**हिमाचल प्रदेश का इतिहास हिंदी में**
Source: https://sozai.app/transcript/history-himachal-pradesh-hindi/

हिमाचल प्रदेश के प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास की विस्तृत जानकारी, पुरापाषाण काल से सिंधु घाटी सभ्यता तक।

## Key Takeaways

- हिमाचल प्रदेश का इतिहास मानव सभ्यता जितना प्राचीन है।
- पाषाण युग के विभिन्न कालों के पुरातात्विक प्रमाण हिमाचल प्रदेश में मिले हैं।
- सिंधु घाटी सभ्यता के समय चार प्रमुख जातियां हिमाचल प्रदेश में निवास करती थीं।
- शैव धर्म और नाग देवता की पूजा हिमाचल प्रदेश की प्राचीन धार्मिक परंपराएं हैं।
- पुरातात्विक खोजों से हिमाचल प्रदेश के इतिहास की समृद्धि और विविधता का पता चलता है।

## What the video covers

- हिमाचल प्रदेश का इतिहास मानव अस्तित्व जितना प्राचीन है, जो सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा है।
- प्रागैतिहासिक काल में पाषाण युग के तीन चरण: पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण काल शामिल हैं।
- प्रोटोहिस्टोरिक काल में लिपि विकसित हुई, पर पढ़ना-लिखना नहीं आता था, जैसे हड़प्पा सभ्यता की लिपि।
- हिमाचल प्रदेश में पुरापाषाण कालीन औजारों के अवशेष सतलुज, सिरसा, मारकंडा नदी घाटी से मिले।
- मध्यपाषाण और नवपाषाण कालीन प्रमाण रोपड़, सरस्वती और यमुना नदी के तलहटी में पाए गए।
- सिंधु घाटी सभ्यता के समय हिमाचल प्रदेश में कोल, किरात, नाग और खस जातियां निवास करती थीं।
- कोल जाति हिमाचल प्रदेश की मूल निवासी है, जिन्होंने नवपाषाण संस्कृति की नींव डाली।
- किरात जाति का उल्लेख महाभारत और अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
- नाग जाति के मंदिर और मूर्तियां हिमाचल प्रदेश में प्राचीन काल से मौजूद हैं, नाग देवता की पूजा प्रचलित थी।
- शैव धर्म हिमाचल प्रदेश का प्राचीनतम धर्म है, जिसमें शिव और शक्ति पूजा का विशेष स्थान है।

Answers

## Questions about this video

हिमाचल प्रदेश के इतिहास में प्रागैतिहासिक काल का क्या महत्व है?

प्रागैतिहासिक काल में हिमाचल प्रदेश में पाषाण युग के तीन चरणों के पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं, जो मानव जीवन के प्रारंभिक विकास को दर्शाते हैं। इस काल में लिपि नहीं थी और मुख्य स्रोत पुरातात्विक अवशेष हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता के समय हिमाचल प्रदेश में कौन-कौन सी जातियां निवास करती थीं?

सिंधु घाटी सभ्यता के समय हिमाचल प्रदेश में मुख्यतः कोल, किरात, नाग और खस जातियां निवास करती थीं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को दर्शाती हैं।

हिमाचल प्रदेश में शैव धर्म का क्या स्थान है?

हिमाचल प्रदेश का प्राचीनतम धर्म शैव धर्म है, जिसमें शिव और शक्ति की पूजा प्रमुख है। सिंधु घाटी सभ्यता में भी पशुपति देवता की पूजा के प्रमाण मिले हैं, जो हिमाचल की धार्मिक परंपराओं का आधार हैं।

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00:00

Speaker A

हेलो फ्रेंड्स वेलकम टू हिमगुरु नॉलेज पॉइंट YouTube चैनल आज की वीडियो होने वाली है काफी ज्यादा इंपोर्टेंट आज हम जानने वाले हैं हिमाचल प्रदेश के इतिहास के बारे में आपसे एक रिक्वेस्ट है कि अभी तक आपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो कृपया सब्सक्राइब जरूर कर दें।

00:20

Speaker A

तो चलिए बात करते हैं सबसे पहले प्राचीन इतिहास के बारे में यूं तो हिमाचल प्रदेश का इतिहास की बात करें तो यह उतना ही प्राचीन है जितना कि मानव अस्तित्व का अपना इतिहास है और यह हमें उस समय में ले जाता है जब सिंधु घाटी सभ्यता जो है वह विकसित हुई थी।

00:54

Speaker A

इस बात की सत्यता के प्रमाण जो है हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में हुई खुदाई में प्राप्त सामग्रियों से मिलते हैं अभी आपको आगे बताऊंगा भी कि कहां-कहां खुदाई की गई और किस-किस वर्ष में की गई थी ठीक है इसके अलावा अगर हम यहां के आदि निवासी की बात करें तो दास दसियों निषाद के नाम से जाने जाते थे।

01:42

Speaker A

इन सभी बातों पर जो मुख्यतः हम प्रमुखता से बात करेंगे तो चलिए सबसे पहले बात कर लेते हैं प्रागैतिहासिक काल की यानी कि जो प्रीहिस्टोरिक काल था हिमाचल प्रदेश में भी उसके बारे में बात कर लेते हैं क्योंकि प्रागैतिहासिक काल की बात करें तो इस काल में लिपि का विकास बिल्कुल नहीं हुआ था।

02:22

Speaker A

इसका मतलब यही है कि इस काल में ना तो मानव को लिखना आता था ना तो पढ़ना आता था तो साफ तौर पर कहा जा सकता है कि इस समय के जो भी हमें स्त्रोत मिलते हैं वह जो है वह पुरातात्विक स्त्रोत मिलते हैं जितने भी हमें यहां से स्त्रोत मिलते हैं और इस अवधि को जो है वह पुरापाषाण काल (30 लाख से 10 हजार BC), मध्यपाषाण काल (1000BC-4000BC) और नवपाषाण काल (7000BC-1000BC) में बांटा गया है।

03:38

Speaker A

ठीक है तो पाषाण काल को जो है पुरापाषाण काल,

03:41

Speaker A

जो 30 लाख से 10 हजार BC तक चला,

03:42

Speaker A

मध्यपाषाण काल (1000BC-4000BC) तक चला और नवपाषाण काल (7000BC-1000BC) में बांटा गया है।

03:43

Speaker A

तो आपको याद रखना है प्रीहिस्टोरिक काल।

03:44

Speaker A

इसके अलावा आपके पास एक और आता है जिसे हम क्या कहते हैं प्रोटो।

03:45

Speaker A

प्रोटोहिस्टोरिक काल।

03:46

Speaker A

प्रोटोहिस्टोरिक पीरियड में क्या रहता था कि इस पीरियड में जो है वह लिपि का विकास हो गया था।

03:47

Speaker A

ठीक है लिपि का विकास हो गया था परंतु जो है वह लिपि पढ़नी नहीं आती थी।

03:48

Speaker A

जैसे बात करेंगे हम हड़प्पा सभ्यता क्योंकि आप जानते हैं कि हड़प्पा सभ्यता में यूं तो लिपि विकसित हो गई थी परंतु अभी तक जो है उस लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है।

03:50

Speaker A

ठीक है तो उसे जो है हम प्रोटोहिस्टोरिक पीरियड में ही लेते हैं।

03:51

Speaker A

तो यहां से आपको जो है वह काफी ज्यादा इंपोर्टेंट जो क्वेश्चंस कंपटीटिव एग्जाम्स में आते हैं वह भी बनते हैं ठीक है।

03:52

Speaker A

तो चलिए बढ़ते हैं आगे जो पुरापाषाण कालीन स्त्रोत की बात हम करते हैं तो हिमाचल प्रदेश में बहुत सारे ऐसे इतिहासकार जैसे ओलाफ रूफर हैं ठीक है।

03:53

Speaker A

इसके अलावा आपके पास जो है बी बी लाल हैं डॉक्टर जी सी महापात्रा हैं जिन्होंने बहुत सारी जगहों से जो है बहुत सारे पुरापाषाण कालीन स्त्रोत की जो है यहां पर नमूने प्राप्त किए थे ठीक है।

03:54

Speaker A

तो जिसमें सबसे पहले बात करें तो 1951 में सतलुज की सहायक नदी सिरसा के दाईं ओर नालागढ़ में जो है वह ओलाफ रूफर ने पत्थरों से बने औजार जैसे खुरपे आदि प्राप्त किए थे।

03:55

Speaker A

इसके अलावा 1955 में बी बी लाल ने गुलेर, देहरा, ढलियारा तथा कांगड़ा से जो थे वह आदिसोहन प्रकार के 72 पत्थरों के उपकरणों के नमूने जो प्राप्त किए थे।

03:56

Speaker A

इसमें अगर हम मुख्यतः बात करें तो चापर हैं, हस्त कुठारें हैं और वेदनीय हैं।

03:57

Speaker A

और वहीं बात करते हैं अगर हम डॉक्टर जी सी महापात्रा की तो उन्होंने भी सिरसा नदी घाटी और कांगड़ा में जो उत्तर पाषाण काल थे 4 लाख वर्ष पूर्व के ठीक है।

03:58

Speaker A

अह उन वहां से जो है वह पत्थर के बने औजारों के अवशेष प्राप्त किए।

03:59

Speaker A

अह वहीं बात करेंगे अगर सिरमौर की तो सिरमौर की मारकंडा नदी के सुकेती क्षेत्र में भी 1974 में इस अवधि के अवशेष जो है प्राप्त हुए थे।

04:00

Speaker A

किसके पुरापाषाण अवधि के जो है वह अवशेष प्राप्त हुए थे मारकंडा नदी के सुकेती क्षेत्र में 1974 में।

04:01

Speaker A

तो कुल मिलाकर जो है अह काफी ज्यादा अवशेष जो है प्राप्त हुए वहीं से पुरापाषाण कालीन की जो है वह जानकारी हमें प्राप्त होती है।

04:02

Speaker A

इसके अलावा बात अगर हम करें मध्यपाषाण एवं नवपाषाण कालीन स्त्रोत की अह तो यहां पर क्या अह इसके स्त्रोत जो है वह रोपड़ में कोटला निहंग में एक तो नवपाषाण युग के प्रमाण मिले।

04:03

Speaker A

वहीं बात करें तो सरस्वती यमुना नदियों की तलहटी में भी इस तरह के प्रमाण हमें मिले मध्यपाषाण पाषाण और नवपाषाण कालीन के ठीक है।

