**Karbala to America.... — Transcript & Summary | SozAI**
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कर्बला से अमेरिका तक इस्लामिक इतिहास और अमेरिका की महत्ता पर विस्तृत चर्चा।

## Key Takeaways

- इस्लामिक इतिहास में कर्बला का गहरा प्रभाव रहा।
- सत्ता संघर्षों ने इस्लामी दुनिया को विभाजित किया।
- स्पेन में मुसलमानों की 800 साल की हुकूमत महत्वपूर्ण थी।
- कोलंबस की अमेरिका खोज ने विश्व इतिहास को बदल दिया।
- अमेरिका की खोज के बाद मुसलमानों की वैश्विक सत्ता में गिरावट आई।

## What the video covers

- कुरान में विभिन्न सुपरपावर्स का उल्लेख और आज का सुपरपावर अमेरिका।
- रसूलल्लाह के बाद चार खलीफाओं ने मुसलमानों की छोटी सी एंपायर को विश्व की सबसे बड़ी बनाई।
- कर्बला का दर्दनाक इतिहास और बनू उमय्या व अब्बासी खानदानों के बीच सत्ता संघर्ष।
- अब्बासी खानदान ने बनू उमय्या को खत्म कर नई खिलाफत स्थापित की।
- बनू उमय्या के शरणार्थी स्पेन गए और वहां मुसलमानों की एक नई हुकूमत बनाई।
- स्पेन में मुसलमानों पर क्रिश्चियन हमले और बाद में उस्मानिया सल्तनत द्वारा शरण।
- उस्मानिया सल्तनत ने यूरोप और एशिया के बीच व्यापार मार्ग बंद किए।
- 1492 में कोलंबस ने अमेरिका की खोज की, जो भारत का नया रास्ता था।
- अमेरिका की खोज के बाद यूरोप के अन्य देश भी अमेरिका पर कब्जा करने लगे।
- अमेरिका की खोज ने मुसलमानों के विश्व प्रभुत्व को कमजोर किया।

Answers

## Questions about this video

कर्बला का इस्लामी इतिहास में क्या महत्व है?

कर्बला इस्लामी इतिहास का एक दर्दनाक वाकया है जिसमें यजीद की फौज ने रसूलल्लाह की फैमिली के कई सदस्यों को शहीद किया। इस घटना ने मुसलमानों के दिलों में गहरा दुख और गुस्सा पैदा किया।

अब्बासी खानदान ने बनू उमय्या के खिलाफ कैसे बगावत की?

अब्बासी खानदान ने कर्बला की घटना को याद दिलाकर लोगों में बनू उमय्या के खिलाफ गुस्सा बढ़ाया और फिर सत्ता हासिल करने के लिए बगावत की, जिससे बनू उमय्या की हुकूमत खत्म हुई।

कोलंबस की अमेरिका खोज का इस्लामी इतिहास से क्या संबंध है?

कोलंबस की अमेरिका खोज उस समय हुई जब उस्मानिया सल्तनत ने यूरोप और एशिया के बीच व्यापार मार्ग बंद कर दिए थे, जिससे यूरोप को भारत तक पहुंचने के लिए नया रास्ता खोजने की जरूरत थी।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A

