**नाग और नौलक्खा हार की रहस्यमयी कहानी #MysteryStory — Transcript & Summary | SozAI**
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नाग और नौलक्खा हार की रहस्यमयी कहानी जिसमें एक नाग हार में बदल जाता है और राजकुमार की असली पहचान का राज खुलता है।

## Key Takeaways

- कहानी में रहस्यमयी तत्व और पारंपरिक भारतीय लोककथाओं का मिश्रण है।
- सपेरों द्वारा पकड़ा गया नाग असली रूप में एक दिव्य उपहार और पुत्र का प्रतीक है।
- राजकुमार की असली पहचान और नाग रूप कहानी का मुख्य रहस्य है।
- विश्वास और संदेह के बीच संघर्ष कहानी को भावनात्मक गहराई देता है।
- राजकुमारी बजंती की विद्वता और उसकी जिज्ञासा कहानी को आगे बढ़ाती है।

## What the video covers

- सपेरों को एक बिल में से काला नाग मिलता है जो बाद में नौलक्खा हार में बदल जाता है।
- सपेरों हार राजा चित्रसेन को देते हैं, जो उसे रानी को उपहार में देते हैं।
- हार के अंदर एक सुंदर बच्चा होता है जिसे राजा और रानी अपना पुत्र मानकर पालते हैं।
- राजकुमार बड़ा होकर राजकुमारी बजंती से विवाह करता है, जो 16 विद्याओं में निपुण है।
- राजकुमारी को शक होता है कि राजकुमार असली पुत्र नहीं है और वह उसकी सच्चाई जानना चाहती है।
- राजकुमार नाग का असली रूप प्रकट करता है और नदी में समा जाता है, जिसके बाद वह गायब हो जाता है।
- राजकुमारी बजंती राजकुमार को खोजने की कोशिश करती है लेकिन असफल रहती है।
- राजकुमारी नगर में नई-नई कहानियां सुनने का आयोजन करती है ताकि राजकुमार के बारे में कोई नई जानकारी मिल सके।
- एक बूढ़ा आदमी जंगल में रहस्यमयी सभा देखता है, जिससे कहानी में नया मोड़ आता है।
- कहानी में रहस्य, प्रेम, और राजसी जीवन के साथ नाग-परिवार की गूढ़ बातें शामिल हैं।

Answers

## Questions about this video

नाग नौलक्खा हार में कैसे बदल गया?

सपेरों ने नाग को पकड़कर पिटारे में बंद किया था, लेकिन जब पिटारा खोला तो नाग गायब था और उसकी जगह एक सुंदर नौलक्खा हार था। यह रहस्यमयी घटना कहानी का मुख्य आकर्षण है।

राजकुमार का असली रूप क्या था?

राजकुमार असल में नाग का रूप धारण करता था, जिसे उसने अपनी पत्नी को सच बताने से पहले नदी के जल में दिखाया और फिर वह नदी में समा गया।

राजकुमारी बजंती ने राजकुमार से क्या सवाल किया?

राजकुमारी बजंती ने राजकुमार से उसके माता-पिता और वंश के बारे में पूछा, जिससे राजकुमार को धर्म संकट में पड़ना पड़ा और अंत में उसने नाग रूप धारण किया।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

पुराने समय की बात है।

00:02

Speaker A

एक जंगल में सपेरों का एक झुंड जा रहा था।

00:05

Speaker A

वे एक पेड़ की छाया में आराम करने बैठे।

00:08

Speaker A

उस पेड़ के पास सांपों का एक बिल था।

00:12

Speaker A

एक सपेरे ने पहचान लिया कि इसमें सांप हो सकता है।

00:16

Speaker A

उसने अपने साथियों से कहा कि हमें यह बिल खोदना चाहिए।

00:21

Speaker A

जब सपेरों ने बिल खोदा तो उसमें से एक बहुत बड़ा काला नाग निकला।

00:26

Speaker A

सपेरों ने उसे पकड़ लिया और पिटारे में बंद कर लिया।

00:31

Speaker A

थोड़ी दूर चलने के बाद सपेरों ने सोचा कि वे नाग का जहर निकाल दें।

00:36

Speaker A

जब उन्होंने पिटारा खोला तो सब हैरान रह गए।

00:40

Speaker A

नाग गायब हो गया था और उसकी जगह एक सुंदर नौलक्खा हार रखा था।

00:46

Speaker A

सपेरे हार देखकर बहुत खुश हुए।

00:49

Speaker A

उन्होंने सोचा कि नाग से तो हार ज्यादा कीमती है, इसे राजा को दे देते हैं।

00:54

Speaker A

राजा उन्हें बहुत सारा धन देगा।

00:57

Speaker A

वे राजा चित्रसेन के शहर की ओर चल दिए।राजा के महल में पहुंचकर उन्होंने राजा को प्रणाम किया।

01:45

Speaker A

राजा ने उनसे आने का कारण पूछा।

01:48

Speaker A

सपेरों ने बताया कि उनके पास एक बहुत कीमती हार है जो रानी के गले की शोभा बढ़ा सकता है।

01:56

Speaker A

राजा चित्रसेन ने हार दिखाने को कहा।

01:59

Speaker A

जब सपेरों ने पिटारा खोला तो राजा और दरबार में सभी लोग हार देखकर हैरान रह गए।

02:06

Speaker A

उन्होंने ऐसा हार पहले कभी नहीं देखा था।

02:09

Speaker A

राजा ने सपेरों से पूछा कि वे यह हार कहां से लाए हैं।

02:14

Speaker A

सपेरों ने बताया कि उन्हें यह रास्ते में मिला था।

02:18

Speaker A

राजा ने हार स्वीकार कर लिया और सपेरों को इनाम देकर विदा किया।

02:23

Speaker A

राजा ने हार वाला पिटारा अपने पास रख लिया।

02:27

Speaker A

शाम को जब राजा महल में गया तो उसने रानी को हार दिखाते हुए कहा कि वो उसके लिए एक सुंदर उपहार लाया है।

