**Breathing's BEST KEPT SECRET | Kriya Yoga | Ayurveda Special | Makes Sense ft Dr Ravinder — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/breathing-best-kept-secret-kriya-yoga-ayurveda/

क्रिया योग और आयुर्वेद के माध्यम से कुंभक और ब्रेथिंग के सेल्फ हीलिंग व एंटी-एजिंग फायदे।

## Key Takeaways

- कुंभक से शरीर की सेल्फ हीलिंग क्षमता बढ़ती है।
- माइटोकांड्रिया की सेहत शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
- आयुर्वेद और योग के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना चाहिए।
- स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक स्वच्छता बीमारियों को कम करती है।
- ब्रैथिंग तकनीकें शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी हैं।

## What the video covers

- कुंभक (ब्रैथ होल्ड) से हाइपोक्सिया के माध्यम से सेल्फ हीलिंग मैकेनिज्म ट्रिगर होता है।
- आयुर्वेद को स्थायी खुशी, आत्मा और स्वयं की प्राप्ति का विज्ञान बताया गया है।
- माइटोकांड्रिया की भूमिका और ATP उत्पादन की कमी से सेल की सुरक्षा कमजोर होती है।
- माइटोफेजी प्रक्रिया के द्वारा सेल रिसाइक्लिंग और क्लीनअप होता है।
- ब्रैथिंग तकनीकों से शरीर में फिजियोलॉजिकल बदलाव आते हैं जो स्वास्थ्य सुधारते हैं।
- क्रिया योग के 114 ब्रीथिंग क्रियाओं का अभ्यास शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी है।
- स्वस्थ जीवनशैली, साफ आहार और क्लीन थॉट्स सेल्फ हीलिंग को बढ़ावा देते हैं।
- माइंड और क्लीन थिंकिंग का बीमारियों पर बड़ा प्रभाव होता है।
- सेल की सुरक्षा के लिए mitochondrial membrane potential महत्वपूर्ण है।
- पुराने आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर समझाना जरूरी है।

Answers

## Questions about this video

कुंभक क्या है और यह शरीर पर कैसे प्रभाव डालता है?

कुंभक का मतलब है सांस रोकना (ब्रैथ होल्ड), जो हाइपोक्सिया के माध्यम से शरीर में सेल्फ हीलिंग मैकेनिज्म को ट्रिगर करता है और हार्ट को अधिक रक्त प्रवाह देता है।

माइटोकांड्रिया का शरीर में क्या महत्व है?

माइटोकांड्रिया सेल की ऊर्जा (ATP) बनाता है और सेल की सुरक्षा के लिए mitochondrial membrane potential बनाए रखता है, जिससे सेल टॉक्सिन से बचा रहता है।

आयुर्वेद और क्रिया योग का आधुनिक विज्ञान से क्या संबंध है?

आयुर्वेद और क्रिया योग के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की भाषा में समझाकर, उनके फिजियोलॉजिकल और सेलुलर प्रभावों को स्पष्ट किया जा सकता है, जिससे उनकी उपयोगिता बढ़ती है।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

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Speaker A

ब्रेथ वो है दैट कैन नॉट हैपन इन पास्ट एंड दैट कैन नॉट हैपन इन फ्यूचर। इट इज़ ओनली हैप्पेनिंग नाउ। कुंभक हाइपोक्सिया जो पावरफुल मैकेनिज्म हमारे पास है सेल्फ हीलिंग का, उसको ट्रिगर कर सकता है। जब हम कुंभक करते हैं तो योर हार्ट विल टेक मोर वॉल्यूम ऑफ ब्लड। आयुर्वेद इज द ओनली सिस्टम ऑफ मेडिसिन इन द वर्ल्ड व्हिच लेज़ आउट द अटेनमेंट ऑफ परमानेंट हैप्पीनेस ऑफ प्लेस, दैट इज गॉड और सेल्फ रियलाइजेशन। एटीपी का प्रोडक्शन कम होते ही जो मैंने बताया था ना, आउटर मेंब्रेन का जो चार्ज है, वो चार्ज भी कम हो जाता है। जो आयुर्वेदिक हर्ब्स होती हैं और मेडिसिंस होती हैं, वो लिवर पे बहुत हार्श होते हैं। इसको मैं बोलूंगा कि आधा अधूरा ज्ञान ना बड़ा डेंजरस होता है। सो व्हेन यू आर डूइंग कुंभक, यू आर प्रिवेंटिंग द श्रिंकेज ऑफ जो सिद्ध लोग होते हैं उनकी सोल्स चूज़ कर सकते हैं कि मैं इस टाइप का वूम मैं चूज़ करूंगा ताकि वो उस लाइफ को जी सके जो उनको जीनी आगे। इट्स ऑल फ्रीक्वेंसी मैचिंग। वन वे नहीं होता कुछ भी। एक और कंट्रोवरशियल है कि सेक्सुअल इंटेलिजेंस ऑफ ओल्ड मैन विद यंग गर्ल मेक्स हिम यंगर। टेलीमियर्स का मेन जो फंक्शन होता है, वो डीएनए को डैमेज से बचाना होता है। माइंड का बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। क्लीन थिंकिंग का बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। एक बीमारी को घटाने में भी और एक बीमारी को बढ़ाने में। [संगीत] दिस एपिसोड इज़ ब्रॉट टू यू बाय Neओ पाम्स। ऑन दिस चैनल, माय गोल हैज़ ऑलवेज़ बीन टू प्रमोट कॉन्शियस कन्वर्सेशन्स, व्हिच विल हेल्प यू इन योर लाइफ। इन दिस एपिसोड विथ डॉ. रविंद्र, वी हैव स्पोकन अबाउट सेल्फ हीलिंग, एंटाई एजिंग एंड अ लॉट ऑफ अदर थिंग्स दैट विल ऐड वैल्यू टू योर लाइफ। एंड आल्सो इफ यू आर अ मैन ऑफ टेस्ट हु लव्स टू वेयर प्रीमियम टाइमलेस शर्ट्स, डू चेक आउट द लिंक इन द डिस्क्रिप्शन। कुंभक, हाइपोक्सिया। और कैसे हम अपनी बॉडी को और कैसे हम खुद इस जो पावरफुल मैकेनिज्म हमारे पास है सेल्फ हीलिंग का उसको ट्रिगर कर सकते हैं। तो हिमांशु, आपने बहुत अच्छी बात बोली कि सेल्फ हीलिंग मैकेनिज्म देखिए, जो हमारा शरीर है उसके अंदर इतनी एबिलिटी होती है कि वो हर बीमारी को खुद ठीक कर सकता है। उसको वो राइट एनवायरनमेंट हमें देना होता है। अब राइट एनवायरनमेंट देने के बहुत सारे तरीके हैं। एक तो क्लीन लाइफस्टाइल है ना? क्लीन फूड, क्लीन थॉट्स। ठीक है? मतलब दिनचर्या कहने का मतलब है आपका जो आहार विहार दिनचर्या यह सब बिल्कुल अगर अच्छा है, जो आज के जमाने में बड़ा मुश्किल है लोगों को फॉलो करना है ना, तो इसी सेल्फ हीलिंग पोटेंशियल को इनेबल करने के लिए एक शॉर्टेस्ट वे है उसको हम बोलते हैं ब्रेथोल्ड कुंभक। इसी को मैं थोड़ा सा डिटेल में अब आपको एक्सप्लेन करूंगा। सो पहले मैं इसका थोड़ा सा बैकग्राउंड दे देता हूं यह कैसे मैं इस पे पहुंचा और कैसे क्यों मैंने इसको रिसर्च करना शुरू किया। सो इन 2012 है ना, तो मैंने क्रिया योग की दीक्षा ली। क्रिया योग के अंदर सारा ब्रेथ वर्क होता है बेसिकली। सो उसमें ऑलमोस्ट 114 क्रियाज़ हैं। मतलब डिफरेंट ब्रीथिंग टेक्निक्स एंड पैटर्न्स हैं बेसिकली। तो जब मैंने उसको प्रैक्टिस करना शुरू किया तो मैंने अपने शरीर के अंदर बदलाव देखे, चेंजेस देखे। है ना? चाहे लेट से कोई एक्यूट कंडीशन भी हो गई है। मैं ब्रीथिंग कर रहा हूं, अपना क्रिया कर रहा हूं तो मेरे को लग रहा है कि मेरे को दवाई लेने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। और मैं अपने आप ही थोड़े टाइम में ही ठीक हो, मतलब ठीक होए जा रहा हूं। एक्चुअली में, राइट? और मैंने देखा मेरी क्लेरिटी बहुत बढ़ रही है। मेरी फोटोजेनिक मेमोरी है, जो मेमोरी मेरी काफी बेसिकली शार्प हो रही थी उस टाइम पर। तो मैंने कहा इस एक्टिविटी में कुछ ना कुछ तो है। तो मैंने तब से मैंने इस पे रिसर्च करना शुरू किया। तो मैंने उसमें से स्पिरिचुअल एंगल थोड़ा सा निकाला और उसको मैं साइंटिफिक वे में लेके आया। क्योंकि देखिए क्या होता है कि आयुर्वेद जो है और हमारे जो स्पिरिचुअल टेक्स्ट हैं, वो कई हजारों सालों पहले लिखे गए हैं। है ना? तो आज के समय में कई लोग उसको समझते हैं और कई लोग नहीं समझते। क्योंकि अगर आप किसी से कम्युनिकेट कर रहे हैं और जिस भाषा में वह समझना चाहता है बंदा, उस भाषा में अगर आप नहीं बोलेंगे, आप तो कभी भी अपनी बात को आप समझा नहीं पाएंगे। तो आज के लोग लॉजिक समझते हैं, साइंस समझते हैं। तो मैंने प्राणायाम को ब्रीथिंग को साइंस से जोड़ा। मैंने यह इस्टैब्लिश किया कि जब हम ब्रीथिंग या कोई भी प्राणायाम करते हैं। ठीक है? चाहे कोई भी, चाहे अलोवि-लोम है, चाहे नाड़ी शोधनम है, चाहे डीप ब्रीथिंग है, चाहे कुंभक है, तो उसका फिजियोलॉजिकल इफेक्ट बॉडी में क्या होता है? हमारे शरीर में ऐसा क्या होता है जिससे हमें अच्छा फील होता है, जिससे हमारा शरीर ठीक होने लग जाता है। तो आज हम उसी की बात करेंगे। तो देखिए कुंभक कुंभक है ब्रेथ होल्ड। ठीक है? तो इसको एक्सप्लेन करने से पहले मैं आपको पहले यह बताऊंगा कि हमारे शरीर के अंदर बीमारी बनती कैसे है? यह बहुत जानना बहुत जरूरी है। अब जो मैं चीज बता रहा हूं, आपको सारी बीमारियों का कारण वही है। चाहे वो एक्यूट कंडीशन हो, चाहे वो क्रॉनिक कंडीशन हो। एक्यूट कंडीशन मतलब कि आपकी बॉडी इतनी इम्यून सिस्टम इतना वीक हो जाता है कि कोई भी वायरल इंफेक्शन है या बैक्टीरियल इंफेक्शन है बहुत जल्दी बॉडी को पकड़ लेता है। क्रॉनिक लाइफस्टाइल इश्यूज होते हैं बेसिकली। ठीक है? तो क्रॉनिक कंडीशन के अंदर भी यही रीजन है। होता क्या है? देखिए हमारी बॉडी का बिल्डिंग ब्लॉक क्या है? एक सेल है। हमारी बॉडी इज़ कंपोज्ड ऑफ बिलियंस ऑफ सेल्स। तो सेल के सेंटर में क्या होता है? न्यूक्लियस। वहां पे क्या होता है? माइटोकांड्रिया। अब माइटोकांड्रिया का फंक्शन क्या होता है? माइटोकांड्रिया का फंक्शन होता है एटीपी को बनाना। एटीपी एक सेल की एनर्जी होती है। ठीक है? एडिनोसाइन ट्राई फास्फेट, जिसकी वजह से सेल सिग्नलिंग करता है। नेबरिंग सेल से वह कम्युनिकेट करता है। उन सेल्स को वो कुछ देता है और उन सेल से वो कुछ लेता है। पर इसी एटीपी की वजह से जो सेल का आउटर मेंब्रेन होता है, वहां पे एक फेंसिंग होती है। जैसे आपकी एक जगह है, आप उसको फेंस कर देते हैं। उसमें करंट छोड़ते हैं ताकि कोई भी बाहर का जानवर या अंदर ना आ सके। ऐसे हमारे सेल की भी एक फेंसिंग होती है, जिसको हम बोलते हैं माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल। उसका काम क्या होता है? कोई भी ऐसी चीज जो सेल को नुकसान पहुंचा सकती है, कोई भी टॉक्सिन सेल के अंदर ना घुसे। राइट? तो उस एमएमपी का फंक्शन क्या होता है? सेल को प्रोटेक्टेड रखना। किसी भी तरीके के टॉक्सिन से, किसी भी तरीके के बैक्टीरिया से, किसी भी तरीके के फ्री रेडिकल से बेसिकली। राइट? तो ड्यू टू सम कंडीशंस, कुछ बीमारियां, एक्यूट कंडीशंस, कुछ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स हैं ना? जब टाइम पे हम खाना नहीं खाते हैं, टाइम पे सोते नहीं हैं। राइट? वर्क स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो जाता है। तो बहुत सारे फैक्टर्स हैं जिसकी वजह से क्या होता है? हमारा जो माइटोकांड्रिया है, वो कमजोर होने लग जाता है एक्चुअली में। राइट? अब वो माइटोकांड्रिया कहीं पे भी किसी भी ऑर्गन में, किसी भी टिश्यू के अंदर कमजोर हो सकता है। इट वो डिपेंड करता है आपके जेनेटिक्स पे। जब हम पैदा होते हैं तो हम कुछ जो जींस होती हैं अपनी इन्हेरिट करते हैं एनसेस्टर्स से और कुछ जींस जो होती हैं हमारे लाइफस्टाइल से, जो हम जिनको हम फिनोटाइप्स बोलते हैं, जो हमारे लाइफस्टाइल से बनती हैं बेसिकली। तो डिफेक्टिव स्पेस जहां होगा, वहां के जो सेल्स हैं उनका माइटोकांड्रिया वीक होने लग जाता है। अब माइटोकांड्रिया जब वीक होता है तो एटीपी का प्रोडक्शन जो है वह भी कम हो जाता है। एटीपी का प्रोडक्शन कम होते ही जो मैंने बताया था ना, आउटर मेंब्रेन का जो चार्ज है, जिसको हम एमएमपी बोलते हैं, माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल, वो चार्ज भी कम हो जाता है। नाउ दैट सेल विल बिकम होस्ट टू ऑल द ऑल ऑल टॉक्सिंस। चाहे वो कोई हैवी मेटल है, चाहे वो कोई भी अनयूज्ड मिनरल है या कोई भी बैक्टीरिया है, फंगस है, एनीथिंग, फ्री रेडिकल है, कुछ भी अब उस सेल के अंदर आएगा और उस सेल को बलकी बना देता है बेसिकली। राइट? ऐसे सेल्स को हम बोलते हैं बलकी सेल्स। बॉडी का एक प्रोसेस होता है, उसको हम बोलते हैं माइटोफेजी। आपने ऑटोफेजी सुना होगा। तो माइटोफेजी क्या है? सेलुलर क्लीन अप है। माइटोफेजी प्रोसेस में क्या होता है? जैसे ही ऐसा बलकी सेल बॉडी एनकाउंटर करती है कहीं पे भी तो वो उसकी आउटर मेंब्रेन पे एक प्रोटीन को अटैच करती है। उसको बोलते हैं पिंक वन। वो प्रोटीन पार्किन प्रोटीन को इनवाइट करता है जो सिग्नल देता है ईट मी सिग्नल। और जैसे ही वो सिग्नल आता है तो ऑटोफेगिज्म एक एंजाइम होता है जो सारे फौटी माइटोकांड्रियास को एंगल्फ करके उनको इनकैप्सुलेट कर देता है और डिसइंटीग्रेट करता है उसको दो पार्ट्स में। यूजेबल में और अनयूजेबल पार्ट में। अनयूजेबल पार्ट बॉडी थ्रू आउट कर देती है ड्रेनेज के थ्रू, लिफेटिक ड्रेनेज के थ्रू, और यूजेबल पार्ट से बॉडी क्या करती है? सेल को रिसाइकल कर देती है। तो इसको बोलते हैं हम सेल रिसाइक्लिंग। ये बॉडी का डिफॉल्ट प्रोसेस होता है माइटोफेजी। राइट? बट ड्यू टू मैंने जो बताया सारे फैक्टर्स, चाहे वो स्ट्रेस है, चाहे वो हमारा पुअर लाइफस्टाइल है, चाहे वो कोई क्रॉनिक कंडीशन है जो पहले से हमारे शरीर में चलती हुई आ रही है, कोई भी एक्यूट इशू है, इन सब चीजों की वजह से हमारी माइटोफेजी डिले होती।

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Speaker A

वॉल्यूम ऑफ़ ब्लड आयुर्वेद इज द ओनली सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन इन द वर्ल्ड व्हिच लेज़ आउट द अटेनमेंट ऑफ़ परमानेंट हैप्पीनेस ऑफ़ प्लेस दैट इज गॉड और सेल्फ रियलाइजेशन। एटीपी का प्रोडक्शन कम होते ही जो मैंने बताया था ना आउटर

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Speaker A

मेंब्रेन का जो चार्ज है वो चार्ज भी कम हो जाता है। जो आयुर्वेदिक हर्ब्स होती हैं और मेडिसिंस होती है वो लिवर पे बहुत हार्श होते हैं। इसको मैं बोलूंगा कि आधा अधूरा ज्ञान ना बड़ा डेंजरस होता है। सो व्हेन यू आर

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Speaker A

डूइंग कुंभक यू आर प्रिवेंटिंग द श्रिंकेज ऑफ जो सिद्ध लोग होते हैं उनकी सोल्स चूज़ कर सकते हैं कि मैं इस टाइप का वूम मैं चूज़ करूंगा ताकि वो उस लाइफ को जी सके जो उनको जीनी आगे। इट्स ऑल फ्रीक्वेंसी मैचिंग। वन वे नहीं

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Speaker A

होता कुछ भी। एक और कंट्रोवरर्शियल है कि सेक्सुअल इंटेलिजेंस ऑफ़ ओल्ड मैन विद यंग गर्ल मेक्स हिम यंगर। टेलीमियर्स का मेन जो फंक्शन होता है वो डीएनए को डैमेज से बचाना होता है। माइंड का बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। क्लीन थिंकिंग का बड़ा इंपॉर्टेंट

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Speaker A

रोल है। एक बीमारी को घटाने में भी और एक बीमारी को बढ़ाने में। [संगीत] दिस एपिसोड इज़ ब्रॉट टू यू बाय Neओ पाम्स। ऑन दिस चैनल, माय गोल हैज़ ऑलवेज बीन टू प्रमोट कॉन्शियस कन्वर्सेशन्स। व्हिच विल हेल्प यू इन योर लाइफ। इन दिस एपिसोड विथ

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Speaker A

डॉ. रविंद्र, वी हैव स्पोकन अबाउट सेल्फ हीलिंग, एंटाई एजिंग एंड अ लॉट ऑफ़ अदर थिंग्स दैट विल ऐड वैल्यू टू योर लाइफ। एंड आल्सो इफ यू आर अ मैन ऑफ़ टेस्ट हु लव्स टू वेयर प्रीमियम टाइमलेस शर्ट्स। डू

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Speaker A

चेक आउट द लिंक इन द डिस्क्रिप्शन। कुंभक, हाइपोक्सिया। और कैसे हम अपनी बॉडी को और कैसे हम खुद इस जो पावरफुल मैकेनिज्म हमारे पास है सेल्फ हीलिंग का उसको ट्रिगर कर सकते हैं। तो हिमांशु आपने बहुत अच्छी बात बोली कि सेल्फ हीलिंग मैकेनिज्म देखिए

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Speaker A

जो हमारा शरीर है उसके अंदर इतनी एबिलिटी होती है कि वो हर बीमारी को खुद ठीक कर सकता है। उसको वो राइट एनवायरमेंट हमें देना होता है। अब राइट एनवायरमेंट देने के बहुत सारे तरीके हैं। एक तो क्लीन

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Speaker A

लाइफस्टाइल है ना? क्लीन फूड, क्लीन थॉट्स। ठीक है? मतलब दिनचर्या कहने का मतलब है आपका जो आहार विहार दिनचर्या यह सब बिल्कुल अगर अच्छा है जो आज के जमाने में बड़ा मुश्किल है लोगों को फॉलो करना है ना तो इसी सेल्फ हीलिंग पोटेंशियल को

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Speaker A

इनेबल करने के लिए एक शॉर्टेस्ट वे है उसको हम बोलते हैं ब्रेथोल्ड कुंभक इसी को मैं थोड़ा सा डिटेल में अब आपको एक्सप्लेन करूंगा सो पहले मैं इसका थोड़ा सा बैकग्राउंड दे देता हूं यह कैसे मैं इस पे

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Speaker A

पहुंचा और कैसे क्यों मैंने इसको रिसर्च करना शुरू किया सो इन 2012 है ना तो मैंने क्रिया योग की दीक्षा ली क्रिया योग के अंदर सारा ब्रेथ वर्क होता है बेसिकली। सो उसमें ऑलमोस्ट 114 क्रियाज़ हैं। मतलब डिफरेंट ब्रीथिंग टेक्निक्स एंड पैटर्न्स

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Speaker A

हैं बेसिकली। तो जब मैंने उसको प्रैक्टिस करना शुरू किया तो मैंने अपने शरीर के अंदर बदलाव देखे, चेंजेस देखे। है ना?

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Speaker A

चाहे लेट से कोई एक्यूट कंडीशन भी हो गई है। मैं ब्रीथिंग कर रहा हूं। अपना क्रिया कर रहा हूं तो मेरे को लग रहा है कि मेरे को दवाई लेने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। और मैं अपने आप ही थोड़े टाइम में ही

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Speaker A

ठीक हो मतलब मतलब ठीक होए जा रहा हूं। एक्चुअली में राइट? और मैंने देखा मेरी क्लेरिटी बहुत बढ़ रही है। मेरी फोटोजेनिक मेमोरी है जो मेमोरी मेरी काफी बेसिकली शार्प हो रही थी उस टाइम पर। तो मैंने कहा

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Speaker A

इस एक्टिविटी में कुछ ना कुछ तो है। तो मैंने तब से मैंने इस पे रिसर्च करना शुरू किया। तो मैंने उसमें से स्पिरिचुअल एंगल थोड़ा सा निकाला और उसको मैं साइंटिफिक वे में लेके आया। क्योंकि देखिए क्या होता है

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कि आयुर्वेद जो है और हमारे जो स्पिरिचुअल टेक्स्ट हैं वो कई हजारों सालों पहले लिखे गए हैं। है ना? तो आज के समय में कई लोग उसको समझते हैं और कई लोग नहीं समझते। क्योंकि अगर आप किसी से कम्युनिकेट कर रहे

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Speaker A

हैं और जिस भाषा में वह समझना चाहता है बंदा उस भाषा में अगर आप नहीं बोलेंगे आप तो कभी भी अपनी बात को आप समझा नहीं पाएंगे। तो आज के लोग लॉजिक समझते हैं, साइंस समझते हैं। तो मैंने प्राणायाम को

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Speaker A

ब्रीथिंग को साइंस से जोड़ा। मैंने यह इस्टैब्लिश किया कि जब हम ब्रीथिंग या कोई भी प्राणायाम करते हैं। ठीक है? चाहे कोई भी चाहे अलोवि-लोम है, चाहे नाड़ी शोधनम है, चाहे डीप ब्रीथिंग है, चाहे कुंभक है, तो उसका फिजियोलॉजिकल इफेक्ट बॉडी में

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Speaker A

क्या होता है? हमारे शरीर में ऐसा क्या होता है जिससे हमें अच्छा फील होता है जिससे हमारा शरीर ठीक होने लग जाता है तो आज हम उसी की बात करेंगे। तो देखिए कुंभक कुंभक है ब्रेथ होल्ड। ठीक है? तो इसको

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Speaker A

एक्सप्लेन करने से पहले मैं आपको पहले यह बताऊंगा कि हमारे शरीर के अंदर बीमारी बनती कैसे है? यह बहुत जानना बहुत जरूरी है। अब जो मैं चीज बता रहा हूं आपको सारी बीमारियों का कारण वही है। चाहे वो एक्यूट

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Speaker A

कंडीशन हो, चाहे वो क्रॉनिक कंडीशन हो। एक्यूट कंडीशन मतलब कि आपकी बॉडी इतनी इम्यून सिस्टम इतना वीक हो जाता है कि कोई भी वायरल इंफेक्शन है या बैक्टीरियल इंफेक्शन है बहुत जल्दी बॉडी को पकड़ लेता है। क्रॉनिक लाइफस्टाइल इश्यूज होते हैं

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Speaker A

बेसिकली। ठीक है? तो क्रॉनिक कंडीशन के अंदर भी यही रीज़न है। होता क्या है? देखिए हमारी बॉडी का बिल्डिंग ब्लॉक क्या है? एक सेल है। हमारी बॉडी इज़ कंपोज्ड ऑफ बिलियंस ऑफ सेल्स। तो सेल के सेंटर में क्या होता

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Speaker A

है? न्यूक्लियस। वहां पे क्या होता है? माइटोकांड्रिया। अब माइटोकांड्रिया का फंक्शन क्या होता है? माइटोकांड्रिया का फंक्शन होता है एटीपी को बनाना। एटीपी एक सेल की एनर्जी होती है। ठीक है? एडिनोसाइन ट्राई फास्फेट जिसकी वजह से सेल सिग्नलिंग

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Speaker A

करता है। नेबरिंग सेल से वह कम्युनिकेट करता है। उन सेल्स को वो कुछ देता है और उन सेल से वो कुछ लेता है। पर इसी एटीपी की वजह से जो सेल का आउटर मेंब्रेन होता है वहां पे एक फेंसिंग होती है। जैसे आपकी

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Speaker A

एक जगह है। आप उसको फेंस कर देते हैं। उसमें करंट छोड़ते हैं ताकि कोई भी बाहर का जानवर या अंदर ना आ सके। ऐसे हमारे सेल की भी एक फेंसिंग होती है। जिसको हम बोलते हैं माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल।

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Speaker A

उसका काम क्या होता है? कोई भी ऐसी चीज जो सेल को नुकसान पहुंचा सकती है। कोई भी टॉक्सिन सेल के अंदर ना घुसे। राइट? तो उस एमएमपी का फंक्शन क्या होता है? सेल को प्रोटेक्टेड रखना। किसी भी तरीके के

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Speaker A

टॉक्सिन से, किसी भी तरीके के बैक्टीरिया से, किसी भी किसी भी तरीके के फ्री रेडिकल से बेसिकली। राइट? तो ड्यू टू सम कंडीशंस कुछ बीमारियां, एक्यूट कंडीशंस, कुछ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स है ना? जब टाइम पे हम खाना नहीं खाते हैं। टाइम पे सोते नहीं

