**Ratan Tata's Biggest Regret?😔 The Truth About Tata Indica | Live Hindi — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/ratan-tata-biggest-regret-tata-indica-truth/

रतन टाटा की इंडिका कार की कहानी, उसकी चुनौतियां, सुधार और भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में इसका प्रभाव।

## Key Takeaways

- रतन टाटा का विजन भारतीय जरूरतों के अनुसार कार बनाना था।
- पूरी तरह से मेड इन इंडिया कार बनाना उस समय एक बड़ी उपलब्धि थी।
- ग्राहकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कंपनी ने सुधार किए।
- इंडिका की शुरुआत में खराब छवि के बावजूद टाटा मोटर्स ने अपनी प्रतिष्ठा वापस हासिल की।
- भारतीय ऑटो उद्योग में इंडिका का योगदान महत्वपूर्ण रहा।

## What the video covers

- 1990 के दशक में भारत में पहली पूरी तरह से मेड इन इंडिया पैसेंजर कार इंडिका का लॉन्च।
- रतन टाटा ने भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार डिजाइन की, जैसे चौड़े दरवाजे धोती-साड़ी पहनने वालों के लिए।
- इंडिका के 98% पार्ट्स भारत में बनाए गए, जो उस समय बड़ी उपलब्धि थी।
- लॉन्च के बाद इंडिका को ग्राहकों से मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया, जिसमें कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं।
- रतन टाटा ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर टीम से समस्याओं की जांच कराई और सुधार के लिए व्यापक कदम उठाए।
- 45,000 से ज्यादा कारें वापस बुलाकर मुफ्त में मरम्मत और पार्ट्स बदले गए।
- मार्केट में इंडिका की खराब छवि के कारण बिक्री प्रभावित हुई और कंपनी पर दबाव बढ़ा।
- 1999 में फोर्ड के बिलफोर्ड से रतन टाटा की मीटिंग की कहानी और उसकी सच्चाई पर प्रकाश डाला गया।
- टाटा मोटर्स ने बाद में अपनी कारों की सेफ्टी और डिजाइन में सुधार कर भारतीय बाजार में अपनी छवि सुधारी।
- इंडिका ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में एक नया मुकाम स्थापित किया, भले ही शुरुआत में चुनौतियां आईं।

## Chapters

1. 00:00 इंडिका की डिजाइन और भारतीय जरूरतें
2. 00:56 1990 का भारत और ऑटोमोबाइल मार्केट
3. 02:05 टाटा का विजन और इंडिका का निर्माण
4. 03:08 मेड इन इंडिया कॉम्पोनेंट्स और वैश्विक सहयोग
5. 05:17 इंडिका का लॉन्च और शुरुआती प्रतिक्रिया
6. 06:22 ग्राहकों की शिकायतें और कंपनी की प्रतिक्रिया
7. 07:19 इमरजेंसी मीटिंग और सुधार के प्रयास
8. 08:20 बिलफोर्ड से मुलाकात और वायरल कहानी की सच्चाई
9. 09:22 टाटा मोटर्स की नई शुरुआत और सेफ्टी सुधार

Answers

## Questions about this video

टाटा इंडिका को डिजाइन करते समय किन खास बातों का ध्यान रखा गया?

रतन टाटा ने इंडिका के दरवाजों की चौड़ाई इस तरह रखी कि धोती पहने किसान और साड़ी पहनी महिला भी आसानी से कार में बैठ और बाहर निकल सकें। यह भारतीय उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया था।

इंडिका लॉन्च के बाद किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?

ग्राहकों ने कार के अंदर ज्यादा नॉइज़ और वाइब्रेशन, विंडोज़ की खराबी, और इंजन परफॉर्मेंस से जुड़ी शिकायतें कीं, जिससे कंपनी को व्यापक सुधार करने पड़े।

क्या सच है कि रतन टाटा ने फोर्ड को अपना पैसेंजर कार बिजनेस बेचने की कोशिश की थी?

