**Umar bin Khattab Vs FIRAON of Egypt | Umar Series 9 — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/umar-bin-khattab-vs-firaon-egypt/

खलीफा उमर बिन खत्ताब के नेतृत्व में मुसलमानों द्वारा इजिप्त की फतह की कहानी, जिसमें रणनीति, चुनौतियाँ और युद्ध की घटनाएँ शामिल हैं।

## Key Takeaways

- खलीफा उमर की सोच और रणनीति ने मुसलमानों की फतह को सफल बनाया।
- बीमारी के बावजूद अमर बिन आस की दृढ़ता ने इजिप्त पर हमला संभव बनाया।
- छोटी फौज के साथ भी सही रणनीति से बड़ी जीत हासिल की जा सकती है।
- रोमन साम्राज्य की ताकत के बावजूद मुसलमानों ने इजिप्त को जीत लिया।
- फतह के बाद सीमाओं का नियंत्रण और विस्तार पर काबू रखना जरूरी था।

## What the video covers

- फिरौन के हजारों सालों के शासन के बाद मुसलमानों ने उमर बिन खत्ताब की खिलाफत में इजिप्त को फतह करने की योजना बनाई।
- खलीफा उमर शुरुआत में इजिप्त पर हमला करने के खिलाफ थे क्योंकि मुसलमानों की फौज एक गंभीर बीमारी से प्रभावित थी।
- अमर बिन आस ने छोटी फौज के साथ इजिप्त की ओर बढ़ने का प्रस्ताव रखा और खलीफा उमर को मनाने में सफल रहे।
- मुसलमानों ने इजिप्त के कैपिटल (आज का काहिरा) के सामने युद्ध के लिए तैयारी की और रोमनों के खिलाफ जंग लड़ी।
- अमर बिन आस ने रणनीतिक रूप से रोमनों की फौज को घेर कर परास्त किया लेकिन शहर में तुरंत प्रवेश नहीं किया।
- खलीफा उमर ने फतह को नियंत्रित करने के लिए सीमाओं का विस्तार रोकने का आदेश दिया।
- मुसलमानों ने इजिप्त के गवर्नर को खोजा लेकिन वह पहले ही शहर छोड़ चुका था।
- रोमन बादशाह ने मुसलमानों से बदला लेने के लिए बड़ी फौज तैयार की, जिससे आगे संघर्ष की संभावना बनी।
- फतह के दौरान मुसलमानों की रणनीति, नेतृत्व और साहस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- यह कहानी इतिहास में इजिप्त की फतह की एक अनोखी और कम चर्चित घटना को उजागर करती है।

## Chapters

1. 00:00 फिरौन और मुसलमानों की इजिप्त पर नजर
2. 01:17 खलीफा उमर की चिंता और बीमारी का संकट
3. 02:20 अमर बिन आस का इजिप्त पर हमला करने का प्रस्ताव
4. 03:23 मुसलमानों की फौज की तैयारी और रवाना होना
5. 04:35 इजिप्त के कैपिटल के सामने युद्ध की तैयारी
6. 05:59 रोमन फौज के साथ जंग और मुसलमानों की रणनीति
7. 07:29 इजिप्त की फतह और गवर्नर का पलायन
8. 08:49 फतह के बाद की चुनौतियाँ और सीमाओं का नियंत्रण

Answers

## Questions about this video

खलीफा उमर ने इजिप्त पर हमला करने में क्यों हिचकिचाहट दिखाई?

खलीफा उमर ने इजिप्त पर हमला करने से पहले मुसलमानों की फौज में फैली एक गंभीर बीमारी के कारण हिचकिचाहट दिखाई, जिससे 25000 सैनिक और कई जनरल शहीद हो चुके थे।

अमर बिन आस ने इजिप्त पर हमला करने का फैसला कैसे मनवाया?

अमर बिन आस ने खलीफा उमर को समझाया कि इजिप्त की तरफ जाना जरूरी है और मुसलमानों की फौज को तैयार कर केवल 4000 सैनिकों के साथ इजिप्त की ओर रवाना हुए, जिससे खलीफा उमर ने अंततः हमला करने की अनुमति दी।

मुसलमानों ने इजिप्त की फतह के बाद क्या रणनीति अपनाई?

