**IC-814: The Untold Story of India's Worst Plane Hijacking | 2D Animation — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/ic-814-india-worst-plane-hijacking-animation/

आईसी-814 विमान अपहरण की दर्दनाक कहानी, जिसमें प्रशासनिक चूक और आतंकवाद के बादल भारत पर छा गए।

## Key Takeaways

- प्रशासनिक चूक और सूचना देरी से संकट बढ़ा।
- साहसिक पायलट प्रयासों के बावजूद आतंकवादियों ने नियंत्रण रखा।
- भारत ने उस रात अपने नागरिकों को बचाने का एकमात्र मौका खो दिया।
- पाकिस्तान की भूमिका और राजनीतिक दबाव ने स्थिति को जटिल बनाया।
- यह घटना भारत के आतंकवाद विरोधी नीतियों को प्रभावित करने वाली सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है।

## What the video covers

- 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से दिल्ली जा रही फ्लाइट IC-814 का अपहरण हुआ।
- 176 यात्री unaware थे कि विमान में हथियारबंद आतंकवादी सवार हैं।
- अपराधियों ने विमान को लाहौर और अमृतसर में लैंड कराया, जहां कमांडो कार्रवाई के लिए रवाना नहीं हुए।
- भारतीय प्रशासन में सूचना देरी और आदेशों की कमी ने बचाव का एकमात्र मौका खो दिया।
- पाकिस्तान ने विमान को मिसाइल से मार गिराने की धमकी दी, जिससे संकट और बढ़ गया।
- कैप्टन देवी शरण ने साहसिक प्रयास किए, लेकिन आतंकवादी नियंत्रण में रहे।
- रूपण कात्याल की हत्या एक संदेश थी, जिसे बचाया जा सकता था।
- पाकिस्तान में विमान की लैंडिंग और दो घंटे तक रुके रहने के दौरान राजनीतिक तनाव बना रहा।
- इंटेलिजेंस और नेगोशिएशन के जटिल पहलू भी सामने आए, जिसमें तालीबान की भूमिका थी।
- यह घटना भारत के लिए 20 साल तक आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों की शुरुआत बनी।

## Chapters

1. 00:00 आईसी-814 का अपहरण और शुरुआत
2. 02:07 अमृतसर में लैंडिंग और कमांडो की गैरमौजूदगी
3. 04:02 गलत लैंडिंग और विमान का बचाव
4. 05:57 कमांडो की देरी और आतंकियों का शक
5. 07:39 लाहौर में लैंडिंग और राजनीतिक तनाव
6. 11:38 कांधार में विमान की स्थिति
7. 13:36 इंटेलिजेंस और नेगोशिएशन
8. 17:19 आतंकवाद की जड़ें और भारत पर प्रभाव

Answers

## Questions about this video

आईसी-814 अपहरण कब और कहाँ हुआ था?

आईसी-814 का अपहरण 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट के दौरान हुआ था।

इस घटना में प्रशासनिक चूक कैसे हुई?

7500 कोड मिलने के बाद भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को तुरंत सूचना नहीं दी गई, एनएसजी कमांडो को कार्रवाई का आदेश नहीं मिला, जिससे बचाव का मौका खो गया।

रूपण कात्याल की हत्या का क्या महत्व था?

रूपण कात्याल की हत्या आतंकियों का एक संदेश थी कि वे बिना खून के भारत को झुका नहीं सकते, और यह घटना इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा थी।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

24 दिसंबर 1999, काठमांडू का त्रिभुवन एयरपोर्ट, शाम के 4:05। एक आदमी बोर्डिंग गेट से गुजरा, साधारण कपड़े, चेहरे पर कोई हड़बड़ाहट नहीं। आईसी 814 दिल्ली जाने वाली फ्लाइट। उसके पीछे चार और लोग थे, अलग-अलग गेट से, अलग-अलग सीटें, लेकिन एक ही मिशन। किसी ने किसी की तरफ देखा तक नहीं। 176 लोग सवार हुए, किसी को नहीं पता था कि एक बैग में जिंदा ग्रेनेड है। एक जेब में चाकू है। एक कमर पर पिस्तौल बंधी है। आतंकियों को पता था बिना खून के भारत नहीं झुकेगा। इसलिए उन्होंने वो आदमी चुना जो सबसे पहले हाथ आया। 25 साल, नया-नया शादीशुदा, हनीमून से लौट रहा था। रूपण कात्याल। उसकी पत्नी कुछ सीट आगे बैठी थी। उसे नहीं पता था कि उसका पति आखिरी सांसें गिन रहा है।

00:22

Speaker A

लेकिन रूपण की मौत इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा नहीं है। सबसे दर्दनाक हिस्सा यह है कि उसे बचाया जा सकता था। 40 मिनट वो विमान भारत की जमीन पर खड़ा रहा। कमांडो तैयार थे। रनवे ब्लॉक हो सकता था, लेकिन आदेश नहीं आया और वो एकमात्र मौका हमेशा के लिए चला गया। उन 40 मिनटों की कीमत भारत ने अगले 20 साल तक चुकाई। संसद पर हमला, पठानकोट, पुलवामा, उन्हीं आतंकियों के हाथों, उन्हीं संगठनों के हाथों जिन्हें उस रात भारत ने जिंदा जाने दिया था। यह टू डी डॉक्यूमेंट्री उस एक रात की कहानी है। उस रात उस विमान में क्या हुआ? और क्यों?

00:37

Speaker A

24 दिसंबर 1999, शाम 4:25। आईसी 814 काठमांडू से उड़े हुए 20 मिनट हो चुके थे। विमान भारतीय हवाई सीमा में दाखिल हो चुका था। कॉकपिट में कैप्टन देवी शरण, कोपायलट राजेंद्र कुमार और फ्लाइट इंजीनियर अनिल कुमार जगिया, तीनों अपना काम कर रहे थे। रूटीन फ्लाइट, कोई अलर्ट नहीं। केबिन में फ्लाइट अटेंडेंट अनिल शर्मा खाने की ट्रॉली लेकर बिजनेस क्लास की तरफ बढ़े। तभी एक आदमी उठा। गले में लाल मफलर, हाथ में जिंदा ग्रेनेड। उसने अनिल शर्मा को दबोच लिया। उसी पल केबिन के चार अलग-अलग कोनों से चार ओर लोग खड़े हो गए। चेहरों पर नकाब, हाथों में पिस्तौल और खंजर, एक ही चीख गूंजी, सिर नीचे। वो दो शब्द थे। लेकिन उन दो शब्दों ने 176 लोगों की जिंदगी को एक पल में पलट दिया। बच्चे अपनी मांओं से चिपक गए। बुजुर्गों के हाथ कांपने लगे। किसी ने प्रार्थना शुरू कर दी।

