**Trump vs NATO: Greenland Tariffs Explained | End of NATO ? America’s Double Game | Shubhankar Mishra — Transcript & SRT | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/trump-vs-nato-greenland-tariffs-explained-end-of-nat-transcript/

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## Questions about this video

वीडियो के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्ज़े को अपनी सुरक्षा के लिए क्यों ज़रूरी बताया?

डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्ज़े को अपनी सुरक्षा के लिए ज़रूरी बताया क्योंकि उनका मानना है कि चीन और रूस वहाँ आ सकते हैं। वे इसे एक रणनीति और डील बताते हैं, जबकि रूस के यूक्रेन पर नियंत्रण को तानाशाही कहते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने किन देशों पर टैरिफ की तलवार लगाई है और क्यों?

वीडियो में बताया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के आठ जिगरी दोस्तों की गर्दन पर टैरिफ की तलवार लगाई है। इसका कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है, लेकिन इसे उनकी 'दादागिरी' और 'रूल ऑफ जंगल' का हिस्सा बताया गया है।

ग्रीनलैंड में बर्फ के नीचे ऐसा क्या है जिसके लिए डोनाल्ड ट्रंप पागल हो रहे हैं?

वीडियो के अनुसार, ग्रीनलैंड में बर्फ के नीचे कुछ ऐसा है जिसके लिए डोनाल्ड ट्रंप पागल हो रहे हैं। यह एक सीक्रेट शहर से भी जुड़ा हो सकता है जिसे दशकों तक दुनिया से छिपाया गया था, हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

साडा कुत्ता कुत्ता, तोडा कुत्ता टॉमी?

00:03

Speaker A

वेल आज की जियोपॉलिटिक्स में अमेरिका यही खेल बड़ी बेशर्मी से खेल रहा है।

00:08

Speaker A

और यह बिल्कुल फनी नहीं है।

00:10

Speaker A

यह बहुत-बहुत डरावना है।

00:15

Speaker A

मतलब आप क्रोनोलॉजी को समझिए कि जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ये कहते हैं कि यूक्रेन पर हमारा नियंत्रण हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी है।

00:23

Speaker A

क्योंकि नाटो हमारी दहलीज पर आया।

00:25

Speaker A

तो अमेरिका और पूरा पश्चिम चिल्लाता है कि यह तानाशाही है, रूस ने तो आक्रमण कर दिया, लोकतंत्र की हत्या हो रही है।

00:35

Speaker A

लेकिन जब वही अमेरिका, वही डोनाल्ड ट्रंप ये कहते हैं कि ग्रीनलैंड पर हमारा कब्जा हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि ऐसा हो सकता है कि चीन और रशिया वहां आ जाए।

00:46

Speaker A

तो अमेरिका उसे स्ट्रेटेजी बता रहा है, डील बता रहा है।

00:54

Speaker A

मतलब भाई आप करें तो मास्टर स्ट्रोक और कोई और ये करे तो वॉर क्रिमिनल।

01:00

Speaker A

मैंने कहा डोनाल्ड ट्रंप साहब ये दोगलापन थी आप लाते कहां से हैं?

01:04

Speaker A

वैसे ये सिर्फ दोगलापन नहीं है, ये शुद्ध दादागिरी भी है।

01:08

Speaker A

ये रूल ऑफ लॉ नहीं है, ये रूल ऑफ जंगल है।

01:12

Speaker A

जहां पर जो कमजोर है उसे ताकतवर खा लेता है।

01:15

Speaker A

ये वैसा ही है जैसा पुलिस वाला खुद चोर बन जाए और कहे मैं चोरी इसलिए कर रहा हूं।

01:20

Speaker A

ताकि कोई और चोरी ना कर पाए।

01:23

Speaker A

और इसीलिए आज इस वीडियो के जरिए हम डिकोड करने वाले हैं डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी की पूरी इनसाइड स्टोरी को।

01:30

Speaker A

हम ये समझेंगे कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका ने आखिर क्यों आठ जिगरी दोस्तों की गर्दन पर टैरिफ की तलवार लगा दी है?

