**Saddam Hussein 🇮🇶 | Hero ya Zalim? — Transcript & Summary | SozAI**
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सद्दाम हुसैन की जिंदगी, इराक की राजनीति और उनकी विरासत पर एक विस्तृत हिंदी विश्लेषण।

## Key Takeaways

- सद्दाम हुसैन ने इराक को आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत किया।
- उनकी तानाशाही शैली ने देश में भय और कड़ाई से शासन स्थापित किया।
- इराक और ईरान के बीच संघर्ष ने क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया।
- सद्दाम की छवि विवादित है, कुछ लोग उन्हें हीरो और कुछ जालिम मानते हैं।
- उनकी राजनीतिक शुरुआत और अमेरिकी CIA के साथ संबंध महत्वपूर्ण थे।

## What the video covers

- सद्दाम हुसैन का बचपन एक यतीम बच्चे के रूप में शुरू हुआ और उन्होंने इराक के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक बनने तक का सफर तय किया।
- इराक का इस्लाम से गहरा संबंध है और इतिहास में कई पैगंबर इराक में पैदा हुए।
- पहली बार मुसलमानों ने इराक को फतह किया और 13,300 साल तक इसे बरकरार रखा।
- ब्रिटिश साम्राज्य ने वर्ल्ड वॉर वन के दौरान इराक पर कब्जा किया और पपेट बादशाह बिठाए।
- सद्दाम हुसैन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक छोटी राजनीतिक पार्टी से की और CIA के सहयोग से इराक के प्रधानमंत्री पर हमला किया।
- इराक के तेल संसाधनों को अपने नियंत्रण में लेकर सद्दाम ने देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत किया।
- 1973 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद सद्दाम ने अरब देशों के तेल का इस्तेमाल अमेरिका को दबाने के लिए किया।
- सद्दाम हुसैन ने अपनी सत्ता मजबूत करने के लिए पार्टी सदस्यों की हत्या और जेलिंग की, जिससे उनकी तानाशाही स्थापित हुई।
- उन्होंने ईरान के सुप्रीम नेता आयतुल्लाह खुमैनी के खिलाफ युद्ध छेड़ा, जो उनके लिए सबसे बड़ा खतरा था।
- सद्दाम की पर्सनालिटी और नेतृत्व शैली हॉलीवुड फिल्म 'द गॉडफादर' से प्रेरित थी।

Answers

## Questions about this video

सद्दाम हुसैन का बचपन कैसा था?

सद्दाम हुसैन एक यतीम बच्चे थे जिनके पिता का निधन उनके जन्म से पहले हो चुका था। बचपन में उन्हें तंग किया जाता था, जिससे वे बहादुर और हिंसक बन गए।

सद्दाम हुसैन ने इराक की अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत किया?

सद्दाम ने इराक के तेल और गैस संसाधनों को अपने नियंत्रण में लेकर देश को आर्थिक रूप से मजबूत किया और मुफ्त स्कूल, अस्पताल और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

सद्दाम हुसैन और आयतुल्लाह खुमैनी के बीच क्या विवाद था?

सद्दाम हुसैन एक सुन्नी नेता थे जबकि खुमैनी ईरान के शिया सुप्रीम नेता थे। दोनों के बीच राजनीतिक और धार्मिक मतभेद थे, जिससे ईरान-इराक युद्ध हुआ।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A

