**Queen of Controversies to Punjab CM? | Unspoken Truths of Maryam Nawaz — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/maryam-nawaz-controversies-punjab-cm/

मरियम नवाज के राजनीतिक सफर और विवादों की अनकही सच्चाईयों का विश्लेषण।

## Key Takeaways

- मरियम नवाज का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है।
- उनके परिवार की राजनीतिक ताकत ने उनके करियर को प्रभावित किया।
- सोशल मीडिया और मीडिया पर उनके प्रभाव और नियंत्रण के आरोप हैं।
- उनके फैसले और बयान अक्सर विवादों का कारण बनते हैं।
- पंजाब की वज़ीरआला के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण और विवादास्पद है।

## What the video covers

- मरियम नवाज के कॉलेज दाखिले में राजनीतिक दखलंदाजी और परिवार की भूमिका।
- सोशल मीडिया पर उनके वीडियो क्लिप के कारण पत्रकार खुर्रम इकबाल की गिरफ्तारी।
- क्रिकेटर नसीम शाह के सोशल मीडिया विवाद और उसके बाद की कार्रवाई।
- मरियम नवाज के शादी और राजनीतिक जीवन की शुरुआत, कैप्टन सफदर के साथ रिश्ता।
- नवाज शरीफ की बेटी से पंजाब की वज़ीरआला बनने तक का सफर।
- सियासत में उनके फैसलों और विवादों का विश्लेषण, जिनसे उनके विरोधी सवाल उठाते हैं।
- सरकारी खजाने से अरबों रुपए की कथित लूट और लग्जरी जहाज की खरीद।
- उनके बयान जो पाकिस्तान में विवादित और भारत में चर्चा का विषय बने।
- उनके राजनीतिक विरोधियों और मीडिया पर दबाव बनाने के आरोप।
- जनरल परवेज मुशर्रफ के तख्तापलट के बाद मरियम नवाज की सियासी सक्रियता।

## Chapters

1. 00:00 मरियम नवाज के कॉलेज दाखिले और परिवार की भूमिका
2. 02:18 खुर्रम इकबाल की गिरफ्तारी और सोशल मीडिया विवाद
3. 04:11 नसीम शाह का सोशल मीडिया विवाद और परिणाम
4. 06:00 कैप्टन सफदर और मरियम नवाज की शादी
5. 09:55 मरियम नवाज का सियासी सफर और विवाद
6. 11:54 सरकारी खजाने से अरबों की कथित लूट और लग्जरी जहाज
7. 15:00 मरियम नवाज के विवादित बयान और मीडिया प्रतिक्रिया
8. 18:28 जनरल मुशर्रफ के तख्तापलट के बाद मरियम नवाज की सक्रियता

Answers

## Questions about this video

मरियम नवाज के कॉलेज दाखिले में क्या विवाद हुआ?

मरियम नवाज के कॉलेज में कम नंबर आने के कारण दाखिला नहीं मिला, जिसके बाद उनके पिता नवाज शरीफ ने प्रिंसिपल को हटवा दिया था।

खुर्रम इकबाल को क्यों गिरफ्तार किया गया?

खुर्रम इकबाल ने मरियम नवाज का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसे गलत रंग में पेश किया गया, जिसके कारण उन्हें बिना वारंट गिरफ्तार किया गया।

नसीम शाह के सोशल मीडिया विवाद का क्या नतीजा निकला?

नसीम शाह के अकाउंट से एक विवादित पोस्ट वायरल हुई, जिसके बाद उन्हें शो कॉज नोटिस जारी किया गया और भारी जुर्माना लगाया गया, जिसके बाद वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हो गए।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

कम नंबर आए तो कॉलेज में दाखिला ना मिला। बाप ने प्रिंसिपल को ही हटा दिया। शादी हुई तो अपने नाम के साथ शौहर का नाम लगाया लेकिन सियासत में कदम रखा तो नाम हटा दिया। ऑोजिशन में थी तो

00:17

Speaker A

एस्टैब्लिशमेंट और जुडिशरी पर बरस रही थी। लेकिन इख्तेदार मिला तो इन्हीं इदारों के गुण गाने लगी। अपनी पब्लिसिटी के लिए सरकारी खजाने से अरबों रुपए लुटा दिए। लेकिन कानून रास्ते में आया तो उसे ही बदल दिया। वो आवाम को

00:37

Speaker A

सादगी का सबक पढ़ाती रही। लेकिन फिर इन्हीं आवाम के पैसों से अपने लिए 11 अरब का लग्जरी जहाज खरीद लिया। दहशतगर्दी के मामले पर एक ऐसा बयान दिया कि पाकिस्तान में लोग भड़क उठे मगर भारत में खुशी के ढोल बजने लगे। इस पर जो तनकीद

01:02

Speaker A

करे उसे कीमत चुकानी पड़ती है। चाहे वो कोई बड़ा खिलाड़ी हो या सीनियर सहाफी। जी हां, सही समझे। बात हो रही है वज़ीरआला पंजाब मरियम नवाज की। मरियम नवाज का नारा है। यह नारा बड़ा प्यारा है। मैं बेटी हूं

01:20

Speaker A

दरों की। मैं बहन हूं इन शेरों की। मगर सवाल यह है कि यह सब सिर्फ सियासी मुखालफिन के इल्ज़ामात हैं या मरियम नवाज के सियासी सफर में वाकई ऐसे मोड़ आए जहां उनके फैसले खुद उनके लिए मसला बन गए। वो

01:37

Speaker A

लड़की जो कभी नवाज शरीफ की बेटी के तौर पर जानी जाती थी। अब मुल्क के सबसे बड़े सूबे की वज़ीर एआला है। आज हम इस डॉक्यूमेंट्री में आपको बताएंगे मरियम नवाज से जुड़े वो कड़वे सच जिस पर बात करते हुए लोगों की

01:53

Speaker A

कांपें टांगने लगती है। आगे बढ़ने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरूर कर लें। तो चलिए शुरू करते हैं। 13 फरवरी 2026 लाहौर का इलाका हरबंसपुरा हम न्यूज़ के सीनियर सहाफी खुर्रम इकबाल जुम्मे की नमाज के लिए घर से निकलने की

