**Why Surah Quraysh Was Revealed ? - The World’s First AI-Visualized Quran Series! — Transcript & Summary | SozAI**
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सूरह कुरैश के नाजिल होने की कहानी और मक्का के कुरैश कबीले की ऐतिहासिक भूमिका का विस्तार से वर्णन।

## Key Takeaways

- सूरह कुरैश मक्का के कुरैश कबीले को उनकी दौलत और स्थिति की याद दिलाने के लिए नाजिल हुई।
- हाशिम की दूरदर्शिता ने मक्का को व्यापारिक केंद्र बनाया और कुरैश को समृद्ध किया।
- काबा के रखवाले होने के कारण कुरैश को सुरक्षा मिली और उनका व्यापार सुरक्षित रहा।
- मक्का में बुतपरस्ती के दौर के बावजूद अल्लाह ने कुरैश को विशेष स्थान दिया।
- सूरह कुरैश का संदेश आज भी जीवन में महत्व रखता है, जो अल्लाह की दी हुई दौलत की कद्र करना सिखाता है।

## What the video covers

- सूरह कुरैश मक्का के कुरैश कबीले की दौलत और घमंड को याद दिलाने के लिए नाजिल हुई।
- कुरैश कबीला मक्का का प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन गया था, जिसके पीछे हाशिम की दूरदर्शिता थी।
- मक्का में भूख और कठिनाइयों के दौर में हाशिम ने व्यापारिक सफर शुरू कर मक्का को समृद्ध बनाया।
- काबा के रखवाले होने के कारण कुरैश के काफिले को डाकुओं से सुरक्षा मिली।
- मक्का में बुतपरस्ती और शिर्क का दौर था, जिसे सूरह कुरैश ने याद दिलाने का माध्यम बनाया।
- कुरैश के अमीर सरदारों का मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नबूवत का विरोध करना।
- सूरह कुरैश का उद्देश्य कुरैश को उनकी असली हैसियत और अल्लाह के घर की अहमियत समझाना था।
- कुरैश के व्यापारिक सफर ने उन्हें दुनिया के कई देशों से जोड़ा और ज्ञान व धन में वृद्धि की।
- यमन के हाकिम अब्राह की मक्का पर हमला करने की योजना और अल्लाह के घर की रक्षा।
- सूरह कुरैश की व्याख्या में यह बताया गया कि अल्लाह कुरैश से सीधे नहीं बल्कि उनकी बात कर रहे हैं।

Answers

## Questions about this video

सूरह कुरैश क्यों नाजिल हुई?

सूरह कुरैश इसलिए नाजिल हुई ताकि कुरैश कबीले को उनकी दौलत और स्थिति की याद दिलाई जा सके और उन्हें यह समझाया जा सके कि यह सब अल्लाह की देन है।

हाशिम ने मक्का के लिए क्या महत्वपूर्ण योजना बनाई?

हाशिम ने मक्का के व्यापार को बढ़ाने के लिए सर्दियों में यमन और गर्मियों में सीरिया का व्यापारिक सफर शुरू किया, जिससे मक्का एक व्यापारिक केंद्र बन गया।

कुरैश कबीले को डाकुओं से सुरक्षा कैसे मिली?

कुरैश कबीले को काबा के रखवाले होने के नाते सम्मान मिला, जिससे डाकू उनके काफिले पर हमला करने से डरते थे और उन्हें सुरक्षित रहने का मौका मिला।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A