सद्दाम हुसैन, सदाम हुसैन, सदाम हुसैन, एक यतीम बच्चा और आगे जाकर दुनिया के सबसे बड़े लीडर्स में से एक, जिसके मरने के 20 साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन आज भी पूरी दुनिया उसे याद करती है। सद्दाम हुसैन के मुल्क इराक का इस्लाम के साथ बहुत ही गहरा ताल्लुक है। क्योंकि इस्लाम के बड़े-बड़े पैगंबर इब्राहिम अल सलाम, लूत अल सलाम और यूनुस अल सलाम सब इराक में ही पैदा हुए थे। लेकिन इन सारे पैगंबरों के बाद भी यहां के लोग एक खुदा को बिल्कुल भूल चुके थे। और उस एक खुदा की जगह आग की इबादत करने लगे थे। आखिर रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद इस्लाम के पहले खलीफा अबू बकर रज अल्लाह ताला अनू ने पूरा अरब फतह करने के बाद अपने जनरल खालिद बिन वलीद को हुकुम दिया कि जाओ और पूरी दुनिया में सबसे पहले इराक को फतह करो। और जनरल खालिद बिन वलीद ने ऐसा ही किया। जिसके बाद पहली बार इराक मुसलमानों के कंट्रोल में आया। यह एक ऐसी फतह थी कि इसके बाद अगले 13,300 साल तक कोई भी मुसलमानों से इराक नहीं छीन सका। लेकिन आज से 100 साल पहले जब इराक पर उस्मानिया खिलाफत की हुकूमत थी, दुनिया में एक बहुत बड़ी जंग शुरू हुई, वर्ल्ड वॉर वन। जिसमें ब्रिटिश एंपायर ने पहली बार मुसलमानों से इराक छीन लिया और इसे छीनने के बाद यहां पर इराक में अपना एक पपेट बादशाह बिठाया और सिर्फ यही नहीं बल्कि पूरे अरब में हर जगह अपने पपेट बादशाह बिठाया। नाउ, बाकी सारे बादशाह तो आज तक अपनी कुर्सियों पर फुल ताकत के साथ बैठे हुए हैं। लेकिन इराक का बादशाह अपने मुल्क को संभाल नहीं सका क्योंकि कुछ ही अरसे बाद इराक के बादशाह को उसके तख्त से हटा दिया गया और पूरे इराक में एक बहुत बड़ी कंफ्यूजन पैदा हुई और बहुत तेजी से इराक के लीडर्स बार-बार बदलने लगे। अब इराक के इसी कंफ्यूजन के दरमियान इराक के एक छोटे से गांव में एक यतीम बच्चा पैदा हुआ जिसका नाम था सद्दाम हुसैन। कुछ लोग उसे एक हीरो समझते हैं और कुछ एक जालिम डिक्टेटर। सद्दाम हुसैन को देखा वो भी था। लेकिन सद्दाम कोई आम बच्चा नहीं था। उसके पैदा होने से पहले ही उसका बाप मर चुका था। और जब सद्दाम की मां को उसके शौहर के मरने का पता चला, उसने सद्दाम के पैदा होने से पहले ही सुसाइड करने की कोशिश की। एक यतीम बच्चा होने की वजह से सदाम हुसैन को बचपन से उसके दोस्त तंग किया करते थे। जिसकी वजह से कहा जाता है कि सदाम हुसैन बहुत छोटी सी उम्र में अपने साथ हमेशा एक स्टील रोड लेकर फिरता था और जो भी बच्चा उसे तंग करता था वो सीधा उस स्टील रोड को उसके सर पर मारता था। मतलब सदाम हुसैन के दिल में बचपन से डर नाम की कोई चीज नहीं थी। इसके कुछ ही अरसे बाद जब सद्दाम हुसैन की मां ने दूसरी शादी की, सद्दाम का सुतेला बाप उस पर इतना जुल्म करने लगा कि सिर्फ 10 साल की उम्र में अपने घर को छोड़कर भाग गया और जाकर अपने मामू के साथ रहने लगा और यहां से उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। क्योंकि उसके मामू का ताल्लुक इराक की एक छोटी सी पॉलिटिकल पार्टी बात पार्टी से था। इस पार्टी में सिर्फ 100 या 200 लोग थे। जब सदाम हुसैन ने छोटी सी उम्र में इस पार्टी को ज्वॉइन किया, इस पार्टी में सबको पता था कि सद्दाम हुसैन की एज तो बहुत कम है लेकिन यह इस पार्टी का सबसे वायलेंट और बहादुर मेंबर है। जैसे ही सदाम हुसैन ने इस पार्टी को ज्वाइन किया, इस पार्टी के लोग अमेरिका की सीआईए के साथ मिलकर उस वक्त के इराक के प्राइम मिनिस्टर को मारने की प्लानिंग कर रहे थे। और यह इतना मुश्किल प्लान था। इसीलिए उन्हें इस काम के लिए बहुत ही खतरनाक लड़कों की जरूरत थी। तो ऑफ कोर्स उन्होंने इस काम के लिए सिर्फ 24 साल की उम्र के सद्दाम हुसैन को चुना। सद्दाम हुसैन ने अपनी टीम के साथ जाकर प्राइम मिनिस्टर की गाड़ियों पर गोलियों की बारिश कर दी। लेकिन इस हमले के बाद भी प्राइम मिनिस्टर बच गया। जिसके बाद मजबूरन सदाम हुसैन इराक को छोड़कर इजिप्ट की तरफ भाग गया। नाउ, सदाम हुसैन का मिशन तो फेल हो चुका था। लेकिन उसकी बहादुरी को देखकर दुनिया के कुछ ताकतवर लोग उससे बहुत इंप्रेस हुए। जैसा कि अमेरिका की सीआईए बिलियन इन्वेस्टमेंट सीआईए सद्दाम हुसैन को इराक के फ्यूचर लीडर के तौर पर तैयार करने लगी। क्योंकि इसके कुछ ही अरसे बाद जैसे ही इराक में सद्दाम हुसैन के पार्टी की हुकूमत बनी, सद्दाम हुसैन वापस इराक की तरफ आया और सिर्फ 30 साल की उम्र में इराक का दूसरा सबसे पावरफुल इंसान बना। अब इराक एक आजाद कंट्री तो थी लेकिन इराक के सारे ऑयल और गैस पर ब्रिटिश का कब्जा था। इसीलिए जैसे ही सदाम हुसैन के पास पावर आई, उसने सबसे पहले इराक के सारे ऑयल और गैस को अपने कंट्रोल में लिया और यहां से सदाम हुसैन इराक के लोगों के लिए एक हीरो बनने लगा। क्योंकि जैसे ही उसने इराक की ऑयल को अपने कंट्रोल में ली, अचानक एक बार फिर 1973 में इजराइल और अरब की एक बहुत बड़ी जंग शुरू हुई। अरब मुल्क ने इजराइल को हर तरफ से घेर लिया था। लेकिन इस जंग में इजराइल को सुपर पावर अमेरिका की फुल सपोर्ट हासिल थी। हैव टू इन्वेंट इजराइल और इसी अमेरिका की सपोर्ट की वजह से इजराइल ने आसानी से बड़े-बड़े अरब मालिक को हरा दिया। ये देखकर सऊदी अरब के बादशाह किंग फैसल को अमेरिका पर बहुत गुस्सा आया। और उसने अमेरिका को सबक सिखाने के लिए सारे अरब कंट्रीज को जमा किया और सब ने मिलकर यह फैसला किया कि हम आज के बाद इजराइल के दोस्तों मतलब अमेरिका को अरब का ऑयल नहीं बेचेंगे। और यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि उस जमाने में अमेरिका अपना 80% तेल अरब मुल्क से खरीदता था। तो जैसे ही किंग फैसल ने अमेरिका पर यह पाबंदी लगाई, पूरी दुनिया में ऑयल की प्राइस डबल नहीं, ट्रिपल नहीं बल्कि चार गुना बढ़ गई। मतलब एक बैरल ऑयल की कीमत $3 से $12 बन गई। अब यह सब तो अमेरिका को कमजोर करने के लिए था। लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा इराक के यंग लीडर सद्दाम हुसैन ने उठाया। सद्दाम हुसैन ने ऑइल की इन नई प्राइसेस को यूज करके इराक को एक मॉडर्न कंट्री बनाई। इराक के हर गांव तक बिजली पहुंचाई। इराक के लोगों के लिए फ्री स्कूल्स और हॉस्पिटल्स बनाए। इन शॉर्ट, सद्दाम हुसैन ने इराक को इतना मजबूत किया कि इराक का एक दीनार $3 के बराबर था। और इस सब के साथ-साथ सदाम हुसैन ने इराक की पूरी आर्मी को अपने कंट्रोल में लिया। लेकिन यह सारी बातें तो एक तरफ। यहां से सदाम हुसैन को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी इंस्पिरेशन मिली। अमेरिका में हॉलीवुड की एक फिल्म रिलीज हुई। द गॉडफादर, जो एक माफिया डॉन कॉरलियन फैमिली की कहानी है। इन माय होम, इन माय बेडरूम। कहा जाता है कि सदाम हुसैन को यह फिल्म इतनी पसंद है, फेवरेट फिल्म ही लव टू वाच द मूवी द गॉडफादर कि उसने अपनी पर्सनालिटी बिल्कुल बदल दी और इस फिल्म की हर चीज को कॉपी करने लगा। मतलब जैसे कपड़े गॉडफादर का हीरो पहनता था, वही कपड़े सदाम हुसैन भी पहनने लगा। जैसी टोपी वो पहनता था, सदाम भी वही टोपी पहनने लगा और सबसे इंपॉर्टेंट दोनों बिल्कुल एक ही स्टाइल में सिगार पिया करते थे। इन शॉर्ट, इन सारी चीजों की वजह से अब सदाम हुसैन इराक का सबसे ताकतवर इंसान बन चुका था। इवन इराक के प्रेसिडेंट से भी ज्यादा। तो ऑफ कोर्स सदाम हुसैन ने इराक के प्रेसिडेंट को हुकुम दिया कि तुम अब बूढ़े हो चुके हो। अब तुमसे ना हो पाएगा। चुपचाप रिजाइन करो और सीधा अपने घर जाओ। नाउ, जैसे ही सदाम हुसैन प्रेसिडेंट बना, पूरी दुनिया ने देखा कि बहुत अरसे बाद बिल्कुल हिटलर की तरह एक नया लीडर सामने आ चुका है। क्योंकि प्रेसिडेंट बनने के सिर्फ छह दिन बाद सदाम हुसैन ने अपने सारे पार्टी मेंबर्स की एक मीटिंग बुलाई और सबको अपने सामने बिठाकर कहा कि मुझे इराक के तख्त से हटाने की एक बहुत बड़ी साजिश की गई है और जिन लोगों ने यह साजिश की है वो सब इस वक्त इस कमरे में मौजूद हैं। यह सुनकर नीचे बैठे सारे लोगों की सांसे बिल्कुल बंद हो गईं। लेकिन सदाम हुसैन ने बिल्कुल आराम से सबसे पहले अपना सिगार लगाया और फिर हर उस शख्स का नाम लेने लगा जो इस साजिश में शामिल था। इस्माइल इब्राहिम। सदाम हुसैन ने यह हुकुम दिया था कि मैं जिसका भी नाम लूं, वो चुपचाप उठकर हॉल से बाहर निकल जाए। कुछ लोग आराम से बाहर चले गए और कुछ को जबरदस्ती निकाला गया। इस तरह सदाम हुसैन ने टोटल 68 लोगों के नाम लिए। जिनमें से कुछ को तो जेल में डाल दिया और बाकियों को गोलियां मार दी गईं। जो लोग हॉल में बच गए, वो जोर-जोर से सदाम हुसैन के नाम के नारे लगाने लगे। और इस तरह सदाम हुसैन ने अपनी खौफ से भरी बादशाहत शुरू की। मतलब इस वक्त सदाम हुसैन अपनी ताकत की पीठ पर था। लेकिन यहां पर उसने अपनी जिंदगी की पहली बड़ी गलती की। सद्दाम ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खुमेनी पर हमला कर दिया। 1979 में जब सदाम हुसैन इराक का लीडर बना, वहां एट द सेम टाइम ईरान में भी एक नई हुकूमत बनी, आयतुल्लाह खुमेनी। इमाम खुमेनी का इंकलाब इतना बड़ा था कि पूरी दुनिया उनसे डरने लगी थी। न्यूक्लियर वेपन। खुमेनी ने ईरान के एक बहुत ही ताकतवर बादशाह को उसके तख्त से हटा दिया था। और अब इमाम खुमेनी बाकी अरब मुल्क के लोगों को भी इंस्पायर कर रहे थे कि वो भी उठे और अपने बादशाहों के खिलाफ बगावत कर दें। इसीलिए सारे अरब बादशाह ईरान के इमाम खुमेनी से नफरत करने लगे थे। और सिर्फ अरब कंट्रीज नहीं, इमाम खुमेनी बार-बार अपने स्पीचेस में सुपर पावर अमेरिका और उसके दोस्त इजराइल को धमकियां दे रहे थे। लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा और सबसे बड़ा खतरा इमाम खुमेनी से एक ही शख्स को था। सद्दाम हुसैन, क्योंकि सदाम हुसैन इराक का एक सुन्नी प्रेसिडेंट था और इराक की ज्यादातर आवाम शिया थी।

