**The Truth Behind STING ENERGY Drink 🍷 Chapri Tag | Red Bull Vs Sting | Case Study | Live Hindi — Transcript & Summary | SozAI**
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स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की सफलता, कीमत, मार्केटिंग और रेड बुल से मुकाबले की कहानी।

## Key Takeaways

- स्टिंग की कम कीमत और व्यापक वितरण ने इसे भारतीय बाजार में सफल बनाया।
- एफएसएसएआई के नियमों ने कुछ ब्रांड्स को नुकसान पहुंचाया, जिससे स्टिंग को फायदा मिला।
- स्टिंग ने रेड बुल जैसे प्रीमियम ब्रांड को टक्कर देते हुए मार्केट में अपनी जगह बनाई।
- पेप्सिको की रणनीति ने स्टिंग को छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचाने में मदद की।
- एनर्जी ड्रिंक मार्केट में स्टिंग की ग्रोथ पिछले 30 वर्षों में सबसे तेज रही है।

## What the video covers

- स्टिंग एनर्जी ड्रिंक ₹20 की किफायती कीमत पर मजदूरों और कॉलेज स्टूडेंट्स में लोकप्रिय हुई।
- रेड बुल जैसे प्रीमियम ब्रांड को टक्कर देते हुए स्टिंग ने भारतीय मार्केट में बड़ा कब्जा किया।
- 2001 से भारत में एनर्जी ड्रिंक मार्केट का विकास और विभिन्न ब्रांड्स की असफलताओं का जिक्र।
- रेड बुल ने शुरुआत में युवा और जिम फ्रिक्स को टारगेट किया, जबकि स्टिंग ने आम जनता को ध्यान में रखा।
- पेप्सिको ने स्टिंग को 2017 में भारत में लॉन्च किया, जो मूल रूप से रॉकस्टार कंपनी का ब्रांड था।
- एफएसएसएआई के नियमों के कारण कुछ एनर्जी ड्रिंक्स पर बैन लगा, जिससे स्टिंग को फायदा हुआ।
- स्टिंग की सफल मार्केटिंग रणनीति में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की कमी और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क शामिल था।
- स्टिंग ने छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच बनाई, जिससे इसका मार्केट शेयर तेजी से बढ़ा।
- 2023 तक स्टिंग ने भारतीय एनर्जी ड्रिंक मार्केट में 90% से अधिक हिस्सेदारी हासिल कर ली।
- रेड बुल के मुकाबले स्टिंग की कीमत, पैकेजिंग और सप्लाई चैन ने इसे आम लोगों की पहली पसंद बनाया।

## Chapters

1. 00:00 स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की लोकप्रियता और कीमत
2. 00:54 एनर्जी ड्रिंक मार्केट का इतिहास और ब्रांड्स की असफलताएं
3. 01:48 रेड बुल का भारतीय मार्केट में प्रवेश और प्रभाव
4. 02:45 पेप्सिको की रणनीति और स्टिंग का लॉन्च
5. 04:44 एफएसएसएआई के नियम और मार्केट में बदलाव
6. 05:52 स्टिंग की मार्केटिंग रणनीति और वितरण नेटवर्क
7. 07:00 स्टिंग की सफलता और मार्केट शेयर में वृद्धि
8. 08:42 स्टिंग और रेड बुल के बीच मुकाबला और भविष्य

Answers

## Questions about this video

स्टिंग एनर्जी ड्रिंक इतनी सस्ती क्यों है?

स्टिंग को भारत में ही मैन्युफैक्चर किया जाता है और पेप्सिको के मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की वजह से इसकी कीमत ₹20 रखी गई है, जो इसे आम लोगों के लिए किफायती बनाती है।

क्या स्टिंग एनर्जी ड्रिंक सेहत के लिए नुकसानदायक है?

एफएसएसएआई ने कैफीन की सीमा तय की है और 500 ml से ज्यादा कंजम्पशन को हानिकारक बताया है। स्टिंग इन नियमों का पालन करता है, इसलिए उचित मात्रा में सेवन सुरक्षित माना जाता है।

स्टिंग ने रेड बुल को भारतीय मार्केट में कैसे टक्कर दी?

