**REHMAN DAKAIT vs. CHAUDHRY ASLAM: The Man Who Ended Lyari's Reign | The Untold Super Cop Story — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/rehman-dakait-vs-chaudhry-aslam-super-cop-story/

चौधरी असलम की कहानी, जिन्होंने रहमान डकैत समेत कई हाई प्रोफाइल अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन किए।

## Key Takeaways

- चौधरी असलम ने लियारी गैंग वार और आतंकवाद के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन किए।
- उनकी छवि एक बहादुर पुलिस अधिकारी की थी, लेकिन उन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगे।
- मीडिया और पुलिस के बीच ऑपरेशन्स की वास्तविकता में अंतर था।
- रहमान डकैत का एनकाउंटर विवादित था लेकिन चौधरी असलम के करियर में महत्वपूर्ण था।
- उनकी मौत टीटीपी के खिलाफ लड़ाई में हुई, जो उनकी बहादुरी का प्रतीक है।

## What the video covers

- अगस्त 2009 में रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत की गिरफ्तारी और एनकाउंटर में मौत।
- चौधरी असलम की पुलिस सेवा और उनका एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में सफर।
- लियारी गैंग वार और पीपल्स अमन कमेटी के खिलाफ चौधरी असलम की कार्रवाई।
- एमकेएम और अन्य उर्दू स्पीकिंग इलाकों में चौधरी असलम का ऑपरेशन क्लीन अप।
- चौधरी असलम पर लगे गैर इंसानी सुलूक और तशद्दुद के आरोप।
- मीडिया और पुलिस के बीच ऑपरेशन्स की असलियत और ड्रामेबाजी।
- चौधरी असलम की पर्सनल लाइफ और करियर की शुरुआत।
- टीटीपी और अन्य आतंकवादी संगठनों के खिलाफ उनकी जंग।
- चौधरी असलम की लोकप्रियता और विवादास्पद छवि।
- उनके द्वारा की गई सफल कारवाईयों का प्रभाव और आलोचनाएं।

## Chapters

1. 00:00 रहमान डकैत की गिरफ्तारी और एनकाउंटर
2. 02:16 चौधरी असलम का लियारी में ऑपरेशन
3. 04:02 मीडिया और पुलिस के ऑपरेशन की असलियत
4. 05:37 रहमान डकैत के खिलाफ विवाद और विरोध
5. 07:35 चौधरी असलम का करियर और एमकेएम के खिलाफ कार्रवाई
6. 09:40 कराची में ऑपरेशन क्लीन अप और पुलिस की भूमिका
7. 11:26 चौधरी असलम की छवि और आरोप
8. 14:30 टीटीपी के खिलाफ जंग और चौधरी असलम की मौत

Answers

## Questions about this video

चौधरी असलम कौन थे और उनकी भूमिका क्या थी?

चौधरी असलम सिंध पुलिस के एक बहादुर अधिकारी थे जिन्होंने लियारी गैंग वार, एमकेएम और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कई ऑपरेशन किए। उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता था।

रहमान डकैत का एनकाउंटर कैसे हुआ था?

अगस्त 2009 में रहमान डकैत को पुलिस ने बूचिस्तान की सड़क पर गिरफ्तार किया था। दो दिन बाद पुलिस मुकाबले में उनकी मौत हुई, जिसे चौधरी असलम की बड़ी कामयाबी माना गया।

चौधरी असलम पर किन आरोपों का सामना करना पड़ा?

उन पर गैर इंसानी सुलूक, बेईमानी और जाली एनकाउंटर के आरोप लगे। कुछ लोग उनके ऑपरेशन्स को प्लांटेड और ड्रामेबाजी भी मानते थे।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01

Speaker A

अगस्त 2009 बूचिस्तान की सड़क पर एक धूल उड़ाती जीप कराची की तरफ जा रही है। जीप में रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत सफर कर रहा था। वो समझ रहा था कि वो अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन असल में

00:20

Speaker A

वो अपनी मौत की जानिब बढ़ रहा था। मौत जो मुहाफिजों की सूरत में नाका लगाए खड़ी थी। एक फौजी वर्दी वाले ने जीप को रुकने का इशारा किया। ड्राइवर ने सरदार रहमान की तरफ देखा। उसने सर के इशारे से गाड़ी

00:34

Speaker A

रोकने की इजाजत दी। गाड़ी हल्के से झटके से रुकी। मगर फौजी अफसर जीप के करीब आया तो रहमान को जोर का झटका लगा। फौजी वर्दी में कोई और नहीं बल्कि पुलिस अफसरान थे। जिनमें उसका जानी दुश्मन चौधरी असलम भी

00:49

Speaker A

मौजूद था। सीनियर सफियों के मुताबिक चौधरी असलम के साथ इरफान बहादुर और उमर शाहिद हामिद समेत पूरी टीम थी। रहमान बलोच और इसके साथी को गिरफ्तार करके ले जाया गया। दो दिन बाद इसकी पुलिस मुकाबले में मारे जाने की खबर

01:07

Speaker A

आई। अब्दुल रहमान बलोच उर्फ़ रहमान डकैत की पूरी कहानी हम आपको पिछली वीडियो में बता चुके हैं। आज बात करेंगे उसको मुकाबले में मारने वाले चौधरी असलम की। सीआईडी के चौधरी असलम का यह पहला मुकाबला नहीं था बल्कि वो तो मशहूर ही एनकाउंटर स्पेशलिस्ट

01:24

Speaker A

[संगीत] था। अब तक 56 नहीं 156 के करीब एनकाउंटर कर चुका था। मगर क्या वो सारे मुकाबले असली थे? या सब के सब जाली। चौधरी असलम हीरो था या विलन नायक था या खलनायक?

01:42

Speaker A

नायक नहीं [संगीत] खलनायक हूं [संगीत] मैं। चौधरी असलम ने रहमान डकैत के अलावा और कौन-कौन से हाई प्रोफाइल टारगेट मुकाबले में मारे?

01:54

Speaker A

मानसेरा का पठान खुद को चौधरी क्यों कहलवाता था? सिंध पुलिस के ईगल स्कॉट से लियारी के चील चौक तक के सफर में क्या-क्या हुआ? आज इस वीडियो में हम आपको सब कुछ बताएंगे। एक हाथ में पिस्तल, [संगीत] एक हाथ में सिगरेट, कलफ लगा सफेद सलवार

02:16

Speaker A

कमीज़। इस हुलिए के साथ चौधरी असलम लिया की गलियों में कई दिनों से दनदना रहे थे। अफशानी गली समेत कई गलियों में सीआईडी की टीम ने कई दिन तक [संगीत] घेराव किया था। गैंग वार के मुलजिमान और उनके आमने-सामने

02:28

Speaker A

फायरिंग होती थी। कई पुलिस अहलकार भी मारे गए। मगर सरदार उजैर जान बलोच चौधरी [संगीत] असलम के हाथ नहीं आए। कुछ लोग इसे प्लांटेड ऑपरेशन भी कहते हैं। काफी दिनों तक चलता रहा। अप्रैल 2012 की अगर हम बात करें कि ये जो लेरी ऑपरेशन के