कुरान की एक सूरत है सूर रूम जो उस जमाने की एक सुपर पावर के बारे में नाजिल हुई थी, द ग्रेट रोमन एंपायर के बारे में। और सिर्फ यही नहीं बल्कि कुरान में बार-बार ऑलमोस्ट हर जमाने के सुपर पावर्स को डिस्कस किया गया है, जैसे कि जुलकरनैन, फिरन, नमरूद। मतलब एज अ मुस्लिम अपने दौर के सुपर पावर्स को समझना एक बहुत ही इंपोर्टेंट काम है। और आज हमारे दौर का सुपर पावर है अमेरिका। अमेरिका ग्रेट अगेन। वी ऑल नो कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफात के बाद उनके चार अजीम खुलफा ने पहली बार मुसलमानों की इस छोटी सी एंपायर को दुनिया का सबसे बड़ा सुपर पावर बनाया। लेकिन सिर्फ 30 साल के बाद यह खिलाफत, खिलाफत राशिता खत्म कर दी गई और मुसलमानों की यह एंपायर एक खानदान बनू उम के कंट्रोल में आए, जिन्होंने आते ही इस इस्लामिक एंपायर को आने वाले सालों में और भी ज्यादा बढ़ाया और इसकी एक स्ट्रांग इकॉनमी भी बनाई। लेकिन इसी बनू उम के दूसरे बादशाह यजद बिन मुआविया के दौर में इस्लाम की तारीख का सबसे दर्दनाक वाकया पेश आया, कर्बला जिसमें यजीद की फौज ने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की फैमिली अहले बैत के बहुत सारे लोगों को बहुत ही बेरहमी से शहीद किया। कर्बला के वाकए के बाद अगले 70 साल तक उमैने से कोई भी बादशाहत ना छीन सका और यह आराम से मुसलमानों की इस पूरी एंपायर पर हुकूमत करते रहे। लेकिन इन 70 सालों में कर्बला का दुख मुसलमानों के दिलों से ना निकल सका और जैसे-जैसे इस्लाम फैलता गया कर्बला का गम आहिस्ता आहिस्ता गुस्से में बदलने लगा। इसके अलावा एक मसला यह था कि बनूमैया के दौर में सिर्फ अरबों की इज्जत थी और बाकी कमों को कोई अहमियत नहीं दी जाती थी और उन्हें ऐसे ही ट्रीट किया जाता था जैसे आज अरब मुक में पाकिस्तानियों और इंडियंस को ट्रीट किया जाता है। आखिर 70 साल बाद बनूमैया की इन्हीं गलतियों की वजह से लोग बनूमैया के इतने खिलाफ हो गए कि एक और खानदान अब्बासी खानदान को मौका मिला कि वो बनूमैया के खिलाफ बगावत कर सके। कहा जाता है कि अब्बासी खानदान के लोग हर शहर में जाकर वहां के लोगों को कर्बला के वाक्यात की याद दिलाते थे, जिससे लोगों में बनूमैया खानदान के लिए गुस्सा और भी बढ़ जाता था। आखिर अब्बासिया ने इसी गुस्से को यूज करके उम्य खानदान की हुकूमत को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और इस तरह अब दुनिया में एक नई खिलाफत पैदा हुई, अब्बासी खिलाफत। इस अब्बासी खानदान के पहले खलीफा ने आते यह हुकम दिया कि जहां भी उम्य खानदान का कोई भी बंदा नजर आए उसकी गर्दन उड़ा दी जाए, चाहे वह इस हुकूमत का हिस्सा हो या ना हो, किसी को भी नहीं छोड़ना। खलीफा के इस हुकम के बाद अब्बासी फौज पूरे इस्लामिक एंपायर में फैल गई और उन्होंने बनूमैया के एक-एक बंदे को ढूंढ ढूंढ कर मारना शुरू किया। और इस तरह बनूमैया के लाखों लोग मारे गए। लेकिन इस सब के बाद भी अब्बासिया का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ। अब्बासी सीधा बनूमैया के कैपिटल की तरफ गए क्योंकि उनके कैपिटल दमक में बन ममैया के सारे बादशाहों की कबर थी। तो अब्बासिया ने इन बादशाहों की डेड बॉडीज को उनकी कब्रों से निकाला और फिर उन्हें कोड़े मारकर आग लगा दी सिवाय बनूमैया के एक खलीफा के उमर बिन अब्दुल अजीज, जिनकी कबर को अब्बासिया ने बिल्कुल ठीक-ठाक रहने दिया। नाउ बनूमैया खानदान के जो लोग बच गए थे उन्हें पता था कि अब यहां रहना इंपॉसिबल है, तो वो इस इस्लामिक एंपायर को छोड़कर वेस्ट की तरफ भागने लगे और अब्बासी खानदान इनका पीछा करने लगा। बनूमैया पहले इजिप्ट की तरफ गए, फिर वहां से लिबिया, जीरिया और आखिर मोरोको तक पहुंचे। लेकिन यहां भी अब्बासिया। अब उमैने के लोगों के पास कोई और ऑप्शन नहीं था, तो वो मजबूरन इस समंदर को क्रॉस करके स्पेन में एंटर हुए। स्पेन इससे कई साल पहले ही मुसलमान फतह कर चुके थे। तो बनूमैया ने वहां के मुसलमानों से दोबारा स्पेन को फतह किया और अगेन वहां पर उमैने की एक नई हुकूमत बनाई। और इस तरह मुसलमान जो अब तक एक ही खिलाफत के अंडर रहते थे पहली बार दो एंपायर्स में डिवाइड हो गए। यहां स्पेन में जिसे उस जमाने में उंदरा ने इतनी जबरदस्त एंपायर बनाई कि स्पेन आने वाले सालों में दुनिया की सबसे जबरदस्त कंट्री बनी। और अगले 800 साल तक कोई भी मुसलमानों से स्पेन दोबारा नहीं छीन सका। लेकिन मुसलमानों की स्पेन पर 800 साल की हुकूमत के बाद अब स्पेन मुसलमानों के हाथों से हमेशा के लिए निकलने वाला था क्योंकि मुसलमानों के स्पेन के पास ही दो छोटी-छोटी क्रिश्चियन अंपायर्स थी और यह दोनों अब तक हमेशा आपस में लड़ते रहते थे। लेकिन अब अचानक एक एंपायर के बादशाह किंग फर्डिनेंड ने दूसरी एंपायर की क्वीन इबेला से शादी कर ली और इस रॉयल शादी के बाद इन दोनों अंपायर्स की दुश्मनी यां खत्म हो गई और यह दोनों मिलकर मुसलमानों के खिलाफ एक यूनाइटेड एंपायर बने। जिसके बाद फर्डिनेंड और इबेला ने मिलकर मुसलमानों के स्पेन पर हमला कर दिया और लाखों मुसलमानों को शहीद करने लगे और मुसलमानों के साथ-साथ यहूदियों को भी मारने लगे। स्पेन में क्रिश्चियंस ने मुसलमानों पर बहुत जुल्म किया। लेकिन व जमाना आज की तरह नहीं था कि दुनिया में मुसलमानों का कोई पूछने वाला ना हो। क्योंकि जैसे ही स्पेन में मुसलमानों पर जुल्म शुरू हुआ, उस वक्त के सुपर पावर उस्मानिया सल्तनत के बादशाह बयाज ने अपनी नेवी को फौरन स्पेन की तरफ भेजा कि वोह वहां के मुसलमानों और यहूदियों को बचाकर उस्मानिया सल्तनत की तरफ लाए। और फिर स्पेन से आए हुए मुसलमानों और यहूदियों को ऑटोमन बादशाह ने खुद बहुत अच्छी तरह वेलकम किया और इन सबको अपनी एंपायर, उस्मानिया सल्तनत की सिटीजनशिप दी। इन सब लोगों को यहां वेलकम करने के बाद उस्मानिया सल्तनत के बादशाहों ने यूरोप के किए गए जुल्मों का बदला लेने के लिए उनके ट्रेडर्स पर एशिया और यूरोप के दरमियान सारे रास्ते बंद कर दिए। लेकिन यूरोपिय इस सब के बाद भी अपने मिशन से पीछे नहीं हटे और आखिर साल 1492 में क्रिश्चियंस ने मुसलमानों को स्पेन से हमेशा के लिए निकाल दिया। बट वेट, इस सब का अमेरिका से क्या ताल्लुक है? ताल्लुक है। 1492 जिस साल मुसलमानों को स्पेन से निकाला गया, एग्जैक्ट उसी साल 1492 में एक स्पेनिश बिजनेसमैन एक बहुत ही अजीब और यून यक प्रपोजल लेकर बादशाह फर्डिनेंड और क्वीन इबेला के दरबार में हाजिर हुआ जिसका नाम था क्रिस्टोफर कोलंबस। असल में उस्मानिया सल्तनत के बादशाहों ने यूरोप पर इतनी सख्त पाबंदियां लगाई थी कि अब यूरोप और एशिया के दरमियान सारे रास्ते बंद हो चुके थे, जिससे यूरोप के हालात बहुत खराब हो चुके थे। क्योंकि यूरोप एक बहुत ही सर्द इलाका था और वहां अपना कोई स्ट्रांग एग्रीकल्चर सिस्टम नहीं था और वहां की जमीन बहुत ही कम चीजें पैदा करती थी। और यूरोप की सारी चीजें ज्यादातर चाइना और इंडिया से ही आती थी। लेकिन अब उस्मानिया बादशाह ने यूरोप पर सारे रास्ते बंद कर दिए थे और यूरोप के लिए अब इंडिया पहुंचना एक बहुत ही मुश्किल काम था। क्योंकि अब उन्हें इस छोटे से रास्ते की बजाय पूरे अफ्रीका को क्रॉस करके इंडिया तक पहुंचना था और इस ट्रिप पर उनके बहुत ज्यादा पैसे खर्च होते थे, जिसकी वजह से यूरोप में महंगाई बहुत बढ़ चुकी थी और यूरोप के लोग बहुत ही गरीब हो चुके थे। और इंडिया तक पहुंचना यूरोप के लिए बहुत ही लाजमी था क्योंकि इंडिया के काली मिर्च और लौंग जैसे मसाले दुनिया की सबसे इंपॉर्टेंट चीजों में से थे। सिर्फ अपने टेस्ट की वजह से नहीं बल्कि यह मसाले उस दौर के मेडिसिंस में भी यूज किए जाते थे। और मोस्ट इंपोर्टेंट, उस जमाने में दुनिया में फ्रिज और फ्रीजस नहीं थे तो लोग इन्हीं मसालों को यूज करके खाने पीने की चीजों को खराब होने से बचाते थे। उस्मानिया सल्तनत के पाबंदियों के बाद अब यूरोप को इस छोटे से रास्ते की बजाय पूरे अफ्रीका को क्रॉस करके इंडिया तक पहुंचना पड़ता था। इस सफर पर उनका खर्चा भी बहुत होता था और बहुत सारी कश्तियां तबाह भी हो जाती थी। कोलंबस का प्लान यह था कि वो इंडिया की तरफ एक नया रास्ता ढूंढेगा, जिस रास्ते को उस्मानिया सल्तनत कंट्रोल नहीं कर सकेगी। और उसका यह आईडिया बादशाह और मलका दोनों को बहुत अच्छा लगा। और इस तरह कोलंबस तीन कश्तियों के साथ पहली बार एक नई दुनिया की तरफ रवाना हुआ और बरमूदा ट्रायंगल को क्रॉस करते हुए ऑलमोस्ट 36 डेज के सफर के बाद कोलंबस की कश्तियां एक आइलैंड तक पहुंची। कोलंबस ने इस आइलैंड पर पहुंचते वहां कुछ ब्राउन कलर के लोग देखे, मतलब बिल्कुल हमारी तरह के लोग। और उसे लगा कि फाइनली हम इंडिया पहुंच चुके हैं। इसीलिए कोलंबस ने वहां सारे लोगों को इंडियंस का नाम दिया। और कहा जाता है कि अपनी मौत तक कोलंबस यही समझता था कि ये सारे इलाके इंडिया ही हैं। बट ही वाज रॉन्ग। इससे कई साल बाद एक नए एक्सप्लोरर अमरिक ने पहली बार यह ऐलान किया कि यह इंडिया नहीं बल्कि एक नई दुनिया है। और इसी अमरिकों की वजह से आज इन सारे इलाकों को अमेरिका कहा जाता है। कोलंबस के बाद स्पेन से लोग अमेरिका की तरफ आते गए और यहां के लोकल लोगों को मारकर अपनी एंपायर बनाने लगे। इसीलिए आज भी अमेरिका में सबसे ज्यादा स्पेनिश जबान ही बोली जाती है। स्पेन के बाद जब बाकी यूरोप को भी अमेरिका की इस नई दुनिया का पता चला तो फ्रांस, ब्रिटेन और पोर्च ने भी अपनी आर्मीज अमेरिका की तरफ भेजी और इसे कब्जा करने लगे। नाउ यहां तक पिछले हजार साल से मुसलमान ही दुनिया के सुपर पावर थे, उमैरा, अब्बासी, उस्मानिया। लेकिन अमेरिका की डिस्कवरी के बाद दुनिया में मुसलमानों की असल तबाही शुरू हुई क्योंकि अमेरिका से पहले दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर उस्मानी सल्तनत थी। लेकिन अमेरिका की डिस्कवरी के बाद उस्मानिया सल्तनत आहिस्ता आहिस्...

