**From Zero to Billions 🔥The ChatGPT Success Story | OpenAI Case Study | AI Revolution | Live Hindi — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/chatgpt-success-story-openai-ai-revolution/

चैट जीपीटी की सफलता की कहानी, ओपन एआई की स्थापना, तकनीकी विकास और इसके प्रभावों का हिंदी में विस्तृत विश्लेषण।

## Key Takeaways

- चैट जीपीटी ने एआई को आम जनता के लिए सुलभ और उपयोगी बनाया।
- ओपन एआई की स्थापना का उद्देश्य एआई को कॉर्पोरेट्स तक सीमित न रखकर इंसानियत के लिए उपयोगी बनाना था।
- फंडिंग और कॉर्पोरेट दबावों के बावजूद ओपन एआई ने कैप्ड प्रॉफिट मॉडल अपनाकर सफलता हासिल की।
- GPT मॉडल्स की निरंतर प्रगति ने टेक्स्ट जनरेशन और संवादात्मक एआई में क्रांति लाई।
- चैट जीपीटी की लोकप्रियता और तेजी से ग्रोथ ने एआई के भविष्य की दिशा तय की।

## What the video covers

- चैट जीपीटी को 21वीं सदी का सबसे बड़ा आविष्कार माना जाता है, जिसने एआई क्षेत्र में क्रांति ला दी।
- ओपन एआई की स्थापना 2015 में सैम ऑल्टमैन, एलन मस्क और अन्य टेक लीडर्स ने की, जिसका उद्देश्य एआई को आम जनता तक पहुंचाना था।
- ओपन एआई ने कई टूल्स और मॉडल्स जैसे जिम, यूनिवर्स, बेसलाइन, GPT-1, GPT-2, और GPT-3 विकसित किए।
- एलन मस्क ने टेस्ला के कारण 2018 में ओपन एआई छोड़ दिया, जिससे फंडिंग में कमी आई।
- 2019 में ओपन एआई ने कैप्ड प्रॉफिट मॉडल अपनाया और माइक्रोसॉफ्ट से $1 बिलियन का निवेश प्राप्त किया।
- GPT-2 ने टेक्स्ट जनरेशन में क्रांति लाई, लेकिन इसके दुरुपयोग के डर से शुरुआत में सीमित रिलीज़ किया गया।
- GPT-3 और बाद में चैट जीपीटी (GPT 3.5 बेस्ड) ने यूजर फ्रेंडली चैटबॉट के रूप में एआई को आम जनता तक पहुंचाया।
- चैट जीपीटी ने लॉन्च के 5 दिनों में 1 मिलियन यूजर्स और 2 महीनों में 100 मिलियन यूजर्स हासिल कर इतिहास रचा।
- इसकी सरलता और सहज इंटरफेस ने इसे हर उम्र और तकनीकी ज्ञान वाले लोगों के लिए लोकप्रिय बनाया।
- वीडियो में ओपन एआई के विकास, चुनौतियों, फंडिंग, और चैट जीपीटी के सामाजिक प्रभावों पर भी चर्चा की गई है।

## Chapters

1. 00:00 चैट जीपीटी और एआई के खतरे
2. 01:19 ओपन एआई की स्थापना और शुरुआती सपने
3. 02:31 ओपन एआई के शुरुआती टूल्स और रिसर्च
4. 03:39 GPT-1 और GPT-2 का विकास
5. 04:47 एलन मस्क का ओपन एआई से अलग होना
6. 06:01 फंडिंग संकट और कैप्ड प्रॉफिट मॉडल
7. 07:11 माइक्रोसॉफ्ट का निवेश और GPT-2 की सफलता
8. 08:24 चैट जीपीटी की लोकप्रियता और तेजी से वृद्धि
9. 09:31 चैट जीपीटी की सरलता और सामाजिक प्रभाव

Answers

## Questions about this video

चैट जीपीटी की सफलता का मुख्य कारण क्या है?

चैट जीपीटी की सफलता का मुख्य कारण इसकी सरलता और यूजर फ्रेंडली इंटरफेस है, जिससे हर उम्र और तकनीकी ज्ञान वाले लोग इसे आसानी से उपयोग कर सकते हैं।

ओपन एआई ने कैप्ड प्रॉफिट मॉडल क्यों अपनाया?

