीन का हिस्सा था। पाक फिट में चार

06:43

Speaker A

अफराद पर मुश्तमिल अमला था। पायलट विंग कमांडर मशूद हसन जिन्हें जनरल जिया ने जादती तौर पर मुंतखब किया था। मॉबिन पायलट, नेविगेटर और फ्लाइट इंजीनियर्स को भी फजाइया के सिक्योरिटी इदारों ने मुकम्मल छान फटक के बाद क्लियर किया था।

06:58

Speaker A

मज़द इत्मीनान के लिए हादसे से सिर्फ एक रोज कब पाक वन, इस्लामाबाद और बहावलपुर के दरमियान आजमाइशी परवाज भी कर चुका था। ताकि यह यकीनी बनाया जा सके कि अगले दिन सदरे पाकिस्तान और आला फौजी कयादत के सफर

07:12

Speaker A

के दौरान कोई गड़बड़ ना हो। जब तमाम हिफाजती इंतजामात मुकम्मल हो गए तो कंट्रोल टावर ने जनरल जिया के तैयारियों को उड़ान भरने की इजाजत दे दी। अभी तक सब ठीक चल रहा था। किसी के वहमोगुमान में भी

07:25

Speaker A

ना था कि चंद मिनट बाद वो धमाका होने वाला है जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनी जाएगी।

07:57

Speaker A

पाक वन का इंजन स्टार्ट हुआ। तैयारा रनवे पर दौड़ा और सहपहर 3:46 पर फज़ा में बुलंद हो गया। चंद लम्हे बाद बहावलपुर के एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर से तैयारी की पोजीशन पूछी गई। जवाब में पायलट मशहूर हसन ने कहा पाक वन स्टैंड बाय। पायलट की यह आखिरी आवाज थी जो सुनी गई और फिर अगले चंद

08:13

Speaker A

मिनट में तैयारा लापता हो गया।

08:32

Speaker A

तमाम राबते कट गए।

09:00

Speaker A

ठीक उसी दौरान एयरपोर्ट से तकरीबन 9 मील दूर दरिया सतलुज के किनारे देहातियों ने आसमान पर अजीब मंजर देखा।

09:18

Speaker A

एक जहाज झटके खा रहा था। वो कभी ऊपर जाता और कभी नीचे आता। फिर अचानक जमीन की जानिब झुका और 3:51 पर सेहरा की रेत से जा टकराया। जोरदार धमाका हुआ और पूरा जहाज आग का गोला बन गया। कोई नहीं बचा। जहाज में सवार तमाम 31 अफराद मौके पर ही दम तोड़ गए। 11 साल तक मुल्क पर हुक्मरानी

09:31

Speaker A

करने वाले जनरल जिया भी ना बच सके। कौम को यह अफसोसनाक खबर सबसे पहले गुलाम इसा खान ने पी टीवी पर आ कर दी। सेपेर 4:30 बजे के लगभग उनका जहाज इस्लामाबाद वापसी के लिए बहावलपुर के हवाई अड्डे से रवाना हुआ। मगर परवास के चंद

09:47

Speaker A

मिनट बाद एक धमाके से हवा में ही बट गया। जल्द ही यह खबर पूरी दुनिया के मीडिया की हेडलाइन बन गई। पाकिस्तान के राष्ट्र और सेनापति जनरल जियाउल हक का एक विमान दुर्घटना में देहांत हो गया। जिया वाज़

10:02

Speaker A

अकंपनीड बाय द अमेरिकन एंबेसडर पाकिस्तान राफेल अलोंग विडियो जनरल नंबर वन पाकिस्तान प्रेसिडेंट जनरल मोहम्मद जिया उल हक वाज़ किल टुडे प्लेन फैशन। दिलचस्प बात यह है कि साबिक सदर परवेज मुशर्रफ भी उस जहाज में सवार होने वाले

10:15

Speaker A

थे। मगर उनकी जिंदगी अभी बाकी थी। अपनी किताब इन द लाइन ऑफ फायर में वो लिखते हैं कि उन्हें भी जनरल जियाउलक के साथ उसी तैयारे में जाना था क्योंकि उन्हें जनरल जिया का मिलिट्री सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया गया था। लेकिन आखिरी वक्त पर