02:50

Speaker A

नाम पर ये ड्रामा रियलिटी इसके अंदर बहुत कम थी। यानी आप ऐसा इन ऑपरेशन मैंने फर्स्ट टाइम देखा था। 12:00 बजे बुलेटिन इन होना है तो 12:00 बजे पौ:45 बजे के आसपास वो कारवाई शुरू कर देते थे। फिर

03:02

Speaker A

3:00 बजे का आपका बुलेटिन अगर इन होना है तो 3:00 बजे वो कर दे थे। फिर मगरब से पहले क्लोजिंग होनी है। रात को नहीं होता था। क्लोजिंग होनी है। मगरब से पहले एक आध एंट्री देके ये तो हम लोग ऐसे गप्पे लगाते

03:13

Speaker A

लगाते थक गए। खड़े हुए जाहिर है कुर्सी नहीं कुछ नहीं तो एक वहां पर रिक्शा खड़ा हुआ था। तो मैं उस रिक्शे की सीट पर बैठा हुआ चौधरी से बात कर रहा था। इतने में जब नजर पड़ी हमारे फोटोग्राफर्स कैमरामैन की

03:24

Speaker A

तो उन्होंने कहा कि जरा चलाएं सीधा करें। तो यूं करके हमने वो रिक्शा चलाया। दफ्तर से फोन आया कि ये अब चौधरी असलम को जो है वो मोटरसाइकिल रिक्शा पे लेकर कहां जा रहे हैं? मैंने बोला कहीं नहीं जा रहा। एक एक

03:36

Speaker A

ड्रामा हम प्लान कर रहे थे। उसके 5 या 7 मिनट बाद मुझे दफ्तर से फोन आया कि आपका इसके ऊपर बीपर है कि आपने चौधरी असलम को रक्श में जो है वह तो बाखदा मकसद एक रियलिटी मैंने उस बीपर में बयान की

03:47

Speaker A

रियलिटी यह थी उनको यह बताया व्यूवर्स को कि देखिए इस रिक्शे में एक मीडिया पर्सन यह रिक्शा चला रहा है और चौधरी असलम उसके पीछे बैठा हुआ है एज ए पैसेंजर तो लाइक लेरी ऑपरेशन भी बिल्कुल इसी तरह का ऑपरेशन

04:02

Speaker A

है के बजाहिर चौधरी असलम नजर आ रहा है लेकिन दरअसल उसको मीडिया चला रहा है बड़ा अजीबोगरीब ऑपरेशन था कि वो पुलिस जो थी वो अंदर दाखिल नहीं हुई बल्कि वो बाहर से जो है वो फायरिंग करती रही और अंदर जो अमन

04:14

Speaker A

कमेटी के लोग थे जिनके खिलाफ ये ऑपरेशन किया जा रहा था वो मीडिया के नुमाइंदों से गुफ्तगू मतलब मीडिया के नुमाइंदों तक तो उनकी रसाई हो गई थी मीडिया के नुमाइंदों को वो इंटरव्यू तो दे रहे थे लेकिन पुलिस

04:25

Speaker A

की जो है उन तक जो है वो रसाई नहीं हुई थी तो अचानक जो है फिर रहमान मलिक ने एक दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस की बोला अभी हम इस ऑपरेशन को जो है ना वो रोक रहे हैं। अब हम

04:33

Speaker A

नए सिरे से जो है ना ऑपरेशन करेंगे और हेलीकॉप्टरों की मदद से कार्रवाई करेंगे और फलानी मदद से कारवाई करेंगे जो उनका एक अंदाज था गुफ्तगू करने का एकदम जो है वो बड़े-बड़े बोल बोलने का उसी तरह की

04:43

Speaker A

उन्होंने गुफ्तगू की और ये ऑपरेशन जो किया था वो टाई टाई फिश जो है वो जो है वो खत्म हो गया मगर चौधरी असलम के मुताबिक यह ऑपरेशन नहीं था बल्कि छापा था और उसमें इसको पूरी कामयाबी मिली

04:56

Speaker A

35 लोग पकड़े गए उसमें दो हेड मनी वाले भी पकड़े गए 25 लाख हेड मनी भी थी उन पे और वो अभी स्ट्रेटजी चेंज है कोई ऑपरेशन बंद नहीं हुआ है। लिहारी गैंग और पीपल अमन कमेटी के खिलाफ

05:07

Speaker A

चौधरी असलम की यह पहली कारवाई नहीं थी बल्कि 20045 में जब लिया टास्क फोर्स बनाई गई तब से वो लिया गैंग्स के पीछे थे। सरदार रहमान बलोच के खिलाफ ऑपरेशन की तफसील हम अपनी पिछली वीडियो में आपको बता

05:19

Speaker A

चुके हैं। बहरहाल अगस्त 2009 में एक सो कॉल्ड एनकाउंटर में रहमान बलोच का मारा जाना चौधरी असलम की बहुत बड़ी कामयाबी थी। बहसियत एसएसपी ईस्ट इन्वेस्टिगेशन इस बात की तस्दीक करता हूं कि यह रहमान डिकेट मगर सीनियर सफी हो या अहलेखाना वो हमेशा

05:37

Speaker A

इस मुकाबले पर सवाल उठाते रहे। रहमान के राइट हैंड उज़ैर बलोच के लिए चौधरी असलम शायद तब से ही नफरत और दुश्मनी का सिंबल बन चुके थे। हम हाई कोर्ट भी जाएंगे, सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। हम जरदारी साहब से भी अपील करते

05:50

Speaker A

हैं के इस केस के मुतालिक गौर करें और चौधरी असलम के खिलाफ एक्शन ले। मगर यह सिर्फ रहमान बलोच की मयत पर रोने वाले या उसके जनाजे में शिरकत करने वाले ही नहीं थे जो चौधरी असलम को नापसंद करते थे। उनसे

06:06

Speaker A

नफरत करने वालों की लिस्ट तो बहुत लंबी है जिनमें तहरीक तालिबान पाकिस्तान अंडरवर और एमकेएम भी शामिल थी। टीटीपी से चौधरी असलम के टकराव पर हम बाद में बात करेंगे क्योंकि उन्हीं दहशतगर्दों के खिलाफ जंग में चौधरी असलम शहीद हुए। पहले हम एमकेएम

06:22

Speaker A

के खिलाफ ऑपरेशन का जिक्र करेंगे। जिसके दौरान चौधरी असलम एक दबंग पुलिस ऑफिसर के तौर पर सामने आए। मगर उससे भी पहले थोड़ा उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में जान लेते हैं। 1964 में वो मानसेरा के इलाके ढुडियाल में पैदा हुए। बाद में वो कराची

06:36

Speaker A

आए और अक्टूबर 1984 में सिंध रिजर्व पुलिस के ईगल [संगीत] स्क्वाड में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए। पुलिस में दो तरह के अफसरान एक तो जो बराहेरास्त सीएसएस करके अफसर कैडर में शामिल होते हैं वह पीएसपी अफसरान कहलाते हैं। एक पुलिस के वो

06:51

Speaker A

अफसरान जो एएसआई और सिपाही भर्ती होते हैं और तरक्की [संगीत] करते करते और घाटघाट का पानी पीते पीते पीते अफसर लेबर पर पहुंचते हैं। असलम खान एएसआई भर्ती हुए थे। और फिर वह तरक्की करते-करते अपने काम की बुनियाद