00:55

Speaker A

4:30, हाईजैकिंग का मुखिया, कोड नेम चीफ, असली नाम इब्राहिम अथर। कॉकपिट का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा। कैप्टन देवी शरण ने पीछे मुड़कर देखा। ठंडी पिस्तौल उनकी कनपट्टी पर थी। चीफ की आवाज बिल्कुल शांत थी। और इसी शांति में उसकी खतरनाक ट्रेनिंग दिख रही थी। विमान पश्चिम की तरफ मोड़ो, सीधा लाहौर। कैप्टन शरण ने एक गहरी सांस ली। उन्होंने खुद को शांत रखा और कहा, ईंधन कम है। लाहौर पहुंचना मुश्किल होगा। आतंकी आग बबूला हो गया। लेकिन उसी तनाव के बीच कैप्टन ने बिना कोई हलचल किए अपना हाथ कंसोल पैनल की तरफ बढ़ाया। एक बटन दबाया। ट्रांसफॉर्डर में कोड दर्ज हुआ। 7500 विमानन की दुनिया में यह कोड सिर्फ एक ही बात का मतलब रखता है। हमारा विमान अगवा हो गया है।

01:11

Speaker A

4:40, दिल्ली एयर ट्रैफिक कंट्रोल की रडार स्क्रीन पर वो लाल कोट चमकने लगा और उस एक कोट के साथ शुरू हुआ भारत के इतिहास का सबसे लंबा, सबसे दर्दनाक संकट। दिल्ली में उस शाम जो होना चाहिए था, वो नहीं हुआ। 7500 का कोड मिलते ही देश के सबसे ऊंचे गलियारों में हड़कंप मचना चाहिए था। एनएसजी को ब्रीफिंग मिलनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री को तुरंत बताया जाना चाहिए था। लेकिन जो हुआ वो इससे बिल्कुल उलटा था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को इस हाईजैकिंग की खबर 1 घंटे बाद मिली। किसी खुफिया एजेंसी से नहीं, टीवी की ब्रेकिंग न्यूज़ से। गृह मंत्री आडवाणी को भी पहली खबर टीवी से मिली।

01:28

Speaker A

यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं थी। यह एक ऐसी नींद थी जिसकी कीमत आसमान में उड़ते विमान के अंदर 176 लोग चुका रहे थे। उधर कॉकपिट में कैप्टन शरण अकेले लड़ रहे थे। दिल्ली से कोई साफ आदेश नहीं। एक तरफ कनपटी पर पिस्तौल, दूसरी तरफ 176 जिंदगियों की जिम्मेदारी। विमान लाहौर एयरस्पेस के करीब पहुंचा। कैप्टन ने इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी। जवाब आया इंकार और एक चेतावनी। अगर भारतीय विमान ने हमारे एयरस्पेस में एंट्री की तो मिसाइल से मार गिराया जाएगा।

01:46

Speaker A

कारगिल की लड़ाई महीनों पहले खत्म हुई थी। दोनों देशों के बीच झर घुला था। कैप्टन के सामने दो रास्ते थे। सामने पाकिस्तान की मिसाइलें, पीछे आतंकियों की बंदूकें। विमान भारत और पाकिस्तान की सीमा के ऊपर अंधेरे आसमान में गोल-गोल चक्कर काटने लगा। डैशबोर्ड पर फ्यूल गेज तेजी से गिर रहा था। 40 मिनट का ईंधन बचा था। कैप्टन ने आतंकी से कहा, फ्यूल खत्म हो रहा है। लाहौर का रास्ता बंद है। अगर अभी नहीं उतरे तो सब मर जाएंगे। पास में अमृतसर है। आतंकी भारत की जमीन पर नहीं उतरना चाहते थे। लेकिन मौत का डर किसी भी गुरूर से बड़ा होता है।

02:07

Speaker A

शाम 6:44। आईसी 814 ने अमृतसर के राजा सासी एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। कैप्टन शरण ने कॉकपिट की खिड़की से बाहर देखा। उन्हें यकीन था अगले कुछ मिनटों में एनएसजी कमांडो जाएंगे। इस दुःस्वप्न का अंत होगा। लेकिन बाहर सिर्फ एक खौफनाक सन्नाटा था। दूर बाउंड्री पर पंजाब पुलिस की दो-चार गाड़ियां। बस कोई कमांडो नहीं। कोई घेराबंदी नहीं। दिल्ली से आदेश था। विमान को रोके रखो। फ्यूल भरने में देरी करो।

02:24

Speaker A

लेकिन कड़वी सच्चाई यह थी कि कमांडोस दिल्ली से रवाना भी नहीं हुए थे। क्यों? क्योंकि उस विमान में रॉ के एक वरिष्ठ अधिकारी शशि भूषण सिंह तोमर सवार थे। दिल्ली को डर था कि आक्रामक कारवाही में उस वीआईपी की जान खतरे में पड़ जाएगी। एक सिस्टम, एक वीआईपी, 176 जिंदगियां। तराजू का पलड़ा किधर झुका यह उस रात अमृतसर की ठंडी सड़क पर साफ दिख रहा था।

02:39

Speaker A

विमान के अंदर आतंकियों को देरी से शक हुआ और वो शक यकीन में बदल गया। बाहर जाल बिछाया जा रहा है। उनकी नजर गई रूपण कात्याल पर। 25 साल का लड़का, हनीमून से लौट रहा था। हाईजैकिंग की शुरुआत में ही उसे रचना से अलग कर दिया गया था। रचना को नहीं पता था कि उसका पति कहां है। रूपण को नहीं पता था कि वो क्यों उठाया जा रहा है।

02:55

Speaker A

आतंकियों ने उसे सीट से खींचा और बिना एक शब्द कहे, बिल्कुल मशीनी अंदाज में उसके सीने और पेट पर चाकुओं से कई-कई वार किए। [नाक से की जाने वाली आवाज़] रूपण फर्श पर गिरा। वो तुरंत नहीं मरा। काफी देर तक तड़पता रहा और उसकी पत्नी कुछ फीट की दूरी पर यह भी नहीं जानती थी कि उस खामोशी के पीछे उसका पति धीरे-धीरे मौत की नींद सो रहा है।