ये बात है कुरान की। कहां है मोहम्मद का वो अल्लाह जिसे किसी ने नहीं देखा, जो हमारे खुदाओं के सामने खड़े होने की जुर्रत कर सके। ये बात है नबी-ए-पाक के परदादा हाशिम की। मक्का वालों में हूं हाशिम, अब्दुल मनाफ का बेटा और हम अल्लाह के घर के मुहाफिज हैं। बिल्कुल सही कहा। हम अल्लाह के घर के रखवाले हैं। किसी में हिम्मत नहीं हमारे काफिले को रोकने की। ये बात है सूर कुरैश की। [हंसी] मदरसों में अक्सर सूर कुरैश हाफिज जी डंडी मार के याद करा ही देते हैं। ली इला कुरैश इरा, लेकिन जिंदगी में ऐसे मौके बहुत कम होते हैं। जब कोई यह बताता है कि असल में सूर कुरैश है क्या और क्यों अल्लाह ने इसको नाजिल किया। कुरैश बड़ा घमंड करते थे अपनी दौलत पर। मगर अल्लाह ने उन्हें याद दिला दिया कि ये सब उसका दिया हुआ है। क्या है सूर कुरैश के नाजिल होने के पीछे की कहानी? और कौन थे अम्र अल उला उर्फ हाशिम? याद है नबी के परदादा हाशिम का जमाना। मैं उस वक्त बच्चा था। और कैसे कुरैश कबीला इतना खुद गर्ज हो गया कि अल्लाह ने उसको मिसाल बनाकर कुरान में हमेशा के लिए कैद कर दिया। मक्का से पैगाम आया है। अल्लाह ने कुरैश कबीले की गफलत को लोगों के लिए सबक बना दिया है। और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट, 1400 साल पहले नाजिल हुई इस सूरत का आज हमारी जिंदगी में क्या काम है, जानेंगे इस वीडियो में। स्कॉलर्स कहते हैं कि सूर कुरैश मक्का में उस वक्त नाजिल हुई जब कुरैश के सरदार अपनी दौलत का घमंड दिखाकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुखालिफत करने लगे। ए बनू हाशिम के लोगों, एक बात मेरी समझ में नहीं आती। कौन सी बात अबू हकम? क्या समझ नहीं आता तुम्हें? मुझे समझ नहीं आता। अगर अल्लाह को पैगंबर चुनना ही था तो कुरैश के किसी अमीर सरदार को चुन लेता। पूरे मक्का में बनू हाशिम का यही मुफ्लिस शख्स मिला अल्लाह को। सही बात है। अल्लाह किसी सरदार को नबी बना देता। और जब इन लोगों का गुरूर, इनका घमंड हद से पार हो गया, तब अल्लाह सुभाना ताला ने इनको याद दिलाने के लिए कि क्या थी इनकी हैसियत? क्या था इनका मकाम? अल्लाह ने सूर कुरैश को नाजिल किया। मोहम्मद हर जगह हमें लाजवाब कर रहे हैं। और अब वो हमारे कुरैश कबीले के खिलाफ एक नई शायरी लाए हैं। कहते हैं हम नाशुकरे हैं। शायद वो ठीक कहते हैं। सोचो जरा। क्या कहा? मैं सोचूं? यह मत भूलो कि हम आम लोग नहीं बल्कि कुरैश के सरदार हैं। क्या तुम भूल गए वो जमाना? जब मक्का भूख से तड़प रहा था। बदहाल था। यह बात असल में मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के परदादा हाशिम के जमाने की है। यह वो दौर था जब मक्का कैद का शिकार था। आबादी कम थी। उसके बावजूद लोग भूख से बिलक रहे थे। उनकी हर सांस अपने आप में एक सवाल थी। यह वो दौर था जब लोग इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सिखाई तौहीद को भूल चुके थे। मक्का बुतपरस्ती और शिर्क का गढ़ बन चुका था। काबा के अंदर और उसके आसपास 360 बुतों को रख दिया गया था। दिन रात लोग इन बुतों की पूजा करते। इनको अल्लाह तक अपनी बात पहुंचाने का वसीला समझते। ऐ होबेल, हमारी दुआओं का वसीला बन। ऐ हुबल, बच्चे भूख से मर रहे हैं। रहम कर, रहम। यह जमाना इतना मुश्किल था कि लोगों को ख्वाबों में भी रोटियां नजर आतीं। कल मैंने एक ख्वाब देखा। हम दोनों बैठे थे। पेट भरकर रोटी खा रही थी और फिर सैर होकर ठंडा पानी पिया। वक्त अपनी रफ्तार से बहता रहा। मक्का वाले देवताओं की पूजा करते रहे। वो अपने देवताओं से दिन रात भीख मांगते। उनकी इबादत करते। हमारी दुआ को अल्लाह तक पहुंचा दे। हुबल की शान सलामत रहे। मगर उनका कोई देवता काम ना आया। धीरे-धीरे इंसान और जानवर मरने लगे। और फिर एक उम्मीद जगी, एक आवाज उठी। अरे ये कौन है? अब्दुल हाशिम, काबा के सरदार आ रहे हैं। हाशिम दूर-दराज इलाके का सफर करके अपने लोगों के लिए खाने का सामान लाए थे। जो खजूर मेरे लिए भी, वो प्यासों की प्यास बुझाते। भूखों को अपने हाथ से रोटी तोड़कर खिलाते। अपने लोगों की खिदमत में उन्होंने दिन रात एक कर दी। लेकिन फिर भी भूख के बादल उन पर मंडराते रहे। हाशिम, कुछ दिन तो गुजर जाएंगे, लेकिन तुम्हें इस मुश्किल का मुकम्मल इलाज निकालना होगा। मुकम्मल इलाज यानी मक्का को एक ऐसे प्लान की जरूरत थी जिससे इस कैद को, इस भुखमरी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। हाशिम सुबह शाम प्लान बनाते रहे। अपने लोगों की फिक्र में घुलते रहे। वह जगह-जगह जाकर बड़े बूढ़ों से राय लेते रहे कि शायद कोई रास्ता, कोई हल निकल आए। मैं अपने लोगों को इस हाल में नहीं देख सकता। आप सब बुजुर्ग हैं मक्का के। कोई रास्ता दिखाइए। पर कोई भी इस परेशानी से निकलने का रास्ता ना दिखा सका। हमारी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है। कैसे निकलें इस मुसीबत से? इस इलाके के बारे में तुम तो जानते हो। मक्का एक रेतीला इलाका था। वहां ना फल पैदा होते थे, ना सब्जियां। ना ही सोने की खदानें थीं, ना हीरे की। चारों तरफ बस रेत ही रेत थी और मुट्ठी भर भूखे लोग। वो करते भी तो क्या? वक्त यूं ही गुजरता रहा। ना जाने कितनी जिंदगियां मौत के हवाले हो गईं। हाशिम गौर-फिक्र में डूबे रहे। और फिर एक दिन उन्हें ख्याल आया कि मक्का वालों की सबसे बड़ी ताकत अल्लाह का घर काबा है। ये मैंने पहले क्यों नहीं सोचा? ये तो सबसे बड़ी ताकत है। और इसी काबा का नाम इस्तेमाल करके वो मक्का का पहला तिजारती सफर करेंगे। कबीले वालों, हम कारोबार करेंगे। सर्दियों में यमन का सफर करेंगे और गर्मियों में सीरिया का। ये क्या कह रहे हैं? ताज्जुब है। यह बात तो कभी सुनी नहीं। इस ऐलान को सुनकर मक्का वालों के होश उड़ गए। आज तक किसी ने ऐसी बात नहीं सोची थी। हाशिम का ये ऐलान असल में मौत का पैगाम था। क्या ये ऐसी बात नहीं? जैसे हम खुद अपनी मौत को दावत दे रहे हों। हां, बिल्कुल। पागलपन है, पागलपन। शाम ढलते ही डाकू हमारा माल लूट लेंगे और हमें कत्ल कर देंगे। कबीले वालों की ये बातें सुनकर हाशिम मुस्कुरा दिए। उन्होंने उन सबको समझाया कि परेशान होने वाली कोई बात नहीं। हम इस बैतुल्लाह के मुहाफिज हैं। हम पर कोई हाथ नहीं डाल सकता। बिल्कुल सही कहा। हाशिम ठीक कहता है। हम पर कोई हाथ नहीं डाल सकता। हम हैं कुरैश। असल में उस जमाने में काबा के अंदर 360 बुतों को रख दिया गया था। यह बुत अलग-अलग इलाकों के अलग-अलग कबीलों के बुत थे और हर कबीला अपने बुत की पूजा करने साल में एक ना एक बार मक्का जरूर आता था। इस बार देखना, लात और उजा मेरे तोहफे से खुश हो जाएंगे। खास तोहफा लाया हूं उनके लिए। हां, क्यों नहीं? तो अगर कोई कबीला कुरैश के काफिले पर हमला करता तो उसे इस बात का जरूर डर लगा रहता कि कहीं ऐसा ना हो कि कुरैश वाले उनके बुत को कोई नुकसान पहुंचा दें या उनके बुत को काबा से निकाल कर फेंक दें, क्योंकि इन द एंड जाना उन्होंने साल में एक ना एक बार अपने बुत की पूजा करने के लिए मक्का ही था। किसी ने अगर जुर्रत भी की तो निकाल देंगे उस कबीले के बुत को। हां, बिल्कुल। और जब यह बात सबको समझ में आ गई तो कुछ ही दिनों में सफर की तैयारी कर ली गई। सफर लंबा है मेरे बेटे। बाबा, आप फिक्र ना करें। मैं जल्द लौटूंगा। बस इजाजत दें। [संगीत] वो सर्दियों में यमन और गर्मियों में शाम की तरफ जाते। और अगर रास्ते में उन्हें कोई डकैत मिल जाता तो वो उससे कह देते, नहीं जानते क्या? हम बैतुल्लाह के रखवाले हैं। यह बात सुनकर डकैत शर्मिंदगी और खौफ से सहम जाते हैं। मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। माफ कर दीजिए, कोई बात नहीं। लेकिन आगे से ख्याल रहे। बेखौफ होकर आगे बढ़ो पूरी रफ्तार से। और इस तरह काबा के मक्का में होने की वजह से कुरैश बेखौफ होकर सर्दी और गर्मी का सफर करते रहे। देखते ही देखते मक्का एक बिजनेस हब बन गया। लोग खुशहाल और अमीर हो गए। इन लंबे सफर की वजह से कुरैश को दुनिया का इतना एक्सपोजर हो गया कि वो बाकी कबीलों से पैसे और इल्म के मामले में बहुत आगे निकल गए। उनके ताल्लुकात कई मुल्कों के बादशाहों के साथ बन गए। और इन्हीं बहुत सारे सफर के दौरान उन्होंने कैलीग्राफी, यानी कि रस्मुल खत सीखा, जिसे बाद में कुरान मजीद को लिखने के लिए इस्तेमाल किया गया। ये रस्मुल खत मैंने सर्दी और गर्मी के सफर के दौरान सीखी है। हाशिम अल्लाह को प्यारे हो गए। लेकिन यह सर्दी और गर्मी के सफर का सिलसिला चलता रहा। देखते ही देखते कुछ ही सालों में मक्का इतना बड़ा बिजनेस हब बन गया कि यमन के हाकिम अब्राह ने हाथियों की फौज के साथ मक्का पर चढ़ाई करने का फैसला कर लिया। उसने यह इरादा कर लिया कि वो अल्लाह के घर को तोड़ देगा क्योंकि वो यह चाहता था कि मक्का की जगह यमन बिजनेस का मरकज बने, बिजनेस का सेंटर बने। और जब अल्लाह सुभाना ताला ने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नबूवत का हुकुम दिया तो यही कुरैश अपने पैसे का जोर दिखाकर उनकी मुखालिफत करने लगे। तब अल्लाह सुभाना ताला ने सूर कुरैश को नाजिल किया ताकि उन्हें यह याद दिला सके कि वो भूख से मर रहे थे। तब अल्लाह ताला ने उनको अपने घर की वजह से इतना बड़ा मकाम दिया। वो इतनी इज्जत वाले हुए। कुरैश वालों का मेरे दरबार में हमेशा इस्तकबाल है। ये थी सूर कुरैश के नाजिल होने के पीछे की कहानी। अबू हादी, हमें वो सूर तो सुनाओ जो नबी पर नाजिल हुई है। बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। [प्रशंसा] कुर इत रब अमन ख। चलिए अब इस सूरत को सिनैटिक अंदाज में, आसान तरीके से समझते हैं। तो देखिए, सबसे पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि इस पूरी सूरत में अल्लाह सुभाना ताला कुरैश से बात नहीं कर रहे, बल्कि कुरैश की बात कर रहे हैं। यानी कि थर्ड पर्सन में बात हो रही है, जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ा इशारा है किसी से खफा होने का, नाराज होने का। जैसे अक्सर होता है ना, हम किसी से नारा...

