**Gen Asim Munir & Pakistan’s Democracy | The Untold Story of Imran Khan & Form 47 — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/gen-asim-munir-pakistan-democracy-imran-khan-form-47/

जनरल आसिम मुनीर की तायनाती से पाकिस्तान की सियासी और अस्करी जंग तेज हुई, इमरान खान के खिलाफ दबाव बढ़ा और चुनावी धांधली हुई।

## Key Takeaways

- जनरल आसिम मुनीर की तायनाती ने पाकिस्तान की सियासी और अस्करी लड़ाई को तेज किया।
- इमरान खान के खिलाफ लगातार मुकदमात और राजनीतिक दबाव ने उनकी लोकप्रियता कम नहीं की।
- 8 फरवरी 2024 के चुनावों में व्यापक चुनावी धांधली हुई, जिससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
- मीडिया और न्यायपालिका पर दबाव ने स्वतंत्रता और न्यायिक निष्पक्षता को खतरे में डाला।
- आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता ने पाकिस्तान के भविष्य को गंभीर चुनौती दी।

## What the video covers

- नवंबर 2022 में जनरल कमर जावेद बाजवा के रिटायरमेंट के बाद जनरल आसिम मुनीर को आर्मी चीफ नियुक्त किया गया।
- इमरान खान ने जनरल आसिम मुनीर को अपने दौर में डीजीआईएसआई के पद से हटाया था, जिससे उनकी राजनीतिक टकराव की शुरुआत हुई।
- जनरल आसिम मुनीर की तायनाती के बाद इमरान खान के खिलाफ मुकदमात दर्ज किए गए और उन पर सियासी दबाव बढ़ा।
- 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी ने पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक उथल-पुथल मचाई।
- पीटीआई के नेताओं को गिरफ्तार किया गया और पार्टी के चुनाव चिन्ह को छीन लिया गया, बावजूद इसके पार्टी ने चुनावों में भारी जीत हासिल की।
- 8 फरवरी 2024 के चुनाव में चुनाव आयोग के सिस्टम में गड़बड़ी और फॉर्म 45 को फॉर्म 47 में बदलकर नतीजे बदले गए।
- मीडिया पर कड़ी सेंसरशिप और इमरान खान के नाम और तस्वीरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में फंसी, महंगाई बढ़ी और नौकरियां खत्म होने लगीं, जिससे युवा देश छोड़ने को मजबूर हुए।
- अदालतों में खुफिया एजेंसियों का दबाव बढ़ा, लेकिन कुछ जजों ने हिम्मत दिखाकर सच्चाई उजागर की।
- सियासी अस्थिरता और चुनावी धांधली ने पाकिस्तान के लोकतंत्र और शासन प्रणाली को गंभीर संकट में डाल दिया।

Answers

## Questions about this video

जनरल आसिम मुनीर की तायनाती का पाकिस्तान की राजनीति पर क्या असर पड़ा?

जनरल आसिम मुनीर की तायनाती ने पाकिस्तान में सियासी और अस्करी संघर्ष को तेज किया, जिससे इमरान खान के खिलाफ दबाव बढ़ा और देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी।

8 फरवरी 2024 के चुनावों में क्या विवाद हुआ?

8 फरवरी 2024 के चुनावों में चुनाव आयोग के सिस्टम में गड़बड़ी हुई, फॉर्म 45 को फॉर्म 47 में बदलकर नतीजे बदले गए, जिससे चुनावी धांधली का आरोप लगा।

इमरान खान के खिलाफ मुकदमात और गिरफ्तारी का क्या प्रभाव पड़ा?

इमरान खान के खिलाफ मुकदमात और गिरफ्तारी के बावजूद उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई, बल्कि उनके समर्थकों में गुस्सा बढ़ा और विरोध प्रदर्शन तेज हुए।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A

