**Namrood Ki Maut Kaise Hui? 🦟 | Hazrat Ibrahim (A.S) aur Namrood ka Waqia | Dastan e kamil — Transcript & Summary | SozAI**
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यह वीडियो हजरत इब्राहिम (अ.स) और बादशाह नमरूद के बीच संघर्ष और नमरूद की मौत की कहानी बताता है।

## Key Takeaways

- असली ताकत और सत्ता अल्लाह के हाथ में है, न कि इंसानी बादशाहों के।
- तौहीद की राह पर चलना और बुत पूजा से बचना जरूरी है।
- अल्लाह की मदद से हर अत्याचार और जुल्म का अंत होता है।
- सच्चाई और ईमानदारी से ही इंसान को जीत मिलती है।
- अहंकार और तकब्बुर अंततः विनाश का कारण बनते हैं।

## What the video covers

- यह कहानी हजारों साल पहले मेसोपोटेमिया के बादशाह नमरूद की है, जिसने खुद को खुदा मान लिया था।
- नमरूद ने उस बच्चे को मारने का आदेश दिया जो उसकी सत्ता को खत्म कर सकता था, लेकिन हजरत इब्राहिम (अ.स) का जन्म हुआ।
- हजरत इब्राहिम (अ.स) ने अपने पिता आजर को बुत पूजा छोड़ने और एक ईश्वर की पूजा करने की सलाह दी।
- इब्राहिम (अ.स) ने नमरूद के दरबार में जाकर उसे एक चुनौती दी कि वह सूरज को पूरब से पश्चिम में निकाल कर दिखाए।
- नमरूद ने इब्राहिम को आग में फेंकने का आदेश दिया, लेकिन अल्लाह की मर्जी से आग ठंडी हो गई और इब्राहिम सुरक्षित रहे।
- नमरूद ने अपनी हार स्वीकार करने के बजाय जुल्म और अत्याचार जारी रखा और एक विशाल मीनार बनाकर अल्लाह से लड़ने की कोशिश की।
- अल्लाह ने नमरूद को चेतावनी देने के लिए एक फरिश्ता भेजा, लेकिन नमरूद ने उसे ठुकरा दिया।
- अल्लाह ने नमरूद की सेना पर मच्छरों का हमला किया, जिसने उसकी सेना को तबाह कर दिया।
- नमरूद अंततः अपनी हार और अपमान के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से टूट गया और उसकी मौत हुई।
- हजरत इब्राहिम (अ.स) ने मक्का में इस्माइल के साथ मिलकर अल्लाह का घर तामीर किया, जो तौहीद का केंद्र बना।

## Chapters

1. 00:00 नमरूद का जुल्म और बाबुल की स्थिति
2. 00:44 नमरूद की सत्ता और उसकी ताकत
3. 01:24 हजरत इब्राहिम की विलादत और बचपन
4. 02:27 इब्राहिम का अपने पिता को तौहीद की दावत देना
5. 03:30 नमरूद के दरबार में इब्राहिम की चुनौती
6. 04:15 इब्राहिम को आग में फेंकना और अल्लाह की मदद
7. 06:15 नमरूद की मीनार और फरिश्ते की दावत
8. 07:36 मच्छरों का अज़ाब और नमरूद की हार
9. 09:45 नमरूद की मौत और इब्राहिम का मक्का में तौहीद का केंद्र बनाना

Answers

## Questions about this video

नमरूद कौन था और उसकी क्या खासियत थी?

नमरूद मेसोपोटेमिया का एक अत्याचारी बादशाह था जिसने खुद को खुदा मान लिया था और 400 साल तक बिना किसी के साथ के हुकूमत की।

हजरत इब्राहिम (अ.स) ने नमरूद के सामने क्या चुनौती दी?

हजरत इब्राहिम ने नमरूद से कहा कि अगर वह खुदा है तो सूरज को पूरब से पश्चिम में निकाल कर दिखाए, जो नमरूद के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

नमरूद की मौत कैसे हुई?