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Speaker A

बेटा और हम अल्लाह के घर के मुहाफिज हैं। बिल्कुल सही कहा। हम अल्लाह के घर के रखवाले हैं। किसी में हिम्मत नहीं हमारे काफिले को रोकने की। ये बात है सूर कुरैश की। [हंसी] मदरसों में अक्सर सूर कुरैश हाफिज जी डंडी

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Speaker A

मार के याद करा ही देते हैं। ली इला कुरैश इरा लेकिन जिंदगी में ऐसे मौके बहुत कम होते हैं। जब कोई यह बताता है कि असल में सूर कुरैश है क्या और क्यों अल्लाह ने इसको नाजिल किया। कुरैश बड़ा घमंड करते थे अपनी दौलत पर।

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Speaker A

मगर अल्लाह ने उन्हें याद दिला दिया कि ये सब उसका दिया हुआ है। क्या है सूर कुरैश के नाजिल होने के पीछे की कहानी? और कौन थे अम्र अल उला उर्फ हाशिम?

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Speaker A

याद है नबी के परदादा हाशिम का जमाना मैं उस वक्त बच्चा था। और कैसे कुरैश कबीला इतना खुद गर्ज हो गया कि अल्लाह ने उसको मिसाल बनाकर कुरान में हमेशा के लिए कैद कर दिया। मक्का से पैगाम आया है। अल्लाह ने कुरैश कबीले की गफलत को

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Speaker A

लोगों के लिए सबक बना दिया है। और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट 1400 साल पहले नाजिल हुई इस सूरत का आज हमारी जिंदगी में क्या काम है जानेंगे इस वीडियो में। स्कॉलर्स कहते हैं कि सूर कुरैश मक्का में उस वक्त नाज़िल हुई जब कुरैश के सरदार अपनी

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Speaker A

दौलत का घमंड दिखाकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुखालिफत करने लगे। ए बनू हाशिम के लोगों एक बात मेरी समझ में नहीं आती। कौन सी बात अबू हकम? क्या समझ नहीं आता तुम्हें?