फंडिंग की कमी और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ओपन एआई ने कैप्ड प्रॉफिट मॉडल अपनाया ताकि कंपनी रिसर्च पर फोकस रख सके और निवेशकों को सीमित लाभ दे सके।

एलन मस्क ने ओपन एआई क्यों छोड़ा?

एलन मस्क ने टेस्ला के ऑटोनॉमस ड्राइविंग प्रोग्राम के कारण और कंपनी के स्वतंत्र रहने के विजन के टकराव के चलते 2018 में ओपन एआई छोड़ दिया।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

चैट जीपीटी 21वीं सदी का सबसे बड़ा इन्वेंशन है। स्टेफन हॉकिंग ने चेतावनी दी कि एआई इंसानियत का सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। एलन मस्क ने भी कहा कि एआई न्यूक्लियर वेपन से भी ज्यादा खतरनाक है। लेकिन आज इतने कंट्रोवर्सीज के बावजूद चैट जीपीटी के पास

00:17

Speaker A

700 मिलियन से ज्यादा वीकली यूज़र्स हैं, हर दिन 1 बिलियन से ज्यादा रिक्वेस्ट और एआई मार्केट का 80% हिस्सा है। तो बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये चैट जीपीटी इतना सक्सेसफुल हुआ कैसे? क्यों कोई भी कॉम्पिटिटर इसे हरा नहीं पाया और कैसे इसने

00:33

Speaker A

ढेरों मासूम बच्चों को मौत की तरफ धकेला? चलिए चैट जीपीटी की पूरी स्टोरी को हम डिटेल में जानते हैं। तो दोस्तों, कहानी की शुरुआत होती है साल 2015 से जब एआई मौजूद तो था, लेकिन उसका ज्यादातर इस्तेमाल लैब्स और बड़ी टेक

00:51

Speaker A

कंपनियों तक ही लिमिटेड हुआ करती थी। Google, Facebook और Microsoft जैसी कंपनियां जरूर रिसर्च कर रही थीं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई भी एआई सामने नहीं आया था जो कि आम लोगों के लिए सच में गेम चेंजर साबित हो

01:03

Speaker A

सके। इसी दौरान एक रात सैम ऑल्टमैन एलन मस्क से मिले। आपको बताते चलें कि सैम ऑल्टमैन वाई कॉम्बिनेटर के प्रेसिडेंट थे। जहां से Airbnb, Dropbox, Reddit और Quora जैसे बहुत से सक्सेसफुल स्टार्टअप्स निकले हैं। एक्चुअली वाई कॉम्बिनेटर एक

01:19

Speaker A

ऐसा प्रोग्राम है जो कि नए स्टार्टअप्स को फंड और सपोर्ट देता है। यहां सैम का सपना था एक ऐसा एआई बनाना जो एजुकेशन, हेल्थकेयर, कोडिंग, राइटिंग और रिसर्च जैसे हर फील्ड में लोगों की मदद कर सके। एलन मस्क

01:33

Speaker A

को भी उनका यह आईडिया काफी पसंद आया। इसीलिए उन्होंने $1 बिलियन के इन्वेस्टमेंट का वादा किया। उनके साथ ही दुनिया के कुछ सबसे बड़े टेक लीडर्स ने भी अपना हाथ बढ़ाया। जिसमें LinkedIn के कोफाउंडर रेड हॉपमैन और PayPal के

01:46

Speaker A

कोफाउंडर पीटर थिएल के साथ-साथ Amazon वेब सर्विसेज, Infosys और वाईसी रिसर्च जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। और फिर इस तरह 8 दिसंबर 2015 को एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के रूप में ओपन एआई की नींव रखी गई। जिसका मकसद साफ था कि एआई का फायदा

02:04

Speaker A

सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट्स तक सीमित ना रहे बल्कि आम इंसान तक भी यह पहुंचे। और दोस्तों आगे चलकर यही ओपन एआई दुनिया को हिला कर रख देने वाला चैट जीपीटी लॉन्च करने वाली थी। लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले

02:17

Speaker A

कंपनी ने कई सारे और भी प्लेटफॉर्म्स और टूल्स लॉन्च किए थे। जैसे 2016 में ओपन एआई लेकर आई थी दो खास टूल्स जिम और यूनिवर्स जिनके जरिए कंप्यूटर को अलग-अलग गेम्स और ऐप सीखने की ट्रेनिंग दी जाती थी। यह

