**Carnatic Wars in Hindi | Modern History of India | UPSC — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/carnatic-wars-modern-history-india-upsc/

यह वीडियो कार्नाटिक युद्धों और ब्रिटिश-फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनियों के संघर्ष को विस्तार से हिंदी में समझाता है।

## Key Takeaways

- कार्नाटिक युद्ध भारत में ब्रिटिश और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनियों के बीच सत्ता संघर्ष का प्रमुख उदाहरण हैं।
- स्थानीय भारतीय नवाब और शासक भी इन युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
- यूरोप में युद्धों का प्रभाव भारत की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ा।
- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंततः भारत में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
- 1748 की संधि ने भारत में युद्ध विराम और कुछ क्षेत्रों का पुनर्वितरण सुनिश्चित किया।

## What the video covers

- 1617 से भारत में कई यूरोपीय ट्रेडिंग कंपनियों का उदय हुआ, जिनमें ब्रिटिश और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनियां प्रमुख थीं।
- ब्रिटिश और फ्रेंच कंपनियों के बीच भारत में वर्चस्व की लड़ाई कार्नाटिक युद्धों के रूप में जानी जाती है।
- 1721 में मार्तंड वर्मा ने चीनी कंपनी को पराजित किया और भारत में दो मुख्य यूरोपीय कंपनियां रह गईं।
- फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1746 में मद्रास पर कब्जा कर ब्रिटिशों को कड़ी टक्कर दी।
- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने फोर्ट सेंट जॉर्ज और फोर्ट सेंट डेविड जैसे मजबूत किले बनाए।
- कार्नाटिक युद्धों में स्थानीय नवाबों और यूरोपीय कंपनियों के बीच गठजोड़ और संघर्ष हुआ।
- 1748 में ऑस्ट्रियन वार के कारण यूरोप में शांति बनी, जिससे भारत में भी युद्ध विराम हुआ।
- ट्रीटी ऑफ अक्स-ला-चापेल के तहत फ्रेंच को मद्रास वापस करना पड़ा और ब्रिटिशों ने अपनी स्थिति मजबूत की।
- मुगल साम्राज्य के कमजोर पड़ने से स्थानीय शासकों और यूरोपीय कंपनियों के बीच सत्ता संघर्ष बढ़ा।
- 1750 के दशक में फ्रेंच और ब्रिटिश कंपनियों के बीच कई युद्ध हुए, जिनका परिणाम भारत में ब्रिटिश प्रभुत्व की ओर बढ़ना था।

## Chapters

1. 00:00 परिचय और प्रारंभिक यूरोपीय कंपनियां
2. 01:32 ब्रिटिश और फ्रेंच कंपनियों का संघर्ष
3. 03:09 मद्रास और पांडिचेरी के किले
4. 04:53 पहला कार्नाटिक युद्ध और इंडियन ओशन संघर्ष
5. 06:23 स्थानीय नवाबों और यूरोपीय कंपनियों के गठजोड़
6. 08:21 यूरोप में युद्ध और भारत पर प्रभाव
7. 09:49 1748 की संधि और युद्ध विराम
8. 12:40 मुगल साम्राज्य का पतन और स्थानीय सत्ता संघर्ष

Answers

## Questions about this video

कार्नाटिक युद्ध क्या थे?

कार्नाटिक युद्ध भारत में ब्रिटिश और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनियों के बीच 18वीं सदी के मध्य हुए संघर्ष थे, जिनका मुख्य उद्देश्य भारत में राजनीतिक और व्यापारिक वर्चस्व स्थापित करना था।

ब्रिटिश और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनियों के बीच संघर्ष क्यों हुआ?

दोनों कंपनियां भारत में व्यापार और क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही थीं, जिससे कई युद्ध और राजनीतिक गठजोड़ हुए।

1748 की संधि का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

1748 की संधि के बाद युद्ध विराम हुआ और फ्रेंच को मद्रास वापस करना पड़ा, जिससे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की भारत में स्थिति मजबूत हुई।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

हेलो हेलो फ्रेंड्स, आज की वीडियो में हम लोग तीनों का नेटिव वॉर स्कोर डिटेल में कवर करेंगे। स्टार्ट करते हैं फर्स्ट का। नोट एक, वोट से साल 1617 आती रहती है। इंडिया में बहुत सारे देशों की इंडिया कंपनी राजू मीणा उनमें से चार कंपनी जो

00:15

Speaker A

मेन थी वह दीप और चिकित्सीय कंपनी दाइची ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी यह चारों बेसिकली ट्रेडिंग कंपनीज थीं और उनमें आपसी व बहन और treatment चलते रहते थे वॉल स्ट्रीट बार और एक-दूसरे से आगे

00:30

Speaker A

मेन थी, वह दीप और चिकित्सीय कंपनी, दाइची ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी। यह चारों बेसिकली ट्रेडिंग कंपनीज थीं और उनमें आपसी व बहन और ट्रीटमेंट चलते रहते थे। वॉल स्ट्रीट बार और एक-दूसरे से आगे

00:44

Speaker A

लड़की वाले जो है वह ट्वीट बार की रेस से बाहर हो गया और इसके बॉर्डर चीट इंडिया कंपनी के पीछे पड़े हुए हों और के राजा मार्तंड वर्मा ने 1721 में बटन ऑफ असल में द चीनी कंपनी को बहुत ही बुरी तरह