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Speaker A

है। राइट? वर्क स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो जाता है। तो बहुत सारे फैक्टर्स हैं जिसकी वजह से क्या होता है? हमारा जो माइटोकांड्रिया है वो कमजोर होने लग जाता है एक्चुअली में। राइट? अब वो माइटोकांड्रिया कहीं पे भी किसी भी ऑर्गन में किसी भी

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Speaker A

टिश्यू के अंदर कमजोर हो सकता है। इट वो डिपेंड करता है आपके जेनेटिक्स पे। जब हम पैदा होते हैं तो हम कुछ जो जींस होती हैं अपनी इन्हहेरिट करते हैं एनसेेस्टर्स से और कुछ जींस जो होती हैं हमारे लाइफस्टाइल

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Speaker A

से जो हम जिनको हम फिनोटाइप्स बोलते हैं जो हमारे लाइफस्टाइल से बनती हैं बेसिकली। तो डिफेक्टिव स्पेस जहां होगा वहां पर वहां के जो सेल्स हैं उनका माइटोकांड्रिया वीक होने लग जाता है। अब माइटोकांड्रिया जब वीक होता है तो एटीपी का प्रोडक्शन जो

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Speaker A

है वह भी कम हो जाता है। एटीपी का प्रोडक्शन कम होते ही जो मैंने बताया था ना आउटर मेंब्रेन का जो चार्ज है जिसको हम एमएमपी बोलते हैं माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल वो चार्ज भी कम हो जाता है। नाउ

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Speaker A

दैट सेल विल बिकम होस्ट टू ऑल द ऑल ऑल टॉक्सिंस। चाहे वो कोई हैवी मेटल है, चाहे वो कोई भी अनयूज्ज मिनरल है या कोई भी बैक्टीरिया है, फंगस है, एनीथिंग, फ्री रेडिकल है, कुछ भी अब उस सेल के अंदर आएगा

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Speaker A

और उस सेल को बलकी बना देता है बेसिकली। राइट? ऐसे सेल्स को हम बोलते हैं बलकी सेल्स। बॉडी का एक प्रोसेस होता है। उसको हम बोलते हैं माइटोफेजी। आपने ऑटोफेजी सुना होगा। तो माइटोफेजी क्या है? सेलुलर क्लीन अप है। माइटोफेजी प्रोसेस में क्या

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Speaker A

होता है? जैसे ही ऐसा बलकी सेल बॉडी एनकाउंटर करती है कहीं पे भी तो वो उसकी आउटर मेंब्रेन पे एक प्रोटीन को अटैच करती है। उसको बोलते हैं पिंक वन। वो प्रोटीन पार्किन प्रोटीन को इनवाइट करता है जो

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Speaker A

सिग्नल देता है ईट मी सिग्नल। और जैसे ही वो सिग्नल आता है तो ऑटोफेगिज्म एक एंजाइम होता है जो जो सारे फौ्टी माइटोकांड्रियास को एंगल्फ करके उनको इनकैप्सुलेट कर देता है और डिसइीग्रेट करता है उसको दो पार्ट्स में।

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Speaker A

यूजेबल में और अनयूजेबल पार्ट में। अनयजेबल पार्ट बॉडी थ्रू आउट कर देती है ड्रेनेज के थ्रू लिफेटिक ड्रेनेज के थ्रू और यूजेबल पार्ट से बॉडी क्या करती है सेल को रिसाइकल कर देती है तो इसको बोलते हैं हम सेल रिसाइक्लिंग ये बॉडी का डिफॉल्ट

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Speaker A

प्रोसेस होता है माइटोफेजी राइट बट ड्यू टू मैंने जो बताया सारे फैक्टर्स चाहे वो स्ट्रेस है चाहे वो हमारा पुअर लाइफस्टाइल है चाहे वो कोई क्रॉनिक कंडीशन है जो पहले से हमारे शरीर में चलती हुई आ रही है कोई

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Speaker A

भी एक्यूट इशू है इन सब चीजों की वजह से हमारी माइटोफजी डिले होती रहती है। राइट? जब माइटोफेजी डिले होती है तो क्या होगा? वो बलकी सेल्स का कंसंट्रेशन बढ़ता रहता है। बलकी सेल्स इन नंबर्स मल्टीप्लाई होते रहते हैं बेसिकली। अब जिस जगह वो

07:46

Speaker A

बलकी सेल्स बढ़ जाएंगे मान के चलिए लिवर में बढ़ गए तो लिवर को वीक करेंगे। कोई अगर अल्कोहल ज्यादा ले रहा है तो उसका ऑलरेडी लिवर वीक है तो उसको उस बलकी सेल्स बढ़ने की संभावना लिवर में ज्यादा होगी।

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Speaker A

कोई बहुत ज्यादा तला हुआ खाता है। मतलब डीप फ्राइड फ्राइड चीजें खाता है। बहुत ज्यादा एक्सेस मीट खाता है। तो उसका जो हार्ट जो है तो उसके हार्ट के अंदर आप देखेंगे बलकी सेल्स बढ़ने की संभावना ज्यादा हो जाएगी। जो स्मोकिंग करते हैं

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Speaker A

उनके लंग्स के अंदर संभावना ज्यादा बढ़ जाएगी बलकी सेल्स की। ठीक है? जहां पे भी ये बलकी सेल्स बढ़ेंगे। बलकी सेल्स क्या है? वो ऐसा सेल है जैसे सेडेंटरी लाइफ से एक मोटा आदमी होता है ना जो कि हिल नहीं

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Speaker A

पाता है और जिसको सब कुछ बैठे-बैठे वहां पे चाहिए। तो ऐसा वो बलकी सेल वो है बेसिकली एक सेडेंटरी सेल है। जिसका कोई फंक्शन नहीं है, जिसका कोई काम नहीं है। सिर्फ शरीर को खराब करना उसका काम है।

08:31

Speaker A

राइट? अब ऐसी सेल्स की तादाद जहां पर भी बढ़ेगी तो वो ऑर्गन वीक होने लग जाता है। अब यहां पे भी ठीक है। यहां पे भी हम कवर कर सकते हैं। बट द मोमेंट जब उन सेल्स की इंटेलिजेंस बढ़ती है

08:42

Speaker A

म्यूटेशन की वजह से और वो अपने आप को मल्टीप्लाई करना अगर सीख गए तो वो कैंसर का रूप ले लेती है बेसिकली। समझ आया आपको? तो सोचिए जेनेटिक म्यूटेशन। तो सारी बीमारियां इसके अंदर आ गई। आपका ऑटोइन डिसऑर्डर्स, आपके जेनेटिक इशज़, आपके

08:56

Speaker A

क्रॉनिक लाइफस्टाइल कंडीशंस, आपके एक्यूट इश्यूज क्योंकि आपका इम्यून सिस्टम भी डिसरेगुलेट हो जाता है। इसकी वजह से कोई भी इंफेक्शन जल्दी से आपको लग जाएगा। तो ये एक ही कारण है सारी बीमारियों का। तो अगर किसी भी शरीर के अंदर यह माइटोफाजी

09:10

Speaker A

टाइम पे ट्रिगर होती है तो उसकी बीमार पड़ने की संभावना काफी ज्यादा कम हो जाती है। ठीक है? कैंसर होने की संभावना काफी ज्यादा कम हो जाती है। किसी भी तरीके का एक्यूट इंफेक्शन होने की संभावना चाहे वह

09:22

Speaker A

बैक्टीरियल है, वायरल है, वह कम हो जाती है। किसी भी तरीके का क्रॉनिक लाइफस्टाइल डिजीज जैसे डायबिटीज वगैरह है वो बहुत ज्यादा संभावना कम हो जाती है। ठीक है? अब इस माइटोफेजी को टाइम पे ट्रिगर कराया कैसे जाए? एक तरीका तो ये है कि क्लीन

09:34

Speaker A

लाइफस्टाइल वही टाइम पे सोओ, टाइम पे उठो, घर का पका हुआ फ्रेश खाना खाओ। पुराना खाना नहीं खाना है। ठीक है? और टाइम पे खाना है वो भी आपको। समझ आया आपको? हम और क्लीन थॉट माइंड का बड़ा रोल होता है।

09:45

Speaker A

मैंने लास्ट सबसे जरूरी वही है। हां लास्ट पडकास्ट में भी मैंने बताया था कि बीमारी आई जैसे ही मैं डिजीज कॉन्शियसनेस के अंदर चला गया मैंने सर्च करना शुरू कर दिया इंटरनेट पे बीमारी के बारे में। है ना? तो बीमारी के सिम्टम्स

09:58

Speaker A

बढ़ने लग जाते हैं। एक्चुअली क्यों बढ़ने लग जाते हैं? साइंस क्या है? क्योंकि व्हनेवर यू थिंक एनीथिंग कुछ भी आप सोचते हो उस पे एक फीलिंग क्रिएट होती है। या वो फीलिंग क्या है? दैट इज अ केमिकल दैट

10:08

Speaker A

योर ब्रेन इज सिक्रेटिंग। अगर आप स्ट्रेस ले रहे हो तो कॉर्टिसोल बन रहा है। खुश हो रहे हो। एंडोरफिनस बन रहे हैं। राइट? अच्छे और हार्मोंस भी होते हैं। बट मोस्टली लोग क्या होते हैं? ग्लास को आधा खाली देखते हैं। राइट? और वो खाली

10:22

Speaker A

देखतेदेखते कॉर्टिसोलॉल इतना बढ़ जाता है। कॉर्टिसोल एक्सेस कॉर्टिसोल बॉडी में हमेशा इनफ्लेमेशन कॉज करता है। एडिक्शन लेके आता है। आपके मेटाबॉलिज्म को वो डिसरप्ट करता है। राइट? तो मेटाबॉलिज्म ये सब चीजें तो डिसरप्ट कर दी उसने। आप सोचिए। तो धीरे-धीरे क्या होता है? बीमारी

10:35

Speaker A

के सिम्टम्स जो है वो बढ़ने लग जाते हैं। राइट? राइट? एज अ डीएनए इंप्रेशन कंटीन्यूअसली हम डीएनए के अंदर ये इंप्रेशन भेज रहे हैं कि कॉर्टिसोल बनाओ, कॉर्टिसोल बनाओ, कॉर्टिसोल बनाओ। बेसिकली इसको एपिजेनेटिक्स बोलते हैं। लास्ट में मैंने आपको समझाया था। राइट? तो माइंड का

10:51

Speaker A

बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। क्लीन थिंकिंग का बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है। एक बीमारी को घटाने में भी और एक बीमारी को बढ़ाने में भी। पर बीमारी तो किसको भी आ सकती है। देखो, एक्सटर्नल फैक्टर्स बहुत सारे होते हैं। बट बीमारी कब तक रहेगी शरीर में वो

11:01

Speaker A

मेरे शरीर पे डिपेंड करता है। सही। सही। तो ये तो हो गया लॉन्ग टर्म वे। अब क्लीन लाइफस्टाइल को अडॉप्ट करने में, है ना?

11:08

Speaker A

अच्छा खाना खाने में, पूरे लाइफस्टाइल को चेंज करने में बड़ा लंबा समय लग जाता है और कई लोग कर भी नहीं पाते हैं। बट शॉर्टेस्ट वे क्या है? शॉर्टेस्ट वे है कुंभक। राइट? अब कुंभक कैसे है?

11:20

Speaker A

जैसे ही हम ब्रेथ होल्ड करते हैं। ठीक है? और उसको डेली प्रैक्टिस करते हैं। ऐसा नहीं कि एक बार ब्रेथ होल्ड किया। मतलब पूरी टेक्निक है। मैं आपको समझाऊंगा इसके एंड में जब ये टॉपिक मैं खत्म करूंगा। तो

11:31

Speaker A

कुंभक को जब हम प्रैक्टिस करते हैं मल्टीपल टाइम्स। ब्रेथ होल्ड करते हैं मल्टीपल टाइम्स। तो हम बॉडी के अंदर हाइपोक्सिक स्टेट को कॉन्शियसली इंड्यूस करा रहे हैं। बॉडी को लो ऑक्सीजन एनवायरमेंट में हम लेके जा रहे हैं। और

11:42

Speaker A

अकॉर्डिंग टू रिसर्च जो कि इंटरनेशनली काफी कंट्रीज के अंदर हुई है। काफी साइंटिस्टों ने रिसर्च की है। सो व्हेन यू इंड्यूस हाइपॉक्सिक स्टेट इनू द बॉडी इनसाइड द बॉडी कॉन्शियसली। सो दो जींस का रेगुलेशन होता है बॉडी के अंदर। एक है बीए

11:55

Speaker A

एनआईपी और एक है एनआई एक्स। ये दो जींस क्या करती हैं? ऑटोफेगिज्म से कम्युनिकेट करती हैं और सारे के सारे जो फौल्टी माइटोकांड्रिया होते हैं वो सारे के सारे जो फौल्टी सेल्स होते हैं उनको टैग करने में मदद करती हैं और जैसे ही वो टैगिंग

12:09

Speaker A

होती है तो बॉडी माइटोफेजी को ट्रिगर कर देती है एक्चुअली ओके हम राइट ठीक है तो शॉर्टेस्ट वे क्या है कुंभक ब्रेथ होल्ड अब इसकी टेक्निक क्या है देखिए अब ये टेक्निक भी जब हमने इसको जब क्रिएट कर

12:22

Speaker A

रहे थे इस टेक्निक को तो क्रिया योग से ही हमने इसको बनाया ठीक है अब क्या होता है इसको हमने बड़ा साइंटिफिकली बनाया इंक्रिमेंटल वे में बनाया है। इसके 12 लेवल्स हैं। 12 लेवल्स हैं। ठीक है? एक साल में एक साल का समय लगता है इसको पूरा

12:34

Speaker A

अच्छे तरीके से प्रैक्टिस करने में। ठीक है? अब 12 लेवल्स हैं इसके। तो शुरू कैसे होते हैं? हर लेवल में 12 सासे हैं। हर लेवल में 12 सासे हैं। ठीक है? 12 ब्रेथ्स हैं। हर लेवल में। यानी कि 12 \* 12 144

12:45

Speaker A

ब्रेथ्स का ये सेट है। ठीक है? एकदम नहीं करना है। धीरे-धीरे ग्रेजुअली करते हुए जाना है इसको। सो फर्स्ट थ्री मंथ्स में हम क्या बोलते हैं? फर्स्ट थ्री मंथ्स में सिर्फ फर्स्ट थ्री सेट्स करने हैं आपको। लेवल वन से लेवल थ्री। राइट? लेवल वन में

12:58

Speaker A

क्या है? 12 ब्रेथ्स हैं। आपने इन्हेल करना है। डीपली इन्हेल थ्रू योर नोज एंड एक्सपेंड योर टमी। देन होल्ड फॉर थ्री सेकंड्स। देन डीपली एक्सेल थ्रू नोज़ एंड कॉन्ट्रैक्ट योर टमी। सो ऐसी ब्रेथ्स आपको 12 लेनी है। फर्स्ट

13:25

Speaker A

लेवल वन क्या है? 12 ब्रेथ्स ऑफ थ्री होल्ड। थ्री होल्ड्स। सो वन से लेके 12थ तक हम जैसे ही आप 13th ब्रेथ लेंगे तो ब्रेथ होल्ड टाइम जो हो जाएगा वो हो जाएगा आपका सिक्स सेकंड्स। ओके?

13:37

Speaker A

सो इन्हेलेशन थ्रू नोज एंड एक्सेलेशन इनेलेशन थ्रू नोज एक्सपैंड योर टमी पॉज फॉर सिक्स सेकंड्स। एक्सेलेशन थ्रू नोज़ एंड कॉन्ट्रैक्ट योर टमी। राइट? फिर वो अगेन 12। फिर जैसे ही 25थ ब्रेथ लेंगे तो नेक्स्ट 12 ब्रेथ्स में होल्ड कितना हो

13:54

Speaker A

जाएगा आपका? नाइन का। नहीं तो फर्स्ट थ्री मंथ्स आपको यही प्रैक्टिस करना है। पहले इसमें आपकोस्ट करनी है क्योंकि बहुत सारे लोग हो सकता है थ्री ईजीली कर लें, सिक्स ईज़ली कर लें, नाइन ना कर पाए। हम तो इसमें एक रूल बड़ा है। इसमें ना बॉडी को

14:06

Speaker A

आपको प्रेशराइज नहीं करना है। हम हां जितना कंफर्टेबली आप कर पा रहे हैं। मान के चलिए थ्री और सिक्स कर पा रहे हैं ईली। बट नाइन तीसरा सेट नहीं हो रहा है। तो जरूरी नहीं है नाइन करो। सिक्स्थ के बाद

14:17

Speaker A

सेवन कर लो पहले। थ्री सिक्स से देन डू इट फॉर फाइव डेज़। सिक्स्थ डे फिर से एट करो। हम फिर डू इट फॉर फाइव डज़। फिर उसके बाद नाइन कर दो। जब 369 हो गया फिर देन कंटिन्यू इट

14:28

Speaker A

फॉर हम 3 मंथ्स। तो कंफर्टेबली जहां पर भी आपको ऐसा लगे थोड़ा सा भी प्रेशर आ रहा है तो वहीं पे रुक जाओ। वहीं तक ही अभी आपकी बॉडी की एबिलिटी है। कैपेबिलिटी है। वो धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी। तो फर्स्ट थ्री मंथ्स में आपने 369 किया।

14:39

Speaker A

36 ब्रेथ्स मॉर्निंग सुबह खाली पेट उठ के मैं बोलता हूं दिन में तीन बार सुबह उठ के एक बार शाम को कर लिया और एक बार रात को सोते समय कर लिया। 36 ब्रेथ्स और कोई पोश्चर का लिमिटेशन नहीं है। चेयर पे बैठ

14:50

Speaker A

के कर लो। हम लेट के कर लो शवासन में बेड पे ठीक है कैसे भी कर लो ठीक है बट हां स्टैटिक रहना है चलते हुए नहीं करना मतलब आप कहीं पे भी बैठे हुए हो जरूरी नहीं है कोई सुहासन या कोई पॉज में करना

15:03

Speaker A

है आपको आपको इस तरीके से इसको करना है और जैसे ही फोर्थ मंथ आएगा फोर्थ मंथ में आप फोर्थ सेट ऐड कर देंगे यानी कि 12 तो 3 6 9 12 फिफ्थ में आप 3 6 9 12 15 ओ एंड सो

15:16

Speaker A

ऑन 12थ मंथ में 36 तक पहुंच जाएगा ये 36 सेकंड्स का ब्रेथ होल्ड 36 सेकंड का ब्रेथ होल्ड। ठीक है? सो यहां से यहां पर गए हम। समझ आया आपको? तो यह आंतरिक कुंभक है। जो अंदर का कुंभक है। इसके बाद जो नेक्स्ट लेवल

15:30

Speaker A

होता है वो होता है बाहर वाला कुंभक। अच्छा। बाह्य कुंभक जिसको हम बोलते हैं जो एक्सलेशन के बाद होता है। जब आप पहले आंतरिक कुंभक को कर लेते हैं। फिर उसके बाद बाह्य कुंभक जो होता है वो ज्यादा डिफिकल्ट होता है। फिर धीरे-धीरे

15:40

Speaker A

करके हमें उसको अचीव करना होता है। बट पहले पहले साल तो सिर्फ इसको करना है आपको। इससे बहुत सारे बेनिफिट्स शरीर के अंदर होता है। मैं आपको बताऊंगा। जब हम फर्स्ट थ्री लेवल्स करते हैं। लेवल वन, लेवल टू एंड लेवल यानी कि 369 ये

15:51

Speaker A

कहां-कहां पे हमें इंपैक्ट करता है? सबसे पहले ये हमें इंपैक्ट करता है कौन से ऑर्गन पे? लंग्स पे। हम ब्लड टिश्यू पे और अर्थ एलिमेंट पे इंपैक्ट करता है। ओके?

16:00

Speaker A

ठीक है? इन तीन चीजों पे सबसे ज्यादा इंपैक्ट होता है। जब इंपैक्ट बाकी ऑर्गन्स पे भी हो रहा है। बट सबसे ज्यादा डोमिनेंस जो है फर्स्ट थ्री लेवल्स में वो इन तीन चीजों पे है। हम जिससे आपका ब्लड सर्कुलेशन प्रॉपर होता

16:10

Speaker A

है। आपकी जो रेस्पिरेटरी जो लंग्स की जो मसल्स हैं वो स्ट्रेंथन होती हैं और आप ग्राउंडेड हो जाते हो बेसिकली। आपके अंदर कॉन्फिडेंस जो है वो आने लग जाता है। आपके विल पावर जो है वो काफी इंप्रूव हो जाती है। आप डाउन टू अर्थ हो

16:20

Speaker A

जाते हो। ईगो थोड़ा-थोड़ा सा डिॉल्व होने लग जाता है। ये अर्थ एलिमेंट है। अर्थ एलिमेंट बेसिकली है ना? तो ये तो पृथ्वी महाभूत ब्लड टिश्यू एंड लंग्स ओके फर्स्ट थ्री लेवल्स में वन टू थ्री नाउ फोर फाइव सिक्स

16:35

Speaker A

नेक्स्ट थ्री लेवल्स में कौन सा ऑर्गन होता है आपका हार्ट और टिश्यू कौन सा होता है मसल टिश्यू और एलिमेंट होता है वाटर ओके ठीक है वाटर एलिमेंट तो इसमें क्या होता है आपकी हार्ट की जो मायोकारार्डियल मसल्स होती हैं वो उसकी जो पंपिंग इन एंड

16:51

Speaker A

पंपिंग आउट की जो एबिलिटी होती है वो इंप्रूव होती है मायोकारार्डियल इजेक्शन फ्रैक्शन आपका इंप्रूव होता मायोक्रेडल जो मसल्स होती है उनकी वो स्ट्रेंथन होती हैं और लंग्स एंड हार्ट का जो कोआर्डिनेशन होता है वो आपका रेगुलेट होता है और प्लस

17:02

Speaker A

क्योंकि वाटर एलिमेंट है तो मसल फ्लूइडिटी मतलब मसल की फ्लेक्सिबिलिटी जो है वो काफी इंप्रूव होती है योर बॉडी बिकम्स मोर फ्लेक्सिबल बेसिकली आप कर रहे हो जब 12 15 एंड 18 यानी कि फोर्थ फिफ्थ और सिक्स्थ लेवल

17:12

Speaker A

फर्स्ट सेकंड थर्ड लेवल हुआ 369 और फोर्थ फिफ्थ और सिक्स्थ लेवल हुआ 12 15 एंड 18 हम राइट जब आप नेक्स्ट थ्री सेट्स पे जाएंगे यानी कि 21 24 एंड 27 तो आपका लिवर एंड किडनी राइट फायर एलिमेंट आपका इसमें

17:30

Speaker A

स्टिमुलेट होता है और इसमें जो मतलब लिवर और किडनी और आपका जो फायर एलिमेंट है ये दोनों चीजें बेसिकली आपकी इसमें स्टिमुलेट होती है और टिश्यू कौन सा होता है इसमें आपका मेद फैट टिश्यू फैट टिश्यू ठीक है अब इसमें फैट टिश्यू क्या होता है

17:44

Speaker A

देखिए फैट टिश्यू पूरी बॉडी को प्रोटेक्ट करती है माइलन शीट हमारे ब्रेन के मेंबेंस हमारे जो सेल के मेजर मेंब्रेन होते हैं फॉस्फस मेंब्रेन होते हैं तो सेल जो फैट है जो मेद धातु है वो पूरी बॉडी को

17:54

Speaker A

प्रोटेक्ट करता है। तो यहां पे आप अपनी बॉडी की प्रोटेक्टिव लेयर बनाते हैं। जब आप इस लेवल तक पहुंच जाते हैं। आपका फायर जो होता है वो काफी ज्यादा अग्नि जो है वो काफी स्ट्रेंथन हो जाती है। जिसकी वजह से

18:03

Speaker A

आपकी इम्यूनिटी काफी बढ़ जाती है। राइट? और आपका मेटाबॉलिज्म काफी फास्ट हो जाता है और बॉडी ट्रांसफॉर्म बहुत जल्दी करती है एक्चुअली। ओके?

18:09

Speaker A

राइट? राइट? और जो आप फोर्थ करते हो मतलब फोर्थ सेट ऑफ जिसके अंदर थ्री लेवल्स हैं। अगेन फोर्थ सेट में फोर्थ सेट में कौन-कौन से लेवल्स हैं आपके? 31 33 30 33 एंड 36। तो इसमें आपका नर्वस सिस्टम। ठीक है? और

18:24

Speaker A

बोन मैरो हम और इसमें आकाश और वायु तत्व और मज्जा यानी कि बोन मैरो टिश्यू एंड बोन टिश्यू ये चारों चीजें इंपैक्ट होती है। ओके?

18:32

Speaker A

तो यहां पे आपकी साइकी मेंटल हेल्थ जो है वो काफी इंपैक्ट होती है। ठीक है? आपके जो पूरी साइकिल होती है सेरेटोनिन, डोपामिन, गाबा जो अच्छे हार्मोंस होते हैं उन कॉकटेल ऑफ गुड न्यूरो ट्रांसमीटर्स बॉडी में काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। एंड

18:46

Speaker A

प्रेजेंट मूवमेंट में आप आने लग जाते हो। बेसिकली में रहते हो। ब्लिस में आप आने लग जाते हो। तो आप अनकंडीशनल हैप्पीनेस बेसिकली आपको मिलने लग जाती है। राइट? क्योंकि आप सोचिए कि अब आप उस लेवल पे आ गए हैं जहां से जहां पे

18:56

Speaker A

अब आपका जो ब्रेन की जो एक्टिविटी है जो न्यूरो ट्रांसमिशन है वो आपका बैलेंस हो रहा है बेसिकली इस लेवल पे। सो आप पॉजिटिव हो जाते हो। आप पास्ट में नहीं जाते हो ज्यादा। आप फ्यूचर में नहीं ज्यादा जाते

19:05

Speaker A

हो। आप प्रेजेंट भी हमेशा रहते हो बेसिकली। राइट? यू बिकम मोर सॉल्यूशन ओरिएंटेड, नॉट प्रॉब्लम ओरिएंटेड। हां। बेसिकली। राइट?

19:12

Speaker A

राइट? तो इस तरीके से जब हम लेवल वन से लेके लेवल 12 पे ये फोर स्टेजेस मैंने बताई। हर स्टेज में थ्री लेवल्स हो गए आपके। है ना?