02:31

Speaker A

टूल्स इतने एडवांस थे कि इनकी हेल्प से कंप्यूटर GTA5 जैसे मुश्किल गेम को भी आसानी से समझ कर खेल सकता था। इसके बाद 2017 में ओपन एआई बेसलाइन लॉन्च किया गया जो कि रीइंफोर्समेंट लर्निंग एल्गोरिदम की एक लाइब्रेरी थी। आसान भाषा में कहें तो एआई

02:48

Speaker A

रिसर्चर्स कोई भी नया एक्सपेरिमेंट करते थे तो उन्हें हर बार शुरुआत से पूरी मेहनत करनी पड़ती थी। जबकि बेसलाइन में पहले से ही टेस्टेड और सही तरीके से काम करने वाले एल्गोरिदम्स मौजूद थे। इससे फायदा यह हुआ

03:00

Speaker A

कि दुनिया भर के रिसर्चर्स और डेवलपर्स शुरू से रिसर्च ना करके यहां से ही एल्गोरिदम्स को देख लेते थे। जिससे उनका टाइम तो बचता ही था। साथ ही रिसर्च भी फास्ट हो जाती थी और ज्यादा से ज्यादा लोग

03:13

Speaker A

आसानी से एआई के फील्ड में कंट्रीब्यूट कर पाते थे। लेकिन सबसे बड़ी पहचान कंपनी को 2018 में मिली क्योंकि यही वो साल था जब ओपन एआई ने दुनिया के सामने इंट्रोड्यूस किया जेपीटी-1 को। यह एक ऐसा मॉडल था जो

03:27

Speaker A

पहले से ही लाखों सेंटेंसेस और टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया था। जब भी आप इसे कोई इनपुट देते थे तो यह उस ट्रेनिंग के आधार पर अगला शब्द प्रेडिक्ट करता और पूरा सेंटेंस जनरेट कर देता था। अब भले ही यह

03:39

Speaker A

मॉडल छोटा था लेकिन एक नई क्रांति की शुरुआत जरूर हो चुकी थी क्योंकि ओपन एआई अब काम कर रही थी अगले बड़े स्टेप पर यानी जीपीटी-2 पर जो कि इससे भी कहीं ज्यादा पावरफुल होने वाला था। लेकिन ठीक इसी बीच

03:53

Speaker A

एक ऐसा झटका लगा जिसने कंपनी की नींव हिला कर रख दी। एक्चुअली 20 फरवरी 2018 को ईलॉन मस्क ने ओपन एआई से एग्जिट ले ली। उन्होंने अपने जाने का रीजन बताया टेस्ला का अपना ऑटोनॉमस ड्राइविंग प्रोग्राम। मतलब कि टेस्ला और ओपन एआई दोनों ही एआई

04:10

Speaker A

रिसर्च कर रहे थे और मस्क को लगा कि यह सीधे टक्कर वाली सिचुएशन है। यहां सबसे बड़ा कॉन्फ्लिक्ट यह था कि दुनिया के टॉप एआई इंजीनियर्स टेस्ला में काम करेंगे या फिर ओपन एआई में। लेकिन दोस्तों, यहां एक

04:22

Speaker A

कहानी का दूसरा पहलू भी है। असल में ओपन एआई के कई सारे एंप्लाइज का यह मानना है कि ईलॉन मस्क के एग्जिट का असल रीजन टेस्ला नहीं बल्कि कुछ और ही था। कहा जाता है कि मस्क चाहते थे कि ओपन एआई को टेस्ला

04:35

Speaker A

के साथ में मर्ज कर दिया जाए ताकि पूरा कंट्रोल उनके हाथ में हो। लेकिन बाकी फाउंडर्स का विजन तो बिल्कुल अलग था। उनका मानना था कि ओपन एआई को हमेशा इंडिपेंडेंट रहना चाहिए ताकि उस पर किसी भी कॉर्पोरेट

04:47

Speaker A

का दबाव ना हो। बस यही बात क्लैश का सबसे बड़ा कारण बनी और आखिरकार एलन मस्क ने कंपनी को छोड़ दिया। लेकिन दोस्तों उनके जाने के बाद सबसे बड़ी प्रॉब्लम सामने आई फंडिंग की। शुरुआत में मस्क ने वादा किया

05:01

Speaker A

था कि वह ओपन एआई में $1 बिलियन की फंडिंग प्रोवाइड करेंगे। लेकिन रियलिटी यह थी कि उन्होंने सिर्फ $45 मिलियन का इन्वेस्टमेंट किया और अब उनके जाने के बाद बाकी अमाउंट मिलने की भी उम्मीद नहीं थी। ऐसे में ओपन एआई के सामने सबसे बड़ा सवाल

