**Plane That Changed Pakistan | Nawaz vs Musharraf | 1999 Martial Law Crisis — Transcript & Summary | SozAI**
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1999 के पाकिस्तान के राजनीतिक संकट में नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ के बीच टकराव की कहानी।

## Key Takeaways

- नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ के बीच सत्ता संघर्ष ने पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा बदल दी।
- फ्लाइट PK-805 की लैंडिंग रोकना नवाज शरीफ का रणनीतिक कदम था।
- सैनिक कमांडरों की भूमिका और उनकी वफादारी इस संकट में निर्णायक साबित हुई।
- जनरल मुशर्रफ ने पहले से ही संभावित हटाने के खिलाफ तैयारी कर रखी थी।
- यह घटना पाकिस्तान में 1999 के मार्शल लॉ संकट की शुरुआत थी।

## What the video covers

- 12 अक्टूबर 1999 को पीआईए की फ्लाइट PK-805 कराची एयरपोर्ट पर लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलने के कारण आसमान में चक्कर लगा रही थी।
- इस फ्लाइट में पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ सवार थे जिन्हें नवाज शरीफ ने हटाने का आदेश दिया था।
- नवाज शरीफ ने जनरल मुशर्रफ को हटाकर जनरल ख्वाजा जियाउद्दीन भट्ट को नया आर्मी चीफ नियुक्त किया।
- फ्लाइट में ईंधन कम होने के बावजूद उसे पाकिस्तान के किसी भी एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति नहीं दी गई।
- जनरल मुशर्रफ ने पहले से ही सैनिकों को हिदायत दी थी कि अगर उन्हें हटाया गया तो उस फैसले को रोका जाए।
- नवाज शरीफ ने एयरपोर्ट बंद करवा दिया और फ्लाइट को दुबई या मशरिक वस्ता के एयरपोर्ट पर जाने की अनुमति दी।
- फौज के कुछ वरिष्ठ कमांडर नवाज शरीफ के फैसले के खिलाफ खड़े हो गए और जनरल मुशर्रफ की हिमायत की।
- यह घटना पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य सत्ता के बीच टकराव का प्रतीक बन गई।
- फ्लाइट की हाईजैकिंग की स्थिति और जमीन पर सत्ता संघर्ष ने पाकिस्तान की सियासी दिशा बदल दी।
- वीडियो में इस पूरे घटनाक्रम की विस्तार से कहानी और संबंधित किताबों के हवाले से विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

## Chapters

1. 00:00 परिचय और फ्लाइट PK-805 की स्थिति
2. 01:08 नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ के बीच टकराव
3. 02:18 फ्लाइट की लैंडिंग रोकने का आदेश और ईंधन संकट
4. 03:24 नवाज शरीफ का आर्मी चीफ बदलने का फैसला
5. 04:44 नए आर्मी चीफ की नियुक्ति और विरोध
6. 05:49 जनरल मुशर्रफ की पूर्व तैयारी और सैनिकों की भूमिका
7. 08:28 नवाज शरीफ की प्रतिक्रिया और एयरपोर्ट बंद
8. 09:27 फ्लाइट की स्थिति और राजनीतिक परिणाम

Answers

## Questions about this video

फ्लाइट PK-805 को पाकिस्तान में लैंडिंग की अनुमति क्यों नहीं दी गई?

नवाज शरीफ ने जनरल परवेज मुशर्रफ को हटाने का आदेश दिया था और इसलिए फ्लाइट को पाकिस्तान में लैंडिंग की अनुमति नहीं दी गई ताकि मुशर्रफ को देश में प्रवेश न मिल सके।

जनरल परवेज मुशर्रफ ने इस स्थिति से कैसे निपटा?

जनरल मुशर्रफ ने पहले से ही सैनिकों को हिदायत दी थी कि अगर उन्हें हटाया गया तो उसे रोका जाए। उन्होंने स्थिति को संभालते हुए मुसाफिरों में डर फैलने से बचाया और सैन्य कमांडरों की मदद से सत्ता संघर्ष में टिके रहे।

यह घटना पाकिस्तान के इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण है?

