**PUTIN के नाम पर RUSSIA कौन लोग चलाते हैं? RUSSIA REAL STORY — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/putin-russia-real-story/

रूस की सत्ता और पुतिन के शासन का इतिहास, पुतिन के करीबी सिलोविक्स नेटवर्क और उनकी भूमिका पर आधारित वीडियो।

## Key Takeaways

- पुतिन का रूस पर 25 वर्षों से एकाधिकार है।
- सिलोविक्स नेटवर्क पुतिन की सत्ता का आधार है।
- पुतिन के करीबी सहयोगी सरकारी संसाधनों और बड़े प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी पाते हैं।
- रूस की सत्ता में राष्ट्रपति की व्यापक और असीमित शक्तियां हैं।
- पुतिन के शासन ने रूस को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत सैन्य और राजनीतिक शक्ति बनाया है।

## What the video covers

- रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जिसके पास सबसे ज्यादा नेचुरल गैस और परमाणु हथियार हैं।
- व्लादमीर पुतिन पिछले 25 वर्षों से रूस के राष्ट्रपति और सत्ता के केंद्र में हैं।
- पुतिन का बचपन और जूडो क्लब में दोस्ती अरकादी रतनबर्ग से हुई, जो बाद में उनके करीबी सहयोगी बने।
- पुतिन के राजनीतिक करियर की शुरुआत केजीबी से हुई और बाद में उन्होंने रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी के डायरेक्टर और प्रधानमंत्री पद संभाला।
- पुतिन ने अपने करीबी सहयोगियों को सरकारी संसाधनों में हिस्सेदारी दी, जिससे वे अमीर और प्रभावशाली बने।
- सिलोविक्स नामक बाहुबली वर्ग पुतिन के प्रति वफादार हैं और रूस की सत्ता में गहरा प्रभाव रखते हैं।
- पुतिन का नियंत्रण संसद, मीडिया, खुफिया एजेंसियों, बैंकों और सरकारी कंपनियों तक फैला हुआ है।
- रूस की सरकार में राष्ट्रपति के पास व्यापक शक्तियां हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं।
- पुतिन के शासन में रूस ने पश्चिमी देशों को चुनौती दी और अपना पुराना वैभव लौटाने की कोशिश की।
- वीडियो में रूस की सत्ता संरचना, पुतिन के करीबी सहयोगियों की भूमिका और उनके प्रभाव की विस्तार से चर्चा की गई है।

## Chapters

1. 00:00 रूस का परिचय और पुतिन का सत्ता में उदय
2. 01:13 पुतिन का बचपन और अरकादी रतनबर्ग से दोस्ती
3. 02:43 पुतिन का केजीबी में करियर और सोवियत संघ का पतन
4. 04:04 पुतिन का राजनीतिक उभार और सत्ता में प्रवेश
5. 05:39 अरकादी रतनबर्ग और पुतिन के करीबी सहयोगी
6. 07:01 सिलोविक्स नेटवर्क और रूस की सत्ता संरचना
7. 08:22 पुतिन की सत्ता की मजबूती और रूस की वैश्विक स्थिति
8. 11:12 रूस की सरकार की संरचना और पुतिन की शक्तियां

Answers

## Questions about this video

पुतिन रूस की सत्ता में कैसे आए?

पुतिन ने केजीबी में काम किया और 1990 के दशक में सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर के कार्यालय में नौकरी पाई। बाद में वे राष्ट्रपति येल्तसिन के करीबी बने, एफएसबी के डायरेक्टर और प्रधानमंत्री बने, फिर 1999 में राष्ट्रपति पद संभाला।

सिलोविक्स कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?

सिलोविक्स वे बाहुबली और प्रभावशाली लोग हैं जो पुतिन के प्रति वफादार हैं। वे रूस की सत्ता, खुफिया एजेंसियों, मीडिया, बैंकों और सरकारी कंपनियों में गहरा प्रभाव रखते हैं और पुतिन के एजेंडा को आगे बढ़ाते हैं।

पुतिन के करीबी सहयोगी अरकादी रतनबर्ग की भूमिका क्या है?

अरकादी रतनबर्ग पुतिन के बचपन के दोस्त हैं जो जूडो क्लब में मिले थे। वे पुतिन के क्लोज सर्कल का हिस्सा हैं और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स और व्यवसायों में हिस्सेदारी पाकर रूस के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

यह रशियन फेडरेशन यानी रूस है। एरिया में दुनिया का सबसे बड़ा देश। यहां 11 टाइम जोन काम करते हैं। इसका लैंड बॉर्डर 14 देशों से लगा है। सबसे ज्यादा नेचुरल गैस रूस के पास है। परमाणु हथियारों में रूस टॉप पर आता है।

00:14

Speaker A

[संगीत] 1991 तक के बायपोलर वर्ल्ड में रूस शक्ति का दूसरा केंद्र था। आज भी मिलिट्री पावर में वो अमेरिका को चुनौती [संगीत] देता है। इतने बड़े देश को आखिर चलाता कौन है? इसका सीधा जवाब है व्लादमीर पुतिन। पुतिन रूस के

00:32

Speaker A

दूसरे, तीसरे, पांचवें, छठे और सातवें राष्ट्रपति हैं। पिछले 25 बरसों से रूस पर उनका [संगीत] एकाधिकार है। धरती पर दिन, महीने, साल और मौसम बदलते हैं। [संगीत] इलेक्शन का प्रोसेस और विरोधी भी बदल जाते हैं। मगर पुतिन ऐसा लगता है जैसे उन्होंने

00:48

Speaker A

समय को थाम लिया हो। लेकिन ये सब हुआ कैसे? पुतिन रूस के सर्वे सर्वा कैसे बने?

