**क्या पहाड़ गायब होंगे? Aravalli Hills पर क्या फैसला Rajasthan, Haryana, Delhi में मुसीबत ला सकता है? — Transcript & SRT | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/aravalli-hills-raj-transcript/

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## Questions about this video

अरावली पर्वत श्रृंखला को अब किस खतरे का सामना करना पड़ रहा है?

अरावली पर्वत श्रृंखला अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसकी नई परिभाषा तय की है। इस नई परिभाषा के तहत 100 मीटर से कम ऊंचे पहाड़ों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा, जिससे इसके 90% से अधिक हिस्से को कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी।

अरावली की नई परिभाषा किसने और कब तय की?

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन सीजीआई बीआर गवई, जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजरिया की बेंच ने अरावली की नई परिभाषा तय की। यह फैसला सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (CEC) की उस परिभाषा को मान्यता देता है जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचे पहाड़ों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

अरावली की नई परिभाषा का आधार क्या था और इसका मूल संबंध किससे था?

अरावली की नई परिभाषा का आधार तमिलनाडु के एक जमींदार टीएन गोदावरमन द्वारा 1995 में दायर की गई एक याचिका थी। यह याचिका मूल रूप से नीलगिरी के जंगलों की सुरक्षा और वहां हो रही पेड़ों की कटाई के खिलाफ थी, न कि सीधे अरावली से संबंधित थी।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

एक पहाड़ जो भारत भारतीय उपमहाद्वीप से भी ज्यादा पुराना है।

00:08

Speaker A

एक पहाड़ जिसने असल में इस भूभाग का भूगोल और मौसम तय किया।

00:14

Speaker A

एक पहाड़ जिसने गंगा-जमुना के मैदानों को रेगिस्तान में तब्दील हो जाने से रोका।

00:18

Speaker A

वो अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर है।

00:24

Speaker A

बात कर रहे हैं अरावली पहाड़ी श्रृंखला की जो इस वक्त खतरे में पड़ती नजर आ रही है।

00:27

Speaker A

इस वीडियो में आपको इसी अरावली की कहानी सुनाएंगे कि कैसे तमिलनाडु के एक जमींदार टीएन गोदावरमन की याचिका के आधार पर अरावली के मुस्तकबिल का फैसला सुना दिया गया।

00:36

Speaker A

कैसे अदालत के एक फैसले ने देश के सबसे उम्रदराज पहाड़ के अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया।

00:52

Speaker A

सुनाएंगे कहानी उस अरावली की जिसे एक तरफ सरकार बचाने के दावे कर रही है और दूसरी तरफ उसकी सिलसिलेवार हत्या के फरमान जारी हो रहे हैं।

00:56

Speaker A

नमस्ते मेरा नाम है सौरभ त्रिपाठी और आप देख रहे हैं न्यूज़ पिंच।

00:59

Speaker A

20 नवंबर 2025 सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में तत्कालीन सीजीआई बीआर गवई।

01:05

Speaker A

जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजरिया की बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

01:10

Speaker A

इशू रिलेटिंग टू डेफिनेशन ऑफ अरावली हिल्स एंड रेंजेस नाम से जारी निर्देश में अरावली की नई परिभाषा गढ़ी गई।

01:18

Speaker A

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी या सीईसी की उस परिभाषा को मान्यता दे दी जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचे पहाड़ों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

01:27

Speaker A

यह अपने आप में कितनी बड़ी उलटबासी है कि जो अरावली इंसान के पैदा होने के पहले से धरती पर मौजूद थी।

01:34

Speaker A

उसको इंसानों के हाथ परिभाषित होना पड़ रहा है।

01:38

Speaker A

अरावली देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है।

01:40

Speaker A

आज से 3.2-3.5 अरब साल पहले जब इंडियन टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट से अलग हो रही थी।

01:48

Speaker A

तब यह पर्वत श्रृंखला अस्तित्व में आई थी।

01:51

Speaker A

भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पहले जीवन के अंकुर इसी पर्वतमाला पर फूटे।

01:57

Speaker A

लेकिन अब अरावली की परिभाषा बदल दी गई है।

02:00

Speaker A

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक अरावली में कुल 12081 पहाड़ थे।

