**What Happens When You STOP Reacting to a Narcissist? | Dr. Tarun Malik — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/stop-reacting-narcissist-dr-tarun-malik/

नार्सिसिस्ट को रिएक्ट करना बंद करने पर मानसिक बदलाव और उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तन।

## Key Takeaways

- नार्सिसिस्ट को रिएक्ट करना बंद करने से उनका नियंत्रण कम होता है।
- रिएक्शन की जगह रिस्पांस अपनाना मानसिक शांति और नियंत्रण बढ़ाता है।
- शुरुआती असहजता सामान्य है, इसे सहन करना जरूरी है।
- अपने इमोशंस को समझना और नियंत्रित करना जरूरी है, दबाना नहीं।
- थेरपी और हिप्नोथेरेपी से मानसिक रीप्रोग्रामिंग संभव है।

## What the video covers

- नार्सिसिस्ट हमारे ट्रिगर्स का उपयोग कर रिएक्शन की उम्मीद करता है, जो गुस्सा या इरिटेशन हो सकता है।
- रिएक्शन और रिस्पांस में फर्क होता है; रिएक्शन इमोशनल और तुरंत होता है, जबकि रिस्पांस सोच-समझकर होता है।
- जब हम नार्सिसिस्ट को रिएक्ट करना बंद करते हैं, तो वे ज्यादा प्रवोक करने की कोशिश करते हैं।
- नार्सिसिस्ट हमारे बदलाव को थ्रेट के रूप में देखते हैं और पुराने पैटर्न को जांचने के लिए अधिक क्रिटिसाइज करते हैं।
- रिएक्शन छोड़ने पर शुरुआत में असहजता, गिल्ट, और कंफ्यूजन महसूस हो सकती है, जो सामान्य है।
- यह बदलाव हमें अपने पॉइंट ऑफ व्यू को बार-बार साबित करने की जरूरत से मुक्त करता है।
- रिएक्शन बंद करने से हम नॉन-प्रेडिक्टेबल बन जाते हैं, जिससे नार्सिसिस्ट को नियंत्रण करना मुश्किल होता है।
- नो रिएक्शन का मतलब खुद को दबाना या अब्यूज सहना नहीं है, बल्कि अपने इमोशंस को समझकर नियंत्रित करना है।
- इस प्रक्रिया में थेरेपी और हिप्नोथेरेपी मददगार साबित हो सकती हैं।
- धैर्य और समय के साथ यह बदलाव स्थायी और सकारात्मक मानसिक स्थिति में परिवर्तित होता है।

## Chapters

1. 00:00 नार्सिसिस्ट के ट्रिगर्स और रिएक्शन का परिचय
2. 00:42 रिएक्शन और रिस्पांस में अंतर
3. 01:26 रिस्पांस की प्रक्रिया और इमोशनल कंट्रोल
4. 01:58 नार्सिसिस्ट का प्रवोकेशन और बदलाव पर प्रतिक्रिया
5. 02:40 रिलेशनशिप में बदलाव और पार्टनर की प्रतिक्रिया
6. 03:19 शुरुआती असहजता और मानसिक संघर्ष
7. 04:39 नए व्यवहार की आदत डालना और मानसिक बदलाव
8. 06:03 नो रिएक्शन का सही अर्थ और आत्म-सम्मान
9. 08:27 थेरेपी की भूमिका और मानसिक रीप्रोग्रामिंग
10. 10:21 अंतिम विचार और धैर्य के साथ बदलाव

Answers

## Questions about this video

नार्सिसिस्ट को रिएक्ट करना बंद करने का क्या मतलब है?

नार्सिसिस्ट को रिएक्ट करना बंद करने का मतलब है कि आप तुरंत इमोशनल प्रतिक्रिया देने की बजाय सोच-समझकर जवाब देते हैं, जिससे आप उनके नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं।

क्या नो रिएक्शन देने का मतलब खुद को दबाना होता है?

नो रिएक्शन देने का मतलब खुद को दबाना नहीं है, बल्कि अपने इमोशंस को समझना और नियंत्रित करना है ताकि आप बिना अनावश्यक तनाव के स्थिति को संभाल सकें।

शुरुआती समय में रिएक्शन बंद करने पर क्या चुनौतियां आती हैं?