03:11

Speaker A

यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी। यह एक संदेश था। कैप्टन ने तुरंत रेडियो पर चिल्लाया। वो लोगों को मार रहे हैं। फ्यूल भेजो। अभी जमीन पर एक जल्दबाजी में प्लान बना। एक फ्यूल ट्रक भेजो। उसके अंदर पंजाब पुलिस के जवान छुपाओ। फ्यूल भरने के बहाने विमान के टायर पंचर कर दो। ट्रक निकला। लेकिन ड्राइवर ने घबराहट में विमान से कुछ दूरी पर जोर से ब्रेक मारे। तेज आना फिर अचानक रुकना। आतंकियों ने देखा और उनका शक यकीन बन गया।

03:28

Speaker A

चीफ वापस कॉकपिट में घुसा। पिस्तौल कैप्टन के सिर पर। अभी प्लेन उड़ाओ। रात 7:49। कैप्टन ने थ्रोटल आगे धकेला। एटीसी ने अंतिम कोशिश की। एक गाड़ी रनवे के बीचोंबीच खड़ी कर दी। विमान 250 किमी/ घंटे की रफ्तार से उस गाड़ी की तरफ बढ़ रहा था। कैप्टन ने पूरी ताकत से योक खींचा। 130 टन का विमान जमीन से उठा। उसका पिछला हिस्सा उस गाड़ी को छूते-छूते बचा। महज कुछ इंच। रनवे के किनारे खड़े अधिकारियों के चेहरों पर ना गुस्सा था, ना डर। बस एक सुन करने वाली लाचारी थी।

03:47

Speaker A

भारत ने उस रात अपने ही लोगों को बचाने का एकमात्र मौका खो दिया। IC814 के डैशबोर्ड पर फ्यूल गेज शून्य पर था। कैप्टन ने विमान पश्चिम की तरफ मोड़ा और लाहौर एटीसी को कॉल किया। इस बार लाहौर ने सिर्फ इंकार नहीं किया। पूरे एयरपोर्ट की रोशनी बंद कर दी। रनवे की लाइटें बंद, नेविगेशन लाइटें बंद। कैप्टन को ऊपर से नीचे सिर्फ अंधेरा दिख रहा था। फ्यूल अलार्म बज रहा था। वो नीचे उतरने लगे। 500 फीट, 300 फीट।

04:02

Speaker A

तभी अंधेरे में एक लंबी रोशन पट्टी दिखी। विमान उस पट्टी की तरफ बढ़ा। लैंडिंग के एकदम करीब पहुंचे। तभी कैप्टन को सच्चाई दिखी। वो रनवे की लाइटें नहीं थी। वो एक व्यस्त हाईवे पर चलती गाड़ियों की हेडलाइटें थी। 130 टन का कमर्शियल विमान एक चालू सड़क पर गिरने ही वाला था। आखिरी सेकंड में कैप्टन ने पूरी ताकत से योक खींचा। विमान वापस ऊपर उठा।

04:17

Speaker A

पाकिस्तानी रडार पर वो दृश्य देख हड़कंप मच गया। एक भारतीय विमान पाकिस्तान की जमीन पर गिरे तो जो राजनीतिक तूफान आएगा, वो युद्ध में बदल सकता था। उस डर ने पाकिस्तान को 1 सेकंड में नरम कर दिया। विमान के जमीन से टकराने से ठीक पहले लाहौर एटीसी ने रनवे की लाइटें जला दी।

04:32

Speaker A

रात 8:07, IC814 ने लाहौर एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। लाहौर में विमान 2 घंटे रुका। पाकिस्तान इस संकट का हिस्सा नहीं बनना चाहता था। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त जी पार्थ सारथी ने लाहौर आने की कोशिश की। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर की मंजूरी में जानबूझकर...

04:51

Speaker A

विमान ने हमारे एयर स्पेस [संगीत] में एंट्री की तो मिसाइल से मार गिराया जाएगा। कारगिल की लड़ाई महीनों पहले खत्म हुई थी। दोनों देशों के बीच [संगीत] झर घुला था। कैप्टन के सामने दो रास्ते थे। सामने पाकिस्तान [संगीत] की मिसाइलें, पीछे

05:06

Speaker A

आतंकियों की बंदूकें। विमान भारत और पाकिस्तान की सीमा के ऊपर अंधेरे आसमान में गोल-गोल चक्कर काटने लगा। डैशबोर्ड पर फ्यूल गेज तेजी से गिर रहा था। 40 मिनट का ईंधन बचा था। कैप्टन ने आतंकी से कहा, फ्यूल खत्म हो रहा है। लाहौर का रास्ता

05:24

Speaker A

बंद है। अगर अभी नहीं उतरे तो सब मर जाएंगे। पास में अमृतसर है। आतंकी भारत की जमीन पर नहीं उतरना चाहते थे। लेकिन मौत का डर किसी भी गुरूर से बड़ा होता है। शाम [संगीत] 6:44। आईसी 814 ने अमृतसर के राजा सासी एयरपोर्ट

05:41

Speaker A

[संगीत] पर लैंडिंग की। कैप्टन शरण ने कॉकपिट की खिड़की से बाहर देखा। उन्हें यकीन था अगले कुछ मिनटों में एनएसजी कमांडो जाएंगे। इस दुस्वप्न का अंत होगा। लेकिन बाहर सिर्फ एक खौफनाक सन्नाटा था। दूर बाउंड्री पर पंजाब पुलिस [संगीत] की

05:57

Speaker A

दो-चार गाड़ियां। बस कोई कमांडो नहीं। कोई घेराबंदी नहीं। दिल्ली से आदेश था। विमान को रोके रखो। फ्यूल भरने में देरी करो। लेकिन कड़वी सच्चाई यह थी कि कमांडोस दिल्ली से रवाना भी नहीं हुए थे। क्यों?

