**Animal Farm (Hindi/हिंदी में) — Transcript & Summary | SozAI**
Source: https://sozai.app/transcript/animal-farm-hindi/

Animal Farm की कहानी में जानवरों की गुलामी और बगावत की प्रेरक कथा हिंदी में प्रस्तुत की गई है।

## Key Takeaways

- जानवरों की गुलामी का मुख्य कारण इंसान है।
- मेहनत का फल जानवरों को नहीं मिलता, बल्कि इंसान उसे छीन लेता है।
- एकता और बगावत ही जानवरों की आज़ादी का रास्ता है।
- जानवरों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा।
- झूठे वादों और इंसानों की चालाकियों से सावधान रहना चाहिए।

## What the video covers

- मिस्टर जोंस के नशे में खेत पर नियंत्रण खोने का वर्णन।
- बूढ़े मेजर का सपना और जानवरों को इंसानों के खिलाफ बगावत के लिए प्रेरित करना।
- जानवरों की कठिन जिंदगी, मेहनत और इंसानों द्वारा शोषण।
- मेजर का इंसान को असली दुश्मन बताना और एकता की अपील।
- जानवरों के बीच विभिन्न प्रकार के पात्रों का परिचय।
- जानवरों की मेहनत का फल इंसान छीन लेता है, जिससे उनकी हालत खराब होती है।
- मेजर का बगावत का संदेश और जानवरों को एकजुट रहने की सलाह।
- जानवरों के बीच दोस्त और दुश्मन की पहचान पर चर्चा।
- जानवरों की जिंदगी में शोषण, मेहनत और अंततः आज़ादी की चाह।
- जानवरों की एकता और इंसानों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत।

## Chapters

1. 00:00 मिस्टर जोंस का नशा और जानवरों की तैयारी
2. 11:16 बूढ़े मेजर का सपना और बगावत का संदेश
3. 22:04 जानवरों की कठिनाइयाँ और इंसानों का शोषण
4. 33:23 जानवरों की मेहनत और फसल की सफलता
5. 44:30 जानवरों के बीच दोस्त और दुश्मन की पहचान
6. 55:38 जानवरों की एकता और इंसानों के खिलाफ लड़ाई
7. 66:45 नेपोलियन का उदय और सत्ता की लड़ाई
8. 77:52 जानवरों की आज़ादी की दिशा में संघर्ष

Answers

## Questions about this video

मेजर का सपना क्या था और उसका महत्व क्या है?

मेजर का सपना जानवरों को इंसानों के खिलाफ बगावत के लिए प्रेरित करता है। यह सपना जानवरों की गुलामी से मुक्ति और आज़ादी का प्रतीक है।

जानवरों की जिंदगी में सबसे बड़ी समस्या क्या है?

जानवरों की सबसे बड़ी समस्या इंसानों द्वारा उनका शोषण है, जो उनकी मेहनत का फल खुद ले लेते हैं और जानवरों को बस जीवित रहने के लिए थोड़ा खाना देते हैं।

जानवरों को बगावत के लिए क्या करना चाहिए?

जानवरों को एकजुट होकर इंसानों को खेत से हटाना चाहिए और अपनी मेहनत का पूरा फल खुद लेना चाहिए ताकि वे आज़ाद और खुशहाल जीवन जी सकें।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:02

Speaker A

पुराने खेत का मालिक मिस्टर जों्स उस रात बहुत नशे में था। उसने मुर्गियों के रहने की जगह तो बंद कर दी, पर शराब के नशे में वह उनकी छोटी खिड़कियां बंद करना भूल गया। उसके हाथ में लालटेन झूल रही थी और उसकी रोशनी यहां वहां नाच रही थी। वह लड़खड़ाते

00:23

Speaker A

हुए आंगन पार कर गया। पीछे के दरवाजे पर उसने अपने जूते उतारे। रसोई से शराब का आखिरी गिलास भरा। उसे गटका और ऊपर सोने चला गया। वहां उसकी पत्नी पहले से ही खर्राटे मार रही थी। जैसे ही मिस्टर जों्स के कमरे की बत्ती

