**From Musa to Hussain: The Untold Story of Ashura — Transcript & Summary | SozAI**
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मुहर्रम और कर्बला की कहानी, इमाम हुसैन की शहादत और इस्लामी इतिहास में उनका महत्व।

## Key Takeaways

- मुहर्रम की शुरुआत कर्बला से पहले मूसा के समय से जुड़ी है।
- खलीफा का चुनाव अब खानदानी आधार पर होने लगा था, जो इस्लामिक सिद्धांतों के खिलाफ था।
- इमाम हुसैन ने अन्याय और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और शहादत दी।
- कर्बला की घटना इस्लामी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।
- मुहर्रम आज भी मुसलमानों के लिए एक यादगार और धार्मिक महत्त्वपूर्ण महीना है।

## What the video covers

- मुहर्रम और कर्बला की घटना इमाम हुसैन रदी अल्लाहु अनू की शहादत से जुड़ी है।
- शिया मुसलमान इस दिन मातम मनाते हैं जबकि सुन्नी मुसलमान रोज़ा रखते हैं।
- मुहर्रम की शुरुआत कर्बला से नहीं बल्कि मूसा अलैहिस्सलाम के समय से जुड़ी है।
- खलीफा मुआविया ने अपने बेटे यज़ीद को उत्तराधिकारी घोषित किया, जो इस्लामिक परंपरा के खिलाफ था।
- इमाम हुसैन ने यज़ीद की खिलाफत को स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
- कुफा के लोग इमाम हुसैन को समर्थन देने के लिए खत लिखते हैं, लेकिन बाद में यज़ीद के दबाव में उनके खिलाफ हो जाते हैं।
- कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को यज़ीद की फौज ने घेर लिया और शहीद कर दिया।
- इमाम हुसैन की शहादत ने इस्लामी खिलाफत को खानदानी बादशाहत में बदल दिया।
- मुहर्रम का महत्व आज भी मुसलमानों के लिए गहरा है और इसे याद करके मातम मनाया जाता है।
- वीडियो में इस्लामी इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं और मुहर्रम के धार्मिक और सामाजिक प्रभावों को विस्तार से बताया गया है।

## Chapters

1. 00:00 मुहर्रम और कर्बला की शुरुआत
2. 01:54 मुआविया और यज़ीद की खिलाफत
3. 03:26 इमाम हुसैन का यज़ीद की खिलाफत से इंकार
4. 04:49 कुफा के लोगों के खत और इमाम हुसैन का जवाब
5. 06:27 कर्बला का युद्ध और शहादत
6. 10:49 मुहर्रम का धार्मिक और सामाजिक महत्व
7. 12:25 इस्लामी इतिहास में मुहर्रम का प्रभाव
8. 13:50 मूसा और मुहर्रम का संबंध

Answers

## Questions about this video

मुहर्रम और कर्बला का क्या महत्व है?

मुहर्रम का महीना इस्लाम में पाक माना जाता है और कर्बला की घटना इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ी है, जो अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है।

इमाम हुसैन ने यज़ीद की खिलाफत क्यों नहीं मानी?

इमाम हुसैन ने यज़ीद की खिलाफत को इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ और अन्यायपूर्ण माना, इसलिए उन्होंने उसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

मुहर्रम के दौरान शिया और सुन्नी मुसलमान कैसे अलग-अलग इबादत करते हैं?

शिया मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत को याद करके मातम मनाते हैं जबकि सुन्नी मुसलमान इस महीने में रोज़ा रखते हैं और सादगी से इबादत करते हैं।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01

Speaker A

मुहर्रम और कर्बला। अल्लाहु अकबर। ये लफ्ज़ सुनते ही इमाम हुसैन रदी अल्लाह अनू की शहादत याद आती है। जिसके दर्द को याद करके आज भी हजारों शिया मुसलमान मातम मनाते हैं। अपना खून बहाते हैं। अपना सीना पीटते हैं।

00:19

Speaker A

[संगीत] और दूसरी तरफ सुन्नी मुसलमान हैं जो इस महीने में रोज़ रखते हैं, इबादत करते हैं। हजरत इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनो की कुर्बानी को याद करके इस महीने को बड़ी सादगी के साथ गुजारते हैं। शिया और सुन्नी

00:40

Speaker A

दोनों ही मुहर्रम के महीने को मनाते हैं। लेकिन दोनों का मुहर्रम मनाने का तरीका बिल्कुल अलग है। इमाम हुसैन के नाम से [गाना गाने की आवाज़] ये मुहर्रम महकता [संगीत] है। अगर मैं आपसे कहूं कि मुहर्रम की शुरुआत

