**Lyari's Dark Secret: Who was Rehman Dakait? | From Benazir's Guard to Most Wanted — Transcript & Summary | SozAI**
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रहमान डकैत की कहानी, जो बेनजीर भुट्टो के गार्ड से लेकर कराची का सबसे वांछित गैंगस्टर बना।

## Key Takeaways

- रहमान डकैत ने अपने जीवन में अपराध और राजनीति दोनों में गहरा प्रभाव छोड़ा।
- लेहारी का इलाका गैंग्स, मंशियात और राजनीतिक सरपरस्ती का केंद्र था।
- गैंग वार में क्रूरता और हिंसा आम थी, जो स्थानीय युवाओं को प्रभावित करती थी।
- राजनीतिक संरक्षण गैंगस्टरों को ताकतवर बनाता था, जैसे कि रहमान डकैत का बेनजीर भुट्टो से संबंध।
- रहमान डकैत की कहानी कराची के सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों की एक झलक प्रस्तुत करती है।

## What the video covers

- लेहारी इलाके में फुटबॉल मैच के दौरान गैंगस्टर और उनकी हिंसा की झलक।
- अरशद पप्पू और उसके क्रूर गैंग वार की भयावहता का वर्णन।
- अब्दुल रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत का जन्म, परिवार और शुरुआती जीवन।
- रहमान डकैत का जुर्म की दुनिया में प्रवेश और गैंगस्टर के रूप में उभरना।
- लेहारी के विभिन्न गैंग्स, उनके सरपरस्त और मंशियात का कारोबार।
- हाजी लालू की भूमिका और उसका कराची के गैंग्स में गॉडफादर का दर्जा।
- रहमान डकैत और चौधरी असलम के बीच दुश्मनी और पुलिस की कार्रवाई।
- रहमान डकैत की गिरफ्तारी, फरार होना और अंततः मौत।
- बेनजीर भुट्टो के गार्ड के रूप में रहमान की राजनीतिक कनेक्शन।
- लेहारी की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और गैंगस्टरवाद का प्रभाव।

## Chapters

1. 00:00 लेहारी की फुटबॉल गली और गैंगस्टर की हिंसा
2. 03:03 रहमान डकैत का जन्म और परिवारिक पृष्ठभूमि
3. 05:47 लेहारी के गैंग्स और मंशियात का कारोबार
4. 08:14 रहमान डकैत का जुर्म की दुनिया में प्रवेश
5. 10:46 हाजी लालू और गैंगस्टर राजनीति का प्रभाव
6. 15:20 रहमान डकैत और चौधरी असलम की दुश्मनी
7. 18:26 रहमान डकैत की गिरफ्तारी और फरारी
8. 23:00 राजनीतिक संरक्षण और रहमान डकैत की मौत

Answers

## Questions about this video

रहमान डकैत कौन थे?

रहमान डकैत कराची के लेहारी इलाके के एक प्रमुख गैंगस्टर थे, जो बेनजीर भुट्टो के गार्ड भी रह चुके थे। उन्होंने अपने जीवन में अपराध और राजनीति दोनों में गहरा प्रभाव छोड़ा।

लेहारी इलाके में गैंग वार की क्या स्थिति थी?

लेहारी में गैंग वार बहुत हिंसक और क्रूर थे, जिसमें कई बार लोगों की हत्या और टुकड़े-टुकड़े करने जैसी घटनाएं होती थीं। यह इलाके मंशियात, जुआ और सट्टे के अड्डों के लिए जाना जाता था।

रहमान डकैत का बेनजीर भुट्टो से क्या संबंध था?

रहमान डकैत बेनजीर भुट्टो के मुहाफिज (गार्ड) थे और पीपल्स पार्टी के समर्थन में सक्रिय थे, जिससे उन्हें राजनीतिक संरक्षण भी मिला था।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01

Speaker A

लेहारी की इस गली में जश्न का समा था। लोग बड़ा सा दायरा बनाकर खड़े थे। शायद कोई फुटबॉल मैच हो रहा था। लेहारी के लोग हमेशा से फुटबॉल के शौकीन रहे हैं। कराची का एक रिपोर्टर शाहिद कोशिश कर रहा था कि

00:15

Speaker A

वो हुजूम में घुसकर देख सके कि किस-किस का मैच हो रहा है। उसने देखा कि खिलाड़ियों में सरदार उज़ैर बलोच, नूर मोहम्मद उर्फ़ बाबा लाडला जैसे लिया के बदनाम जमाना गैंगस्टर शामिल हैं। लोग सीटियां बजा रहे थे। रक्स कर रहे थे। सरदार उज़ैर बलोच ने

00:31

Speaker A

फुटबॉल को ठोकर लगाई। वो लुढ़कते हुए बाबा लाडला के पैरों के पास आई। बाबा लाडला ने कहका लगाते हुए बॉल को लात मारी। वो लुढ़कती हुई किसी और के पास गई। शाहिद ने जरा और गौर से देखा तो वो दंग रह गया। जिस

00:46

Speaker A

गेंद से फुटबॉल खेली जा रही थी वो गेंद नहीं एक इंसानी सर था। अरशद पप्पू का सर। अरशद पप्पू ऊपर से ऊपर से बिहारी गैंग वॉर से मुतालिक इस भयानक वाक्य की तफसील उज़ैर बलोच ने अपनी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताई थी।

01:08

Speaker A

रिपोर्ट के मुताबिक अरशद पप्पू को हजारों अफराद के हुजूम ने तशद्दुद का निशाना बनाया था। पहले उसकी उंगलियां काटी गई। हाथ पैर तोड़े गए। फिर टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया। लेकिन अरशद पप्पू उस गैंग वॉर का खुद भी ऐसा ही सफाक किरदार था।

01:26

Speaker A

[संगीत] पप्पू ने किसी बंदे को कत्ल किया था और उसकी बॉडी के 16 पीसेस किए। वो बहुत मशहूर हुआ था। उस वक्त पप्पू बड़ा मोस्ट वांटेड था। मैंने पप्पू से बोला क्या जो है ना आपके हवाले से तो इंटरव्यू वगैरह कोई चीज

01:39

Speaker A

वैसे भी नहीं हो सकती। आपका कोई मौका भी नहीं लगा सकते इस बात से आपका तो ताजा ये वाकया हुआ है। तो उसने कहने लगा यार मैंने कौन सा गलत काम किया। वो बड़ा कमीना आदमी था जिसको मैंने मारा। मेरे पास तो टाइम

01:49

Speaker A

नहीं था जो मैंने उसके सिर्फ 16 पीसेस किए। अगर मेरे पास टाइम होता तो मैं उसको खीमा निकाल देता। मगर आज हम अरशद पप्पू की नहीं बल्कि उस शख्स की कहानी सुना रहे हैं जो कभी अरशद पप्पू का दोस्त था। फिर दुश्मन बना तो

02:02

Speaker A

लिया की गलियां नौजवानों के लहू से तर हो गई। [संगीत] लिया के घरों की दीवारें गोलियों के निशानों से छलनी [संगीत] हो गई। जी हां, आज हम बात करेंगे अब्दुल रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत की। [संगीत] लिया वाले कहते हैं वो बलोच कबीले का

02:28

Speaker A

सरदार था। पुलिस कहती है वो सरदार तो था मगर डाकुओं का। अगर वो डाकुओं का सरदार था तो इसे बेनजीर भुट्टो का मुहाफिज किसने बनाया? वो बेनजीर का मुहाफिज था तो रावलपिंडी धमाके में उनकी हिफाजत क्यों नहीं की? वो पीपल्स अमन कमेटी बनाने वाला

02:46

Speaker A

था या कराची का अमन बिगाड़ने वाला। और का दोबारा शुरू हो गया है। और पुलिस और को भी भगा दिया गया। चौधरी असलम और रहमान बलोच की दुश्मनी कैसे शुरू हुई? रहमान डकैत को गिरफ्तार करने के बाद चौधरी असलम को गिरफ्तार क्यों किया

03:03

Speaker A

गया? वो दो बार पकड़ा गया। मगर दोनों बार पुलिस की कैद से फरार हो गया। मगर जब तीसरी बार पकड़ा गया तो फिर क्या हुआ? यह और इन जैसे बहुत से सवालात के जवाब आप जानेंगे इस डॉक्यूमेंट्री में। लेकिन अगर

03:17

Speaker A

अभी तक आपने हमारा चैनल सब्सक्राइब नहीं किया तो जरूर सब्सक्राइब कर लें और वीडियो पर अपनी राय भी जरूर दीजिएगा। तो चलिए 50 साल पहले के लिया चलते हैं। [संगीत] यह 1976 की बात है। रेक्सर लाइन की अफशानी

03:31

Speaker A

गली में हाजी दाद मोहम्मद के घर में एक बच्चे की पैदाइश हुई। जिसका नाम अब्दुल रहमान रखा गया। जाहिर है यह घर उस वक्त इस हालत में नहीं था बल्कि यह पूरा इलाका गरीबी में डूबा हुआ था। तब अब्दुल रहमान

03:44

Speaker A

के रिश्तेदारों का कहना है कि वह जद्दी पुश्ती रईस और कबायली सरदार था। तो सरदार अब्दुल रहमान बलोच था वह कबायली बंदा था। उसका ताल्लुक ईरान से था। बलूचिस्तान से था। तो आशारी बलोच था। ओरिजिनल बलोच था। खानदानी बंदा था। हमारे

03:58

Speaker A

अंदर सरबाजी भी है। लिया में बहुत से जगहों में रहते हैं। सरबाजी आशारी अफशानी और भी बहुत से कौमें हैं जो सरदार अब्दुल रहमान से हमारी मिलती है। तो मैं भी तो सरदार अब्दुल रहमान का छोटे भाई का बेटा