04:04

Speaker A

और अगर हम भारत में बात करें तो इसे एक ही युग माना जाता है जबकि यूरोप में इसका विभाजन किया गया है।

04:05

Speaker A

स्थाई कृषि और सभ्यताओं का जो भी विकास है वह इसी अवधि के दौरान हुआ था।

04:06

Speaker A

मध्यपाषाण और नवपाषाण कालीन की।

04:07

Speaker A

और इसके अलावा बात करेंगे हम सिंधु घाटी की सभ्यता के समय जो हिमाचल प्रदेश के निवासी थे तो मुख्यतः इसमें जो है वह कोल, किरात ठीक है।

04:08

Speaker A

कोल-कोल हि.प्र. के मूल निवासी हैं जिन्होंने नव पाषाण युगीन संस्कृति की नींव डाली थी।

04:09

Speaker A

पश्चिमी हिमालय में वर्तमान के कोली, हाली, डूम, चनाल, बाडी आदि लोग कोल जाति में से ही हैं।

04:10

Speaker A

कोल जाति का हि.प्र. में बसने का पता कुमाऊं की चन्देश्वर घाटी की चट्टानों से मिलता है।

04:11

Speaker A

किरात-किरात (मंगोल) कोल जाति के बाद यहां आने वाली दूसरी जाति थी।

04:12

Speaker A

ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें शिश्नदेव (लिंग देवता की पूजा करनेवाले) कहा है।

04:13

Speaker A

महाभारत में किरातों को हिमालय के निवासी बताया गया है।

04:14

Speaker A

वनपर्व (महाभारत) के अध्याय 140 में इनके निवास का वर्णन मिलता है।

04:15

Speaker A

किरातों को पहाड़ी तलहटी से ऊंचे पर्वतों की तरफ भगाने वाले खश थे।

04:16

Speaker A

मनु ने भी किरातों का वर्णन किया है।

04:17

Speaker A

कालिदास के रघुवंश में किन्नरों का उल्लेख मिलता है।

04:18

Speaker A

नाग-इस जाति के लोग हिमाचल की पहाड़ियों में हर जगह बसते थे।

04:19

Speaker A

मण्डी के पंचवक्त्र शिव मंदिर में नागों की 10 फुट ऊंची मूर्तियां हैं।

04:20

Speaker A

हड़प्पा सभ्यता की मुहरों में नाग देवता को दिखाया गया है।

04:21

Speaker A

महाभारत में अर्जुन ने नाग राजा वासुकी की उलोपी नामक नाग कन्या से गंधर्व विवाह किया था।

04:22

Speaker A

वासुकी नाग की पूजा चम्बा, कुल्लू आदि में की जाती है।

04:23

Speaker A

तक्षक नाग ने हिमालय में नाग राज्य स्थापित किया था।

04:24

Speaker A

खस-आर्यों की तीसरी शाखा जो मध्य एशिया से कश्मीर होते हुए पूरे हिमालय में फैल गयी, खश जाति कहलायी।

04:25

Speaker A

रोहडू क्षेत्र के खशधार, खशखण्डा नाम के गांव में इनके निवास का पता चलता है।

04:26

Speaker A

शिव-हिमाचल के आदि निवासियों द्वारा ऐसे देव की उपासना के प्रमाण मिलते हैं, जो शिवजी से मिलते-जुलते हैं।

04:27

Speaker A

इसका उदाहरण मणिमहेश, किन्नर कैलाश, महासू देवता का मंदिर है।

04:28

Speaker A

हिमाचल का प्राचीनतम धर्म शैव धर्म है।

04:29

Speaker A

पशुपति देवता की पूजा के प्रमाण सिंधु घाटी सभ्यता में मिले हैं।

04:30

Speaker A

शक्ति-हि.प्र. में शिव उपासना के साथ-साथ शक्ति पूजा भी होती थी।

04:31

Speaker A

यह पौराणिक काल में दुर्गा, काली, अम्बा और पार्वती आदि नामों से प्रसिद्ध हुई।

04:32

Speaker A

छतराणी में शक्ति देवी, भरमौर में लक्षणा देवी, ब्रजेश्वरी देवी मंदिर, ज्वालामुखी, हिडिम्बा देवी कुल्लू, नैनादेवी बिलासपुर, हाटेश्वरी देवी हाटकोटी और भीमाकाली सराहन हि.प्र. में शक्ति उपासना के प्राचीन प्रमाण हैं।

04:33

Speaker A

नाग देवता-नाग देवता के अनेक मंदिरों एवं पूजा स्थलों के प्राचीन प्रमाण हि.प्र. में प्राप्त हुए हैं।

04:34

Speaker A

और इसके अलावा अन्य जातियों के बारे में अगर पढ़ लेते हैं जिसमें नाग और खस है ठीक है।

04:35

Speaker A

तो नाग जाति के बारे में अगर हम बताएं आपको तो इसमें क्या रहता था कि यह जो है हिमाचल की पहाड़ियों में हर जगह बसते थे।

04:36

Speaker A

यह नाग जाति के लोग मंडी की बात करें तो पंचवक्त्र शिव मंदिर में नागों की 10 फुट ऊंची मूर्तियां भी है।

04:37

Speaker A

हड़प्पा सभ्यता की मुहरों पर भी नाग देवता को दिखाया गया है।

04:38

Speaker A

इसके अलावा महाभारत में जो अर्जुन ने नाग राजा वासुकी की उलोपी नामक नाग कन्या से गंधर्व विवाह भी किया था।

04:39

Speaker A

तो यह भी काफी ज्यादा इंपोर्टेंट है कि महाभारत में जो अर्जुन ने है वह नाग राजा वासुकी ठीक है नाग राजा वासुकी की उलोपी नामक नाग कन्या से जो है वह गंधर्व विवाह किया था।

04:40

Speaker A

और इसके अलावा नाग जो राजा थे वासुकी ठीक है उनकी पूजा चंबा, कुल्लू आदि में की जाती है।

04:41

Speaker A

तक्षक नाग ने हिमालय में नाग राज्य की स्थापना भी की थी।

04:42

Speaker A

इसके अलावा अगली जाति की बात अगर हम करें खस जाति की तो इसमें क्या कहते हैं कि यह आर्यों की तीसरी शाखा थी।

04:43

Speaker A

जो मध्य एशिया से कश्मीर होते हुए पूरे हिमालय में फैल गई उसे ही हम जो है खस जाति कहते हैं।

04:44

Speaker A

तो मुख्यतः यह क्या थी यह आर्यों की तीसरी शाखा थी जो कहां से आए थे मध्य एशिया से कश्मीर होते हुए पूरे हिमालय में फैले थे यह।

04:45

Speaker A

है ना इसके अलावा अह इसके जो प्रमाण है वह रोहड़ू क्षेत्र के जो खशधार है खशखंडी नाम के गांव है वहां से जो है इनके प्रमाण और इनके निवास का जो है हमें पता चलता है।

04:46

Speaker A

तो कुल मिलाकर जो है वह सिंधु घाटी सभ्यता के समय हिमाचल प्रदेश में यह चार जातियां जो निवास करती थी कौन-कौन सी कोल, किरात और इसके अलावा नाग और खस यानी खश खस आप कोई भी कह सकते हो।

04:47

Speaker A

तो यह चार जातियां जो है निवास करती थी आपको यह भी याद रखना है।

04:48

Speaker A

इसके अलावा देवता क्योंकि जब हम सिंधु घाटी सभ्यता की बात करते हैं तो जो सिंधु घाटी सभ्यता में अह देवता प्रचलित थे जिन देवताओं की पूजा की जाती थी वही तो हिमाचल प्रदेश में पूजा की जाएगी।

04:49

Speaker A

तो मुख्यतः आप जानते ही हैं कि पशुपति अह जो पशुपतिनाथ है उनकी जो है वह पूजा की जाती थी सिंधु घाटी सभ्यता में भी।

04:50

Speaker A

तो हिमाचल प्रदेश के आदि निवासी भी जो है वह शिव की ही पूजा करते थे।

04:51

Speaker A

इसके अलावा नाग देवता की अगर हम बात करें तो अनेक मंदिर और पूजा स्थलों के प्राचीन प्रमाण जो है हिमाचल प्रदेश में प्राप्त हुए हैं।

04:52

Speaker A

ठीक है तो यहां से यह भी आपको याद रखना है कि शिव और नाग देवता यह प्रमुख देवता थे जिन जिनकी पूजा जो है हिमाचल प्रदेश में सिंधु घाटी सभ्यता या फिर जो आपके पास प्रागैतिहासिक काल था उस दौरान की जाती थी।

04:53

Speaker A

आगे बढ़ते हैं थोड़ा और बात करते हैं आर्य और हिमाचल की क्योंकि आर्यों की एक शाखा ने जो मध्य एशिया से होते हुए भारत में प्रवेश किया था।

04:54

Speaker A

मैंने आपको पहले ही बताया कि आर्यों की तीसरी शाखा को हम क्या कहते हैं वह मैंने आपको बताया खस ठीक है।

04:55

Speaker A

आर्यों की तीसरी शाखा जो हिमाचल प्रदेश में जिसने निवास किया सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान उसी में जो है आर्यों की एक शाखा ने मध्य एशिया से होते हुए भारत में प्रवेश किया।

04:56

Speaker A

यह वैदिक आर्य कहलाए ठीक है यह वैदिक आर्य कहलाए और इन लोगों ने जो है अपना पशुधन हो या देवता और गृहस्थी का सामान लेकर आए और सप्त सिंधु प्रदेश की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।

04:57

Speaker A

जहां पूरी तरह बसने में इन्हें 400 वर्ष का समय लग गया।

04:58

Speaker A

सप्त सिंधु जो अभी वर्तमान में पंजाब है वहां से यह शिवालिक की ओर बढ़ने पर जो है उनका वैदिक जो आर्य थे इनका सामना किससे हुआ वहां के प्राचीन निवासियों कोल, किरात और नाग जाति के लोगों से हुआ।

04:59

Speaker A

शांबर-दिवोदास युद्ध-दस्यु राजा शांबर के पास यमुना से व्यास नदी के बीच की पहाड़ियों में 99 किले थे।

05:00

Speaker A

ऋग्वेद के अनुसार दस्यु राजा शांबर और आर्य राजा दिवोदास के बीच 40 वर्षों तक युद्ध हुआ।

05:01

Speaker A

अंत में दिवोदास ने उदब्रज नामक स्थान पर शांबर का वध कर दिया।

05:02

Speaker A

आर्यों ने कोल, किरातों और नागों को निचली घाटियों से खदेड़ कर दुर्गम पहाड़ियों की ओर जाने पर बाध्य कर दिया।