00:54

Speaker A

उनको कुर्सी से हटाना मुश्किल क्यों है? और रूस में सरकार किस तरह काम करती है?

00:59

Speaker A

[संगीत] इन्हीं सवालों के जवाब आपको इस वीडियो में मिलेंगे। नमस्कार, मेरा नाम है दिव्याशी सुमराव। आप देख रहे हैं क्यूरिस्तान और यह है हमारी स्पेशल सीरीज पावर बाज़ जिसमें हम दुनिया भर के देशों की सत्ता का चरित्र बताते हैं। पावरबाज़ की

01:13

Speaker A

पांचवी [संगीत] किश्त में रूस की कहानी। साल 1963 जगह रूस का दूसरा सबसे बड़ा शहर [संगीत] लेननग्रात जिसे अब सेंट पीटर्सबर्ग के नाम से जाना जाता है। शहर के एक घर में काफी शोरगुल हो रहा है। 12 साल का एक बच्चा

01:36

Speaker A

[संगीत] अरकादी रोतनबर्ग जिद पकड़ कर बैठा है। उसके मां-बाप उसको जूडो क्लब भेजना चाहते हैं। लेकिन वह घर से निकलने को तैयार नहीं है। काफी मनाने और लालच देने [संगीत] के बाद अरकादी राजी हो जाता है। फिर एक जूडो क्लब में उसका एडमिशन करवाया

01:50

Speaker A

जाता है। वहां कई बच्चे पहले से ट्रेनिंग ले रहे थे। उसमें [संगीत] से एक बच्चा बाकियों से एकदम अलग था। उसकी कद काठी मामूली थी। वो शांत [संगीत] रहता था। मगर जैसे ही कोई उसको परेशान करता वो पूरी तरह

02:03

Speaker A

बदल जाता था। [संगीत] अपनी उम्र से बड़े लोगों से लड़ने भिड़ने से वो परहेज नहीं करता था। इसके चलते उसके [संगीत] दोस्तों की संख्या बहुत कम थी। लेकिन अरकादी के साथ उसकी पटरी खाने लगी। कुछ ही समय में

02:15

Speaker A

वे बेस्ट कदीज बन चुके थे। यह दोस्ती आगे चलकर रूस की हिस्ट्री और पॉलिटिक्स [संगीत] में बड़ा गुल खिलाने वाली थी। क्योंकि अरकादी रतनबर्ग का यह दोस्त कोई और नहीं बल्कि व्लादमीर [संगीत] पुतिन था। धीरे-धीरे बचपन बीता। जूडो क्लब के दिन भी

02:29

Speaker A

बीते। फिर दोनों अपने-अपने करियर्स में मशगूल हो गए। पुतिन सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी में चले गए। जबकि अरकादी रोतनबर्ग ने जूडो ट्रेनर की नौकरी पकड़ ली। इसके चलते दोनों का मिलनाजुलना बहुत कम हो गया। लेकिन वे एक दूसरे को भूले

02:43

Speaker A

नहीं थे। नियति उन्हें मिलाने के लिए तैयार बैठी थी। साल था 1989। नवंबर के महीने में बर्लिन की दीवार गिरा दी गई। यह दीवार ईस्ट बर्लिन [संगीत] को वेस्ट बर्लिन से अलग करती थी। वेस्ट बर्लिन पर पश्चिमी देशों का कंट्रोल था। जबकि

02:58

Speaker A

[संगीत] ईस्ट में सोवियत संघ की कठपुतली सरकार का शासन था। जैसा बंटवारा बर्लिन शहर का हुआ था वैसा ही पूरे जर्मनी का भी हुआ था। बर्लिन उस बंटवारे का [संगीत] एक सिंबल था। जब बर्लिन वॉल गिरी उस समय

03:11

Speaker A

पुतिन ईस्ट जर्मनी में तैनात थे। कुछ दिनों बाद [संगीत] एंटी सोवियत प्रोटेस्टर्स ने उनके हेड क्वार्टर पर हमला किया। खतरा देखकर सिक्योरिटी गार्ड्स अपनी जगह से भाग गए। वहां मौजूद लोगों की जान पर बनाई थी। तब पुतिन बंदूक लेकर बाहर

03:25

Speaker A

निकले। उन्होंने भीड़ को ललकारते हुए कहा, यहां घुसने की कोई कोशिश भी मत करना। हमारे पास हथियार हैं। अगर तुमने कोई हरकत की तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा। उनकी धमकी सुनकर भीड़ वापस लौट गई। लेकिन इस घटना ने

03:39

Speaker A

पुतिन को आभास दिलाया कि सोवियत संघ के दिन लद चुके हैं और केजीबी की शक्ति भी खत्म हो चुकी है। [संगीत] 1990 की शुरुआत में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके एक बरस बाद सोवियत संघ का पतन हो गया और केजीबी

03:52

Speaker A

को भी भंग कर दिया गया। ईस्ट जर्मनी से लौटने के बाद पुतिन सेंट पीटर्सबर्ग चले गए। उनको शहर के मेयर के यहां नौकरी मिल गई। इन्हीं दिनों में पुतिन और अरकादी की दोस्ती हरी हुई। वे बचपन के दिनों की तरह

04:04

Speaker A

फिर से मिलने जुलने लगे। 1990 का दशक रूस के लिए अच्छा नहीं था। लेकिन पुतिन का ग्राफ तेजी से ऊपर गया। 1996 में वो राजधानी मॉस्को पहुंचे और बहुत जल्द राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के खासम खास बन गए। 1998 में उनको खुफिया एजेंसी एफएसबी