04:13

Speaker A

हूं। फतेह मोहम्मद और उन जैसे रिश्तेदार तो कहते हैं कि हाजी दाद मोहम्मद का ट्रांसपोर्ट का बिजनेस था। [संगीत] और उन्होंने इलाके में बहुत से फलाही काम कराए। स्कूल खोले, फुटबॉल और बॉक्सिंग क्लब बनवाए। पहले ये जगह जो आप देख रहे हैं जो आप बैठे

04:29

Speaker A

हुए हैं तो ये उन्होंने संग बुनियाद रखी थी। यह जगह है ये अंजुमन ये स्कूल ये जो आप देख रहे हैं ये बवरची खाना ये नमाज़ जनाजा की जगह अगर आप बोलोगे तो मैं आपको सारा जगह दिखाऊंगा ये इतने बड़े घर महल वो

04:45

Speaker A

खुद खानदानी बंदा था माशाल्लाह सरदार लकब भी उसको दिया गया है ना दूसरी तरफ पुलिस और सहाफियों के मुताबिक दाद मोहम्मद उर्फ दादल शेर मोहम्मद उर्फ शेरू बेग मोहम्मद उर्फ बेकल और ताज मोहम्मद उर्फ ताजू ये सब मुख्तलिफ जरा में मुल्लवीस थे। शेरू और

05:04

Speaker A

दादल मंशियात का कारोबार करते थे। उस दौर में लिया में दूसरे जरा पेशा ग्रुप भी थे। कलरी में इकबाल उर्फ़ बाबू डकैत का राज था। जबकि लिया नदी के उस पार जहानाबाद और आसपास के इलाकों में हाजी लालू की हुकूमत थी। जहां से वो अपना

05:19

Speaker A

मंशियात भत्ते और अगवा बराए तावान का धंधा चलाता था। हाजी लालू के बेटों में अरशद पप्पू और अरफात नुमाया हुए। जिनका जिक्र आगे भी आता रहेगा। लिया में बेसिकली उस वक्त से यह मशीया जुए और सट्टे के अड्डे जो हैं वो उस वक्त से चले आ

05:34

Speaker A

रहे हैं। पहले जो है वो यही लोग हुआ करते थे दाद मोहम्मद दादल या ये जो है बाबू डकैत या दूसरी तरफ जो मेवा शाह कब्रिस्तान है हम लिया नदी की दूसरी तरफ की अगर बात करें तो उधर हाजी लालू वगैरह यही बेसिकली

05:47

Speaker A

जो है मेन उस दौर के लोग हुआ करते थे। अच्छा ये सारे लोग जो हैं इनके जुए और सट्टे के अड्डे भी थे और मंशियात के अड्डे भी थे। इन्हीं से कमाई भी थी और इन्हीं के ऊपर लड़ाई भी थी।

05:57

Speaker A

सीनियर सहाफियों के मुताबिक हाजी लालू को तमाम जरा पेशा ग्रुपों के सरबराहों की हैसियत हासिल थी। हाजी लालू को जो अहमियत हासिल थी कि सारे गैंग्स उन्हें अपने अब्बा का अपने बाप का दर्जा देते थे और उन्हें गॉडफादर कहते

06:10

Speaker A

थे। कराची के जो मेवा शाह कब्रिस्तान है उसमें हर साल सालाना बुनियादों पर जो क्रिमिनल्स नेटवर्क है उनका एक इत्तमा होता है। और सबसे बड़ी बात ये है कि इस प्रोग्राम की जो मेन सिक्योरिटी होती थी वो हाजी लालू साहब की होती थी। हाजी लालू

06:22

Speaker A

परमिशन देते थे। हाजी दादल और हाजी लालू ग्रुप के अच्छे ताल्लुकात थे। दोनों को सियासी सरपरस्ती भी हासिल थी। मुबशिर फारूक के मुताबिक हाजी लालू तो इतने पावरफुल थे कि पुलिस और अदालती ट्रांसफर पोस्टिंग भी वही करवाते थे। 70 की दहाई में जुल्फिकार अली

06:40

Speaker A

भुट्टो ने रोटी कपड़ा मकान का नारा दिया। लिया के आवाम तो उन बुनियादी जरूरतों को भी तरसे हुए थे। उस वक्त से ही सारा लिया जे भुट्टो के नारों से गूंजने लगा। रहमान बलोच के वालिद हाजी दादल और उनके भाई भी

06:52

Speaker A

पीपल्स पार्टी में शामिल हो गए। जो दाद मोहम्मद है जो रहमान डकैत का बाप दाद मोहम्मद दादल अगर हम उसकी बात करते हैं तो ये चार भाई थे। इनके जो वालिद थे मुराद उनका नीप रोड पर एक बर्फखाना था और ये उस

07:06

Speaker A

वक्त भी जो है वो सियासी जो एक छतरी होती है उसकी तलाश में तो रहते ही थे। तो 70 की दहाई में जब पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को उरूज मिला जुल्फिकार अली भुट्टो के दौर में तो उस वक्त इन लोगों ने भी पीपल्स पार्टी

07:18

Speaker A

को ज्वाइन कर लिया था। पीपल्स पार्टी के खिलाफ एक क्रैकडाउन शुरू किया जंजिया ने तो उस क्रैकडाउन के दौरान जो है जो पीपल्स पार्टी के कारकुनों की गिरफ्तारियां हुई उसमें दाद मोहम्मद की भी गिरफ्तारी हुई और दाद मोहम्मद जेल चला गया। गिरफ्तार होने

07:32

Speaker A

के बाद यह बीमार था और बीमारी की हालत में ही जो है इसकी जेल में डेथ हो गई थी। उधर बाप की निगरानी से महरूम रहमान बलोच तालीम से जी चुराने लगा और छठी जमात के बाद स्कूल जाना छोड़ दिया। वो अपने जैसे

07:47

Speaker A

दोस्तों के साथ आवारागर्दी करने लगा जिनमें कई जरायम पेशा लड़के भी शामिल थे। वो इंतहाई झगड़ालू और बेखौफ हो चुका था। वो सिर्फ 13 साल का था जब पटाखा फोड़ने से रोकने पर उसने एक शख्स को छुरियों मारकर

08:00

Speaker A

जख्मी कर दिया। उस वाकये की एफआईआर तो दर्ज हुई मगर मुलजिम चूंकि कम उम्र था इसीलिए पुलिस ने गिरफ्तारी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। बहरहाल अब्दुल रहमान डकैत का यह जुर्म की दुनिया में पहला कदम था। उसके बाद उसने आरिफ नाजिम का ग्रुप

08:14

Speaker A

ज्वाइन कर लिया। रहमान का बेसिकली यह था कि 18-19 साल का नौजवान था। बाप जेल जा चुका था। और इलाके में जो है वो मंशियात और जुए और सट्टे के अड्डे चला करते थे। उस दौर में एक गैंग लीडर हुआ करता था छोटा सा

08:29

Speaker A

आरिफ उसका नाम था आरिफ बलोच ये रऊफ बलोच जो बाद में लिया के एक नाजिम भी रहे उनका भाई था तो आरिफ का बेसिकली जो गैंग था उसे रहमान ने ज्वाइन किया था और वहीं पर जो है वो उसने जो है वो बेसिकली कह लें कि जुर्म

08:43

Speaker A

की दुनिया में वहीं से कदम रखा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 1992 में मंशियात के मामले में रहमान का झगड़ा मंशियात के दो और सप्लायर्स नदीम अमीन और उसके साथी नन्नू से हुआ। नदीम अमीन भी हिस्ट्री शीटर था और उस पर तकरीबन 30 मुकदमात कायम थे।

08:59

Speaker A

रहमान और आरिफ ने नदीम और ननू दोनों को गोलियां मारकर कत्ल कर दिया। यह रहमान के हाथों कत्ल की पहली वारदात थी। और उस मुकदमे में भी वो और आरिफ मफरूर रहे। उस दौरान बाबू डकैत ने रहमान के चाचा ताज

09:13

Speaker A

मोहम्मद को कत्ल कर दिया था। जिसके बाद हाजी लालू ने रहमान को अपनी सरपरस्ती में ले लिया। असल में बाबू डकैत और हाजी लालू की टसल चल रही थी और बाबू के गैंग से निपटने के लिए हाजी लालू को गर्म खून की

09:26

Speaker A

जरूरत थी। 1993 में

09:39

Speaker A

बेजिगरी और बहादुरी देखकर हाजी लालू ने उसे गोया अपना मुंह बोला बेटा बना लिया। रहमान भी जैसे हाजी लालू का मुरीद हो गया। यह एक ऐसा वक्त होता है कि जिस वक्त जो है हाजी लालू ने हाथ रखता है बाकायदा हाजी

09:51

Speaker A

लालू जो है वह रहमान के ऊपर। और हाथ इस हद तक रखता है कि वो रहमान की शादी भी जो है उस घर में कर देता है जहां वो पहले अपने बेटे की शादी कर चुका होता है अरफात की।

10:02

Speaker A

सेठ युसुफ एक उसी इलाके की एक शख्सियत हैं। उनकी बेटी से जो है वह रहमान की शादी हो जाती है। अब रहमान और अरफात ये दोनों जो है एक तरह से एक दूसरे के साडू भी हैं। हम जुल्फ भी हैं। तो यहां से जो है फिर

10:15

Speaker A

बेसिकली हाजी लालू ने रहमान पे हाथ रखा और फिर इसके बाद जो है यूं समझ लीजिए कि जहानाबाद से लेकर और लेरी तक उस दौर में अगर देखा जाए तो एक ही गैंग ऑपरेट करता था जो बड़ा गैंग जिसे हम कहते हैं। छोटे-छोटे