10:37

Speaker A

उनकी जगह किसी दूसरे ब्रिगेडियर को यह ओहदा दे दिया गया और यूं वो इस हादसे का शिकार होने से बच गए। खैर जनरल जियाउल हक मुल्क के सदर भी थे और आर्मी चीफ भी। हादसे के बाद आईन के तहत चेयरमैन सेनेट

10:51

Speaker A

गुलाम ईसा खान को सदर मुमिकत बना दिया गया। नए सदर ने आर्मी चीफ की कमान मिर्जा असलम बेग के सुपुर्द कर दी। लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल अपनी जगह मौजूद था। आखिर ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान के सदर का तैयारा चंद मिनटों

11:04

Speaker A

में ही आसमान से जमीन पर आ गिरा। यह जहाज में किसी हादसे का नतीजा था या फिर जहाज को किसी ने टारगेट किया था। फ़ौरन तहकीकात शुरू कर दी गई। कहा जाता है कि अ जुल्फकार तंजीम ने पाक वन की तबाही की

11:19

Speaker A

जिम्मेदारी कबूल करने का दावा किया। मगर फिर जब उसे पता चला कि हादसे में अमरीकी भी हलाक हुए हैं तो तंजीम फ़ौरन अपने दावे से पीछे हट गया।

11:34

Speaker A

कहना है कि उस वक्त कोल्ड वॉर उज पर थी। जहाज में अमकी सफीर भी हलाक हुआ था और सोवियत यूनियन इतना बड़ा दांव खेलने की हिमाकत नहीं करेगा। फिर शक की सुई अटकी भारत पर। भारत का इल्जाम था कि जियाउल हक

11:49

Speaker A

सिख अलैदगी पसंदों से मुलाकातें कर रहे हैं और उन्हें असलहा और तरबियत फराहम कर रहे हैं। भारतीय वज़ीर आजम राजीव गांधी ने खुली धमकी दी थी कि पाकिस्तान को पछताना पड़ सकता है लेकिन भारत के लिए भी इतनी

12:03

Speaker A

बड़ी साजिश रचाना आसान ना था। ऐसे में कुछ अपनों पर भी शुभा हुआ। डॉन अखबार के मुताबिक जिन लोगों ने जनरल सियाउल हक को आमों की पेटियां और दीगर तोहफे दिए थे उन सबको हिरासत में ले लिया गया। 8 घंटे तक

12:19

Speaker A

पुलिस ने तफ्तीश की लेकिन फिर छोड़ दिया। बीबीसी के मुताबिक जमीन पर मौजूद अमले समेत दीगर 80 अफराद से भी तफ्तीश की गई। यहां तक कि पाक पन उड़ाने वाले विंग कमांडर मशूद हसन और फ्लाइट लेफ्टिनेंट साजिद के लवाहकीन से भी इन्वेस्टिगेशन की

12:35

Speaker A

गई। लेकिन दोनों पायलट बेगुनाह पाए गए। उस वक्त मिर्जा असलम बेग को भी शक की नजर से देखा गया। डॉन न्यूज़ के मुताबिक जनरल जियाउल हक और जनरल अख्तर अब्दुल रहमान के बेटों और दीगर का कहना था कि जनरल जिया

12:48

Speaker A

जनरल मिर्जा असलम बेग के बतौर वाइस चीफ फौज के ऑपरेशनल मामलात का मजीद कंट्रोल हासिल करने की कोशिशों से खुश ना थे। वो उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अफज़ाल को लाना चाहते थे और मिर्जा असलम बेग यह बात अच्छी तरह जानते थे। डॉन न्यूज़ ने जब

13:06

Speaker A

मिर्जा असलम बेग से इस बारे में सवाल किया तो वह तल्ख लहजे में बोले कि अगर इस पूरे खेल में मेरा कोई किरदार होता तो मैं बाद में हुकूमत पर कब्जा ना कर लेता। तहकीकात जारी थी मगर कोई ऐसा सिरा नहीं मिल रहा था

13:19

Speaker A

जिससे पता चले कि आखिर जहाज के साथ हुआ क्या? इसी दौरान ऐसे इल्जामात भी सामने आए जिनसे लगा कि तहकीकात में जानबूझकर रुकावटें डाली जा रही हैं। जनरल अख्तर अब्दुल रहमान के बेटे हुमायूं अख्तर के मुताबिक हादसे की तहकीकात के लिए वो जितनी