मुसलमानों ने इजिप्त की फतह के बाद रोमनों की फौज को घेर कर परास्त किया लेकिन शहर में तुरंत प्रवेश नहीं किया, और बाद में सीमाओं के विस्तार को नियंत्रित करने के लिए खलीफा उमर के आदेश का पालन किया।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01

Speaker A

फिरौन जो हजारों साल तक पूरे इजिप्त पर राज करते रहे, लेकिन अब फाइनली मुसलमान उमर बिन खत्तम की खिलाफत में फिरौन के इसी इजिप्त को हमेशा के लिए उनसे छीनने वाले थे। यह स्टोरी इजिप्त की फतह की स्टोरी बहुत ही इंटरेस्टिंग होने वाली है क्योंकि आज तक इसे किसी ने एक्सप्लेन नहीं किया। ब वेट, यहां पर एक बहुत बड़ा मसला था। खलीफा उमर यह चाहते ही नहीं थे कि मुसलमान इजिप्त पर हमला करें क्योंकि इजिप्ट पर हमले से कुछ ही

00:19

Speaker A

बहुत ही इंटरेस्टिंग होने वाली है क्योंकि आज तक इसे किसी ने एक्सप्लेन नहीं किया ब वेट यहां पर एक बहुत बड़ा मसला था खलीफा उमर यह चाहते ही नहीं थे कि मुसलमान इजिप्त पर हमला करया क्योंकि इजिप्ट पर हमले से कुछ ही

00:33

Speaker A

अरसा पहले मुसलमानों की खिलाफत पर एक बहुत बड़ी मुसीबत आई थी। ऊन ये एक ऐसी बीमारी थी जिसने मुसलमानों की फौज के 25000 सोल्जर्स को शहीद कर दिया था और सिर्फ सोल्जर्स को ही नहीं बल्कि मुसलमानों के सारे बड़े

00:48

Speaker A

जनरल्स भी इस बीमारी से फौत हो चुके थे जिसके बाद खलीफा उमर खुद हालात को कंट्रोल करने के लिए मदीना से मुसलमानों की आर्मी की तरफ गए और वहां उनकी मुलाकात मुसलमानों के नए आर्मी चीफ अमर बिन आस से हुई

01:02

Speaker A

जनरल्स भी इस बीमारी से फौत हो चुके थे। जिसके बाद खलीफा उमर खुद हालात को कंट्रोल करने के लिए मदीना से मुसलमानों की आर्मी की तरफ गए और वहां उनकी मुलाकात मुसलमानों के नए आर्मी चीफ अमर बिन आस से हुई,

01:17

Speaker A

है और बिल्कुल एक छोटी सी फौज के साथ इजिप्ट को फतह करना बहुत ही मुश्किल हो गया और हजरत उमर को इस बात का भी खतरा था कि ऐसा ना हो कि मुसलमानों की फौज इजिप्त की तरफ चली जाए और पीछे से उन पर पर्जन

01:29

Speaker A

जिन्होंने हजरत उमर के सामने एक नया आईडिया, एक नया प्लान रखा कि अब हमें स्लो होने की बजाय फिरौन के मुल्क इजिप्त की तरफ जाना चाहिए। लेकिन हजरत उमर इस बारे में थोड़ा कंफ्यूज थे कि अभी-अभी हमारी इतनी बड़ी फौज इस बीमारी से शहीद हो चुकी

01:41

Speaker A

मक्का के एक बहुत रिच बिजनेसमैन थे और अपने बिजनेस की वजह से उनका बार-बार इजिप्ट की तरफ आना जाना होता रहता था तो अब उन्हें इस बात का बहुत अच्छी तरह पता था कि इजिप्ट के लोग मुसलमानों के सामने

01:53

Speaker A

है और बिल्कुल एक छोटी सी फौज के साथ इजिप्ट को फतह करना बहुत ही मुश्किल हो गया। और हजरत उमर को इस बात का भी खतरा था कि ऐसा ना हो कि मुसलमानों की फौज इजिप्त की तरफ चली जाए और पीछे से उन पर पर्जन

02:07

Speaker A

बदल गया तो तुम्हें अपनी पूरी फौज के साथ वापस आना होगा यह सुनकर अमर बिनास ने अपनी फौज को रेडी होने का हुकम दिया और सिर्फ 4000 की फौज के साथ इजिप्ट के कैपिटल की तरफ रवाना हुए नाउ एट द सेम टाइम अमर बिन