10:29

Speaker A

थे कई और वह यही था हाजी लालू का गैंग जिसमें अरशद पप्पू और रहमान डकैत अरफात जो उसका वो था साडू ये सब मिलके जो है ये सारे धंधे किया करते थे। इस तरह हाजी लालू का ग्रुप लेरी और ओल्ड सिटी एरिया पर राज

10:46

Speaker A

करने लगा। भत्ते और अखबार बराए तावान की वारदातें बढ़ने लगी तो अखबारात ने शोर मचाया जिस पर पुलिस ने आरिफ के गैंग के खिलाफ कारवाई का फैसला किया। 18 फरवरी 1995 आरिफ और रहमान अपने दूसरे साथियों के हमरा उस्मानाबाद मिल्स एरिया

11:07

Speaker A

में पाक पाइप मिल्स की खाली इमारत में जमा थे। मुखबरी पर पुलिस ने इमारत पर छापा मारा और उन सबको एक लाइन में खड़ा कर दिया। अब पुलिस मुकाबला शुरू हुआ तो आरिफ तो पुलिस की गोली का निशाना बन गया। मगर

11:20

Speaker A

रहमान पूरी ताकत से दौड़ा और दीवार फलांग कर भाग गया। उस वाक्य के थोड़े ही महीनों बाद लियारी में एक खबर ने सबको चौंका दिया। 18 मई 1995 कलाकोट में एक घर में फायरिंग से रहमान बलोच की वालिदा खतीजा

11:34

Speaker A

बीवी हलाक हो गई। फायरिंग करने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद रहमान बलोच था। रहमान ने पुलिस को बताया था कि इसे शक था कि उसकी वालिदा पुलिस की मुखबर बन चुकी है। दूसरी तरफ कुछ और जराय कहते हैं कि अब्दुल

11:47

Speaker A

रहमान बलोच को उनकी किरदार पर शूबा था। बहरहाल यह वो जमाना था जब एमकेएम के खिलाफ ऑपरेशन जारी था तो हाजी लालू ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई का भी दबाव था| हाजी लालू ने अपने बेटे अरफात और रहमान की कुर्बानी

12:00

Speaker A

देने का फैसला किया| उस दिन भी अगर पुलिस की प्लानिंग कामयाब होती तो मेवा शाह की कोई गुमनाम कबर रहमान बलोच का आखिरी ठिकाना बन जाती| उस दौर में जो है वह हाजी लालू से मांगा गया रहमान डकैत को यह रहमान

12:14

Speaker A

डकैत तो एक तरह से उस वक्त हाजी लालू की छतरी तले था तो जब रहमान डकैत को मांगा गया तो हाजी लालू मना नहीं कर सका क्योंकि उस वक्त हाजी लालू भी पीपल्स पार्टी को ज्वाइन कर चुका था। उसने जो है वह एक

12:26

Speaker A

कड़वा घूंट पीते हुए यह किया कि उसने अपने बेटे अरफात और रहमान डकैत की गिरफ्तारी का फैसला किया। अच्छा ये गिरफ्तारी जो है वो इस तरह से हुई कि उसने रहमान को अपने बेटे अरफात के साथ मेवा शाह कब्रिस्तान की तरफ

12:37

Speaker A

भेजा और वहां पुलिस पहले से उनके मुंतज़िर थी। उन्होंने इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अच्छा यह बात हाजी लालू को नहीं पता थी कि ये मामला सिर्फ गिरफ्तारी तक नहीं रुकेगा बल्कि फैसला जो है वो एनकाउंटर का

12:50

Speaker A

हो चुका था। लेकिन किस्मत कह लें खुशकिस्मती कह ले रहमान की कि जिस वक्त उसको गिरफ्तार किया गया मेवक अश कब्रिस्तान से अफात के साथ तो उस वक्त एक फैमिली जो है वो ततफन के बाद वापस जा रही

13:02

Speaker A

थी। उन्होंने जो है वो रहमान की गिरफ्तारी देखी और रहमान की फैमिली को बताया। रहमान की फैमिली के माजी में जो है वो एक और सियासी यहां पर फैमिली थी। उससे अच्छे ताल्लुकात थे और उस दौर में जो है वो

13:14

Speaker A

गवर्नर भी उसी फैमिली से थे। तो वहां से राबते हुए और उन राबतों के नतीजे में जो है वो उस दिन रहमान की एक तरह की जान बख्शी हुई और रहमान की गिरफ्तारी जो है फिर वो औरंगी के इलाके से दिखाई गई।

13:28

Speaker A

सरकारी रिकॉर्ड का कहना है कि रहमान और उसके साथियों अली ईरानी और हनीफ [संगीत] को मेवा शाह से नहीं बल्कि गोली मार से रेंजर्स ने गिरफ्तार किया था। उन पर नाजायज असलहे और मनशियात रखने का इल्जाम आयद किया गया। दो हफ्ते बाद उन्हें औरंगी

13:43

Speaker A

टाउन पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस मुकदमे में रहमान ढाई साल तक जेल में बी क्लास कैदी रहा। कैद के दौरान रहमान के हाजी लालू से ताल्लुकात बिगड़ते चले गए। आखिरकार वो जेल से फरार हो गया। जेल जाने

13:56

Speaker A

के कुछ अरसे के बाद जो है हाजी लालू का मुतालबा हाजी लालू ने अपने बेटे की जमानत करा ली अरफात की। अच्छा यह वो दौर था शायद आपको याद भी हो के उस दौर में जमानत जो है वो होना बहुत मुश्किल होता था। इजाद

14:08

Speaker A

दहशतगर्दी की खुसूसी अदालतें जो है वो कायम थी और एटीसी से जो है वो जमानत मिलना तो नामुमकिन समझा जाता था। अच्छा रहमान की भी जमानत नहीं हो रही थी। जब रहमान की जमानत नहीं हो रही थी तो रहमान जेल में ही

14:22

Speaker A

था। उस वक्त उसने हाजी लालू को मुख्तलिफ मैसेजेस भेजे। तो उसने कहा कि मेरी जमानत का कुछ करें और इसके लिए उसने कहा कि आपके पास जो मेरे रकम पड़ी हुई है मेरे पैसे पड़े हुए हैं उनको आप इस्तेमाल करें और

14:32

Speaker A

बताने वाले बताते हैं कि वो रकम जो है कोई ₹1 करोड़ की रकम थी उस दौर में लेकिन हाजी लालू ने जो उसको जवाब में ये कहा कि कौन सी रकम मेरे पास तुम्हारे कोई पैसे नहीं और यहां से बेसिकली इख्तलाफात हाजी लालू

14:44

Speaker A

से शुरू हुए रहमान बुनियादी तौर पर जब अपने जो इनके ऊपर केसेस थे वहां अफशानी गली के कलाकोट के उन केसेस में जब इसको गिरफ्तार किया था तो जेल में था तो इतना फ्रेंडली वो होता था इनका कि जाहिर है पैसा पानी की तरह

14:56

Speaker A

बहाते थे उस वक्त भी ये लोग तो जब यह जेल से सिटी कोर्ट आते थे तो सिटी कोर्ट में जो पेशी होती थी इब्तदाई इनकी अपनी सेटिंग होती थी जाहिर पेशकारों वगैरह को पैसे देके तो उसके बाद फरी तौर पे जो है वो ये

15:07

Speaker A

लोग अपनी पेशी भुगता के उसके बाद इनको कैदियों को या जितने भी जेल से लोग आते थे इनको वेट करना पड़ता था क्योंकि गाड़ी तो शाम को ही जाएगी 4 या 5:00 बजे तो ये फिर क्या करता था कि जो पुलिस वाले इसकी

15:19

Speaker A

निगरानी पर तैनात होते थे उनके [संगीत] साथ खर्चा वगैरह देके उनको ये अपने घर चला जाता था और उनको साथ ले जाता था। तो पहले कई मर्तबा ऐसा हो चुका था। जब आखरी एक दिन हुआ तो वह जो थे अपने घर के बाहर बिठा के

15:33

Speaker A

उनकी खातिर मदारत कर रहे थे। उनको वो खर्चावर्चा दे रहे थे और उसके बाद जो है वो काफी देर उन्होंने जब इंतजार किया तो यह घर से बाहर नहीं आया। तो पता ये चला कि उन्होंने कहा कि भ वो तो चला गया है। तुम

15:45

Speaker A

लोग वापस जाओ। तो फिर इन्होंने आके सिटी कोर्ट में आके जो है वो एक फर्जी कहानी बना के कि जी हम उसको लाए थे यहां से वो फरार हो गया और एक एफआईआर वहां पर सिटी कोर्ट में उसकी दर्ज करवा दी कि वो हमारे

15:56

Speaker A

पास से फरार हुए जबकि पुलिस उसको उसके अपने घर पर लेरी में लेकर गई हुई थी और वो वहां से फरार हुआ था। रहमान बलोच 10 जून 1997 को सिटी कोर्ट से फरार हुआ था। उसके बाद वह हब में रूपोश हो गया और वहां अपना

16:09

Speaker A

नेटवर्क कायम किया। इस दौरान उसके ताल्लुकात कई आला पुलिस अफसरान और दीगर इदारों के हुकाम से भी कायम हुए। वो कई बार ईरान भी गया। मफरूरी के दौरान रहमान कई बार कराची भी आया और मंशियात का धंधा भी मुनज्जम करता रहा। रहमान ने दौराने

16:25

Speaker A

तफ्तीश बताया था कि उसने हब में पुलिस की इजाजत से जुए और मंशियात के अड्डे खोले थे। हब में उसने एक आलीशान घर भी बनाया था जो वाइट हाउस कहलाता था। उस वाइट हाउस पर चौधरी असलम ने धावा भी बोला था। रहमान ने