यह घटना 1999 के मार्शल लॉ संकट की शुरुआत थी जिसने पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा और सैन्य सत्ता के संतुलन को बदल दिया, और नवाज शरीफ की सरकार को गिराने में निर्णायक भूमिका निभाई।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:02

Speaker A

आसमान पर एक जहाज जिंदगी और मौत के बीच परवाज कर रहा था। यह पीआईए की एक आम कमर्शियल फ्लाइट थी। लेकिन पाकिस्तान के किसी भी एयरपोर्ट पर उसे उतरने की इजाजत नहीं थी। जहाज सजा में चक्कर लगा रहा था।

00:17

Speaker A

हर गुजरते लम्हे के साथ क्यूं खत्म हो रहा था। और उसमें सवार 198 मुसाफिरों की ज़िंदगियां दांव पर लगी हुई थी। मुसाफिरों में वो शख्स भी था जिसे उसके ओहदे से हटाया जा चुका था। मगर उसने एक ऐसा दांव

00:32

Speaker A

खेला कि चंद घंटों में हालात का रुख बदल कर रख दिया और उसे हटाने वाला खुद हटने पर मजबूर हो गया। यह कहानी है 12 अक्टूबर 1999 की। यह कहानी है दो ताकतों के टकराव की। यह कहानी है

00:47

Speaker A

नवाज शरीफ और जनरल परवेज मुशर्रफ की। लेकिन यह कहानी सिर्फ ताकत की कशमकश की नहीं यह एक ऐसी परवाज की कहानी भी है जिसने मंजिल का फैसला होते-होते पाकिस्तान की सियासी मंजिल ही बदल डाली। अगर यह हाई जैकिंग थी तो किसने की? जमीन

01:08

Speaker A

पर बैठे नवाज शरीफ ने या जहाज में सवार परवेज मुशर्रफ ने आज हम आपको उसी परवाज की पूरी कहानी सुनाएंगे। उन चंद घंटों की कहानी जिनमें एक जहाज सिर्फ 198 मुसाफिरों को नहीं बल्कि पाकिस्तान की तारीख को भी

01:24

Speaker A

एक नए मोड़ की तरफ ले गया। आगे बढ़ने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें और यह वीडियो तो आपको जरूर पसंद आएगी। इसलिए लाइक का बटन भी दबाना मत भूलिएगा। तो आइए चलते हैं 12 अक्टूबर 1999 की उस

01:38

Speaker A

शाम की तरफ जब पाकिस्तान की तारीख बदलने वाली थी। 12 अक्टूबर 1999 शाम के पौ:45 बजे का वक्त था। पीआईए की परवाज पीके 805 श्रीलंका से कराची आ रही थी। यह एक आम कमर्शियल एयर बस थी जिसमें मुसाफिरों और अमले समेत 198

02:01

Speaker A

अफराद सवार थे। लेकिन इन मुसाफिरों में एक शख्स ऐसा भी था जिसकी मौजूदगी ने इस परवाज को गैर मामूली बना दिया था। वो थे पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चेयरमैन जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ्स कमेटी जनरल परवेज मुशर्रफ। जहाज कराची एयरपोर्ट पर लैंडिंग की तैयारी

02:18

Speaker A

कर रहा था। वो तकरीबन 8000 फीट तक नीचे आ चुका था। खिड़कियों से कराची शहर की रोशनियां साफ दिखाई दे रही थी। मंजिल बिल्कुल सामने थी। सिर्फ 10 मिनट बाद जहाज रनवे पर उतरने वाला था। लेकिन फिर अचानक

02:34

Speaker A

एक ऐसी खबर आई जिसने सब कुछ बदल दिया। जनरल मुशर्रफ के मिलिट्री सेक्रेटरी उनके पास आए और आहिस्ता से उनके कान में कहा, "सर, आपको पायलट कॉकपिट में बुला रहा है।" आर्मी चीफ को दौरान परवाज इस तरह कॉकपिट में