शुरुआती समय में गिल्ट, बेचैनी, कंफ्यूजन और रिएक्ट करने की टेंप्टेशन आना सामान्य है, क्योंकि पुराने व्यवहार की आदतें टूट रही होती हैं।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

कैसा फील करते हैं हम जब हमें कोई प्रवोक करने की कोशिश करता है और पहली बार हम उस इंसान को कोई रिएक्शन नहीं देते हैं। यूजुअल बेसिस पर क्या होता है कि एक नार्सिसिस्ट जो है, उसे पता है कि हमारे

00:13

Speaker A

ट्रिगर्स क्या-क्या हैं। तो उन ट्रिगर्स को यूज करके वह हमारे अंदर से एक रिएक्शन की एक्सपेक्टेशन कर रहा होता है। वो रिएक्शन गुस्सा हो सकता है। इरिटेशन हो सकती है। अपने आप को जस्टिफिकेशन करने वाली डिजायर हो सकती है। वैलिडेशन सीक करने वाला

00:29

Speaker A

बिहेवियर हो सकता है। उनको प्लीज़ करने वाला बिहेवियर हो सकता है। बट कैसा फील करते हैं हम? क्या होता है उस टाइम पे जब हम उनको किसी प्रकार का रिएक्शन नहीं देते हैं। वो कैसे रिएक्ट करता है नार्सिसिस्ट

00:42

Speaker A

उस सिचुएशन में और मोस्टेंटली इंटरनली हमारे अंदर किस प्रकार के चेंजेस आते हैं। तो जो आज की वीडियो का टॉपिक है वो यही है कि जब हम एक नार्सिसिस्ट को रिएक्ट करना बंद कर देते हैं तब क्या होता है? सबसे

00:53

Speaker A

पहली चीज हमें एक डिफरेंस को समझना है। रिएक्शन में और रिस्पांस में डिफरेंस होता है। रिएक्शन इंस्टेंटली निकलता है। उसमें हम ज्यादा इमोशनल होते हैं। ट्रिगर्स के थ्रू हम ईज़िली इन्फ्लुएंस हो जाते हैं। मुझे अभी इनको आंसर देना है। इस कंपल्सिव

01:10

Speaker A

डिजायर हमारे ऊपर भारी रहती है। यह रहता है रिएक्शन। लेकिन रिस्पांस इससे थोड़ा अलग है। रिस्पांस एकदम से नहीं निकलता। हम पॉज लेते हैं। वहां पर हमारा रिप्लाई कॉन्शियस बेसिस पे आता है। तो कॉन्शियस का मतलब यहां पर क्या हो गया कि रिप्लाई

01:26

Speaker A

हमारा इंटेंशनल है। हमें पता है कि हमें यहां पर कैसे कब क्या बोलना है। यहां पर जो मेन जो ड्राइविंग फैक्टर होता है वो यह थॉट रहता है कि मुझे हमेशा हर चीज में एंगेज होने की जरूरत नहीं है। यानी कि

01:37

Speaker A

यहां पर आपका रिप्लाई आपके कंट्रोल में रहता है। आप दूसरों के कंट्रोल में नहीं होते हैं। तो यहां पे दूसरे क्या है?

01:43

Speaker A

मोस्टेंटली इमोशंस की बात हो रही है। तो जो रिएक्शन निकलता है वह इमोशंस के द्वारा डिक्टेटेड रिस्पांस होता है। यहां रिस्पांस वर्ड मैं इसलिए यूज़ कर रहा हूं रिस्पांस यहां पे एक प्रकार का रिप्लाई है। लेकिन जब प्रॉपर रिस्पांस की बात हो

01:58

Speaker A

रही है। यहां पर इमोशंस हमें डिक्टेट नहीं करते। हमारा लॉजिकल माइंड हमारे इमोशंस को डिक्टेट करना है। करता है कि कैसे कब क्या बोलना है, एक्सप्रेस करना है। जब आप रिएक्ट करना बंद कर देते हैं तो नार्सिसिस्ट जो है वह ज्यादा प्रवोक करने