19:18

Speaker A

तो लेवल वन से लेवल 12 तक जब आप करते हो तो आपके सारे एलिमेंट्स कवर हो गए। आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी। तो हमने लास्ट पडकास्ट में बात करी थी वात, पित्त, कफ की। हम तो वात, पित्त कफ अपने आप बैलेंस हो गया।

19:28

Speaker A

तो एक ही एक ही एक्टिविटी से आपका वात कफ भी बैलेंस हो रहा है। सारे मेजर ऑर्गन्स जो हैं आपके कवर हो गए हैं। हम सारे ऑलमोस्ट टिश्यूज़ जो हैं वो कवर हो गए हैं आपके। राइट?

19:36

Speaker A

राइट? सो कुंभक का बेनिफिट देखिए। सेलुलर डिटॉक्स कर रहा है आपको। ठीक है? साथ-साथ में आपके सारे ऑर्गन्स को स्ट्रेंथन कर रहा है। साथ-साथ में आपके सारे टिश्यूज़ को स्ट्रेंथन कर रहा है। और आपको स्पिरिचुअली भी अपलिफ्ट कर रहा है बेसिकली। राइट? अब

19:50

Speaker A

मैं आपको थोड़ा सा यह बताता हूं कि हार्मोन लेवल पर क्या होता है। जैसे मैंने बताया आपको वही जब आप करते हो अभी चार-चार में हमने डिवाइड कर रखा है इसको। फर्स्ट, सेकंड, थर्ड एंड फोर्थ लेवल में आपका

20:02

Speaker A

सेरेटोनिन डोमिनेंस रहता है। बेसिकली फेल गुड फैक्टर मूड हार्मोन जो होता है बेसिकली। राइट? उसके बाद फाइव, सिक्स, सेवन एंड एट में आपका डोपामिन जो आपको और मोर फोकस्ड करता है। ठीक है? आपको रिवॉर्ड देता है ताकि आप इस

20:17

Speaker A

एक्टिविटी को और कंटिन्यू कर सकें। हम राइट? तो डोपामिन आपका डोमिनेंट रहता है। और नेक्स्ट में मतलब 9, 10, 11 एंड 12 जो लास्ट थर्ड सेट है फोर लेवल्स का उसके अंदर आपका गावा डोमिनेंट रहता है। जो वो

20:30

Speaker A

आपको मेंटल क्लेरिटी लेके आता है। और जो आपको मेंटल क्लेरिटी मतलब इतनी क्लेरिटी के आप इस चीज को आइडेंटिफाई कर पाते हैं कि इट इज अ वेस्ट ऑफ टाइम टू यू नो स्पेंड सम टाइम इन पास्ट और यू नो थिंक अबाउट

20:44

Speaker A

फ्यूचर। प्रेजेंट में रहने का जो बोध होता है वो आपको मिल जाता है बेसिकली जब आप लास्ट फोर सेट्स करते हैं तो ये हार्मोंस का रेगुलेशन होता है बेसिकली और ये सारी चीजें जो मैंने आपको बताई है दिस इज ऑल

20:55

Speaker A

बेस्ड ऑन रिसर्चेस जो डिफरेंट-डिफरेंट रिसर्चेस बेसिकली हुई है। अगर किसी को ये रिसर्चेस पढ़नी है या जाननी है तो वो इसके हमारे कमेंट्स में कमेंट कर सकता है। तो हम उसको वो रिसर्चेस जो है अपना ईमेल आईडी तो रिसर्चेस के लिंक्स हम भेज सकते हैं और

21:08

Speaker A

वो क्रेडिबिलिटी के लिए मैं बोल रहा हूं ताकि लोग लोगों को ये ना लगे कि हम ऐसी बातों को बोल रहे हैं। बेसिक तो इसके पीछे काफी सारी रिसर्च जो है वो इनवॉल्वड है। तो ये तो ब्रीथिंग के मैंने एक्सेप्ट मतलब

21:19

Speaker A

एक एक मैंने एस्पेक्ट आपको बताया। दूसरी जो एक जर्मन रिसर्च थी वो क्या कहती है जो मैंने लास्ट टाइम भी बताया था कि जब हम ब्रेथ होल्ड करते हैं। है ना? तो स्टेम सेल्स बढ़ना शुरू हो जाते हैं हमारे शरीर

21:33

Speaker A

के अंदर। है ना? क्योंकि बॉडी एक ऐसी स्टेट में चली जाती है। एक लो ऑक्सीजन स्टेट में चली जाती है जहां पे बॉडी को डर होता है कि कहीं कुछ डैमेज ना हो जाए। तो बॉडी हां मर ना जाए।

21:42

Speaker A

तो बॉडी उस चीज से निकलने के लिए अपने को बचाने के लिए अपनी सारी ताकत लगा देती है। अपनी सारी फोर्सर्सेस बेसिकली वो लगा देती है। उसमें स्टेम सेल सबसे ऊपर होते हैं जो एडल्ट्स में कम हो जाते हैं।

21:52

Speaker A

स्टेम सेल्स कैन टेक फॉर्म ऑफ एनी सेल। हां। और इट डस रीजनरेशन जो बच्चों में अच्छे होते हैं और जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं वैसे-वैसे वो कम होते जाते हैं। तो स्टेम सेल्स आपके बढ़ते हैं। दूसरा वीजीएफ वैस्को एंडोथिलियल ग्रोथ फैक्टर

22:05

Speaker A

जिससे क्या होता है? कोलटरल्स बनते हैं। सो जब हम कुंभक करते हैं तो योर हार्ट विल टेक मोर वॉल्यूम ऑफ ब्लड। राइट? कंपैरिजन टू यू नो हां क्योंकि जब आप होल्ड करते हो हम तो कोलटरल्स बनते हैं हम

22:16

Speaker A

अगर मेन आर्टरी में कोई प्रॉब्लम आ भी गई वैसे तो कुंभक करेंगे तो नहीं आएगी बट बाय चांस पहले से कोई दिक्कत है तो योर कोलटरल्स विल टेक केयर ऑफ़ दैट ओके तीसरा ईपीओ एरथ्रोपाइयो प्रोटीन जिसकी वजह से रेड ब्लड सेल्स का कंसंट्रेशन इंप्रूव

22:28

Speaker A

होता है कंसंट्रेशन ऑफ़ हीमोग्लोबिन एंड सिंगल सेल आपका बढ़ जाता है ओके नाइट्रिक ऑक्साइड आपका बढ़ जाता है जो डाइलेशन करता नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ता है नाइट्रिक ऑक्साइड और छठा जो मैंने बताया आपको सेरोटोनिन डोपामिन एंड गाबा का जो

22:41

Speaker A

रेगुलेशन है हार्मोन रेगुलेशन है। अब देखिए इसमें कोई भी चीज अगर ज्यादा हो जाए तो प्रॉब्लम है। सेरोटोनमी बहुत ज्यादा हो जाएगा तो भी दिक्कत है। डोपामिन बहुत ज्यादा हो जाएगा तो ईगो हार्मोन है तो भी दिक्कत है। डोपामिन

22:51

Speaker A

ब्रिंग्स इन एडिक्शन। हां और गाबा ऊपर नीचे हो गया तो वो भी तब तब भी दिक्कत है बेसिकली। सही बात है। तो हमेशा जो हार्मोंस है ना उसका बैलेंस जो है ना वो बहुत जरूरी होता है हमारे शरीर के अंदर। ठीक है? आगे हम बात करेंगे

23:02

Speaker A

अभी कि हार्मोंस को रेगुलेट कौन सा ऑर्गन करता है और वही ऑर्गन हमारे पूरे शरीर के अंदर बेसिकली एक ही ऑर्गन है वो जिसको अगर हमने ध्यान रख लिया तो हमारा शरीर निरोग रहेगा बेसिकली राइट तो पहले हमने बात करी कि कैसे हम बॉडी के

23:13

Speaker A

सेल्फ हीलिंग एबिलिटी को सेल्फ सेल्फ हीलिंग पोटेंशियल को बेसिकली इनेबल करें तो उसका तरीका बेसिकली इनेबलिंग का तरीका मैंने आपको बताया कुंभक हम तो ये कुंभक अगर आप अपनी दिनचर्या के अंदर इसको आप प्रैक्टिस करते हैं डेली प्रैक्टिस करते हैं तो इसके रिजल्ट्स आपको

23:28

Speaker A

ऐसा नहीं है कि एक महीने बाद मिलेंगे हां आफ्टर फाइव डेज यू विल स्टार्ट सीइंग द रिजल्ट्स। राइट? सिंगल सिंगल सेशन में लोगों को रिजल्ट मिलते हैं। मतलब साइकेट्रिक जो पेशेंट्स होते हैं जिनको स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो रहा है या

23:39

Speaker A

नेगेटिव बहुत ज्यादा सोच रहे हैं। तो आप सोच वो नेगेटिविटी एकदम से खत्म होती हुई चली जाती है बेसिकली। राइट? तो इनिशियल लेवल पे आपको थॉट्स में इफेक्ट आपको पहले फर्स्ट फाइव डेज में आने लग जाएगा। फिजियोलॉजिकल जो इफेक्ट्स हैं उसको आने

23:50

Speaker A

में थोड़ा-थोड़ा समय लगता है। एक महीने के अंदर आपको वो भी दिखने लग जाते हैं। बस हम हम राइट? क्योंकि मेरे जो सेशंस होते हैं उसमें मेरे को जैसे अभी आपने नाइट्रिक ऑक्साइड बोला तो जो मैंने रियलाइज किया है

24:01

Speaker A

ओवर टाइम जब आप ब्रेथ होल्ड करते हो जैसे मेरा अभी जो ब्रेथ होल्ड है वो है 4 1/2 मिनट या 5 मिनट के आसपास का जब एक सेशन मैं कर लेता हूं अदरवाइज इट्स मोस्टली 90 सेकंड्स और ये

24:13

Speaker A

मैं एक्सेल एक्सेल पे 90 सेकंड्स फिर वो 1 मिनट 2 मिनट हो जाता है और इन्हेल वाला होल्ड जो है वो 4 5 मिनट तक चला जाता है मैंने ये रियलाइज किया है कि आफ्टर अ टाइम हमें मैं कर रहा हूं दो-ती साल से। देयर

24:26

Speaker A

इज समथिंग वेरी मतलब आप उसको शब्दों में तो नहीं समझा सकते बट अगर कह सकते हो लाइक अ स्पिरिचुअल डाउनलोड काइंड ऑफ़ थिंग हैपेंस एंड इंट्यूशन इंक्रीसेस लाइक एनीथिंग। मतलब इंट्यूशन बढ़ता है। स्पिरिचुअल डाउनलोड बढ़ते हैं। आपके स्पिरिचुअल ऐसे

24:41

Speaker A

एक्सपीरियसेस होते हैं जो आप समझा नहीं सकते किसी को। एंड दैट कॉन्सेंट स्टेट ऑफ़ ब्लिस जो रहती है बॉडी में कि मतलब आपको ऐसा लगता है कि हां ठीक है। मतलब हां। हां तो ये सारे बेनिफिट्स जो आपने

24:52

Speaker A

बताए ये स्पिरिचुअल बेनिफिट्स हैं सारे। तो बच्चों में हमने ये देखा जब हम बच्चों को कुम सिखाया हमने तो बच्चों में फोटोजेनिक मेमोरी मतलब जिन जो पहले जिनका ध्यान ही नहीं लगता था पढ़ाई के अंदर। सोचो यहां पढ़ रहे

25:01

Speaker A

हैं और दिमाग कहीं और घूम रहा है। क्यों? इसलिए घूम रहे क्योंकि उनसे याद ही नहीं हो रहा है या वो उस चीज को मेमोराइज ही नहीं कर पा रहे हैं। और एंजॉय भी नहीं कर रहे। एंजॉय भी नहीं कर पा रहे।

25:10

Speaker A

इंटरेस्ट ही नहीं आ रहा है बेसिकली उनका। तो वो सब रिवर्स हो जाता है बेसिकली। तो जो भी पेरेंट्स हैं जिनके बच्चे अभी छोटे हैं उनको अगर अभी से आप कुंभक की आहार डालेंगे तो आप यू आर यू नो

25:20

Speaker A

हां आप अपने बच्चे को स्पिरिचुअली भी अपलिफ्ट कर रहे हैं और अपने बच्चे की जो बॉडी की सेल्फ हीलिंग एबिलिटी है उसको भी आप अपलिफ्ट करके रख रहे हैं और आने वाले समय में चाहे कोई भी बीमारी हो जाए

25:30

Speaker A

एक्सटर्नल है चाहे वो इंटरनल है हम किसी भी बीमारी कोई भी बीमारी होने का जो खतरा है शरीर के अंदर चांस है वो बेसिकली अपने आप ही कम हो जाता है। लेकिन मान लेते हैं अभी जैसे बहुत सारे लोगों को ये इश्यूज होते हैं कि

25:44

Speaker A

जब स्कैन्स में भी कुछ नहीं आता, रिपोर्ट्स में भी कुछ नहीं आता। मोस्टली न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स। कैंसर तो खैर एक सिचुएशन है ही। न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स की अगर बात करते हैं तो जिनको हो गया है प्रिवेंशन नहीं जब वो ऑलरेडी सफर कर रहे हैं।

25:57

Speaker A

ब्रेथ होल्ड उनके लिए कितना इंपॉर्टेंट मतलब वो कर सकता है कुछ। सबसे मैं आपको बताता हूं। तो अ मैं गुड़गांव अपना जो हमारा क्लीनिक है उसमें 4:00 बजे तक मैं नॉर्मल पेशर्स को देखता हूं। हम उसके बाद हम

26:10

Speaker A

मतलब आफ्टर फाइव आई सी ओनली पेशेंट हु आर सफरिंग फ्रॉम यू नो सम काइंड ऑफ़ साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर। चाहे वो स्ट्रेस है, ए्जायटी है, चाहे वो साइकोसिस है या कुछ भी है बेसिकली। और जो की फैक्टर है उनकी हीलिंग में वो ये

26:23

Speaker A

कुंभ की राय है हमेशा। राइट? अब सोचिए मेरा रोल क्या रहता है? मेरे को लोग क्यों हायर करते हैं अपने जैसे बच्चों के लिए? क्योंकि उसमें काउंसलिंग सेशंस होते हैं बेसिकली है ना। काफी समझाना पड़ता है, बताना पड़ता है ताकि जो वो

26:36

Speaker A

मेडिकेशंस ले रहे हैं ना एलोपैथी जो मेडिसिनस होती हैं जो साइकेट्रिक मेडिकेशंस हैं आइदर वो अपटेक होता है या वो इनबिट करता है किसी भी चीज को। सही बात है। किसी को बढ़ाता है या किसी को घटाता है वो

26:44

Speaker A

बेसिकली उससे क्या है बहुत सारी मेडिसिंस तो बेसिकली हैबचुअल हो जाती हैं। राइट? और वो कुछ छोड़ना बड़ा मुश्किल होता है। बहुत मुश्किल है। सो मैं उन मेडिसिनस को छुड़वाता हूं। ओके?

26:54

Speaker A

और क्योंकि जो अपटेक और इनहबिशन हमें करना है वो मैं नेचुरली सिखाता हूं कुंभक से उन बच्चों को उन पेशेंट्स को जो नहीं कर पा रहे हैं। जिन जिसके लिए उनको दवाइयों का सहारा लेना पड़ रहा है बेसिकली।

27:06

Speaker A

ओके? और कुंभक अगर आपने सीख लिया तो यू कैन इनबिट एनी हार्मोन एंड यू कैन अपटेक और रेगुलेट एनी हार्मोन बेसिकली। ओके?

27:16

Speaker A

एंड यू कैन कंट्रोल योरसेल्फ हम कि कब सोचना है, कब नहीं सोचना है। अभी साइकेट्रिक इशज़ में क्या होता है कि आपका कंट्रोल थॉट्स पे होता नहीं है। कंट्रोल खो जाता है। आपके लॉजिक्स डिसररप्ट हो जाते हैं। हम

27:28

Speaker A

ठीक है? इलॉजिकल थॉट्स आएंगे। आप उन पे टाइम स्पेंड करोगे। जितना टाइम स्पेंड करोगे आप दुखी होगे। फिर वही मैंने बताया ज्यादा बनेगा बेसिकली और फिर उसी डीप डाउन में आप जाते रहते हो बेसिक। तो कुंभक क्रिटिकल रोल प्ले करता है सारे

27:41

Speaker A

साइकेट्रिक इशज़ में। मैंने पांचप दिनों में रिजल्ट देखे हैं। मतलब जो लोग कुंभक जिन्होंने प्रैक्टिस शुरू किया और एक दो तीन महीने के अंदर वीन ऑफ धीरे-धीरे सारी मेडिसिन वीन ऑफ हो जाती हैं और कंट्रोल सेल्फ कंट्रोल आ जाता है। सबसेोर्ट्ट है

27:54

Speaker A

सेल्फ कंट्रोल। लोग क्या करते हैं? थॉट आते ही रिएक्शन दे देते हैं। हां। सो कुंभक अच्छा कुंभक का एक आयाम मैं और बताता हूं आपको। वो सिर्फ ब्रेथ होल्ड कुंभक नहीं है। कुंभक इज द वे ऑफ़ लिविंग। राइट?

28:04

Speaker A

मैंने कुछ बोला आपको। आपने तुरंत रिएक्शन दे दिया। यू हैव नॉट डन द कुंभक। हम मतलब कुंभक मैंने कुछ बोला रुक के होल्ड करना। रुक के समझ के फिर रिसोंड करना। राइट?

28:15

Speaker A

दैट इज आल्सो कुंभक। कुंभक। आप फास्ट करते हैं। दैट इज़ आहार कुंभक। हम आपने अपनी आंखें बंद करी। नेत्र कुंभक। होल्ड करना बेसिक। आपने सुनना बंद किया कर्ण कुंभक। हम तो जब बच्चा वो में होता है ना पेट में

28:27

Speaker A

होता है तो वह पंच इंद्रिय कुंभक करता है तो पंच इंद्रिय कुंभक अगर आप कर लो पांचों इंद्रियों का कुंभक अब सोचिए हमारी जो एनर्जी बॉडी से बाहर जाती है वो इन फाइव सेंसेस के थ्रू तो जाती है

28:38

Speaker A

पांचों इंद्रियों के थ्रू जाती है जो ड्रॉ आउट होती है एनर्जी अगर उस एनर्जी को प्रिजर्व करना है तो पांचों इंद्रियों का कुंभक करना पड़ेगा आपको और पांचों इंद्रियों कुंभक अगर आपने कर लिया तो बॉडी की सेल्फी एबिलिटी को कितना

28:47

Speaker A

बढ़ा दिया आपने सही बात है जस्ट सी लाइक अ मतलब किड इन अ वम हां आप समझ रहे हैं?

28:56

Speaker A

उसका नरिशमेंट कैसे होता है? 9 महीने तक ग्रोथ कैसे होती है उसकी? आप सोचो अंधेरे में ही रहता है वो। हम आप समझो सही बात है। तो आयुर्वेद में कुटी प्रवेक्षा करके हम एक ऐसी एक थेरेपी होती है जिसमें एक ऐसा

29:07

Speaker A

रूम बनाया जाता है जिसमें एक इतनी सी भी लाइट नहीं आ सकती अंदर। ओके। और क्रिटिकल पेशेंट को वहां पे रखा जाता है और उसको ट्रीट किया जाता है। बेसिकली इसी से मिनिमल इंटरवेंशन ऑफ़ मेडिसिंस। बॉडी की सेल्फ हीलिंग एबिलिटी क्योंकि जब हां

29:17

Speaker A

पंचेंद्रिय कुंभक आप समझ रहे तो कुछ औषधियां भी होती है बट ऐसी इंटेंस औषधियां नहीं होती हैं। उसमें उस कंडीशन में यह होता है कि बॉडी के सेल्फ हीलिंग पोटेंशियल को इनेबल करना। हां क्योंकि आई थिंक आई डोंट थिंक उससे

29:28

Speaker A

पावरफुल कुछ और है। बिल्कुल उससे पावर आप खुद प्रैक्टिस करिएगा। डेली दो घंटा क्या करिए? आंख रुई लगा के आंखों में काला काला कपड़ा बांध लीजिए। कानों में कॉटन कर लीजिए। डार्क रूम में बैठ जाइए। एक इतनी सी भी लाइट

29:40

Speaker A

नहीं होनी चाहिए। जस्ट सीट फॉर टू आवर्स एंड डू कुंभक ब्रेथ होल्ड आल्सो साथ में। मतलब बहुत हां मतलब ऑफ कोर्स आफ्टर टू आवर जब आप रूम से बाहर आएंगे ना यू विल सी एवरीथिंग फ्रॉम डिफरेंट पर्सेक्टिव आपको कलर्स मोर वाइब्रेंट

29:52

Speaker A

दिखेंगे आपको चीजें बहुत ज्यादा बेहतर समझ आएंगी मान के चलिए आपने कल गीता पढ़ी है भगवत गीता का कोई श्लोक पढ़ा है और दो घंटे के बाद वो करने के बाद आप उस श्लोक को पढ़ेंगे तो उसको और डीपेस्ट मीनिंग जो है

30:03

Speaker A

आपको समझ आएगा एक्चुअली सो ये असली हीलिंग है बेसिकली राइट जो हमारी पौराणिक और एंशिएंट जो हीलिंग है जो लोग पहले गुरुकुलों में जो प्रैक्टिस करते थे जो हमारे गुरु लोग जो प्रैक्टिस करते थे बेसिकली तो वो ये हीलिंग होती थी

30:15

Speaker A

कि इसलिए गुरुगुल होते थे। हम तो इसीलिए हमारे आज के आजकल हमारे स्कूलों में हेल्थ का सब्जेक्ट ही नहीं है कि प्रिवेंशन कैसे करें?

30:22

Speaker A

पुराने जमाने में सबसे पहले तो शरीर की ही शिक्षा दी जाती थी कि शरीर को स्वस्थ कैसे रखना है आपको?

30:27

Speaker A

उसको स्वस्थ रख स्वस्थ रखने के लिए टेक्निक्स होती थी। सुबह उठ के देखो हवन करना, योग करना, प्राणायाम करना आप समझो। खुद बना के खाना अपना। गुरुकुल में क्या होता था कि इंसान को खुद बना के खाना होता

30:38

Speaker A

था। ऐसा नहीं है कि आपको कोई बना के देगा। क्योंकि आई थिंक उसमें इंटेंशन का कुछ होता है। अगर आप खाना बनाते टाइम वो इंटेंशन आपका भाव हां बिल्कुल बिल्कुल भाव जो होता है इमोशंस जो होते हैं वो होता

30:48

Speaker A

है। ऐसा बोला जाता है कि वाटर की मेमोरी होती है। हां अब खाना बनाने के लिए पानी चाहिए तो जल जहां पे भी रखा है और वहां पे कोई नेगेटिव वार्तालाप या नेगेटिव चीजें हो रही है और उस जल को आप कंज्यूम करोगे तो बॉडी इज 72%

30:58

Speaker A

वाटर। हम सो इट विल इंपैक्ट योर 72% हेल्थ। सो इसलिए इसीलिए जब हम कोई भी स्पिरिचुअल जैसे आपने गीता पढ़ा या हनुमान चालीसा पढ़ रहे। क्यों बोला जाता है कि आप जल साथ में रखो। हां। क्यों बोला जाता है कि अग्नि भी साथ में

31:12

Speaker A

रखो। पंचमहाभूत का प्रेजेंस है। पंचमभूत भगवान। तो वो एक प्रतीक है बेसिकली ना कि जल भी है, अग्नि भी है, वायु और आकाश तो है ही है। बेसिकली पृथ्वी पे तो आप बैठे ही हैं। राइट?

31:21

Speaker A

तो पांच तत्वों के साथ जब आप कोई भी चीज करते हो तो एक एक श्री विद्या में साधना होती है जिसमें वो ग्लास रखते हैं और फिर वो पूरा सहस्राम चैंट करते हुए उसको पी लेते हैं। हां। हां। तो ये ये इसको बोलते हैं ब्लेस

31:34

Speaker A

ब्लेस्ड वाटर। मतलब ब्लेसिंग दिया। अब देखो पानी होल्ड करता है मेमोरी है ना पानी मेमोरी को जो पानी है वो होल्ड करता है और पानी के साथ बेसिकली कभी भी आप कोई ऐसा खिलवाड़ नहीं कर सकते हो आप नेगेटिव

31:44

Speaker A

सोच के पानी को बिल्कुल नहीं पी सकते इसलिए बोला जाता है तसल्ली से बैठ के बैठ के पानी पियो बैठ के पानी पियो शांति से वो यही मतलब है बेसिकली नाइस ठीक है और जो ये कुंभक का एक

31:54

Speaker A

इसका लिंक भी हम उसमें दे देंगे कमेंट्स के अंदर मैं एक चीज और बताऊंगा आपको जो आपने सुना होगा हमारी योग के अंदर कुंडलिनी हमारे सात चक्र होते हैं जब हम सांस को अंदर लेते हैं तो हमारी ऊर्जा ऊपर की तरफ जाती है और जो हम सांस

32:06

Speaker A

को छोड़ते हैं तो हमारी ऊर्जा ऊपर से नीचे आती है। ये आपने सुना। इस पे इस पे एक एक पॉइंट के बाद आएंगे। हम जो मेरा प्रीवियस क्वेश्चन था उसमें आपने जो आंसर किया था वो साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर का था।

32:20

Speaker A

बट मेरे को ये भी कंफर्म करना है फॉर पीपल हु हैव न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर। जैसे फाइब्रोमाइलजिया फाइब्रोमाइल मतलब जैसे वो होता है ना कि बॉडी में पूरे टाइम पेन है। हां हां टर्मिनल में कुछ नहीं आ रहा। न्यूरलिया न्यूरलजिया हो फाइब्रोमाइल हो

32:33

Speaker A

गया जिसके अंदर आप सिर्फ सिम्टम के बेस पे एक डायग्नोसिस दे सकते हो कि हां इसको माइलजिया हो गया या इसको फाइब्रोमाइल हो गया। डेफिनेटली कुंभक हैज़ अ वेरीेंट रोल। क्योंकि जो आप देख रहे हैं जो मैंने बताया

32:44

Speaker A

था आपको नर्वस सिस्टम और बोन मैरिट टिश्यू जो हमारा लास्ट जो थ्री का सेट था मतलब हमारा जिसके अंदर था आपका 30 33 एंड 36 वाला जो सेट था हमारा उसके अंदर सारा का सारा जो हमारा इंपैक्ट है वो इन्हीं चीजों पे है एक्चुअली में।

32:57

Speaker A

तो नर्वस सिस्टम का जो स्टेबलाइजेशन है हमारा न्यूरोलॉजिकल जो स्टेबलाइजेशन है वो सारा बेसिकली आपको फोर्थ मतलब थर्ड स्टेज में जिसमें तीन सेट्स हैं आपके 30 33 एंड 36 वहां पे हो रहा है तो बिल्कुल डेफिनेटली न्यूरोलॉजिकल कंडीशन के अंदर भी

33:11

Speaker A

इसका रोल है और पेन कंट्रोल कंट्रोल करने में तो काफी इंपॉर्टेंट रोल है। सिर्फ न्यूरोलॉजिकल पेन ही नहीं अगर आपको अर्थराइटिस का भी कहीं पेन है राइट या कहीं पे भी कुछ भी आपको दर्द हो रहा है तो आप एक बार प्रैक्टिस करके देखिए

33:22

Speaker A

बिफोर आफ्टर आप नोट कर लीजिए कितनी इंटेंसिटी है पेन की और आफ्टर जब आप अच्छा 369 ही कर लीजिए जो मैंने आपको इफेक्ट बताए हैं ना वन से लेके 12 लेवल तक वो इफेक्ट आपको हर लेवल पे मिलेगा बट

33:33

Speaker A

डोमिनेंस उसका ज्यादा मिलेगा जो मैंने आपको बताया है बेसिकली ऐसा नहीं है कि नर्वस सिस्टम का इंपैक्ट जो है 369 पे नहीं आएगा आएगा वहां पे भी बट इंटेंसिटी थोड़ी सी कम होगी थोड़ा समय लगेगा बेसिकली आने में बट अगर आप 30 33 36 करेंगे तो

33:44

Speaker A

इंटेंसिटी बहुत ज्यादा होगी उस इफेक्ट की उस पर्टिकुलर टिश्यू पे बोन मैरो टिश्यू पे जहां से हमारा सारा नर्वस सिस्टम कंट्रोल होता है। राइट? तो डेफिनेटली जो ऑलरेडी जो सफर कर रहे हैं किसी भी तरीके के इस तरीके की बीमारी से

33:57

Speaker A

वो अगर कुंभक प्रैक्टिस करेंगे तो बहुत जल्दी उनको इफेक्ट जो है वो मिलेगा। ओके। ठीक है? अब आ सकते हैं वो कुंडलिनी वाली। हां। तो तो चक्र थ्योरी है ना कि जब जैसे ही हमने सांस को अंदर भरा तो हमारी जो एनर्जी है

34:12

Speaker A

वो नीचे से मूलध से होती हुई वो संसार तक जाती है। फिर जैसे ही हम सांस को बाहर निकालते हैं वो ऊपर से फिर नीचे की तरफ आती है। तो एक साइंटिस्ट हैं बेसिकली हावर्ड के तो उन्होंने रिसर्च किया। सो

34:23

Speaker A

व्हाट ही वास ट्राइंग टू एस्टैब्लिश इज़ कि अब ब्रेथ का बॉडी के फिजिकल सिस्टम से क्या कनेक्शन है?