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Speaker A

को डिस्कस किया गया है जैसे कि जुलकरनैन फिरन नमरूद मतलब एज अ मुस्लिम अपने दौर के सुपर पावर्स को समझना एक बहुत ही इंपोर्टेंट काम है और आज हमारे दौर का सुपर पावर है अमेरिका अमेरिका ग्रेट अगेन वी ऑल नो कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु

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Speaker A

अलैहि वसल्लम की वफात के बाद उनके चार अजीम खुलफा ने पहली बार मुसलमानों की इस छोटी सी एंपायर को दुनिया का सबसे बड़ा सुपर पावर बनाया लेकिन सिर्फ 30 साल के बाद यह खिलाफत खिलाफत राशिता खत्म कर दी गई और

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Speaker A

मुसलमानों की यह एंपायर एक खानदान बनू उम के कंट्रोल में आए जिन्होंने आते ही इस इस्लामिक एंपायर को आने वाले सालों में और भी ज्यादा बढ़ाया और इसकी एक स्ट्रांग इकॉनमी भी बनाई लेकिन इसी बनू उम के दूसरे

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Speaker A

बादशाह यजद बिन मुआविया के दौर में इस्लाम की तारीख का सबसे दर्दनाक वाकया पेश आया कर्बला जिसमें यजीद की फौज ने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की फैमिली अहले बैत के बहुत सारे लोगों को बहुत ही बेरहमी से शहीद

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Speaker A

किया कर्बला के वाकए के बाद अगले 70 साल तक उमैने से कोई भी बादशाहत ना छीन सका और यह आराम से मुसलमानों की इस पूरी एंपायर पर हुकूमत करते रहे लेकिन इन 70 सालों में कर्बला का दुख मुसलमानों के दिलों से ना

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Speaker A

निकल सका और जैसे-जैसे इस्लाम फैलता गया कर्बला का गम आहिस्ता आहिस्ता गुस्से में बदलने लगा इसके अलावा एक मसला यह था कि बनूमैया के दौर में सिर्फ अरबों की इज्जत थी और बाकी कमों को कोई अहमियत नहीं दी

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Speaker A

जाती थी और उन्हें ऐसे ही ट्रीट किया जाता था जैसे आज अरब मुक में पाकिस्तानियों और इंडियंस को ट्रीट किया जाता है आखिर 70 साल बाद बनूमैया की इन्हीं गलतियों की वजह से लोग बनूमैया के इतने खिलाफ हो गए कि एक

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Speaker A

और खानदान अब्बासी खानदान को मौका मिला कि वो बनूमैया के खिलाफ बगावत कर सके कहा जाता है कि अब्बासी खानदान के लोग हर शहर में जाकर वहां के लोगों को कर्बला के वाक्यात की याद दिलाते थे जिससे लोगों में

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Speaker A

बनूमैया खानदान के लिए गुस्सा और भी बढ़ जाता था आखिर अब्बासिया ने इसी गुस्से को यूज करके उम्य खानदान की हुकूमत को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और इस तरह अब दुनिया में एक नई खिलाफत पैदा हुई अब्बासी खिलाफत

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Speaker A

इस अब्बासी खानदान के पहले खलीफा ने आते यह हुकम दिया कि जहां भी उम्य खानदान का कोई भी बंदा नजर आए उसकी गर्दन उड़ा दी जाए चाहे वह इस हुकूमत का हिस्सा हो या ना हो किसी को भी नहीं छोड़ना खलीफा के इस

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Speaker A

हुकम के बाद अब्बासी फौज पूरे इस्लामिक एंपायर में फैल गई और उन्होंने बनूमैया के एक-एक बंदे को ढूंढ ढूंढ कर मारना शुरू किया और इस तरह बनूमैया के लाखों लोग मारे गए लेकिन इस सब के बाद भी अब्बासिया का

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Speaker A

गुस्सा ठंडा नहीं हुआ अब्बासी सीधा बनूमैया के कैपिटल की तरफ गए क्योंकि उनके कैपिटल डमक में बन ममैया के सारे बादशाहों की कबर थी तो अब्बासिया ने इन बादशाहों की डेड बॉडीज को उनकी कब्रों से निकाला और फिर उन्हें कोड़े मारकर आग लगा दी सिवाय

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Speaker A

बनूमैया के एक खलीफा के उमर बिन अब्दुल अजीज जिनकी कबर को अब्बासिया ने बिल्कुल ठीक-ठाक रहने दिया नाउ बनूमैया खानदान के जो लोग बच गए थे उन्हें पता था कि अब यहां रहना इंपॉसिबल है तो वो इस इस्लामिक