यह कहानी इंटरनेट पर काफी सुनी जाती है, लेकिन अक्टूबर 2024 में ऑटो कार इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह पूरी तरह सच नहीं है और इस मीटिंग की असली स्थिति अलग थी।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

अच्छा, एक बात बताइए, क्या कोई कार बनाते समय इतनी डिटेलिंग में सोचता है कि धोती पहना किसान हो या साड़ी पहनी हुई महिला? कार के चौड़े दरवाजों की वजह से किसी को बैठने में प्रॉब्लम ना हो। लेकिन इंडिका

00:11

Speaker A

बनाते समय रतन टाटा ने हर छोटी से छोटी बातों का ध्यान रखा था। और फिर जब टाटा ने पहली बार ट्रक से हटकर फर्स्ट मेड इन इंडिया पैसेंजर कार लॉन्च की, ना तो पूरे मार्केट में हलचल मच गई थी। बुकिंग्स इतनी

00:22

Speaker A

तेजी से आई कि खुद मार्केट लीडर Maruti को भी अपनी गाड़ियों के दाम तक कम करने पड़ गए। लेकिन सिर्फ कुछ ही महीनों बाद से हालात ऐसे बिगड़े कि रतन टाटा को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर सीनियर टीम से

00:34

Speaker A

पूछना पड़ गया कि आखिर हमसे चूक कहां हुई? और हां, बिलफोर्ड वाली वह कहानी भी तो आपने जरूर सुनी होगी कि जब तुम्हें कार बनानी आती ही नहीं है तो फिर इस बिजनेस में आए ही क्यों? सुनी है ना? लेकिन सालों से

00:45

Speaker A

शेयर होती आ रही यह कहानी क्या सच थी? आज हम इसको भी एक्सपोज करने वाले हैं। तो फिर अब बने रहिए हमारे साथ क्योंकि आज जो सच सामने आएगा, ना वो शायद उस टाटा इंडिका से बिल्कुल अलग होगा जिसे आप अब तक जानते आए

00:56

Speaker A

हैं। तो दोस्तों, यह टाइम था 1990 का। इकोनॉमिक लिबरलाइजेशन के बाद इंडिया का मार्केट पूरी दुनिया के लिए खुल चुका था। और इसी दौर में सड़कों पर या तो Maruti 800 का दबदबा था या फिर एंबेसडर जैसी कार्स दिखाई

01:13

Speaker A

देती थी। हां, फॉरेन ब्रांड भी इंडिया में आना शुरू हो चुकी थी। लेकिन ज्यादातर कंपनीज़ अपने देश के लिए बनी पुरानी और आउटडेटेड डिज़ाइंस वाली कार ही इंडिया में लाकर बेच रही थी। जैसे 1997 में Ford इंडिया आई और पहली बार अपनी कार स्कॉट ल्च

01:28

Speaker A

की। लेकिन वह पहले से ही एक पुरानी जनरेशन का मॉडल था। ऊपर से उसका इंजन भी अंडरपावर माना गया। जनरल मोटर्स ने भी अपनी ओपल एक्स्ट्रा उतारी जो कि यूरोप में काफी पहले से ही चलती आ रही थी। और दोस्तों, यह

01:40

Speaker A

सिर्फ 1990 की बात नहीं है। आज भी दुनिया के कई सारे हिस्सों में यही खेल चल रहा है। नाइजीरिया और केन्या जैसे डेवलपिंग कंट्रीज डेवलप्ड देशों के लिए आज वही बन चुके हैं जो कभी भारत हुआ करता था। अमीर

01:52

Speaker A

देश आज भी अपनी आउटडेटेड और अनसेफ गाड़ियां ऐसे ही गरीब देशों में डंप करते रहते हैं। यानी उस टाइम एक तरफ दुनिया हमें अपनी पुरानी टेक्नोलॉजी बेच रही थी। लेकिन वहीं दूसरी तरफ भारत की एक कंपनी अपनी पहली मेड इन इंडिया पैसेंजर कार

02:05

Speaker A

बनाने की तैयारी कर रही थी। नाम था टेलको, यानी कि Tata इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी, जिसे आज हम Tata मोटर्स के नाम से जानते हैं। और इस कार को लेकर रतन Tata का विजन पहले दिन से बिल्कुल क्लियर था।

02:17

Speaker A

बिजनेस वर्ल्ड मैगज़ीन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपना पूरा विजन सिर्फ एक लाइन में ही बता दिया था क्योंकि उनका कहना था कि कार का साइज होगा Maruti Zen जितना, अंदर की स्पेस होगी एंबेसडर जितनी, कीमत होगी Maruti 800 के बराबर और रनिंग

02:32

Speaker A

कॉस्ट होगी डीजल कार की जितनी। यानी कि यह कोई हवाहवाई बात नहीं थी बल्कि इंडियन मार्केट की जरूरत को समझकर बनाया गया एक क्लियर और प्रैक्टिकल विज था। लेकिन सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह थी कि Tata इससे पहले

