**How Pakistan Shocked the World & India | The A.Q. Khan Story — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/pakistan-shocked-world-india-aq-khan-story/

पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम की शुरुआत, चुनौतियाँ और सफलता की कहानी, जिसमें कायदेआज़म से लेकर डॉ. अब्दुल कदीर खान तक की भूमिका शामिल है।

## Key Takeaways

- पाकिस्तान का एटमी प्रोग्राम वैज्ञानिक, राजनीतिक और खुफिया चुनौतियों से भरा था।
- डॉ. रफी मोहम्मद चौधरी और डॉ. अब्दुल कदीर खान ने इस प्रोग्राम की नींव और सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- भारत और अन्य देशों के विरोध और साजिशों के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी एटमी ताकत हासिल की।
- 1974 में भारत के एटमी परीक्षण ने पाकिस्तान को हथियार बनाने के लिए मजबूर किया।
- 1998 में पाकिस्तान ने सफलतापूर्वक एटमी परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया।

## What the video covers

- 1947 में पाकिस्तान के गठन के बाद कायदेआज़म को ऑस्ट्रेलियाई साइंटिस्ट सर मार्क ओलिफेंट का खत मिला, जिसमें न्यूक्लियर फिजिक्स पर ध्यान देने की सलाह दी गई।
- डॉ. रफी मोहम्मद चौधरी को पाकिस्तान बुलाकर न्यूक्लियर प्रोग्राम की नींव रखी गई, जबकि भारत ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
- अमेरिका के 'एटम्स फॉर पीस' प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान को एक प्रोटोटाइप एटमी रिएक्टर और ट्रेनिंग मिली।
- 1962 के भारत-चीन युद्ध और चीन के एटमी धमाके के बाद पाकिस्तान ने एटमी हथियार बनाने का निर्णय लिया।
- 1972 में जुल्फिकार अली भुट्टो ने मुल्तान में वैज्ञानिकों की बैठक कर न्यूक्लियर बम बनाने का आदेश दिया।
- डॉ. अब्दुल कदीर खान ने यूरोप में यूरेनियम एनरिचमेंट की तकनीक लेकर पाकिस्तान के प्रोजेक्ट 706 की शुरुआत की।
- पाकिस्तान ने खुफिया और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद एटमी हथियार बनाने का काम जारी रखा।
- भारत के 1974 के एटमी परीक्षण ने पाकिस्तान को हथियार बनाने के लिए प्रेरित किया।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव, धमकियाँ और साजिशों के बावजूद पाकिस्तान ने 1998 में सफलतापूर्वक एटमी परीक्षण किया।
- वीडियो में पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम के इतिहास, प्रमुख वैज्ञानिकों और राजनीतिक हस्तियों की भूमिका को विस्तार से बताया गया है।

## Chapters

1. 00:00 पाकिस्तान के गठन और कायदेआज़म को खत
2. 02:26 डॉ. रफी मोहम्मद चौधरी और न्यूक्लियर फिजिक्स
3. 04:35 अमेरिका का एटम्स फॉर पीस प्रोग्राम और पाकिस्तान
4. 06:28 भारत-चीन युद्ध और पाकिस्तान की एटमी तैयारी
5. 08:36 जुल्फिकार अली भुट्टो का नेतृत्व और मुल्तान मीटिंग
6. 10:35 डॉ. अब्दुल कदीर खान और प्रोजेक्ट 706 की शुरुआत
7. 12:38 पाकिस्तान का एटमी परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

Answers

## Questions about this video

पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम की शुरुआत कैसे हुई?

पाकिस्तान के गठन के बाद कायदेआज़म को ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक सर मार्क ओलिफेंट का खत मिला, जिसमें न्यूक्लियर फिजिक्स पर ध्यान देने की सलाह दी गई। इसके बाद डॉ. रफी मोहम्मद चौधरी को बुलाकर न्यूक्लियर प्रोग्राम की नींव रखी गई।

डॉ. अब्दुल कदीर खान की भूमिका क्या थी?

डॉ. अब्दुल कदीर खान ने यूरोप में यूरेनियम एनरिचमेंट की तकनीक हासिल की और पाकिस्तान के प्रोजेक्ट 706 को शुरू किया, जिससे पाकिस्तान को एटमी हथियार बनाने में मदद मिली।

भारत के एटमी परीक्षण का पाकिस्तान पर क्या प्रभाव पड़ा?

1974 में भारत के एटमी परीक्षण के बाद पाकिस्तान ने हथियार बनाने का निर्णय लिया और जुल्फिकार अली भुट्टो ने इसे प्राथमिकता दी, जिससे पाकिस्तान का एटमी प्रोग्राम तेज़ी से आगे बढ़ा।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

14 अगस्त 1947 यह रेडियो पाकिस्तान लाहौर है। आपको पाकिस्तान मुबारक। 1947 पाकिस्तान अभी बना ही था। खजाना खाली, रियासत कमजोर, दुश्मन ताकतवर। कायदे आजम एक-एक करके [संगीत] मुल्क के मसाइल सुलझाने में मशरूफ थे कि अचानक उनके नाम एक खत आता है। एक

00:24

Speaker A

ऑस्ट्रेलियाई साइंसदान का खत। लिखा था कि दुनिया बदलने वाली है। मुस्तकबिल उस कौम का होगा जिसके पास एटमी ताकत होती। साथ ही एक मशवरा भी था। एक ऐसा मशवरा जिसके बारे में उस वक्त किसी ने तसवुर भी नहीं किया

00:40

Speaker A

होगा कि वो एक दिन पाकिस्तान के एटम बम की पहली चिंगारी बनेगा। लेकिन एटम बम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। यह जासूसी, धमकियों और आलमी साजिशों से भरी एक खुफिया जंग थी। कभी इबरत का निशान बनाने की धमकी दी गई तो कभी अरबों