02:18

Speaker A

तैयारी कर रहे थे। अचानक उनके घर का दरवाजा खुला और 15 से 20 मुसल्ला अफराद अंदर दाखिल हो गए। इनमें कुछ पुलिस की वर्दी में भी थे। ना कोई वारंट दिखाया ना गिरफ्तारी की वजह बताई। बस खुर्रम इकबाल

02:34

Speaker A

को जबरदस्ती अपने साथ ले आए। पूरा महल्ला यह तमाशा देख रहा था। सफी के बकौल उन्हें तकरीबन 8 घंटे तक शहर की सड़कों पर घुमाया और फिर छोड़ दिया। लेकिन सवाल यह है कि आखिर उनका जुर्म क्या था? दरअसल इस सारी

02:51

Speaker A

कहानी की वजह मरियम नवाज का एक वीडियो क्लिप था जो खुर्रम इकबाल ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। यह है वो वीडियो। वाली वालों यह सिर्फ दावा नहीं है। मरियम नवाज नवाज शरीफ की तरह दावा नहीं करती।

03:04

Speaker A

काम करके दिखाती है। अल्हम्दुलिल्लाह। अब जरा गौर करें। मरियम नवाज के जुमले को सोशल मीडिया पर एक अलग ही रंग दे दिया गया। क्योंकि सुनने वाले को ऐसा महसूस होता था जैसे मरियम नवाज अपने वालिद नवाज शरीफ पर तनकीद कर रही हो।

03:20

Speaker A

मरियम नवाज नवाज शरीफ की तरह दावा नहीं करती। काम करके दिखाती है। अल्हम्दुलिल्लाह। लेकिन पूरी तकरीर सुने तो मामला कुछ और नजर आता है। मरियम नवाज का मतलब यह था कि नवाज शरीफ की तरह वह भी सिर्फ दावे नहीं करती बल्कि काम करके

03:35

Speaker A

दिखाती हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर यह क्लिप किसी और ही रंग में फैलता रहा और पंजाब पुलिस ने यह क्लिप शेयर करने पर सफी को घर से ही उठा लिया। और अभी खुर्रम इकबाल का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि

03:49

Speaker A

अगले ही महीने एक और ऐसा वाकया सामने आ गया। क्रिकेटर नसीम शाहवाला याद ही होगा आपको 27 मार्च 2026 लाहौर में पीएसएल की इफ्ताही तकरीब थी। वज़ीरआला मरियम नवाज भी तकरीब में मौजूद थी। उन्हें खास प्रोटोकॉल दिया गया और फिर अचानक नसीम शाह के एक्स

04:11

Speaker A

अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई। सवाल सिर्फ चंद अल्फाज़ का था। उन्हें लॉर्ड्स की मलका की तरह प्रोटोकॉल क्यों दिया जा रहा है?

04:20

Speaker A

पोस्ट वायरल हुई और फिर डिलीट कर दी गई। नसीम शाह ने पहले कहा कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। लेकिन बाद में उनके अकाउंट से यह कहा गया कि यह पोस्ट उनकी मैनेजमेंट टीम की तरफ से की गई थी और यह उनके

04:35

Speaker A

ख्यालात नहीं। लेकिन तीर कमान से निकल चुका था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड फौरन हरकत में आया। उसी दिन नसीम शाह को शो कॉज नोटिस इशू हुआ। उन्होंने माफी मांगी। अपना सोशल मीडिया एडवाइजर फारग कर दिया। मगर इसके बावजूद 3 दिन बाद ₹ करोड़ जुर्माना

04:56

Speaker A

कर दिया गया। और उस दिन के बाद से वो आज तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेलते नजर नहीं आए। लेकिन मरियम नवाज का यह डिक्टेटर्स वाला रवैया कोई आज की बात नहीं। इसकी एक कहानी उनके सियासी कैरियर शुरू होने से बहुत

05:12

Speaker A

पहले की है। साल था 1985। मरियम नवाज ने स्कूल की तालीम मुकम्मल की और लाहौर के मशहूर केनयर्ड कॉलेज में दाखला लेने की कोशिश की। लेकिन दाखिला नहीं मिला। क्यों?

05:26

Speaker A

क्योंकि नंबर्स कम थे। मरियम ने वालिद नवाज शरीफ से शिकायत की और फिर जो कुछ हुआ उस पर आज भी सवाल उठाए जाते हैं। उस वक्त नवाज शरीफ पंजाब के वज़ीरआला थे और जनरल जियाउल हक की हुकूमत में वो सूबे की

05:42

Speaker A

ताकतवर तरीन सियासी शख्सियत थे। नवाज शरीफ ने वही ताकत इस्तेमाल की और किननेट कॉलेज की प्रिंसिपल को मौतल कर दिया। लेकिन कॉलेज के स्टाफ को जब प्रिंसिपल की मौतली का पता चला तो उन्होंने एहतेजाज शुरू कर दिया। तलावा भी सड़कों पर आ गए। दबाव बढ़ा

06:00

Speaker A

और बिल आखिर प्रिंसिपल को बहाल करना पड़ा। जब यहां दाल ना गली तो मरियम नवाज को मजबूरन लाहौर कॉलेज फॉर वुमेन में दाखिला लेना पड़ा। एफएससी के बाद उनके दिल में डॉक्टर बनने की ख्वाहिश जागी। लेकिन किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज में भी दाखिला नहीं

06:17

Speaker A

मिला। वजह वही कम नंबर्स। इस बार नवाज शरीफ ने कॉलेज प्रिंसिपल को सस्पेंड करने का कोई रिस्क नहीं लिया बल्कि एक चार्ज। उन्होंने मरियम का दाखिला पहले आर्मी मेडिकल कॉलेज रावलपिंडी में करवाया और फिर कुछ अरसे बाद प्लानिंग के तहत किंग एडवर्ड