02:43

Speaker A

कभी भी पैसेंजर कार बनाई ही नहीं थी। उस समय टेलको सिर्फ ट्रक्स और बसेस ही बनाती आ रही थी। यही वजह था कि Tata के अंदर भी कई सारे सीनियर एग्जीक्यूटिव्स इस प्रोजेक्ट को लेकर श्योर नहीं थे। उनका

02:55

Speaker A

मानना था कि ट्रक बनाने वाली कंपनी को पैसेंजर कार बनाने जैसा बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहिए। लेकिन रतन टाटा का फैसला बिल्कुल क्लियर था कि अगर भारत को अपनी कार बनानी है तो फिर शुरुआत किसी ना किसी को तो करनी ही होगी। और हां, यहां एक बात

03:08

Speaker A

समझनी बहुत जरूरी है। उस दौर में Maruti हो या फिर कोई भी फॉरेन जॉइंट वेंचर ज्यादातर कंपनीज़ कार के पार्ट्स विदेश से ही मंगवाती थी और इंडिया में उसे असेंबल करके तैयार करती। खुद Maruti ने भी शुरुआत इसी तरीके से ही की थी और 1991 तक उसके

03:23

Speaker A

सिर्फ 65% कॉम्पोनेंट्स ही भारत में बन रहे थे। लेकिन Tata ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना। उनका लक्ष्य था पूरी तरह से मेड इन इंडिया कार बनाने का और लॉन्च से पहले ही वह इस लक्ष्य के 98% तक पहुंच चुके थे।

03:36

Speaker A

लेकिन 98% ही क्यों, वह हम आगे आपको बताएंगे। पर सवाल यह था कि जब Tata ने इससे पहले कभी पैसेंजर कार बनाई ही नहीं थी, तो फिर यह सब पॉसिबल कैसे हुआ? असल में यहीं से रतन टाटा ने दुनिया भर के

03:47

Speaker A

एक्सपर्ट्स को एक साथ लाना शुरू किया। इटली की आईडीए डिज़ स्टूडियो ने कार का डिजाइन तैयार किया। फ्रांस की ले मोटर मॉडर्न ने ट्रांसमिशन की टेस्टिंग की। यूएस की जॉनसन कंट्रोल्स ने सीट्स बनाई और स्पेन की FOSसा ने रियर व्यू मिरर्स तैयार

04:01

Speaker A

किए। यानी एक्सपर्टाइज दुनिया भर से आई, लेकिन कार भारत में ही बनी और यही था उस 98% का असली मतलब। लॉन्च से पहले इसके 3885 कॉम्पोनेंट्स में से 98% भारत में बन चुके थे। आप जरा सोचिए उस देश की बात हो

04:16

Speaker A

रही है जिसने इससे पहले कभी भी अपनी खुद की पैसेंजर कार नहीं बनाई थी। ऐसे में 98% कॉम्पोनेंट्स का भारत में बनना अपने आप में बहुत बड़ी अचीवमेंट थी। लेकिन रतन टाटा का सपना सिर्फ भारत में कार बनाना

04:28

Speaker A

नहीं था। वह एक ऐसी कार बनाना चाहते थे जो शुरू से ही भारतीय लोगों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही थी। इसीलिए इंडिका के दरवाजों की चौड़ाई तक ऐसी रखी गई कि साड़ी या फिर धोती पहनने वाले लोग भी आसानी से

04:40

Speaker A

कार में बैठ सके और बाहर निकल सके। फिर आया 15 जनवरी 1998 का दिन। दिल्ली के प्रगति मैदान में ऑटो एक्सपो लगा था और टाटा का करीब एक एकड़ में फैला हुआ पवेलियन लोगों से खचाखच भरा हुआ था। हर

04:52

Speaker A

कोई अपनी आंखों से देखना चाहता था कि आखिर भारत की पहली पूरी तरह से स्वदेशी पैसेंजर कार दिखती कैसी है। और फिर जैसे ही इंडिका से पर्दा हटा, वहां मौजूद बड़े-बड़े इंडस्ट्री लीडर्स कुछ पल के लिए उस कार को

05:04

Speaker A

तो देखते ही रह गए। Maruti के उस समय के एमडी से लेकर आनंद महिंद्रा और राहुल बजाज तक हर किसी की नजर इस कार पर टिकी हुई थी। उस दिन रतन टाटा ने खुद कहा था कि जिस रास्ते को हमने चुना था, ना, उसके बहुत सारे