01:36

Speaker A

हम ये जानेंगे कि ग्रीनलैंड में बर्फ के नीचे क्या ऐसा है जिसके लिए डोनाल्ड ट्रंप पागल हो रहे हैं?

01:42

Speaker A

उस सीक्रेट शहर का राज जानेंगे जिसे दशकों तक दुनिया से छिपाया गया।

01:48

Speaker A

हम आपको इस वीडियो में बताएंगे कैसे 75 साल पुराना नाटो गठबंधन जो सोवियत संघ भी नहीं तोड़ पाया।

01:54

Speaker A

वो आज अपने घर की लड़ाई में बिखरने को तैयार है।

02:00

Speaker A

और साथ में सबसे जरूरी बात इस वीडियो के अंत में हम यह भी समझेंगे।

02:06

Speaker A

कि ग्रीनलैंड की लड़ाई जो है वो भारत के अरुणाचल प्रदेश और चीन के लिए खतरे की घंटी कैसे है?

02:13

Speaker A

इससे पहले इस कहानी की हम शुरुआत करें हमारी आपसे गुजारिश है कि आप हमारे व्हाट्सएप चैनल से जरूर जुड़िएगा।

02:19

Speaker A

आप जुड़ते हैं तो ये वीडियोस आप तक अपने आप पहुंच जाते हैं।

02:24

Speaker A

लिंक हमने डिस्क्रिप्शन में कमेंट सेक्शन में दे रखा है।

02:28

Speaker A

अब कहानी शुरू करते हैं।

02:30

Speaker A

ग्रीनलैंड की कहानी जो है वो सिर्फ जमीन के टुकड़े की नहीं है।

02:36

Speaker A

वो दुनिया के बदलते नियमों की है।

02:40

Speaker A

इसलिए कुर्सी की पेटी आपको बांधनी पड़ेगी क्योंकि आज का सफर बहुत गहरा होने वाला है।

02:46

Speaker A

नया साल शुरू हुआ है, अभी 20 दिन भी नहीं हुए हैं।

02:52

Speaker A

लेकिन ऐसा लग रहा है कि सारी दुनिया जो है वो बारूद के ढेर पर बैठी है।

02:56

Speaker A

ईरान में कब युद्ध हो जाए वो पता नहीं।

03:00

Speaker A

वेनेजुएला में जो हुआ वो सबने देख लिया।

03:03

Speaker A

लेकिन 17 जनवरी 2026 जब यूरोप में लोग सो रहे थे तब डोनाल्ड ट्रंप ने अपनों को भी झटका दे दिया।

03:11

Speaker A

डोनाल्ड ट्रंप ने एक फरमान जारी किया।

03:15

Speaker A

जिससे वाशिंगटन से लेकर ब्रुसेल्स तक हड़कंप मच गया।

03:19

Speaker A

डोनाल्ड ट्रंप लिखते हैं कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड ये सभी देश जो ग्रीनलैंड पहुंचे हैं पता नहीं किस इरादे से ये खतरनाक स्थिति है।

03:33

Speaker A

इसलिए जब तक ग्रीनलैंड की पूर्ण और कुल खरीद के लिए डील नहीं हो जाती तब तक 1 फरवरी से इन पर 10% टैरिफ और 1 जून से 25% टैरिफ लगाता।

03:43

Speaker A

डोनाल्ड ट्रंप नाटो के देशों पर टैरिफ लगा रहे थे।

03:48

Speaker A

वैसे ही जैसे भारत पर लगाया था जब भारत ने उनकी बात नहीं मानी थी।

03:54

Speaker A

अब डोनाल्ड ट्रंप का ये जो ऐलान था ये अचानक नहीं था।

04:00

Speaker A

इसके पीछे ईगो फैक्टर था।

04:03

Speaker A

क्योंकि इन आठ देशों ने डोनाल्ड ट्रंप के ईगो को डेंट कर दिया था।

04:10

Speaker A

वो ठोकर मारी थी जो अंदर चुभ रही थी।

04:13

Speaker A

असल में अमेरिका ने जब ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जाने की शुरुआती धमकियां दी।

04:20

Speaker A

तो यही वो आठ यूरोपीय देश थे जिन्होंने डेनमार्क के साथ कहा कि हम खड़े रहेंगे, मजबूती से रहेंगे।