01:03

Speaker A

निकलने की रेस से वार्डो की चीज और 10 ने अपने आपको अलग कर लिया है। इसलिए हुआ क्योंकि साल 1661 में इंग्लैंड के चार्ल्स तूने वर्चुअल के राजा जौनपुर की बेटी के साथ शादी कर ली और इस तरह पर छिपकलियां

01:19

Speaker A

बाद डर चीज इंडिया कंपनी भी गेम से आउट हो गई तो अब इंडिया में दो ही यूरोपियन कमीशन के बीच वर्चस्व की लड़ाई होनी थी और यह दो कंपनी सीओ फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी फ्रेंच ईस्ट

01:32

Speaker A

लड़की वाले जो है, वह ट्वीट बार की रेस से बाहर हो गया और इसके बॉर्डर चीट इंडिया कंपनी के पीछे पड़े हुए हों। और के राजा मार्तंड वर्मा ने 1721 में बटन ऑफ असल में द चीनी कंपनी को बहुत ही बुरी तरह

01:47

Speaker A

यानी इन दोनों कंपनियों के जो मेन सेटलमेंट से वह कार्नेटिक क्वेश्चन में काइनेटिक बेसिक लिए वेस्ट बंगाल और ईस्टर्न घटस के बीच के रीजन को कहा जाता है और 1744 में यहां के नवाब बने अन 13 अब हुआ था कि 1740 से 0.1 बॉक्सिंग चल

02:05

Speaker A

हरा दिया। चीनी कंपनी को यहां पर सरेंडर करना पड़ा और इसके बाद सेंटर्स ईस्ट इंडिया कंपनी में अपना ज्यादातर कारोबार जो है वह इंडिया से शूट कर लिया और इंडोनेशिया और मलयेशिया को अपना नया देश बना लिया। तो इस तरह बैटल आफ गुलाब जल के

02:21

Speaker A

में विपणन साल से 145 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इंडियन ओशन में खड़े फ्रेंडशिप पर अटैक कर दिया था है और इसी के साथ फर्स्ट काइनेटिक वर्ग की शुरुआत हो गई अब जवाब देने की बारी थी फ्रंट ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर धूप

02:38

Speaker A

बाद डर चीज इंडिया कंपनी भी गेम से आउट हो गई। तो अब इंडिया में दो ही यूरोपियन कमीशन के बीच वर्चस्व की लड़ाई होनी थी और यह दो कंपनी सीओ फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी। फ्रेंच ईस्ट

02:51

Speaker A

पहुंच गया और फिर ब्रिटिश टिप्स को तहस-नहस कर दिया और इतना ही नहीं सप्टेंबर 1746 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास को भी कैप्चर कर लिया है है और यहां पर बहुत सारी ब्रिटिश उसको प्रिजनर्स और बना कर रख दिया ब्रिटिशर्स

03:09

Speaker A

इंडिया कंपनी ने अपने सेटलमेंट बनाए थे पांडिचेरी और कई कल में, जबकि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने दो कॉर्ड्स बनाएं फोर्ट सेंट जॉर्ज जो कि आगे चलकर मद्रास बना और फोर्ट सेंट डेविड जो कि कल उठना जाता है।

03:31

Speaker A

इसीलिए उन्हें कुछ दिन शांत बैठा प्रॉमिस पूरा नहीं किया तो 6 मद्रास को कैप्चर करने के लिए उद्दीन और फिर यहां पर नदी के किनारे फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की छोटी सी जिसमें मात्र 40 उन्होंने अनवरुद्दीन 10,000 की खोज को बुरी तरह से खदेड़ दिया

03:54

Speaker A

यानी इन दोनों कंपनियों के जो मेन सेटलमेंट से वह कार्नेटिक क्वेश्चन में काइनेटिक बेसिक लिए वेस्ट बंगाल और ईस्टर्न घटस के बीच के रीजन को कहा जाता है। और 1744 में यहां के नवाब बने अन 13। अब हुआ था कि 1740 से 0.1 बॉक्सिंग चल

04:14

Speaker A

अकेले पंगा नहीं ले सकता उनका एक सिपाही 10 पर भारी पड़ता है इसके बाद सर्टिफिकेट में यूरोप में ओस्ट्रॉम सेक्शन एंड हो गया और ब्रिटेन और फ्रांस ने इक्विटी फंड की हिस्ट्री का नाम था ट्रीटी आफ 155 ब्रिटेन

04:29

Speaker A

रहा था जहां पर यह डिसाइड होना था कि ऑस्ट्रेलिया की गद्दी पर कौन बैठेगा, जिसमें साल 1744 में ब्रिटेन ने भी एंट्री मिली। तो ब्रिटेन और फ्रांस यूरोप में आमने-सामने आ चुके थे। ब्रिटेन और फ्रांस के बीच इस टेंशन का आंसर जो है वह इंडिया

04:41

Speaker A

टेरिटरी लुइस भर को हथियाया हुआ है उसे फ्रांस को वापस करना होगा लुइस पर बिजली कनाडा का पार्ट है जो उस समय फ्रांस के पास था लेकिन ब्रिटेन ने उसको हथिया लिया था तो ब्रिटेन को इस रोटी के हिसाब से लूज

04:53

Speaker A

में विपणन साल से 145 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इंडियन ओशन में खड़े फ्रेंडशिप पर अटैक कर दिया था। है और इसी के साथ फर्स्ट काइनेटिक वर्ग की शुरुआत हो गई। अब जवाब देने की बारी थी फ्रंट ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर धूप।