13:36

Speaker A

कोशिश कर सकते थे की लेकिन फिर अंदाजा हो गया कि हम किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकेंगे। डॉन न्यूज़ ने लिखा कि बदकिस्मत पाकपन के पायलट विंग कमांडो मशूद के भाई ग्रुप कैप्टन नोमान को उनके वालिद ने तफ्तीश से पीछे हटने का मशवरा दिया। नोमान

13:54

Speaker A

के मुताबिक वालिद ने कहा कि वो पहले ही एक बेटा खो चुके हैं। अब एक और नहीं खोना चाहते। अमरियत के खात्मे के बाद पाकिस्तान में जमूरियत का दौर शुरू होने वाला था। शायद इसीलिए अमेरिका ने 22 अगस्त को

14:07

Speaker A

तहकीकात के लिए एक छह रुकनी टीम तो भेजी मगर उनमें सब फजाई हादसात के माहरीन थे। क्राइम या टेररिज्म का कोई एक एक्सपर्ट भी उसमें ना था। यह जानने के लिए कि जहाज किसी खराबी की वजह से तो नहीं गिरा। एक तहकीकाती कमेटी

14:28

Speaker A

बनाई गई जिसमें अमरीकी भी शामिल थे। कमेटी ने तबाहशुदा जहाज के इंजन, फ्लाइंग सिस्टम और दीगर टेक्निकल मामलात का बारीकी से जायजा लिया और 16 अक्टूबर को अपनी 365 सफात की रिपोर्ट सदर गुलाम इसाक खान को पेश कर दी। इस रिपोर्ट के सिर्फ 30 सफात

14:46

Speaker A

आवाम के सामने लाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज में ऐसी कोई खराबी नहीं मिली जो हादसे का सबब बनती। इसलिए [संगीत] यह हादसा कोई मुजरिमाना कारवाई या तकरीफकारी यानी सेबोटाज का नतीजा हो सकती है। इस तकरीबकारी में कौन मुलव्विस हो सकता है

15:04

Speaker A

रिपोर्ट में यह कहीं नहीं लिखा था। अलबत्ता यह इमकान जाहिर किया गया कि हो सकता है हादसे से कुछ लम्हे पहले तैयारे के अंदर कोई गैर मामूली वाक्या पेश आया हो जिसकी वजह से कॉकपिट के अमले ने जहाज का

15:18

Speaker A

कंट्रोल खो दिया हो। कुल मिलाकर रिपोर्ट में यह था कि जहाज किसी टेक्निकल खराबी की वजह से नहीं गिरा बल्कि मुमकिन है कि उसे टारगेट किया गया हो। लेकिन हैरतंगेज तौर पर हमले के शवाहिद भी नहीं मिले। तैयारे

15:31

Speaker A

के इंजन भी फेल नहीं हुए थे। प्रोपेलर ब्लेड्स के मुय से पता चला कि जहाज के इंजन जमीन से टकराने तक पूरी ताकत से चल रहे थे। फ्यूल टैंक का मुयना किया गया वो भी क्लियर था। फ्यूल पंप्स की खराबी के भी

15:45

Speaker A

कोई आसार नहीं मिले। जहाज का इलेक्ट्रिक सिस्टम भी ठीक काम कर रहा था क्योंकि जहाज में मौजूद दोनों इलेक्ट्रिक घड़ियां एन उसी लम्हे रुकी थी जिस वक्त तैयारा जमीन से टकराया। उस दिन मौसम भी साफ और दिन की

15:58

Speaker A

रोशनी भी क्लियर थी। पायलट भी तजुर्बेकार और भरोसे वाले थे। उनकी सेहत भी ठीक थी। अब हर चीज क्लियर थी। जहाज पर हमला भी नहीं किया गया। अंदर धमाका भी नहीं हुआ। जहाज में कोई खराबी भी नहीं थी। तो ऐसे

16:13

Speaker A

में अमकी एक्सपर्ट्स ने अंदाजा लगाया कि हर चीज सही होने के बावजूद तैयारा जिस तरह गिरा है उसकी एक ही वजह हो सकती है और वो यह कि तैयारे का कंट्रोल अचानक खत्म हो जाए। ऐसा सिर्फ एक वजह से हो सकता था