05:17

Speaker A

लोगों ने आलोचनाएं की। उनका मानना था कि हम यह काम नहीं कर पाएंगे। लेकिन आज हमारे पास एक ऐसी कार है जो हमारे युवा इंजीनियर्स की मेहनत और जुनून का नतीजा है। लॉन्च से पहले इंडिका की करीब ₹115000

05:30

Speaker A

से ज्यादा बुकिंग्स हो चुकी थी और फिर 30 दिसंबर 1998 को करीब ₹2600 की शुरुआती कीमत के साथ यह कार मार्केट में उतारी गई। कंपनी ने इसकी टैगलाइन रखी थी मोर कार पर कार। यानी कि उसी कीमत में ज्यादा

05:44

Speaker A

स्पेस, ज्यादा फीचर्स और ज्यादा वैल्यू देने का वादा। इस कार के लॉन्च का इंपैक्ट इतना बड़ा था कि Maruti को भी अपनी 800 की कीमत करीब ₹00 तक घटानी पड़ गई। ऐसा लग रहा था कि Tata ने अपने पहले ही कोशिश में

05:56

Speaker A

इतिहास रच दिया है और अब रतन टाटा का सपना सच होता हुआ दिखाई दे रहा था। लेकिन दोस्तों, असली कहानी तो अब शुरू होने वाली थी। जैसे-जैसे इंडिका कस्टमर्स के हाथों में पहुंची, ना, उसकी कमियां सबके सामने आने लगीं। किसी को कार के अंदर जरूरत से

06:11

Speaker A

ज्यादा नॉइज़ और वाइब्रेशन महसूस हो रही थी। किसी के विंडोज़ ठीक से ऊपर नीचे नहीं हो रही थी और ऊपर से कई सारे कस्टमर्स ने तो इंजन परफॉर्मेंस पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। और यह सिर्फ कुछ लोगों की

06:22

Speaker A

कंप्लेंट्स नहीं थीं। नाराजगी इतनी बढ़ गई कि कई जगह पर कस्टमर्स ने गुस्से में तोड़फोड़ तक शुरू कर दी थी। इस तरह जिस कार से Tata ने भारतीय पैसेंजर कार मार्केट को बदलने का सपना देखा था, वही

06:34

Speaker A

कार अब कंपनी के लिए सबसे बड़ी चैलेंज बनती जा रही थी। दांव पर लगे हुए थे पूरे ₹1,700 करोड़। Tata ने इस प्रोजेक्ट में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। ऐसे में जब इंडिका को लेकर एक के बाद एक कंप्लेंट्स

06:45

Speaker A

आने लगीं तो बात सिर्फ कार की नहीं रह गई। अब रतन टाटा के उस सपने पर भी सवाल उठने लगे थे। मामला इतना सीरियस हो गया कि रतन टाटा को खुद कमान संभालनी पड़ी। उन्होंने मुंबई के ताज प्रेसिडेंट होटल

06:57

Speaker A

में अपनी पूरी सीनियर टीम के साथ एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और वहां उन्होंने सिर्फ एक बात कही कि बिना किसी संकोच के आप लोग बताइए कि आखिर हमसे चूक कहां हुई?

07:06

Speaker A

इसके बाद में कमरे में मौजूद सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने बिना कुछ छुपाए अपनी-अपनी प्रॉब्लम्स बतानी शुरू कर दीं और फिर यहीं से Tata Indica के कमबैक पर काम शुरू हुआ। Tata ने देश भर में स्पेशल सर्विस कैंप्स लगाए। कंपनी ने 45,000 से

07:19

Speaker A

ज्यादा इंडिका गाड़ियों को वापस बुलाकर उनकी कमियां ठीक कीं और अपने खर्चे पर 42 पार्ट्स तक बदल दिए। लेकिन इन सब कोशिशों के बावजूद मार्केट का भरोसा वापस लाना इतना आसान नहीं था। इंडिका की खराब रेपुटेशन फैल चुकी थी और सेल्स भी उम्मीद

07:34

Speaker A

के हिसाब से काफी कम आ रही थी। कंपनी पर प्रेशर लगातार बढ़ता ही जा रहा था। टाटा के सामने अब सवाल यह था कि क्या पैसेंजर कार बिजनेस में बने रहना सही फैसला होगा?

