**HANUMAN ANSH AVTAR | Neem Karoli Baba की चमत्कारी कहानी | Hindi Short Film | 2D Animation — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/hanuman-ansh-avtar-neem-karoli-baba-story/

नीम करौली बाबा की चमत्कारी कहानी, एक साधु की गाड़ी रोकने की घटना और उनके जीवन के प्रेरणादायक पहलू।

## Key Takeaways

- साधु और आध्यात्मिकता का सम्मान समाज में जरूरी है।
- भूखे को पहले खाना खिलाना चाहिए, उपदेश बाद में।
- साधु के चमत्कार और उनकी मर्जी से ही कई घटनाएं संभव होती हैं।
- नीम करौली बाबा का जीवन प्रेरणा और दया का उदाहरण है।
- सामाजिक नियमों और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।

## What the video covers

- फर्रुखाबाद से चलती गाड़ी में एक साधु बिना टिकट यात्रा करता है, जिससे गाड़ी रुक जाती है।
- अंग्रेज अफसर और मजिस्ट्रेट भी गाड़ी न चलने की वजह नहीं समझ पाते।
- साधु के चमत्कारिक प्रभाव से गाड़ी फिर चलने लगती है।
- यह कहानी लक्ष्मण नारायण शर्मा नामक एक बच्चे की दयालुता और साधु के प्रति सम्मान से जुड़ी है।
- नीम करौली बाबा के जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनके चमत्कारों का वर्णन।
- बाबा हर आने वाले से सबसे पहले पूछते थे कि 'खाना खाया?' और भूखे को पहले खाना खिलाने पर जोर देते थे।
- बाबा के असली नाम और उनके सात नामों से जाने जाने की बात।
- बाबा के जीवन में आए कठिनाइयों, उनके सामाजिक योगदान और आध्यात्मिक संदेश।
- बाबा के चमत्कारों की वजह से लोगों का उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान बढ़ा।
- कहानी में भारतीय रेलवे, सामाजिक नियमों और आध्यात्मिकता के बीच संघर्ष को दर्शाया गया है।

## Chapters

1. 00:00 साधु और गाड़ी की घटना
2. 02:41 गाड़ी रुकने का रहस्य और साधु का चमत्कार
3. 05:14 समाज में साधु के प्रति व्यवहार और प्रतिक्रिया
4. 07:26 लक्ष्मण नारायण शर्मा का बचपन और जीवन
5. 09:44 नीम करौली बाबा के नाम और चमत्कार
6. 12:06 बाबा का संदेश: भूखे को पहले खाना खिलाओ
7. 14:23 बाबा के जीवन के अंतिम वर्ष और प्रभाव

Answers

## Questions about this video

नीम करौली बाबा की गाड़ी रोकने वाली घटना क्या थी?

फर्रुखाबाद से चलती गाड़ी में एक साधु बिना टिकट यात्रा कर रहा था, जिससे गाड़ी अचानक रुक गई। साधु के चमत्कारिक प्रभाव से गाड़ी फिर चलने लगी।

नीम करौली बाबा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या था?

बाबा का संदेश था कि भूखे आदमी को पहले खाना खिलाओ, उपदेश बाद में देना चाहिए। यह उनकी दया और मानवता का मूल सिद्धांत था।

इस वीडियो में लक्ष्मण नारायण शर्मा का क्या महत्व है?

लक्ष्मण नारायण शर्मा बचपन में दयालु बच्चे थे, जिन्होंने साधु की मदद की। वे बाद में नीम करौली बाबा के रूप में प्रसिद्ध हुए।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:01

Speaker A

दोपहर के 3:00 बजे थे। फर्रुखाबाद से चलने वाली गाड़ी अपने वक्त से 15 मिनट पीछे थी। पहले दर्जे के डिब्बे में एक साधु बैठा था। बदन पर फटा हुआ कंबल, पैर नंगे। पास में एक छोटा सा चिमटा। महाराज टिकट।

00:18

Speaker A

क्या बेटा? कागज का एक टुकड़ा होता है बाबा। पैसे देकर मिलता है। पैसे तो नहीं है। राम का नाम है। वह चलेगा। बाबा यह पहला दर्जा है। यहां राम का नाम नहीं चलता। फिर तो बड़ी दिक्कत है बेटा। मुझे तो बस

00:44

Speaker A

क्या बेटा? कागज का एक टुकड़ा होता है बाबा। पैसे देकर मिलता है। पैसे तो नहीं हैं। राम का नाम है। वह चलेगा। बाबा यह पहला दर्जा है। यहां राम का नाम नहीं चलता। फिर तो बड़ी दिक्कत है बेटा। मुझे तो बस

01:02

Speaker A

पहले दर्जे में बिना टिकट? अभी उतारो इसे। जनाब अगला स्टेशन आने दीजिए। यह जगह सुनसान है। मैंने कहा अभी। गाड़ी रुकी। किसी स्टेशन पर नहीं बीच जंगल में। बाबा मुझे माफ कर दीजिए। माफी की क्या जरूरत बेटा?

01:29

Speaker A

वही आता है। टिकट बाबू ने पीछे मुड़कर देखा और वहीं उसकी हंसी सूख गई। दरवाजे पर अंग्रेज अफसर खड़ा था। नाम हाड़ी साहब। यहां क्या हो रहा है? जनाब यह एक साधु हैं। किसी को परेशान नहीं कर रहे।

01:48

Speaker A

क्या हुआ? कोयला पूरा है, भाप पूरी है। ब्रेक सब खुले हैं साहब। दबाव पूरा था। पहिए 1 इंच नहीं घूमे। हार्ड मजाक कर रहे हो जनाब। मैं 20 साल से इंजन चला रहा हूं। मैं गाड़ी से मजाक भी नहीं

02:07

Speaker A

पहले दर्जे में बिना टिकट? अभी उतारो इसे। जनाब अगला स्टेशन आने दीजिए। यह जगह सुनसान है। मैंने कहा अभी। गाड़ी रुकी। किसी स्टेशन पर नहीं, बीच जंगल में। बाबा मुझे माफ कर दीजिए। माफी की क्या जरूरत बेटा?

02:28

Speaker A

फिर खबर मजिस्ट्रेट तक पहुंच गई। मजिस्ट्रेट 2 घंटे से गाड़ी खड़ी है और किसी को कारण नहीं पता। इंजन ठीक है सर। तो चल क्यों नहीं रही?