नवंबर 2022 में जब जनरल कमर जावेद बाजवा रिटायर हो रहे थे तो जीएच क्यू के अंदर एक ऐसी जंग जारी थी जिसके असरात ने आने वाले पूरे मुल्क का नक्शा बदलना था। इमरान खान हर कीमत पर चाहते थे कि जनरल फैज हमीद नए आर्मी चीफ बने। लेकिन दूसरी तरफ शबाज शरीफ और आसिफ अली ज़रदारी के पास एक ऐसा नाम था जिसे इमरान खान कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे और वो नाम था जनरल आसिम मुनीर का। जनरल आसिम मुनीर वही शख्स थे जिन्हें इमरान खान ने अपने दौर हुकूमत में महज चंद महीनों के अंदर डीजीआईएसआई के ओदे से हटा दिया था और जब नवंबर 2022 में शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर के नाम पर दस्तखत किए तो यह सिर्फ एक नए आर्मी चीफ की तायनाती नहीं थी। यह पाकिस्तान की तारीख की सबसे खूनरेज सियासी और अस्करी जंग का बाकायदा ऐलान था। सवाल यह है कि इस एक तायनाती के बाद ऐसा क्या हुआ जिसने पाकिस्तान की मशत, जम्हूरियत और आवामी हुकूक को तबाही के दहाने पर ला खड़ा किया। शहबाज शरीफ हुकूमत और इस्टैब्लिशमेंट ने जब जनरल आसिम मुनीर को कमान सौंपी तो इमरान खान उस वक्त सड़कों पर थे। वह लॉन्ग मार्च कर रहे थे। जलसे कर रहे थे और उनका बयानिया दिन-बदिन शदीद होता जा रहा था। वजीराबाद में इमरान खान पर गोली चली। वह जख्मी हुए। लेकिन उनकी मकबूलियत में जरा बराबर कमी नहीं आई। जनरल आसिम मुनीर के कमान संभालते ही जीएचक्यू और हुकूमती एवानों में एक बात तय हो चुकी थी। इमरान खान को किसी भी कीमत पर सियासी मंजरनामे से कायक करना होगा। शुरुआत हुई मुकदमात से तौशाखाना अलकादिर ट्रस्ट गद्दारी और साइफर केस एक के बाद एक इमरान खान पर दसियों मुकदमात दर्ज किए जाने लगे। लेकिन इस्टैब्लिशमेंट के लिए सबसे बड़ा मसला यह था कि वह जितना दबाव बढ़ाते इमरान खान की आवामी मकबूलियत उतनी ही बढ़ती जाती। फिर आया मई 2023। 9 मई को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के एहते से रेंजर्स ने जिस तरह इमरान खान को गर्दन से पकड़ कर हिरासत में लिया उसकी तसावीर ने पूरे मुल्क में आग लगा दी। पीटीआई के कारकुनान का गुस्सा सातवीं आसमान पर था और घंटों के अंदर-अंदर वह हुआ जिसका तस्सवुर भी पाकिस्तान में नहीं किया जा सकता था। कोर कमांडर हाउस लाहौर और जीएचक्यू के बाहर मुजाहरे हुए। लेकिन 9 मई के इन वाक्यात को इस्टैब्लिशमेंट ने एक मौके के तौर पर इस्तेमाल किया। 9 मई के फौरन बाद जनरल आसिम मुनीर ने वो पॉलिसी अपनाई जिसे पीटीआई को क्रैश करने का ऑपरेशन कहा जाता है। रावलपिंडी से लेकर कराची तक पीटीआई के हर बड़े रहनुमा को उठाया गया। फवाद चौधरी, शरी मजारी, उस्मान डार, अली ज़दी इन सब पर शदीद दबाव डाला गया कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करें। इमरान खान की मजम्मत करें और पार्टियां छोड़ दें। जिन्होंने इंकार किया उन्हें बार-बार गिरफ्तार किया गया। चादर और चारदीवारी का तद्दुस पामाल हुआ। घरों पर छापे मारे गए और खानदानों को हरासा किया गया। इमरान खान के गिर्द घेरा मुकम्मल तौर पर तंग कर दिया गया था और अगस्त 2023 में बिलाखिर अलकादिर ट्रस्ट और तोशाखाना केस में उन्हें अटक जेल मुंतकिल कर दिया गया लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी असली तबाही तो उसके बाद मईत इलेक्शन और मुल्क की अदलिया पर आने वाली थी। 