स्टिंग ने कम कीमत, मजबूत सप्लाई चैन और छोटे शहरों व गांवों तक पहुंच बनाकर रेड बुल के प्रीमियम इमेज को चुनौती दी और तेजी से मार्केट शेयर बढ़ाया।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

सिर्फ ₹20 में मिलने वाली इस रेड बॉटल को एक मजदूर पीता है अपनी थकान मिटाने के लिए। तो वहीं एक कॉलेज स्टूडेंट नींद भगाने के लिए। कुछ लोग इसे गरीबों का रेड बुल कहते हैं, तो कोई छपरियों की ड्रिंक।

00:13

Speaker A

जी हां, अब बात हो रही है स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की जो आज इंडियन मार्केट की किंग बन चुकी है। इसने तो रेडबुल जैसे प्रीमियम ब्रांड का भी ऑलमोस्ट खात्मा कर दिया है। लेकिन इतनी बदनाम होने के बाद भी स्टिंग

00:26

Speaker A

जी हां, अब बात हो रही है स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की, जो आज इंडियन मार्केट की किंग बन चुकी है। इसने तो रेडबुल जैसे प्रीमियम ब्रांड का भी ऑलमोस्ट खात्मा कर दिया है। लेकिन इतनी बदनाम होने के बाद भी स्टिंग

00:41

Speaker A

पहले 2001 में CocaC कोलाa ने शॉक नाम से एक एनर्जी ड्रिंक ल्च की और 2008 में Pepsio ने शोबे के साथ अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन दोनों ही अटेम्प्ट्स बुरी तरह से फेल रहे और कुछ ही टाइम में यह ड्रिंक्स

00:54

Speaker A

इतना बड़ा नाम कैसे बना? यह ड्रिंक इतनी सस्ती क्यों है? और क्या वाकई यह सेहत के लिए नुकसानदायक है? सब कुछ हम डिटेल में जानेंगे आज के इस वीडियो में। दोस्तों, भारत में एनर्जी ड्रिंक का सफर काफी ज्यादा इंटरेस्टिंग रहा है। सबसे

01:09

Speaker A

ब्रांडिंग ऐसी जो सीधे कॉलेज जाने वाले यंगस्टर्स और जिम फ्रिक्स को टारगेट करती थी। Redbul ने अपने आप को शुरुआत से ही एक कूल ड्रिंक के रूप में प्रेजेंट किया और कुछ ही सालों में इसका मार्केट शेयर 60%

01:22

Speaker A

पहले 2001 में कोका कोला ने शॉक नाम से एक एनर्जी ड्रिंक लॉन्च की और 2008 में पेप्सिको ने शोबे के साथ अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन दोनों ही अटेम्प्ट्स बुरी तरह से फेल रहे और कुछ ही टाइम में यह ड्रिंक्स

01:35

Speaker A

सक्सेस को ही देखकर मार्केट में एक के बाद एक नए खिलाड़ी कूद पड़े। यूएसए से आया मॉन्सर एनर्जी जो कि इंटरनेशनल लेवल पर रेड बुल का सबसे बड़ा कॉम्पिटिट माना जाता है। तो वहीं इंडिया में ल्च किया गया

01:48

Speaker A

मार्केट से गायब हो गई। लेकिन फिर आया साल 2009 और यहीं से गेम पूरी तरह से बदल गया। इंडियन मार्केट में एंट्री करता है ऑस्ट्रेलियन ब्रांड रेड बुल। 250 ml का एक चमकदार कैन करीब ₹100 की कीमत और

02:04

Speaker A

लेकिन यह सारी कोशिशें ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। कुछ ब्रांड छोटे कस्टमर सेगमेंट में सिमट कर रह गए तो कुछ बिना कोई शोरशराबे के गायब से हो गए। और इस तरह से 2015 तक इंडियन एनर्जी ड्रिंक मार्केट का

02:17

Speaker A

ब्रांडिंग ऐसी जो सीधे कॉलेज जाने वाले यंगस्टर्स और जिम फ्रिक्स को टारगेट करती थी। रेड बुल ने अपने आप को शुरुआत से ही एक कूल ड्रिंक के रूप में प्रेजेंट किया और कुछ ही सालों में इसका मार्केट शेयर 60%