05:16

Speaker A

था कि अब आगे क्या करें? इसी प्रॉब्लम से ही बाहर निकलने के लिए 2019 में ओपन एआई अपने स्ट्रक्चर में बदलाव लाया और इस नॉन प्रॉफिट कंपनी को फंडिंग की कमी देखते हुए कैप्ड प्रॉफिट मॉडल में बदल दिया गया।

05:29

Speaker A

इसका मतलब यह था कि ओपन एआई अभी भी रिसर्च ओरिएंटेड ही रही लेकिन इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करने के लिए उन्होंने एक ऐसा ऑप्शन रखा कि ठीक है आप पैसा लगाइए हम आपको प्रॉफिट देंगे लेकिन सिर्फ एक लिमिट तक। इसका मतलब कैप्ड प्रॉफिट मॉडल में कोई

05:45

Speaker A

भी इन्वेस्टर अमीर तो बन सकता था लेकिन अनलिमिटेड पैसे नहीं कमा सकता था। क्योंकि कंपनी का अल्टीमेट गोल प्रॉफिट नहीं बल्कि इंसानियत को फायदा पहुंचाना था। इस प्रॉफिट मॉडल पर शिफ्ट करना कंपनी के लिए काम कर गया और 2019 में उसे माइक्रोसॉफ्ट

06:01

Speaker A

जैसा पावरफुल पार्टनर मिला जिसने $1 बिलियन के इन्वेस्टमेंट किए और साथ ही उन्होंने सुपर कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्रोवाइड किया जिससे बड़े एआई मॉडल्स को ट्रेन करना पहले से भी ज्यादा आसान हो गया। यहीं से ओपन एआई की असली उड़ान शुरू

06:15

Speaker A

हुई और 2019 में जीपीटी-2 लॉन्च कर दिया गया जिसने एआई की दुनिया में हलचल सी मचा दी थी क्योंकि यह सेंटेंसेस और पैराग्राफ्स को बिल्कुल इंसानों की तरह लिख सकता था। यहां तक कि कुछ ही सेकंड्स में न्यूज़ आर्टिकल्स, स्टोरीज और रिसर्च

06:30

Speaker A

पेपर्स तक सब कुछ जनरेट कर सकता था। लेकिन दोस्तों इसकी यही ताकत इसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम भी बन गई थी। क्योंकि ओपन एआई को डर था कि अगर इसे सीधे पब्लिक कर दिया गया तो लोग इसका गलत इस्तेमाल करेंगे। जैसे

06:43

Speaker A

फेक न्यूज़ बनाना, स्पैम क्रिएट करना या फिर गलत जानकारी फैलाना। इसीलिए शुरुआत में ओपन एआई ने सिर्फ छोटा वर्जन रिलीज़ किया और पूरा मॉडल अपने ही पास रखा। हालांकि कुछ महीनों बाद जब उन्हें लगा कि यह उतना खतरनाक नहीं है जितना उन्होंने

06:58

Speaker A

सोच रखा था तो फिर जीपीटी-2 के फुल वर्जन को पब्लिक के लिए रिलीज़ कर दिया गया। यह उस टाइम रिसर्चर्स और डेवलपर्स के लिए एक बहुत बड़ा मोमेंट था। क्योंकि पहली बार उनके पास एक ऐसा एआई था जो इंसानों की तरह

07:11

Speaker A

लंबा, लॉजिकल और रीडेबल टेक्स्ट लिख सकता था। लेकिन फिर आया साल 2020 जब कंपनी ने जीपीटी-3 को इंट्रोड्यूस किया जो कि जीपीटी-2 के मुकाबले और भी ज्यादा पावरफुल और एक्यूरेट था। लेकिन यहां एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम भी थी कि GPT-3 भले ही दुनिया का

07:27

Speaker A

सबसे पावरफुल एआई मॉडल बन चुका था लेकिन इसे आम आदमी डायरेक्टली यूज नहीं कर पा रहा था। असल में इसे इस्तेमाल करने के लिए पहले पूरा मॉडल अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड करना पड़ता था और फिर उसे चलाने के लिए