04:22

Speaker A

का डायरेक्टर बनाया गया। फिर 1999 में उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी दी गई और 31 दिसंबर 1999 को जब येल्तसिन ने अचानक इस्तीफा दिया तो राष्ट्रपति की कुर्सी व्लादमीर पुतिन को सौंप दी गई। पुतिन मॉस्को के पावर गेम में बिल्कुल नए थे। हर

04:39

Speaker A

ताकतवर व्यक्ति [संगीत] उन्हें अपना प्यादा समझ रहा था। मगर पुतिन को लोगों की परख थी। केजीबी की ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया गया था कि अपनी परछाई पर भी भरोसा मत करना। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उन्होंने यह सीख याद रखी लेकिन अकेले

04:54

Speaker A

कंट्रोल बनाकर रखना नामुमकिन था। इसके लिए उन्हें अपने आसपास वफादार लोगों की जरूरत थी। तब पुतिन ने जूडो क्लब के दोस्त अरकादी रतनबर्ग को याद किया। [संगीत] पुतिन ने उनको अपने क्लोज सर्कल का हिस्सा बनाया और उन्हें रूस के सरकारी रिसोर्सेज

05:09

Speaker A

में हिस्सेदारी। जैसे-जैसे पुतिन की ताकत बढ़ी उसी अनुपात में अरकादी भी ऊपर गए। थोड़े ही समय में बैंकिंग और कंस्ट्रक्शन बिजनेस में उनकी तूती बोलने लगी थी। सबसे ज्यादा सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स उनको मिल रहे थे। आज के समय अरकादी रतनबर्ग रूस के सबसे

05:25

Speaker A

अमीर लोगों में शामिल हैं और यह सब सिर्फ पुतिन से दोस्ती की बदौलत हुआ। अरकादी ने इसको याद रखा और समय-समय पर इसका हिसाब भी चुकाते रहते हैं। कुछ उदाहरणों से इसे समझिए। नंबर एक 2014 में रूस ने क्रीमिया

05:39

Speaker A

पर कब्जा कर लिया। क्रीमिया की कोई भी जमीनी सीमा रूस से नहीं लगती। दोनों के बीच लगभग 18 कि.मी. का अंतर है। 2015 में इसको जोड़ने के लिए पुल बनाने की योजना बनी। लेकिन कोई भी कंपनी इतना बड़ा

05:51

Speaker A

प्रोजेक्ट लेने के लिए तैयार नहीं थी। तब अरकादी रतनबर्ग ने इस पर अपनी हामी भरी और इस प्रोजेक्ट को पूरा भी किया। नंबर दो 2021 में रूस के विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी ने एक हवेली का वीडियो रिलीज किया। यह [संगीत] हवेली ब्लैक सी के किनारे पर

06:06

Speaker A

बनी थी। इसकी कीमत लगभग ₹9000 करोड़ बताई गई। नवलनी ने आरोप लगाया कि उस हवेली के मालिक पुतिन हैं। इसको लेकर पुतिन की खूब आलोचना हो रही थी। तब अरकादी आगे आए और उन्होंने कहा कि हवेली पुतिन की नहीं

06:19

Speaker A

बल्कि उनकी है। इस तरह उन्होंने पुतिन को बचाने की कोशिश की थी। यह कुछ उदाहरण भरे हैं। जबकि असली कनेक्शन कहीं ज्यादा गहरा है। अरकादी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए अक्सर लागत से अधिक रकम कोट करते हैं। फिर भी उनको सरकारी कॉन्ट्रैक्ट बड़ी

06:34

Speaker A

आसानी से मिल जाते हैं। रिपोर्ट्स हैं कि एक्स्ट्रा पैसे का एक हिस्सा पुतिन को भी मिलता है। अरकादी जैसे बिजनेसमैन पुतिन के लिए एटीएम मशीन की तरह हैं। यूक्रेन जंग में चीज बाहर निकल कर सामने आई है जिसका

06:46

Speaker A

खर्च पुतिन से फायदा पाने वाले रईस लोग उठा रहे हैं। [संगीत] पुतिन के दौर में अमीर और प्रभावशाली होने वाले लोगों के लिए सिलोविक टर्म का इस्तेमाल होता है। [संगीत] इसका मतलब होता है पीपल ऑफ फोर्स यानी बाहुबली। यह लोग 1990 के दशक के

07:01

Speaker A

ओलेगार्क्स का आधुनिक अवतार हैं। पुतिन ने इन सिलोवाक्स का जबरदस्त नेटवर्क बनाया है। इसमें शामिल होने को दो जरूरी शर्तें हैं। पुतिन के प्रति वफादारी और उनके फैसलों को सिर झुका कर मारने की काबिलियत। इसके बदले उन्हें अपने मुताबिक बिजनेस

07:15

Speaker A

चलाने की छूट मिलती है और पैसा कमाने में सरकार भी उनकी मदद करती है। [संगीत] अरकादी रोतनबर्ग इस नेटवर्क की एक बड़ी इकाई हैं। ऐसा ही एक नाम इगो सेचन का भी है। जब [संगीत] पुतिन सेंट पीटर्सबर्ग के

07:28

Speaker A

मेयर के दफ्तर में थे तब सेचन उनके पर्सनल असिस्टेंट हुआ करते थे। जब पुतिन पावर में आए उन्होंने सेचन को भी साथ बुला लिया। 2008 में पुतिन प्रधानमंत्री बने तो सेचन को डेपुटी पीएम बनाया गया। 2012 में उनको