34:28

Speaker A

हम तो उन्होंने अपने को एमआरआई के मशीन में डाला और पहले नॉर्मल ब्रीथ कर रहे थे वो। मतलब नॉर्मल लेंथ ऑफ़ इन्हेलेशन था, नॉर्मल लेंथ ऑफ़ एक्सेलेशन था। हम हम तो, उन्होंने देखा जैसे ही वह इन्हेल करते हैं, समथिंग सम मूवमेंट इज़ हैपनिंग इंटू द

34:41

Speaker A

स्पाइन। ओके? वो मूवमेंट बताऊंगा किस फिजिकल मूवमेंट? फिजिकल मूवमेंट। और जैसे ही वो एक्सेल करते हैं, सम मूवमेंट इज़ हैपनिंग डाउन द स्पाइन। इनेलेशन पे अप द स्पाइन थी और एक्सेलेशन पे डाउन द स्पाइन थी। दैट वाज़ द मूवमेंट ऑफ़ सीएसएफ।

34:54

Speaker A

सेरीबोस्पाइनल फ्लूइड। हम राइट? जो मेनली हमारा क्रेनियल क्रेनियल कैविटी में होता है जो ब्रेन को नरिश भी करता है और ब्रेन को डिटॉक्स भी करता है बेसिकली। ओके। और सेरीबोस्पाइनल फ्लूइड पूरे दिन में बॉडी 400 ml बनाती है। एक

35:06

Speaker A

एडल्ट में 400 ml सेबोस्पाइनल फ्लूइड बनाती है। उसको पूरी बॉडी में डिस्ट्रीब्यूट होना होता है। और ब्रेन का पूरा सेरिबोस्पाइनल फ्लूइड डेली रिप्लेस होना होता है। अभी ठीक है? अब जैसे ही उन्होंने अपनी ब्रेथ को लंबा किया तो ऑसिलेशन ऑफ सीएसएफ है जो

35:22

Speaker A

वो एकदम से बढ़ गया। मतलब पहले वो मान के चलिए यहां तक आया तो अब वो यहां तक हो गया। हम जैसे ही उन्होंने एक्सेल को डीप किया तो पहले वो यहां तक गया था तो वो यहां तक हो

35:30

Speaker A

गया। प्रेशर मतलब जितना वो डीप इन्हेल और डीप एक्सेल कर रहे थे उतना उसका ऑसिलेशन बढ़ रहा था बेसिकली ऊपर की तरफ और नीचे की तरफ हम राइट सोचिए कितना ब्यूटीफुल एक कोरिलेशन है अगर आप देखेंगे हमारी चक्रा थ्योरी के

35:42

Speaker A

अंदर भी क्या होता है व्हेन वी इन्हेल कुंडलिनी मूव्स अप व्हेन वी एक्सेल कुंडलिनी मूव्स डाउन सो दिस इज द कनेक्शन बिटवीन यू नो एंड दैट प्रूव्स आवर सनातन धर्म हमारा योग हमारी कुंडलिनी जो थ्योरी है हमारी जो चक्रा थ्योरी है दैट दिस होल

35:55

Speaker A

एक्सपेरिमेंट प्रूव्स दैट राइट व्हिच राइट एंड सेरबोसल फ्लूइड के बारे में और मैं बताऊंगा यह वही फ्लूइड होता है जब बेबी वर्म में होता है। ठीक है? तो बच्चा भी उसी में फ्लोट करता है। तो वो का डिटॉक्सिफिकेशन वर्म का नरिशमेंट

36:08

Speaker A

बच्चे का नरिशमेंट भी इसी से होता है। तो इसका मतलब यह भी है हां ये बहुतेंटेंट पॉइंट है। एक्चुअली मेरे दिमाग में जस्ट आया है कि अगर कोई प्रेग्नेंट वूमेन है इन द लास्ट ट्रायमेस्टर मे बी हम वो ब्रेथ होल्ड करे तो उसका बेनिफिट

36:22

Speaker A

मैं तो हमारा हम गर्भ संस्कार करवाते हैं। गर्भ संस्कार क्या होता है कि एक अच्छा हेल्दी बेबी कंसीव करने का एक पूरा अब मॉडर्न टर्म्स में बोलूंगा थेरेपी है एक तरीके से। राइट यह पूरा प्रोटोकॉल है। हम उस गर्भ संस्कार में हमारा प्राणायाम

36:35

Speaker A

डे वन से होता है। बेसिकली अच्छा डे वन से नहीं बट ये फियर नहीं होता कि जैसे लास्ट मंथ्स में नहीं होल्ड करते हैं। कोई फियर नहीं होता। एक्चुअली क्या है? हम हमारा शुरू कहां से होता है? देखिए कंसेप्शन से

36:49

Speaker A

तीन महीने पहले से गर्भ संस्कार शुरू होता है। बीज शुद्धि जिसको हम बोलते हैं। ओके?

36:52

Speaker A

बीज शुद्धि में क्या होता है? राइट? अ कंसेप्शन होने से पहले मतलब मेल फीमेल का दोनों का जो सेवन के सेवन टिश्यूस है शुक्र धातु जो है अर्थवा जो फीमेल में है उसका शुद्धिकरण होना ताकि उसकी क्वालिटी बेहतर हो जाए बेसिकली

37:04

Speaker A

जो करंट टिश्यूज़ होते हैं उसको पहले एड्रेस किया जाता है तो उस टाइम पे ही बेसिकली उनको कुंभक में इनिशिएट कर दिया जाता है अच्छा और आपने बोला फियर अब कई लोगों को होगा 36 पे होल्ड करेंगे तो कुछ हो ना जाए

37:14

Speaker A

वही मतलब प्रेशर बढ़ता है ना किसी बॉडी अब मैं बताता हूं इसीलिए इस टेक्निक को इंक्रीमेंटल रखा गया है हम मैं सीधा कभी बोलता ही नहीं कि 36 करो राइट जब तक थ्री नहीं या 36 तक आप पहुंच ही

37:25

Speaker A

नहीं सकते। हम 3 69 अगर आप 36 तक भी पहुंच गए ना तब भी स्टार्ट आपको थ्री से ही करना पड़ेगा। गाड़ी चलाते हैं ना गियर पहला लगाते हैं, दूसरा लगाते हैं। पहले से सीधा तीसरा लगा लो। गाड़ी उठेगी

37:37

Speaker A

पर झटका लेके उठेगी। हम इंजन पे लोड पड़ेगा। ऐसी बॉडी का है। कई लोग आउट ऑफ द प्रोटोकॉल चले जाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा हुआ है कि मैंने एक्सप्लेन किया इसको ऐसे करना है। उन्होंने करा 18 सीधा 18 से शुरू कर दिया।

37:49

Speaker A

बट उसके फिर इफेक्ट होते हैं। प्रैक्टिस दिस थेरेपी और दिस यू नो टेक्निक एज इट इज स्टार्ट फ्रॉम द लोएस्ट क्योंकि अप्टेशन होता है। देखो आप बॉडी को धीरे-धीरे प्रिपेयर कर रहे हैं। जब आप एक ट्रैक करते हैं ऊपर पहाड़ पे चढ़ रहे हैं और 45°

38:09

Speaker A

इंक्लिनेशन है या कितना भी इंक्लिनेशन है अगर आप लंबे-लंबे स्टेप लो तो बहुत जल्दी थक जाओगे और माउंटेन सिकनेस आपको होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। बट ब्रेथ लेंथ के हिसाब से आप स्टेप ले रहे हैं छोटे-छोटे छोटे-छोटे।

38:21

Speaker A

सो व्हाट यू आर डूइंग यू आर सिंकिंग योरसेल्फ विद योर ब्रेथ एंड विद एलिवेशन यू आर मेकिंग अ बैलेंस फिर धीरे-धीरे करके वो शुरू शुरू में स्लो होगी स्पीड धीरे-धीरे वो स्पीड भी बढ़ेगी आप देखेंगे और उस बढ़ती हुई स्पीड पे आपका

38:33

Speaker A

सांस भी नहीं फूलेगा हम सिमिलरली ये कुंभक एक्सरसाइज है कुंभक इज़ जस्ट यू नो यू आर डूइंग अ ट्रैक बेसिकली ऑन दिस एलिवेशन यू हैव टू बी वेरी केयरफुल आपको आउट ऑफ बॉडी की एबिलिटी से ज्यादा नहीं करना है कभी भी

38:49

Speaker A

जितना आपकी बॉडी आपको अलव कर रही है उतना ही करना है इसीलिए इसलिए इसको हमने इंक्रीमेंटल बनाया है। छोटे पांच साल के बच्चे से लेके और 90 इयर्स 100 इयर्स के एज तक के लोग सब इसको बेसिकली इसी एक

38:59

Speaker A

सिंगल टेक्निक को बेसिकली फॉलो कर सकते हैं। बट अपने-अपने हिसाब से छोटे बच्चे होते हैं दो-ती साल के उनके लिए हम क्या करते हैं? उनको बोलते हैं कुंभक करने की भी जरूरत नहीं है। उनको हम बोलते हैं ब्रेथ अवेयरनेस। कुछ मत करो।

39:11

Speaker A

काउंट योर ब्रेथ। हम बच्चों के लिए गेम हो गया। क्योंकि मस्कुलर डिस्ट्रोफी जैसे मैंने आपको बताया था एक हमारा प्रोजेक्ट है। इसके बारे में हम बात करेंगे। तो उसमें ना छोटे बच्चे भी होते हैं। अब उनको कुंभक तो

39:21

Speaker A

करा नहीं सकते। क्या कराएं? फिर एक गेम बना देते हैं हम कि काउंट बेटा काउंट आपको अपना ब्रेथ काउंट करना है। काउंट 118 ब्रेथ्स काउंट जितनी काउंटिंग उसको सिखाई है उतनी काउंटिंग बोलते हैं कि हां 50 50 ब्रेथ काउंट कर लो या 100 ब्रेथ काउंट कर

39:34

Speaker A

लो बेसिकली। तो उसके लिए गेम हो जाता है। हम ब्रेथ काउंट कर रहा है तो ब्रेथ पे अवेयरनेस आ रही है। हम और ब्रेथ वो है दैट कैन नॉट हैपन इन पास्ट एंड दैट कैन नॉट हैपन इन फ्यूचर। इट इज़

39:42

Speaker A

ओनली हैपनिंग नाउ। सो ब्रेथ अवेयरनेस बिल्ड हो रही है उससे। राइट? राइट? राइट? और इसका भी है। इफ अगर आप 20 ब्रेथ्स काउंट कर रहे हो तो सेरोटोनिन एकदम से बढ़ना शुरू होता है और कॉर्टिसोल धीरे-धीरे रिडक्शन शुरू होता है।

39:55

Speaker A

हम 20 से 50 ब्रेथ्स आप काउंट करते हो। ठीक है? तो इंक्रीस ऑफ़ सेरोटोनिन और बढ़ता है और कॉर्टिसॉल का रिडक्शन और वो हो जाता है, डाउन हो जाता है। मोर देन 50 ब्रेथ्स जब आप काउंट करते हो। सो आपका

40:09

Speaker A

फील गुड फैक्टर है ना? आपका मोटिवेशन फोकस डोपामिन और गाबा की साइकिल वो भी कंप्लीट हो जाती है। तो मोर देन 100 ब्रेथ अगर 100 में हो तो 108 ब्रेथ अगर आप काउंट कर रहे हो कुंभव भी नहीं कर रहे हो ना अपने वर्क

40:19

Speaker A

स्टेशन पे हो आप। हां क्लोज योर आइज आफ्टर एव्री एक्सेलेशन काउंट वन टू थ्री जस्ट बी अवेयर ऑफ़ योर ब्रेथ। राइट?

40:28

Speaker A

एंड इसके पीछे भी सारी रिसर्चेस हैं। ये जो मैं आपको बोल रहा हूं ना काउंट कि 20 ब्रेथ तक क्या होगा? 50 ब्रेथ तक काउंट करने पे क्या होगा? 100 ब्रेथ तक क्या होगा? दिस इज़ ऑल डॉक्यूमेंट। बिल्कुल लेकिन ये पॉइंट समझ नहीं आता। लोग

40:39

Speaker A

ऐसे रिसर्च रिसर्च के पीछे क्यों भागते हैं? इसको तो आप एक्सपीरियंस खुद ही कर सकते हो करके। हां नहीं अब देखिए मैंने आपको वही बताया मैंने क्यों करा ये रिसर्च क्योंकि ताकि मैं मैक्सिमम लोगों को ये चीजें बता सकूं

40:50

Speaker A

क्योंकि मेरा देखो मैं आयुर्वेदिक डॉक्टर हूं। आये का जो एक बेसिक प्रिंसिपल है प्रिवेंशन उस पे कोई काम नहीं करता। हम लोग लड़ रहे हैं आपस में। एलोपैथी डॉक्टर लड़ रहे हैं। आयुर्वेद से आयुर्वेद वाला डॉक्टर लड़ रहा है।

41:02

Speaker A

वो क्योर पे लड़ रहे हैं बट एक्चुअली प्रिवेंशन का काम। प्रिवेंशन का काम। अरे बीमार अगर हम बनेंगे ही नहीं। तो खत्म है ना काम सारा। या राइट इस चीज को पढ़ाओ ना हम तो दिक्कत तो यही है कि कैसे हम बीमार ना

41:13

Speaker A

हो वो उसप कोई बात ही नहीं करता है। इस दवाई ने ये नुकसान कर दिया। आयुर्वेद वाला बोलेगा इसके एलोपैथी के साइड इफेक्ट्स हैं। एलोपैथी वाला बोलेगा आयुर्वेद की दवाई के साइड इफेक्ट्स हैं। लड़ते रहो। हां पेशेंट गया तेल लेने। समझ रहे हो? मतलब

41:26

Speaker A

आप पेशेंट को गाइड कर दो ना। लड़ने से बेहतर ये है कि एक दूसरे की पैथी पे आप गलत बोल रहे हो। यू प्रैक्टिस योर ओन पैथी। वी प्रैक्टिस आवर ओन पैथी। आप अपनी पैथी को प्रैक्टिस करो। हां सही बात

41:36

Speaker A

है। सबसेेंट यही है लोग वो नहीं करते एक्चुअली हम ओके और क्या-क्या डीप बेनिफिट्स हैं ये सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड के?

41:44

Speaker A

देखो सेबोस्पाइनल फ्लूइड को मैं मानता हूं सेरबोस्पाइनल फ्लूइड वो फ्लूइड है जो एक्चुअली में आपकी मैंने बोला ना 70% बॉडी पानी है आप समझिए। उस डिफरेंट-डिफरेंट तरीके के फ्लूइड्स हैं हमारी बॉडी के अंदर। सेरीबोस फ्लूइड एक फाइनेस्ट फ्लूइड है जो

42:01

Speaker A

हमारी बॉडी में सबसे बेस्ट डिटॉक्सिफिकेशन करता है। बेसिकली हम और हमारे कंट्रोलर के डिटॉक्सिफिकेशन सब उसी के हाथ में है। आप समझिए अगर मान के चलिए सेरोसिनल फूड ब्रेन में पूरा रिप्लेस नहीं हुआ। ठीक है? पूरा रिप्लेस नहीं हुआ

42:14

Speaker A

है। तो जो टॉक्सिंस होते हैं कुछ प्रोटंस होते हैं जो ब्रेन के अंदर इकट्ठा होने शुरू हो जाते हैं। है ना? जैसे ब्रेन ट्यूमर आपने सुना होगा। बिनाइन ट्यूमर भी बन जाते हैं लोगों को। बजराइड क्यों बन रहा है वो? क्योंकि कफा स्टेगनेंट हो गया

42:25

Speaker A

है। ब्रेन के अंदर कफा स्टैग्नेट क्यों हुआ? सेवसल फ्लूइड पूरा नहीं हो पा रहा है। हम ओके आप समझ रहे हैं? और इस तरह के कुछ इंप्योरिटीज जो हैं जो सेव स्पाइनल फ्लूइड रिप्लेस ना होने की वजह से नहीं निकल पाई

42:37

Speaker A

है। उसकी वजह से साइकेट्रिक इशज़ भी आते हैं। आपको अच्छा फील नहीं होता। फील गुड फैक्टर नहीं आता है। न्यूरोट ट्रांसमिशन पूरा डिसेप्ट हो जाता है बेसिकली आपका। राइट?

42:44

Speaker A

इमंबैलेंस हो जाता है। हम देखिए क्या होता है? हमारी बॉडी में हर हार्मोन का एक एक लेवल होता है कि इतना ही हार्मोन चाहिए हमें। हम्। रेस्ट हार्मोंस को हमारा लिवर मेटाबोलाइज़ करके बाहर निकाल देता है। वह उसको वह करके

42:56

Speaker A

रखता है। मतलब बैलेंस बना के रखता है ताकि कोई भी हार्मोन जरूरत से ज्यादा शरीर के अंदर ना बने। जितना जरूरी है उतना ही वो बने बेसिकली। राइट? तो सेरीबोस्पाइनल फ्लूइड का जो सबसे दो इंपॉर्टेंट सबसे फंक्शन है। एक तो नरिशमेंट और एक

43:08

Speaker A

डिटॉक्सिफिकेशन ऑफ योर वाइटल ऑर्गन्स। ये सबसेेंट रोल है इसका। ओके? ठीक है। अ ब्रेथोल्ड पे हमने जिस मतलब जो इसके इफेक्ट्स की बात करी है क्या हम अ एंटी एजिंग को भी उससे लिंक कर सकते हैं?

43:29

Speaker A

यस टेलोमियर्स आपने सुने होंगे। टेलोमियर्स टेलोममेियर्स एक थ्रेड लाइक स्ट्रक्चर्स होते हैं हमारे सेल के अंदर जो कि हमारे डीएनए को कैरी करते हैं बेसिकली। राइट? तो जैसे ही सेल हमारा मल्टीप्लाई होता है। ठीक है? तो टेलोममेयर्स जो होते हैं उनका जो लेंथ

43:46

Speaker A

होता है वो शॉर्ट होना शुरू हो जाता है। ओके? धीरे-धीरे करते एक समय ऐसा आता है वो इतना शॉर्ट हो जाता है कि फिर अ वो मतलब नॉन एक्सिस्टेंट हो जाता है। एक क्रोमोसोम में आता है। हां हां हां बिल्कुल

43:57

Speaker A

ओके। तो ये जो सेल जो है जैसे वो जितनी लेंथ शॉर्ट होती रहेगी उतना सेल की एक्टिविटी जो है वो कम होती रहती है। उतना वो सेल बलकी होता रहता है। जैसे मैं बता रहा था ना बलकी सेल। तो ये भी एक तरीके ये भी एक

44:07

Speaker A

फंडा होता है बलकी सेल होने का कि जब टेलीमर्स जो होते हैं वो कम होना शुरू हो जाते हैं। जब हम ब्रेथ होल्ड कुंभक करते हैं। सो टे जो टेममेरेज एक्टिविटी होती है एंजाइमेटिक जो एक्टिविटी होती है जो

44:16

Speaker A

टेलोममेर्स के अंदर डीएनए को सप्लाई करता है और टेलीममेर्स की जो लेंथ है उसको जो प्रिजर्व करके रखता है तो वो कुंभक है अगेन हाइपोक्सिक स्टेट। सो व्हेन यू आर डूइंग कुंभक यू आर प्रिवेंटिंग द श्रिंकेज ऑफ टेलोमियर्स। ठीक है? जिसकी वजह से सेल

44:33

Speaker A

मल्टीप्लिकेशन के बाद भी वो शॉर्ट नहीं होते हैं बेसिकली। राइट? और टेलीमियर्स का मेन जो फंक्शन होता है वो डीएनए को डैमेज से बचाना होता है। बेसिकली कुछ भी उसमें कुछ चेंज ना हो जाए। कुछ ऑल्टरेशन ना हो जाए। म्यूटेशन से बचाना

44:45

Speaker A

होता है। समझ रहे हैं आप? कि कहीं वो इधर-उधर ना वो जैसे चंचल बच्चा होता है ना उसको मदरफादर उसको हर चीज पे टोकते हैं। वैसे ही इसका फंक्शन होता है। सो मेन एंटा एजिंग में देखिए एंटा एजिंग

44:57

Speaker A

का अगर हम ब्रॉड लेवल पे देखें क्या? अगर हमारे सारे सेल्स शरीर के अंदर टाइम पे जैसे ही बलकी बनते हैं माइटोफेज ट्रिगर हो जाए और टाइम पे वो रिसाइकल हो जाए तो वैसे ही रीजनरेशन हो गया। अब समझिए

45:07

Speaker A

स्टेम सेल्स अगर आपके बढ़ गए तो वैसे ही रीजनरेशन हो गया। तो कुंभक इन इटसेल्फ इज़ रीजनरेशन। आजकल लोग तरह-तरह के इंजेक्शंस, तरह-तरह की मेडिकेशंस लेते हैं एंटाइजिंग के मैंने देखा है कई लोग मेटफॉर्मिन ले रहे हैं। एक डायबिटिक

45:23

Speaker A

ड्रग है। मैटफॉर्मिन लेते हैं ताकि शुगर मेटाबोलाइज इंसुलिन का जो अपटेक और इंटेक है वो थोड़ा सा कंट्रोल हो जाए। शुगर स्पाइक ना हो। खाना खाने के बाद मैट फॉर्मिनल लेते हैं ताकि वो शुगर स्पाइक ना। उनका मानना है कि

45:36

Speaker A

अगर ऐसा करेंगे तो उससे एजिंग जो है वो नहीं होगी। वो मतलब एज बॉडी जो है वो कम करेगी बेसिकली। राइट? बट देखिए क्या है कि कोई भी केमिकल को अगर आप लोगे ठीक है?