02:20

Speaker A

एंपायर हमला कर दे। लेकिन आर्मी चीफ अमर बिन आस इस सब के बाद भी हजरत उमर के सामने अपने प्लान पर मजबूती से खड़े रहे कि नहीं, हमें इजिप्ट की तरफ हर हाल में जाना चाहिए क्योंकि अमर बिन आस इस्लाम लाने से पहले

02:31

Speaker A

उनसे इजिप्त के बारे में पूछा कि मुझे बताओ कि हमें क्या करना चाहिए जिस पर हजरत उस्मान और बाकी सहाबा ने क्लीयरली कहा कि हमें इजिप्त की तरफ जाने वाली फौज को रोक देना चाहिए आर्मी चीफ मिनिस्टर सहाबा इन

02:44

Speaker A

मक्का के एक बहुत रिच बिजनेसमैन थे और अपने बिजनेस की वजह से उनका बार-बार इजिप्ट की तरफ आना जाना होता रहता था। तो अब उन्हें इस बात का बहुत अच्छी तरह पता था कि इजिप्ट के लोग मुसलमानों के सामने

02:56

Speaker A

लेकर वापस आ जाओ लेकिन अगर तुम लोग पहले ही इजिप्ट के बॉर्डर को क्रॉस कर चुके हो तो फिर अल्लाह का नाम लो और आगे बढ़ो जैसे ही हजरत उमर का यह मैसेंजर अमर बिन आस तक पहुंचा मुसलमान पहले ही इजिप्ट

03:10

Speaker A

कभी खड़े नहीं हो सकते। आखिर उनके बार-बार कहने पर हजरत उमर ने उनकी बात मान ली और उन्हें इजिप्त पर हमले की इजाजत दे दी, लेकिन एक शर्त पर कि चलो तुम इजिप्ट की तरफ रवाना तो हो जाओ, लेकिन अगर मेरा इरादा

03:23

Speaker A

दूरी पर थे लेकिन जैसे ही अमर बिनस ने हजरत उमर के मैसेंजर को देखा उन्हें अच्छी तरह समझ आ गई कि इस लेटर में क्या लिखा हुआ है तो उन्होंने फौरन यह लेटर खोला ही नहीं बल्कि पहले उस मैसेंजर को बिठाया उसे

03:35

Speaker A

बदल गया तो तुम्हें अपनी पूरी फौज के साथ वापस आना होगा। यह सुनकर अमर बिन आस ने अपनी फौज को रेडी होने का हुक्म दिया और सिर्फ 4000 की फौज के साथ इजिप्ट के कैपिटल की तरफ रवाना हुए। नाउ एट द सेम टाइम अमर बिन

03:49

Speaker A

बढ़ना ही होगा इसी के साथ अमर बिनास मुसलमानों की पूरी फौज को लेकर बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगे यह सारे इलाके फतह करते हुए फाइनली इजिप्ट के कैपिटल के सामने जंग के लिए रेडी खड़े हो गए जिसे आज कायरो कहा जाता

04:05

Speaker A

आस इजिप्ट और हजरत उमर मदीना की तरफ बढ़ रहे थे और इस पूरे रास्ते में हजरत उमर सिर्फ इजिप्ट के बारे में ही सोचते रहे। और जैसे ही हजरत उमर मदीना पहुंचे, उन्होंने सारे बड़े सहाबा की एक मीटिंग बुलाई और

04:21

Speaker A

आकर इस सिटी के सामने अपने टेंट्स लगाए और जंग के लिए बिल्कुल रेडी हुए जिसे देखकर रोमंस ने भी अपनी पूरी फौज को मुसलमानों के सामने ने खड़ा किया जिसमें बच्चे औरतें बूढ़े सब शामिल थे ताकि यह करने से

04:35

Speaker A

उनसे इजिप्ट के बारे में पूछा कि मुझे बताओ कि हमें क्या करना चाहिए, जिस पर हजरत उस्मान और बाकी सहाबा ने क्लीयरली कहा कि हमें इजिप्ट की तरफ जाने वाली फौज को रोक देना चाहिए। आर्मी चीफ मिनिस्टर सहाबा इन

04:47

Speaker A

बोलना है इस मैसेंजर ने सीधा जाकर सारे रोमंस के सामने कहा कि तुम लोग जानते भी हो हम कौन हैं हमने अभी-अभी तुम्हारे बादशाह हर कल को बुरी तरह हराया है तो अब तुम हमारा क्या बिगाड़ लोगे यह सुनकर वहां

