**How Gujaratis Dominate USA Kirana Business! — Transcript & Summary | SozAI**
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अमेरिका में गुजराती परिवार किराना स्टोर्स के बिजनेस में कैसे सफल हुए, इसके पीछे की रणनीतियाँ और इतिहास।

## Key Takeaways

- गुजराती परिवारों ने किराना स्टोर्स को रिसेशन प्रूफ बिजनेस के रूप में चुना।
- कम एजुकेशन में भी यह बिजनेस सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है।
- परिवार के सदस्यों द्वारा खुद काम करने से लागत कम होती है।
- लगातार प्रॉफिट को पुनः निवेश कर व्यवसाय का विस्तार किया गया।
- गुजराती समुदाय की मेहनत और रणनीति से अमेरिका में किराना स्टोर्स पर उनका वर्चस्व है।

## What the video covers

- अमेरिका के करीब 50 प्रतिशत किराना स्टोर्स गुजराती परिवारों के स्वामित्व में हैं।
- 1960 के दशक में कई गुजराती अमेरिका में करियर बनाने गए, जिनमें से कुछ डॉक्टर और इंजीनियर बने।
- कम पढ़े-लिखे गुजराती लोगों ने रिसेशन प्रूफ किराना स्टोर्स के बिजनेस को चुना।
- किराना स्टोर्स में एजुकेशन की जरूरत कम होती है, और ग्रोसरीज की मांग हमेशा बनी रहती है।
- गुजराती परिवार लॉस में चल रहे स्टोर्स को सस्ते में खरीदते और खुद काम करके लेबर कॉस्ट बचाते थे।
- वे शिफ्ट में काम करते थे ताकि स्टोर 24/7 खुला रहे।
- प्रॉफिट का इस्तेमाल नई स्टोर्स खरीदने में किया जाता था, जिससे व्यवसाय तेजी से बढ़ा।
- आज अमेरिका में लगभग 60,000 कन्वीनियंस स्टोर्स गुजराती परिवारों के हैं।

Answers

## Questions about this video

गुजराती लोग अमेरिका में किराना स्टोर्स में क्यों सफल हुए?

गुजराती लोगों ने किराना स्टोर्स को रिसेशन प्रूफ बिजनेस माना क्योंकि ग्रोसरीज की मांग हमेशा रहती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ खुद काम करके लागत कम करते और प्रॉफिट को पुनः निवेश कर व्यवसाय बढ़ाते।

क्या किराना स्टोर चलाने के लिए ज्यादा एजुकेशन जरूरी है?

नहीं, किराना स्टोर चलाने के लिए ज्यादा एजुकेशन की जरूरत नहीं होती। यह बिजनेस होलसेलर से सामान खरीदकर प्रॉफिट मार्जिन जोड़कर बेचने पर आधारित है।

गुजराती परिवार किराना स्टोर्स को कैसे खरीदते और चलाते हैं?

वे लॉस में चल रहे स्टोर्स को सस्ते में खरीदते हैं, वहां के स्टाफ को निकालकर खुद परिवार के सदस्य काम करते हैं, जिससे लेबर कॉस्ट बचती है और स्टोर 24/7 खुला रहता है।

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Speaker A

अमेरिका की करीब 50 प्रतिशत किराना स्टोर्स को गुजराती ओन करते हैं। 1960 में कई गुजराती लोग अपना करियर बनाने के लिए अमेरिका जाने लगे। इनमें से कई लोग डॉक्टर या इंजीनियर जैसे प्रोफेशन में चले गए, लेकिन जो ज्यादा

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Speaker A

पढ़े-लिखे नहीं थे, वो बिजनेस अपॉर्चुनिटी ढूंढने लगे। इन्होंने देखा कि किराना स्टोर्स या कन्वीनियंस स्टोर्स का बिजनेस रिसेशन प्रूफ है, क्योंकि इकॉनमी चाहे जैसी भी हो, लोगों को ब्रेड, मिल्क और वेजिटेबल्स जैसी ग्रोसरीज हमेशा चाहिए ही होती हैं। साथ

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Speaker A

ही इस बिजनेस को चलाने के लिए किसी एजुकेशन की जरूरत नहीं थी। सिंपली होलसेलर से सामान खरीदना था और अपना प्रॉफिट मार्जिन ऐड करके आगे बेचना था। इसीलिए ये गुजराती फैमिलीज ऐसी स्टोर्स को ढूंढने लगी जो लॉस में चल रही हो ताकि ये उसे

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Speaker A

सस्ते से सस्ते दाम में खरीद सके। स्टोर खरीदने के बाद ये वहां के सभी स्टाफ को निकाल देते थे और पूरी फैमिली खुद ही आपस में काम बांट लेती थी, जिससे इनका लेबर कॉस्ट जीरो हो जाता था। प्लस ये शिफ्ट्स

00:47

Speaker A

में काम करते थे ताकि इनका स्टोर 24/7 चल सके। इन स्ट्रेटेजी से जो प्रॉफिट आता था, ये उसे पूरा खुद पे खर्च नहीं करते थे, बल्कि ये उससे नई स्टोर्स खरीद लेते थे। और आज इसीलिए अमेरिका के करीब 60,000

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Speaker A

कन्वीनियंस स्टोर्स के ओनर्स गुजराती हैं।

Topics: गुजराती किराना स्टोर अमेरिका बिजनेस स्ट्रेटेजी कन्वीनियंस स्टोर रिसेशन प्रूफ बिजनेस परिवारिक व्यवसाय प्रॉफिट मार्जिन लेबर कॉस्ट शिवांशु अग्रवाल

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