06:11

Speaker A

क्योंकि उस विमान में रॉ के एक वरिष्ठ अधिकारी [संगीत] शशि भूषण सिंह तोमर सवार थे। दिल्ली को डर था कि आक्रामक कारवाही में उस वीआईपी की जान खतरे में पड़ जाएगी। [संगीत] एक सिस्टम, एक वीआईपी, 176 जिंदगियां। तराजू

06:27

Speaker A

का पलड़ा किधर झुका यह उस रात अमृतसर की ठंडी सड़क [संगीत] पर साफ दिख रहा था। विमान के अंदर आतंकियों को देरी से शक हुआ और वो शक यकीन में बदल गया। बाहर जाल बिछाया जा रहा है। उनकी नजर गई रूपण

06:42

Speaker A

कात्याल पर। 25 साल का लड़का हनीमून से लौट रहा था। हाईजैकिंग की शुरुआत में ही उसे रचना से अलग कर दिया गया था। रचना को नहीं पता था कि उसका पति कहां है। रूपण को नहीं पता था कि वो क्यों उठाया जा रहा है।

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Speaker A

आतंकियों [संगीत] ने उसे सीट से खींचा और बिना एक शब्द कहे बिल्कुल मशीनी अंदाज में उसके सीने और [संगीत] पेट पर चाकुओं से कई-कई वार किए। [नाक से की जाने वाली आवाज़] रूपण फर्श पर गिरा। वो तुरंत नहीं मरा।

07:09

Speaker A

काफी देर तक तड़पता रहा और उसकी पत्नी कुछ फीट की दूरी पर यह भी नहीं जानती थी कि उस खामोशी के पीछे उसका पति धीरे-धीरे मौत [संगीत] की नींद सो रहा है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी। यह एक संदेश था। कैप्टन ने

07:23

Speaker A

तुरंत रेडियो पर चिल्लाया। [संगीत] वो लोगों को मार रहे हैं। फ्यूल भेजो। अभी जमीन पर एक जल्दबाजी में प्लान बना। एक फ्यूल ट्रक भेजो। उसके अंदर पंजाब पुलिस के जवान छुपाओ। फ्यूल भरने के बहाने विमान के टायर पंचर कर दो। ट्रक निकला। लेकिन

07:39

Speaker A

ड्राइवर ने घबराहट में विमान से [संगीत] कुछ दूरी पर जोर से ब्रेक मारे। तेज आना फिर अचानक रुकना। आतंकियों ने देखा और उनका शक यकीन [संगीत] बन गया। चीफ वापस कॉकपेट में घुसा। पिस्तौल कैप्टन के सिर पर। अभी प्लेन उड़ाओ। रात 7:49।

07:57

Speaker A

कैप्टन ने थ्रोटलल आगे धकेला। एटीसी ने अंतिम कोशिश की। एक गाड़ी रनवे के बीचोंबीच खड़ी कर दी। विमान 250 किमी/ घंटे की [संगीत] रफ्तार से उस गाड़ी की तरफ बढ़ रहा था। कैप्टन ने पूरी ताकत से योक खींचा। 130 टन का विमान जमीन से उठा।

08:14

Speaker A

उसका पिछला हिस्सा [संगीत] उस गाड़ी को छूते-छूते बचा। महज कुछ इंच। रनवे के किनारे खड़े अधिकारियों के चेहरों पर [संगीत] ना गुस्सा था ना डर। बस एक सुन करने वाली लाचारी थी। भारत ने उस रात अपने ही लोगों को बचाने का एकमात्र मौका खो

08:30

Speaker A

दिया। IC814 के डैशबोर्ड पर फ्यूल गेज शून्य पर था। कैप्टन ने विमान पश्चिम की तरफ मोड़ा और लाहौर एठी को कॉल किया। इस बार लाहौर ने सिर्फ इंकार नहीं किया। [संगीत] पूरे एयरपोर्ट की रोशनी बंद कर दी। रनवे की लाइटें बंद, नेविगेशन लाइटें

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Speaker A

बंद। [संगीत] कैप्टन को ऊपर से नीचे सिर्फ अंधेरा दिख रहा था। फ्यूल अलार्म बज रहा था। वो [संगीत] नीचे उतरने लगे। 500 फीट, 300 फीट। तभी अंधेरे में एक लंबी रोशन पट्टी दिखी। विमान उस पट्टी की तरफ बढ़ा।

09:04

Speaker A

लैंडिंग के एकदम करीब [संगीत] पहुंचे। तभी कैप्टन को सच्चाई दिखी। वो रनवे की लाइटें नहीं थी। वो एक व्यस्त हाईवे पर चलती [संगीत] गाड़ियों की हेडलाइटें थी। 130 टन का कमर्शियल विमान एक [संगीत] चालू सड़क पर गिरने ही वाला था। आखिरी सेकंड में

09:19

Speaker A

कैप्टन ने पूरी ताकत से [संगीत] योक खींचा। विमान वापस ऊपर उठा। पाकिस्तानी रडार पर वो दृश्य देख हड़कंप मच गया। एक भारतीय विमान पाकिस्तान की जमीन पर गिरे तो जो राजनीतिक तूफान आएगा [संगीत] वो युद्ध में बदल सकता था। उस डर ने

09:34

Speaker A

पाकिस्तान को 1 सेकंड में नरम कर दिया। विमान के जमीन से टकराने से ठीक [संगीत] पहले लाहौर एटीसी ने रनवे की लाइटें जला दी। रात 8:07 IC84 ने लाहौर एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। लाहौर में विमान 2ाई घंटे रुका। पाकिस्तान

09:51

Speaker A

[संगीत] इस संकट का हिस्सा नहीं बनना चाहता था। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त जी पार्थ सारथी ने [संगीत] लाहौर आने की कोशिश की। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर की मंजूरी में जानबूझकर [संगीत] इतनी देरी की कि वो पहुंच ही नहीं सके। पाकिस्तान ने 20,000

10:08

Speaker A

[संगीत] पाउंड फ्यूल भरा और एक ही आदेश दिया। निकलो। रात 10:32 IC84 लाहौर से उड़ा। अगला पड़ाव दुबई 25 दिसंबर रात 1:32 विमान यूएई के अलमिनहाद एयरबेस पर उतरा। भारत ने एनएसएसजी कमांडोस से भरा एक राहत विमान दुबई भेजा। लेकिन यूएई [संगीत] ने

10:31

Speaker A

साफ इंकार कर दिया। अपनी जमीन पर कोई सैन्य कारवाई नहीं। भारतीय अधिकारी अपनी आंखों से आईसी 814 को देख [संगीत] रहे थे और कुछ नहीं कर सकते थे। दुबई में आतंकियों ने 27 यात्रियों को रिहा किया। ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और बीमार और इसी

10:48

Speaker A

रिहाई में रूपण कात्याल का शव भी विमान से नीचे उतारा गया। उन 27 रिहा लोगों में एक नाम नहीं था रचना कात्याल रूपण की नई नवेली दुल्हन जिसे अब तक यह भी नहीं पता था कि उसका पति [संगीत] इस दुनिया में