05:03

Speaker A

ऋषि भारद्वाज आर्य राजा दिवोदास के मुख्य सलाहकार थे।

05:04

Speaker A

तो आपको यहां भी याद रखना है कि इनको पूरी तरह बसने में यहां 400 वर्ष का समय भी लग गया।

05:05

Speaker A

सप्त सिंधु जो अभी वर्तमान में पंजाब है वहां से यह शिवालिक की ओर बढ़ने पर जो है वह उनका वैदिक जो आर्य थे इनका सामना किससे हुआ वहां के प्राचीन निवासियों जो मैंने आपको पहले बताया कोल, किरात और नाग जाति।

05:06

Speaker A

क्योंकि कोल, किरात और नाग जाति जो है यह अलग में हमने देखे बाकी जो आपके पास हमने खस बताए हैं वह तो तीसरी शाखा मैंने आपको आर्य की बताई ठीक है।

05:07

Speaker A

तो यह कोल, किरात और नाग जाति थे इनसे इनका सामना हुआ।

05:08

Speaker A

इसके अलावा जो शांबर दिवोदास यानी युद्ध जो दस्यु राजा शांबर थे उनके पास जो है यमुना से व्यास नदी के बीच की पहाड़ियों में 99 किले थे।

05:09

Speaker A

आपको याद रखना है जो दस्यु राजा शांबर थे उनके पास जो है वह कितने किले थे 99 किले थे और यह किले जो है वह यमुना से व्यास नदी के बीच फैले हुए थे।

05:10

Speaker A

जो जितनी पहाड़ियां थी यमुना से व्यास नदी के बीच वहां पर यह 99 किले फैले हुए थे।

05:11

Speaker A

इसके अलावा जो दस्यु राजा शांबर थे और जो आर्य राजा दिवोदास थे उनके बीच में 40 वर्षों तक युद्ध भी हुआ।

05:12

Speaker A

अंत में दिवोदास जो है वह विजय हुआ और उसने उदब्रज नामक स्थान पर शांबर का जो है वध कर दिया।

05:13

Speaker A

आर्यों ने कोल, किरातों और नागों को जो है वह खदेड़ कर निचली घाटियों से जो है वह दुर्गम घाटियों की ओर जाने पर विवश कर दिया यानी बाध्य कर दिया।

05:14

Speaker A

इसके बाद जो ऋषि भारद्वाज आर्य राजा दिवोदास के मुख्य सलाहकार भी नियुक्त किए गए थे।

05:15

Speaker A

तो यह है आर्यों का इतिहास हिमाचल प्रदेश में और मैंने आपको पहले ही बताया कि जब आर्यों की तीसरी शाखा की बात आएगी तो आपको खस लिखना है ठीक है।

05:16

Speaker A

बाकी आर्य की जो प्रथम यह शाखा है या एक शाखा जो हम कहते हैं जो मध्य एशिया से प्रवेश किया था जिन्होंने भारत में उन्हें वैदिक आर्य कहते थे ठीक है।

05:17

Speaker A

और इस तरह से उन्हें बसने में कितना समय लगा इसके अलावा जो शांबर थे ठीक है दस्यु राजा शांबर थे उनके पास 99 किले थे यमुना से व्यास नदी के बीच फैले हुए थे।

05:18

Speaker A

तो यहां सबसे सभी जगह से जो क्वेश्चन अराइज होते हैं आपको यह पढ़ना है।

05:19

Speaker A

इसके अलावा बात करते हैं वैदिक काल की ठीक है जो प्रमुख है वैदिक काल भी यहां हमारे पास है।

05:20

Speaker A

तो वैदिक आर्य की बात करते हैं वैदिक आर्यों की बात करें तो शक्तिशाली राजा ययाति ने सरस्वती नदी के किनारे अपने राज्य की नींव रखी।

05:21

Speaker A

उसके बाद उसका पुत्र पुरु इस राज्य का शासक बना।

05:22

Speaker A

अब उसके बाद क्या हुआ दशराग युद्ध हुआ दशराग युद्ध क्यों यहां पर इंपोर्टेंट है हिमाचल प्रदेश के इतिहास में क्योंकि यह युद्ध जो है वह एक तो रावी नदी के किनारे हुआ ठीक है।

05:23

Speaker A

अब दशराग युद्ध है क्या दशराग युद्ध में जो है वह जो दिवोदास का पुत्र था ठीक है सुदास ठीक है।

05:24

Speaker A

दिवोदास का पुत्र जो सुदास था उसका युद्ध जो था वह 10 आर्यों ठीक है 10 आर्य राजा और 10 अनार्य राजाओं के बीच हुआ।

05:25

Speaker A

कुल मिलाकर अनार्य और आर्य राजा 10 थे उनके साथ जो था वह दिवोदास के पुत्र सुदास का युद्ध हुआ इसलिए इसे जो है वह दशराग युद्ध कहा गया।

05:26

Speaker A

इसके अलावा बात करें तो इस समय जो है वह सुदास था उसकी सेना का नेतृत्व उनके गुरु और मंत्री वशिष्ठ ने किया जबकि जो अन्य 10 राजा थे उनकी सेनाओं का नेतृत्व विश्वामित्र ने किया।

05:27

Speaker A

तो यानी कि सेनाओं के नेतृत्व यहां पर महत्वपूर्ण है क्योंकि एक में जो है वह मंत्री वशिष्ठ थे और दूसरे में जो है वह विश्वामित्र थे।

05:28

Speaker A

तो ऐसे में जो है वह काफी ज्यादा इंपोर्टेंट यहां पर रहता है।

05:29

Speaker A

इसके अलावा सुदास की सेना की बात करें तो उसने जो है वह 10 राजाओं जिन्हें पूर्व राज्य की सेना भी कहते हैं उसको जो है वह पराजित किया ठीक है।

05:30

Speaker A

इसके बाद सुदास जो है वह ऋग्वैदिक काल का सबसे शक्तिशाली राजा बन गया और यह युद्ध आपको याद रखना है जो दशराग युद्ध हुआ था वह रावी नदी के किनारे हुआ था।

05:31

Speaker A

कई बार आपको पूछ लिया जाता है दशराग युद्ध कौन सी नदी के किनारे हुआ तो रावी नदी के किनारे हुआ और किन-किन के बीच में हुआ तो यह सुदास और 10 आर्य और अनार्य राजाओं के बीच हुआ था।

05:32

Speaker A

चलिए अब बढ़ते हैं थोड़ा और आगे अब वैदिक ऋषि की बात कर लेते हैं तो जब भी वैदिक ऋषि की बात करते हैं हिमाचल प्रदेश तो आप जानते हैं देवभूमि है यहां पर ऋषियों का इतिहास काफी ज्यादा रहा है।

05:33

Speaker A

तो वैदिक ऋषि की बात करते हैं तो मंडी को मांडव्य ऋषि से जोड़ा जाता है बिलासपुर को व्यास ऋषि से, निर्मंड को परशुराम से, मनाली को मनु ऋषि से कुल्लू घाटी में जो मणिकर्ण के पास स्थित वशिष्ठ कुंड है गर्म पानी के चश्मे को वैदिक ऋषि वशिष्ठ से जोड़ा जाता है।

05:34

Speaker A

तो कुल मिलाकर आपको याद रखना है इन सभी को कौन सी ऋषि से जोड़ा जाता है ठीक है।

05:35

Speaker A

मंडी को मांडव्य से, बिलासपुर को व्यास ऋषि से, निर्मंड को परशुराम से, मनाली को मनु ऋषि से तथा कुल्लू घाटी में जो आपके पास मणिकर्ण के पास स्थित वशिष्ठ कुंड है उसको किससे जोड़ा जाता है वैदिक ऋषि वशिष्ठ से जोड़ा जाता है।

05:36

Speaker A

इसके अलावा जमदग्नि ऋषि की बात अब हम कर लेते हैं तो जमदग्नि ऋषि की बात करें तो उन्हें जम्लू देवता के रूप में भी जाना जाता है।

05:37

Speaker A

यह उनका मंदिर है मलाना में यह मंदिर स्थित है ठीक है जमदग्नि ऋषि यानी कि जम्लू देवता ठीक है।

05:38

Speaker A

आप जानते हैं जम्लू देवता का मंदिर कहां पर है मलाना में है जमदग्नि ऋषि की बात करें तो जिस स्थान पर उनका निवास था उन्हें जो है वह जम्मु का टिब्बा कहते हैं ठीक है।

05:39

Speaker A

जम्मु का टिब्बा कहते हैं यह सिरमौर जिले के रेणुका के पास स्थित है और जमदग्नि ऋषि की पत्नी की बात करें तो रेणुका थी।

05:40

Speaker A

इसके अलावा हम अगस्त्य की बात करें या गौतम ऋषियों की बात करें तो रेणुका के आस-पास अपने अपने आश्रम उन्होंने बनाए हुए हैं और बाद में जो है उन्होंने अन्य स्थानों पर अपना निवास स्थान जो है बना लिया।

05:41

Speaker A

वह अन्य स्थान पर जो है चले गए कौन-कौन अगस्त्य थे गौतम ऋषि ठीक है।

05:42

Speaker A

तो यह जो था वह जमदग्नि ऋषि का इतिहास रहा है।

05:43

Speaker A

इसके अलावा बात करें ऋषि परशुराम की तो ऋषि परशुराम जो था वह वैदिक आर्य राजा जो सहस्त्र अर्जुन था ठीक है।

05:44

Speaker A

वह जब अह रेणुका पहुंचे थे तो वहां उनका स्वागत जमदग्नि ऋषि ने किया था।

05:45

Speaker A

सहस्त्रार्जुन ने जमदग्नि ऋषि से कामधेनु गाय की मांग की जिसे ऋषि ने देने से इंकार कर दिया।

05:46

Speaker A

अब इंकार तो कर दिया पर इसके बाद क्या हुआ कि इसके बाद जो अह सॉरी इसके बाद जो हां सहस्त्रार्जुन था वह क्या हो गया क्रोधित हो गया और उसके बाद उसने क्या किया कि जमदग्नि ऋषि के आश्रम को नष्ट कर दिया।

05:47

Speaker A

ठीक है जो कीर्तिवीर्य था यानी कि सहस्त्रार्जुन था उसने ऋषि जमदग्नि के आश्रम को ही नष्ट कर दिया।

05:48

Speaker A

परशुराम ने स्थानीय राजाओं तथा जातियों का जो है संघ बनाकर सहस्त्रार्जुन पर आक्रमण कर उसका वध कर दिया उसके बाद ठीक है।