02:35

Speaker A

रानी ने पिटारा खोला तो उसमें एक बहुत सुंदर छोटा बच्चा सो रहा था।

03:21

Speaker A

बच्चा इतना सुंदर था कि रानी उसे देखती रह गई।

03:25

Speaker A

राजा को रानी की बात पर भरोसा नहीं हुआ, उसने खुद देखा तो सच में हार की जगह बच्चा था।

03:33

Speaker A

राजा और रानी बहुत खुश हुए क्योंकि वे हमेशा संतान के बारे में सोचते रहते थे।

03:39

Speaker A

उन्होंने सोचा कि यह बच्चा भगवान ने दिया है और वे इसे अपना बच्चा मानकर पालेंगे।

03:46

Speaker A

कुछ दासियां उनकी बातें सुन रही थी।

03:49

Speaker A

रानी ने पूछा कि यह बच्चा किसने दिया है।

03:53

Speaker A

राजा ने बताया कि सपेरे एक नौलक्खा हार लेकर आए थे जो महल आते-आते सुंदर बच्चे में बदल गया।

04:00

Speaker A

उसी दिन से राजा और रानी उस बच्चे को अपने बेटे की तरह पालने लगे।

04:06

Speaker A

एक दिन राजा ने दरबार में घोषणा की कि रानी के गर्भ से एक सुंदर बेटे ने जन्म लिया है।

04:12

Speaker A

प्रजा में खुशी छा गई और पूरे नगर में उत्सव मनाया गया।

04:17

Speaker A

धीरे-धीरे वह लड़का बड़ा हुआ और जवान हो गया।

04:22

Speaker A

जब वह शादी के लायक हुआ तो राजा ने रानी से उसके विवाह की बात की, रानी भी इस बात से खुश थी।

04:29

Speaker A

राजा चित्रसेन के राज्य के पास एक और राज्य था जिसके राजा का नाम जयंत था।

04:35

Speaker A

उनकी एक बहुत सुंदर बेटी थी जिसका नाम बजंती था।

04:40

Speaker A

बजंती को राजा ने सभी विद्याओं का ज्ञान दिलाया था इसलिए वह 16 विद्याओं को जानती थी।

04:47

Speaker A

राजा जयंत भी अपनी बेटी का विवाह करना चाहते थे।

04:52

Speaker A

उन्होंने राजपुरोहित को बुलाकर अपनी बेटी के लिए योग्य वर ढूंढने के लिए भेजा।

04:58

Speaker A

पुरोहित कई राज्यों में घूमा लेकिन उसे बजंती के समान तेजस्वी राजकुमार नहीं मिला।

05:05

Speaker A

घूमते-घूमते वह राजा चित्रसेन के राज्य में पहुंचा।

05:09

Speaker A

राजा चित्रसेन के दरबार में पुरोहित का आगमन हुआ।

05:13

Speaker A

राजा समझ गए कि यह किसी राजा की बेटी का रिश्ता लेकर आए हैं।

05:18

Speaker A

पुरोहित ने बताया कि वह राजा जयंत का पुरोहित है और उनकी बेटी बजंती का टीका लेकर आया है।

05:25

Speaker A

उसने सुना था कि राजा चित्रसेन का राजकुमार भी विवाह के योग्य हो गया है।

05:31

Speaker A

राजा चित्रसेन ने अपने बेटे को पुरोहित को दिखाया।

05:35

Speaker A

पुरोहित राजकुमार को देखते ही खुश हो गया और बजंती का विवाह पक्का करके अपने राज्य लौट गया।

05:42

Speaker A

कुछ दिनों बाद जब विवाह का उचित समय आया तो राजा चित्रसेन अपने बेटे को दूल्हा बनाकर राजा जयंत के यहां बारात लेकर पहुंचे।

05:53

Speaker A

राजा जयंत ने उनका खूब स्वागत किया और अपनी बेटी का विवाह राजकुमार के साथ कर दिया।

06:00

Speaker A

विवाह के बाद राजा चित्रसेन अपनी राजधानी लौट आए।

06:04

Speaker A

धीरे-धीरे और समय बीता।

06:06

Speaker A

एक दिन रानी ने राजा से कहा कि अब उन्हें राज्य की बागडोर अपने बेटे को सौंप देनी चाहिए।

06:13

Speaker A

राजा चित्रसेन ने अपने बेटे को युवराज घोषित कर दिया।

06:17

Speaker A

राजकुमार बहुत अच्छे से राज्य चलाने लगा।

06:21

Speaker A

एक दिन राजकुमारी बजंती को उसकी दासी ने कहा कि वह राजकुमार से पूछे कि उसके माता-पिता कौन हैं।

06:29

Speaker A

दासी की बात सुनकर बजंती को आश्चर्य हुआ।

06:33

Speaker A

दासी ने कहा कि राजकुमार महाराज चित्रसेन के बेटे नहीं हैं।

06:38

Speaker A

राजकुमारी बजंती के मन में भी अपने पति को लेकर शक होने लगा।

06:43

Speaker A

उसने सोचा कि शाम को जब राजकुमार महल में आएंगे तो वह उनसे यह बात जरूर पूछेगी।

06:51

Speaker A

जब राजकुमार शाम को महल में आए तो बजंती ने उनसे पूछा कि उनके माता-पिता कौन हैं और वे किस राजवंश के हैं।