00:42

Speaker A

बुझी, पूरे खेत में खलबली मच गई। दिन भर से सब जानवरों के बीच दबी जुबान में यह बात चल रही थी कि बूढ़े मेजर ने पिछली रात एक अजीब सपना देखा है। वह सबको यह बात बताना चाहता था। बूढ़ा मेजर एक बहुत ही खास और समझदार सूअर था। सब ने तय किया था कि जैसे

01:05

Speaker A

ही मालिक सो जाएगा, वे सब बड़े तबेले में मिलेंगे। खेत के सभी जानवर बूढ़े मेजर की बहुत इज्जत करते थे। उसकी बात सुनने के लिए वे अपनी नींद खराब करने को भी तैयार थे। तबेले के कोने में थोड़ी ऊंची जगह पर

01:22

Speaker A

बूढ़ा मेजर घास के बिस्तर पर बैठा था। ऊपर एक लालटेन लटक रही थी। वह 12 साल का हो चुका था और अब काफी मोटा हो गया था। उसके बड़े दांत थे। फिर भी वह देखने में बहुत नेक और भला आदमी जैसा लगता था। धीरे-धीरे बाकी जानवर भी वहां पहुंचने

01:43

Speaker A

लगे। सबसे पहले तीन कुत्ते आए। ब्लूबेल, जेस्सी और पिंचर। उनके पीछे बड़े सूअर आए और घास पर सबसे आगे बैठ गए। मुर्गियां खिड़कियों पर चढ़ गईं। कबूतर छज्जों पर जा बैठे और भेड़ गाय सूअरों के पीछे बैठ गईं। तभी दो बड़े घोड़े आए। बॉक्सर और क्लोवर। वे बहुत धीरे-धीरे कदम

02:10

Speaker A

रख रहे थे ताकि घास में छिपे किसी छोटे जानवर पर उनका भारी पैर ना पड़ जाए। क्लोवर एक ममता भरी घोड़ी थी। बॉक्सर बहुत ही ऊंचा और तगड़ा घोड़ा था। वह दो घोड़ों के बराबर अकेला ताकतवर था। उसकी नाक पर एक सफेद पट्टी थी जिससे वह थोड़ा कम अक्ल लगता

02:33

Speaker A

था। सच तो यह है कि वह बहुत दिमाग वाला नहीं था। पर वह बहुत मेहनती और पक्का इंसान था। इसलिए सब उसे बहुत मानते थे। घोड़ों के बाद सफेद बकरी म्यूरियल और गधा बेंजमिन आए। बेंजमिन पूरे खेत में सबसे बूढ़ा था और उसका मिजाज बहुत चिड़चिड़ा

02:54

Speaker A

था। वह बहुत कम बोलता था। जब बोलता तो कोई ना कोई कड़वी बात ही कहता। वह कहता था कि भगवान ने उससे मक्खियां उड़ाने के लिए पूछ तो दी हैं, पर अच्छा होता अगर ना पूछ होती और ना ही मक्खियां। वह कभी नहीं हंसता था। [संगीत] पूछने पर कहता है कि उसे हंसने

03:13

Speaker A

वाली कोई बात नहीं दिखती। वह ऊपर से तो कड़क था, पर मन ही मन बॉक्सर से बहुत प्यार करता था। वे दोनों अक्सर इतवार का दिन साथ बिताते थे, पर एक दूसरे से बिना कोई बात किए चुपचाप घास चरते रहते थे। दो घोड़े अभी बैठे ही थे कि बतख के

03:34

Speaker A

नन्हे बच्चे तबेले के अंदर आए। उनकी मां खो गई थी। वे धीरे-धीरे चूछ कर रहे थे और यहां वहां भटक रहे थे ताकि उन्हें ऐसी जगह मिल जाए जहां कोई उन्हें कुचल ना दे। क्लोवर ने अपने बड़े पैर पर उनके चारों तरफ दीवार जैसा बना दिया। बच्चे उसके पैर