05:49

Speaker A

क्योंकि अह इससे जो है वह काफी ज्यादा क्रोधित हुए थे परशुराम उन्हें काफी ज्यादा जो है यहां पर आहत हुआ था कि अह जो उनके आश्रम को नष्ट किया गया था जमदग्नि ऋषि के और साथ में उनकी गाय को लूटा था।

05:50

Speaker A

इसलिए उन्होंने उनका वध कर दिया और सहस्त्रार्जुन के पुत्रों को जमदग्नि ऋषि की हत्या कर दी ठीक है।

05:51

Speaker A

इसके अलावा परशुराम जो है इससे भड़क गए और सभी क्षत्रियों पर आक्रमण करने लगे।

05:52

Speaker A

तो आपको यह भी याद रखना है कि जमदग्नि ऋषि की हत्या किसने की थी जमदग्नि ऋषि की हत्या सहस्त्रार्जुन के पुत्रों यानी कि कीर्तिवीर्य के पुत्रों ने की थी।

05:53

Speaker A

इससे परशुराम भड़क गए थे और सभी क्षत्रियों पर जो है वह आक्रमण करने लग गए थे।

05:54

Speaker A

ठीक है बढ़ते हैं थोड़ा आगे और बात करते हैं महाभारत काल और हिमाचल प्रदेश की चार प्राचीन जनपद के बारे में।

05:55

Speaker A

यह सबसे महत्वपूर्ण यहां पर टॉपिक यह रहता है देखिए यह मानचित्र भी है जनपद का जो महाभारत काल के जनपद रहे हैं ठीक है।

05:56

Speaker A

तो हिमाचल प्रदेश के प्राचीन जनपद जो रहे हैं चार प्राचीन जनपद रहे हैं जिसमें हम मुख्यतः बात करें तो एक तो आपके पास त्रिगर्त है एक औदुंबर है एक कुलंद है और कुलुत का ठीक है।

05:57

Speaker A

तो इन चार जनपदों का जो विवरण मिलता है हमें महाभारत में कुल मिलाकर और ऋग्वेद में अगर हम बात करें तो हिमाचल को हिमवंत कहा गया है।

05:58

Speaker A

यह भी आपको याद रखना है ऋग्वेद में जो हिमाचल को है हिमवंत कहा गया है।

05:59

Speaker A

अब महाभारत में क्या था कि जो पांडव थे उन्होंने अज्ञातवास का समय जो था वह हिमाचल की ऊपरी पहाड़ियों में व्यतीत किया था।

06:00

Speaker A

उस दौरान जो है वह जो भीमसेन थे उन्होंने कुल्लू की जो कुलदेवी हिडिंबा थी उससे विवाह किया।

06:01

Speaker A

इसके बाद जो है वह जो त्रिगर्त आपके पास रियासत थी ठीक है वहां के जो राजा सुशर्मा थे उन्होंने महाभारत में कौरवों की ओर से युद्ध लड़ा और कौरवों का साथ दिया तो यहां से भी प्रश्न बनता है आपका ठीक है।

06:02

Speaker A

इसके अलावा जो कश्मीर है औदुंबर है और त्रिगर्त के शासक जो युधिष्ठिर को कर देते थे ठीक है।

06:03

Speaker A

कश्मीर, औदुंबर और त्रिगर्त के शासक जो थे वह युधिष्ठिर को कर देते थे।

06:04

Speaker A

कुलिंद रियासत ने पांडवों की अधीनता ही स्वीकार की उन्होंने जो है वह कौरवों की ओर जाना उचित नहीं समझा।

06:05

Speaker A

बाकी इसमें जो चार जनपद है उनके बारे में थोड़ा जान लेते हैं ठीक है।

06:06

Speaker A

तो चार जनपदों में जो औदुंबर है उसके बारे में जान लेते हैं तो अगर औदुंबर की बात करें तो महाभारत के अनुसार जो औदुंबर थे वह विश्वामित्र के वंशज थे जो कौशिक गोत्र से संबंधित थे।

06:07

Speaker A

अब औदुंबर राज्य के जो सिक्के थे वह कांगड़ा, पठानकोट, ज्वालामुखी, गुरदासपुर और होशियारपुर के क्षेत्र में मिले हैं।

06:08

Speaker A

और यहीं से जो है वह औदुंबर जो रहे हैं अह जो कौशिक गोत्र से संबंध रखते थे उनके निवास स्थान की भी पुष्टि होती है।

06:09

Speaker A

यह लोग की बात करें तो यह शिवजी की पूजा करते थे क्योंकि हमने पहले ही देखा कि जो आपके पास प्रागैतिहासिक काल था वहां पर शिव और नाग देवता की पूजा ही की जाती थी।

06:10

Speaker A

तो यह लोग भी क्या करते थे शिवजी की ही पूजा करते थे और पाणिनी के गणपत है उसमें भी औदुंबर जाति के विवरण मिलते हैं आपके पास जो औदुंबर वृक्ष है उसकी बहुलता के कारण भी यह जनपद औदुंबर कहलाता है।

06:11

Speaker A

क्योंकि उस समय जो थे वह औदुंबर वृक्ष जो है काफी ज्यादा अधिक मात्रा में थे उनकी काफी ज्यादा बहुलता थी ठीक है।

06:12

Speaker A

तो इसलिए भी इसको जो है वह औदुंबर कहला कहते हैं।

06:13

Speaker A

इसके अलावा जो आपके पास ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि में औदुंबरों के सिक्कों पर महादेव अह जो महादेव सा शब्द मिलता है यह आपके पास औदुंबर के सिक्के हैं ठीक है।

06:14

Speaker A

इसके अलावा बात करें तो सिक्कों पर जो है वह त्रिशूल भी खुदा हुआ है और इसके अलावा औदुंबरों की बात करें तो तांबे और चांदी के सिक्के चलाए उन्होंने जिनका प्रचलन जो है काफी ज्यादा उस काल में हुआ।

06:15

Speaker A

और औदुंबर की बात करें तो पहले ही हमने बताया कि एक तो यह शिव भक्त भी थे और भेड़पालक भी थे इसलिए इनका संबंध जो था वह चंबा की जो गद्दी जनजाति थी उससे संबंध माना जाता है।

06:16

Speaker A

बाकी इसके बारे में विस्तृत जानकारी जो है यही रही है औदुंबर काल की ठीक है।

06:17

Speaker A

चलिए अब बात करते हैं हम त्रिगर्त की तो त्रिगर्त की बात करें तो त्रिगर्त जनपद की स्थापना भूमीचंद ने की थी ठीक है।

06:18

Speaker A

त्रिगर्त जो जनपद था उसकी स्थापना किसने की थी भूमीचंद ने तो एक तो यह भी आपको याद रखना है।

06:19

Speaker A

इसके अलावा सुशर्मा की बात करें तो उसकी पीढ़ी का जो था वह 231वां राजा था किसका त्रिगर्त जनपद की जो पीढ़ी रही थी उसकी पीढ़ी का जो है वह 231वां राजा जो था वह सुशर्मा था।

06:20

Speaker A

इसके अलावा सुशर्मा चंद्र ने जो है महाभारत युद्ध में कौरवों की सहायता की थी यह हमने पहले ही आपको बताया और सुशर्मा चंद्र ने क्या किया था कि पांडवों का जो अज्ञातवास था वह कहां था जो हिमाचल की ऊपरी पहाड़ियां थी वहां पर पांडवों का अज्ञातवास चल रहा था।

06:21

Speaker A

तो ऐसे में जो सुशर्मा चंद्र थे उसने अज्ञातवास में जो शरण देने वाले मत्स्य राजा विराट थे उस पर आक्रमण कर दिया जिन्होंने पांडवों को जो है वह क्या दी थी शरण दी थी मत्स्य राजा विराट उस पर आक्रमण कर दिया ठीक है।

06:22

Speaker A

जो हाटकोटी के थे उस टाइम ठीक है तो जो कि अह बात करते हैं हाटकोटी में उसका पड़ोसी राज्य था।

06:23

Speaker A

अब त्रिगर्त, रावी, व्यास और सतलुज नदियों के बीच का यह भाग था।

06:24

Speaker A

इसके अलावा सुशर्मा चंद्र ने कांगड़ा किला बनाया और नगरकोट को अपनी राजधानी बना दिया तो उस समय आपको यह भी याद रखना है कि सुशर्मा चंद्र ने क्या किया था कांगड़ा किला बनवाया था और नगरकोट को जो है अपनी राजधानी बना दिया।

06:25

Speaker A

कनिष्क की बात करें तो छह राज्य समूहों को त्रिगर्त का हिस्सा बताया था।

06:26

Speaker A

अब इसमें वह छह राज्य कौन-कौन से रहे थे वह आपको देखना है कौरव शक्ति, जलमनी, जानकी, ब्रह्मगुप्त, डंडकी और कोंदोप्रथा त्रिगर्त के हिस्से थे ठीक है।

06:27

Speaker A

और वहीं पाणिनी ने जो है वह त्रिगर्त को जो आयुधजीवी संघ कहा था जिसका अर्थ है युद्ध के सहारे जीने वाले संघ।

06:28

Speaker A

त्रिगर्त का उल्लेख अगर हम बात करें तो कहां-कहां मिलता है एक तो पाणिनी के अष्टध्यायी में मिलता है कल्हण के राजतरंगिणी में भी मिलता है विष्णु पुराण में भी आपको देखने को मिलेगा और वृहत संहिता में भी आपको देखने को मिलेगा तथा जो महाभारत का आपके पास द्रोण पर्व है उसमें भी आपको जो है वह त्रिगर्त जनपद का जो है उल्लेख देखने को मिलेगा।

06:29

Speaker A

और सबसे बड़ी रियासत भी उस समय की रही है त्रिगर्त तो यह भी आपको याद रखना है काफी ज्यादा महत्वपूर्ण रहती है।

06:30

Speaker A

अब बात हम कर लेते हैं कुलुत की तो कुलुत राज्य व्यास नदी के ऊपर का इलाका था ठीक है।

06:31

Speaker A

जो कुलुत राज्य था वह कहां के था व्यास नदी के ऊपर का इलाका था और अह इसकी अगर हम बात करें तो इसका विवरण हमें रामायण में भी मिलता है महाभारत में मिलता है वृहत संहिता में मिलता है मार्कंडेय पुराण में मिलता है मुद्रा राक्षस और मत्स्य पुराण में मिलता है।