06:59

Speaker A

यह सुनकर राजकुमार का चेहरा काला पड़ गया।

07:03

Speaker A

उन्होंने कहा कि वह महाराज चित्रसेन के बेटे हैं।

07:06

Speaker A

लेकिन बजंती नहीं मानी और सच बताने को कहा, मां गंगा की कसम दी, राजकुमार धर्म संकट में पड़ गए।

07:12

Speaker A

उन्होंने सोचा कि किसी ने उसके मन में यह सवाल पैदा किया है।

07:19

Speaker A

राजकुमार ने अपनी पत्नी को बहुत समझाया कि वह महाराज का ही बेटा है लेकिन राजकुमारी जिद पर अड़ गई।

07:26

Speaker A

उसने कहा कि अगर वह नहीं बताएगा तो वह भोजन नहीं करेगी।

07:31

Speaker A

राजकुमार सोचने लगे कि उन्हें सब कुछ बताना ही पड़ेगा।

07:36

Speaker A

राजकुमार ने बार-बार अपनी पत्नी से कहा कि मान जाओ, अभी भी समय है, मुझसे यह बात मत पूछो वरना बहुत पछताओगी।

07:45

Speaker A

लेकिन राजकुमारी जिद्दी करके बैठ गई।

07:49

Speaker A

राजकुमार ने कहा कि अगर नहीं मानती हो तो ठीक है, हम कल महल से बाहर वन विहार के लिए चलेंगे और वहां चलकर मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगा।

07:59

Speaker A

अगले दिन राजकुमार और बजंती रथ में बैठकर वन विहार करने का बहाना करके महल से निकले और एक नदी के किनारे आ गए।

08:09

Speaker A

राजकुमारी बजंती ने पूछा कि वह उसे नदी के पास क्यों लाए हैं, क्या इस नदी से उनका कोई संबंध है।

08:16

Speaker A

राजकुमार ने फिर से कहा कि मान जाओ और मुझसे मेरे वंश के बारे में मत पूछो वरना तुम्हें बहुत पछताना पड़ेगा।

08:25

Speaker A

लेकिन राजकुमारी नहीं मानी।

08:27

Speaker A

राजकुमार ने नदी में उतरकर जल के बीच पहुंच गए और कहा कि रानी अभी भी समय है, तुम मुझसे यह बात मत पूछो, अभी कुछ नहीं बिगड़ा है।

08:37

Speaker A

लेकिन राजकुमारी ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, उन्हें इस भेद को उसके सामने रखना ही होगा।

08:44

Speaker A

अब राजकुमार और आगे बढ़े और जब पानी मुंह तक आ गया तब उन्होंने कहा कि रानी अभी तुम्हारे पास समय है, यह जानने की कोशिश मत करो कि मैं कौन हूं।

08:59

Speaker A

परंतु रानी नहीं मानी।

09:01

Speaker A

फिर राजकुमार ने अपना असली नाग का रूप धारण कर लिया और नदी के जल के ऊपर अपना फन दिखाने लगे।

09:09

Speaker A

और अपना फन दिखाने के बाद वे नदी के अंदर समा गए और फिर बाहर निकलकर नहीं आए।

09:15

Speaker A

राजकुमारी बजंती ने राजकुमार को खोजने की बहुत कोशिश की परंतु राजकुमार का कहीं पता नहीं चला।

09:23

Speaker A

जब काफी देर हो गई और राजकुमार नहीं लौटे तो राजकुमारी बजंती घबरा गई क्योंकि अब उनका पति नाग बनकर कहीं चला गया था।

09:33

Speaker A

बजंती ने वहां उसे खोजने का बहुत प्रयत्न किया लेकिन वह नहीं मिला।

09:39

Speaker A

थक हारकर वह अपने रथ के पास आ गई और सारथी से कहा कि रथ को महल की ओर ले चलो।

09:45

Speaker A

महल पहुंचकर उन्होंने महाराज को बताया कि उनका बेटा नदी में डूब गया है।

09:51

Speaker A

यह सब सुनकर राजा को बड़ा दुख हुआ।

09:55

Speaker A

राजा ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि जाओ नदी के जल को खंगाल डालो और राजकुमार की लाश को तलाश करो।

10:04

Speaker A

राजा के सैनिक रानी बजंती महाराज और महारानी के साथ उस नदी तट पर पहुंचे।

10:11

Speaker A

नदी में जगह-जगह जाल डलवाए गए लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

10:16

Speaker A

नदी में कई गोताखोरों ने राजकुमार की लाश को तलाश किया मगर कुछ हाथ नहीं लगा।

10:23

Speaker A

अब तो उदास होकर राजा और रानी और राजकुमारी बजंती वापस अपने महल को लौट आए।

10:30

Speaker A

राजा चित्रसेन वृद्ध हो चुके थे, ऊपर से बेटे का दुख उनके ऊपर आ गया था।

10:36

Speaker A

राजा के मन में तो यही था कि नदी में डूबकर उनका बेटा मर गया है।

10:41

Speaker A

महारानी बजंती भी बड़ी दुखी रहने लगी और मन में अपने आप को कोसने लगी कि उन्होंने राजकुमार के साथ बहुत बुरा किया है।

10:50

Speaker A

उनके कर्मों के कारण आज उनका पति उनसे दूर चला गया है, यदि वह उनसे उनके वंश के बारे में पूछने की जिद ना करती तो शायद उनका पति उनसे दूर नहीं जाता।