07:42

Speaker A

सरकारी पेट्रोलियम कंपनी रोजफ्ट का सीईओ बना दिया गया। [संगीत] रोजफ रूस की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। इगो सेचन अभी भी इसके सीईओ हैं। उनकी छत्रछाया में कंपनी का पैसा यूक्रेन जंग में बखूबी [संगीत] इस्तेमाल हो रहा है। क्योंकि यूक्रेन

07:56

Speaker A

पुतिन के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। कोई भी सिलोवार्क इसका विरोध [संगीत] नहीं कर सकता। पुतिन के सिलोबार्क हर क्षेत्र में हैं। उन्हें पुतिन ने खुद चुना है। इसलिए चुना है क्योंकि उन्हें वफादारी का भरोसा है और वे [संगीत] उनके एजेंडा को

08:11

Speaker A

आगे बढ़ा रहे हैं। अपनी आत्मकथा फर्स्ट पर्सन में पुतिन लिखते हैं वे बहुत सारे दोस्त हैं लेकिन कुछ ही लोग मेरे करीबी हैं। वे कभी मुझसे अलग नहीं हुए। हमने कभी एक दूसरे को धोखा नहीं दिया। मेरे लिए यही

08:22

Speaker A

चीज बहुत मायने रखती है। पुतिन के यही करीबी लोग सिलोवाक्स हैं। उनका कंट्रोल संसद से लेकर खुफिया एजेंसी, मीडिया, स्पोर्ट्स क्लब, बैंकों और सरकारी कंपनियों तक फैला हुआ है। उनके पास पैसा है, प्रसूक है और निर्णय लेने का अधिकार भी

08:39

Speaker A

है। असल में रूस को वही चला रहे हैं। यह फॉर्मल गवर्नमेंट के पैरेलल चलने वाली व्यवस्था है जिसे पुतिन ने बनाया है और वही उनके कर्ताधर्ता भी हैं। इसलिए कई दफा उन्हें हेड सिलोवाक्स भी कहा जाता है। पिछले 25 वर्षों से रूस में पुतिन का

08:54

Speaker A

साम्राज्य बरकरार है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका सिलोबार्क्स की रही है। लेकिन कई दफा इ

09:10

Speaker A

बोरिस यल्सन के सबसे पसंदीदा ओलगार्क्स [संगीत] में से एक थे। लेकिन येसन के बाद बदली हवा को भांप नहीं पाए। कई ओलगार्क्स ने चुपचाप पतन का वर्चस्व स्वीकार कर लिया था। मगर मिखाइल को [संगीत] यह सब राजस नहीं आ रहा था। एक दिन उन्होंने लाइव टीवी

09:24

Speaker A

पर पुतिन को चैलेंज कर दिया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। कुछ [संगीत] दिनों बाद मिखाइल का प्राइवेट जेट एक एयरपोर्ट पर तेल भरवाने के लिए रुका। उसी समय कुछ हथियारबंद सैनिक जेट में घुसे और मिखाइल को घसीटते हुए अपने साथ ले गए। फिर

09:38

Speaker A

[संगीत] उनके ऊपर टैक्स चोरी और धांधली का मुकदमा चला। उनके अगले 10 बरस साइबेरिया की जेल में बीते। जब तक वह जेल से निकलते उनके बिजनेस पर सरकार ने कब्जा कर लिया था और उसकी चाबी इगोर सीचन को सौंप दी थी।

09:50

Speaker A

दिसंबर 2013 में पुतिन ने मिखाइल को माफ कर दिया लेकिन जेल से छूटते ही उन्हें रूस छोड़कर जाना पड़ा। आज भी मिखाइल लंदन में निर्वासन की जिंदगी जी रहे हैं। दूसरा उदाहरण है येगिनी प्रघोजन का। 1990 के दशक

10:04

Speaker A

में प्रगोजन खाने का ठेला लगाते थे। उनके [संगीत] अड्डे पर पुतिन अक्सर जाया करते थे। वहीं से उन दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी। जब पुतिन पावर में आए प्रगोजन को खाने के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने लगे। जब पैसा बढ़ा उन्होंने वैगनर ग्रुप बनाया।

10:19

Speaker A

यह एक प्राइवेट मिलिट्री ग्रुप है। वैगमनर ग्रुप की बदौलत प्रगोजन पुतिन के और खास बन गए। उन्होंने अपने लोगों को यूक्रेन में भी उतारा मगर जून 2023 में उन्होंने विद्रोह का मन बना लिया। पुतिन ने किसी तरह विद्रोह शांत [संगीत] कराया और

10:32

Speaker A

शुरुआती दिनों में प्रभुजन को माफ भी कर दिया। मगर दो महीने बाद ही प्रभुजन का प्रेम क्रैश हो गया। चर्चा चली ये सब पुतिन के इशारे पर हुआ। तीसरा उदाहरण है व्लादर गुजस्की का। वो भी इलसन के क्लोज

10:43

Speaker A

सर्कल का हिस्सा थे। गुजस्की ने मीडिया के फील्ड में नाम बनाया था। उन्होंने 1993 में रूस का पहला प्राइवेट टीवी चैनल [संगीत] एनTV शुरू किया। इसी के सहारे वो यल्सन के करीब पहुंचे और उनको चुनाव जितवाने में भी मदद की। लेकिन जब पुतिन का

10:58

Speaker A

पद बढ़ा तब रिश्ते बिगड़ने लगे। फिर मार्च 2000 में पुतिन ने [संगीत] राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया। इसके बाद एनTV ने खुलकर उनकी आलोचना शुरू कर दी। लेकिन यह ज्यादा दिनों तक हो नहीं पाया। जून 2000 में सीक्रेट पुलिस ने गुजस्की को गिरफ्तार कर