11:03

Speaker A

नहीं रहा। सुबह 6:20 दुबई से विमान उड़ा। इस बार [संगीत] ईंधन पूरा था। अगला पड़ाव कांधार। कांधार सिर्फ एक शहर नहीं था। यह भारत के लिए एक भू-राजनीतिक काला छेद [संगीत] था। 1999 में अफगानिस्तान पर तालिबान का पूरा कब्जा

11:19

Speaker A

था। भारत उसे मान्यता नहीं देता था। वहां कोई दूतावास नहीं था। कोई खुफिया नेटवर्क नहीं था। कोई अंतरराष्ट्रीय कानून वहां काम नहीं करता था। आतंकियों ने कांधार इसीलिए चुना था। वहां भारत बिल्कुल बेबस था। 25 दिसंबर सुबह 8:33

11:38

Speaker A

IC814 कांधार [संगीत] एयरपोर्ट पर उतरा। इंजन बंद हुए। ऑक्सिलरी पावर यूनिट ठप हो [संगीत] गया। हीटिंग बंद, ताजी हवा बंद। बाहर दिसंबर की ठंड में तापमान शून्य से नीचे था। वो विशालकाय केबिन एक आइस बॉक्स में बदल गया। टॉयलेट

11:54

Speaker A

ओवरफ्लो हो चुके थे। 48 घंटों से 150 [संगीत] से ज्यादा लोग अपनी सीटों पर बंधे थे। बिना पानी, बिना नींद। तभी बाहर रनवे पर भारी बूटों की आवाजें गूंजी। बख्तरबंद गाड़ियां आई। तालिबान के हथियारबंद लड़ाकों ने विमान को चारों तरफ से घेर

12:11

Speaker A

लिया। टैंक, एंटी एयरक्राफ्ट गन, रॉकेट लांचर दुनिया को बताया गया यह बंधकों की सुरक्षा के लिए है। लेकिन सच्चाई अलग थी। उन टैंकों की नाल आसमान और रनवे के दरवाजों की तरफ थी। अगर भारत का एक भी कमांडो आता तो उसे आतंकियों से पहले

12:28

Speaker A

तालीबान [संगीत] के टैंकों का सामना करना पड़ता। तालीबान ने आतंकियों को एक ढाल दे दी थी। भारत के सामने अब एक ऐसी दीवार थी जिसे ना ताकत तोड़ सकती थी ना कूटनीति। लेकिन उस दीवार के उस पार जो खेल होने

12:42

Speaker A

वाला था [संगीत] वो खेल सिर्फ हथियारों से नहीं दिमाग से खेला जाता। और उस खेल के लिए भारत ने एक ऐसा आदमी भेजा जो दुश्मन के [संगीत] बीच जाकर बिना किसी बंदूक के सिर्फ अपनी आवाज की ताकत से लड़ता था।

12:56

Speaker A

उसका नाम था अजित डोभाल। 27 दिसंबर 1999 दोपहर के 3:00 बजे [संगीत] कांधार एयरपोर्ट उस वक्त दुनिया की सबसे खतरनाक जमीन एक छोटा सा भारतीय सरकारी विमान रनवे पर उतरा दरवाजा खुला एक आदमी नीचे उतरा साधारण कपड़े कोई बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं

13:16

Speaker A

कोई हथियार नहीं कोई सुरक्षा गार्ड नहीं चारों तरफ तालीबान के लड़ाके थे कलाशिकोव टैंक एंटी एयरक्राफ्ट गन और उन सबके पीछे वो विमान खड़ा था जिसमें तीन तीन दिनों से 176 जिंदगियां [संगीत] कैद थी। उस आदमी ने एक पल रुक कर चारों तरफ देखा। फिर आगे

13:36

Speaker A

बढ़ा बिना किसी हड़बड़ाहट के। उसका नाम था अजित डोभाल। [संगीत] इंटेलिजेंस ब्यूरो के एडिशनल डायरेक्टर। जो आदमी 5 साल पाकिस्तान में एक मुसलमान बनकर रहा था। जिसने मिजोरम में बागियों के बीच घुसकर [संगीत] उन्हें हथियार छुड़वाए। जिसने पंजाब के आतंकवाद के सबसे काले दौर में

13:56

Speaker A

ऑनप्रेशन ब्लैक थंडर को अंदर से लीड किया। ना बैकअप था ना भागने का रास्ता था। लेकिन डोभाल का [संगीत] चेहरा उस पल पूरी तरह शांत जैसे वो किसी दफ्तर में बैठक के लिए आए हो। डोभाल को मालूम था कि [संगीत] यह

14:10

Speaker A

नेगोशिएशन किताबों वाली नहीं होगी। सामने वाले ट्रेंड किलर थे। पाकिस्तानी आईएसआई [संगीत] की सीधी मदद से आए थे। उनकी मांगे थी 200 मिलियन नकद। 36 खूंखार आतंकियों [संगीत] की रिहाई और एक मारे गए आतंकी का ताबूत। डोभाल ने एक छोटी सी मुस्कान दी।

14:29

Speaker A

उन्हें पता था मांगे जितनी [संगीत] बड़ी होती हैं, उनके पीछे की घबराहट उतनी ही ज्यादा होती है। वायरलेस पर पहली बातचीत शुरू हुई। चीफ इब्राहिम अथर की आवाज में घमंड था। यकीन था कि भारत झुकेगा। डोभाल ने जवाब दिया बिल्कुल शांत। बिल्कुल सपाट।

14:48

Speaker A

200 मिलियन डॉलर नकद कांधार जैसी जगह पर लाना [संगीत] तकनीकी रूप से संभव नहीं। यह इच्छा का सवाल नहीं। लॉजिस्टिक्स का सवाल है। [संगीत] ताबूत की मांग किसी भी देश के कानून में स्वीकार्य नहीं। एक पल रुके। [संगीत] फिर बोले, हम बाकी बातों पर बात

15:04

Speaker A

कर सकते हैं। यह डोभाल की पहली चाल थी। सबसे बड़ी और सबसे असंभव मांगे पहले ही काट दी। बिना गुस्से के, बिना नाटक के, सिर्फ तर्क से। आतंकी चाहते हैं कि सामने वाला घबराए, [संगीत] चिल्लाए। उस घबराहट को देखकर उनकी ताकत बढ़ती है। डोभाल ने वो

15:22

Speaker A

घबराहट कभी नहीं दिखाई। यह बहुत कठिन था क्योंकि विमान के अंदर 150 से ज्यादा लोग हर घंटे मौत के करीब जा रहे थे। विमान के अंदर उन दिनों का हाल किसी नर्क [संगीत] से कम नहीं था। पहला दिन डर। हर कोई सोच