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Speaker A

साथ बहुत ही गहरा ताल्लुक है। क्योंकि इस्लाम के बड़े-बड़े पैगंबर इब्राहिम अल सलाम, लूत अल सलाम और यूनुस अल सलाम सब इराक में ही पैदा हुए थे। लेकिन इन सारे पैगंबरों के बाद भी यहां के लोग एक खुदा

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Speaker A

को बिल्कुल भूल चुके थे। और उस एक खुदा की जगह आग की इबादत करने लगे थे। आखिर रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलह वसल्लम के बाद इस्लाम के पहले खलीफा अबू बकर रज अल्लाह ताला अनू ने पूरा अरब फतह करने के

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Speaker A

बाद अपने जनरल खालिद बिन वलीद को हुकुम दिया कि जाओ और पूरी दुनिया में सबसे पहले इराक को फतह करो। और जनरल खालिद बिन वलीद ने ऐसा ही किया। जिसके बाद पहली बार इराक मुसलमानों के कंट्रोल में आया। यह एक ऐसी फतह थी कि

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Speaker A

इसके बाद अगले 13,300 साल तक कोई भी मुसलमानों से इराक नहीं छीन सका। लेकिन आज से 100 साल पहले जब इराक पर उस्मानिया खिलाफत की हुकूमत थी। दुनिया में एक बहुत बड़ी जंग शुरू हुई वर्ल्ड वॉर वन। जिसमें ब्रिटिश एंपायर ने पहली बार

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Speaker A

मुसलमानों से इराक छीन लिया और इसे छीनने के बाद यहां पर इराक में अपना एक पपेट बादशाह बिठाया और सिर्फ यही नहीं बल्कि पूरे अरब में हर जगह अपने पपेट बादशाह बिठाया। नाउ। बाकी सारे बादशाह तो आज तक

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Speaker A

अपनी कुर्सियों पर फुल ताकत के साथ बैठे हुए हैं। लेकिन इराक का बादशाह अपने मुल्क को संभाल नहीं सका क्योंकि कुछ ही अरसे बाद इराक के बादशाह को उसके तख्त से हटा दिया गया और पूरे इराक में एक बहुत बड़ी

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कंफ्यूजन पैदा हुई और बहुत तेजी से इराक के लीडर्स बार-बार बदलने लगे। अब इराक के इसी कंफ्यूजन के दरमियान इराक के एक छोटे से गांव में एक यतीम बच्चा पैदा हुआ जिसका नाम था सद्दाम हुसैन। कुछ लोग उसे एक हीरो

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Speaker A

समझते हैं। और कुछ एक जालिम डिक्टेटर। सद्दाम हुसैन को देखा वो भी था। लेकिन सद्दाम कोई आम बच्चा नहीं था। उसके पैदा होने से पहले ही उसका बाप मर चुका था। और जब सद्दाम की मां को उसके शौहर के मरने

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का पता चला, उसने सद्दाम के पैदा होने से पहले ही सुसाइड करने की कोशिश की। एक यतीम बच्चा होने की वजह से सदाम हुसैन को बचपन से उसके दोस्त तंग किया करते थे। जिसकी वजह से कहा जाता है कि सदाम हुसैन बहुत

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Speaker A

छोटी सी उम्र में अपने साथ हमेशा एक स्टील रोड लेकर फिरता था और जो भी बच्चा उसे तंग करता था वो सीधा उस स्टील रोड को उसके सर पर मारता था। मतलब सदाम हुसैन के दिल में बचपन से डर नाम की कोई चीज नहीं थी। इसके

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कुछ ही अरसे बाद जब सद्दाम हुसैन की मां ने दूसरी शादी की। सद्दाम का सुतेला बाप उस पर इतना जुल्म करने लगा कि सिर्फ 10 साल की उम्र में अपने घर को छोड़कर भाग गया और जाकर अपने मामू के साथ रहने लगा और

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यहां से उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। क्योंकि उसके मामू का ताल्लुक इराक की एक छोटी सी पॉलिटिकल पार्टी बात पार्टी से था। इस पार्टी में सिर्फ 100 या 200 लोग थे। जब सदाम हुसैन ने छोटी सी उम्र में इस

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पार्टी को ज्वॉइ किया। इस पार्टी में सबको पता था कि सदाम हुसैन की एज तो बहुत कम है लेकिन यह इस पार्टी का सबसे वायलेंट और बहादुर मेंबर है। जैसे ही सदाम हुसैन ने इस पार्टी को ज्वाइन किया इस पार्टी के लोग अमेरिका की सीआईए

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के साथ मिलकर उस वक्त के इराक के प्राइम मिनिस्टर को मारने की प्लानिंग कर रहे थे। और यह इतना मुश्किल प्लान था। इसीलिए उन्हें इस काम के लिए बहुत ही खतरनाक लड़कों की जरूरत थी। तो ऑफ कोर्स उन्होंने

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इस काम के लिए सिर्फ 24 साल की उम्र के सद्दाम हुसैन को चुना। सद्दाम हुसैन ने अपनी टीम के साथ जाकर प्राइम मिनिस्टर की गाड़ियों पर गोलियों की बारिश कर दी। लेकिन इस हमले के बाद भी प्राइम मिनिस्टर

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बच गया। जिसके बाद मजबूरन सदाम हुसैन इराक को छोड़कर इजिप्ट की तरफ भाग गया। नाउ सदाम हुसैन का मिशन तो फेल हो चुका था। लेकिन उसकी बहादुरी को देखकर दुनिया के कुछ ताकतवर लोग उससे बहुत इंप्रेस हुए। जैसा कि अमेरिका की सीआईए बिलियन

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इन्वेस्टमेंट सीआईए सद्दाम हुसैन को इराक के फ्यूचर लीडर के तौर पर तैयार करने लगी। क्योंकि इसके कुछ ही अरसे बाद जैसे ही इराक में सद्दाम हुसैन के पार्टी की हुकूमत बनी, सद्दाम हुसैन वापस इराक की तरफ आया और सिर्फ 30 साल की उम्र में इराक

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का दूसरा सबसे पावरफुल इंसान बना। अब इराक एक आजाद कंट्री तो थी लेकिन इराक के सारे ऑयल और गैस पर ब्रिटिश का कब्जा था। इसीलिए जैसे ही सदाम हुसैन के पास पावर आई उसने सबसे पहले इराक के सारे ऑयल और गैस

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को अपने कंट्रोल में लिया और यहां से सदाम हुसैन इराक के लोगों के लिए एक हीरो बनने लगा। क्योंकि जैसे ही उसने इराक की ऑयल को अपने कंट्रोल में ली अचानक एक बार फिर 1973 में इजराइल और अरब की एक बहुत बड़ी

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जंग शुरू हुई। अरब मुालिक ने इजराइल को हर तरफ से घेर लिया था। लेकिन इस जंग में इजराइल को सुपर पावर अमेरिका की फुल सपोर्ट हासिल थी। हैव टू इन्वेंट इजराइल और इसी अमेरिका की सपोर्ट की वजह से इजराइल ने आसानी से

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बड़े-बड़े अरब मालिक को हरा दिया। ये देखकर सऊदी अरब के बादशाह किंग फैसल को अमेरिका पर बहुत गुस्सा आया। और उसने अमेरिका को सबक सिखाने के लिए सारे अरब कंट्रीज को जमा किया और सब ने मिलकर यह फैसला किया कि हम आज के बाद इजराइल के

