**CUET 2025 | MICRO ECONOMICS CH- 1 | INTRODUCTION TO MICRO ECONOMICS | ONE SHOT | EASIEST EXPLANATION — Transcript & Summary | SozAI**
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CUET 2025 के लिए माइक्रोइकोनॉमिक्स का परिचय, स्केरसिटी, प्रॉब्लम ऑफ चॉइस और इकोनॉमिक एक्टिविटीज को सरल हिंदी में समझाया।

## Key Takeaways

- CUET 2025 में माइक्रोइकोनॉमिक्स का पूरा सिलेबस आता है, इंडियन इकोनॉमिक डेवलपमेंट नहीं।
- इकोनॉमिक्स की मुख्य समस्या स्केरसिटी और प्रॉब्लम ऑफ चॉइस है।
- माइक्रोइकोनॉमिक्स में इंडिविजुअल इकाइयों का अध्ययन होता है।
- पॉजिटिव और नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स के बीच अंतर समझना जरूरी है।
- नियमित प्रैक्टिस और क्वेश्चन बैंक से परीक्षा में सफलता संभव है।

## What the video covers

- CUET 2025 के इकोनॉमिक्स सिलेबस में माइक्रोइकोनॉमिक्स शामिल है, इंडियन इकोनॉमिक डेवलपमेंट नहीं।
- इकोनॉमिक्स की तीन मुख्य एक्टिविटीज हैं: प्रोडक्शन, कंजम्पशन और इनकम।
- इकोनॉमिक्स का मुख्य फोकस है लिमिटेड रिसोर्सेज से अनलिमिटेड वांट्स को पूरा करना।
- स्केरसिटी (संसाधनों की कमी) और प्रॉब्लम ऑफ चॉइस इकोनॉमिक्स की मूल समस्याएं हैं।
- इकोनॉमिक्स एक सोशल साइंस है जो गुड्स और सर्विसेज के प्रोडक्शन, कंजम्पशन और डिस्ट्रीब्यूशन का अध्ययन करता है।
- इंडिविजुअल का मतलब कोई भी डिसीजन मेकिंग यूनिट हो सकती है जैसे व्यक्ति, कंपनी या फर्म।
- रिसोर्सेज में लैंड, लेबर, कैपिटल और मशीनरी शामिल हैं जो अन्य वस्तुएं बनाने में उपयोग होते हैं।
- इकोनॉमिक्स के दो प्रकार होते हैं: पॉजिटिव इकोनॉमिक्स (जो है) और नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स (जो होना चाहिए)।
- वीडियो में CUET के लिए विशेष तैयारी, प्रैक्टिस और क्वेश्चन बैंक के उपयोग पर जोर दिया गया है।
- टीचर ने छात्रों को पांच दिन में माइक्रोइकोनॉमिक्स पूरी तरह से कवर करने का आश्वासन दिया है।

Answers

## Questions about this video

CUET 2025 में माइक्रोइकोनॉमिक्स का सिलेबस क्या है?

CUET 2025 में माइक्रोइकोनॉमिक्स का पूरा सिलेबस शामिल है जबकि इंडियन इकोनॉमिक डेवलपमेंट नहीं आता। इसमें प्रोडक्शन, कंजम्पशन, स्केरसिटी, प्रॉब्लम ऑफ चॉइस जैसे टॉपिक्स आते हैं।

स्केरसिटी का अर्थ और उसकी इकोनॉमिक्स में भूमिका क्या है?

स्केरसिटी का मतलब है संसाधनों की कमी या लिमिटेड होना जबकि मानव की वांछाएं अनलिमिटेड होती हैं। यही इकोनॉमिक्स की मुख्य समस्या है जिससे प्रॉब्लम ऑफ चॉइस उत्पन्न होती है।

माइक्रोइकोनॉमिक्स में 'इंडिविजुअल' का क्या मतलब है?

इंडिविजुअल का मतलब है कोई भी डिसीजन मेकिंग यूनिट जैसे व्यक्ति, कंपनी, फर्म या ऑर्गेनाइजेशन जिस पर माइक्रोइकोनॉमिक्स में अध्ययन किया जाता है।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