02:31

Speaker A

था, वहीं दूसरी तरफ Pe पेप्सिको के लिए हालात बुरे होते जा रहे थे। 2008 में सूबे के फेलियर ने Pepsi के कॉन्फिडेंस को काफी तगड़ा झटका दिया था और उसके बाद से ही वह बस एक परफेक्ट कमबैक अपॉर्चुनिटी की तलाश

02:45

Speaker A

से भी ज्यादा हो गया। रेड बुल ने ना सिर्फ इंडियन मार्केट में एनर्जी ड्रिंक की एक पूरी कैटेगरी खड़ी की बल्कि यह भी दिखाया कि एक एनर्जी ड्रिंक लोगों की लाइफस्टाइल का भी हिस्सा बन सकती है। और फिर इसी

03:02

Speaker A

नुकसान की भरपाई कर सके बल्कि मार्केट में उसकी एक नई पहचान भी बना दी। लेकिन दोस्तों Pepsio अभी अपने गिरते हुए ब्रांड्स और भारी लॉसेस से उबरने की प्लानिंग में लगा ही था। तभी इंडियन रेगुलेटरी एजेंसीज ने एक ऐसा कदम उठा लिया

03:17

Speaker A

सक्सेस को ही देखकर मार्केट में एक के बाद एक नए खिलाड़ी कूद पड़े। यूएसए से आया मॉन्सर एनर्जी, जो कि इंटरनेशनल लेवल पर रेड बुल का सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर माना जाता है। तो वहीं इंडिया में लॉन्च किया गया

03:32

Speaker A

लीटर से ज्यादा नहीं हो सकती। और फिर इसके बाद 1 जुलाई 2017 को एक और सख्त रूल लागू हुआ कि अब हर बोतल या कैन पर यह क्लियरली लिखना पड़ेगा कि 500 ml से ज्यादा कंजशन हेल्थ के लिए हार्मफुल है। इन सख्त नियमों

03:47

Speaker A

जिंगा और क्लाउड 9, और इन दोनों ही ड्रिंक्स की खास बात थी इनका ₹2500 वाला अफोर्डेबल प्राइस टैग। और हां, कोका कोला भी कहां पीछे रहने वाला था। इसने अपना पुराना प्लान फिर से एक्टिवेट किया और लॉन्च किया बर्न नाम का एक एनर्जी ड्रिंक।

04:02

Speaker A

करेंगे। यही सोचकर 2017 में उन्होंने स्टिंग नाम की एक एनर्जी ड्रिंक इंडियन मार्केट में ल्च कर दी। इंटरेस्टिंग बात यह थी कि स्टिंग Pepsio का अपना ब्रांड नहीं था। असल में इस एनर्जी ड्रिंक की शुरुआत रॉकstar नाम की एक अमेरिकन कंपनी

04:17

Speaker A

लेकिन यह सारी कोशिशें ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। कुछ ब्रांड छोटे कस्टमर सेगमेंट में सिमट कर रह गए तो कुछ बिना कोई शोरशराबे के गायब से हो गए। और इस तरह से 2015 तक इंडियन एनर्जी ड्रिंक मार्केट का

04:32

Speaker A

पेप्सिको ने देखा कि इंडियन मार्केट भी फिलीपींस और वियतनाम से काफी मिलती जुलती है। इसीलिए उन्होंने वही स्ट्रेटजी अपनाते हुए स्टिंग को खरीद लिया और उसे इंडिया में लेकर आए। इंडिया में स्टिंग का लॉन्च सीधा-सीधा एक ही टारगेट के साथ किया गया

04:47

Speaker A

असली किंग सिर्फ एक ही था, रेड बुल। इसने खुद को एक प्रीमियम सिंबल बना लिया था। एक ऐसी ड्रिंक जिसे पीकर लोग कूल और क्लासी दिखना चाहते थे। लेकिन दोस्तों, एक तरफ जहां रेड बुल का एंपायर एक्सपेंड कर रहा

05:02

Speaker A

को एक प्योर एनर्जी ड्रिंक की जगह नॉर्मल सॉफ्ट ड्रिंक की तरह पोजीशन करना चाहता था। मतलब एक ऐसी ड्रिंक जो रेड बुल की तरह हाई स्टेटस का सिंबल ना रहे। बल्कि आम आदमी भी बिना सोचे समझे उसे कंज्यूम कर

