**Gautam Adani : The Fastest Billionaire Rise — Transcript & Summary | SozAI**
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गौतम अडानी की संघर्ष और सफलता की कहानी, जो अहमदाबाद से मुंबई तक के उनके बिजनेस सफर को दर्शाती है।

## Key Takeaways

- भरोसा और सही टाइमिंग बिजनेस की सफलता की कुंजी हैं।
- परिवार का समर्थन और आत्मविश्वास सफलता के लिए जरूरी हैं।
- शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी महत्वपूर्ण है।
- मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का जज्बा जरूरी है।
- छोटे से शुरुआत कर बड़े बिजनेस तक पहुंचा जा सकता है।

## What the video covers

- गौतम अडानी का जन्म और बचपन अहमदाबाद की एक छोटी गली में हुआ।
- उनका परिवार मिडिल क्लास था और बिजनेस को वे धर्म की तरह मानते थे।
- गौतम ने बचपन से ही अपने पिता के व्यापार पर ध्यान दिया और जुबान को सबसे बड़ा नियम माना।
- स्कूल में उनका मन नहीं लगता था क्योंकि उनका ध्यान मार्केट और बिजनेस पर था।
- 16 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई जाकर अपने बिजनेस की शुरुआत की।
- मुंबई के जवेरी बाजार में उन्होंने डायमंड्स के बिजनेस में कदम रखा।
- उन्होंने भरोसे और टाइमिंग को बिजनेस की सबसे बड़ी वैल्यू माना।
- 19 साल की उम्र में गौतम ने बड़े क्लाइंट्स जैसे धीरूभाई अंबानी को डायमंड्स बेचना शुरू किया।
- 1991 में उन्होंने 10 लाख रुपए कमाए और अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया।
- उनकी मां ने उनका पूरा समर्थन किया जबकि परिवार के अन्य सदस्य विरोधी थे।

## Chapters

1. 00:00 गौतम अडानी की प्रारंभिक कहानी और बचपन
2. 01:29 परिवार और बचपन में बिजनेस की समझ
3. 03:03 गौतम का स्कूल और बिजनेस के प्रति लगाव
4. 06:08 मुंबई जाने का फैसला और परिवार की प्रतिक्रिया
5. 08:21 मुंबई में जवेरी बाजार और डायमंड्स बिजनेस
6. 11:35 पहले बड़े क्लाइंट्स और शुरुआती सफलता
7. 15:15 व्यापार में भरोसे और टाइमिंग का महत्व
8. 19:15 1991 में सफलता और आगे की योजनाएं

Answers

## Questions about this video

गौतम अडानी ने अपने बिजनेस की शुरुआत कैसे की?

गौतम ने अहमदाबाद में अपने पिता के छोटे व्यवसाय से सीख लेकर 16 साल की उम्र में मुंबई जाकर डायमंड्स के बिजनेस में कदम रखा।

गौतम अडानी के बिजनेस में सबसे महत्वपूर्ण क्या था?

उनके बिजनेस में भरोसा (जुबान) और सही टाइमिंग को सबसे महत्वपूर्ण माना गया, जो बिना कॉन्ट्रैक्ट के भी डील पूरी कर देता था।

गौतम अडानी के परिवार का उनके बिजनेस पर क्या प्रभाव था?

उनकी मां ने उनका पूरा समर्थन किया जबकि पिता और भाई ने शुरुआत में विरोध किया, लेकिन मां के भरोसे ने गौतम को आगे बढ़ने में मदद की।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:03

Speaker A

दुनिया को सिर्फ वो दिखता है जो सामने है। एक परखने वाले को वो दिखता है जो वहां कल होने वाला है। ऐसी ही कुछ कहानी है इस इंसान की जिसे 40 साल पहले कोई भी नहीं जानता था। कुछ लोग उसे विजनरी बोलते हैं तो कुछ कैपिटलिस्ट। लेकिन सच यह है यह कहानी पैसों से नहीं अहमदाबाद की एक छोटी सी गली में हुई थी।

00:20

Speaker A

बोलते हैं तो कुछ कैपिटलिस्ट। लेकिन सच यह है यह कहानी पैसों से नहीं अहमदाबाद की एक छोटी सी गली में हुई थी। [संगीत] [संगीत] आठ बच्चों के शोर में एक 13 साल का लड़का जो बिल्कुल शांत था गौतम शांतिलाल अडानी

01:01

Speaker A

आठ बच्चों के शोर में एक 13 साल का लड़का जो बिल्कुल शांत था, गौतम शांतिलाल अडानी।

01:11

Speaker A

मां, पहला मनसुख ने बोलो ना मेरी नोटबुक छुपा दी। इसने बापू शाम को दुकान से आते वक्त मेरे लिए भी नया नया पेंसिल लाओगे?