02:13

Speaker A

की कोशिश कर सकता है। यहां पे सिंपल सा आपको एक साइकोलॉजिकल पैटर्न समझना है। आप किसी भी रिलेशनशिप की बात करेंगे तो जब आप यूजुअल तरीके से जैसे आप रिएक्ट करते थे अब आप जब वो रिएक्शन देना बंद कर देंगे तो

02:26

Speaker A

दूसरा इंसान कोशिश तो करेगा ना जानने की कि भाई पुराना वाला पैटर्न अवेलेबल है या नहीं है तो कोशिश करने के पीछे जरूरी नहीं है कि वो इंसान हमेशा नार्सिसिस्ट ही हो। जब हम बदलते हैं तो हमारा पार्टनर कभी-कभी

02:40

Speaker A

हमारे बदलाव के साथ एडजस्ट ईज़िली नहीं कर पाता है। उसको टाइम लगता है। अगर मैं एक नॉर्मल रिएक्शन की नॉर्मल रिलेशन की बात करता हूं तो उसमें क्या रहता है कि जब आप चेंज होते हैं आपके चेंज के साथ-साथ आपका

02:52

Speaker A

पार्टनर भी चेंज होता है। लेकिन जब एक नार्सिसिस्टिक रिलेशन की बात होती है, हमारा पार्टनर जब टॉक्सिक है, मैनपुलेटिव है, तो वह हमारे इस चेंज को एक थ्रेट के रूप में पर्सिव करता है और वो रिएक्शन अभी भी प्रेजेंट है या नहीं। पुराने वाला उसको

03:06

Speaker A

चेक करने के लिए वह अपनी हरकतों को ज्यादा बढ़ा सकता है। अब वह अपनी हरकतों को बढ़ाता है यानी कि प्रोवोक करता है हमें। प्रोवोक कैसे कर सकता है? वो पहले से ज्यादा हमें क्रिटिसाइज कर सकता है। बार-बार पुराने इंसिडेंट्स को लाएंगे

03:19

Speaker A

कन्वर्सेशंस के बीच में। जबरदस्ती। अब हम बदल रहे हैं जो कि एक अच्छी चीज है और हमारे बदलाव को एक गलत रूप में प्रेजेंट करके हमें एक कर देंगे कि भाई हम गलत काम कर रहे हैं। हमें एक्यूज करते हैं कि आप

03:31

Speaker A

चेंज हो रहे हो। तो यह गलत है। पहले से ज्यादा ही इमोशनल होने की वो कोशिश करते हैं। बात पे सेंसिटिव हो जाते हैं। रिएक्शन देते हैं। जस्ट टू प्रोवोक अस। हमें प्रवोक करने के टैक्टिक्स होते हैं। तो अगर हम ऐसा बदलाव अपने नार्सिसिस्टिक

03:44

Speaker A

पार्टनर के अंदर देख रहे हैं तो इसका मतलब क्या है? हमें एक यहां पे आंसर मिल गया है कि हम उनका जो पहले वाला तरीका था रिस्पॉन्ड करने का वह फॉलो नहीं कर रहे हैं। अब जब आप रिएक्ट करना बंद कर देते हो तो एक चीज

03:55

Speaker A

मैं आपको बता दूं इनिशियल बेसिस पे आपको बुरा लगेगा। क्यों बुरा लगेगा? देखो सीधी सी बात है। आप उस नार्सिसिस्टिक पार्टनर के साथ इतने अरसे से रह रहे हैं। आप यूजुअल तरीके से रिएक्ट करने के हैबिचुअल हैं। अब आप एक नई हैबिट को अडॉप्ट कर रहे

04:09

Speaker A

हैं। अब इसप्टेशन में समय लगता है। चेंज इंस्टेंटली नहीं आता है। जस्ट बिकॉज़ हम बिहेवियर में चेंज ला रहे हैं। हमारी इमोशनल कंडीशन एकदम से नहीं बदलती। वह धीरे-धीरे बदलती है। इस वजह से इनिशियल बेसिस पे हमें बुरा लग सकता है। देखिए