05:15

Speaker A

था, वहीं दूसरी तरफ पेप्सिको के लिए हालात बुरे होते जा रहे थे। 2008 में सूबे के फेलियर ने पेप्सी के कॉन्फिडेंस को काफी तगड़ा झटका दिया था और उसके बाद से ही वह बस एक परफेक्ट कमबैक अपॉर्चुनिटी की तलाश

05:28

Speaker A

थे। ऊपर से Pepsio ने इस ड्रिंक को लॉन्च करते टाइम कोई बड़ा सेलिब्रिटी कैंपेन या फिर हाई बजट टीवी एड्स भी नहीं चलाया था। बल्कि वो सिर्फ अपने मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के दम पर बिना ज्यादा शोरशराबे के ही स्टिंग को मार्केट में लेकर आए थे।

05:44

Speaker A

में था। 2013 से 2016 के बीच पेप्सी, ट्रॉपिकना और उसके दूसरे कई सारे कोर ब्रांड्स का मार्केट शेयर गिरने लगा था, जिससे इंडिया में पेप्सिको को लगातार लॉसेस फेस करने पड़े। और अब पेप्सी को चाहिए था एक ऐसा दाव जो ना सिर्फ उसके पुराने

05:57

Speaker A

चेंज हुआ जब 2020 में Pepsio ने स्टिंग को एक नए अंदाज में ल्च किया। 250 ml की पेट बॉटल और कीमत सिर्फ ₹20। अब दोस्तों, यह प्राइिंग कोई छोटी बात नहीं थी बल्कि यह वो फैसला था जिसने पूरी एनर्जी ड्रिंक

06:13

Speaker A

नुकसान की भरपाई कर सके बल्कि मार्केट में उसकी एक नई पहचान भी बना दी। लेकिन दोस्तों, पेप्सिको अभी अपने गिरते हुए ब्रांड्स और भारी लॉसेस से उबरने की प्लानिंग में लगा ही था। तभी इंडियन रेगुलेटरी एजेंसीज ने एक ऐसा कदम उठा लिया

06:27

Speaker A

गांव के जनरल स्टोर तक हर कोई इसे स्टॉक करने लगा था। रेड बुल अब भी ₹100 में था और स्टिंग सिर्फ ₹20 में। कुछ ही महीनों में जो ड्रिंक पहले सिर्फ कूल कैफेस और नाइट क्लब में दिखती थी, वह अब

06:39

Speaker A

जिसने पूरे एनर्जी ड्रिंक मार्केट को हिला कर रख दिया। असल में एफएसएसएआई यानी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दिसंबर 2016 में एक नया रूल इंट्रोड्यूस किया। अब किसी भी एनर्जी ड्रिंक में कैफीन की लिमिट 300 एमg पर

06:55

Speaker A

उम्मीद नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2021 में इंडिया के अंदर स्टिंग ने करीब 2.3 करोड़ बॉटल्स बेचे। फिर 2022 में यह नंबर बढ़कर 6.5 करोड़ हो गया और 2023 में तो रिकॉर्ड ही टूट गया। 11 करोड़ बॉटल्स बिक गए। मतलब कि सिर्फ 4 सालों में ही

07:14

Speaker A

लीटर से ज्यादा नहीं हो सकती। और फिर इसके बाद 1 जुलाई 2017 को एक और सख्त रूल लागू हुआ कि अब हर बोतल या कैन पर यह क्लियरली लिखना पड़ेगा कि 500 ml से ज्यादा कंजम्पशन हेल्थ के लिए हार्मफुल है। इन सख्त नियमों

07:30

Speaker A

7% पर आ गया। यहां तक कि Pepsio का भी कहना है कि स्टिंग की ग्रोथ रेट पिछले 30 सालों में किसी भी सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड से कहीं ज्यादा रही है। और दोस्तों स्टिंग के इस कामयाबी के पीछे कोई एक नहीं बल्कि

07:43

Speaker A

के चलते कुछ एनर्जी ड्रिंक जिनमें हानिकारक इंग्रेडिएंट्स इस्तेमाल किए जा रहे थे, उन पर बैन लग गया और भारत की एनर्जी ड्रिंक मार्केट में एक खाली स्पेस बन गया। पेप्सिको ने भी यह मौका देखा और यह डिसाइड किया कि वह इसी गैप को ही फिल