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Speaker A

दोस्तों मतलब अमेरिका को अरब का ऑयल नहीं बेचेंगे। और यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा झजका था क्योंकि उस जमाने में अमेरिका अपना 80% तेल अरब मुालिक से खरीदता था। तो जैसे ही किंग फैसल ने अमेरिका पर यह पाबंदी लगाई पूरी दुनिया

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में ऑयल की प्राइस डबल नहीं ट्रिपल नहीं बल्कि चार गुना बढ़ गई। मतलब एक बैरल ऑयल की कीमत $3 से $ बन गई। अब यह सब तोप अमेरिका को कमजोर करने के लिए था। लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा इराक के यंग लीडर

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सद्दाम हुसैन ने उठाया। सद्दाम हुसैन ने ऑइल की इन नई प्राइसेस को यूज करके इराक को एक मॉडर्न कंट्री बनाई। इराक के हर गांव तक बिजली पहुंचाई। इराक के लोगों के लिए फ्री स्कूल्स और हॉस्पिटल्स बनाए। इन शॉर्ट

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सदाम हुसैन ने इराक को इतना मजबूत किया कि इराक का एक दीनार $3 के बराबर था। और इस सब के साथ-साथ सदाम हुसैन ने इराक की पूरी आर्मी को अपने कंट्रोल में लिया। लेकिन यह सारी बातें तो एक तरफ। यहां से

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Speaker A

सदाम हुसैन को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी इंस्पिरेशन मिली। अमेरिका में हॉलीवुड की एक फिल्म रिलीज हुई। द गॉड फादर जो एक माफिया डॉन कॉरलियन फैमिली की कहानी है। इन माय होम इन माय बेडरूम। कहा जाता है कि

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Speaker A

सदाम हुसैन को यह फिल्म इतनी पसंद है। फेवरेट फिल्म ही लव टू वाच द मूवी द गॉड फादर कि उसने अपनी पर्सनालिटी बिल्कुल बदल दी और इस फिल्म की हर चीज को कॉपी करने लगा। मतलब जैसे कपड़े गॉड फादर का हीरो

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Speaker A

पहनता था वही कपड़े सदाम हुसैन भी पहनने लगा। जैसी टोपी वो पहनता था सदाम भी वही टोपी पहनने लगा और सबसे इंपॉर्टेंट दोनों बिल्कुल एक ही स्टाइल में सिगार पिया करते थे। इन शॉर्ट इन सारी चीजों की वजह से अब

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Speaker A

सदाम हुसैन इराक का सबसे ताकतवर इंसान बन चुका था। इवन इराक के प्रेसिडेंट से भी ज्यादा। तो ऑफ कोर्स सदाम हुसैन ने इराक के प्रेसिडेंट को हुकुम दिया कि तुम अब बूढ़े हो चुके हो। अब तुमसे ना हो पाएगा।

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Speaker A

चुपचाप रिजाइन करो और सीधा अपने घर जाओ। नाउ जैसे ही सदाम हुसैन प्रेसिडेंट बना, पूरी दुनिया ने देखा कि बहुत अरसे बाद बिल्कुल हिटलर की तरह एक नया लीडर सामने आ चुका है। क्योंकि प्रेसिडेंट बनने के सिर्फ छ दिन

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Speaker A

बाद सदाम हुसैन ने अपने सारे पार्टी मेंबर्स की एक मीटिंग बुलाई और सबको अपने सामने बिठाकर कहा कि मुझे इराक के तख्त से हटाने की एक बहुत बड़ी साजिश की गई है और जिन लोगों ने यह साजिश की है वो सब इस

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Speaker A

वक्त इस कमरे में मौजूद है। यह सुनकर नीचे बैठे सारे लोगों की सांसे बिल्कुल बंद हो गई। लेकिन सदाम हुसैन ने बिल्कुल आराम से सबसे पहले अपना सिगार लगाया और फिर हर उस शख्स का नाम लेने लगा जो इस साजिश में

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Speaker A

शामिल था। इस्माइल इब्राहिम सदाम हुसैन ने यह हुकुम दिया था कि मैं जिसका भी नाम लूं वो चुपचाप उठकर हॉल से बाहर निकल जाए। कुछ लोग आराम से बाहर चले गए और कुछ को जबरदस्ती निकाला गया। इस तरह सदाम हुसैन

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Speaker A

ने टोटल 68 लोगों के नाम लिए। जिनमें से कुछ को तो जेल में डाल दिया और बाकियों को गोलियां मार दी गई। जो लोग हॉल में बच गए वो जोर-जोर से सदाम हुसैन के नाम के नारे लगाने लगे। और इस तरह सदाम हुसैन ने अपनी खौफ से

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Speaker A

भरी बादशाहत शुरू की। मतलब इस वक्त सदाम हुसैन अपनी ताकत की पीठ पर था। लेकिन यहां पर उसने अपनी जिंदगी की पहली बड़ी गलती की। सद्दाम ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खुमेनी पर हमला कर दिया। 1979 में जब सदाम हुसैन इराक का लीडर बना।

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Speaker A

वहां एट द सेम टाइम ईरान में भी एक नई हुकूमत बनी। आयतुल्लाह खुमेनी। इमाम खुमेनी का इंकलाब इतना बड़ा था कि पूरी दुनिया उनसे डरने लगी थी। न्यूक्लियर वेपन। खुमेनी ने ईरान के एक बहुत ही ताकतवर बादशाह को उसके तख्त से

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Speaker A

हटा दिया था। और अब इमाम खुमेनी बाकी अरब मुालिक के लोगों को भी इंस्पायर कर रहे थे। कि वो भी उठे और अपने बादशाहों के खिलाफ बगावत कर दें। इसीलिए सारे अरब बादशाह ईरान के इमाम खुमेनी से नफरत करने लगे थे।

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Speaker A

और सिर्फ अरब कंट्रीज नहीं इमाम खुमेनी बार-बार अपने स्पीचेस में सुपर पावर अमेरिका और उसके दोस्त इजराइल को धमकियां दे रहे थे। लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा और सबसे बड़ा खतरा इमाम हुमेनी से एक ही शख्स को था।

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Speaker A

सद्दाम हुसैन क्योंकि सदाम हुसैन इराक का एक सुन्नी प्रेसिडेंट था और इराक की ज्यादातर आवाम शिया थी जो अपना असल लीडर सदाम हुसैन को नहीं बल्कि इमाम खुमेनी को मानते थे और इस बात का सद्दाम हुसैन को बहुत अच्छी तरह पता था। यहां तक कि एक बार

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Speaker A

सदाम हुसैन ने ईरान के आयतुल्लाह खुमेनी को दज्जाल। इसीलिए प्रेसिडेंट बनने के सिर्फ एक साल बाद सदाम हुसैन ने सुपर पावर अमेरिका और अरब बादशाहों की फुल सपोर्ट के साथ ईरान में आया खुमेनी की हुकूमत पर हमला कर

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Speaker A

दिया और बहुत तेजी से ईरान से यह सारा इलाका फतह कर लिया जिसकी वजह से दोनों साइड से हजारों मुसलमान मरने लगे। नाउ एक तरफ पूरी दुनिया के सपोर्ट के साथ सद्दाम हुसैन था और दूसरी तरफ अकेला इमाम खुमेनी।

11:49

Speaker A

लेकिन फिर भी सद्दाम हुसैन ईरान का कुछ नहीं बिगाड़ सका। और जंग के कुछ ही अरसे बाद सद्दाम हुसैन ने खुमेनी के साथ सीज फायर करने की कोशिश की। लेकिन इस बार इमाम खुमेरीनी ने यह जंग बंद करने से इंकार कर दिया। क्योंकि इस

12:04

Speaker A

जंग से एक बहुत लंबे अरसे के बाद पूरी ईरानी कौम एक ही लीडर इमाम खुमेनी के पीछे यूनाइट हो चुकी थी। जिसके बाद इमाम खुमेनी ने ऐलान किया कि अब यह जंग सिर्फ तभी खत्म होगी जब इराक के प्रेसिडेंट सद्दाम हुसैन