04:25

Speaker A

क्या होता है? हमें आदत होती है कुछ पैटर्न्स को रेगुलर बेसिस पे फॉलो करने की। जैसे हमें आदत थी बार-बार अपने को डिफेंड करने की। हमें आदत थी बार-बार यह एक्सपेक्ट करने की कि अब हमें क्रिटिसाइज किया जाएगा। अब हमारे अंदर कमियों को

04:39

Speaker A

निकाला जाएगा। हमें आदत थी कि इस रिलेशन में पीस को मेंटेन करने की रिस्पॉन्सिबिलिटी मेरी ही है। दूसरों के अप्रूवल को सीक करने की आदत थी हमारी। उनके मूड को स्टडी करने की बुरी आदत थी हमारी। तो इन आदतों से हम इस रिलेशन में

04:53

Speaker A

सर्वाइव कर रहे थे। इसलिए जब इन आदतों से हम बाहर आने का अटेम्प्ट करते हैं तो क्योंकि यह आदतें हैबिट होती हैं ना। अब हैबिट से बाहर आओगे तो विड्रॉल सिम्टम्स तो आते हैं ना। तो यहां पर भी विड्रॉल

05:07

Speaker A

सिम्टम्स कैसे आते हैं? आपको गिल्ट हो सकता है। बार-बार आप एशियस फील कर सकते हैं। बिना बात की रेस्टलेस आपको हो सकती है। थोड़ी बहुत कंफ्यूजन आपको रहेगी अपने इस चेंज बिहेवियर के साथ और एक टेंप्टेशन अंदर रह सकती है। रिस्पॉन्स करना है। और

05:24

Speaker A

यहां पे रिस्पांस बेसिकली क्या है? रिएक्ट करना है कि मुझे रिएक्ट करना है, रिएक्ट करना है। यह टेंप्टेशन हमारे अंदर रहती है। तो, यह चीज अगर आप फील कर रहे हैं, तो यह एक पॉजिटिव साइन है। तो, इनिशियल बेसिस

05:35

Speaker A

पर अगर बुरा लग रहा है, मेजॉरिटी ऑफ अस जब हम एक नार्सिसिस्ट को टैकल करने जाते हैं। मेजॉरिटी इस पॉइंट पे आकर सरेंडर कर देते हैं। क्योंकि उनको लगता है कुछ गलत हो रहा है। इट्स जस्ट नॉर्मल साइकोलॉजिकल

05:49

Speaker A

कंडीशनिंग। पुराने पैटर्न को ब्रेक करके नए पैटर्न को डालोगे। अनकंफर्टेबल तो फील होगा ना इनिशियल बेसिस पे। कुछ दिन बस आपको इस इमोशन को हैंडल करना है। बाद में फिर आप इसके हैबिचुअल हो जाएंगे। आपके अंदर एक बड़ा पॉजिटिव चेंज आता है कि आपको अपना

06:03

Speaker A

पॉइंट ऑफ व्यू, अपने साइड ऑफ स्टोरी को बार-बार प्रूफ करने की जरूरत नहीं होती है। तो यहां पे उसका मतलब क्या है कि भाई आई डू नॉट नीड टू प्रूव कि आई एम राइट। यह वाली जो टेंप्टेशन है हमारी कम होती है

06:14

Speaker A

क्योंकि अब आप अपने फोकस को शिफ्ट कर देते हैं दूसरे के वैलिडेशन के ऊपर नहीं, इंटरनल पीस के ऊपर कि मुझे पता है मेरा पॉइंट ऑफ व्यू क्या है। अब मैं दूसरे को प्रूफ करता नहीं फिरूंगा या फिरूंगी कि मेरा पॉइंट ऑफ

06:26

Speaker A

व्यू सही है। आई एम राइट। आई नो मैं अपने लिए सही हूं। तो यह इंटरनल वैलिडेशन वाला जो फैक्टर है, यह बढ़ने लगता है। एक और चेंज आपके अंदर क्या आता है? यू बिकम लेस प्रेडिक्टेबल। पहले क्या होता था? जब आपको