11:12

Speaker A

लिया। उन पर गर्बन और धांधली के आरोप लगाए [संगीत] गए। फिर जेल में ही उनसे डील करवाई गई। उन्हें अपना चैनल एक सरकारी गैस कंपनी को बेचने के लिए कहा गया। जैसे ही उन्होंने चैनल बेचा उनको रिहा कर दिया

11:24

Speaker A

गया। रिहा होने के बाद बुजुर्स्की भी निर्वासन में चले गए। इस तरह मीडिया को पालतू बनाने का रास्ता खुला। 2010 के दशक में रूस सरकार फॉरेन एजेंट्स एक्ट लेकर आई। इसके तहत विदेशी फंडिंग या विदेश से किसी भी तरह की मदद लेने वाली संस्थाओं पर

11:40

Speaker A

शिकंजा कसा गया। उन्हें फॉरेन एजेंट बताकर परेशान किया जाने लगा। मीडिया चैनलों को बंद करना, पत्रकारों को गिरफ्तार करना और बिना वजह छापेमारी आम हो गई। इसके जरिए पुतिन की आलोचना को असंभव और अस्वीकार्य बना दिया गया। पुतिन के शासनकाल में एक और

11:56

Speaker A

बड़ी चीज हुई। रूस में विपक्ष की गुंजाइश लगातार खत्म होती चली गई। आपको अमेरिका के विपक्षी नेताओं का नाम याद होगा। आपको पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों के बारे में भी पता होगा। लेकिन रूस की किसी बड़ी विपक्षी पार्टी या किसी बड़े विपक्षी नेता

12:11

Speaker A

का नाम शायद ही जानते होंगे। [संगीत] आखिरी बार जो नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा वो एलेक्सी नवनी का था। लेकिन उनका अंत [संगीत] साइबेरिया की एक जेल में हुआ। एक से बढ़कर एक बनावटी आरोपों में सजा झेलते-झेलते [संगीत] जेल में ही उनकी मौत

12:26

Speaker A

हो गई। फिर उनकी संस्था और उनके समर्थकों को सिस्टमैटिक ढंग से शांत कर दिया गया। यह एक बड़ी वजह है कि पुतिन के खिलाफ कोई दमदार नेता नहीं दिखता। उनके विरोधी सिमटते जा रहे हैं और उनका वोट प्रतिशत

12:38

Speaker A

लगातार बढ़ता जा रहा है। 204 के राष्ट्रपति चुनाव में पुतिन को लगभग 89% वोट मिले थे। दूसरे नंबर के कैंडिडेट 5% वोट तक नहीं जुटा सके। इससे पुतिन के एक छत्र राज का साफ पता चलता है। यह तो हुई

12:53

Speaker A

सामदा दाम दंड भेद की नीति। लेकिन संवैधानिक तौर पर भी पुतिन ने अपनी कुर्सी बचाने का इंतजाम कर रखा है। 2008 में उनके लगातार दो प्रेसिडेंशियल टर्न पूरे हो रहे थे। तब उन्होंने अपने वफादार मिट्री [संगीत] मे देव को राष्ट्रपति बना दिया।

13:08

Speaker A

वो खुद प्रधानमंत्री बन गए। जब 2012 आया तब तक प्रेसिडेंट का टर्म 4 साल से बढ़ाकर छ साल किया जा चुका था। पुतिन 2012 में भी जीते। 2018 में भी और अब 2024 में उनका तीसरा टर्म आ रहा था और रूस में कोई

13:24

Speaker A

व्यक्ति लगातार तीन टर्म में राष्ट्रपति [संगीत] नहीं रह सकता था। इससे बचने के लिए उन्होंने एक जनमत संग्रह कराया। इसमें तय हुआ कि कोई व्यक्ति अपने जीवन में दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं रह सकता। इस हिसाब से पुतिन को तुरंत कुर्सी छोड़नी

13:35

Speaker A

[संगीत] थी क्योंकि तब उनका चौथा टर्म चल रहा था। लेकिन कानून में यह क्लॉज़ रखा गया कि यह नई लिमिट 204 से लागू होगी। यानी नई लिमिट के हिसाब से पुतिन का यह पहला कार्यकाल [संगीत] है। वो 2030 का चुनाव भी

13:47

Speaker A

लड़ सकते हैं और जैसे हालात हैं 2036 तक कुर्सी उन्हीं के पास रहने वाली है। इस कहानी से आपको पुतिन की पावर का अंदाजा मिल चुका [संगीत] होगा। कैसे उन्होंने रूस में अपना दबदबा जमाया है और क्यों कोई

14:00

Speaker A

उनके खिलाफ खड़े होने की हिमा नहीं करता। अब रूस का फॉर्मल पावर स्ट्रक्चर क्या है?

14:05

Speaker A

उसको भी समझ लेते हैं। कागजों पर वहां की सरकार कैसी दिखती है? [संगीत] रूस में सेमी प्रेसिडेंशियल सिस्टम है। वहां राष्ट्रपति भी है, प्रधानमंत्री का पद भी है। लेकिन प्रधानमंत्री के पास नाम मात्र की शक्तियां हैं। असली पावर राष्ट्रपति के

14:17

Speaker A

पास ही होती है। सभी अहम मसलों पर अंतिम फैसला उन्हीं का होता है। प्रधानमंत्री का काम उन फैसलों को लागू कराने तक सीमित है। रूस में भी सरकार के तीन अंग हैं। कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। यूं तो संवैधानिक तौर पर रूस एक

14:32

Speaker A

लोकतांत्रिक गणराज्य है। आमतौर पर लोकतांत्रिक देशों में तीन अंगों [संगीत] के बीच शक्ति का संतुलन रहता है। वे एक दूसरे को निरंकुश होने से रोकते हैं। [संगीत] लेकिन रूस में यह स्थिति काफी अलग है। कार्यपालिका से शुरू करते हैं।