05:07

Speaker A

ऑप्शन के कारण शुरू हुई यह फर्स्ट काइनेटिक वॉर ट्रीटी आफ 1 लख पीपल के साथ ही खत्म हो गई अब हम इस पर स्टार्टिंग और को समृद्ध कर लेते हैं यूरोप में ऑस्ट्रियन वषरें के चलते हैं ब्रिटिश ईस्ट

05:20

Speaker A

लेकिन जो प्लेन जो है वह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को ईद का जवाब पत्थर से देना चाहता था। उसने मॉरिशस के फ्रेंच गवर्नर बुद्ध को इनवाइट किया। बुद्ध ने भी तुरंत अपने नेवल फोर्स लेकर बेवकूफ बंगाल की तरफ

05:34

Speaker A

ऑफ़ सेंट होम हुआ था बट 1748 में एक्सिसिबिलिटी के साथ पोस्टिंग और सेक्शन एंड हो गया जिससे इंडिया में भी शांति हुई मगर इस चिट्ठी की शर्तों के अनुसार फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को मद्रास वापस से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को देना पड़ा

05:50

Speaker A

पहुंच गया और फिर ब्रिटिश टिप्स को तहस-नहस कर दिया। और इतना ही नहीं, सप्टेंबर 1746 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास को भी कैप्चर कर लिया है। है और यहां पर बहुत सारी ब्रिटिश उसको प्रिजनर्स और बना कर रख दिया। ब्रिटिशर्स

06:07

Speaker A

कि मुगल बादशाह औरंगजेब के रूल के दौरान मुग़ल एंपायर अपनी पीठ पर था पूरे देश में मुगल परचम लहरा रहा था इतने बड़े एंपायर के एडमिनिस्ट्रेशन के लिए उसने कई सारी प्रॉब्लम्स इसमें अपने गवर्नर नियुक्त किए हुए थे और इन प्रोविंसेस के आसपास के जो

06:23

Speaker A

ने कॉमेडी के नवाब अनवरुद्दीन से मदद मांगी। अनवरुद्दीन ने फ्रेंच गवर्नर डिस्प्ले को बोला कि उसकी एंट्री में किसी भी तरह के कोई भी नहीं चाहिए। शांति उल्टा दिन को अपने यहां से अनुरोध किया कि वह मद्रास को कैप्चर करने के बाद उसी को तो

06:37

Speaker A

लड़खड़ा गया मुग़ल एंपायर को कमज़ोर पड़ता देख कई सारी प्रॉब्लम्स के गवर्नर ने खुद को रोमांस का निर्धारण घोषित कर दिया ऐसे स्टेट्स को सक्सेसर स्टेट्स भी कहा जाता है ऐसा ही एक सबसे स्टेट तक हैदराबाद जहां के गवर्नर ने 1724 में अपने आप को

06:56

Speaker A

इसीलिए उन्हें कुछ दिन शांत बैठा प्रॉमिस पूरा नहीं किया तो 6 मद्रास को कैप्चर करने के लिए उद्दीन और फिर यहां पर नदी के किनारे फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की छोटी सी जिसमें मात्र 40 उन्होंने अनवरुद्दीन 10,000 की खोज को बुरी तरह से खदेड़ दिया।

07:14

Speaker A

समय डिप्टी गवर्नर मोहम्मद सईद ने उसे नोटिस का जवाब दिया और टाइटल दिया इस तरह की शुरुआत हुई और में नव्यत वर्ष का बेटा था इसीलिए उसने अपने गुलाम अली खान के बेटे दोस्त को दोस्त से जुड़ा हुआ तो 1732

07:44

Speaker A

इस बटन को या फिर इसलिए कि यहां पर यह उस जगह का नाम था कि आज की डेट में चेन्नई में संतों में छोटी लोकेलिटी है। बैटल आफ आधार ने अनवरुद्दीन की आंखें खोल दी। अनवरुद्दीन को यह समझ गया कि इन यूरोप इन पावर से वह

08:07

Speaker A

उसकी हत्या कर दी गई प्रॉब्लम यह थी कि सफदर अली खान का बेटा अभी बहुत छोटा था और उधर चंदा साहेब को मराठा उठाकर लेकर और आप चंदा साइज जो है वह छत्रपति शाहू जी के बंधी थे तो अब चंदा साहिब को टर्न ओवर

08:21

Speaker A

अकेले पंगा नहीं ले सकता। उनका एक सिपाही 10 पर भारी पड़ता है। इसके बाद सर्टिफिकेट में यूरोप में ओस्ट्रॉम सेक्शन एंड हो गया और ब्रिटेन और फ्रांस ने इक्विटी फंड की हिस्ट्री का नाम था ट्रीटी आफ 155। ब्रिटेन

08:35

Speaker A

ऐसा ही हुआ यह बच्चा जो साथ अतुला खान टू था वह कार्नेटिक अगले नवाब बना बट साथ-साथ अशोक जाओ फसने अनवरुद्दीन को कार्नेटिक का प्रतिनिधि नियुक्त किया जब तक कि सादा पुलाव टू बड़ा नहीं हो जाता है एंग्री बर्ड ही साल के बौद्ध यानि जुलाई

08:53

Speaker A

और फ्रांस की संधि के कारण इंडिया में उनकी कंपनी के बीच भी अब युद्ध विराम हो चुका था और साथ ही साथ एक्सिसिबिलिटी में फ्रांस और ब्रिटेन के बीच एक सौदा हुआ। सौदा यह था कि ब्रिटेन में जो प्रिंस