01:05

Speaker A

डॉलर की पेशकशें हुई। कभी [संगीत] भारत ने पीआईए का जहाज हाईजैक करवाकर हालात बिगाड़ने की कोशिश की तो कभी इसराइल के साथ मिलकर पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम को मिटाने की साजिश की। मगर फिर एक ऐसा मोड़ भी आया जब भारत के ही

01:27

Speaker A

एक वजीर आजम के टेलीफोन [संगीत] कॉल ने पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम को हमेशा के लिए महफूज़ बना दिया और फिर वो दिन आया जब 28 मई 1998 को एक बटन दबा और जागे के खामोश पहाड़ धमाकों [संगीत] से लरस उठे।

01:49

Speaker A

नारा तकबीर अल्लाहू अकबर। [संगीत] आज की इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि कायदेआज़म को मिलने वाले उस खत में आखिर ऐसा क्या था जो पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम की पहली ईंट साबित हुआ। पाकिस्तान के हाईजैक होने वाले जहाज को

02:08

Speaker A

भारत ले जाने का मंसूबा कैसे नाकाम हुआ और भारत के वजीर आजम की वो कौन सी हिमाकत थी जिससे पाकिस्तान दुनिया की सातवीं एटमी कुत बन गया। आज हम बताएंगे पाकिस्तान के एटम बम तक पहुंचने की ड्रामाई और सनसनीखेज

02:26

Speaker A

कहानी जो बहुत कम लोग जानते हैं। [संगीत] लेकिन उससे पहले हमारा चैनल सब्सक्राइब जरूर कर लें और वीडियो को लाइक और शेयर करना ना भूलें। तो कहानी शुरू करते हैं कायदेआज़म को मिलने वाले उस खत से। यह ऑस्ट्रेलिया के साइंसदान सर मार्क

02:48

Speaker A

ओलिफेंट थे। एटॉमिक साइंस के एक्सपर्ट। [संगीत] उन्होंने खत में लिखा कि आने वाला दौर साइंस और टेक्नोलॉजी का है। आपके नए मुल्क पाकिस्तान को साइंस खासतौर पर एटॉमिक और न्यूक्लियर फिजिक्स पर तवज्जो देनी चाहिए। इस काम के लिए उन्होंने कायदेआज़म को एक

03:06

Speaker A

शख्स का नाम भी बताया और कहा कि पूरे सबकॉन्टिनेंट में न्यूक्लियर फिजिक्स को उनसे ज्यादा कोई नहीं जानता। वो नाम था डॉक्टर रफी मोहम्मद चौधरी का। [संगीत] डॉक्टर रफी मोहम्मद चौधरी सर मार्क ओलिफेंट की ब्रिटेन में कायम लेबोररी में काम कर

03:27

Speaker A

चुके थे। लेकिन यहां एक मसला था। वो अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे और कभी पाकिस्तान नहीं आए थे। कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्होंने फौरन उन्हें खत लिखा और पाकिस्तान आने की दावत दी। साथ ही उन्हें गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर के फिजिक्स

03:43

Speaker A

डिपार्टमेंट का हेड बनाने की ऑफर भी कर दी। उधर जब इंडिया के वज़ीर आजम नेहरू को पता चला तो उन्होंने डॉक्टर रफी चौधरी को रोकने की बहुत कोशिश की। यहां तक कि नेशनल फिजिक्स लेबोरेटरी में डेपुटी डायरेक्टर बनाने की पेशकश कर दी। लेकिन डॉक्टर रफी

04:00

Speaker A

नहीं रुके। यह वही रफी चौधरी हैं जिन्हें डॉक्टर समर मुबारक मंत ने 1998 में पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम का रियल फाउंडर करार दिया था। यह वही रफी चौधरी हैं जो जुल्फिकार अली भुट्टो की उस मीटिंग में भी शरीक थे जो 1972 में एटम बम बनाने

04:19

Speaker A

के लिए मुल्तान में बुलाई गई थी और यह वही रफी चौधरी है जिन्हें सदर जियाउल हक ने हाथ उठाकर फौजी अंदाज में सलूट किया था। बहरहाल पाकिस्तान आकर डॉक्टर रफी ने गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर फिजिक्स डिपार्टमेंट संभाला और [संगीत] ऐसे

04:35

Speaker A

शागिर्द पैदा किए जो पाकिस्तान को एटमी मैदान में उतारने की तैयारी [संगीत] में लग गए। लेकिन यह इतना आसान नहीं था। खुदा का करना यह हुआ कि उसी जमाने में अमेरिका ने एटम्स फॉर पीस के नाम से एक प्रोग्राम

04:49

Speaker A

चलाया। प्रोग्राम का मकसद दूसरे मुल्कों को एटमी तवानाई की सलाहियत फराहम करना था। लेकिन इस शर्त पर कि वो एटम बम नहीं बनाएंगे। अक्टूबर 1954 में पाकिस्तान के वज़ीर आजम मोहम्मद अली बोगरा अमेरिका पहुंचे। सर आइज़नहावर से मुलाकात की और

05:06

Speaker A

एटम्स फॉर पीस प्रोग्राम में शामिल होने पर बात की। 11 अगस्त 1955 को दोनों मुल्कों के दरमियान मुयदा हुआ जिसके तहत अमेरिका ने पाकिस्तान को एक प्रोटोटाइप एटमी रिएक्टर फराहम कर दिया। अमेरिका ने पाकिस्तानी साइंसदानों को इस सिलसिले में

05:22

Speaker A

जरूरी ट्रेनिंग भी देना शुरू कर दी। इसी दौरान पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन की बुनियाद भी रख दी गई। मकसद वही था। यानी अपनी एटमी सलाहियत को मेडिकल, इंडस्ट्री और दीगर शोबों में इस्तेमाल करना। ट्रेनिंग हासिल करने वालों में एक

05:40

Speaker A

साइंसदान मुनीर अहमद खान भी थे। वो जब ट्रेनिंग मुकम्मल करके लौटे तो उन्हें एटॉमिक एनर्जी कमीशन का हेड बना दिया गया। मुनीर अहमद खान भी डॉ. रफीक चौधरी के शागिर्दों में से ही एक थे। खैर, अब अमेरिका ने एटमी रिएक्टर तो दे दिया लेकिन