8 फरवरी 2024 की रात 10:00 बजे पाकिस्तान के तमाम न्यूज़ चैनल्स की स्क्रीनों पर एक ऐसा मंजर था जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक सबको हिला कर रख दिया था। इमरान खान जेल में थे। उनकी पार्टी का इंतखाबी निशान बल्ला छीन लिया गया था और उनके तमाम उम्मीदवार बगैर किसी पार्टी सिंबल के आद हैसियत में लड़ रहे थे। लेकिन उसके बावजूद आवाम ने हर रुकावट तोड़कर इमरान खान के हामियों के लिए वोटों के अंबार लगा दिए थे। नताइज बता रहे थे कि पीटीआई हिमायत याफ्ता उम्मीदवार दो तिहाई अक्सरियत से जीत रहे हैं। लेकिन फिर रात के 12:00 बजे अचानक इलेक्शन कमीशन का सिस्टम बैठ जाता है। मोबाइल और इंटरनेट सर्विसेज मुअल कर दी जाती हैं और सुबह के उजाले में दुनिया एक ऐसा नतीजा देखती है जिसने पाकिस्तान के इंतखाबी निजाम को दुनिया भर में रुसवा करके रख दिया। सवाल यह है कि इस रात के अंधेरे में नताइज कैसे बदले गए? और फॉर्म 45 को फॉर्म 47 में बदलकर किस तरह शबाज शरीफ को दोबारा वजीर एआम की कुर्सी पर बिठाया गया। 8 फरवरी के इलेक्शन से पहले एस्टैब्लिशमेंट ने वो तमाम हरबे इस्तेमाल किए जो किसी भी सियासी जमात को खत्म करने के लिए किए जा सकते हैं। पीटीआई के रहनुमाओं को इलेक्शन कैंपेन चलाने की इजाजत नहीं थी। पार्टी का इंतखाबी निशान बल्ला छीनकर उम्मीदवारों को ऐसे निशानात दिए गए कि आम वोटर उलझ जाए। लेकिन सोशल मीडिया के जरिए पीटीआई ने अपने वोटर्स तक हर उम्मीदवार का निशान पहुंचा दिया। इलेक्शन वाले दिन सुबह से ही पोलिंग स्टेशंस पर आवाम का बेपनाह हुजूम देखा गया। रात के वक्त पोलिंग स्टाफ ने पोलिंग एजेंट्स को कानूनी फॉर्म 45 थमा दिए। जिन पर हर उम्मीदवार के असल हासिल करदा वोट दर्ज थे। उन फॉर्म 45 के मुताबिक पीटीआई के आजाद उम्मीदवार ना सिर्फ केपीके बल्कि पंजाब और कराची के उन हिस्सों से भी 10 भारी अक्सरियत से जीत रहे थे जहां मुस्लिम लीग नून और एमक्यूएम को नाकाबिले शिकस्त समझा जाता था। आधी रात को रिटर्निंग अफसरान के दफातिर के दरवाजे बंद कर दिए गए। पोलिंग एजेंटों को बाहर निकाल दिया गया और वहां वो खेल खेला गया जिसे पाकिस्तान की तारीख की सबसे बड़ी इंतखाबी डकैती कहा जाता है। सुबह के वक्त जो फॉर्म 47 जारी किए गए उनमें हारने वाले उम्मीदवारों को रातोंरात जीत का परवाना थमा दिया गया। रावलपिंडी के साबिक कमिश्नर लियाकत चट्टा ने बाद में खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस हकीकत से पर्दा उठाया कि किस तरह उन पर और दीगर हुकाम पर दबाव डालकर 70 हजार से वोटों की लीड वाले पीटीआई उम्मीदवारों को हराया गया। इस तमाम खेल को संभालने के लिए मीडिया को मुकम्मल तौर पर फतह कर लिया गया। मेन स्ट्रीम न्यूज़ चैनल्स को वाज़ हिदायत जारी की गई कि न्यूज़ स्क्रीनंस पर इमरान खान का नाम नहीं आना चाहिए। उनकी तस्वीर नहीं दिखाई जाएगी और ना ही उनका बयानिया चले। सहाफियों को धमकियां दी गईं और जो ना माना उसे ऑफ एयर कर दिया गया या मुल्क छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। आवाम