06:41

Speaker A

क्रिटिसाइज करता था आपका नार्सिसिस्टिक पार्टनर तो आप अपने को डिफेंड करते थे। जब वह जबरदस्ती विड्र करते थे अपने आप को रिलेशन से तो आप उनका पीछा करते थे। यानी कि आप चेज करते थे कि क्यों मुझे अवॉयड कर

06:51

Speaker A

रहे हो? क्यों मुझे साइलेंट ट्रीटमेंट दे रहे हो। जब वो आपको किसी भी चीज के लिए एक्यूज़ करते थे तो आपको एक्सप्लेन करना पड़ता था कि मैं गलत नहीं हूं। और जब वो आपको प्रोवोक करते थे तो आप फिर वहां पर

07:01

Speaker A

आर्ग्यू करते थे, लड़ते थे और उनको वो सप्लाई देते थे अटेंशन की। यह था आपका पुराना पैटर्न। अब जब आपका यह पैटर्न बदल रहा है, आपका नार्सिसिस्टिक पार्टनर इस बदलाव को लेकर हैबिचुअल नहीं है, तो अब वह प्रेडिक्ट नहीं कर पा रहा है। क्योंकि अब

07:15

Speaker A

आप रिएक्शन करना बंद कर रहे हैं और आप रिस्पॉन्ड करना शुरू कर चुके हैं। जिसमें आप रुकते हैं और चूज़ करते हैं कि मुझे यहां रिस्पॉन्ड करना है या नहीं करना। वह सारा कॉन्शियस कंट्रोल आपका बना रहता है। यह

07:28

Speaker A

आपको नॉन प्रिडिक्टेबल बना देता है। अनप्रिडिक्टेबल बना देता है। जिसकी वजह से आपका नार्सिसिस्टिक पार्टनर ज्यादा आपको प्रोवोक करने की कोशिश करता है। एक डिफरेंस हमें समझना है। रिएक्शन ना देना डजंट मीन कि आप अपने आप को सप्रेस कर रहे

07:42

Speaker A

हैं। कई बार लोगों को यह कंफ्यूजन हो जाती है कि मैं रिएक्शन नहीं दे रहा हूं। इसका मतलब यह तो नहीं मैं अपने को सप्रेस कर रहा हूं। इनके डिफरेंस को हम समझेंगे। ना रिएक्शन देने का मतलब यह नहीं है कि आप

07:53

Speaker A

बिना बात के अब्यूज को अलव कर रहे हैं। कोई भी आपसे जिस भी तरीके के डिसिस्पेक्टफुल मैनर से अगर बात करता है तो आप उसको अलव कर देते हैं। नो रिएक्शन का मतलब यह नहीं है कि आप प्रिटेंड कर रहे

08:03

Speaker A

हैं कि मुझे बुरा नहीं लगा। यह चीज अगर आप करते हैं तो यह होता है कि आप अपने को सप्रेस कर रहे हैं। नो रिएक्शन का मतलब आ जाता है कि आपको लगता है कि यहां पर मुझे कुछ बोलना चाहिए या फिर नहीं बोलना चाहिए।

08:15

Speaker A

आप अपने इमोशंस को अंडरस्टैंड करते हैं। आप अपने फीलिंग्स को समझते हैं। लेकिन रिएक्शन करने की पावर आपके अ...

08:27

Speaker A

के रिस्पांस में कन्वर्ट हो जाता है। यहां पे हमने एक बात को समझा है। हमारे इमोशंस जो मैंने पहले भी बताया था हमें डिक्टेट नहीं कर रहे हैं। यहां पर हम अपने इमोशंस को और अच्छे से समझ पा रहे हैं और समझने

08:38

Speaker A

के बाद हम चूज़ करते हैं कि अब हमें आगे कैसे रिएक्शन देना है। तो, यह चीजें होती है। इन चेंजेस के थ्रू हम गो थ्रू होते हैं जब हम रिएक्शन देना बंद कर देते हैं किसी भी नार्सिसिस्ट को। बात आती है कि