05:56

Speaker A

उसे चलाने के लिए यूरेनियम की जरूरत थी। लिहाजा 1960 में लाहौर और ढाका में दो सेंटर्स कायम किए गए और यूरेनियम की तलाश शुरू कर दी गई। कुदरत मेहरबान थी, डेरा गाजी खान से यूरेनियम के जखाय मिल गए। काम

06:13

Speaker A

बन गया। सच तो यह है कि 1955 के बाद तवील अरसे तक पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का मकसद एटमी बिजली बनाना और दूसरे पुर अमन मकासद के लिए इस्तेमाल करना था। लेकिन फिर जब ख्ते के हालात बदले तो

06:28

Speaker A

पाकिस्तान के इरादे भी बदलने लगे। [संगीत] हुआ यूं कि 1962 में चीन और भारत की जंग छिड़ गई। इसके 2 साल बाद चीन ने एटमी धमाका कर दिया। अमेरिका, सोवियत यूनियन, ब्रिटेन और फ्रांस के बाद चीन एटमी ताकत बन गया। एक

06:58

Speaker A

तरफ चीन की एटमी ताकत, दूसरी तरफ पाकिस्तान से बढ़ती दोस्ती ने इंडिया को खौफजदा कर दिया। उसने भी एटमी हथियारों की जानिब कदम बढ़ाना शुरू कर दिए। इंडिया के अज़ाइन को देखते हुए पाकिस्तान में यह सोचा जाने लगा कि अगर इंडिया ने एटमी हथियार

07:14

Speaker A

बना लिए तो वो पाकिस्तान के खिलाफ भी इस्तेमाल हो सकते हैं। जुल्फिकार अली भुट्टो तथा पाकिस्तान के वज़ीर खारजा थे। वो फौरन हरकत में आए। काबीना में तजवीज पेश की गई कि पाकिस्तान को भी एटमी हथियारों का प्रोग्राम शुरू कर देना चाहिए। लेकिन

07:30

Speaker A

सदर अयूब खान और बाज वजीरों ने तजवीज की सख्त मुखालफत की। बीबीसी के मुताबिक 1968 में सदर अयूब खान फ्रांस के दौरे पर गए। वहां फ्रांसीसी सदर चार्ल्स डिकोल ने खुद पाकिस्तान में एटमी प्रोसेसिंग प्लांट बनाने की पेशकश की। लेकिन सदर अयूब ने

07:49

Speaker A

उसे ठुकरा दिया। दूसरी तरफ भारत से मुसलसल ऐसी खबरें आने लगीं कि वह एटमी हथियारों की जानिब तेजी से बढ़ रहा है। अब तो जुल्फिकार अली भुट्टो ने ठान ली [संगीत] कि कुछ भी हो जाए एटम बम तो बनाना है। 16

08:04

Speaker A

दिसंबर 1971 को फॉल ऑफ ढाका के बाद भुट्टो मुल्क के चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर बन गए। फैसलों की ताकत अब उनके हाथ में थी। जनवरी 1972 में उन्होंने मुल्तान में मुल्क के बड़े-बड़े साइंसदानों को इकट्ठा किया और उनसे न्यूक्लियर बम की फरमाइश कर

08:22

Speaker A

दी। इस वाक्य की तफसील आपको हमारी सेठ आबिद पर बनी इस वीडियो में मिल जाएगी। यह वीडियो भी जरूर देखिएगा क्योंकि इसमें सेठ आबिद के अहम किरदार को भी तफसील से बयान किया गया है। तो साइंसदानों के साथ मीटिंग

08:36

Speaker A

के बाद भुट्टो ने ईरान, तुर्की, मराकश, अल्जीरिया, ट्यूनिशिया, लीबिया, मिस्र और شام के तूफानी दौरे किए। मकसद था इन मुल्कों से अपने मिशन के लिए ताुन हासिल करना। 1973 में पाकिस्तान ने एटमी हथियार बनाने के प्रोग्राम का बकायदा आगाज़ कर दिया। साथ

08:54

Speaker A

ही फ्रांसीसी हुकूमत को एटमी फ्री प्रोसेसिंग प्लांट की तामीर की पुरानी पेशकश पर आमादा किया जो अयूब खान ने मना कर दी थी। इसी दौरान भारत ने मई 1974 में एटमी धमाका कर दिया। अब तो जुल्फिकार अली भुट्टो पर जल्द से जल्द

09:11

Speaker A

एटमी ताकत बनने का भूत सवार हो गया। क्योंकि उन्हें खतशा था कि भारत एटॉमिक पावर बनने के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी हरकत कर सकता है। ऐसे में उन्होंने वो मशहूर बयान दिया कि हम घास खा लेंगे मगर

09:26

Speaker A

एटम बम जरूर बनाएंगे। लेकिन जाहिर है एटम बम बनाना कोई बच्चों का खेल तो था नहीं। ऐसे में उन्हें उम्मीद की एक किरण नजर आई। डॉक्टर अब्दुल कदीर खान। डॉक्टर अब्दुल कदीर खान ने हॉलैंड में मेटालर्जी में एमएससी और फिर बेल्जियम की

09:45

Speaker A

यूनिवर्सिटी से इसी शोबे में पीएचडी कर रखी थी। 1972 के बाद से वो हॉलैंड की यूरेनियम एनरिचमेंट करने वाली एक कंपनी से वाबस्ता हो गए। डॉक्टर अब्दुल कदीर थे तो हॉलैंड में मगर उनका दिल पाकिस्तान के लिए धड़कता था। जब भारत ने 1974 में एटमी

10:03

Speaker A

तजुर्बा किया [संगीत] तो वो वतन के अजीज की सलामती के हवाले से शदीद फिकरमंद हो गए। उन्होंने फौरन वज़ीर आजम भुट्टो को खत लिखा और बताया कि वो यूरेनियम को एनरिच करके एटम बम बना सकते हैं। उन्होंने खत में इस

