**Self-Disciplined कैसे रहें ? | Avadh Ojha Sir Motivation | Saarthi Inspire — Transcript & Summary | SozAI**
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इस वीडियो में अवध ओझा सर बताते हैं कि कैसे आत्म-अनुशासन से जीवन में सफलता और मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है।

## Key Takeaways

- छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करके उत्साह बढ़ाएं।
- डायरी में अपनी प्रगति दर्ज करें और शेड्यूल का पालन करें।
- ध्यान और योग से मानसिक शक्ति बढ़ाएं।
- मोटिवेशन अस्थायी है, आत्म-अनुशासन स्थायी सफलता का आधार है।
- मन को नियंत्रित करना सफलता की कुंजी है।

## What the video covers

- आत्म-अनुशासन (डिसिप्लिन) कष्ट से आता है और इसे डायरी के माध्यम से बनाए रखना चाहिए।
- छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर धीरे-धीरे प्रगति करनी चाहिए, बड़े लक्ष्य मन को हतोत्साहित करते हैं।
- ध्यान और योग की मदद से मानसिक शक्ति बढ़ाई जा सकती है, जो चुनौतियों से लड़ने में सहायक है।
- मोटिवेशन अस्थायी होता है, इसलिए स्थायी सफलता के लिए आत्म-अनुशासन जरूरी है।
- मन को मजबूत करना आवश्यक है क्योंकि मन बार-बार भटकाने की कोशिश करता है।
- विचारों को नियंत्रित करना सीखना चाहिए, क्योंकि विचार मन को प्रभावित करते हैं।
- डायरी को भगवान की तरह पूजा करनी चाहिए और शेड्यूल का सख्ती से पालन करना चाहिए।
- धीरे-धीरे प्रगति करना चाहिए, जैसे किसी कौशल को सीखने में समय लगता है।
- सकारात्मक सोच और नियमित अभ्यास से मन को गुलाम बनाकर सफलता हासिल की जा सकती है।
- ध्यान की विधि विपासना से सांसों को देखना और मन को नियंत्रित करना सिखाया गया है।

## Chapters

1. 00:00 मन की परेशानियाँ और आत्म-अनुशासन का महत्व
2. 00:56 डिसिप्लिन कैसे कष्ट से आता है और शुरुआत कैसे करें
3. 01:29 छोटे लक्ष्य बनाएं और शेड्यूल का पालन करें
4. 02:38 ध्यान और योग से मानसिक शक्ति बढ़ाना
5. 04:02 विचारों को नियंत्रित करना और मन को मजबूत बनाना
6. 06:29 डायरी का महत्व और शेड्यूल का सख्ती से पालन
7. 06:58 मोटिवेशन की सीमाएं और स्थायी सफलता के लिए अनुशासन
8. 09:17 विपासना और सांसों पर ध्यान केंद्रित करना
9. 10:29 मन को नियंत्रित कर जीवन में सफलता प्राप्त करना
10. 13:24 मन की चालाकी और आत्म-अनुशासन की चुनौती

Answers

## Questions about this video

आत्म-अनुशासन कैसे विकसित करें?

छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर, डायरी में प्रगति दर्ज करके और नियमित शेड्यूल का पालन करके आत्म-अनुशासन विकसित किया जा सकता है। ध्यान और योग भी मानसिक शक्ति बढ़ाने में मदद करते हैं।

ध्यान का आत्म-अनुशासन में क्या योगदान है?

ध्यान मन को नियंत्रित करना सिखाता है, जिससे विचारों पर नियंत्रण रहता है और मानसिक शक्ति बढ़ती है, जो आत्म-अनुशासन बनाए रखने में सहायक होती है।

मोटिवेशन और आत्म-अनुशासन में क्या अंतर है?