04:27

Speaker A

और ये मजबूती दिखाने के लिए नाटो के उसूलों का सम्मान करते हुए इन आठ देशों ने अपने सैनिक जो हैं वो ग्रीनलैंड भेज दिए।

04:35

Speaker A

इनडायरेक्टली ये अमेरिका को एक बड़ा संदेश था कि ग्रीनलैंड अकेला नहीं है।

04:40

Speaker A

हाथ मत लगाना।

04:43

Speaker A

लेकिन ट्रंप जो अपने ईगो के लिए जाने जाते हैं ना खाता ना बही जो हम सोच रहे हैं बस वही सही।

04:50

Speaker A

उन्होंने इसे अपनी शान के खिलाफ मान लिया।

04:54

Speaker A

उन्होंने कहा अच्छा तुम मेरे खिलाफ सेना भेज रहे हो?

04:58

Speaker A

रुको।

05:00

Speaker A

मैं तुम्हारी इकॉनमी को तोड़ता हूं।

05:04

Speaker A

और सजा मुकर्रर कर दी गई।

05:06

Speaker A

1 फरवरी से इन सभी आठ देशों के सामानों पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया गया।

05:14

Speaker A

धमकी दी गई कि अगर 1 जून तक ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के मन मुताबिक समझौता नहीं हुआ।

05:23

Speaker A

यानी ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं सौंपा गया तो ये टैरिफ बढ़कर 25% कर दिया जाएगा।

05:30

Speaker A

और ये 25% किसी दुश्मन देश पर नहीं लगाया गया है।

05:35

Speaker A

ये उन दोस्तों पर लगाया गया है जो पिछले 75 सालों से हर युद्ध में अमेरिका के कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे थे।

05:41

Speaker A

अगर इसे और आसान भाषा में समझाना हो तो ये वैसा है जैसा आपका अमीर पड़ोसी अपनी एसयूवी आपके घर के बगीचे में पार कर दे।

05:49

Speaker A

और जब आप कहेंगे कि भाई साहब ये गलत तरीका है।

05:54

Speaker A

तो वो कहे सुनो अगर गाड़ी पार्क नहीं करने दोगे ना।

05:58

Speaker A

तो मैं तुम्हारे घर की बिजली पानी कनेक्शन काट दूंगा।

06:03

Speaker A

डोनाल्ड ट्रंप वही काम कर रहे हैं।

06:06

Speaker A

आप इसे हफ्ता वसूली का ग्लोबल वर्जन कह सकते हैं।

06:10

Speaker A

हालांकि ग्रीनलैंड की लड़ाई अब सिर्फ नेताओं के बंद कमरों की लड़ाई नहीं रह गई है।

06:16

Speaker A

इसका असर सड़क पर भी दिख रहा है।

06:21

Speaker A

जब हम और आप ये बात कर रहे हैं तो ग्रीनलैंड की राजधानी में।

06:28

Speaker A

डेनमार्क की राजधानी में।

06:32

Speaker A

सर्द सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

06:35

Speaker A

आपको जानकर हैरानी होगी कि कड़ाके की ठंड में भी हजारों लोग वहां सड़कों पर उतरे हैं।

06:44

Speaker A

और वो ग्रीनलैंड का लाल सफेद झंडा लेकर चिल्ला रहे हैं कि सुनो डोनाल्ड ट्रंप।

06:51

Speaker A

ग्रीनलैंड इज नॉट फॉर सेल।

06:54

Speaker A

ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।

06:57

Speaker A

उधर 20000 से अधिक लोग ऐसे भी हैं जो अमेरिकी दूतावास की तरफ मार्च कर रहे हैं।

07:04

Speaker A

वो पोस्टर लगा रहे हैं कि हैंड्स ऑफ ग्रीनलैंड।

07:08

Speaker A

ये सिर्फ विरोध नहीं है, ये एक छोटे से देश की अपने अस्तित्व बचाने की चीख है।

07:15

Speaker A

हालांकि इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है।

07:20

Speaker A

कई जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का ये मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ये ग्रीनलैंड बम जानबूझकर फोड़ रहे हैं।

07:29

Speaker A

ताकि अमेरिका में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और उनकी जो कुख्यात एप्सटीन फाइल्स आई थी।