02:49

Speaker A

बुलाया जाना मामूली बात नहीं थी। जनरल मुशर्रफ फौरन जहाज के अगले हिस्से की तरफ गए। वहां पायलट ने जो उन्हें बताया उस पर तो पहले उन्हें यकीन ही नहीं आया। जनरल मुशर्रफ अपनी किताब इन द लाइन ऑफ फायर में

03:02

Speaker A

लिखते हैं। पायलट ने उन्हें बताया कि जहाज को पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में उतरने की इजाजत नहीं बल्कि उसे हुक्म दिया गया है कि फौरन पाकिस्तान की हुदूद से बाहर निकल जाए। मसला सिर्फ यह नहीं था कि जहाज को लैंडिंग

03:23

Speaker A

की इजाजत नहीं मिल रही थी बल्कि असल मसला था फ्यूल। जहाज में सिर्फ 1 घंटे और 10 मिनट का ईंधन बाकी था। जनरल मुशर्रफ के लिए यह समझना मुश्किल था कि आखिर पाकिस्तान का एक मुसाफिर तैयारा जिसमें खुद आर्मी चीफ

03:38

Speaker A

सवार हैं उसे अपने ही मुल्क में उतरने से क्यों रोका जा रहा है। लेकिन एक बात वो फौरन समझ गए थे वो यह कि अगर यह खबर जहाज में फैल गई तो मुसाफिरों में खौफ और हड़कंप फैल सकता था। इसलिए उन्होंने हिदायत की कि

03:53

Speaker A

यह बात किसी सूरत आम मुसाफिरों तक नहीं पहुंचनी चाहिए। दूसरी तरफ जनरल मुशर्रफ के एडीसी और मिलिट्री सेक्रेटरी ने जमीन पर राब्ता करने की कोशिश शुरू कर दी। सबसे पहले कोर कमांडर कराची और उनके स्टाफ से राब्ता करने की कोशिश हुई। तीन मुख्तलिफ

04:08

Speaker A

मोबाइल नंबरों से कॉल की गई लेकिन किसी से राब्ता नहीं हो रहा था। वो जहाज के मुख्तलिफ हिस्सों में जाकर मोबाइल सिग्नल्स तलाश करते रहे। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इसी दौरान 15 मिनट का फ्यूल और खर्च हो चुका था। परवेज मुशर्रफ समझ चुके

04:24

Speaker A

थे कि उनके साथ यह खेल नवाज शरीफ खेल रहे हैं। उनका अंदाजा इतना गलत भी नहीं था क्योंकि एक तरफ आकाश में यह जहाज चक्कर लगा रहा था तो दूसरी तरफ जमीन पर ताकत का चक्कर चल रहा था। उस रोज सेक्रेटरी डिफेंस

04:39

Speaker A

लेफ्टिनेंट जनरल इफ्तार अली खान अपने घर पर थे कि अचानक एक फोन आया और उन्हें फौरन एयरपोर्ट पहुंचने की हिदायत दी गई। वह एयरपोर्ट पर पहुंचे तो वजीर एआम नवाज शरीफ ने उन्हें अपनी गाड़ी में बिठा लिया और

04:52

Speaker A

फिर एक ऐसा हुक्म दिया जो आने वाले चंद घंटों में पाकिस्तान की तारीख बदलने वाला था। नवाज शरीफ ने कहा कि उन्हें एक छोटा सा काम करना है। एक नोटिफिकेशन तैयार करें कि जनरल मुशर्रफ को रिटायर करके उनकी जगह

05:06

Speaker A

डीजीआईएसआई जनरल ख्वाजा जियाउद्दीन भट्ट को नया आर्मी चीफ मुकरर कर दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल इफ्तार ने कहा कि नोटिफिकेशन तैयार करने के लिए उन्हें रिटर्न ऑर्डर की जरूरत होगी। नवाज शरीफ उन्हें लेकर पीएम हाउस पहुंचे और अपने

05:22

Speaker A

मिलिट्री सेक्रेटरी को यह आर्डर लिखकर देने को कहा। यूं जिस वक्त आसमान पर जनरल मुशर्रफ का जहाज लैंडिंग के लिए जगह तलाश कर रहा था उससे कुछ पहले जमीन पर उन्हें आर्मी चीफ के ओहदे से हटाने का हुक्म तैयार