01:29

Speaker A

बाकी बच्चे मस्ती कर रहे थे। पढ़ रहे थे, लड़ रहे थे। सिर्फ गौतम की आंखें हमेशा अपने पिता के हाथों पर थीं। कहां कितना पैसा आया, कहां कितना गया। चुपचाप खाना खाओ सब। स्कूल का टाइम हो गया है। रोज सुबह थाली पर झगड़ा नथी करवानो।

01:51

Speaker A

ज्यादा है तो दुकान ने बड़ी करवी जोई है मां एक जगह बैठकर तो बाजार से जीत नहीं सकते [हंसी] बड़ा व्यापारी बाद में बन जाना गौतम पहले बड़ा इंसान जरूर बनना उस वक्त किसी को भी नहीं पता था कि ये

02:07

Speaker A

केम हजी सोया नथी। क्या देख रहा है बेटा? मां बापू रोज सुबह से रात तक इतनी मेहनत करे छे। एक-एक थान का हिस्सा गिनते हैं क्योंकि बाजार बहुत बड़ा है। गौतम और हमारी दुकान छोटी, जिम्मेदारियों का वजन थोड़ा ज्यादा है तो दुकान ने बड़ी करवी जोई है। मां, एक जगह बैठकर तो बाजार से जीत नहीं सकते। बड़ा व्यापारी बाद में बन जाना गौतम, पहले बड़ा इंसान जरूर बनना। उस वक्त किसी को भी नहीं पता था कि ये मिडिल क्लास लड़का का एक दिन इंडिया की सबसे बड़ा बिजनेस एंपायर खड़ा करेगा।

02:33

Speaker A

सकते। किशोर भाई हमारे बाजार में कागज नहीं चलता। कोई गिरवी नहीं होता। सिर्फ जुबान होती है और मेरी जुबान वचन है। बिना पैसा, बिना प्रोडक्ट, बिना कॉन्ट्रैक्ट [संगीत] सिर्फ एक हाथ मिलाया और डील कंप्लीट हो गई। बापू, आपने कुछ बेचा नहीं, कुछ दिखाया

03:03

Speaker A

गौतम के घर में बिजनेस सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं था। बिजनेस एक धर्म था और इस धर्म का पहला नियम था जुबान। शांतिलाल भाई, रेट ज्यादा है। इतना नहीं दे सकते। किशोर भाई, हमारे बाजार में कागज नहीं चलता। कोई गिरवी नहीं होता। सिर्फ जुबान होती है और मेरी जुबान वचन है। बिना पैसा, बिना प्रोडक्ट, बिना कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ एक हाथ मिलाया और डील कंप्लीट हो गई।

03:26

Speaker A

[संगीत] क्लास में गौतम का मन नहीं लगता था क्योंकि गौतम का ध्यान स्कूल के बाहर की दुनिया में था। गौतम ध्यान कहां है तुम्हारा?

03:54

Speaker A

बापू, आपने कुछ बेचा नहीं, कुछ दिखाया नहीं। फिर सौदा कैसे हुआ? बेटा, सौदा सिर्फ माल का नहीं होता, टाइमिंग का होता है और भरोसे का। यही गौतम ने पहला बिजनेस लेसन सीख लिया। वैल्यू किसी चीज में नहीं होती। वैल्यू टाइमिंग और ट्रस्ट में होती है।

04:25

Speaker A

दूसरे देश तक सफर करते हैं। चल ना क्या देख रहा है? ये शिप्स कितनी बड़ी हैं। ये कहां जाती हैं?