14:46

Speaker A

[संगीत] रूस में हेड ऑफ द स्टेट की कुर्सी राष्ट्रपति के पास है। राष्ट्रपति सेना के कमांडर इन चीफ भी हैं। वो देश में आपातकाल लगा या हटा सकते हैं। रूस की विदेश और सुरक्षा से जुड़ी नीतियां वही डिसाइड करते

14:58

Speaker A

हैं। [संगीत] परमाणु हमले पर अंतिम फैसला करने का अधिकार सिर्फ उन्हीं के पास है। रूस के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को भी नियुक्त करते हैं और जब चाहे उन्हें पद से हटा भी सकते हैं। राष्ट्रपति अपनी मर्जी से संसद को भंग कर सकते हैं। संसद से पास

15:11

Speaker A

हुए किसी बिल पर राष्ट्रपति वीटो कर सकते हैं। कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में है। रूस में राष्ट्रपति के पास ना सिर्फ असीमित शक्तियां हैं बल्कि [संगीत] उन्हें उनका इस्तेमाल करने का हक भी है। जैसी शक्तियां

15:26

Speaker A

किसी जमाने में [संगीत] राजा महाराजाओं के पास हुआ करती थी। लेकिन तब राजा एक ही परिवार से आते थे। अब चुनाव से आते हैं। रूस के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

15:36

Speaker A

यह भी [संगीत] जानते हैं। सबसे पहले नॉमिनेशन फाइल किया जाता है। नॉमिनेशन दो तरीकों से फाइल होता है। अगर किसी पॉलिटिकल पार्टी के पास संसद में सीट है तो वो डायरेक्ट अपना कैंडिडेट उतार सकती है। अगर कोई निर्दलीय कैंडिडेट चुनाव

15:49

Speaker A

लड़ना चाहे तो वो भी संभव है। उसके [संगीत] लिए देश भर से 3 लाख लोगों के सिग्नेचर्स जुटाने होते हैं और एक प्रांत से 7500 से ज्यादा साइन नहीं लिए जा सकते। नॉमिनेशन फाइल होने के बाद सेंट्रल इलेक्शन कमीशन सीईसी जांच पड़ताल करती है।

16:03

Speaker A

सीईसी के अप्रूवल के बाद ही [संगीत] कोई कैंडिडेट बैलेट पेपर तक पहुंच सकता है। रूस में राष्ट्रपति चुनाव डायरेक्ट वोटिंग से होता [संगीत] है। देश भर में वोटर्स सीधे राष्ट्रपति चुनने के लिए वोट डालते हैं। जिस भी कैंडिडेट को 50% से ज्यादा

16:16

Speaker A

वोट मिलते हैं वो विजेता बन जाता है। अगर पहले [संगीत] राउंड में कोई विजेता नहीं मिलता तब टॉप टू कैंडिडेट्स के बीच सेकंड राउंड की वोटिंग कराई जाती है। इस तरह रूस का सबसे ताकतवर व्यक्ति चुना जाता है। अब

16:28

Speaker A

एक और सवाल क्या रूस के राष्ट्रपति को कुर्सी से हटाया जा सकता है? रूस के राष्ट्रपति को महाभियोग लगाकर हटाया जा सकता है। [संगीत] महाभियोग भी सिर्फ देशद्रोह या किसी दूसरे संगीन जुर्म में लग सकता है। बीमार या मानसिक रूप से

16:40

Speaker A

अस्वस्थ होने पर हटाने की कोई व्यवस्था नहीं है। [संगीत] महाभियोग चलाने के लिए सबसे पहले संसद के निचले सदन ड्यूमा में प्रस्ताव लाना होता है। सिर्फ प्रस्ताव लाने के लिए सदन के 1/3 सदस्यों का समर्थन चाहिए। अगर समर्थन मिल गया फिर केस

16:54

Speaker A

सुप्रीम कोर्ट और कॉन्स्टिट्यूशन कोर्ट में जाता है। उन्होंने कह दिया कि केस सही है और इसको आगे बढ़ाया जा सकता है। तब ट्यूमा में वोटिंग कराई जाती है। अगर दो तिह सदस्यों ने प्रस्ताव का [संगीत] समर्थन किया तभी ऊपरी सदन फेडरेशन काउंसिल

17:06

Speaker A

में पहुंचता है। वहां भी दो तिहाई मेंबर्स का वोट मिला तब प्रस्ताव पास [संगीत] हो जाता है। उस केस में राष्ट्रपति को कुर्सी छोड़नी होती है और प्रधानमंत्री कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाते हैं। महाभियोग लगने के 90 दिनों के अंदर नया राष्ट्रपति [संगीत]

17:19

Speaker A

चुनाव कराना अनिवार्य है। यानी संविधान में राष्ट्रपति को हटाने की व्यवस्था तो दी गई है लेकिन मौजूदा समय में ऐसा करना लगभग नामुमकिन है। [संगीत] पहली बात संसद के दोनों सदनों में पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का दबदबा है और दूसरी बात

17:34

Speaker A

सुप्रीम कोर्ट और कॉन्स्टिट्यूशन कोर्ट में पुतिन के वफादार बैठे हैं। इसलिए किसी भी महाभियोग [संगीत] प्रस्ताव के पनपने की उम्मीद नहीं के बराबर है। राष्ट्रपति हो गए अब प्रधानमंत्री की बारी। रूस में प्रधानमंत्री हेड ऑफ द गवर्नमेंट है।