07:06

Speaker A

पर, अपनी बहादुरी की बुनियाद पर, अपनी लेगसी की बुनियाद पर, कारकरदगी की बुनियाद पर वो एसपी के ओहदे तक पहुंचे। यह वही दौर था जब ऑल पाकिस्तान महाजिर स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी एपीएमएसओ महाजिर कौमी मूवमेंट यानी एमकेएम के रूप

07:23

Speaker A

में ढल रही थी। अल्ताफ हुसैन महाजिरों के एक बड़े लीडर के तौर पर उभर रहे थे। कुछ अरसे बाद ट्रैफिक हादसे में बुशरा ज़दी की मौत के बाद शहर में जुबान की बुनियाद पर फसादादात होने लगे थे। ऐसे में चौधरी असलम

07:35

Speaker A

ज्यादातर उर्दू स्पीकिंग इलाकों में तायनात रहे। एमकेएम पर इसी दौर से वायलेंस के इल्जामात लगने शुरू हो गए थे। 19 जून 1992 को कराची में ऑपरेशन क्लीन अप शुरू हुआ। जो ऑपरेशन ब्लू फ़ॉक्स कहलाता है। बाद में 1994 में पीपल्स पार्टी के दौर में इस

07:51

Speaker A

ऑपरेशन की कमान सिंध पुलिस ने संभाली। चौधरी असलम इन दिनों गुलबहार में एसएओ थे। कि मेरी शादी के से पहले 9 साल से वो सर्विस में थे। नॉर्मल इंसान की तरह कोई नाम नहीं। मेरी शादी होती है तो एक साल के

08:05

Speaker A

अंदर वो एसएओ गुलवार बन जाते हैं। सीट पे आए ऑपरेशन शुरू 94 उस बंदे को कुछ लोगों ने ये कहा कि उसकी डील डोल देख के चलने का अंदाज, कपड़े पहनने का अंदाज कि चौधरी है। पहले ये चौधरी साहब इस बात पे चिढ़ते थे। बोले

08:24

Speaker A

चौधरी क्यों बोलते हैं इनको? करते करते एक दिन घर में बैठे फोन कर रहे हैं किसी को असलम बोल रहा हूं यार। बोला पहचाना नहीं है। उसका चेहरा थोड़ा सा बजा बोला जानते नहीं हो मुझे। चौधरी है असलम।

08:39

Speaker A

बोले सॉरी सॉरी आपने चौधरी लगाया नहीं। मैंने कहा चौधरी असलम असलम तुम्हारी पहचान ही बन गई। चौधरी अब तुम्हारी पहचान इसके अलावा नहीं है। तो बहाल ये लोगों का कहना था कि चौधरी है। चौधरी नहीं है। वो यूसफुज पठान है। [संगीत]

08:57

Speaker A

यह इलाका अंग्रेजों के दौर में फायरिंग रेंज था। इसीलिए गोली मार भी कहलाता था। अब इलाके के नाम का असर था या ऊपर से मिलने वाला फ्री हैंड चौधरी असलम ने एमकेएम के कारकुनों को टारगेट करना शुरू कर दिया। चौधरी असलम पर एमकेएम के

09:12

Speaker A

रहनुमाओं और कारकुनों के साथ गैर इंसानी सुलूक और बेईमाना तशद्दुद के इल्जामात भी लगे। चौधरी असलम ने जब यह बतौर एसएओ गुलबहार लगे तो इनके ऊपर भी फिर एक इदारे ने हाथ रखा फिर वह इदारे के साथ जॉइंट

09:25

Speaker A

वेंचर के तौर पे ये कारवयां करते थे। जैसे कि आपने कहा कि मावरा अदालत या इस टाइप की चीजें हुई थी। देखिए वो एक ऐसा दौर था जो डिसाइडेड पुलिस मुकाबले होते थे और वो ऐसा दौर था जिसमें पहले से पकड़े हुए जो लोग

09:40

Speaker A

होते थे उनका जो है वो एनकाउंटर किया जाता था। जाहिर है जब दहशतगर्दी हो रही थी एमकेएम के ऊपर इल्जाम था कि वो कराची के जो पुलिस वाले हैं या दूसरी कौमियतों के लोग हैं या दूसरी तंजीमो जमातों के लोग

09:53

Speaker A

हैं उनको वो दहशतगर्दी में जो है वो मार दिया जाता था तो उसके रिएक्शन के तौर पे फिर ये इस तरह का एक एनकाउंटर प्लान होता था जो मैं समझता हूं कि जिसमें ये लोग पेशपेश थे। उन दिनों अगर आप बात करें तो

10:07

Speaker A

चौधरी असलम का एक ग्रुप काम कर रहा था। दूसरी तरफ राव अनवार जो थे वो एक्टिव थे। जीशान काजमी थे। इसी तरह नईम सन्नाटा इस टाइप के लोग थे उस वक्त जो अपनेपने इलाकों में जो है वो काम करते थे।

10:21

Speaker A

चौधरी असलम को जो बुनियादी तौर पे जो शहरत मिली वो मिली कराची ऑपरेशन के दौरान। कराची ऑपरेशन जो हो रहा था उस वक्त एमकेएम के खिलाफ हो रहा था। उनमें चंद पुलिस अफसरान ऐसे थे जिनकी बजाय शहरत ये थी कि

10:33

Speaker A

वो जो ऑपरेशन करने वाले अफसरान थे जो एमकेएम के खिलाफ सामने आके फाइट कर रहे थे या उनके खिलाफ ऑपरेशन कर रहे थे और उनमें उन पे ये इल्जामात भी थे कि बहुत ज्यादा जो है वो मावरा अदालत या मावरा कानून काम

10:45

Speaker A

करते हैं। उनका तशद्दुद जो है बहुत शदीद नयत का तशद्दुद होता है। तो उनमें चौधरी असलम का जो है वो जो है ना शुमार होता था। तो उनकी बेसिक जो बुनियादी शोहरत मिली जिसने उनको बिल्कुल एक चौधरी असलम को

10:57

Speaker A

चौधरी असलम बनाया। वो पुलिस मुकाबले थे। चौधरी किसी तंजीम के खिलाफ मतलब पार्टी के खिलाफ नहीं है। वो दहशत गर्दों के खिलाफ एक्शन करता है। किसी से भी मुनसलिक हो। हर बंदा अपने जमीर की अदालत में है। चौधरी

11:11

Speaker A

अपने जमीर की अदालत में। मगर सियासी जमातों और क्रिमिनल गैंग्स के इन कारकुनों के खिलाफ ऑपरेशन कोई आसान काम भी नहीं था। दूसरी तरफ से भी पुलिस पर भरपूर हमले किए जाते थे। 4 1/2 साल के अरसे में इंस्पेक्टर बहादुर अली समेत 450

11:26

Speaker A

पुलिस अफसरान और अहलकार मारे गए थे। खुशकिस्मती से चौधरी असलम किसी का निशाना नहीं बने। चौधरी ने उस दौर में जब के लोग दिन दहाड़े नहीं निकलते थे। मगरिब को लोग घरों में दुबक जाते थे। नहीं निकलते थे। इतना खौफ