अल्लाह ने नमरूद की सेना पर मच्छरों का अजीम हमला किया, जिससे उसकी सेना तबाह हो गई और अंततः नमरूद अपनी हार और अपमान के कारण टूट गया और मर गया।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

यह बात है आज से हजारों साल पहले की, जब जमीन पर एक ऐसा बादशाह हुक्मरान था जिसने अपनी हदें भुला दी थी। इराक की सरजमीन, जिसे आज हम मेसोपोटेमिया के नाम से जानते हैं, उस वक्त जुल्म और कुफ्र का गढ़ बन चुकी थी। बाबुल का वह शहर, जहां बुलंदोबाला महलात और मिट्टी के बड़े-बड़े मंदिर इंसानी तक की गवाही देते थे। फिजा में धुएं और बुतों के आगे जलने वाली आग की बू फैली थी, और लोगों के दिल खौफ से सहमे हुए थे।

00:13

Speaker A

वहां एक शख्स तख्त नशीन था, जिसका नाम तारीख में नमरूद बिन कनान लिखा गया। मैं नमरोड हूं, और इस जमीन का कानून भी मैं और फैसला भी मैं। जो 400 साल तक बिला शिरकत गैर हुकूमत करता रहा। इबने कसीर फरमाते हैं कि वह दुनिया

00:28

Speaker A

के उन चार बादशाहों में से एक था, जिनके कब्जे में पूरी जमीन की हुक्मरानी दे दी गई थी। उसकी दौलत, उसके लश्कर और उसकी ताकत ने उसे इस कदर अंधा कर दिया था कि वह इंसानियत के मकाम से गिर चुका था। वो सोने

00:44

Speaker A

के तख्त पर बैठता। उसके सर पर हीरों का ताज होता, और वह हर साहिल से अपनी बंदगी का इकरार करवाता था। नमरूद के दौर में बाबुल की जमीन सरसबज तो थी, मगर वहां के इंसानों की रूहें बंजर और प्यासी हो चुकी थी। लोग

00:58

Speaker A

सितारों की पूजा करते, बुतों के सामने सजदा रेज होते, और नमरूद को अपना पालने वाला खुदा मानते थे। क्या तुम मेरे सिवा किसी और को अपना रब तस्लीम करने की हिम्मत कर सकते हो?

01:11

Speaker A

इसी घुटनजदा माहौल में, जब कुफ्र अपनी इंतहा पर था, अल्लाह ने कायनात को एक अजीम रोशनी अता करने का फैसला फरमाया। एक ऐसे बच्चे की विलादत का वक्त करीब आ पहुंचा था, जिसने बाततिल के उस बुलंदोबाला एवान को जड़ से हिला देना था। नजूमियो ने नमरूद

01:24

Speaker A

को डराया। एक बच्चा पैदा होगा जो तेरे ताज और तख्त को खाक में मिला देगा। नमरूद के दिल में खौफ की एक लहर दौड़ गई, और उसने हुक्म दिया इस साल पैदा होने वाले हर बच्चे को ढूंढ निकालो और किसी को जिंदा ना छोड़ो। जुल्म

01:40

Speaker A

की बस्ती में मांओं की चीखें गूंजने लगीं। मगर अल्लाह की तदबीर के सामने इंसानी चाले हमेशा मात खा जाती हैं। हजरत इब्राहिम अल सलाम की वाल्लिदा ने अल्लाह पर भरोसा किया, और बाबुल के करीब एक पोशीदा गार में पनाह

01:54

Speaker A

लेने का फैसला किया। इसी खामोश और तारीख गार में कायनात के उस अजीम पैगंबर की विलादत हुई, जिसने दुनिया को तौहीद का रास्ता दिखाना था। अल्लाह ने आप अल सलाम की हिफाजत फरमाई, और गार की उन दीवारों के

02:07

Speaker A

पीछे आपका बचपन मोजाती तौर पर गुजरने लगा। रिवायत है कि अल्लाह ने आपकी उंगलियों से दूध और शहद जारी फरमा दिया था, ताकि आपकी परवरिश में कोई कमी ना आए। जब आप पहली बार गार से बाहर तशरीफ लाए, तो आपकी नजरों ने

02:20

Speaker A

कायनात के खालिदिक को तलाश करना शुरू कर दिया। आपने चमकते हुए सितारों को देखा, रोशन चांद को देखा, और तपते हुए सूरज को देखकर उनके ढल जाने पर गौर किया। आप अल सलाम ने अपने रब के हुजूर अर्ज किया कि

02:34

Speaker A

मैं गुरूब हो जाने वालों से मोहब्बत नहीं रखता। मेरा रब तो वो है जो कभी नहीं ढलता। अल्लाह ने आपको नबूवत के अजीम मंसब पर फाइज किया, और आपको अपनी कौम और उस सरकश बादशाह की तरफ दावत हक देने का हुक्म

02:47

Speaker A

दिया। आप सबसे पहले अपने वालिद आजर के पास गए, जो बुत तराश था और नमरूद के दरबार में खास मकाम रखता था। आपने निहायत नरमी और मोहब्बत से उसे समझाया, अब्बा जान इन बेजान पत्थरों की इबादत छोड़ दें, और सिर्फ वाहदा ला शरीक की बंदगी