07:40

Speaker A

चाहिए होती थी मजबूत प्रोग्रामिंग नॉलेज। और फिर इसी दौरान कंपनी ने सोचा कि क्यों ना इस टेक्नोलॉजी को एक चैटबॉट की तरह दुनिया के सामने पेश किया जाए। एक ऐसा चैटबॉट जिसमें कोई भी इंसान नॉर्मल कन्वर्सेशन की तरह बात कर सके बिना किसी

07:55

Speaker A

कोडिंग या टेक्निकल नॉलेज के। और दोस्तों इसी सोच ने ही जन्म दिया चैट जीपीटी को जो कि इनिशियली जीपीटी 3.5 पर बेस्ड था। चैट जीपीटी को 30 नवंबर 2022 को पब्लिक के लिए रिलीज किया गया था और यहीं से शुरू हुआ

08:09

Speaker A

असली एआई रिवॉल्यूशन। वो रिवॉल्यूशन जिसने एजुकेशन, काम करने का तरीका, रिसर्च, बिजनेस और क्रिएटिविटी सबको बदल कर रख दिया। शुरुआत में किसी को भी अंदाजा नहीं था कि चैट जीपीटी दुनिया का सबसे तेजी से ग्रो करने वाला प्रोडक्ट बन जाएगा। लेकिन

08:24

Speaker A

लॉन्च होते ही सिर्फ 5 दिनों में ही इसने 1 मिलियन यूज़र्स क्रॉस कर लिए। जबकि यह माइलस्टोन अचीव करने में Instagram को लगे 2 साल और Netflix को 3 साल। इतना ही नहीं सिर्फ 2 महीने में 100 मिलियन यूज़र्स

08:39

Speaker A

गेन करके यह हिस्ट्री का फास्टेस्ट ग्रोइंग कंज्यूमर सॉफ्टवेयर भी बन गया था। लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर इतनी तेजी से यह पॉपुलर हुआ कैसे? वेल दोस्तों, इसकी सबसे बड़ी वजह थी सिंप्लिसिटी। चैट जीपीटी का इंटरफेस इतना आसान था कि इसे बच्चों से

08:54

Speaker A

लेकर बड़ी उम्र के लोगों तक हर कोई आराम से चला सकता था। चाहे वो टेक जानता हो या नहीं। बस एक सवाल टाइप करिए और सेकंड्स में एकदम इंसान जैसी लैंग्वेज में जवाब मिल जाता था। दूसर

09:06

Speaker A

लॉन्च के टाइम ओपन AI ने इसे बिल्कुल फ्री रखा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे ट्राई कर सकें और जब लोगों ने देखा कि यह तो Google से भी फास्ट और स्मार्ट जवाब दे रहा है तो फिर हर कोई इसे टेस्ट करने लगा।

09:19

Speaker A

तीसरी और सबसे गेम चेंजिंग वजह थी इसका इंसानों जैसा कन्वर्सेशन। पहली बार किसी एआई से बात करके ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी इंसान से बात कर रहे हो। ना कोई रोबोटिक टोन और ना ही घिसे पिटे बोरिंग

09:31

Speaker A

आंसर्स बल्कि यह नेचुरल और कन्वर्सेशनल स्टाइल में रिस्पांस देता था। यही वजह थी कि लोग एक्साइटेड होकर इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे। Twitter, Redit, Instagram हर जगह पर चैट जेपीटी ट्रेंड करने लगा। यहां तक कि मीम्स भी

09:46

Speaker A

बनने लगे थे कि Google इज डेड चैट जेपीटी इज हियर। और फिर देखते ही देखते चैट जेपीटी सिर्फ टेक वर्ल्ड के लोगों का टूल नहीं रहा बल्कि आम लोगों का भी दोस्त बन गया। स्टूडेंट्स इसे होमवर्क और असाइनमेंट्स लिखवाने के लिए यूज करने लगे।

10:00

Speaker A

कोडर्स ने इसका इस्तेमाल बग फिक्स और कोड जनरेट करने के लिए किया। राइटर्स और यूर्स को कंटेंट आइडियाज और रिसर्च मटेरियल्स मिलने लगे और बिजनेस प्रोफेशनल्स ईमेल प्रेजेंटेशन और रिपोर्ट तक चैट जेपीटी से बनवाने लगे। यानी एक ही प्रोडक्ट लेकिन

10:16

Speaker A

अलग-अलग फील्ड्स के लोग उसे अलग-अलग तरीके से यूज कर रहे थे। और यही वर्सटाइलिटी चैट जीपीटी की सबसे बड़ी ताकत बन गई। लेकिन दोस्तों, जितनी तेजी से चैट जेपीटी को सक्सेस मिली, उतनी ही तेजी से वह प्रॉब्लम्स में भी फंसने लगा। असल में चैट