का रियासत के निजाम से एतमाद बिल्कुल उठ गया और शहबाज शरीफ की कयादत में बनने वाली हुकूमत पहले ही दिन से फॉर्म 47 की हुकूमत के नाम से मशहूर हो गई। सियासी अदम इस्तेहकाम किसी भी मुल्क की मशत के लिए ज़हरे कातिल होता है। जब से अप्रैल 2022 में इमरान खान की हुकूमत गिराई गई और बाद में 8 फरवरी के इंतखाबादात में आवामी मैंडेट को बिलस किया गया। पाकिस्तान का मुआशी ग्राफ सीधा नीचे की तरफ गिरा। दुनिया भर के सरमाए और गैर मुल्की सरमायाकारों ने देख लिया कि पाकिस्तान में कानून की कोई हुक्मरानी नहीं है। जहां एक रात में नताज बदले जा सकते हैं वहां उनका सरमाया महफूज़ कैसे रह सकता है। नतीजतन आईएमएफ की शरायत मजीद सख्त होती गई और हुकूमत के पास बजट पूरा करने का सिर्फ एक ही तरीका बचा। आम आवाम की जेबों पर डाका डालना। बिजली के बिल इतने बढ़ा दिए गए कि गरीब और मिडिल क्लास का महीने का आधा बजट सिर्फ बिजली का बिल अदा करने में चला जाता है। गैस, पेट्रोल और बुनियादी खाने-पीने की अशिया पर इतने टैक्सेस ठोस दिए गए कि सफेद पोश तबके के लिए दो वक्त की रोटी पूरा करना नामुमकिन हो गया। सनतें बंद होने लगीं। कारखाने ठप हो गए और लाखों नौकरपेशा अफराद बेरोजगार हो गए। मुल्की तारीख में पहली बार ऐसा हुआ कि पढ़े लिखे नौजवान, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स और आईटी माहरीन लाखों की तादाद में मुल्क छोड़कर बाहर भागने पर मजबूर हो गए। जहां मुल्क की मशत वेंटिलेटर पर थी, वहां अरबों रुपए के वसाइल, पीटीआई वर्कर्स को पकड़ने, सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने, इंटरनेट सर्विसेज को बंद करने और फायर वाल्स लगाने पर जाया किए गए। इंटरनेट की बार-बार मुतली और सोशल मीडिया पर पाबंदियों की वजह से पाकिस्तान की अरबों डॉलर की आईटी इंडस्ट्री तबाही के दहाने पर पहुंच गई। मुआशी माहरीन ने बार-बार कहा कि जब तक मुल्क में सियासी इस्तेहकाम नहीं आएगा जब तक असल आवामी नुमाइंदों को उनका हक नहीं मिलेगा तब तक कोई पैकेज या कोई गैर मुल्की दौरे मशत को नहीं बचा सकता। लेकिन ताकत के नशे में मस्त इख्तदार के ऐवानों ने उन तमाम इंतबाहात को नजरअंदाज कर दिया। जब फॉर्म 47 के जरिए हुकूमत कायम की गई तो ताकतवर हल्कों के सामने सबसे बड़ी रुकावट आजाद अदलिया थी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स में कुछ जज ऐसे मौजूद थे जो हुकूमत और एस्टैब्लिशमेंट के गैर आईनी इखदामात के आगे बंद बांधने की कोशिश कर रहे थे। जब इस्लामाबाद हाईकोर्ट के छह जजों ने चीफ जस्टिस और सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल को एक धमाकेदार खत लिखा जिसमें उन्होंने खुल्लम खुल्ला इंकशाफ किया कि किस तरह खुफिया एजेंसियों के अहलकार जजों को डराते धमकाते हैं। उनके घरों में कैमरे लगाते हैं और फैसलों पर असर अंदाज होने के लिए उनके रिश्तेदारों को अगवा करते हैं तो पूरे मुल्क के अदालती निजाम में जलजला आ गया। लेकिन जब अदलिया ने मखसूस निशिस्तों के केस में पीटीआई के हक में फैसला दिया और यह खतरा पैदा हुआ कि हुकूमत की जाली अक्सरियत खत्म हो सकती है तो पावर हाउसेस में खतरे की घंटियां बज गईं। उन्हें मालूम था कि अ