11:02

Speaker A

लेकिन जैसा कि राजपुरोहित ने बताया था कि राजकुमारी बजंती बड़ी विद्वान थी, 16 विद्याओं को जानती थी।

11:09

Speaker A

काफी सोच विचार के बाद उनको एक तरकीब सूझी।

11:14

Speaker A

राजकुमारी ने अपने पूरे नगर में यह घोषणा करवा दी कि कोई भी व्यक्ति उसे कोई नई बात सुनाएगा तो उसके बदले में उनको उचित इनाम दिया जाएगा, चाहे कोई आपबीती हो या फिर प्राचीन घटना से संबंधित कोई भी कहानी हो या कथा हो, कुछ भी जो कोई सुनाएगा उसको उचित इनाम दिया जाएगा।

11:35

Speaker A

रानी बजंती रोज कहानी सुनती थी, उनके पास कहानियां सुनाने वालों की भीड़ लगी रहती थी।

11:42

Speaker A

कोई रामायण की कहानी सुनाता तो कोई राजा का इतिहास।

11:47

Speaker A

राजकुमारी बजंती का बस यही काम था कि वह सुबह से शाम तक नई-नई कहानियां सुनती रहती थी।

11:54

Speaker A

ऐसे ही कुछ समय बीत गया।

11:57

Speaker A

एक दिन उसी राज्य का एक बूढ़ा आदमी पास के जंगल से गुजर रहा था।

12:02

Speaker A

जंगल पार करते-करते उसे रात हो गई तो उसने सोचा कि अब रात में आगे चलना ठीक नहीं है क्योंकि जंगल में खतरनाक जानवर भी मिल सकते हैं।

12:11

Speaker A

यही सोचकर बूढ़ा आदमी उस जंगल में एक पीपल के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया।

12:16

Speaker A

रात का समय था, बूढ़े आदमी को डर के मारे नींद नहीं आ रही थी।

12:22

Speaker A

जब रात के 12:00 बजे तो उसने देखा कि एक झाड़ू लगाने वाला आता है और पूरे जंगल में झाड़ू लगा देता है।

12:31

Speaker A

फिर एक पानी छिड़कने वाला आता है, वह हर जगह पानी छिड़क देता है।

12:36

Speaker A

उसके बाद वहां कुर्सियां लगनी शुरू हो जाती है।

12:39

Speaker A

फिर एक सिंहासन आता है।

12:41

Speaker A

बूढ़ा आदमी पीपल के पेड़ पर बैठा-बैठा यह सब देख रहा था।

12:46

Speaker A

उसने देखा कि वहां सभा होने लगती है।

12:50

Speaker A

वह बूढ़ा आदमी बहुत डर गया और सोचने लगा कि यह सब क्या हो रहा है और यह लोग कौन हैं, क्या आज यह उसे जिंदा छोड़ेंगे या नहीं।

13:00

Speaker A

वहां एक से बढ़कर एक अजीब मेहमान आने लगे।

13:03

Speaker A

वे अजीब इसलिए थे क्योंकि उनका आधा शरीर सांप का था और आधा इंसान का।

13:09

Speaker A

भयानक दिखने वाले नागों का दरबार सज रहा था।

13:13

Speaker A

जब सभी लोग आ गए तो वहां दो और सिंहासन थे और उन पर थोड़ी देर बाद नागों के राजा और उनके बेटे युवराज आकर बैठ गए।

13:22

Speaker A

पूरा दरबार उनका स्वागत करता है।

13:25

Speaker A

उनके बीच जो बातें होनी थी वह बातें हो रही थी लेकिन नागराज का बेटा चुपचाप गर्दन झुकाए बैठा था।

13:34

Speaker A

उस दरबार में राजकुमार की शादी को लेकर बातें चल रही थी।

13:38

Speaker A

जब राजकुमार की शादी का नाम आता है तो वह गर्दन ऊपर कर लेता है और बहुत उदास हो जाता है।

13:45

Speaker A

कुछ देर तक उनकी बातें चलती रहती है और इधर वह बूढ़ा आदमी उस पीपल के पेड़ पर बैठा उनकी बातें सुन रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि यहां किस बात की बात हो रही है और यह कौन लोग हैं।

13:54

Speaker A

उसे लगा कि आज वह उनसे जिंदा नहीं बचेगा, वह डर के मारे उस पेड़ की एक डाली पर चिपक कर लेटा रहा।

14:02

Speaker A

तीन-चार घंटे बाद दरबार खत्म हो जाता है।

14:06

Speaker A

सभी मेहमान वहां से जा चुके थे लेकिन नागराज और उनका बेटा उस पीपल के पेड़ की तरफ आ जाते हैं।

14:13

Speaker A

तब पीपल के पेड़ पर बैठा बूढ़ा आदमी सोचने लगता है कि यह उसकी तरफ ही आ रहे हैं और उसे लगा कि अब यह उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे।

14:22

Speaker A

क्योंकि उन्हें पता चल गया है कि वह इस पेड़ पर बैठा है।

14:27

Speaker A

यह सोचकर वह बूढ़ा आदमी डर जाता है।

14:30

Speaker A

लेकिन नागपुत्र राजकुमार उस पीपल की जड़ों में बैठकर रोने लगता है और अपनी रानी बजंती को याद करता है।

14:38

Speaker A

यह सब बातें वह बूढ़ा आदमी सुन रहा था और मन में सोचता है कि यह तो बड़ा चमत्कार हो गया है, वह क्या देख रहा है।