09:08

Speaker A

नियुक्त किया गया हमने अभी थोड़ी देर पहले ही देखा कि 1746 में पोस्ट का नेतृत्व के दौरान अधार नदी के किनारे फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की एक छोटी सी टुकड़ी जिसमें मात्र हजार सोल्जर्स होंगे उन्होंने अनवरुद्दीन के 10,000 की फौज को बुरी तरह

09:24

Speaker A

टेरिटरी लुइस भर को हथियाया हुआ है उसे फ्रांस को वापस करना होगा। लुइस पर बिजली कनाडा का पार्ट है जो उस समय फ्रांस के पास था, लेकिन ब्रिटेन ने उसको हथिया लिया था। तो ब्रिटेन को इस रोटी के हिसाब से लूज

09:37

Speaker A

वह मराठाओं की कैद से छूट गए चंदा साइड को जब पता चला कि कर्नाटक के नवाब अब अनवरुद्दीन को बना दिया गया है तो उसके तो होश उड़ गए क्योंकि चंदा साहिब के हिसाब से वह नव्य टेस्टी के

09:49

Speaker A

पर को वापस फ्रांस को देना था और इसके बदले फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को मद्रास वापस से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को देना था। तो अल्टीमेटली लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी गोवा इससे मद्रास मिल गया। तो इस तरह ऑस्ट्रियन

10:02

Speaker A

मिला लिया लेकिन वहीं एक मसला और खड़ा हो गया जून 1748 में आसफ जब फर्स्ट की मृत्यु हो गई या नहीं हैदराबाद में अब निजाम की कुर्सी खाली थी और इस कुर्सी के दावेदार थे से दो लोग नासिर जंग और मुजफ़्फ़र जंग

10:18

Speaker A

ऑप्शन के कारण शुरू हुई यह फर्स्ट काइनेटिक वॉर ट्रीटी आफ 1 लख पीपल के साथ ही खत्म हो गई। अब हम इस पर स्टार्टिंग और को समृद्ध कर लेते हैं। यूरोप में ऑस्ट्रियन वषरें के चलते हैं ब्रिटिश ईस्ट

10:33

Speaker A

जमशेद की नाथ झा का बेटा था इसलिए उसे ही निजाम बनना चाहिए था बट प्रॉब्लम यह थी कि नासिर जंग ने 1741 में आ जाओ फर्स्ट की हत्या करने की कोशिश की बड़ा सब्जियां फोर्स ने उसे मार मार के भगा दिया इसीलिए

10:47

Speaker A

इंडिया कंपनी ने फ्रेंड टिप्स पर अटैक कर दिया। इसके रीटेलियेशन में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी में मद्रास को कैप्चर कर लिया और मद्रास अनवरुद्दीन को भी चाहिए था। इसीलिए फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी और क्वालिटी के नवाब अनवरुद्दीन के बीच बैटल

11:02

Speaker A

अनवरुद्दीन जो की कॉमेडी का नवाब था उसने नासिर जंग को सपोर्ट कर दिया तो मुझे ऑफिस जाने के लिए अनवरुद्दीन आप किसी दुश्मन से कम नहीं था इसीलिए नासिर जंग और अनवरुद्दीन एक तरफ आ गए और दूसरी तरफ था

11:14

Speaker A

ऑफ़ सेंट होम हुआ था। बट 1748 में एक्सिसिबिलिटी के साथ पोस्टिंग और सेक्शन एंड हो गया जिससे इंडिया में भी शांति हुई। मगर इस चिट्ठी की शर्तों के अनुसार फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को मद्रास वापस से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को देना पड़ा।

11:25

Speaker A

इंडिया कंपनी साथ में आ गया था तो इस तरह चंद्र साहिब मुजफ़्फ़र जंग और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी एक टीम बन गए और दूसरी तरफ अनवरुद्दीन और मुजफ्फर जन तो थे ही उन्होंने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के दुश्मन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भी

11:38

Speaker A

अब क्योंकि यह सारे इवेंट्स लड़ाइयां इंडिया के कार्नेटिक रियल में हुई थी, इसीलिए इसे फर्स्ट कार्मिनेटिव और भी कहा जाता है। चलिए अब देखते हैं सेकंड का रिलेटिव और सबसे पहले देखते हैं सेकंड कार्नेटिक व का बैकग्राउंड ईपीएफओ।

11:52

Speaker A

और कोर्ट की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया अनवरुद्दीन यह जानता था कि अगर यह पांच एक बार कोड तक पहुंच गई तो फिर अ रिपोर्ट को कैप्चर होने से बचा नहीं पाएगा इसी लिए अनवरुद्दीन अपनी पूरी तैयारी के साथ अंबार

12:06

Speaker A

कि मुगल बादशाह औरंगजेब के रूल के दौरान मुग़ल एंपायर अपनी पीठ पर था। पूरे देश में मुगल परचम लहरा रहा था। इतने बड़े एंपायर के एडमिनिस्ट्रेशन के लिए उसने कई सारी प्रॉब्लम्स, इसमें अपने गवर्नर नियुक्त किए हुए थे और इन प्रोविंसेस के आसपास के जो