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Speaker A

आर्मी चीफ बने। लेकिन दूसरी तरफ शबाज शरीफ और आसिफ अली ज़रदारी के पास एक ऐसा नाम था जिसे इमरान खान कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे और वो नाम था जनरल आसिम मुनीर का। जनरल आसिम मुनीर वही शख्स थे जिन्हें इमरान खान

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Speaker A

ने अपने दौरे हुकूमत में महज चंद महीनों के अंदर डीजीआईएसआई के ओदे से हटा दिया था और जब नवंबर 2022 में शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर के नाम पर दस्तखत किए तो यह सिर्फ एक नए आर्मी चीफ [संगीत] की तायनाती नहीं

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Speaker A

थी। यह पाकिस्तान की तारीख की सबसे खूनरेज सियासी और अस्करी जंग का बाकायदा ऐलान था। सवाल यह है कि इस एक तायनाती के बाद ऐसा क्या हुआ जिसने पाकिस्तान की मशत, जम्हूरियत और [संगीत] आवामी हुकूक को तबाही के दहाने पर ला खड़ा किया। शहबाज

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Speaker A

शरीफ हुकूमत और इस्टैब्लिशमेंट [संगीत] ने जब जनरल आसिम मुनीर को कमान सौंपी तो इमरान खान उस वक्त सड़कों पर थे। वह लॉन्ग मार्च कर रहे थे। जलसे कर रहे थे और उनका बयानिया दिन-बदिन शदीद होता जा रहा था।

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Speaker A

वजीराबाद में इमरान खान पर गोली चली। वह जख्मी हुए। लेकिन उनकी मकबूलियत में जरा बराबर कमी नहीं आई। जनरल आसिम मुनीर के कमान संभालते ही जीएचक्यू और हुकूमती एवानों में एक बात तय हो चुकी थी। इमरान खान को किसी भी कीमत पर [संगीत] सियासी

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Speaker A

मंजरनामे से कायक करना होगा। शुरुआत हुई मुकदमात से तौशाखाना अलकादिर ट्रस्ट गद्दारी और साइफर केस एक के बाद एक [संगीत] इमरान खान पर दसियों मुकदमात दर्ज किए जाने लगे। लेकिन इस्टैब्लिशमेंट के लिए सबसे बड़ा मसला यह था कि वह [संगीत]

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Speaker A

जितना दबाव बढ़ाते इमरान खान की आवामी मकबूलियत उतनी ही बढ़ती जाती। फिर आया मई 2023 9 मई को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के एहते से रेंजर्स ने जिस तरह इमरान खान को गर्दन से पकड़ कर हिरासत में लिया उसकी तसावीर

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Speaker A

ने पूरे मुल्क में आग लगा [संगीत] दी। पीटीआई के कारकुनान का गुस्सा सातवीं आसमान पर था और घंटों के अंदर-अंदर वह हुआ जिसका तस्सवुर भी पाकिस्तान में नहीं किया जा सकता था। कोर कमांडर हाउस लाहौर और जीएचक्यू के बाहर मुजाहरे हुए। लेकिन 9 मई

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Speaker A

के इन वाक्यात को इस्टैब्लिशमेंट ने एक मौके के तौर पर इस्तेमाल किया। [संगीत] 9 मई के फौरन बाद जनरल आसिम मुनीर ने वो पॉलिसी अपनाई जिसे पीटीआई को क्रैश करने का ऑपरेशन कहा जाता है। रावलपिंडी से लेकर कराची तक पीटीआई के हर बड़े रहनुमा को

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Speaker A

उठाया गया। फवाद चौधरी, शरी मजारी, उस्मान डार, अली ज़दी इन सब पर शदीद दबाव डाला गया कि वह प्रेस [संगीत] कॉन्फ्रेंस करें। इमरान खान की मजम्मत करें और पार्टियां छोड़ दें। जिन्होंने इंकार किया उन्हें बार-बार गिरफ्तार किया गया। [संगीत] चादर और

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Speaker A

चारदीवारी का तद्दुस पामाल हुआ। घरों पर छापे मारे गए और खानदानों को हरासा किया गया। इमरान खान के गिर्द घेरा मुकम्मल तौर पर तंग कर दिया गया [संगीत] था और अगस्त 2023 में बिलाखिर अलकादिर ट्रस्ट और तोशाखाना केस में उन्हें अटक जेल मुंतकिल

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Speaker A

कर दिया गया लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी असली तबाही तो उसके बाद मईत इलेक्शन और मुल्क की अदलिया पर आने वाली थी। 8 फरवरी 2024 की रात 10:00 बजे पाकिस्तान [संगीत] के तमाम न्यूज़ चैनल्स की स्क्रीनों पर एक

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Speaker A

ऐसा मंजर था जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी [संगीत] तक सबको हिला कर रख दिया था। इमरान खान जेल में थे। उनकी पार्टी का इंतखाबी निशान बल्ला छीन लिया गया था और उनके तमाम उम्मीदवार बगैर किसी पार्टी सिंबल के आद हैसियत में लड़ रहे

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Speaker A

थे। लेकिन उसके बावजूद आवाम ने हर रुकावट तोड़कर [संगीत] इमरान खान के हामियों के लिए वोटों के अंबार लगा दिए थे। नताइज बता रहे थे कि पीटीआई हिमायत याफ्ता उम्मीदवार दो तिहाई अक्सरियत से जीत रहे हैं। लेकिन फिर [संगीत] रात के 12:00 बजे अचानक