07:36

Speaker A

जिसमें उनके नंग धड़ंग तस्वीरें, वीडियोस और उनके कारनामे थे उससे लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।

07:44

Speaker A

अमेरिका की सड़कों पर भी लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

07:49

Speaker A

तख्तियां ले खड़े हैं जिन पर लिखा है कि फोकस ऑन एप्सटीन फाइल्स नॉट ऑन ग्रीनलैंड।

07:56

Speaker A

दरअसल ट्रंप की सरकार जो है घरेलू मोर्चों पर घिरी पड़ी है।

08:00

Speaker A

जब घर में आग लगी हो तो पड़ोसी के घर में पत्थर फेंकना पुरानी पॉलिटिक्स का हिस्सा है।

08:06

Speaker A

अपनी सरकार के खिलाफ हो रहे स्कैंडल को दबाने के लिए जनता को डिस्ट्रैक्ट करने के लिए ट्रंप को एक नया वेनेजुएला चाहिए था।

08:14

Speaker A

एक नया दुश्मन।

08:16

Speaker A

और ग्रीनलैंड इसी का बकरा बना है।

08:19

Speaker A

ट्रंप प्रशासन सिर्फ डिस्ट्रैक्शन नहीं मानता वो इसे एक फैंसी नाम दे रहा है।

08:25

Speaker A

गोल्डन डोम प्रोजेक्ट।

08:27

Speaker A

ये 175 बिलियन डॉलर का एक प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस सिस्टम है।

08:32

Speaker A

व्हाइट हाउस का ये तर्क है कि अमेरिका को चीन और रूस की हाइपरसोनिक मिसाइल से बचाने के लिए ग्रीनलैंड पर उनका पूरा नियंत्रण जरूरी है।

08:40

Speaker A

उनका ये कहना है कि हमें वहां रडार और इंटरसेप्टर्स लगाने हैं।

08:45

Speaker A

लेकिन ये तर्क पूरी तरह खोखला है क्योंकि सच ये है।

08:51

Speaker A

अमेरिका के पास 1951 के समझौते के तहत वहां पहले से ही पिट्टू फिक स्पेस बेस है।

08:59

Speaker A

अमेरिका के पास पहले से ही वो पूरा मिलिट्री एक्सेस है।

09:05

Speaker A

तो सवाल ये है कि किस बार कब्जा करने की जिद क्यों?

09:08

Speaker A

और क्या 75 साल पुराना भाईचारा जो नाटो का था वो जिद की भेंट चढ़ेगा?

09:17

Speaker A

देखिए सबसे बड़ा सवाल जो आज पूरी दुनिया को डरा रहा है वो नाटो को लेकर है।

09:22

Speaker A

कि क्या नाटो जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन है वो टूटने की कगार पर है?

09:30

Speaker A

इस खतरे को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा और ये समझना पड़ेगा।

09:37

Speaker A

कि नाटो है क्या और बनाया क्यों गया था?

09:41

Speaker A

तो कहानी शुरू होती है 1945 में।

09:45

Speaker A

दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो चुका था, हिटलर हार चुका था।

09:50

Speaker A

लेकिन यूरोप पूरी तरह बर्बाद हो गया था।

09:53

Speaker A

शहर के शहर मलबे में तब्दील हो गए थे।

09:57

Speaker A

उस समय दुनिया में सिर्फ दो दादा बचे थे।

10:02

Speaker A

एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ सोवियत संघ।

10:07

Speaker A

सोवियत संघ की लाल सेना ने आधे यूरोप पर कब्जा कर रखा था।

10:12

Speaker A

पश्चिमी देशों को डर था कि आज सोवियत संघ रुका है कल वो अपनी टैंक लेकर हमारे घरों में घुस जाएगा।