16:39

Speaker A

दोबारा लेरी में कदम जमाना शुरू किया। उसने अपने पुराने दुश्मन बाबू डकैत को ठिकाने लगाया। रहमान और उसके कारकुनों ने हाजी लालू गैंग के खिलाफ भी कार्रवयां शुरू कर दी थी। जिससे लेरी में एक तवील गैंग वॉर का आगाज हुआ। इस जंग में एक तरफ

16:54

Speaker A

लालू, उसके बेटे अरशद पप्पू और अरफात वगैरह थे तो दूसरी जानिब रहमान बलोच, नूर मोहम्मद उर्फ़ बाबा लाडला, जाहिद शरीफ केचू और फैसल पठान शामिल थे। जब वह फरार हुआ तो उसके बाद फिर उसने अपना दोबारा से गैंग एस्टैब्लिश करना शुरू किया, स्ट्रांग

17:12

Speaker A

करना शुरू किया और वह लेरी में जोर पकड़ता चला गया। अच्छा यह वो दौर था जब वो जेल में था तो जाहिर है अरशद पप्पू वालों ने यानी रहमान हाजी लालू वालों ने अपने पैर फैलाए थे लेरी में कोई ढाई साल का अरसा जो

17:23

Speaker A

है रहमान जेल में रहा था और दूसरी तरफ बाबू डकैत वालों ने भी अपने पैर फैलाए थे। तो यहां से जो है वो बेसिकली अब बदला जो है वो रहमान के अंदर था। और उसने जो पहला मर्डर उस साइड का किया वह इनायत का मर्डर

17:37

Speaker A

था। और इनायत जिस तरह से रहमान और अरफात आपस में हमजुल्फ थे इसी तरह से इनायत और अरशद पप्पू आपस में हमजुल्फ थे और इनायत को जो है वो फिर रहमान ने एक दिन जो है फुलरी के इलाके में ही उसने कत्ल कर दिया।

17:52

Speaker A

यह वो कत्ल था जो बेसिकली गैंग वॉर की इब्तदा भी बना। रहमान हमारा अपना आपका बच्चा था। उसने हमारे साथ नाजायज किया ज्यादती किया हमारा ही माला हुआ हमारे लिए नासूर बन गया रहमान ने हमारे साथ ज्यादती किया उसने मेरा को

18:08

Speaker A

उठाया किया उससे ₹ लाख लिया इनायत नाम का उसके बाद जो रहमान ने चौथा दिन को मारा तो मुझे फ़ किया बोला मैंने आपका को मार दिया उसका लाश पड़ा उठा ले फिर से हमारा दुश्मनी शुरू पुलिस के तफतीशी रिकॉर्ड के मुताबिक रहमान

18:25

Speaker A

ने लेरी के बाहर भी टारगेट किलिंग का काम शुरू कर दिया 2001 में उसे कराची अंडरवर डॉन शोएब खान की सुपारी मिली। सुपारी यानी पैसे लेकर कत्ल करने का काम। ₹ करोड़ की यह सुपारी भोलू गैंग के सरबराह मंजर

18:40

Speaker A

अब्बास ने दी थी। रहमान ने अपने साथियों के साथ मलीर पुल पर शोएब खान पर कातिलाना हमला किया। इस हमले में शोएब खान जख्मी हुआ। मगर चार पुलिस वाले मारे गए। बहरहाल इस किस्म की झड़पें भी चलती रही। मगर

18:52

Speaker A

रहमान और उसके गिरोह का असली मुकाबला हाजी लालू गैंग से ही था। जिसमें भत्ते, अगवाए बराए तावान, मनशियात और जुएं के अड्डों के पैसे की रेल पेल थी। दूसरा काम जो रहमान ने किया वह यह किया कि जो यह कश्ती चौक है लिहारी में जहां से

19:09

Speaker A

बलूचिस्तान के लिए बसें चला करती हैं। तो यहां पर एक सिंध बलूचिस्तान ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन का एक दफ्तर भी था और उस वक्त उसके सदर हुआ करते थे मेहरान बलोच। ये मेहरान बलोच जो है वो हाजी लालू का नुमाइंदा था और उसने ही उसे

19:22

Speaker A

सदर बनवाया हुआ था और इस इस बस अड्डे से जो है वो भत्ते की रकम जो है वो हाजी लालू के पास जाया करती थी। रहमान ने यह किया कि मेहरान बलोच को ओदे से हटा दिया और उसकी जगह मामा फैजू को फैज

19:34

Speaker A

मोहम्मद उ मामा फैजू को जो है उसने सदर बना दिया और यह कहा कि अब इस अड्डे से पैसा जो है वह हाजी लालू की तरफ नहीं जाएगा। अब पैसा जो है वह इधर आएगा रहमान के पास। यह चीज़ उन लोगों को बहुत ज्यादा

19:46

Speaker A

बुरी लगी। हाजी लालू वालों को और अरशद पप्पू वालों को और उन्होंने जो है फिर एक दिन अरशद पप्पू ने एक Alto कार में आकर इसको गिरफ्त इसको मामा फैजू को बस के अड्डे से उस एसोसिएशन के दफ्तर से जो है

19:59

Speaker A

वो अकवा किया और अपना साथ ले गए। अरशद पप्पू के गिरोह के लोगों ने मामा फैजू जो कि उज़ैर बलोच का वालिद था उसको किडनैप किया और उसके छोड़ने के लिए उन्होंने उस पे उस वक्त कोई रैंडसम मांगा और तीन चार

20:15

Speaker A

पांच दिन तक यह बात रही। उसके बाद उन्होंने उसको तावान की रकम भी दे दी। इसके बावजूद जो है वो फैजी फैजू मामा जो थे उनकी लाश मिल गई और उसको उन्होंने कत्ल करके लाश फेंक दी। जिसके बाद इनकी फिर यह

20:26

Speaker A

दुश्मनी का आगाज हुआ। उजैर उन दिनों तो स्टूडेंट था। शायद कॉमर्स कॉलेज में पढ़ता था और कभी भी इस तरह की एक्टिविटी ना सोच थी ना कोई वो थी पर उसके बाद इसने जो है वो रहमान के साथ शामिल हुआ और उनके साथ

20:39

Speaker A

मिलके फिर ये अरशद पप्पू और इनके गैंग के खिलाफ जो है वो इन्होंने लड़ाई शुरू की जो कि आखिर तक जो है वो मैं समझता हूं कि अब तक अब तो हाजी लालू भी नहीं है। अर्शद पप्पू या उसकी फैमिली का कोई बंदा ऐसा

20:51

Speaker A

नहीं है। और वो यहां अगर बचे कुचे कुछ उसकी फैमिली के लोग थे वो भी यहां से अब हब शिफ्ट हो गए हैं। और जहां इनका पाक कॉलोनी में पूरा निजाम था वो सारा जो है वो खत्म हो चुका है। अब

21:03

Speaker A

सीनियर पुलिस अफसरों के मुताबिक पप्पू ने एक दिन कलाकोट में रहमान पर भी हमला किया। मगर वह बच निकला तो पप्पू के गुस्से का रुख रहमान के रिश्तेदारों की जानिब हो गया। दोनों जानिब से एक दूसरे के अजीजों

21:17

Speaker A

और दोस्तों के कत्ल का सिलसिला शुरू हुआ। हालात इस कदर बिगड़े कि रहमान को लेरी से बलचिस्तान फरार होना पड़ा। फिर पुलिस ने अरशद पप्पू और हाजी लालू को गिरफ्तार कर लिया। तो रहमान बलोच वापस लिया आया और

21:31

Speaker A

अपने मुखालिफिन को चुन चुन कर मौत के घाट उतारने लगा। हाजी लालू गैंग के अफराद को जब भी मौका मिलता हिसाब चुकता करने की कोशिश करते। रहमान बलोच ने बाद में पुलिस की तफ्तीश में एतराफ किया कि वह पुलिस

21:44

Speaker A

अफसरों, अहलकारों, मुखबरों और मुख्तलिफ कारिंदों समेत 35 अफराद के कत्ल में मुलविस था। रहमान बलोच और हाजी लालू गैंग की इस लड़ाई में कुछ ही अरसे में हजारों अफराद मारे गए। लिहारी की समाजी और नामवर शख्सियात ने कत्लो गारत का यह सिलसिला

21:58

Speaker A

रुकवाने की कोशिश की। उन शख्सियात में बलोच इत्तहाद तहरीक के सरबराह अनवर भाईजान सहाफी सैद सरबाजी अजीज संघोर और इस इलाके के एमएलए नबील गबोल ने आसिफ जरदारी से मुलाकातें की। यह परवेज मुशर्रफ का दौर था। आसिफ जरदारी वैसे तो जेल में थे मगर

22:16

Speaker A

बीमार पड़े तो इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल थे। क्लिफटन में वाकई अस्पताल उनके दोस्त डॉक्टर आसिम हुसैन का है। बहरहाल आसिफ जरदारी ने कत्लो गारत पर परेशानी का इज़हार किया और कहा कि यह सिलसिला रुकवाया जाए। हाजी लालू भी उन दिनों जेल में थे।

22:31

Speaker A

मशवरा दिया गया कि उनसे जमानत ली जाए कि उनका गैंग रहमान बलोच के खिलाफ कोई हमला ना करें। एक बलोच सरदार ने कहा कि हाजी लालू तो यह जबान दे देंगे लेकिन रहमान की जमानत कौन देगा? बहरहाल फिर अनवर भाईजान

22:45

Speaker A

को सालिस बनाया गया। अनवर भाईजान अरशद पप्पू के मामू ससुर थे। मगर वो समाजी शख्सियत थे। इसीलिए सब उनका एतराम करते थे। अभी उन्होंने सालसी की कोशिश शुरू ही की थी कि 8 जनवरी 2005 को रहमान बलोच ने