15:37

Speaker A

रहा था यह जल्दी खत्म होगा। कमांडो [संगीत] आएंगे। दूसरा दिन थकान, पानी कम था। टॉयलेट ओवरफ्लो बच्चे रो-रो कर चुप हो गए थे। तीसरा दिन एक अजीब [संगीत] खामोशी कोई नहीं रो रहा था। 176 लोग बस एक दूसरे

15:53

Speaker A

को देख [संगीत] रहे थे। जैसे अंदर से टूट जाने के बाद इंसान जो जगह पहुंचता है वहां। कुछ लोगों ने जेब में पड़े कागज निकाले। टिश्यू पेपर पर अपने परिवारों के लिए आखिरी खत लिखने लगे। एक बुजुर्ग ने

16:06

Speaker A

लिखा हमारे बेटे का ख्याल रखना। एक मां ने लिखा माफ करना। मैं वापस नहीं आ पाई। एक नौजवान ने लिखा, अब्बू, मैंने कभी तुमसे नहीं कहा कि मैं तुमसे कितना [संगीत] प्यार करता हूं। यह खत किसी को नहीं मिले।

16:21

Speaker A

सबने बस अपनी सीट की जेब में रख लिए। उधर डोभाल [संगीत] हर घंटे बातचीत को आगे बढ़ा रहे थे। रणनीति एक ही थी। समय खींचो जितना वक्त बीतेगा, आतंकियों की मांगे उतनी ही सिकुड़ेंगी। 36 आतंकियों की मांग 20 पर

16:37

Speaker A

आई। डोभाल ने कहा [संगीत] आगे बात करते हैं। 20 से 10 पर आई। डोभाल ने फिर वही कहा। लेकिन एक नाम हर बार उस लिस्ट में था। मौलाना मसूद अजहर दिल्ली के वॉर रूम में यह नाम सुनते ही [संगीत] सन्नाटा छा

16:52

Speaker A

जाता था। 1994 में भारतीय सुरक्षा बलों ने उसे कश्मीर [संगीत] से पकड़ा था। 5 साल से भारत की जेल में था। लेकिन उससे पहले वो अफगानिस्तान के जिहाद [संगीत] का सबसे बड़ा प्रचारक था। उसके भाषणों से हजारों लड़के आतंक की राह [संगीत] पर आए थे।

17:08

Speaker A

आईएसआई उसे अपना सबसे कीमती हथियार मानती थी। उसे छोड़ना सीधे मतलब था। एक ऐसे आदमी को आजाद करना जो [संगीत] कल हजारों लोगों की मौत का कारण बनेगा। दिल्ली के वॉर रूम में बैठे लोग यह [संगीत] सब जानते थे और

17:23

Speaker A

यह भी जानते थे। अगर उसे नहीं छोड़ा तो विमान में बंद [संगीत] 150 से ज्यादा लोगों का क्या होगा। इस नेगोशिएशन में एक और खिलाड़ी था जिसका किसी को अंदाजा नहीं था। खुद तालीबान। उसने विमान के चारों तरफ

17:36

Speaker A

अपने टैंक लगाए थे। दुनिया को लगा यह बंधकों की सुरक्षा है। लेकिन असल में यह हाईजैकर्स पर भी दबाव था। तालीबान ने आतंकियों को साफ संदेश [संगीत] दिया था। या तो भारत के साथ सौदा करो या हमारी जमीन

17:49

Speaker A

छोड़ो। आतंकियों के पास ना फ्यूल था ना कोई अगला ठिकाना। इस्लाम में इंसानों को पैसों के बदले बेचना हराम माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया पूरी दुनिया में यह खबर दिखा रहा था। तालीबान नहीं चाहता था कि दुनिया उसे इस सौदे में शामिल देखे। एक

18:06

Speaker A

तरफ डोभाल का दिमागी खेल। दूसरी तरफ तालीबान का अनकहा दबाव और बीच में आतंकी जो धीरे-धीरे अपनी ताकत खोते जा रहे थे। आठवां दिन 31 दिसंबर 1999 [संगीत] पूरी दुनिया 21वीं सदी के जश्न की तैयारी में थी। नई दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी

18:25

Speaker A

के दफ्तर में कोई जश्न नहीं था। सामने कागज था उस पर तीन नाम मौलाना मसूद अजहर, अहमद उमर सईद, शेख, मुस्ताक, अहमद जरगर। 36 से शुरू होकर सात दिनों की बातचीत में मांग यहां तक सिकुड़ी थी। लेकिन यह तीन

18:42

Speaker A

नाम किसी के लिए भी आम नहीं थे। मसूद अजहर पाकिस्तानी मदरसों का सबसे बड़ा आतंकी विचारक उमर सैद शेख लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ा। अलकायदा और आईएसआई के बीच का सबसे काम का आदमी जरगर कश्मीर में अल उमर मुजाहदीन का संस्थापक यह फौजी

19:00

Speaker A

नहीं थे। यह रणनीतिकार थे। इन्हें छोड़ना मतलब तीन टाइम बम को जिंदा कर देना। कैबिनेट की बैठक में सब यह जानते थे। कुछ लोगों ने कहा नहीं छोड़ना [संगीत] चाहिए। आतंकवाद के आगे नहीं झुकना चाहिए। नैतिक रूप से, रणनीतिक रूप से यह नीति सही थी।

19:18

Speaker A

लेकिन उन लोगों के ज़हन में वो 150 [संगीत] से ज्यादा चेहरे नहीं थे। जो अंधेरे में टिश्यू पेपर पर आखिरी खत लिख रहे थे। जिनके घरों में बच्चे हर रात टीवी के सामने रो रहे थे। अटल जी देर तक चुप रहे

19:31

Speaker A

बहुत देर तक। फिर धीरे से बोले, "हमारे पास कोई रास्ता नहीं है। तीनों को छोड़ा जाएगा।" उस कमरे में एक सन्नाटा छा गया [संगीत] जो किसी हार का नहीं था। यह उस बोझ का सन्नाटा था जो एक नेता को तब उठाना

19:44

Speaker A

पड़ता है जब हर रास्ता बंद हो और एकमात्र दरवाजा आगे जाकर तबाही की तरफ खुलता हो। कांधार में डोबाल को यह फैसला बताया गया। उन्होंने कुछ नहीं कहा। एक लंबी चुप्पी। वो चुप्पी सिर्फ उनकी नहीं थी। यह उस पूरे