14:46

Speaker A

और कुछ देर रोने के बाद हाय बजंती, हाय बजंती कहते हुए वह नाग वहां से चला जाता है।

14:54

Speaker A

धीरे-धीरे सुबह होने लगती है।

14:56

Speaker A

जब सुबह हुई तो वह बूढ़ा आदमी उस पेड़ के नीचे उतरता है और नीचे उतरने के बाद वापस अपने शहर लौट आता है।

15:05

Speaker A

और मन में सोचने लगता है कि वैसे भी वह बहुत करीब है और रानी बजंती भी नई-नई कहानियां सुनती रहती है तो क्यों ना चलकर यह बात महारानी बजंती को सुनाई जाए।

15:17

Speaker A

इसके बदले में महारानी उसे बहुत सारा पैसा देंगी और वह अमीर हो जाएगा ऐसा सोचकर वह बूढ़ा आदमी उसी जगह पहुंच जाता है।

15:29

Speaker A

जहां रानी बजंती का मंडप लगा हुआ था जहां रानी बजंती रोज कहानियां सुना करती थी।

15:39

Speaker A

वहां एक से बढ़कर एक बड़े विद्वान रानी को कहानी सुना रहे थे।

15:44

Speaker A

कुछ घंटे इंतजार करने के बाद उस बूढ़े आदमी का कहानी सुनाने का नंबर आता है।

15:50

Speaker A

वह महारानी बजंती से कहने लगता है कि महारानी आज उसने बड़ा अजीब नजारा देखा है।

15:58

Speaker A

आज वह उसे आंखों देखी घटना सुनाएगा।

16:00

Speaker A

रात में जब वह जंगल से गुजर रहा था तो रात होने की वजह से वह उस जंगल में फंस जाता है।

16:07

Speaker A

रात होने की वजह से वह वहीं रुकना ठीक समझता है और उसी जंगल में एक पेड़ पर चढ़कर बैठ जाता है।

16:15

Speaker A

वह सुबह होने का इंतजार करने लगता है तब वह वहां देखता है कि वहां एक नागराज का दरबार लगता है।

16:22

Speaker A

उन सब का आधा शरीर इंसान का था और आधा शरीर नाग का।

16:27

Speaker A

ऐसे अजीब प्राणी उस दरबार में आए थे।

16:30

Speaker A

कुछ देर तो उसे लगा कि यह लोग उसे मार डालेंगे लेकिन वह उस समय पीपल के पेड़ पर चिपका हुआ चुपचाप बैठा रहता है।

16:39

Speaker A

और जब दरबार खत्म होता है तो वहां से नागों के राजा का बेटा एक सुंदर रथ में बैठकर जिस पीपल के पेड़ पर वह बैठा था उसी पेड़ की ओर आता है।

16:50

Speaker A

वह उस रथ से नीचे उतरता है और पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर कुछ देर हाय बजंती, हाय बजंती कहकर रोता रहता है।

16:59

Speaker A

उसके बाद वहीं से गायब हो जाता है।

17:02

Speaker A

अब यह बात जब राजकुमार बजंती सुनती है तो उस बूढ़े आदमी से कहने लगती है कि बाबा मैं तुम्हें इतना धन दूंगी कि तुम्हारी कई पीढ़ियां बैठी-बैठी खा सकती है।

17:15

Speaker A

लेकिन तुम मुझे उस जगह पर लेकर चलो जहां तुमने राजकुमार को रोते हुए देखा था।

17:22

Speaker A

यह बात सुनकर बूढ़ा आदमी डर जाता है और कहता है राजकुमारी अब मैं वहां नहीं जाऊंगा, वहां जाने से मुझे बहुत डर लग रहा है।

17:30

Speaker A

तब राजकुमारी कहती है कि नहीं बाबा तुम चिंता मत करो तुम्हें मेरे साथ वहां चलना ही पड़ेगा।

17:37

Speaker A

इतना कहकर रानी बजंती ने एक सोने की मोहरों से भरी थैली उस बूढ़े आदमी को दी और कहती है कि मैं तुम्हें और भी सोने की मोहर दूंगी, तुम मुझे उस जगह पर पहुंचा दो।

17:50

Speaker A

बूढ़ा आदमी रानी द्वारा दी गई सोने की मोहरों को देखकर खुश हो जाता है और वह राजकुमारी बजंती को लेकर उस जंगल की तरफ चल देता है।

18:00

Speaker A

और कुछ समय बाद उसी जगह पर जाकर बूढ़ा आदमी कहता है कि राजकुमारी मैंने इसी पीपल के पेड़ के ऊपर बैठकर सब कुछ देखा था।

18:10

Speaker A

तब राजकुमारी कहती है तो बाबा मैं भी आज उन्हें अपनी आंखों से देखना चाहती हूं।

18:15

Speaker A

इस प्रकार वह बूढ़ा आदमी और रानी बजंती उस पेड़ के ऊपर चढ़कर बैठ जाते हैं और वे इंतजार करते हैं।

18:23

Speaker A

दोस्तों उस दरबार का इंतजार करते-करते पूरी रात निकल जाती है लेकिन वहां पर कोई नहीं आता है।

18:30

Speaker A

उस रात ना तो कोई दरबार सजता है और ना कोई नाग आता है।

18:35

Speaker A

अब रानी बजंती उस बूढ़े आदमी पर गुस्सा हो जाती है और कहती है बाबा तुमने झूठ बोला है और इसके लिए मैं तुम्हें कड़ी से कड़ी सजा दे सकती हूं।