10:16

Speaker A

हवाले से कुछ तफसीलात भी लिखी जिन्हें पढ़कर भुट्टो को लगा कि इस आदमी की बातों में दम है। भुट्टो ने फौरन डॉक्टर खान को पाकिस्तान बुलाया और यूं 1976 में शुरू हुआ पाकिस्तान का एक खुफिया एटमी प्रोग्राम जिसे नाम दिया गया प्रोजेक्ट

10:35

Speaker A

706। इस्लामाबाद में एयरपोर्ट के करीब एक इमारत बनाई गई। पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन के साइंसदान और इंजीनियर्स सब मिलकर इस प्रोजेक्ट 706 पर काम करने लगे। लेकिन मसला यह था कि पाकिस्तान में ना सेंट्रीफ्यूज की मशीनें थीं और ना उन्हें

10:59

Speaker A

चलाने [संगीत] का तजुर्बा रखने वाले लोग। सेंट्रीफ्यूज दरअसल एक बहुत तेजी से घूमने वाली मशीन होती है जो यूरेनियम के आइसोटोप्स को अलग करके यूरेनियम 235 बनाती है और उ...

11:16

Speaker A

मुलाजमत थी इसलिए वो वापस चले गए थे। उन्हें जब पता चला कि पाकिस्तान में सेंट्रीफ्यूज के बारे में कोई नहीं जानता तो वो 1976 में दोबारा पाकिस्तान आए और सारा काम उन्होंने खुद संभाल लिया। उन्हें हॉलैंड की कंपनी में काम के दौरान दुनिया

11:33

Speaker A

के बेहतरीन सेंट्रीफ्यूजेस के ब्लूप्रिंट्स तक रसाई हासिल थी। वो उन सबको कॉपी करके पाकिस्तान ले आए। डॉक्टर खान की निगरानी में कहोटा में लेबोररी तामीर हुई। अब अगला मरहला इन लेबोरियों के लिए मशीनों की खरीदारी का था। यूरोपीय

11:49

Speaker A

मुालिक ने अपनी कंपनियों पर पाबंदी लगा रखी [संगीत] थी कि वो कोई मशीन तो गया। उसका ऐसा कोई पुर्जा भी किसी मुल्क को नहीं बेच सकती जो एटमी प्रोग्राम में इस्तेमाल होता हो। इस मसले का हल यह निकाला गया कि उन मशीनों के बेसिक पुरजे

12:04

Speaker A

तो लोकल इंजीनियर से तैयार करवा लिए गए। जबकि मशीनों की खरीदारी के लिए डॉक्टर अब्दुल कदीर खान का तजुर्बा काम आया। इन मशीनों की खुसूसियत यह थी कि यह मेडिकल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट में भी इस्तेमाल होती थी। डॉक्टर साहब ने इसी से फायदा

12:20

Speaker A

उठाया। उनके पास यह मशीनरी बनाने वाली 100 यूरोपियन, कनाडियन और अमेरिकी कंपनियों की एक लिस्ट मौजूद थी। उन्होंने इस मशीनरी का हर पुर्जा अलग-अलग कंपनियों से मंगवाया ताकि किसी को शक ना हो। इनकी खरीदारी के लिए पाकिस्तान के मुख्तलिफ ताजिरों को

12:38

Speaker A

इस्तेमाल किया गया। जो हसास पुरजे यह ताज नहीं खरीद सके उनके लिए कागजों पर फर्जी मेडिकल और इंडस्ट्रियल कंपनियां बनाई गई और उन फर्जी कंपनियों के नाम पर यह पुरजे इंपोर्ट किए गए। नाइजर से 400 टन यूरेनियम ऑक्साइड भी खुफिया तौर पर मंगवाया गया जो

12:56

Speaker A

एनरच यूरेनियम बनाने में काम आता है। यह सब करने में इतनी एहतियात की जा रही थी कि जो पाकिस्तानी ताजिर एक पुर्जा खरीद लेता उससे फिर कोई दूसरी खरीदारी नहीं करवाई जाती थी। यूं सेंट्रीफ्यूज मशीनों का मसला भी हल हो गया। पुर्जों को जोड़कर मशीनें

13:14

Speaker A

बनाने में कुछ मैथमेटिक्स और फिजिक्स के मसाइल भी थे। इन मसाइल के हल के लिए कायदा आजम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स की खिदमात हासिल की गई। बहरहाल अब्दुल कदीर खान और दीगर लोगों की मेहनत से कहोटा लेबोरेटरी में 1974 में ही यूरेनियम एनरच करने का

13:31

Speaker A

काम शुरू कर दिया गया और 1978 में मुकम्मल तौर पर कामयाबी भी हासिल कर ली गई। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एक साबिक ऑफिसर बी रामन ने अपनी किताब काऊ बॉयज ऑफ रॉ में दावा किया है कि भारत को 1978 [संगीत] में

13:48

Speaker A

ही पता चल चुका था कि पाकिस्तान ने यूरेनियम को एनरच करने में कामयाबी हासिल कर ली है। उसे यह खबर इसराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने दी थी। लेकिन मोसाद को यह पता नहीं चल रहा था कि यूरेनियम एनरच

14:01

Speaker A

प्लांट आखिर है कहां? प्लान था उसे ढूंढकर तबाह करना। इसके लिए भारतीय जमीन से फजाई कारवाई होनी थी। फसाद ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर साइट को तलाश करने की जिम्मेदारी भारतीय एजेंसी रॉ को दी। भारतीयों को शुभा था कि हो ना हो कहोटा

14:17

Speaker A

प्लांट ही वो जगह है जहां पाकिस्तान यूरेनियम एनरचमेंट कर रहा है। अब इस शूबे को यकीन में बदलने के लिए भारत ने इर्द-गिर्द जासूसों का जाल बिछा दिया। वहां करीब ही एक नाई की दुकान थी। जहां कहोटा के कुछ साइंसदान बाल कटवाने आया