07:43

Speaker A

और फिर इसी उथल-पुथल के बीच 1999 में रतन टाटा अपनी सीनियर टीम के साथ डेट्रॉयड पहुंचे। जहां फोर्ड के चेयरमैन बिलफोर्ड से उनकी मुलाकात हुई। अब इस मीटिंग को लेकर सालों से एक कहानी इंटरनेट पर बार-बार सुनाई जाती रही है। अच्छा पता है

07:58

Speaker A

ना वह वाली स्टोरी जिसमें कहा जाता है कि रतन टाटा अपने स्ट्रगलिंग पैसेंजर कार बिजनेस को Ford के हाथों बेचने पहुंचे थे और मीटिंग के दौरान बिलफोर्ड ने रतन टाटा से कहा कि जब आपको पैसेंजर कार्स की समझ

08:09

Speaker A

ही नहीं है तो आपने यह बिजनेस शुरू ही क्यों किया? हम इस बिजनेस को खरीद कर आप पर एहसान करेंगे। अब सुनने में यह कहानी बहुत ड्रामेटिक लगती है, ना? और सच कहूं तो मैं...

08:20

Speaker A

लेकिन सवाल यह है कि क्या बिलफोर्ड ने सच में यह बातें कही थी? एक्चुअली इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ अक्टूबर 2024 में आया था। जब रतन टाटा के निधन के बाद ऑटो कार इंडिया ने इस मीटिंग से जुड़ी एक रिपोर्ट

08:32

Speaker A

पब्लिश की थी। ऑटो कार इंडिया के एडिटर होरामजद सुरा जी ने बताया था कि कुछ महीने पहले उन्होंने खुद रतन टाटा से पूछा था कि क्या बिलफोर्ड वाले इंसल्ट की कहानी सच है? तब रतन टाटा ने इस बात से साफ इंकार

08:44

Speaker A

कर दिया। उन्होंने बताया था कि बिलफोर्ड के साथ उनकी मुलाकात बहुत अच्छी रही थी। दोनों ने सिर्फ बिजनेस ही नहीं बल्कि बेसबॉल, बास्केटबॉल और अपनी पसंदीदा कार्स के ऊपर भी बातें की थी। और फिर इसके कुछ दिन बाद ही बिलफोर्ड ने भी रतन टाटा को

08:58

Speaker A

श्रद्धांजलि देते हुए यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच फैमिली बिजनेस के प्रॉब्लम्स पर लंबी बातें हुई थी और फिर अपने फेवरेट कार्स को लेकर भी खूब चर्चाएं हुई। यानी कि जिस कहानी को हम सालों से सच मानते आए हैं ना उसके सपोर्ट

09:11

Speaker A

में कोई ठोस एविडेंस नहीं मिलते हैं। डेटॉयड से लौटने के बाद रतन टाटा ने अपना पूरा फोकस एक ही चीज पर लगा दिया इंडिका की कमियों को जड़ से ठीक करने पर। और दोस्तों, यह सिर्फ दो-चार पार्ट बदलने का

09:22

Speaker A

काम नहीं था। पूरी फैक्ट्री में काम करने का पूरा तरीका ही बदल गया। टाटा के अकॉर्डिंग पूरी टीम फार्मूला वन जैसी रफ्तार से काम में जुट गई। जहां-जहां बदलाव की जरूरत थी, वहां तुरंत सुधार किए गए और पार्ट्स बनाने वाली कंपनीज़ ने भी

09:36

Speaker A

बेहद कम समय में नए पार्ट्स तैयार करके दे दिए। और फिर 2001 में उस मेहनत का नतीजा भी सामने आया Indica वर्जन 2 के रूप में और इस बार लोगों ने भी Tata का साथ दिया। Indica वर्जन 2 भारत में सबसे तेजी से सफल

09:49

Speaker A

होने वाली कार्स में से एक बन गई। सिर्फ 18 महीनों में ही इसकी 1 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक गई। और सबसे इंटरेस्टिंग बात तो यह थी कि उस समय पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की ग्रोथ धीमी पड़ गई थी। लेकिन

10:00

Speaker A

इंडिका वर्जन 2 अकेले 46% की ग्रोथ के साथ में आगे बढ़ रही थी। और देखते ही देखते इसका मार्केट शेयर भी 20% के पार पहुंच गया था। यहां तक कि 2003 के एक स्टडी में इंडिका के डीजल वर्जन को ऑपरेटिंग कॉस्ट