18:46

Speaker A

तब वह बूढ़ा आदमी कहता है नहीं महारानी मैंने कोई झूठ नहीं बोला है।

18:51

Speaker A

मैंने जो अपनी आंखों से देखा था वही आपको बताया है तब रानी बोलती है तो फिर आज क्या हुआ।

18:59

Speaker A

तब बूढ़े आदमी ने कहा यह मैं भी नहीं जानता कि वे लोग आज क्यों नहीं आए।

19:05

Speaker A

दोस्तों रानी बजंती निराश होकर अपने महल लौट आती है।

19:10

Speaker A

इधर वह बूढ़ा आदमी मन ही मन परेशान रहने लगता है कि वह रानी के सामने झूठा पड़ गया है।

19:17

Speaker A

वह बूढ़ा आदमी सोचने लगता है कि उस दिन कौन सी तिथि थी जिस दिन उस जंगल में दरबार लगा था।

19:25

Speaker A

उसने यह बात ज्योतिषियों से पूछा।

19:29

Speaker A

तब ज्योतिषियों ने बताया कि उस दिन पूर्णिमा थी, चांद पूरी तरह से उगा हुआ था और ऐसे मौथे पर देवताओं की सेवा कुछ जगहों पर होती है।

19:39

Speaker A

हो सकता है तुमने उस सेवा को देख लिया हो।

19:42

Speaker A

अब तो वह बूढ़ा आदमी सोचने लगता है कि अगली पूर्णिमा आएगी तब वह रानी को लेकर वहां जाएगा।

19:50

Speaker A

महारानी भी उस बूढ़े आदमी से कहती है कि अगर तुम मुझे वह नजारा दिखा दोगे तो मैं तुम्हें बहुत बड़ा इनाम दूंगी।

19:59

Speaker A

इधर धीरे-धीरे समय बीतता है और जब अगली पूर्णिमा की रात आती है तो वह बूढ़ा आदमी महल में पहुंचता है।

20:05

Speaker A

और महारानी से कहता है कि महारानी आज आपको मेरे साथ उस जंगल में चलना पड़ेगा, आज मैं आपको वह नजारा दिखाऊंगा।

20:16

Speaker A

दोस्तों महारानी बजंती और वह बूढ़ा आदमी दोनों जंगल की ओर चल देते हैं।

20:22

Speaker A

वहां पहुंचकर रानी बजंती और वह बूढ़ा आदमी उस पीपल की जड़ों में छुपकर बैठ जाते हैं।

20:29

Speaker A

जब रात के 12:00 बजने का समय नजदीक आता है तो वहां एक झाड़ू लगाने वाला आता है।

20:35

Speaker A

वह झाड़ू लगाता है।

20:36

Speaker A

पानी छिड़कने वाला आता है, वह पानी का छिड़काव करता है।

20:41

Speaker A

थोड़ी देर बाद दरबार सजने लगता है।

20:43

Speaker A

धीरे-धीरे वहां नाग लोग आने लगते हैं।

20:47

Speaker A

नागों का आधा शरीर इंसान का था और आधा शरीर नाग का।

20:51

Speaker A

बूढ़े आदमी इशारे से कहता है कि महारानी अब आप ध्यान से देख लो यही सब मैंने उस दिन देखा था।

20:57

Speaker A

दोस्तों रानी बजंती उस नजारे को बड़े ध्यान से देख रही थी और कुछ समय बाद रानी का पति भी आ जाता है जो उस नागराज का बेटा था।

21:09

Speaker A

उसका आधा शरीर नाग का था और आधा इंसान का।

21:15

Speaker A

महारानी उसे देखते ही पहचान जाती है और कहने लगती है कि यही मेरा पति है।

21:20

Speaker A

महारानी सोचने लगती है कि अब वह उसे कैसे पा सकती है।

21:25

Speaker A

महारानी हिम्मत करके धीरे-धीरे उस पेड़ की खोखल से बाहर निकलने लगती है।

21:31

Speaker A

उधर वह बूढ़ा आदमी डर जाता है और बूढ़ा आदमी राजकुमारी से कहता है कि राजकुमारी आप थोड़ी देर इंतजार कीजिए।

21:40

Speaker A

तीन-चार घंटे तक वह सभा चलती रहती है।

21:44

Speaker A

जब सभा खत्म होने का समय होता है तो सभी नाग वहां से चले जाते हैं।

21:49

Speaker A

राजकुमार भी उस पीपल के पेड़ के पास आकर बैठकर रोने लगता है।

21:54

Speaker A

उसे देखकर रानी बजंती डर जाती है क्योंकि उसका आधा शरीर नाग का था और आधा इंसान का।

22:01

Speaker A

अपने पति को रोता देखकर राजकुमारी से रुका नहीं जाता है और राजकुमारी बजंती जड़ों से निकलकर उसके पास आ जाती है और उसका हाथ पकड़ लेती है।

22:10

Speaker A

अचानक से महारानी बजंती के सामने खड़ा देखा तो राजकुमार एकदम से डर जाता है और कहने लगता है रानी तुम।

22:21

Speaker A

तब रानी कहने लगती है कि मैंने तुम्हें खोजने के लिए क्या-क्या नहीं किया है लेकिन अब मैं तुम्हें कहीं भी नहीं जाने दूंगी।

22:30

Speaker A

यह सुनकर राजकुमार कहने लगता है नहीं रानी बहुत समय हो चुका है अब तुम मुझे पा नहीं सकती हो।