12:24

Speaker A

चंदा साहिब बना कार्नेटिक का अगला नंबर पर चंद्र साहिब के नवाब बनने में सबसे अहम भूमिका थी फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की तो इसीलिए उच्चतम साहिब में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को पांडिचेरी के आसपास के अस्थि गांव दे दिए तो इस तरह बैटल आफ उम्र

12:40

Speaker A

एरिया से उन्हें शोभा कहा जाता था, उन हिस्सों में सब गवर्नर्स या फिर कहें कि डिप्टी गवर्नर स्कॉट करते थे जो प्रोविंसेस के गवर्नर को रिपोर्ट करते थे। बट मुगल एंपरर औरंगज़ेब की शत्रुओं से साथ में मृत्यु हो गई और मुगल साम्राज्य

12:55

Speaker A

खिलाड़ी की तलाश थी अनवरुद्दीन का एक बेटा था वरना जहां नासिर जंग और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अव्वल राज्य को यह विश्वास दिलाया कि वह भला जाकर साथ है और अनवरुद्दीन की मौत का बदला लिया जाएगा इस तरह ब्रिटिश टीम में अव्वल राज्य की

13:11

Speaker A

लड़खड़ा गया। मुग़ल एंपायर को कमज़ोर पड़ता देख कई सारी प्रॉब्लम्स के गवर्नर ने खुद को रोमांस का निर्धारण घोषित कर दिया। ऐसे स्टेट्स को सक्सेसर स्टेट्स भी कहा जाता है। ऐसा ही एक सबसे स्टेट तक हैदराबाद जहां के गवर्नर ने 1724 में अपने आप को

13:24

Speaker A

ब्रिटिश टीम कि यहां पर बहुत ही बुरी हालत हो गई वह घबरा गया और भाग कर जिंदगी के फोटो में छुप गया जिंदगी बेसिकली कार्नेटिक रियर में ही एक जगह है जो मार्किट से अराउंड 80 किलोमीटर दूर होगी

13:36

Speaker A

हैदराबाद का निजाम घोषित कर लिया और टाइटल लिया। निजाम उल-मुल्क आसिफ जान फर्स्ट का हैदराबाद के आसपास और भी सुबह थे जिन पर मुगल काल में डिप्टी गवर्नर नियुक्त है और जो आसफ जाओ फर्स्ट को रिपोर्ट करते थे। ऐसा ही एक सुखमय कार्नेटिक करने में उस

13:49

Speaker A

अतुल बादशाह औरंगजेब को भी इसके लिए को कैप्चर करने में आर्ट साल लग गए थे फ्रेंच टीम ने इस किले की घेराबंदी कर दी और ग्यारह सितंबर 1950 की रात को इस किले पर अटैक कर दिया यो यो प्रिंस कवनो ड्यूप्लिकेट मिलिट्री

14:07

Speaker A

समय डिप्टी गवर्नर मोहम्मद सईद ने उसे नोटिस का जवाब दिया और टाइटल दिया। इस तरह की शुरुआत हुई और में नव्यत वर्ष का बेटा था। इसीलिए उसने अपने गुलाम अली खान के बेटे दोस्त को दोस्त से जुड़ा हुआ तो 1732

14:19

Speaker A

पर आ पहुंचे और इस तरह ब्रिटिश टीम और फ्रेंच टीम दोनों आमने-सामने आ गई और छिड़ गया जिन जी का युद्ध बैटर और जिंदगी में फिर एक बार प्रिंस टीम ब्रिटिश टीम पर भारी पड़े इसी बैटल्स इन जी के दौरान

14:33

Speaker A

में छात्रों की मृत्यु के नवाब दोस्तों का बेटा था। उधर अली खान का हैं और दोस्तों अली का दामाद था। चंदा साहेब दो स्त्री की मृत्यु के बांध सफदर अली खान क्वालिटी का नवाब बना। बट सफदर अली खान बहुत ही अनफॉर्चूनेटली 3142 में ही

14:49

Speaker A

मुजफ़्फ़र जंग को क्योंकि हैदराबाद का नवाब बनने के लिए मुजफ़्फ़र जंग का रास्ता साफ हो गया था इस तरह दिसंबर 1750 को मुजफ्फर जांघों ऑफिशियली हैदराबाद का निजाम घोषित कर दिया गया और फिर एक बार चीटिंग का एक और खिलाड़ी मैदान से बाहर जा

15:06

Speaker A

उसकी हत्या कर दी गई। प्रॉब्लम यह थी कि सफदर अली खान का बेटा अभी बहुत छोटा था और उधर चंदा साहेब को मराठा उठाकर लेकर और आप चंदा साइज जो है वह छत्रपति शाहू जी के बंधी थे। तो अब चंदा साहिब को टर्न ओवर

15:20

Speaker A

इंडिया कंपनी के एक अहम भूमिका थी तो इसके एहसान के बदले मुजफ्फर ने पांडिचेरी के आसपास की बहुत सारी टेरिटरी फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दी फ्री मोड टाउन मसूलीपट्टनम को भी फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया ₹5 फ्रेंच ईस्ट इंडिया

15:35

Speaker A

बनाया नहीं जा सकता था। बड़ी ही दुविधा का समय था। ऐसी सिचुएशन में हैदराबाद के निजाम आसफ जाओ फर्स्ट में इंटरफेयर किया। आज सब्जी फोर्स ने कहा कि कोई दिक्कत की बात नहीं है, इस बच्चे को ही आप नवा बनाइए तो