02:41

Speaker A

गाड़ी का मालिक ही उतारेगा ना। बाबा चुपचाप उतर गए। एक शब्द नहीं कहा। पटरी से हटकर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। चिमटा जमीन में गाढ़ा और आंखें बंद कर ली। चलाओ गाड़ी। पहिए हिले और फिर रुक गए।

02:59

Speaker A

चलेगी। साहब गाड़ी तो चल भी नहीं रही। इस एक जवाब का किसी के पास कोई जवाब नहीं था। मजिस्ट्रेट पेड़ के नीचे पहुंचा। साथ में हार्डी पीछे 300 यात्री। महाराज गाड़ी नहीं चल रही तो मैं क्या करूं बेटा? मैं तो पेड़ के

03:20

Speaker A

क्या हुआ? कोयला पूरा है, भाप पूरी है। ब्रेक सब खुले हैं साहब। दबाव पूरा था। पहिए 1 इंच नहीं घूमे। हार्ड मजाक कर रहे हो जनाब। मैं 20 साल से इंजन चला रहा हूं। मैं गाड़ी से मजाक भी नहीं

03:43

Speaker A

बनाना। चढ़ जाऊं? महाराज आप चढ़िए। जो मांगना है मांग लीजिए। यह विभाग करके देगा। और अब इस पूरी कहानी का वो हिस्सा आता है जिसने सब कुछ बदल दिया। जिस आदमी को अभी-अभी बेइज्जत करके उतारा गया था, उसने

04:04

Speaker A

करता। आधा घंटा बीता। एक घंटा, 2 घंटे गर्मी बढ़ने लगी। बच्चे रोने लगे। औरतें डिब्बों से उतर कर पटरी के किनारे बैठ गईं। फर्रुखाबाद से मदद आई। इंजीनियर आए, पेज खोले गए। भठी दोबारा तेज की गई। रिपोर्ट एक ही आई। इंजन में कोई खराबी नहीं है।

04:26

Speaker A

किसी साधु के साथ ऐसा मत करना। वो सफाई नहीं देगा। लेकिन तुम्हारा मन खराब हो जाएगा। बाबा डिब्बे में चढ़े। अपनी जगह बैठे और मुस्कुरा कर बोले अब क्या गाड़ी चलाना भी मेरी जिम्मेदारी है?

04:42

Speaker A

फिर खबर मजिस्ट्रेट तक पहुंच गई। मजिस्ट्रेट 2 घंटे से गाड़ी खड़ी है और किसी को कारण नहीं पता। इंजन ठीक है सर। तो चल क्यों नहीं रही?

04:58

Speaker A

नाम से कभी नहीं जाना। नियम करौली बाबा। लेकिन दोस्तों, यह तो सिर्फ भीड़ के सामने दिखी एक झलक थी। असली कहानी इसके पीछे है। उस कंबल के पीछे जो एक रात इतना भारी हो गया कि दो लोग मिलकर मुश्किल से उठा पाए।

05:14

Speaker A

तभी भीड़ में से एक बूढ़ा आदमी आगे आया। 2 घंटे पहले एक साधु को इसी गाड़ी से जबरदस्ती उतारा गया था। गाड़ी उसी वक्त से खड़ी है। वो अब भी वहीं बैठे हैं। बकवास। अब भारतीय रेलवे साधुओं की मर्जी से

05:30

Speaker A

ने बरसों पहले एक बेरोजगार नौजवान से कह दी थी और उस एक सवाल के पीछे जो बाबा हर आने वाले से सबसे पहले पूछते थे खाना खाया अगर आप यह कहानी पूरी सुनना चाहते हैं तो कमेंट में लिख दीजिए जय हनुमान चलिए अब

05:47

Speaker A

चलेगी। साहब गाड़ी तो चल भी नहीं रही। इस एक जवाब का किसी के पास कोई जवाब नहीं था। मजिस्ट्रेट पेड़ के नीचे पहुंचा। साथ में हार्डी पीछे 300 यात्री। महाराज गाड़ी नहीं चल रही तो मैं क्या करूं बेटा? मैं तो पेड़ के

06:05

Speaker A

पैदा हुआ नाम रखा गया लक्ष्मण नारायण शर्मा घर में सब कुछ सामान्य था बस एक चीज थी जो कोई नहीं समझ पाता था वो बच्चा खुद लक्ष्मण रोटी ठंडी हो रही है मां दो रोटी और बना दो इतनी भूख लगी है आज

06:23

Speaker A

नीचे बैठा हूं। महाराज गाड़ी में 300 लोग हैं। जब एक को उतारा था तब 300 याद नहीं आए थे। महाराज कंबल मैंने पकड़ा था। हुक्म ऊपर का था लेकिन हाथ मेरा था। मुझे माफ कर दीजिए। गलती हो जाती है बेटा। बस उसे आदत मत

06:32

Speaker A

लक्ष्मण उसका पेट बता रहा था मां। मां ने रोटी बना दी। बच्चा बाहर गया। थाली दी और बैठकर देखता रहा जब तक वो आदमी खा नहीं गया। यह किसी संत की कहानी नहीं थी। यह एक आठ साल के बच्चे की आदत थी।

06:47

Speaker A

बनाना। चढ़ जाऊं? महाराज आप चढ़िए। जो मांगना है मांग लीजिए। यह विभाग करके देगा। और अब इस पूरी कहानी का वो हिस्सा आता है जिसने सब कुछ बदल दिया। जिस आदमी को अभी-अभी बेइज्जत करके उतारा गया था, उसने

07:12

Speaker A

दुर्गा प्रसाद जी हंस दिए उन्होंने इसे बचपन का खेल समझा उस जमाने में बाल विवाह का रिवाज था घर वालों को लगा शादी हो जाएगी तो मन मन घर में लग जाएगा। महज 11 साल की उम्र में लक्ष्मण की शादी करा दी

07:26

Speaker A

अपने लिए कुछ नहीं मांगा। वो जो पेड़ है ना, वहां एक स्टेशन बनवा दो। स्टेशन यहां आसपास के गांव वाले मीलों पैदल चलते हैं। बूढ़े चलते हैं, बच्चे चलते हैं। यहां स्टेशन बन गया तो आने वाली पीढ़ियां चैन से चलेंगी और और आज के बाद

07:43

Speaker A

लेती थी? राम का। और किसका? अब वही मुझे जगाते हैं मां। मां कुछ समझ नहीं पाई। बच्चे का सिर सहलाया और सो गई। सुबह घर में सिर्फ एक चीज गायब थी। लक्ष्मण ना कोई चिट्ठी, ना विदाई, ना पैसा, ना रास्ता। बस एक कंबल और एक नाम।

08:03

Speaker A

किसी साधु के साथ ऐसा मत करना। वो सफाई नहीं देगा। लेकिन तुम्हारा मन खराब हो जाएगा। बाबा डिब्बे में चढ़े। अपनी जगह बैठे और मुस्कुरा कर बोले अब क्या गाड़ी चलाना भी मेरी जिम्मेदारी है?

08:18

Speaker A

सबसे पहले वह पहुंचा गुजरात। मोरबी के पास एक गांव बवानिया। गांव के बाहर एक तालाब था। एक नौजवान साधु उसमें उतर गया। गले तक पानी में और आंखें बंद कर ली। 1 घंटा 2 घंटे पूरा दिन। अरे बाबा बाहर आ जाओ। पानी में सांप हैं।

08:39

Speaker A

सीटी बजी और गाड़ी चल पड़ी। उस जगह का नाम था नीव गरोड़ी। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले का एक छोटा सा गांव। वहां आगे चलकर सच में एक स्टेशन बना। और उस दिन के बाद उस साधु को दुनिया ने उसके असली

08:54

Speaker A

हैं। ऊपर एक टूटी हांडी, ना लकड़ी, ना आग। बाबा यह क्या कर रहे हैं आप? खाना बना रहा हूं। किस पर?