11:40

Speaker A

आरा था 94 में। फिर 18 पुलिस अफसर उठे जिन्होंने कराची को पाक किया। क्या यह सारे शहीदों के दो तीन रह गए। अल्लाह उनको सलामत रखे। ये बहुत ही जो है वो एक खतरनाक जो है वो दौर है। ये एक खौफ का जो है ना वो दौर है।

11:53

Speaker A

वहां यहां लाशें गिरती थी। लोग अपने घरों में जाते हुए जो है वो जो है वो डरते थे। नवंबर 1996 में बेनजीर भुट्टो की हुकूमत खत्म होने के बाद एमक्यूएम के खिलाफ ऑपरेशन सुस्त पड़ गया। एमक्यूएम महाजिर कौमी मूवमेंट से मुत्तहदा कौमी मूवमेंट बन

12:08

Speaker A

गई। 97 के इलेक्शन में नेशनल असेंबली की 12 सीटें भी मिली। और नवाज गवर्नमेंट में मिनिस्ट्री भी। बाद में फिर अनबन हुई और एमके क्यूएम हुकूमत से अलग हो गई थी। मगर एम क्यूएम और चौधरी असलम की दोस्ती उस

12:20

Speaker A

वक्त नहीं हुई थी। चौधरी असलम 25 फरवरी 1999 को डीएसपी नाज़बाद लग गए। बाद में मुशर्रफ दौर के शुरू में वो स्पेशल ब्रांच लाडकाना, एसआरपी सकर और एंटी कार लिफ्टिंग सेल कराची में रहे। मुत्तहैदा कौमी मूवमेंट से उनके ताल्लुकात उस वक्त बेहतर

12:34

Speaker A

हुए जब रऊफ सिद्दीकी सुबाई वजीर-ए-रखला बने। लिहारी में रहमान बलोच गैंग से मुत्तहैदा के कारकुनों का क्लैश शुरू हो चुका था। मुत्तहैदा ने अपने दुश्मन से निपटने के लिए चौधरी असलम को इस्तेमाल करने का प्लान बनाया और चौधरी असलम को

12:46

Speaker A

लिहारी टास्क फोर्स का सरबराह बना दिया गया। एक ये भी इस सुरते हाल का दिलचस्प पहलू ये है कि उनकी बजाय शहरत जो थी वो एमकेएम के कारकुनों को मावरा अदालत कत्ल की वजह से मिली। बाद में जब एमकेएम का दौरे हुकूमत

12:58

Speaker A

आता है 2002 में तो रऊफ सिद्दीकी जो है वज़र दाखिला जो है बनते हैं। यही चौधरी असलम समेत वही जो पुलिस अफसरान जो थे जो एमकेएम के खिलाफ ऑपरेशन कर रहे थे वही रऊफ सिद्दीकी की जो एमकेएम के वज़र दाखिला थे

13:12

Speaker A

उनकी स्पेशल टीम बन जाते हैं। और इन अफसरान को के बारे में यह कहा जाता था कि जो खास जो टास्क होते थे वह रऊफ सिद्दीकी या उस वक्त के गवर्नर इशु इबाद जो है वो इन अफसरान को दिया करते थे वो जिनको जो है

13:25

Speaker A

पूरा करते थे। रूफ सिद्दीकी ने उस वक्त के गवर्नर इशतु इबाद से बात की और इशतुल इबाद ने जो है फिर लंदन में उस वक्त की जो एमकेएम की लीडरशिप थी उनसे बात की कि हमें यहां पे बहुत सारे काम कराने के लिए अपने

13:36

Speaker A

मुखालफिन के खिलाफ जो है काम करवाने के लिए इन जैसे लोगों की इन अफसरान की जरूरत है और ये हमारे एजेंडे पर जो है वो काम करने को तैयार हैं। तो बकायदा इनको जो है माफी दी गई थी लंदन से कि भाई अब जो है ये

13:48

Speaker A

आपके लिए एमकेएम के लिए या एमकेएम के वज़र दाखला के लिए जो है काम कर सकते हैं। तो यह जो अफसरान जो एमकेएम के कारकुनों के क़त्ल में मुलविज़ थे, बाद में वही जो है एमकेएम की टीम बन गए। क्योंकि यह वह दौर

13:59

Speaker A

था जब पूरे पाकि कराची के अंदर जो है वो एमकेएम की ही तोती बोलती थी। तो एमकेएम के सामने कोई ऐसा ग्रुप मौजूद नहीं था जो उसके सामने खड़ा हो सकता था। तो लेरी गैंग वार जो है खड़ी होना शुरू हो गई थी। तो फिर

14:09

Speaker A

वो चौधरी असलम को जो है ये जो है ना वो काम सौंपा गया था कि आप गैंग वार का जो है वो उनको निपटाए। एक जब एक चला था जो दौर चला था कराची ऑपरेशन का जिसमें एमकेएम के

14:23

Speaker A

खिलाफ जो पुलिस अफसरान कारवया करते रहे थे और फिर उसके बाद एक दौर ऐसा आया जब परवेज मुशर्रफ का दौर आया फिर एमकेएम जो थी वो यहां पर इ्तेदार में आ गई थी| इ्तेदार में आने के बाद फिर इन लोगों ने उन अफसरान का

14:37

Speaker A

तो ये सिवाय ट्रांसफर के अंदर इन्हने सिंध कुछ अफसरान को ट्रांसफर किया कुछ को फिर वापस आया फिर इनकी एक डील हुई हमारे ही कोई दोस्त थे जिन्होंने ने इनकी जो है वो एमकेएम से डील करवाई और उन दिनों रऊफ

14:51

Speaker A

सद्दीकी थे वजीर दाखला गवर्नर सिंध थे इशतबाद इन लोगों से मुलाकातें कराई फिर पैटर्न चेंज हुआ इनका फिर इनकी हमदर्दियां चेंज हुई वही जो एमकेएम के सैकड़ों कारकुनों को मारने का एमकेएम के दहशतगर्द कहकर उनको मारने का जो दावेदार था बड़े

15:08

Speaker A

अललान मीडिया पे सारी चीजें होती थी उन दिनों वही चौधरी असलम फिर इनका हम नवा बन और इनके सिद्दीकी से दोस्ती हुई। शबो रोज़ इनके साथ गुजरते थे। फिर इन्होंने लियारी पर कब्जा करने के लिए जैसे कि मैंने आपको

15:23

Speaker A

बताया कि एक लिहरी टास्क फोर्स बनवाई और उसका मकसद यही था कि अरशद पप्पू और इन लोगों पे हाथ रख के और लेरी में किस तरीके से एमकेएम की एंट्री दिलवाई जाए। मगर इससे पहले वो एक कारनामा भी अंजाम दे

15:37

Speaker A

चुके थे। वो था अंडरवर डॉन शोएब खान की गिरफ्तारी। शोएब खान को दाऊद इब्राहिम का साथी समझा जाता था। इसीलिए उन पर हाथ डालना जरा मुश्किल था। शोएब खान पर दूसरे जरा के साथ एमकेएम के कारकुनों को कत्ल करने का भी

15:55

Speaker A

इल्जाम था। चौधरी असलम ने दिसंबर 2004 में लाहौर से गिरफ्तार करके कराची लाया। पुलिस उससे पहले लगी रही। उसको नहीं काबू किया शोएब को। असलम भी अपनी टाइगर गाड़ी लेके डिफेंस में कभी इधर कभी उधर चार बंदे थे घर में और कोई पोस्टिंग नहीं। सबसे