08:53

Speaker A

क्या आप इस नो रिएक्शन की स्टेट पर पहुंच चुके हैं या नहीं? बहुत सारे लोग हैं जो इस स्टेट को अचीव करना चाहते हैं। तो अगर हम अचीव करना चाहते हैं तो अचीव करें तो करें कैसे? उसके लिए मेरे पास आपको देने

09:05

Speaker A

के लिए दो ऑप्शंस हैं। पहला ऑप्शन है आप इसके लिए पर्सनल थेरेपी ले सकते हैं। मैं यहां पर पर्सनल थेरेपी सेशंस प्रोवाइड कराता हूं विथ द हेल्प ऑफ हिप्नोथेरेपी जिसकी मदद से हम अपने सबकॉन्शियस माइंड को रिप्रोग्राम करते हैं। इस रिप्रोग्रामिंग

09:18

Speaker A

से हम अपने पुराने पैटर्न को तोड़ के नए पैटर्न को इंस्टॉल करते हैं और नया पैटर्न जो है किसी भी प्रकार के नार्सिसिस्टिक अब्यूज को टोलरेट नहीं करता है। यह होता है जब हम पर्सनल थेरेपी सेशंस को लेते हैं

09:28

Speaker A

जो आप फिजिकली आके भी करवा सकते हैं या वर्चुअली ऑनलाइन सेशंस भी ले सकते हैं। अब इसके अलावा दूसरा ऑप्शन क्या है? दूसरा ऑप्शन कंप्लीटली फ्री ऑफ कॉस्ट है। उसके लिए मैंने एक हिप्नोथेरेपी का सेशन ऑलरेडी बना रखा है हमारे इसी YouTube चैनल के

09:40

Speaker A

ऊपर। उसका लिंक मैं इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में पिन कर दूंगा। आपने उस सेशन को डेली बेसिस पर सुनना है जो आपकी मेंटल रीोग्रामिंग करने में मदद करता है। YouTube का सेशन भी उतना ही इफेक्टिव है जितना हमारा पर्सनल सेशंस रहते हैं।

09:53

Speaker A

डिफरेंस यह रह जाता है कि पर्सनल सेशन ज्यादा स्पेसिफिक हो जाते हैं। वो आपके लाइफ को सेंटर रख के उसके बेसिस पे सेशन कंडक्ट होता है। YouTube वाला सेशन जो है वो जनरलाइज्ड है बट उतना ही पावरफुल रहता

10:06

Speaker A

है। ऑलराइट। हेल्प आपके लिए है। बट हां, जस्ट बिकॉज़ आप चेंज हो रहे हैं। डजंट मीन कि कुछ गलत है। यह नए पॉजिटिव चेंज के लिए हमारा हमारी जो माइंड और बॉडी की जो कोऑर्डिनेशन वाली स्किल है वो भी हैबचुअल

10:21

Speaker A

नहीं है। तो क्योंकि उसकी हैबचुअल नहीं है। तो हमें थोड़ी ए्जायटी घबराहट बेचैनी इनिशियल बेसिस पे होती है। इसको हमने बस थोड़े टाइम तक सहन करके इनको पास होने देना है। बाद में फिर हमारी जो एंपावरमेंट है वो बहुत अच्छे तरीके से बाहर आती है।

10:35

Speaker A

तो आज की वीडियो इसी टॉपिक के ऊपर थी। अगर कोई पॉइंट आपको समझ में नहीं आया है तो मुझे कमेंट में लिख के जरूर बताइएगा। मैं कोशिश करूंगा उसके ऊपर एक शॉर्ट वीडियो बनाने की। उसके अलावा ऐसे ही सिमिलर

10:44

Speaker A

टॉपिक्स अगर आपके पास है जिसके ऊपर आप वीडियोस देखना चाहे तो रिकमेंड बिल्कुल करिए। मिलता हूं अगली वीडियो में। तब तक अपना ध्यान रखें। टेक केयर। बाय-ब।

Topics: नार्सिसिस्ट रिएक्शन और रिस्पांस मानसिक बदलाव टॉक्सिक रिलेशनशिप इमोशनल कंट्रोल हिप्नोथेरेपी मेंटल हेल्थ प्रवोकेशन सेल्फ कंट्रोल थेरपी


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