09:05

Speaker A

नाम से कभी नहीं जाना। नियम करौली बाबा। लेकिन दोस्तों, यह तो सिर्फ भीड़ के सामने दिखी एक झलक थी। असली कहानी इसके पीछे है। उस कंबल के पीछे जो एक रात इतना भारी हो गया कि दो लोग मिलकर मुश्किल से उठा पाए।

09:28

Speaker A

खाना। और फिर उन्होंने एक वाक्य कहा जो आगे चलकर उनकी पूरी जिंदगी की नीव बन गया। भूखा आदमी भगवान की बात नहीं सुनता। पहले उसे खाना खिलाओ। उपदेश बाद में देना। उस टूटी हांडी की वजह से उन्हें नाम मिला

09:44

Speaker A

उस हार्व के प्रोफेसर के पीछे जो दुनिया की सबसे खतरनाक नशीली गोलियां लेकर बाबा को परखने आया और अपना नाम तक छोड़कर लौटा। उस बीमारी के पीछे जिसने 50 करोड़ लोगों की जान ली और जिसके खत्म होने की बात बाबा

09:59

Speaker A

नदी एक ही होती है बेटा। हर गांव उसे अपने नाम से बुलाता है। जहां भी नाम मिलने लगता, जहां भी भीड़ जुड़ने लगती, वो वहां से चल देते थे। लेकिन एक चीज है जिससे कोई साधु नहीं भाग सकता अपने घर से। कई साल बाद गुजरात के

10:16

Speaker A

ने बरसों पहले एक बेरोजगार नौजवान से कह दी थी और उस एक सवाल के पीछे जो बाबा हर आने वाले से सबसे पहले पूछते थे खाना खाया अगर आप यह कहानी पूरी सुनना चाहते हैं तो कमेंट में लिख दीजिए जय हनुमान चलिए अब

10:35

Speaker A

आया हूं बेटा बाबा ऐसा मत कहिए पिता तुम संत बन गए यह बड़ी बात है लेकिन एक बाप की बात सुनो जिस घर में जन्म हुआ है उसका कर्ज चुकाए बिना त्याग पूरा नहीं होता त्यागी बाद में बन जाना पहले मेरे बेटे बन

10:56

Speaker A

पीछे चलते हैं पूरे 60 साल पीछे 1900 के आसपास का समय उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा गांव अकबरपुर एक जमींदार परिवार मुखिया का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा खेत थे अनाज था इज्जत थी इसी घर में एक बच्चा

11:16

Speaker A

बिताए। खेत, घर, परिवार, दो बेटे और एक बेटी। गांव के लोग उन्हें पंडित जी कहते थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन दुनिया भर के लोग इसी आदमी के पीछे खींचे चले आएंगे। भीतर की आग बुझी नहीं थी। बस

11:30

Speaker A

पैदा हुआ नाम रखा गया लक्ष्मण नारायण शर्मा घर में सब कुछ सामान्य था बस एक चीज थी जो कोई नहीं समझ पाता था वो बच्चा खुद लक्ष्मण रोटी ठंडी हो रही है मां दो रोटी और बना दो इतनी भूख लगी है आज

11:39

Speaker A

मैंने तो कुछ कहा नहीं। 20 साल हो गए हैं। अब कहने की जरूरत नहीं रही। बच्चे बड़े हो गए हैं। जमीन का बंटवारा कर दिया है। किसी को कोई कमी नहीं होगी। बस एक कमी रहेगी। मैं तुम्हारे लिए बहुत बुरा पति साबित

12:01

Speaker A

मुझे मुझे नहीं बाहर एक आदमी बैठा है। उसने तीन दिन से कुछ नहीं खाया। तुझे कैसे पता तीन दिन से नहीं खाया?

12:19

Speaker A

हाथ में रख दिया। यह साथ ले जाना। पहाड़ों में बहुत ठंड होती है। कहां जा रहे हो?

12:26

Speaker A

लक्ष्मण उसका पेट बता रहा था मां। मां ने रोटी बना दी। बच्चा बाहर गया। थाली दी और बैठकर देखता रहा जब तक वो आदमी खा नहीं गया। यह किसी संत की कहानी नहीं थी। यह एक आठ साल के बच्चे की आदत थी।

12:41

Speaker A

किताब नहीं लिखी। कभी किसी को शिष्य नहीं बनाया। बस एक लकड़ी का तख्त, एक कंबल और एक सवाल। बाबा चरण स्पर्श। खाना खाया?

12:54

Speaker A

लक्ष्मण ये क्या कर रहे हो? बैठा हूं पिताजी। आंखें बंद करके आंखें खोलकर बहुत कुछ दिखता है पिताजी बहुत ज्यादा और बंद करके बंद करके सिर्फ एक दिखते हैं कौन हनुमान जी तुझे उनके बारे में किसने बताया किसी ने नहीं वो खुद आ जाते हैं

13:15

Speaker A

सवाल यही होता था। एक दिन एक बड़ा व्यापारी आया। महाराज, आपके लिए भेंट लाया हूं। इससे एक मंदिर बनवा दीजिए। हम तुम्हारे गांव में कितने लोग भूखे सोते हैं?

13:29

Speaker A

दुर्गा प्रसाद जी हंस दिए उन्होंने इसे बचपन का खेल समझा उस जमाने में बाल विवाह का रिवाज था घर वालों को लगा शादी हो जाएगी तो मन मन घर में लग जाएगा। महज 11 साल की उम्र में लक्ष्मण की शादी करा दी

13:52

Speaker A

व्यापारी तो अभी सोना लेकर आया था। उसने जो बचा था वो दिया। इसने जो था वो दे दिया। फर्क दिखता है सच में पैर छूने हैं तो हनुमान जी के छू। चादर हां वही चादर जिसके नीचे वो छिपे बैठे हैं।

14:16

Speaker A

गई। लेकिन जिसका मन कहीं और लगा हो उसे कोई बंधन नहीं बांध सकता। शादी के कुछ ही महीने बाद एक रात बच्चा आंगन में मां के पास आकर बैठ गया। मां एक बात पूछूं? पूछ बेटा। बचपन में तुम मुझे सुलाते वक्त किसका नाम

14:32

Speaker A

बाबा। झूठ बोलेगा तो दाढ़ी टेढ़ी कट जाएगी। सच बोल। नाई के हाथ से उस तरह नीचे गिर गया। बाबा मेरा बेटा तीन दिन से घर नहीं आया। काम ढूंढने गया था। कह कर गया था 2 दिन में लौट आऊंगा। पूरे शहर में ढूंढ लिया।

14:51

Speaker A

लेती थी? राम का। और किसका? अब वही मुझे जगाते हैं मां। मां कुछ समझ नहीं पाई। बच्चे का सिर सहलाया और सो गई। सुबह घर में सिर्फ एक चीज गायब थी। लक्ष्मण ना कोई चिट्ठी, ना विदाई, ना पैसा, ना रास्ता। बस एक कंबल और एक नाम।

15:11

Speaker A

और बाबा दुकान से बाहर निकल गए। ना ही खड़ा देखता रह गया। इससे पहले कि वो कुछ समझ पाता। लगभग 2 मिनट बाद बाबा वापस आ गए। चुपचाप कुर्सी पर बैठ गए। हां अब कर। बाबा आप कहां गए थे? शौच। 2

15:28

Speaker A

घर वालों ने ढूंढा, रिशेदारी में पूछा, मंदिरों में पूछा, कुछ नहीं मिला। और दोस्तों, यही वो हिस्सा है जहां आकर हर खोजने वाला रुक जाता है। इन सालों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। सिर्फ बिखरे हुए किस्से हैं। अलग-अलग गांवों की यादों में।

15:44

Speaker A

पिताजी काम ढूंढते-ढूंढते बहुत दूर निकल गया था। वापस आने के पैसे भी खत्म हो गए। तीन दिन से स्टेशन पर बैठा था। तो आया कैसे? यही तो सबसे अजीब बात है। आज दोपहर एक बाबा आए। मुझे पैसे दिए और कहा