06:35

Speaker A

कॉलेज लाहौर में ट्रांसफर करवा दिया। तरकीब तो कामयाब रही लेकिन वो डॉक्टर ना बन सकी क्योंकि शादी की वजह से मरियम बीवी को मेडिकल की तालीम छोड़ना पड़ी। 6 अगस्त 1990 को जिस दिन सदर गुलाम इसहाक खान ने वजीर आजम बेनजीर भुट्टो की हुकूमत

06:58

Speaker A

बरतरफ की उसी दिन एक नौजवान फौजी अफसर की सियासत के एवान में एंट्री हुई। नाम था कैप्टन मोहम्मद सफ्तार। उन्हें केयरटेकर प्राइम मिनिस्टर गुलाम मुस्तफा जतोई का एडीसी मुकरर किया गया। वहां रहने के लिए जगह मिली तो कैप्टन सफदर ने वर्दी रखने के

07:16

Speaker A

लिए एक अलमारी की डिमांड की। सिंध हाउस से एक ताला लगी अलमारी उठाकर उनके कमरे में पहुंचा दी गई। कैप्टन सफदर ने ताला खोला और अंदर देखा तो हैरान रह गए। अलमारी में कपड़े नहीं थे बल्कि जेवरात थे। हीरे की

07:32

Speaker A

अंगूठियां थी और बेनजीर भुट्टो की फैमिली की तस्वीरों वाले एल्बम्स भी। कैप्टन सदन ने फौरन वजीर आजम हाउस के मिलिट्री ऑफिसर को इत्तला दी और तमाम चीजें वापस बेनजीर भुट्टो तक पहुंचा दी गई। बेनजीर भुट्टो की तरफ से इस ईमानदारी को सराहा गया। वाक्य

07:50

Speaker A

की खबर कुछ अरसे बाद नवाज शरीफ तक पहुंची तो वह भी बहुत मुतासिर हुए। 24 अक्टूबर 1990 के इलेक्शन के बाद नवाज शरीफ वज़ीरआज़म बने तो कैप्टन सबदर उनके एडीसी थे। वह अपनी ईमानदारी की वजह से नवाज शरीफ के दिल

08:05

Speaker A

में तो घर कर ही चुके थे। मगर एक दिन वो वज़ीरआज़म की अहलिया बेगम कुलसूम नवाज की नजरों में भी आ गए। जिससे उनकी जिंदगी का रुख ही बदल गया। एक दिन नवाज शरीफ का काफिला वादिय कागान की तरफ जा रहा था।

08:19

Speaker A

नवाज शरीफ के साथ उनकी अहलिया बेगम कुलसूम नवाज भी मौजूद थी और ड्राइवर के साथ कैप्टन सफदर बैठे थे। बातोंबातों में सबदर ने बताया कि उनका बचपन इसी इलाके में गुजरा है और उनका घर भी करीब ही है।

08:33

Speaker A

कुलसुम नवाज ने फौरन कहा तो फिर हमें अपना घर दिखाइए। बस फिर क्या था? वज़ीर आजम और उनकी अहलिया कैप्टन सबदर के आबाई घर पहुंच गए। खानदान से मुलाकात हुई और बात खत्म। नहीं बात तो अब शुरू होने वाली थी। कुछ

08:50

Speaker A

अरसे बाद कैप्टन सफदर को मालूम हुआ कि कुलसुम नवाज ने अपने स्टाफ के एक आदमी को मानसेरा भेजा था। मकसद था खामोशी से कैप्टन सदर के खानदान के बारे में मालूमात हासिल करना। और फिर आया 1992। कैप्टन सदर

09:06

Speaker A

छुट्टियों पर अपने घर मानसेरा गए तो वालदैन ने बताया कि वज़ीर आजम नवाज शरीफ ने अपनी बेटी के लिए उनका रिश्ता मांगा है। 25 दिसंबर 1992 को नवाज शरीफ की 42वीं सालगिरह थी। इसी दिन 28 साला कैप्टन सबदर

09:24

Speaker A

और 19 साला मरियम नवाज का निकाह हुआ। अब कैप्टन सबदर सिर्फ फौज के अफसर नहीं थे। वो वज़ीर आजम के दामाद भी बन चुके थे। उन्होंने फौज से रिटायरमेंट ली। सिविल सर्विज में आए और लाहौर के मॉडल टाउन में

09:40

Speaker A

असिस्टेंट कमिश्नर तायनात हो गए। मरियम से शादी के बाद कैप्टन सबदर खासे खुश नजर आते थे। एक मौके पर उन्होंने मरियम के बारे में कहा कि वो खुशकिस्मत इंसान है क्योंकि उन्हें दुनिया में ही हूर मिल गई। कैप्टन

09:55

Speaker A

सफदर वज़ीर आजम के दामाद थे, एमएलए थे, सजाएं भुगती, जेल गए। लेकिन इसके बावजूद उन्हें नून लीग में कभी कोई बड़ा ओहदा या अहम जिम्मेदारी नहीं मिली। यही वजह है कि वह कभी पार्टी के साथ कदम से कदम मिलाकर

10:10

Speaker A

चलते नजर आते हैं तो कभी मंजर से यदम गायब हो जाते हैं। और जब से मरियम नवाज पंजाब की वज़ीरआला बनी है तब से तो पता ही नहीं चलता कि वह है कहां। लेकिन सवाल यह है कि मरियम नवाज वज़ीरआला पंजाब कैसे बन गई।

10:31

Speaker A

एक वक्त था जब नवाज शरीफ ने अपनी बेटी को सियासत से दूर रखा हुआ था और शादी के बाद मरियम नवाज भी अपनी फैमिली लाइफ में मशरूफ थी। लेकिन फिर आया 12 अक्टूबर 1999। वो दिन जब जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ

10:48

Speaker A

की हुकूमत का तख्ता उलट दिया और मुल्क की सियासत ही बदल कर रख दी। उस रोज असल में हुआ क्या था? नवाज शरीफ ने मुशर्रफ को ओदे से हटाने का फैसला क्यों किया और फिर आसमान और जमीन पर इख्तेदार की जंग कैसे

11:03

Speaker A

शुरू हुई इसकी चौंका देने वाली पूरी तफसील आप हमारी इस डॉक्यूमेंट्री में देख सकते हैं। बहरहाल मुशर्रफ दौर में जब नवाज