02:06

Speaker A

इसमें से महज 1048 ही 100 फीट के नए बेंचमार्क को पार कर पाएंगे।

02:13

Speaker A

मतलब अरावली की पर्वतमाला का 90% से ज्यादा हिस्सा अब अरावली नहीं माना जाएगा।

02:17

Speaker A

कानूनी तौर पर अरावली को मिला प्रोटेक्शन अब इन हिस्सों पर लागू नहीं होगा।

02:22

Speaker A

कमाल की बात यह है कि जिस पिटीशन में अरावली की नई परिभाषा तय की गई।

02:28

Speaker A

उसका अरावली से कोई सीधा लेना-देना था ही नहीं।

02:31

Speaker A

30 साल पुराना यह मुकदमा दरअसल नीलगिरी के जंगलों की हिफाजत को लेकर हुआ था।

02:36

Speaker A

उसी पर ले चलते हैं आपको।

02:37

Speaker A

साल 1995 तमिलनाडु के थिरुमुल पद के रहने वाले एक जमींदार टीएन गोदावरमन ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के खिलाफ एक सिविल पिटीशन दायर की।

02:46

Speaker A

गोदावरमन का कहना था कि नीलगिरी के इलाके में मौजूद जंगल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है, जिनका इस्तेमाल गैर-वन कामों में होता है।

02:55

Speaker A

यह वन संरक्षण एक्ट 1980 का उल्लंघन है।

02:57

Speaker A

12 दिसंबर 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया।

03:03

Speaker A

और कहा कि कौन सी जमीन जंगल और कौन सी नहीं, यह सरकार के नोटिफिकेशन से तय नहीं होगा।

03:10

Speaker A

सामान्य या डिक्शनरी के अर्थ में जो जगह जंगल है उसे कानूनी तौर पर जंगल माना जाएगा।

03:17

Speaker A

और उसके संरक्षण के लिए एफसीए 1980 लागू होगा।

03:20

Speaker A

यह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बड़ी जीत थी।

03:23

Speaker A

लेकिन फैसला सुनाने के बाद भी कोर्ट ने इस केस को खुला रखा।

03:29

Speaker A

इसमें अंतरिम अपील के आधार पर देश के अन्य वन क्षेत्रों पर अपने फैसले देने जारी रखे।

03:34

Speaker A

31 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात सरकार की अंतरिम अपील के आधार पर एक सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी बनाने के निर्देश दिए।

03:43

Speaker A

इस कमेटी को काम दिया गया कि वह अरावली और उससे जुड़े वन्य क्षेत्र की परिभाषा तय करें।

03:49

Speaker A

मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यह काम मल्टी एजेंसी कमेटी को सौंप दिया।

03:56

Speaker A

ताकि हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात में अरावली की एक यूनिफॉर्म परिभाषा लागू की जा सके।

04:02

Speaker A

इस कमेटी के सदस्य कौन-कौन थे वो भी देख लीजिए।

04:04

Speaker A

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) के सचिव - समिति के अध्यक्ष।

04:09

Speaker A

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के वन विभाग के सचिव।

04:13

Speaker A

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) के महानिदेशक या प्रतिनिधि।

04:17

Speaker A

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) का प्रतिनिधि।

04:20

Speaker A

सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (CEC) का प्रतिनिधि।

04:22

Speaker A

इसके अलावा एक टेक्निकल समिति भी बनाई गई।

04:26

Speaker A

इस समिति को अरावली की परिभाषा तय करने के तकनीकी पैमाने तय करने थे।

04:30

Speaker A

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया एफएसआई के महानिदेशक के नेतृत्व में बनने वाली इस कमेटी में।

04:35

Speaker A

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जीएसआई और सर्वे ऑफ इंडिया एसओआई के एक-एक प्रतिनिधि को भी रखा गया था।

04:40

Speaker A

2010 में एफएसआई ने अरावली का सर्वेक्षण किया था।

04:44

Speaker A

इस रिपोर्ट में उन्होंने 3 डिग्री ढलान और 20 मीटर की ऊंचाई तक की जमीन को पहाड़ माना था।

04:49

Speaker A

एफएसआई ने अपनी रिपोर्ट में पहाड़ के आसपास 100 मीटर के दायरे।

04:53

Speaker A

और दो पहाड़ों के बीच 500 मीटर के दायरे को संरक्षित क्षेत्र मानने का सुझाव दिया था।

04:58

Speaker A

नई बनी टेक्निकल कमेटी ने इस पैमाने को थोड़ा सा बदला।

05:02

Speaker A

2024 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में टेक्निकल कमेटी ने ढलान के कोण को 3 डिग्री से बदलकर 4.57 डिग्री कर दिया।