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Speaker A

इलेक्शन कमीशन का सिस्टम बैठ जाता है। मोबाइल और इंटरनेट सर्विसेज मुअल [संगीत] कर दी जाती हैं और सुबह के उजाले में दुनिया एक ऐसा नतीजा देखती है जिसने पाकिस्तान के इंतखाबी निजाम को दुनिया भर में रुसवा करके रख [संगीत] दिया। सवाल यह

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Speaker A

है कि इस रात के अंधेरे में नताइज कैसे बदले गए? और फॉर्म 45 [संगीत] को फॉर्म 47 में बदलकर किस तरह शबाज शरीफ को दोबारा वजीर एआम की कुर्सी [संगीत] पर बिठाया गया। 8 फरवरी के इलेक्शन से पहले

04:29

Speaker A

एस्टैब्लिशमेंट ने वो तमाम हरबे [संगीत] इस्तेमाल किए जो किसी भी सियासी जमात को खत्म करने के लिए किए जा सकते हैं। पीटीआई के रहनुमाओं को इलेक्शन कैंपेन चलाने [संगीत] की इजाजत नहीं थी। पार्टी का इंतखाबी निशान बल्ला छीनकर उम्मीदवारों को

04:43

Speaker A

ऐसे निशानात दिए गए कि आम वोटर उलझ जाए। लेकिन सोशल मीडिया के जरिए पीटीआई [संगीत] ने अपने वोटर्स तक हर उम्मीदवार का निशान पहुंचा दिया। इलेक्शन वाले दिन सुबह से ही पोलिंग स्टेशंस पर आवाम का बेपनाह हुजूम देखा गया। रात के वक्त पोलिंग स्टाफ ने

05:00

Speaker A

पोलिंग एजेंट्स को कानूनी फॉर्म 45 [संगीत] थमा दिए। जिन पर हर उम्मीदवार के असल हासिल करदा वोट दर्ज थे। उन फॉर्म 45 के मुताबिक पीटीआई के आजाद उम्मीदवार ना सिर्फ केपीके बल्कि पंजाब और कराची के उन हिस्सों से भी 10 भारी अक्सरियत से जीत

05:18

Speaker A

रहे थे जहां मुस्लिम लीग नून और एमक्यूएम को नाकाबिले शिकस्त समझा जाता था| आधी रात को रिटर्निंग अफसरान के दफातिर के दरवाजे बंद कर दिए गए| पोलिंग एजेंटों को बाहर निकाल दिया गया और वहां वो खेल खेला गया

05:31

Speaker A

जिसे पाकिस्तान की तारीख की सबसे बड़ी इंतखाबी डकैती कहा जाता है। सुबह के वक्त जो फॉर्म 47 जारी [संगीत] किए गए उनमें हारने वाले उम्मीदवारों को रातोंरात जीत का परवाना थमा दिया गया। रावलपिंडी के साबिक कमिश्नर लियाकत चट्टा ने बाद में

05:47

Speaker A

खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस हकीकत से पर्दा उठाया कि किस तरह उन पर और दीगर हुकाम पर दबाव डालकर 70 हजार से [संगीत] वोटों की लीड वाले पीटीआई उम्मीदवारों को हराया गया। इस तमाम खेल को संभालने के लिए

06:01

Speaker A

मीडिया को मुकम्मल तौर पर फतह कर लिया गया। मेन स्ट्रीम न्यूज़ चैनल्स को वाज़ हिदायत जारी की गई कि न्यूज़ स्क्रीनंस पर [संगीत] इमरान खान का नाम नहीं आना चाहिए। उनकी तस्वीर नहीं दिखाई जाएगी और ना ही उनका बयानिया चले। सहाफियों को धमकियां दी

06:17

Speaker A

[संगीत] गई और जो ना माना उसे ऑफ एयर कर दिया गया या मुल्क छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। आवाम का रियासत के निजाम से एतमाद बिल्कुल उठ गया और शहबाज शरीफ की कयादत में बनने वाली हुकूमत पहले ही दिन

06:30

Speaker A

से फॉर्म 47 की हुकूमत के नाम से मशहूर हो गई। सियासी अदम इस्तेहकाम किसी भी मुल्क की मशत के लिए ज़हरे कातिल होता है। जब से अप्रैल 2022 में इमरान खान की हुकूमत गिराई गई और बाद में 8 फरवरी के