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Speaker A

एंपायर को छोड़कर वेस्ट की तरफ भागने लगे और अब्बासी खानदान इनका पीछा करने लगा बनूमैया पहले इजिप्ट की तरफ गए फिर वहां से लिबिया जीरिया और आखिर मोरोको तक पहुंचे लेकिन यहां भी अब्बासिया अब उमैने के लोगों के पास कोई

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Speaker A

और ऑप्शन नहीं था तो वो मजबूरन इस समंदर को क्रॉस करके स्पेन में एंटर हुए स्पेन इससे कई साल पहले ही मुसलमान फतह कर चुके थे तो बनूमैया ने वहां के मुसलमानों से दोबारा स्पेन को फतह किया और अगेन वहां पर

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Speaker A

उमैने की एक नई हुकूमत बनाई और इस तरह मुसलमान जो अब तक एक ही खिलाफत के अंडर रहते थे पहली बार दो अंपायर्स में डिवाइड हो गए यहां स्पेन में जिसे उस जमाने में उंदरा ने इतनी जबरदस्त एंपायर बनाई कि

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Speaker A

स्पेन आने वाले सालों में दुनिया की सबसे जबरदस्त कंट्री बनी और अगले 800 साल तक कोई भी मुसलमानों से स्पेन दोबारा नहीं छीन सका लेकिन मुसलमानों की स्पेन पर 800 साल की हुकूमत के बाद अब स्पेन मुसलमानों के हाथों से हमेशा के लिए निकलने वाला था

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Speaker A

क्योंकि मुसलमानों के स्पेन के पास ही दो छोटी-छोटी क्रिश्चियन अंपायर्स थी और यह दोनों अब तक हमेशा आपस में लड़ते रहते थे लेकिन अब अचानक एक एंपायर के बादशाह किंग फर्डिनेंड ने दूसरी एंपायर की क्वीन इबेला से शादी कर ली और इस रॉयल शादी के बाद इन

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Speaker A

दोनों अंपायर्स की दुश्मनी यां खत्म हो गई और यह दोनों मिलकर मुसलमानों के खिलाफ एक यूनाइटेड एंपायर बने जिसके बाद फर्डिनेंड और इबेला ने मिलकर मुसलमानों के स्पेन पर हमला कर दिया और लाखों मुसलमानों को शहीद करने लगे और मुसलमानों के साथ-साथ

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Speaker A

यहूदियों को भी मारने लगे स्पेन में क्रिश्चियंस ने मुसलमानों पर बहुत जुल्म किया लेकिन व जमाना आज की तरह नहीं था कि दुनिया में मुसलमानों का कोई पूछने वाला ना हो क्योंकि जैसे ही स्पेन में मुसलमानों पर जुल्म शुरू हुआ उस वक्त के

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Speaker A

सुपर पावर उस्मानिया सल्तनत के बादशाह बयाज ने अपनी नेवी को फौरन स्पेन की तरफ भेजा कि वोह वहां के मुसलमानों और यहूदियों को बचाकर उस्मानिया सल्तनत की तरफ लाए और फिर स्पेन से आए हुए मुसलमानों और यहूदियों को ऑटोमन बादशाह ने खुद बहुत

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Speaker A

अच्छी तरह वेलकम किया और इन सबको अपनी एंपायर उस्मानिया सल्तनत की सिटीजनशिप दी इन सब लोगों को यहां वेलकम करने के बाद उस्मानिया सल्तनत के बादशाहों ने यूरोप के किए गए जुल्मों का बदला लेने के लिए उनके ट्रेडर्स पर एशिया और यूरोप के दरमियान

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Speaker A

सारे रास्ते बंद कर दिए लेकिन यूरोपिय इस सब के बाद भी अपने मिशन से पीछे नहीं हटे और आखिर साल 1492 में क्रिश्चियंस ने मुसलमानों को स्पेन से हमेशा के लिए निकाल दिया बट वेट इस सब का अमेरिका से क्या

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Speaker A

ताल्लुक है ताल्लुक है 1492 जिस साल मुसलमानों को स्पेन से निकाला गया एग्जैक्ट उसी साल 1492 में एक स्पेनिश बिजनेसमैन एक बहुत ही अजीब और यून यक प्रपोजल लेकर बादशाह फर्डिनेंड और क्वीन इबेला के दरबार में हाजिर हुआ जिसका

06:05

Speaker A

नाम था क्रिस्टोफर कोलंबस असल में उस्मानिया सल्तनत के बादशाहों ने यूरोप पर इतनी सख्त पाबंदियां लगाई थी कि अब यूरोप और एशिया के दरमियान सारे रास्ते बंद हो चुके थे जिससे यूरोप के हालात बहुत खराब हो चुके थे क्योंकि यूरोप एक बहुत ही सर्द

06:21

Speaker A

इलाका था और वहां अपना कोई स्ट्रांग एग्रीकल्चर सिस्टम नहीं था और वहां की जमीन बहुत ही कम चीजें पैदा करती थी और यूरोप की सारी चीजें ज्यादातर चाइना और इंडिया से ही आती थी लेकिन अब उस्मानिया बादशाह ने यूरोप पर सारे रास्ते बंद कर

06:35

Speaker A

दिए थे और यूरोप के लिए अब इंडिया पहुंचना एक बहुत ही मुश्किल काम था क्योंकि अब उन्हें इस छोटे से रास्ते की बजाय पूरे अफ्रीका को क्रॉस करके इंडिया तक पहुंचना था और इस ट्रिप पर उनके बहुत ज्यादा पैसे

06:48

Speaker A

खर्च होते थे जिसकी वजह से यूरोप में महंगाई बहुत बढ़ चुकी थी और यूरोप के लोग बहुत ही गरीब हो चुके थे और इंडिया तक पहुंचना यूरोप के लिए बहुत ही लाजमी था क्योंकि इंडिया के काली मिर्च और लौंग जैसे मसाले दुनिया की

07:03

Speaker A

सबसे इंपॉर्टेंट चीजों में से थे सिर्फ अपने टेस्ट की वजह से नहीं बल्कि यह मसाले उस दौर के मेडिसिंस में भी यूज किए जाते थे और मोस्ट इंपोर्टेंट उस जमाने में दुनिया में फ्रिज और फ्रीजस नहीं थे तो

07:14

Speaker A

लोग इन्हीं मसालों को यूज करके खाने पीने की चीजों को खराब होने से बचाते थे उस्मानिया सल्तनत के पाबंदियों के बाद अब यूरोप को इस छोटे से रास्ते की बजाय पूरे अफ्रीका को क्रॉस करके इंडिया तक पहुंचना पड़ता था इस सफर पर उनका खर्चा भी बहुत

07:27

Speaker A

होता था और बहुत सारी कश्तियां तबाह भी हो हो जाती थी कोलंबस का प्लान यह था कि वो इंडिया की तरफ एक नया रास्ता ढूंढेगा जिस रास्ते को उस्मानिया सल्तनत कंट्रोल नहीं कर सकेगी और उसका यह आईडिया बादशाह और