07:56

Speaker A

कि बाहर से इंपोर्ट होता था। मतलब कि उसके हर एक कैन को इंडिया में लाने का कॉस्ट बहुत ज्यादा था। इसके अपोजिट स्टिंग को यहां इंडिया में ही मैन्युफैक्चर किया गया और pepsio के बॉटलिंग पार्टनर वरुण बेवरेजेस का वेल ऑर्गेनाइज्ड नेटवर्क इस

08:11

Speaker A

करेंगे। यही सोचकर 2017 में उन्होंने स्टिंग नाम की एक एनर्जी ड्रिंक इंडियन मार्केट में लॉन्च कर दी। इंटरेस्टिंग बात यह थी कि स्टिंग पेप्सिको का अपना ब्रांड नहीं था। असल में इस एनर्जी ड्रिंक की शुरुआत रॉकस्टार नाम की एक अमेरिकन कंपनी

08:28

Speaker A

ज्यादा रिटेल स्टोर्स पर मिलने लगा। और दोस्तों, यह वही नेटवर्क था जो कि पेप्सी या कोक जैसे इस्टैब्लिश ब्रांड का होता है। यानी यह ड्रिंक सिर्फ बड़े शहरों तक ही सिमट कर नहीं रहा बल्कि छोटे गांव और कस्बों की किराना पान की दुकानों तक भी

08:42

Speaker A

ने की थी। रॉकस्टार ने स्टिंग को पहले टेस्ट किया था। साउथ ईस्ट एशिया के दो देशों में, फिलीपींस और वियतनाम। क्योंकि वहां की मार्केट में वैल्यू फॉर मनी प्रोडक्ट्स की बहुत डिमांड थी और इसीलिए उन देशों में स्टिंग काफी सफल भी रही।

08:57

Speaker A

ग्लोबल कैंपेन से कूल दिखाने में लगा रहा वहीं स्टिंग ने शुरुआत में किसी बड़े सेलिब्रिटी ब्रांड एंबेसडर का सहारा नहीं लिया। इसकी ब्रांडिंग एकदम प्योर देसी अंदाज में की गई जिससे कि आम लोग भी रिलेट कर सके। लाल चमकदार बॉटल, कैंडी जैसा मीठा

09:13

Speaker A

पेप्सिको ने देखा कि इंडियन मार्केट भी फिलीपींस और वियतनाम से काफी मिलती जुलती है। इसीलिए उन्होंने वही स्ट्रेटजी अपनाते हुए स्टिंग को खरीद लिया और उसे इंडिया में लेकर आए। इंडिया में स्टिंग का लॉन्च सीधा-सीधा एक ही टारगेट के साथ किया गया

09:31

Speaker A

लेकिन फिर इसके बाद Pepsio ने स्टिंग की रीच को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए अपना मार्केटिंग स्किल बढ़ाया और बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार को ब्रांड एंबेसडर बना लिया। अब स्टिंग की रीच सिर्फ दुकानों पर नहीं बल्कि टीवी स्क्रीन्स और थिएटर्स तक

09:46

Speaker A

था और वह था रेड बुल के मार्केट शेयर को हथियाना। इसीलिए जब स्टिंग लॉन्च हुई तो फिर वह आई रेड बुल जैसे ही 250 ml की कैन में, लेकिन प्राइस था एग्जैक्टली आधा, यानी सिर्फ ₹50। शुरुआत में पेप्सिको इस स्टिंग

10:00

Speaker A

मिनट की एक छोटी सी मूवी के रूप में दिखाया गया। 133 सेकंड के इस ऐड में एक इंटरेस्टिंग कहानी दिखाई गई जिसमें एक सिक्योरिटी गार्ड स्टिंग पीकर एनर्जी से भर जाता है और एक स्नाइपर की साजिश को नाकाम कर देता है जिससे एक इंडस्ट्री टकून

10:16

Speaker A

को एक प्योर एनर्जी ड्रिंक की जगह नॉर्मल सॉफ्ट ड्रिंक की तरह पोजीशन करना चाहता था। मतलब एक ऐसी ड्रिंक जो रेड बुल की तरह हाई स्टेटस का सिंबल ना रहे, बल्कि आम आदमी भी बिना सोचे समझे उसे कंज्यूम कर