16:13

Speaker A

बड़ा मुश्किल काम क्या होता है? आपके पास पोस्टिंग भी नहीं है कराची में और आपको टास्क भी दिया। उसके बाद बिहारी टास्क सेल बनता है। असलम ने 2 महीने का टाइम दिया और ठीक 1 महीना 15 दिन लाहौर से अरेस्ट करके

16:25

Speaker A

ले आया। शोएब खान के बाद चौधरी असलम ने लियारी में मुजरिमों के खिलाफ भरपूर कारवाईयां शुरू कर दी। मुबयना तौर पर मुत्तहदा कौमी मूवमेंट रहमान बलोच के मुखालिफ ग्रुप अरशद पप्पू को सपोर्ट कर रही थी। जिसकी वजह से

16:38

Speaker A

रहमान बलोच को फरार होकर बलोचिस्तान के इलाके हब जाना पड़ा। 18 मई 2005 को चौधरी असलम ने हब में रहमान बलोच के घर वाइट हाउस पर छापा मारा। उधर से भी पुलिस टीम पर फायरिंग की गई। जिसमें इंस्पेक्टर

16:50

Speaker A

इरफान बहादुर जख्मी हो गए थे। हम चौकी पे गए थे रहमान के लिए रेड करने। उस वक्त यह पैक हो गए थे चारों तरफ। चार बंदे थे टोटल अंदर। गाड़ियां बाहर से निकल गई। गायब क्योंकि आपके साथ अंदर भी कोई

17:05

Speaker A

दुश्मन मुखबर होता है। चौधरी के पेट में ही लगी गोली। फिर इरफान का बाजू बिल्कुल कीमा बना हुआ था जो मैंने देखा जाके और एक अरशद भट्ट था उसकी शादितों की। फिर उसके बाद चौधरी का मिशन बन गया। बुराई को खत्म

17:19

Speaker A

करूंगा। जो चौधरी पे गोली चलाएगा चौधरी उसको नहीं छोड़ता। यहां से रहमान बलोच गैंग से उनकी दुश्मनी समझे जाती किस्म की हो गई। चौधरी असलम बदले की आग में जलने लगे। चौधरी असलम पर यह इल्जाम उस वक्त भी लगा कि वह रहमान

17:34

Speaker A

बलोच ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ मुत्तहदा को खुश करने के लिए कर रहे हैं। बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने इस इल्जाम को गलत करार दिया। ये था कि चौधरी असलम की टीम जब यह रहमान डिकैत जब गिरफ्तार नहीं हो रहा था एक

17:47

Speaker A

छलावा बना हुआ था मैं समझता हूं। तो फिर उससे रिलेटेड कोई भी लोग होते थे किसी भी तरीके के वो इनको जो है वो उनके पीछे लगते थे। गिरफ्तारियां करते थे। खासतौर पर अगर हम तस्करा करें रहीम बलोच का जो कि रहमान

18:02

Speaker A

का भाई था और वो मकसद एक अबनॉर्मल टाइप था उसको फिर उन्होंने एनकाउंटर करके जो है वो मार दिया चौधरी असलम और उसकी टीम ने वो एक बड़ा एक तरह से रहमान डकैत के लिए चैलेंज था टास्क था और जिस पे उन्होंने जो है वो

18:19

Speaker A

अपनी कारवाइयां मजीद इनके खिलाफ जो है वो तेज की अब अशद पप्पू के सारे भाइयों को हमने पकड़ा हाजी लालू को हमने पकड़ा उसके बनोई गफार धोबी को हमने मारा। अब इतने लोगों को मारा और उनकी हेड मनी जासर अरफाद अरशद

18:31

Speaker A

पप्पू का भाई हमने पकड़ा। उसके अलावा उसका भांजे बिलाल जिसप अब 10 लाख हेड मनी है उसको मैंने पकड़ा। तो मैं उनसे मिला भी हूं। उनको पकड़ भी रहा हूं। बहरहाल जैसा कि हमने रहमान बलोच की वीडियो में बताया था कि चौधरी असलम ने जून 2006

18:46

Speaker A

में रहमान बलोच को कोटा से गिरफ्तार किया था। मगर फिर वह खुद एक जाली मुकाबले के इल्जाम में गिरफ्तार हो गए थे। हुआ यह था कि 11 जुलाई 2006 को लियारी टास्क फोर्स ने दावा किया कि उसने गडाब में एक मुकाबले

18:59

Speaker A

में माशूक बरोही नामी मुलजिम को मार दिया है। जो कत्ल अखवा और डकैतियों वगैरह में मुलव्विस था। बाद में पता चला वो माशूक बरोही नहीं बल्कि एक किसान रसूल बख्श भरोही था। जिसे सकरण से गिरफ्तार करके लाया गया था। सीनियर सफियों के मुताबिक इन

19:14

Speaker A

जाली पुलिस मुकाबलों का मकसद भारी हेड मनी हासिल करना भी होता था। बेगुनाह शख्स को चौधरी असलम ने गिरफ्तार करके और उसको हालांकि उस वक्त रहमान डिकैत भी चौधरी असलम की कस्टडी में था और उसी जगह पर माशूक बरोही को भी लाया गया था।

19:32

Speaker A

रहमान डिकैत ने शनाख्त करके चौधरी असलम को यह एहसान किया था उसके ऊपर कि यह जिस बंदे को तुम चौधरी माशूक बरोही कह रहे हो यह माशूक बरोही नहीं है माशूक बरोही कोई और है ये एक मैं जानता हूं इसको ये हब का कोई

19:47

Speaker A

अननोन बंदा है माशूक बरोही नहीं है तो ये लेकिन इसके बावजूद चौधरी असलम ने उस बंदे को मार दिया यह सोच के कि शायद रहमान डकैत उसको बचाना चाह रहा है इस वजह से उसने उसको एनकाउंटर जाहिर करके मार दिया लेकिन

20:01

Speaker A

जब वो माशूक बरोही जो था वो जाली साबित हुआ मुकाबला और एक बेगुनाह बंदा मारना साबित हुआ तो फिर चौधरी असलम उसकी टीम के उन्हीं लोगों के खिलाफ उल्टी एक एफआईआर 302 के तहत हुई और उसके तहत चौधरी असलम

20:18

Speaker A

फिर गिरफ्तार हुआ। वो उसकी टीम के लोग गिरफ्तार हुए। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इस एनकाउंटर में चौधरी असलम, उमर शाहिद हामिद, इरफान बहादुर और चौधरी असलम के दीगर साथी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का नोटिस लिया और यूं दूसरों को लॉकअप और जेल

20:35

Speaker A

में डालने वाला चौधरी असलम खुद सलाखों के पीछे पहुंच गया। वह 18 महीने जेल में रहे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने चौधरी असलम समेत तमाम अफसरों को बेगुनाह करार दे दिया और बरी कर दिया और वो अपनी जॉब पर वापस भी आ

20:48

Speaker A

गए। पुलिस सबसे गरीब और सबसे मिसकीन महकमा है। इसलिए नहीं के मैं पुलिस की कोई मदद सराई करने बैठा हूं। पुलिस इस मुआशरे में मिड करियर का काम करता है। कोई तनाजा, कोई झगड़ा, कोई इख्तलाफ हो जाए तो लोग पुलिस