05:35

Speaker A

हो चुका था। इसी दौरान वज़ीर आजम के मिलिट्री सेक्रेटरी ने जनरल ख्वाजा जियाउद्दीन भट्ट को फोन किया। उन्हें बताया गया कि वज़ीर आजम उनसे मुलाकात करना चाहते हैं। जब जनरल जियाउद्दीन वज़ीरएआम हाउस पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि जनरल मुशर्रफ को बरतरफ किया जा

05:52

Speaker A

रहा है और मुशर्रफ की जगह उन्हें पाकिस्तान का नया आर्मी चीफ मुकरर किया जा रहा है। जनरल जियाउद्दीन के लिए यह एक चौंका देने वाली खबर थी क्योंकि छ माह बाद तो वह रिटायर होने वाले थे। लेकिन उन्हें क्या

06:05

Speaker A

मालूम था कि उनकी यह तकरोरी सिर्फ एक नए आर्मी चीफ की तकरोरी नहीं बल्कि पाकिस्तान में इख्तेदार की एक ऐसी जंग का आगाज था जिसका फैसला चंद ही घंटों बाद होना था। बहरहाल जनरल जियाउद्दीन भट्ट पाकिस्तान के नए आर्मी चीफ बन गए। ओहदा संभालते ही

06:24

Speaker A

उन्होंने फौरन तौर पर दो बड़े फैसले किए। जनरल महमूद अहमद और जनरल मोहम्मद अजीज को उनके ओहदों से हटा दिया। उनकी जगह जनरल सलीम हैदर को 10 कोर का कमांडर और जनरल अकरम को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मुकरर कर दिया

06:38

Speaker A

गया। लेकिन मसला यह था कि जिन लोगों को हटाया जा रहा था वो नए आर्मी चीफ के अहकामात मानने के लिए तैयार नहीं थे। जिस वक्त जनरल महमूद और जनरल अजीज को अपनी बरतरफी की खबर मिली, वो गोल्फ खेल रहे थे।

06:51

Speaker A

जनरल अजीज ने फौरन कोर कमांडर कराची जनरल मुजफ्फर उस्मानी को फोन किया। सारी सुरते हाल बताई और सवाल किया, "अब क्या करें?" जनरल उस्मानी ने पूछा, "क्या जनरल परवेज मुशर्रफ श्रीलंका जाने से पहले कोई हिदायत देकर गए थे?" जवाब मिला, "हाँ।" जनरल उस्मानी ने कहा

07:10

Speaker A

फिर उनकी हिदायत पर अमल करो। लेकिन आखिर वो हिदायत क्या थी? यह समझने के लिए हमें कुछ पीछे जाना होगा। [संगीत] 2013 में 1999 के डीजी मिलिट्री ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल शाहिद अजीज की किताब शाय हुई। जिसका नाम था यह खामोशी कहां तक? इस

07:29

Speaker A

किताब में जनरल शाहिद अजीज ने एक अहम इंकशाफ किया। लिखा कि जनरल परवेज मुशर्रफ को पहले ही खतशा था कि नवाज शरीफ उन्हें किसी भी वक्त आर्मी चीफ के ओदे से हटा सकते हैं। और इस खतश [संगीत] से निपटने के

07:42

Speaker A

लिए वो पहले ही तैयारी कर चुके थे। श्रीलंका रवाना होने से पहले उन्होंने आर्मी हाउस में एक अहम इजलास बुलाया। इजलास में आर्मी चीफ के अलावा एक्स कोर के कमांडर, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, डीजी मिलिट्री इंटेलिजेंस और खुद जनरल शाहिद अजीज मौजूद

07:59

Speaker A

थे। जनरल मुशर्रफ ने वहां सबको एक साफ हिदायत दी थी कि अगर उनकी गैर मौजूदगी में नवाज शरीफ उन्हें ओदे से हटाने का कोई फैसला करें तो उस फैसले को हर सूरत रोका जाए। और अब वही सुरते हाल सामने आ चुकी