19:59

Speaker A

देश की चुप्पी थी जो जानता था कि आज जो होगा [संगीत] उसकी कीमत कल चुकानी पड़ेगी। 31 दिसंबर दिल्ली का पालम एयरपोर्ट रात पूरी दुनिया में नए साल का जश्न शुरू हो रहा था। एक विशेष भारतीय विमान [संगीत]

20:15

Speaker A

में तीन लोग बैठे थे। मसूद अजहर, उमर सईद, शेख, जरगर। उनके साथ थे विदेश मंत्री [संगीत] जसवंत सिंह। एक संप्रभु देश के विदेश मंत्री अपने सबसे बड़े दुश्मनों को वीआईपी स्क्वाड देकर कांधार छोड़ने जा रहे थे। [संगीत] इससे बड़ी कूटनीतिक लाचारी

20:32

Speaker A

क्या होती? कांधार। 31 दिसंबर दोपहर बर्फीला रनवे [संगीत] उजाड़ एयरपोर्ट आईसी 814 और भारत का विशेष विमान आमने-सामने भारत के विमान का दरवाजा खोला तीनों उतरे। तालिबान के लड़ाकों ने पहचान कंफर्म की धीरे-धीरे बिना किसी जल्दी के। जब पहचान [संगीत] पूरी हुई IC

20:55

Speaker A

84 का दरवाजा खुला। और वो 155 लोग जो आठ दिनों से उस बंद ठंडे बदबूदार केबिन में थे बाहर निकले। चेहरे पीले [संगीत] पैर कांपते हुए कुछ रो रहे थे। कुछ बस आगे चल रहे थे जैसे यकीन नहीं हो रहा। डोभाल उनसे

21:12

Speaker A

मिले बोले आप लोग आजाद हैं। हम आपको सुरक्षित घर लेकर जाएंगे। फिर उन्होंने कहा भारत माता की जय। [संगीत] कोई नहीं बोला। खामोशी। डोभाल ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें उस खामोशी का मलाल रहा। लेकिन वो खामोशी सिर्फ डर की

21:30

Speaker A

नहीं थी। यह उस थकान [संगीत] की खामोशी थी जो 8 दिन मौत के साए में जीने के बाद इंसान को मिलती है। किसी भी नारे से ज्यादा गहरी और उधर उसी रनवे से तीन आदमी बेखौफ होकर निकले। हथियार लहराते हुए

21:44

Speaker A

मुस्कुराते हुए। तालिबान की बख्तरबंद गाड़ियों में बैठे और अफगानिस्तान [संगीत] के रेगिस्तान में गायब हो गए। वो तीन आदमी कहां गए? उस दिन किसी को पता नहीं था। लेकिन अगले 20 साल का इतिहास गवाह है। 1 जनवरी 2000 दिल्ली में एक घर में एक लड़की

22:01

Speaker A

टीवी के सामने बैठी थी। रचना कात्याल हाथ में चाय [संगीत] का कप था। ठंडा हो चुका था। उसे पता नहीं चला। टीवी पर खबर आ रही थी। आईसी 814 के यात्री आजाद सभी सुरक्षित सभी लेकिन रचना जानती थी सभी नहीं एक

22:17

Speaker A

नहीं। उसका पति रूपण कात्याल 25 साल का हनीमून की यादें सीने में भरकर घर जा रहा था। जिसकी [संगीत] पूरी जिंदगी आगे थी वो नहीं लौटा। वो दुबई में उतर गया था। एक बंद ताबूत में रचना ने टीवी बंद किया।

22:33

Speaker A

कमरे में अंधेरा हो गया और उस अंधेरे में वह बैठी रही। कांधार के उस रनवे से निकले तीन आदमियों की वजह से आने वाले वर्षों में ऐसी और कितनी रचनाएं बनी यह गिनना मुश्किल है। मौलाना मसूद अजहर कांधार से

22:47

Speaker A

सीधा पाकिस्तान गया। वहां उसका स्वागत एक नायक की तरह हुआ। आईएसआई की पूरी मशीनरी [संगीत] उसके पीछे थी। पैसा था, लोग थे, जमीन थी। कांधार से आजाद होने के 2 महीने [संगीत] के अंदर उसने एक नया संगठन बनाया।

23:02

Speaker A

नाम रखा जैश-ए-मोहम्मद। यह कोई आम आतंकी संगठन नहीं था। यह एक कारखाना था जो नफरत पैदा करता था। नौजवानों को झड़ देता था और उन्हें भारत के खिलाफ हथियार बनाता था। पूरे पाकिस्तान के मदरसों में मसूद अजहर के भाषणों की

23:18

Speaker A

कैसेटें बांटी गई। 13 दिसंबर 2001 भारतीय संसद पर हमला। पांच हथियार बंद आतंकी अंदर घुस गए। नौ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। अगर वह उस हॉल तक पहुंच जाते जहां सैकड़ों सांसद बैठे थे तो जो होता वो भारत के इतिहास की

23:35

Speaker A

सबसे बड़ी त्रासदी होती। जांच में सामने आया जैश ए मोहम्मद मसूद अजहर कांधार के उस रनवे पर जो बीज बोया गया था उसका पहला फल 2016 जनवरी पठानकोट भारतीय वायुसेना के एयरबेस में रात के अंधेरे में छह आतंकी

23:53

Speaker A

घुसे। दो दिनों की मुठभेड़ में सात सुरक्षाकर्मी शहीद जांच में जैश ए मोहम्मद मसूद अजहर 14 फरवरी 2019 पुलवामा सीआरपीएफ के काफिले में एक गाड़ी थी विस्फोटक से भरी एक नौजवान उसे चला रहा था उसने काफिले की बस [संगीत] में गाड़ी घुसा दी 40 जवान

24:14

Speaker A

शहीद हुए 40 घर उजड़े 40 मांओं की गोद सुनी 40 पत्नियां विधवा जांच में जैश ए मोहम्मद मसूद अजहर 31 दिसंबर 1999 को कांधार से बेखौफ निकला वो आदमी उसी की वजह से 20 साल बाद पुलवामा [संगीत] हुआ। दूसरा नाम अहमद उमर सईद शेख लंदन

24:35

Speaker A

स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स का पड़ा हुआ। [संगीत] जोश में भरा जिहादी नहीं ठंडे दिमाग का रणनीतिकार। कांधार से निकलने के बाद वो अलकायदा और आईएसआई के बीच सबसे अहम कड़ी बना। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार इसी उमर शेख ने 11 सितंबर के हमलों के मुख्य