21:05

Speaker A

का के पास जाते हैं। जिसकी बात सुन ली जाए वो तो कहता है पुलिस बहुत अच्छी है। और जिसकी बात ना सुनी जाए वो कहता है पुलिस बहुत बुरी है। मावरा अदालत वाकयात होते हैं। लेकिन मावराए अदालत वाकयात वहां होते

21:18

Speaker A

हैं जहां अदालती निजाम कमजोर होता है। जहां इस्तगासा कमजोर होता है। जहां जराइयम पेशा अफराद की बल्लेबले होती है। के मावरा मावरा-ए-ए अदालत कत्ल करने का इल्जाम चौधरी असलम और उस जैसे बहादुर अफसरान पर लगा और कई दफा उन्होंने फेस भी किया। एक

21:39

Speaker A

डाकू के डाकू मारने के बाद उस कत्ल के इल्जाम में असलम खान और उसकी पूरी टीम एक बरस से जायद जेल में रहे भाई और फिर बरी होकर आ गए। चौधरी असलम जेल से बाहर आए तो नक्शा थोड़ा

21:54

Speaker A

बदल चुका था। 2008 के इलेक्शन के बाद वफाक और सिंध में पीपल्स पार्टी की हुकूमत कायम हुई। एमकेएम भी इसका हिस्सा थी। रहमान बलोच लेयारी में मजीद जोर पकड़ चुका था और मनमानियों पर उतर आया था। नतीजा यह हुआ कि

22:07

Speaker A

सदर आसिफ अली जरदारी ने लेरी में ऑपरेशन और रहमान बलोच के खिलाफ काराइयों की मंजूरी दे दी। रेंजर्स और पुलिस ने मुश्तका ऑपरेशन शुरू किया। मगर मरकजी किरदार में अब भी चौधरी असलम नजर आए। चौधरी असलम ने अगर उसमें मैं समझता हूं कि

22:21

Speaker A

रियल एनकाउंटर तो बहुत कम होंगे। बेशतर जितने भी ज्यादातर एनकाउंटर हुए मैं समझता हूं वह यही होते थे। उनको जाली मुकाबलों में या एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग करके मारा जाता था। देखिए ये एक मामूली बात नहीं है कि एजेंसियां आपको कह रही हैं कि

22:36

Speaker A

आपने इन लोगों को जो है वो पकड़ के हवाले करना है और उनको एनकाउंटर में मारना है। एजेंसियां आपको कह रही है हर पुलिस अफसर के अंदर यह दम यह थप्पड़ मैं समझता हूं यह नहीं था। चौधरी असलम इसमें कमाल महारत थी

22:49

Speaker A

या दूसरे नंबर पर अगर कमाल महारत थी तो राव अनवार के पास है कि वो इस तरह के एनकाउंटर के एक्सपर्ट थे कि पकड़े हुए लोगों को मारना और इस तरह के एनकाउंटर बनाना। लिहारी गैंग वॉर के नुमाया किरदार वैसे ही

23:02

Speaker A

मशकूक पुलिस मुकाबलों में मारे जाने लगे। जैसे 90ज में एमकेएम के कारकुन मारे जाते थे। लिहारी के बेताज बादशाह और इलाके में सरदार का दर्जा हासिल करने वाला रहमान बलोच भी 9 अगस्त 2009 को एक ऐसे ही मुकाबले में मारा गया।

23:19

Speaker A

बहसियत एसएसपी ईस्ट इन्वेस्टिगेशन इस बात की तस्दीक करता हूं कि यह रहमान मगर जैसा कि हमने शुरू में बताया और रहमान बलोच की स्टोरी में भी कि जराय यही कहते हैं कि इसे गिरफ्तार करके जाली मुकाबले में ठिकाने लगाया गया था। उस रोज जो है

23:35

Speaker A

इनकी कहानी जो है वह इख्तताम को पहुंची। इन्हें मलीर के इलाके में मली लिंक रोड पर ले जाया गया और वहां पर जो है वह अगले दिन जो उसके बाद जो प्रेस जारी हुई वो यही थी कि पुलिस ने एक गाड़ी को रुकने का इशारा

23:48

Speaker A

किया। उसमें सवार अफराद ने रुकने के बजाय पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार होने की कोशिश की और पुलिस की जवाबी फायरिंग से चार लोग मारे गए। जिनमें जो है वो जिनकी शनाख बाद में रहमान नज़द गाल अकील इंग्लिश

24:01

Speaker A

बटवाला और औरंगजेब के नाम से हुई। तो ये थी बेसिकली रहमान की का एंड चौधरी असलम साहब तो आपको पता है बहुत माशा्लाह जाली एनकाउंटर में कितने मशहूर आदमी थे ना। इसने कितने बेगुनाह कत्ल किए थे। तो देखो

24:16

Speaker A

बुरे का अंजाम बुरा ही होता है। सही है ना? आपके सामने सारे मिसाल है। मैं बाकी आपको तो अब्दुल रहमान बलोच को तो किसी दावत पे बुलाया गया था। बलचिस्तान में उसको वहां कत्ल कर दिया गया था। चौधरी

24:28

Speaker A

असलम को कहा गया कहते हैं आप आ जाना। आप इसकी सुपारी लेके आप अपना शो कर देना। आपका रैंक बढ़ेगा। आपको पता है कोई अफसर अगर किसी को मारता है तो उसको पता है मेरा नाम हो जाएगा कि मैंने बड़े बंदे को मारा।

24:39

Speaker A

चौधरी असलम को पता है किसने मारा है। मगर चौधरी असलम ने खुद रियल मुकाबले में अब्दुल रहमान को नहीं मारा। रहमान ब्रज को दावत पर बुलाकर धोखे से मारा गया। इसके बाद जब जुल्फिकार मिर्जा सिंध के वज़र दाखला बने तो लेहारी में पीपल्स अमन कमेटी

24:54

Speaker A

के खिलाफ कारवाईयां सुस्त पड़ गई। नतीजा यह हुआ कि मुहैदा और लिया गैंग के दरमियान क्लैश पड़ने लगे। लेकिन यह वो दौर था जब कराची में टीटीपी भी जोर पकड़ने लगी थी। जुल्फिकार मिर्जा ने सीआईडी यानी क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट को एक्टिव करने

25:08

Speaker A

का हुकुम दिया और उन्हें वहां डिप्लॉय कर दिया गया। इस इदारे को टीटीपी, लश्कर जंगवी और इस किस्म के एक्सट्रीमिस्ट ग्रुपों के खिलाफ कारवाइयों का टास्क मिला। चौधरी असलम ने बहुत बहादुरी से इस एलिमेंट का खात्मा करना शुरू किया। रोजाना

25:22

Speaker A

किसी ना किसी इलाके में सीआईडी की कारवाईयां होती। टीटीपी और दूसरी टेररिस्ट तंजीमों की कारकुन मारे जाते या गिरफ्तार कर लिए जाते। इस कामयाबी ने चौधरी असलम को स्टेट के पावरफुल सर्किल और आवाम की नजरों में हीरो बनाना शुरू कर दिया था।