06:44

Speaker A

इंतखाबादात में आवामी मैंडेट को बिलस किया गया। पाकिस्तान का मुआशी ग्राफ सीधा नीचे की तरफ गिरा। दुनिया भर के सरमाए और गैर मुल्की सरमायाकारों ने देख लिया कि पाकिस्तान में कानून की कोई हुक्मरानी नहीं है। जहां एक रात में नताज बदले जा

07:01

Speaker A

सकते हैं वहां उनका सरमाया महफूज़ कैसे रह सकता [संगीत] है। नतीजतन आईएमएफ की शरायत मजीद सख्त होती गई और हुकूमत के पास बजट पूरा करने का सिर्फ एक ही तरीका बचा। आम आवाम की जेबों पर डाका डालना। बिजली के

07:15

Speaker A

बिल इतने बढ़ा दिए गए कि गरीब और मिडिल क्लास का महीने का आधा [संगीत] बजट सिर्फ बिजली का बिल अदा करने में चला जाता है। गैस, पेट्रोल और बुनियादी खाने-पीने की अशिया पर इतने टैक्सेस ठोस दिए गए कि सफेद पोश तबके के

07:33

Speaker A

लिए दो वक्त की रोटी पूरा करना नामुमकिन हो गया। सनतें बंद होने लगी। कारखाने ठप हो गए और लाखों नौकरपेशा अफराद बेरोजगार हो गए। मुल्की तारीख में पहली बार ऐसा हुआ कि पढ़े लिखे नौजवान, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स और आईटी माहरीन लाखों की तादाद

07:52

Speaker A

में मुल्क छोड़कर बाहर भागने पर मजबूर हो गए। [संगीत] जहां मुल्क की मशत वेंटिलेटर पर थी, वहां अरबों रुपए के वसाइल, पीटीआई वर्कर्स को पकड़ने, सोशल मीडिया अकाउंट्स [संगीत] को ब्लॉक करने, इंटरनेट सर्विसेज को बंद करने और फायर वाल्स लगाने पर जाया

08:07

Speaker A

किए गए। इंटरनेट की बार-बार मुतली और सोशल मीडिया पर पाबंदियों की वजह से पाकिस्तान की अरबों डॉलर की आईटी इंडस्ट्री तबाही के दहाने पर [संगीत] पहुंच गई। मुआशी माहरीन ने बार-बार कहा कि जब तक मुल्क में सियासी इस्तेहकाम नहीं आएगा जब तक असल आवामी

08:23

Speaker A

नुमाइंदों [संगीत] को उनका हक नहीं मिलेगा तब तक कोई पैकेज या कोई गैर मुल्की दौरे मशत को नहीं बचा सकता। लेकिन ताकत के नशे में मस्त इख्तदार के ऐवानों ने उन तमाम इंतबाहात को नजरअंदाज कर दिया। जब फॉर्म

08:37

Speaker A

47 के जरिए हुकूमत कायम की गई तो ताकतवर हल्कों के सामने सबसे बड़ी रुकावट [संगीत] आजाद अदलिया थी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स में कुछ जज ऐसे मौजूद थे जो हुकूमत और एस्टैब्लिशमेंट के गैर आईनी इखदामात के आगे बंद [संगीत] बांधने की

08:52

Speaker A

कोशिश कर रहे थे। जब इस्लामाबाद हाईकोर्ट के छह जजों ने चीफ [संगीत] जस्टिस और सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल को एक धमाकेदार खत लिखा जिसमें उन्होंने खुल्लम खुल्ला इंकशाफ किया कि [संगीत] किस तरह खुफिया एजेंसियों के अहलकार जजों को डराते धमकाते

09:06

Speaker A

हैं। उनके घरों में कैमरे लगाते हैं और फैसलों पर असर अंदाज होने के लिए उनके रिश्तेदारों [संगीत] को अगवा करते हैं तो पूरे मुल्क के अदालती निजाम में जलजला आ गया। लेकिन जब अदलिया ने मखसूस निशिस्तों के केस में पीटीआई के हक में फैसला

09:20

Speaker A

[संगीत] दिया और यह खतरा पैदा हुआ कि हुकूमत की जाली अक्सरियत खत्म हो सकती है तो पावर हाउसेस में खतरे की घंटियां बज [संगीत] गई। उन्हें मालूम था कि अगर कानून अपने रास्ते पर चला तो यह हुकूमत एक दिन