10:29

Speaker A

लगे। साथ ही बहुत सारे लोगों ने इसे छपरियों की एनर्जी ड्रिंक का भी नाम दिया। अब दोस्तों इसके पीछे एक हार्स लेकिन असल सच था कि स्टिंग के सबसे बड़े खरीदार वो दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग बने जो कि

10:42

Speaker A

सके। लेकिन शुरुआती कुछ साल स्टिंग के लिए आसान नहीं थे। क्योंकि उस टाइम इंडिया में एनर्जी ड्रिंक एक निश प्रोडक्ट की तरह देखा जाता था। मतलब एक ऐसी ड्रिंक जो कि कभी-कभी लोग शौक के तौर पर कंज्यूम करते

10:56

Speaker A

में बहुत हेल्प करती है। लेकिन फिर दोस्तों इसके बाद से पढ़े लिखे तबके के बहुत सारे शहरी लोग अबस्टिंग पीने में शर्म महसूस करने लगे। सोचिए एक ड्रिंक जो एनर्जी के लिए बनी थी उसे क्लास और सोशल इमेज के तराजू में तोला जाने लगा। लेकिन

11:12

Speaker A

थे। ऊपर से पेप्सिको ने इस ड्रिंक को लॉन्च करते टाइम कोई बड़ा सेलिब्रिटी कैंपेन या फिर हाई बजट टीवी एड्स भी नहीं चलाया था। बल्कि वो सिर्फ अपने मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के दम पर बिना ज्यादा शोरशराबे के ही स्टिंग को मार्केट में लेकर आए थे।

11:26

Speaker A

स्टिंग की ग्रोथ कभी नहीं रुकी। इसके अलावा बहुत सारे लोगों के मन में स्टिंग को लेकर कुछ हेल्थ कंसर्न्स भी हैं और लोग इसे लाल रंग वाला जहर, लत लगाने वाला नशा और ना जाने क्या-क्या कहते हैं। पर इन सभी

11:40

Speaker A

इसीलिए शुरुआत के लगभग 2 साल इस स्टिंग के लिए कुछ खास नहीं रहे। मगर फिर धीरे-धीरे इसने अपनी जगह बनानी शुरू की। खासकर उन शहरों और कस्बों में जहां रेड बुल जैसे ड्रिंक्स की रेंज कम थी। लेकिन असली गेम तब

11:53

Speaker A

हूं वह पूरी तरह इंटरनेट पर की गई रिसर्च पर बेस्ड है और मैं किसी भी ड्रिंक को पीने के लिए आपको प्रमोट या इनकरेज नहीं कर रहा हूं। सबसे पहले बात करते हैं स्टिंग के लाल रंग की जिसके चलते लोग इसकी

12:06

Speaker A

चेंज हुआ जब 2020 में पेप्सिको ने स्टिंग को एक नए अंदाज में लॉन्च किया। 250 ml की पेट बॉटल और कीमत सिर्फ ₹20। अब दोस्तों, यह प्राइसिंग कोई छोटी बात नहीं थी, बल्कि यह वो फैसला था जिसने पूरी एनर्जी ड्रिंक

12:20

Speaker A

लेकिन वह तब होगा जब आप लंबे समय तक हर रोज दो-तीन बॉटल्स पी रहे हो। इसके अलावा स्टिंग के लिए लोगों में एक परसेप्शन यह भी बहुत कॉमन है कि इससे दिल कमजोर होता है और हार्ट अटैक हो सकता है क्योंकि कुछ

12:33

Speaker A

इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया था। अब स्टिंग एक प्रीमियम प्रोडक्ट नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा प्रोडक्ट बन चुका था जो कि आम सॉफ्ट ड्रिंक के बराबर खड़ा था। पहली बार एक एनर्जी ड्रिंक उस लेवल पर पहुंच चुकी थी जहां गली के पान वाले से लेकर

12:46

Speaker A

में नहीं बल्कि बाजार में मिलने वाली हर एनर्जी ड्रिंक में होता है और इससे हार्ट रेट भी सबका नहीं बढ़ता बल्कि सिर्फ उन लोगों का बढ़ता है जो पहले से हार्ट पेशेंट हैं या फिर जिन्हें एंजायटी की दिक्कत है। अगर स्ट्रिंग की बात करें तो