मोटिवेशन अस्थायी होता है और केवल काम करने के लिए प्रेरित करता है, जबकि आत्म-अनुशासन स्थायी होता है जो निरंतर प्रयास और सफलता के लिए आवश्यक है।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01

Speaker A

इस दुनिया में हर व्यक्ति अपने मन से परेशान है, लेकिन चूंकि वह उसे देख नहीं पाता, इसलिए दूसरे को परेशानी का कारण बताता है। तुम अपने टारगेट से बढ़कर काम करते हो, उत्साह बढ़ता है, और जब भी तुम

00:12

Speaker A

अपने टारगेट से कम काम करते हो, उत्साह घटता है। डिसिप्लिन एक ऐसी चीज है जो कष्ट से ही आती है। डायरी मतलब डिसिप्लिन। तो यह काम करो, डायरी बनाओ और अपनी स्टैमिना को अपने हिसाब से आगे बढ़ाते चलिए। तुमसे खेल

00:25

Speaker A

रहा है और तुम उसको मजा दे रहे हो। तुमसे मजा ले रहा है, कभी तुमसे कह रहा है। हिंदी रामधारी सिंह दिनकर बहुत बढ़िया। तुम्हें अपने उस मन को मजबूत करना पड़ेगा। वो तुम्हें बार-बार भटका रहा है, उसे मजबूत करना है

00:34

Speaker A

किसी भी कीमत। [संगीत] प जय हिंद फ्रेंड्स। डिसिप्लिन एक ऐसी चीज है जो कष्ट से ही आती है। जैसे बैठ के मत पढ़ो। मैंने यह डाइस ले रखी थी, मैं इस पर पढ़ता था कम से कम तीन से चार घंटे। 12

00:56

Speaker A

घंटे मत करना, वरना स्पाइनल प्रॉब्लम हो जाएगी। कुछ लोग क्या करते हैं ना, अत ना शुरू कर देते हैं। बाबा रामदेव ने जब शुरू में बताना शुरू किया कपाल भाती करने से चेहरे पर चमक आती, एक भाई साहब ने सवा घंटा

01:09

Speaker A

कर लिया, किडनी पलट गई। वो दो महीने आईसीयू में रहे। किसी भी काम की शुरुआत धीरे-धीरे करो। डिसिप्लिन कष्ट से आएगा। अपने आप को कष्ट दो और अपने ऊपर नजर रखो। एक शेड्यूल बनाओ और शेड्यूल छोटा बनाओ। सुबह उठो सोचो आज मुझे तीन घंटा

01:29

Speaker A

पढ़ना है बस। एक मिनट, आप तीन घंटे का शेड्यूल बनाओगे तो तुम्हारा मन बगावत करेगा, कहेगा नहीं, नहीं तीन घंटे का नहीं। 10 घंटा बन की आदत है, बड़े बड़े प्लान बनवाना करना कुछ नहीं। तुम अगर उसके नेचर

01:44

Speaker A

को देखो, वो प्लान बनाने में कंजूसी कभी नहीं करता। यही तो उसका खेल है। कहेगा पूरा दिसंबर बैठ के पढ़ना है। जब तो अगर यहां कुछ लोग बाहर के होंगे, तो जब तुम अपने घर जाते होगे छुट्टी में, तोय किताब लेकर जाता

01:58

Speaker A

होगा कि घर चल रहे हैं और टाइम वेस्ट कर पढ़ेंगे बैठ के। और जब तुम घर पहुंचते हो, तो तुमसे क्या कहता है कि यार कानपुर में तो पढ़ ही रहे हो। पता लगा जितनी किताब लेकर गए थे बिना खुले सब वापस आई

02:11

Speaker A

है। छोटे छोटे वो बनाओ गोल। कहो तीन घंटा पड़ेंगे तो जब तुमने तीन घंटे का गोल बनाया और पढ़ गए, सात घंटा कितना मजा आया उस दिन। जब भी तुम अपने टारगेट से बढ़कर काम करते हो, उत्साह बढ़ता है, और जब भी तुम अपने टारगेट से कम काम

02:28

Speaker A

करते हो, उत्साह घटता है। तो जब तुम 10 घंटे का टारगेट बनाके सिर्फ 3 घंटे पढ़ते हो और यह प्रक्रिया 2 महीने चलती है, तो तुम डिप्रेशन के शिकार धीरे-धीरे होने लगते हो। इसलिए कम टारगेट बनाओ और ज्यादा आउटपुट

02:42

Speaker A

निकालो और कष्ट दो अपने आप को। इस पे नजर रखने के लिए एक डायरी बगल में रखनी है। यह सब चीज़ें मैंने अभी कहा ना कि कुछ लोग क्या करते हैं, पहले दिन सारी ताकत झोक देते हैं। ताव में कोई काम नहीं करना है। ज