09:32

Speaker A

भी नहीं टिक सकेगी। इसलिए उन्होंने अदिलिया पर आखिरी और सबसे मोहलिक वॉर करने का मंसूबा बनाया और फिर लाई गई आईनी तरमीम। रात [संगीत] के पिछले पहर मेंबराने असेंबली की खरीदो और फरोख्त की गई। कई पीटीआई अराकीन को इगवा किया गया और उनके

09:48

Speaker A

खानदानों पर दबाव डाला [संगीत] गया ताकि वह हुकूमत के हक में वोट दें। इस तमाम सियासी जोड़तोड़ और डरा धमका कर 26वीं आईनी तरमीम मंजूर करवाई गई। इस तरमीम का मकसद मुल्क में इंसाफ फराहम करना नहीं था बल्कि अदालतों के हाथ काटना था। चीफ

10:05

Speaker A

जस्टिस की तायनाती का तरीकाकार बदल दिया गया ताकि अपनी पसंद का चीफ जस्टिस लाया जा सके। आईनी बेंचेस के नाम पर एक ऐसा निजाम बनाया गया जिसके जरिए किसी भी आजाद मनिश जज को सियासी और हसास केसेस से अलग कर

10:21

Speaker A

दिया जाए। आज हाल यह है कि अगर किसी आम शहरी का कोई अजीज गायब हो जाए। अगर किसी को बगैर किसी जुर्म के रात के अंधेरे में उठा लिया जाए तो अदालत के पास इतनी [संगीत] ताकत भी नहीं बची कि वह उसे आजाद

10:34

Speaker A

करवा सके। आईन की बालादस्ती [संगीत] खत्म हो चुकी है। इमरान खान को जेल की सलाखों के पीछे बंद करके यह समझा गया था कि वक्त के साथ-साथ उनका नाम और बयानिया लोगों के ज़हनों से मिट जाएगा। लेकिन हकीकत उसके

10:49

Speaker A

बिल्कुल बरक्स हुई। [संगीत] जेल की दीवारों ने उनकी मकबूलियत को कम करने के बजाय उसे एक ऐसी सियासी और नजरियाती तहरीक में बदल दिया जिसकी मिसाल पाकिस्तान की 70 साला तारीख में नहीं मिलती। हर वह कदम जो पीटीआई को खत्म करने के लिए उठाया गया।

11:05

Speaker A

चाहे वह 9 मई का क्रैकडाउन हो, 8 फरवरी का फॉर्म 47 का इलेक्शन हो या 26वीं आईनी तरमीम के जरिए अदिलिया की आजादी पर वार उन तमाम फैसलों ने आवाम और रियासत के दरमियान मौजूद एतमाद [संगीत] के रिश्ते को

11:20

Speaker A

पारापारा कर दिया। आज पाकिस्तान जिस मोड़ पर खड़ा है वहां माशी इशारिए बदतरीन सतह पर हैं। मुल्क का पढ़ा लिखा तबका मायूसी के आलम में हिजरत कर रहा है और बैनुल अकवामी बिरादरी में मुल्क की साख एक आमराना निजाम की सी बन चुकी है। तारीख

11:37

Speaker A

गवाह है कि जब [संगीत] भी ताकतवरों ने आवाम के फैसले को जूतों तले रौंदने की कोशिश की है। आरजी फतह तो मिल जाती है लेकिन हत्मी शिकस्त हमेशा बेइंसाफी और तकब्ुर का मुकद्दर बनती [संगीत] है। पाकिस्तान के आवाम ने 8 फरवरी को बगैर

11:52

Speaker A

किसी कायद और बगैर किसी इंतखाबी निशान के खामोश इंकलाबी वोट डालकर अपना फैसला सुना दिया था। वो फैसला आज [संगीत] भी तारीख के औरा पर दर्ज है और कोई जादू निगरी का फॉर्म 47 उसे मिटा नहीं सकता। पाकिस्तान

12:08

Speaker A

के सामने दो ही रास्ते हैं या तो आइन और आवामी मैंडेट की तरफ वापसी या फिर एक ऐसा गहरा अंधेरा जिससे निकलने में शायद दिहाइयां लग जाए। फैसला अब वक्त के हाथों में

Topics: जनरल आसिम मुनीर इमरान खान पाकिस्तान लोकतंत्र फॉर्म 47 सियासी संघर्ष चुनावी धांधली पीटीआई शहबाज शरीफ आर्मी चीफ तायनाती पाकिस्तान राजनीति

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