00:57

Speaker A

कर्बला के मैदान से नहीं हुई। हजरत हुसैन रदी अल्लाह अनो की शहादत से नहीं हुई [संगीत] बल्कि इसकी हकीकत हजारों साल पुरानी है। जुड़ी इससे मूसा [गाना गाने की आवाज़] की भी जिंदगी है। और इस हकीकत को समझने के लिए हमें 1400

01:16

Speaker A

साल पुराने डेमस्कस में जाना होगा। डमस्कस साल 680 सीई प्रॉफेट मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के गुजरने [संगीत] के 50 साल बाद। मुसलमानों के खलीफा मुआविया रजिअल्लाहु अनो अब नहीं रहे। जल्द से जल्द सारी इस्लामी रियासतों में पैगाम पहुंचा दो।

01:37

Speaker A

जी बिल्कुल। खलीफा की तदवीन जोहर की नमाज के फौरन बाद की जाएगी। डेमस्कस की मस्जिदों में जोहर के वक्त जनाजे का ऐलान हो गया था। अल्लाहु अकबर। लोगों ने जनाजे की नमाज़ भी पढ़ ली। लेकिन हर आम और खास इंसान जानता था कि हजरत

01:54

Speaker A

मुआविया रज़ अल्लाहु अनो ने अपने इंतकाल से सालों पहले ही खलीफा चुने जाने के तरीके में एक बहुत बड़ा बदलाव कर दिया [संगीत] था। उन्होंने अपनी जिंदगी में ही पूरे एंपायर से अपने बेटे यज़ीद के हक में बैत ले ली थी। यानी लोगों को बता दिया था

02:10

Speaker A

कि इस्लाम का [संगीत] अगला खलीफा मेरा बेटा यज़ीद होगा। इस्लामिक हिस्ट्री में पहली बार खिलाफत का फैसला ईमान और उसूलों की बुनियाद पर नहीं बल्कि खून और खानदान की बुनियाद पर हो रहा था। इसे अंग्रेजी में हेरिडिटी सक्सेशन कहते हैं। यानी राजा

02:25

Speaker A

का बेटा राजा बनेगा और रंग का बेटा रंग। यज़ीद एक ऐसा शख्स था जिसका मकसद इस्लामिक एंपायर को आगे फैलाना नहीं था। बल्कि उसका मकसद था अपनी पावर को, अपने दबदबे को कायम रखना। और जब यज़ीद के खलीफा बनने का ऐलान

02:40

Speaker A

सारे इस्लामिक स्टेट्स में हुआ तब एक हंगामा फैल गया। मक्का से लेकर मदीना तक, शाम से लेकर इराक तक लोगों में खलबली होने लगी। ऐ लोगों सुनो, आज से मुसलमानों के नए खलीफा हजरत मुआविया के बेटे यज़ीद होंगे।

02:56

Speaker A

ये क्या बात हुई? इस्लाम हमें इसकी इजाजत नहीं देता। यह सरासर गलत है। ये रसूल्लाह का तरीका नहीं है। क्या हुसैन को इसकी खबर है? दीन का मजाक बना दिया है। हद हो गई। मेरा ख्याल है हमें इमाम हुसैन के जवाब का इंतजार करना

03:10

Speaker A

चाहिए। ठीक कहते हो। उसके बाद ही कुछ कहना ठीक होगा। इमाम हुसैन रदी अल्लाह अनू को जब यज़ीद के खलीफा बनने की खबर मिली तब उन्होंने यज़ीद को खलीफा मानने से सिरे से इंकार कर [संगीत] दिया। इमाम हुसैन इस्लाम के चौथे

03:26

Speaker A

खलीफा हजरत अली रदी अल्लाहहु अनो के छोटे बेटे थे। यह वही हुसैन थे जिनके बारे में आपने फरमाया कि हसन और हुसैन इस दुनिया में मेरे दो महकते फूल हैं। यह वही हुसैन थे जिनके वजूद में आप सल्लल्लाह अलैहि वहि

03:40

Speaker A

वसल्लम की झलक दिखती थी। यह वही हुसैन थे जिन्होंने कभी किसी के साथ नाइंसाफी नहीं की और ना किसी पर जुल्म होते देखकर खामोश रहे। और इसीलिए उन्होंने यज़ीद की खिलाफत को सिरे से नकार दिया मना कर दिया। इमाम

03:54

Speaker A

हुसैन रदी अल्लाह अनू के इंकार से पूरे अरेबियन पेनसुला में सारी इस्लामिक स्टेट्स के अंदर एक खलबली मच गई। क्या यज़ीद वाकई खलीफा बनने के लायक है?