22:36

Speaker A

यहां जो सभा होती है वह मेरे विवाह को लेकर ही होती है।

22:41

Speaker A

मेरे पिता इस सभा में मेरे विवाह का प्रस्ताव रख चुके हैं और जब तीसरी सभा होगी तब तो मेरा विवाह तय हो जाएगा और जब मेरा विवाह तय हो जाएगा तो बताओ मैं तुम्हारे साथ कैसे रह सकता हूं।

22:54

Speaker A

मुझे तो अपनी इस पत्नी के साथ रहना पड़ेगा।

22:59

Speaker A

तुमने तो मुझे त्याग दिया है।

23:02

Speaker A

मैंने उस दिन तुम्हें बार-बार समझाया था कि मुझसे मेरा वंश मत पूछो तब राजकुमार की बात सुनकर रानी बजंती रोने लगती है और बार-बार अपनी गलती की माफी मांगती है।

23:11

Speaker A

तब दोस्तों राजकुमार कहता है राजकुमारी रोने का समय नहीं है मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूं।

23:19

Speaker A

यदि तुमने वह उपाय कर लिया तो शायद हमारा मिलन हो सकता है तब रानी बजंती बोलती है कि तुम मुझे जो उपाय बताओगे मैं वही उपाय करूंगी लेकिन तुम्हें मेरे साथ रहना होगा।

23:32

Speaker A

तब राजकुमार बोलता है रानी अब मेरे जाने का समय हो गया है मुझे मेरे पिता के दरबार में पहुंचना है लेकिन अगली पूर्णिमा के दिन तुम्हें इसी प्रकार यहां आकर के बैठना पड़ेगा और जब यहां सभा लगने लगे तो ध्यान रखना।

23:49

Speaker A

तुम चुपचाप महाराज के सिंहासन के नीचे आकर छुप जाना और जब मेरे विवाह की बात चले तो तुम उस सिंहासन से नीचे से निकलकर महाराज के सामने जाकर खड़ी होकर तुम मुझे महाराज से मांग लेना।

24:00

Speaker A

अगर महाराज बात मान लेते हैं तो मैं तुम्हें मिल जाऊंगा।

24:04

Speaker A

इतना कहकर वह नाग वहां से गायब हो जाता है।

24:07

Speaker A

इधर महारानी बजंती और वह बूढ़ा आदमी अपने शहर लौट आते हैं।

24:12

Speaker A

तब से रानी राजकुमार को पा पाएंगी या नहीं इस बात को लेकर दुखी रहने लगती है।

24:19

Speaker A

इधर राजा चित्रसेन भी अपने बेटे के धम में दिन-रात दुखी रहते हैं।

24:25

Speaker A

धीरे-धीरे समय निकल जाता है।

24:27

Speaker A

इधर महारानी सोच रही थी कि अब चाहे कुछ भी हो जाए अगली पूर्णिमा के दिन वह अपने पति को पाकर ही रहेंगी।

24:35

Speaker A

यह सोचकर अब रानी कहानियां सुनना भी बंद कर देती है।

24:39

Speaker A

धीरे-धीरे समय बीतता जाता है।

24:42

Speaker A

जब तीसरी पूर्णिमा नजदीक आती है तो रानी मन में विचार कर रही थी कि आज चाहे कुछ भी हो जाए वह अपने पति को लेकर ही लौटेंगी।

24:50

Speaker A

वह बूढ़े आदमी को लेकर उस पीपल के पेड़ के पास पहुंच जाती है वहां दोनों उस पीपल की जड़ में छुपकर बैठ जाते हैं और सभा लगने का इंतजार करने लगते हैं।

25:05

Speaker A

इधर रात के 12:00 बजते ही दरबार की तैयारी शुरू हो जाती है।

25:10

Speaker A

कुर्सियां लगती है और राजा का सिंहासन आता है।

25:13

Speaker A

इधर रानी उस पीपल की खोखल से निकलकर उस सिंहासन के नीचे छुप जाती है।

25:19

Speaker A

बड़े ही विशाल शरीर वाले नाग वहां आकर के बैठने लगते हैं कुछ देर के बाद राजकुमार का पिता जो नागों का राजा था वह भी आ जाता है।

25:26

Speaker A

राजकुमार भी वहीं आकर बैठ जाता है।

25:30

Speaker A

दरबार शुरू होता है उनमें आपस में बातें होने लगती है।

25:34

Speaker A

कुछ समय के बाद राजकुमार के विवाह की बात शुरू होती है।

25:41

Speaker A

अब राजकुमार के विवाह की जब बात चली तो राजकुमारी बजंती मोठा पाते ही सिंहासन के नीचे से निकलकर राजा के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती है।

25:51

Speaker A

अचानक से एक स्त्री को वहां पर आया देखकर सारी सभा घबरा जाती है।

25:57

Speaker A

तब नागराज बोलता है तुम कौन हो और यहां इस सुनसान जंगल में आधी रात के समय तुम यहां क्यों आए हो।

26:05

Speaker A

क्या तुम्हें मौत का डर भी नहीं लगता है हम नाग हैं और नाग लोग कितने जहरीले होते हैं यह तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।

26:14

Speaker A

यह बात सुनकर बजंती कहने लगती है कि महाराज मुझे डर किस बात का मैं तो आपकी पुत्रवधू हूं।

26:21

Speaker A

राजकुमार मेरे पति हैं और आप ना मानो तो उनसे ही पूछ लो इनके साथ मेरा विवाह हुआ है।

26:28

Speaker A

जब महाराज अपने राजकुमार से पूछते हैं कि राजकुमार यह कौन है।

26:33

Speaker A

तो राजकुमार पूरी कहानी अपने पिता को सुनाता है और कहता है पिताजी एक दिन मुझे कुछ सपेरों ने पकड़ लिया था और पकड़कर पिटारे में रखकर मुझे ले जाने लगे।