16:28

Speaker A

जहरीली गैस। एक ऐसी गैस जो पूरे फ्लाइट क्रू को हलाक या बेहोश कर दे। इस अंदाजे को ताकत उस वक्त मिली जब केमिकल एग्जामिनेशन के दौरान मलबे पर एंटमनी और फास्फोरस के आसार मिले जो नहीं होने चाहिए थे। कॉकपिट में कोई वॉइस रिकॉर्डर भी नहीं

16:45

Speaker A

था। यह भी बताया गया कि जहाज में ब्लैक बॉक्स भी नहीं था। हादसे के बाद किसी भी तरह की कोई रिकॉर्डिंग ना मिल सकी। जिस वक्त हादसा हुआ उस वक्त करीब में तीन जहाज उड़ रहे थे। एक जनरल असलम बैक का टर्बो

16:59

Speaker A

जेट। दूसरा पार्क वन 379 जो पार्क वन का बैकअप C130 तैयारा था और तीसरा सेसना जो सिक्योरिटी के लिए फजा में था। इन तीनों जहाजों के पायलटों ने बाद में बताया कि पार्क वन ने सबसे पहले कंट्रोल टावर को

17:14

Speaker A

रावलपिंडी पहुंचने का अंदाजन वक्त बताया। फिर कंट्रोल टावर ने तैयारी की पोजीशन [संगीत] पूछी जिस पर कोई जवाब नहीं आया। इसी दौरान पार्क 379 ने राब्ता करने की कोशिश की। रेडियो पर सिर्फ मुख्तसर सा जुमला सुनाई दिया। स्टैंड बाय और फिर

17:31

Speaker A

खामोशी छा गई। कंट्रोल टावर ने मुसलसल राब्ते की कोशिशें की मगर खामोशी बरकरार रही। फिर तीन-4 मिनट बाद अचानक एक मधम सी आवाज सुनाई दी। मशहूद मशहूद। यह तैयारे में सवार जनरल सिया के मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रिगेडियर नजीब अहमद

17:52

Speaker A

की आवाज थी। उसके बाद मुकम्मल खामोशी। अमेरिकी साफी एडवर्ड जे एस्टीन के मुताबिक इससे यह पता चलता है कि कॉकपिट का रेडियो ऑन था और अगर पायलट होश में होते तो वो खामोश क्यों रहते। पायलट्स को शायद इतना

18:09

Speaker A

टाइम भी नहीं मिला कि वो रेडियो पर मेडे का इमरजेंसी कोर्ट पुकार सकते। अगर कॉकपेट में किसी किस्म की मज़ाहमत या झगड़ा हुआ होता तो उसकी आवाज रेडियो पर जरूर सुनाई देती। जहाज बाबलपुर की एयर स्ट्रिप पर खड़ा था। वहां मौजूद एक अहलकार के मुताबिक

18:26

Speaker A

सुबह के वक्त मरम्मती अमला जिसमें कुछ सिविलियन भी थे वो आए और उन्होंने तकरीबन 2 घंटे तक तैयारे के कारगो दरवाजे को एडजस्ट किया। इस दौरान ये लोग बगैर किसी तलाशी के तैयारे में आते जाते रहे। यही शुभा जियाउल हक के बेटे एजाजुल हक ने भी

18:42

Speaker A

जाहिर किया। लैग तो था ना वहां पर किसी तरह से तो वो दरवाजा खराब हो गया। फिर उसका दरवाजा खराब हो गया। उसको ठीक करने के बहाने लोगों को अंदर भिजवाया गया। फिर वहां पर नर्व गैस फिट की गई। आम की पेटियां वहां पर पहुंची।

18:55

Speaker A

कोई चेकिंग वैकिंग नहीं हुई उसकी। माहरीन के मुताबिक नर्व गैस काम दिखाने के बाद फास्फोरस की शक्ल में अपनी कुछ वाकयात छोड़ देती है। चौंका देने वाली बात यह है कि कॉकपिट के मलबे के कीमियाई तजिए में फास्फोरस के वाज़ और भारी आसार पाए गए।

19:12

Speaker A

हादसे के बाद सिर्फ एक शख्स का पोस्टमार्टम हुआ और वो थे अमेरिकी ब्रिगेडियर जनरल हरबर्ट एम वसम। खून की सांस की नाली से राख या कार्बन के जर्रात नहीं मिले। जिसका मतलब यह था कि वह तैयारा गिरने से लगने वाली आग से पहले ही हलाक हो