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Speaker A

मुझे समझ नहीं आता। अगर अल्लाह को पैगंबर चुनना ही था तो कुरैश के किसी अमीर सरदार को चुन लेता। पूरे मक्का में बनू हाशिम का यही मुफ्लिस शख्स मिला अल्लाह को। सही बात है। अल्लाह किसी सरदार को नबी बना

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Speaker A

देता। और जब इन लोगों का गुरूर इनका घमंड हद से पार हो गया। तब अल्लाह सुभाना ताला ने इनको याद दिलाने के लिए कि क्या थी इनकी हैसियत? क्या था इनका मकाम? अल्लाह ने सूर कुरैश को नाजिल किया। मोहम्मद हर जगह हमें

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Speaker A

लाजवाब कर रहे हैं। और अब वो हमारे कुरैश कबीले के खिलाफ एक नई शायरी लाए हैं। कहते हैं हम नाशुकरे हैं। शायद वो ठीक कहते हैं। सोचो जरा। क्या कहा? मैं सोचूं?

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Speaker A

यह मत भूलो कि हम आम लोग नहीं बल्कि कुरैश के सरदार हैं। क्या तुम भूल गए वो जमाना?

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Speaker A

जब मक्का भूख से तड़प रहा था। बदहाल था। यह बात असल में मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम के परदादा हाशिम के जमाने की है। यह वो दौर था जब मक्का कैद का शिकार था। आबादी कम थी। उसके बावजूद लोग भूख से बिलक

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Speaker A

रहे थे। उनकी हर सांस अपने आप में एक सवाल थी। यह वो दौर था जब लोग इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सिखाई तौहीद को भूल चुके थे। मक्का बुतपरस्ती और शिर्क का गढ़ बन चुका था। काबा के अंदर और उसके आसपास 360

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Speaker A

बुतों को रख दिया गया था। दिन रात लोग इन बुतों की पूजा करते। इनको अल्लाह तक अपनी बात पहुंचाने का वसीला समझते। ऐ होबेल हमारी दुआओं का वसीला बन। ऐ हुबल बच्चे भूख से मर रहे हैं। रहम कर रहम।

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Speaker A

यह जमाना इतना मुश्किल था कि लोगों को ख्वाबों में भी रोटियां नजर आती। कल मैंने एक ख्वाब देखा। हम दोनों बैठे थे। पेट भरकर रोटी खा रही थी और फिर सैर होकर ठंडा पानी पिया। वक्त अपनी रफ्तार से

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Speaker A

बहता रहा। मक्का वाले देवताओं की पूजा करते रहे। वो अपने देवताओं से दिन रात भीख मांगते। उनकी इबादत करते। हमारी दुआ को अल्लाह तक पहुंचा दे। हुबल की शान सलामत रहे। मगर उनका कोई देवता काम ना आया। धीरे-धीरे

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Speaker A

इंसान और जानवर मरने लगे। और फिर एक उम्मीद जगी, एक आवाज उठी। अरे ये कौन है?

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Speaker A

अब्दुल हाशिम काबा के सरदार आ रहे हैं। हाशिम दूर दराज इलाके का सफर करके अपने लोगों के लिए खाने का सामान लाए थे। जो खजूर मेरे लिए भी वो प्यासों की प्यास बुझाते। भूखों को अपने हाथ से रोटी तोड़

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Speaker A

कर खिलाते। अपने लोगों की खिदमत में उन्होंने दिन रात एक कर दी। लेकिन फिर भी भूख के बादल उन पर मंडराते रहे। हाशियम कुछ दिन तो गुजर जाएंगे लेकिन तुम्हें इस मुश्किल का मुकम्मल इलाज निकालना होगा। मुकम्मल इलाज यानी मक्का को एक ऐसे प्लान

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Speaker A

की जरूरत थी जिससे इस कैद को इस भुखमरी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। हाशिम सुबह शाम प्लान बनाते रहे। अपने लोगों की फिक्र में घुलते रहे। वह जगह-जगह जाकर बड़े बूढ़ों से राय लेते रहे कि शायद

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Speaker A

कोई रास्ता कोई हल निकल आए। मैं अपने लोगों को इस हाल में नहीं देख सकता। आप सब बुजुर्ग हैं मक्का के। कोई रास्ता दिखाइए। पर कोई भी इस परेशानी से निकलने का रास्ता ना दिखा सका। हमारी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है। कैसे

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Speaker A

निकलें इस मुसीबत से? इस इलाके के बारे में तुम तो जानते हो। मक्का एक रेतीला इलाका था। वहां ना फल पैदा होते थे ना सब्जियां। ना ही सोने की खदानें थी ना हीरे की। चारों तरफ बस रेत ही रेत थी और मुट्ठी भर भूखे लोग। वो करते

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Speaker A

भी तो क्या वक्त यूं ही गुजरता रहा। ना जाने कितनी जिंदगियां मौत के हवाले हो गई। हाशिम गौर-फिक्र में डूबे रहे। और फिर एक दिन उन्हें ख्याल आया कि मक्का वालों की सबसे बड़ी ताकत अल्लाह का घर काबा है।

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Speaker A

ये मैंने पहले क्यों नहीं सोचा? ये तो सबसे बड़ी ताकत है। और इसी काबा का नाम इस्तेमाल करके वो मक्का का पहला तिजारती सफर करेंगे। कबीले वालों हम कारोबार करेंगे। सर्दियों में यमन का सफर करेंगे और गर्मियों में

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Speaker A

सीरिया का। ये क्या कह रहे हैं? ताज्जुब है। यह बात तो कभी सुनी नहीं। इस ऐलान को सुनकर मक्का वालों के होश उड़ गए। आज तक किसी ने ऐसी बात नहीं सोची थी। हाशिम का ये ऐलान असल में मौत का पैगाम