26:45

Speaker A

तो मैंने उनसे बचने के लिए उस पिटारे के अंदर नौलखा हार का रूप धारण कर लिया था।

26:52

Speaker A

उन सपेरों ने नौलखा हार महाराज चित्रसेन के यहां दे दिया।

26:57

Speaker A

मैंने सोचा राजा चित्रसेन को कोई बेटा नहीं है, राजा की कोई संतान नहीं है तो क्यों ना राजा के यहां मैं बेटा बन जाता हूं।

27:06

Speaker A

तो वह अपनी माया से बेटा बन जाता है और कई साल महाराज के राज महलों का सुख भोगता रहता है।

27:13

Speaker A

महाराज अपने बेटे की तरह उसका पालन पोषण करते हैं और इसी सुंदरी के साथ उसका विवाह करवा देते हैं।

27:21

Speaker A

लेकिन एक दिन जिद करके इस सुंदरी ने मुझसे मेरे वंश के बारे में पूछा कि तुम किस वंश के हो मैंने इसे बहुत समझाया लेकिन यह नहीं मानती है।

27:30

Speaker A

और जब यह नहीं मानती है तो जहां मेरा स्थान था वहां इसे लेकर जाता हूं और वहां पहुंचकर मैं अपने असली रूप में आ जाता हूं और मैं अपने परिवार के पास चला आता हूं।

27:43

Speaker A

यह बात महाराज जब सुनते हैं तो नागराज कहने लगते हैं कि देवी क्या यह सच कह रहा है।

27:51

Speaker A

तब राजकुमारी बजंती कहती है।

27:55

Speaker A

हां महाराज ऐसा ही हुआ था मेरा विवाह इन्हीं के साथ हुआ था जबकि पहले इनका पूरा शरीर इंसान का था।

28:02

Speaker A

बजंती की बात सुनकर नागराज अपने बेटे को डांटते हैं।

28:06

Speaker A

पहले तो तुमने हमारी परंपरा के खिलाफ जाकर जमीन पर शादी की है और फिर उसके बाद तुम इस स्त्री को छोड़कर हमारे पास वापस आए हो तुमने यह अपराध किया है।

28:20

Speaker A

अब मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि जब तक यह स्त्री जिंदा रहेगी तब तक तुम जमीन पर रहकर इनका साथ दोगे।

28:30

Speaker A

इसे छोड़कर नहीं जा सकते।

28:33

Speaker A

इसे अपनी पत्नी के रूप में रखना होगा और जिस राजा के तुम बेटे बने थे उस राजा का राज्य भी तुम्हें चलाना होगा।

28:46

Speaker A

उस राजा की सेवा करनी पड़ेगी जब तक वहां का काम खत्म नहीं हो जाता है तब तक तुम हमारे साथ हमारे नागलोक में नहीं लौट पाओगे।

28:53

Speaker A

अब तुम्हारा विवाह नहीं होगा।

28:56

Speaker A

दोस्तों नागराज ने यह श्राप देकर बजंती को उसका पति दे दिया राजकुमार अब अपने पहले वाले रूप में आ जाता है उसके बाद रानी बजंती और राजकुमार नागराज से सर झुकाकर आशीर्वाद लेते हैं और अपनी पत्नी के साथ विदा लेकर वहां से राज महल की ओर चले आते हैं।

29:09

Speaker A

राजकुमार अपनी नगरी में आता है तो वहां पहुंचकर वह देखता है कि बेटे के धम में परेशान होकर महाराज की हालत बहुत ही ज्यादा खराब हो चुकी थी।

29:20

Speaker A

जब राजकुमार महाराज के पास पहुंचा तो महाराज अपने बेटे को देख बहुत ही खुश हो जाते हैं।

29:26

Speaker A

उन्हें ऐसा लगने लगता है जैसे सारी बीमारियों ने उनका पीछा छोड़ दिया हो।

29:32

Speaker A

पूरे राजमहल में खुशियां मनाई जाती है।

29:36

Speaker A

राजा साहब पूरे शहर में यह खबर भिजवा देते हैं कि उनका राजकुमार वापस लौट आया है।

29:44

Speaker A

यह सुनकर पूरे शहर में खुशी से उत्सव मनाया जाता है और राजा चित्रसेन और उनकी महारानी अपने बेटे को पाकर बहुत खुश होते हैं।

29:53

Speaker A

तो दोस्तों इस प्रकार से रानी बजंती अपने खोए हुए पति को ढूंढ लेती है और बड़े प्यार के साथ अपने पति के साथ रहती है।

30:01

Speaker A

दोस्तों इस कहानी से यही नतीजा निकलता है कि चाहे कितनी ही पतिव्रता स्त्री हो अगर उसकी जिस जिद से आपके मान-सम्मान या पारिवारिक रिश्ते में दरार आए तो वह जिद उसकी कभी पूरी नहीं करनी चाहिए।

30:16

Speaker A

तो दोस्तों हमारा वीडियो आपको कैसा लगा अगर आपको ऐसे ही वीडियो पसंद है तो हमारे वीडियो को लाइक कमेंट शेयर और चैनल को सब्सक्राइब कर लें वीडियो देखने के लिए धन्यवाद।

Topics: नाग की कहानी नौलख्खा हार राजकुमार की पहेली हिंदी रहस्य कहानी राजा चित्रसेन राजकुमारी बजंती लोककथा सपेरा और नाग भारतीय मिथक परिवार और राजशाही

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