12:19

Speaker A

को उसके तख्त से हटा दिया जाएगा। और यह ऐलान करते ही ईरान ने सद्दाम हुसैन पर हमला कर दिया। और ये सारा इलाका फतह करने के बाद ईरान की फौज पहली बार इराक के अंदर घुस गई। अब तक इराक अपना सारा पैसा ऑयल

12:34

Speaker A

बेचकर कमाता था। इसीलिए खुमेनी ने इराक के ऑयल बेचने के सारे रास्ते बंद कर दिए। जिसके बाद इराक की पूरी फौज हर तरफ से पीछे हटने लगी। अब फाइनली सद्दाम हुसैन डरने लगा था क्योंकि उसकी हुकूमत के पास

12:49

Speaker A

पैसे बिल्कुल खत्म होने वाले थे। तो सदाम हुसैन मजबूरन हर किसी से अमेरिका, सऊदी, कुवैत सब कर्जे लेने लगा। मतलब अब सदाम हुसैन के हालात इतने खराब हो चुके थे कि एक दिन एक बहुत ही इंपॉर्टेंट मीटिंग में

13:04

Speaker A

इराक के हेल्थ मिनिस्टर ने अपने प्रेसिडेंट सद्दाम हुसैन से कहा कि मिस्टर प्रेसिडेंट मेरा ख्याल है अब हमें इमाम खुमेनी की बात मान लेनी चाहिए और आपको इराक के तख्त से रिजाइन कर देना चाहिए। यह सुनकर सदाम हुसैन उसे गौर से देखने लगा और

13:22

Speaker A

वहां बाकी सारे मिनिस्टर से पूछा कि क्या कोई और भी इस मिनिस्टर की बात से एग्री करता है? तो ऑफकोर्स सद्दाम के खौफ की वजह से किसी ने भी अपना हाथ नहीं उठाया। जिसके बाद सदाम हुसैन अपने इस मिनिस्टर को घसीट

13:37

Speaker A

कर साथ वाले कमरे में लेकर गया और वहां अपने हाथों से इसके सर पर गोली मार दी। इसके बाद सदाम हुसैन गुस्से से बिल्कुल पागल हो चुका था। यहां तक कि उसने अपने ही कंट्री के बागी लोगों पर केमिकल वेपन से

13:51

Speaker A

हमला किया। आखिर जब ईरान की ताकत बहुत ज्यादा बढ़ने लगी तो सुपर पावर अमेरिका भी खुलकर ईरान के खिलाफ इस जंग में शामिल हुआ और अपने जंगी जहाजों को लेकर ईरान के बॉर्डर्स के पास खड़ा किया और इवन ईरान के

14:07

Speaker A

एक पैसेंजर प्लेन को भी मार गिराया। जिसमें अमेरिका ने 300 इनोसेंट लोगों को शहीद कर दिया। आखिर 8 साल की खतरनाक जंग के बाद दोनों कंट्रीज ने सीज फायर का ऐलान कर दिया और यह जंग खत्म हो गई। इस जंग में दोनों मुल्कों को कोई

14:27

Speaker A

फायदा नहीं हुआ और 10 लाख मुसलमान फॉर नो रीज़ मारे गए। और इस जंग का फायदा सिर्फ दो कंट्रीज को हुआ। चाइना और इजराइल जो इराक और ईरान दोनों को वेपन्स बेचकर पैसा बनाते रहे। आखिर इस जंग के

14:45

Speaker A

खत्म होने के बाद इराक की इकॉनमी दोबारा ऊपर जाने लगी और सद्दाम हुसैन की ताकत दोबारा बढ़ने लगी। यह देखकर अरब कंट्रीज ने सद्दाम हुसैन से कहा कि अब सब ठीक हो चुका है तो अब मेहरबानी करो और हमारे

15:00

Speaker A

बिलियंस ऑफ डॉलर्स का कर्जा वापस दो। जिस पर सद्दाम हुसैन ने कहा कि कौन से पैसे?

15:05

Speaker A

ईरान के आयतुल्लाह खुमेनी के साथ। यह जंग तो मैंने तुम लोगों के कहने पर की थी और अब तुम सब मुझसे पैसे मांग रहे हो। निकलो यहां से। एक रुपया भी मैं किसी को नहीं दूंगा। अभी तक पूरा अरब सदाम हुसैन के साथ

15:19

Speaker A

खड़ा था। लेकिन अब सदाम हुसैन की यह बदमाशी देखकर अरब के बादशाह उसके खिलाफ होने लगे। और स्पेशली कुवैत का बादशाह कुवैत इराक के बॉर्डर के पास एक बहुत ही छोटी कंट्री। लेकिन यह छोटा सा मुल्क दुनिया के सबसे बड़े ऑयल कंट्रीज में से

15:37

Speaker A

है। इसीलिए जैसे ही सदाम हुसैन ने कुवैत को उसका कर्जा वापस देने से इंकार कर दिया। कुवैत ने जानबूझकर सद्दाम को कमजोर करने के लिए अपने ऑयल की सप्लाई बढ़ा दी। जिससे पूरी दुनिया में ऑयल की प्राइसेस नीचे आने लगी और यह इराक की इकॉनमी के लिए

15:56

Speaker A

एक बहुत बड़ा धजका था। जिससे सदाम हुसैन को बहुत गुस्सा आया और उसने सोचा कि इस छोटे से मुल्क कुवैत की क्या औकात है कि यह मुझे सद्दाम हुसैन को आंखें दिखाएं। इसीलिए 1990 में अचानक रात के 2:00 बजे

16:11

Speaker A

सद्दाम हुसैन ने अपनी पूरी ताकत के साथ कुवैत पर हमला कर दिया। कुवैत का साइज इराक से 25 गुना छोटा था। इसीलिए सिर्फ दो दिनों में सदाम हुसैन ने पूरे कुवैत पर कब्जा कर लिया। यह देखकर कुवैत का बादशाह और पूरी रॉयल फैमिली

16:30

Speaker A

कुवैत को छोड़कर भाग गई। सिवाय एक शहजादे के कुवैत के बादशाह का भाई शहजादा फ़हाद जो इराक के हमले के बाद भी बहादुरी से अपने महल में बैठा रहा। लेकिन जैसे यह शहजादा इराक की फौज के हाथ में

16:46

Speaker A

आया। उन्होंने पहले इसके सर में गोली मारी और फिर इसकी डेड बॉडी के ऊपर अपने टैंक्स चढ़ाए। इसके बाद सदाम हुसैन का खौफ पूरे अरब में फैल गया और कुवैत जैसे रिच कंट्री को अपना एक सूबा बनाने के बाद सदाम हुसैन

17:03

Speaker A

इराक बल्कि पूरी अरब दुनिया का सबसे पावरफुल लीडर बना। लेकिन कुवैत पर हमला करना सदाम हुसैन की जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। क्योंकि हमला करने से पहले सदाम हुसैन ने अमेरिका के साथ एक मीटिंग की। ह प्रॉब्लम्स विवे

17:23

Speaker A

जिसमें अमेरिका ने उसे क्लियरली बताया कि तुम अरबों की जंग से हमारा कोई लेना देना नहीं है। लेकिन यह एक बहुत बड़ा झूठ था। अमेरिका बस सद्दाम को अपने ट्रैप में फंसाना चाहता था। इसलिए नहीं कि अमेरिका को कुवैतियों की कोई परवाह थी। बल्कि

17:39

Speaker A

इसलिए कि अमेरिका चाहता था कि सद्दाम हुसैन को एक बहाना बनाकर वो हमेशा के लिए अरब दुनिया की तरफ अपनी आर्मी भेजे और वहां पर अपने बेसिस बनाए और बिल्कुल ऐसा ही हुआ। अमेरिका बहुत ही चालाकी से बाकी अरब कंट्रीज को सद्दाम