07:39

Speaker A

मलका दोनों को बहुत अच्छा लगा और इस तरह कोलंबस तीन कश्तियों के साथ पहली बार एक नई दुनिया की तरफ रवाना हुआ और बरमू द ट्रायंगल को क्रॉस करते हुए ऑलमोस्ट 36 डेज के सफर के बाद कोलंबस की कश्तियां एक

07:51

Speaker A

आइलैंड तक पहुंची कोलंबस ने इस आइलैंड पर पहुंचते वहां कुछ ब्राउन कलर के लोग देखे मतलब बिल्कुल हमारी तरह के लोग और उसे लगा कि फाइनली हम इंडिया पहुंच चुके हैं इसीलिए कोलंबस ने वहां सारे लोगों को इंडियंस का नाम दिया और कहा जाता है कि

08:05

Speaker A

अपनी मौत तक कोलंबस यही समझता था कि ये सारे इलाके इंडिया ही हैं बट ही वाज रॉन्ग इससे कई साल बाद एक नए एक्सप्लोरर अमरिक ने पहली बार यह ऐलान किया कि यह इंडिया नहीं बल्कि एक नई दुनिया है और इसी

08:18

Speaker A

अमरिकों की वजह से आज इन सारे इलाकों को अमेरिका कहा जाता है कोलंबस के बाद स्पेन से लोग अमेरिका की तरफ आते गए और यहां के लोकल लोगों को मारकर अपनी एंपायर बनाने लगे इसीलिए आज भी अमेरिका में सबसे ज्यादा

08:31

Speaker A

स्पेनिश जबान ही बोली जाती है स्पेन के बाद जब बाकी यूरोप को भी अमेरिका की इस नई दुनिया का पता चला तो फ्रांस ब्रिटेन और पोर्च ने भी अपनी आर्मीज अमेरिका की तरफ भेजी और इसे कब्जा करने लगे नाउ यहां तक

08:43

Speaker A

पिछले हजार साल से मुसलमान ही दुनिया के सुपर पावर थे उमैरा अब्बासी उस्मानिया लेकिन अमेरिका की डिस्कवरी के बाद दुनिया में मुसलमानों की असल तबाही शुरू हुई क्योंकि अमेरिका से पहले दुनिया की सबसे बड़ी सुपर पावर उस्मानी सल्तनत थी लेकिन

09:01

Speaker A

अमेरिका की डिस्कवरी के बाद उस्मानिया सल्तनत आहिस्ता आहिस्ता दुनिया की बड़ी अंपायर्स के लिस्ट से ही निकल गई यह नई दुनिया अमेरिका एक बहुत ही बड़ा इलाका था और यहां की जमीनें भी एग्रीकल्चर के लिए बेस्ट जमीनें थी लेकिन अब मसला यह था कि

09:15

Speaker A

यहां के लोकल लोगों को तो यूरोपियन पहले ही बीमारियों और जंगो से मार चुके थे तो अब यूरोप को अमेरिका की जमीनों से फायदा उठाने के लिए कुछ ऐसे लोगों की जरूरत थी जो गरीब भी हो और ताकतवर भी और उस जमाने

09:27

Speaker A

में दुनिया में ऐसे लोग सिर्फ एक ही पर थे अफ्रीका तो सबसे पहले ब्रिटिश अफ्रीका की तरफ गए और वहां से अफ्रीकन को कश्तियों में भर भर के अमेरिका की तरफ ले जाने लगे इन लोगों को जबरदस्ती पहले अफ्रीका से

09:40

Speaker A

किडनैप किया जाता था और फिर इन्हें कश्तियों में नीचे जंजीरों से बांधकर बिल्कुल जानवरों की तरह अमेरिका पहुंचाया जाता था इसी तरह ब्रिटिश ऑलमोस्ट 3.1 मिलियन 31 लाख अफ्रिकंस को गुलाम बनाकर अमेरिका की तरफ लाया लेकिन यह सिर्फ 31

09:57

Speaker A

लाख नहीं थे क्योंकि इन अफ्रिकंस को अमेरिका लाने के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने एक नया कानून बनाया कि इन अफ्रीकन गुलामों के जो फ्यूचर में बच्चे पैदा होंगे वह भी ऑटोमेटिक हम वाइट लोगों के गुलाम हो गए और

10:10

Speaker A

इस तरह ब्रिटिश ने इन ब्लैक स्लेव्स को यूज करके अमेरिका की इकॉनमी को आहिस्ता आहिस्ता स्टेबल किया लेकिन जैसे-जैसे अमेरिका स्ट्रांग होता गया ब्रिटिश और अमेरिकंस के दरमियान लड़ाइयां शुरू होने लगी क्योंकि यहां पर मसला यह था कि अब

10:22

Speaker A

ब्रिटिश दो हिस्सों में डिवाइड हो चुके थे एक व अंग्रेज जो यहां ब्रिटेन में रहते थे और दूसरे व जो कोलं के बाद पिछले 300 साल से अमेरिका में आबाद हो चुके थे तो अब ब्रिटेन के अंग्रेजों ने अमेरिका के

10:35

Speaker A

अंग्रेजों को हुकम दिया कि अमेरिका की जमीनों से जितने भी प्रॉफिट्स मिलेंगे वह सब हमारे कैपिटल लंदन की तरफ भेजे जाए लेकिन अमेरिका के अंग्रेजों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया अमेरिकंस की इस बगावत से ब्रिटिश को बहुत गुस्सा आया और उन्हें सबक

10:49

Speaker A

सिखाने के लिए ब्रिटिश ने अमेरिका की हर चीज पर चाय टोबैको कॉटन और हैवी टैक्सेस लगाए जिससे अमेरिकंस ने आखिर यह फैसला किया कि अब हम इन ब्रिटिश के और नहीं रह सकते और अपने लीडर जॉर्ज वाशिंगटन के साथ

11:03

Speaker A

अपनी आजादी की जंग शुरू की अब यहां पर एक बहुत बड़ा मसला था क्योंकि जैसे ही अमेरिका की आजादी की जंग शुरू हुई एट द सेम टाइम यहां से बहुत दूर ब्रिटिश की एक दूसरी कॉलोनी इंडिया के एक

11:17

Speaker A

अजीम लीडर ने भी अपनी आजादी की जंग शुरू की और इस लीडर का नाम था टीपू सुल्तान तो अब ब्रिटेन के पास दो ऑप्शंस थे कि या तो अपनी पूरी फौज के साथ इंडिया को बचाया जाए और या अमेरिका को तो आखिर ब्रिटिश ली ने

11:30

Speaker A

ये फैसला किया कि ज्यादा फौज अमेरिका नहीं बल्कि इंडिया भेजी जाए क्योंकि उस जमाने में अमेरिका की इंडिया के सामने कोई हैसियत नहीं थी तो अब जब ब्रिटिश की ज्यादा अटेंशन इंडिया की तरफ थी तो अमेरिका के लीडर जॉर्ज वाशिंगटन ने कुछ ही