45:47

Speaker A

और उस केमिकल को तो बॉडी को ही प्रोसेस करना है। उसमें बाइंडर्स भी होते हैं, प्रिजर्वेटिव्स भी होते हैं, बहुत सारी चीजें होती हैं। और जब आप किसी भी पिल से किसी भी फंक्शन को स्टिमुलेट कराते हो तो जो बॉडी का नेचुरल फंक्शन है वो

45:58

Speaker A

डिस्टर्ब हो जाता है। नेचुरल बंद हो जाता है। तो आपको हमेशा उस पे डिपेंडेंट रहना पड़ेगा उसके लिए। हां। अब आप जब उसको छोड़ोगे आप कुछ भी थोड़ा सा भी कार्ब खाया एकदम शुगर स्पाइक जाएगा आपको। क्यों? क्योंकि पहले तो आप पिल से कंट्रोल

46:11

Speaker A

कर रहे थे। बॉडी को तो आपने वो एबिलिटी बनाई नहीं। तो व्हेन यू डू कुंभक यू इनेबल ऑल दी काइंड ऑफ फंक्शनंस कि वो सेल्फ अपने आप ही करें बॉडी जब जरूरत है जितना उतना करें हम। सो एक्चुअली कुंभक मेक्स योर

46:24

Speaker A

सिर्फ ब्रेन नहीं बोलूंगा बॉडी के हर सेल को इट मेक्स मोर इंटेलिजेंट बेसिकली ताकि जब जो लेना है वो ले। जब जो देना है वो दे और जिसको अंदर नहीं आने देना उसको नहीं अंदर आने दें। एक एक सेल को अगर आपने ठीक

46:37

Speaker A

कर दिया समझ रहे हैं आप? तो बिलियंस ऑफ़ सेल पे पे सारा इंपैक्ट तो सेम ही है ना बेसिकली आप समझ रहे हैं वही तो बिल्डिंग ब्लॉक बोलते हैं ना कि अब अपने आ इस मिनट को ठीक कर दो

46:50

Speaker A

हां आने वाला मिनट भी ठीक हो जाएगा मिनट भी ठीक हो जाएगा हम तो वही शरीर की हीलिंग है बेसिकली इंटरेस्टिंग अच्छा एक बहुत ही कंट्रोवर्शियल टेक है ये जब आप गर्भ संस्कार की बात कर रहे थे तो मेरे को वो

47:04

Speaker A

याद आ गया बिकॉज़ आप गर्भ संस्कार कराते हो तो मुझे यह कंफर्म करना करना एक तरीके से कि यह सच है कि या फिर यह ऐसी बोलने वाली बात कि ऐसा बोला जाता है कि जो सोल्स होती हैं

47:18

Speaker A

मतलब जैसे एक इंसान मर गया अब उसकी सोल फ्री हो गई तो वो सोल कैन चूज़ कि वो कौन सा वूम में जाने वाली है या कैन चूज़ कि मैं शायद यहां मतलब हर कोई नहीं कर सकता ऑफ कोर्स बट कुछ सोल्स ऐसी हैं जो चूज़ कर

47:32

Speaker A

सकती हैं स्पेसिफिकली वो सोल्स जो बहुत अ फॉर एग्जांपल इवॉल्वड या फिर जो सिद्ध लोग होते हैं। उनकी सोल्स चूज़ कर सकते हैं कि मैं इस टाइप का वम में चूज़ करूंगा या करूंगी। व्हाटएवर ताकि वो उस लाइफ को जी

47:46

Speaker A

सके जो उनको जीनी है आगे। तो मतलब जो मैंने पढ़ा था वो ये था कि अब आने वाले टाइम में बहुत मुश्किल होता जा रहा है कि कोई भी इवॉल्व सोल पैदा हो सके। बिकॉज़ जो अभी कल्चर और कंडीशन है उस हिसाब से उतनी

48:07

Speaker A

कैपेबल वम्स नहीं है जो उसको होल्ड कर सके। आपने बहुत सही पॉइंट बोला और आपने अभी पहला क्वेश्चन पूछा कि सोल वम को चूज़ करती है या नहीं करती है। आपने दूसरा क्वेश्चन जो पूछा उसमें उसका आंसर दे दिया। ओ

48:20

Speaker A

क्योंकि इट्स टू वे हम अब मान के चलिए कि कृष्ण जी हैं वो अभी जन्म लेते हैं। उनको कोई वम चाहिए है ना तो ऐसा वर्म भी होना चाहिए राइट जो उनको धारण करेगा हां इट्स टू वे अब सोचिए थॉट प्रोसेस ऑफ कपल्स

48:40

Speaker A

उनकी फ्रीक्वेंसी क्या है इट्स ऑल फ्रीक्वेंसी मैचिंग बेसिक वन वे नहीं होता कुछ भी वो इसलिए कम हो रहे हैं क्यों क्योंकि यहां की फ्रीक्वेंसी मैच ही नहीं हो रही है अभी हम आप समझ रहे हैं फ्रीक्वेंसी मैच ही नहीं

48:53

Speaker A

हो रही और अच्छा एक और चीज यह भी बहुत कंट्रोवर्शियल है कि मैक्सिमम जो बच्चे होते हैं मैक्सिमम वो अनअवेयर स्टेट में पैदा होते हैं। मतलब द मोमेंट दे आर गेटिंग कंसीव्ड कपल में जैसे उन्होंने कंसीव किया उस टाइम पे वो

49:11

Speaker A

क्या सोच रहे हैं या किस स्टेट में हैं। मोस्ट ऑफ द पेरेंट्स आर इदर इन अनअवेयर स्टेट और मतलब वो उस पर्टिकुलर सोल के बारे में तो बिल्कुल नहीं सोच रहे होते। बिल्कुल है ना? तो उससे देखो क्या होता है जनरली गर्भ

49:27

Speaker A

संस्कार में क्या होता है कि जो जो गुण संस्कार आपको बच्चे में चाहिए हम वो चीजें आपको खुद प्रैक्टिस करनी होती है। हां वो ट्रांसफर वही तो होगा। वो ट्रांसफर होता है। हां अब अनअवेयर जो पेरेंट्स होते हैं फिर

49:40

Speaker A

उसमें बर्थ रिलेटेड डिफेक्ट्स इशूज़ जो आजकल बढ़ रहे हैं वो बहुत आते हैं। जैसे जेनेटिक डिसऑर्डर्स हैं। डिस्ट्रोफी तो चल चलो एक जीन डिफेक्ट है जो फीमेल साइड से आता है। एडीएसडी हो गया, ऑटिज्म हो गया। इस इन सारी चीजों को प्रिवेंशन ही

49:53

Speaker A

बेसिकली गर्भ संस्कार है। अब जैसे आपने बोला कि अनअवेयर तो अनवेयर रह के अगर हम कंसेप्शन कर रहे हैं तो फिर बच्चे के कुछ भी संस्कार बन सकते हैं। कुछ भी हो सकता है। रैंडम है। अब एग्जांपल बताता हूं। फोर्थ मंथ में

50:04

Speaker A

गर्भ संस्कार में जब हृदय बन जाता है ना तो मां के दो दिल हो जाते हैं। हां। उस टाइम पे बच्चा अपनी इच्छा प्रकट करता है मां के द्वारा। डिजायर ऐसी डिजायर होगी वो कि जो शायद मदर ने कभी पहले

50:16

Speaker A

एक्सपीरियंस ही नहीं करी होगी। और मदर अगर उसको सप्रेस कर देगी तो बच्चा अपनी ग्रोथ रोक देता है। ओ शिट। अच्छा। सेवंथ मंथ में जब सेंसेस बन जाते हैं बच्चे के। सेंसेस मतलब कि जब वो सब कुछ महसूस सुनने लग जाता है तो सेवंथ मंथ से

50:29

Speaker A

और पैदा होने तक जो उसका संस्कार जो उसके अंदर जाएंगे, जो उसका बिहेवियर बनेगा, जो कोर नेचर बनेगा, जो उसकी पर्सनालिटी बनेगी, वो सबसे हार्ड कोर पर्सनालिटी होगी, उसको चेंज करना बड़ा मुश्किल होगा। हम और सेवंथ मंथ से पैदा होने तक बच्चा अपने

50:40

Speaker A

मां-बाप से रिलेशन बना चुका होता है। आसपास के रिलेटिव से रिलेशन बना चुका होता है। अगर उसके सामने वहां पर वायलेंस हो रहा है। बच्चा वो में है तो सब वो सुन रहा है। वही वही एपिजेनेटिक्स के थ्रू वही चीजें जो

50:53

Speaker A

फिनोटाइप्स हैं बेसिकली वो गलत तरीके से बेसिकली बच्चे के अंदर बनेंगे। वो बोलते हैं ना कि फादर को ओसीडी है, बच्चे को भी ओसीडी है। क्यों? क्योंकि उससे पहले उसने उस चीज को ठीक नहीं किया ना। आप सोचो ओसीडी को या

51:04

Speaker A

कंपलशन को ठीक करना बड़ा इजी है। हम आप लड़ रहे हो डेली आके। हम या आप स्ट्रेस में हो आप चलो माई एक Netflix पे कोई ऐसा कंटेंट देख रही है जो वायलेंस है बहुत ज्यादा हां राइट फिर बच्चे के अंदर एक एंगर गुस्सा होगा

51:17

Speaker A

फिर हम बोलेंगे पता नहीं यार परिवार पे तो कोई ऐसा है नहीं ये कैसा मेरा बच्चा ऐसा कैसा हो गया हम इसलिए हो गया ऐसा क्योंकि आपने वो कंटेंट देखा है राइट सेवंथ मंथ के बाद हम सो व्हाटएवर यू कंज्यूम इंक्लूडिंग फूड

51:29

Speaker A

इंक्लूडिंग थॉट विल इंपैक्ट द बेबी राइट बेसिकली हम क्यों आजकल इतने मेंटल एडीएस डी एडीएसडी केसेस कितने बढ़ते आ रहे हैं आप देखिए अब यूएस में देखेंगे इंडिया में तो खैर कोई इतना ध्यान देता नहीं है इंडिया में तो

51:42

Speaker A

बोलते हैं ये तो मतलब दो थप्पड़ लगा के बिठा देते हैं शैतान बट चंचल बोल देती यूएस में तो यूएस में तो टैग कर देते हैं ना एडीएसडी वहां पे तो पूरा एक कैटेगरी बना देते हैं भाई आपके

51:51

Speaker A

बच्चे को एडीएचडी है और ये है वो है तो ऐसे मेरे कई पेशेंट है जो बोलते हैं कि हम वो यूएस में रहते हैं अब स्कूल में गया बच्चा वो यहां पे तो बोलो शैतान बच्चा है थोड़ा तो बोल दिया जी एडीएचडी है कुछ नहीं

52:01

Speaker A

है एडीएचडी तरीके होते हैं हर चीज के है ना चंचलता मतलब थोड़ा वायु ज्यादा है बेसिकली ना दोष में अगर हम देखेंगे चंचलता वायु से आती है। हम अच्छी मालिश करो बच्चे की। अच्छा बेसिकली उसको वो वाला खाना खिलाओ जिससे वायु

52:12

Speaker A

इम्बैलेंस ना हो। अपने आप ही चंचलता कम हो जाएगी। कम होएगी। बेसिकली तरीके होते हैं। तो गर्भ संस्कार तो वो चीज है। सो इसको बेबी प्लान करना है तो अने रह के तो कभी करना ही नहीं चाहिए। यू हैव टू बी फुल्ली अवेयर।

52:24

Speaker A

हां। क्या चाहिए आपको? हम क्या चाहिए? समझ रहे हैं? कैसा चाहिए? हम क्या संस्कार चाहिए? क्या गुण चाहिए?

52:34

Speaker A

हां। हां यू हैव टू बी क्रिस्टल क्लियर। कंफ्यूज नहीं रह सकते आप। कंफ्यूज रह गए तो इंटरेस्टिंग। तो दैट इज गप्स का। ओके सर। अ ऑर्गन्स की जब हम बात करें तो अ हम ऐसे कैसे मतलब हाउ कैन वी मेक इट क्लियर फॉर अस? कि

52:56

Speaker A

कौन सा ऑर्गन सबसे इंपॉर्टेंट है इन टर्म्स ऑफ कि नंबर वन ये है। नंबर टू ये है कि जिसका हमें इसका ध्यान रखेंगे तो एवरीथिंग इज सॉर्टेड। देखिए नेचर ने इसका आंसर हमें खुद दिया है। ओके? मैं आपसे

53:11

Speaker A

पूछूंगा कि हमारे शरीर में कौन सा ऐसा ऑर्गन है जो अपने को रीजनरेट कर सकता है?

53:15

Speaker A

सबसे फास्ट लिवर। लिवर। सो लिवर ही वो ऑर्गन है। अगर आपने उसका ध्यान रख लिया तो आपने पूरे शरीर का ध्यान रख लिया। ओके? लिवर के बहुत सारे फंक्शनंस हैं। पहले हम फंक्शनंस की बात करते हैं। तो पहला फंक्शन क्या है इसका?

53:26

Speaker A

डिटॉक्सिफिकेशन। हम कोई भी कोई भी केमिकल कंज्यूम किया हमने। अल्कोहल ले रहे हैं। कोई भी टॉक्सिन है वो सब लिवर क्लियर करता है। हम हम दूसरा कोई भी पैथोजन है। ठीक है? किसी भी तरीके का कोई क्रीमी जिसको हम आयुर्वेद

53:37

Speaker A

में बोलते हैं। बैक्टीरिया हो गया कुछ भी हो गया उसको भी लिवर ही क्लियर करता है। हम हम तीसरा मेटाबॉलिज्म फैट, कार्ब्स एंड प्रोटीन को एनर्जी में कन्वर्ट करने का काम लिवर ही करता है। राइट? और एक्स्ट्रा जो ग्लूकोस होता है उसको एज अ ग्लाइकोजन

53:51

Speaker A

लिवर ही स्टोर करता है ताकि वह ब्लड शुगर को मेंटेन कर सके। समझ आया आपको? और प्लस लिपिड्स कोलेस्ट्रॉल में कन्वर्ट करता है। वो भी हमारा लिवर करता है। ये तो इसके मेटाबॉलिक फंक्शनंस हो गए। राइट?

54:04

Speaker A

बाइल प्रोडक्शन करता है। जिसकी वजह से फैट फैटी एसिड में कन्वर्ट होते हैं और फैट सॉलुबल विटामिन ए, डी, ई के हमारी बॉडी को मिल पाते हैं। ठीक है? ए, डी और बी12 को स्टोर भी करता है फ्यूचर के लिए। स्टोर भी

54:16

Speaker A

करता है काफी न्यूट्रिएंट्स को। स्टोरेज भी है वो। जैसे ग्लाइकोजन को स्टोर कर रहा है। कभी जरूरत पड़ी खाना नहीं खाया बॉडी ने तो ग्लाइकोजन को रिलीज कराना ब्लड स्ट्रीम के अंदर। ए डी बी12 इन सब न्यूट्रिएंट्स को

54:26

Speaker A

माइक्रो न्यूट्रिएंट्स को वो स्टोर करता है। तीसरा हार्मोंस का मेटाबॉलिज्म ये भी करता है। हार्मोनस का मेटाबॉलिज्म क्यों जरूरी है? एक्सेस एस्ट्रोजन हो गया। एक्सेस टेस्टोस्टरॉन हो गया। एक्सेस डोपामिन। कोई भी हार्मोन एक्सेस में जाएगा तो बॉडी के अंदर वो प्रॉब्लम क्रिएट

54:39

Speaker A

करेगा। तो ये क्या करता है? यह एक्सेस हार्मोनस को डोरमेंट कर देता है। उसको थोड़ा सा वीक कर देता है। कमजोर कर देता है और उसको वाटर सॉलबल बनाकर बॉडी से एक्सक्रीट करवा देता है। यूरिन के थ्रू हम

54:51

Speaker A

तो ये भी एक लिवर का फंक्शन है। एल्बोमिन बनाता है। प्रोटीन सिंथेसिस करता है। एल्बुमिन जो ब्लड के वॉल्यूम को मेंटेन करके रखता है। हम ठीक है? तो ये मेजर फंक्शनंस हैं लिवर के। ठीक है? ये सारे फंक्शनंस अगर मैं आपको

55:03

Speaker A

बात करूंगा तो ये सारे ऑर्गन से रिलेट करते हैं। अब पहले हम बात करते हैं किडनी से किडनी की। तो अमोनिया जब बनता है शरीर में तो एक्सेस अमोनिया को लिवर कन्वर्ट करता है यूरिया के अंदर जो यूरिन के रास्ते बाहर

55:14

Speaker A

निकलता है। टॉक्सिंस मैंने बताया लिवर क्लियर करता है तो किडनी का लोड कम कर रहा है। इसलिए हम हेप्टोबलरी सिस्टम बोलते हैं लिवर एंड किडनी किडनी कंबाइंड। लिवर अच्छा है तो किडनी अपने आप ही अच्छी रहेगी। ओके?

55:25

Speaker A

किडनी में दिक्कतें तब आएगी इंटरनली। इंटरनल अगर फैक्टर की वजह से अगर लिवर आपका कॉम्प्रोमाइज होगा। क्योंकि लिवर अपना काम पूरा नहीं कर रहा है तो सारा लोड कहां गया?

55:33

Speaker A

किडनी पे। तो किडनी को सपोर्ट कर दिया लिवर ने। दूसरा आते हैं इंटेस्टाइन। हम इंटेस्टाइन में बाइल रिलीज करता है लिवर जिसकी वजह से फैट सॉलुबल जो हमारे न्यूट्रिएंट्स हैं वो ईजीली अब्सॉर्ब हो जाते हैं। हमारे इंटेस्टाइन के अंदर

55:46

Speaker A

माइक्रोनट्रिएंट्स ईली अब्सॉर्ब हो जाते हैं। ठीक है? ये भी फंक्शन हमारा लिवर का होता है। फिर पनक्रियाज की बात करते हैं। ग्लाइकोजन को जब भी जरूरत होती है बॉडी को एनर्जी की तो जो स्टर्ड ग्लाइकोजन है जो लिवर ने खुद स्टोर किया है उसको वो रिलीज़

55:58

Speaker A

करा देता है स्ट्रीम में ताकि पनक्रियाज पे लोड ना पड़े। उसके बीटा सेल्स जो है वो इंपैक्ट ना हो एक्चुअली में। राइट? दूसरा है लिपेज एक्टिविटी। लिपेज एक्टिविटी वही जो फैट को कंट्रोल करती है, फैट मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती है जो कि एक

56:10

Speaker A

पेनक्रियाज का फंक्शन भी है। बट उसको भी लिवर खुद करता है। एक्चुअली में सोचिए लिवर अपना काम तो कर ही रहा है। वो दूसरे ऑर्गन्स को भी सपोर्ट कर रहा है उनका लोड को कम करके। बेसिकली स्टमक को कैसे सपोर्ट कर

56:20

Speaker A

रहा है लिवर? फैट को प्रॉपर्ली मेटाबोलाइज करके प्रोटीन को प्रॉपर्ली सिंथेसाइज करके गैस्ट्रिक ट्रबल और एसिडिटी से प्रिवेंट करता है। अगर गैस और एसिडिटी बनेगी तो वो ऊपर की तरफ रिफ्लेक्स होता है। उसका गैस बनता है। प्रेशर ऊपर की तरफ

56:33

Speaker A

जाता है। स्टमक के जो मेंबेंस होते हैं जो जिसको क्लेद बोलते हैं हम। गट लाइनिंग जिसको बोलते हैं तो उसको इफेक्ट होने से वो बचाता है। तो दैट्स हाउ यू नो इट इज प्रिवेंटिंग योर इट इज सपोर्टिंग योर

56:43

Speaker A

स्टमक आल्सो। ओके? उसके बाद लंग्स पे आते हैं। देखो सारे टॉक्सिक पॉलटेंट्स को वो क्लीन करता है। ब्लड को क्लीन कर रहा है तो क्लीन ब्लड जा रहा है लंग्स के अंदर। तो गैसियस एक्सचेंज बहुत बेहतर होता है। पैथोजन को किल कर रहा

56:54

Speaker A

है तो ये निमोनिया होने से भी हमें बचाता है कि पैथोजन अगर ब्लड के अंदर कोई भी बैक्टीरिया कुछ भी जाएगा और वो लंग्स के अंदर चला गया तो आपने सुना होगा ना पैथोजन जैसे ट्यूबरक्लोसिस भी एक बैक्टीरिया ही

57:04

Speaker A

है। है ना? हां। तो इस तरीके के इश्यूज निमोनिया कोई कोई बैक्टीरिया की कॉलोनी लंग्स में ना बन जाए तो उसको भी वो प्रिवेंट कर रहा है बेसिकली लंग्स को। राइट? अब आते हैं हार्ट की बात। कोलेस्ट्रॉल और लिपिड्स को मेंटेन

57:18

Speaker A

करता है बेसिकली हमारा लिवर। ठीक है? तो एक्सेस कोलेस्ट्रॉल को बाइल में कन्वर्ट कर देता है। हम और अगर एक्सेस कोलेस्ट्रॉल शरीर में बनता ही जा रहा है। ट्राइग्लिस्टराइट्स बनते ही जा रहे हैं तो फिर वो आर्टरीज के अंदर

57:28

Speaker A

डिपॉजिट हो के प्लेग जनरेशन करेंगे। जिसकी वजह से ब्लॉकेजेस आनी शुरू हो जाती हैं। बेसिकली। दूसरा फंक्शन क्या है कि हमारे ब्लड को कितना क्लॉट होना है और कितना डाइल्यूट होना है यह भी हमारा लिवर ही कंट्रोल करता है। सो ब्लड क्लॉटिंग और

57:40

Speaker A

अनक्लॉटिंग एबिलिटीज जो होती है अगर मान के चलिए कि एक्सेस में क्लॉटिंग हो रही है और लिवर कंप्रोमाइज्ड है वो कंट्रोल नहीं कर पा रहा है तो वो क्लॉट ब्रेन में अटकेगा ब्रेन स्ट्रोक करेगा हार्ट में अटकेगा हार्ट स्ट्रोक करेगा। सो

57:51

Speaker A

दैट वे क्लॉट को प्रिवेंट करके क्लॉट को मेंटेन करके बेसिकली लिवर आपके हार्ट को भी सपोर्ट कर रहा है और आपके ब्रेन को भी सपोर्ट कर रहा है। राइट? हार्मोंस को मेटाबोलाइज करके एक्सेस हार्मोंस को मेटाबोलाइज करके वो इसको भी ब्रेन को

58:05

Speaker A

सपोर्ट सबसे ज्यादा करता है। क्योंकि मेन जो हमारे न्यूरोट ट्रांसमिट हैं या हार्मोन्स हैं उनका सबसे ज्यादा रोल पूरे शरीर में होता है। बट मेजर रोल जो होता है हमारे ब्रेन में भी होता है बेसिकली। राइट? दूसरा अमोनिया को यूरिया में

58:16

Speaker A

कन्वर्ट करके अमोनिया अगर एक्सेस हो जाए तो आपको एपिलेप्सी का अटैक, आपको सीजर आ जाएगा। आपको मेमोरी लॉस भी हो सकता है। अगर अमोनिया आपको बढ़ जाए तो वो टॉक्सिंस को न्यूट्रलाइज करके जो टॉक्सिंस ब्रेन के लिए घातक होते हैं, ब्रेन के लिए जो अच्छे

58:30

Speaker A

नहीं होते हैं उनको वहां से हटा के बेसिकली वो ब्रेन की हेल्थ को सपोर्ट करता है बेसिकली। हम ओके? राइट? सो और ओवरऑल स्किन देख लीजिए आप। ठीक है? क्योंकि अब स्किन पे बोलते हैं ना कि आपके स्किन पे कोई इरप्शन

58:42

Speaker A

हो गए। स्किन पे कोई इंफेक्शन आ गया। वो क्यों आया? क्योंकि लिवर ने अपना काम पूरा नहीं करा। हम टॉक्सिन उसने नहीं निकाले। तो अब वो प्लाज्मा से ब्लड टिश्यू में गए। अब ब्लड टिश्यू से वो बेसिकली अदर टिश्यूज़ में गए

58:54

Speaker A

और जाके वो आपको स्किन से बाहर निकल रहे। तो देखिए हर बीमारी कहीं ना कहीं कनेक्टेड है आपके। अच्छा जब ज्डिस होता है, लिवर डाउन होता है, सबसे पहले क्या होता है?

59:02

Speaker A

आपका कलर पेल हो जाता है। हां। आपकी आइज जो है वो पेल हो जाती है। आइज पे इफेक्ट दिख रहा है लिवर का। स्किन पे इफेक्ट दिख रहा है लिवर का। किसी और ऑर्गन का दिखता है कि हार्ट में ब्लॉकेज

59:13

Speaker A

होने वाली है तो फेस पे कुछ दिख जाए या नेल्स पे कुछ दिख जाए। राइट? इयर्स में थोड़ा बहुत दिखता है। बोलते हैं कि इयर्स पर दिखता है। बट ओवरऑल अगर आप देखेंगे तो पूरे शरीर में हर ऑर्गन पर लिवर का

59:26

Speaker A

इंपैक्ट दिखता है। नेल से लेके आपके आइज से लेके, आपकी नोज से लेके आपके इयर्स, आपकी स्किन हर जगह। हम तो लिवर हेल्थ जो है सबसे इंपॉर्टेंट है। और लिवर है पित्त का स्थान। ओके?

59:37

Speaker A

और पित्त का काम क्या होता है? ट्रांसफॉर्मेशन। फ्रॉम फूड टू सेवन टिश्यूज़। हम फूड से प्लाज्मा, ब्लड, मसल्स, फैट, बोन, बोन मेरो, रिप्रोडक्टिव, बिल्डिंग ब्लक्स ऑफ द बॉडी। हम्। इससे सारा शरीर बनना है। पर आजकल लिवर की हेल्थ ख़राब क्यों है? 90% लोगों का फैटी

59:54

Speaker A

लिवर है। क्यों? डिसिप्लिन नहीं है। क्योंकि पित्त डिसिप्लिन डिमांड करता है। कभी भी खाते हैं लोग। SWG, जोatो ये सब है। रात को 2:00 बजे भी मंगा के खा रहे हैं। जब फायर लो है। एक्सेस कार्ब्स का कंस्पशन है। राइट? मतलब बैलेंस्ड मील नहीं

60:08

Speaker A

खा रहे हैं। मतलब प्रोटीन, फैट, कार्ब्स का एक बैलेंस्ड एक कॉम्बिनेशन होना चाहिए। वो नहीं खाते हैं बेसिकली। कुछ भी एक्सेस खा लेंगे। पिज़्ज़ा खा लिया तो पिज़्ज़ा ही पेट भर के खा लिए। ठीक है? पेट भरने के

60:18

Speaker A

बाद मैं बताऊंगा। आज चरक संहिता में स्पेशली मेंशंड है जब भी आप खाना खाएं। सो यू हैव टू ईट 2/3 ऑफ योर हंगर। हम 1/3 शुड बी अवेलेबल फॉर ऑल द थ्री दोषाज़। अच्छा। डाइजेशन के लिए रहना चाहिए। हम क्या करते

60:32

Speaker A

हैं? पूरा पूरा भर ले। वो भी गलत टाइम पे। 10 टू 2 इज़ द टाइम ऑफ़ मेन फायर। पित्त का मेन समय है। तो 10 टू 2 सबसे अच्छा टाइम है प्रॉपर मील खाने का। हम और नाइट को जब सन सेट हो जाता है तो वो

60:45

Speaker A

टाइम अच्छा नहीं है खाने के लिए। वो उसको लाइट खाना खाइए। मतलब 200 300 कैलोरीज आप ले सकते हैं। आप बॉयल्ड वेजिटेबल्स, सटे वेजिटेबल्स और कुछ भी सेवी सॉलिड टाइप ले सकते हैं। बट हैवी मील नहीं खा सकते आप।

60:57

Speaker A

हैवी प्रोटीन नहीं खा सकते आप। नहीं तो फिर वो आपके लिवर को इंपैक्ट करेगा। ओके?

61:02

Speaker A

फिर कार्बोनेटेड ड्रिंक्स हैं, कोल्ड ड्रिंक्स हैं, जूसेस हैं मार्केट के। है ना? वो सब वो क्योंकि सारा का सारा जो शुगर है वो सब कन्वर्ट कहां होता है?

61:12

Speaker A

कुछ तो बॉडी लिवर ग्लाइकोजन ग्लाइकोजन में कन्वर्ट कर लेता है और कुछ कैलोरीज सीधा लिवर फैट में कन्वर्ट कर देता है हमेशा। ओके?

61:19

Speaker A

और फिर फैटी लिवर धीरे-धीरे बढ़ता हुआ जाता है। तो आजकल फैटी लिवर अल्कोहल जो पीते हैं उनको तो है ही है। प्लस जो नॉर्मल लाइफ स्टाइल जी रहे हैं उनको भी है बिकॉज़ ऑफ ये है। ठीक है?

61:30

Speaker A

पुअर ईटिंग हैबिट्स। हम अब लिवर जो है उसको हेल्दी रखा कैसे जाए? सबसे पहली चीज तो डिसिप्लिन मैंने बताया। आप आज अपनी रिपोर्ट करा लीजिए। एलएफटी की रिपोर्ट कराई आपने। आपने एक अल्ट्रासाउंड करा लिया। उसमें आपका ग्रेड आ गया। फैटी

61:44

Speaker A

लिवर क्या है? ठीक है? आप सिर्फ दिन में तीन टाइम बांधिए खाने के। सुबह का टाइम हो गया 8:00 बजे जैसे 12:00 बजे लंच हो गया। 6:00 बजे डिनर हो गया। हम लंच शुड बी योर हैवी मील, डिनर शुड बी

61:56

Speaker A

लाइट एंड ब्रेकफास्ट शुड बी स्टार्टर। कि जब आप स्टार्ट कर रहे हैं जस्ट टू बूस्ट द एनर्जी। और टाइम सेम रखिए। ठीक है?