19:29

Speaker A

चुके थे। हादसे की तहकीकात के लिए तीन कमीशन बनाए गए। पहले बेनज़र भुट्टो हुकूमत में बंदियाल कमीशन बना। फिर शुदात कमीशन बनाया गया। लेकिन किसी की रिपोर्ट मंजरेआम पर नहीं आई। जियाउल हक के बेटे एजाजुल हक का दावा है कि यह हादसा नहीं साजिश थी।

19:47

Speaker A

यह हादसा एक साजिश थी। C130 एक ऐसा जहाज है जो कि अगर सारे इंजन भी फेल हो जाए ना वो फिर भी ग्लाइड कर सकता है और ग्लाइड करके उतर सकता है। यह ऐसा जहाज नहीं है कि ऊपर फट जाए या गिर जाए।

20:00

Speaker A

जिस वक्त हादसा हुआ एजाजुल हक अपनी फैमिली के साथ कनाडा में अपनी वाइफ की छोटी [संगीत] बहन के घर पर थे। वालिद की मौत की खबर सुनकर वो तकफीन से एक दिन पहले [संगीत] 19 अगस्त को पाकिस्तान पहुंचे। उनका दावा

20:14

Speaker A

है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि कॉकपेट में नर्व गैस छोड़ी गई थी जिससे पायलट मफलूज हो गए और जहाज आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। बकल एजाजुल हक यह [संगीत] गैस एक ट्रॉफी में छुपाई गई थी जो

20:29

Speaker A

उनके वालिद को तोहफे में दी गई थी। बाद में यह ट्रॉफी कॉकपिट में मुंतकिल कर दी गई। जब उनसे पूछा गया कि यह ट्रॉफियां किसने दी थी तो उनका कहना था कि वहां मौजूद अफसरान ने जो इस तकरीब के इंतजामात

20:44

Speaker A

और निगरानी के जिम्मेदार थे। एजाजुल हक के ख्याल में साजिश करने वालों ने एक ही तरीके पर इनहसार नहीं किया। उन्होंने पायलट्स को मफलूज करने के लिए आसाबी गैस इस्तेमाल की। आमों के डब्बों में धमाकाखेज मवाद रखा और साथ ही जहाज को बाहर से किसी

21:00

Speaker A

रॉकेट या मिसाइल नुमा किसी चीज से भी निशाना बनाया गया। गैर मुल्की न्यूज़ एजेंसी को एक इंटरव्यू में एजाजुल हक ने मिर्जा असलम बेग और महमूद तुरानी को भी मशकूक करार दिया। उन्होंने इस हादसे में भारतीय और इसराइली खुफिया एजेंसियों के

21:15

Speaker A

मुलविस होने का शबा भी जाहिर किया। एजाजुल हक का इल्जाम है कि उन्होंने हकायक तक पहुंचने की पूरी कोशिश की। मगर उस पर पर्दा डालने की कोशिशें बहुत मजबूत थी। जैसा कि हमने कहा मशकूक लोगों की फहरिस्त बहुत तवील [संगीत] है। मगर आज तक किसी एक

21:31

Speaker A

के खिलाफ भी ठोस सबूत सामने नहीं आ सका। आज इस हादसे [संगीत] को 38 साल गुजर चुके हैं। इस दौरान तहकीकात भी हुई, कमीशन भी बने, रिपोर्टें भी तैयार हुई और बाज़ रिपोर्टों पर पर्दे भी डाले [संगीत] गए।

21:45

Speaker A

पाकिस्तान में हादसे के चंद ही दिन बाद जनरल जियाउल हक और जनरल अख्तर अब्दुल रहमान के नाम टीवी और अखबारात से आहिस्ता-आहिस्ता गायब होने लगे। पाक वन के मलवे के साथ सिर्फ एक तारा जमीबोस नहीं हुआ [संगीत] था। इसके साथ पाकिस्तान के

22:00

Speaker A

ताकतवर तरीन शख्स रियासत के अहम तरीन राज और बेशुमार सवालात भी खाक में मिल गए थे। यानी जियाउलत का तैयारा हादसा पाकिस्तान की हिस्ट्री का वो चैप्टर है जिसका आखिरी सफा आज तक नहीं लिखा जा सका।

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