04:36

Speaker A

क्लास में गौतम का मन नहीं लगता था क्योंकि गौतम का ध्यान स्कूल के बाहर की दुनिया में था। गौतम ध्यान कहां है तुम्हारा? मार्केट में।

05:02

Speaker A

कुछ अलग ही कहना था। पहले पढ़ाई पूरी कर ले गौतम। कॉलेज की डिग्री जरूरी होती है। धंधे में उतनी स्टेबिलिटी नहीं होती। बापू, धंधा स्टेबिलिटी देखकर नहीं मौका देखकर होता है। अगर अभी नहीं निकला तो देर हो जाएगी। [संगीत]

05:20

Speaker A

और फिर आया वो दिन जब एक स्कूल ट्रिप गौतम को कांडला फोर्ट ले गया। पहली बार उसने देखा कितने बड़े-बड़े शिप्स होते हैं। कितना दूर तक समुंदर है और कैसे कंटेनर्स एक देश से दूसरे देश तक सफर करते हैं। चल ना, क्या देख रहा है? ये शिप्स कितनी बड़ी हैं। ये कहां जाती हैं?

05:44

Speaker A

पता नहीं यार। चल खेलते हैं। बाकी सारे बच्चे खेल रहे थे। सिर्फ गौतम ये सारी चीजें ऑब्जर्व कर रहा था।

06:08

Speaker A

खुद को प्रूफ करने का [संगीत] फैसला था। पिता ने मना किया था। भाई ने डरा दिया था। लेकिन मां मां कुछ अलग थी। मां को गौतम पे पूरा भरोसा था। सामान बांध ली तू। केला पैसा छे। काफी नहीं।

06:52

Speaker A

गौतम अब 16 साल का हो गया था और वो बाहर जाके काम करना चाहता था। पर घर वालों का कुछ अलग ही कहना था। पहले पढ़ाई पूरी कर ले गौतम। कॉलेज की डिग्री जरूरी होती है। धंधे में उतनी स्टेबिलिटी नहीं होती।

07:33

Speaker A

बापू, धंधा स्टेबिलिटी देखकर नहीं मौका देखकर होता है। अगर अभी नहीं निकला तो देर हो जाएगी। बाहर की दुनिया कितनी धूप छांव वाली है तू अभी नहीं समझेगा। बातें करना आसान होता है। मैं सिर्फ बातें करने नहीं जा रहा हूं बापू। मुझे भी कोशिश करनी है। दुकान पे तो तू बैठने से रहा। सच बता। करना क्या चाहता है?

07:45

Speaker A

मुंबई जाना है भाई। पागल हो गया है। अहमदाबाद से सीधा मुंबई। बाजार बहुत बड़ा है वहां का। नए लोगों को खा जाता है। खा तो तभी जाएगा ना जब मैं हार कर रुक जाऊंगा।

08:21

Speaker A

गौतम को रिजेक्ट कर दिया था। [संगीत] [संगीत] दूसरे कॉलेज में एडमिशन लिया लेकिन गौतम उससे भी पूरा नहीं कर पाया। सर मैं काम करता हूं सुबह से इसलिए क्लास टाइम पर नहीं आ पाता। बेटा एक साथ दो नाव में पैर नहीं रख सकते। या

09:06

Speaker A

यह सिर्फ घर छोड़ने का फैसला नहीं था। यह खुद को प्रूफ करने का फैसला था। पिता ने मना किया था। भाई ने डरा दिया था। लेकिन मां कुछ अलग थी। मां को गौतम पे पूरा भरोसा था। सामान बांध ली तू। केला पैसा छे। काफी नहीं। ये रख ले तुझे जरूरत पड़ेगी। और सुन वापस आना हो तो शर्माना मत। और यहीं से असली गौतम अडानी की जर्नी शुरू होने वाली थी।

09:37

Speaker A

का सबसे हिडन बिजनेस स्कूल। यहां ना कोई सिलेबस था ना कोई डिग्री। काम तेज करते हो और नजर भी अच्छी है। बस जल्दी के चक्कर में गलती मत कर देना। एक गलत स्टोन और पूरा लॉट रिजेक्ट। चिंता मत कीजिए। मैं गलत स्टोन भेजता नहीं

09:56

Speaker A

पहली बार गौतम अकेला था बिना किसी सेफ्टी नेट के। अहमदाबाद की लाइट्स पीछे जा रही थीं और एक 16 साल का लड़का अपनी पुरानी जिंदगी को खिड़की से बाहर जाते देख रहा था।

10:19

Speaker A

मुंबई जा रहे हो?