22:59

Speaker A

उन्हें ही कत्ल कर दिया। 2005 को जो है पप्पू के वाइफ का सर मामू जो हमारा साथी दुश्मनी था उनसे हमें सलाह मिली कि वह किसी जनाजे में आ रहे तो हम लोग पहले वहां पर रोड पे बैठ गए थे गरीब

23:13

Speaker A

शाह रोड पे तो जैसे ही आया हमने उसप फायरिंग किया भाई का नाराज हो गया और जो इसका साथी जख्मी हो गया था हम लोग मौके पे फरार हो गए थे क्यों उस फायरिंग करी जो पप्पू के वाइफ का सजा मामू था और हम लोगों

23:26

Speaker A

का दुश्मनी था उससे कंप्लेंट करता था खिलाफ ये सारी लेटे बहरहाल अनवर भाईजान के कत्ल के बाद सुलह और अमन की सब उम्मीदें दम तोड़ गई। आसिफ जरदारी भी यह कहकर साइड लाइन हो गए कि रहमान ने तो सालिस को ही कत्ल कर डाला।

23:42

Speaker A

अरशद पप्पू ने उसके जवाब में रहमान के रिश्ते के चचा को कत्ल कर दिया और उनकी आखिरी चीखें फोन पर रहमान को सुनाई और जैसा कि मैंने बताया था कि वो परवेज मुशर्रफ का दौर था और मुत्तहदा कौमी

23:53

Speaker A

मूवमेंट का शहर पर दोबारा होल्ड हो चुका था। रहमान ने भी मलीर, गोलीमार, खामोश कॉलोनी, कासिमाबाद, डालमिया और दीगर इलाकों में अपने पैर जमाना शुरू कर दिए थे। और उसके कारिंदे इन इलाकों में मंशाद फ़रोशी, जुए के अड्डे चलाने और भत्ताखोरी

24:09

Speaker A

में मुलव्विस थे। रहमान बलोच की कहानी में यहां एंट्री होती है कराची ऑपरेशन के मशहूर किरदार चौधरी असलम की। चौधरी असलम। चौधरी असलम ओपनली बात थी कि इन्होंने जो 92 में एमकेएम के खिलाफ जो ऑपरेशन शुरू हुआ वो चौधरी असलम उसके मरकजी किरदार थे।

24:28

Speaker A

इसी तरह और जितने भी पुलिस अफसर थे मरकजी किरदार थे। फिर बाद में जब जनरल परवेज मुशर्रफ का इ्तदार आया उन्होंने एमकेएम के ऊपर हाथ रखा। इनका ऑपरेशन थोड़ा सा इनके खिलाफ खत्म हुआ। ना सिर्फ ये फिर हुकूमत

24:41

Speaker A

में शामिल हो गए। फिर एक पैटर्न ऐसा चेंज हुआ के रऊ सद्दीकी जब वज़र दाखला थे तो चौधरी असलम की जो है वह उनके साथ पैचअप होता है। फिर चौधरी असलम जो है वो अपने तमाम एक्टिविटीज जो थी वो उनके साथ मिलकर

24:56

Speaker A

जो है वो करने लगे। फिर एक लेरी टास्क फोर्स उन दिनों बनाई गई। बुनियादी तौर पर जो गैंग वार का लफज़ इस्तेमाल होता है मैं समझता हूं वो एक पॉलिटिकल सेटअप था। वो इस तरीके से के एमक्यूएम जो थी वो लारी में

25:09

Speaker A

किसी भी सूरत एंट्री देना चाहती थी मुतदा कौमी मूवमेंट बनने के बाद वहां अपने जो है वो इलेक्शन लड़ना चाहती थी। वहां अपना कोई निजाम सेटअप जो है वो खड़ा करना चाहती थी। लेकिन वहां पर बलोच जो थे या पीपल्स

25:22

Speaker A

पार्टी का एक बड़ा निजाम था वहां वो किसी भी सूरत जो है वो उनको वहां नहीं होने देते थे और बहुत ज्यादा मुजामत थी। जिसके बाद एमकेएम ने जो है वो हाजी लालू के साथ जो है वो उसके ऊपर हाथ रखा और उसे दरपर्दा

25:35

Speaker A

उसकी जितनी क्रिमिनल एक्टिविटीज थी उनको उन पे खामोश रहते थे और उसके बाद उसको इस्तेमाल करने की कोशिश की उन्होंने लहरी में एंटर होने के लिए यह बुनियादी बात जो झगड़ा इनका शुरू हुआ शुरुआत थी ये के वो

25:48

Speaker A

लेरी में एंट्री देना चाहते थे एमकएम को और रहमान डिकैत या दूसरे जो लोग थे वह पीपल पार्टी की सपोर्ट में किसी किसी भी सूरत उनको लियारी में दाखिला नहीं देना चाहते थे। यह लड़ाई थी बुनियादी तौर पर। तो रऊफ

26:02

Speaker A

सद्दीकी ने जो है वो लिया टास्क फ़ उस वक्त वो करवाई और चौधरी असलम को जो है वो उसका सरबराह बनाया और वो बुनियादी तौर पर लड़ाई तो ऐसी थी जो मैंने आपको बताया पॉलिटिकल थी। वो किसी भी सूरत जो उनके रास्ते में

26:15

Speaker A

रुकावट आ रहा था वो रहमान डिकैत या उसके साथी थे। उनको खत्म करने के लिए इन्होंने जो है वो ऑपरेशन शुरू किए। जैसे कि हब में एक बड़ा ऑपरेशन किया। वहां पे एक एसएओ भी शहीद हुआ और वहां पर रहमान डकैत तो वहां

26:27

Speaker A

से नहीं मिल सका या उसके लोग नहीं मिल सके। बड़ी नाकामी हुई पुलिस को। अबारी टास्क फ़ोर्स को टास्क यही था कि आपने जो है वो लेरी को साफ करना है और उस वक्त जो है फिर यह लग गया चौधरी रहमान के पीछे और

26:38

Speaker A

एक दिन जो है रहमान को इतला इसको चौधरी को इतला मिलती है कि रहमान जो है वो हब के इलाके में जो उसका एक ठिकाना है जिसे वाइट हाउस भी कहा जाता है वहां मौजूद है और ये इस इंफॉर्मेशन में जो है वो एक हमारा जो

26:50

Speaker A

कौमी इदारा है सात इदारा उसके लोग भी उसकी इंफॉर्मेशन भी शामिल थी और ये मुश्तरका ऑपरेशन था इस ऑपरेशन के लिए जब ये वहां पहुंचते हैं तो रहमान वाले पहले से तैयार थे और वह पुलिस के ऊपर फायरिंग करते हैं

27:04

Speaker A

और पुलिस की इनकी फायरिंग से जो है एक एसएओ अशद भट्ट समेत जो है वो चार पुलिस अहलकार जो है वो मारे जाते हैं। इरफान बहादुर नहीं सॉरी उमर शाहिद हामिद जो है वो जख्मी होते हैं और ये लोग जो है वो

27:18

Speaker A

वहां से एक नाकाम मुहिम के बाद वापस आ जाते हैं। अच्छा इसके बाद जो एक और चीज जो है इस वाक्य में बड़ी इंपॉर्टेंट है वो यह है कि इस वाक्य के चार दिन के बाद जो है वो रहमान का भाई रहीम जो है वो एक पुलिस

27:30

Speaker A

मुकाबले में लेरी में मारा जाता है। इस हवाले से इंफॉर्मेशन यही है कि जनाब रहीम को जो है उसके सुसर से मांगा गया तो पुलिस ऑफिसर्स ने उससे कहा कि आप इसे हमारे हवाले कर दें। हम इसकी गिरफ्तारी जाहिर

27:40

Speaker A

करके इसे जेल भेज देते हैं। कहीं ऐसा ना हो कि चौधरी जो है वो गुस्से में जो है इसे कत्ल कर दे रहमान से बदले के लिए। वो हवाले कर देता है सुसर रहीम को और अगले दिन इतला आती है कि रहमान का भाई रहीम

27:54

Speaker A

पुलिस मुकाबले में मारा गया। मई 2005 में होने वाले इस ऑपरेशन में नाकामी असलम चौधरी को [संगीत] अपने करियर पर बदनुमा दाग लग रही थी। वो रहमान बलोच को जिंदा या मुर्दा किसी भी हाल में गिरफ्तार करना चाहते थे। वो ना मिला तो

28:09

Speaker A

सिर्फ 4 दिन बाद 22 मई 2005 को एक मुबईना मुकाबले में उसके भाई को मार दिया गया। चौधरी असलम का कलेजा फिर भी ठंडा ना हुआ। उन्होंने रहमान की तलाश जारी रखी। बिल आखिर 1 साल बाद उसका सुराख कोएटा में

28:23

Speaker A

मिला। 18 जून 2006 कोटा के सेटेलाइट टाउन में ऑपरेशन करके रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तारी जाहिर नहीं की गई और कराची में एक खुफिया मुकाम पर कैद करके उससे तफ्फतीश जारी रही। अभी रहमान बलोच से तफ्फतीश का सिलसिला चल ही रहा था

28:40

Speaker A

कि चौधरी असलम खुद गिरफ्तार हो गए। जी हां, लेरी टास्क फोर्स सरबराह असलम चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया था। असल में हुआ यह था कि इस फोर्स ने 12 जुलाई 2006 को एक पुलिस मुकाबले में एक इश्तहारी

28:59

Speaker A

मुलजिम माशूक बरोही को मारने का दावा किया जो अगवा बराए तावान की कई वारदातों में मतलूब था। बाद में पता चला कि मरने वाला माशूक बरोही नहीं बल्कि एक बेगुनाह शख्स रसूल बख्श बरोही था। उस वक्त के चीफ