10:20

Speaker A

इस डर से बचने के लिए यूरोप के देश अमेरिका के पास गए।

10:25

Speaker A

कहा भैया बचा लो हमें।

10:28

Speaker A

हम अकेले सोवियत संघ से नहीं लड़ सकते।

10:32

Speaker A

तब 4 अप्रैल साल 1949 को वाशिंगटन डीसी में एक संधि हुई।

10:40

Speaker A

और 12 देशों ने मिलकर कसम खाई कि आज से हम एक परिवार हैं।

10:45

Speaker A

नाटो का एक ही नियम था जो उसकी आत्मा है।

10:50

Speaker A

आर्टिकल पांच।

10:51

Speaker A

ये आर्टिकल कहता है कि अगर हमारे किसी एक सदस्य देश पर किसी मुल्क ने भी हमला किया तो ये हमला हम सभी मुल्कों पर माना जाएगा।

11:01

Speaker A

और हम सब मिलकर उस दुश्मन को मारेंगे।

11:06

Speaker A

इसी डर की वजह से पिछले 75 सालों में सोवियत संघ या रूस ने कभी किसी नाटो देश पर सीधे हमला करने की हिम्मत नहीं की।

11:14

Speaker A

लेकिन आज 2026 में किस्मत का खेल देखिए।

11:19

Speaker A

जिस अमेरिका के लिए यूरोप ने खून बहाया था आज वही अमेरिका आर्टिकल पांच की धज्जियां उड़ा रहा है।

11:28

Speaker A

आज धमकाने वाला कोई बाहरी रूस या चीन नहीं है बल्कि खुद वही अमेरिका है जिसने मिलकर नाटो बनाया था।

11:38

Speaker A

अब आप कल्पना कीजिए।

11:40

Speaker A

ग्रीनलैंड जो है डेनमार्क का हिस्सा है।

11:44

Speaker A

और डेनमार्क नाटो का सदस्य है।

11:47

Speaker A

अगर अमेरिका जो नाटो का हेड है वो अपनी सेना भेजकर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करता है।

11:54

Speaker A

तो बाकी के देशों को क्या करना चाहिए?

11:56

Speaker A

नाटो के नियम के मुताबिक ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी को डेनमार्क की मदद करनी चाहिए।

12:02

Speaker A

और अमेरिका के खिलाफ लड़ना चाहिए।

12:05

Speaker A

लेकिन क्वेश्चन है कि क्या ये मुमकिन है?

12:08

Speaker A

क्या फ्रांस और ब्रिटेन अमेरिका पर परमाणु बम गिराएंगे?

12:11

Speaker A

जवाब है नहीं।

12:13

Speaker A

और यही वो विरोधाभास है जहां से नाटो टूट रहा है।

12:19

Speaker A

क्योंकि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सुरक्षा की गारंटी का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

12:25

Speaker A

यूरोपियन यूनियन ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई।

12:29

Speaker A

पता लगा कि खतरनाक स्थिति है।

12:32

Speaker A

फ्रांस के राष्ट्रपति कह रहे हैं कि हम झुकेंगे नहीं।

12:36

Speaker A

लेकिन सच्चाई ये है कि जिस टेबल पर बैठकर वो रूस से लड़ने की रणनीति बनाते थे आज उसी टेबल पर एक दूसरे का गला काटने को तैयार है।

12:46

Speaker A

ये नाटो के भीतर सिविल वॉर जैसा है।

12:50

Speaker A

और ऐसा नहीं कि ये सारी बातें सिर्फ हवा में हो रही हैं।

12:54

Speaker A

अमेरिका भी पूरी तैयारी में है।

12:57

Speaker A

12 जनवरी के आसपास फ्लोरिडा के रिपब्लिकन कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने अमेरिकी संसद में एक खतरनाक बिल पेश किया।

13:07

Speaker A

जिसका नाम है ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट।

13:11

Speaker A

ये बिल कोई मजाक नहीं।

13:13

Speaker A

ये बिल राष्ट्रपति ट्रंप को व्हाट एवर स्टेप नेसेसरी यानी जो भी जरूरी कदम हो वो उठाने की असीमित ताकत देता है चाहे वो नेगोशिएशन हो।

13:24

Speaker A

आर्थिक नाकेबंदी हो या फिर मिलिट्री एक्शन।

13:28

Speaker A

यानी बंदूक लोड हो चुकी है, कानून बन चुका है।

13:33

Speaker A

बस ट्रंप का ट्रिगर दबाना बाकी है।

13:37

Speaker A

अब एक सवाल आपके जहन में आ सकता है कि ग्रीनलैंड क्यों?