हेलो स्टूडेंट्स, कैसे हैं आप सब लोग? तो वेलकम है आपका माइक्रोइकोनॉमिक्स की सीरीज में। जिन बच्चों को नहीं पता है सीयूईटी 2025 में जो इकोनॉमिक्स का सिलेबस है उसके अंदर माइक्रोइकोनॉमिक्स पूरी की पूरी आ रही है। इंडियन इकोनॉमिक डेवलपमेंट नहीं आ रही है। माइक्रो और मैक आ रहा है। और मेजॉरिटी बच्चों ने सीबीएसई में क्लास 11th के अंदर माइक्रो पढ़ा था। वो 11th में अच्छे से पढ़ते नहीं क्योंकि 11th को सोचते हैं कि यार 11th में कौन अच्छे से पढ़ेगा? 12th में बोर्ड्स है उसको अच्छे से पढ़ लेंगे और ये पता किसी को नहीं कि भैया ये सीबीटी में आ जाएगा। पहले इंडियन इको आती थी लेकिन अब ये पूरा पैटर्न चेंज हो चुका है। तो बच्चों के मन में काफी डर है। काफी टेंशन है कैसे होगा। लेकिन मैं इस बात की गारंटी लेता हूं। तुम अगर सिर्फ पांच दिन 1 मई 2 मई 3 मई 4 मई 5 मई पांच दिन अगर अच्छे से माइक्रोइकोनॉमिक्स में डेली दो-दो वीडियो डालूंगा। अगर आप उसको देख लोगे पूरा का पूरा रिवाइज कर लोगे और फिर मैं इसके क्वेश्चंस डालूंगा। चैप्टर वाइज़ेंट एमसीक्यूज़ पीवाईक्यू भी कवर होंगे उसके अंदर औरेंट क्वेश्चंस भी कवर होंगे। और इसको अगर आप कर लोगे ना तो माइक्रो में अगर पेपर में 20 या 25 क्वेश्चन आते हैं तो मैं इस बात को डंके की चोट पे कह सकता हूं कि तुम्हारे 25 के 25 क्वेश्चन सही होंगे। ऑलरेडी आपने ये पढ़ा नहीं है क्लास 12th के अंदर थोड़ा टफ लगेगा। लगेगा थोड़ा मुश्किल है। लेकिन हिम्मत मत हारना। एंड तक देखना। मैं जितना भी कराऊंगा ना क्वेश्चन उसी से आएगा। पेपर उसी से बनेगा। तो जितने भी बच्चे सीईटी 2025 दे रहे हैं उनको माइक्रोइकोनॉमिक्स की कोई चिंता नहीं करनी है। उन तक ये वीडियो पहुंचा देना। मैं इसकी प्लेलिस्ट भी बना दूंगा और इसी चैनल पे आप लोगों के लिए कंप्लीट वीडियो डाल दूंगा। ए टू जेड आज इसका पहला पार्ट है और इंट्रोडक्शन चैप्टर जो है ना माइक्रो ना हम सबकी डेली लाइफ से रिलेटेड है। ये इंट्रोडक्शन चैप्टर थोड़ा सा डिफरेंट है। इसके अलावा पूरा का पूरा जो माइक्रो है ना वो इससे रिलेटेड है। हमारे डेली लाइफ से तो ईजी है। मजा आएगा समझ आएगा। इसके अलावा आप लोगों को मैंने कहा था जितने भी प्रीवियस ईयर क्वेश्चंस हैं एजुcट की ये वाली जो बुक है जिसके अंदर अकाउंट्स इको और बिजनेस स्टडीज तीनों के पांचप पास्ट ईयर पेपर दे रखे हैं। तीनों के आप लोगों को अनसॉल्व पेपर दे रखे हैं। एस पर लेटेस्ट सिलेबस आप इनको भी जरूर बनाना। डेफिनेटली आपको फायदा मिलेगा। यह मेरा लास्ट लास्ट क्लास आप लोगों को जगाना है कि अगर अब आपने प्रैक्टिस नहीं करी अब आपने कोशिश नहीं करी ना तो एंड तक भी अब आप कुछ नहीं कर पाओगे। तो आज 1 मई है। आज से जागना शुरू कर दो। मेहनत करना शुरू कर दो। प्रीवियस ईयर क्वेश्चन की बुक का लिंक मैं डिस्क्रिप्शन बॉक्स में डाल दूंगा। उसमें प्रीवियस ईयर क्वेश्चन प्रैक्टिस पेपर है। तीनों सब्जेक्ट के डोमेनस अपने अच्छे कर लो। 750 डोमेनस में आप फिक्स कर लो। उसके बाद जो है इंग्लिश भूपेंद्र सर करा रहे हैं। वो अच्छे से क्लास आपका हो जाएगा। उसका लिंक भी डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दे दूंगा। एटलीस्ट उसके मार्क्स जरूर जरूर जरूर बना लेना। तो कहीं कोई दिक्कत, परेशानी, कोई प्रॉब्लम आपको नहीं आएगी। ठीक है? तो आई होप आप लोग क्लास इसको अच्छे से समझोगे और मुझे वीडियो के कमेंट्स में बताना भी कि कैसा लगा आपको। ठीक है? तो स्टार्ट करते हैं। पहला लेक्चर था तो आप लोगों को थोड़ा ज्ञान दे दिया लेकिन आगे से क्लास में कंटिन्यू वीडियो को स्टार्ट कर दिया करूंगा। तो सबसे पहला जो चैप्टर है वो है इंट्रोडक्शन। देखो इंट्रोडक्शन की अगर बात करें तो सबसे पहले इकोनमी है क्या? हमारी और मैं पूरा का पूरा सीयूईटी के अकॉर्डिंग करवा रहा हूं जो सीयूईटी में पूछा जा सकता है एस पर एनसीईआरटी तो तुम्हें कुछ भी और एनसीईआरटी वगैरह कुछ ना उठाओ तो भी चल जाएगा इसके अंदर तो इकोनमी एक सिस्टम है जो प्रोवाइड करता है क्लास पीपल रिसोर्सेज टू वर्क सो एस टू पीपल कैन अर्न फॉर लिविंग। देखो तीन इकोनॉमिक एक्टिविटीज होती हैं और हमारी इस इकॉनमी के अंदर ये तीनों एक्टिविटी की जाती हैं। सबसे पहला प्रोडक्शन किया जाता है। प्रोडक्शन होगा तो कंजशन होगा। कंजशन अगर लोग करेंगे तो किसी की इनकम बनेगी। वो सेव करेंगे और फिर वो इन्वेस्ट करेंगे। इन्वेस्टमेंट को हम लोग क्या बोलते हैं? कैपिटल फॉरेशन और वो फ्लो कांसेप्ट होता है माइक्रोइकोनॉमिक्स में। आप ध्यान रखना। ठीक है? तो ये तीन चीज है जो इकोनमी में ये तीन इकोनॉमिक एक्टिविटीज होती हैं। हमारी इकॉनमी में ना एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम क्या है? ह्यूमन वांट्स आर अनलिमिटेड। हमें अनलिमिटेड लैंड, अनलिमिटेड क्लास पैसा, अनलिमिटेड रिसोर्सेज की जरूरत है। बट रिसोर्सेज के दो डीमैरिट है। रिसोर्सेज संसाधन जो है वो लिमिटेड है। एक तो और उसके अल्टरनेटिव यूजेज हैं। सर लिमिटेड है। समझ आ गया कि भैया हमें चाहिए ₹100 करोड़। पैसे हमारे पास कम है। हमें चाहिए बहुत सारी जमीन, जमीन हमारे पास कम है। हम मार्केट जाते हैं शॉपिंग करने के लिए। हमारे पास पैसे कम पड़ जाते हैं। तो ह्यूमन वांट्स जो है ना वो अनलिमिटेड है। लेकिन रिसोर्सेज लिमिटेड है। और रिसोर्सेज के अल्टरनेटिव यूजज़ हैं। मतलब मेरे पास मान लो 100 स्क्वायर फीट का एक लैंड है। मैं उस पे क्या कर सकता हूं? खेतीबाड़ी कर सकता हूं। प्लेग्राउंड बनवा सकता हूं। स्विमिंग पूल बनवा सकता हूं उसके अंदर और उसमें क्लास मैं कोई चैरिटेबल ट्रस्ट चला सकता हूं। कोई फैक्ट्री खड़ी कर सकता हूं। कोई भी काम हम उसके अंदर कर सकते हैं। तो अल्टरनेटिव यूजज़ हैं। तो सवाल यही है कि कौन सा यूज करें ताकि हमें फायदा सबसे ज्यादा मिले। सो देयर इज बिग प्रॉब्लम इन द इकॉनमी। ह्यूमन वांट्स आर अनलिमिटेड बट रिसोर्सेज टू सेटिस्फाई दोज़ वांट्स आर लिमिटेड एंड रिसोर्सेज हैव अल्टरनेटिव यूज। जो रिसोर्सेज हैं उसके अल्टरनेटिव यूजज़ हैं। और ये जो है दो लिमिटेशंस हैं किसके? रिसोर्सेज के। हमारे हम पता है इकोनॉमिक्स क्यों पढ़ते हैं? इकोनॉमिक्स हम पढ़ते ही इसलिए हैं कि जो लिमिटेड रिसोर्सेज है उस लिमिटेड रिसोर्स से अनलिमिटेड वांट्स को कैसे पूरा किया जाए। इकोनॉमिक्स जो आया ना क्लास ये आया ही क्लास इसीलिए क्योंकि लिमिटेड रिसोर्सेज हैं भैया और डिमांड जो है वो अनलिमिटेड है। ठीक है? तो अब इस अनलिमिटेड डिमांड को कैसे पूरा करेंगे लिमिटेड रिसोर्सेज से? इस चीज की स्टडी ही क्या कहलाता है? इकोनॉमिक्स कहलाता है। तो इकोनॉमिक्स में जब डिमांड अनलिमिटेड है, रिसोर्सेज लिमिटेड है तो क्या जनरेट होगा? प्रॉब्लम ऑफ़ चॉइस या स्केरसिटी जिसको बोलते हैं। स्केरसिटी मतलब रिसोर्सेज़ स्केयर है। मतलब कि लिमिटेड है। स्केरसिटी इज़ द मेन प्रॉब्लम इन द इकॉनमी। दिस इज़ द रीज़न व्हाई वी स्टडी इकोनॉमिक्स। और जब ये स्केरसिटी होती है तो प्रॉब्लम ऑफ़ चॉइस जनरेट होता है कि यार अच्छा ये खरीद लूं या यही खरीद लूं। आप लोग कपड़े खरीदने जाते हो यार ये वाली शर्ट खरीद लूं। तो यार ये वाली दोनों नहीं खरीद सकता। दोनों महंगे मैं कोई एक खरीद सकता हूं। है ना? मैं इस चीज पे खर्चा ज्यादा करूंगा तो इस चीज पे खर्चा कम होगा। सिंपल। इसी को क्या कहते हैं? प्रॉब्लम ऑफ चॉइस। अब इकोनॉमिक्स क्या है? इकोनॉमिक्स एक सोशल साइंस है दैट स्टडीज द प्रोडक्शन कंजमशन ऑफ गुड्स एंड सर्विसेस एंड इट्स डिस्ट्रीब्यूशन अमंग द डिफरेंट पीपल। प्रोडक्शन होगा। प्रोडक्शन होगा तो लोग कंजशन करेंगे। प्रोडक्शन जब होगा तो प्रोडक्शन में जो लोग पार्टिसिपेट करते हैं हम उनको पैसे देंगे और कंजशन से फिर उनकी इनकम होगी। फिर वो आगे खर्च करेंगे। इसी पूरे प्रोसेस को ही हम क्या कहते हैं? इकोनॉमिक्स कहते हैं। बेटा जो मैं अंडरलाइनिंग कर रहा हूं ना ध्यान से समझ के चलना। एनसीईआरटी कवर है। सब कुछ इसके अंदर कवर है। आपको ये वीडियो देखनी है। ये नोट्स मैं Telegram पे और एसपीसीसी ऐप पे एसपीसीसी ऐप पे अरेंज फॉर्मेट में दे दूंगा आपको। वो आप जरूर ले लेना वहां से और इसको अच्छे से प्रैक्टिस कर लेना। हो सके अपनी कॉपी में नोट्स बना लेना। यकीन मानना यही एज है। जो चीज नई है वो चीज एज ले जाएगी और पहली बार पेपर में आएगा पूरा का पूरा सिलेबस। पहले दो यूनिट था। अब सारे यूनिट आएंगे तो पेपर आसान होगा। अगर आप थोड़ा सा पढ़ के चले जाओगे ना तो वो बच्चे जो क्विट करके जाएंगे उनसे बहुत आगे निकल जाओगे। ठीक है? अच्छा इंडिविजुअल का मतलब क्या होता है? तो इंडिविजुअल मींस कोई भी ऐसा इंसान, कंपनी, फैक्ट्री, फर्म जो डिसीजन मेकिंग यूनिट है। अ डिसीजन मेकिंग यूनिट कैन बी अ सिंगल पर्सन हो सकता है, ग्रुप ऑफ पर्सन हो सकता है, कोई फर्म हो सकता है, कोई भी ऑर्गेनाइजेशन, कोई कंपनी, कोई फैक्टर उसको क्या बोलते हैं? इंडिविजुअल। और माइक्रो में ना हम किसी इंडिविजुअल के बारे में स्टडी करते हैं। मेरे बारे में, मेरी फैक्ट्री के बारे में, किसी एक कंपनी के बारे में माइक्रो के अंदर स्टडी की जाती है। रिसोर्स किसे कहते हैं? इट मींस दोज़ गुड्स एंड सर्विसेस व्हिच आर यूज्ड टू प्रोड्यूस अदर गुड्स एंड सर्विज लैंड, लेबर, कैपिटल, मशीनरी। दीज़ आर ऑल कॉल्ड रिसोर्सेज। संसाधन जिनसे हम किसी दूसरी चीज को बनाते हैं। राइट? अच्छा अब इकोनॉमिक्स में दो इकोनॉमिक्स हैं। पॉजिटिव साइंस या पॉजिटिव इकोनॉमिक्स, नॉर्मेटिव साइंस या नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स। आज लिख के ले लो। एक सवाल आपको सीईटी में जरूर पूछा जाएगा इससे। एंड वेरी सिंपल। पॉजिटिव इकोनॉमिक्स डील विद व्हाट इज? पॉजिटिव इकोनॉमिक्स बताता है कि हमारी एक्च