06:32

Speaker A

तो कुल मिलाकर जो है काफी ज्यादा विस्तृत इसका उल्लेख हमें जो है काफी ज्यादा जगहों पर मिलने देखने को मिल जाता है।

06:33

Speaker A

इसकी राजधानी की बात करें तो इसकी प्राचीन राजधानी थी नगर थी ठीक है जिसका विवरण जो है पाणिनी ने अपनी कतरे कतरे आदि गंगा में दिया है।

06:34

Speaker A

इसके अलावा कुल्लू घाटी में अगर हम बात करें तो राजा विरियास के नाम से 100 ईस्वी का जो है सबसे पुराना सिक्का भी मिलता है क्योंकि कुल्लू तो कुल्लू घाटी आप इसे कह लीजिए ठीक है।

06:35

Speaker A

इस पर अगर हम बात करें तो प्राकृत और खरोष्ठी भाषा में लिखा गया है।

06:36

Speaker A

वहीं कुल्लू रियासत की स्थापना की बात करें तो प्रयाग इलाहाबाद से जो विहंगमणिपाल आए थे उन्होंने की थी।

06:37

Speaker A

तो यह आपको याद रखना है कि कुलुत जो रियासत थी उसकी स्थापना किसने की थी इलाहाबाद से आए विहंगमणिपाल ने।

06:38

Speaker A

तो यह बात रही कुलुत की अब बात करते हैं कुलिंद की क्योंकि चार जनपद है यहां पर हमने बात कर ली यहां पर औदुंबर की हमने बात की त्रिगर्त की हमने बात की कुलुत की अब बात करते हैं कुलिंद की।

06:39

Speaker A

कुलिंद की बात करें तो महाभारत के अनुसार जो कुलिंद था ठीक है उस पर अर्जुन ने विजय प्राप्त की थी।

06:40

Speaker A

अब कुलिंद रियासत जो थी वह हम मुख्यतः बात करें तो जो व्यास थी सतलुज थी और यमुना के बीच की भूमि थी जिसमें मुख्यतः जो है वह सिरमौर था, शिमला था, अंबाला और सहारनपुर के यह सभी क्षेत्र शामिल थे।

06:41

Speaker A

ठीक है वर्तमान समय की अगर हम बात करें कुनेत या कनेत का संबंध जो है वह कुलिंद से माना जाता है।

06:42

Speaker A

कुलिंद के चांदी के सिक्के पर राजा अमोघभूति का नाम खुदा हुआ मिला है।

06:43

Speaker A

यमुना नदी का पौराणिक नाम कालिंदी ही है और इसके साथ-साथ पड़ने वाले क्षेत्र को कुलिंद कहा गया है।

06:44

Speaker A

इस क्षेत्र में पहले जो कुलिंद यानी कि बहेड़ा है उसके पेड़ों की बहुतायत मात्रा थी ठीक है।

06:45

Speaker A

इस कारण भी इसका जनपद का नाम कुलिंद पड़ा होगा ऐसा जो है वह कहा जाता है।

06:46

Speaker A

इसके अलावा जो हमने पहले ही आपको बताया कि अर्जुन ने जो इसको इस पर विजय प्राप्त की थी।

06:47

Speaker A

इसके अलावा और कुछ इसमें महत्वपूर्ण जो है वह जो भी था हमने आपको बताया।

06:48

Speaker A

यह चार जनपद जो है वह काफी ज्यादा महत्वपूर्ण रहते हैं हिमाचल प्रदेश के महाभारत काल के ठीक है।

06:49

Speaker A

यह आपको याद रखना है महाभारत काल के जो हिमाचल प्रदेश के चार प्राचीन जनपद थे यह काफी ज्यादा महत्वपूर्ण रहते हैं यहां से आपको प्रश्न आ सकता है औदुंबर, कुलिंद और कुलुत साथ में त्रिगर्त का ठीक है।

06:50

Speaker A

तो यह आपको याद रखने हैं और बाकी बात करते हैं अब हम मध्यकालीन इतिहास की प्राचीन इतिहास की हमने बात की अब बात करते हैं मध्यकालीन इतिहास की।

06:51

Speaker A

तो मध्यकालीन इतिहास में सबसे पहले जो है हम बात करेंगे महमूद गजनवी के आक्रमण के बारे में क्योंकि यहीं से शुरुआत यहां पर होती है मध्यकालीन इतिहास की।

06:52

Speaker A

यहां से काफी ज्यादा प्रश्न जो कंपटीटिव एग्जाम्स में पूछे जाते हैं आप भी जानते हैं।

06:53

Speaker A

महमूद गजनवी की बात करें तो उसने भारत पर 17 बार जो आक्रमण किए थे इसमें अगर हम बात करें तो 1009 ईस्वी में उसने नगरकोट पर भी आक्रमण किया था।

06:54

Speaker A

यह जो है मैक्सिमम कंपटीटिव एग्जाम्स में पूछा जाता है कि नगरकोट किले पर जो है वह कब आक्रमण किया गया तो 1009 ईस्वी में किया गया यह आपको याद रखना है।

06:55

Speaker A

और महमूद गजनवी की बात करें तो उसने जो है वह सिर्फ ज्यादा हम अगर बात करें तो अधिकार जो था उसने सिर्फ नगरकोट किले पर किया।

06:56

Speaker A

अधिकतर क्षेत्रों पर वह जो है वह अधिकार नहीं कर पाया कुछ एक क्षेत्र ऐसे थे उसने किया परंतु ज्यादा अधिकार जो था उसने इस नगरकोट के किले पर जो है वह किया।

06:57

Speaker A

इसके बाद जो है वह त्रिलोचन पाल और उसके पुत्र जो भीमपाल था उसकी मृत्यु के उपरांत जो 1026 ईस्वी में है वह तुर्कों के अधीन जो है वह कांगड़ा आ गया था।

06:58

Speaker A

तो यह भी आपको याद रखना है ठीक है।

06:59

Speaker A

इसके अलावा इसमें ज्यादा कुछ इंपोर्टेंट रहता नहीं है यही कुछ रहता है कि 1009 ईस्वी में जो है वह नगरकोट पर आक्रमण किया था बाकी इसमें 1023 तक नगरकोट को छोड़कर कांगड़ा के अधिकतर हिस्सों पर अधिकार नहीं कर पाया था वह और 1026 ईस्वी में जो तुर्कों के अधीन कांगड़ा आ गया था।

07:00

Speaker A

चलिए अब जान लेते हैं थोड़ा और इसमें बारे में अब तुगलक के बारे में जान लेते हैं कि तुगलक ने कब तक जो है हिमाचल प्रदेश में आक्रमण किए क्या कुछ उनका इतिहास रहा।

07:01

Speaker A

तो मोहम्मद बिन तुगलक की बात करेंगे जिसने 1325 से 1351 तक जो है यहां इसका काल रहा ठीक है।

07:02

Speaker A

1337 ईस्वी में नगरकोट के राजा पृथ्वीचंद को पराजित करने के लिए इसने सेना भेजी थी और जिसका नेतृत्व जो उसने स्वयं किया था।

07:03

Speaker A

इसके अलावा फिरोजशाह तुगलक की बात करते हैं 1351 से 1388 तक ठीक है।

07:04

Speaker A

उसने कांगड़ा के राजा रूपचंद को सबक सिखाने के लिए 1361 में जो है वह नगरकोट पर आक्रमण करके घेरा डाला था।

07:05

Speaker A

परंतु जो राजा रूपचंद था और फिरोजशाह तुगलक था उनके बीच में क्या हुआ था कि समझौता हो गया था और नगरकोट पर से बाद में जो है वह घेरा उठा लिया गया था।

07:06

Speaker A

ठीक है परंतु जो रूपचंद था उसने जो है वह फिरोजशाह तुगलक की अधीनता भी स्वीकार कर ली थी।

07:07

Speaker A

तो यहां पर ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने जो है वह अधीनता स्वीकार नहीं की थी एक समझौते के तहत जो है वह रूपचंद ने फिरोजशाह तुगलक की अधीनता स्वीकार की थी।

07:08

Speaker A

इस कारण जो है वह घेरा हटा लिया गया था।

07:09

Speaker A

तुगलक का काल भी यहीं पर रहता है तुगलक कौन से आक्रमण किए यह दो ही मोहम्मद बिन तुगलक और फिरोजशाह तुगलक ही यहां पर इंपोर्टेंट रहते हैं आपको यहीं से पढ़ना है।

07:10

Speaker A

इसके अलावा बात अगर हम करें तैमूरलंग के आक्रमण के बारे में तो 1398 ईस्वी में जो है वह मंगोलों का आक्रमण तैमूरलंग के जो नेतृत्व में हुआ था।

07:11

Speaker A

अब उस समय जो था वह कांगड़ा का राजा मेघचंद था जब तैमूरलंग ने आक्रमण किया ठीक है।

07:12

Speaker A

और तैमूरलंग के आक्रमण के समय जो हिंडूर जो वर्तमान में भी नालागढ़ है वहां का शासक जो था वह आलमचंद था जिसने तैमूरलंग की की थी सहायता की थी।

07:13

Speaker A

जिसके फलस्वरूप क्या हुआ था तैमूरलंग हिंडूर को हानि पहुंचाए बिना आगे बढ़ गया था।

07:14

Speaker A

अब यहां पर यही रहता है कि 1398 में एक तो जो है वह तैमूरलंग ने तैमूरलंग ने क्या किया था वह आक्रमण किया था मंगोलों की जो सेना थी ठीक है।

07:15

Speaker A

उसका नेतृत्व किया था और आक्रमण किया था उस समय जो कांगड़ा का राजा था वह मेघचंद था और तैमूरलंग की सहायता सहायता किसने की थी वह की थी आलमचंद ने ठीक है।

07:16

Speaker A

जो उस समय जो था वह हिंडूर यानी नालागढ़ का शासक था।

07:17

Speaker A

तो यह आपको मुख्य जो पॉइंट्स है मेन पॉइंट्स यहां पर याद रखने हैं।

07:18

Speaker A

अब बात करते हैं यहां पर हम मुगल काल की ठीक है जो मुगल साम्राज्य यहां पर हिमाचल प्रदेश में आया और उन्होंने कितने आक्रमण किए कब तक राज किया और क्या कुछ उनका इतिहास रहा वह जान लेते हैं।

07:19

Speaker A

तो बाबर की बात हम करते हैं बाबर ने क्या किया कि 1525 ईस्वी में एक तो कांगड़ा के निकट जो मलौट है वहां पर अपनी चौकी स्थापित की।