62:05

Speaker A

8:00 बजे, 12:00 बजे और 6:00 बजे हम 510 मिनट ओपन नीचे हो सकता है बट एक दो घंटा नहीं हो सकता। हम हम एक महीना इसको फॉलो करिए। लिवर लव्स डिसिप्लिन। उसको डिसिप्लिन चाहिए क्योंकि लिवर के पास ना 5 मिनट से ज्यादा फंक्शनंस

62:18

Speaker A

हैं। 500 से ज्यादा फंक्शन है। उसको 500 से ज्यादा चीजें देखनी है। उसको सारे ऑर्गन्स को देखना है। समझो आप। खुद को रीजनरेट भी करना है उसको। और बाकी ऑर्गन्स को सपोर्ट भी करना है उसको। राइट?

62:31

Speaker A

अगर आपने उसको डिसिप्लिन नहीं दिया तो फिर वो मैल प्रैक्टिस करेगा लिवर खुद ही। हम वो पूरे तरीके से चीजों को सिंथेसाइज नहीं करेगा। पूरे तरीके से चीजों को मेटाबोलाइज नहीं करेगा। टॉक्सिन ज्यादा बनेंगे। एक तो टॉक्सिन दूसरे ऑर्गन से भी आपको पता है

62:45

Speaker A

लिवर लिवर जब लिवर बनाया भगवान ने तो एक्सेप्शन बनाया है उसने। सारी वेंस हमारी टुवर्ड्स द हार्ट जाती हैं। हम बट जो गट की सारी वेंस हैं वो ट्रिब्यूटरी के थ्रू पोर्टल ट्रिब्यूटरीज होती हैं। वो पोर्टल वेन जो होती है मेन वन जो लिवर को

62:59

Speaker A

ब्लड सप्लाई करती है। सारा गंदा खून सारे गट से कलेक्ट करके इंटेस्टाइन से उससे कलेक्ट करके पहले लिवर के पास जाता है। वो हार्ट के पास नहीं जाता सीधा। अच्छा। लिवर उसमें से अपना यूज़बल पार्ट निकाल लेता है बाइल बनाने के लिए, बहुत सारी

63:11

Speaker A

चीजें बनाने के लिए और बाकी पार्ट को फिर वो वेंस के थ्रू हार्ट को बेचता है बेसिकली। हम सो ये एक्सेप्शन बनाया भगवान ने। भगवान ने लिवर के साथ ही सारे एक्सेप्शन बनाए हैं। उसी को ठीक रखना है। तो डिसिप्लिन पहली

63:22

Speaker A

चीज हो गई। ठीक है? दूसरी चीज हो गई बिटर्स कड़वा। हम लिवर को कड़वा बहुत पसंद है। ओके? हां। लिवर की एंजाइम की एक्टिविटी बाइल का रिलीज बाइल साल्ट्स। कड़वा टेस्ट सबसे ज्यादा सपोर्ट करता है। बेसिकली लिवर की

63:40

Speaker A

जितनी भी हमने जब रिपोर्ट होती है उसमें एएलटी, एएसपी, एसजीपीटी, एसजीओटी जितने भी एंजाइम्स आप देखते हैं उन सबको बैलेंस करने का तरीका कड़वा टेस्ट है। हम हम बिटर्स पहले जमाने में तो हम अपने खाने में बिटर हमेशा होता था। सुबह-सुबह तो नीम

63:53

Speaker A

का दातून करते थे लोग। नीम की कच्ची पत्तियां भी खाते थे लोग। है ना? और करेले की सब्जी बनती थी। तो बिटर्स बहुत ज्यादा यूज़ होते थे। राइट? बिटर्स में अगर आप बात करेंगे, खाने वाली चीज़ जो लीफी चीजें हैं वो सारी

64:03

Speaker A

मोस्टली बिटर्स होती हैं। अच्छा। जो हरी सब्जियां जिनको आप बोल लीजिए लीफी जो चीजें होगी वो सारी बिटर होती है। तो अपनी डाइट में अगर आप बिटर को ऐड करोगे तो आप अपने लिवर की हेल्थ को सपोर्ट कर रहे हो।

64:15

Speaker A

ठीक है? ठीक है? इसमें मैं कुछ अपना मैं बताना चाहूंगा कि दो हर्ब्स हैं इसमें। ठीक है? जो कि आज के समय में मेरे को लगता है कि हर इंसान को जरूरत है जिसका फैटी लेवल है। वो है

64:26

Speaker A

कालमेग जिसको हम बोलते हैं चिरायता और एक है भईया आमला। ये दोनों हर्ब कालमेग और भईया आमला अब कालमेक जो है ना बिटर की एक दिक्कत है। बिटर जो टेस्ट होता है ना वह हमेशा रिडक्टिव इन नेचर होता है।

64:42

Speaker A

स्क्रेपिंग होता है। वो सिर्फ साफ करता है। ऐसे बहुत कड़वे टेस्ट हैं जो साफ भी कर रहे हैं और नरिशमेंट भी दे रहे हैं। जो रीजनरेशन भी कर रहे हैं। कारल्मिक उनमें से एक है। ओके?

64:53

Speaker A

वो कड़वा भी है। वो लिवर को टॉक्सिक जो इफेक्ट हुआ लिवर के ऊपर चाहे केमिकल से हुआ, चाहे अल्कोहल से हुआ, चाहे किसी भी चीज से हुआ, वो उसको नरिश भी कर रहा है। प्लस एक्सेस डिपजिशन ऑफ जो फैट है उसको वो

65:06

Speaker A

निकाल भी रहा है। हम चिरायता पुराने जमाने जब हम छोटे होते थे बुखार होता था तो चिरायता का काढ़ा बना के ना सुबह मम्मी पिलाती थी कभी दादाजी पिलाते थे। बड़ा कड़वा होता है बेसिकली वैसे पियोगे तो आप उसको

65:17

Speaker A

तो बहुत ही कड़वा होता है। वेरी बिटर और बुखार अगर आपको हुआ है। बुखार के बाद आपको रिकवरी के लिए पुराने जमाने में चिराएगा काढ़ा ही दिया जाता था। क्योंकि वो एनर्जी भी दे रहा है। प्लस एलिमिनेशन भी कर रहा है चीजों का। दोनों

65:28

Speaker A

काम करता है काल में। दूसरा है भई आमला। भूई अमला ज्डिस का दुश्मन है। सबसे ज्यादा बाइल पर काम करता है। ओके?

65:36

Speaker A

राइट? और लिवर की इनफ्लेमेशन को कम करता है। हम कोई सूजन आ गई या इनफ्लेमेशन आ गई। एंड आयरन रिच होता है सबसे इंपॉर्टेंट। तो और दूसरा डायरेटिक होता है तो किडनी को भी सपोर्ट करता है। हम तो दोनों डिटॉक्सिफाइंग ऑर्गन।

65:50

Speaker A

डिटॉक्सिफिकेशन किडनी करती है उस और लिवर भी करता है। दोनों मतलब डिटॉक्सिफिकेशन का रोल दोनों ऑर्गन्स का है। हम राइट? तो अब ये दोनों को जब हम कंबाइन कर देते हैं तो यह दोनों लिवर एंड किडनी हेप्टोबलरी हेल्थ पर बेसिकली इसका इंपैक्ट

66:05

Speaker A

बड़ा अच्छा हो जाता है और बॉडी अगर साथ में आपने अपना लाइफ स्टाइलाइल भी ठीक कर लिया और ये दो हर्ब्स को कुछ समय के लिए अगर आपने ले लिया कालमेग और भईया अमला को बराबर क्वांटिटी के अंदर और जैसे एक 500

66:15

Speaker A

mg का कैप्सूल है तो 250 mg ये डाला 250 mg ये डाला तो 500 mg कैप्सूल मॉर्निंग इवनिंग आप ले लें उसका इंपैक्ट आप खुद ही देख लेंगे जिनको मोशन ऐसा आ रहा है कि बाइंडेड नहीं आता है थोड़ा लूज आता है

66:27

Speaker A

सेमी सॉलिड टाइप आता आता है। आप देखेंगे मोशन की बाइंडिंग सबसे पहले शुरू हो जाती है। बेसिकली जिनको ब्लोटिंग रहती है। ब्लोटिंग क्यों हो रही है? क्योंकि फैट प्रॉपर्ली मेबिलाइज नहीं हो रहा है। बाइल साल्ट्स उतने अच्छे हैं नहीं। तो

66:37

Speaker A

बाइल इंप्रूव होगा तो उससे ब्लोटिंग जो है वो कंट्रोल हो जाती है। राइट? एंड यू यू फील लाइट क्योंकि स्क्रेपिंग भी हो रही है साथ में। हम मतलब कहने का मतलब ये कॉम्बिनेशन ऐसा कॉम्बिनेशन है क्योंकि आयरन रिच है तो

66:48

Speaker A

ब्लड को भी बया अमला आयरन रिच है तो ब्लड को भी सपोर्ट कर रहा है। ठीक है? और कालवेग जो है वो लिवर को रीजनरेट कर रहा है। तो रीजनरेशन भी हो रहा है और डिटॉक्सिफिकेशन भी साथ में हो रहा है।

66:58

Speaker A

बेसिकली गॉट इट। ठीक है? तो लिवर एक ऐसा ऑर्गन है अगर आपने इसको कंट्रोल में रख लिया तो आपने बॉडी के हर ऑर्गन को कंट्रोल में रख लिया। अगर लिवर को कंट्रोल में नहीं रखा तो किसी कोई भी

67:09

Speaker A

ऑर्गन आपके कंट्रोल से कभी भी बाहर जा सकता है। चाहे वो ब्रेन है, चाहे वो हार्ट है, चाहे वो लंग्स है, चाहे वो किडनी है, चाहे वो पेनक्रियाज है, चाहे कुछ भी है। बेसिकली। ठीक है? एक लिवर डॉक्टर थे पडकास्ट पे। हम

67:20

Speaker A

हम उन्होंने बोला था कि जो आयुर्वेदिक हर्ब्स होती हैं और मेडिसिंस होती हैं वो लिवर पे बहुत हारश होती है। देखिए मैं आपको बताता हूं। इसको मैं बोलूंगा कि आधा अधूरा ज्ञान ना बड़ा डेंजरस होता है। ओके। अब मान के चलिए कि किसी को बहुत ज्यादा

67:41

Speaker A

गर्मी लगती है। उसको स्किन पे इरप्शनंस हो रहे हैं। मतलब स्किन एलर्जी है। ठीक है?

67:46

Speaker A

किस चीज किस किस चीज का सिम्टम है? हाई फायर का। पित्त का सिम्टम है। मैं उसको स्पाइसी स्पाइसेस खिला दूं। सोचो मैंने मिर्च खिला दिया, गरम मसाला खिला दिया। उसके वो चीज और बढ़ जाएगी। तो डेंजरस हो गई उसके लिए।

67:59

Speaker A

राइट? बट मैं उसको रोज फर्टिलिटी दे दूं या कोकोनट वाटर दे दूं जो उसके फायर को शांत कर दे। उसके लिए वो हम अच्छा। तो आयुर्वेद में ऐसा नहीं है। आयुर्वेद में देखिए क्या होता क्या है कि चीज

68:12

Speaker A

किसी बॉडी के लिए टॉक्सिक भी हो सकती है और किसी बॉडी के लिए सब्जेक्टिव है। बेसिकली ठीक भी हो सकती है। ठीक है? ठीक है?

68:18

Speaker A

डिपेंडिंग अपॉन अगर आपने एनालिसिस प्रॉपर्ली किया है और आपने उसको प्रिस्राइब ढंग से किया है हम तो ये चीज बेसिकली एक ही चीज एक को साइड करेगी। एक चीज दूसरे को बैलेंस भी कर सकती है। डिपेंडिंग अपॉन कौन सी विकृति और कौन

68:30

Speaker A

सा दोष जो है शरीर के अंदर है। अब जो आपने लिवर डॉग की बात बोली। अब ये क्या होता है? मैं आपको बताता हूं कि अब कई लोग आपने देखा होगा Instagram पे आपने देखा होगा आजकल कोई भी डॉक्टर बन के

68:40

Speaker A

बैठ जाता है। है ना? इन्फ्लुएंसर्स हैं बहुत सारे। है ना? कहीं से कुछ सुन लिया कि भाई आप जैसे गिलोय की बात करते हैं। अब गिलोय गिलोय की गिलोय की कंट्रोवर्सी हुई थी जिसमें लिवर डॉक ने बोला था कि गिलोय

68:52

Speaker A

जो है लिवर के लिए बहुत टॉक्सिक होती है। हम बट गिलोय का एक रेप्लिका होता है। एक कॉडिफिला होता है। एक क्रिस्पा होता है। बेसिकली दिखते दोनों सेम है। ओके। ठीक है? अब क्या होता है कि कई लोगों ने

69:02

Speaker A

क्या करा जब कोविड का टाइम हुआ तो वो सीधा उसके क्रिस उस क्रिस्पा के उस पत्तों को तोड़-तड़ के वो खाया और वो टॉक्सिक है। उसमें दूध निकलता है थोड़ा सा बेसिकली। है ना? मतलब एक लेटेक्स टाइप भी निकलता है

69:11

Speaker A

बेसिकली। वो टॉक्सिक है। डेफिनेटली ऐसे ही खा लिया। ऐसे ही वही उसका काढ़ा बना के पी लिया। ऐसे ही ऑफ कोर्स प्रॉपर्ली फार्मेसी की बनी हुई मेडिसिन क्योंकि उसमें तो पहले आइडेंटिफिकेशन होता है। आइडेंटिफिकेशन के बाद शोधन होता है। सबसेेंट बात शोधन हर

69:24

Speaker A

हर्ब। देखिए नेचर ने कोई भी हर्ब बनाएगा ना जो फूड है देखो फूड को प्रोटेक्टिव एलिमेंट नहीं दिए। पर जो हर्ब्स है ना उनको प्रोटेक्टिव चीजें दी हैं। अल्कलइड्स ऐसे दिए होते हैं जो अपने को पेस्ट से, इंसेक्टिसाइड से,

69:34

Speaker A

किसी भी इंसेक्ट से, पेस्ट से, पैरासाइट से बचा सके अपने आपको। तो हर हर्ब के साथ ऐसा होता है। हम उस हर्ब का शोधन हर हर्ब का शोधन जरूरी होता है उसको यूज करने से पहले। हम अगर आप रॉ हर्ब कहीं तोड़ के खा रहे हो।

69:48

Speaker A

एक गिलोय खाई मैंने तोड़ के उससे मेरे को साइड इफेक्ट हो गया। हां। हैं?

69:51

Speaker A

और आप फिर आप बोल रहे हो आयुर्वेद खराब है। हम आपने शोधन किया उसको। एक हर्ब बताता हूं। उसको ये बोलते हैं अह क्या? एक मिनट। ये बहुत टॉक्सिक हर्बी है वो। हां भल्ला तक हम ठीक है ओके

70:11

Speaker A

बड़ा टॉक्सिक होता है वो है ना अगर उसको आपने ऐसे ले लिया है ना तो आपको एदममिया एकदम से कर देगा और कार्डियोटॉक्सिक उसके कवर में कार्डियोटॉक्सिक एलिमेंट्स होते हैं कुछ ऐसे ऑयल्स होते हैं उसके अंदर हम आपको पता है जब उसका शोधन होता है शोधन

70:26

Speaker A

शोधन मतलब प्यूरिकेशन जो टॉक्सिक एलिमेंट्स हैं जो कवर में टॉक्सिक जो ऑइल्स ऐसे हैं उसके अंदर जो वोलेटाइल ऑइल्स हैं उसके अंदर और जो कार्डियोटॉक्सिक जो एलिमेंट जब उसको निकाल दिया जाता है वो कैसी मेडिसिन बनती है वो

70:38

Speaker A

एंटी कैंसर मेडिसिन है। बेसिकली वो ट्यूमर को भी कम कर देती है ऑन रिकॉर्ड मैं आपको बता रहा हूं क्योंकि मेरे पास तो बहुत कैंसर पेशेंट्स आते हैं। सो भात तक रसायन जो है वो दिया जाता है कीमोथरेपी के साइड

70:48

Speaker A

इफेक्ट से रिकवर होने के लिए। कोई भी ट्यूमर कीमोथेरेपी भी नहीं ले रहे हैं। अगर आप नेचुरली ट्रीटमेंट में जाना चाह रहे हैं तो उसको एंटी एज एन एंटी ट्यूमर ड्रग यूज़ किया जाता है। बट आफ्टर डिटॉक्सिफिकेशन हम

71:00

Speaker A

अब कोई जाके कल को भल्ला तक खा ले और गड़बड़ हो जाए। अब धतूरा है। हां। हां धतूरा शिव जी पे चढ़ता है। शिव जी पे सारा पोइजन चढ़ता है और सारा जो पोइजन चढ़ता है वो सारा मेडिसिन है।

71:10

Speaker A

हम धतूरा है पोइजन है। आप वैसे खा लो आपको पागल कर देगा। न्यूरोटॉक्सिक है। हां उसी धतूरे को आप शोधन करो। ब्लैक साल्ट नींबू के रस में शोधन होता है। एनरोबिक एनवायरमेंट में उसको फिर डमरू यंत्र बना के उसको फिर पकाया जाता है पूरी रात। पका

71:25

Speaker A

के फिर उसकी भस्म बनाई जाती है। क्रॉनिक साइनसाइटिस है ना किसी को? सिर्फ तीन दिन ले लेना। वो तीन दिन वो पुड़िया लेनी है 125 एमg की शहद के साथ। जिंदगी में लौट के नहीं आएगी एलर्जी और वो भी सर्दियों में

71:38

Speaker A

और साल में मैं बहुत जब विंटर्स आएंगे तो मैं करता हूं यह मैं खुद बनाता हूं शुद्ध करता हूं उसको फिर बनाता हूं और तीन डोज़ देता हूं बस एलर्जिक रेनाइटिस या सटिस साइनसाइटिस के पेशेंट को बस इमीडिएटली अरेस्ट कर देती है

71:52

Speaker A

हम उसकी मेडिसिन भी बनती है आयुर्वेद में कनकासव जो है कनकासव में कनक धतूरे को ही बोलते हैं ओ तो धतूरे से बनती है जो सोना नहीं होता नहीं वो ऐसे इसको हां तो कनकासव जो है वो आपका डायलेटर

72:04

Speaker A

ब्रकोडाइलेटर है, एंटी एलर्जिक है और कंकर से कोई दिक्कत नहीं होती लोगों को। यह प्रॉब्लम क्या है कि ऐसे डॉक्टर्स की कि एक छोटा सा नेगेटिव पार्ट पकड़ लिया कहीं से भी उस पे फिर पूरे आयुर्वेद को आपने रख

72:16

Speaker A

दिया। आप कैसे रख सकते हैं? हम आपको बेसिक जब एलोपैथी में भी कोई मेडिसिन बनती है तो इंग्रेडिएंट्स का रॉ मटेरियल का पहले टॉक्स डिटॉक्सिफिकेशन, उसकी क्लींजिंग, कई रिएक्शंस करते हैं। कुछ सब कुछ करते हैं। ऐसे आयुर्वेद में होता है।

72:30

Speaker A

हम कोई भी चीज को हम ऐसे रॉ उखाड़ के नहीं खा सकते। हम कहने का मतलब यह है जो रॉ उखाड़ के खा रहा है वो अपनी बोलते हैं ना सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेदार है। तो वो पेशेंट अपनी

72:40

Speaker A

हेल्थ का खुद जिम्मेदार है। भाई उसमें आयुर्वेद के डॉक्टर का कोई रोल नहीं है। आयुर्वेद की पढ़ाई का कोई रोल नहीं है। हां। आपको प्रॉपर्ली हर चीज को कितना मिक्स करना है, कैसे बनाना है? आपको एक हर्ब तोड़िए। आपको उसको पंचांग में जड़ यूज़

72:53

Speaker A

करनी है। उसका पत्ता यूज़ करना है। उसका फूल यूज़ करना है। क्या यूज़ करना है?

72:56

Speaker A

हम एक हर्ब है टैक्सेस बकाटा। उत्तराखंड में होती है 2200 मीटर ऊपर। टेक्सिस पकाटा से बहुत इंपॉर्टेंट एक कीमोथेरेपी ड्रग बनती है जो कि वाइड वाइडली यूज़ होती है पूरे वर्ल्ड में प्लेसी टेक्सॉल उसके बार्क से निकलता है टेक्सॉल और

73:13

Speaker A

पुराने जमाने में हमारे राजा लोग जो होते थे ना उसको वो पोइजन होता है आपने खा लिया तो खत्म उसका पोइजन बना के और उसको तीर पे लगा के ऐसे चलाते थे उसको हमारे गुरु जी यूज़ करते थे प्लेसीटेक्सोल

73:22

Speaker A

उसको शोधन करके उसका भी शोधन आयुर्वेद में होता है और कैंसर में उसको प्रिस्राइब करते थे वहां से बनाया प्लेसीटेक्सल हम रेस्पिरेंट कहां से बना?

73:34

Speaker A

रेस्पिरेंट एंटीसाइकोटिक जो ड्रग है जो साइकेटरी मेडिसिन है। ठीक है? कहां से बना? सर्पगंधा सर् सबसे ज्यादा रेस्पिरेंट जो होता है सर्गंधा के अंदर होता है। सर्गंधा हम ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए देते हैं। माइंड को काम करने के लिए देते हैं। राइट?

73:49

Speaker A

इट इज़ अ वेरी पोटेंट हर्ब। हम बट ऐसे ही खा लो आप सर्वगंधा को तो दिक्कत है। उसका प्रॉपर मर्दन होता है। देखो हर जड़ी बूटी का किन्ही-गिनी क्वात में मर्दन होता है। जो कि उसके कंपैटिबल हर्ब्स होती हैं जो

74:00

Speaker A

कि उसकी टॉक्सिक चीजों को कंज्यूम कर लेती हैं। बेसिकली। सो आयुर्वेद को आप फॉलो करिए। ठीक है? उन हर्ब्स को कभी मत खाइए जो जंगलों में ऐसे होती हैं एज अ वीड। उनको प्रॉपर्ली प्रोसेस करके ही आपको खाना

74:13

Speaker A

चाहिए और प्रोसेसिंग आपको आनी चाहिए। सारी वीड हटाते नहीं। खरपतवार बोलते हैं। बट सारी वीड्स जो है वो जड़ी बूटी है। हम भूया आंवला वीड है। कालमेघ वीड है, गोखरू वीड है। आप समझ रहे हैं? ऐसा नहीं है सारी

74:27

Speaker A

वीड ही टॉक्सिक है। बट फॉर द सेफ्टी पर्पस पूछ के आयुर्वेदिक वैद्य से क्या मैं खा सकता हूं या खा सकती हूं? क्या ये सही जड़ी हर्ब है या नहीं है? हम हम क्योंकि उसका फायदा है बाकी के जो

74:39

Speaker A

डॉक्टर्स हैं जो दूसरी पैथी के डॉक्टर्स हैं वो उठा लेते हैं और फिर वो आयुर्वेद को जो एक इतनी अच्छी पैथी है जो प्रिवेंशन भी सिखाती है जो आपको जीना भी सिखाती है जो आपको सांस लेना भी सिखाती है जो आपको

74:48

Speaker A

सोचना भी सिखाती है उस पैथी को फिर वो बदनाम करते हैं बेसिकली एक छोटे से नेगेटिव पॉइंट्स राइट राइट ओके आपकी जो स्टडी है मस्कुलर डिस्ट्रोफी पे उसके बारे में एक बार डिटेल में बात कर हां देखिए तो मस्कुलर डिस्ट्रोफी

75:02

Speaker A

का थोड़ा सा बैकग्राउंड मैं देता हूं ये शुरू हुआ था 2017 18 से तो उस टाइम पे मेरे पास कुछ पेशेंट्स थे अह आर्मी के अह तो उनको बेकर्स डिस्ट्रोफी था। बेकर्स क्या होता है? थोड़ा मिडिल एज में आती है। तो डिस्ट्रोफी कई प्रकार की

75:17

Speaker A

होती है। लिम ग्रिडल होता है, बेकर्स हो गया, डशेन हो गया। तो डशेन इज़ अ वेरी यू नो क्वालिटी ऑफ़ लाइफ जिसमें सबसे ज्यादा खराब होती है और सबसे अर्ली एज से वो आ जाती है फाइव इयर्स से। तो मेरे पास सबसे

75:30

Speaker A

पहले बैककर डिस्ट्रोफी के पेशेंट थे जिसमें क्या फुट ड्रॉप हो गया या पैर या कंधे जो है आपके पैर कमजोर होने लग गए। है ना? हम आर्मी से पेशेंट्स थे। तो उस टाइम पे मेरा उसमें दिक्कत क्या थी कि जैसे ही फिजिकल

75:42

Speaker A

एक्टिविटी ज्यादा हुई है ना। अब जीन डिफेक्ट तो पहले से ही था। अब आर्मी में आपको पता है फिजिकल एक्टिविटी कितनी ज्यादा होती है। जैसे ही फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा हुई, फिजिकल एक्सरेशन ज्यादा हुआ तो सिम्टम बढ़ने लग जाता है। बेसिकली मसल

75:52

Speaker A

डिजनरेशन ज्यादा हो जाता है। तो वो क्या हुआ कि अब ऐसे जो लोग आर्मी के अंदर हैं ऑलरेडी और बाद में आर्मी में भर्ती होने के बाद उनको ये प्रॉब्लम जब आती है तो उनको डेस्क जॉब दे देते हैं। हां फील्ड से

76:02

Speaker A

हटा के उसे हम हम और जो उनके लिए बड़ा एम्ब्रेसिंग होता है कि लोग आते हैं जब तो जब फर्स्ट पेशेंट मेरे पास आया मैंने देखा तो उनको पैर में प्रॉब्लम था चलने में पॉश्चर गड़बड़ हो गया था तो उनको एचआर का जॉब दे रखा था

76:16

Speaker A

बेसिकली तो जेनेटिक डिसऑर्डर बोला जाता है कि कोई इलाज नहीं होता इसका ठीक है क्योंकि जीन ही डिफेक्ट है तो क्या इलाज क्या होगा राइट बट हमारे साइंटिस्ट काम कर रहे थे माइक्रोजीन थेरेपी पे जिसकी कॉस्ट मोर देन यू नो ₹5 करोड़ होती है एक

76:32

Speaker A

इंजेक्शन की। आपने सुना होगा कई बार एक केसेस ऐसे आते हैं कि छोटी बच्ची को 5 करोड़ का इंजेक्शन चाहिए। वो सब जेनेटिक डिसऑर्डर्स होते हैं। इसकी बहुत तरीके की डिस्ट्रोफी एडिनल डसोट्रोफी भी है। डशेन मस्कुलर डिस्ट्रोफी है। बैकर्स है। लिम

76:44

Speaker A

ग्रिडल डिस्ट्रोफी है। तो वहां से मैंने अपना ऐ बनाया। मैंने क्या ऐ बनाया? देखो मेरा जो पहला गोल था कि ये बीमारी है। चलो ये शुरू हुई मान के चलो पैर से। है ना?