29:12

Speaker A

जस्टिस इफ्तखार चौधरी ने जाली पुलिस मुकाबले का नोटिस ले लिया। अब यह मामला चल ही रहा था कि रहमान की एक बीवी ने हाईकोर्ट में दरख्वास्त दायर कर दी कि रहमान की गिरफ्तारी जाहिर की जाए। चौधरी असलम ने एक पुलिस अफसर के जरिए रहमान के

29:26

Speaker A

अहलेखाना से डील की कि वह दरख्वास्त वापस ले लें। तो वह गिरफ्तारी जाहिर कर देंगे। अभी इस डील पर अमल हुआ भी नहीं था कि सुप्रीम कोर्ट के हुकुम पर चौधरी असलम को गिरफ्तार कर लिया गया। तो, दूसरी मर्तबा

29:38

Speaker A

जो गिरफ़्तारी है रहमान की, वह कोटा के सेटेलाइट टाउन से है। कोई 1 साल गुजर गया था। इस एक साल के बाद जो है वह रहमान को कोएटा के इलाके से सेटेलाइट टाउन से गिरफ्तार किया गया। और यह ऑपरेशन भी जो है

29:51

Speaker A

यह एक इंटेलिजेंस इदारे का और लिहारी टास्क फ़ोर्स का जो है मुश्तका ऑपरेशन था। बुनियादी बात ये थी कि लहरी टास्क फोर्स जब बनी तो उसके बाद तो जाहिर है कि एक्टिविटीज पूरी हर तरह से होती थी और उस

30:01

Speaker A

वक्त जनरल परवेज मुशरफ की हुकूमत थी तो वज़र दाखला सिंध हुकूमत की जितने भी वो थे उनके साथ मुख्तलिफ एजेंसीज का जो वो मुदाखलत थी इन्वॉल्वमेंट थी वो भी इनको साथ देते थे और जितनी भी उनकी गिरफ्तारियों के हवाले से इनफेशन होती थी

30:15

Speaker A

वो शेयर करते थे। तो यूं हमारे पास जो इतला थी उस वक्त के रहमान को जो है वो एजेंसीज ने ट्रेस करके उसको गिरफ्तार किया और उसके बाद उसको कराची मुंतकिल किया और फिर चौधरी असलम और लहरी टास्क फोर्स की

30:28

Speaker A

टीम के हवाले किया फदर इन्वेस्टिगेशन के लिए। अब उन्होंने इसकी गिरफ्तारी जाहिर नहीं की और उसको एक पुलिस अफसर थे उनके घर पे रखा। जहां इनसे तफ्तीश शुरू की गई। तफ्तीश ये थी काफी चीजें डिस्क्लोज हो गई थी और मुख्तलिफ उस पे कोई ये भी दो बताते

30:44

Speaker A

हैं कि लोगों के इनकी आपस में दोस्ती भी हो गई थी पैचअप भी हो गया था रजाकाराना तौर पर एक दूसरे से ये काफी चीजें इन्होंने डिस्क्लोज करके वो आगे का ला अमल भी तैयार कर लिया था लिहाजा इस दौरान क्या

30:55

Speaker A

होता है कि चौधरी असलम और उनकी टीम जो थी तकरीबन 22-25 लोग थे पुलिस के जिनके ऊपर एक जाली एनकाउंटर का जो है वो एफआईआर कट जाती है जिसके बाद इनकी गिरफ्तारियां होती है तो इस दौरान जो था बताया गया कि रहमान

31:10

Speaker A

डिकेत जो है वह वहां से किसी तरीके से फरार हो गया या उसको फरार करा दिया गया। रहमान एक बार फिर लेरी में वापस आ गया और अरशद पप्पू गैंग के साथ लड़ाई दोबारा शुरू हो गई। कुछ ही महीनों बाद अक्टूबर 2006

31:23

Speaker A

में अरशद पप्पू को नयाबाद के एक फ्लैट से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। अरशद पप्पू के सर की कीमत ₹ लाख मुकर्रर थी और उस पर कत्ल, इदामे कत्ल, भत्ताखोरी, अगवा बराए तावान, दहशतगर्दी के 60 से ज्यादा

31:37

Speaker A

मुकदमात थे। उसकी गिरफ्तारी बजाहिर पुलिस की बड़ी कामयाबी थी। मगर दूसरी जानिब रहमान बलोच मजीद ताकतवर सोता गया। वह लेरी का बेताज बादशाह बन चुका था। अब इलेक्शन की भी आमद आमद थी। रहमान बलोच को सियासी सरपरस्ती की जरूरत थी। और एमकेएम का

31:55

Speaker A

मुकाबला करने के लिए पीपल्स पार्टी को रहमान बलोच की। इस बहामी जरूरत ने कई वारदातों में मतलूब मुलजिम रहमान बलोच को दो बार वज़र आजम रहने वाली बेनजीर भुट्टो का मुहाफिज बना दिया। पीपल्स पार्टी का लेरी हमेशा से गढ़ रहा है। ये पीपल्स

32:09

Speaker A

पार्टी का दावा भी है। और अगर देखें तो जुल्फकार अली भुट्टो हो, बेनजीर भुट्टो हो इन्होंने लेहारी से इलेक्शन लड़ा है। और जिस 2007 की आप बात कर रहे हैं इस 2007 में जब 2006 में जब ये वहां से चौधरी की

32:24

Speaker A

कैद से फरार होने में कामयाब हुआ रहमान। तो अगले साल जो है वो इलेक्शन की का साल था 2007 जो बाद में डिले भी हुए इलेक्शन बीबी की शहादत की वजह से। तो क्योंकि इलेक्शन से पहले का माहौल बनना

32:38

Speaker A

शुरू हो चुका था। तो उस वक्त जो है वह बेसिकली पीपल्स पार्टी और रहमान के दरमियान जो है एक डील हो गई। दोनों एक दूसरे की जरूरत थी। पीपल्स पार्टी को लेरी में होल्ड चाहिए था। उसके लिए उन्हें

32:50

Speaker A

रहमान की जरूरत थी और रहमान को जो है सियासी छतरी चाहिए थी। उसके लिए उसे पीपल्स पार्टी की जरूरत थी। देखिए बेसिकली जैसे कि मैं पहले तस्करा कर चुका हूं कि पीपल्स पार्टी के लिए ये लोग बहुत बड़ा सरमाया थे। असासा थे क्योंकि एक

33:03

Speaker A

पुलिस पीपल्स पार्टी के लिए ही वहां पर जो है वह एक बड़ा पुराना जो सेटअप था पीपल्स पार्टी का तो उसको यह बरकरार रखना चाहते थे और जैसे कि एमकेएम उनको तोड़ना चाहती थी तो इसकी वजह से इनकी

33:16

Speaker A

पीपल्स पार्टी में बहुत ज्यादा कुर्बत हो गई थी। फिर बीवी के साथ जो था वो उनकी जो जानिसाराने बेनजीर के नाम से इन्होंने जो एक तंजीम शुरू की फिर जब बीवी की सिक्योरिटी के ऊपर मामूर हुए जब बेनजीर

33:30

Speaker A

पाकिस्तान वापस आई थी जब उनके ऊपर कारसाद के करीब हमला हुआ उस तमाम सिक्योरिटी में भी ये इतला थी कि रहमान उनके साथ था बल्कि ये भी कहा गया कि रहमान जो है वो उस वक्त बीवी को वहां से निकालकर जब हमले के बाद

33:42

Speaker A

जो है वो बाफाजत बलावल हाउस पहुंचाने में भी जो है वो रहमान का ही काफी किरदार था। फिर एक दफा यह भी हुआ कि जब पाकिस्तान पीपल पार्टी की सिंध में हुकूमत बनी तो उस वक्त असेंबली के अंदर जो है वह रहमान डकैत

33:54

Speaker A

के आने की इतला मिली थी। कुछ लोगों ने उनको देखा था। यह खबरें भी उस वक्त यानी अखबारात में नुमाया हुई थी। अब्दुल रहमान बलोच जो था वो पीपल्स पार्टी का सच्चा जाला था। जो उसके साथ शहीद हुआ अकील बलोच

34:05

Speaker A

जो सच्चा जानिसार था। मोहतरमा का प्रोटोकॉल में होता था। अब्दुल रहमान बलोच खुद था। जब मोहतरमा के ऊपर हमला हुआ। मोहतरमा को बायपासद बिलावल हाउस तक पहुंचाया गया। हैरतंगेज तौर पर 27 दिसंबर को बीबी की हिफाजत की जिम्मेदारी जान निसाराने बेनजीर

34:22

Speaker A

भुट्टो को नहीं सौंपी गई। बहरहाल बेनजीर की शहादत के बाद पीपल्स पार्टी ने इलेक्शन में कामयाबी हासिल की। पाकिस्तान पीपल पार्टी डिक्लेयर्स विक्ट्री इन ऑल ऑफ़ पाकिस्तान। वी हैव वन दिए इलेक्शंस। [संगीत] उसके साथ ही रहमान बलोच के असरो रुसूख में

34:44

Speaker A

भी बेपनाह इजाफा हो गया। 2008 में रहमान ने पीपल्स अमन कमेटी के नाम से एक तंजीम बनाई और एमकेएम के तंजीमी ढांचे के तर्ज पर अमन कमेटी के यूनिट और सेक्टर्स कायम कर दिए। मुख्तलिफ इलाकों में पार्टी ऑफिस

34:57

Speaker A

खोले और इलाका जिम्मेदार मुकरर किए। रहमान ने भत्ताखोरों का दायरा भी बढ़ा दिया। खारा दर, मीठा दर, सराफा बाजार, खजूर बाजार, जू बाजार, हाजी कैंप, टिमबर मार्केट और मोहलका इलाकों में कारोबार करने वालों को रहमान बलोच को भत्ता देना