16:03

Speaker A

सबसे पहले वह पहुंचा गुजरात। मोरबी के पास एक गांव बवानिया। गांव के बाहर एक तालाब था। एक नौजवान साधु उसमें उतर गया। गले तक पानी में और आंखें बंद कर ली। 1 घंटा 2 घंटे पूरा दिन। अरे बाबा बाहर आ जाओ। पानी में सांप हैं।

16:18

Speaker A

नाई वहीं बैठ गया क्योंकि वो बाबा दुकान से सिर्फ 2 मिनट के लिए गए थे और जिस स्टेशन पर उसका बेटा बैठा था वो वहां से 100 मील दूर था। दोस्तों इस कहानी को मानना या ना मानना आपके ऊपर है। लेकिन आगे

16:33

Speaker A

बाहर कहां है भाई? बाहर तो और गहरा पानी है। महीने बीत गए। लोग उनका असली नाम भूल गए और उन्हें तालाब से जोड़कर बुलाने लगे। तलया बाबा। फिर एक दूसरे गांव में लोगों ने देखा कि बाबा रेत पर हाथ रखकर बैठे

16:51

Speaker A

पर जापानी फौज के सामने खड़ा कर दिया गया था। फतेहगढ़ में एक छोटे से घर में एक बूढ़ा जोड़ा रहता था। रामलाल और सावित्री बहुत गरीब एक ही बेटा और वो बर्मा में था। 4 महीने से कोई चिट्ठी नहीं आई थी। एक शाम

17:06

Speaker A

हैं। ऊपर एक टूटी हांडी, ना लकड़ी, ना आग। बाबा यह क्या कर रहे हैं आप? खाना बना रहा हूं। किस पर?

17:26

Speaker A

माफ कीजिए महाराज। नमक खत्म हो गया था। अरे मैं शिकायत नहीं कर रहा। तारीफ कर रहा हूं। ज्यादा नमक तो कोई भी डाल सकता है। कम डालने के लिए हिम्मत चाहिए। आज रात यहीं सोऊंगा। जरूर महाराज। लेकिन घर में बस यही एक कंबल

17:48

Speaker A

रेत पर। बाबा, रेत पर खाना नहीं बनता। आग चाहिए होती है। नीचे भी आग है बेटा। तुम लोगों ने बस ऊपर वाली आग देखी है। पागल है ये। थालियां ले आओ। खाना ठंडा हो जाएगा। बाबा यह तो बन भी गया। बहस बाद में पहले

18:02

Speaker A

महाराज की आवाज आ रही है। बाबा करा रहे थे। जैसे कोई उन्हें बुरी तरह पीट रहा हो। महाराज महाराज सब ठीक है। जाओ देखो जाकर। हिम्मत नहीं हो रही। कहीं नाराज ना हो जाएं। लेकिन इतना दर्द किस बात का है पता नहीं।

18:25

Speaker A

खाना। और फिर उन्होंने एक वाक्य कहा जो आगे चलकर उनकी पूरी जिंदगी की नीव बन गया। भूखा आदमी भगवान की बात नहीं सुनता। पहले उसे खाना खिलाओ। उपदेश बाद में देना। उस टूटी हांडी की वजह से उन्हें नाम मिला

18:40

Speaker A

अंदर एकदम शांति थी। महाराज रात आप ठीक थे? सपना देख रहा था। कैसा सपना महाराज?

18:50

Speaker A

हांडी वाले बाबा, कहीं तिकोनिया वाले बाबा, कहीं लक्ष्मण दास, कहीं तलैया बाबा। बाबा जिंदगी में कुल सात नामों से जाने गए। एक बार किसी ने पूछ ही लिया बाबा आपका असली नाम क्या है?

19:00

Speaker A

एक काम करना इसे गंगा में बहा देना। लेकिन यह तो हमारा एक ही बहा देना। और सुन खोलने की कोशिश मत करना नहीं तो फंस जाओगे। महाराज इसके अंदर है क्या? वो चीज जो कभी तुम्हारे घर में आनी ही नहीं चाहिए थी।

19:22

Speaker A

नदी एक ही होती है बेटा। हर गांव उसे अपने नाम से बुलाता है। जहां भी नाम मिलने लगता, जहां भी भीड़ जुड़ने लगती, वो वहां से चल देते थे। लेकिन एक चीज है जिससे कोई साधु नहीं भाग सकता अपने घर से। कई साल बाद गुजरात के

19:41

Speaker A

था। लोहे के टुकड़ों जैसा लग रहा है। एक बार खोल कर देख लें क्या? नहीं बाबा ने मना किया है। दोनों ने कंबल गंगा में बहा दिया और भूल गए। ठीक एक महीने बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। बेटा लौट आया था।

19:57

Speaker A

कस्बे में एक बूढ़ा आदमी लाठी टेकता हुआ पहुंचा। पूछते-पूछते वो एक पेड़ के नीचे रुका। वहां एक नौजवान साधु बैठा था। लक्ष्मण तुम्हारी मां रोज दरवाजे पर बैठती है। कहती है आज आएगा। बाबा पिताजी पिता मैं तुमसे भीख मांगने

20:21

Speaker A

क्या हुआ था? जापानियों ने अचानक हमला किया। रात के अंधेरे में हमारी टुकड़ी छोटी थी। गोलियां बारिश की तरह बरस रही थी। हमारे लड़के एक-एक करके गिर रहे थे। हे राम। और मैं मैदान के बीचों-बीच फंसा था। ना

20:39

Speaker A

आया हूं बेटा बाबा ऐसा मत कहिए पिता तुम संत बन गए यह बड़ी बात है लेकिन एक बाप की बात सुनो जिस घर में जन्म हुआ है उसका कर्ज चुकाए बिना त्याग पूरा नहीं होता त्यागी बाद में बन जाना पहले मेरे बेटे बन

21:02

Speaker A

मिट्टी उड़ रही थी। लेकिन एक भी गोली मुझे नहीं लगी। पूरी रात एक भी नहीं। रामलाल के हाथ कांपने लगे। सुबह मदद आ गई। मैं बच गया। लेकिन पिताजी मेरे साथ खड़े 17 लोग नहीं बचे। सिर्फ मैं बेटा वो कौन सी रात थी?

21:26

Speaker A

जाओ पिताजी चलो चलो चलें। इससे पहले कि तुम कुछ और कहो और मैं और रोने लगूं। और वो लौट आए। एक ऐसा संत जो अपने पिता के कहने पर वापस गृहस्थ बन गया। अगले करीब 20 साल उन्होंने एक साधारण आदमी की तरह

21:44

Speaker A

कौन सा कंबल? पिताजी आप कांप क्यों रहे हैं? बेटा उस रात हमारे घर में कोई सपना नहीं देख रहा था। वर्मा के मोर्चे पर उनके बेटे पर चलाई गई गोलियां कहीं और गिर गई थी। एक कंबल में। बाबा ने वो सारा दर्द

22:02

Speaker A

बिताए। खेत, घर, परिवार, दो बेटे और एक बेटी। गांव के लोग उन्हें पंडित जी कहते थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन दुनिया भर के लोग इसी आदमी के पीछे खींचे चले आएंगे। भीतर की आग बुझी नहीं थी। बस

22:18

Speaker A

में देता है वह हिसाब नहीं रखता। अगर यह कहानी आपको यहां तक बांधे हुए है तो कमेंट में लिख दीजिए जय नीम करौली बाबा। अब आगे बढ़ते हैं क्योंकि उसी युद्ध के खत्म होने के 4 साल बाद नीप करोड़ी स्टेशन पर एक

22:33

Speaker A

दबी हुई थी। 20 साल बाद एक रात उनकी पत्नी ने आंगन में उन्हें बैठा देखा। कंबल गोद में रखा था। जा रहे हो?