04:59

Speaker A

सब की बातें सुनने के बाद आखिर हजरत उमर ने फैसला किया और अमर बिन आस के नाम एक लेटर भेजा जिसमें हजरत उमर ने अपने आर्मी चीफ को क्लियर ऑर्डर दिया था कि जैसे ही तुम्हें मेरा ये खत मिले अपनी पूरी फौज

05:13

Speaker A

साथ इजिप्ट का कैपिटल फतह करना इंपॉसिबल था इसीलिए अगले सात महीने तक मुसलमान इसी तरह इस सिटी के सामने अपने कैंप्स में बैठे रहे और आखिर आर्मी चीफ अमर बिनास को भी समझ आ गई कि अब वक्त आ चुका है कि

05:26

Speaker A

लेकर वापस आ जाओ। लेकिन अगर तुम लोग पहले ही इजिप्ट के बॉर्डर को क्रॉस कर चुके हो तो फिर अल्लाह का नाम लो और आगे बढ़ो। जैसे ही हजरत उमर का यह मैसेंजर अमर बिन आस तक पहुंचा, मुसलमान पहले ही इजिप्ट

05:39

Speaker A

इजिप्त की तरफ रवाना की और इस फौज का लीडर एक बहुत बड़ा सहाबी जुबैर बिन अवाम को बनाया हजरत उमर जुबैर रज अल्ला ताला अहो की इतनी इज्जत किया करते थे कि उन्होंने अपनी वफात के बाद खलीफा बनने वाले छह

05:51

Speaker A

के बॉर्डर को क्रॉस कर चुके थे। लेकिन यहां पर स्टोरी का एक दूसरा एंगल भी है कि जैसे ही हजरत उमर का मैसेंजर अमर बिन आस तक पहुंचा, मुसलमान इजिप्ट नहीं पहुंचे थे बल्कि इजिप्ट के बॉर्डर से बिल्कुल थोड़ी सी

06:03

Speaker A

बिल्कुल खालिद बिन वलीद के स्टाइल पर हमले का एक नया प्लान बनाया अगले दिन रोमन फौज अपने किले से बाहर निकली और दोनों फौज एक दूसरे के आमने-सामने हुई और जंग शुरू हुई कुछ ही देर के जंग के बाद अचानक मुसलमान

06:16

Speaker A

दूरी पर थे। लेकिन जैसे ही अमर बिन आस ने हजरत उमर के मैसेंजर को देखा, उन्हें अच्छी तरह समझ आ गई कि इस लेटर में क्या लिखा हुआ है। तो उन्होंने फौरन यह लेटर खोला ही नहीं बल्कि पहले उस मैसेंजर को बिठाया, उसे

06:29

Speaker A

खड़ी हो गई ये देखकर अमर बिनस ने दोबारा हमले का हुकम दिया इस तरह मुसलमानों ने रोमंस की फौज को हर तरफ से घेर लिया और फिर इन्हें क्रश कर दिया लेकिन इस सब के बाद भी मुसलमान इस सिटी में दाखिल ना हो

06:41

Speaker A

खिलाया और उसे थोड़ा आराम करने को कहा। और जैसे ही मुसलमानों ने इस बॉर्डर को क्रॉस किया, आर्मी चीफ अमर बिन आस ने खलीफा उमर के लेटर को खोला और कहा कि अब तो बहुत देर हो चुकी, अब हमें आगे

06:52

Speaker A

गेट खोल दी ये देखकर मुसलमानों की पूरी फौज इजिप्ट के कैपिटल में एंटर हुई और इस सिटी को फतह करके यहां के गव गर्नर को ढूंढने लगी बट इट वाज टू लेट गवर्नर पहले इस सिटी को छोड़कर इजिप्ट की सबसे पावरफुल

07:06

Speaker A

बढ़ना ही होगा। इसी के साथ अमर बिन आस मुसलमानों की पूरी फौज को लेकर बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगे। यह सारे इलाके फतह करते हुए फाइनली इजिप्ट के कैपिटल के सामने जंग के लिए रेडी खड़े हो गए जिसे आज कायरो कहा जाता

07:19

Speaker A

इजिप्ट को हजरत उमर के सामने सरेंडर करने के लिए तैयार हूं अमर बिनास ने गवर्नर की इस रिक्वेस्ट को बिल्कुल रिजेक्ट कर दिया क्योंकि उन्हें पता था कि मुसलमानों की जंग इस गवर्नर से नहीं बल्कि रोमन एंपायर के बादशाह से आर्मी चीफ अमर बिनास ने