08:14

Speaker A

थी। नवाज शरीफ ने जनरल मुशर्रफ को हटा दिया था। लेकिन फौज के अहम कमांडरों ने नए आर्मी चीफ को मानने से इंकार कर दिया था। यह कमांडर जनरल परवेज मुशर्रफ की हिमायत में खड़े हो चुके थे। यह एक्शन क्या था और

08:28

Speaker A

उस पर अमल कैसे किया गया? इसकी तफसील हम आगे बयान करेंगे। पहले यह सुन लें कि इस एक्शन पर नवाज शरीफ का रिएक्शन क्या था। सीनियर सहाफी सुहेल वच की किताब गद्दार कौन में नवाज शरीफ ने इस वाक्य के बारे

08:42

Speaker A

में यूं बताया कि जब जनरल जियाउद्दीन भट्ट की बतौर आर्मी चीफ तकरुरी का ऐलान हुआ तो उन्हें महसूस हुआ कि फौज की हाईकमान में शामिल कुछ लोग इस फैसले के खिलाफ हैं और वह बगावत की तैयारी कर रहे

08:55

Speaker A

हैं। नवाज शरीफ के बकौल इसी सुरते हाल को देखते हुए उन्होंने फैसला किया कि जनरल परवेज मुशर्रफ को कराची आने की इजाजत नहीं दी जाएगी। [संगीत] अमीनुल्लाह चौधरी उस वक्त सिविल एविएशन के डायरेक्टर जनरल थे। उनका कहना था कि

09:10

Speaker A

उन्हें यह इख्तियार हासिल था कि वह मुंतखब वज़ीर आजम के हुक्म पर एयरपोर्ट बंद कर सकते थे और उन्होंने ऐसा ही किया। अपनी किताब मुशर्रफ नवाज एंड हाईजैकिंग फ्रॉम द ग्राउंड द बिज़ार स्टोरी ऑफ पीके 805 में वह लिखते हैं कि नवाज शरीफ ने उन्हें

09:27

Speaker A

सिर्फ 15 मिनट के अंदर दो मर्तबा फोन किया। दोनों मर्तबा हिदायत एक ही थी। जनरल मुशर्रफ को लेकर आने वाले जहाज को पाकिस्तान में उतरने की इजाजत नहीं देनी। जहाज को दुबई के अलावा मशरिक वस्ता के किसी भी एयरपोर्ट पर जाने की इजाजत दी जा

09:42

Speaker A

सकती थी। लेकिन पाकिस्तान में लैंडिंग की इजाजत नहीं थी और ऐसा ही हो रहा था। आसमान पर जनरल मुशर्रफ का जहाज मुसलसल कराची के ऊपर चक्कर लगा रहा था। वक्त गुजर रहा था और जहाज का फ्यूल कम हो रहा था।

09:59

Speaker A

इसी दौरान पायलट ने दोबारा कराची कंट्रोल टावर से राब्ता किया। जो जवाब मिला वो सुरते हाल को मजीद संगीन बनाने वाला था। कंट्रोल टावर ने कहा जहाज को 300 फीट की ब

10:16

Speaker A

कहां? इसका कोई वाज़ जवाब नहीं दिया गया। सिर्फ यह कहा गया कि भारत, ओमान, अबूजैबी या ईरान किसी भी जगह चले जाएं। क्योंकि पाकिस्तान की तमाम एयरपोर्ट्स को हुक्म दिया जा चुका था कि जहाज को कहीं भी उतरने

10:31

Speaker A

नहीं दिया जाएगा। लेकिन भारत जाने का मतलब क्या था? परवेज मुशर्रफ के बकल इसका मतलब था अपने ही मुल्क के आर्मी चीफ को, अपने ही मुल्क के जहाज को और 198 मुसाफिरों को दुश्मन मुल्क के हवाले कर देना।

10:52

Speaker A

बहरहाल वक्त तेजी से गुजर रहा था। फ्यूल मुसलसल जल रहा था। जनरल मुशर्रफ समझ चुके थे कि यह सुरते हाल तेजी से एक खतरनाक अंजाम की तरफ बढ़ रही है। और अब या तो जहाज की जमीन से टक्कर होगी या फिर उनकी