17:59

Speaker A

हुसैन की ताकत से डराने लगा और इवन अमेरिका ने सऊदी बादशाह को इराक के फेक टैंकों की तस्वीरें भी दिखाई कि अगर सद्दाम को ना रोका गया तो उसका नेक्स्ट टारगेट सऊदी अरब होगा। तो अब अगर सद्दाम हुसैन से अपनी जान

18:16

Speaker A

छुड़ानी है तो हमें अमेरिका की फौज को सऊदी अरब के अंदर बेसिस देने ही होंगे। जिसके बाद ऑफ कोर्स सऊदी बादशाह ने अमेरिका को बेसिस दे दिए। लेकिन सऊदी अरब की आवाम इस सब से बिल्कुल भी खुश नहीं थी।

18:30

Speaker A

स्पेशली एक सऊदी उससामा बिन लादेन। लेकिन अब अमेरिका सीधा सद्दाम हुसैन को धमकियां देने लगा। कि अगर तुम कुवैत से पीछे नहीं हटे तो हम तुम पर हमला कर देंगे। लेकिन जब सद्दाम पीछे नहीं हटा तो अमेरिका ने अरब में अपने नए बेसिस से सद्दाम हुसैन

18:55

Speaker A

की फौज पर हमला कर दिया और सिर्फ एक महीने में पूरे कुवैत को दोबारा आजाद कर दिया। लेकिन कुवैत से भागते-भागते सद्दाम ने एक काम ऐसा किया जिसकी वजह से आज तक दुनिया में बहुत सारे लोग उसे एक हीरो समझते हैं। जैसे ही

19:15

Speaker A

अमेरिका ने इराक पर हमला किया सद्दाम हुसैन को पता था कि वो अमेरिका का तो कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसीलिए उसने पहली बार अपने मिसाइल्स का रुख अमेरिका के दोस्त इजराइल की तरफ किया। इराकी ट्रूप्स वर टू एंटर द वुड एक्ट और इजराइल के कैपिटल पर

19:32

Speaker A

40 मिसाइल से हमला कर दिया। इजराइल पर इस हमले के बाद अमेरिका, सऊदी और इजराइल सबको समझ आ गई कि अब सदाम हुसैन को हटाने का वक्त आ चुका है। तो अब जब पूरी दुनिया सदाम हुसैन के खिलाफ हो

19:48

Speaker A

चुकी थी। तो सदाम हुसैन ने भी यह देखकर अपने आप को बिल्कुल बदल दिया। मतलब अब तक जो सद्दाम बिल्कुल एक लिबरल और सेकुलर आदमी था। अब अपनी हर स्पीच में और हर जगह जाकर इस्लाम और मुसलमानों के हक की आवाज

20:02

Speaker A

उठाने लगा। सदाम हुसैन ने इराक के हर स्कूल में कुरान पढ़ने को एक लाजमी सब्जेक्ट बनाया। वो सदाम हुसैन जो अब तक खुद भी शराब पीता था और बाकियों को भी पिलाता था। उसने पूरे इराक में शराब पीने पर पाबंदी लगा दी।

20:21

Speaker A

पहली बार इराक के झंडे पर अल्लाहू अकबर लिखवाया गया और इवन सदाम हुसैन ने अपने जिस्म से कई लीटर खून निकालकर अपने ही खून से कुरान लिखवाने का हुक्म दिया और यह सब सदाम हुसैन सिर्फ इसलिए कर रहा था ताकि अब

20:36

Speaker A

उसकी आवाम अल्लाह और इस्लाम के नाम पर उसे सुपर पावर अमेरिका से बचा सके। लेकिन अब ऐसा करना इंपॉसिबल था। क्योंकि अमेरिका ने सदाम हुसैन की हुकूमत पर इतनी पाबंदियां लगाई थी कि वो एक कतरा भी तेल का किसी को

20:52

Speaker A

नहीं बेच सकता था। जिससे उसकी इकॉनमी बिल्कुल तबाह हो चुकी थी। यहां तक कि सद्दाम की हुकूमत में इराक के लोग खानेपीने की चीजों को भी तरसने लगे थे। और यह अमेरिका की पुरानी आदत है। अमेरिका के सेंशंस ऐसी ही होते हैं जिस तरह एक

21:09

Speaker A

शेर अपने शिकार को खाने से पहले उसकी गर्दन को अपने दांतों में दबोच कर उसके मरने का इंतजार करता रहता है ताकि फिर उसे आराम से खा सके। आखिर अमेरिका के सेंशंस के बाद इराक के हालात इतने खराब हो गए कि यहां पर सदाम

21:29

Speaker A

हुसैन को उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा झजका मिला। अचानक एक दिन सद्दाम हुसैन के दो बड़े जनरल्स इराक को छोड़कर फरार हो गए और कुछ ही दिनों बाद यह जनरल्स पूरी दुनिया के टीवीज के सामने आए और कहा कि सद्दाम हुसैन एक बहुत ही

21:48

Speaker A

जालिम डिक्टेटर है। और सब बड़े कंट्रीज को मिलकर सद्दाम को उसके तख्त से हटाना चाहिए। और साथ ही एक बहुत ही खतरनाक बात कही कि सद्दाम का इरादा यह है कि वो इराक के लिए एटम बम बनाए। इन जनरल्स की बातों की वजह से

22:06

Speaker A

सद्दाम हुसैन को बहुत दुख हुआ क्योंकि ये कोई आम जनरल्स नहीं थे बल्कि ये दोनों जनरल्स सद्दाम की दो बेटियों के शौहर भी थे। तो अब जब सदाम हुसैन के दामाद ने उसके खिलाफ यह बातें की तो अमेरिका को उसका

22:21

Speaker A

बहाना मिलाव्स कि सद्दाम को कैसे और कब हटाना है। सद्दाम हुसैन ने अपने दामादों की बगावत के बाद भी उन दोनों को एक मैसेज भेजा कि मैं तुम दोनों को माफ करने के लिए तैयार हूं। अगर तुम फौरन मेरी बेटियों को

22:34

Speaker A

लेकर वापस इराक आओ। लेकिन जैसे ही उनका जहाज इराक में लैंड हुआ। सदाम हुसैन ने उन दोनों को हुकुम दिया कि मेरी दोनों बेटियों को तलाक दो। और इस तलाक के कुछ ही घंटों बाद इन दोनों को मार दिया गया।

22:48

Speaker A

जिसके बहुत अरसे बाद सदाम हुसैन की बेटी से इंटरव्यू लिया गया। जिसमें इंटरव्यूअर ने उससे पूछा कि आपके शौहर को किसने मारा?

22:57

Speaker A

क्या आपके बाप सदाम हुसैन ने जिस पर उसने कहा कि नहीं? तो इंटरव्यूअर ने दोबारा पूछा कि फिर किसने मारा? क्या आपके भाई ने मारा? हुसैन तो सद्दाम की बेटी ने कहा कि हां हमारे हस्बैंड्स को हमारे भाई ने ही

23:14

Speaker A

मारा। उसका भाई मतलब सद्दाम हुसैन का बड़ा बेटा उदय सद्दाम हुसैन इराक का सबसे बड़ा डॉन जो खुद को अपने बाप से भी ज्यादा पावरफुल समझता था। जिसके जुल्मों को देखकर हॉलीवुड की बड़ी-बड़ी फिल्में भी बनी। जो इराक में अपने टॉर्चर,

23:42

Speaker A

रेप और बड़ी-बड़ी पार्टियों की वजह से मशहूर थी। कहा जाता है इराक की हर शरीफ औरत सद्दाम के इस बेटे के सामने आने से डरती थी। जो कभी भी किसी को उठाकर किडनैप कर लेता था। और कोई इसे कुछ नहीं कह सकता था।

23:58

Speaker A

क्योंकि इराक इसके बाप का मुल्क है जो इराक में कहीं पर भी किसी पर भी गोलियां चलाता था। सदाम हुसैन इन्हीं हरकतों की वजह से अपने इस बेटे से बहुत तंग था। लेकिन वो क्या करता इसे कुछ कह भी नहीं सकता था। क्या