04:04

Speaker A

मैं उसे अपना खलीफा नहीं मानता। आपके मानने या ना मानने से कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर कुर्सी प्यारी है तो यज़ीद का साथ दीजिए। [संगीत] हुसैन तो पैगंबर के नवासे हैं। अगर वो इंकार कर रहे हैं तो फिर हम यज़ीद को अपना

04:19

Speaker A

खलीफा कैसे मान सकते हैं? बात तो आपकी ठीक है। हुसैन की रगों में हक और नबी-ए पाक का खून शामिल है। उनकी बात को यूं नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यज़ीद ने लाखों कोशिशें की कि किसी सूरते हाल इमाम हुसैन किसी तरह से यज़ीद को अपना

04:35

Speaker A

खलीफा मान लें ताकि इस्लामिक एंपायर के अंदर ये जो खलबली मची हुई है उसे कंट्रोल किया जा सके। लेकिन इमाम हुसैन अपनी बात से टस से मस ना हुए। और इसी बीच कुफा के एलिट्स ने ऊंचे ओहदों पर बैठे हुए लोगों ने

04:49

Speaker A

इमाम हुसैन को खत लिखना शुरू कर दिए। इन ताकतवर लोगों ने अपने खतों में लिखा कि ए हुसैन हमारे पास कोई इमाम नहीं। यज़ीद का जुल्म खत से पार हो गया है। इस्लाम के जिन उसूलों पर रियासत बनाई गई थी। यज़ीद

05:02

Speaker A

[संगीत] उन्हीं उसूलों को तोड़ रहा है। हम काफी वक्त से आपको खत लिख रहे हैं। आप पैगंबर इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हैं। हमें आपकी जरूरत है। इस्लाम को आपकी जरूरत है। अगर आप ही हब का परचम

05:16

Speaker A

नहीं उठाएंगे तो फिर आम लोग हब के लिए आवाज कैसे उठाएंगे? हम आपके साथ हैं आपके वफादार। इमाम हुसैन [संगीत] ने इन खतों को हुज्जत तमाम माना। यानी के फाइनल आर्गुमेंट माना। इमाम हुसैन को लगा कि अगर वह इन खतों का

05:32

Speaker A

जवाब ना दें या फिर इन लोगों के पास वापस कुफा लौट कर ना जाएं तो लोग कहेंगे कि हमने तो आपको बुलाया था लेकिन इमाम आप ही नहीं आए। और फिर इसके बाद इमाम हुसैन ने अपने कुछ साथियों को लेकर गुफा का सफर

05:46

Speaker A

शुरू कर दिया। इधर यज़ीद के हुकुम पर कुफा के गवर्नर उबैदुल्लाह इबने जियाद ने प्रोपेगेंडा चलाया कि हुसैन बागी हो चुके हैं और मुसलमानी हुकूमत के लिए एक फितना बन चुके हैं। [संगीत] यज़ीद ने खत लिखने वालों को धमकाया और ऐलान

06:11

Speaker A

किया। यज़ीद को खलीफा ना मानने वालों को उनके ओहदों से बर्खास्त कर दिया जाएगा। उन सबका हुक्का पानी बंद कर दिया जाएगा। और रियासत गद्दारी के इल्जाम में उनकी सारी जायदाद पर कब्जा कर लेगी। यह खत पढ़ा आपने? मुझे यज़ीद के हाथों

06:27

Speaker A

गर्दन कटाने का शौक नहीं है। लेकिन हम इमाम हुसैन को क्या जवाब देंगे? यह एक अहम सवाल है। अल्लाह से दुआ कीजिए। [संगीत] वो सब देखने वाला है। फिलहाल आप कोई खत ना लिखिए। [संगीत] ये आप क्या कह रहे हैं? हम इमाम हुसैन का

06:51

Speaker A

रास्ता रोके। उनसे जंग करें। उनका खून बहाएं। वो रसूल्लाह के नवासे हैं। शेर खुदा अली के बेटे हैं। यज़ीद का हुक्म यानी रियासत का हुक्म। जाइए इमाम को कुफा में दाखिल होने से रोकिए। या तो आप हमारे साथ

07:06

Speaker A

हैं या हमारे खिलाफ। डर और लालच के चलते यज़ीद के हुकुम की तामील हुई। इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनहु को कुफा पहुंचने से पहले ही कर्बला के मैदान में यज़ीद की फौज ने घेर लिया। ये अपने आप में कितना बड़ा धोखा था कि जो

07:30

Speaker A

लोग कल तक खत लिख रहे थे, इमाम हुसैन को बुला रहे थे, आज वही लोग यज़ीद की फौज में तलवारें लेकर इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनू के खिलाफ खड़े थे। यह लोग यज़ीद का साथ दे रहे थे सिर्फ इस

07:44

Speaker A

[संगीत] डर से कि कहीं यज़ीद उन्हें भी कत्ल ना कर दे। कहीं उनसे उनकी पोजीशन उनकी पावर को ना छीन ले। किताबों में यह बात मेंशन है कि इमाम [संगीत] हुसैन रदी अल्लाहहु अनू के साथ तकरीबन 72 मुसलमान खड़े थे और उन