02:55

Speaker A

सीखने में टाइम लगता है, चाहे वह साइकिल चलाना सीखना हो और चाहे पढ़ना सीखना। उस टाइम तुम्हें देना ही पड़ेगा। साइकिल चला लेती हो पहले दिन चलाने लगी थी नहीं। जब तुम सीख जाओगी, अब तुम सीख गई तो

03:12

Speaker A

हाथ छोड़ के भी साइकिल चला रही हो। एक डायरी अपने पास रखो, उसमें अपना नाम लिख के अपना डेवलपमेंट ग्राफ बनाओ और उस डायरी को भगवान की तरह पूजा करो। उसकी तुम्हारा शेड्यूल नहीं टूटना चाहिए। जैसे आज तुम्हें मूवी देखने जाना है,

03:28

Speaker A

तो तुम जाओ, लेकिन कल अगर तुम्हारा मूवी का शेड्यूल नहीं है, तो भगवान भी अगर उतर के तुमसे कहे मूवी देखना जाना है, तो तुम्हें नहीं जाना है। इसलिए बचपन में स्कूल में हमें एक बड़ी प्यारी चीज मिली थी, डायरी।

03:42

Speaker A

डायरी मतलब डिसिप्लिन। आप सारे लोग ध्यान और योग की शुरुआत करिए, यह रिक्वेस्ट है मेरा आपसे, क्योंकि चुनौतियों से तभी लड़ पाओगे जब तुम्हारे अंदर ताकत होगी। मोटिवेशन एक उधार की चीज है जो म दूरों के लिए होती है। इस बात को

04:02

Speaker A

डायरी में लिख लो। यह मोटिवेशन की कहानी किसने शुरू की थी? व फोर्ड ने, अमेरिका का व्यापारी बिजनेसमैन। फड उसको, उसके उसको पता चला कि मजदूर ज्यादा काम नहीं कर रहे हैं, तो उसने कहा इनको मोटिवेट करो। मोटिवेशन इज फॉर वर्कर्स नॉट फॉर

04:24

Speaker A

किंग्स। इस देश की सबसे बड़ी विधा है ध्यान। ध्यान मतलब य नहीं कि आख ब करके तीन घंटे लेटे। व सब हरामखोर ही है। ध्यान मतलब देखना, अपने आप को देखना। उसमें एक प्रक्रिया है। भारत में बड़े सारे सेंटर्स है, विपासना

04:47

Speaker A

के सेंटर्स है। बुद्ध ने यह खोज की थी इस विधि की, विपासना की। विपासना का मतलब होता है आन पान सती, अपने सांसों को आते जाते हुए देखना। आप जब भी परेशान हो, इस ट्रिक को लगाइए। अपनी सांसों को

05:03

Speaker A

देखिएगा। आपका मन क्या है, यह आपको नहीं पता। विचार कहां से आते हैं, यह आपको नहीं पता। और विचार कौन से आएंगे, यह भी आपको नहीं पता। यह तुम्हारा मन ही तो है। विचार फेंक देता है। तुम बैठे हो और विचार कब फेंके? जब

05:20

Speaker A

पढ़ने बैठोगे तब। तुम पूरे दिन घूमो, ये तुमसे कुछ नहीं कहेगा। जैसे तुमने किताब खोली, एक विचार फेंक देगा, सीतापुर वाली बुआ पापा से मकान में हिस्सा मांग रही है। आपने कभी गौर किया इन बातों पर? नहीं किया होगा। यह ध्यान है, उस विचार को देखना

05:42

Speaker A

कि ला मांगने दो हिस्सा। मुझे पढ़ना है, आईएस बनना है, डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, विधायक भी बनना है। सब आईएस ही बन रहे, विधायक कोई बनने को तैयार नहीं। सांसद भी बनना है और फिर बुआ जी का

05:56

Speaker A

मकान कब्जा करना है। वही जो तुम्ह विचार दे रहा है, उसको तुम पलट कर क्यों नहीं दे रहे हो? वापस तुम उसके प्रभाव में आ जा रहे हो, एक्सेप्ट कर ले रहे हो। फिर व तुम्हें अगले आधे घंटे