15:47

Speaker A

रही थी कि यह उबला हुआ कहां गायब हो गया क्योंकि बैटल आफ जिंजर तो हुई इसलिए थी क्योंकि वला जहां पर छुपा हुआ था लेकिन बटन और जिंदगी के बाद भी वरना जाएगा कुछ अता-पता नहीं चला और यह जानना बहुत जरूरी

15:58

Speaker A

ऐसा ही हुआ। यह बच्चा जो साथ अतुला खान टू था वह कार्नेटिक अगले नवाब बना। बट साथ-साथ अशोक जाओ फसने अनवरुद्दीन को कार्नेटिक का प्रतिनिधि नियुक्त किया। जब तक कि सादा पुलाव टू बड़ा नहीं हो जाता है। एंग्री बर्ड ही साल के बौद्ध यानि जुलाई

16:12

Speaker A

आप देख सकते हो कि जिस से काफी दूर निकल आए तो फ्रेंड्स तैयारी कर रही थी कि इतने में ही खबर आई कि मुजफ्फर खान कि लकी अली पास मिलने गए थे वहां पर उनकी हत्या हो गई ना सिर्फ टीम का एक खिलाड़ी था बल्कि

16:31

Speaker A

2018 फॉर में साधु अलग घंटों की भी हत्या कर दी गई और इसी के साथ गारंटी के नवाबों की पहली लाइन अष्टमी नव्यत डायनेस्टी खत्म हो गई। तो अब तो कोई ऑप्शन बचा नहीं था। इसीलिए कार्नेटिक नवाब अनवरुद्दीन को

16:49

Speaker A

नीचे दब गया उसने पूरा का पूरा नॉर्दन सरकार फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के हवाले कर दिया नॉर्दन सरकार बिजली आंध्र प्रदेश के चार डिस्ट्रिक्ट को कहा जाता है यह चार डिस्ट्रिक्ट है मुस्तफानगर वेल्लोर राजमुंद्री और चिकन खोल तो इस तरह

17:05

Speaker A

नियुक्त किया गया। हमने अभी थोड़ी देर पहले ही देखा कि 1746 में पोस्ट का नेतृत्व के दौरान अधार नदी के किनारे फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की एक छोटी सी टुकड़ी जिसमें मात्र हजार सोल्जर्स होंगे, उन्होंने अनवरुद्दीन के 10,000 की फौज को बुरी तरह

17:18

Speaker A

आंधी चल रही है तो फ्रेंड्स हम बिल्कुल बेफिक्र होकर वरला झा की तलाश में त्रिचनापल्ली की तरफ निकल सकती है क्योंकि वहां पर छुपा हुआ था वरना जहां फ्रेंच टीम में जुलाई 1761 में त्रिचनापल्ली के किले का घेराव कर दिया वरना जाए और उसकी आर्मी

17:33

Speaker A

से खदेड़ दिया। उसने अनवरुद्दीन की आंखें खोल दी थी। अनवरुद्दीन को यह समझ आ गया था कि यूरोपियन पॉवर से वह अकेला पंगा नहीं ले सकता। उनका एक सिपाही 10 पर भारी पड़ता है। अब इसी बैकग्राउंड में चैनल साइज जो है

17:49

Speaker A

रहे थे वह फ्रेंच टीम को चकमा देकर यहां से निकल गए और सीधा पहुंचे फोर्स एंड डिफरेंट वहां फोर्ट सेंट डेविड में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सभी बड़े ऑफिस इस भयावह स्थिति में कोई रास्ता तलाश करने की कोशिश कर रहे थे ताकि किसी भी तरह

18:04

Speaker A

वह मराठाओं की कैद से छूट गए। चंदा साइड को जब पता चला कि कर्नाटक के नवाब अब अनवरुद्दीन को बना दिया गया है तो उसके तो होश उड़ गए क्योंकि चंदा साहिब के हिसाब से वह नव्य टेस्टी के

18:19

Speaker A

क्लाइव फोर्ट सेंट डेविड पहुंच चुके थे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आफिस के सामने उन्होंने एक प्लैन रखा स्लाइड ने कहा कि चंदा साहब ने अपने पूरी फौज तिरुचिरापल्ली के ग्राम में लगा दी है ऐसे में बढ़िया मौका है बारकोड को कैप्चर करने

18:34

Speaker A

ज्योति बारिश के तो अब चंद्र सहित किसी भी हाल में अनवरुद्दीन को हटाकर खुद करने का नवाब बनना चाहता था। तो इसी लिए चंदा साहिब ने अनवरुद्दीन के दुश्मन और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर धूप ले से हाथ

18:47

Speaker A

बहुत ही बड़ा झटका रहा इसके बाद ब्रिटिश फोर्सज एंड त्रिचनापल्ली में फ्रेंच टीम पर भी टैग कर दिया और फाइनली अप्रैल 1752 आते आते हैं रिच फूड का घेराव खत्म हुआ प्रिंस टीम को यहां पर सरेंडर करना पड़ा

19:00

Speaker A

मिला लिया। लेकिन वहीं एक मसला और खड़ा हो गया। जून 1748 में आसफ जब फर्स्ट की मृत्यु हो गई या नहीं। हैदराबाद में अब निजाम की कुर्सी खाली थी और इस कुर्सी के दावेदार थे से दो लोग।