25:37

Speaker A

फिर जाने से पहले जिंदगी के कुछ मिल टाइम के अंदर मुझे ट्रेनिंग दी। उसने असला चला क्लशन रिपीटर 9 एमएम मैंने कहा क्या बात है? मुझे फूलन देवी बनाना है। बोला नहीं बुरा वक्त आने का पता नहीं होता। तुम गैरत

25:53

Speaker A

की बात करती हो कि गैरत की मौत है। अपना अपने डिफेंस के लिए सीखो। कल महीना हुआ जरूरत पड़ेगी। तहरी के तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ भरपूर कारवाइयों का पहला बड़ा रद्दे अमल सीआईडी के हेड ऑफिस पर हमले की शक्ल में आया। 11

26:10

Speaker A

नवंबर 2010 को सिविल लाइंस कराची में सीआईडी के दफ्तर से बारूद से भरी गाड़ी टकरा दी गई। चौधरी असलम हमले में बच गए मगर 20 दूसरे लोग मारे गए। हमले की जिम्मेदारी टीटीपी और लश्कर जंगी ने कबूल की। हमले के बाद चौधरी असलम ने

26:27

Speaker A

टेररिस्ट तंजीमों के खिलाफ ज्यादा फ़ोर्स से कारवाईयां शुरू कर दी। जवाब में टीटीपी और लश्कर जंगमी ने एक बड़ा और खतरनाक हमला किया। 19 सितंबर 2011 खयाबाने रूमी डिफेंस चौधरी असलम के दोनों बच्चे स्कूल जा रहे थे। बच्चे घर के अंदर वाले दरवाजे से निकले।

26:45

Speaker A

उन्होंने बैग पार्किंग में खड़ी गाड़ी में रखे। वो गाड़ी में बैठने वाले थे कि किसी बात पर झगड़ा हुआ तो छोटे ने बड़े को मुक्का मारा और भागा। बड़ा इसे मारने के लिए पीछे लपका। अभी वह घर के अंदर पहुंचे

26:58

Speaker A

ही थे कि एक जोरदार धमाका हुआ। 500 किलो बारूद से भरी गाड़ी चौधरी [संगीत] असलम के घर की दीवार से टकरा गई थी। सुबह बारूद मारा और बारूद उसने मारा भी सिर्फ मेरे बच्चों को था। जब मेरे बच्चे

27:17

Speaker A

स्कूल जा रहे थे और मेरे बच्चों का आपस में झगड़ा हो गया और उन्होंने बस्ते तो रख दिए गाड़ी में लेकिन वो ऊपर चले गए वापस और उसने समझा कि बच्चे बैठ गए तो उसने मारा तो उन बच्चों का बच जाना ही मोइजजा

27:27

Speaker A

है 7:15 20 मिनट के अंदर बाहर में आई उठकर मेरे बच्चे स्कूल के लिए रेडी हो रहे थे वेट कर रही थी तैयार 8 7 मिनट का गेम था एक थमक की आवाज आई और मेरा 45 केवीए का जनरेटर

27:41

Speaker A

ब्लास्ट कर गया मेरे कमरे में चारों तरफ आग फैली मैंने असलम को किक मारी इसको नहीं पता फिर भी सो रहा है। इसमें सारी विंडो गिरी हुई है। चीजें टूटी हुई है। उसके नींद इतनी गहरी हुई है। मैंने मारी किक

27:53

Speaker A

मैंने कहा उठो बाराती आ गया नीचे जा बेगती की मत मुझे नहीं मरना। इतने में ब्लैक अंधेरा हो गया। वो केमिकल जो होते हैं उसने वो गले में आने लगे। असलम कुछ हड़बड़ाया। सबसे पहली आवाज उसने अपने आखिरी बेटे पे लगाई। कहां हो? उसने कहा

28:09

Speaker A

पापा हम स्टेयर पे खड़े हैं। कूल जा रहे हैं। तोतला था बोला कूल जा रहा था। तीनों बेटे पार्किंग लाइट गाड़ी की जल रही। उस गाड़ी को उन्होंने हिट किया। उन्होंने समझा बच्चे बैठ के जिसको फिर वहां से

28:22

Speaker A

चौधरी और चौधरी की फैमिली गाजी होती है। हमले में चौधरी असलम के घर में रहने वाले छह पुलिस अहलकार एक राह चलती खातून और उसका बच्चा जान से गए। चौधरी असलम का घर किसी खंडर का मंजर पेश कर रहा था।

28:35

Speaker A

दहशतगर्दों का टारगेट था कि चौधरी असलम को उनकी फैमिली समेत खत्म कर दिया जाए। मगर उनकी किस्मत अच्छी थी कि वह बच गए। इस हमले में एक घर का भेदी भी मुलव्विस था। जिसने दहशत गगर्दों को सारी इंफॉर्मेशन दी

28:49

Speaker A

थी। इसके बारे में हम बाद में बताएंगे। खैर इस हमले की जिम्मेदारी भी तालिबान ने कबूल की। उनके तर्जुमान एहसान उल्ला एहसान ने दावा किया कि चौधरी असलम और दूसरे पुलिस अफसरान को आइंदा भी निशाना बनाया जाएगा। एसएसपी चौधरी असलम इस हमले के बाद

29:02

Speaker A

भी खौफजदा नहीं हुए बल्कि दहशतगर्दों को खुलेआम ललकारा। इन्होंने शेर के मुंह में हाथ डाला है। इनकी नस्लें भी याद रखेंगी कि इनको कौन मिला है। इसके बाद चौधरी असलम ने इन दहशतगर्द ग्रुपों के खिलाफ ताबड़तोड़ कारवाइयां की।

29:16

Speaker A

मगर दहशतगर्द भी मौके की ताक में थे। उनको मदद हासिल थी चौधरी असलम के एक करीबी साथी की। दहशतगर्दों को मौका मिला 9 जनवरी 2014 को। इस दिन नौदरन बाईपास पर मंगो पीर के इलाके में चौधरी असलम ने एक मुबईना

29:29

Speaker A

मुकाबला किया। इसमें तीन तालिबान दहशतगर्दों की हलाकत का दावा किया गया। इस सपहर चौधरी असलम की गाड़ी हसन स्क्वायर से ईसा नगरी की तरफ मुड़ी और लियारी एक्सप्रेसवे पर चढ़ी। उनकी जान को शदीद खतरा था। इसीलिए हुकूमत ने उन्हें बम

29:44

Speaker A

प्रूफ गाड़ी दी हुई थी। लेकिन उस दिन चौधरी असलम की बम प्रूफ गाड़ी मरम्मत के लिए गई हुई थी। इनफॉर्मर ने यह खबर दहशत गर्दों तक पहुंचा दी थी। तो उन्होंने पूरी प्लानिंग कर ली थी। एक Suzuki पिकअप जिस

29:54

Speaker A

पर ड्रम लोड थे। लेरी एक्सप्रेसवे पर चंद ही मिनट पहले चढ़ी थी और मोड़ पर खड़ी थी। आखिरी मुलाकात जाने से पहले 10 मिनट पहले मैं नाराज थी। मैं भागती हुई हॉस्पिटल से घर आई गली में। मैंने कहा मुझे कुछ नहीं