10:14

Speaker A

के मामले में सबसे बेहतर कार चुना गया। यानी कि जिस कार की शुरुआत कंप्लेंट से हुई थी, वह यह परफॉर्मेंस की वजह से लोगों का भरोसा जीत रही थी। इसके बाद से इंडिका की रफ्तार और भी ज्यादा बढ़ गई। 2007 में

10:26

Speaker A

इसने अपना सबसे बड़ा सेल्स रिकॉर्ड बनाया सिर्फ एक साल में करीब 14,42,000 यूनिट्स बेचकर। लेकिन इसी कामयाबी के साथ ही एक नई प्रॉब्लम भी पैदा होने लगी। अपनी अफोर्डेबिलिटी, बड़ी स्पेस और कम मेंटेनेंस कॉस्ट की वजह से इंडिका टैक्सी

10:40

Speaker A

ऑपरेटर्स की पहली पसंद बन गई। अब सुनने में तो यह बात काफी अच्छी लगती है ना, लेकिन आगे चलकर यही Tata के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाली थी। धीरे-धीरे सड़कों पर इंडिका ज्यादातर टैक्सी के रूप में दिखने

10:52

Speaker A

लगी और यहीं से लोगों के दिमाग में इसकी इमेज बदल गई। बहुत से बायरर्स इसे देखकर बस इतना कहते थे अरे यह तो टैक्सी वाली कार है और आगे चलकर यही परसेप्शन Tata पर इतना भारी पड़ गया ना कि उसे कमर्शियल और

11:04

Speaker A

पर्सनल व्हीकल्स के लिए अलग-अलग स्ट्रेटजी बनानी पड़ी। इसी बीच Tata के सामने एक नया मौका आया और इस बार भारत में नहीं बल्कि यूके में। 2003 में ब्रिटेन की MG Rover नाम की एक कंपनी ने Indica को अपने ब्रांड

11:17

Speaker A

के नाम के साथ में लॉन्च किया और यहां इसका नाम रखा गया था City Rover। Tata के लिए यह इंटरनेशनल मार्केट में अपनी पहचान बनाने का सबसे बड़ा मौका था। लेकिन यूके में मामला बिल्कुल उल्टा पड़ गया। लोगों

11:29

Speaker A

को इसकी कीमत ज़्यादा लगी और कार से जो उम्मीदें थी ना वैसा एक्सपीरियंस नहीं मिल पाया और देखते ही देखते C सिटी Rover की गिनती यूके की सबसे खराब कार्स में होने लगी और फिर सिर्फ 2 साल बाद यानी कि 2005

11:41

Speaker A

में MG Rover खुद ही बंद हो गई। लेकिन दोस्तों कहानी सिर्फ यहीं नहीं रुकी। यहां से सिर्फ 3 साल बाद 2008 में वही Tata Motors फिर ब्रिटेन पहुंची। लेकिन फर्क बस इतना था कि इस बार वह अपनी कार बेचने नहीं

11:53

Speaker A

बल्कि Jaguar और Land Rover को खरीदने के लिए पहुंची थी। लेकिन उधर भारत में Tata Indica अपनी टैक्सी वाली इमेज से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही थी और फिर इसी सोच के साथ 2008 में Indica Vista ल्च की गई

12:06

Speaker A

और यह बिल्कुल नए प्लेटफार्म पर बनी थी लेकिन किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया। उसी साल ऑटो एक्सो में Tata की अपने ही नैनो ने सारी सुर्खियां बटोर ली और Vista पर लोगों का ध्यान ही नहीं गया। ऊपर से

12:18

Speaker A

विstा के नाम के साथ में इंडिका भी जुड़ा रहा जिससे लोगों को लगा कि यह कोई बिल्कुल नई कार नहीं है बल्कि पुरानी indica का ही नया वर्जन है और उसके साथ टैक्सी वाली इमेज भी कहीं ना कहीं पीछे-पीछे चली आई।

12:29

Speaker A

इसी बीच बाजार भी बदल चुका था। Maruti Swift, Hyundai, Santro, i10 और Wagon R जैसी गाड़ियां अब वही खूबियां लेकर आ चुकी थी जो कभी सिर्फ इंडिका के पास हुआ करती थी। इसीलिए अब Indica के पास ऐसा कुछ भी