03:54

Speaker A

के पास डुबक गए और फौरन सो गए। आखिरी समय में मौली नाम की सफेद घोड़ी आई। वह बहुत नखरेबाज और सुंदर थी। वह चीनी का टुकड़ा चबा रही थी और अपने गर्दन हिला हिलाकर अपने चोटी में बंधे लाल रिबन सबको दिखा रही थी ताकि सब उसे ही देखें।

04:18

Speaker A

सबसे बाद में बिल्ली आई। उसने हमेशा की तरह सबसे गर्म जगह ढूंढी और बॉक्सर और क्लोवर के बीच घुस कर बैठ गई। मेजर की बातों पर ध्यान देने के बजाय वह पूरे समय बस मजे में म्याऊं म्याऊं करती रही।

04:36

Speaker A

अब मोजेस नाम के पालतू कौवे को छोड़कर सब जानवर वहां आ चुके थे। कौवा दरवाजे के पीछे सोया हुआ था। जब मेजर ने देखा कि सब आराम से बैठ गए हैं और उसकी बात सुनने का इंतजार कर रहे हैं, तो उसने अपना गला साफ किया और बोलना शुरू किया।

04:57

Speaker A

मेरे साथियों, आपने मेरे कल रात के अजीब सपने के बारे में सुना होगा। पर सपने की बात मैं बाद में करूंगा। पहले एक जरूरी बात सुन लीजिए। मुझे नहीं लगता कि अब मैं आपके साथ बहुत दिनों तक रहूंगा। मरने से पहले मैं चाहता हूं कि जो कुछ मैंने अपनी

05:15

Speaker A

जिंदगी में सीखा है, वह आपको बता दूं। मैंने एक लंबी जिंदगी जी है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अपने तबेले में अकेले लेटे मैंने बहुत सोचा है। मुझे इस दुनिया की असलियत अच्छे से समझ आ गई है। देखिए साथियों, हमारी जिंदगी कैसी है?

05:34

Speaker A

सच तो यह है कि हमारी जिंदगी बहुत दुखी है। हमें बहुत खटकना पड़ता है और हम जल्दी मर जाते हैं। हम पैदा होते हैं। हमें बस इतना खाना दिया जाता है कि हम जिंदा रह सकें। हमसे तब तक काम लिया जाता है जब तक हमारे शरीर का

05:52

Speaker A

एक-एक कतरा निचोड़ ना लिया जाए। और जैसे ही हम किसी काम के नहीं रहते, हमें बड़ी बेरहमी से काट दिया जाता है। यहां किसी भी जानवर को एक साल का होने के बाद सुख या आराम नसीब नहीं होता। कोई भी जानवर आजाद नहीं है। हमारी जिंदगी सिर्फ

06:11

Speaker A

गुलामी और दुख है। यही साफ बात है। पर क्या ऐसा होना जरूरी है? क्या हमारी जमीन इतनी गरीब है कि वह हमें ठीक से खाना नहीं दे सकती? नहीं साथियों, कभी नहीं। हमारी मिट्टी बहुत उपजाऊ है। यहां का मौसम बहुत अच्छा है। यहां जितने जानवर अभी हैं,

06:33

Speaker A

उससे कहीं ज्यादा जानवर मजे से पेट भर खाना खा सकते हैं। हमारे इसी अकेले खेत में 101 घोड़े, 20 गाय और सैकड़ों भेड़े ठाट से रह सकती हैं। पर फिर भी हमारी हालत इतनी खराब क्यों है? क्योंकि हमारी मेहनत का सारा फल इंसान हमसे छीन लेता है।

06:52

Speaker A

बस यही हमारी सब मुसीबतों की जड़ है। वह जड़ है इंसान। इंसान ही हमारा असली दुश्मन है। बस इस इंसान को यहां से हटा दो। फिर हमारी भूख और कमर तोड़ काम की तकलीफ हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

07:10

Speaker A

इंसान अकेला ऐसा जीव है जो कुछ पैदा नहीं करता और सब कुछ चट कर जाता है। ना वह दूध देता है, ना अंडे देता है। वह इतना कमजोर है कि हल भी नहीं खींच सकता। वह खरगोश पकड़ने के लिए तेज दौड़ भी नहीं सकता। फिर भी वह हम सब जानवरों का राजा बना बैठा है।