07:58

Speaker A

लोगों के सामने यज़ीद की पूरी की पूरी फौज खड़ी हुई थी। हालांकि इस बात की रवायत हमें किताबों में कम मिलती है। बहुत कम जगह पे ये लिखा गया है। लेकिन मेरे ख्याल में इस बात में कहने में कोई हर्ज नहीं कि

08:11

Speaker A

उस दिन शेर खुदा के बेटे ने कलाम पाक को चूम कर बुलंद आवाज में कहा ए मुसलमानों मैं हूं इमाम हुसैन अल्लाह के रसूल मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का नवासा फातिमा बिंते मोहम्मद का बेटा। ए तलवारों अगर मेरे खून से इस्लाम जिंदा

08:30

Speaker A

रह सकता है तो आओ मुझे अपनी आगोश में ले लो। रोको इन सबको। ये रियासत के दुश्मन हैं। खलीफा के नाफरमान हैं। चलो आगे बढ़ो। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] [चीखने की आवाज़] अल्लाहु अकबर [चीखने की आवाज़] [संगीत] इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनू अपनी आखिरी

09:16

Speaker A

सांस तक लड़ते रहे। लेकिन यज़ीद की फौज ने उन्हें और उनके साथियों को शहीद कर दिया। इस जंग में कुछ गिने-चुने लोग ही सर्वाइव कर पाए। किताबों में यह बात तक मेंशन है कि यज़ीद ने इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनो को और उनके

09:37

Speaker A

साथियों को पानी तक ना दिया था और प्यास की तड़पती हुई हालत में आपको शहीद किया था। [संगीत] 10 मुहर्रम यानी आशुरा के रोज ये कर्बला का वाकया हुआ। उस दिन यज़ीद के हाथ में कुर्सी और ताकत तो आ गई लेकिन उसके बावजूद

10:03

Speaker A

भी हिस्ट्री के पन्नों में यज़ीद की पहचान एक जालिम के तौर पर दर्ज हो गई। इमाम हुसैन के नाम से [गाना गाने की आवाज़] ये मुहर्रम महकता है। [संगीत] खलीफा यज़ीद सलामत रहे। आपकी उम्र दराज हो। कर्बला हो या बहरे अहमर खुदा का इंसाफ

10:26

Speaker A

बरहक है। दूसरी तरफ इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनो अपनी जिंदगी गवा कर भी सब कुछ गवा गए। हुसैन जिंदाबाद। हुसैन जिंदाबाद। और इसी शहादत को याद करके 10 मुहर्रम के रोज ना जाने कितने सारे मुसलमान मातम मनाते हैं। गली-गली ताज़ निकालते हैं।

10:49

Speaker A

छोटे-छोटे बच्चे से भी आप पूछेंगे ना कि भाई मुहर्रम क्यों मनाते हैं? तो उनमें से ज्यादातर का जवाब होगा कि इस दिन इमाम हुसैन को शहीद किया गया था। कर्बला से आज तक हक जंग जारी। हजरत इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनू शहीद हो

11:08

Speaker A

गए। और इसी दिन से इस्लामिक खिलाफत एक खानदानी बादशाहत में बदल गई। यानी उम्मयत डायनेस्टी में बदल गई। हजरत मुआविया रज़ अल्लाहहु अनू के जरिए लिया गया एक फैसला जहां तकवे और मेरिट की बुनियाद पर नहीं बल्कि खून की बुनियाद पर खलीफा को चुना

11:25

Speaker A

गया। बहुत सारी किताबों में यह बात भी मेंशन है कि हजरत मुआविया रज़ अल्लाह अनू के जरिए लिया गया यह।

11:38

Speaker A

था। वजह जो भी रही हो लेकिन हकीकत यह है कि इस्लामिक हिस्ट्री के अंदर ये एक बहुत बड़ा मोड़ था। एक ऐसा मोड़ जिस पर हमने कर्बला की शहादत देखी। हालांकि बहुत सारे लोग ये समझते हैं कि मुहर्रम की जो हुरमत

11:52

Speaker A

है वो कर्बला की वजह से है। इमाम हुसैन रदी अल्लाहहु अनू की शहादत की वजह से है। मुहर्रम असल में होता क्या है? इसको समझने के लिए हमें हजारों साल पहले उस दौर में जाना होगा जब ना इंसान था ना इंसान की

12:07

Speaker A

परछाई जब अल्लाह सुभाना ताला ने ये जमीन और आसमान बनाए असल में तब से यह महीना मुहर्रम अल्लाह सुभाना ताला के नजदीक है। [संगीत] मुहर्रम का लफज़ निकला है लफज़ हुरमत से। जिसका मतलब होता है सेक्रेट यानी पाक महीना। अल्लाह सुभाना ताला ने