76:53

Speaker A

हम अब धीरे-धीरे ये काफ मसल पे जाएगी। धीरे-धीरे ये ऊपर जाती जाएगी और मसल्स पूरी बॉडी के कमजोर होते हुए चले जाएंगे। ठीक है? मेरा एम था कि प्रोग्रेशन को रोकना हम कि किसी तरीके से मैं इस प्रोग्रेशन को

77:04

Speaker A

रोक दूं। राइट? प्रोग्रेशन रुक जाएगा तो जो जितना अगर एक फुट गड़बड़ हुआ है तो पूरी बॉडी तो एटलीस्ट बची ही रहेगी। बच जाएगी। क्वालिटी ऑफ़ लाइफ तो इंप्रूव होगी। राइट?

77:15

Speaker A

तो इसको ध्यान में रखते हुए मैंने मस्लो डिस्ट्रोफी को पढ़ना शुरू किया। जब मैंने देखा कि एग्स जीन डिफेक्ट है। डिस्ट्रोफिन जीन जो सबसे बड़ी लार्जेस्ट एग्स जीन होती है वह फौल्टी हो जाती है। उसमें कुछ चीजें मतलब डिलीशन हो जाता है। जिसकी वजह से

77:29

Speaker A

क्या है? बॉडी डिस्ट्रोफिन जीन नहीं बना पाती है। जिसे मैं एक्सप ऐसे अकड़ा रहा हूं और ऐसे रिलीज़ कर रहा हूं। है ना? ये टेंशन एंड रिलीज़। दिस इज़ बिकॉज़ ऑफ़ डिस्ट्रोफिन जीन। अच्छा। यस। ओके। वो मसल को सपोर्ट करती है बेसिकली।

77:42

Speaker A

हम एक सपोर्ट सिस्टम होता है मसल। अब सपोर्ट सिस्टम चला जाता है तो मसल ढीले हो जाते हैं। ओ जब ब्लस्टोफिन प्रोटीन नहीं बनता मसल ढीले हो जाते हैं जो मैंने पढ़ा तो उन सेल्स में कैल्शियम घुसने लग जाता है। वही बलकी

77:52

Speaker A

सेल हो गए आप ढीले हो गए जो माइटोफेजी की मैं बात कर रहा हूं मैं हम तो बलकी सेल्स बन गए वहां के और बलकी सेल जैसे ही बनता है तो जो भी चीज है वो सब उस सेल में इंक्लूड करता है। तो कैल्शियम

78:00

Speaker A

सबसे ज्यादा घुसता है उसके अंदर और उस सेल को कैल्सिफाई कर देता है और सेल की डेथ हो जाती है एक और जब सेल मर गया वो तो डिजनरेशन ऐसे बहुत सारे सेल जब मरते हैं तो डिजनरेशन होती चली जाती है एक

78:12

Speaker A

ओके अब उस टाइम पे ही मैं मैग्नीशियम पे काम कर रहा था मैग्नीशियम ट्रांसडर्मल मैग्नीशियम क्योंकि आज के समय में डेफिशिएंसी ऑफ़ मैग्नीशियम इज़ अ पैराडेमिक क्योंकि पहले पानी से मिलता था हमें पूरे दिन में हमें कम से कम 500 एमg से 600 एमg

78:25

Speaker A

मैग्नीशियम चाहिए डाइटरी इंटेक जो हमारा होना चाहिए बट खाने से 200 mg मिलता है। बाकी कहां से मिलना था हमें? पानी से। पानी से। पानी हमने क्या कर दिया? आरो का। आरो उसमें तो गया वो खत्म। वाटर टेबल डिप्लीट

78:36

Speaker A

हो गई। सब सोइल से भी चला गया। आजकल ट्रीट करना पड़ता है खेतों को भी। मैग्नीशियम इ्सम साल्ट डालना पड़ता है उसके अंदर भी है ना ट्रीट करने के लिए। मैग्नीशियम ताकि खाने में आ जाए मैग्नीशियम सबसे ज्यादा।

78:45

Speaker A

तो मैग्नीशियम के बहुत सारे रोल होते हैं। एक तो विटामिन डी का रेगुलेशन करता है वो। मेन प्रकर है विटामिन डी को एक्टिवेट कराने के लिए। ठीक है? दूसरा मैग्नीशियम का एक फंक्शन है जो मैंने एमएमपी बताया था आपको माइटोफेजी में जो

78:57

Speaker A

सेल का आउटर मेंब्रेन होता है ना माइटोकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल उस चार्ज को मेंटेन करने में मैग्नीशियम का बहुत बड़ा रोल होता है बेसिकली हम सेल के अंदर मैग्नीशियम एटीपी से बॉन्ड बना के एटीपी को बढ़ाता है एटीपी को

79:10

Speaker A

एक्सप्पोनेंशली इसकी ग्रोथ कराता है बेसिकली मैग्नीशियम अगर है तो एटीपी का जो रेगुलेशन है वो अच्छा रहता है हमारे सेल के अंदर और चार्ज जो है मेंट है यानी कि मैग्नीशियम जिस सेल में है वो सेल प्रोटेक्टेड है वो सेल कम्युनिकेट अच्छी

79:21

Speaker A

तरीके से करेगा और किसी चीज को अंदर भी नहीं आने देगा। इट इज़ अ इट इज़ काइंड ऑफ़ गार्ड टू द सेल। मैग्नीशियम एक गार्ड है हमारे सेल का जो किसी भी चीज को अंदर घुसने नहीं देता है। बेसिकली समझ आया? फिर

79:31

Speaker A

मैंने देखा ओरल कंजशन तो सिर्फ बहुत ही पुअर है इसका। एक्सेस दे दो तो लूज मोशन हो जाएगा। हम फिर मैंने देखा ट्रांसडर्मल अब्सॉर्प्शन इसका बहुत अच्छा है। ओके?

79:39

Speaker A

देन आई फाउंड सम ट्रांसडर्मल मैग्नीशियम। बेसिकली डेड सीसी हम जो लाते हैं। ठीक है?

79:44

Speaker A

तो मैंने पेशेंट्स को वो देना शुरू किया। पहले अपने क्लनिक पे देना शुरू किया। दे आई सॉ वेरी गुड रिजल्ट्स। फ्लेक्सिबिलिटी इंप्रूव हुई। जो बीमारी जहां पे थी वहां तक वो रुक रही थी और रहने की प्रोग्रेशन स्लो हो

79:57

Speaker A

रहा था बेसिकली धीरे-धीरे क्यों? क्योंकि हमने कैल्शियम का जो इनफिल्ट्रेशन है सेल के अंदर वो हमने रिड्यूस कर दिया हम मैग्नीशियम सप्लाई कर करा के बेसिकली। क्या हुआ? एक तो लोकली मैग्नीशियम सप्लाई करने से एक तो जो सेल है सेल का एटीपी

80:09

Speaker A

इंप्रूव हुआ और एमएमपी जो है एमएमपी मेटाकांड्रियल मेंब्रेन पोटेंशियल जो है वो उसका मेंटेन हो गया। जिसकी वजह से कैल्शियम उसमें अंदर घुस ही नहीं पा रहा है जो हेल्दी सेल्स है और जिसमें ऑलरेडी घुस चुका है राइट? अब उसके लिए हमें कुछ

80:23

Speaker A

करना था कि जिस जिसके अंदर घुस चुका है अब उसका क्या करें? हां उसमें मैग्नीशियम हेल्प करता है बट थोड़ा हेल्प करता है। उसके लिए फिर हम कुंभक लेके आए। फिर मैंने साथ में कुंभक जोड़ा। ओके। कुंभक क्या कर रहा है? सेलुलर माइटोफेजी।

80:36

Speaker A

तो जब हम कुंभक करते हैं बेसिकली। सो मैंने बताया स्टेम सेल्स बढ़ते हैं। सेलवर क्लीन अप होता है। बहुत सारी जींस हमारी एक्सप्रेस होती हैं। जो कि हमारे जो पार्शियली डैमेज सेल्स होते हैं पार्शियली डैमेज जिनका माइटोकांड्रिया होता है। बॉडी

80:47

Speaker A

उन सेल्स को रिसाइकल कर देती है। तो इट वाज़ अ टू वे अप्रोच। मैग्नीशियम से हमने हेल्दी सेल्स को प्रोटेक्टेड रखा। उनके एमएमपी को कंट्रोल रखा और जो सेल्स पार्शियली डैमेज हो गए थे उन सेल्स को हमने क्या करा? कुंभक से

80:59

Speaker A

रिवाइव करने की कोशिश करी। ओके। और इन दोनों थेरेपीस का इतना अच्छा रिजल्ट आया। हमने फिर हमने आईएमडी इंडियन एसोसिएशन मस्कुलर डिस्ट्रोफी के साथ एक स्टडी करी 30 लोगों पे जिसमें से 14 लोगों ने काफी अच्छा फॉलो किया। 16 लोगों ने मतलब एक 16 लोग थे जो

81:16

Speaker A

ट्रेडिशनल ट्रीटमेंट थे और 14 लोग थे जो ये कुंभक और मैग्नीशियम मैग्नीशियम पूल भी हमने वहां पे बनाया था। मैग्नीशियम पूल में हमने 40,000 लीटर वाटर के अंदर मैग्नीशियम को डाला जिसमें हर पेशेंट को थेरेपी दो ढाई घंटा दी जाती थी। फिर

81:28

Speaker A

मैग्नीशियम ऑयल को डेली एप्लीकेशन होता था। जैसे काफ मसल्स पे, फीट पे, शोल्डर्स पे, अफेक्टेड जो एरियाज हैं ऑलरेडी और जो हेल्दी एरियाज है उस पे भी उनको उसको लगाया जाता था और कुंभक प्रैक्टिस कराया जाता था बेसिकली।

81:40

Speaker A

तो 30 लोगों में से 14 लोग जो थे उनका डॉक्यूमेंट उनकी जो स्टडी है वो पूरा डॉक्यूमेंट है हमारे पास। तो उसमें आप सोचिए चार लोग ऐसे थे जो व्हीलचेयर से खड़े हो पाए। ओ राइट? एक पेशेंट ऐसा था जिसको मस्कुलर

81:55

Speaker A

डिस्ट्रोफी प्लस साथ में उसको पैरालिसिस भी आ गया था। 28 साल से मस्कुलस्ट्रोफी का पेशेंट था। लिमिटल मस्कस्ट्रोफी थी उसको। 28 साल से व्हीलचेयर पे था। प्लस दो-ती साल पहले उसको स्ट्रोक आया तो लेफ्ट साइड पूरी डेड हो गई। हम

82:08

Speaker A

ये ऐसे हो गई फुल। हम वो कुछ भी नहीं उठा पा रहा है उससे। मार्च 24 के अंदर वो एनरोल हुआ था हमारे पास लास्ट ईयर। अब वो पूरे के पूरे 12 लेवल्स करता है। 144 ब्रेथ करता है। ही

82:22

Speaker A

लॉस्ट 15 kg ऑफ़ वजन वेट। क्योंकि डिस्ट्रोफिक पेशेंट के साथ प्रॉब्लम क्या है? बैठे रहना है तो वेट बढ़ता रहेगा। हम तो कुंभक से कुंभक इज एन एक्सरसाइज टेक्निक टू लूज योर वेट विदाउट डूइंग एनी इंटेंस फिजिकल एक्टिविटी एंड वर्कआउट।

82:39

Speaker A

क्लीन अप हो रहा है ना अब सेलर सेल लेवल पे क्लींजिंग हो रही है। आप सोचिए। सो बॉडी का जो डिटॉक्सिफिकेशन जो प्रोसेस है वो बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। अभी राइट?

82:47

Speaker A

लेफ्ट साइड उनकी पूरी रिकवर हो गई इन सिक्स मंथ्स। वहां से 9 केजी का वेट उठा पाते हैं। अब वो दो अटेंडेंट लगते थे उनको बेड से व्हीलचेयर पे व्हीलचेयर से बेड पे आने में। हम अब वो खुद व्हीलचेयर से बेड पे बेड से

82:59

Speaker A

व्हीलचेयर पे आ जाते हैं। करवट नहीं ले पाते करवट ले पाते। खुद नहा लेते हैं। खुद सब कुछ कर लेते हैं। व्हीलचेयर से खुद खड़े हो जाते हैं। बाल भी वापस आ गए उनके। हेयर लाइन रिसीड कर रही थी बेसिकली उनकी।

83:10

Speaker A

राइट? और मसल सरकम्फ्रेंस भी उनका इंप्रूव हुआ। हम और जो चार मैंने बताया ना मसल मसल मसल सरकम्फ्रेंस तो हमारा काफी पेशेंट्स में इंप्रूव हुआ जो कि हमने सोचा भी नहीं था। हमने पहले देखा था सिर्फ हम हमेशा बात ये

83:22

Speaker A

करेंगे कि हम सिर्फ डिजीज को के प्रोग्रेशन को रोक रहे हैं। ये इतना हो गया बस इससे आगे नहीं। हम क्वालिटी ऑफ़ लाइफ को इंप्रूव कर रहे थे बेसिकली ताकि एक ऐसा बोला जाता है डीएमडी के पेशेंट की

83:33

Speaker A

22 25 22 से 25 साल ही उनकी लाइफ स्पैन रहता है। हां। बट हम इससे चाह रहे थे कि एटलीस्ट 20 साल और बढ़ जाए। बट हमें डिवाइन ने एक ऐसी दो कॉम्बिनेशन थेरेपीस दी जिससे बेसिकली लाइफ स्टाइल लाइफ स्पैन तो अच्छा हुआ ही हुआ और

83:50

Speaker A

लाइफस्टाइल की लाइफ की जो क्वालिटी है वो भी इंप्रूव हुई। कई लोगों का मसल से कॉन्फिडेंस इंप्रूव हुआ। जो पहले खड़े होने खड़े नहीं हो पाते थे वो अपने आप मतलब हमारे पास वीडियोस आते हैं एज अ टेस्टिमोनियल के पहले मेरा बच्चा नहीं हो

83:59

Speaker A

पाता था। खड़ा अब दो सेकंड में खड़ा हो पा रहा है। पहले मेरा बच्चा बस पे नहीं चढ़ पाता था। मेरा बच्चा बस पे चढ़ पा रहा है। राइट? सो 30 लोगों की स्टडी हमने खत्म करी। उसके बाद अब हमने 50 लोगों की स्टडी

84:10

Speaker A

हमारी ऑनगोइंग है। उसमें 50 50 लोग एनरोल्ड हैं जिसमें मैग्नीशियम और कुंभक ये दो ही और विदाउट इंटरवेंशन ऑफ़ सिंगल ओरल मेडिसिन। कोई ओरल मेडिसिन नहीं है। हम अब ये क्या प्रूव करता है जो एक वाइटल मिनरल है आफ्टर ऑक्सीजन शरीर के अंदर

84:25

Speaker A

मैग्नीशियम उसको हमने पूरा किया जो कि बहुत सारे वाइटल फंक्शनंस के लिए जरूरी है। हम उसको पूरा किया ट्रांसडर्मली और बॉडी की सेल्फ हीलिंग एबिलिटी को हमने इनेबल किया कुंभक सिखा के ट्रेनिंग देके। जब यह दोनों का कॉम्बिनेशन मिला एक एटीपी को बढ़ाने

84:40

Speaker A

में हेल्प कर रहा है और एक सेल को रिसाइकल कर रहा है। एक सेल को नया बना रहा है और एक सेल को एनर्जी दे रहा है। तो कॉम्प्लीमेंट्री हो गई बेसिकली। इससे पूरी प्रेजेंटेशन मैंने आईसीएमआर की मीटिंग हुई

84:50

Speaker A

थी सोलन में पूरा दिया था। वहां पे पूरा समझाया था मैंने विद प्रूफ ऑफ माय पेशेंट्स। सो मेरा यही वो था कि वहां पे साइंटिस्ट जो लोग थे वो वही बात कर रहे थे कि जीन थेरेपी पे वी आर वर्किंग। वी आर

85:03

Speaker A

टेस्टिंग ऑन माउस। इट विल कॉस्ट अराउंड ₹5 करोड़ बट वी आर नेगोशिएटिंग वि द गवर्नमेंट कि वह कुछ पार्ट उसका दे दे फिर भी एक दो करोड़ की पड़ेगी। वही देखो क्योर वाली बात है बट बीमारी और जो ये क्योर है इसके बीच

85:16

Speaker A

में जो स्पेस है जो ब्लैंक स्पेस है इसको कोई देख ही नहीं रहा है। हम कि हम क्वालिटी ऑफ़ लाइफ तो इंप्रूव कर सकते हैं। सही बात है। व्हाई वी आर नॉट वर्किंग ऑन दैट। मैंने फीलिंग में तो होगी ना।

85:25

Speaker A

सो मैंने स्टेज पे चढ़ के यही बोला। मैं भी वही बातें बोल रहा हूं। जीन की माइटोफेजी बी बीएआईपी3 एनआई एक्स और ये सारी चीजें वो भी वही बात बोल रहे हैं बट वो बोल रहे हैं जीन थेरेपी

85:36

Speaker A

मैं बोल रहा हूं इसके थ्रू हम ओके सो जब ये एक्सपीरियंस मेरे साथ हुआ तो उससे मेरे को और कॉन्फिडेंस मिला हम कि कुंभक एक ऐसी चीज है जिसका जिससे आप किसी भी बीमारी को ठीक कर सकते हो

85:48

Speaker A

मैं भी मानता हूं वैसे ये बात किसी भी बीमारी को हम हम बट प्रैक्टिस जो है इट शुड बी वेरी इन अ डिसिप्लिनरी मैनर आपको उसको प्रैक्टिस करना है हम डेली करना है, रेगुलर करना है, सेम टाइम पे करना है।

86:02

Speaker A

अच्छा ऐसा है। सेम टाइम जरूरी है। सेम टाइम जरूरी इसलिए होता है। देखिए मैंने आपको बताया ना हमारी बॉडी को डिसिप्लिन पसंद होता है बहुत ज्यादा। हम कब कौन सी चीज़ रिलीज़ हो रही है। तो आप कभी भी किसी चीज़ को डिसिप्लिन में करके देखना

86:12

Speaker A

डेली एक ही टाइम पे। हम और आप देखना बेसिकली के मतलब बॉडी कैसे चेंज होती है एक्चुअली में। कोई भी चाहे आप गलत चीज भी सेम टाइम पे कर लो। मेरे कहने का मतलब है आप छोले छोले भटूरे हैं

86:22

Speaker A

ना आप डेली 1:00 बजे खाओ। हां। ठीक है? और एक दूसरे बंदे को बोलो तू छोले भटूरे आज 1:00 बजे खाया और कल 3:00 बजे खाया। ऐसे एक महीने करो 3:00 बजे 1:00 बजे जिसने कभी 1:00 बजे कभी 3:00 बजे कभी 6:00

86:34

Speaker A

बजे खाया है छोले भटूरा उसका लिवर का स्कैन देख लेना और अपना लिवर का स्कैन देख लेना। छोले भटूरे इफ़ेक्ट तो आपको भी करेगा। बट वो इंटेंसिटी कम होगी इफेक्ट की क्योंकि आपने सेम टाइम पे खाया है। हम

86:45

Speaker A

गॉट इट। बट उसने क्या अलग-अलग टाइम पे खाया है। ऐसे होता है हेल्दी चीज को आप गलग टाइम पे खाओगे तो प्रॉब्लम करेगा। बेसिकली आपको हम तो दिक्कत ये है सारी। तो यह मस्कुलर डिस्ट्रोफी का जो प्रोजेक्ट है इट इज वै

86:55

Speaker A

क्लोज टू माय हार्ट। इसीलिए हमने इसको फ्री रखा है अपने हर मस्कुलर डिस्ट्रोफी के पेशेंट के लिए। जो मैग्नीशियम की सप्लाई है वो सारी हमारी तरफ से जाती है। जो सारी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग है वो सब हम फ्री करते हैं

87:06

Speaker A

एक्चुअली। ओके? ग्रुप में। तो कोई भी है इसलिए हमने ये हमेशा अनाउंस किया हुआ है। किसी को कहीं पे भी कोई पेशेंट मिलता है। सो रेफर टू अस हम एट लीस्ट उनकी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ और डिजीज का प्रोग्रेशन स्लो करने में काफी ज्यादा

87:17

Speaker A

मदद जो है वो हो जाएगी कुंभक एंड मैग्नीशियम से। बेसिकली। ओके। सर। तो ये रिसेंटली एक पोस्ट किया था अ लिवरडॉक ने हम मतलब जो जनरली तो मैं बहुत सारे पोस्ट ऐसे ही इग्नोर करता हूं बट ये वाला थोड़ा

87:34

Speaker A

ज्यादा कंट्रोवर्शियल लगा मुझे जिसमें बेसिकली इट वाज़ अबाउट कि आयुर्वेदा में सब कुछ गलत है या मतलब क्या-क्या गलत है बेसिकली तो उसमें कुछ चीजें ऐसी थी जो व्हिच आई थिंक आर कंट्रोवर्शियल बट आई थिंक इफ वी कैन क्लियर इट तो बेटर बेटर रहेगा। सो

87:52

Speaker A

इसमें बेसिकली व्हाट ही हैज़ डन इज़ ही हैज़ पोस्टेड स्नैपशॉट्स फ्रॉम बुक्स ऑफ़ आयेदा टेक्निकल और उसमें संस्कृत में भी लिखा हुआ है और इंग्लिश में भी लिखा हुआ है। तो सीमिंगली लग तो ऐसा रहा है कि ये आयेदा

88:05

Speaker A

की बुक है क्योंकि उसमें संस्कृत वगैरह सब है। अब जैसे फॉर एग्जांपल इसमें एक पेज है जिसमें है ट्यूबरक्लोसिस द किंग ऑफ डिजीजेस गेट सिक्यर्ड बाय मसाज अंक्शन वेयरिंग ऑफ न्यू एंड प्लेज़ेंट गारमेंट्स टेकिंग ऑर्डिनरी एंड मेडिकेटेड बाथ इन कंसोनेंस विथ द टेंपरेचर ऑफ सीजन

88:22

Speaker A

एक्सटर्नल क्लींज़िंग यूजिंग मेडिकेटेड एनीमा टेकिंग मिल्क घी मीट फूड मिक्स्ड विद मीट सूप ड्रिंकिंग एग्रेबल अल्कोहलिक प्रिपरेशंस परफ्यूम्स ऑब्ज़र्विंग फ्रेंडली एंड ब्यूटीफुल लेडीज़ हियरिंग वोकल इंस्ट्रूमेंट म्यूजिक ऑब्जर्विंग सेलवेसी तो अब जैसे ये ट्यूबरक्लोसिस के ऊपर है तो क्या ये सच है क्या है क्या ये

88:44

Speaker A

देखो मैं बताता हूं आपको अभी इस रूम में हम कितने लोग हैं चार चार लोग हैं हम कितने को संस्कृत आती है ट्रांसलेशन आती है प्रॉपर प्रॉपर ट्रांसलेशन हां राइट हां एवरीबडी इज फ्री टू यूज़ देयर ओन वोकैबलरी

89:00

Speaker A

हम ओन वर्ड्स हम अब ये इस श्लोक को अगर आप पढ़ोगे तो इसका मतलब क्या है देखो ट्यूबरक्लोसिस एक ऐसी ऐसी बीमारी है। अच्छा बहुत सारे टेक्स्ट है। वैसे जो ये टेक्स्ट का जो आप जो पढ़ रहे हो ये चरक संहिता का एक ट्रांसलेशन

89:13

Speaker A

है। ठीक है? सबसे गंदा ट्रांसलेशन है। जिसमें वर्ड्स को बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया कि किस तरीके से उसको यूज़ करना है। अब इस श्लोक का एक्चुअल मतलब क्या है? जो राजक्ष्मा का पेशेंट है, ट्यूबरक्लोसिस का जो पेशेंट है इसके सात धातु

89:27

Speaker A

कमजोर हो रहे हैं। धातुश्या बोलते हैं इसको। सात के सात धातु जिसमें कमजोर होना शुरू हो जाते हैं। सेवन टिश्यूज़ प्लाज्मा, ब्लड, मसल्स, फैट, बोन, बोन एंड रिप्रोडक्टिव है ना? हम्म। शरीर बहुत कमजोर महसूस करता है। कमजोर फील

89:37

Speaker A

करता है। मेंटली एंड फिजिकली बोथ। राइट? मतलब इतना ज्यादा डीप मेंटल में डिप्रेशन में चला जाता है पेशेंट उस टाइम पे कि उसको उसको लगता है बेसिकली अब वो शायद कुछ ही दिनों का मेहमान है। अच्छा। ऐसी बीमारी होती है। है ना? अब लंग का

89:51

Speaker A

टीबी हो जाए तो वो खांस खांसते ही मर जाता है। या उसको मतलब सांस लेने में बड़ी दिक्कत होती है। बेसिकली ट्यूबरलोसिस एक ऐसी बीमारी है। अब इस श्लोक को अगर आप ढंग से ट्रांसलेट करोगे। अब जैसे इसमें बोला

90:02

Speaker A

कि ब्यूटीफुल लेडी को देखो ऐसी चीज़ों में पार्टिसिपेट करो। सो कहने का मतलब है इसमें कि जब इंसान एक ऐसी बीमारी से ग्रसित हो गया है तो इट इज़ एपिजेनेटिक्स। सो यू हैव टू चेंज योर एनवायरमेंट। आपको सैड एनवायरमेंट में या कोई ऐसे एनवायरमेंट

90:17

Speaker A

में नहीं जाना है जहां पे और ज्यादा स्ट्रेसफुल एनवायरमेंट हो। जहां पे लड़ाई दंगा ये सब चीजें हो। आपको ऐसे एनवायरमेंट में जाना है जहां पे बेसिकली आप खुश फील हो सके। आपको अच्छा लगे। राइट? आपको वो हॉबीज अपनी करनी है जो आप पहले करते थे या

90:29

Speaker A

छोटे जिन जिनसे आपको अच्छा लगता था। अब इसका मतलब क्या है? जब आप ऐसी चीजों में इन्वॉल्व होते हो दैट यू लाइक है ना?

90:36

Speaker A

तो यू फील समथिंग यू फील हैप्पी। तो व्हाट इज दैट फीलिंग? दैट इज द सिकक्रेशन ऑफ़ न्यूरोट ट्रांसमीटर। राइट?