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Speaker A

रही है। माइक्रो और मैक आ रहा है। और मेजॉरिटी बच्चों ने सीबीएसई में क्लास 11th के अंदर माइक्रो पढ़ा था। वो 11th में अच्छे से पढ़ते नहीं क्योंकि 11th को सोचते हैं कि यार 11th में कौन अच्छे से

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Speaker A

पढ़ेगा? 12th में बोर्ड्स है उसको अच्छे से पढ़ लेंगे और ये पता किसी को नहीं कि भैया ये सीबीटी में आ जाएगा। पहले इंडियन इको आती थी लेकिन अब ये पूरा पैटर्न चेंज हो चुका है। तो बच्चों के मन में काफी डर

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Speaker A

है। काफी टेंशन है कैसे होगा। लेकिन मैं इस बात की गारंटी लेता हूं। तुम अगर सिर्फ पांच दिन 1 मई 2 मई 3 मई 4 मई 5 मई पांच दिन अगर अच्छे से माइक्रोइकोनॉमिक्स में डेली दो-दो वीडियो डालूंगा। अगर आप उसको

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Speaker A

देख लोगे पूरा का पूरा रिवाइज कर लोगे और फिर मैं इसके क्वेश्चंस डालूंगा। चैप्टर वाइज़ेंट एमसीक्यूज़ पीवाईक्यू भी कवर होंगे उसके अंदर औरेंट क्वेश्चंस भी कवर होंगे। और इसको अगर आप कर लोगे ना तो माइक्रो में अगर पेपर में 20 या 25 क्वेश्चन आते हैं

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Speaker A

तो मैं इस बात को डंके की चोट पे कह सकता हूं कि तुम्हारे 25 के 25 क्वेश्चन सही होंगे। ऑलरेडी आपने ये पढ़ा नहीं है क्लास 12th के अंदर थोड़ा टफ लगेगा। लगेगा थोड़ा मुश्किल है। लेकिन हिम्मत मत हारना। एंड

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Speaker A

तक देखना। मैं जितना भी कराऊंगा ना क्वेश्चन उसी से आएगा। पेपर उसी से बनेगा। तो जितने भी बच्चे सीईटी 2025 दे रहे हैं उनको माइक्रोइकोनॉमिक्स की कोई चिंता नहीं करनी है। उन तक ये वीडियो पहुंचा देना। मैं इसकी प्लेलिस्ट भी बना दूंगा और इसी

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Speaker A

चैनल पे आप लोगों के लिए कंप्लीट वीडियो डाल दूंगा। ए टू जेड आज इसका पहला पार्ट है और इंट्रोडक्शन चैप्टर जो है ना माइक्रो ना हम सबकी डेली लाइफ से रिलेटेड है। ये इंट्रोडक्शन चैप्टर थोड़ा सा डिफरेंट है। इसके अलावा पूरा का पूरा जो

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Speaker A

माइक्रो है ना वो इससे रिलेटेड है। हमारे डेली लाइफ से तो ईजी है। मजा आएगा समझ आएगा। इसके अलावा आप लोगों को मैंने कहा था जितने भी प्रीवियस ईयर क्वेश्चंस हैं एजुcट की ये वाली जो बुक है जिसके अंदर

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Speaker A

अकाउंट्स इको और बिजनेस स्टडीज तीनों के पांचप पास्ट ईयर पेपर दे रखे हैं। तीनों के आप लोगों को अनसॉल्व पेपर दे रखे हैं। एस पर लेटेस्ट सिलेबस आप इनको भी जरूर बनाना। डेफिनेटली आपको फायदा मिलेगा। यह मेरा लास्ट लास्ट क्लास आप लोगों को जगाना

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Speaker A

है कि अगर अब आपने प्रैक्टिस नहीं करी अब आपने कोशिश नहीं करी ना तो एंड तक भी अब आप कुछ नहीं कर पाओगे। तो आज 1 मई है। आज से जागना शुरू कर दो। मेहनत करना शुरू कर दो। प्रीवियस ईयर क्वेश्चन की बुक का लिंक

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Speaker A

मैं डिस्क्रिप्शन बॉक्स में डाल दूंगा। उसमें प्रीवियस ईयर क्वेश्चन प्रैक्टिस पेपर है। तीनों सब्जेक्ट के डोमेनस अपने अच्छे कर लो। 750 डोमेनस में आप फिक्स कर लो। उसके बाद जो है इंग्लिश भूपेंद्र सर करा रहे हैं। वो अच्छे से क्लास आपका हो

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Speaker A

जाएगा। उसका लिंक भी डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दे दूंगा। एटलीस्ट उसके मार्क्स जरूर जरूर जरूर बना लेना। तो कहीं कोई दिक्कत, परेशानी, कोई प्रॉब्लम आपको नहीं आएगी। ठीक है? तो आई होप आप लोग क्लास इसको अच्छे से समझोगे और मुझे वीडियो के

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Speaker A

कमेंट्स में बताना भी कि कैसा लगा आपको। ठीक है? तो स्टार्ट करते हैं। पहला लेक्चर था तो आप लोगों को थोड़ा ज्ञान दे दिया लेकिन आगे से क्लास में कंटिन्यू वीडियो को स्टार्ट कर दिया करूंगा। तो सबसे पहला

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Speaker A

जो चैप्टर है वो है इंट्रोडक्शन। देखो इंट्रोडक्शन की अगर बात करें तो सबसे पहले इकोनमी है क्या? हमारी और मैं पूरा का पूरा सीयूईटी के अकॉर्डिंग करवा रहा हूं जो सीयूईटी में पूछा जा सकता है एस पर एनसीईआरटी तो तुम्हें कुछ भी और एनसीईआरटी

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Speaker A

वगैरह कुछ ना उठाओ तो भी चल जाएगा इसके अंदर तो इकोनमी एक सिस्टम है जो प्रोवाइड करता है क्लास पीपल रिसोर्सेज टू वर्क सो एस टू पीपल कैन अर्न फॉर लिविंग। देखो तीन इकोनॉमिक एक्टिविटीज होती हैं और हमारी इस

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Speaker A

इकॉनमी के अंदर ये तीनों एक्टिविटी की जाती हैं। सबसे पहला प्रोडक्शन किया जाता है। प्रोडक्शन होगा तो कंजशन होगा। कंजशन अगर लोग करेंगे तो किसी की इनकम बनेगी। वो सेव करेंगे और फिर वो इन्वेस्ट करेंगे। इन्वेस्टमेंट को हम लोग क्या बोलते हैं?

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Speaker A

कैपिटल फॉरेशन और वो फ्लो कांसेप्ट होता है माइक्रोइकोनॉमिक्स में। आप ध्यान रखना। ठीक है? तो ये तीन चीज है जो इकोनमी में ये तीन इकोनॉमिक एक्टिविटीज होती हैं। हमारी इकॉनमी में ना एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम क्या है? ह्यूमन

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Speaker A

वांट्स आर अनलिमिटेड। हमें अनलिमिटेड लैंड, अनलिमिटेड क्लास पैसा, अनलिमिटेड रिसोर्सेज की जरूरत है। बट रिसोर्सेज के दो डीमैरिट है। रिसोर्सेज संसाधन जो है वो लिमिटेड है। एक तो और उसके अल्टरनेटिव यूजेज हैं। सर लिमिटेड है। समझ आ गया कि

04:13

Speaker A

भैया हमें चाहिए ₹100 करोड़। पैसे हमारे पास कम है। हमें चाहिए बहुत सारी जमीन, जमीन हमारे पास कम है। हम मार्केट जाते हैं शॉपिंग करने के लिए। हमारे पास पैसे कम पड़ जाते हैं। तो ह्यूमन वांट्स जो है

04:23

Speaker A

ना वो अनलिमिटेड है। लेकिन रिसोर्सेज लिमिटेड है। और रिसोर्सेज के अल्टरनेटिव यूजज़ हैं। मतलब मेरे पास मान लो 100 स्क्वायर फीट का एक लैंड है। मैं उस पे क्या कर सकता हूं? खेतीबाड़ी कर सकता हूं। प्लेग्राउंड बनवा सकता हूं। स्विमिंग पूल

04:35

Speaker A

बनवा सकता हूं उसके अंदर और उसमें क्लास मैं कोई चैरिटेबल ट्रस्ट चला सकता हूं। कोई फैक्ट्री खड़ी कर सकता हूं। कोई भी काम हम उसके अंदर कर सकते हैं। तो अल्टरनेटिव यूजज़ हैं। तो सवाल यही है कि कौन सा यूज करें ताकि हमें फायदा सबसे

04:49

Speaker A

ज्यादा मिले। सो देयर इज बिग प्रॉब्लम इन द इकॉनमी। ह्यूमन वांट्स आर अनलिमिटेड बट रिसोर्सेज टू सेटिस्फाई दोज़ वांट्स आर लिमिटेड एंड रिसोर्सेज हैव अल्टरनेटिव यूज। जो रिसोर्सेज हैं उसके अल्टरनेटिव यूजज़ हैं। और ये जो है दो लिमिटेशंस हैं किसके?