07:29

Speaker A

वह हमसे हाड़तोड़ काम करवाता है। बदले में हमें बस इतना ही खाना देता है कि हमारी जान बची रहे। बाकी सारा माल वह खुद डकार जाता है। हमारी मेहनत से खेत जुते हैं। हमारे गोबर से मिट्टी में जान आती है। फिर भी हमारे पास अपनी खाल के अलावा कुछ नहीं

07:47

Speaker A

है। हे गायों, तुमने पिछले साल हजारों लीटर दूध दिया। वह कहां गया? वह दूध तुम्हारे बछड़ों को तगड़ा करने के काम आना चाहिए था। पर उसकी एक-एक बूंद हमारे दुश्मनों के गले में उतर गई। और मुर्गियों, तुमने पिछले साल कितने अंडे दिए? उनमें से

08:06

Speaker A

कितने चूजों ने आंखें खोलीं। बाकी सब तो बाजार में बिक गए ताकि जोंस और उसके आदमियों की जेब भर सके। और क्लोवर, तेरे वे चार बच्चे कहां हैं जो तेरे बुढ़ापे की लाठी बन थे? सबको एक साल का होते ही बेच दिया गया। अब तू उन्हें कभी दोबारा नहीं

08:24

Speaker A

देख पाएगी। इतनी मेहनत और बच्चे पालने के बदले तुझे क्या मिला? बस थोड़ा सा राशन और रहने की जगह। हमारी यह दुख भरी जिंदगी भी पूरी नहीं होने दी जाती। मैं अपनी शिकायत नहीं कर रहा। मैं तो खुशकिस्मत हूं। मैं 12 साल का

08:41

Speaker A

हूं और मेरे 400 से ज्यादा बच्चे हैं। पर सच तो यह है कि आखिर में कोई भी जानवर कसाई के चाकू से नहीं बच पाता। तुम छोटे सूअर जो मेरे सामने बैठे हो, एक साल के अंदर तुम सब चिल्लाते हुए कसाई के फट्टे पर दम तोड़ दोगे।

08:59

Speaker A

हम सबको इसी डरावनी मौत का सामना करना होगा। गाय, सूअर, मुर्गियां, भेड़ें सब। घोड़ों और कुत्तों की किस्मत भी कोई अच्छी नहीं है। बॉक्सर, जिस दिन तेरे शरीर की ताकत कम होगी, जोंस तुझे कसाई को बेच देगा। वह तेरा गला काट कर तुझे कुत्तों के

09:17

Speaker A

खाने के लिए उबाल देगा। और जब कुत्ते बूढ़े हो जाते हैं और उनके दांत गिर जाते हैं, तो जोंस उनके गले में ईंट बांधकर उन्हें पास के तालाब में डुबो देता है। तो साथियों, क्या यह साफ नहीं है कि हमारी सारी मुसीबतों की जड़ यह इंसान

09:35

Speaker A

ही है? बस इस इंसान को रास्ते से हटा दो तो हमारी मेहनत का फल हमारा होगा। हम रातोंरात अमीर और आजाद हो सकते हैं। तो हमें क्या करना चाहिए? हमें दिन रात एक करके इंसानों को भगाने के लिए काम करना होगा। मेरा तुम सबको यही पैगाम है, बगावत।

09:56

Speaker A

मुझे नहीं पता कि यह बगावत कब होगी। एक हफ्ते में या 100 साल में। पर मुझे पक्का यकीन है कि एक ना एक दिन इंसाफ जरूर होगा। अपनी आंखें इस पर टिकाए रखो और मेरी यह बात अपने बाद आने वालों को जरूर बताना ताकि वे तब तक लड़ते रहे जब तक जीत ना मिल

10:15

Speaker A

जाए। और याद रखना साथियों, अपना इरादा कभी मत बदलना। किसी की बातों में मत आना। अगर कोई कहे कि इंसान और जानवर एक ही हैं या इंसान का भला होने में ही हमारा भला है, तो समझ लेना वह अपना उल्लू सीधा करना चाहता है। यह सब झूठ है। इंसान सिर्फ अपने बारे