24:16

Speaker A

क्या करूं मैं इसका? क्या करूं? मार भी नहीं सकता। प्यार जो करता है मुझसे। जिसके गैराज में दुनिया की हर लग्जरी गाड़ी खड़ी थी। लेकिन सद्दाम अपने सारे गंदे काम भी अपने इसी बेटे से कराया करता था। इसीलिए

24:29

Speaker A

अपने बेटियों के शौहरों को मारने का टास्क भी सद्दाम ने अपने इसी बेटे को दिया जिसने जाकर उन्हें कुछ ही घंटों में मार दिया। अब सदाम हुसैन के दोनों दामाद मर तो गए थे लेकिन उनकी की हुई बातें अब भी जिंदा थी।

24:44

Speaker A

सद्दाम के केमिकल और एटम बॉम्ब। अब अमेरिका को सद्दाम हुसैन पर हमले का बहाना मिल चुका था। लेकिन वो बस दुनिया में किसी ऐसे इवेंट का इंतजार कर रहे थे जिससे वो आसानी से इराक पर हमला कर सके और ऐसा ही नई सदी के शुरू होते ही

25:05

Speaker A

अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया गया। अमेरिका के प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश ने बहुत कोशिश की कि किसी तरह इस हमले का इल्जाम वो इराक के सदाम हुसैन पर लगा सके और फिर इराक पर हमला करके अमेरिका वहां की पूरी

25:23

Speaker A

ऑयल पर कब्जा कर ले। लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी जब उसे कोई सबूत नहीं मिला तो उसने मजबूरन इराक को छोड़कर अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। लेकिन अब मसला ये था कि अफगानिस्तान अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर है और

25:40

Speaker A

अमेरिका को अपने टैंक्स, जहाज और ट्रक्स इतने दूर भेजने के लिए एक बार फिर बहुत ज्यादा ऑयल की जरूरत थी। इसीलिए अफगानिस्तान पर हमले के कुछ ही अरसे बाद अमेरिका एक बार फिर इराक के सदाम हुसैन पर झूठे इल्जाम लगाने लगा। सदाम हुसैन

25:58

Speaker A

अमेरिका सदाम हुसैन के उसी दामाद का इंटरव्यू बार-बार चलाने लगा जिसमें उसने क्लियरली कहा था कि सद्दाम हुसैन के पास केमिकल और एटम बम है। लेकिन यह सब बिल्कुल झूठ था क्योंकि जब यूएन ने इन बॉम्ब्स को ढूंढने के लिए अपनी

26:14

Speaker A

टीम इराक की तरफ भेजी तो उन्हें पूरे इराक में ऐसा कोई भी बॉम्ब नहीं मिला। बीन एंटेड। लेकिन फिर भी अमेरिका अपने झूठ से पीछे नहीं हट रहा था। तो अब अमेरिका जैसे सुपर पावर को रोकने के लिए दुनिया के आम

26:28

Speaker A

लोग सड़कों पर आए। दुनिया की 600 सिटीज में 3 करोड़ लोगों ने मिलकर इराक पर हमले के खिलाफ प्रोटेस्ट किए। जो आज तक दुनिया की तारीख का सबसे बड़ा प्रोटेस्ट है। लेकिन अमेरिका को इन चीजों की कोई परवाह

26:50

Speaker A

नहीं थी। वो इराक के ऑयल के पीछे पागल हो चुका था। इसीलिए 2003 में अमेरिका का प्रेसिडेंट अचानक टीवी पर आया और उसने कहा सद्दाम हुसैन सदाम हुसैन और उसके दोनों बेटों के पास सिर्फ दो दिन का टाइम है कि

27:05

Speaker A

वो इराक को छोड़कर भागवर्स वरना अमेरिका उन पर ऐसा हमला करेगा जिसे पूरी दुनिया याद्व लेकिन ऑफकोर्स सद्दाम हुसैन अमेरिका जैसी सुपर पावर की धमकी के बाद अपने तख्त पर बैठा रहा सदाम हुसैन और उसके बेटे इराक को

27:24

Speaker A

छोड़कर कहीं नहीं गए। तो अब अमेरिका के पास और कोई ऑप्शन नहीं था। अमेरिका ने अपनी फुल ताकत के साथ इराक पर हमला कर दिया। अमेरिका और उसके साथियों ने मिलकर इराक पर हजारों बॉम्ब्स गिराए। अब तक सद्दाम इतना कमजोर हो चुका था कि अमेरिका

27:45

Speaker A

ने सिर्फ एक महीने में पूरे इराक पर कब्जा कर लिया। यह देखकर ऑफ कोर्स सदाम हुसैन और उसके दोनों बेटे अमेरिका की फौज से भागकर अलग-अलग जगहों पर छुप गए। जिसके बाद अमेरिका की फौज हर तरफ इन बाप बेटों को

27:59

Speaker A

ढूंढने लगी और पूरे इराक में ऐलान किए कि सद्दाम के बेटों के सर की कीमत 15-15 मिलियन है और बाप के सर की कीमत 25 मिलियन। टुडे 25 मिलियन ऑन द हेड ऑफ़ सदाम। अब सदाम हुसैन को ढूंढना तो बहुत मुश्किल

28:14

Speaker A

था लेकिन उसके दोनों बेटे एक साथ अपने एक बहुत ही करीबी दोस्त के घर छुप कर बैठे थे। जहां कहा जाता है कि ये दोनों भाई कई दिन तक सारा सारा दिन वीडियो गेम्स खेला करते थे। लेकिन जैसे ही अमेरिका ने इन

28:26

Speaker A

दोनों के सर की कीमत 15-15 मिलियन रखी इनका ट्रस्टेड दोस्त भी इन पैसों के लालच में आया और अपनी दोस्ती को भूल गया। दोस्त दोस्त ना रहा। उसने सदाम हुसैन के बेटों को कहा मुझे एक बहुत ही जरूरी काम से बहुत

28:43

Speaker A

जरूरी काम से कहीं जाना है। यह दोस्त सीधा अमेरिका की सीआईए के पास गए और उन्हें कहा कि मेरे पास सद्दाम के दोनों बेटे हैं। यह सुनते ही अमेरिका ने उसे 30 मिलियन का इनाम दिए जो आज 13 अरब बनते हैं। मतलब

28:57

Speaker A

₹1300 करोड़। अमेरिका ने यह सारे पैसे उस दोस्त को दिए और जाकर सद्दाम के दोनों बेटों के घर को हर तरफ से घेर लिया। लेकिन सरेंडर करने के बजाय सद्दाम के दोनों बेटों ने अमेरिका की फौज पर क्लैश कोफ और

29:10

Speaker A

रॉकेट लॉन्चर से हमला कर दिया। आखिर 3 घंटों की सख्त लड़ाई के बाद अमेरिका ने इन दोनों भाइयों को मिसाइल से उड़ा दिया। जैसे ही अमेरिका की फौज घर के अंदर गई, उन्होंने देखा कि सद्दाम के दोनों बेटे जमीन पर मरे हुए पड़े। लेकिन अब भी

29:27

Speaker A

घर के अंदर से कोई उन पर फायरिंग कर रहा है। जब उन्होंने गौर से देखा तो उन्हें पता चला कि यह तो एक छोटा सा बच्चा है जो उन पर फायरिंग कर रहा है। यह छोटा सा बच्चा कोई और नहीं बल्कि सद्दाम का पोता

29:40

Speaker A

मुस्तफा सद्दाम हुसैन था जो इतनी छोटी सी ऐज में भी अमेरिकनंस के सामने सरेंडर करने को तैयार नहीं था। जिसके बाद अमेरिका ने इस बच्चे पर भी फायरिंग करके उसे मार दिया। अब जब यह खबर उनके बाप सद्दाम हुसैन

29:53

Speaker A

तक पहुंची और उन्हें बताया गया कि आपके दोनों बेटों को मार दिया गया तो उसने सबसे पहले पूछा कि क्या मेरे बेटों ने सरेंडर किया या अमेरिकनंस के साथ लड़कर शहीद हुए?