17:47

Speaker A

फिलहाल ये कुर्सी मिखायल मिसुत्सन के पास है। लेकिन उनके पास अपने दम पर निर्णय लेने की शक्ति नहीं है। वो एक तरह से राष्ट्रपति [संगीत] के एजेंट की तरह काम करते हैं। उन्हें सरकार के रूटीन कामों को देखना होता है और राष्ट्रपति के एजेंडा को

18:00

Speaker A

लागू करना भी उनकी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री को कैसे चुना जाता है? रूस में प्रधानमंत्री के लिए अलग से कोई चुनाव नहीं होता। उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से नॉमिनेट किया जाता है। फिर वो नाम संसद के निचले सदन ड्यूमा में रखा जाता है। अगर

18:13

Speaker A

ड्यूमा ने सिंपल मेजॉरिटी से मोहर लगा दी तो वह व्यक्ति प्रधानमंत्री बन जाता है। ड्यूमा चाहे तो राष्ट्रपति के सुझाए नाम को रिजेक्ट भी कर सकती है। अगर तीन बार नाम रिजेक्ट हुआ तो राष्ट्रपति [संगीत] ड्यूमा को भंग कर सकते हैं। उस स्थिति में

18:25

Speaker A

निचले सदन का चुनाव कराना होता है। अब सरकार के दूसरे अंग विधायिका की तरफ चलते हैं। विधायिका माने कानून बनाने वाली संस्था। [संगीत] जैसे कि भारत में लोकसभा और राज्यसभा है वैसे ही रूस में भी दो सदनों वाली संसद है। रूस की संसद का नाम

18:39

Speaker A

फेडरल असेंबली है। [संगीत] इसके निचले सदन को स्टेट ड्यूमा कहते हैं। स्टेट ड्यूमा में कुल 450 मेंबर्स होते हैं। पुतिन के गठबंधन के पास 337 सीटें होती हैं। इन सदस्यों का चुनाव जनता के डायरेक्ट वोट से होता है। स्टेट ड्यूमा के मेंबर्स का

18:55

Speaker A

कार्यकाल होता है 5 वर्ष का। दूसरा सदन है फेडरेशन काउंसिल। इसमें 170 सदस्य होते हैं। यह रूस के 85 प्रांतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हर एक प्रांत को दो-दो काउंसलर्स मिले हैं। इनमें से एक का चुनाव प्रांत की विधानसभा करती है। जबकि

19:11

Speaker A

दूसरे मेंबर को प्रांतों के गवर्नर अपॉइंट करते हैं। फेडरेशन काउंसिल के मेंबर्स का टर्म फिक्स नहीं रहता। प्रांतों में गवर्नर्स के बदलने से उनकी कुर्सी भी बदल सकती [संगीत] है। संसद के पास क्या-क्या शक्तियां हैं? संसद बजट पास करती है। बिल

19:24

Speaker A

पर बहस करती है और उस पर वोटिंग करती है। दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाता है। राष्ट्रपति के साइन [संगीत] करते ही बिल कानून बन जाता है। लेकिन अगर राष्ट्रपति ने वीटो लगाया

19:33

Speaker A

तब स्टेट ड्यूमा दो [संगीत] तिहाई वोटों से वीटो को खारिज कर सकती है। प्रधानमंत्री के नाम पर मोहर संसद ही लगाती है। जजों और दूसरे उच्च अधिकारियों की नियुक्ति पर [संगीत] मोहर भी संसद से लगती है और राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग

19:46

Speaker A

की प्रक्रिया संसद से ही शुरू होती है। यानी संसद के पास पर्याप्त शक्तियां हैं जिसके जरिए वह राष्ट्रपति को निरंकुश होने से रोक सकती है। लेकिन [संगीत] पुतिन के कार्यकाल में वह महज डबल स्टैंप बनकर रह गई है। अब सरकार के तीसरे अंग न्यायपालिका

20:01

Speaker A

की बात कर लेते हैं। सबसे ऊपर के लेवल पर दो कोर्ट्स को जानना जरूरी है। पहली है कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट। यह आम लोगों से जुड़े मामलों को नहीं देखती है। इसका काम यह चेक करना है कि कोई कानून संविधान के

20:12

Speaker A

अनुसार है या नहीं। यह केंद्र और प्रांतों के बीच विवादों का निपटारा भी करती है और अंतरराष्ट्रीय संधियों की वैधता पर भी फैसला लेती [संगीत] है। इस कोर्ट में कुल 19 जज होते हैं। उनका नाम राष्ट्रपति सुझाते हैं और संसद का ऊपरी सदन उन नामों

20:28

Speaker A

को फाइनल करता है। आम लोग और मिलिट्री से जुड़े मामलों को देखने वाली सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट है। यह फाइनल कोर्ट ऑफ अपील भी है। इसके जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और संसद का ऊपरी सदन उनके नाम पर मोहर लगाता है। रूस के

20:43

Speaker A

संविधान में न्यायपालिका को स्वतंत्र बताया गया है। लेकिन असलियत में ऐसा है नहीं। अदालतों के फैसले अक्सर राजनीति से प्रेरित होते हैं और उनमें पक्षपात आसानी से दिख जाता है। ये तो हुई सरकार की शाखाएं लेकिन यहां दो और संस्थाओं के बारे

20:57

Speaker A

में जानना जरूरी हो जाता है जिसके बिना रूस का पावर स्ट्रक्चर पूरा नहीं हो सकता। पहली संस्था है मिलिट्री। रूस अपनी जीडीपी का लगभग 7% हिस्सा डिफेंस पर खर्च करता है। 204 में उसने लगभग ₹1 लाख करोड़ की