05:04

Speaker A

रिसोर्सेज के। हमारे हम पता है इकोनॉमिक्स क्यों पढ़ते हैं? इकोनॉमिक्स हम पढ़ते ही इसलिए हैं कि जो लिमिटेड रिसोर्सेज है उस लिमिटेड रिसोर्स से अनलिमिटेड वांट्स को कैसे पूरा किया जाए। इकोनॉमिक्स जो आया ना क्लास ये आया ही क्लास इसीलिए क्योंकि

05:22

Speaker A

लिमिटेड रिसोर्सेज हैं भैया और डिमांड जो है वो अनलिमिटेड है। ठीक है? तो अब इस अनलिमिटेड डिमांड को कैसे पूरा करेंगे लिमिटेड रिसोर्सेज से? इस चीज की स्टडी ही क्या कहलाता है? इकोनॉमिक्स कहलाता है। तो इकोनॉमिक्स में जब डिमांड अनलिमिटेड है,

05:36

Speaker A

रिसोर्सेज लिमिटेड है तो क्या जनरेट होगा? प्रॉब्लम ऑफ़ चॉइस या स्केरसिटी जिसको बोलते हैं। स्केरसिटी मतलब रिसोर्सेज़ स्केयर है। मतलब कि लिमिटेड है। स्केरसिटी इज़ द मेन प्रॉब्लम इन द इकॉनमी। दिस इज़ द रीज़न व्हाई वी स्टडी इकोनॉमिक्स। और जब ये

05:50

Speaker A

स्केरसिटी होती है तो प्रॉब्लम ऑफ़ चॉइस जनरेट होता है कि यार अच्छा ये खरीद लूं या यही खरीद लूं। आप लोग कपड़े खरीदने जाते हो यार ये वाली शर्ट खरीद लूं। तो यार ये वाली दोनों नहीं खरीद सकता। दोनों महंगे

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Speaker A

मैं कोई एक खरीद सकता हूं। है ना? मैं इस चीज पे खर्चा ज्यादा करूंगा तो इस चीज पे खर्चा कम होगा। सिंपल। इसी को क्या कहते हैं? प्रॉब्लम ऑफ चॉइस। अब इकोनॉमिक्स क्या है? इकोनॉमिक्स एक सोशल साइंस है दैट

06:10

Speaker A

स्टडीज द प्रोडक्शन कंजमशन ऑफ गुड्स एंड सर्विसेस एंड इट्स डिस्ट्रीब्यूशन अमंग द डिफरेंट पीपल। प्रोडक्शन होगा। प्रोडक्शन होगा तो लोग कंजशन करेंगे। प्रोडक्शन जब होगा तो प्रोडक्शन में जो लोग पार्टिसिपेट करते हैं हम उनको पैसे देंगे और कंजशन से

06:23

Speaker A

फिर उनकी इनकम होगी। फिर वो आगे खर्च करेंगे। इसी पूरे प्रोसेस को ही हम क्या कहते हैं? इकोनॉमिक्स कहते हैं। बेटा जो मैं अंडरलाइनिंग कर रहा हूं ना ध्यान से समझ के चलना। एनसीईआरटी कवर है। सब कुछ इसके अंदर कवर है। आपको ये वीडियो देखनी

06:34

Speaker A

है। ये नोट्स मैं Telegram पे और एसपीसीसी ऐप पे एसपीसीसी ऐप पे अरेंज फॉर्मेट में दे दूंगा आपको। वो आप जरूर ले लेना वहां से और इसको अच्छे से प्रैक्टिस कर लेना। हो सके अपनी कॉपी में नोट्स बना लेना।

06:43

Speaker A

यकीन मानना यही एज है। जो चीज नई है वो चीज एज ले जाएगी और पहली बार पेपर में आएगा पूरा का पूरा सिलेबस। पहले दो यूनिट था। अब सारे यूनिट आएंगे तो पेपर आसान होगा। अगर आप थोड़ा सा पढ़ के चले जाओगे

06:54

Speaker A

ना तो वो बच्चे जो क्विट करके जाएंगे उनसे बहुत आगे निकल जाओगे। ठीक है? अच्छा इंडिविजुअल का मतलब क्या होता है? तो इंडिविजुअल मींस कोई भी ऐसा ऐसा इंसान, कंपनी, फैक्ट्री, फर्म जो डिसीजन मेकिंग यूनिट है। अ डिसीजन मेकिंग यूनिट कैन बी अ

07:08

Speaker A

सिंगल पर्सन हो सकता है, ग्रुप ऑफ पर्सन हो सकता है, कोई फर्म हो सकता है, कोई भी ऑर्गेनाइजेशन, कोई कंपनी, कोई फैक्टर उसको क्या बोलते हैं? इंडिविजुअल। और माइक्रो में ना हम किसी इंडिविजुअल के बारे में स्टडी करते हैं। मेरे बारे में, मेरी

07:20

Speaker A

फैक्ट्री के बारे में, किसी एक कंपनी के बारे में माइक्रो के अंदर स्टडी की जाती है। रिसोर्स किसे कहते हैं? इट मींस दोज़ गुड्स एंड सर्विसेस व्हिच आर यूज्ड टू प्रोड्यूस अदर गुड्स एंड सर्विज लैंड, लेबर, कैपिटल, मशीनरी। दीज़ आर ऑल कॉल्ड

07:34

Speaker A

रिसोर्सेज। संसाधन जिनसे हम किसी दूसरी चीज को बनाते हैं। राइट? अच्छा अब इकोनॉमिक्स में दो इकोनॉमिक्स हैं। पॉजिटिव साइंस या पॉजिटिव इकोनॉमिक्स, नॉर्मेटिव साइंस या नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स। आज लिख के ले लो। एक सवाल आपको सीईटी में जरूर पूछा जाएगा इससे। एंड वेरी सिंपल।

07:49

Speaker A

पॉजिटिव इकोनॉमिक्स डील विद व्हाट इज? पॉजिटिव इकोनॉमिक्स बताता है कि हमारी एक्चुअल कंडीशन क्या है? इंडिया में महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ रही है। ये पॉजिटिव इकोनॉमिक्स है। इंडिया को अभी भी इंडिया की पॉपुलेशन वर्ल्ड की नंबर वन कंट्री बन गई है पॉपुलेशन में। वो क्या है

08:07

Speaker A

क्लास आपका? पॉजिटिव इकोनॉमिक्स है। ये जरूरी नहीं कि सही बात बताएं। ये सिर्फ एक्चुअल कंडीशन को बताता है। वो सही हो या गलत हो। इट डील्स विथ व्हाट इज इट शोज़ द रियल पिक्चर ऑफ़ एन इकॉनमी। इट डजंट पास

08:21

Speaker A

एनी वैल्यू जजमेंट दे मे बी ट्रू और मे बी फॉल्स। और ये कोई वैल्यू जजमेंट नहीं देता। ज्ञान नहीं पेलता ये सजेशन नहीं देता कि अच्छा ऐसा करना चाहिए। व्हाट इज ये कहता है क्या है? लेकिन ये जो

08:33

Speaker A

नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स है इट डील्स विद व्हाट ऑ टू बी और व्हाट शुड बी एंड इट इज़ सजेस्टिव इन नेचर। यह सजेशन देता है। ऐसा करना चाहिए। पॉपुलेशन ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इंडिया में प्राइसेस इतने नहीं बढ़ना चाहिए। टेररिज्म इतना नहीं बढ़ना

08:48

Speaker A

चाहिए। ये सारी की सारी जो बातें हैं ना इसको कहते हैं हम लोग नॉर्मेटिव साइंस और नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स। किसी भी इकॉनमी में तीन तरह के सेंट्रल प्रॉब्लम्स होते हैं। व्हाट टू प्रोड्यूस, हाउ टू प्रोड्यूस एंड फॉर हुूम टू प्रोड्यूस। ध्यान से सुनना

09:01

Speaker A

मेरे बच्चे। व्स टू प्रोड्यूस का मतलब क्या होता है क्लास? क्या सामान बनाना है और किस क्वांटिटी में बनाना है? हाउ टू प्रोड्यूस का मतलब क्या होता है? लेबर इंटेंसिव टेक्निक से बनाना है या कैपिटल इंटेंसिव टेक्निक से बनाना है फॉर हुूम टू

09:16

Speaker A

प्रोड्यूस मतलब आपके ग्राहक कौन होंगे? आप किन के लिए सामान बनाओगे? अमीरों के लिए या गरीबों के लिए या मिडिल क्लास के लिए?