10:34

Speaker A

में सोचता है। हम जानवरों के बीच पक्की एकता होनी चाहिए। सब इंसान दुश्मन हैं। सब जानवर साथी। तभी वहां बड़ा शोर मच गया। जब मेजर बात कर रहा था तो चार बड़े चूहे अपने बिलों से बाहर निकल आए थे। वे पिछले पैरों पर बैठकर

10:56

Speaker A

उसकी बातें सुन रहे थे। कुत्तों की नजर अचानक उन पर पड़ गई। चूहों ने तेजी से बिलों की तरफ दौड़ लगाई। तब कहीं जाकर उनकी जान बची। मेजर ने अपना पैर उठाकर सबको चुप होने का इशारा किया। उसने कहा साथियों, एक बात का फैसला भी करना जरूरी

11:16

Speaker A

है। यह जो जंगली जीव हैं जैसे चूहे और खरगोश, क्या यह हमारे दोस्त हैं या दुश्मन?

11:22

Speaker A

चलो इस पर सबकी राय लेते हैं। मेरा सवाल यह है कि क्या चूहे हमारे साथी हैं? फौरन सबने अपनी राय दी। ज्यादातर जानवरों ने मान लिया कि चूहे हमारे साथी हैं। सिर्फ चार जानवरों ने मना किया। तीनों कुत्तों ने और बिल्ली ने।

11:42

Speaker A

बाद में पता चला कि बिल्ली ने तो दोनों तरफ हाथ उठा दिया था। वह एकदम थाली का बैंग...

12:00

Speaker A

पैरों पर चलता है, वह दुश्मन है। जिसके चार पैर हैं या जिसके पास पंख है, वह दोस्त है। और सुनो इंसान से लड़ते लड़ते कहीं तुम भी उसके जैसे मत बन जाना। जब तुम उसे हरा दोगे तभी उसकी बुरी आदतें मत अपनाना। कोई भी जानवर कभी घर में नहीं

12:18

Speaker A

रहेगा। कोई बिस्तर पर नहीं सोएगा। कोई कपड़े नहीं पहनेगा। कोई शराब नहीं पिएगा। कोई तंबाकू नहीं फूंकेगा। कोई पैसों को हाथ नहीं लगाएगा और ना ही लेनदेन करेगा। इंसान की हर आदत गंदी है और सबसे बड़ी बात कोई भी जानवर अपने जैसे दूसरे जानवर पर

12:37

Speaker A

डंडे का राज नहीं चलाएगा। कोई कमजोर हो या ताकतवर समझदार हो या सीधा साधा हम सब भाई हैं। कोई जानवर किसी दूसरे जानवर की जान नहीं लेगा। सब जानवर बराबर हैं। अब साथियों, मैं तुम्हें अपने कल रात के

12:55

Speaker A

सपने के बारे में बताता हूं। मैं उस सपने को पूरी तरह समझा नहीं सकता। वह एक ऐसी दुनिया का सपना था जहां से इंसान गायब हो चुके थे। पर उस सपने ने मुझे एक पुरानी बात याद दिला दी जिसे मैं भूल चुका था। बहुत साल पहले जब मैं छोटा सा सूअर था।

13:14

Speaker A

मेरी मां और बाकी सूअर एक पुराना गाना गाते थे। मुझे उसकी धूम तो याद थी पर बोल भूल गया था। कल रात सपने में वह गाना और उसके बोल दोनों याद आ गए। मुझे यकीन है कि यह गाना पुराने जमाने के जानवर गाते होंगे जो अब कोई नहीं जानता। मैं वह गाना

13:33

Speaker A

तुम्हें सुनाता हूं। मैं बूढ़ा हूं और मेरी आवाज फटी हुई है। पर जब तुम धुन सीख जाओगे तो तुम इसे मुझसे भी अच्छा गाओगे। इस गाने का नाम है [संगीत] इंग्लैंड के जानवर। बूढ़े मेजर ने अपना गला साफ किया और गाना