30:11

Speaker A

कहना। मैं नाराज थी। बोला अभी भी नाराज हूं। बोला तुम्हारी साजन की किस गली में शाम हो जाए। पछताओगी। मैंने कहा मैं वैसे नहीं नाराज। मैं तो गाड़ी की वजह से नाराज हूं। मैं तुम्हें मजबूत देखना चाहता हूं।

30:24

Speaker A

मुझे अमारत, गुरबत और किसी चीज से वो नहीं है। लालच तुम्हारे पास सेफ्टी गाड़ी हो बस। बोला पांच छ दिन का टाइम दे। फिर खड़ा हो गया मेरे सर पे। हाथ रखा मेरी चोरी पकड़ ली। माफ करना। बख्श देना। मैंने कहा आप ऐसी बातें क्यों

30:44

Speaker A

कर रहे हो? जब मैंने ऐसे देखा ना तो उसके चेहरे के ऊपर एक रूप थालाइट की तरह। बस वो पल नहीं समझ आई बाद में आई शाम 4:40 पर जैसे ही चौधरी असलम की गाड़ी वहां पहुंची जोरदार धमाका हुआ

31:04

Speaker A

चौधरी असलम इस हमले में शहीद हो गए उनका ड्राइवर कामरान भी जान से गया फिर रास्ते में जब वो टूल टैक्स नहीं होता जो एक है ना हसन स्क्वायर वाला उधर से आधा मिनट भी नहीं हुआ 30 सेकंड क्रॉस इसने मुझे फोन

31:19

Speaker A

फोन किया। मेरा दिल नहीं चाहता मैं इधर आऊं। मुझे तुम दूसरी जगह मिलो। मैंने कुछ बात करनी है तुमसे। मैंने कहा बात सुनो मेरी हालत खराब है। रोज एक जगह से मूव करना बच्चों के साथ आसान काम नहीं है। असलम कल चले गए। बोला

31:35

Speaker A

खुश रहना, आबाद रहना। चौधरी का अल्लाह हाफिज। चौधरी असलम पर इस हमले की जिम्मेदारी इस बार भी तहरीक तालिबान पाकिस्तान ने कबूल की। उनके तर्जुमान शाहिद उल्ला शाहिद ने कहा कि चौधरी असलम को इसलिए मारा गया क्योंकि उन्होंने टीटीपी के 50 से ज़्यादा

31:51

Speaker A

कारकुनों को हलाक किया था। सीआईडी के मुताबिक यह खुदकश हमला था और मुबईना खुदकश बमबार की शनाख्त 26 साला नईमुल्ला सिद्दीकी वद रफी उल्लाह सिद्दीकी के नाम से हुई। उसका हबाई ताल्लुक मोहम्मद एजेंसी से था। मगर वो कराची की कस्बा कॉलोनी में

32:05

Speaker A

रहता था। बाद में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने हमले में मुलविस मज़द चार दहशत गर्दों को गिरफ्तार किया। उन लोगों से इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि चौधरी असलम का ड्राइवर कामरान दहशत गर्दों का इनफॉर्मर था। सितंबर 2011 में जब उनके घर

32:18

Speaker A

पर हमला हुआ था तब भी इसी ने मुखबरी [संगीत] की थी और जनवरी 2014 में बम प्रूफ गाड़ी ना होने की इंफॉर्मेशन भी इसी ने दहशतगर्दों को दी थी। सीआईडी हुकाम के मुताबिक कामरान पुलिस में भर्ती से पहले

32:31

Speaker A

भी लश्कर जंगवी का हिस्सा था। पुलिस में आने के बाद कुछ अरसे के लिए इसने जंगवी से ताल्लुक खत्म किया था। फिर जब चौधरी असलम ने तालिबान और दूसरे शिद्दत पसंदों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, तो कामरान की

32:41

Speaker A

हमदर्दियां दोबारा लश्कर के साथ हो गई थी। और वह लश्कर के रहनुमा नईम बुखारी से राब्ते में आ गया था। नईम बुखारी को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। उसने सीटी को बताया कि तालिबान और लश्कर जंगमी ने चौधरी

32:53

Speaker A

असलम के कत्ल की प्लानिंग 6 महीने तक की। चौधरी असलम की शहादत की खबर ने इंटरनेशनल मीडिया में भी जगह बनाई। उन्हें सुपर कॉफ और तालिबान हंटर करार दिया गया। इस सुपर कॉप पर एक इल्जाम यह भी लगा कि

33:10

Speaker A

उन्होंने करोड़ों की जायदादें नाजायज तरीकों से बनाई। चौधरी असलम के मुताबिक उन्होंने यह करोड़ों रुपए इश्तहारी मुजरिमों को एनकाउंटर में मार कर कमाए। इतनी ज्यादा हेड मनी हासिल करना एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। सर आपको कितने अब तक हेड मनी मिल चुके

33:26

Speaker A

हैं? मुझे भी कोई 9 करोड़ के करीब मिल चुकी है। 9 करोड़ एंड दैट इज द हाईएस्ट। [संगीत] आज वर्ल्ड में इतनी बहरहाल चौधरी असलम की शहादत पर जहां बहुत से आंखों में आंसू थे तो वहीं बहुत से

33:41

Speaker A

घरों में शुक्राने के नवाफिल पड़े गए मिठाइयां भी तकसीम की गई क्योंकि किसी के लिए वो हीरो था तो किसी के लिए विलन मेरी नजर में तो एक पुलिस वाला था मैं हीरो कभी भी नहीं कह सकता हजारों लाखों

33:53

Speaker A

लोग वो हैं कि जिनके लोगों को मुकाबलों में मारा गया कुछ बेगुनाह भी थे उसमें कुछ जाहिर है जुर्मदार भी थे पुलिस के लोग जिनके कातिलों को मारा उन्होंने उनकी उनकी नजर में हीरो थे और वो लोग जिनके लोगों को

34:05

Speaker A

मारा उनकी नजर में विलेन थे। तो यह तो एक नेगेटिव पॉजिटिव मैं समझता हूं होता है। जो गैर मामूली आदमी होता है उसके चाहने वाले और उसके ना चाहने वालों की तादाद घटती बढ़ती रहती है। कभी चाहने वाले बढ़

34:18

Speaker A

जाते हैं, कभी ना चाहने वाले बढ़ जाते हैं। जब ना चाहने वाले बढ़ जाते हैं तो उस उस नामवरी और उस शोहरत को बदनामी कहा जाता है। और जब चाहने वाले बढ़ जाते हैं तो उस नामवरी को जो है वो शोहरत कहा जाता है। तो

34:33

Speaker A

असलम खान जो है जिसे पूरी दुनिया चौधरी असलम के नाम से जानती है वो उसने शोहरत की हर दो बुलंदियों का लुत्फ उठाया वो बदनाम भी रहा और वो मशहूर भी रहा। चौधरी पाकिस्तान का फक्र है। हीरो है।

34:49

Speaker A

हीरो है। आपका इनके बारे में क्या ख्याल है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। और अगली डॉक्यूमेंट्री आप किस बारे में देखना चाहते हैं? यह भी जरूर बताएं। [संगीत]

Topics: चौधरी असलम रहमान डकैत लियारी गैंग वार पीपल्स अमन कमेटी एमकेएम कराची पुलिस एनकाउंटर स्पेशलिस्ट टीटीपी सिंध पुलिस ऑपरेशन क्लीन अप


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