10:31

Speaker A

जीपीटी के सामने तीन बड़े चैलेंजेस एक साथ खड़े हो गए। टेक्निकल, एथिकल और फाइनेंशियल। इसके टेक्निकल इशू को इंडस्ट्री में हेलुसिनेशन कहा गया। यहां हेलुसिनेशन का मतलब था गलत जवाब देना वो भी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ। यह प्रॉब्लम

10:47

Speaker A

इसलिए आती थी क्योंकि चैट जेपीटी का काम है दिए गए कॉन्टेस्ट के बाद से अगला शब्द प्रेडिक्ट करना। लेकिन यह एक फैक्ट चेककर नहीं था। अगर ट्रेनिंग डाटा में कहीं पर भी गलत जानकारी मौजूद है तो यह उसे भी

10:59

Speaker A

रिप्रोड्यूस कर देता था और यही कारण था कि कंपनी को कई बार क्रिटिसिज्म भी झेलना पड़ा। दूसरा बड़ा चैलेंज था बायस और एथिक्स। अब चैट जीपीटी को इंटरनेट के डाटा पर ट्रेन किया गया था और हम सब जानते हैं

11:12

Speaker A

कि इंटरनेट पर हर तरह की सोच यानी सही और गलत दोनों मौजूद होते हैं। इसी वजह से चैट जीपीटी कभी-कभी ऐसे जवाब भी देता था जिनमें साफ-साफ पक्षपात नजर आता था। जैसे कि किसी कम्युनिटी के बारे में गलत बातें

11:25

Speaker A

फैलाना हो और किसी सेंसिटिव इशू पर एकतरफा व्यू जो कि काफी डेंजरस था क्योंकि इससे डिस्क्रिमिनेशन लोगों की रेपुटेशन को नुकसान या फिर पॉलिटिकल मैनपुलेशन तक हो सकता था। और दोस्तों बस यहीं से एक बड़ी डिबेट शुरू हो गई कि आखिर एआई कितना फ्री

11:41

Speaker A

होना चाहिए। कौन डिसाइड करेगा कि आखिर क्या फिल्टर करना है और क्या अलव करना है। अब आती है तीसरी और सबसे बड़ी प्रॉब्लम फाइनेंशियल स्ट्रगल की। चैट जीपीटी को चलाना सस्ता काम नहीं है। हर क्वेरी के पीछे जीपीयू सर्वर्स, बिजली स्टोरेज और

11:57

Speaker A

मेंटेनेंस की भारी कॉस्ट लगती है। इसीलिए जब यह वायरल हुआ और लाखों लोग इसे रोज यूज करने लगे तो कंपनी का खर्चा भी आसमान छूने लगा। जैसा कि एक रिपोर्ट के अकॉर्डिंग चैट जीपीटी के सर्वर्स चलाने के लिए डेली लगभग

12:10

Speaker A

$ लाख खर्च करने पड़ते हैं। मतलब 5 से $ करोड़ रोज। यहां तक कि सैम ऑल्टमैन का भी कहना है कि आपके सिर्फ प्लीज और थैंक यू कहने से ही चैट जीपीटी को मिलियन डॉलर्स का खर्चा उठाना पड़ रहा है। इस वजह से ओपन

12:23

Speaker A

एi रेवेन्यू जनरेट करने के लिए नए-नए रास्ते तलाश करने लगा और साल 2023 में चैट जीपीटी प्लस सब्सक्रिप्शन को इंट्रोड्यूस किया गया जिसका अमाउंट था $20। इस प्लान के तहत ओपन एi ने चैट GPT प्लस यूज़र्स के लिए GPT4 ल्च किया जो कि GPT 3.5 से कहीं

12:42

Speaker A

ज्यादा एक्यूरेट आंसर्स देता था। लेकिन दोस्तों चैट जीपीटी अभी अपने स्ट्रगल से बाहर निकलने का रास्ता खोज ही रहा था कि तभी एक बड़ी खबर आई कि Google भी अपना एi चैटबोट ल्च करने जा रहा है जिसका नाम रखा

12:54

Speaker A

गया था बर्ड जैसे ही यह खबर आई लोगों को लगने लगा कि ऐप चैट जेपीटी का गेम ओवर है क्योंकि Google ही वो कंपनी है जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन और डाटा मौजूद है। लेकिन जब बार्ड लॉन्च हुआ तो