03:00

Speaker A

करें। मगर बाप ने गुस्से में आकर धमकी दी, अगर तुम बाज ना आए तो मैं तुम्हें संसार कर दूंगा। यहां से दूर चले जाओ। इब्राहिम अल सलाम ने अल्लाह के सामने अपना हाल रखा, और दुआ की कि ए मेरे रब मेरी कौम को

03:15

Speaker A

हिदायत अता फरमा। अब वक्त आ गया था कि उस वक्त के सबसे बड़े बुत यानी नमरूद के सामने हक की बात रखी जाए। नमरूद के दरबार का मंजर बड़ा हौलनाक था, जहां पहरेदारों की कतारें लगी थीं, और हर तरफ सोने की

03:30

Speaker A

चमकदमक थी। जब इब्राहिम अलहिसलाम दरबार में दाखिल हुए, तो आपने किसी इंसान के सामने सर झुकाने से साफ इंकार कर दिया। नमरूद ने हैरत और गुस्से से पूछा, ऐ नौजवान तूने मेरे सामने सजदा क्यों नहीं किया? क्या तू नहीं जानता कि मैं कौन हूं?

03:43

Speaker A

आप अल सलाम ने बड़े सुकून से जवाब दिया, मेरा सजदा सिर्फ उसके लिए है जिसने मुझे और तुझे पैदा किया है। नमरूद ने कहकाहा लगाया, और तकब्बुर से कहा, इस जमीन पर जिंदगी और मौत मेरे हाथ में है।

03:59

Speaker A

देखो मैंने एक मुजरिम को रिहा कर दिया, और एक बेगुनाह को कत्ल। क्या मैं जिंदगी और मौत का मालिक नहीं? इब्राहिम अल सलाम ने उसकी उस नादानी पर एक ऐसी दलील पेश की, जिसने पूरे दरबार में सन्नाटा तारी कर

04:15

Speaker A

दिया। आपने फरमाया कि मेरा रब वो है जो सूरज को मशरिक से निकालता है। अगर तू वाकई खुदा है तो उसे मगरिब से निकाल कर दिखा दे। इस एक जुमले ने नमरूद के होश उड़ा दिए। वो लाजवाब हो गया, और उसके

04:26

Speaker A

चेहरे पर जिल्लत के आसार नुमाया होने लगे। मगर तकब्बुर इंसान को सच्चाई कुबूल करने से रोक देता है। नमरूद ने अपनी शिकस्त तस्लीम करने के बजाय जुल्म का रास्ता चुना। उसने हुक्म दिया कि इब्राहिम को कैद कर दिया जाए, और एक ऐसी इबरतनाक सजा

04:40

Speaker A

तैयार की जाए जिसे देखकर रहती दुनिया कांप उठे। बाबुल की पूरी कौम को हुक्म दिया गया कि वह लकड़ियां इकट्ठी करें, ताकि एक अजीमोशान आग दहकाई जा सके। महीनों तक लकड़ियां जमा की जाती रही। यहां तक कि वह

04:54

Speaker A

ढेर एक पहाड़ की मानिंद नजर आने लगा। जब उस ढेर को आग लगाई गई, तो उसके शोले आसमान से बातें करने लगे, और उसकी तपिश इतनी थी कि परिंदे भी करीब से नहीं गुजर सकते थे। नमरूद ने एक ऊंचे से उस मंजर

05:07

Speaker A

को देखने का इंतजाम किया, ताकि वह अपनी ताकत का जश्न मना सके। इब्राहिम अल सलाम को एक मंजनीक में रखा गया, ताकि आपको दूर से उस आग के समंदर में फेंका जा सके। इस कठिन घड़ी में भी आपके चेहरे पर कोई खौफ

05:21

Speaker A

नहीं था। आपकी जुबान पर सिर्फ अल्लाह का जिक्र और दिल में उसकी रजा थी। फरिश्तों ने तड़प कर अल्लाह से इजाजत मांगी कि वह अपने खलील की मदद करें। मगर इब्राहिम अल सलाम ने सिर्फ अल्लाह पर तवकुल किया। आपने

05:34

Speaker A

रब से रहमत की इल्तजा की, और फरमाया कि मेरे लिए मेरा अल्लाह ही काफी है, और वही बेहतरीन कारसाज है। जब आपको आग में फेंका गया, तो कायनात के मालिक ने आग को मुखातिब करके एक ऐसा हुक्म दिया जो अक्ले इंसानी