11:42

Speaker A

दिनों में अपनी आजादी की जंग जीत गए और इस तरह पहली बार अमेरिका एक आजाद कंट्री बनी ब्रिटिश एंपायर अमेरिका को तो खो चुकी थी लेकिन इससे उनकी ताकत पर कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि अमेरिका को खोने के बाद

11:54

Speaker A

ब्रिटिश ने इंडियन लीडर टीपू सुल्तान को मारकर पूरे इंडिया पर अपनी हुकूमत बनाई यह सब कुछ आज से 250 साल पहले हुआ था 250 साल जब एक तरफ पूरी दुनिया में बादशाह और मलगा की हुकूमत थी लेकिन यहां अमेरिका में उनके

12:08

Speaker A

पहले प्रेसिडेंट जॉर्ज वाशिंगटन ने पहली बार एक प्रेसिडेंशियल सिस्टम बनाया जिसमें अमेरिकंस का कोई बादशाह नहीं था और उनका प्रेसिडेंट भी सिर्फ 8 साल ही हुकूमत कर सकता था और इस रूल को हमेशा कायम रखने के लिए अमेरिका के पहले सदर जॉर्ज वाशिंगटन

12:22

Speaker A

ने 8 साल बाद अपनी पोस्ट छोड़ दी हालांकि उन्हें ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि उस वक्त वो अपनी पावर के पीक पर थे लेकिन उनकी इस कुर्बानी की वजह से आज तक अमेरिका का एक प्रेसिडेंट भी इस रूल को

12:33

Speaker A

तोड़ नहीं सका और इसके साथ ही दुनिया का सबसे बेहतरीन मेरिट का सिस्टम बनाया जिसकी वजह से आहिस्ता आहिस्ता अमेरिका की इकॉनमी पूरी दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने लगी मतलब सिर्फ कुछ ही सालों में अमेरिका की कॉटन इंडस्ट्री 1000% इंक्रीज हुई

12:49

Speaker A

लेकिन अब तक अमेरिका की ये सारी इकॉनमी अफ्रीकन ब्लैक स्लेव्स की वजह से ही चल रही थी लेकिन यहां एंट्री होती है अमेरिका के एक प्रेसिडेंट जो आज तक अमेरिका के सबसे फेमस प्रेसिडेंट है ए ब्राहमम लिंकन जिन्होंने प्रेसिडेंट बनते ही अमेरिका में

13:02

Speaker A

एक बिल पास किया कि अमेरिका के सारे अफ्रीकन ब्लैक स्लेव्स को आजाद कर दिया जाए और आज के बाद अमेरिका में कोई भी किसी दूसरे का गुलाम नहीं होगा एब्रे लिंकन के इस डिसीजन के बाद जो लोग अमेरिका के इस

13:13

Speaker A

स्लेव ट्रेड से फायदा उठा रहे थे उन्होंने लिंकन के इस फैसले से अमेरिका के खिलाफ बगावत कर दी और इस तरह अमेरिका की हिस्ट्री की सबसे बड़ी जंग सिविल वॉर शुरू हुई लेकिन अब्राहम लिंकन कुछ ही सालों बाद

13:25

Speaker A

यह जंग तो जीत गए लेकिन इस जंग से अमेरिका को बहुत नुकसान हुआ मतलब मिलियंस ऑफ लोग मारे गए लेकिन एक बहुत बड़ा फायदा भी हुआ कि अमेरिका ने यह जंग जीतने के लिए इतने गंस और वेपंस बनाए कि अब अमेरिका के पास

13:37

Speaker A

पूरी दुनिया से ज्यादा वेपंस पड़े हुए थे सिविल वॉर जीतने के बाद अब दुनिया में एक बहुत बड़ा चेंज आया क्योंकि अब तक दुनिया की जितनी भी इन्वेंशन हुई थी वो इस पुरानी दुनिया में हुई थी लेकिन अब दुनिया की

13:48

Speaker A

सबसे बड़ी इंवेंशंस अमेरिका में होने लगी टेलीफोन स्विंग मशीन इलेक्ट्रिसिटी और दुनिया का पहला एयरप्लेन भी अमेरिका में बना इन सारी इन्वेंशन के साथ-साथ अमेरिका में दुनिया के सबसे ज्यादा वेपंस भी बनाए जाते थे लेकिन अब भी इन सारी चीजों के बाद

14:04

Speaker A

भी अमेरिका दुनिया में एक पावर तो थी लेकिन एक सुपर पावर नहीं थी सुपर पावर अब भी यूरोप के कंट्रीज ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी ही थे तो अब अमेरिका को सुपर पावर बनने के लिए एक ऐसे इवेंट की जरूरत थी

14:16

Speaker A

जिसमें यह सारे सुपर पावर्स खत्म हो जाए और सिर्फ अमेरिका ही बाकी रह जाए और एगजैक्टली ऐसा ही हुआ यह सारी पुरानी सुपर पावर्स अचानक आपस में लड़ने लगे और इस तरह दुनिया की सबसे बड़ी जंग शुरू हुई वर्ल्ड

14:28

Speaker A

वॉर [संगीत] वन वर्ल्ड वॉर वन में एक तरफ दुनिया की सारी पुरानी सुपर पावर्स जब आपस में लड़ रही थी तो अमेरिका इस जंग से बहुत दूर बिल्कुल आराम से यह सब कुछ देख रहा था और ब्रिटिश एंपायर की बहुत मिन्न तों के बाद

14:43

Speaker A

भी वो इस जंग में आखिरी मिनट तक शामिल नहीं हुआ और पूरी जंग के दौरान अमेरिका इन सबको वेपन सप्लाई करता रहा वर्ल्ड वॉर वन में दुनिया में एक ऐसी सिचुएशन थी कि जब एक तरफ दुनिया की सारी पुरानी सुपर पावर्स

14:56

Speaker A

लड़ रही थी जिसकी वजह से उनकी इकॉनमी बहुत ही खराब हो चुकी थी तो एट द सेम टाइम दुनिया में सिर्फ एक ही स्टेबल कंट्री और एक ही स्टेबल करेंसी थी अमेरिका और डॉलर और जब आखिर वर्ल्ड वॉर 1 के हालात बहुत ही

15:08

Speaker A

खराब हो गए तो आखिर अमेरिका ने ही आकर यूरोप को इस जंग से निकाला और यह जंग जीत गया और पहली बार वर्ल्ड वॉर व के बाद अमेरिका एक सुपर पावर बनने की तरफ जाने लगी इसीलिए पूरी दुनिया से लोग अमेरिका

15:19

Speaker A

में अपने पैसे इन्वेस्ट करने लगे जिससे अमेरिका की इकॉनमी स्टॉक मार्केट और करेंसी दुनिया की सारी कंट्रीज से आगे बढ़ने लगी लेकिन जैसे ही अमेरिका वर्ल्ड वॉर 1 के बाद अपनी पीक तक पहुंचा अचानक आउट ऑफ नोवेयर अमेरिका की पूरी इकॉनमी