09:24

Speaker A

सो व्हाट टू प्रोड्यूस का मतलब क्या है? एव्री सोसाइटी मस्ट डिसाइड ऑन हाउ मच ईच ऑफ़ मेनी पॉसिबल गुड्स एंड सर्विसेस इट विल बी प्रोड्यूस। वेदर टू प्रोड्यूस मोर फूड क्लॉथिंग हाउसिंग टू हैव मोर लग्जरी गुड्स वेदर टू हैव मोर एग्रीकल्चर गुड्स टू हैव

09:40

Speaker A

मोर इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट एंड सर्विसेस वेदर टू यूज़ मोर रिसोर्सेज इन एजुकेशन एंड हेल्थ और टू मोर रिसोर्सेज इन बिल्डिंग और मिलिट्री सर्विसेस बिल्डिंग मिलिट्री सर्विसेस वेदर टू हैव मोर बेसिक एजुकेशन और मोर हायर एजुकेशन वेदर टू हैव मोर

09:52

Speaker A

कंजमशन गुड्स और हैव इन्वेस्टमेंट गुड्स लाइक मशीन व्हिच विल बूस्ट द प्रोडक्शन एंड कंजमशन टुमारो अगर सरकार जो हायर एजुकेशन है उस पे ज्यादा पैसा खर्च करेगी तो जो लोअर एजुकेशन है, लिममेंट्री एजुकेशन है उस पे कम पैसा खर्च करेगी। अगर

10:06

Speaker A

आप मिलिट्री गुड्स ज्यादा बनाओगे तो कंज्यूमर गुड्स कम बनेगा क्योंकि रिसोर्सेज आर लिमिटेड है। तो यहां पे पीपीसी का जो कर्व बनता है इस तरीके से बनता है। एक का प्रोडक्शन बढ़ाओगे तो ऑब्वियसली दूसरे का प्रोडक्शन कम होगा।

10:17

Speaker A

बिकॉज़ रिसोर्सेज आपके पास लिमिटेड है। अगर आप पढ़ाई में ज्यादा टाइम स्पेंड करोगे तो मस्ती कम कर पाओगे। Instagram पे कम ध्यान दे पाओगे। Instagram पे, रील्स में, दोस्तों में, तफरी, बाजी, गपशप मस्ती में ज्यादा टाइम स्पेंड करोगे तो पढ़ाई में कम

10:29

Speaker A

टाइम स्पेंड करोगे। सीधी सी बात है। आपके पास टाइम सबके पास क्या है? लिमिटेड है। तो व्हाट टू प्रोड्यूस के अंदर आता है व्हाट गुड्स एंड सर्विसेस आर टू प्रोड्यूस इन व्हाट क्वांटिटीज। अगला क्या है? हाउ दीज़ गुड्स आर प्रोड्यूस? हाउ टू प्रोड्यूस

10:40

Speaker A

देयर आर टू मेथड ऑफ प्रोडक्शन। लेबर इंटेंसिव कैपिटल इंटेंसिव। आप प्रोडक्शन कैसे करोगे? अगर लेबर सरप्लस इकॉनमी है तो भैया लेबर से काम कराओ। लेबर से लेबर इंटेंसिव में लेबर का यूज़ ज्यादा होता है। कैपिटल का यूज़ कम होता है। कैपिटल

10:53

Speaker A

इंटेंसिव टेक्निक में कैपिटल का यूज़ ज्यादा होता है। लेबर का यूज़ कम होता है। कैपिटल मतलब मशीनरी। तो बड़ी-बड़ी जो कंपनी है, कैपिटलिस्टिक इकॉनमी है, अमेरिकन कंपनीज़ हैं वो मशीन से काम कराती हैं। वो लेबर से काम नहीं कराती। तो मशीन

11:05

Speaker A

का यूज़ ज्यादा होता है। लेबर का यूज़ कम होता है। प्रोडक्शन बहुत तेजी से बढ़ता है। हां लेकिन कॉस्ट भी ज्यादा आ जाती है। अगर लेबर से काम कराओगे तो बेरोजगारी कम होगी। कॉस्ट कम आएगी लेकिन टाइम जो है वो

11:14

Speaker A

ढीले लगेगा। कैपिटल इंटेंसिव में बेरोजगारी बन सकती है। सबके अपने-अपने फायदे हैं। कैपिटल इंटेंसिव महंगा है। लेबर इंटेंसिव सस्ता है। तो कैसे बनाना है? ये भी एक प्रॉब्लम है। थर्ड प्रॉब्लम हुम टू प्रोड्यूस हु गेट हाउ मच ऑफ द

11:24

Speaker A

गुड्स व्हाट आर प्रोड्यूस इन इकॉनमी? एमसीक्यू आएगा ये ले लो ये ले लो पेपर के बाद देखना पेपर के बाद देखना तुम अपने इस जूनियर को बोलोगे भाई सुनील सर जहां 100% लिख देते हैं ना भाई वो आना है पेपर में

11:36

Speaker A

एक क्वेश्चन आएगा हाउ शुड बी द प्रोड्यूस गुड्स एंड इकॉनमी टू डिस्ट्रीब्यूट अमंग द इंडिविजुअल इन द इकॉनमी कैसे डिस्ट्रीब्यूशन होगा जो भी हमने सामान बनाया है उसका बंटवारा कैसे करेंगे हु गेट मोर एंड हु गेट लेस वेदर ऑ नॉट टू इंश्योर

11:48

Speaker A

अ मिनिमम अमाउंट ऑफ़ कंजमशन फॉर एवरीवन इन इकॉनमी वेदर नॉट एलिममेंट्री एजुकेशन एंड बेसिक हेल्थ सर्विसेस शुड बी अवेलेबल फ्रीली फॉर एवरीवन इन इकॉनमी तो ये सारे जो एग्जांपल आपको दिख रहे हैं ना इसी को क्या बोलते हैं? फॉर हुम टू प्रोड्यूस। द

11:59

Speaker A

एलोकेशन ऑफ़ स्केयर रिसोर्सेज एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ फाइनल गुड्स एंड सर्विज आर द सेंट्रल प्रॉब्लम ऑफ एन इकॉनमी। तो स्केयर रिसोर्सेज जो हमारे पास है उसका कैसे एलोकेशन करेंगे? कैसे उन लोगों को बांटेंगे? ताकि रिसोर्सेज सबको मिले। यही हमारा तीन सेंट्रल प्रॉब्लम है। व्हाट टू

12:13

Speaker A

प्रोड्यूस? क्या बनाना है? किस क्वांटिटी में बनाना है? किसके लिए बनाना है? तो दीज़ थ्री आर द सेंट्रल प्रॉब्लम्स ऑफ़ एन इकॉनमी। अगर यही अगर मैं बात करूं यही सेंट्रल प्रॉब्लम सरकार सॉल्व करती है उसको बोलते हैं सेंट्रली प्लान इकॉनमी या

12:27

Speaker A

सोशलिस्टिक इकॉनमी यही सेंट्रल प्रॉब्लम को प्राइवेट प्रोड्यूसर प्राइवेट फर्म सॉल्व करते हैं उसको बोलते हैं क्लास कैपिटलिज्म या मार्केट इकॉनमी वहां प्रॉफिट मोटिव होता है सरकार करती है सोशल वेलफेयर होता और इंडिया इज अ मिक्स इकॉनमी क्योंकि जहां पे द सेंट्रल प्रॉब्लम व्हाट

12:41

Speaker A

टू प्रोड्यूस हाउ टू प्रोड्यूस एंड फॉर हुम टू प्रोड्यूस आर सॉल्व बाय द गवर्नमेंट एंड प्राइवेट प्रोड्यूसर बोथ डिमांड सप्लाई के अकॉर्डिंग भी और सरकार के अकॉर्डिंग भी मोटिव भी प्रॉफिट भी कमाना है। साथ में सोशल वेलफेयर भी करना

12:52

Speaker A

है। उसको बोलते हैं मिक्स्ड इकॉनमी। अच्छा पॉजिटिव नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स के डिफरेंस की बात करें। लिखने को नहीं आएगा। सब कुछ समझना है और आज मैं तुम्हें जितना करा दूंगा इस कसम खा लेना कि इस अच्छे से आप लर्न कर लेना याद कर लेना। सारा कुछ आज हम

13:04

Speaker A

कवर कर लेंगे। इट डील्स विद व्हाट इज और हाउ द इकोनॉमिक प्रॉब्लम आर एक्चुअली सॉल्व। देखो ये जो पॉजिटिव इकोनॉमिक्स है ना ये बताता है क्लास क्या है और इकोनॉमिक प्रॉब्लम कैसे सॉल्व होगा। लेकिन ये डील्स विद व्हाट ऑ टू बी व्हाट शुड बी क्या होना

13:20

Speaker A

चाहिए और हाउ द इकोनमिक प्रॉब्लम शुड बी सॉल्व ठीक है कैसे सॉल्व होना चाहिए ये एक्चुअली कैसे सॉल्व हुआ और ये कैसे सॉल्व होना चाहिए सजेशन दे रहा है वेरिफिकेशन इट कैन बी वेरीिफाइड विद एक्चुअल डेटा इसको वेरीफाई कर सकते हैं एक्चुअल डेटा से इट

13:32

Speaker A

कैन नॉट बी वेरीिफाइड क्योंकि भ सजेशन की बात करता है पर्पस इट एम्स टू रियल डिस्क्रिप्शन ऑफ़ एन इकोनमिक एक्टिविटी और इट इज़ डिटरमाइन द आइडियल्स। तो भैया आइडियल्स के बारे में बताता है। सजेस्टिव की बात करें। यह क्लास सजेस्टिव नहीं है।

13:44

Speaker A

एक्चुअल फैक्ट है। लेकिन यह क्या है? क्लास आपका सजेस्टिव नेचर है। वैल्यू जजमेंट ये कोई वैल्यू जजमेंट नहीं देता। इट इज़ न्यूट्रल बिटवीन एंड्स। ठीक है?