21:11

Speaker A

रकम डिफेंस पर लगाई थी। सिर्फ अमेरिका और चीन का डिफेंस बजट रूस से अधिक [संगीत] है। रूस के पास लगभग 13 लाख सैनिक एक्टिव ड्यूटी पर हैं। रिजर्व में [संगीत] 20 लाख सैनिकों को रखा गया है। यूक्रेन जंग में

21:22

Speaker A

रूस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके चलते नंबर्स में [संगीत] फेरबदल हो सकता है। रूस को परमाणु हथियारों के मामले में बढ़त है। उनके पास अमेरिका से भी ज्यादा परमाणु हथियार हैं और यह हथियार दुनिया में कहीं भी पहुंच सकते हैं। सेना और

21:36

Speaker A

हथियारों से जुड़े सारे मुद्दों में अंतिम फैसला पुतिन ही लेते हैं। लोकतांत्रिक देशों में मिलिट्री देश को बचाने का काम करती है। लेकिन रूस में उसका पहला काम पुतिन को सेफ रखना है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि पुतिन को ही देश समझ लिया गया है।

21:50

Speaker A

पिछले कुछ समय में एक नोशन बना है कि पुतिन है तो रूस है। उनके बिना रूस का पतन हो जाएगा। यह आईडिया मेन स्ट्रीम का हिस्सा भी बन चुका है। दूसरी बात पुतिन रशियन आर्मी के चीफ कमांडर भी हैं। वह असल

22:02

Speaker A

में अपनी पावर्स को अप्लाई करते हैं। आर्मी के शीर्ष अफसरों की नौकरी पुतिन के प्रति वफादारी पर निर्भर रहती है। ऊंचे पदों पर ऐसे ही लोगों को नियुक्त किया जाता है जिन्हें पुतिन ने अच्छे से परखा हो और जो उनके फैसले का विरोध करने की

22:16

Speaker A

हिम्मत ना कर सकें। इस तरह पुतिन ने मिलिट्री को भी [संगीत] साध रखा है। दूसरी संस्था इंटेलिजेंस एजेंसियां। रूस के पास तीन बड़ी खुफिया एजेंसियां हैं। पहली है एफएसपी। [संगीत] यह रूस के अंदर काम करती है। दूसरी है

22:29

Speaker A

एसवीआर। यह रूस के बाहर खुफिया जानकारियां जुटाती है। और तीसरी [संगीत] है जीआरयू। ये विदेशों में स्पेशल ऑपरेशंस चलाती है। जो काम सीधी [संगीत] उंगली से नहीं हो सकता। उसके लिए इन एजेंसीज का इस्तेमाल किया जाता है। इन तीनों एजेंसीज पर

22:43

Speaker A

राष्ट्रपति [संगीत] पुतिन का कंट्रोल है। इनको चलाने वाले लोग पुतिन के वफादार हैं और वे उन्हें बचाने के लिए लगातार काम करते रहते हैं। तो यह थी रूस के पॉलिटिकल सिस्टम की पूरी कहानी। इसमें [संगीत] कोई शक नहीं है कि पुतिन ने रूस को दलदल से

22:57

Speaker A

बाहर निकाला है। सोवियत संघ के विक्टिम के बाद रूस [संगीत] की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई थी। महंगाई सैकड़ों गुना बढ़ चुकी थी। लगभग आधी आबादी [संगीत] के पास कोई काम नहीं था। रूस पश्चिमी देशों से मदद की गुहार लगा रहा था। रूस के अंदर कई इलाकों

23:12

Speaker A

[संगीत] में सशस्त्र विद्रोह भी हो रहा था। पुतिन ने उस हालात से निकालकर रूस को खड़ा किया। उनके दौर में रूस पश्चिमी देशों को चुनौती देने के काबिल बना और रूस ने अपना पुराना वैभव लौटाने [संगीत] के लिए भी काम शुरू किया। लेकिन इस कवायद में

23:26

Speaker A

लोकतंत्र, मानव अधिकार और आजादी जैसी जरूरी [संगीत] चीजें पीछे छूट गई। आम लोगों ने इस बदलाव की बड़ी कीमत चुकाई है। वे कठपुतलियों की तरह नाचने को मजबूर रह गए। [संगीत] पुतिन के निरंकुश शासन में कोई दूसरा लीडर बना ही नहीं। ना तो उनके

23:40

Speaker A

अपने धड़े में ना विपक्ष में। इसलिए अक्सर यह सवाल उठता है कि पुतिन के बाद रूस का क्या होगा? क्या उनका देश पावर [संगीत] वैक्यूम को भर देगा या कोलैप्स हो जाएगा?

23:51

Speaker A

इसका जवाब काफी हद तक पुतिन की नियत पर ही निर्भर [संगीत] करता है। इसीलिए रूस के असली पावरबाज व्लादमीर पुतिन है। आप पुतिन को क्या मानते हैं? तानाशाह या मसीहा?

24:02

Speaker A

हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। अगर कोई काम की जानकारी मिली हो तो वीडियो को लाइक और शेयर कीजिए। कावदास के बाकी एपिसोड्स आप प्लेलिस्ट पर क्लिक करके देख सकते हैं। क्यूरिस्तान [संगीत] को सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। यह लैंड ऑफ

24:15

Speaker A

क्यूरियोसिटी है यानी जिज्ञासा की जमीन। आपके लिए तमाम जानकारी लेकर आए थे अभिषेक कुमार। किसी [संगीत] नए और दिलचस्प किस्से कहानी के साथ आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए विदा लेती हूं। शुक्रिया।

Topics: रूस व्लादमीर पुतिन सिलोविक्स अरकादी रतनबर्ग रूस की सरकार केजीबी एफएसबी रूस की राजनीति पुतिन का शासन रूस और यूक्रेन


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