05:08

Speaker A

पहाड़ की ऊंचाई को 20 मीटर से बढ़ाकर 30 मीटर कर दिया।

05:11

Speaker A

इस बदलाव के चलते अरावली का 60% हिस्सा संरक्षित क्षेत्र से बाहर हो गया।

05:16

Speaker A

लेकिन मल्टी एजेंसी कमेटी ने एफएसआई के सुझाव को भी मानने से इंकार कर दिया।

05:21

Speaker A

मल्टी एजेंसी कमेटी ने नए पैमाने बनाए जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

05:28

Speaker A

इसके चलते अरावली का 90% हिस्सा संरक्षित क्षेत्र से बाहर हो गया।

05:33

Speaker A

मल्टी एजेंसी कमेटी की इस एक परिभाषा ने अरावली की परिस्थिति के तंत्र का व्याकरण बदलकर रख दिया।

05:40

Speaker A

लेकिन यहां एक सवाल यह उठ रहा है कि अरावली की बदली परिभाषा पर इतना हंगामा क्यों हो रहा है?

05:45

Speaker A

इसका जवाब हमें एफएसआई के 2010 के सर्वे में मिलता है।

05:49

Speaker A

इस सर्वे के मुताबिक अरावली में राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर 3200 जगहों पर अवैध खनन हो रहा था।

05:57

Speaker A

राजस्थान की 128 में से 31 पहाड़ियां खोदकर समतल कर दी गई थी।

06:02

Speaker A

नक्शे पर उनका नामोनिशान मिट गया था।

06:05

Speaker A

अरावली में अवैध खनन एक बड़ी समस्या है।

06:09

Speaker A

1975 से 2019 के बीच अरावली का 8% हिस्सा नक्शे से गायब हो गया था।

06:14

Speaker A

इसके चलते हरियाणा का 3.6 लाख हेक्टेयर हिस्सा रेगिस्तान में तब्दील हो गया।

06:20

Speaker A

3.6 लाख हेक्टेयर हिस्सा रेगिस्तान में तब्दील हो गया।

06:25

Speaker A

यह राज्य के कुल क्षेत्रफल का 8% था।

06:29

Speaker A

सुप्रीम कोर्ट में दायर 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के फिरोजपुर झिरका में 85.8 मीट्रिक टन पत्थर का अवैध खनन हुआ था।

06:35

Speaker A

यह पत्थर मिट्टी की शक्ल में निर्माण कार्य में खप गए।

06:40

Speaker A

लेकिन अरावली में अवैध खनन को लेकर सरकार कितना गंभीर है।

06:46

Speaker A

इसे समझने के लिए आपको फरीदाबाद के गांव राजावासी कहानी समझनी पड़ेगी।

06:52

Speaker A

20 जुलाई 2023 हरियाणा के वन विभाग ने अरावली के 506 एकड़ इलाके को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया।

06:59

Speaker A

यह ग्रेट निकोबार स्वैप प्रोग्राम के तहत किया जा रहा था।

07:04

Speaker A

बाद में इसको भी बताएंगे।

07:05

Speaker A

यह ग्रेट निकोबार स्वैप क्या है?

07:07

Speaker A

साल 2021 में ग्रेट निकोबार में 910 वर्ग किलोमीटर की वन भूमि पर अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल।

07:15

Speaker A

आईसीटीटी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, टाउनशिप बिजली संयंत्र और नौसेना सुविधाएं बनाने का प्रस्ताव था।

07:20

Speaker A

यहां हुए वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में वन क्षेत्र बनाए जाने थे।

07:27

Speaker A

इसे ग्रेट निकोबार स्वैप नाम दिया गया था।

07:30

Speaker A

हरियाणा में फरीदाबाद के राजावास गांव में खसरा नंबर 91 से 125 तक के इलाके को नोटिफिकेशन निकालकर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया गया इसी के तहत।

07:39

Speaker A

लेकिन हास्यास्पद बात यह है कि ठीक इसी दिन हरियाणा का माइनिंग विभाग इस संरक्षित वन क्षेत्र की 119.5 एकड़ जमीन पर पत्थर खदान के लिए ऑनलाइन नीलामी करवा रही थी।

07:48

Speaker A

मतलब एक तरफ जिस जमीन को सरकार वन क्षेत्र घोषित कर रही थी।

07:55

Speaker A

दूसरी तरफ उसी जमीन पर खनन के पट्टे बांट रही थी।

07:59

Speaker A

सब जानते हैं खनन सरकारों के लिए बड़ी आमदनी का हिस्सा है।

08:02

Speaker A

हर साल राजस्थान सरकार अरावली में खनन की लीज और रॉयल्टी के जरिए 5000 करोड़ की आमदनी करती है।