15:34

Speaker A

क्रैश हो गई यह अमेरिका की तारीख का सबसे बड़ा क्रैश था और इस क्रैश को आज तक द ग्रेट डिप्रेशन के नाम से याद किया जाता है यह इतना खतरनाक क्रैश था कि कुछ ही दिनों में अचानक अमेरिका के सबसे रिच लोग

15:46

Speaker A

खाने-पीने की चीजों के लिए भी रोड पर खड़े होकर भीख मांगने लगे और इस क्रैश से ऑलमोस्ट 23000 अमेरिकंस ने अपने हाथों से अपनी जान ली जिनमें से बहुत सारे लोगों ने अमेरिका के इन्हीं खूबसूरत बिल्डिंग से छलांग लगाई अमेरिका की इसी तबाही का सबसे

16:01

Speaker A

बड़ा फायदा यूरोप के एक नए यंग लीडर ने उठाया जिसने पूरी दुनिया को बताया कि यह अमेरिका भी कोई इतनी बड़ी चीज नहीं है तो हमें एक नए निजाम एक नए सिस्टम की जरूरत है और इस लीडर का नाम था एडोल्फ

16:14

Speaker A

हिटलर हिटलर के प्लांस के पीछे पूरी जर्मन कौम खड़ी हुई और उन्होंने हिटलर को फुल सपोर्ट किया और इस तरह कुछ ही सालों में हिटलर जर्मनी का सबसे ताकतवर लीडर बन गया और आहिस्ता आहिस्ता उसके पास इतनी ताकत आई

16:27

Speaker A

कि उसने जर्मनी के पास ही एक दूसरे मुल्क पोलैंड पर हमला कर दिया और इस तरह अगेन दुनिया में एक नई जंग शुरू हुई वर्ल्ड वॉर ट लेकिन इस वर्ल्ड वॉर ट में भी अमेरिका ने बिल्कुल पहली जंग की तरह इस वॉर में

16:40

Speaker A

हिस्सा नहीं लिया और अगेन बिल्कुल आराम से बैठकर सारों को वेपंस भेजता रहा और अगेन एक तरफ सारी सुपर पावर्स लड़ रही थी और अमेरिका इस सबसे प्रॉफिट हासिल कर रहा था और इस तरह जंगो से पैसे कमाना अमेरिका की

16:53

Speaker A

आज तक आदत है वहां जर्मनी में हिटलर बहुत तेजी से अपने वेपंस और आर्मी को बढ़ा रहा था और बार-बार हर जगह जाकर अपनी स्पीस में यही कहता था कि हमारे जर्मनी के हारने की वजह सिर्फ एक ही है यहूदी इन्हीं की वजह

17:06

Speaker A

से हम पिछली जंग हारे हैं और हिटलर के ऑर्डर्स पर जर्मनी ने यहूदियों पर जुल्म करना शुरू किया लेकिन अब यहां मसला यह था कि यहूदी उस जमाने में भी दुनिया के सबसे इंटेलिजेंट लोग थे और दुनिया के ऑलमोस्ट

17:18

Speaker A

सारे बड़े साइंटिस्ट यहूदियों में से ही थे इन्हीं में से एक जर्मन यहूदी साइंटिस्ट का नाम था अल्बर्ट आइंस्टाइन टा जैसे ही हिटलर ने यहूदियों पर जुल्म शुरू किया तो आइंस्टाइन जर्मन होते हुए भी अमेरिका को सपोर्ट करने लगे और अचानक एक

17:35

Speaker A

दिन वर्ल्ड वॉर ट शुरू होते ही आइंस्टाइन ने जर्मनी में बैठकर एक बहुत ही सीक्रेट लेटर उस वक्त के अमेरिकन प्रेसिडेंट रूजवेल्ट की तरफ भेजा और इस लेटर में एक बहुत ही इंपॉर्टेंट बात लिखी थी फ्रॉम एल्बर्ट आइंस्टाइन टू द प्रेसिडेंट ऑफ द

17:49

Speaker A

यूनाइटेड स्टेट्स मिस्टर प्रेसिडेंट मैं आपकी तरफ एक बहुत ही सीक्रेट और इंपोर्टेंट लेटर भेज रहा हूं जर्मनी का फ्यूअर हिटलर एक बहुत ही खतरनाक टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा [संगीत] जिसके बाद दुनिया में कोई भी उसके सामने खड़ा नहीं हो सकेगा एटॉमिक

18:07

Speaker A

बॉम यह लेटर मैं आपकी तरफ इसलिए लिख रहा हूं कि आप अमेरिका के सारे फिजिसिस्ट को जमा करके एक अमेरिकन एटम बम पर काम शुरू कर दें ताकि अमेरिका जर्मनी से पहले ही एटम बम बना सके बाय द वे इस लेटर के बाद

18:19

Speaker A

आइंस्टाइन अपनी मौत तक इसे रिग्रेट करता रहा रूज वड ने आइंस्टाइन का यह लेटर पढ़ने के बाद इस पर फुल स्पीड एक्शन लिया और इस तरह अमेरिका एक आम फुटबॉल स् डियम के नीचे एटम बम बनाने लगा अब जब अमेरिकन साइंटिस्ट

18:32

Speaker A

एटम बम पर काम कर रहे तो अचानक जापान जो उस वक्त जर्मनी का साथी था उसने अमेरिका के एक पोर्ट पर हमला कर दिया उसम ाज अमेरिकंस मारे गए और बहुत सारे शिप्स और जहाज तबाह हुए तो अब मजबूरन अमेरिका जो अब

18:46

Speaker A

तक इस जंग से बाहर था उसे इस जंग में आना ही पड़ा और अमेरिका अपनी पूरी फौज एक करोड़ सोल्जर्स के साथ जिसमें सिविलियंस भी शामिल थे वर्ल्ड वॉर टू में दाखिल हो जिसके कुछ ही सालों बाद बिल्कुल वर्ल्ड

19:02

Speaker A

वॉर वन की तरह जर्मनी दोबारा यह जंग हार गई और उसके लीडर एडोल्फ हिटलर ने अपने आप को एक कमरे में बंद करके खुदकुशी कर ली जर्मनी तो इस जंग से निकल गया लेकिन उसका साथी जापान अभी भी इस जंग में था तो

19:15

Speaker A

अमेरिकन प्रेसिडेंट रूजवेल्ट ने जापान के एंपरर हीरो हीट को यह वार्निंग दी कि सरेंडर करो वरना हम तुम्हारा ऐसा हाल करेंगे कि आने वाली पूरी दुनिया उसे याद करेगी लेकिन ऑफकोर्स जापान ने सरेंडर नहीं किया और उसके एंपरर ने सोचा कि ज्यादा से

19:29

Speaker A

ज्यादा ये क्या कर लेंगे लेकिन उसे इस बात का पता नहीं था कि आइंस्टाइन के लेटर के बाद अब अमेरिका का एटम बम बिल्कुल रेडी था तो आखिर अमेरिका के नए प्रेसिडेंट हैरी ट्रूमर ने अपने ऑफिस में एक मीटिंग बुलाई