10:39

Speaker A

हां, अकेले डर नहीं लगता। जाना तो पड़ेगा।

11:08

Speaker A

हाई वी बाय फ्रॉम अदा डीलर्स। अदर डीलर्स डिलीवरी में तीन वीक्स लगाते हैं। मैं 10 दिन में दे दूंगा। सेम क्वालिटी गारंटीड यू आर वेरी यंग फॉर दिस बिनेस। यंग हूं इसलिए काम भी ज्यादा करूंगा और जल्दी डिलीवर करूंगा।

11:26

Speaker A

लेकिन गौतम के कानों में सिर्फ एक ही आवाज थी मां के आखिरी शब्द। पिताजी की बात मान के गौतम ने जय हिंद में एडमिशन के लिए अप्लाई किया और उस कॉलेज ने गौतम को रिजेक्ट कर दिया था।

11:39

Speaker A

19 साल की उम्र में इतने पैसे अब क्या करेगा? फिर से लगाऊंगा क्योंकि यह प्रूफ है कि मैं कुछ कर सकता हूं। अब असली काम शुरू होगा। मुंबई में पैसा बना लिया था लेकिन फैमिली की कॉल आई अहमदाबाद वापस आओ। बड़े भाई की

12:06

Speaker A

दूसरे कॉलेज में एडमिशन लिया लेकिन गौतम उससे भी पूरा नहीं कर पाया।

12:28

Speaker A

सर, मैं काम करता हूं सुबह से इसलिए क्लास टाइम पर नहीं आ पाता।

12:51

Speaker A

बेटा, एक साथ दो नाव में पैर नहीं रख सकते। या तो काम संभालो या फिर पढ़ाई, दोनों नहीं चलेगा।

13:15

Speaker A

लॉजिस्टिक्स मेरा रिस्क भी कम रहेगा। काम सबका हो जाएगा। तब इंडिया में लाइसेंस राज था। जहां हर चीज के लिए गवर्नमेंट की परमिशन चाहिए थी। तुम्हारी उम्र क्या है?

13:28

Speaker A

और उसी दिन गौतम ने एक और लेसन सीख लिया। अगर आगे जाना है तो अपना खुद का रास्ता बनाना पड़ेगा। पढ़ाई छूट गई। लेकिन मुंबई ने एक नई पढ़ाई शुरू कर दी। जवेरी बाजार। इंडिया का सबसे हिडन बिजनेस स्कूल। यहां ना कोई सिलेबस था ना कोई डिग्री। काम तेज करते हो और नजर भी अच्छी है। बस जल्दी के चक्कर में गलती मत कर देना। एक गलत स्टोन और पूरा लॉट रिजेक्ट।

13:35

Speaker A

चिंता मत कीजिए। मैं गलत स्टोन भेजता नहीं। फिर भी एक बार और देख लेता हूं। कचा पूरा दिन सिर्फ पत्थर ही देखते रहते हो। कब तक दूसरों के लिए काम करोगे? पहले मार्केट समझना पड़ेगा। यहां लाखों का माल सिर्फ हाथ मिलाकर बिक जाता है। कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं। कोई गारंटी नहीं। सिर्फ भरोसा। एक बार भरोसा टूट गया ना तो काम भी गया।

13:57

Speaker A

सबसे बड़े के लिए काम करो। रोज आ जाते हो तुम। कितनी बार मना करूं?

14:02

Speaker A

यहां हर स्टोन में वैल्यू छिपी है। बस उसे देखने की और परखने की नजर होनी चाहिए। यहां दिनभर गौतम डायमंड्स देखा करता था। लेकिन असली चीज जो वो ऑब्जर्व कर रहा था वो ट्रस्ट थी। करोड़ों का बिजनेस सिर्फ जुबान पर चलता था और अब गौतम को अपना असली प्लेग्राउंड मिल चुका था।

14:17

Speaker A

साउथ कोरिया से डायरेक्ट इंपोर्ट करता हूं। बीच का खर्चा बच जाता है और डिलीवरी गारंटीड 15 दिन में। धीरूभाई अंबानी उस वक्त इंडिया के बिजनेस किंग थे। इसलिए गौतम ने उन्हें अपना क्लाइंट बनाने का डिसाइड कर लिया था।

14:46

Speaker A

सिर्फ 19 साल की उम्र में गौतम खुद डायमंड ब्रोकर बन जाता है और बड़े-बड़े क्लाइंट्स को डायमंड्स भी सेल करता है।