22:50

Speaker A

होकर बोर्ड देखता रहा। फिर स्टेशन मास्टर के पास गया। यह स्टेशन कब बना? बहुत पुराना है साहब। कहते हैं एक साधु की वजह से बना था। कौन सा साधु?

23:04

Speaker A

मैंने तो कुछ कहा नहीं। 20 साल हो गए हैं। अब कहने की जरूरत नहीं रही। बच्चे बड़े हो गए हैं। जमीन का बंटवारा कर दिया है। किसी को कोई कमी नहीं होगी। बस एक कमी रहेगी। मैं तुम्हारे लिए बहुत बुरा पति साबित

23:22

Speaker A

को मैंने बेइज्जत करके उतारा था, उसने अपने लिए एक पैसा नहीं मांगा। जिस आदमी को मैंने बेइज्जत करके उतारा था, उसने अपने लिए एक पैसा नहीं मांगा। उसने यह स्टेशन मांगा। उन गांव वालों के लिए जिन्हें वह जानता तक

23:40

Speaker A

हुआ। नहीं, तुम बहुत अच्छे पति थे। बस इतना था कि तुम सिर्फ मेरे नहीं थे। और यह बात मुझे शादी के पहले ही दिन समझ आ गई थी। तुम मुझे जाने दोगी? पत्नी ने कुछ नहीं कहा। अंदर गई। एक कंबल उठाकर लाई और उनके

23:57

Speaker A

हिंदुस्तान के बिल्कुल दूसरे कोने में था। नैनीताल से करीब 17 कि.मी. दूर पहाड़ों में एक मोड़ है। वहां दो पहाड़ एक दूसरे को इस तरह काटते हैं जैसे कैंची के दो फल हो। इसीलिए उस जगह का नाम पड़ गया कैंची।

24:12

Speaker A

हाथ में रख दिया। यह साथ ले जाना। पहाड़ों में बहुत ठंड होती है। कहां जा रहे हो?

24:26

Speaker A

पूरन ओ पूरन इधर आ। पूरन ने चारों तरफ देखा। कोई नहीं था। बाबा आपको मेरा नाम कैसे पता?

24:36

Speaker A

जहां लोग भूखे हैं। दोस्तों, इस कंबल को याद रखिएगा क्योंकि आगे इसी कंबल की वजह से एक ऐसी रात आने वाली है जिसे समझने की कोशिश ल

24:55

Speaker A

और बुला ला। नदी पार चलना है। सब नदी पार करके जंगल में पहुंचे। इसे हटाओ। बाबा। यह तो बस एक पत्थर है। इसके पीछे कुछ नहीं है। इसके पीछे एक गुफा है। बाबा। मेरा जन्म यहीं हुआ है। मैं 50 साल से

25:16

Speaker A

यहीं हूं। यहां कोई गुफा नहीं है। 50 साल से तू आंखें खोल कर घूम रहा है और गुफा नहीं दिखी। इसीलिए तो कहता हूं आंखें खोल के कम दिखता है। लोग हंस पड़े लेकिन खोदना शुरू कर दिया। बाबा काफी खोद लिया है। कहीं गलती तो नहीं

25:38

Speaker A

हो रही? थोड़ा और धैर्य रख। और फिर कुदाल एक जगह जाकर टकराई। पत्थर हटाया गया और नीचे सच में एक गुफा थी। लोग अंदर घुसे और वहीं जम गए। गुफा के अंदर हवन की सामग्री पड़ी थी और राख अभी

25:56

Speaker A

भी हल्की गर्म थी जैसे अभी-अभी कोई यहां बैठा हो। बाबा यह कैसे हो सकता है? पत्थर सालों से बंद था। यह तो चमत्कार है। यह चमत्कार नहीं है। और मैं कोई चमत्कारी बाबा नहीं हूं। बहुत साल पहले यहां दो संत

26:14

Speaker A

तपस्या करते थे। यह उनकी जगह है। लेकिन आप तो यहां कभी आए ही नहीं। जो साधना से जुड़ा होता है ना पूरन वो समय से छिप नहीं सकता। अब यहां क्या होगा बाबा?

26:29

Speaker A

अब यहां हनुमान जी रहेंगे। नदी से पानी लाओ, जगह साफ करो, घर की मरम्मत करनी है। मालिक आ रहा है। उस दिन गांव वालों ने जगह साफ की और वहां हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई। पहले एक छोटा मंदिर बना फिर धीरे-धीरे

26:47

Speaker A

आश्रम। करीब 1964 में कैंची धाम ने वो रूप लेना शुरू किया जो आज हम देखते हैं। बाबा ने अपनी जिंदगी के आखिरी 10 साल यहीं बिताए। और यही वो घटना हुई जो आज तक हर साल 15 जून को याद की जाती है। उस दिन

27:02

Speaker A

भंडारा था। हजारों लोग पहाड़ की ढलान तक कतार में खड़े थे। बाबा बहुत बड़ी समस्या हो गई है। कितनी बड़ी?

27:12

Speaker A

घी खत्म हो गया है। और अभी आधे लोगों को भी खाना नहीं मिला है। कितने लोग बचे हैं?

27:20

Speaker A

हजारों बाबा हजारों बाबा लाइन नीचे तक जा रही है तो नदी से पानी भरकर डिब्बे ले आओ। पानी बाबा मैं घी की बात कर रहा हूं। पूरी पानी में नहीं तली जाती। मैंने सुन लिया। जा डालूं? डाल दे। बाबा ने कहा है

27:44

Speaker A

पानी कढ़ाई में गिरा और अगले ही पल दोनों के हाथ रुक गए। ये ये घी है। चुप कुछ मत बोल बस देख शोर मत करो पूड़ तलो। बाबा ये कैसे हुआ?

28:00

Speaker A

सवाल बाद में पहले सबको खाना खिलाओ। अगर कोई भूखा लौट गया तो मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगा। उस दिन कोई भूखा नहीं लौटा और आज भी हर साल 15 जून को कैंची धाम में भंडारा होता है। 1 लाख से ज्यादा लोग

28:17

Speaker A

प्रसाद लेते हैं। आज तक कोई भूखा नहीं लौटा। अब बाबा का नाम गांवों से निकलकर दिल्ली तक पहुंच चुका था। एक दिन कैंची के बाहर एक सरकारी गाड़ी रुकी। शास्त्री जी आप कहें तो थोड़ी देर रुक कर दर्शन कर लेते हैं।

28:32

Speaker A

नहीं मैं इन बाबाओं साधुओं में विश्वास नहीं करता। आप जाना चाहे तो जाइए। मैं गाड़ी में बैठा हूं। अफसर अंदर गया। आ गए। चीन वालों से काफी उलझन चल रही है आजकल। बाबा आपको कैसे पता? हम तो अभी-अभी उसी