19:14

Speaker A

मैदान से बाहर हो गया और कॉमेडी का नवाब बना उलझा अब दोनों टीमों में दो-दो खिलाड़ी थे और इसको भी एकदम बराबरी पर था निजाम फ्रेंच टीम का और नवाब ब्रिटिश टीम का बड़ी मुश्किल से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया

19:28

Speaker A

कंपनी सेकंड कार्यक्रमों में वंश या कंपनी के बराबर आकर खड़ी हो गई और यह सब हो पाया फ्लाईट की चतुराई के दम पर बर्ड्स प्ले इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं था उसने सप्टेंबर सेवर बिट्टू में फोर्ट सेंट डेविड पर अटैक कर

19:43

Speaker A

दिया ब्रिटिश सैनिक हमने इसे ट्रैक को ब्लॉक कर दिया और इसके बाद क्लाइव ने फ्रंट फुट पर आकर दो बेहतरीन शॉट लगाया क्लाइव ने 1752 के आखिरी कुछ महीनों में कॉल लॉग और चिंगलपेट में जो फ्रंट पार्ट से उन्हें कैप्चर कर लिया बर्ड्स प्ले अभी

19:59

Speaker A

भी अपनी हार मानने के लिए तैयार नहीं था उसने 1753 में ब्रिटिश टीम पर अटैक कर दिया दोनों टीम एक दूसरे की तरफ बढ़ने लगी और इन दोनों उन्होंने त्रिचनापल्ली में तीन बैटल्स हुई फ्रेंच टीम को ना सिर्फ

20:10

Speaker A

यहां पर हार का सामना करना पड़ा पर ज्यादा शर्म की बात यह थी कि ब्रिटिश टीम के फ्रेंच कमांडर मोस्टली को भी कैप्चर कर लिया गया यह दो फ्रांस के लिए बहुत ही डूब मरने वाली बात थी फ्रांस की गवर्मेंट ने

20:22

Speaker A

दिल्ली को वापस सिर्फ फैसला लिया और तिरुचिरापल्ली में हुई हार कट पूरा का पूरा ठीक है उसके सर पर फोड़ दिया इंडिया में धूप लेकर बदले अब हम गोलियों को भेजा गोलियों को सीधे निर्देश दिए गए थे कि वह

20:35

Speaker A

इंडिया जाते ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ नेगोशिएशन करें ताकि यह युद्ध रुक सकते हैं चेन्नई सेटिंग्स पांच में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच एक कंडीशनर पीस एग्रीमेंट हुआ और इस पीस प्रीति को कहा जाता है ट्रीटी आफ

20:50

Speaker A

पांडिचेरी और इस तरह सेकंड का नेटिव और एंड हुआ था तो इसे कट कटिंग और एंड होते-होते सिचुएशन कि वह राजा को खाना ठीक करना मान लिया गया था और उधर फ्रेंच टीम का सलावत खान अभी भी निजाम का हैदराबाद का

21:04

Speaker A

तो इसके बाद अब हम डिस्कस करेंगे थर्ड का नेतृत्व को थर्ड नॉमिनेटिव और LED भी खो चुकी फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के कपिल में अंतिम कील साबित हुई फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी ने अक्टूबर शिफ्ट में ड्यूटी प्ले को हटाकर गोद यू को फ्रेंच ईस्ट

21:22

Speaker A

इंडिया कंपनी का गवर्नर नियुक्त किया था बट गोलियों अक्टूबर 1754 में आया और मात्र चार महीने बांध यानि फैब्रिक सेटिंग पांच में यहां से चला गया उसके कार्यकाल में एक ही इंपोर्टेंट चीज हुई और वह थी पीस ट्रीटी आफ पांडिचेरी उसके बाद शिफ्ट में

21:39

Speaker A

मेरिट को फ्रेंड चीनी कंपनी का गवर्नर बनाया गया मगर मेरिट में वह दम नहीं था उसमें क्षमता नहीं थी कि वह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सामने टिक पाए यह सब तो हो रहा था इंडिया में लेकिन उधर यूरोप में 1756 में से वन

21:53

Speaker A

ड्रॉप्स शुरू हो गया जहां पर ब्रिटेन और फ्रांस एक बार फिर आमने-सामने आ गए एक्स्ट्रा कि इसका इन फैक्ट जो है वह इंडिया में भी देखने को मिलेगा और ऐसा ही हुआ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 23 मार्च समिति छोटी सरवन में फ्रेंच ईस्ट

22:07

Speaker A

इंडिया कंपनी की चंद्रनगर फैक्ट्री पर अटैक कर दिया सबसे पहले चंद्र नगर के लोकेशन देखते हैं मैप में चंद्रनगर उस समय कि बंगाल का पार्ट था और कहा जाता है कि फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी का जो पहला डायरेक्टर था उसने 1628 में 40,000 कोइंस

22:22

Speaker A

मुगल सूबेदार को देखकर यह जगह ली थी और फिर डिस्प्ले के समय में यहां पर बहुत कम हुआ और चंदनगर बंगाल में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी का एक मीन कमर्शल एक्टिविटी सेंटर बन गया आप चंद्र नगौर को फ्रेंच

22:36

Speaker A

ईस्ट इंडिया कंपनी का कोर्स कमर्शल सेंटर मान सकते हो बट ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी चंद्र घर पर अटैक करके इस जगह को तहस-नहस कर दिया वहीं यूरोप में फ्रेंड्स कमेंट को यह साफ हो गया कि मेरिट से चीज समझ नहीं