14:33

Speaker A

करते थे। रॉ के एजेंटों ने वहां से बाल जमा करना शुरू किए और उन्हें भारत भेजते रहे। भारत में कई साल तक इन बालों पर रिसर्च होती रही और फिर एक सैंपल उन्हें ऐसा मिल ही गया जिसमें यूरेनियम 235 की

14:49

Speaker A

तापकारी के जर्रात थे। अब साबित हो चुका था कि पाकिस्तान एटम बम की तरफ बढ़ रहा है और उसका मरकज है यही कहोटा प्लांट। प्लान के मुताबिक अब इसरली तैयारों को भारत में रिफ्यूलिंग के बाद पाकिस्तान के उस प्लांट

15:03

Speaker A

पर हमला करना था। बी रामन के मुताबिक रॉ के ऑफिसर जब इस प्लान की परमिशन लेने के लिए वजीरेआम मोरारजी डिसाई के पास गए तो उन्होंने इंकार कर दिया। साफ कह दिया कि वो किसी मुल्क के मामलात में मुदाखलत नहीं

15:17

Speaker A

चाहते। मोरारजी देसाई ने सिर्फ इंकार ही नहीं किया बल्कि मुबयना तौर पर सदर जियाउलक को फोन करके भी कहा कि कहोटा प्लांट में क्या हो रहा है भारत सब जानता है। यह सुनते ही जियाउलक फौरन हरकत में आए। कहोटा प्लांट के आसपास फैले भारतीय

15:33

Speaker A

जासूसों का पता चलवाया और उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा दिया। मोरारजी देसाई को बाद में पाक भारत ताल्लुकात बेहतर बनाने की कोशिशों पर 1988 में निशाने पाकिस्तान से भी नवाजा गया। पाकिस्तान का एटमी प्रोग्राम कामयाबी की पटरी पर दौड़ने लगा।

15:51

Speaker A

सामने मंजिल थी एटम बम की। लेकिन जहां यह सब हो रहा था और उधर अमेरिका यह सब देख रहा था। इसी दौरान अमकी वजीर खारजे की वो मशहूर धमकी भी सामने आई जिसमें उन्होंने भुट्टो से कहा था कि हम तुम्हें इबरत का

16:07

Speaker A

निशान बना देंगे। उसके बाद जुल्फिकार अली भुट्टो ने रावलपिंडी जलसे में खत लहराते हुए उसे हेनरी [संगीत] कैसेंजर की धमकी बताया था। भुट्टो का कहना था कि उनके खिलाफ आलमी साजिश रचाई गई है। जिसकी फंडिंग अमेरिका कर रहा है और सियासी

16:23

Speaker A

मुखालफिन मोहरा बने हुए हैं। बहरहाल यहां सवाल यह है कि अमेरिका को पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम के बारे में पल-पल की खबर कैसे मिल रही थी? उसका जवाब डॉक्टर अब्दुल कदीर खान ने अपनी किताब दास्ताने अज्म में दिया है। वो लिखते हैं कि कहोटा रिसर्च

16:41

Speaker A

लेबोरेटरी में काम करने वाले चंद साइंसदान अमेरिका के मुखबर थे। जब शक हुआ तो उनकी निगरानी की जाने लगी। बाद में इन सबको वहां से हटा दिया गया। एक दिन एक सिपाही पत्थर नुमा कोई चीज लेकर आया। उसे खोल कर

16:56

Speaker A

देखा गया तो उसमें एक ड्राई बैटरी, ट्रांसमीटर और कुछ हालात लगे हुए थे जिन्हें नाकारा बना दिया गया। यह खबर सदर जियाउल हक को दी गई। चंद रोज बाद अमेरिकी सफीर जनरल जियाउलक से मिलने आया और एटमी मामले पर बात की। जियाउलक ने इंतहाई नरमी

17:13

Speaker A

से कहा कि पाकिस्तान कोई एटम बम नहीं बना रहा। अमरी सफीर मुस्कुराया और कहा कि हमारी इंटेलिजेंस बहुत अच्छी है। आप नाश्ते में क्या खाते हैं? हमें यह भी पता चल जाता है। उस पर जियाउल हक ने कुर्सी से

17:27

Speaker A

टेक लगाया और कहा कि अगर आप किसी पत्थर की मदद से मालूमात हासिल कर रहे थे तो हमारे जवानों ने वह पत्थर खोलकर उसे नाकारा बना दिया है। अब आपको कुछ नहीं मिलेगा। यह सुनते ही अमकी सफीर के चेहरे का रंग उड़

17:42

Speaker A

गया और वो फौरन उठकर चला गया। जनवरी 1979 में अमेरिका ने पाकिस्तान पर एटम बम की तैयारी का इल्जाम लगाया और फौजी और इख्तादी इमदाद रोक दी। लेकिन फिर यह हुआ कि उसी साल के आखिर में सोवियत फौज ने अफगानिस्तान पर हमला कर

18:02

Speaker A

दिया। अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत पड़ गई और उसे मजबूरन पाकिस्तान पर से पाबंदियां उठाना पड़ी। पाकिस्तान के लिए यह सुनहरी मौका था और जियाउलक ने इससे खूब फायदा उठाया। सोवियत यूनियन के खिलाफ जंग में पाकिस्तान अमेरिका का फ्रंट लाइन

18:18

Speaker A

इत्तेहादी था। अमेरिका ने [संगीत] ना सिर्फ पाकिस्तान की इमदाद बहाल की बल्कि पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम की तरफ से भी आंखें बंद कर ली। लेकिन जैसे ही सोवियत यूनियन अफगानिस्तान से निकला अमेरिका ने 1990 में पाकिस्तान पर दोबारा पाबंदियां

18:35

Speaker A

लगा दी। तब तक पाकिस्तान अपना काम कर चुका था। डॉक्टर अब्दुल कदीर खान अपनी किताब में लिखते हैं कि 10 दिसंबर 1984 को वो जनरल जियाउल हक के दफ्तर में गए और उन्हें बताया कि हमने एटम बम बना लिया है। यह खबर