28:52

Speaker A

बैठक से निकले हैं। शास्त्री को साथ क्यों नहीं लाए? वो साधुओं में विश्वास नहीं करते। गाड़ी में ही बैठे होंगे। जा बुला कर ला। नमस्कार महाराज जी। सच कहूं तो सच कहूं तो मुझे यहां आने की उम्मीद नहीं थी।

29:10

Speaker A

तुम तो मेरे लिए गुलाब लाने वाले थे। फिर क्या हुआ? भूल गए। यह बात मैंने किसी से नहीं कही थी। कभी नहीं। यह सिर्फ मेरे मन में थी। जानना क्या है? सब कुछ तो पहले से ही है। अब चिंता मत कर। चीन आगे नहीं बढ़

29:29

Speaker A

पाएगा। रुक जाएगा। और जो आदमी सुबह यह कहकर आया था कि वह साधुओं में विश्वास नहीं करता वो शाम को गाड़ी में बैठते हुए बस इतना बोला कुछ चीजें बस होती हैं समझ में नहीं आती। साल 1971 दिल्ली का बिरला मंदिर

29:46

Speaker A

बाबा वो आदमी सुबह से यहीं खड़ा है। कुछ बोल नहीं रहा। डरा हुआ लग रहा है। बाबा अरे इधर आ। वो आदमी पास आकर बैठ गया। मुंह खोला ही था कि बाबा बोल पड़े। चुप कुछ मत बोल। तेरा भाई जेल में है।

30:03

Speaker A

आपको आपको कैसे पता? चिंता मत कर वो छूट जाएगा। बाबा उन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। वो दूसरे देश की जेल में है। बाबा और छूटने के बाद वो राजा बनेगा। आदमी राजा बाबा। तू अभी तक यहीं बैठा है। घर

30:23

Speaker A

जा। भाई के आने की तैयारी कर। वो आदमी उठा और चला गया। उसका भाई उस वक्त पाकिस्तान की जेल में बंद था। मौत की सजा सुनाई जा चुकी थी। कुछ महीने बाद बांग्लादेश आजाद हुआ और वह कैदी रिहा होकर लौटा। उसका नाम

30:37

Speaker A

था शेख मुजीब उर रहमान। बांग्लादेश के राष्ट्रपिता और जो आदमी उस दिन बिरला मंदिर में डरा हुआ खड़ा था, वो उनका छोटा भाई था। एक और किस्सा। एक दिन आश्रम के बाहर दो आदमी आपस में उलझ पड़े। मैं तुझे

30:52

Speaker A

बता रहा हूं पिछले मंगलवार बाबा कानपुर में मेरे घर पर थे। मेरी बेटी की शादी में। पिछले मंगलवार बाबा मेरे साथ नैनीताल में थे। मैंने दिन भर उन्हें खिचड़ी खिलाई। उन्होंने मेरी बेटी के सिर पर हाथ रखा था और मुझसे कहा था कि खिचड़ी में नमक

31:08

Speaker A

कम है। बाबा यह कहते हैं आप कानपुर में थे और मैं कहता हूं आप नैनीताल में थे। नैनीताल में थे। तुम दोनों सही हो। बाबा दोनों कैसे सही हो सकते हैं? तेरे घर में कितने कमरे हैं? चार। और हवा कितने कमरों में है? चारों में।

31:33

Speaker A

तो जा हवा से पूछ कर आ कि वो किस कमरे में थी? दोनों एक दूसरे का मुंह देखते रह गए। बाबा आप हैं कौन?

31:44

Speaker A

चोर दिल चुराता हूं और आज तक किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई। बाबा हर बड़े सवाल का जवाब एक हंसी में उड़ा देते थे। लेकिन 1967 में एक ऐसा आदमी आया जो हंसी में उड़ाए जाने के लिए तैयार

32:01

Speaker A

नहीं था। वो जवाब मांगने आया था सबूत के साथ। और उसकी जेब में दुनिया की सबसे खतरनाक चीजों में से एक रखी थी। उसका नाम था रिचर्ड अल्बर्ट। हार्व यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान का प्रोफेसर। पैसा था, डिग्रियां थी, नाम था। लेकिन उसकी पूरी

32:20

Speaker A

जिंदगी एक ही उसूल पर टिकी थी। जब तक सबूत ना हो तब तक कुछ भी सच नहीं। पहाड़ों में चढ़ते हुए उसके साथ एक अमेरिकी नौजवान था। नाम भगवान दास। भगवान दास तुम्हारी जेब में क्या है? रिचर्ड दवा। भगवान दास कैसी

32:36

Speaker A

दवा? रिचर्ड वो जो आदमी के दिमाग का दरवाजा खोल देती है। रंग बदल जाते हैं। आवाजें बदल जाती हैं। समय का एहसास तक खत्म हो जाता है। भगवान दास कितनी देर के लिए? रिचर्ड 8 से 12 घंटे और मात्रा

32:53

Speaker A

ज्यादा हो जाए तो आदमी मर भी सकता है। भगवान दास और तुम यह साधुओं को खिलाना चाहते हो। रिचर्ड मैं जानना चाहता हूं कि जो अवस्था वो सालों की साधना से पाते हैं और जो यह गोली एक घंटे में दे देती है

33:07

Speaker A

क्या वो एक ही चीज है? और अगर एक ही निकली तो साधना की जरूरत ही क्या है? और अगर नहीं निकली रिचर्ड ने जवाब नहीं दिया। एक बात साफ कर दूं। मैं किसी गुरु में विश्वास नहीं करता। मैंने इस देश में बहुत

33:23

Speaker A

साधु देखे हैं। सब पैसा मांगते हैं। भगवान दास यह कुछ नहीं मांगेगा। वो आश्रम पहुंचे। बाबा तख्त पर बैठे थे। कंबल ओढ़े। बाबा ने रिचर्ड को देखा और सीधा बोले कल रात तुम बड़ी गाड़ी में आए थे। मुझे दे

33:39

Speaker A

दो। मेरी गाड़ी मांग रहे हैं। मैंने बताया नहीं था। वो वो मेरी नहीं है। मेरे एक दोस्त की है। अच्छा तो छोड़ो मुझे गाड़ी की जरूरत ही क्या है?

33:54

Speaker A

कल रात तुम बाहर बैठे थे अकेले। तारों के नीचे। हां। तुम अपनी मां के बारे में सोच रहे थे। यह बात मैंने किसी को नहीं बताई। पिछले साल गुजर गई। हां। तिल्ली बढ़ गई थी। रिचर्ड वहीं जमीन पर बैठ गया। पूरी जिंदगी

34:18

Speaker A

उसने तर्क पर सबूत पर भरोसा किया था। बस कीजिए बहुत हो गया। तुम्हारे पास कोई योगी दवा है क्या? वही जो तुम अमेरिका से लाए हो। रिचर्ड ने कांपते हाथों से जेब से डिबियां निकाली। अब आगे जो हुआ वो खुद रिचर्ड ने

34:37

Speaker A

लिखा है और शायद इसीलिए इसे नकारना मुश्किल हो जाता है। उसने सोचा था कि एक गोली देगा सिर्फ एक। क्योंकि एक ही गोली किसी आम आदमी को घंटों दूसरी दुनिया में पहुंचा देती है। उसने एक गोली हथेली पर

34:50

Speaker A

रखी और दो। और? और और दो। रिचर्ड ने एक और गोली रखी। और दो। अब रिचर्ड के हाथ कांप रहे थे। उसे डर था कि इतनी मात्रा इस बूढ़े आदमी को मार देगी। लेकिन बाबा का हाथ आगे बढ़ा हुआ था