13:43

Speaker A

क्या सच में अमेरिका को वहां रूस और चाइना की मिसाइलों का डर है?

13:49

Speaker A

जवाब है नहीं।

13:51

Speaker A

ये सिर्फ दिखावे का है।

13:53

Speaker A

जवाब बर्फ के नीचे छिपा है।

13:56

Speaker A

अरबों खरबों डॉलर का खजाना।

14:00

Speaker A

ग्रीनलैंड का 80% हिस्सा बर्फ से ढका है।

14:04

Speaker A

लेकिन ग्लोबल वार्मिंग ने इस बर्फ को पिघलाना शुरू कर दिया है।

14:09

Speaker A

और पिघलती बर्फ के नीचे रेयर अर्थ मिनरल्स का भंडार है।

14:14

Speaker A

आज की दुनिया तेल पर नहीं चिप्स और बैटरियों पर चलती है।

14:19

Speaker A

आपका आईफोन हो, टेस्ला कार हो या फिर एफ 35 फाइटर जेट।

14:26

Speaker A

सबको चलने के लिए ये मिनरल्स चाहिए।

14:29

Speaker A

फिलहाल इन पर चीन का राज है।

14:32

Speaker A

अमेरिका जानता है कि भविष्य का तेल यही मिनरल है।

14:37

Speaker A

और ये खेल सिर्फ सरकार का नहीं, बड़ी-बड़ी अरबपति जैसे बिल गेट्स।

14:44

Speaker A

पीटर थील भी ग्रीनलैंड के खनिजों में पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं।

14:50

Speaker A

कोबोल्ड मेटल्स जैसी कंपनियां वहां खुदाई की तैयारियां कर रही हैं।

14:55

Speaker A

उन्हें पता है कि भविष्य का सोना यहीं छिपा है।

14:59

Speaker A

इसके अलावा एक और बहुत बड़ा कारण है।

15:02

Speaker A

बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं।

15:06

Speaker A

जिसे पोलर सिल्क रोड कहा जा रहा है।

15:09

Speaker A

जो जहाज एशिया से यूरोप जाने के लिए स्वेज नहर का लंबा रास्ता लेते थे वो भविष्य में ग्रीनलैंड के ऊपर से गुजरेंगे।

15:17

Speaker A

ये रास्ता दूरी को 40% तक कम कर देगा।

15:21

Speaker A

ग्रीनलैंड वो चेक पोस्ट है जो आने वाले 100 सालों तक वैश्विक व्यापार को नियंत्रित करेगा।

15:27

Speaker A

अब जो ग्रीनलैंड को कंट्रोल करेगा वो दुनिया के व्यापारिक गर्दन को पकड़ लेगा।

15:33

Speaker A

डोनाल्ड ट्रंप ये जानते हैं कि ये मौका वो चीन या रूस को नहीं देना चाहते हैं।

15:38

Speaker A

लेकिन ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की ये दीवानगी आज की नहीं है।

15:42

Speaker A

इसका इतिहास बहुत पुराना है।

15:45

Speaker A

क्या आप जानते हैं कि ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे अमेरिका का एक सीक्रेट शहर आज भी दबा हुआ है?

15:52

Speaker A

बात है 1960 के दशक की।

15:55

Speaker A

शीत युद्ध अपने चरम पर था।

15:58

Speaker A

उस वक्त कोल्ड वॉर में अमेरिका ने ग्रीनलैंड में एक बेहद खुफिया मिशन चलाया था।

16:03

Speaker A

जिसका नाम था प्रोजेक्ट आइसवर्म।

16:06

Speaker A

प्लान बेहद खतरनाक था।

16:08

Speaker A

अमेरिका ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के नीचे हजारों किलोमीटर लंबी सुरंगें खोदकर एक पूरा शहर कैंप सेंचुरी बसाना चाहता था।