19:41

Speaker A

जिसमें अमेरिकन प्रेसिडेंट ने अपने जनरल से पूछा कि हम आखिर जापान को कैसे सरेंडर पर मजबूर कर सकते हैं तो उसके जनरल्स ने कहा कि जपनीज लोग एक बहुत ही खतरनाक कौम है वो इतनी आसानी से सरेंडर नहीं करेंगे

19:52

Speaker A

जिस पर आखिर वहां बैठे सारों ने दुनिया का पहला एटम बम यूज करने का फैसला किया तो आखिर अमेरिका के एक आइलैंड से पॉल अपने जहाज पर एटम बम लेकर जापान की सिटी हिरोशिमा की तरफ रवाना हुआ यह जहाज

20:08

Speaker A

हिरोशिमा एग्जैक्ट 8:1 बजे पहुंचा जिस वक्त इस सिटी के सारे बच्चे अपने स्कूल और बड़े अपने कामों पर जा रहे थे और एग्जैक्ट इसी टाइम पर पॉल ने एक बटन दबाया और एटम बम को जहाज से फेंक दिया यह एटम बम 44

20:21

Speaker A

सेकंड्स तक हवा में गिरता रहा व्च मींस कुछ लोगों ने जरूर इस एटम बम को देखा होगा जमीन तक पहुंचने से पहले ही अचानक आसमान में एक लाइट आई और विद इन अ सेकंड 70000 लोग खत्म हो गए

20:34

Speaker A

अब जब जापान यह पता ही लगा रहा था कि उसके साथ हुआ क्या है तो अचानक सिर्फ तीन दिन बाद अमेरिका ने जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर भी एक और एटम बम गिरा दिया जिसमें 40000 लोग मारे गए इन धमाकों

20:49

Speaker A

के बाद यूएस प्रेसिडेंट ने दोबारा जापान के एंपरर को वार्निंग दी कि सरेंडर करो वरना हमारा नेक्स्ट टारगेट टोक्यो होगा और मजबूरन जापान के पंपर ने सरेंडर कर दिया इन धमाकों के बाद अमेरिका में एक बहुत ही इंटरेस्टिंग सर्वे किया गया जिसमें

21:04

Speaker A

अमेरिकन से पूछा गया कि अमेरिका ने यह बम डालकर सही किया या गलत जिसमें 85 पर लोगों ने यह कहा कि अमेरिकन प्रेसिडेंट ने बिल्कुल सही फैसला किया है लेकिन आहिस्ता आहिस्ता लोग इस फैसले के खिलाफ होते गए और

21:15

Speaker A

यह नंबर 85 से 50 पर तक आ गया क्योंकि लोगों को समझ आ गई कि यह हमला अमेरिका ने बिल्कुल आम इनोसेंट सिविलियंस पर किया था आपने सुना होगा कि जिन पायलट ने ये एटॉमिक बम्स इन सिटीज पर गिराए थे उन्होंने भी

21:28

Speaker A

इसके बाद सुसाइड कर लिया था लेकिन ये भी बिल्कुल झूठ है बल्कि ये दोनों अपनी मौत तक इन बम्स को डिफेंड करते रहे लेकिन कहीं ना कहीं इनके दिल में जरूर कोई शर्मिंदगी होगी क्योंकि इन्होंने यह वसीयत की थी कि हमारे मरने के बाद हमारे

21:42

Speaker A

जिस्मों को दफनाने की बजाय आग लगा दीज वर्ल्ड वॉर ट के बाद अब पूरी दुनिया ने अमेरिका की ताकत को देख लिया था और अब अमेरिका एक सुपर पावर बन चुका था और अमेरिका की इकॉनमी डॉलर फुल पावरफुल हो

21:55

Speaker A

चुकी थी जिसके बाद अमेरिका ने यूएन बनाकर अपनी ताकत और भी मजबूत की और अमेरिका पहली बार दुनिया का वाहिद सुपर पावर बना और दुनिया की सारी कंट्रीज ने अमेरिका के सामने अपना सर झुका दिया सिवाय एक कंट्री

22:11

Speaker A

के अब दुनिया का सुपर पावर वही रह सकता था जिसके पास दुनिया में सबसे ज्यादा एटम बम्स हो तो सोवियत यूनियन ने अमेरिका के सिर्फ 4 साल बाद अपना एटम बम बनाया और इस तरह वो अमेरिका को डायरेक्टली चैलेंज करने

22:23

Speaker A

लगा और दुनिया में सुपर पावर बनने की एक नई रेस शुरू हुई सुपर पावर बनने की यह रेस शुरू तो वेपंस और एटम बम से हुई थी लेकिन आहिस्ता आहिस्ता यह रेस इन दोनों मुल्कों के हर चीज में फैल गई चेस स्विमिंग

22:35

Speaker A

ओलंपिक्स और इवन साइंस क्योंकि दुनिया का पहला शख्स जब सोवियत यूनियन से पहली बार स्पेस की तरफ गया तो अमेरिका ने उनसे जीतने के लिए नासा को इतनी फंडिंग दी कि अमेरिकन साइंटिस्ट नील आर्मस्ट्रांग चांद तक पहुंच गया दुनिया के सारे छोटे-छोटे

22:50

Speaker A

मुल्क भी इन दोनों सुपर पावर्स में एक की साइड लेने लगे जैसे कि नॉर्थ कोरिया सोवियत और साउथ कोरिया ने अमेरिका का साथ दिया पाकिस्तान ने अमेरिका और चाइना ने सोवियत का साथ दिया इंडिया इस जंग में मोस्टली न्यूट्रल ही था जो उनका बहुत ही

23:03

Speaker A

जबरदस्त डिसीजन था क्योंकि जिन कंट्रीज ने उस जमाने में इन सुपर पावर्स का साथ दिया था वो आज तक वन वे और द अदर इन्हीं कंट्रीज के गुलाम है अमेरिका और सोवियत के दरमियान इस रेस में पहले पहले तो लड़ाई

23:14

Speaker A

बहुत सख्त थी लेकिन आहिस्ता आहिस्ता अमेरिका की स्ट्रांग इकॉनमी के सामने सोवियत खड़े नहीं हो सके और आखिर इस 40 साल की कोल्ड वॉर के बाद 1991 में सोवियत यूनियन टूट गया और अगेन एक बार फिर दुनिया का वाहिद सुपर पावर अमेरिका बना अगर देखा

23:30

Speaker A

जाए जब पिछली सदी शुरू हुई 1900 में तो दुनिया में बहुत सुपर पावर्स थे ब्रिटिश एंपायर फ्रांस जर्मनी उस्मानिया रशिया लेकिन उस सदी के खत्म होते दुनिया का सिर्फ एक ही सुपर पावर बाकी रहा अमेरिका द यूनाइटेड स्टेटस ऑफ अमेरिका लेकिन नई सदी

23:48

Speaker A

शुरू होते अमेरिका के सबसे टॉलेस्ट टावर्स वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया गया सब्सक्राइब

Topics: कर्बला अब्बासी खिलाफत बनू उमय्या उस्मानिया सल्तनत कोलंबस अमेरिका की खोज मुस्लिम इतिहास स्पेन में मुसलमान सुपरपावर इस्लामिक एंपायर


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