07:09

Speaker A

था। क्या ये ऐसी बात नहीं? जैसे हम खुद अपनी मौत को दावत दे रहे हो। हां बिल्कुल। पागलपन है पागलपन। शाम ढलते ही डाकू हमारा माल लूट लेंगे और हमें कत्ल कर देंगे। कबीले वालों की ये बातें सुनकर हाशिम

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Speaker A

मुस्कुरा दिए। उन्होंने उन सबको समझाया कि परेशान होने वाली कोई बात नहीं। हम इस बैतुल्लाह के मुहाफिज हैं। हम पर कोई हाथ नहीं डाल सकता। बिल्कुल सही कहा। हाशिम ठीक कहता है। हम पर कोई हाथ नहीं डाल सकता। हम हैं कुरैश।

07:44

Speaker A

असल में उस जमाने में काबा के अंदर 360 बुतों को रख दिया गया था। यह बुत अलग-अलग इलाकों के अलग-अलग कबीलों के बुत थे और हर कबीला अपने बुत की पूजा करने साल में एक ना एक बार मक्का जरूर आता था।

07:58

Speaker A

इस बार देखना लात और उजा मेरे तोहफे से खुश हो जाएंगे। खास तोहफा लाया हूं उनके लिए। हां क्यों नहीं?

08:06

Speaker A

तो अगर कोई कबीला कुरैश के काफिले पर हमला करता तो उसे इस बात का जरूर डर लगा रहता कि कहीं ऐसा ना हो कि कुरैश वाले उनके बुत को कोई नुकसान पहुंचा दें या उनके बुत को काबा से निकाल कर फेंक दे क्योंकि इन द

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Speaker A

एंड जाना उन्होंने साल में एक ना एक बार अपने बुत की पूजा करने के लिए मक्का ही था। किसी ने अगर जुर्रत भी की तो निकाल देंगे उस कबीले के बुत को। हां बिल्कुल। और जब यह बात सबको समझ में आ गई तो कुछ ही

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Speaker A

दिनों में सफर की तैयारी कर ली गई। सफर लंबा है मेरे बेटे। बाबा आप फिक्र ना करें। मैं जल्द लौटूंगा। बस इजाजत दें। [संगीत] वो सर्दियों में यमन और गर्मियों में शाम की तरफ जाते। और अगर रास्ते में उन्हें

09:00

Speaker A

कोई डकैत मिल जाता तो वो उससे कह देते नहीं जानते क्या? हम बैतुल्लाह के रखवाले हैं। यह बात सुनकर डकैत शर्मिंदगीगी और खौफ से सहम जाते हैं। मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। माफ कर दीजिए कोई बात नहीं। लेकिन आगे से ख्याल रहे।

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Speaker A

बेखौफ होकर आगे बढ़ो पूरी रफ्तार से। और इस तरह काबा के मक्का में होने की वजह से कुरैश बेखौफ होकर सर्दी और गर्मी का सफर करते रहे। देखते ही देखते मक्का एक बिजनेस हब बन गया। लोग खुशहाल और अमीर हो गए। इन लंबे सफर की

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Speaker A

वजह से कुरैश को दुनिया का इतना एक्सपोज़र हो गया कि वो बाकी कबीलों से पैसे और इल्म के मामले में बहुत आगे निकल गए। उनके ताल्लुकात कई मुल्कों के बादशाहों के साथ बन गए। और इन्हीं बहुत सारे सफर के दौरान

09:58

Speaker A

उन्होंने कैलीग्राफी यानी कि रस्मुल खत सीखा जिसे बाद में कुरान मजीद को लिखने के लिए इस्तेमाल किया गया। ये रस्मुल खत मैंने सर्दी और गर्मी के सफर के दौरान सीखी है। हाशिम अल्लाह को प्यारे हो गए। लेकिन यह

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Speaker A

सर्दी और गर्मी के सफर का सिलसिला चलता रहा। देखते ही देखते कुछ ही सालों में मक्का इतना बड़ा बिजनेस हब बन गया कि यमन के हाकिम अब्राह ने हाथियों की फौज के साथ मक्का पर चढ़ाई करने का फैसला कर लिया।

10:31

Speaker A

उसने यह इरादा कर लिया कि वो अल्लाह के घर को तोड़ देगा क्योंकि वो यह चाहता था कि मक्का की जगह यमन बिजनेस का मरकज बने, बिजनेस का सेंटर बने। और जब अल्लाह सुभाना ताला ने आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को नबूवत का

10:48

Speaker A

हुकुम दिया तो यही कुरैश अपने पैसे का जोर दिखाकर उनकी मुखालिफत करने लगे। तब अल्लाह सुभाना ताला ने सूर कुरैश को नाजिल किया ताकि उन्हें यह याद दिला सके कि वो भूख से मर रहे थे। तब अल्लाह ताला ने उनको अपने

11:03

Speaker A

घर की वजह से इतना बड़ा मकाम दिया। वो इतनी इज्जत वाले हुए। कुरैश वालों का मेरे दरबार में हमेशा इस्तकबाल है। ये थी सूर कुरैश के नाजिल होने के पीछे की कहानी। अबू हादी हमें वो सूर तो सुनाओ जो

11:19

Speaker A

नबी पर नाजिल हुई है। बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम [प्रशंसा] कुर इत रब अमन ख चलिए अब इस सूरत को समझते हैं सिनेैटिक अंदाज में आसान तरीके से। तो देखिए सबसे पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि इस पूरी सूरत में अल्लाह सुभाना ताला कुरैश से बात

11:51

Speaker A

नहीं कर रहे बल्कि कुरैश की बात कर रहे हैं। यानी के थर्ड पर्सन में बात हो रही है जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ा इशारा है किसी से खफा होने का नाराज होने का। जैसे अक्सर होता है ना हम किसी से नाराज

12:03

Speaker A

होते हैं तो हम कैसे बात करते हैं? हम किसी और से कहते हैं कि इससे कह दो कि मेरे सामने ना आया करे। मुझे इससे बात करना पसंद नहीं। तो यह थर्ड पर्सन में बात करना होता है। इसी तरह अल्लाह सुभाना ताला