35:07

Speaker A

और बाबा ने सारी गोलियां एक साथ मुंह में डाल ली। पानी पिया और मुस्कुरा कर बैठ गए। रिचर्ड ने घड़ी देखी। 10 मिनट बीते। कुछ नहीं 20 मिनट। कुछ नहीं एक घंटा। बाबा वैसे ही बैठे थे। राम राम राम राम।

35:25

Speaker A

2 घंटे 3 घंटे कुछ भी नहीं हुआ। ना आंखें फैली ना आवाज बदली ना शरीर हिला एक भी लक्षण नहीं और उस दिन हार्व के उस तेज दिमाग ने अपनी आंखों से एक बात देखी नशे से मिलने वाली चेतना कुछ घंटों की मेहमान

35:41

Speaker A

होती है लेकिन कुछ लोग उसी अवस्था में हमेशा रहते हैं। कोई कह सकता है कि शायद बाबा ने गोलियां निगली ही नहीं होंगी। सवाल जायज है। लेकिन यह किस्सा किसी भक्त ने नहीं उसी वैज्ञानिक ने खुद लिखा है जो

35:55

Speaker A

उन्हें पकड़ने आया था। उस दिन के बाद रिचर्ड वापस नहीं गया। महाराज जी मुझे कुछ सिखाइए। कुछ भी ध्यान योग मंत्र सिखाने के लिए है क्या? तुझे तो सब पता है। बस भूल गया है। तो फिर मैं करूं क्या?

36:16

Speaker A

सबसे प्रेम कर। सबकी सेवा कर। सबको खाना खिला और भगवान को याद रख। बस इतना कर। फिर आना तब सिखाऊंगा। फिर बाबा ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। और तेरा नाम बहुत लंबा है। आज से तू राम

36:33

Speaker A

का सेवक है। रिचर्ड अल्फर्ड उसी दिन रामदास बन गया। अमेरिका लौट कर उसने एक किताब लिखी। बी हियर नाउ। उसकी लाखों प्रतियां बिकी और उसी किताब के जरिए अमेरिका ने पहली बार एक ऐसे बूढ़े आदमी के बारे में सुना जो एक फटे कंबल में लिपटा

36:50

Speaker A

रहता था। बाद में उन्होंने बाबा के बारे में सिर्फ एक वाक्य लिखा जो सब कुछ कह देता है। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं। उन्होंने बस मुझसे प्रेम किया और उसी में सब कुछ सिखा दिया। रामदास के बाद पश्चिम

37:03

Speaker A

से और लोग आने लगे। उन्हीं में एक लंबे बालों वाला अमेरिकी डॉक्टर था। नाम लेरी ब्रिलियंट। अरे तू डॉक्टर है?

37:12

Speaker A

हां था। था अब नहीं। अब तो बस घूम रहा हूं। संयुक्त राष्ट्र जाएगा कहां? संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन तू दुनिया से चेचक मिटाएगा। महाराज जी आप समझ नहीं रहे मैं एक हिप्पी हूं ना नौकरी है ना पैसा मुझे तो कोई उस

37:33

Speaker A

दफ्तर में घुसने भी नहीं देगा तो कोशिश कर और अगर मना कर दिया तो वापस आ जाना और अगर दोबारा मना कर दिया तो दोबारा चला जाना जरा इस बात का वजन समझिए 20वीं सदी में चेचक ने दुनिया में

37:49

Speaker A

लगभग 50 करोड़ लोगों की जान ली थी और पहाड़ पर बैठा एक बूढ़ा आदमी जिसने कभी स्कूल नहीं देखा था। एक बेरोजगार हिप्पी से कह रहा था कि तू इसे खत्म करेगा। लेरी दिल्ली गया। मना कर दिया गया। दोबारा गया

38:04

Speaker A

फिर मना कर दिया गया। कहते हैं उसे लगभग डेढ़ दर्जन बार लौटाया गया और आखिर में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उसे रख लिया। लेरी ब्रिलियंट उसी टीम का हिस्सा बना जिसने भारत से और फिर पूरी दुनिया से चेचक

38:18

Speaker A

को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। 1980 में ऐलान हुआ कि चेचक पृथ्वी से पूरी तरह मिट चुकी है। और जिस बूढ़े आदमी ने यह बात सबसे पहले कही थी, वो यह ऐलान सुनने के लिए जिंदा नहीं था। वो 7 साल पहले ही जा

38:32

Speaker A

चुका था। एक सर्दियों की शाम पहाड़ों में बर्फीली हवा चल रही थी। आश्रम के बाहर एक आदमी कांपता हुआ बैठा था। पतला कुर्ता कोई चादर नहीं। बाबा बाहर निकले। उसे देखा कुछ नहीं बोले। चलते-चलते अपने कंधे से कंबल

38:47

Speaker A

उतारा और उसके ऊपर डाल दिया और बिना मुड़े आगे बढ़ गए। बाबा आपका कंबल उसे ठंड लग रही थी। बाबा आपको भी तो लगेगी। मुझे आदत है। यही वो कंबल था जो एक पत्नी ने 20 साल बाद अपने पति को विदा करते हुए दिया था। और

39:08

Speaker A

यही वो कंबल था जो एक रात फतेहगढ़ में लोहे जैसा भारी हो गया था। और फिर वो महीना आया जब उन्होंने वो चादर भी उतार दी। सितंबर 1973। बाबा उन दिनों बार-बार एक ही बात कह रहे थे। अब जाने का समय हो गया है।

39:24

Speaker A

कहां बाबा? सेंट्रल जेल से निकलना है। सेंट्रल जेल? बाबा आप कब जेल में थे? अरे मूर्ख यह शरीर ही तो जेल है। बाबा ऐसा मत कहिए। क्यों? लोग जेल से छूटने पर खुश होते हैं ना। अब मुझे ठंड नहीं लगेगी।

39:45

Speaker A

सितंबर की शुरुआत में उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। भक्त उन्हें आगरा ले गए। दवाइयां दी गई। फिर वो कैंची लौटने के लिए ट्रेन में सवार हुए। लेकिन ट्रेन में ही तबीयत बिगड़ने लगी। बाबा बाबा सुन रहे हैं? वृंदावन

40:02

Speaker A

बाबा मथुरा आने वाला है। वहीं उतर जाते हैं। पास में अस्पताल है। वृंदावन ले चलो। वहां शांति है। बाबा वृंदावन बहुत दूर है। मुझे उस घर का पता मालूम है जहां जाना है। ट्रेन मथुरा में रोकी गई। वहां से बाबा को

40:25

Speaker A

वृंदावन ले जाया गया। नब्ज़ स्थिर है। चिंता की बात नहीं। महाराज यह मत उतारिए। आपको ऑक्सीजन की जरूरत है। यह सब बेकार है। थोड़ा गंगाजल ले आओ। गंगाजल लाया गया। बाबा ने एक घूंट लिया और जाप शुरू किया।

40:48

Speaker A

जय जगदीश हरे। जय बाबा थोड़ी देर और रुक जाइए। जय जगदीश हरे जय जगदीश हरे हर जाप के साथ आवाज धीमी होती गई जय जगदीश हरे और 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में नीम करौली बाबा ने अपना शरीर छोड़ दिया वो चले