13:00

Speaker A

गांव के जनरल स्टोर तक हर कोई इसे स्टॉक करने लगा था। रेड बुल अब भी ₹100 में था और स्टिंग सिर्फ ₹20 में। कुछ ही महीनों में जो ड्रिंक पहले सिर्फ कूल कैफेस और नाइट क्लब में दिखती थी, वह अब

13:15

Speaker A

मामले में स्टिंग और रेड बुल ऑलमोस्ट सेम लेवल पर हैं। लेकिन बात जब चीनी की होती है तो यहां पर एक बड़ा डिफरेंस सामने आता है। इस्टिंग में 6.8 ग्राम पर 100 ml चीनी होती है। जबकि रेड बुल में यह क्वांटिटी

13:29

Speaker A

स्टूडेंट्स, मजदूरों और ऑटो ड्राइवर्स की पहली पसंद बन गई। पेप्सिको की स्ट्रांग सप्लाई चेन और एग्रेसिव प्राइसिंग स्ट्रेटजी का जादू ऐसा चला कि सेल्स आसमान छूने लगी और 2020 के बाद स्टिंग ने जो रफ्तार पकड़ी उसकी पेप्सिको को भी शायद

13:43

Speaker A

में स्टिंग पीने के बाद लोगों को शॉर्ट टर्म के लिए एनर्जी का एक बूस्ट मिलता है जिससे उन्हें एक गुड फीलिंग आती है। और इसी फीलिंग को ही बार-बार महसूस करने के लिए लोग इसे रेगुलरली पीने लगते हैं। और

13:56

Speaker A

उम्मीद नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2021 में इंडिया के अंदर स्टिंग ने करीब 2.3 करोड़ बॉटल्स बेचे। फिर 2022 में यह नंबर बढ़कर 6.5 करोड़ हो गया और 2023 में तो रिकॉर्ड ही टूट गया। 11 करोड़ बॉटल्स बिक गए। मतलब कि सिर्फ 4 सालों में ही

14:08

Speaker A

स्पाइक। और इसीलिए बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह ड्रिंक्स साफ तौर पर मना किए गए हैं। लेकिन दोस्तों, अब सवाल उठता है कि आज के दौर पर स्ट्रिंग खड़ा कहां है और इसका फ्यूचर क्या है? देखिए दोस्तों, 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक

14:22

Speaker A

स्टिंग ने इंडियन एनर्जी ड्रिंक मार्केट का पूरा नक्शा ही बदल दिया। 2018 में जहां रेड बुल के पास 75% मार्केट शेयर होता था, 2023 तक स्टिंग अकेला 90% शेयर का किंग बन चुका था। जबकि रेड बुल का शेयर गिरकर सिर्फ

14:38

Speaker A

गुना तक ग्रो कर सकता है। रेडबल जो एक टाइम पर भारत में एनर्जी ड्रिंक का दूसरा नाम माना जाता था। अब सेल्स और मार्केट शेयर की रेस में बहुत पीछे छूट गया है। वहीं दूसरी तरफ Pepsio की इस सक्सेस को

14:50

Speaker A

7% पर आ गया। यहां तक कि पेप्सिको का भी कहना है कि स्टिंग की ग्रोथ रेट पिछले 30 सालों में किसी भी सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड से कहीं ज्यादा रही है। और दोस्तों, स्टिंग के इस कामयाबी के पीछे कोई एक नहीं बल्कि

15:04

Speaker A

पीछे है। और दोस्तों Pepsio भी सिर्फ एक प्रोडक्ट लॉन्च करके ही नहीं रुक गया बल्कि वो लगातार नए फ्लेवर्स भी ला रहा है। फिलहाल की अगर बात करें तो स्टिंग रेड के अलावा ब्लू करंट और गोल्ड नाइट फ्यूल

15:16

Speaker A

काफी सारे रीजन हैं। और एक सबसे बड़ा रीजन तो हम आपको बता ही चुके हैं, जो थी इसकी प्राइसिंग। दूसरा बड़ा फर्क था पैकेजिंग और सप्लाई चैन का। असल में रेड बुल सिर्फ एलुमिनियम कैन में मिलता था, जो

15:29

Speaker A

भी पुराने से पुराने कॉम्पिटिटर्स को हराया जा सकता है। वैसे आप हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा कि क्या आपने कभी यह ड्रिंक पी है और अगर पी है तो इसका टेस्ट आपको कैसा

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