11:21

Speaker A

नहीं थी। मरियम नवाज अपनी वालदा के साथ-साथ थी। फिर नवाज शरीफ जिला वतन हुए तो मरियम भी खानदान के दूसरे अफराद के साथ पाकिस्तान से बाहर चली गई। 2007 में वापसी हुई तब वो पॉलिटिक्स से दूर रहीं। लेकिन

11:36

Speaker A

2013 के इलेक्शन के मौके पर उन्हें पूरी तैयारी के साथ सियासत में उतारा गया। अच्छा यहां हम आपको एक दिलचस्प बात बताएं। मरियम नवाज उस वक्त तक मरियम नवाज नहीं बल्कि मरियम सफदर थी। नवाज शरीफ ने 2011 में जब असासों के गोषवारे जमा कराए तो

11:54

Speaker A

उनका नाम मरियम सफदर ही लिखा था। और तो और पनामा पेपर्स के मुताबिक ऑफशोर कंपनियों के लिए इस्तेमाल होने वाले पासपोर्ट में भी उनका नाम मरियम सफदर था। लेकिन सियासत में आने के बाद वो मरियम सफदर से मरियम

12:08

Speaker A

नवाज बन गई। बिल्कुल ब्लावल भुट्टो की तरह उन्होंने भी अपने नाम के साथ नाना का नाम जोड़ रखा है। मकसद यही है कि अपनी पार्टी पर गिरिफ्त मजबूत रहे और कयादत खानदान से बाहर ना निकलने पाए। खैर छोड़ें वापस

12:23

Speaker A

टॉपिक पर आते हैं। 2013 में नवाज शरीफ तीसरी बार वजीर आजम बन गए और वज़रआम बनते ही उन्होंने बेटी को प्राइम मिनिस्टरर्स यूथ प्रोग्राम की चेयर पर्सन मुकरर कर दिया। यह मरियम नवाज का पहला बड़ा सरकारी ओहदा था जो उन्हें सिर्फ इस बात पर मिला

12:40

Speaker A

कि वो वजीर आजम की साहिबजादी हैं। लेकिन पीटीआई से यह बात हजम ना हुई। उसने आसमान सर पर उठा लिया। इसे नेपोटिज्म करार दिया और पहुंच गई लाहौर हाईकोर्ट। वहां मरियम नवाज की तालीम और अहलियत पर भी सवालात

12:55

Speaker A

उठाए गए। एक और सवाल भी हुआ। एप्लीकेंट ने पूछा कि मरियम नवाज का असल नाम क्या है?

13:02

Speaker A

नॉमिनेशन पेपर्स में उन्होंने अपना नाम मरियम सदर लिखा है। लेकिन वजीर आजम की हिदायत पर उनके लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसमें उनका नाम मरियम नवाज दर्ज है। क्यों? इसका कोई जवाब नहीं दिया गया। नवंबर 2014 में अदालत ने मरियम नवाज

13:20

Speaker A

को प्राइम मिनिस्टरर्स यूथ प्रोग्राम की चेयर पर्सनशिप से हटाने का हुक्म दिया और अगले ही दिन उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन उस वक्त तक मरियम नवाज सियासत के दाव पेच सीख चुकी थी और उन्हें सोशल मीडिया की ताकत का अंदाजा भी हो गया था।

13:37

Speaker A

2013 में नवाज शरीफ के वज़रआज़म बनने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया का महासवाल लिया। एक सोशल मीडिया सेल बनाया और जानते हैं यह सेल कहां से ऑपरेट हो रहा था। वज़र एआज़म हाउस से। रोजनामा 92 न्यूज़ की रिपोर्ट

13:51

Speaker A

में इंकशाफ किया गया कि वजीरेआम की साहिबजादी ने यूनिवर्सिटी लेवल के 60 आईटी एक्सपर्ट्स की एक टीम खुफिया तौर पर भर्ती की। उन्हें ₹1 लाख मंथली सैलरी और दूसरे बेनिफिट्स दिए। सोशल मीडिया सेल का काम सिर्फ हुकूमत के कामों को बढ़ा चढ़ाकर पेश

14:10

Speaker A

करना, पीटीआई और पीपल्स पार्टी के खिलाफ कार्टून बनाना और मनफी प्रोपेगेंडा करना था। 3 साल तक यह सेल वज़रआज़म हाउस के अंदर ही काम करता रहा। लेकिन जब अपोजिशन जमातों ने इस सेल को बेनकाब किया तो उसे चुपके से

14:26

Speaker A

प्रेस इंफॉर्मेशन डिपार्टमेंट शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन सैलरी समेत उसके सारे खर्चे सरकारी खजाने से ही पूरे होते रहे। और फिर जब नवाज शरीफ की हुकूमत खत्म हुई तो इस सेल को इस्लामाबाद से लाहौर मुंतकिल किया गया। लेकिन अब अदायगियां नून लीग की

14:44

Speaker A

जेब से होने लगी। मरियम नवाज ने नवाज शरीफ के दौर में सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि मेन स्ट्रीम मीडिया को भी कंट्रोल करने की कोशिश की और इसके लिए उन्होंने इस्तेमाल की इश्तहारात की ताकात। भांडा तब फूटा जब 2021 में मोहतरमा की ऑडियो लीक्स

15:02

Speaker A

हुई। 24 चैनल को समा को 92 को और क्या नाम है इसका? एआरवाई को कोई ऐड नहीं जाएगा। तो मैंने कहा ये आपको करना पड़ेगा। तो उसने किया। फिर मैंने मिया आमिर से भी कहा। आमिर ने कहा आप देखिए मैं करता क्या

15:15

Speaker A

हूं इसके सामने समा को बहुत मौका दिया है लेकिन समा जो है वो जो ये इनका एंकर है नदीम मलिक साहब और जिस तरह की समा की न्यूज़ है अब हमारा और पैक नहीं चल सकता समा के साथ