12:41

Speaker A

नहीं बचा था जो उसे सबसे अलग बना सके और यहीं से उनकी सेल्स लगातार गिरने लगी। लेकिन Tata Motors भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठी रही। कंपनी समझ चुकी थी कि सिर्फ ऑफर देने या मार्केटिंग करने से बात

12:53

Speaker A

नहीं बनने वाली है। अब अगर वापसी करनी है ना तो शुरुआत बिल्कुल नए तरीके से करनी पड़ेगी। इसी सोच के साथ 2013 में Tata ने हॉरिजन नेक्स्ट की शुरुआत की। यह कंपनी का एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन प्लान था जिसके

13:05

Speaker A

तहत Tata अपनी पुरानी कार्स डिज़ और ओवरऑल ब्रांड इमेज तीनों को बदलना चाहती थी। इसीलिए अगले ही साल से कंपनी ने अपनी पूरी स्ट्रेटजी बदल दी। पुराने मॉडल्स धीरे-धीरे हटाए जाने लगे और फिर यह तय हुआ कि सिर्फ टैक्सी मार्केट के भरोसे नहीं

13:19

Speaker A

रहना। आगे बनने वाली कार्स में डिज़ और सेफ्टी सबसे बड़ी प्रायोरिटी होगी। लेकिन दोस्तों इससे पहले कि इन बदलाव का असर दिखता ना 2014 में एक ऐसी रिपोर्ट आई जिसने Tata की पुरानी जनरेशन की गाड़ियों की सबसे बड़ी कमजोरी सामने लाकर रख दी।

13:33

Speaker A

ग्लोबल एनcp ने पहली बार भारत में बनने वाली गाड़ियों के इंडिपेंडेंट क्रैश टेस्ट रिपोर्ट पब्लिश करने शुरू किए। जिसमें Tata Nano को एडल्ट सेफ्टी में ज़ीरो स्टार्स मिले और इंडिका को सिर्फ वन स्टार। जरा सोचिए यह वही इंडिका थी जिसने

13:46

Speaker A

कभी भारत को अपने पहले स्वदेशी पैसेंजर कार होने का प्राउड दिया था। लेकिन अब सेफ्टी को लेकर भी सबसे ज्यादा सवाल उसी पर उठ रहे थे और फिर इसके बाद से तो इंडिका के लिए वापसी करना और भी मुश्किल

13:57

Speaker A

हो गया। इसीलिए पहले तो दिसंबर 2015 में Tata ने Vista को बंद कर दिया और फिर आखिरकार 2018 में कंपनी ने इंडिका का भी प्रोडक्शन हमेशा के लिए बंद करने का फैसला लिया। वजह बिल्कुल साफ थी। नए एमिशन

14:10

Speaker A

नॉर्म्स के हिसाब से इन कार्स को अपग्रेड करना इतना महंगा पड़ता ना कि उसकी सबसे बड़ी ताकत यानी कि अफोर्डेबिलिटी ही खत्म हो जाती। अब एक तरफ इंडिका की कहानी अपने आखिरी पड़ाव पर थी और दूसरी तरफ Tata

14:22

Speaker A

मोटर्स अपनी नई पहचान बनाने में जुट चुकी थी और इस बदलाव के पीछे एक बड़ा नाम था प्रताप बोस जिन्हें Tata मोटर्स ने डिज़ हेड बनाया हुआ था। इससे पहले वह Mercedes Benzen, MSUB और Pajio जैसे कंपनीज़ के लिए

14:35

Speaker A

भी कार्स डिजाइन कर चुके थे। और दोस्तों Tata में उनकी रिस्पांसिबिलिटी सिर्फ नई गाड़ियों को डिजाइन करना नहीं था बल्कि Tata की उस रेपुटेशन को भी बदलना था जो सालों से इंडिका और टैक्सी मार्केट के साथ जुड़ चुकी थी। इसीलिए Tata ने अपनी

14:48

Speaker A

गाड़ियों का पूरा लुक ही बदलना शुरू कर दिया। अब सिर्फ बड़ी कैबिन और कम कीमत काफी नहीं थी। कार पहली नजर में ही मॉडर्न और एक्साइटिंग लगनी चाहिए थी। इसी सोच को ही कंपनी ने एक प्रोजेक्ट का नाम दिया

15:00

Speaker A

इंपैक्ट डिज़। इस बदलाव की शुरुआत जस्ट और बोल्ट से हुई थी। लेकिन असली फर्क 2016 में Tiago के आने के बाद से दिखाई दिया। Tiago देखने में पुरानी Indica से बिल्कुल अलग थी। उसकी कीमत भी अफोर्डेबल थी और