07:33

Speaker A

है। और यह कोई आम सिटी नहीं थी बल्कि उस जमाने की दुनिया की सबसे पावरफुल सिटीज में से थी जिस पर पिछले 600 साल से रोमन एंपायर का राज था और कोई भी उनसे यह सिटी नहीं छीन सका था। मुसलमानों की फौज ने सीधा

07:46

Speaker A

मुझसे पूछे बगैर पूरे इजिप्ट को सरेंडर कर दिया जिसके बाद उसने सारे रोमन फौज को मैसेज भेजा कि गवर्नर की बातों को छोड़ो और मुसलमानों के साथ आखरी जंग के लिए तैयार हो जाओ मुसलमानों के आर्मी चीफ अमर

07:59

Speaker A

आकर इस सिटी के सामने अपने टेंट्स लगाए और जंग के लिए बिल्कुल रेडी हुए, जिसे देखकर रोमंस ने भी अपनी पूरी फौज को मुसलमानों के सामने खड़ा किया जिसमें बच्चे, औरतें, बूढ़े सब शामिल थे ताकि यह करने से

08:10

Speaker A

है कि जब मुसलमान अपना सामान पैक कर रहे थे और अपने टेंट्स को बांध रहे थे तो अमर बिन आस रज अल्ला अन्हो भी अपना टेंट बांधने के लिए गए तो वहां उन्होंने देखा कि उनके टेंट के अंदर ही एक कबूतर ने अपना

08:22

Speaker A

मुसलमानों के दिलों में उनका खौफ बैठ जाए। बट वो किसको डरा रहे थे? मुसलमानों को? आई डोंट थिंक सो। अमर बिन आस ने उनकी इतनी बड़ी फौज देखकर अपना एक मैसेंजर उनके पास भेजा और उसे अच्छी तरह समझाया कि तुमने क्या

08:34

Speaker A

इस टेंट को एक निशानी के लिए यहीं पर रहने दिया और इसी टेंट के आसपास आबाद होने लगे नाउ अरबी में टेंट को फस्ता कहा जाता है और आगे जाकर इसी कबूतर के टेंट की वजह से इजिप्ट के कैपिटल का नाम ही फुस्त पड़ा जो

08:49

Speaker A

बोलना है। इस मैसेंजर ने सीधा जाकर सारे रोमंस के सामने कहा कि तुम लोग जानते भी हो हम कौन हैं। हमने अभी-अभी तुम्हारे बादशाह हर कल को बुरी तरह हराया है, तो अब तुम हमारा क्या बिगाड़ लोगे? यह सुनकर वहां

09:00

Speaker A

अलेक्जेंड्रिया एलेक्जेंडर द ग्रेट के नाम पर बनी एक बहुत बड़ी सिटी थी और हजरत उमर ने अपनी पूरी खिलाफत में इससे बड़ी सिटी पर कभी हमला नहीं किया था जो डमक और मदन जैसी सिटी से भी बहुत बड़ी थी मुसलमानों

09:15

Speaker A

पर सब हैरान हो गए, लेकिन वहां के लीडर सायरस ने कहा कि बात तो सही है। इसी के साथ अमर बिन आस ने फुल ताकत के साथ इजिप्ट के कैपिटल पर हमला कर दिया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि सिर्फ 4000 की फौज के

09:30

Speaker A

ने एक बहुत बड़ी फौज मुसलमानों के साथ जंग के लिए तैयार की अब फाइनली यह लग रहा था कि खलीफा उमर कभी भी इजिप्ट को फतह नहीं कर पाएंगे और मुसलमानों की फौज यहां से मायूस होकर वापस चली जाएगी लेकिन अचानक

09:43

Speaker A

साथ इजिप्ट का कैपिटल फतह करना इंपॉसिबल था। इसीलिए अगले सात महीने तक मुसलमान इसी तरह इस सिटी के सामने अपने कैंप्स में बैठे रहे और आखिर आर्मी चीफ अमर बिन आस को भी समझ आ गई कि अब वक्त आ चुका है कि