07:20

Speaker A

उसके अलावा 1526 ईस्वी में आप जानते हैं कि पानीपत के प्रथम युद्ध में ब्राह्मण लोदी को हराकर भारत में मुगल शासन की जो स्थापना की थी बाबर ने ठीक है।

07:21

Speaker A

परंतु हिमाचल प्रदेश में अगर हम बात करें तो 1526 ईस्वी में उसने जो है अपनी चौकी स्थापित की थी कांगड़ा के निकट मलौट नामक स्थान पर।

07:22

Speaker A

इसके अलावा अकबर की बात करते हैं तो अकबर ने क्या किया था कि 1526 ईस्वी में सिकंदर शाह को पकड़ने के लिए नूरपुर में अपनी सेना भेजी थी ठीक है।

07:23

Speaker A

क्योंकि जो नूरपुर का राजा था उस समय भगतमल उसने क्या किया था सिकंदर शाह से दोस्ती कर ली थी।

07:24

Speaker A

अब भाई सिकंदर शाह से दोस्ती कर ली तो सिकंदर शाह को पकड़ने के लिए नूरपुर सेना भेज दिया अकबर ने ठीक है।

07:25

Speaker A

और अकबर जो था वह पहाड़ी राजाओं को अपनी अह जो अधीनता स्वीकार करने के लिए क्या करता था उनके बच्चों और रिश्तेदारों को अपने दरबार में बंधक बनाकर रखता था।

07:26

Speaker A

इसके लिए जो अकबर ने क्या किया कि जो कांगड़ा के राजा जयचंद थे उसको भी बंधक बना लिया।

07:27

Speaker A

अब जयचंद के पुत्र ने जो है वह क्या देखा कि उसके पिता को जो है वह बंधक बना लिया है तो ऐसे में जयचंद के पुत्र ने जो है वह विधिचंद उसने क्या किया नूरपुर के राजा तख्तमल के साथ जो है मिलकर विद्रोह किया था ठीक है।

07:28

Speaker A

क्योंकि उसके पिता जो है वह जयचंद को किसने अकबर ने पकड़ लिया था।

07:29

Speaker A

अब विधिचंद जो है उसके भी मृत्यु हो गई कब 1605 ईस्वी में और उसका पुत्र जो त्रिलोकचंद था वह गद्दी पर बैठा।

07:30

Speaker A

अब विधिचंद हमने आपको पहले ही बताया विधिचंद ने क्या किया था विधिचंद ने जो क्या किया था राजा तख्तमल के साथ जो है मिलकर विद्रोह किया था ठीक है।

07:31

Speaker A

क्योंकि उसके पिता जो है वह जयचंद को किसने अकबर ने पकड़ लिया था।

07:32

Speaker A

अब विधिचंद जो है उसके भी मृत्यु हो गई कब 1605 ईस्वी में और उसका पुत्र जो त्रिलोकचंद गद्दी पर बैठा।

07:33

Speaker A

जहांगीर ने क्या किया कि 1615 ईस्वी में कांगड़ा पर कब्जा करने के लिए नूरपुर जो उस समय धमेरी था के राजा सूरजमल था उसको और शेख जो फरीद मुर्तजा खान था उसको भेजा परंतु दोनों में विवाद होने और मुर्तजा खान की मृत्यु होने के बाद जो कांगड़ा किले पर कब्जा करने की योजना थी उसको स्थगित कर दिया।

07:34

Speaker A

इसके पश्चात जो जहांगीर ने 1617 में फिर से क्या किया सूरज नूरपुर की जो राजा था सूरजमल उसको और शाह कुली खान मोहम्मद को क्या किया कि उनको जो है वह कांगड़ा विजय के लिए सेना भेजी।

07:35

Speaker A

परंतु राजा सूरजमल और शाह कुली खान में भी झगड़ा हो जाने के कारण क्या हुआ कुली खान को वापस बुला लिया गया।

07:36

Speaker A

अब उल्टा क्या हुआ यहां पर राजा सूरजमल ने जो है वह मुगलों के विरुद्ध ही विद्रोह कर दिया।

07:37

Speaker A

जहांगीर ने क्या किया कि सूरजमल के विद्रोह को दबाने के लिए राजा राय विक्रमजीत और अब्दुल अजीज को भेजा।

07:38

Speaker A

राजा सूरजमल ने मानकोट और तारागढ़ किले में शरण ली जो चंबा रियासत के अधीन थे।

07:39

Speaker A

तो यह था जहांगीर का भी यहां पर पूरा ठीक है।

07:40

Speaker A

इसके अलावा शाहजहां की बात कर लेते हैं भाई शाहजहां की अगर हम बात करें तो शाहजहां के शासनकाल में नवाब असदुल्ला खान और कोच कुली खान कांगड़ा जिले के मुगल किलेदार बने।

07:41

Speaker A

याद रखना आपको कौन बने यहां पर मुगल किलेदार एक तो आपके पास असदुल्ला नवाब असदुल्ला खान और बाकी कौन रहा कोच कुली खान कांगड़ा जिले के जो है वह मुगल किलेदार बने थे।

07:42

Speaker A

कोच कुली खान की बात करें तो वह 17 वर्षों तक मुगल किलेदार रहा उसने जो है वह बाण नदी के पास दफनाया गया था।

07:43

Speaker A

सिरमौर के राजा की बात करें मधाता प्रकाश तो शाहजहां का समकालीन रहा था उसने मुगलों के गढ़वाल अभियान में कई बार सहायता भी की थी।

07:44

Speaker A

तो हमने बात की यहां पर मुगल शासन की भी यहां पर हिमाचल प्रदेश में बाबर की बात की अकबर की बात की इसके अलावा हमने जो है बात की शाहजहां की ठीक है।

07:45

Speaker A

इसके अलावा बात करते हैं यहां पर मुगलों के पतन की और घमंडचंद की घमंडचंद ने इसका किस तरह से फायदा उठाया यह भी जानना इंपोर्टेंट है।

07:46

Speaker A

हुआ क्या कि औरंगजेब की मृत्यु हो गई और औरंगजेब की मृत्यु होते ही क्या हो गया कि मुगलों का जो है वह पतन होना शुरू हो गया।

07:47

Speaker A

इसके बाद अहमदशाह दुर्रानी ने क्या किया कि 1748 से 1788 के बीच 10 बार पंजाब पर आक्रमण कर दिया जिससे मुगलों की जो है वह कमर तोड़ दी गई।

00:00

Speaker A

इसका फायदा जो है किसने उठाया राजा घमंडचंद ने ठीक है उसने जो है वह कांगड़ा और दोआब के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया कांगड़ा किलों की बात करें तो वह अब भी जो है वह किसके पास था मुगलों के पास था परंतु नवाब सैफ अली खान की बात करें तो कांगड़ा जिले के अंतिम मुगल किलेदार थे वह इसलिए अहमदशाह दुर्रानी ने 1759 में जो है वह घमंडचंद को जालंधर दोआब का नाजिम बना दिया।

07:49

Speaker A

इससे हुआ क्या कि जो घमंडचंद था उसका सतलुज से रावी तक के क्षेत्र पर एकछत्र राज हो गया तो इसका फायदा उसने उठा लिया।

07:50

Speaker A

अब वहीं से आप देखिएगा कि आधुनिक इतिहास में जो है वह घमंडचंद की क्या कुछ यहां पर भूमिका रहती है।

07:51

Speaker A

बात करेंगे आधुनिक इतिहास की अब आधुनिक इतिहास में क्या हुआ सिख जो है हिमाचल प्रदेश में आए सिखों की बात करें तो गुरु नानक देव जी कांगड़ा, ज्वालामुखी, कुल्लू, सिरमौर और लाहौल-स्पीति की यात्रा की जो कि काफी ज्यादा महत्वपूर्ण आपसे पूछा जाता है कि गुरु नानक जी ने कांगड़ा की यात्रा कब की ज्वालामुखी, कुल्लू, सिरमौर, लाहौल-स्पीति की ठीक है।

07:52

Speaker A

एकमात्र ऐसा स्थान जहां पर जो है वह गुरु नानक देव नहीं गए वह धर्मशाला रहा क्योंकि कांगड़ा में गए ज्वालामुखी, कुल्लू, सिरमौर, लाहौल-स्पीति सभी जगह गए परंतु जो कांगड़ा धर्मशाला था वहां नहीं गए।

07:53

Speaker A

बाकी पांचवें सिख गुरु की अर्जुन देव की बात करें तो उन्होंने क्या किया कि पहाड़ी राज्यों में जो भाई कलियाना को हरमिंदर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर के निर्माण के लिए चंदा एकत्र करने के लिए भेजा।

07:54

Speaker A

इसके अलावा जो छठे गुरु हरगोविंद जी थे उन्होंने क्या किया कि बिलासपुर जो उस समय कहलूर था उसके राजाओं को जो है वह तोहफे में दी गई भूमि पर कीरतपुर का निर्माण किया।

07:55

Speaker A

नवें सिख गुरु थे तेग बहादुर जी उन्होंने कहलूर जो वर्तमान में बिलासपुर है वहां से जमीन लेकर जो है मखोवाल गांव की स्थापना की जो बाद में आनंदपुर साहिब कहलाया जो अभी आनंदपुर साहिब है ठीक है।

07:56

Speaker A

उस समय जो है वह मखोवाल गांव था उसकी स्थापना किसने की थी नवें गुरु जो नवें सिख गुरु थे तेग बहादुर जी ने ठीक है।

07:57

Speaker A

तो यह सिखों का कुछ दौर रहा था इसके अलावा विस्तृत अगर हम बात करें तो गुरु गोविंद सिंह की तो गुरु गोविंद सिंह की अगर हम बात करें तो उनके और कहलूर के राजा भीमचंद के बीच जो है सफेद हाथी को लेकर क्या हुआ था मनमुटाव जारी हो गया था।

07:58

Speaker A

जिसे आसाम की रानी रतनराय ने दिया था।

07:59

Speaker A

अब बात करें अगर हम गुरु गोविंद सिंह की तो पांच वर्षों तक वह पोंटा साहिब में रहे और इस दौरान उन्होंने दशम ग्रंथ की रचना भी कर दी।

08:00

Speaker A

और गुरु गोविंद सिंह की बात करें तो कहलूर के राजा भीमचंद उसके समधी गढ़वाल के फतेहशाह और हंडूर के राजा हरिचंद के बीच जो था वह 1686 में भगानी साहिब का युद्ध लड़ा गया जिसमें गुरु गोविंद सिंह ही विजयी रहे।