12:14

Speaker A

इस पूरी सूरत में थर्ड पर्सन में बात कर रहे हैं। अब दूसरा पॉइंट जो समझने का है वो यह है कि यहां पर किसी एक इंसान की बात नहीं हो रही है बल्कि यहां पर पूरी कौम की बात हो रही है। कुरैश कबीले की बात हो रही

12:27

Speaker A

है। अब क्योंकि पहली और दूसरी आयतें एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा कनेक्टेड है तो उन्हें एक साथ समझते हैं। इलाफी कुरैश इला रहता व स यानी कुरैश बहुत ज्यादा मानूस हो गए, कंफर्टेबल हो गए, फमिलियर हो गए सर्दी और

12:46

Speaker A

गर्मी के सफर से। यह तो हुई एक ऊपरी ऊपरी बात। अब जरा आप हल्का सा बस हल्का सा इसकी गहराई में अगर आप उतरेंगे तो आप देखेंगे कि यहां पर जो इलाफ का लफ्ज है तो इसका मतलब होता है किसी चीज की आदत हो जाना,

12:58

Speaker A

किसी चीज के लिए आधी हो जाना। जैसे सर्दी हो या गर्मी हो या बारिश हो हमें ऑफिस जाने की आदत हो चुकी है। जैसे रिक्शे वाले को 10 लोगों को बिठा के रिक्शा खींचने की आदत हो चुकी है। जैसे नानबाई को रोटी

13:12

Speaker A

बनाने वाले को दिन में हजारों रोटी बनाने की आदत हो चुकी है। बिल्कुल उसी तरह यहां पे ये बात की जा रही है कि आदत हो गई कुरैश को सर्दी और गर्मी के सफर की। ठीक?

13:22

Speaker A

अब एक ही बात को दो बार दोहराया जा रहा है। आदत हो गई आदत हो गई। अब्दुल मेरे भाई किस कदर सर्दी है। मगर इन सफरों का अपना ही मजा है। असल में हमें आदत हो गई है। जब आप इसमें

13:36

Speaker A

लाम को देखेंगे जो स्टार्टिंग में यहां पे लाम इस्तेमाल किया गया है। इसके दो मतलब होते हैं। पहला मतलब तो यह है कि बड़ा ताज्जुब का इज़हार किया जा रहा है। अल्लाह ताला अब ताज्जुब करके कह रहे हैं कि

13:47

Speaker A

ताज्जुब है। इतनी आदत हो गई कि वो अल्लाह को ही भूल गए। पहली बात और इसका दूसरा मतलब क्या बनता है? आदत हो गई कुरैश को सर्दी और गर्मी के सफर की। इस वजह से उन्हें क्या करना चाहिए था कि वह अपने रब

14:01

Speaker A

की इबादत करते या करें जो उस घर का मालिक है, काबा का मालिक है, बैतुल्लाह का मालिक है। तो जब हम इस आयत के ऊपर गौर करते हैं तो हम देखते हैं कि रेहला का मतलब होता है सफर और शिता यानी के ठंड। अब सोचने की बात

14:19

Speaker A

यह है कि यहां पर अल्लाह ताला ने यह क्यों कहा कि ठंड और गर्मी के सफर की आदत हो गई। अल्लाह यह भी कह सकते थे कि गर्मी और सर्दी के सफर की आदत हो गई। लेकिन यही क्यों कहा जा रहा है कि सर्दी और गर्मी के

14:32

Speaker A

सफर की आदत हो गई। हम पर सर्दियां आसान है। बेखौफ होकर आगे बढ़ो पूरी रफ्तार से। तो यहां समझने वाली बड़ी मजेदार बात यह है कि सर्दियों में ना अक्सर दिन छोटे होते हैं। रातें लंबी होती हैं। बहुत सारी

14:47

Speaker A

सब्जियां, बहुत सारी फसलें उगती नहीं। अक्सर कई लोगों के काम ठंडे पड़ जाते हैं। चोरी चकारी का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है। तो सर्दियां इतना मुश्किल वक्त होता है लेकिन उसमें भी अल्लाह सुभाना ताला ने तुम्हें हिफाजत में रखा। हर खौफ से महफूज़

15:00

Speaker A

रखा। तुम्हें रोजगार दिया। इस वजह से उन्हें क्या करना चाहिए था? जिसका जवाब अल्लाह ताला तीसरी आयत में देते हैं। फ रब्बहाल बैत तुम्हें चाहिए था कि अपने रब की इबादत करते उस रब की इबादत करते जिसका यह काबा है। जैसा कि मैंने आपको पहले ही

15:18

Speaker A

बताया कि वो मक्का से यमन और यमन से शाम का सफर किया करते थे। जो सफर मुश्किल था डकैती का भी डर था। लेकिन क्योंकि वो रास्तों में नाम ले लिया करते थे। नहीं जानते क्या हम बैतुल्लाह के रखवाले हैं

15:33

Speaker A

के भाई हम तो बैतुल्लाह वाले हैं। हम तो अल्लाह के घर के मुहाफिज हैं। तो कभी कोई उन्हें परेशान नहीं करता था। इसलिए उन्हें चाहिए था कि अल्लाह के घर की इबादत करते। अल्लाह की इबादत करते ना कि बुतपरस्ती

15:45

Speaker A

करते। हमारी दुआ को अल्लाह तक पहुंचा दे। हुबल की शान सलामत रहे। अब यहां पे जो फे का इस्तेमाल किया गया है वो इस बात पर जोर दे रहा है कि वैसे तो अल्लाह ताला ने बंदे को बेइंतहा नेमतों से

15:58

Speaker A

नवाजा हुआ है। सांस आ रही है, जा रही है, जिस्म अपना काम कर रहा है। लेकिन चलो कोई बात नहीं। तुम नाशुरे हो गए तो हो गए। कोई नहीं। पर कम से कम इस नेमत को तो याद रखते। यह नेमत जिसका तुम नाम ले लेके

16:12

Speaker A

बार-बार सफर किया करते थे। ये फ़ा इस बात को जाहिर करता है। अब जब अगली बार आप नमाज़ में पढ़े। इस आयत को रिसाइट करें। इस सूरत को रिसाइट करें तो याद रखिए कि यह कोई मज़ की बात नहीं हो रही। यह एक हैवी बात की जा