15:10

Speaker A

प्राइस टू हाई वी बाय फ्रॉम अदा डीलर्स। अदर डीलर्स डिलीवरी में तीन वीक्स लगाते हैं। मैं 10 दिन में दे दूंगा। सेम क्वालिटी गारंटीड। यू आर वेरी यंग फॉर दिस बिनेस। यंग हूं इसलिए काम भी ज्यादा करूंगा और जल्दी डिलीवर करूंगा।

15:35

Speaker A

एक्सपोर्ट्स। सर [संगीत] एग्जैक्टली एक्सपोर्ट क्या करेंगे? जो दुनिया खरीदना चाहे। एक ऑफिस, एक फोन, दो एंप्लई और एक ऐसा बिजनेसमैन जो दुनिया का नक्शा अपनी दीवार पर लगाए बैठा था। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। असली गेम अभी बाकी था। 1991 में

16:03

Speaker A

एक साल में 10 लाख कमाया। लेकिन गौतम के लिए यह पैसा एक प्रूफ था कि घर से निकलने का डिसीजन गलत नहीं था। और जब एक आदमी खुद पर बिलीव करता है तो असली खेल उसके बाद शुरू होता है।

16:30

Speaker A

19 साल की उम्र में इतने पैसे, अब क्या करेगा?

16:55

Speaker A

फिर से लगाऊंगा क्योंकि यह प्रूफ है कि मैं कुछ कर सकता हूं। अब असली काम शुरू होगा।

17:23

Speaker A

11% विदाउट आवर कैपिटल [संगीत] दैट लैंड इन मंड्रा इज जस्ट 4ाउ एक ऑफ यूज़लेस मार्श यू विल बी रूट शायद आप सही कह रहे हैं फिर भी नहीं क्योंकि जो आपको बैरन वेस्टलैंड दिख रहा है मुझे वहां वहां कैनवस दिख रहा है। सो

17:50

Speaker A

मुंबई में पैसा बना लिया था लेकिन फैमिली की कॉल आई, अहमदाबाद वापस आओ। बड़े भाई की प्लास्टिक फैक्ट्री थी, इजी पैकेजिंग और पीवीसी नहीं मिल रहा था। फैक्ट्री को 20 टन पीवीसी चाहिए महीने का। आईपीसीएल सिर्फ दो टन एलोकेट करता है। इससे ज्यादा मिलेगा नहीं। आईपीसीएल से नहीं मिलेगा। तो बाहर से इंपोर्ट करेंगे।

18:22

Speaker A

इंपोर्ट इतना आसान होता तू सब कर लेते। तू लाइसेंस राज समझता भी है।

18:47

Speaker A

हां समझता हूं। इसलिए सिस्टम के अंदर से रास्ता ढूंढना पड़ेगा।

19:16

Speaker A

नए साल की रात अहमदाबाद की सड़कें चुप थी। गौतम अपने दोस्त [संगीत] के साथ घर लौट रहे थे और उन्हें बिल्कुल भी पता नहीं था कि अगले 24 घंटों में जिंदगी उनकी परीक्षा लेने वाली थी। चुपचाप गाड़ी बंद कर।

19:45

Speaker A

ये सब क्या है सर? गुजरात में 200 से ज्यादा स्मॉल प्लास्टिक मेकर्स हैं। सबको पीवीसी चाहिए। किसी को नहीं मिल रहा। यह सब उनकी डिमांड है। तो मैं जानता हूं अब अलग-अलग मांगेंगे तो किसी को नहीं मिलेगा। इसलिए मैंने सबका डिमांड एक साथ जमा कर दिया। फिर आप जीएससीसी के नाम से इंपोर्ट करो। लाइसेंस आपका, लॉजिस्टिक्स मेरा, रिस्क भी कम रहेगा। काम सबका हो जाएगा।

20:00

Speaker A

तो सीधा बताओ क्या चाहिए? 15 करोड़। डॉलर में कल सुबह तक ठीक है पर पैसा हवा में नहीं आता फैमिली से बात करनी पड़ेगी अगर पैसा चाहिए तो फोन करवाऊं कोई और यहां डर जाता लेकिन गौतम ने वही

20:18

Speaker A

तब इंडिया में लाइसेंस राज था। जहां हर चीज के लिए गवर्नमेंट की परमिशन चाहिए थी।

20:42

Speaker A

तुम्हारी उम्र क्या है?

20:49

Speaker A

काम के लिए काफी है सर। और वैसे भी उम्र से क्या फर्क पड़ता है सर?