15:28

Speaker A

देखिए मेरी मीडिया मैनेजमेंट जिओ और दुनिया ने तो उनकी जई तई फेर दी है। जो दो बास्केट्स आई है ना जो अब्बू जान लाए हैं अज़र भाईजान से ये जो रात को कायनात ने पैक की एक नुसरत जावेद को भेजनी

15:41

Speaker A

एक राणा जवाद को भेजनी हिम्मत देखिए कि बाद में मरियम नवाज ने अपनी आवाज की तस्दीक भी कर दी। मरियम नवाज के इस एतराफ के बाद उस वक्त के इंफॉर्मेशन मिनिस्टर फवाद चौधरी ने इल्जाम लगाया कि मुस्लिम लीग नून ने अपने पिछले

16:00

Speaker A

दौरे हुकूमत में पसंदीदा सफियों और मीडिया चैनल्स को खूब नवासा और इसके लिए कौमी खजाने से 18 अरब खर्च किए और यह सारा काम मरियम नवाज की निगरानी में एक खुसूसी मीडिया सेल कर रहा था। इसी दौरान नून लीग

16:16

Speaker A

की तर्जुमान मरियम औरंगजेब ने यह कहकर सफाई देने की कोशिश की कि मरियम नवाज ने इश्तहारात की बात जरूर की थी मगर वो पार्टी के इश्तहारात की थी। 2016 में पनामा स्कैंडल का धमाका हुआ। पेपर पनामा पनामा पेपर पनामा सिटी

16:34

Speaker A

और लंदन के एवन फील्ड अपार्टमेंट्स अचानक पाकिस्तान की सियासत का सबसे बड़ा मौजू बन गए। शरीफ खानदान पर सवालात की बौछाड़ थी और मरियम नवाज भी इस तूफान के घेरे में आ चुकी थी। तहकीकात के दौरान मरियम नवाज ने

16:50

Speaker A

कहा कि वो एवन फील्ड फ्लैट्स की मालिक नहीं। सबूत के तौर पर एक ट्रस्ट डी भी पेश की जिस पर तारीख लिखी थी 2 फरवरी 2006। बजाहिर सब कुछ ठीक था। मगर फिर एक छोटी सी चीज ने पूरे मामले को एक नया रुख दे दिया।

17:09

Speaker A

डॉक्यूमेंट्स में इस्तेमाल हुआ था क्लबरी फोंट और मसला यह था कि यह फोंट 2007 में आया। इस पर सवाल उठा कि अगर दस्तावेज 2006 की है तो इसमें 2007 के बाद आने वाला फोंट कैसे इस्तेमाल हुआ? यह सवाल मरियम नवाज के

17:27

Speaker A

गले पड़ गया। क्योंकि ऑपोजिशन के हाथ एक नया खिलौना आ चुका था। मरियम नवाज को कैललेबरी क्वीन कहा जाने लगा। लेकिन असल मामला सिर्फ एक फोंट का नहीं था। केस आगे बढ़ा और शरीफ खानदान के लंदन फ्लैट्स, कंपनियों और उनकी मिल्कियत से मुतालिक

17:45

Speaker A

सवालात मजीद संगीन होते गए। फिर आया 2017 सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को ना अहल करार देकर वज़ारत उसमा से हटा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने वज़रआज़ पाकिस्तान मियां मोहम्मद नवाज शरीफ को ना अहल करार दे दिया है। और 2018 के इलेक्शन से चंद दिन पहले एतसाब

18:04

Speaker A

अदालत ने एमन फील्ड रेफरेंस में मरियम नवाज को 7 साल कैद की सजा सुनाई और जेल भेज दिया। सितंबर 2018 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा मौतल कर दी। लेकिन अगस्त 2019 में चौधरी शुगर मिल्स केस में उन्हें कोर्ट लखपत जेल से गिरफ्तार कर लिया गया।

18:23

Speaker A

वो वहां अपने वालिद से मिलने आई थी। नवंबर में इस केस में भी जमानत मिल गई और वह बाहर आ गई। लेकिन अब मरियम नवाज की सियासत बिल्कुल बदल चुकी थी। वो कहते हैं ना कि सियासतदान जेल की हवा खाने के बाद ही लीडर

18:38

Speaker A

बनता है। मरियम नवाज के साथ भी यही हुआ। उन्हें जेल से बाहर आते ही मुस्लिम लीग नून की नायब सदर बना दिया गया। नवाज शरीफ इलाज का कहकर लंदन चले गए। पार्टी की पूरी लगाम मरियम नवाज के हाथ में थी। अब जलसा

18:55

Speaker A

हो, एहतेजाज हो या हुकूमत के खिलाफ अपोजिशन की तहरीक। मरियम नवाज ने कहीं भी नवाज शरीफ की कमी महसूस नहीं होने दी। 2020 में जब अपोजिशन जमातों ने पीडीएम बनाई तो मरियम नवाज ने इसमें भी भरपूर किरदार अदा किया। नवाज शरीफ पाकिस्तान में

19:14

Speaker A

नहीं थे लेकिन बेटी जलसों में उनकी नुमाइंदगी करती रही। उनके बयानिए को आगे बढ़ाती रही और नून लीग के कारकुनों के दरमियान अपनी जगह मजबूत करती चली गई। फिर सितंबर 2022 आया। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने एवं फील्ड रेफरेंस में मरियम नवाज की सजा

19:32

Speaker A

और एतसाब अदालत का फैसला खत्म कर दिया और उन्हें बरी कर दिया गया। यूं वो कानूनी रुकावट भी दूर हो गई जो उन्हें इंतखाबी सियासत में हिस्सा लेने से रोक रही थी। जनवरी 2023 में मरियम नवाज को मुस्लिम लीग

19:47

Speaker A

नून की सीनियर नायब सदर और चीफ ऑर्गेनाइजर मुकर्रर कर दिया गया। अब वो पार्टी की आला तरीन कयादत में शामिल हो चुकी थी। लेकिन मरियम नवाज का यह तेज रफ्तार सियासी उरूज सबको पसंद नहीं आया। 2018 में मुस्लिम लीग