24:51

Speaker A

[संगीत] अपहरणकर्ता मोहम्मद अट्टा को $1 लाख का फंड ट्रांसफर किया। वो पैसे जो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले की योजना में लगे वो पैसे [संगीत] जिनकी वजह से 3000 अमेरिकी मारे गए। कांधार की उस रिहाई की कीमत [संगीत]

25:06

Speaker A

सिर्फ भारत ने नहीं चुकाई। फिर उमर शेख ने वॉलस्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल को जो पाकिस्तान में आतंकी फंडिंग की जांच कर रहे थे। बैठक के बहाने बुलाया और अगवा कर लिया। दिनों बाद उनकी बेरहम हत्या का

25:19

Speaker A

वीडियो सामने आया। उस हत्या के पीछे वह आदमी था जिसे भारत ने कांधार में आजाद किया था। तीसरा नाम मुस्ताक [संगीत] अहमद जरगर। कश्मीर घाटी का पुराना दर्द। कांधार से लौटते ही उसने घाटी में अपना नेटवर्क फिर खड़ा किया। वो खूनी दौर जो धीरे-धीरे

25:38

Speaker A

थम [संगीत] रहा था। वो फिर लौट आया। तीनों नाम। तीनों ने अलग-अलग दिशाओं में तबाही [संगीत] मचाई। लेकिन तीनों की जड़ एक थी। कांधार का वो रनवे 31 [संगीत] दिसंबर 1999। लेकिन यह कहानी सिर्फ हार की नहीं है। उस

25:54

Speaker A

हार ने भारत को कुछ सिखाया और वो सबक उस दर्द से कहीं ज्यादा [संगीत] ताकतवर निकला। आईसी 814 के बाद पहला सवाल उठा। अमृतसर में वो मौका क्यों चुका? जांच हुई। जो सच सामने आया वो बेहद कड़वा था। कोई एक

26:10

Speaker A

आदेश देने वाला नहीं था। सुरक्षा एजेंसियां आपस में बात नहीं करती थी। इस कमजोरी को दूर करने के लिए पहली बार एक एकीकृत [संगीत] संकट प्रबंधन व्यवस्था बनाई गई। एनएसएसजी को दुनिया की सबसे घातक एंटी हाईजैकिंग फोर्सेस में से एक बनाया

26:24

Speaker A

गया। इसराइल की मोसाद और [संगीत] जर्मनी की जीएसएजी नौ से ट्रेनिंग लेकर। कितने मिनट में एयरपोर्ट पर पहुंचना है, विमान को कैसे घेरना है, कैसे अंदर घुसना है, सब कुछ नए सिरे से तय हुआ। और एक बदलाव जो

26:38

Speaker A

बहुत कम लोग जानते हैं। आज जब आप किसी भारतीय विमान में सवार होते हैं। उस विमान में आपके साथ कुछ लोग और होते हैं। साधारण कपड़ों में, खिड़की के पास, अखबार पढ़ते हुए। यह स्काई मार्शल हैं। पूरी तरह

26:52

Speaker A

[संगीत] हथियार बंद, पूरी तरह ट्रेंड। आप उन्हें नहीं पहचान सकते। आईसी 814 के बाद भारत ने यह व्यवस्था बनाई। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव हुआ भारत की सोच में। कांधार के पहले नीति थी। दुश्मन जो करे हम जवाब [संगीत] देंगे। कांधार के बाद नीति बदली।

27:09

Speaker A

अब सिर्फ जवाब नहीं अब पहल अब इंतजार नहीं। यह सोच धीरे-धीरे पकती रही। [संगीत] साल दर साल और फिर एक दिन कार्रवाई में बदली। उरी सितंबर 2016 18 जवान शहीद। 10 दिन के अंदर पैरा स्पेशल फोर्सेस ने सर्जिकल स्ट्राइक की। सीमा पार पाकिस्तान

27:28

Speaker A

की जमीन पर पुलवामा। फरवरी 2019 [संगीत] 40 जवान शहीद। 12 दिन के अंदर बालाकोट में भारतीय वायु सेना ने जैश ए मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण केंद्र पर बम गिराए। वह जमीन [संगीत] जहां पुलवामा की योजना बनी थी तबाह और मई 2019 में संयुक्त

27:47

Speaker A

राष्ट्र ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया। वो आदमी जो 1999 में कांधार से बेखौफ निकला था। आज दुनिया की नजर में एक घोषित आतंकी है। इस पूरी कहानी में [संगीत] एक किरदार है जिसे हम भूल जाते

28:02

Speaker A

हैं। कैप्टन देवी शरण जिनकी कणपट्टी पर [संगीत] 8 दिन पिस्तौल टिकी रही। जिन्होंने लाहौर के अंधेरे में बिना रणवे देखे विमान उतारा। जिन्होंने कभी घबराहट नहीं दिखाई। उन्होंने बाद [संगीत] में बस इतना कहा मेरा काम था मैंने किया। और अजीत

28:20

Speaker A

डोभाल जो कांधार [संगीत] की जमीन पर अकेले उतरा। ना हथियार ना बचने का रास्ता। सिर्फ दिमाग और आवाज से वो काम किया जो पूरी फौज मिलकर नहीं कर सकती थी। 1 जनवरी 2000 155 लोग भारत लौटे थके हुए टूटे हुए लेकिन

28:37

Speaker A

जिंदा लेकिन एक घर में रोशनी नहीं थी रचना कात्याल का घर रूपण के बिना रूपण की कहानी इस पूरे संकट [संगीत] की आत्मा है। वो याद दिलाता है कि यह सिर्फ राजनीति नहीं थी। यह असली इंसानों [संगीत] की असली

28:50

Speaker A

जिंदगियां थी। IC814 सिर्फ एक फ्लाइट का नंबर नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जो टूटा, जो झुका, जो हारा [संगीत] लेकिन जो उस हार से उठा और उठकर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ। क्योंकि ताकत उस देश

29:06

Speaker A

[संगीत] में होती है जो अपनी गलतियों से सीखता है। और फिर कभी वही गलती नहीं दोहराता। अगर दोस्तों यह कहानी आपका दिल छू गई हो तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें और वीडियो शेयर जरूर करें। जय हिंद।

Topics: आईसी814 हवाई अपहरण आतंकवाद भारत-पाकिस्तान सीमा कैप्टन देवी शरण रूपण कात्याल एनएसजी तालीबान पाकिस्तान 1999


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