16:16

Speaker A

वहां 600 परमाणु मिसाइलें तैनात करने की योजना थी।

16:21

Speaker A

जो लगातार चलती रहती और सोवियत संघ के निशाने पर होती।

16:27

Speaker A

अमेरिका ने वहां पर सिनेमा हॉल, चर्च और रहने की भी जगह बनाई थी।

16:32

Speaker A

सब कुछ बर्फ के नीचे।

16:34

Speaker A

लेकिन कुदरत से कोई नहीं जीत पाया।

16:37

Speaker A

ग्लेशियर की बर्फ खिसकने लगी और वो पूरा शहर दब गया।

16:42

Speaker A

प्रोजेक्ट को छोड़ना पड़ा।

16:45

Speaker A

लेकिन वो जहरीला रेडियोएक्टिव कचरा वो केमिकल आज भी बर्फ के नीचे दबा है।

16:52

Speaker A

और अब ग्लोबल वार्मिंग से जब बर्फ पिघल रही है।

16:56

Speaker A

तो जहर के बाहर आने का खतरा भी मंडरा रहा है।

17:00

Speaker A

यही नहीं साल 1968 में।

17:02

Speaker A

अमेरिका का एक बी 52 बमवर्षक विमान जिसमें चार हाइड्रोजन बम थे ग्रीनलैंड में क्रैश हो गया।

17:10

Speaker A

उस हादसे को ब्रोकन एरो कहा जाता है।

17:13

Speaker A

ट्रंप कहते हैं ग्रीनलैंड सुरक्षित नहीं है।

17:16

Speaker A

लेकिन सच तो ये है ग्रीनलैंड को सबसे ज्यादा खतरा खुद अमेरिका के प्रयोगों से हो रहा है।

17:23

Speaker A

हालांकि क्या ग्रीनलैंड दूध का धुला है?

17:27

Speaker A

ये भी ऐसा नहीं है।

17:31

Speaker A

क्या ग्रीनलैंड के लोग अमेरिका जाना चाहते हैं?

17:33

Speaker A

बिल्कुल नहीं।

17:35

Speaker A

85% से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो अमेरिका के कब्जे के खिलाफ हैं।

17:40

Speaker A

हालांकि ये भी सच है ग्रीनलैंड के लोग डेनमार्क से भी बहुत खुश नहीं है।

17:45

Speaker A

इतिहास गवाह है कि डेनमार्क ने भी उन पर जबरदस्ती अपनी संस्कृति थोप दी थी।

17:51

Speaker A

1960 और 70 के दशक में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की हजारों महिलाओं की जबरन नसबंदी करवाई थी ताकि उनकी आबादी ना बढ़े।

18:00

Speaker A

ये एक ऐसा घाव है जो आज भी हरा है और जिसके लिए डेनमार्क ने माफी भी मांगी है।

18:07

Speaker A

ग्रीनलैंड के लोग आजादी चाहते हैं।

18:11

Speaker A

लेकिन एक लोकतंत्र के रूप में।

18:15

Speaker A

वो अमेरिका का 51वां राज्य या कोई कॉलोनी नहीं बनना चाहते हैं।

18:21

Speaker A

वो जानते हैं कि ट्रंप उन्हें इंसान नहीं बस एक डील समझते हैं।

18:27

Speaker A

हालांकि ये सब कुछ भारत के लिए भी खतरे की घंटी है।

18:31

Speaker A

और यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि इस लड़ाई से क्या भारत को फर्क पड़ता है?

18:36

Speaker A

अब पहली नजर में आप कहेंगे कि भाई हम तो हजारों किलोमीटर दूर हैं।

18:41

Speaker A

तो हमें क्या मतलब है?

18:43

Speaker A

लेकिन यही वो पॉइंट है जहां हमें सबसे ज्यादा सावधान होने की जरूरत है।

18:48

Speaker A

अगर दुनिया ने ट्रंप के इस तर्क को मान लिया कि नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर आप किसी इलाके पर कब्जा कर सकते हैं।

18:55

Speaker A

तो कल सुबह उठकर शी जिनपिंग क्या कहेंगे?