12:25

Speaker A

कुरान मजीद में चार महीनों को पाक महीना करार दिया है। सबसे पहले है जुलकादा, जुल हिज्जा, मुहर्रम और रजब। ये चार महीने इतने पाक महीने हैं कि अरब के बद्दू इन महीनों में अपनी तलवारे मयान में रख देते

12:41

Speaker A

थे ताकि लोग बिना डर के सफर कर सकें, बिजनेस कर सकें, इबादत कर सकें। बाकी और महीनों में गुनाह करने पर और अच्छाइयां करने पर अल्लाह सुभाना ताला की तरफ से सजा भी मिलती है और सवाब भी मिलता है। लेकिन

12:54

Speaker A

इन चार महीनों में यूं समझिए कि अल्लाह ने एक्स्ट्रा सिक्योरिटी लगा रखी है। अगर आप गलती करते हैं तो उस गलती की सजा उस गलती का गुनाह बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। और अगर आप कोई अच्छा काम करते हैं तो उन अच्छे

13:07

Speaker A

कामों का सवाब भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। हमारे प्यारे नबी मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वहि वसल्लम इसे शहरल्लाह यानी अल्लाह का महीना कहा है और हमें इन्फॉर्म किया है कि रमजान के बाद सबसे अफजल रोज़े मुहर्रम के नफली रोज़े होते हैं। तो क्या

13:23

Speaker A

बात समझ में आई कि ये महीना ना किसी गम की वजह से और ना ही किसी खुशी की वजह से पाक है। बल्कि ये जब से जमीन और आसमान और कायनात को बनाया गया है उस दिन से अल्लाह

13:35

Speaker A

सुभाना ताला ने इन महीनों [संगीत] को पाक करार दे दिया है। इतना पाक कि इस दिन 10 मुहर्रम को मक्का में कुरैश काबा पर नया गिलाफ चढ़ाते और मदीना के यहूदी इस दिन का रोजा रखते। हालांकि धीरे-धीरे कुरैश ने

13:50

Speaker A

जिस तरह एक अल्लाह की इबादत को छोड़कर बुतों की पूजा शुरू कर दी उसी तरह उन्होंने इन पाक महीनों को आगे पीछे करना शुरू कर दिया। जैसे कभी किसी कबीले पर कब्जा करना होता, किसी का माल लूटना होता,

14:02

Speaker A

कोई जंग करनी होती, तो यह लोग आपस में कहते कि भाई ऐसा करो कि मुहर्रम के महीने को आगे वाले महीने में शिफ्ट कर दो। [संगीत] इस महीने अगर हमला ना किया या फिर जंग ना की तो बड़ा नुकसान हो जाएगा। हमारे

14:15

Speaker A

प्यारे नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब इस्लाम का पैगाम लेकर आए तब आपने सख्ती से इन पाक महीनों को इधर-उधर करना हराम करार दे दिया। मेरा इरादा है कि आने वाले कुछ दिनों में हमजा के कबीले पर हमला कर दिया जाए। आपका क्या ख्याल है?

14:33

Speaker A

लेकिन यह तो मुहर्रम का महीना है। इसमें हम जंग कैसे कर सकते हैं? कोई बात नहीं। मुहर्रम का महीना जंग के बाद रख दो। ऐसा मौका दोबारा नहीं आएगा। अब यह करना मुश्किल है। हमारे ज्यादातर गुलाम बागी हो

14:46

Speaker A

चुके हैं। और मोहम्मद के उसूलों के मुताबिक हम इन महीनों को आगे पीछे नहीं कर सकते। लेकिन अभी भी एक सवाल आप सबके दिमाग में आना चाहिए कि भाई जब कर्बला हुआ ही नहीं, जब मुहर्रम को कोई वाकई नहीं गुजरा

14:57

Speaker A

तब यह अरब के बद्दू और ये यहूदी किस चीज को इतनी ज्यादाेंस देते थे कि दसवीं मुहर्रम का रोजा रखते थे। तो इस सवाल के जवाब को जानने के लिए चलिए मैं आपको लेकर चलता हूं मिस्र के हजारों साल पुराने

15:10

Speaker A

जमाने में। उस जमाने में मिस्र यानी इजिप्ट दुनिया की सबसे ताकतवर सल्तनत में से एक थी। और इस सल्तनत का बादशाह था फिरौन। एक ऐसा [संगीत] जालिम बादशाह जिसने जुल्म की सारी हदें पार कर दी थी। याकूब अली सलाम की पूरी नस्ल उसकी गुलामी में

15:26

Speaker A

पिस रही थी। उनके बेटों को जिबा कर दिया जाता। उनकी औरतों को जलील किया जाता और इन लोगों की बुरी तरह पिटाई की जाती। क्या कहा तूने? फिरौन तेरा खुदा नहीं है। आज मैं तेरी बाल उधेर दूंगा कमबख्त हट