13:52

Speaker A

लेकिन ये क्या करता है? वैल्यू जजमेंट देता है। मतलब रिसोर्स एंड्स मतलब यहां पे रिसोर्सेज है। एग्जांपल प्राइस ऑफ़ इंडियन इकॉनमी आर कॉन्स्टेंटली राइज़िंग। देयर आर इनकिलिटीज़ ऑफ़ इनकम इन आवर कंट्री। इंडिया शुड टेक स्टेप्स टू कंट्रोल। देखो राइजिंग

14:04

Speaker A

प्राइस। इन इनकम इनकिटी शुड बी रिड्यूस्ड। तो ये सजेशन दे रहा है नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स है और ये क्या है क्लास आपका पॉजिटिव इकोनॉमिक्स है। ठीक है? नेक्स्ट डिफरेंस बिटवीन माइक्रो और माइक्रोइकोनॉमिक्स। माइक्रो मतलब छोटा, माइक्रो मतलब लार्ज। माइक्रो में हम बात

14:19

Speaker A

करते हैं स्टडी ऑफ़ एन इंडिविजुअल और प्रोडक्ट। मैक में स्टडी करते हैं होल इकोनमी को। माइक्रो इज़ इट स्टडीज़ द इकॉनॉमी एज़ होल और एग्रीगेट। सब्जेक्ट की मैटर बात करूं। स्टडी अबाउट डिमांड। यहां पे डिमांड है, सप्लाई है, डिटरमिनेशन ऑफ़

14:31

Speaker A

प्राइस और आउटपुट है। किसी एक कंपनी का, किसी एक फर्म का, किसी एक इंसान की इनकम, किसी एक कंपनी का प्राइस क्या है?

14:37

Speaker A

प्रोडक्ट का ये सब माइक्रो है। लेकिन स्टडी अबाउट द एग्रीगेट डिमांड, एग्रीगेट सप्लाई, डिटरमिनेशन ऑफ़ एग्रीगेट आउटपुट एंड जनरल प्राइस लेवल वो आपका क्या है?

14:45

Speaker A

मैकोनॉमिक्स है। जिसको प्राइस थ्योरी बोलते हैं। इसका इनकम एंड एंप्लॉयमेंट थ्योरी बोलते हैं। इनकम ऑफ अ कंज्यूमर, प्राइसिंग ऑफ अ प्रोडक्ट। स्टडी अबाउट अ सिंगल ट्री इन अ फॉरेस्ट। पूरे जंगल में किसी एक ट्री के बारे में अगर आप स्टडी

14:56

Speaker A

करते हो, तो यह क्या हो जाता है क्लास? आपका माइक्रोइकोनॉमिक्स लेकिन जंगल में जितने भी पेड़ हैं आप सबके बारे में स्टडी कर रहे हो तो भैया वह क्या हो जाता है आपका मैक इकोनॉमिक्स नेशनल इनकम पर कैपिटा

15:10

Speaker A

इनकम क्योंकि इसका फार्मूला जो है वो भी नेशनल इनकम अपॉन पॉपुलेशन है तो वो हो गया आपका स्टडी अबाउट द होल फॉरेस्ट ये सब क्या है मैकोनॉमिक्स है तो ये बड़े लेवल पे बात करता है ये इंडिविजुअल लेवल पे बात

15:22

Speaker A

करता है अब हमारा जो नेक्स्ट टॉपिक है वो पीपीसी प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी फ्रंट फ्रंटियर या इसी को कहते हैं सेम प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व। ध्यान से सुनना बेटा। हम हमको दो अलग-अलग गुड्स बनाने हैं। हमारे पास रिसोर्सेज लिमिटेड है। तो लिमिटेड रिसोर्सेज से हम दो

15:41

Speaker A

अलग-अलग गुड्स के कितने कॉम्बिनेशंस को बना सकते हैं? दैट इज कॉल्ड प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी फ्रंटियर या प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व। इट इज द ग्राफिकल प्रेजेंटेशन ऑफ द वेरियस कॉम्बिनेशन ऑफ टू गुड्स दैट कैन बी प्रोड्यूस्ड विद द गिवन अमाउंट ऑफ रिसोर्सेज। दिए गए हुए अमाउंट

16:01

Speaker A

ऑफ रिसोर्सेज से कितने आप क्लास बना सकते हो, कितना प्रोडक्शन कर सकते हो? इट इज़ आल्सो कॉल्ड ट्रांसफॉर्मेशन कर्व और प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व। इसको ट्रांसफॉर्मेशन कर्व और प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व कहा जाता है। एजम्पशन की बात करें तो रिसोर्सेज पूरी तरीके से

16:17

Speaker A

क्लास यूटिलाइज है। यानी हम पहले ही मानते हैं कि रिसोर्सेज फुल्ली यूटिलाइज है। पहले ही मान लेते हैं रिसोर्सेज फुल्ली यूटिलाइटिलाइज है। टेक्नोलॉजी में कोई चेंज नहीं आएगा। इनकम जो है वो क्या है?

16:26

Speaker A

क्लास आपका कांस्टेंट है। तो अगर मैं यहां पे बना के दूं आपको ये हो गया क्लास एक्सिस x एक्सिस y एक्सिस। ये है आपका पीपीसी कर्व। तो यहां पे हेल्थ केयर सर्विज है। यहां मिलिट्री है यानी गुड्स y

16:39

Speaker A

गुड्स एक्स। अब अगर एक अगर आप ये 150 कर रहे हो ये 210 कर रहे हो इसको कम करोगे तो ये क्या हो जाएगा? बढ़ जाएगा। इसके शेप के बारे में ध्यान रखना। देखो यार जो सीबीटी में क्वेश्चन पूछे जाते हैं

16:52

Speaker A

ना वो डीपली चीजें पूछी जाती हैं। छोटी-छोटी चीजें पूछी जाती हैं। इसके शेप पूछेगा कैसा शेप है? तो अगर आप यहां से देखोगे ना तो ये कैसा शेप है? शेप है?

17:02

Speaker A

कॉनकेव टू द ओरिजिन। कैसा शेप है? कॉनकेव टू द ओरिजिन। और अगर A से B की तरफ आओगे तो यहां पर देखो 80 सैक्रिफाइस किया और यहां पे गेन कितना हुआ? ये कितना है? 210 है। 80 सैक्रिफाइस किया और यहां पे हां

17:17

Speaker A

210 ही है और 400 तो यहां पे क्लास 190 तो 190 80 यहां से कम हुआ तो यहां से 190 गेन हो गया। तो यही कहलाता है क्लास आपका प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व। राइट? पीपीसी इज़ कॉनकेव टू द ओरिजिन ड्यू टू इंक्रीस इन

17:32

Speaker A

मार्जिनल अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। जो पीपीसी है वो क्यों कॉनकेव होता है? क्योंकि मार्जिनल अपॉर्चुनिटी कॉस्ट कहो या मार्जिनल रेट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन पढ़ा हुआ क्या है आपको ये इनक्रीस कर रहा होता है। इसकी वजह से जो पीपीसी है ना वो क्या बन

17:46

Speaker A

जाता है? कॉनकेव टू द ओरिजिन बनता है। अ पीपीएफ इज़ डाउनवर्डली स्लोपिंग। देखो डाउनवर्डली स्लोपिंग तो है ही और कॉनकेव टू द ओरिजिन है। ऑल दी कॉम्बिनेशन ऑन अ पीपीएफ मस्ट इंप्लाइस दैट रिसोर्सेज आर फुल्ली और एफिशिएंटली यूटिलाइज़। एक

18:02

Speaker A

प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी कर्व के ऊपर जितने भी पॉइंट हैं एक पॉइंट, दो पॉइंट, तीन पॉइंट ये सारे पॉइंट क्या शो करते हैं?