13:06

Speaker A

पिक्चर पूरी तरह से पलट गई। बाड ने पहले ही पब्लिक डेमो में सवाल का गलत जवाब दे दिया जो कि इतना बड़ा ब्लंडर बना कि Google की क्रेडिबिलिटी तक हिल गई और अगले ही दिन इसके मार्केट वैल्यू से अरबों डॉलर

13:19

Speaker A

साफ हो गए। यहीं से लोगों का भरोसा चैट जीपीटी पर और भी मजबूत हो गया और बा उल्टा चैट जीपीटी के लिए बूस्टर साबित हुआ। यहां तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था और ओपन एi अपने अगले मॉडल पर रिसर्च करने में लगा

13:33

Speaker A

हुआ था। लेकिन फिर तभी इसी साल यानी नवंबर 2023 में अचानक टेक दुनिया में एक ऐसा धमाका हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। असल में 17 नवंबर 2023 को सैम ऑल्टमैन को अचानक एक Google मीट पर बुलाया

13:47

Speaker A

गया और वहां उन्हें बताया गया कि आप ओपन एi के सीईओ नहीं रहे। इतना बड़ा फैसला इतनी जल्दी में लिया गया था कि ऑल्टमैन खुद ही शॉक्ड रह गए थे। और इस फैसले का इंपैक्ट यह हुआ कि ग्रेक ब्रॉकमैन जो कि

14:00

Speaker A

कोफाउंडर थे और उस वक्त कंपनी के चेयरमैन की पोजीशन संभाल रहे थे। उन्होंने भी बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ जाते हुए इस्तीफा दे दिया। अचानक से हुए इस एक्शन के बाद इन्वेस्टर्स और एंप्लाइज सब हैरान थे। पूरी दुनिया शॉक में थी कि एआई का

14:14

Speaker A

सबसे बड़ा चेहरा अचानक गेम से बाहर कैसे हो गया। इसके जवाब में बोर्ड ने कहा कि सैम ऑल्टमैन हर बार बोर्ड को पूरी सच्चाई नहीं बताते थे। कई बार बातें छुपाते थे और सिर्फ सेलेक्टिव इंफॉर्मेशन शेयर करते थे।

14:28

Speaker A

लेकिन बोर्ड के एक्सप्लेनेशन के बाद भी कंपनी के अंदर एक विद्रोह शुरू हो गया और लगभग पूरे स्टाफ ने डिमांड की कि या तो सैम ऑल्टमैन को वापस लाओ या फिर हम सभी रिजाइन दे देंगे। इतना प्रेशर बिल्ड हुआ

14:40

Speaker A

कि आखिरकार बोर्ड को झुकना पड़ गया। बोर्ड का पूरा स्ट्रक्चर बदल दिया गया। पुराने मेंबर्स हटा दिए गए और सिर्फ 5 दिन बाद सैम ऑल्टमैन फिर से ओपन एआई के सीईओ बन गए। और इस तरह एक बड़े कोलैप से बचकर

14:53

Speaker A

कंपनी वापस से ट्रैक पर आ गई। इसके बाद से ओपन एi ने अपनी इमेज जनरेशन मॉडल डेल e3 को भी चैट जीपीटी में इंटीग्रेट कर दिया और यह फीचर लॉन्च होते ही काफी पॉपुलर हुआ क्योंकि लोगों को पहली बार एहसास हुआ था

15:07

Speaker A

कि इमेजिनेशन की कोई सीमा नहीं और अब सिर्फ टेक्स्ट लिखकर वह अपनी सोच को इमेज में बदल सकते थे। आर्टिस्ट, स्टूडेंट, मार्केटर्स सबके लिए यहां पर एक नया दौर शुरू हो गया। जहां क्रिएटिविटी के दरवाजे पूरी तरह से खुल चुके थे। चैट जीपीटी

15:22

Speaker A

लगातार आगे बढ़ रहा था और इसकी ग्रोथ को देखते हुए सभी को यह समझ आ गया था कि फ्यूचर एi का ही होने वाला है। इसीलिए टेक वर्ल्ड के बड़े-बड़े जॉइंट्स भी इसमें उतरने लगे और चैट जीपीटी का कंपटीशन बढ़ता