21:14

Speaker A

बॉस ने क्या बोला? काम खत्म। फिर किडनैपर्स को फिरौती की रकम मिलने के बाद वे गौतम, अडानी और उनके दोस्त को छोड़ देते हैं। तुझे डर नहीं लगा? लगा था पर सुबह तक जिंदा रहना ज्यादा जरूरी था। गौतम अडानी बिल्कुल ठीक थे। लेकिन उनकी

21:45

Speaker A

और यहीं से गौतम ने इंडिया की एक बात समझ ली। सिस्टम को लड़ने की जरूरत नहीं। सिस्टम को यूज करने की जरूरत है।

22:03

Speaker A

इसीलिए तो रुक नहीं सकता। इतना आगे बढ़ना है कि फिर कोई रोक ना सके। लेकिन गौतम ने इस पूरी सिचुएशन को बिल्कुल नॉर्मली ट्रीट किया और वो तुरंत ऑफिस के लिए निकल गए। 2002 में इंडिया के टॉप इंडस्ट्रियलिस्ट

22:24

Speaker A

प्लास्टिक के बिजनेस ने गौतम को एक और सबक दिया। अगर तुम्हें सबसे बड़ा बनना है तो सबसे बड़े के लिए काम करो।

22:41

Speaker A

रोज आ जाते हो तुम। कितनी बार मना करूं?

23:04

Speaker A

बोला ना, हमारा रेगुलर सप्लायर है। एक बार मेरा रेट भी देख लीजिए। तुम मानोगे नहीं ना। आर्डर मिलने तक मुश्किल है। इतना सस्ता कैसे?

23:30

Speaker A

साउथ कोरिया से डायरेक्ट इंपोर्ट करता हूं। बीच का खर्चा बच जाता है और डिलीवरी गारंटीड 15 दिन में।

23:50

Speaker A

किया जाता है तो मैसेज पूरे गुजरात को जाता है। तो क्या करें? सीआईआई को लगता है वह गुजरात के बिजनेसमैन [संगीत] की आवाज है। अब उन्हें पता चलना चाहिए कि गुजरात अपनी आवाज खुद है और मोदी जी गुजरात का फ्यूचर।

24:06

Speaker A

धीरूभाई अंबानी उस वक्त इंडिया के बिजनेस किंग थे। इसलिए गौतम ने उन्हें अपना क्लाइंट बनाने का डिसाइड कर लिया था।

24:26

Speaker A

फिर मिले दो लोग। एक लड़का जिसकी पूरी दुनिया काम थी और एक लड़की जिसकी पूरी दुनिया स्टेबिलिटी थी। नाम था प्रीति वोरा, एक यंग डेंटिस्ट।

24:44

Speaker A

सुना है आप बहुत बिजी रहते हैं।

25:05

Speaker A

एक्चुअली बहुत ज्यादा। तो फिर घरवाले भी अपॉइंटमेंट लेकर मिलेंगे।

25:40

Speaker A

अरे नहीं नहीं, उनके लिए तो टाइम निकालना ही पड़ेगा वरना डांट पड़ती रहेगी।

26:35

Speaker A

अडानी 100 लोगों के बीच बेसमेंट में बैठे थे। वो ऊपर हैं। हम बच नहीं पाएंगे। आवाज मत करो। हम सब बाहर निकलेंगे। बस अपने आप को कंट्रोल में रखो। सांस लो। गौतम हाउ आर यू दिस गम?

27:08

Speaker A

दोनों भी बिल्कुल अलग थे। शायद इसीलिए यह रिश्ता टिका। लेकिन असली तूफान अभी बाकी था। और फिर 1988 में एक नाम पैदा हुआ, अडानी एक्सपोर्ट्स।

27:39

Speaker A

सर, एग्जैक्टली एक्सपोर्ट क्या करेंगे?

27:57

Speaker A

जो दुनिया खरीदना चाहे। एक ऑफिस, एक फोन, दो एंप्लई और एक ऐसा बिजनेसमैन जो दुनिया का नक्शा अपनी दीवार पर लगाए बैठा था। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। असली गेम अभी बाकी था।

Topics: गौतम अडानी बिजनेस सफर अहमदाबाद मुंबई डायमंड्स विश्वास टाइमिंग परिवार समर्थन व्यापार सफलता कहानी

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