09:59

Speaker A

न बेटे ने आकर अपने बाप का तखत संभाला इस यंग बादशाह से रोमन एंपायर की बहुत उम्मीदें थी कि यह जरूर मुसलमानों से हमारी खोई हुई ताकत को छीनेगा लेकिन सिर्फ कुछ ही दिन तख्त पर रहने के बाद इस बादशाह

10:13

Speaker A

मदीना में खलीफा उमर से मदद मांगी जाए। हजरत उमर को इस बात का पहले ही पता था कि अमर बिन आस इजिप्ट को बहुत ही लाइटली ले रहे हैं और उसे जरूर ज्यादा फौज की जरूरत पड़ेगी। तो उन्होंने फौरन 12000 की फौज

10:26

Speaker A

वॉर स्टार्ट हुई जिसके बाद वो फौज जिसे हेरेकलियस नेने मुसलमानों से लड़ने के लिए भेजा था उसे मजबूरन वापस जाना पड़ा यह सिविल वॉर इतनी बड़ी कि बस सी एक दूसरे को मारने लगे लेकिन जब हालात थोड़े कंट्रोल

10:39

Speaker A

इजिप्ट की तरफ रवाना की और इस फौज का लीडर एक बहुत बड़ा सहाबी जुबैर बिन अवाम को बनाया। हजरत उमर जुबैर रज अल्ला ताला अन्हो की इतनी इज्जत किया करते थे कि उन्होंने अपनी वफात के बाद खलीफा बनने वाले छह

10:55

Speaker A

उसके साथ क्या होगा खलीफा उमर रज अल्लाह ताला अन्हो मदीना से रोमन एंपायर की इस सिविल वॉर को बहुत गौर से देख रहे थे और उन्हें समझ आ चुकी थी कि इजिप्ट फतह करने का यही बेस्ट टाइम है तो उन्होंने फौरन

11:07

Speaker A

लोगों में से एक जुबैर बिन अवाम को भी नॉमिनेट किया था, जिसे फिर हम बाद में एक्सप्लेन करेंगे। तो सब्सक्राइब तो। अब यह नई फौज भी आकर अमर बिन आस के साथ इजिप्ट में मिल गई और इन दोनों फौजों ने मिलकर

11:20

Speaker A

लेटर खोला इसमें हजरत उमर ने क्लियर ऑर्डर दिया था कि आम्र फौरन मुसलमानों की पूरी फौज को एक जगह जमा करके मेरा यह लेटर उन सबके सामने पढ़कर सुनाओ आर्मी चीफ अमर बिनस ने बिल्कुल ऐसा ही किया और मुसलमानों

11:32

Speaker A

बिल्कुल खालिद बिन वलीद के स्टाइल पर हमले का एक नया प्लान बनाया। अगले दिन रोमन फौज अपने किले से बाहर निकली और दोनों फौज एक दूसरे के आमने-सामने हुई और जंग शुरू हुई। कुछ ही देर के जंग के बाद अचानक मुसलमान

11:46

Speaker A

खतरा है कि तुम रसूल अल्लाह और कुरान के बताए हुए तरीकों को भूल चुके हो और बिल्कुल हमारे दुश्मनों की तरह दुनिया की मोहब्बत में खो चुके हो याद रखना अल्लाह ऐसी कौम की मदद कभी भी नहीं करता

12:00

Speaker A

जंग से पीछे हटने लगे और आहिस्ता आहिस्ता जंग के मैदान से इतना पीछे आ गए कि ऐसे लगने लगा कि अब फाइनली मुसलमान यह जंग हार जाएंगे। लेकिन एग्जैक्ट इसी टाइम मुसलमानों की एक दूसरी फौज आकर रोमंस के फौज के पीछे

12:13

Speaker A

लड़ने के लिए तैयार हो जाओ ताकि मुसलमान इजिप्ट को हमेशा हमेशा के लिए इस्लाम के कंट्रोल में ला सके हजरत उमर के इस लेटर को पढ़ने के बाद मुसलमानों की फौज का जज्बा इतना बड़ा कि उन्होंने अपनी तलवारें उठाई और अलेक्जेंड्रिया की

12:29

Speaker A

खड़ी हो गई। ये देखकर अमर बिन आस ने दोबारा हमले का हुक्म दिया। इस तरह मुसलमानों ने रोमंस की फौज को हर तरफ से घेर लिया और फिर इन्हें क्रश कर दिया। लेकिन इस सब के बाद भी मुसलमान इस सिटी में दाखिल ना हो