05:47

Speaker A

से बालातर था। अल्लाह ने फरमाया, ऐ आग ठंडी हो जा, और इब्राहिम के लिए सलामती वाली बन जा। आग ने सिर्फ उन रस्सियों को जलाया जिनसे आप बंधे हुए थे। आपके लिबास और जिस्म को आंच तक ना आई। नमरूद ऊपर से यह

06:01

Speaker A

देखकर दंग रह गया। उसकी आंखें अपनी शिकस्त का यह मंजर यकीन नहीं कर पा रही थीं। वो देख रहा था कि आग की लपेटें इब्राहिम अलैहिस्सलाम को छुए बगैर दूर हट रही हैं, जैसे वो उनकी खादमा हो। जब आग बुझ गई, और

06:15

Speaker A

आप अलैहिस्सलाम बाहर तशरीफ लाए, तो हक की चमक ने कुफ्र के ऐवानों में लजा तारी कर दिया। मगर नमरूद का दिल पत्थर से भी ज्यादा सख्त हो चुका था। उसने उस खुले मौजे को जादू करार देकर रद्द कर दिया। अब

06:28

Speaker A

अल्लाह की मोहलत खत्म होने को थी, और उस सरकश बादशाह के लिए ज़वाल का एक अनोखा बाप शुरू होने वाला था। जब नमरूद ने हक के इतने बड़े मौजजे को झुठला दिया, तो गोया उसने अपनी तबाही के परवाने पर खुद दस्तखत

06:41

Speaker A

कर दिए। इब्राहिम अल सलाम ने बाबुल की जमीन को छोड़ने का फैसला किया, और अपने चंद साथियों के हमरा हिजरत की राह इख्तियार की। आपने फस्तीन और मिस्र की जानिब सफर किया, ताकि अल्लाह का पैगाम उन लोगों तक पहुंचाएं जो सच्चाई के प्यासे

06:54

Speaker A

थे। इधर बाबुल में नमरूद का गुरूर अपनी हदें पार कर चुका था। वो अब खुद को जमीन का वाहिद ताकतवर खुदा समझने लगा था। मुफसरीन लिखते हैं कि नमरूद ने अल्लाह से लड़ने के लिए एक बुलंदोबाला मीनार तामीर

07:09

Speaker A

करवाने का इरादा किया। इसका गुमान था कि वह बुलंदी पर जाकर आसमान के खुदा को माज अल्लाह निशाना बना सकेगा, जो उसकी अकल की पस्ती की दलील थी। अल्लाह ने नमरूद की आजमाइश के लिए उसकी तरफ एक फरिश्ता इंसानी

07:22

Speaker A

रूप में भेजा, ताकि उसे आखिरी बार खबरदार किया जाए। फरिश्ते ने उसे दावत दी, तो ईमान ले आ और अपनी सरकशी छोड़ दे। अल्लाह तुझे माफ कर देगा, और तेरी बादशाहत कायम रहेगी। नमरूद बोलता है, क्या जमीन पर मेरे सिवा भी कोई बादशाह है

07:36

Speaker A

जिससे मैं डरूं? मैं किसी को नहीं मानता। नमरूद ने फरिश्ते की बात को मजाक में उड़ा दिया, और तकब्बुर से कहा, अगर तुम्हारे खुदा के पास कोई लश्कर है तो उसे मेरे मुकाबले बुला लो। उसने अपने लाखों के लश्कर को मैदान में

07:52

Speaker A

उतारा, जहां मीलों तक सिर्फ हथियारों की चमक और घोड़ों की टापें सुनाई देती थीं। नमरूद अपने हाथी पर सवार, लोहे के लिबास में, मलबूस अपनी ताकत के नशे में चूर खड़ा था। अचानक उफ पर एक सियाह बादल

08:06

Speaker A

नमूदार हुआ। मगर यह बारिश का बादल नहीं था, बल्कि अल्लाह के अज़ाब का पेशखमा था। यह मच्छरों का एक ऐसा अजीम लश्कर था, जिसकी गिनती सिर्फ उनका खालिक ही जानता था। सूरज की रोशनी उन मच्छरों की कसरत की वजह से

08:20

Speaker A

छुप गई, और पूरे मैदान में एक अजीब सी साईं साईं गूंजने लगी। नमरूद और उसके सिपाही हैरान थे कि यह नन्ही सी मखलूक उनका क्या बिगाड़ लेगी। मगर अल्लाह की लाठी बेआज होती है। मच्छरों का वो सैलाब लश्कर पर