06:10

Speaker A

नचा रहा है और तुम्हारा मन थक गया। मैं सब लोगों से हाथ जोड़कर अपील कर रहा हूं, जोड़ लिया कि आप सभी लोग ध्यान से जुड़े। इस सारे इसलिए सारे धर्मों में आंख बंद करके पूजा करने का प्रावधान है। किसी

06:29

Speaker A

में ो नहीं है, क्योंकि जब तुम आंख खोलते हो तो तुम्हें दुनिया दिखाई पड़ती है, लेकिन जब बंद करते हो तो तुम दिखाई पड़ते हो। तो अगर तुम 4 बजे उठ सकते हो, अगर तुम अपने आप को डिसिप्लिन कर सकते हो, मतलब तुम ताकतवर

06:42

Speaker A

आदमी हो। र हटा देंगे स बस धीरे-धीरे करो। एक साल लगेगा। 14 साल में भगवान राम भगवान बने थे, मतलब भगवान बनने की विधि 14 साल है। 14 साल करना पड़ेगा। एक साल में आईएस तो जितना साल बढ़ा, 20 साल कर लोगे तो पता नहीं

06:58

Speaker A

ब्रह्मांडी तुम्हारे कब्जे में रहेगा। इसीलिए तो इस देश में तुम संत रविदास को सुनो। मन चंगा मन पर बात कर रहे हैं। तुलसीदास ने क्या कहा? जा की रही भावना जैसी यह मन तो तुम्हें हर बार तुम्हें शादी नहीं करने देगा। अगर पांच छह लड़कियां

07:18

Speaker A

एक साथ खड़ी कर जाएं कि इसमें चुन लो, फिर डिस्टर्ब कर देगा तुमको कि नहीं। ये नहीं। तुमसे खेल रहा है। वो एक पकड़ो। वो तुमसे खेल रहा है और तुम उसको मजा दे रहे हो। तुमसे मजा ले रहा है।

07:33

Speaker A

कभी तुमसे कह रहा है हिंदी रामधारी सिंह दिनकर बहुत बढ़िया। अब तुम दिन भर बैठ के सोच रहे हो कि हां यार रामधारी सिंह यही तो मैं कह रहा हूं। डिसीजन लेना है तुरंत। यह जो तुम्हारा सबकॉन्शियस, यह जो सारा यह

07:46

Speaker A

मन ही तो है। हां, वो ऐसे चलता है, ऐसे पैराबोला बनाता है, ऐसे विचार फेंकता है। विचार बस बस बस बस इसको पकड़ लो। कबीर ने कहा कि जो व्यक्ति अपने मन को अपना गुलाम बना लेगा, बस वही इस दुनिया पर राज करेगा।

08:04

Speaker A

क्योंकि शक् जैसे तुम्हें 4:00 बजे उठना है। अब तुम्हारी नींद खुली 4:00 बजे। अब इसने तुमसे क्या कहा कि 5 मिनट और, इतनी ठंडक में कौन उठता है? नेहरू जी 11 बजे सो के उठते थे। तुमने एक बात इसकी गौर की? जो काम इसे तुमसे

08:21

Speaker A

कराना होता है, उसके लिए बड़े अच्छे-अच्छे एविडेंस देता है। य कोई सिगरेट पीता है तो उससे कहता है नेहरू जी भी पीते थे। स्टेलिन भी पीते थे। अरे स्टेलिन नाली का पानी पीता था। पियोगे बस। जैसे ही तुम्हारी 4:00 बजे नींद

08:35

Speaker A

खुले और यह तुम्हें राय देने लगे, उसको राय को पकड़ लो तुरंत कि अच्छा हम ही को समझा रहे हो। इस दुनिया में हर व्यक्ति अपने मन से परेशान है, लेकिन चूंकि वह उसे देख नहीं पाता, इसलिए दूसरे को परेशानी का कारण

08:50

Speaker A

बताता है। [संगीत]

Topics: आत्म-अनुशासन मोटिवेशन ध्यान योग डायरी लक्ष्य निर्धारण मानसिक शक्ति विपासना सफलता अवध ओझा

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