08:01

Speaker A

ठीक है तो आपको याद रखना है कि गुरु गोविंद सिंह और कहलूर के राजा भीमचंद और भीमचंद के जो समधी थे कौन गढ़वाल के फतेहशाह और हंडूर के राजा हरिचंद के बीच जो था वह 1686 में भगानी साहिब का युद्ध लड़ा गया जिसमें गुरु गोविंद सिंह जो है वह विजय रहे ठीक है।

08:02

Speaker A

इसके अलावा हंडूर के राजा की अगर हम बात करें हंडूर यानी वर्तमान में जो नालागढ़ है उसके जो राजा थे हरिचंद उनकी मृत्यु जो थे गुरु गोविंद सिंह के तीर से हो गई।

08:03

Speaker A

इसके बाद क्या हुआ इसके बाद जो है वह युद्ध के बाद गुरु गोविंद सिंह ने हरिचंद के उत्तराधिकारी को वह जमीन वापस लौटा दी ठीक है।

08:04

Speaker A

और भीमचंद जो कहलूर के साथ भी उनके संबंध मधुर हो गए इसके अलावा राजा भीमचंद ने मुगलों के विरुद्ध गुरु गोविंद सिंह से सहायता भी मांगी गुरु गोविंद सिंह ने नादौन में मुगलों को हरा भी दिया।

08:05

Speaker A

उसके बाद गुरु गोविंद सिंह की बात करें तो मंडी के राजा सिद्धसेन के समय मंडी और कुल्लू की यात्रा उन्होंने की गुरु गोविंद सिंह की बात करें तो उन्होंने 13 अप्रैल 1699 ईस्वी में बैशाखी के दिन आनंदपुर साहिब में जो है वह 80 हजार सैनिकों के साथ खालसा पंथ की स्थापना की।

08:06

Speaker A

उसके तत्पश्चात 1708 ईस्वी में नांदेड़ महाराष्ट्र में जो इनकी मृत्यु हो गई इसके बाद जो है बंदा बहादुर की मृत्यु के बाद 12 सिख मिसलों में जो है वह बंट गया।

08:07

Speaker A

तो यह कुछ यहां पर इतिहास रहा सिख का गुरु गोविंद सिंह साहिब में ठीक है गुरु गोविंद सिंह की।

08:08

Speaker A

इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण यहां पर विषय रहता है जो कि आपको मोस्टली कंपटीटिव एग्जाम्स में पूछा जाता है वह है कांगड़ा किला, संसारचंद, गोरखे और महाराजा रणजीत सिंह।

08:09

Speaker A

अब संसारचंद की बात करें हम राजा घमंडचंद ठीक है जो घमंडचंद थे जिसने जो है वह फायदा कब उठाया था जब जो है वह मुगल का जो है वह पतन शुरू होना शुरू हो गया था।

08:10

Speaker A

मुगल काल का ठीक है यह हमने आपको बताया था मुगलों का जब पतन होना शुरू हो गया था उस समय जो था वह राजा घमंडचंद ने जो है इस मौके का फायदा उठाना शुरू कर दिया था और जिसका सतलुज से रावी तक के क्षेत्र पर एकछत्र राज हो गया था।

08:11

Speaker A

ठीक है तो उसने क्या किया कि जस्सा सिंह रामगढ़िया को हरा दिया।

08:12

Speaker A

अब जस्सा सिंह रामगढ़िया कौन था वह एक पहला सिख था जिसने जो था वह कांगड़ा की पहाड़ियों पर आक्रमण किया था।

08:13

Speaker A

ठीक है इसके तत्पश्चात घमंडचंद की मृत्यु के उपरांत जो है वह संसारचंद द्वितीय ने 1782 ईस्वी में जय सिंह कन्हैया की सहायता से जो था क्या था मुगलों से कांगड़ा किला छीन लिया ठीक है।

08:14

Speaker A

तो यह भी आपको याद रखना है कि जब घमंडचंद की मृत्यु हो गई तो उसके बाद जो है वह संसारचंद द्वितीय ने क्या किया 1782 ईस्वी में जय सिंह कन्हैया की सहायता से जो था क्या था मुगलों से कांगड़ा किला छीन लिया।

08:15

Speaker A

उसके बाद जय सिंह कन्हैया ने 1783 में कांगड़ा किला अपने कब्जे में लेकर संसारचंद को देने से मना कर दिया फिर जय सिंह कन्हैया ने क्या किया कि 1785 में जो है वह वापस जो है वह किला संसारचंद को लौटा दिया।

08:16

Speaker A

तो यह कुछ ऐसे सर्कल चलता रहा कि पहले तो भाई जो संसारचंद द्वितीय था और जय सिंह कन्हैया था उन्होंने मिलकर जो है वह मुगलों से कांगड़ा किला छीन लिया।

08:17

Speaker A

अब भाई हुआ क्या 1783 के बाद 2 साल बाद जो 1785 ईस्वी में जो है जय सिंह कन्हैया ने क्या किया कि संसारचंद को जो है वह किला वापस लौटा दिया।

08:18

Speaker A

संसारचंद की बात अब करते हैं संसारचंद द्वितीय जो है वह कांगड़ा का सबसे शक्तिशाली राजा रहा है और बात करें तो 1775 ईस्वी में वह कांगड़ा का राजा बना उसने 1786 ईस्वी में नेरटी शाहपुर युद्ध में चंबा के राजा को हराया।

08:19

Speaker A

तो यह भी आपको याद रखना है कि 1786 में नेरटी शाहपुर युद्ध किसके बीच हुआ चंबा के राजा और संसारचंद द्वितीय के बीच में हुआ।

08:20

Speaker A

या फिर आपको पूछा जा सकता है कि चंबा के राजा और संसारचंद के बीच 1786 का युद्ध कहां हुआ तो नेरटी शाहपुर में हुआ यह आपको याद रखना है।

08:21

Speaker A

वर्ष 1786 से 1805 ईस्वी तक का काल जो है स्वर्णिम काल रहा है एक तरह से संसारचंद के लिए उसने 1787 ईस्वी में कांगड़ा किले पर कब्जा किया।

08:22

Speaker A

उसके बाद 1794 में कहलूर बिलासपुर पर आक्रमण किया परंतु जैसे ही उसने कहलूर पर जो है वह बिलासपुर आक्रमण किया उसका पतन जो है वह शुरू हो गया।

08:23

Speaker A

उसके बाद क्या हुआ कि कहलूर के राजा थे उसने पहाड़ी शासकों के संघ के माध्यम से गोरखों को के जो अमर सिंह थापा थे उसको क्या किया कि राजा संसारचंद को हराने के लिए आमंत्रित किया।

08:24

Speaker A

इसके बाद उदय किसका हुआ गोरखों का अमर सिंह थापा के नेतृत्व में तो यह आपके पास भाई गोरखे आ गए ठीक है।

08:25

Speaker A

इस मार्ग से गोरखे आ गए आपके पास अब गोरखों ने क्या किया सेनापति अमर सिंह थापा के नेतृत्व में 1804 ईस्वी में तक कुमायूं, गढ़वाल, सिरमौर तथा शिमला की 30 हिल्स रियासतों पर कब्जा कर लिया था।

08:26

Speaker A

आप अंदाजा लगाइए कि कुमायूं, गढ़वाल, सिरमौर तथा शिमला की 30 हिल्स रियासतों पर कब्जा जो है गोरखों ने कर लिया था 1804 ईस्वी तक।

08:27

Speaker A

इसके बाद 1806 ईस्वी को अमर सिंह थापा ने जो है वह महल मोरी नामक स्थान पर जो है संसारचंद को पराजित किया ठीक है।

08:28

Speaker A

यह महल मोरी नामक स्थान जो हमीरपुर में है तो आपको कंपटीटिव एग्जाम्स में कई बार आता है कि 1806 ईस्वी में अमर सिंह थापा ने जो है वह संसारचंद को किस स्थान पर पराजित किया था वह महल मोरी हमीरपुर में ठीक है।

08:29

Speaker A

तो यह आपको याद रखना है 1806 में पराजित किया था।

08:30

Speaker A

इसके अलावा संसारचंद उसके बाद कहां गया उसने जो है वह कांगड़ा जिले में शरण ली वहां वह 4 वर्षों तक रहा और 4 वर्षों तक जो है वह कांगड़ा किले पर जो है वह घेरा डाले रखा गोरखों ने।

08:31

Speaker A

संसारचंद की बात करें तो 1809 ईस्वी में ज्वालामुखी जाकर उसने महाराजा रणजीत सिंह से मदद मांगी दोनों के बीच जो है एक संधि हुई जिसे ज्वालामुखी संधि कहा गया ठीक है।

08:32

Speaker A

1809 ईस्वी में हुई तो आपको याद रखना है 1809 ईस्वी में जो है वह राजा संसारचंद और जो महाराजा रणजीत सिंह ने उनके बीच में संधि हुई जिसे ज्वालामुखी संधि कहा गया यह भी आपको याद रखना है।

08:33

Speaker A

तो अब इसके बाद कौन आ गया आपके पास भाई यह आपके पास आ गई महाराजा रणजीत सिंह।

08:34

Speaker A

अब महाराजा रणजीत सिंह से जैसे ही उसने सहायता मांगी संधि हो गई तो महाराजा रणजीत सिंह ने क्या किया कि गोरखों पर आक्रमण कर दिया और उन्होंने क्या किया कि जो गोरखों के नेतृत्व कर रहा था अमर सिंह थापा उसको जो है हरा दिया और सतलुज के पूर्व तक धकेल दिया।

08:35

Speaker A

संसारचंद ने महाराजा रणजीत सिंह को एक तो 66 गांव दे दिए बाकी कांगड़ा किला सहायता के बदले में दे दिया।

08:36

Speaker A

इसके बाद जो अह जो आपके पास महाराजा रणजीत सिंह थे उन्होंने देसा सिंह मजीठिया को जो है वह कांगड़ा किला और कांगड़ा का नाजिम 1809 ईस्वी में बना दिया।

08:37

Speaker A

इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने 1813 ईस्वी में हरिपुर जो गुलेर वर्तमान में है ठीक है नूरपुर और जसवां को अपने अधिकार में ले लिया।

08:38

Speaker A

हरिपुर गुलेर अभी नूरपुर और जसवां है यह दोनों उनको जो है अपने अधिकार में 1813 में ले लिया।

08:39

Speaker A

1818 में दत्तापुर में 1825 में कुटलहर को हराया उसके तत्पश्चात 1823 में संसारचंद की मृत्यु के पश्चात जो है वह अनिरुद्ध चंद को 1 लाख रुपए नजराने के एवज में गद्दी पर बैठने दिया।