15:12

Speaker A

पहली बार लोगों को लगा कि Tata सिर्फ टैक्सी मार्केट के लिए नहीं बल्कि पर्सनल बायरर्स के लिए भी अच्छी कार्स बना सकती है। इसके बाद से 2017 में Nexon आई। उसकी पीछे की तरफ झुकती हुई रूफ लाइन, ऊंची

15:24

Speaker A

बॉडी और अलग स्टाइलिंग देखकर शायद ही कोई कह सकता था कि इसे उसी कंपनी ने बनाया है जिसकी पहचान कभी Inda और Indigo जैसी गाड़ियों से होती थी। प्रताप बोस की टीम ने Tata की कार को सिर्फ नया शेप नहीं

15:36

Speaker A

दिया। उन्होंने लोगों की नजरों में Tata की पूरी इमेज बदलनी शुरू कर दी। लेकिन Tata का सबसे बड़ा बदलाव डिजाइन में नहीं बल्कि सेफ्टी में दिखाई दिया। अगस्त 2018 में ग्लोबल एनcap ने Nexon का क्रैश टेस्ट किया जिसमें उसे एडल्ट सेफ्टी के लिए फोर

15:50

Speaker A

स्टार्स मिले। अब यहां एक बात ध्यान दीजिएगा। Tata चाहती तो फोर स्टार रेटिंग पर ही रुक सकती थी। लेकिन कंपनी ने कार में कुछ और सेफ्टी इंप्रूवमेंट्स किए और उसे दोबारा क्रैश टेस्ट के लिए भेज दिया। जिसके बाद दिसंबर 2018 में नया रिजल्ट आया

16:04

Speaker A

और इस बार Nexon को पूरे फाइव स्टार्स मिले। इसी के साथ वह भारत में बनी और भारत में बिकने वाली पहली कार बन गई जिसने एन कैप की फाइव स्टार रेटिंग हासिल की थी। जरा सोचिए 2014 में इसी Tata के Indिकाa

16:17

Speaker A

को क्रश टेस्ट में सिर्फ एक स्टार मिला था और सिर्फ 4 साल बाद उसी कंपनी ने ही भारत की पहली फाइव स्टार रेटेड कार बनाकर दिखा दी। इसके बाद से Tata ने इसी रास्ते पर ही आगे बढ़ना जारी रखा। 2020 में Altros को

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भी ग्लोबल एनकैप में फाइव स्टार एडल्ट सेफ्टी रेटिंग मिली और फिर 2021 में पंच ने भी फाइव स्टार्स हासिल कर लिए। यानी कि Nexon के साथ शुरू हुआ यह बदलाव अब पूरी रेंज में दिखने लगा था। ऊपर से प्रताप बोस

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की टीम Tata की अगली जनरेशन तैयार कर रही थी। जिसमें Tiago और Nexon के बाद Tigor, Altros, Harrier और नई Safari जैसी गाड़ियां आई और इन सभी ने Tata की वह पुरानी इमेज तोड़ दी जिनमें उनकी कार्स को

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सिर्फ प्रैक्टिकल और अफोर्डेबल माना जाता था। अब Tata की गाड़ियां अपने डिजाइन और रोड प्रेजेंस के लिए भी पहचानी जाने लगी थी। यानी इंडिका का प्रोडक्शन भले ही 2018 में ही बंद हो गया हो, लेकिन उसकी कहानी वहीं खत्म नहीं हुई थी। क्योंकि आज भी

17:07

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Tata की नई कार्स में कहीं ना कहीं के दौर से सीखा हुआ एक लेसन जरूर दिखता है। और शायद यही वजह है कि भारत की ऑटोमोटिव हिस्ट्री में इंडिका को सिर्फ पहली भारतीय पैसेंजर कार के तौर पर नहीं बल्कि उस कार

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के तौर पर याद किया जाएगा जिसने Tata मोटर्स को हमेशा के लिए बदल दिया। तो फिर क्या इंडिका से रिलेटेड कोई आपकी भी यादें हैं?

Topics: रतन टाटा टाटा इंडिका भारतीय ऑटोमोबाइल मेड इन इंडिया कार कार डिजाइन इंडिका की समस्याएं टाटा मोटर्स 1990 का भारत कार लॉन्च ऑटोमोबाइल सुधार


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