11:06

Speaker A

नवाज शरीफ हुकूमत से। जनरल मुशरफ ने अपनी किताब इन द लाइन ऑफ फायर में इस वाक्य को इंतहाई सख्त अल्फाज़ में बयान किया। लिखा कि तारीख में शायद यह पहला वाक्या था कि किसी शख्स ने जमीन पर बैठे-बैठे एक उड़ते हुए जहाज को हाईजैक कर

11:25

Speaker A

लिया हो। वो शख्स कोई मामूली आदमी नहीं था। वो पाकिस्तान का वजीर आजम था जिसने अपने मुल्क के शहरियों की जिंदगियों के तहफुज का हलफ उठाया था। यकीन नहीं आ रहा था कि सिर्फ मुझसे छुटकारा पाने के लिए वो

11:38

Speaker A

सब मुसाफिरों को मारने की कोशिश कर रहे थे। जनरल मुशर्रफ ने पायलट से पूछा हम कहां जा सकते हैं? पायलट ने बताया भारत में अहमदाबाद या फिर ओमान लेकिन फैसला फ़ौरन करना होगा क्योंकि जहाज अब 21,000 फीट की बुलंदी पर पहुंच चुका था। अब जहाज

11:56

Speaker A

के पास इतना ईंधन भी नहीं बचा था कि उसे पाकिस्तान की हुदूद से बाहर ले जाया जा सके। यानी बाहर जाने का रास्ता भी बंद हो चुका था। जनरल मुशर्रफ ने फौरन फैसला सुनाया। हम कहीं नहीं जा रहे। जहाज कराची एयरपोर्ट पर

12:13

Speaker A

ही उतरेगा। पायलट ने यह फैसला कंट्रोल टावर तक पहुंचाया और वहां से जो जवाब आया उसने कॉकपेट [संगीत] में मौजूद हर शख्स को खामोश कर दिया। बताया गया कि पाकिस्तान के तमाम एयरपोर्ट्स की लाइट्स बंद कर दी गई

12:27

Speaker A

हैं। और सिर्फ यही नहीं कराची एयरपोर्ट के रनवे पर फायर फाइटर की तीन गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं। रनवे बंद था। यहां उतरने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। कॉकपिट में सन्नाटा छा गया। परवेज मुशर्रफ लिखते हैं

12:41

Speaker A

कि वो गुस्से से भर चुके थे। लेकिन खुद पर कंट्रोल करना जरूरी था। वरना पायलट की तवज्जो भटक सकती थी जो खतरनाक था। फिर अचानक पैगाम आया कि आप नवाब शाह में उतर सकते हैं। पैगाम मिलते ही पायलट ने जहाज

12:56

Speaker A

का रुख नवाब शाह की तरफ मोड़ दिया। नवाज शरीफ का कहना था कि जहाज को नवाब शाह में लैंड करने की हिदायत सुरते हाल देखकर की गई। मकसद यह था कि उन्हें बगैर किसी खून खराबे के हिरासत में लिया जा सके। लेकिन

13:10

Speaker A

जहाज ने अभी नवाब शाह का आधा रास्ता ही तय किया था कि जहाज के रेडियो पर एक आवाज उभरी। बोल रहा हूं। ये कराची में आर्मी डिवीजन के मेजर जनरल मलिक इख्तेखार अली थे। उन्होंने पायलट को मुखातिब करके कहा चीफ से कहें कि वापस आ

13:26

Speaker A

जाएं और कराची में उतरें। हालात अब काबू में हैं। प्लीज लुक लैंड कराची एयरपोर्ट द कराची कंट्रोल टावर विल राइट यू देयर इज नो नीड टू डाइवर्ट एनीवेयर। इस बातचीत के बाद परवेज मुशर्रफ ने पायलट से पूछा कि क्या हम कराची पहुंच सकते हैं?