22:49

Speaker A

पा रही है इसलिए फ्रेंड्स को मैंने इंडिया में अपनी पोजीशन को मजबूत करने के लिए 1758 में लेफ्ट को हटाकर कॉमेडी ललि को फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी का गवर्नर बना दिया लेबल और डेरिंग कमांडर था उसने इंडिया आते ही सबसे पहले ब्रिटिश ईस्ट

23:05

Speaker A

इंडिया कंपनी के फोर्ट सेंट डेविड जो कि बैडरूम में था उस पर अटैक कर दिया राज्य कि लली इसमें सफल रहा और इस तरह फोर्ट सेंट डेविड पर अब फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्जा हो गया लल्ली का आप

23:18

Speaker A

नेक्स्ट टारगेट ताण फोर्ट सेंट जॉर्ज यानि मद्रास बट व्होस के विषय में हमें एक चीज हमेशा याद रखनी चाहिए कि जब भी दो पक्षों में लड़ाई होती है तो दोनों पक्षों की फाइनेंशियल सिचुएशन उस लड़ाई की आउट कम

23:31

Speaker A

में एक बड़ा रोल प्ले करती है क्योंकि किसी भी तरह की मिलिट्री एक्सरसाइज में काफी ज्यादा पैसों की जरूरत होती है ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी फाइनेंशली एक बहुत ही अच्छी पोजीशन में मीणा आपको मालूम है कि समिति फिर सात में वह बैटल ऑफ

23:45

Speaker A

प्लासी जीत चुके थे और बंगाल सरकार ने डिस्क्रिप्शन में उन्हें काफी फायदा हुआ था उनके पास रिवेन्यूज बहुत ही भयंकर जनरेट हुए थे वहीं दूसरी तरफ फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की फाइनेंशियल सिचुएशन उस समय उसने कुछ खास नहीं थी लेकिन सब कुछ

24:00

Speaker A

जानते हुए भी ले ली ने 1758 में मद्रास का घिराव कर दिया है कि अ अ कि मद्रास बचाने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के सेंट फोर्ट विलियम से मद्रास की मदद के लिए अपनी कई

24:15

Speaker A

टुकड़ियां भेजी थी जिसका सामना करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था और इस तरह लूप को 1759 में मद्रास का घेराव उठाना पड़ा नई और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की बारी थी लाडली को सबक सिखाने की ब्रिटिश

24:29

Speaker A

ईस्ट इंडिया कंपनी ने डिसाइड किया कि आपकी बार फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी पर ऐसा वार किया जाएगा कि वह दोबारा खड़ी नही हो पाए 22जनवरी 1760 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच वेंडी वश में एक मैटल हुआ जिसे बैटल

24:44

Speaker A

ऑफ़ हैंड वॉश कहा जाता है वह Bigg Boss यानि वनवासी बेसिकली एक जगह है जो कि कार डिवीजन में ही है और यह मद्रास के लगभग 110 किलोमीटर दूर है इस बैटल फॉर एडवांस में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को लीड कर

24:58

Speaker A

रहे थे सर आयरकूट और वैलिड कर रहा था फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को बैटल फ्रंटियर ऑप्शन है फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी बहुत ही बुरी तरह हारी और शुक्र ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मार्च 1761 में पांडिचेरी को भी कैप्चर कर लिया

25:13

Speaker A

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक-एक करके फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की सभी इंडियन पॉलीटिशियंस को हथेलियां इंक्लूडिंग पांडिचेरी माही और कर आई विल बी और साथ ही साथ रैली को भी बंदी बना लिया फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी के बाद अब वापस से इस गेम

25:28

Speaker A

में खड़े होने का कोई चांस नहीं बचा था फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी उधर यूरोप में 1763 में सविनय अवार्ड खत्म हो गया है है और यूरोपियन देशों के बीच एक पीस फटी

25:43

Speaker A

हुई जिसका नाम था राष्ट्रीय पर्व 1763 इन जनरल हिस्ट्री में यह कहा गया कि इससे व के दौरान जिसने भी दूसरे की चैरिटी पर कब्जा किया है उसे लौटा दिया जाए इसीलिए ट्यूब पर इस हिसाब से चंद्रनगर पांडिचेरी

25:59

Speaker A

माई और कराई कलर फ्रांस को वापस दे दिया गया बट साथ-साथ फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को हिदायत दी गई कि अब से वह किसी भी तरह के किलेबंदी नहीं करेंगे और ना ही अपने टूल्स रख सकते हैं ब्रिटिश ईस्ट इंडिया

26:12

Speaker A

कंपनी ने फ्रेंच इसने कंपनी को सिर्फ शांति से ट्रेडिंग करने की इजाजत दी थी यह निकालने डिक्रिस तीसरे युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का वर्चस्व साबित कर दिया था फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी बीडीएम से पूरी तरह से टूट चुकी थी और इस तरह

26:26

Speaker A

थर्ड काउंटिंग और के बाद शुरूआत होती है इंडिया में ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की कहानी की मॉडर्न हिस्ट्री की प्ले लिस्ट में आपको इसलिए कंपनी के आने से इंडिया के आजाद होने तक की सारी वीडियोस में जाएगी थैंक यू सो मच फॉर वॉचिंग वक्त

Topics: कार्नाटिक युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी भारतीय इतिहास यूपीएससी इतिहास मुगल साम्राज्य मद्रास पांडिचेरी औपनिवेशिक भारत 1748 संधि


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