12:42

Speaker A

सब अपनी आंखों से देखा तो उसे समझ आ गई कि एक 11 साल का बच्चा खलीफा उमर का मुकाबला कभी भी नहीं कर सकता तो अब और लड़ने का कोई फायदा नहीं है इसी के साथ उसने अपना कलम उठाया और पूरे इजिप्ट को हजरत उमर की

12:55

Speaker A

सके। आखिर एक दिन जुबैर बिन अवाम रजि अल्ला ताला अन्हो ने तंग आकर एक बहुत ही बोल्ड डिसीजन लिया और अपने कुछ ही साथियों के साथ रात के अंधेरे में इस सिटी के अंदर दाखिल हुए और सीधा जाकर मुसलमानों के लिए

13:13

Speaker A

मैसेंजर फुल स्पीड मदीना पहुंचा और हजरत उमर के घर के बजाय मस्जिदए नबवी की तरफ गया हजरत उमर को जब इसका पता चला तो वो सीधा मस्जिद नबवी की तरफ गए और वहां पर इस मैसेंजर ने हजरत उमर को इजिप्त के फतह के

13:25

Speaker A

गेट खोल दी। ये देखकर मुसलमानों की पूरी फौज इजिप्ट के कैपिटल में एंटर हुई और इस सिटी को फतह करके यहां के गवर्नर को ढूंढने लगी। बट इट वाज टू लेट। गवर्नर पहले इस सिटी को छोड़कर इजिप्ट की सबसे पावरफुल

13:37

Speaker A

बुलाकर पूछा कि तुम मेरे घर की बजाय मस्जिद नबवी की तरफ क्यों गए उस मैसेंजर ने कहा कि मुझे लगा आप सो रहे होंगे तो हजरत उमर ने उसे जवाब दिया कि अगर खलीफा दिन को सोएगा तो यह इतनी बड़ी खिलाफत कौन

13:49

Speaker A

सिटी अलेक्जेंड्रिया की तरफ भाग चुका था। नाउ गवर्नर भाग तो गया था, लेकिन उसके दिल में मुसलमानों का इतना खौफ बैठ चुका था कि उसने यहां से भागते ही मुसलमानों की तरफ एक लेटर भेजा कि अब और बस है, मैं पूरे

14:04

Speaker A

इजाजत मांगी कि अब वक्त आ चुका है कि मुसलमान अपनी पहली नेवी बनाए लेकिन हजरत उमर ने ऐसा करने से इंकार कर दिया क्योंकि अगर देखा जाए अरब हमेशा डेजर्ट में ही रहे थे और उन्हें समुंदरों और कश्तियों का कोई

14:17

Speaker A

इजिप्ट को हजरत उमर के सामने सरेंडर करने के लिए तैयार हूं। अमर बिन आस ने गवर्नर की इस रिक्वेस्ट को बिल्कुल रिजेक्ट कर दिया क्योंकि उन्हें पता था कि मुसलमानों की जंग इस गवर्नर से नहीं बल्कि रोमन एंपायर के बादशाह से है। आर्मी चीफ अमर बिन आस ने

14:29

Speaker A

आइडिया छोड़कर अफ्रीका की तरफ बढ़े और बहुत तेजी से लिबिया थीसिया बल्कि अल्जीरिया तक पहुंचे आखिर हजरत उमर ने लेटर भेजा कि अब और बस करो हमारी खिलाफत बहुत ज्यादा फैल चुकी है तो इससे ज्यादा आगे जाने की इजाजत नहीं है जिसके बाद अमर

14:44

Speaker A

इजिप्ट के सरेंडर की यह ऑफर एक्सेप्ट तो कर ली, लेकिन जब रोमन एंपायर के बादशाह हरा किलिस को अपने गवर्नर के इस सरेंडर का पता चला तो उसे गवर्नर की इस बुजनी पर बहुत गुस्सा आया कि इसकी औकात क्या है? इसने

14:56

Speaker A

जान ले कि हर साल दरियाई नील का पानी बिल्कुल सूख जाता है और उसे दोबारा बहाने का रास्ता सिर्फ हमें पता है हर साल जब भी इस दरिया का पानी सूखता है हम इस दरिया में एक जवान कंवारी लड़की को फेंक देते