16:27

Speaker A

रही है। एक फेवर अल्लाह ताला याद दिला रहे हैं। तो ऐसे नहीं के कुरैश ना आपको इसे जोर से और जोर लगा के महसूस करके पढ़ना है कि इसमें एक वजनदार बात हो रही है। ले इलाफ़ी कुरैश इलाफ़ रहता

16:43

Speaker A

व सफ़ के ताज्जुब है कि अल्लाह ताला ने तुम्हें इतने फेवर दिए इतना एहसान किया और तुम भूल गए उसको तुम्हें चाहिए था कि उसकी इबादत करते उस रब की जिसका नाम लेके तुम इतने बड़े बन गए। काबा के रखवालों का मेरे दरबार में हमेशा

17:00

Speaker A

इस्तकबाल है। अब जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हम सीरत को देखेंगे, सारी जिंदगी को देखेंगे और इब्राहिम अल सलाम की जिंदगी को भी देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि सारा का सारा मामला वो सारा राज इस तीसरी आयत में

17:13

Speaker A

ही छुपा था। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सारी जिंदगी लगा दी कि बंदा अपने रब की इबादत करे। एक तौहीद पे रहे। एक रब की इबादत करे। अल्लाह और बंदे के दरमियान और कोई नहीं। बंदे को हाथ फैलाने है। अपने रब

17:26

Speaker A

से दुआ मांगनी है। बीच में यह सोचना ही नहीं कि मेरी बात रब तक कैसे पहुंचेगी। वह रब का बनाया हुआ बंदा है तो उसकी बात रब तक पहुंचेगी ही पहुंचेगी। इसलिए फल याबदू रब्बा हाद बैत एक बहुत इंपॉर्टेंट आयत है

17:38

Speaker A

जो तौहीद का मतलब सिखाती है जो हमें यह बताती है सिर्फ और सिर्फ अपने एक रब एक अल्लाह की इबादत करनी है। तो अब जब हम इन तीनों आयतों को मिला के पढ़ते हैं तो क्या बात समझ में आती है कि अल्लाह ताला कहते

17:51

Speaker A

हैं कि ताज्जुब की बात है कुरैश को इतनी ज्यादा आदत हो गई सर्दी और गर्मी के सफर की कि वो अपने रब को ही भूल गए। उन्हें चाहिए था कि वो अपने रब की इबादत करते। उस रब की जिसका यह घर है।

18:05

Speaker A

अल्लाहहु अकबर। अब यहां एक सोचने वाली बात है कि कुरैश तो यह भी कह सकते थे कि अरे भाई किस अल्लाह की इबादत करें? कौन सा अल्लाह? हमने तो काबा के अंदर 360 बतों को रख रखा है। बताओ

18:18

Speaker A

कौन से की इबादत करनी है? तो इसका जवाब अल्लाह सुभाना ताला चौथी आयत में देते हैं। क्या है चौथी आयत? अलज़ व आम आन ख। अब यहां पर जो अलजीवी का लफ्ज है वो असल में एक इंट्रोडक्शन है। अल्लाह

18:34

Speaker A

ताला अपने आप को इंट्रोड्यूस कर रहे हैं कि वो रब कौन सा रब जिसने तुम्हें खाना दिया जब तुम भूखे थे। अब जू का जो मतलब होता है ये होता है बहुत ज्यादा भूख। एक्सट्रीम हंगर। खौफ यानी डर खतरा। किसी

18:47

Speaker A

भी बात का खतरा। जैसे कुरैश को खतरा था कि कहीं रास्ते में माल लेके निकले तो लूट ना लिया जाए। ठीक है? अब इस पूरी आयत को एक बार फटाफट जल्दी से समझ लेते हैं कि कुरैश बहुत ज्यादा मानूस हो गए। बहुत ज्यादा

18:59

Speaker A

कंफर्टेबल हो गए सर्दी और गर्मी के सफर से क्योंकि एक मुश्किल सफर था तो उन्हें चाहिए था कि वो अपने रब की इबादत करते। वो रब जिसने उन्हें खाना दिया जब वो भूख से तड़प रहे थे। वो रब जिसने उन्हें सेफ्टी

19:14

Speaker A

दी जब वो बहुत ज्यादा खतरे में थे। बच्चे भूख से मर रहे हैं। रहम कर रहम। अब समझने की बात ये है कि ये तो 1400 साल पुरानी सूरत है। इसके अंदर कुरैश की बात हो रही है। मेरे किस काम की

19:30

Speaker A

है ये? मैंने क्या इससे सीखना है? लेकिन क्योंकि कुरान अल्लाह का कलाम है और वह सारी उम्मत के लिए ता कयामत नाजिल किया गया है। तो आज हमारी जिंदगी में इसका रेलेवेंस यह है कि सूर कुरैश एक आईना है

19:43

Speaker A

जो हमें ये सिखाता है जब आप अल्लाह ताला आपको नेमत देता है और आप गफलत का शिकार हो जाते हो तो आप असल में कुरैश की कौम वाले रास्ते पर चलने लगते हो। जैसे मिसाल के तौर पे आज से 5 10 साल 15 साल पहले शायद

19:57

Speaker A

आप जिस प्लेट में खाना खा रहे हैं उसे खरीदने की हैसियत नहीं होगी। शायद आप किराए के मकान में रहते होंगे तो आज आपका अपना मकान हो गया होगा। शायद आपको जितनी अच्छी एजुकेशन मिलनी चाहिए थी उतनी नहीं

20:08

Speaker A

मिली लेकिन आपके बच्चे आपसे भी ज्यादा अच्छी एजुकेशन हासिल कर रहे हैं। तो अल्लाह ताला ने आपकी लाइफ को कंफर्टेबल कर दिया। अब आपको क्या चाहिए? आपको चाहिए कि अपने रब को जानने की कोशिश करें। उसके नामों को जाने, उसके नबियों को जाने, उसकी

20:22

Speaker A

किताब को पढ़ें। लेकिन आप और हम अक्सर क्या करते हैं? अजी अब पैसा आ गया है तो ऐसा है गाड़ी थोड़ी बड़ी ले लेते हैं। और एक शहर में भी अपना फ्लैट होना चाहिए। एक तो है एक और उससे माशा्लाह किराया आएगा।