08:08

Speaker A

अवैध खनन के जरिए तो जो कमाई होती है वह तो किसी कागज में है ही नहीं।

08:12

Speaker A

बेहिसाब दौलत है।

08:13

Speaker A

और आरोप तो ऐसे भी लगते हैं कि सरकारों के पास भी काफी कुछ जाता है।

08:20

Speaker A

उनके भी वारे-न्यारे होते हैं।

08:22

Speaker A

नेताओं के वारे-न्यारे भी होते हैं।

08:23

Speaker A

ऐसे में सरकार अक्सर अवैध खनन की तरफ आंखें मूंद लेती है।

08:31

Speaker A

तो अब इसी अवैध खनन को कानूनी जामा पहनाया जाएगा।

08:34

Speaker A

20 नवंबर 2025 को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिए हैं।

08:42

Speaker A

कि वह इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन आईसीएफआरई के जरिए एक वैज्ञानिक अध्ययन करवाएं।

08:50

Speaker A

ताकि सारंडा की तरह अरावली में भी एक सस्टेनेबल माइनिंग का रोड मैप तैयार हो सके।

08:55

Speaker A

सस्टेनेबल माइनिंग का रोड मैप।

08:57

Speaker A

यह साफ संकेत है कि अरावली में अब नए सिरे से खनन की शुरुआत होगी।

09:03

Speaker A

माने अब तक जो अवैध खनन दबे-छुपे चलता था उसके लिए बाकायदा सरकारी पट्टे बांटे जाएंगे।

09:09

Speaker A

2010 के आसपास अरावली के पास वृक्षारोपण करके एक ग्रीन फील्ड वॉल खड़ी करने का प्रस्ताव भी बना था।

09:14

Speaker A

लेकिन ग्रीन वॉल बनना तो दूर एक कानूनी परिभाषा के चलते अरावली खुद को बचाने में नाकामयाब होती दिख रही है।

09:21

Speaker A

अरावली का खत्म होना उत्तर भारत के बड़े हिस्से के।

09:24

Speaker A

परिस्थिति के तंत्र यानी इकोसिस्टम को बिगाड़ कर रख देगा।

09:30

Speaker A

अरावली इतने सालों से थार के रेगिस्तान को पूरब की तरफ बढ़ने से रोकती रही।

09:36

Speaker A

यह पश्चिमी भारत की हीट वेव को उत्तर भारत के शेष हिस्सों में घुसने से रोकती है।

09:42

Speaker A

चंबल, साबरमती, लूनी, बनास सहित एक दर्जन से ज्यादा नदियां इस पर्वतमाला से निकलती हैं।

09:49

Speaker A

सरिस्का, रणथंभौर, मुकुंदरा और कैलादेवी टाइगर रिजर्व इसी पर्वतमाला का हिस्सा है।

09:55

Speaker A

इसके अलावा फुलवारी की नाल, सीतामाता, माउंट आबू, कुंभलगढ़, नाहरगढ़।

10:01

Speaker A

सहित 15 वन्यजीव अभ्यारण और 10 इकोसेंसिटिव जोन भी अरावली का हिस्सा है।

10:06

Speaker A

अरावली लेपर्ड, टाइगर, भालू सहित कई सारी एंडेंजर्ड प्रजातियों का घर भी है।

10:11

Speaker A

इसके साथ-साथ यह एक और इंसान का भी घर है जो फिलहाल अरावली का भाग्य विधाता है।

10:17

Speaker A

भूपेंद्र यादव देश के पर्यावरण मंत्री।

10:20

Speaker A

भूपेंद्र यादव अरावली के बेटे हैं उनकी पैदाइश और पढ़ाई अजमेर में हुई है जो कि अरावली की गोद में बसा हुआ है।

10:28

Speaker A

तारागढ़ से लेकर नाग पहाड़ तक भूपेंद्र यादव ने अपने कॉलेज के दौर में यह सारा इलाका अपने पैरों से नापा होगा।