18:50

Speaker A

सुनते ही [संगीत] जनरल जियाउल हक खुशी से झूम उठे और आगे बढ़कर अब्दुल कदीर खान का माथा चूम लिया। [संगीत] लेकिन खबर खुफिया रखी गई। कोई एटमी धमाका नहीं किया गया। यह मौका भारत ने कई बरसों बाद दिया।

19:07

Speaker A

[संगीत] 11 मई 1998 को भारत ने पोखरान में एक के बाद एक तीन एटमी धमाके किए। इस पर पाकिस्तान की हुकूमत और फैसला साजों पर दबाव पड़ने लगा। आवाम चाहते थे कि भारत के इन एटमी [संगीत] धमाकों का फौरी जवाब दिया

19:25

Speaker A

जाए। लेकिन दुनिया की बड़ी ताकतें पाकिस्तान को किसी भी कीमत पर ऐसा करने से रोक रही थी। इससे पहले कि पाकिस्तानी हुक्मरा कोई फैसला करते [संगीत] 13 मई को भारत ने मजीद दो धमाके कर दिए। टुडे एट 1545 आवर्स इंडिया कंडक्टेड टू अंडर

19:45

Speaker A

ग्राउंड दें। अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर थी। इधर आवाम के जज्बात थे कि थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर भारतीय हुक्मरा और सियासतदान भड़कीले बयान देकर पाकिस्तान को धमका रहे थे। 11 मई को जब भारत ने पहले

20:05

Speaker A

तीन धमाके किए उस वक्त वज़ीर आजम नवाज शरीफ काजाकिस्तान में थे। दौरा मुख्तसर किया और फौरन पाकिस्तान पहुंचे। 13 मई को काबीना की डिफेंस कमेटी का इजलास बुलाया। तीनों सर्विज चीफ वफाकी वज़रा कहोटा रिसर्च लेबोरेटरीज के हेड डॉ. अब्दुल कदीर खान।

20:23

Speaker A

पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन के सरबराह डॉक्टर समर मुबारक मंत ने शिरकत की। सोहेल वच की किताब गद्दार खान में नवाज शरीफ ने दावा किया है कि दफाई कमेटी के इस इजलास में आर्मी चीफ जनरल [संगीत] जहांगीर करामत और नेवल चीफ एडमिरल फसी बुखारी दोनों ने

20:40

Speaker A

एटमी धमाकों की मुखालिफत की। जबकि पाक फजाइया के सरबराह एयर मार्शल परवेज मेहती कुरैशी ने एटमी धमाके करने के हक में राय दी। बाद में जनरल जहांगीर करामत ने शुजावाज़ की किताब क्रॉस स्वॉर्ड्स में मुखालफत की वजह यह बयान की कि वो चाहते थे

20:57

Speaker A

कि जल्दबाजी में कोई फैसला ना किया जाए। सब जानते थे कि धमाकों के नतीजे में अमरी पाबंदियां लगेंगी। लेकिन उन्होंने हुकूमत से कह दिया था कि वो जो फैसला करेगी उसकी हिमायत की जाएगी। अगले रोज यानी 14 मई को

21:12

Speaker A

विफाकी काबीना का इजलास हुआ। इजलास से मुतालिक वजीर खजाना सरताज अजीज अपनी किताब बिटवीन ड्रीम्स [संगीत] एंड रियलिटीज में लिखते हैं कि इजलास में तीन वज़रा ने फरी एटमी धमाकों का मुतालबा किया। छह वज़रों की राय थी कि एटमी धमाके ना करने के एवज़

21:29

Speaker A

मिलने वाले मुआशी पैकेज को कबूल कर लेना चाहिए। बाकी छह वज़र ना तीन में थे ना 13 में। सरताज अजीज खुद भी एटमी धमाकों के हक में नहीं थे। उधर इंडियन लीडरशिप की धमकियों में शिद्दत आ रही थी। कोई आजाद

21:44

Speaker A

कश्मीर पर हमले की बात कर रहा था तो कोई पाकिस्तान को मशवरा दे रहा था कि अब वो सर झुका कर जीना सीख ले। भारतीय वज़र आजम अटल बिहारी वाजपेई और उनके नायब एलके एडवाणी ने तो सीधा-सीधा पाकिस्तान पर एटम बम

22:00

Speaker A

गिराने की धमकी दे डाली। दूसरी तरफ मगरबी ताकतें पाकिस्तान को रोकने की कोशिशें कर रही थी। अमेरिकी सदर बिल क्लिंटन ने चार बार नवाज शरीफ को फोन किया और एटमी धमाके ना करने के बदले $5 अरब डॉलर की ऑफर कर

22:14

Speaker A

दी। यह ऑफर कम नहीं थी। पाकिस्तान उस वक्त भी शदीद माली मुश्किलात का शिकार था लेकिन नवाज शरीफ ने [संगीत] इंकार कर दिया। वो धमाकों का फैसला कर चुके थे। अमेरिकी सदर बिल क्लिंटन ने जब देखा कि पाकिस्तान नहीं

22:30

Speaker A

मान रहा तो उन्होंने धमकाने के लिए अपने नायब वजीर खारजा स्ट्रोप टालबोट को भेजा। बाद में स्ट्रो टॉलबोट ने अपनी किताब इंगेजिंग इंडिया में ऐतराफ किया कि हुकूमत पाकिस्तान ने किसी किस्म का दबाव कबूल करने से साफ इंकार कर दिया और कह दिया कि

22:46

Speaker A

भारत के एटमी [संगीत] धमाकों का जवाब देने के सिवा कोई ऑप्शन नहीं। पाकिस्तान में मौजूद अमकी सफीर ने उस वक्त की अपोजिशन लीडर बेनजीर भुट्टो से भी राब्ता किया और उन्हें एटमी धमाकों की मुखालफत पर आमादा करने की कोशिश की मगर बेनजीर भी नहीं