20:04

Speaker A

के रहनुमा चौधरी निसार ने पार्टी यह कहकर छोड़ दी कि वो बच्चों के अंडर काम नहीं कर सकते। मैं बच्चों के नीचे तो सियासत नहीं कर सकता ना एक बंदे की डिग्निटी होती है। इसमें कौन सी गलत इसमें तनकीद का कौन सा

20:18

Speaker A

पहलू है? मुझसे पूछा गया सवाल पूछा गया। आप मियां नवाज शरीफ के नीचे काम कर सकते हैं? मैंने कहा कर सकता हूं। शबाज शरीफ के नीचे काम कर सकते हैं। मैंने कहा कर सकता हूं। कहा मरियम नवाज के नीचे कर सकते हैं।

20:30

Speaker A

मैंने कहा नहीं कर सकता। और जब 2023 में मरियम नवाज को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और चीफ ऑर्गेनाइजर बनाया गया तो इस ऐलान के सिर्फ 1 घंटे बाद ही मिफ्ता इस्माइल ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। साबिक वज़र खजाना मिता इस्माइल ने मुस्लिम

20:47

Speaker A

लीग नून के सुबाई ओदे से इस्तीफा दे दिया है। मिफा इस्माइल मुस्लिम लीग नून सिंध के जनरल सेक्रेटरी थे। मिफ्ता इस्माइल ने अपना इस्तीफा सेक्रेटरी जनरल मुस्लिम लीग नून एसएन इकबाल को भिजवा दिया है। मिफ्ता इस्माइल मुस्लिम लीग नून की तमाम कमेटियों

20:59

Speaker A

से भी मुस्ताफी हो चुके हैं। पीटीआई हुकूमत के दौर में मरियम नवाज ने सिर्फ इमरान खान और उनकी पार्टी को टारगेट नहीं किया बल्कि एस्टैब्लिशमेंट और अदिलिया पर भी उंगली उठाई। बगैर किसी लगी लिपटी के साफ-साफ कह दिया कि इमरान खान को

21:14

Speaker A

सीट पर बिठाने में इन इदारों का किरदार था। लेकिन फिर हवाओं का रुख बदला तो मरियम नवाज ने फौरन यू टर्न ले लिया। जब पीडीएम बनी उसने जोर पकड़ा और शहबाज शरीफ अगले वजीर आजम बनते दिखाई दिए तो मरियम नवाज ने

21:30

Speaker A

इदारों पर तनकीद बंद कर दी। मकसद शायद शहबाज शरीफ को इस्टैब्लिशमेंट के साथ मुजाकरात का मौका देना था। वह रास्ता मुझे आता है। वह रास्ता बहुत सारे लोग आज भी लेते हैं और वह रास्ता बहुत आसान है। उसमें सिर्फ आपको हाथ जोड़ने पड़ते हैं।

21:45

Speaker A

उसमें सिर्फ आपको अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट कुर्बान करनी पड़ती है। उसमें सिर्फ आपको जूते साफ करने पड़ते हैं। और उस वो आसान रास्ता है। वो मुझे भी आता है। बहुत अच्छे तरीके से आता है। फरवरी 2024 में मरियम नवाज ने पहली बार इलेक्शन लड़ा और लाहौर

22:00

Speaker A

से जीतकर पंजाब असेंबली की मेंबर बनी। मुस्लिम लीग नून पंजाब की सबसे बड़ी सियासी जमात बनकर उभरी और मरियम नवाज को वजीरआला मुंतखब कर लिया गया। उनके वज़रआला बनते ही पंजाब में पीटीआई वालों पर बुराइयां आ गई। मार्च 2024 में मुवैना

22:19

Speaker A

इंतखाबी धांधली के खिलाफ लाहौर समेत पंजाब के कई शहरों में पीटीआई के कारकुन घरों से निकले। मगर हर जगह उनका सामना पुलिस से हुआ। जून 2024 में तो पंजाब हुकूमत ने सूबे भर में दफा 144 लगाकर जलसों और धरनों

22:37

Speaker A

पर पाबंदी ही लगा दी और साथ ही पीटीआई रहनुमाओं और कारकुनों के घरों पर छापे भी पड़ते रहे। पंजाब से पीटीआई का पत्ता साफ करने के लिए एक तरफ कारकुनों और रहनुमाओं की पखड़ धकड़ जारी थी तो दूसरी तरफ मरियम

22:53

Speaker A

नवाज ने अपनी पब्लिसिटी शुरू कर दी। 25 फरवरी 2025 को मुल्क के तमाम बड़े अखबारात का फ्रंट पेज एक जैसा था। सब पर एक जैसी खबरें और एक जैसी सुर्खियां ज़ेर ज़बर तक कभी फर्क नहीं था। लीड सुपर लीड से लेकर

23:11

Speaker A

ऊपर से नीचे तक पूरे का पूरा सफा एक जैसा। गौर करने पर पता चला कि वो इश्तहार था। फुल पेज का इश्तहार जो पंजाब हुकूमत का एक साल मुकम्मल होने पर शाया करवाया गया। इसमें सिवाय वज़र आला की तारीफों के और कुछ

23:27

Speaker A

नहीं था और इस एक सफे पर मरियम नवाज का नाम 32 जगह पर लिखा हुआ था। अगले दिन यानी 26 फरवरी को तो पंजाब हुकूमत ने सारी हदें पार कर ली। कौमी अखबारात के अंदर 60 सफात का एक खुसूसी सप्लीमेंट छपवाया जो बकायदा

23:44

Speaker A

किसी रिसाले की शक्ल में था। इस सप्लीमेंट के तमाम सफात पर पंजाब हुकूमत के इश्तहारात थे। इनमें मरियम नवाज की बड़ी-बड़ी तस्वीरें, उनकी शान में कसीदे और तारीख कारकरदगी जैसे नारों के सिवा कुछ नहीं था। और मजे की बात यह है कि यह सारे

24:01

Speaker A

इश्तहारात खबरों और आर्टिकल्स की शक्ल में थे। मगर था यह सब पेड कंटेंट। कहीं यह नहीं लिखा था कि यह इश्तहार है। अखबारी मालिकान ने भी सहाफती अखलाकियात का ख्याल नहीं रखा कि कहीं तो लिख देते कि यह