08:40

Speaker A

ठीक है अब अनिरुद्ध चंद ने क्या किया कि रणजीत सिंह को अपनी बेटी का विवाह जम्मू के राजा ध्यान सिंह के पुत्र करने से मना कर दिया और अंग्रेजों से शरण मांग ली।

08:41

Speaker A

भाई 1839 ईस्वी में क्या हुआ वेंचुरा के नेतृत्व में एक सेना मंडी से दूसरी कुल्लू भेजी गई और उसके बाद महाराजा रणजीत सिंह के 1839 ईस्वी में मृत्यु के पश्चात सिखों का पतन शुरू हो गया ठीक है।

08:42

Speaker A

1839 में जैसे ही महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु हुई उसके तत्पश्चात सिखों का जो पतन है वह शुरू हो गया।

08:43

Speaker A

तत्पश्चात अगर हम बात करें तो ब्रिटिश आ गए अब ठीक है ब्रिटिश और गोरखों की ही बात चल पड़ी।

08:44

Speaker A

तो गोरखों ने क्या किया कि कहलूर के राजा महानचंद के साथ मिलकर 1806 में संसारचंद को हराया एक तो जो गोरखों ने हराया ठीक है।

08:45

Speaker A

अमर सिंह ने क्या किया कि 1809 ईस्वी में भागल रियासत के राणा जगत सिंह को भगाकर अर्की पर कब्जा कर लिया।

08:46

Speaker A

ठीक है उसके बाद अमर सिंह थापा ने अपने बेटे रंजोर सिंह को सिरमौर पर आक्रमण करने के लिए भेज दिया।

08:47

Speaker A

भाई वहां पर क्या हुआ कि राजा करम प्रकाश जो सिरमौर के राजा थे क्योंकि अमर सिंह थापा ने बेटे रंजोर सिंह को भेजा था तो जो राजा करम प्रकाश थे सिरमौर के राजा थे और भूरिया अंबाला के उनको क्या किया उन्होंने भगाकर जो है वहां से भाग गए।

08:48

Speaker A

इसके बाद नाहन और जातक किले पर गोरखों का कब्जा हो गया।

08:49

Speaker A

अब 1810 ईस्वी में गोरखों ने क्या किया जो हिंडूर जुब्बल और पंडरा के जो क्षेत्र थे उस पर कब्जा कर लिया।

08:50

Speaker A

अमर सिंह थापा ने क्या किया बुशहर रियासत पर 1811 ईस्वी में आक्रमण कर दिया।

08:51

Speaker A

अब अमर सिंह थापा की बात करें तो 1813 ईस्वी तक वह रामपुर में रहा उसके बाद अर्की वापस लौट आया।

08:52

Speaker A

तत्पश्चात क्या हुआ यह जान लीजिए सॉरी गोरखा पराजय ठीक है।

08:53

Speaker A

गोरखा पराजय कैसे हुई उसके बाद क्या हुआ जैसे ही ब्रिटिश ने 1 नवंबर 1814 में गोरखों के विरुद्ध जो है वह युद्ध की घोषणा की।

08:54

Speaker A

उसके तत्पश्चात जुब्बल रियासत में अंग्रेजों ने डांगी वजीर और प्रिमू के साथ मिलकर 12 मार्च 1815 को चौपाल में 100 गोरखों को हथियार डालने पर विवश किया।

08:55

Speaker A

चौपाल जीतने के बाद राबिनगढ़ जो किला था ठीक है जिस पर जो है रंजोर सिंह थापा का कब्जा था जो अमर सिंह थापा का पुत्र था उस पर भी क्या किया अंग्रेजों ने आक्रमण कर दिया भाई।

08:56

Speaker A

टिक्कम दास, बदरी और डांगी वजीर के साथ बुशहर रियासत की जितनी भी सेनाएं थी उसने अंग्रेजों के साथ मिलकर गोरखों को राबिनगढ़ किले से भी भगा दिया ठीक है।

08:57

Speaker A

रामपुर-कोटगढ़ के पास बुशहर और कुल्लू की संयुक्त सेनाओं ने सारन-का-टिब्बा के पास गोरखों को हथियार डालने पर मजबूर किया।

08:58

Speaker A

हिंडूर के राजा रामशरण और कहलूर के राजा के साथ मिलकर अंग्रेजों ने मोर्चा बनाया।

08:59

Speaker A

अमर सिंह थापा को रामगढ़ से भगाकर मलौन किले में शरण लेनी पड़ी।

09:00

Speaker A

भक्ति थापा जो गोरखों का बहादुर सरदार था उसकी मृत्यु मलौन किले में होने से गोरखों को भारी क्षति हुई।

09:01

Speaker A

कुमायूं की हार और उसके सैनिकों की युद्ध करने की अनिच्छा ने अमर सिंह थापा को हथियार डालने पर उस टाइम जो है वह मजबूर सा कर दिया।

09:02

Speaker A

इसके बाद सुगौली की संधि या फिर इसको हम कहते हैं संगोली की संधि।

09:03

Speaker A

इसमें क्या हुआ कि अमर सिंह थापा ने अपने और अपने पुत्र रंजोर सिंह को जो कि जातक दुर्ग की रक्षा कर रहा था को बचाने के लिए ठीक है।

09:04

Speaker A

सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी के लिए 28 नवंबर 1815 को याद रखनी है फुल डेट ऐसे तो 1815 कई बार आता है बट पूरी डेट आपको याद रखनी है 28 नवंबर 1815 को ब्रिटिश मेजर जनरल डेविड ऑक्टरलोनी के साथ जो है सुगौली की संधि पर हस्ताक्षर कर दिए।

09:05

Speaker A

अब इस संधि के अनुसार जो गोरखे थे वह अपनी निजी संपत्ति के साथ वापस सुरक्षित नेपाल जाने पर जो है वह विवश हो गए और उनको जो है वह वापस नेपाल जाने का रास्ता जो है वह प्रदान किया ब्रिटिशों द्वारा।

09:06

Speaker A

तो यह जो था वह संगोली की संधि भी आप कह सकते हैं सुगौली की संधि रही थी 28 नवंबर 1815 को किसके बीच में अमर सिंह थापा के और साथ में ब्रिटिश मेजर जनरल डेविड ऑक्टरलोनी के बीच में तो यह भी आपको याद रखना है कंपटीटिव एग्जाम्स में पूछा जाता है।

09:07

Speaker A

इसके बाद ब्रिटिश और पहाड़ी राज्य में क्या हुआ पहले तो क्या किया था अंग्रेजों ने पहाड़ी रियासतों से किए वादों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया क्योंकि उन्होंने क्या किया था कि भाई हम जो क्या कर देंगे पहाड़ी रास्तों रास्तों को जो राजाओं को दे देंगे परंतु जहां पर जो था या तो उत्तराधिकारी मर गया था मृत्यु हो गई थी वहां पर भी जो है ब्रिटिशों ने कब्जा करना शुरू कर दिया और जहां पर जो है आपसी लड़ाई थी उत्तराधिकारियों में वहां पर भी जो है ब्रिटिशों ने कब्जा करना शुरू कर दिया।

09:08

Speaker A

इसके अलावा पहाड़ी शासकों को युद्ध खर्चे के तौर पर भारी धनराशि भी अंग्रेजों को देनी पड़ती थी और बाद में अगर हम बात करें तो अंग्रेजों ने प्लासी में 20 शिमला पहाड़ी राज्यों की बैठक बुलाई ताकि गोरखों से प्राप्त क्षेत्रों का बंटवारा किया जा सके।

09:09

Speaker A

इसमें जो है बिलासपुर, कोटखाई, भागल और बुशहर को 1815 से 1819 सनद प्रदान की गई कुम्हारसेन, बालवान, धरोच, कुठार, मंगल, धामी को स्वतंत्र संदे प्रदान की गई।

09:10

Speaker A

खनेठी और देलथ बुशहर राज्य को भी दी गई जबकि कोटि, घुंड, ठियोग, मथान और रतेश क्योंथल रियासत जो थी वह भी दे दी गई।

09:11

Speaker A

सिखों के खतरे के कारण जो है बहुत से राज्यों ने अंग्रेजों की शरण ली नूरपुर के राजा बीर सिंह ने शिमला और सबाथु छावनी अंग्रेजों की में शरण ली।

09:12

Speaker A

बलबीर सेन मंडी के राजा ने रणजीत सिंह के विरुद्ध मदद के लिए सबाथु के पॉलिटिकल एजेंट कर्नल टप्प को पत्र लिखा।

09:13

Speaker A

बहुत से पहाड़ी राज्यों ने अंग्रेजों की सिखों के विरुद्ध मदद भी की।

09:14

Speaker A

गुलेर के शमशेर सिंह, नूरपुर के बीर सिंह, कुटलहर के नारायण पाल ने सिखों को अपने इलाकों से खदेड़ा।

09:15

Speaker A

महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद 9 मार्च 1846 की लाहौर संधि के बाद सतलुज और व्यास के क्षेत्रों पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया।

09:16

Speaker A

1846 ईस्वी तक अंग्रेजों ने कांगड़ा, नूरपुर, गुलेर, जसवां, दतारपुर, मंडी, सुकेत, कुल्लू और लाहौल-स्पीति को पूर्णतः अपने कब्जे में ले लिया।

09:17

Speaker A

तो यह था हिमाचल प्रदेश का इतिहास और यह इतिहास हमारे पास जो है वह प्राचीन इतिहास भी रहा मध्यकालीन में भी रहा आधुनिक में भी रहा।

09:18

Speaker A

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में बहुत सारे आंदोलन भी हुए सम्मेलन भी चलाए गए बहुत सारे यहां पर जो है हिमाचल प्रदेश में अगर हम बात करें तो बहुत सारी ऐसी घटनाएं भी हुई जिनका विवरण जो है इसमें नहीं दिया गया उस पर हम जो है अलग से आपके लिए क्लासेस लेकर आएंगे वीडियोस लेकर आएंगे।

09:19

Speaker A

उम्मीद करता हूं कि आपको जो है यह वीडियो अच्छी लगी होगी तो ज्यादा से ज्यादा अपने अन्य दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

09:20

Speaker A

वीडियो अच्छी लगी तो एक लाइक जरूर कर दें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर हमें बताइए कि आपको जो नेक्स्ट वीडियो कौन से टॉपिक पर चाहिए तब तक के लिए मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में धन्यवाद जय हिंद जय हिमाचल।

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