35:13

Speaker A

पड़ता था। वरना पहले लिफाफे में गोली आती थी और फिर तावान ना देने पर दस्ती बम हमला। लेहारी के तमाम बस अड्डों, ट्रक अड्डों, फिशरी के ताजों से भी बकायदगी से भत्ता लिया जाता था। पीपल्स पार्टी की हुकूमत

35:32

Speaker A

थी। यानी सया बहे कोतवाल तो डर काहे का? यही वजह है कि कराची पोर्ट से निकलने और किमाड़ी से गुजरने वाला कोई कंटेनर रहमान के नेटवर्क को भत्ता दिए बगैर नहीं गुजर सकता था। नेटो सप्लाई के कंटेनर भी यहीं

35:46

Speaker A

से अफगानिस्तान जाते थे। उनको भी रहमान को भत्ता देना पड़ता था। वरना उनके कंटेनर्स लूट कर लेरी ले जाए जाते थे। ईरान से स्मगलशुदा तेल लाने वाले भी इसी गैंग को भत्ता देकर महफूज़ रह सकते जब आप उस वक्त

35:58

Speaker A

की वज़र आजम के बहुत करीब हो और आपकी जो उनका बलावल हाउस है वहां आना जाना बहुत ज्यादा वो हो गया था और यह पीपल पार्टी का एक असासा थे इस लहरी और इसके जो बलोच आबादियां थी वहां पर और उसके बाद फिर

36:12

Speaker A

जाहिर है इनको एक काफी खुला हाथ दे दिया गया था और इनके ऊपर हाथ रख दिया गया था कि इन्होंने जो पिटिकल सेटअप थे उनके अंदर मुदाखला शुरू की फिर एक लेरी में अमन कमेटी के नाम से एक तनजीम बनाई गई और उसके

36:24

Speaker A

फिर मुख्तलिफ इलाकों में कराची के यूनिट्स बनाए गए वहां पर जो पीपल पार्टी या जो बलोच कम्युनिटीज थी जहांजहां जिनजिन इलाकों में कराची में वहां उनके दफातर खोले गए। फिर इनका जो एक निजाम इनके साथ ऐसे लोग थे इन्होंने मुख्तलिफ चंदे के नाम

36:40

Speaker A

पे जो है वो एक भत्ते का अमल शुरू हो गया। मैं समझता हूं सराउंडिंग्स में जो फिर पूरे कराची में आहिस्ता-आहिस्ता जो जितने बिजनेसमैन थे, बिल्डर थे या आपके जो खारा या इन इलाकों के जो कारोबारी लोग थे,

36:53

Speaker A

आरती थे जो उन तक जो है वो पर्चियां जाने लगी, पैसे लिए जाते थे सेटअप के नाम पे। इसके अलावा गुटके और स्मगलशुदा छालिया का काम भी रहमान की सरपरस्ती में लेरी में होने लगा। उन सब कामों से होने वाली कसीर

37:08

Speaker A

आमदनी से रहमान ने करोड़ों की जायदादें बना ली। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 2006 तक रहमान कराची और बलूचिस्तान के कई इलाकों में 150 एकड़ जराई जमीन, 33 घरों, 34 दुकानों, 12 प्लॉटों का मालिक बन चुका था। ईरान में भी जायदादें बना ली थी। जराय

37:26

Speaker A

के मुताबिक 20078 के बाद तो इससे भी ज्यादा जायदादें बनाई गई। बहरहाल बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक रहमान बलोच ने मुत्तहदा और हकीकी के असरी बाजुओं के नाराज अरकान को भी अपने साथ मिलाना और उन्हें लेरी में पनाह देना शुरू कर दिया

37:40

Speaker A

था। इस तरह उनके गैंग ने उर्दू बोलने वालों के इलाकों में भी भत्ताखोरी शुरू कर दी थी। पीपल्स अमन कमेटी के दफातिर हर इलाके में खुलने लगे तो मुत्तहैदा को डर हो गया था कि गैंग वॉर पूरे शहर में ना

37:51

Speaker A

फैल जाए। रहमान बलोच अब सियासी तौर पर इतना मजबूत हो गया था कि लियारी और आसपास के इलाकों से कौन सुबाई और कौमी असेंबली का रुकुन बनेगा और कौन टाउन नाज़िम होगा। यह फैसला वही करता था। अबाई घर के सामने

38:04

Speaker A

बना एक बड़ा सा डेरा हर वक्त आबाद रहता। वो अब सरदार अब्दुल रहमान बलोच कहलाने लगा था। इलाके के लोगों के मसाइल हो, लेनदेन के मामलात हो या दूसरे मसले। रहमान बलोच के इस डेरे पर रोजाना जिरका मुनकद होता।

38:19

Speaker A

बेतहाशा पैसा आया तो उसने इलाके में फलाही काम किए। मदरसे, स्कूल और क्लीनिक बनवाए। आज भी उसके रिश्तेदार और इलाके के लोग उसे अपना खैरख्वाह समझते हैं। अब्दुल रहमान बलोच ने यहां पर यह स्कूल है। आपके सामने इसको तामीर करवाया। पार्क

38:35

Speaker A

है और यह हमारे पास ईदगाह है नमाज़ जनाजा पढ़ने के लिए ईद की नमाज़ के लिए रोड बनवाए थे उस टाइम अभी हमारे पास लहरी में मीठा पानी कारा पानी माशा्लाह हर चीज आपको 24 घंटा मिलता है तो अब्दुल रहमान की वजह से

38:47

Speaker A

थी रहमान बल गरीबों का मसीहा था देखिए एक्चुअली होता है क्या आप फिल्मों में भी देखते हैं कि जो क्रिमिनल होते हैं या बड़े-बड़े जो बड़ी-बड़ी वारदातें करते हैं बड़े-बड़े डाकू होते हैं जो अपनी कम्युनिटी होती है उनकी वो बहुत हेल्प

39:01

Speaker A

करते हैं। तो लारी में देखिए एक चीज़ तो वह कि इन्होंने पॉलिटिकली लेरी के जो लोग थे वह भी नहीं चाहते थे कि एमकेएम या इस तरह की वहां एलिमेंट्स आकर कोई इलेक्शन लड़े या कोई ऐसी चीज हो। एक तो इन्होंने बहुत उनको

39:13

Speaker A

बहुत मजबूत हाथ दिया। दूसरी बात ये थी कि जो लेरी में इन्होंने वेलफेयर के काम बहुत किए। जिस तरीके [संगीत] से जमात इस्लामी जो है वो एक खिदमत खलक का एक इदारा चला रही है। जिस तरह एमकेएम जो है वो खिदमत

39:29

Speaker A

खलक फाउंडेशन चलाती रही है। बिल्कुल इसी तरह उसके पैरेलल इन्होंने लहरी के अंदर अपना जो है वो वेलफेयर का सिस्टम शुरू किया था। बकायदा तौर पर बड़ी-बड़ी तकारीब होती थी। तकारीब के अंदर जो है वो जो वहां के गरीब लोग थे उनकी मुख्तलिफ किस्म की

39:42

Speaker A

इमदाद होती थी। राशन तकसीम करना उनको दूसरी चीजें करना। तो ये एक बहुत बड़ा उन्होंने सेटअप शुरू किया था। स्कूल कायम करना, इलाके में दीगर मसाइल या फिर इन्होंने दिखावे के लिए एक मनशियात के खिलाफ एक कैंपेन स्टार्ट की थी लेरी के

39:56

Speaker A

अंदर मुझे याद है। तो ये सारी चीजें की थी जिसकी वजह से लेरी वाले इनको अपना मसीहा समझते थे। बहरहाल जैसा कि हमने बताया था कि इलाके के सियासी फैसले भी वही करता था। बल्कि 2005 के बलियाती इलेक्शन में तो

40:09

Speaker A

उसने अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। जो पीपल्स पार्टी के उम्मीदवारों के मुकाबले में जीत गया था। फिर रहमान ने 3 साल बाद अपने ही उम्मीदवार से इस्तीफा मांग लिया था। साथ ही उसने किमाड़ी के टाउन नाजिम से भी इस्तीफा मांगा जो उसकी एक बहुत बड़ी

40:24

Speaker A

गलती साबित हुई। बेसिकली रहमान के और पीपल्स पार्टी के जो इख्तलाफात हैं वो जाहिर है जब पीपल्स पार्टी को वहां लेरी में जरूरत थी और रहमान को उसकी जरूरत थी। तो एक दूसरे के करीब जरूर आए और इस दौरान

40:39

Speaker A

जो है वो रहमान ने कुछ अपने तौर पर फैसले लेना भी शुरू कर दिए थे। यानी एक मौके पर तो यह भी हुआ कि जब वहां बलिदयाती इंतखाबादत हुए तो मलिक फयाज जो हैं वो रहमान के एक तरह से कैंडिडेट थे और सामने

40:54

Speaker A

कैंडिडेट मलिक अहमद खान या मोहम्मद खान नाम था उनका मलिक मोहम्मद खान ये पीपल्स पार्टी के कैंडिडेट थे और ये बलिदती इंतखाबादत जो है वो मलिक फयाज़ जीत जाते हैं रहमान की [संगीत] सपोर्ट से और पीपल्स पार्टी का कैंडिडेट जो है वो लिया में हार

41:07

Speaker A

जाता है यहां ये जाहिर है पीपल्स पार्टी के लोगों को बुरी लगने वाली बात थी। लेकिन कुछ अरसे के बाद रहमान ने मलिक फयाज़ से इस्तीफा मांग लिया। यह कुछ अरसा नहीं है। इसमें भी कोई मेरा ख्याल है ढाई तीन साल

41:21

Speaker A

का कोई अरसा है। और जब उन्होंने मलिक फयाज़ से इस्तीफा मांगा तो मलिक फयाज़ ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन साथ ही जो है एक और इस्तीफा भी मांगा रहमान ने। वो मांगा किमाड़ी के टाउन नाज़िम से हुमायूं खान से।