24:15

Speaker A

इश्तहार है। 60 सफात के इस सप्लीमेंट पर सुबाई खजाने से कितनी बड़ी रकम खर्च हुई कोई नहीं जानता लेकिन अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है। अपोजिशन यह मामला लेकर लाहौर हाईकोर्ट पहुंच गई। अदालत ने जवाब मांगा तो पता है पंजाब हुकूमत ने क्या किया? 17

24:34

Speaker A

जून 2025 को एक कानून मंजूर कर दिया। आवामी आगाही और मालूमात की तरसील एक्ट। यह कानून क्या है? यह कानून यह है कि अब कोई पंजाब हुकूमत से सरकारी इश्तहारात पर कोई सवाल नहीं कर सकेगा। कोई यह नहीं पूछ

24:49

Speaker A

सकेगा कि कितने इश्तहारात दिए? क्यों दिए? आवाम के टैक्सों का उन पर कितना पैसा खर्च हुआ? सरकारी खजाना कितना खाली हुआ? कोई सवाल नहीं। कोई अब यह मामला लेकर अदालत भी नहीं जा सकेगा क्योंकि अदालतों से इस तरह

25:05

Speaker A

का मुकदमा सुनने का इख्तियार वापस ले लिया गया और चालाकी देखिए इस कानून का निफाज़ यकुम जनवरी 2024 से पहले से किया गया है यानी जनरल इलेक्शन से भी पहले बात ही खत्म हो गई अब कर लो जो करना है। मरियम नवाज की

25:21

Speaker A

पब्लिसिटी सिर्फ मीडिया तक महदूद नहीं पंजाब के चप्पे-चप्पे पर हर गली मोहल्ले में उनका नाम और तस्वीर दिखाई देती है। गुजस्ता दिनों पंजाब में ऐसे प्ले कार्ड्स भी देखे गए जिन पर वजीर आला मरियम नवाज को मादरे मिल्लत यानी कौम की मां कहा गया। सब

25:38

Speaker A

जानते हैं कि यह लकब मोहतरमा फातिमा जिना का है। मुमकिन है यह पोस्टर्स सुबाई हुकूमत ने ना बांटे हो मगर सुब हुकूमत को इस पर एक्शन तो लेना चाहिए था। मुहर्रम उल हराम में भी मरियम नवाज की पब्लिसिटी पर

25:52

Speaker A

ठीक-ठाक रकम खर्च की गई। जगह-जगह उनके पोस्टर्स और बैनर्स नजर आए। इस मौके पर जो बिरयानी के डब्बे तकसीम किए गए उन पर भी वजीरआला की मुस्कुराती तस्वीर थी। कब्रिस्तानों को भी नहीं बख्शा गया वहां भी मरियम नवाज की पब्लिसिटी की जा रही है।

26:10

Speaker A

और तो और सड़कों पर काम हो रहा हो तो वहां भी मरियम नवाज की तस्वीर। मरियम नवाज को अपनी जात की पब्लिसिटी का इतना शौक है कि टीवी और अखबारात ने इश्तहार दे दिए। गली महलों, सड़कों, चौराहों पर छोटे बड़े

26:25

Speaker A

तशीरी बोर्ड्स लगा दिए मगर तसल्ली ना हुई। तो अब एक ही प्लेटफार्म बचा था सोशल मीडिया। तो यूं वो TikTok पर भी आ गए। अब किसी अस्पताल का दौरा हो या कोई फील्ड विजिट। किसी सरकारी मंसूबे का इफ्तदा हो

26:41

Speaker A

या आवामी जलसा। कोई छोटी बड़ी तकरीब हो या अहम इजलास बतौर वजीरआला उन्होंने अपनी हर एक्टिविटी को एक सिनेैटिक और प्रोफेशनल लुक देने के लिए TikTok का भरपूर इस्तेमाल किया और इसे प्रोमोशनल कंटेंट में बदल दिया। और जब ऑपोजिशन ने इस पर तनकीद की तो

27:02

Speaker A

मरियम का जवाब यह था कि TikTok ऐसे ही नहीं बन जाती। यह मुझे कहते हैं मैं TikTok बनाती हूं। TikTok बनाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। काम किया होता है तो TikTok बनती है। और फिर यूं हुआ कि एक दिन वो पुलिस की

27:20

Speaker A

वर्दी पहन कर आ गई। अप्रैल 2024 में लाहौर के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में पासिंग आउट परेड थी। मरियम नवाज पुलिस यूनिफार्म पहने सर पर कैप लगाए हाथ में छड़ी थामे पहुंच गई। इस पर भी खूब उधम मचा और इसे मोहतरमा का पब्लिसिटी स्टंट

27:42

Speaker A

करार दिया गया। सबसे अहम नुक्ता अपोजिशन ने उठाया। पूछा कि क्या गवर्नर और वजीरआला पुलिस की वर्दी पहन सकते हैं? यह सवाल सामने आते ही पंजाब पुलिस हरकत में आई। Twitter पर एक नोटिफिकेशन शेयर किया जिसमें पंजाब पुलिस ड्रेस रेगुलेशंस में

27:59

Speaker A

तरमीम की इत्तला देते हुए बताया गया कि गवर्नर या वज़रआला पुलिस की वर्दी पहन सकते हैं और इस नोटिफिकेशन पर डेट 30 जनवरी 2024 की दर्ज थी जिस पर आईजी पुलिस उस्मान अनवर के दस्तखत भी थे। पीटीआई ने इल्जाम

28:15

Speaker A

लगाया कि यह नोटिफिकेशन पुरानी तारीख के साथ बाद में जारी किया गया। मोहतरमा को TikTok का शौक चढ़ा हुआ है। वो इसलिए ये वर्दियां पहन के देखा नहीं। उनको अंदाजा था ना कि मैं वर्दी पहनूंगी तो यह वायरल