15:39

Speaker A

पीछे। कुरान में अल्लाह सुभाना ताला बयान करते हैं कि फिरौन अपने गुरूर में अपनी ताकत के नशे में इस कदर अंधा हो गया कि वो लोगों से कहने लगा फकाला अना रबला कि मैं तुम सबका खुदा हूं और मैं सबसे बड़ा रब

15:55

Speaker A

हूं। सो कहने लगा कि तुम्हारा सबसे बड़ा मालिक मैं हूं। और आखिरकार इस तकब्बुर और गुरूर को मिट्टी में मिलाने के लिए अल्लाह सुभाना ताला ने हजरत मूसा अल सलाम को भेजा। बिना किसी फौज के, बिना किसी हथियार के, बिना किसी दौलत

16:10

Speaker A

के सिर्फ एक लकड़ी की लाठी और अपने रब पर पुख्ता यकीन करके मूसा अल सलाम उस वक्त के सबसे बड़े जालिम फिरौन के सामने खड़े हो गए। आपने उसे उसके महल में खड़े होकर ललकारा। उसे बताया कि वो खुदा नहीं है

16:25

Speaker A

बल्कि खुदा वो है जो इस जमीन और आसमान को जलाता है। खुदा वो है जो चींटी को भी रिज़ खिलाता है। खुदा वो है जो सुबह और शाम करता है। खुदा वो है जो पानी को बहाता है। खुदा वो है जो पौधों को उगाता है। मूसा अल

16:40

Speaker A

सलाम ने सालों तक एक अल्लाह को मानने की दावत दी। दूर-दूर इलाकों में जाकर लोगों को समझाया। उन्हें बताया कि फिरौन खुदा नहीं है बल्कि खुदा वो है जो हर वक्त उनका ख्याल रखता है। और धीरे-धीरे लोग उनके साथ

16:54

Speaker A

एकजुट [संगीत] होने लगे। जब फिरौन का जुल्म बढ़ा तब मूसा अल सलाम के मानने वालों की जान पर खतरा मंडराने लगा। तब अल्लाह सुभाना ताला ने मूसा अल सलाम को हुकुम दिया कि ए मूसा अपनी कौम को लीजिए यहां से निकल जाइए।

17:08

Speaker A

हुकुम मिलते ही बूढ़े, बच्चे, जवान, औरतें, कमजोर, लाचार, बेबस सब के सब अपना सामान बांधकर मूसा अलैहिस्सलाम के पीछे चल दिए। लेकिन जैसे ही फिरौन को यह खबर हुई कि उसके गुलाम उसके चुंगल से फरार हो रहे है, उसका गुस्सा आसमान को छूने लगा।

17:26

Speaker A

मेरी फौज तैयार करो। आज मुझसे कोई नहीं बच पाएगा। मैं सबको खत्म कर दूंगा। गुस्से में चूर फिरौन अपने घोड़ों पर सवार होकर अपने महल से निकल पड़ा। चीखते चिल्लाते घोड़े, चाबुक खाते घोड़े जमीन पर बिजली की रफ्तार से दौड़ रहे थे। उधर मूसा

17:45

Speaker A

अल सलाम समुंदर के सामने खड़े सोच रहे थे कि यह अल्लाह का क्या फैसला है। चीखता चिल्लाता समुंदर, ठाटें मारता समुंदर। उस समुंदर की लहरें मूसा अल सलाम के लोगों के जिस्म में खौफ बनकर दौड़ रही थी। और दूसरी

17:58

Speaker A

तरफ धूल उड़ाती हुई फिरौन की जालिम फौज मौत बनकर मूसा अल सलाम की कौम की तरफ बढ़ रही थी। दाएं और बाएं भागने का कोई रास्ता ना था। और फिर जैसे आसमान ने भी मूसा अल सलाम की कौम से मुंह मोड़ लिया। खौफनाक आंधी चलने

18:13

Speaker A

लगी। धूल और गुबार के तूफान ने लोगों को अपनी आगोश में ले लिया। वो लाचार लोग डर से कांप [संगीत] उठे। औरतों की चीखें गूंजने लगी और खौफ का यह आलम था कि मासूम बच्चों ने मांओं के दूध तक छोड़ दिए। पूरा

18:26

Speaker A

माहौल एक ऐसी चीखती खामोशी में बदल गया जहां हर चीख खाने वाली मौत का पैगाम थी। कमजोर ईमान वाले बुरी तरह चिल्लाए। ऐ मूसा आज तुमने हमें मरवा दिया। मूसा अल सलाम लोगों की बात सुनकर जरा ना घबराए बल्कि आपके चेहरे के ऊपर खौफ की एक