41:34

Speaker A

हुमायूं खान ना तो रहमान के हिमायत याफ्ता थे ना पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के टिकट पर इलेक्शन जीत कर आए तो मुस्लिम लीग नून के इलेक्शन टिकट पर इलेक्शन जीत कर आए थे। हुमायूं खान ने इस्तीफा देने से इंकार

41:45

Speaker A

किया रहमान के कहने पर और उसने शिकायत की एक ऐसी बलचिस्तान की सियासी शख्सियत से जो उन दिनों आसिफ अली ज़रदारी से बहुत क्लोज थे और उन दिनों जो है आपको याद होगा 2009 में जो है कई सेनेटर्स और कई

42:03

Speaker A

अपना एमएलए और एमपीएस ने जो है वो पीपल्स पार्टी में जॉइनिंग की थी बलचिस्तान से। इस शिकायत को बहुत सीरियस लिया गया था और फिर आसिफ अली जरदारी ने जो है वो बेसिकली गो अहेड दिया रहमान के खिलाफ कारवाई का।

42:18

Speaker A

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक आसिफ अली ज़रदारी ने चौधरी [संगीत] असलम को हिदायत दी थी कि उसे मारना नहीं यानी एनकाउंटर नहीं करना बल्कि अदालत में पेश करना ताकि वो अपने मुकदमात का सामना करें। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। चौधरी असलम एक बार फिर रहमान

42:33

Speaker A

बलोच की ताक में लग गए। बिल आखिर उन्हें खबर मिली कि वो बलचिस्तान से वापस आ रहा है। उसकी गिरफ्तारी बड़े फिल्मी अंदाज में हुई और जिस रोज रहमान जो है वो पुलिस मुकाबले में मारा गया है। वो बेसिकली मंद

42:48

Speaker A

बलचिस्तान से वापस आ रहा था और एक कॉल ट्रेस होती है। ये कॉल जो है वो एक नजीर जदगाल नामी जो रहमान का एक साथी था। उसने अपने घर पर की थी और चंद सेकंड की कॉल थी जिसमें उसने बस यह कहा था कि हम बस यहां

43:03

Speaker A

से निकल रहे हैं मन से कराची के लिए। पुलिस ने जीरो पॉइंट पर नाकाबंदी की और यह नाकाबंदी आर्मी की यूनिफार्म में थी। जब ये जीप जो थी जो गाड़ी थी जिसमें जो है ये लोग कराची की तरफ आ रहे थे। ये कराची से

43:16

Speaker A

ही गई थी। औरंगजेब नाम का शख्स जो है गाड़ी लेकर गया था कराची से इनको लाने के लिए। तो रहमान ने वह पुलिस की यूनिफार्म वो आर्मी की यूनिफार्म में लोगों को देखकर पिक को देखकर जो है वह औरंगजेब को गाड़ी

43:27

Speaker A

रोकने के लिए कहा और जब गाड़ी रुकी तो सामने कैप्टन की वर्दी में इरफान बहादुर खड़े हुए थे और उनके पीछे से नमूदार हुए चौधरी असलम गिरफ्तारी के बाद फिर इनको जब रखा गया तो आमतौर पर लेरी टास्क फोर्स के जो चौधरी

43:42

Speaker A

असलम थे या उनकी टीम थी ये उन्हीं लोगों के पास था तो इतलात मिल गई थी अखबारात में खबरें भी बाज अखबारात में छप गई थी उस वक्त के रहमान बलोच रहमान डकैत को जो है वह गिरफ्तार कर लिया गया है और यह था डाउट

43:55

Speaker A

कि इनको एनकाउंटर में मार दिया जाएगा। हम क्योंकि बहुत मैं खुद लहरी में रहा हूं। बहुत क्लोज हमारे रिलेशन थे वहां के लोगों से तो हमारे बिल्कुल सामने की चीजें थी कि फिर वहां पर एक सिलसिला शुरू किया कि किस

44:08

Speaker A

तरीके से इसको बचाना है। तो बचाने के लिए फिर लहरी के जो मालदार लोग थे जो वो थे जो इनके बहुत करीब के लोग थे जिनके साथ मिलकर जो है वह पूरा निजाम एक चला रहे थे। यह वो

44:19

Speaker A

लोग जमा हुए। [संगीत] किसी ने ₹1 लाख दिए, किसी ने ₹50 लाख दिए। तो मुझे याद है कि जिनको मैं जानता हूं औरंगजेब जो थे ट्रांसपोर्टर थे ये औरंगजेब जो है वो ₹1 करोड़ तकरीबन औरंगजेब ने जमा किया। इसी

44:31

Speaker A

तरीके से और लोगों ने जो पैसे जमा किए तीन या चार लोग थे जो यह पैसा लेकर दोस्ताना माहौल में लेहरी टास्क फोर्स के जो चौधरी असलम और इनकी टीम थी उनके पास गए कि भी ताकि रहमान को जो है वो किसी तरीके से उसे

44:45

Speaker A

छुड़ा सके। अब यह सारा वो था कि अचानक इन लोगों को जो थे यह भी कांटेक्ट से खत्म हो गए। राब्ता हुआ और उसके बाद अगले दिन यह खबर आती है कि रहमान डकैत और उसके तीन या चार साथियों को जो है वो पुलिस मुकाबले

45:00

Speaker A

में मारे गए हैं। जिसमें वो सारे औरंगजेब और ये वो लोग जो बाकायदा तौर पर मकसद पैसे लेकर गए थे उसको छुड़ाने के लिए। उन्होंने पैसे भी रख लिए और उसके बाद उनको भी इसी तरीके से मारकर जो है वो एनकाउंटर जाहिर

45:12

Speaker A

किया एक बड़ा। तो उस रोज जो है इनकी कहानी जो है वह इख्तताम को पहुंची। इन्हें मलीर के इलाके में मलीर लिंक रोड पर ले जाया गया और वहां पर जो है वो अगले दिन जो उसके बाद जो प्रेस जारी हुई वो यही थी कि पुलिस

45:25

Speaker A

ने एक गाड़ी को रुकने का इशारा किया। उसमें सवार अफराद ने रुकने के बजाय पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार होने की कोशिश की और पुलिस की जवाबी फायरिंग से चार लोग मारे गए। जिनमें जो है वो जिनकी शनाख बाद

45:38

Speaker A

में रहमान नज़र जदगाल अकील इंग्लिश बूट वाला औरंगजेब के नाम से हुई। तो ये थी बेसिकली रहमान की का एंड [संगीत] अगली सुबह अखबारात में छपने वाली दो-तीन कॉलमी सुर्खियों से रहमान के अहले खानों को उसके मारे जाने का पता चला।

45:58

Speaker A

चौधरी असलम साहब तो आपको पता है बहुत माशा्लाह जाली एनकाउंटर में कितने मशहूर आदमी थे। ना इसने कितने बेगुनाह कत्ल किए थे। तो देखो बुरे का अंजाम बुरा ही होता है। सही है ना? आपके सामने सारे मिसाल है।

46:12

Speaker A

मैं बाकी आपको तो अब्दुल रहमान बलोच को तो किसी दावत पे बुलाया गया था बलचिस्तान में। उसको वहां कत्ल कर दिया गया था। चौधरी असलम को कहा गया कहते हैं आप आ जाना। आप इसकी सुपारी लेके आप अपना शो कर

46:24

Speaker A

देना। आपका रैंक बढ़ेगा। आपको पता है कोई अफसर अगर किसी को मारता है तो उसको पता है मेरा नाम हो जाएगा कि मैंने बड़े बंदे को मारा। चौधरी असलम को पता है किसने मारा। मगर चौधरी असरम ने खुद रियल मुकाबले में

46:34

Speaker A

अब्दुल रहमान को नहीं मारा। रहमान ब्रज को दावत पर बुलाकर धोखे से मारा गया है। 30 साला रहमान ने तीन शादियां की थी। उसकी बीवियों के नाम फरजाना, शहनाज और सायरा बानो हैं। मुख्तलिफ बरसों में उनके 13 बच्चे पैदा हुए। रहमान बलोच के मारे जाने

46:50

Speaker A

के बाद भी लिया गैंग वॉर का सिलसिला थमा नहीं था। क्योंकि [संगीत] उसके बाद गैंग की कमान उज़ैर बलोच ने संभाल ली थी। उज़ैर बलोच को पीपल्स पार्टी के जुल्फिकार मिर्जा की सूरत में नया सरपरस्त मिल गया था। उधर अरशद पप्पू गैंग को मुत्तहैदा

47:03

Speaker A

कौमी मूवमेंट की हिमायत हासिल हो गई थी। फिर एक नई तंजीम कच्ची राबता कमेटी भी बनाई गई। अगले 5 वर्षों में लियारी की गलियों में इतना खून बहा कि पिछले 50 साल में नहीं बहा था। उसमें कुछ कमी पहले अरशद

47:16

Speaker A

पप्पू के कत्ल के बाद आई जिसका जिक्र हमने वीडियो के शुरू में किया था। बाद में लियारी में एक भरपूर ऑपरेशन क्लीन अप हुआ और उज़ैर बलोच को भी गिरफ्तार कर लिया गया। सरदार उज़ैर जान बलोच, नूर मोहम्मद उर्फ़

47:28

Speaker A

बाबा लाडला, गफ्फार जिक्री समेत लियारी गैंग वॉर के मज़द किरदारों और मज़द पहलुओं पर हमारी वीडियोस का सिलसिला जारी रहेगा। आपको यह वीडियो कैसी लगी हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। [संगीत]

Topics: रहमान डकैत लेहारी गैंगस्टर कराची बेनजीर भुट्टो अरशद पप्पू हाजी लालू मंशियात गैंग वार पाकिस्तान राजनीति


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