08:34

Speaker A

टूट पड़ा, और उनके गोश्त और खाल को चाटने लगा। देखते ही देखते लाखों का लश्कर तितर-बितर हो गया। ताकतवर घोड़े जमीन पर गिरने लगे, और मगरूर सिपाही अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। मगर फरार का कोई रास्ता ना था। नमरूद यह हौलनाक

08:48

Speaker A

मंजर देखकर बदहवासी में अपने महल की तरफ भागा, और मजबूत दरवाजों के पीछे छुप गया। वो समझता था कि पत्थर की यह दीवारें उसे इस अज़ाब से बचा लेंगी जो जमीन और आसमान के मालिक ने भेजा है। मग

09:05

Speaker A

मंजर देखकर बदहवासी में अपने महल की [संगीत] तरफ भागा और मजबूत दरवाजों के पीछे छुप गया। वो समझता था कि पत्थर की यह दीवारें उसे इस अज़ाब से बचा लेंगी जो जमीन और आसमान के मालिक ने भेजा है। मगर अल्लाह

09:18

Speaker A

का हुक्म आ चुका था और एक लंगड़ा मच्छर अल्लाह की तरफ से उस अजीम बादशाह की जिल्लत के लिए मामूर किया गया था। वो नन्हा सा मच्छर नमरूद की नाक के रास्ते उसके दिमाग तक जा पहुंचा और वहां जाकर

09:31

Speaker A

काटने लगा। नमरूद के सर में वो दर्द उठा कि उसे अपनी जिंदगी बोझ लगने लगी और उसे सुकून की कोई राह नजर ना आती थी। मेरे सर को किसी चीज से मरो। इस दर्द ने मुझे दीवाना कर दिया [चीखने की आवाज़] है।

09:46

Speaker A

दुनिया का वो बादशाह जो सजदा तलब करता था अब लोगों से इल्तजा कर रहा था कि उसके सर पर जूते मारे जाएं। जब उसके सर पर जर्ब लगाई जाती तो उसे चंद लम्हों के लिए सुकून मिलता। और जैसे ही जर्ब रुकती, [संगीत]

09:59

Speaker A

दर्द दोबारा जानलेवा हो जाता। 400 साल तक जिस सर पर ताज सजा रहा, अब वही सर हर वक्त जूतों की जद में रहता था। मेरे सर पर जूते मार दो। शायद इस दर्द से मुझे कुछ लम्हों का आराम मिल जाए।

10:13

Speaker A

अल्लाह ने उसे इतनी लंबी उम्र इसलिए दी थी ताकि वह तौबा कर ले। मगर जब उसने हद पार की [संगीत] तो उसे उसी की रियाया के हाथों जलील करवाया। वो महल जो कभी ऐशो-इशरत का मरकज था। अब वहां से सिर्फ नमरूद की चीखें

10:27

Speaker A

और जूतों के लगने की आवाजें आती थी। इब्न कसीर के मुताबिक वो 400 साल तक इसी अज़यतनाक हालत में रहा। जितने साल उसने खुदाई का दावा किया था आखिरकार उसका गुरूर खाक में मिल गया और वह जिल्लत की मौत मरा

10:41

Speaker A

ना उसका लश्कर काम आया और ना उसकी दौलत नमरूद की हलाकत के बाद बाबुल की वो बस्ती वीरान हो गई और उसके महलात इबरत का निशान बन गए दूसरी तरफ हजरत इब्राहिम अल सलाम की नस्ल में अल्लाह ने बरकत अता फरमाई और

10:56

Speaker A

उनकी औलाद में अंबिया का सिलसिला जारी रहा। आप अल सलाम की उम्र मुबारक के बारे में रिवायत मुख्तलिफ है। मगर आपने एक तवील और बाबरकत जिंदगी पाई। आपको अबुल अंबिया यानी नबियों का बाप कहा जाता है। क्योंकि कायनात के अजीम तरीन रसूल आप ही की नस्ल

11:13

Speaker A

से आए। मक्का की बंजरवादी में आपने अपने लखते जिगर इस्माइल के साथ मिलकर अल्लाह का घर तामीर किया जो आज भी तौहीद का मरकज है। नमरूद का नाम आज सिर्फ इबरत के लिए लिया जाता है। जबकि इब्राहिम अल सलाम का

11:27

Speaker A

[संगीत] नाम हर नमाज में दुद की सूरत में पढ़ा जाता है।

Topics: हजरत इब्राहिम नमरूद मौत मेसोपोटेमिया बाबुल तौहीद बुत पूजा अल्लाह इब्राहिम की आग में सुरक्षा मच्छरों का अज़ाब

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