18:58

Speaker A

चीन कहेगा कि भैया अरुणाचल प्रदेश जिसे वो अपना साउथ तिब्बत कहता है।

19:03

Speaker A

वो हमारे लिए खतरा है।

19:07

Speaker A

वो भारत पर अटैक करने के लिए सोच सकता है।

19:10

Speaker A

नेशनल सिक्योरिटी के लिए कहेगा कि अरुणाचल पर कब्जा करना जरूरी है।

19:13

Speaker A

हम हमला नहीं कर रहे हैं, हम तो बस गोल्डन शील्ड बना रहे हैं।

19:17

Speaker A

एक नई तरह की प्रथा की शुरुआत हो जाएगी जहां दुनिया के सारे देश आपस में लड़ने झगड़ने लगेंगे।

19:24

Speaker A

अगर अमेरिका ग्रीनलैंड ले सकता है।

19:27

Speaker A

तो रूस बाल्टिक देशों को निगल सकता है।

19:30

Speaker A

चीन ताइवान को घरेलू मामला बताकर कभी भी हड़प सकता है।

19:36

Speaker A

पाकिस्तान फिर से कोशिश करेगा।

19:39

Speaker A

अमेरिका एक ऐसी गलत मिसाल सेट कर रहा है जो दुनिया के हर तानाशाह को दूसरे की जमीन हड़पने का लाइसेंस देगी।

19:46

Speaker A

और फिर।

19:48

Speaker A

ये दुनिया जंगल बन जाएगी।

19:51

Speaker A

जहां जिसकी लाठी उसकी भैंस और यही नियम भारत की सीमाओं को भी असुरक्षित कर सकता है।

19:56

Speaker A

ये जंगल राज की पूरी तरह वापसी का है।

19:59

Speaker A

डोनाल्ड ट्रंप का ये कदम सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं ये सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद उन ढांचों को गिराने की कोशिश है।

20:07

Speaker A

जिसने 75 साल तक दुनिया को शांति में रखा।

20:11

Speaker A

अगर जून तक ट्रंप अपनी धमकी पर अमल करते हैं और 25% टैरिफ लगाते हैं या उससे भी बुरा ग्रीनलैंड पर फौजी कार्रवाई करते हैं।

20:20

Speaker A

तो 2026 इतिहास के पन्नों में उन सालों में दर्ज होगा जब पश्चिम ने खुद खुदकुशी कर ली थी।

20:28

Speaker A

ग्रीनलैंड की बर्फीली हवाओं में गूंजते नारे।

20:31

Speaker A

वाशिंगटन में रैंडी फाइन का बिल।

20:33

Speaker A

ये दो अलग-अलग दुनिया की तस्वीरें हैं।

20:36

Speaker A

एक तरफ अस्तित्व की लड़ाई है।

20:38

Speaker A

दूसरी तरफ विस्तारवाद की भूख।

20:41

Speaker A

पुतिन और जिनपिंग दूर बैठकर तमाशा देख रहे हैं क्योंकि उनका सबसे बड़ा दुश्मन नाटो।

20:48

Speaker A

आज खुद को ही खत्म करने पर तुला है।

20:53

Speaker A

सवाल है कि दुनिया सांसे रोके देख रही है।

20:58

Speaker A

अब होगा क्या?

20:59

Speaker A

क्या यूरोप झुकेगा?

21:01

Speaker A

क्या नाटो टूटेगा?

21:03

Speaker A

या हम एक नए और खौफनाक साम्राज्यवादी युग की शुरुआत देख रहे हैं जहां ताकतवर जो चाहे छीन सकता है।

21:10

Speaker A

और कमजोर सिर्फ तमाशा देखने को मजबूर हो जाएगा।

21:16

Speaker A

सवाल बड़ा महत्वपूर्ण है।

21:19

Speaker A

सोचिएगा आप।

21:21

Speaker A

क्या ट्रंप एक गलत परंपरा की शुरुआत कर रहे हैं?

21:27

Speaker A

और साल 2026 तबाही के सारे संकेत लेकर बैठा है।

21:33

Speaker A

ईरान में युद्ध रुक गया है।

21:35

Speaker A

लेकिन नाटो आपस में लड़ रहा है।

21:37

Speaker A

सवाल क्या इस साल ट्रंप मूड बनाकर आए हैं कि नोबेल पीस नहीं मिला।

21:42

Speaker A

तो दुनिया की पीस से वो खिलवाड़ कर लेंगे?

21:46

Speaker A

सोचने वाली बात है।

21:47

Speaker A

सोचिएगा आप।

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