23:03

Speaker A

[संगीत] मानी बल्कि पीपल्स पार्टी ने तो जमात इस्लामी के साथ मिलकर ऑल पार्टीज कॉन्फ्रेंस बुलाई और हुकूमत पर एटमी धमाके करने के लिए जोर डालते रहेI हालांकि यह वो दौर था जब बेनज़र को करप्शन मुकदमात का सामना था| वो एहतसाब अदालत में पेशियां

23:20

Speaker A

भुगत रही थीI मगर मुल्की मफात में उन्होंने हुकूमती फैसले का साथ दिया। अमरीकी सिफारतकारों ने बलूचिस्तान के वज़रआला अख्तर मेंगल को भी पट्टी पढ़ाने की कोशिश की। लेकिन एटमी धमाकों से सुबाई हुकूमतों का तो कोई लेना देना ही नहीं।

23:36

Speaker A

इसी दौरान गैलप पाकिस्तान के सर्वे में 70% से जायद आवाम ने एटमी तजुर्बात की हिमायत की। लेकिन इसके बावजूद अमेरिका, बर्तनानिया, जापान और दीगर बैनुल अकवामी ताकतें पाकिस्तान को एटमी तजुर्बात से रोकने की कोशिशों में लगी रहीं। उधर भारत

23:53

Speaker A

भी यह सब खामोशी से नहीं देख रहा था। उसने पाकिस्तान को एटमी [संगीत] तजुर्ब से रोकने के लिए एक मंसूबा बनाया। 28 मई के एटमी धमाके [संगीत] से ठीक 4 दिन पहले यानी 24 मई को एक ऐसा वाकया पेश आया जो

24:09

Speaker A

किसी के वहमोगुमान में भी नहीं था। [संगीत] तीन हाईजैकरों ने पीआईए का फोकट जहाज हाईजैक कर लिया। यह जहाज गवादर से कराची आ रहा था। 33 मुसाफिर और पांच क्रू मेंबर सवार थे। तैयार ने जैसे ही उड़ान भरी, हाई जैकरों ने असलहा निकाला और पायलट

24:27

Speaker A

को जहाज दिल्ली एयरपोर्ट ले जाने के लिए कहा। मगर पायलट ने होशियारी दिखाई और जहाज का रुख सिंध के शहर हैदराबाद की तरफ मोड़ दिया। हाई जैकरों को बताया गया कि वह भारतीय रियासत गुजरात के भोज एयरपोर्ट पर

24:40

Speaker A

रिफ्यूलिंग के लिए उतरेंगे। उसके बाद [संगीत] दिल्ली जाएंगे। हाई जैकर्स धोखे में आ गए। जहाज को हैदराबाद में उतार लिया गया और हाई जैकर यही समझे [संगीत] कि वो इंडिया में दाखिल हो चुके हैं। यहां सारी तैयारियां मुकम्मल थी। जहाज को एक ऐसी जगह

24:56

Speaker A

खड़ा किया गया जहां से हाई जैकर वहां हैदराबाद एयरपोर्ट लिखा हुआ पढ़ ना सके। [संगीत] लाइटें पहले ही बंद कर दी गई थी। करीबी मस्जिदों में आजान देने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। एयरपोर्ट पर भारतीय तिरंगा भी

25:10

Speaker A

लहरा दिया गया और पाकिस्तानी हुक्काम भारतीय हुक्काम का भेष बदलकर हाई जैकरों के इस्तकबाल के लिए खड़े [संगीत] हो गए। वो तीनों हाईजैकर इजी होकर जहाज से उतरे और पाकिस्तानी हुकाम को भारतीय समझकर उनसे कहा कि वो पाकिस्तानी हुकूमत के सामने

25:27

Speaker A

हमारा यह मुतालबा रखें कि वो एटमी तजुर्बात बलूचिस्तान में ना करें। इससे पहले कि वो मजीद कुछ कहते पाक फौज के कमांडोस ने तीनों हाईजैकरों को दबोच लिया। बाद में पता चला कि वो तीनों रॉ के एजेंट थे। यूं भारत का पाकिस्तान को एटमी

25:44

Speaker A

तजुर्बात से रोकने का प्लान फेल हो गया। [संगीत] फिर वो दिन आ गया जिसका पूरी कौम बेसब्री से इंतजार कर रही थी। 28 मई 1998 एटमी तजुर्बात के लिए बलूचिस्तान के इलाके चाखी का इंतखाब कई साल पहले किया जा चुका था।

26:06

Speaker A

इसकी वजह यह थी कि यहां शदीद गर्मी और पानी की किल्लत की वजह से दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं है। धमाके से कब्रिल पाक फौज ने 100 कि.मी. का एरिया घेरे में ले लिया। फजा में जंग की जहाज उड़ते रहे और फिर

26:20

Speaker A

दोपहर 3:16 पर पाकिस्तान [संगीत] ने वो एटमी धमाके किए कि जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनी गई नारा तकबीर अल्लाह हू अकबर अल्लाह हू अकबर पाकिस्तान पाकिस्तान पाकिस्तान पाकिस्तान पाकिस्तान पाकिस्तान पाकिस्तान [संगीत] बिकम अ न्यूक्लियर पावर 30 मई को एक और टेस्ट किया गया। भारत के

26:52

Speaker A

पांच धमाकों के जवाब में छह धमाके। यूं पाकिस्तान दुनिया की सातवीं एटमी ताकत बन गया। कामयाब एटमी तजुर्बात के बाद वज़र आजम नवाज शरीफ ने टीवी पर [संगीत] इसका ऐलान किया और कौम को मुबारकबाद दी। गुजस्ता दिनों भारत ने जो एटमी तजुर्बात

27:08

Speaker A

किए आज हमने उसका हिसाब भी चुका दिया है और पांच कामयाब एटमी तजुर्बात किए हैं। [संगीत] आवाम खुशी से झूम उठे। सड़कों पर जश्न होने लगा। मनों के हिसाब से मिठाइयां तकक्सम हुई। वो भारत जो अपने एटमी तजुर्बात के बाद पाकिस्तान को धमकियां दे