30:03

Speaker A

तो उन्हें बताया गया कि आपके दोनों बेटे अपने खून के आखिरी कतरे तक अमेरिका की फौज के साथ लड़ते रहे। यह सुनते ही सदाम हुसैन ने कहा कि या अल्लाह आपका बहुत शुक्र है कि आपने मुझे ऐसे बहादुर बेटे दिए। जिसके

30:16

Speaker A

बाद सदाम हुसैन ने रेडियो पर आकर एक स्पीच की और कहा कि मेरे दोनों बेटों को शहीद कर दिया गया। लेकिन अगर मेरे ऐसे ही 100 और बेटे होते मैं उन सबको अपनी कौम के लिए कुर्बान कर देता। आखिर कई महीनों तक सदाम

30:30

Speaker A

हुसैन को ढूंढने के बाद अमेरिका को इस बात का पता चला कि सदाम हुसैन एक खास मछली मशगूफ बहुत ही शौक से खाता है। और इसी मछली की खबर को फॉलो करते-करते सदाम हुसैन का पुराना दोस्त अमेरिका की फौज को उसके

30:43

Speaker A

घर तक लेकर आया। जो एक बहुत ही खराब और टूटी हुई झोपड़ी थी। लेकिन इस झोपड़ी के अंदर भी अमेरिकनंस को कोई नहीं मिला। जैसे ही अमेरिका की फौज इसे एक झूठी खबर समझकर वापस जाने वाली थी, उस शख्स ने सद्दाम के

30:56

Speaker A

दोस्त ने अपने पांव से एक रस्सी की तरफ इशारा किया और कहा, "इसे खींचो।" इस रस्सी का पीछा करते-करते अमेरिका की फौज एक जमीन में एक सुरंग तक पहुंची। अमेरिका का एक फौजी जैसे ही इस सुरंग में अपना ग्रेनेड

31:10

Speaker A

फेंकने वाला था, अचानक उस सुराख के अंदर से एक लंबी दाढ़ी वाला शख्स निकला और कहा मैं हूं इराक का प्रेसिडेंट सद्दाम हुसैन और मैं सरेंडर करने के लिए तैयार हूं। दुनिया के सबसे महंगे पैलेसेस और लग्जरी गाड़ियों में

31:28

Speaker A

फिरने वाला सद्दाम अब एक ऐसे सुरंग से पकड़ा गया जिसमें खड़े होने की जगह भी नहीं थी और उसके अंदर सिर्फ एक लाइट और एक छोटा सा पंखा लगा हुआ था। अमेरिका ने सदाम हुसैन को इसके बाद कई अरसे तक अपने कैद

31:39

Speaker A

में रखा और आखिर एक साल बाद सदाम हुसैन को पूरी दुनिया के कैमरों के सामने इराक की अदालत में पेश किया गया। दुनिया यह देखकर हैरान रह गई कि अब यह वह पुराना पावरफुल और मगरूर सदाम हुसैन नहीं बल्कि एक सफेद

31:53

Speaker A

दाढ़ी वाला कमजोर और बूढ़ा आदमी था। लेकिन जैसे ही जज ने इस बूढ़े सद्दाम से उसका नाम पूछा तो सदाम हुसैन ने उसे कहा कि मेरा नाम पूरा इराक बल्कि पूरी दुनिया जानती है। मुझे तुम्हें बताने की जरूरत नहीं। मतलब

32:09

Speaker A

अब सब कुछ खोने के बाद भी सद्दाम अपना सर झुकाने के लिए तैयार नहीं था। सदाम बार-बार उन जजेस से कहता था कि तुम लोग कोई जजवज नहीं हो बल्कि सिर्फ अमेरिका के एजेंट्स हो और उनका मजाक उड़ाने के लिए बार-बार अदालत में उन पर

32:24

Speaker A

हंसता रहता था और कभी पूरे केस को रोक कर सबको नमाज पढ़ने का कहता था और कभी पूरी अदालत का ही बॉयकॉट कर देता था। आखिर सदाम हुसैन अपनी इन केसेस की वजह से दोबारा एक हीरो बनने लगा था। इसीलिए 2006 में फाइनली

32:39

Speaker A

अदालत ने सदाम हुसैन को मौत की सजा सुनाई। नाउ अपनी मौत की सज़ा सुनते ही सदाम हुसैन रोने-धोने के बजाय जोर-जोर से इजराइल और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाने लगा और उसने बार-बार फस्तीन और मुसलमानों के हक के लिए

32:54

Speaker A

भी नारे लगाए। सदाम हुसैन की जिंदगी की आखिरी ख्वाहिश यह थी कि मुझे एक सोल्जर की तरह एक गन से शूट कर दिया जाए। लेकिन उसकी यह डिमांड रिजेक्ट कर दी गई और उसके कुछ ही दिनों बाद उसे पूरी दुनिया के सामने फांसी

33:08

Speaker A

दे दी गई। जिसकी वीडियो आज तक YouTube पर पड़ी हुई है। लेकिन उसे यहां आप नहीं दिखा सकते। सद्दाम को हटाने के बाद अमेरिका का ख्याल था कि इराक अब एक बहुत ही पीसफुल कंट्री बन जाएगी। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी

33:21

Speaker A

नहीं हुआ क्योंकि सद्दाम को हटाने के बाद अमेरिका ने कुछ बहुत बड़ी-बड़ी गलतियां की। अमेरिका की फौज ने इराक में लाखों लोगों को मारा। इराक में शिया सुन्नी जंग दोबारा शुरू की और सबसे बड़ी गलती यह थी कि उन्होंने सदाम हुसैन की पूरी फौज को

33:37

Speaker A

उनकी जॉब से हटाकर घर जाने का हुकुम दिया जिसकी वजह से एक ही रात में लाखों लोगों की फौज जिनके पास गंस वेपन्स सब कुछ था जॉबलेस हो गए और इराक में अपनी मर्जी की एक नई फौज बनाने लगे।

33:52

Speaker A

यह देखकर सद्दाम की लाखों की फौज और उनके जनरल्स में गुस्सा दोबारा बढ़ने लगा और वो इराक में हर जगह जमा होकर एक नई इससे भी बड़ी बगावत की प्लानिंग करने लगे जिसको आगे जाकर नाम में आ गई। तबारक अमेरिका के हमले के बाद इराक के

34:11

Speaker A

हालात इतने खराब हुए कि इराकी अमेरिकन से नफरत करने लगे। यहां तक कि जब अमेरिका के प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश ने पहली बार इराक विजिट किए तो उनके सर पर लाइव जूते भी मारे गए। इराक पर हमला अमेरिका ने झूठ बोलकर किया

34:29

Speaker A

था। अ मिलियन पीपल इनकान और यह बात आज पूरी दुनिया मानती है। वॉर अ बिग फैट मिस्टेक जॉर्ज बुश मिस्टेक। सदाम हुसैन की फांसी के बाद पूरी दुनिया के अरब लीडर्स की एक बहुत बड़ी मीटिंग हुई जिसमें अरब के

34:46

Speaker A

सारे बड़े-बड़े बादशाह बैठे हुए थे। अचानक अरब का एक बहुत बड़ा लीडर सदाम हुसैन की फांसी की तस्वीर लेकर स्टेज पर चढ़ा और अरब के सारे बादशाहों से कहा कि अब भी अगर हमने अमेरिका को नहीं रोका तो मैं कसम

35:00

Speaker A

खाता हूं कि अमेरिका इसके बाद हम सबको बारी-बारी खत्म करेगा। इस लीडर का नाम था मोहम्मद कजाफी। और इसकी यह बात बिल्कुल सही थी क्योंकि सदाम हुसैन को मारने के बाद अमेरिका का नेक्स्ट टारगेट मोहम्मद कजाफी था। सब्सक्राइब

Topics: सद्दाम हुसैन इराक इराक की राजनीति अरब-इजराइल युद्ध तेल संकट तानाशाही ईरान-इराक युद्ध CIA द गॉडफादर हिंदी डॉक्यूमेंट्री

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