10:34

Speaker A

फिलहाल वह अलवर के सांसद हैं जहां अरावली सबसे ज्यादा अवैध खनन का शिकार हो रही है।

10:40

Speaker A

ऐसे आरोप लगते हैं।

10:41

Speaker A

यह कमाल की बात है कि अरावली की नई परिभाषा उनका ही महकमा तय कर रहा है।

10:49

Speaker A

उनके ही नेतृत्व में अरावली की सिलसिलेवार हत्या की योजना बन रही है।

10:53

Speaker A

उम्मीद करते हैं हमारा यह वीडियो भूपेंद्र यादव तक पहुंचेगा।

10:58

Speaker A

वह अरावली की इस नई परिभाषा पर पुनर्विचार हेतु पहल करेंगे।

11:03

Speaker A

लोगों के मन में अरावली मिटने की जो आशंकाएं हैं उन पर जवाब देने जनता के सामने आएंगे।

11:09

Speaker A

किसी ठोस रणनीति के साथ।

11:11

Speaker A

अब जो अरावली को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं वह अगर सही साबित होती हैं तो इसका हमारे आपके ऊपर क्या असर होगा?

11:18

Speaker A

इसके बारे में हमने बात की है हमारे साथी हैं एक मित्र हैं माधव शर्मा।

11:23

Speaker A

जो कि एनवायरमेंट जर्नलिस्ट हैं पर्यावरण से जुड़े मामले कवर करते रहते हैं।

11:28

Speaker A

उनको सुनिए और समझिए।

11:30

Speaker B

तो दुनिया की सबसे पुरानी पहाड़ियों में से एक अरावली और भारत की सबसे पुरानी पहाड़ अरावली के खत्म होने का।

11:38

Speaker B

एक बड़ा जो है संकट पैदा हो गया है सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से।

11:44

Speaker B

और कमाल की बात यह है कि इस देश की राष्ट्रपति जिस जगह पर रहती हैं वह भी एक अरावली की चोटी हुआ करती थी।

11:53

Speaker B

और करीब 18-20 मीटर की वह चोटी थी।

11:56

Speaker B

और यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि भारत की तकदीर के जो फैसले होते हैं वह उन्हीं सब जगहों से।

12:04

Speaker B

वहीं संसद है, वहीं इंडिया गेट है, वहीं सब लुटियन जोन जो पूरा कहते हैं वहां से यह सब चीजें निकल कर आती हैं।

12:10

Speaker B

फैसले आते हैं तो अरावली को लेकर के जो डिसीजन आया है राजस्थान पर इसका बहुत बड़ा इंपैक्ट आने वाला है।

12:17

Speaker B

क्योंकि अरावली का 80% हिस्सा राजस्थान में पड़ता है जो पूरी दिल्ली से होते हुए राजस्थान और फिर गुजरात तक अरावली जाती है।

12:28

Speaker B

तो राजस्थान में करीब अरावली का 80% हिस्सा आता है और अरावली की जो एवरेज ऊंचाई है सबसे बड़ी चोटी जो है करीब 1722 मीटर जो माउंट आबू में है।

12:39

Speaker B

लेकिन एवरेज चोटियां जो है इसकी हाइट जो है वह राजस्थान में 80 मीटर तक 80 से 90 मीटर तक 60 से 80 मीटर यह इसकी एवरेज हाइट है अरावली की पूरे राजस्थान में।

12:49

Speaker B

तो सबसे बड़ा संकट राजस्थान में है।

12:51

Speaker B

अब आते हैं इसके जो पर्यावरणीय जो एक खतरा हमें जो महसूस हो रहा है।

12:57

Speaker B

वह यह कि अरावली एक तरह से शील्ड का काम करती है डेजर्ट और बाकी राजस्थान को।

13:03

Speaker B

पूरे देश को बांटते हुए दिल्ली तक डेजर्टिफिकेशन को रोकती अरावली।

13:09

Speaker B

बारिश का पैटर्न जो है वह डिसाइड करती है।

13:12

Speaker B

तमाम जो नदियां हमारी निकली हैं गंभीरी नदी है, बनास है यह सब जो है ग्राउंड वाटर रिचार्ज अरावली की वजह से होता है।

13:20

Speaker B

हमारा राजस्थान में वैसे ही पानी की दिक्कत है लेकिन अरावली एक तरह से पानी का भी बड़ा सोर्स है।

13:26

Speaker B

इसके अलावा जो बायोडायवर्सिटी की बात कर रहे हैं फ्लोरा फोना तमाम हमारे वाइल्ड एनिमल्स को लेकर के जो एक संकट है।

13:32

Speaker B

वह इस फैसले की वजह से प्रभावित होगा और बहुत बड़ा खतरा है पूरे एक तरह से एक सभ्यता के खत्म होने का खतरा है।