18:44

Speaker A

शिकन तक ना आई। आपने मुस्कुरा कर कहा कल्ला इन्ना मा या रब्बी सयादी दीन मेरा रब मेरे लिए रास्ता जरूर निकालेगा तो मूसा के साथी कहने लगे कि हम तो पकड़ लिए गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं मेरा

19:00

Speaker A

परवरदिगार मेरे साथ है वो मुझे रास्ता बताएगा उस वक्त हमने मूसा की तरफ वही भेजी कि अपनी लाठी समंदर पर मारो [संगीत] जैसे ही वो लाठी पानी पर पड़ी पानी दो टुकड़े हो गया दीवारों की तरह पहाड़ों की

19:14

Speaker A

तरह समुंदर का पानी दोनों तरफ खड़ा हो गया और उस गहरे समुंदर के बीच में सूखी जमीन का एक रास्ता खुल गया। मूसा अल सलाम अपनी कौम के साथ उस रास्ते पर उतर गए। मूसा अल सलाम को देख फिरौन भी अपनी फौज के साथ उसी

19:29

Speaker A

समुंदर वाले रास्ते पर उतर पड़ा। और जब फिरौन ठीक बीच में था उसी लम्हे पानी ने फिरौन को उसकी सल्तनत को उसके गुरूर को अपनी आगोश में ले लिया। [संगीत] अल्लाह सुभाना ताला ने फिरौन के जुल्म को उस दिन हमेशा के लिए खत्म कर दिया और उसकी

19:58

Speaker A

लाश को ता कयामत लोगों के लिए एक इबरत बनाकर छोड़ दिया। तो आज हम तेरे बदन को बचा लेंगे ताकि तू पिछलों के लिए इबरत हो और बहुत से लोग हमारी निशानानियों से बेखबर हैं। और यह अजीम मौजजा किस दिन हुआ

20:13

Speaker A

था? यह अजीम मौजजा हुआ था मुहर्रम की 10वीं तारीख को और इसी 10वीं तारीख को अशुरा का दिन कहा जाता है। अशुरा अरबी का लफ्ज है जिसका मतलब होता है 10थ यानी के 10 और ये अशुरा का दिन किसी आम फतेह का

20:28

Speaker A

दिन नहीं है। बल्कि ये तबकुल का वो सबक है कि जब इंसान ये सोचे कि जिस रोज सारे रास्ते बंद होंगे ना लगेगा कि अरे अब तो कहीं मैं जा ही नहीं सकता तब तुम अपने दिल में ये बात यकीन कर लो कि वो है जो

20:42

Speaker A

तुम्हारे लिए रास्ता निकालेगा बिल्कुल उस तरह जिस तरह मूसा अल सलाम के लिए समंदर को फाड़ कर रास्ता निकाला है। सिर्फ कर्बला तक नहीं सिमती ये कहानी [गाना गाने की आवाज़] है। जुड़ी इससे मूसा की भी। जिंदगानी है,

21:08

Speaker A

पता है? हम सबको अपने अंदर सवाल पूछने की आदत पैदा करनी चाहिए। आपको इस वक्त मुझसे सवाल पूछना चाहिए कि मकतूब भाई यह तो बताइए कि यह हजारों साल पुराना वाकया आप यह बात कैसे कह सकते हैं कि यह 10वीं

21:21

Speaker A

मुहर्रम को ही हुआ था और इसे अशुरा ही कहते हैं? इस सवाल के जवाब में हमें एक ऑथेंटिक हदीस मिलती है। जब नबी-ए पाक मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम मक्का से मदीना तशरीफ लेकर आए तो आपने देखा कि मदीना के यहूदी यानी जस अशुरा का रोजा

21:37

Speaker A

रखते हैं। आपने पूछा कि भाई आप लोग यह रोजा क्यों रखते हैं? यह बड़ा दिन है। इस दिन अल्लाह ने मूसा अल सलाम और उनकी कौम को बचाया और फिरौन को समंदर में डूबा दिया। तो मूसा अल सलाम ने

21:53

Speaker A

शुक्राने का रोजा रखा। इसलिए हम भी इस दिन रोजा रखते हैं। इन यहूदियों का जवाब सुनकर आप सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि मूसा अल सलाम पर तुमसे ज्यादा हक हम मुसलमानों का है। और फिर आपने खुद भी रोजा रखा और बाकी

22:09

Speaker A

मुसलमानों को भी इस रोज़ को रखने का हुकुम दिया। अल्लाह के रसूल [संगीत] सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की हमें एक हदीस मिलती है जिसमें आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि आशुरा के दिन का रोजा रखो क्योंकि [संगीत] अल्लाह आशुरा के

22:23

Speaker A

रोजेदारों के एक साल के पिछले गुनाहों को माफ कर देता है। अल्लाह के रसूल [संगीत] सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ये फरमाया कि अगले साल मैं नौ और 10 या फिर 10 और 11 मुहर्रम का रोजा रखूंगा। लेकिन [संगीत]