15:10

Speaker A

मुझसे पूछे बगैर पूरे इजिप्ट को सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसने सारे रोमन फौज को मैसेज भेजा कि गवर्नर की बातों को छोड़ो और मुसलमानों के साथ आखरी जंग के लिए तैयार हो जाओ। मुसलमानों के आर्मी चीफ अमर

15:24

Speaker A

हुआ और दरियाई नील का पानी ऑलमोस्ट सूख गया जिससे मुसलमान थोड़ा घबरा ने लगे कि यह तो वाकई दरिया बिल्कुल सूख रहा है और आखिर दरिया का पानी इतना कम हुआ कि कुछ लोग यह तक सोचने लगे कि क्या हमें भी इस

15:37

Speaker A

बिन आस को भी समझ आ गई कि अब रोमन एंपायर का बादशाह आखिरी दम तक लड़ने के लिए तैयार है। तो उन्होंने भी अपनी आर्मी को अलेक्जेंड्रिया की तरफ जाने का हुक्म दिया। अब यहां पर एक बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी

15:49

Speaker A

क्या है हम तो इस दुनिया में आए इसलिए कि दुनिया के इन पुराने सारे रिवाजों को तोड़ दे तो फौरन हजरत उमर ने एक चिट्ठी भेजी और कहा कि इस चिट्ठी को दरिया नील में डाला जाए जिसमें लिखा था ऐ नील के पानी अगर तू

16:02

Speaker A

है कि जब मुसलमान अपना सामान पैक कर रहे थे और अपने टेंट्स को बांध रहे थे, तो अमर बिन आस रज अल्ला अन्हो भी अपना टेंट बांधने के लिए गए। तो वहां उन्होंने देखा कि उनके टेंट के अंदर ही एक कबूतर ने अपना

16:15

Speaker A

अर्से बाद दरियाई नील का पानी पहले से भी ज्यादा बहने लगा इस तरह हजरत उमर सिर्फ एक बादशाह नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक नया निजाम रख रहे थे और उनके दौर में इंसाफ का एक ऐसा निजाम था कि एक दिन आर्मी

16:29

Speaker A

घोंसला बनाया हुआ है और साथ उस कबूतर के बच्चे भी थे। तो अब अमर बिन आस ने इस कबूतर के घर को बचाने के लिए इस टेंट को यहीं पर रह दिया। यह टेंट बहुत ही इंपॉर्टेंट है क्योंकि आने वाले वक्त में हर मुसलमान ने

16:41

Speaker A

कुछ नहीं कह सका लेकिन उसने हमेशा से हजरत उमर के इंसाफ के बारे में बहुत सुना था तो वो सीधा इजिप्त से मदीना की तरफ गया और जाकर हजरत उमर के सामने अपने ऊपर हुए जुल्म की शिकायत की ये सुनकर हजरत उमर को

16:54

Speaker A

इस टेंट को एक निशानी के लिए यहीं पर रहने दिया और इसी टेंट के आसपास आबाद होने लगे। नाउ अरबी में टेंट को फस्ता कहा जाता है और आगे जाकर इसी कबूतर के टेंट की वजह से इजिप्ट के कैपिटल का नाम ही फुस्त पड़ा जो

17:07

Speaker A

बेटा मदीना पहुंचे तो उन्होंने देखा कि हजरत उमर के साथ सब बैठे हुए हैं और साथ ही वो इजिप्शियन भी खलीफा उमर ने उन सब के सामने उस इजिप्शियन को अपना डंडा दिया और कहा कि आर्मी चीफ अमर बिन आस के बेटे को

17:20

Speaker A

आज तक इजिप्ट का कैपिटल है और उसे कायरो कहा जाता है। लेट्स कम बैक टू द स्टोरी। रोमंस के कुछ ही अर्से बाद मुसलमान भी इस सिटी के प...

17:34

Speaker A

उस इजिप्शियन ने अमर बिनास को तो नहीं मारा लेकिन हजरत उमर ने अमर से कहा कि तुम कब से लोगों को गुलाम बनाने लगे जब उनकी मांओं ने उन्हें आजाद पैदा किया है इसी जबरदस्त जस्टिस की वजह से अब हजरत उमर

17:46

Speaker A

दुनिया के सबसे ताकतवर लीडर बन चुके थे लेकिन इजिप्ट फतह करने के फौरन बाद पर्जन एंपायर का बादशाह एक बड़ी फौज जमा करके मुसलमानों से बदला लेने के लिए बिल्कुल रेडी था सब्सक्राइब h

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