18:10

Speaker A

रिसोर्सेज को आपने पूरी तरीके से इस्तेमाल कर लिया है। कोई पॉइंट अगर आउटसाइड पीपीसी है तो उसको बोलते हैं अनअटनेबल। भैया आप वो प्रोडक्शन नहीं कर सकते। कोई पॉइंट पीपीसी के इनसाइड है तो वो शो करता है अंडर यूटिलाइजेशन ऑफ रिसोर्सेज। बस आप ये

18:27

Speaker A

ध्यान रखना। राइट? सो पॉइंट अंडर द पीपीएफ शोज़ अंडर यूटिलाइजेशन ऑफ़ रिसोर्सेज और रिसोर्सेज आर अंडर एंप्लॉयड आउटसाइड द पीपीएफ इज़ अनअटनेबल कॉम्बिनेशन। बाहर है तो अनटनेबल है और ए बी सी डी जो है वो अटेनेबल कॉम्बिनेशन है सारे के सारे। ठीक

18:40

Speaker A

है? अगर यहां पे है तो भैया मौका है कि वो आगे जाएगा। रिसोर्सेज अभी पूरा इस्तेमाल नहीं किया। लाइक आपके पास जमीन 100 एकड़ थी। आपने 70 एकड़ में ही प्रोडक्शन किया। 30 एकड़ रह गया। तो ये पॉइंट क्या बन

18:50

Speaker A

जाएगा? अंडरयूटिलाइजेशन ऑफ़ रिसोर्सेज अंदर है। बट एंप्लई को हम मानते हैं ना एंप्लई पूरी तरीके से है। अगर मान लो कभी भी नियर फ्यूचर प्रोडक्शन की कैपेसिटी बढ़ाओगे, नई टेक्नोलॉजी नई मशीन लेके आओगे तो पीपीसी आगे की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। और नेचुरल

19:06

Speaker A

डिजास्टर आ गया। मशीन टूट गई तो पीपीसी पीछे की तरफ शिफ्ट होगा। अच्छी मेडिकल फैसिलिटी दोगे लोगों को। लोगों की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। पीपीसी राइटवर्ड शिफ्ट होगा। चलो उसकी बात में करेंगे। अब ये ना थोड़ा सा आप समझ लो कि ये जो

19:18

Speaker A

मार्जिनल रेट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन है लिख लो इसको मार्जिनल रेट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन इसको कहते क्या हैं? देखो अलग-अलग कॉम्बिनेशन ले लिया आपने ए बी सी डी ई एफ अब गुड्स x से गुड्स y इसकी शुरुआत ज़ीरो से है। ये

19:30

Speaker A

क्या है क्लास आपका? 15 तो 0 1 2 3 4 5 लिख लिया आपने। आप अपनी कॉपी में लिखो। 0 1 2 3 4 5 बस यहां 15 है। पहले एक कम करना फिर दो कम करना। फिर तीन कम करना। फिर चार

19:39

Speaker A

कम करना। फिर पांच कम करना। 15 में से वन घटाओ। 14 14 में से टू घटाओ। 12 12 में से थ्री घटाओ नाइन 9 में से फोर घटाओ फाइव फाइव में से फाइव घटाओ तो आंसर कितना क्लास आएगा ज़ीरो तो एमआरटी जो है मार्जिनल

19:52

Speaker A

रेट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन वो क्या कहता है कि हर एक x को गेन करने के लिए कितना y आपने छोड़ा एमआरटी क्या कहता है लॉस इन गुड्स y / गेन इन गुड्स x तो यहां पे आपने कितना y को छोड़ा सर एक y को किसके लिए एक x के

20:13

Speaker A

लिए फिर आपने आपने दोबारा 2 y को छोड़ा उसी एक x को गेन करने के लिए। फिर 3y को फिर 4 y को छोड़ा लास्ट में 5 y और यहां पे देखो बराबर हो गया। एक एंड यहां भी

20:21

Speaker A

जीरो, एक एंड यहां भी जीरो है। तभी पीपीसी जो है एक्सिस को यहां पे टच करता है। तो एक चीज जीरो होती है। और एक आखिरी बात ये जब रिसोर्सेज शिफ्ट होते हैं। अब देखो y से x की तरफ रिसोर्सेज शिफ्ट हो रहा है तो

20:34

Speaker A

आपको जो कॉस्ट आ रही है आपकी ज्यादा आ रही है। 1 2 3 4 5 तो एमआरटी कंटिन्यू बढ़ता है। इसी वजह से जो पीपीसी है वो कॉनकेव टू द ओरिजिन है। एमआरटी को आप एमओसी भी कह सकते हो। अगर रिसोर्सेज इनक्रीज हो गया तो

20:49

Speaker A

पीपीसी क्या करेगा? यहां से राइटवर्ड शिफ्ट हो जाएगा। रिसोर्सेज डिक्रीज हो गया तो पीपीसी लेफ्टवर्ड शिफ्ट होगा। अगर मान लो कि अ दोनों गुड्स की टेक्नोलॉजी बढ़ गई तो भाई पीपीसी राइटवर्ड शिफ्ट होगा। दोनों गुड्स में खराब टेक्नोलॉजी आ गई।

21:04

Speaker A

अर्थक्वेक आ गया तो पीपीसी क्या करेगा? दोनों तरफ से लेफ्टवर्ड दोनों का प्रोडक्शन कम हो जाएगा। लेकिन शिफ्ट वर्ड हम तभी यूज़ करते हैं जब दोनों एंड से रिसोर्सेज चेंज हो। गुड्स एक्सक्स, गुड्स वाइज दोनों में चेंज आए। लेकिन अगर कभी

21:16

Speaker A

सिर्फ एक ही गुड्स में चेंज आया तो उसे शिफ्ट नहीं बोलते हैं। उसको हम लोग रोटेशन बोलते हैं। जैसे यहां पे देखोगे ना चेंज इन टेक्नोलॉजी और एफिशिएंट टेक्नोलॉजी गुड्स x गुड्स x की नई टेक्नोलॉजी ले आए मार्केट में या अपग्रेडेशन ऑफ टेक्नोलॉजी

21:31

Speaker A

होगी गुड्स x की तो देखो पीपीसी ऐसा था अगर टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करोगे ना x में तो x का प्रोडक्शन देखो बढ़ेगा y का सेम रहेगा तो ये क्या होगा राइटवर्ड रोटेट होगा उसी तरीके से अगर y की टेक्नोलॉजी

21:43

Speaker A

अच्छी हो गई या y में ग्रोथ ऑफ रिसोर्सेज हो गए आपने रिसोर्सेज को बढ़ा दिए रिसोर्सेज तो लिमिटेड है लेकिन फिर भी अगर आपने रिसोर्सेज को बढ़ाया तो तो ये अपवर्ड मूवमेंट सॉरी अपवर्ड क्या होगा? रोटेट होगा। यहां से प्रोडक्शन जो y का बढ़

21:56

Speaker A

जाएगा। तो अगर ध्यान रखना किसी भी एक कमोडिटी में चेंज आया तो रोटेट होगा। दोनों में चेंज आया तो शिफ्ट होगा। तो अगर ऊपर की तरफ जा रहा है तो रोटेट अपवर्ड। अगर यही नीचे की तरफ आता रोटेट डाउनवर्ड।

22:07

Speaker A

ये राइट गया तो रोटेट राइटवर्ड। अगर कम हो जाता रिसोर्सेज तो रोटेट लेफ्टवर्ड। ये ध्यान रखना। अगर एक का बढ़ेगा दूसरे घटेगा तो इस तरीके से यहां पे y में अपवर्ड जाएगा और क्लास यहां पे x में डाउनवर्ड।

22:19

Speaker A

इस तरीके से यहां भी देखो इधर से नीचे आ गया। इधर से आगे चला गया। यह इंटरसेक्ट कर जाएगा पीपीसी को। तो, यह है पीपीसी की पूरी की पूरी कहानी। अब आते हैं प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी सेट किसे बोलते हैं? द कलेक्शन

22:30

Speaker A

ऑफ़ ऑल पॉसिबल कॉम्बिनेशन ऑफ़ गुड्स एंड सर्विसेस दैट कैन बी प्रोड्यूस्ड विद द गिवन अमाउंट ऑफ़ रिसोर्सेज। सर, इसमें डिफरेंस क्या रहा? ये भी तो सेम है पीपीसी। बस ये ग्राफिकल प्रेजेंटेशन है। और ये क्लास नंबर्स में हम दिखाते हैं

22:43

Speaker A

थ्योरेटिकल नॉलेज है। उसे क्या बोलते हैं? प्रोडक्शन सेट। मतलब कि गिवन अमाउंट ऑफ रिसोर्सेज से। अलग-अलग कॉम्बिनेशन हम कितना बना सकते हैं? मेरे पास जमीन मान लो इतना है। इसमें हम लोगों को उगाना है राइस। इसमें उगाना है हम लोगों को वीट। तो

22:55

Speaker A

इस इतना राइस उगाएंगे तो इतना वीट छोड़ना पड़ेगा। इतना ज्यादा वीट उगाएंगे तो राइस को छोड़ना पड़ेगा। तो कितने अलग-अलग कॉम्बिनेशन हम बना सकते हैं? उसी को बोलते हैं प्रोडक्शन पॉसिबिलिटी सेट। अच्छा अपॉर्चुनिटी कॉस्ट क्या होता है? अभी मैं

23:06

Speaker A

जिस स्कूल में काम कर रहा हूं, उसकी मेरी सैलरी 75,000 है। मेरे को ना एक जॉब मिल रही है। मेरे को एक एक ऑनलाइन वाले बुला रहे हैं। कह रहे हैं आपको 1 लाख की सैलरी देंगे। हमारे पास आ जाओ। तो इस 1 लाख की

23:16

Speaker A

सैलरी को पाने के लिए इस 75,000 की सैलरी को मुझे छोड़ना पड़ेगा। इसी को क्या कहते हैं? अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। मेरे पास दो अल्टरनेटिव है। एक है 1 लाख, एक है 75,000। तो मेरा जो पहला अल्टरनेटिव है, उसको पाने के लिए जो मैं छोड़ दूंगा, जो