15:35

Speaker A

चला गया। इस कंपटीशन में सबसे पहले कूदे एलन मस्क नवंबर 2023 में उन्होंने अपना एआई चैटबॉट ग्रॉक को लॉन्च किया। इस एi चैटबॉट को एक्स के रियल टाइम डाटा के साथ में जोड़ा गया। इसीलिए यह बहुत ही एक्यूरेट रिस्पांस देता था। ऐसे में

15:51

Speaker A

दोस्तों Google भी भला कहां पीछे रहता। फरवरी 2024 में उसने बा को रिब्रांड करके जैेमिनी के नाम से पेश किया जो कि बा से काफी फास्ट और एक्यूरेट था। इसीलिए बा से Google की जो बदनामी हुई थी उसे जैेमिनी

16:05

Speaker A

ने काफी हद तक कवर कर दिया। लेकिन फिर इसी दौरान 10 जनवरी 2025 को एक और नया कॉम्पिटिट मार्केट में उतरा जो था चाइना का डीप सीक। इसका हाइप बहुत जबरदस्त था। यहां तक कि हर कोई इसे चैट जीपीटी से भी

16:19

Speaker A

ज्यादा पावरफुल मान रहा था। और इसी हाइप की ही बदौलत सिर्फ 17 दिनों के अंदर इसने अमेरिका में iOS ऐप स्टोर पर चैट जीपीटी को भी पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले फ्री ऐप का खिताब अपने

16:32

Speaker A

नाम कर लिया। लेकिन दोस्तों इसके जवाब में चैट जीपीटी भी शांत नहीं रहा। उसने अपना डीप रिसर्च फीचर ल्च कर दिया जो कि ज्यादा इनेटिव और एक्यूरेट रिजल्ट निकाल कर देता है। और दोस्तों अभी हाल ही में ओपन एi ने

16:45

Speaker A

अपना जीपीटी5 मॉडल भी इंट्रोड्यूस किया है जो कि चैट जीपीटी के पिछले सभी मॉडल्स से बहुत बेहतर है। इतना ही नहीं चैट GPT के पास ग्लोबली 80.92% मार्केट शेयर है। जबकि Microsoft को पायलट जो इसी का GPT4 मॉडल यूज कर रहा है। उसके

17:01

Speaker A

पास 5.19% डीप सीक के पास 2.75% और Google जैमिनी के पास सिर्फ 2.19% है। कुल मिलाजुलाकर चैट जेपीटी का फिलहाल कोई भी मुकाबला नहीं है। लेकिन दोस्तों जहां एक तरफ चैट जेपीटी ने हमारी जिंदगी आसान बनाई है, वहीं इसका एक खतरनाक पहलू भी

17:19

Speaker A

सामने आया है और वो है चैट जेपीटी से जुड़ी हुई मौतें। 11 अप्रैल 2025 को कैलिफोर्निया में 16 साल का एडमम रैन अचानक से कर बैठा। उसके घर में कोई भी झगड़ा नहीं हुआ था। इसीलिए यह सबके लिए

17:32

Speaker A

शॉकिंग था। बाद में जब पेरेंट्स ने उसके चैट्स देखे तो पता चला कि एडमम अपने आखिरी दिनों में सबसे ज्यादा चैट जेपीटी से ही बात कर रहा था। उसने चैट जेपीटी को अपने कमरे में लगाए गए एक फंदे की फोटो भेजी और

17:45

Speaker A

पूछा, क्या यह काम करेगा? चैट जेपीटी ने जवाब दिया, हां, इसमें कोई बुराई नहीं है। क्या मैं इसे और मजबूत बनाने में मदद करूं? और फिर कुछ घंटों बाद उसकी मां ने उसे उसी जगह पर लटका हुआ पाया। फैमिली ने

17:58

Speaker A

ओपन एआई पर केस किया तो फिर कंपनी का रिस्पांस आया कि चैट जेपीटी हर बार सेंसिटिव या इमोशनल केसेस को सही तरह से हैंडल नहीं कर पाता। और दोस्तों यह अकेला मामला नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में

18:09

Speaker A

ऐसे और भी केसेस सामने आए हैं जहां लोग एआई से बात करने के बाद से अपनी जान तक गवा बैठे हैं। यानी अब असली सवाल यह है कि फ्यूचर में चैट जीपीटी और एआई हमारी जिंदगी आसान बनाएंगे या फिर हमारे लिए

18:22

Speaker A

मुश्किल बन जाएंगे। आप अपना ओपिनियन भी हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा।

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