13:47

Speaker A

उसने बताया कि जहाज इस वक्त कराची और नवाब शाह के बीच में है। बम मुश्किल कराची पहुंच पाएंगे। और अगर रास्ते में मौसम खराब मिला तो दाएं बाएं मुड़ने की वजह से फ्यूल ज्यादा खर्च होगा और जहाज क्रैश

14:01

Speaker A

होने का खतरा है। अगले चंद मिनट बहुत ही खौफनाक थे। कुछ भी हो सकता था। जहाज में सवार तमाम मुसाफिरों और स्टाफ की जान खतरे में थी। लेकिन जहाज सही सलामत कराची लैंड कर गया। और उस वक्त जहाज में सिर्फ 7 मिनट का ईंधन

14:26

Speaker A

बचा था। लेकिन यह काया अचानक पलटी कैसे? हुआ यह कि जब परवेज मुशर्रफ के हामी फौजी अफसरान को पता चला कि उनके बॉस को कराची में उतरने नहीं दिया जा रहा तो उन्होंने एयरपोर्ट का कंट्रोल अपने हाथ में ले

14:40

Speaker A

लिया। पहले एयरपोर्ट के बाहर पुलिस की कुछ गाड़ियां पहुंची। थोड़ी देर में पुलिस के आला अफसरान भी वहां आ गए। इसी दौरान फौज की गाड़ियां भी वहां पहुंच गई। नेवी और एयरफोर्स के कुछ ऑफिसर्स भी आ गए। कुछ देर

14:54

Speaker A

बाद पुलिस वहां से चली गई। इतने में कराची के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मुजफ्फर उस्मानी वहां पहुंचे और कई दूसरे अफसरान के साथ एयरपोर्ट के अंदर चले गए। कंट्रोल टावर का निजाम अब उनके हाथ में था। उन्होंने परवेज मुशर्रफ की बाहिफाजत

15:09

Speaker A

लैंडिंग को यकीनी बनाया। नवाज शरीफ के बकॉल उन्होंने कोर कमांडर कराची जनरल मुजफ्फर उस्मानी को हुक्म दिया था कि वह मुशर्रफ को अब रिटायर्ड आर्मी चीफ की हैसियत से रिसीव करें और इज्जत के साथ एक जगह मुंतकिल कर दें। जनरल उस्मानी ने ऐसा

15:25

Speaker A

ही करने की यकीनदहानी कराई। मगर एयरपोर्ट पहुंचकर उन्होंने परवेज मुशर्रफ का साथ दिया। फौज ने सिर्फ एयरपोर्ट ही नहीं बल्कि पीएम हाउस और पीटीवी [संगीत] की इमारत का भी घेराव कर लिया। उसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। लेकिन यह कहानी फिर कभी सही। बहरहाल

15:48

Speaker A

परवेज मुशर्रफ जहाज से उतर कर पहले आर्मी हाउस गए और फिर कोर हेड क्वार्टर्स पहुंचे। रात तकरीबन सवा5 बजे के बाद पीटीवी पर वफे वफे से यह ऐलान नशर होना शुरू हुआ कि फौज ने मुल्क का इख्तेदार संभाल लिया है। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल

16:04

Speaker A

परवेज मुशर्रफ कुछ देर बाद कौम से खिताब करेंगे। परवेज मुशर्रफ ने यह खिताब रात पौ:45 बजे किया। डियर ब्रदर्स एंड सिस्टर्स योर आर्म फर्सेस हैव नेवर एंड शैल नेवर लेट यू डाउन इंशा्लाह। नवाज शरीफ के खिलाफ तैयारा हाईजैक करने और

16:25

Speaker A

मुसाफिरों की जिंदगी खतरे में डालने का केस बनाया गया। 6 अप्रैल सन 2000 को कराची की इनदादे दहशतगर्दी अदालत ने उन्हें हाईजैकिंग और दहशतगर्दी केस में दो मर्तबा उम्र कैद की सजा सुना दी। दिलचस्प बात यह थी कि हाई जैकिंग का जुर्म एंटी टेररिज्म

16:42

Speaker A

एक्ट में शामिल नहीं था। बाद में इसी मुकदमे के लिए उसे कानून का हिस्सा बना दिया गया। बर्तनावी सहाफी ओवन बेनेट जॉन्स ने इस वाक्य के बाद पायलट, कोपायलट, मुसाफिरों, सिविल एिएशन अथॉरिटी, पीआईए के हुकाम और ग्राउंड स्टाफ से तफसीली बातचीत