27:28

Speaker A

रहा था उसकी बोलती [संगीत] बंद हो चुकी थी। लेकिन सामने एक कड़ा इम्तिहान भी था। एटमी तजुर्बात की खबर फैलते ही मुखालफत करने वाले मुल्कों ने पाकिस्तान पर पाबंदियां लगा दी। जर्मनी ने इमदाद रोक ली। अमेरिका ने पाबंदियों के साथ सजा देने

27:44

Speaker A

का भी ऐलान कर दिया। स्वीडन ने पाकिस्तान को हथियारों की फरोख बंद कर दी। जापान ने भी एहतेजाज किया। वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ जो इमदाद दे रहे थे वो रोक ली गई। लेकिन फिर क्या हुआ? पाबंदियां जिस तरह लगी थी उसी

28:00

Speaker A

तरह हटती भी चली गई। अमेरिका से ताल्लुकात भी जल्द सेट हो गए। कुछ ही अरसे बाद इन मुल्कों को समझ आ गई कि पाकिस्तान ने धमाके तो कर ही लिए हैं। अब तो कुछ हो नहीं सकता। सारी जिंदगी के लिए तो बैन लगा

28:13

Speaker A

नहीं सकते। पाकिस्तान एटमी ताकत तो बन गया लेकिन सवाल यह है कि पाकिस्तान का यह एटमी प्रोग्राम कितना मजबूत है क्योंकि 2001 से मगरिब में यह प्रोपेगेंडा शुरू हो गया था कि पाकिस्तान के एटमी हथियार दहशत गर्दों के हाथ लग सकते हैं। अब उन्हें कौन समझाए

28:31

Speaker A

कि भाई ये शबे बरात के पटाखे तो है नहीं कि कोई भी इन्हें उठाकर ले जाएगा। सेफ्टी और सिक्योरिटी पाकिस्तान के एटमी प्रोग्राम के दो बेसिक एलिमेंट्स हैं। और इन दोनों के लिए पूरा [संगीत] एक सिस्टम मौजूद है। पाकिस्तान की न्यूक्लियर

28:47

Speaker A

रेगुलेटरी अथॉरिटी एटॉमिक एनर्जी कमीशन स्ट्रेटेजिक प्लांस डिवीजन और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम निहायत महफूज़ हाथों में है। आईएईए जैसी [संगीत] इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ने भी इसकी तारीफ की है। एक इंटरव्यू में जब डॉक्टर समर मुबारक से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने बताया

29:06

Speaker A

कि एटनी हथियार को काबिल इस्तेमाल बनाने के लिए उसके पार्ट मुख्तलिफ जगहों [संगीत] से जमा करने पड़ेंगे और अगर हथियार बन भी जाए तो उसे चलाने के लिए जो कोड इस्तेमाल होते हैं वो तीन अलग-अलग लोगों के पास है।

29:20

Speaker A

जब तक वो कोड इकट्ठे नहीं होंगे हथियार चलेगा ही नहीं। अच्छा पाकिस्तान पर एक इल्जाम यह [संगीत] भी लगता है कि उसने मालूमात चुराकर एटम बम बनाया। अगर यह बात है तो अमेरिका ने भी तो जर्मन साइंसदानों से इंफॉर्मेशन [संगीत] चुराकर एटम बम

29:36

Speaker A

बनाया था। इसराइल ने भी अमेरिकी एटम बम के ब्लूप्रिंट्स चुराकर उन्हें एटमी हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल किया। तो इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में। यूं तो पाकिस्तान को एटमी ताकत बनाने में सैकड़ों गुमनाम लोगों का हाथ है। लेकिन पांच लोगों

29:51

Speaker A

के नाम बहुत नुमाया है। अगर इनमें से कोई एक भी पीछे हट जाता तो यह मिशन कभी मुकम्मल ना होता। सबसे पहला नाम जुल्फिकार अली भुट्टो जिन्होंने पाकिस्तान को एटॉमिक कुत बनाने का ख्वाब देखा। दूसरे डॉक्टर अब्दुल कदीर खान जिन्होंने इस ख्वाब को

30:10

Speaker A

ताबीरर देने के लिए हॉलैंड में अपनी लग्जरी लाइफ छोड़ दी। तीसरा नाम जियाउल हक का है जिन्होंने अखवानवार का पूरा फायदा उठाया और एटमी प्रोग्राम जारी [संगीत] रखा। चौथी शख्सियत गुलाम इसहाक खान की है। वो 1970 और 1980 की दहाई में वज़र खजाना

30:29

Speaker A

सेक्रेटरी जनरल दफा और चेयरमैन सेनेट रहे। जियाउल हक के बाद वो मुल्क के सदर भी बने। इस दौरान एटमी प्रोग्राम के लिए फंडिंग, जरूरी पुरजों की इंपोर्ट और दीगर सपोर्ट में उन्होंने इंतहाई अहम किरदार अदा किया। और पांचवा और आखिरी नाम नवाज शरीफ का है।

30:47

Speaker A

जिन्होंने दुनिया भर के प्रेशर को नजरअंदाज करके कामयाब एटमी तजुर्बात किए। इनके अलावा भी सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोगों ने अपना-अपना किरदार इंतहाई [संगीत] मेहनत और वतन से मोहब्बत में अदा किया। पाकिस्तानी कौम इन तमाम लोगों की मकरूज़

31:04

Speaker A

रहेगी। आप सबसे ज्यादा क्रेडिट किसे देंगे? [संगीत] हमें कमेंट में जरूर बताइएगा।

Topics: पाकिस्तान एटमी प्रोग्राम कायदेआज़म डॉ. रफी मोहम्मद चौधरी डॉ. अब्दुल कदीर खान जुल्फिकार अली भुट्टो भारत-पाकिस्तान परमाणु हथियार प्रोजेक्ट 706 न्यूक्लियर फिजिक्स


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