20:35

Speaker A

थोड़ा ज्यादा पैसा आ गया तो जी साहब अब चेयरमनी का इलेक्शन लड़ा जाएगा। पैसा तो है लेकिन अब पावर भी चाहिए। मैं आपका अपना गुड्डन इस बार चुनाव में खड़ा हो रहा हूं। तो जिस तरह से अल्लाह सुभाना ताला कुरैश

20:51

Speaker A

के ऊपर ताज्जुब जाहिर कर रहे हैं। मुझे यह मेरी समझ है कि एक दिन ऐसा आएगा कि आखिरत के मैदान में हमारे ऊपर ताज्जुब किया जाएगा कि बताओ क्या लोग थे इन्हें खाने को दिया, पीने को दिया, बेहतर जिंदगी दी,

21:04

Speaker A

बेहतर शहर में पैदा किया। लेकिन ये अपने रब को भूल गए। अपने बच्चों की तरफ, अपने मां-बाप की तरफ नजर उठा के देखिए। आपके और उन गाजा में मर रहे लोगों के बीच सिर्फ इतना फर्क है कि वह गाजा में पैदा हुए और

21:18

Speaker A

आप यहां पैदा हुए हैं। आप आराम से वीडियो देख सकते हैं। वो आराम से इस चैन की सांस भी नहीं ले सकते। तो अगर आपको यह नेमत मिली हुई है ना तो इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ और सिर्फ और सिर्फ अल्लाह सुभाना

21:30

Speaker A

ताला की रहमत है। इसलिए कोशिश कीजिए अपने रब को जानने की, उसके कलाम को पढ़ने की। क्योंकि जिंदगी बहुत मुख्तसर है। बहुत छोटी है। पता नहीं कब बुलावा आ जाए। तो उसको याद करिए। इससे पहले वह आपको याद कर

21:43

Speaker A

ले। अगर आप गादा के लोगों से मोहब्बत करते हैं, लेकिन उनके बारे में कुछ नहीं जानते, तो इस वीडियो को जाकर देखिए। इसमें मैंने सारे फैक्ट और सबूतों के साथ एक्सप्लेन किया है कि गादा पे होने वाला यह जुल्म कब

21:58

Speaker A

शुरू हुआ। उम्मीद करता हूं बात समझ आई होगी। वीडियो पसंद आई होगी। आखिर में आपसे एक दो बातें करना चाहता हूं। यह किताबें देख रहे हैं आप यह सारी आसान तर्जुमा, तफीमुल कुरान, तस्किरुल कुरान, रहीकुल मखतूम, कलाम पाक अगर आपने हमारी सारी

22:13

Speaker A

वीडियोस देख ली है तो आपने आपके बच्चों ने आपकी फैमिली ने और जो भी लोग ये वीडियोस देख रहे हैं उन लोगों ने इन सब किताबों के कम से कम कम से कम कम से कम 100 पन्ने पढ़

22:24

Speaker A

लिए होंगे। क्योंकि हम जो भी वीडियोस बनाते हैं वो इन किताबों का सहारा ले और भी बहुत सारी किताबों का सहारा लेकर बनाते हैं। मेरा यह मकसद है कि हम कुरान को इतना मजेदार और इतना आसान बना दें कि हमारी

22:35

Speaker A

नस्लें हमारी आने वाले बच्चे इसे बड़े आसान तरीके से समझ सकें। मीडिया की पावर का हम सबको अंदाजा है। हम सब जानते हैं कि मीडिया क्या-क्या कर सकता है। लेकिन उसके बावजूद क्यों नहीं है हमारी अपनी मीडिया प्रेजेंस? क्योंकि हम अभी तक इन्हीं मसलों

22:49

Speaker A

में पड़े हुए हैं। अरे फलानी चीज सही नहीं है, फलानी चीज खराब नहीं है। जमाने के साथ चलने की बहुत ज्यादा जरूरत है। इस वक्त के लिए इस दौर के लिए बहुत बहुत बहुत बहुत ज्यादा जरूरत है कि आप खुद भी पढ़ें। अपने

23:01

Speaker A

बच्चों को भी पढ़ाएं और दीन को समझें। ताकि जब आप आखिरत में उनसे मुलाकात करें तो आप सब साथ हो जन्नत में। अल्लाह के आगे आपको शर्मिंदा ना होना पड़े। तो अगर आप हमारे इस मिशन को सपोर्ट करना चाहते हैं

23:13

Speaker A

तो इस क्यूआर कोड को स्कैन करके आप हमारी कम्युनिटी का हिस्सा बन सकते हैं। यह कम्युनिटी इसलिए है ताकि आप लोग एआई को समझ सकें। हम लोग कुछ बातें कर सकें। एक सेम आईडियोलॉजी के लोग एक साथ मिलकर आ

23:25

Speaker A

सकें। लोग मुझे कमेंट करते हैं कि भाई आपकी कम्युनिटी ज्वाइन करने से हमें क्या फायदे होंगे और हमें इसके अलावा और क्या-क्या पोक्स मिलेंगे? मैं उनसे पूछना चाहता हूं क्या यह बेहतर नहीं कि दुनिया का माल पिक्चरें देखने में जाए लेकिन

23:38

Speaker A

तुम्हारा माल का जरा सा खतरा इस आने वाली नस्ल के सुधार में लग जाए। याद रखिए वी आर द बिल्डर्स ऑफ़ द आखिरत एंड दिस इज द प्लेस वेयर वी बिल्ड इट। हम आखिरत बनाने वाले लोग हैं। इस दुनिया में हमें आखिरत को

23:50

Speaker A

बनाने के लिए भेजा गया है। और यह वो जगह है जहां उसे बनाया जाएगा। जजाक अल्लाह खैर। अस्सलाम वालेकुम। शता व सफ

Topics: सूरह कुरैश कुरैश कबीला मक्का का इतिहास हाशिम काबा के रखवाले इस्लामिक इतिहास कुरान की व्याख्या मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बुतपरस्ती व्यापारिक सफर

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