22:37

Speaker A

अगले साल मुहर्रम आने से पहले ही अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया से पर्दा फरमा गए। तो कोशिश कीजिए 9, [संगीत] 10 और 11 को रोजा रखिए। अपने रब का शुक्र अदा कीजिए। इमाम हुसैन रज़ अल्लाह अनो की शहादत को अपने [संगीत] दिल

22:53

Speaker A

में जिंदा रखिए। सफीनत निजात [गाना गाने की आवाज़] हुसैन जिंदाबाद। हुसैन जिंदाबाद। आशूरा का दिन यानी वो दिन जब अल्लाह सुभाना ताला ने मूसा अल सलाम के लिए रास्ता बना दिया। लेकिन [संगीत] आप यहां पर एक छोटी सी बात को नोट कीजिएगा कि

23:15

Speaker A

अल्लाह सुभाना ताला ने कहा कि मूसा लाठी को पानी पर मारो। अल्लाह सुभाना ताला चाहते तो [संगीत] ऐसे ही समुंदर के दो टुकड़े कर देते। उसके बावजूद भी लाठी को पानी पर मारने का हुकुम क्यों दिया? ताकि दुनिया को लोगों को यह बात समझाई जा सके

23:29

Speaker A

कि आपने कोशिश करनी है, एफर्ट करना [संगीत] है और बाकी का काम अल्लाह सुभाना ताला के हवाले है। और यही सोचकर मैंने आप लोगों के लिए एक एआई मास्टर क्लास को डिजाइन किया है। जिसमें आप बेसिक से लेकर

23:42

Speaker A

एडवांस तक सिर्फ ₹500 की छोटी सी कीमत में एआई को सीख सकते हैं। इस तरह का कोर्स मार्केट में 78,000 का मिल रहा है। तो अगर आप अपनी जिंदगी में कुछ बदलाव लाना चाहते हैं, घर बैठे [संगीत] अपनी कमाई को शुरू

23:56

Speaker A

करना चाहते हैं, एआई की मदद से अपने बिजनेस को ग्रो करना चाहते हैं, अपना कोई YouTube चैनल शुरू करना चाहते हैं, किसी का सहारा बनना चाहते हैं या सिर्फ नॉलेज हासिल करना चाहते हैं, तो अभी www.mub.com पर जाकर हमारी ai master क्लास को जॉइ

24:13

Speaker A

करें। 99.9 पॉजिटिव फीडबैक है हमारा। मैं कहूंगी कि सीखने [संगीत] वाले थक गए लेकिन सिखाने वाले हमारे मकतूब भाई ना स्टार्टिंग टू एंड तक इतने ही जोश [संगीत] से हमें सिखाते रहे हैं। अल्हम्दुलिल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह आपने इतने कम अमाउंट में

24:25

Speaker A

हमें इतनी बड़ी इंफॉर्मेशन प्रोवाइड कर दी है ना मैं सीरियसली बता सकती हूं इतनी तरह से कोई नहीं सिखा सकता था। इस कोर्स को बनाने के पीछे एक बहुत बड़ा मकसद यह है कि [संगीत] लोग इससे फायदा उठा

24:35

Speaker A

सकें। जो लोग अफोर्ड नहीं कर सकते वो भी कम दामों के अंदर इस सदी का सबसे बड़ा रेवोल्यूशन एआई को सीख सकें। अपनी जिंदगी को बदल सकें। कोर्स को ज्वाइन करने का लिंक मैंने [संगीत] डिस्क्रिप्शन में भी अवेलेबल करा दिया है।

24:48

Speaker A

दादा अब्बू आप भी एआई सीखेंगे? क्यों नहीं? इल्म की कोई उम्र [संगीत] नहीं होती। आप मेरा रजिस्ट्रेशन जल्दी से कर दीजिए। तो इस मुहर्रम अपने आप को बदलिए। अपने तरीके को बदलिए। रसूल अल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत पर चलने की कोशिश

25:03

Speaker A

कीजिए। रोजा रखिए। इबादत कीजिए। कोई मुश्किल आ पड़े तो हक का साथ दीजिए। इमाम हुसैन रदी्लाहु अनो की तरह। उम्मीद करता हूं कि आपको वीडियो पसंद आई होगी। बात समझ आई होगी। मुझे और मेरी टीम को अपनी दुआओं

25:19

Speaker A

में याद रखिए। जजाक अल्लाह खैर। अस्सलाम वालेकुम। सिर्फ कर्बला तक नहीं। सिमती ये कहानी है। [गाना गाने की आवाज़]

Topics: मुहर्रम कर्बला इमाम हुसैन शहादत यज़ीद मुस्लिम इतिहास इस्लामी खिलाफत शिया सुन्नी इस्लामी इतिहास

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