90:44

Speaker A

यू नो फ्रॉम द ब्रेन। ए्री फीलिंग इज़ अ सीक्रेशन ऑफ़ न्यूर ट्रांसमीटर। सो इसमें बोला जा रहा है एक रोगी को अच्छा समय देना। एक रोगी को अच्छा महसूस कराना और फील कराना ताकि उसकी एक्सेप्टेबिलिटी टू द ट्रीटमेंट बढ़ जाए। बेसिकली। अब इसको किस

90:55

Speaker A

तरीके से प्रेजेंट किया गया है? सो ये ऐसे डॉक्टर है ना यह ओरिजिनल टेक्स्ट कोई ट्रांसलेट करके संस्कृत में बताएं ना कि संस्कृत में बेसिकली इसका क्योंकि जैसे इसमें संस्कृत जैसे मुझे जो थोड़ी बहुत आती है उसमें जैसे लिखा है कि

91:07

Speaker A

ब्रह्मचर्यण दानेन तपसा देवार देवारचने मतलब बेसिकली समथिंग रिलेटेड टू ब्रह्मचर्य एंड सेलिबेसी यस यस और तप मतलब आपकी तप मतलब तप मतलब डिसिप्लिन डिसिप्लिन आप समझ रहे हैं अब कहीं जो ट्रांसलेशन है उसमें कहीं इन वर्ड्स मीनिंग कहीं मेंशंड है?

91:28

Speaker A

बस ये लिखा है ऑब्जर्विंग सेलसी गिविंग डोनेशन बट इसमें गलत क्या है? नहीं नहीं यह जो वो यह दिखा रहा है कि एक ट्यूबरक्लॉल के को ठीक कैसे कैसे किया जाता है कि लड़कियों को देखो सुंदर सुंदर तो ऐसे उसमें भी तो ना मुन्ना भाई

91:41

Speaker A

एमबीबीएस मुन्ना भाई मुन्ना भाई तो अब मैं क्या कह रहा हूं मैं इसने एक एस्पेक्ट उठा के रख दिया आप वैश रत्नावली पढ़ो हां उसमें राजक्ष्मा को ठीक करने के इतने फॉर्मूलेस हैं हां ठीक है जो बनाए गए हैं और ये जिस चीज को

91:54

Speaker A

बोल रहा है कि अल्कोहल पिला के ठीक करना उसको आयुर्वेद में आशा वरिष्ठ बोलते हैं जो नेचुरल फर्मेंटेशन ऑफ मेडिसिन होता है वो अल्कोहल नहीं होता बेसिकली वो मेडिसिन है मेडिसिनेशन है वो। अब एलोपैथी में कितनी मेडिसिन है? कोडक्स

92:05

Speaker A

कोडक्स पे क्यों बैन है? लोग उससे नशा करते हैं। नहीं अल्कोहल मतलब वो ऐसे ब्लैक डॉग और वो नहीं है। वो वो नहीं है। दैट इज किसी चीज को हम फर्मेंट करते हैं। हर्ब्स को फर्मेंट करते हैं। जो नेचुरल प्रोसेस में जो प्रोडक्शन

92:16

Speaker A

हो रहा है वो है बेसिकली। तंत्र में भी यही होता है वैसे। तंत्र में जिसको वो बोलते हैं मदिरा वो मदिरा नहीं होता। अल्कोहल अल्कोहल अगर आप देखोगे एलोपैथी मेडिसिन में कितना यूज़ होता है। हम अफीम यूज़ होती है।

92:26

Speaker A

हम एलोपैथी मेडिसिन केस के अंदर उसकी तो कोई बात नहीं करता है। हम समझ आया? तो ट्रीटमेंट पूरा नहीं बताया राजमा का ट्रीटमेंट क्या है अगर आप आओगे संप्रति संपृप्ति मतलब कि डिजीज कैसे प्रोग्रेस होगी कहां तक जाएगी कहां किस

92:37

Speaker A

धातु तक पहुंची है इस तरीके की पूरी की पूरी एनालिसिस होती है हम बस खाली श्लोक के मीनिंग को तोड़ोड़ के आपने लिख दिया यहां पे हम और आपने लोगों को फैला दिया इससे आयुर्वेद का ना तो थोड़ा सा भी नुकसान नहीं होगा

92:49

Speaker A

बेसिकली क्योंकि जो लोग इसको मान रहे हैं वो आयुर्वेद के काबिल नहीं है हम ठीक है और जो नहीं मान रहे हैं वो तो आयुर्वेद के पास है ही ऑलरेडी बेसिकली ठीक है अच्छा इसमें एक और है जो थोड़ा थोड़ा और

93:00

Speaker A

अजीब है। इसमें ये है कि इन केस ऑफ़ ऑब्स्ट्रक्शन ऑफ़ डिलीवरी ऑफ द फीिटस। डिलीवरी की स्पेलिंग भी गलत है। द वाइना शुड बी फ्यूमिगेटेड बाय यूजिंग द पील ऑफ अ ब्लैक स्नेक। द रूट ऑफ हिरण्य पुष्पी शुड बी टाइड टू द

93:16

Speaker A

हैंड्स एंड फीट ऑफ हैंड्स एंड फीट और द रूट्स ऑफ विशालल्या। दिस मे बी डन इवन इन नॉन डिलीवरी ऑफ़ फीटल कवरिंग। भसदार रत्नावली में इसका मेंशन है जो हमारे स्नेक का जो स्किन होता है उसके अंदर बहुत सारी मेडिसिनल प्रॉपर्टीज होती

93:30

Speaker A

हैं। ओके। आपको पता है ऐसे तरीके के चर्म रोग, स्किन रोग जो लालाज है। ठीक है? आज के समय में वैद्य को नहीं पता वो कैसे बनते हैं। बट एक वैद्य हैं जिनको मैं जानता हूं जिनके फादर जिनके ऊपर उनके ऊपर बायोपिक भी बन

93:41

Speaker A

रही है। बैलेंदु प्रकाश जी के फादर हैं प्रकाश वैद्य बेंदु प्रकाश जी जो पद्मश्री भी हैं। ओके। पूरे वर्ल्ड में पनक्रिएटाइटिस का सफल इलाज सिर्फ वही करते हैं। सारी पैथी मिला के हम सफल इलाज बता रहा हूं मैं आपको। उस दवाई

93:54

Speaker A

को जो वो बनाते हैं वो कॉपर से बनाते हैं और दो साल लगते हैं उसको बनने में। उस मेडिसिन का नाम है अमर। ओ राइट दूर-दूर से हर देश से उनके पास पेशेंट आता है वहां पर रहता है और ठीक हो

94:03

Speaker A

के जाता है पेनक्रिएटाइटिस एक्यूट पैंकक्रिएटाइटिस विद नेक्रोसिस आल्सो हम और उन्होंने पूरा एविडेंस बेस्ड है उनका उनका उनके पूरे मेडिसिन को पेटेंट मिला हुआ है हम उनके प्रोटोकॉल को पेटेंट मिला हुआ है उनकी दवाइयां बड़ी-बड़ी आईएसआर बड़ी-बड़ी लैब्स में टेस्ट होती है उनके पास

94:20

Speaker A

एनालाइज़र्स उनके हॉस्पिटल के अंदर रखे हुए हैं एनालाइज़र्स कोई भी मेडिसिन बनता है उसका पार्टिकल साइज देखा जाता है बेसिकली इतने लेवल तक वो बेसिकली उसको एविडेंस बेस वेस्ट करते हैं। सऊदी अरब में पेनिटाइटिस बहुत होता है लोगों को। तो

94:30

Speaker A

सऊदी अरब में मेन वो ट्रीट करने जाते हैं बेसिकली उसको। तो उनके जो फादर थे चंद्र प्रकाश जी चंद्र प्रकाश बालेंदु जी। तो एक बार बालेंदु सर को कुछ ऐसी प्रॉब्लम हुई थी। स्किन का कोई ऐसा इशू हुआ था। कोई

94:42

Speaker A

दिक्कत हुई थी बेसिकली है ना? और वो ठीक ही नहीं हो रही थी। तो वो गए उनके पास इलाज कराने के लिए अपने फादर के पास। तो उन्होंने स्नेक की पील से बना हुआ मलम उनको दिया। और बालेंदु जी बोल रहे थे जो 2

94:56

Speaker A

महीने हो गए थे मेरे को इस बीमारी से जूझते हुए मैं अपने फादर के पास नहीं गया 3 दिन के अंदर वो क्लियर हो गया बस सो कितना ज्यादा एंटीबक्टीरियल प्रॉपर्टीज होंगी कितनी ज्यादा एंटीवायरल प्रॉपर्टीज होंगी उसके अंदर तो फ्यूमिगेशन व्हाट

95:09

Speaker A

फ्यूमिगेशन पुराने जमाने में क्या होता है धूमपान बोलते हैं उसको किसी भी चीज को आपने जला दिया और जब उसका फ्यूल फ्यूल के साथ उसके जो वोलेटाइल जो पार्टिकल्स होते हैं वो जाते हैं ऊपर सो दैट फ्यूमिगेट्स योर यू नो अब पुराने जिस टाइम पे ये लिखा

95:21

Speaker A

गया है उस टाइम पे उस टाइम पे ये एंटीसेप्टिक एंटी बायोटेक्स थे तब थोड़ी नहीं होते थे। ये उस टाइम के हिसाब से लिखा गया है। हम सही बात है। आज थोड़ी प्रैक्टिस कर रहा है कोई इसको। हां।

95:31

Speaker A

आज तो हमारे पास मॉडर्न साइंस है। अवेलेबिलिटी है। सही बात है। दिस इज़ वैरी फुलिश बिहेवियर ऑफ़ दिस डॉक्टर। आई मतलब व्हाट टू से मतलब चीजों को नेगेटिवली प्रेजेंट करना। हां। मतलब ये करेगा कौन? अब मतलब अब कौन करेगा? सोचने वाली बात है।

95:42

Speaker A

जो चीज़ 5000 साल पहले भाई कुछ था ही नहीं। हां। 5000 साल पहले या 2000 साल पहले या 200 साल पहले भी लगा लो आप। 200 साल एलोपैथी की उम्र कितनी है? 200 250 साल? हम 300 साल पहले क्या था? इलाज तो सब इन्हीं

95:54

Speaker A

चीज़ों से होता था। उस टाइम पे जो जैसा मिलता था लोग प्रैक्टिकल करते थे और प्रैक्टिकल से जो फर्क आ गया तो उसको डॉक्यूमेंट कर दिया अभी। हम्म बट आज के जमाने में अगर आप बात करेंगे हमारे एजुकेशन में मैंने बीएएमएस करा है।

96:08

Speaker A

हमें ये पढ़ाया हमें तो नहीं पढ़ाया जाता कि आप स्नेक की पील उतारो उसको जलाओ वो करो। क्योंकि दैट इज़ नॉट रेलेवेंट इन टुडेेस टाइम। सही बात है। पुराने जमाने में जंगल इतने होते थे। स्नेक इतने ज्यादा मिलते थे। आप समझिए

96:18

Speaker A

नॉन पोइजनस भी पोइजनस भी। ठीक है? ठीक है। उस हिसाब से बेसिकली उस टाइम का वो टाइम था वो समय गया। हम मतलब लिबर डॉक्टर मॉडर्न डॉक्टर होते हुए भी आज भी पास्ट में ही जी रहे हैं। आयुर्वेद कितना आगे आ गया है।

96:30

Speaker A

हम सो मैं यही बोलूंगा उनसे यही सजेशन है मेरा कि थोड़ा सा अपने ज्ञान को थोड़ा सा बढ़ाओ। राइट और चीजों को ना ढंग से समझो। पुरानी चीजों को मत लेके आओ। हम अच्छा इसमें एक एक है जिसमें मतलब सबसे ज्यादा आई थिंक

96:45

Speaker A

उसी पे लोग थोड़े से वो हुए हैं व्हिच इज क्योंकि एक तो जब भी हम कहीं पे भी अगर सेक्स की बात करते हैं लोग थोड़े वो हो जाते हैं मतलब अजीब सा रिएक्ट करने लगते हैं कि हाउ कि सेक्स के बारे में ऐसा कैसे

96:58

Speaker A

लिखा हुआ है क्योंकि आई थिंक बहुत कुछ ऐसा टबू है जबकि हर कोई कर रहा है मतलब इंसान जानवर कीड़ा हर कोई कर रहा है कौन सा टबू है पता नहीं बट इसमें है कि कॉमन गोल्ड के उसमें ट्रांसलेशन में है

97:13

Speaker A

इंडलजेंस इन वुमेन कॉपुलेशन इंजरी टू द हेड असॉल्ट बाय स्मोक सनलाइट डस्ट टू मच ऑफ कोल्ड सप्रेशन ऑफ़ अर्जस ऑफ यूरिन आर द इमीडिएट कॉजेस ऑफ़ प्रतिशया मतलब ये कॉजेस लिखे हैं हम अब ये कॉमन कोल्ड वाले सेक्शन में है

97:30

Speaker A

बेसिक समझ तो क्योंकि कुछ आ नहीं रहा तो ये ये सब भी वही देखो क्या होता है ना ये सब सिम्टम्स अब देखो इसने इसने सिम्टम मम को एक प्रॉब्लम से रिलेट किया हुआ है। आप समझो। ठीक है?

97:42

Speaker A

अब दिस इज़ वै अनक्लियर। हां। पूरी पूरी ट्रांसलेशन भी नहीं है। बेसिकली थोड़ी आ रहा है। एक ही पेज है बस। पूरी ट्रांसलेशन भी नहीं है। बेसिकली हम आपने सिर्फ क्या पढ़ा? आपने कुछ वर्ड्स को पिक किया बीच में से विदाउट नोइंग द

97:53

Speaker A

कॉन्टेस्ट ऑफ इट। हम और आपने फिर गलत बोलना शुरू कर दिया लोगों ने एक्चुअली में। तो बेसिकली ये किसी भी किसी भी जो जो मैंने सारी पोस्ट दी किसी भी चीज का कोई रेलेवेंस नहीं है। बेसिकली आज के समय में।

98:05

Speaker A

ये अभी ये पढ़ाया नहीं जाता। बिल्कुल नहीं पढ़ाया जाता। बिल्कुल नहीं पढ़ाया जाता। हम पिछले अब मैं आपको एक प्रैक्टिकल एग्जांपल बताता हूं। हम 200 साल पहले या 250 साल पहले लोग मिट्टी से नहाते थे। साबुन नहीं होते थे उस टाइम

98:18

Speaker A

पे। हां। मिट्टी लेप करके नहाते थे। हां। बर्तन भी मिट्टी से ही मांझते थे। मतलब धोते थे। राख से धोते थे। आज धोते हो क्या आप?

98:27

Speaker A

बट पहले तो धोते थे। हां। पुन उस टाइम में जब फैसिलिटी सही बात है। तो जो साइंस है, साइंस का डेवलपमेंट ऐसे ही तो होता है। उस टाइम पे जो अवेलेबल रिसोर्सेज थे उसी के हिसाब से लोग इलाज और

98:36

Speaker A

ट्रीटमेंट करते हम पेड़ पौधों से, पत्तों से, जानवरों की स्किन से, उनके नाखून से, आयुर्वेद में तो सींग से भी दवाई बनती है। हां। श्रृंग भस्म जो है सबसे अच्छी फेफड़ों की मेडिसिन है। श्रृंग भस्म। अब तो बैन कर दी

98:49

Speaker A

है। एलीफेंट के टीथ से मेडिसिन बनती है। थी। अब बंद कर दी। हस्ती भस्म बोलते हैं उसको जो कि आपके हेयर को उगाने में बहुत ज्यादा मदद करती थी। बेसिकली। राइट?

98:58

Speaker A

आप समझ रहे ऐसी चीजें हैं कि मतलब इन सब चीजों से बेसिकली मेडिसिन सब में मेडिसिन प्रॉपर्टी इस पृथ्वी पे कोई भी चीज़ ऐसी नहीं है जैसे मेडिसिन प्रॉपर्टी ना हो। अच्छा टॉक्सिन भी हो सकता है। बट इफ यू नो हाउ टू रिमूव द टॉक्सिन देन

99:12

Speaker A

यू कैन मेक अ मेडिसिन आउट ऑफ इट। राइट? बट इफ यू डोंट नो दैट तो यू कांट डू इट। बट अगर आपको नहीं पता आयुर्वेद के बारे में। सो डोंट मैं तो ये बोलूंगा कि भ डोंट ओपन योर माउथ एंड स्प्रेड दिस इट।

99:25

Speaker A

क्योंकि इसमें एक और कंट्रोवरर्शियल है कि सेक्सुअल इंटेलिजेंस ऑफ ओल्ड मैन विद यंग गर्ल मेक्स हिम यंगर व्हाइल सेक्स ऑफ़ यंग मैन विद ओल्डर लेडी मेक्स हिम एज एन ओल्ड। अब देखो कितना इसमें गलत वो मतलब ये तो ऐसा लग रहा है कि जैसे

99:38

Speaker A

भाव देखो श्लोक का ना एक होता है वर्ड का मीनिंग हम एक होता है कॉन्टेक्स्ट कॉन्टेक्स्ट हां अब देखो कितना ब्यूटीफुली चरक ने ये श्लोक को लिखा कि ओल्ड मैन व्हेन इंडल्जस विद यंग वुमेन वुमेन देन ही फील्स यंग

99:56

Speaker A

हम अब इसमें आप सोचिए कि जो वो ओल्ड वुमेन है उसका कॉन्टेस्ट क्या है ओल्ड वुमेन मतलब के वो आज भी अपने आपको वैसा माने कि कोई भी जो यंग जो यंग वूमेन का मतलब क्या है?

100:08

Speaker A

वो आज भी अपने को वैसा समझे वैसा माने कि यंग वूमन भी उसको पसंद करे बेसिकली यू नो उसके विगर को उसके स्टैमिना को उतनी स्ट्रेंथ जैसे अपना आप ये देखते हैं इसको क्या बोलते हैं अरे एक हीरो है ना क्या

100:20

Speaker A

नाम है उसका मिलन सुमन उसको आयरन मैन आज भी बोलते हैं इतनी उम्र में कितना फिट रहता है बेसिकली हां सही बात है सो कहने का मतलब है कि आपको आज भी वैसे ही जैसे आप बन ठनते थे यंग लड़कियों के लिए

100:30

Speaker A

जब आप छोटे थे आज भी आपको वैसे ही बनना ठनना है उतनी एक्सरसाइज करनी है उतनी आइब्स निकाल के रखनी है ताकि आप हेल्दी रहो ओजस बड़ा होना चाहिए ओजस बढ़ा होना होना चाहिए। हां। और और यंग को क्यों बोला गया है ओल्ड के साथ?

100:41

Speaker A

आप यह भी कंपैरिजन सुन लो। एक यंग लड़का है। ठीक है? अब वो इतना डिप्रेशन इतना उसमें चला गया कि उसको ये लग रहा है कि बेसिकली के तो जो मेरे को तो कोई ऐसी मिलेगी जो मतलब यू नो यंग नहीं है

100:52

Speaker A

या ऐसा कुछ नहीं है। वो यंग है होते हुए अपने विचारों से ओल्ड हो गया। हम हां तो ये बेसिकली वही है कहने का मतलब कॉन्टेस्ट। ये है उसका। कहने का मतलब ये है। कॉन्टेस्ट ये है बेसिकली। समझो। कॉन्टेस्ट यह है कि ओल्ड

101:05

Speaker A

रहते हुए भी यंग रहना जो बोलते हैं ना कि बूढ़े शरीर में भी एक जवान दिल है हम और ऐसा भी हो सकता है कि एक जवान शरीर के अंदर एक बूढ़ा दिल है होता ही है वो तो होता ही है राइट

101:15

Speaker A

तो ये वही मतलब है इसको समझाने का अब इसको आप कैसे ही तोड़ दो मोड़ दो दैट इज द कॉन्टेस्ट ऐसे ही हमारे भगवत गीता के जो श्लोक हैं एक आप वर्ड मीनिंग समझोगे एक ऐसा कॉन्ट बहुत कुछ होता है ऑफ कोर्स

101:24

Speaker A

हां अब पीछे के मीनिंग्स तो बहुत होते हैं। पीछे के मीनिंग्स बहुत होते हैं। तो उस टाइम पे भी क्या होता था? लेमैन को समझाने के लिए लोग ऐसे हां लिखते थे बेसिकली तो बट वो वो तो गुरु जब सिखाता है कि

101:35

Speaker A

वही इसलिए ट्रांसफर होता है ना गुरु से शिष्य आ गया और वो संस्कृत में ट्रांसफर होता था वो ऐसे लैंग्वेज में नहीं ट्रांसफर होता था इंग्लिश में कि इंग्लिश में आपने लिख दिया कुछ भी अब जैसे एक इनका लिवर डॉग का मैं

101:44

Speaker A

एक डॉक्यूमेंट और देख रहा था उसमें उन्होंने लिखा हुआ है और बोल रहे हैं कि बीएएमएस की सिलेबस की बुक है उसमें लिखा हुआ है स्टेरॉइड्स देना है इतना ये देना है उतना और ऐसा-सा करना है ये करना है वो

101:53

Speaker A

करना है आप एक बात बताइए आयुर्वेद लिखा गया है 2000 3000 साल पहले या 5000 साल पहले उस टाइम पे स्टेरॉइड्स नहीं कहां से आया टेक्स्ट के अंदर?

102:01

Speaker A

हां मैंने खुद पढ़ा है। मैंने तो कभी किसी टेस्ट में एलोपैथी मेडिसिन का सुना ही नहीं एक्चुअली। हम हां स्टेरॉइड क्यों होगा आयुर्वेद में?

102:07

Speaker A

स्टेरॉयड है ही नहीं आयुर्वेद के अंदर कि पहले स्टेरॉइड दो फिर ये दो फिर ये दो। ऐसा तो कोई है ही नहीं। तो मतलब पता नहीं कौन से राइटर्स की ये बुक है। आई डोंट नो। और दूसरा मैं बताना

102:16

Speaker A

चाहूंगा बीएएमएस और एमबीएस को कंपेयर करूंगा जो हमारी पढ़ाई होती है ना ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट फर्स्ट थ्री इयर्स सेम होती है। वही बॉडी एनाटॉमी हमें पढ़ाई जाती है। वही बॉडी एनाटमी नहीं पढ़ाई। तो बॉडी है सेम बॉडी है। अब आपका दिल और उनका दिल अलग

102:29

Speaker A

थोड़ी है। एक सेम ही तो जगह है। बेसिकली आप समझो। टर्मिनोलॉजी हमारी होती है हम। ठीक है? कि शरीर में कहां पे कौन सा प्रोसेस कैसे चल रहा है। और सब चीजें कोरिलेट करती हैं। या कि ब्लड कैसे श्रोता चैनल्स जो हमारी

102:44

Speaker A

धमनियां जिसको हम वेसल्स बोलते हैं। उसके बारे में सब कुछ हार्ट के बारे में, लिवर के बारे में, किडनी के बारे में, यकृत प्लीहा, लिवर, स्प्लीन, वृक हो गया, किडनी हृदय हो गया। ठीक है? है और काश श्वास आपका फेफड़े हो गए बेसिकली मस्तिष्क

102:58

Speaker A

माइंड को अलग लेवल पे हमारे यहां पे तो शरीर को बेसिकली एक तो सूक्ष्म ऐसे देखा गया है कि पृथ्वी मतलब साक्षात शरीर फिर एक शरीर का एस्ट्रल पार्ट भी देखा जाता है बेसिकली हां हां एस्ट्रल बॉडी एस्ट्रल बॉडी भी

103:10

Speaker A

देखी जाती है बेसिकली हमें मतलब हमें भाव इमोशंस ये भी सिखाए जाते हैं कि हमारे गुरु जी बोलते थे कि जब तक आप पेशेंट के दिमाग में नहीं जा गए जब तक आप उसको ठीक ही नहीं कर सकते द मोमेंट जब तक आप

103:21

Speaker A

अंडरस्टैंड नहीं करोगे कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है उसके इमोशन को आप कंट्रोल नहीं करोगे करता है आप उसको ठीक ही नहीं कर सकते एक से उतनी मेहनत हम करते हैं उतनी मेहनत वो करते हैं ठीक है जो

103:30

Speaker A

ऑब्सोल्यूट टेक्स्ट है जो पुराने जमाने में जिस टाइम पे फैसिलिटी जब जो फॉलो होता था वो तो हमारे यहां पे भी नहीं पढ़ा था कि वो छोड़ चुके हैं सब हम तो आज तो फैसिलिटीज हैं या राइट आज हम भी स्टेथोस्कोप यूज़ करते हैं।

103:43

Speaker A

हम भी थर्मामीटर यूज़ करते हैं। हां। उसमें एलोपैथी डॉक्टर का थोड़ी ना वो है। क्या कहते हैं? हक। हां। क्योंकि दैट इज इन्वेंशन ऑफ़ मॉडर्न साइंस। साइंस इंजीनियर्स ने बनाया है। बनाई है वो चीजें सारी। हम उसको तो हम भी यूज़ कर सकते हैं। मेरी फाइट

103:55

Speaker A

हो रही थी ऐसी किसी डॉक्टर से तो वो बोलता है कि तुम हमारे डिवाइसेस यूज़ करते हो। हमारी डिवाइस क्या होता है?

104:00

Speaker A

हमारी डिवाइस क्या होता है? मैंने कहा हमारी डिवाइस क्या होता है? मैंने कहा क्या ईसी ईसीजी मशीन तूने बनाई है?

104:05

Speaker A

हम मैंने कहा स्टेथोस्कोप तूने बनाया है। थर्मामीटर तूने बनाया है। एमआरआई मशीन तूने बनाई है। मैंने कहा साइंटिस्टों ने इंजीनियर्स ने सालों साल मेहनत करके उसको बनाया है। हां मतलब तो सही। तुमने मेडिसिन पढ़ी है। मेडिसिन प्रिस्क्राइब करना सीखा है और बॉडी को

104:20

Speaker A

समझना सीखा है। वही हमने सीखा है। हां। सो एनी डॉक्टर कैन यूज़ दोज़ डिवाइसेस एंड दोज़ टर्मिनोलॉजी आल्सो मैं तो टर्म्स यूज़ करता हूं। आई कंपेयर यू नो के पार्किंसन है जैसे पार्किंसन में अब पार्किंसन वर्ड दिया गया उसका है। हमारे

104:35

Speaker A

यहां पे कंपावाता बोलते हैं। पार्किंसन को आयुर्वेद से समझाता हूं। कौन सा दोष इमंबैलेंस हुआ? कैसे हुआ? सो जब तक आप मॉडर्न पर्सपेक्टिव नहीं दोगे पेशेंट को जब तक वो समझेगा नहीं एक्चुअली उसको। हम सही बात है। तो यही है।

104:44

Speaker A

राइट। ठीक है सर। थैंक यू सो मच। अगेन बहुत बढ़िया एपिसोड। मजा भी आया लास्ट क्लास में। हा हा

Topics: कुंभक क्रिया योग आयुर्वेद सेल्फ हीलिंग माइटोकांड्रिया ATP माइटोफेजी प्राणायाम हाइपोक्सिया एंटी-एजिंग

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