28:29

Speaker A

होगी। और भाई वो वायरल हो गई। अब ये इलीट फोर्स की पेन है। अगले दिन पायलट की पेनें। फिर इसके बाद ट्रैफिक पुलिस की पेन है। खैर एक कौम को भी तमाशा महसूस होने दें। सबसे बड़ा धमाका उस वक्त हुआ जब

28:44

Speaker A

फरवरी 2026 में पंजाब हुकूमत की जानिब से इंतहाई महंगा और लग्जरी गल्फ स्ट्रीम जहाज खरीदने की खबरें सामने आई। यह मामला दबा रहता अगर सुबई हुकूमत पायलट की जरूरत का इश्तहार ना छापती। इस जहाज की कीमत तकरीबन ₹11 अरब बताई जाती है। उन्हीं दिनों

29:03

Speaker A

तैयारे को लाहौर से सियालकोट के दरमियान परवाज करते हुए देखा गया और वही मखसूस कोड पंजाब टू इस्तेमाल किया गया जो आमतौर पर वजीरआला की मौजूदगी में इस्तेमाल होता है। पंजाब हुकूमत की जानिब से इंतहाई महंगा जहाज खरीदने पर खूब तनकीद हुई। मिफ्ता

29:20

Speaker A

इस्माइल ने तो यहां तक कह दिया कि आवाम को पेट पर पत्थर बांधने का मशवरा देने वाले खुद लग्जरी जहाज में सीट बेल्ट बांध रहे हैं। जब तनकीद बहुत ज्यादा बढ़ी तो पंजाब के वजीर इत्तलाक अजमा बुखारी ने सफाई पेश

29:35

Speaker A

की कि यह जहाज वजीरआला के लिए नहीं बल्कि सुबाई हुकूमत की एयरलाइन एयर पंजाब के लिए खरीदा गया है। जो हमारा एयर पंजाब है उसमें हम मुख्तलिफ जहाज खरीद रहे हैं और कुछ हम लीज़ पे लेंगे और यह एक फ्लट बनाना

29:49

Speaker A

है हमको और यह उसी की एक कड़ी है एयर पंजाब के हवाले से हमें मुख्तलिफ जहाज जो है वो वो करने हैं बिकॉज़ इस साल एयर पंजाब ने अपनी जो सर्विज है वो शुरू करनी है। सो इस हवाले से जहाज तो हमें या खरीदने

30:01

Speaker A

पड़ेंगे या लीज पे लेने पड़ेंगे। लेकिन मरियम औरंगजेब ने ऐसा कोई बहाना नहीं तराशा बल्कि साफ कह दिया कि यह मरियम नवाज के लिए ही खरीदा है। जहाज क्यों खरीदा?

30:13

Speaker A

वो जहाज खरीदा है भाई। वो उस वज़रआला पंजाब से सवाल कर रहे हैं। जहाज क्यों खरीदा? जो एक दिन के अंदर डीजी खान होती थी, भक्कर होती थी, लैया होती थी, बहावलपुर होती थी, मुल्तान होती थी, राजनपुर होती थी।

30:30

Speaker A

उसने आवाम को रिलीफ पहुंचाने के लिए जहाज खरीदा और बिल्कुल ठीक खरीदा। 5 सितंबर 2026 को मरियम नवाज ने एक ऐसी बात कह दी जिस पर पाकिस्तान में तो खूब तनकीद हुई मगर भारत में उसका जश्न मनाया गया। एक तकरीब से खिताब करते हुए वजीरआला

30:48

Speaker A

पंजाब ने कहा अफसोस की बात यह है कि मुझे थ्रेट जो है वो मेरे नेबरिंग कंट्रीज से कम है और मेरे नेबरिंग प्रोवसेस से ज्यादा है। भारतीय मीडिया ने मोहतरमा के इस बयान को खूब उछाला और दावा किया कि मरियम नवाज ने

31:02

Speaker A

दहशतगर्दी के हवाले से भारत को क्लीन चिट दे दी है और पाकिस्तान को बाहर से नहीं बल्कि अंदर से ही खतरा है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि वज़रआला मरियम नवाज ने पंजाब में बहुत से तामीराती और

31:15

Speaker A

तरकियाती मंसूबे शुरू किए। सड़कें बन रही हैं। मंसूबे मुकम्मल हो रहे हैं और हुकूमती कारकरदगी आवाम को नजर भी आ रही है। लेकिन शायद मरियम नवाज सिर्फ तरक्कियाती मंसूबों से वो मकूलियत वापस हासिल नहीं कर सकती जो कभी तहरीक इंसाफ ने

31:32

Speaker A

उनसे छीन ली थी। क्योंकि हुकूमत चलाने के लिए सिर्फ काम करना काफी नहीं होता। तनकीद भी बर्दाश्त करना पड़ती है। इख्तलाफ सुनना पड़ता है और मुखालिफ आवाजों को जगह भी देनी पड़ती है। मरियम नवाज को अगर वाकई एक

31:48

Speaker A

बड़ी सियासी लीडर बनना है तो उन्हें ताकत के इस तासुर से बाहर निकलना होगा जिसने उनकी सियासत को मुतनाजा बनाया। उन्हें यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ ताकतवर हुक्मरान की बेटी नहीं बल्कि एक ऐसी सियासी और जमूली शख्सियत है जो अपने खिलाफ

32:04

Speaker A

उठने वाली आवाज को बर्दाश्त भी कर सकती हैं। क्योंकि असल कामयाबी सिर्फ यह नहीं कि आपके दौर में कितने मंसूबे बने। असल कामयाबी यह भी है कि आपने इख्तलाफ करने वालों के साथ कैसा सुलक किया।

Topics: मरियम नवाज पंजाब मुख्यमंत्री सियासत नवाज शरीफ पंजाब सरकार सोशल मीडिया विवाद खुर्रम इकबाल नसीम शाह पाकिस्तान राजनीति जनरल मुशर्रफ


---
This is the markdown twin of https://sozai.app/transcript/maryam-nawaz-controversies-punjab-cm/ — the same content, without the markup.
Published by SozAI (https://sozai.app). Reuse and quotation are allowed with attribution and a link back.
Machine-readable index: https://sozai.app/llms.txt · data API: https://sozai.app/api/