13:40

Speaker B

मैं इसीलिए कह रहा हूं क्योंकि अरावली सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है दुनिया के।

13:46

Speaker B

और जहां-जहां पर्वत होते हैं जहां-जहां नदियां होती हैं वहां सभ्यताएं पनपती हैं आप सबको पता है।

13:52

Speaker B

यह जो बड़ा खतरा एक महसूस हो रहा है।

13:55

Speaker B

अब कमाल की बात यह है कि 2018 में मुझे एक जस्टिस मदन बी लोकुर थे।

14:02

Speaker B

उन्होंने कहा था राजस्थान में अवैध खनन को लेकर जो अरावली में हो रहा था कि 31 पहाड़ियां गायब हुई थी।

14:09

Speaker B

खनन हुआ था तो पूरी चोटियां जो है अरावली की खत्म हो गई थी।

14:14

Speaker B

तो मुझे वह वर्डिक्ट भी याद है उन्होंने सेंटेंस कहा था कि क्या हनुमान जी उठाकर ले गए उन पूरी पहाड़ियों को?

14:19

Speaker B

तो अब मैं कह रहा हूं कि वही सुप्रीम कोर्ट है जस्टिस जरूर बदल गए होंगे लेकिन क्या अब हम इंसानी लोग इंसानी जो खनन माफिया हैं।

14:28

Speaker B

उनको हम यह उनके हाथ में दे रहे हैं कि अरावली को आप खत्म कर दीजिए और जो हमारा पूरा बायोडायवर्सिटी एक पूरा जीवन उससे चल रहा है।

14:36

Speaker B

बहुत करोड़ों लोग उससे उसके लाइफलाइन में है अरावली की।

14:41

Speaker B

तो वह पूरा एक प्रभावित होगा।

14:43

Speaker B

यह बड़ा खतरा है मुझे लगता है कि इस पर जरूर संसद को सोचना चाहिए।

14:46

Speaker B

आम लोगों को सोचना चाहिए।

14:50

Speaker B

पश्चिमी राजस्थान जो डेजर्ट है वहां के लोगों से लेकर दिल्ली के लोगों तक को भी सोचना चाहिए।

14:59

Speaker B

क्योंकि एक्यूआई दिल्ली का जो एक्यूआई की हम बात करते हैं।

15:04

Speaker B

वह अरावली का बहुत बड़ा रोल है उसको कम करने को लेकर के।

15:08

Speaker B

दिल्ली में जो प्रदूषण है वह दिल्ली की वजह से है अगर अरावली उसमें अपना रोल अरावली के खत्म होने के बाद अगर डेजर्टिफिकेशन या जो हवाएं चलती हैं।

15:15

Speaker B

वह अगर शुरू हो जाए तो दिल्ली क्या पूरा एनसीआर और ऊपर का जो अरावली का भाग है।

15:20

Speaker B

वह रहने लायक ही नहीं बचेगा।

15:22

Speaker B

यह बहुत बड़ी चिंताएं हैं इन पर मुझे उम्मीद भी है और मैं मेरी डिमांड भी है।

15:27

Speaker B

हम सब जो पर्यावरण को लेकर के काम करने वाले लोग हैं कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए।

15:33

Speaker B

तुरंत ध्यान दिया जाए वरना हम लोग आमतौर पर जब रास्ते में निकलते हैं।

15:36

Speaker B

तो तमाम पहाड़ियां हैं मैं अभी खड़ा हूं यह पीछे मेरे विंध्याचल की पहाड़ियां हैं।

15:41

Speaker B

यहां इतना अवैध माइनिंग हो रहा है कि आप मतलब दुख होता है उन पहाड़ियों को देखकर के।

15:47

Speaker B

कि हम बचपन से देखते आ रहे थे वह सब अब खत्म हो रहा है।

15:49

Speaker B

तो यह छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं।

15:53

Speaker B

इसीलिए अरावली को बचाना बेहद जरूरी है।

15:56

Speaker B

इस फैसले को बदलना बहुत जरूरी है।

15:58

Speaker A

आपको न्यूज़ पिंच का यह वीडियो कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

16:02

Speaker A

इसे लिखा था इत्मीनान से हमारे साथी विनय सुल्तान ने।

16:07

Speaker A

कैमरे के पीछे से शूट किया है मोहित ने।

16:10

Speaker A

एडिट किया है अभय पटेल ने।

16:12

Speaker A

मेरा नाम है सौरभ त्रिपाठी।

16:14

Speaker A

देखते रहिए न्यूज़ पिंच।

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