17:00

Speaker A

की और फिर यह नतीजा निकाला कि जहाज दरअसल नवाज शरीफ ने नहीं बल्कि परवेज मुशर्रफ ने हाईजैक किया था। मुशर्रफ ने जहाज को कराची एयरपोर्ट पर उतरने नहीं दिया और उस वक्त तक एयरपोर्ट के ऊपर चक्कर लगाने पर मजबूर

17:14

Speaker A

रखा जब तक उन्हें यह यकीन नहीं हो गया कि कोर कमांडर कराची जनरल मुजफ्फर उस्मानी ने कराची एयरपोर्ट का कंट्रोल संभाल लिया है। ओवन बेनिटिंग की तमाम बातें अपनी किताब पाकिस्तान द आई ऑफ द स्टम में लिखी हैं।

17:29

Speaker A

शाहिद खाकान अब्बासी उन दिनों पीआईए के चेयरमैन थे। उन्होंने दावा किया कि पायलट ने कॉकपेट की आखिरी 30 मिनट की गुफ्तगू डिलीट कर दी थी और श्रीलंका में तैयारा उड़ने से पहले ही यहां फौजी कारवाई शुरू हो चुकी थी।

17:43

Speaker A

पाकिस्तान आर्मी हैड मूव्ड टू रिमूव दी इेड गवर्नमेंट एट दैट टाइम इवन बिफोर जनरल मुशर्रफ्स एयरक्राफ्ट टोक ऑफ फ्रॉम माली। बहरहाल 17 जुलाई 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने सबूत ना होने पर नवाज शरीफ की सजा खत्म करके उस मुकदमे से बरी कर दिया। लेकिन

18:04

Speaker A

इसके बावजूद उन्हें जिला वतन करके मुल्क से बाहर भेज दिया गया। 12 अक्टूबर 1999 को जो कुछ हुआ वो अचानक नहीं था। उसकी बुनियाद कई माह पहले पड़ चुकी थी। नवाज शरीफ के बकल कारगिल जंग के बाद जनरल

18:19

Speaker A

मुशर्रफ, जनरल अजीज और जनरल महमूद को डर था कि उनके खिलाफ कारवाई हो सकती है। और इस कारवाई से बचने के लिए ही उन्होंने मुंतकिब हुकूमत का तख्ता पलटने का प्लान बनाया था। लेकिन परवेज मुशर्रफ पहले दिन से यही कहते रहे कि वज़र आजम की बरतरफी

18:36

Speaker A

सोचा समझा प्लान नहीं था। बल्कि जब नवाज शरीफ ने फौज के सरबराह को जबरदस्ती हटाने की कोशिश की तो फौज ने एक इदारे के तौर पर एक्शन लिया। नवाज शरीफ ने परवेज मुशरफ के इदाम को फौजी बगावत करार दिया तो परवेज

18:52

Speaker A

मुशर्रफ ने इसे नवाज शरीफ का फौज के खिलाफ सिविल कु कहा। उनका कहना था कि फौज ने तो बस अपने चीफ के दफा में जवाबी कारवाई की थी। दरअसल तैयारियां दोनों तरफ से मुकम्मल थी। बस इंतजार इस बात का था कि पहल कौन

19:07

Speaker A

करेगा। परवेज मुशर्रफ तकरीबन 9 साल इख्तेदार में रहे। मगर फिर उन्हें जाना पड़ा। बाद में सियासत में भी आने की कोशिश की मगर नाकाम रहे। लेकिन नवाज शरीफ आज भी पाकिस्तान की सियासत में मौजूद हैं और उनकी फैमिली इख्तदार में है।

19:30

Speaker A

[संगीत]

Topics: नवाज शरीफ परवेज मुशर्रफ 1999 मार्शल लॉ पीआईए फ्लाइट PK-805 पाकिस्तान राजनीतिक संकट सैन्य सत्ता संघर्ष फ्लाइट हाईजैकिंग कराची एयरपोर्ट जनरल ख्वाजा जियाउद्दीन भट्ट पाकिस्तान इतिहास


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