23:31

Speaker A

सैक्रिफाइस कर दूंगा, जो फॉरगोन कर दूंगा, उसी को कहते हैं अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। तो इस 1 लाख की नौकरी पाने के लिए मैं 75,000 की नौकरी को छोड़ दूंगा। दिस इज कॉल्ड अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। यानी कि सेकंड बेस्ट अल्टरनेटिव। फर्स्ट तो यह है, सेकंड यह

23:44

Speaker A

है। तो सेकंड बेस्ट सेकंड अल्टरनेटिव को हम लोग क्या कहते हैं? अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। इट इज़ द कॉस्ट ऑफ़ नेक्स्ट बेस्ट अल्टरनेट फॉरगोन या फिर सेकंड बेस्ट अल्टरनेटिव। 1 लाख को पाने के लिए कितना छोड़ा या फिर सेकंड वाला जो नंबर है उसी को क्या बोलते

23:54

Speaker A

हैं? अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। एक इंसान है मान लो 35,000 पे काम कर रहा है और उसको दूसरा ऑफर मिल रहा है 5,000 के लिए। तो भैया 5,000 के लिए 35 छोड़ेगा तो 35,000 को क्या बोलते हैं? अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। और

24:04

Speaker A

हमेशा आप एक कुछ पाने के लिए कुछ छोड़ोगे और जो छोड़ा उसी को अपॉर्चुनिटी कॉस्ट हम लोग बोलते हैं। यहां पे एग्जांपल उसी चीज का दिया हुआ है। एक जमीन पे अगर राइस उगा रहे हो तो राइस ज्यादा उगाना चाहोगे तो

24:14

Speaker A

वीट को छोड़ना पड़ेगा। तो जो चीज छोड़ रहे हो ना दैट इज कॉल्ड अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। ओके? अगला है अगला। अच्छा जैसे आप लोग 12th में हो तो आपका छोटा भाई बहन कोई घर में होगा तो आपके पड़ोसी या रिश्तेदार

24:25

Speaker A

कहते होंगे यार इसको तू पढ़ा दे। तू 12th में अच्छा पढ़ता है तू पढ़ा दे। है ना? तो तुम पढ़ाने चले गए लेकिन तुमको पैसे नहीं देते। वो कहते हैं यार तुम तो भाई हो। तुमको क्या तुम्हारा थोड़ी कुछ लग रहा है।

24:34

Speaker A

लेकिन नहीं आप बोलोगे मेरा लग नहीं रहा लेकिन मैं अपनी पढ़ाई को छोड़ के तुमको पढ़ा रहा हूं। तो मेरी वो कॉस्ट लग रही है। दैट इज कॉल्ड अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। कि अगर मैं तुम्हारे बच्चों को नहीं पढ़ा रहा

24:42

Speaker A

होता तो मेरी यहां पे अपनी पढ़ाई चल रही होती और मैं अच्छा स्कोर करता लाइफ में अच्छा करता। तो टाइम तो लिमिटेड है। मैं अपना टाइम आपको दे रहा हूं। अपनी पढ़ाई छोड़ के जो छोड़ रहे हो दैट इज कॉल्ड

24:50

Speaker A

अपॉर्चुनिटी कॉस्ट। मार्जिनल अपॉर्चुनिटी कॉस्ट किसे कहते हैं? और मार्जिनल रेट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन दोनों सेम है। दोनों पीपीसी में आते हैं। और पीपीसी कॉनकेव क्यों बनता है? क्योंकि ये दोनों बढ़ते हैं। इसीलिए मार्जिनल अपॉर्चुनिटी कॉस्ट इज़ डिस्क्राइब एस द रेट। अपॉर्चुनिटी

25:06

Speaker A

कॉस्ट और मार्जिनल अपॉर्चुनिटी कॉस्ट में फर्क है तो किस चीज का? रेट का। वो एक ही बार होता है। ये कंटिन्यू क्लास चलता रहता है। द रेट एट व्हिच आउटपुट ऑफ़ गुड्स Y इज़ टू बी सैक्रिफाइस फॉर एव्री एडिशनल यूनिट

25:18

Speaker A

ऑफ़ गुड्स X। X को पाने के लिए Y को किस रेट से सैक्रिफाइस कर रहे हो? उसी को क्या बोलते हैं? क्लास? मार्जिनल अपोजिट कॉस्ट है। ये हमेशा क्लास बढ़ता है। ये बढ़ता है। इसीलिए पीपीसी ऐसा बनता है। शेप ध्यान

25:29

Speaker A

रखना। ओके? यानी कि एमआरटी क्या है? इट इज़ द रेश्यो। अब वो रेट है। ये रेश्यो है। ऑफ नंबर ऑफ़ यूनिट्स ऑफ़ कमोडिटी सैक्रिफाइस टू गेन एडिशनल यूनिट ऑफ़ अनदर कमोडिटी। जैसे हमारे इस वाले अपने एग्जांपल के अंदर आपने

25:42

Speaker A

देखा कि ये क्या है? एमआरt रेश्यो ऑफ़ डेल्टाy / डेल्टा X। तो यहां पे डेल्टा x तो सब जगह वन वन है। डेल्टाy में पहले एक सैक्रिफाइस किया, फिर दो सैक्रिफाइस किया, फिर तीन किया, फिर चार किया, फिर पांच

25:54

Speaker A

किया। डेल्टाy / डेल्टा x। ठीक है? तो ये हो गया मार्जिनल रेट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन। mआरt आल्सो कॉल्ड अ स्लोप ऑफ पीपीसी। अब ये क्वेश्चन पूछेगा स्लोप ऑफ पीपीसी किसे बोलते हैं? एमआरटी। कमेंट्स में लिखो। स्लोप ऑफ पीपीसी किसे बोलते हैं? एमआरटी।

26:09

Speaker A

फार्मूला क्या है? लॉस इन गुड y / गेन इन गुड x। इट मींस लॉस ऑफ आउटपुट ऑफ गुड्स y फॉर एडिशनल यूनिट ऑफ गुड्स x पीपीसी कैन बी अ स्ट्रेट लाइन। अच्छा क्या पीपीसी स्ट्रेट लाइन बन सकता है? हां बन सकता है

26:20

Speaker A

कब? व्हेन मार्जिनल अपॉर्चुनिटी कॉस्ट एंड एमआरटी इज कांस्टेंट। यानी कि आपका कांस्टेंट है। 4y को छोड़ा, 4y को छोड़ा, 4y को छोड़ा। किसके लिए? एक x के, एक x के, एक x के। तो ये एमआरटी ना कांस्टेंट है। यही एमआरटी होता है। ये कांस्टेंट है

26:34

Speaker A

और ये कांस्टेंट है। इसीलिए पीपीसी स्ट्रेट लाइन बन सकता है। सो कैन बी इन नॉर्मल केस पीपीसी स्ट्रेट लाइन नहीं बनता। बट अगर एमआरटी कांस्टेंट होगा तो पीपीसी स्ट्रेट लाइन भी बन जाएगा। तो ये रहा क्लास मैंने बता दिया आपको एमआरटी तो

26:47

Speaker A

सेम वही डायग्राम है। अगर ध्यान से समझना अगर एमओसी या एमआरटी राइज़ हो रहा है तो पीपीसी का शेप कैसा होगा? ये और एमआरटी का फार्मूला क्या है? अगर आपको इस तरीके से दे देगा ना तो निकाल लेना आप। है ना? लॉस

27:00

Speaker A

इन गुड y एक और गेन इन गुड x एक। यहां पे लॉस 14 से 12 में दो हो गया। यहां पे गेन एक ही हो रहा है। तो आप निकाल लेना। अगर ये बढ़ता हुआ नजर आ रहा है तो पीपीसी ऐसा

27:09

Speaker A

बनेगा। अगर यह कांस्टेंट है 1 1 2 2 3 33 33 4 तो पीपीसी कैन बी अ स्ट्रेट लाइन और अगर यह घट रहा है 4 3 2 1 तो पीपीसी क्या हो रहा है क्लास इस तरीके से बन जाएगा दिस

27:20

Speaker A

इज़ कॉल्ड कॉन्वेक्स टू द ओरिजिन यानी शेप ऑफ़ पीपीसी इज़ कंप्लीटली डिपेंड अपॉन एमओसी या एमआरटी दैट्स इट। आई होप कि आप लोगों को ये पूरा का पूरा इंट्रोडक्शन चैप्टर मजा आया होगा, सीखने को मिला होगा। कैसा लगा मुझे बताना कमेंट सेक्शन में और अच्छा

27:37

Speaker A

लगे तो क्लास में दोस्तों को भी शेयर करना। वीडियो को लाइक कर देना। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। टिल देन टेक केयर।

Topics: CUET 2025 माइक्रोइकोनॉमिक्स इकोनॉमिक्स परिचय स्केरसिटी प्रॉब्लम ऑफ चॉइस इकोनॉमिक एक्टिविटीज पॉजिटिव इकोनॉमिक्स नॉर्मेटिव इकोनॉमिक्स इंडिविजुअल इकाई इकोनॉमिक रिसोर्सेज


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