41:13

Speaker A

गए लेकिन कहां जो आदमी एक ही समय में दो जगह मौजूद रह सकता था वो आखिर कहां गया होगा और अब इस कहानी का सबसे अजीब हिस्सा शुरू होता है क्योंकि बाबा के जाने के बाद उनके पास आने वालों की गिनती घटी नहीं,

41:29

Speaker A

बढ़ गई। करीब एक साल बाद अमेरिका से एक 19 साल का लड़का भारत आया। फटे कपड़े, लंबे बाल, जेब में कुछ डॉलर, वो घूमने नहीं आया था। वो एक आदमी से मिलने आया था। उस लड़के का नाम था स्टीव जॉब्स। उसने कॉलेज छोड़

41:44

Speaker A

दिया था और उसने एक किताब पढ़ी थी। बी हियर नाउ। वही किताब जो रामदास ने लिखी थी। महाराज जी महाराज जी यहां नहीं है बेटा। नहीं है। कब आएंगे? वो पिछले साल चले गए। स्टीव कुछ देर वहीं खड़ा रहा।

42:02

Speaker A

मुझे एक साल की देर हो गई। चलें वो है ही नहीं यहां पता है। लेकिन यहां बैठकर यहां बैठकर पहली बार दिमाग शांत लग रहा है। बेटा खाना खाया? क्या?

42:19

Speaker A

खाना खाया? नहीं तो अंदर चलो। महाराज जी का नियम था जो भी आए भूखा ना जाए। लेकिन वो तो है ही नहीं। नियम तो है। वो कई महीने भारत में रुका। तुझे वहां मिला क्या आखिर? तू जिससे मिलने

42:39

Speaker A

गया था वो तो था ही नहीं। यही तो बात है। मैं जवाब लेने गया था। जवाब देने वाला मिला ही नहीं। मुझे खुद सोचना पड़ा। पहली बार। भारत से लौटने के ठीक 2 साल बाद उसने एक गैराज में अपनी

42:55

Speaker A

कंपनी शुरू की। Apple। अब कहानी लगभग 30 साल आगे बढ़ती है। एक और 24 साल का लड़का उसने कॉलेज के कमरे में एक वेबसाइट बनाई थी। नाम Facebook लेकिन कंपनी बुरे दौर से गुजर रही थी। बड़ी कंपनियां इसे खरीदना

43:10

Speaker A

चाहती थी और उसके अपने लोग कह रहे थे बेच दो। लड़के ने लगभग मन बना लिया था। तभी वह उस आदमी से मिलने गया जिसे वह अपना गुरु मानता था। स्टीव जॉब्स मुझे लगता है मुझे इसे अब बेच देना चाहिए।

43:27

Speaker A

क्यों? क्योंकि मैं थक गया हूं। हर कोई कह रहा है यह ज्यादा दिन नहीं चलेगा। तुम मुझसे सलाह लेने आए हो या मंजूरी?

43:40

Speaker A

मुझे नहीं पता। सवाल यह नहीं कि कंपनी कितने में बिकेगी? सवाल यह है कि तुमने इसे बनाया ही क्यों था?

43:49

Speaker A

मुझे याद नहीं तो जाओ और याद करो। कहां? भारत। पहाड़ों में एक मंदिर है। मैं बहुत साल पहले वहां गया था। कुछ दिन वहां बैठो फिर फैसला करना। माना जाता है कि मार्क ज़करबर्ग भारत आए और करीब एक महीना

44:10

Speaker A

यहां बिताया। और इसी दौरान वो उसी जगह पहुंचे जिसका जिक्र स्टीव जॉब्स ने किया था। वहां ना कोई दफ्तर था ना कोई सलाहकार। बस पहाड़, नदी और एक कतार जिसमें लोग खाना लेने खड़े थे। बेटा लाइन में लग जाओ। मैं

44:26

Speaker A

खाने के लिए नहीं आया। यहां जो भी आता है खाने के लिए ही आता है। बाकी बहाने हैं। यह लोग एक दूसरे को जानते भी हैं। नहीं। यहां यही एक नियम है। ना जाति पूछी जाती है, ना धर्म, ना पैसा।

44:46

Speaker A

और कहते हैं उसी कतार को देखते हुए उसे वह बात याद आ गई जो वह भूल चुका था कि उसने यह सब शुरू ही इसलिए किया था कि लोग एक दूसरे से जुड़ सकें। वो लौटे और उन्होंने Facebook नहीं बेचा। और यह सुनी सुनाई बात

45:01

Speaker A

नहीं है। 2015 में मार्क ज़करबर्ग ने खुद एक खुले मंच पर यह बात कही थी। अब जरा एक पल रुक कर सोचिए। एक आदमी जिसने कभी ऊंची पढ़ाई नहीं की। जो कभी विदेश नहीं गया जिसने कभी कोई किताब नहीं लिखी। जिसने कभी

45:17

Speaker A

किसी को अपने पैर तक नहीं छूने दिए। जो पूरी जिंदगी एक फटे कंबल में लिपटा रहा। उसके जाने के 50 साल बाद दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों के मालिक उसी पहाड़ी पर जाकर बैठते हैं। एक दिन एक नौजवान आश्रम

45:31

Speaker A

के एक बूढ़े सेवक के पास बैठ गया। बाबा जी एक बात पूछूं? मैंने बहुत कहानियां सुनी है। ट्रेन रुकना, दो जगह एक साथ होना, पानी का घी बन जाना। यह सब सच है। तू क्या सोचता है?

45:47

Speaker A

मुझे नहीं पता। यह अच्छा जवाब है। एक बात बताऊं? बाबा को यह सब पसंद नहीं था। कोई चमत्कार कहता, तो चिढ़ जाते। कहते थे मैं कुछ नहीं करता। हनुमान जी करते हैं। तो असली बात क्या थी? सेवक ने उंगली उठाकर

46:06

Speaker A

सामने इशारा किया। उधर देख। नीचे भंडारा चल रहा था। लंबी कतारें थी। उन कतारों को देख। ना जाति पूछी जाती है ना धर्म। ना पैसा लिया जाता है। बेटा ट्रेन रोकना चमत्कार नहीं था। चमत्कार यह है। और यह आज

46:26

Speaker A

तक चल रहा है। बाबा ने ना कोई उपदेश दिया ना कोई पंथ चलाया। उन्होंने बस तीन बातें कही और आज पूरा कैंची धाम इन्हीं तीन बातों पर टिका है। सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, सबको खाना खिलाओ। और उनका सबसे सुंदर वाक्य

46:42

Speaker A

सिर्फ दो शब्दों का था। सब एक हैं। शायद इसीलिए जब कोई अपनी सबसे बड़ी परेशानी लेकर उनके सामने बैठता था तो वह उसका हल नहीं बताते थे। वो बस इतना पूछते थे। खाना खाया? अगर यह कहानी आपको अंत तक बांधे रखी

46:57

Speaker A

तो इसे उन लोगों तक पहुंचाइए जिन्हें बाबा के बारे में जानना चाहिए। चैनल सब्सक्राइब कर लीजिए और कमेंट में लिख दीजिए जय बजरंगबली जय नीम करौली बाबा।

Topics: नीम करौली बाबा चमत्कार हिंदी शॉर्ट फिल्म 2D एनीमेशन आध्यात्मिक कहानी भारतीय रेलवे साधु लक्ष्मण नारायण शर्मा भूखा आदमी सामाजिक संदेश


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