13:50

Speaker A

शुरू किया। जैसा उसने कहा था उसकी आवाज फटी हुई थी। पर उसने बहुत अच्छा गाया। वह धुन ऐसी थी जो दिल में जोश भर दे। गाने के बोल कुछ ऐसे थे। इंग्लैंड के जानवरों, आयरलैंड के जानवरों, दुनिया के हर कोने के जानवरों, मेरी खुशी वाली बात सुनो। एक

14:11

Speaker A

सुनहरा कल आने वाला है। आज नहीं तो कल वह दिन आएगा। जब जालिम इंसान को गद्दी से उतार दिया जाएगा। तब इंग्लैंड के इन लहलहाते खेतों में सिर्फ हम जानवर ही राज करेंगे। हमारी नाकों से नकेल निकल जाएगी। हमारी पीठ से भारी बोझ उतर जाएगा।

14:33

Speaker A

लगाम और कांटे हमेशा के लिए सड़ जाएंगे। और कड़कड़ाते कोड़े फिर कभी नहीं चलेंगे। इतनी दौलत होगी कि हम सोच भी नहीं सकते। गेहूं, जौ और सारा चारा हमारा होगा। मटर सेम और सारी फसलें [संगीत] उस दिन सिर्फ हमारी होंगी। उस दिन इंग्लैंड के खेत

14:53

Speaker A

चमकेंगे। पानी एकदम साफ हो जाएगा। हवाओं में एक मीठी खुशबू होगी जिस दिन हम आजाद होंगे। उस दिन के लिए हमें जी तोड़ मेहनत करनी होगी। चाहे हम उस सूरज को देखने से पहले ही मर जाए। गाय, घोड़े, बत्तख और तीतर सबको आजादी के लिए पसीना बहाना होगा।

15:19

Speaker A

यह गाना सुनते ही जानवरों में गजब का जोश भर गया। अभी मेजर ने गाना खत्म भी नहीं किया था कि सब जानवर खुद ही गाने लगे। जो थोड़े कम दिमाग वाले थे उन्होंने भी धुन और कुछ शब्द पकड़ लिए और जो समझदार थे जैसे बड़े सूअर और कुत्ते उन्होंने तो कुछ

15:37

Speaker A

ही मिनटों में पूरा गाना रट लिया फिर क्या था पूरा खेत एक साथ मिलकर यह गाना गाने लगा गाय कुत्ते भेड़े घोड़े और बतख सब अपनीपनी आवाज में चिल्ला चिल्लाकर गाने लगे उन्हें इतना मजा आया कि उन्होंने एक के

15:55

Speaker A

बाद एक पांच बार पूरा गाना गा डाला अगर कोई उन्हें रोकता नहीं तो वह पूरी रात गाते रहते। पर बदकिस्मती से शोर से मिस्टर जों्स की नींद खुल गई। उसे लगा कि आंगन में कोई लोमड़ी घुस आई है। उसने फौरन अपनी बंदूक

16:11

Speaker A

उठाई और अंधेरे में गोली चला दी। बंदूक के छर्रे तबेले की दीवार में ज्यादा धंसे। गोली चलते ही सब जानवर हड़बड़ाकर भागने लगे। हर कोई अपने सोने की जगह की तरफ भागा। पंछी अपने छज्जों पर दुबक गए और बाकी जानवर घास पर लेट गए। देखते ही देखते

16:33

Speaker A

पूरे खेत में सन्नाटा छा गया। तीन रात बाद बूढ़ा मेजर अपनी नींद में ही चैन से मर गया। उसे बाग के कोने में मिट्टी दे दी गई। यह मार्च की शुरुआत का समय था। अगले तीन महीनों तक खेत में खूब

16:55

Speaker A

चोरी छिपे काम हुआ। बूढ़े मेजर की बातों ने समझदार जानवरों की पूरी सोच ही बदल दी थी। उन्हें यह तो नहीं पता था कि वह बगावत कब होगी या उसके जीते जी होगी भी या नहीं। पर वे समझ गए थे कि इसके लिए तैयारी करना उनका फर्ज है।

17:14

Speaker A

सबको सिखाने और तैयार करने का काम बड़े सूअर ने संभाल लिया। सब जानते थे कि वह सबसे तेज दिमाग वाले जानवर हैं। सूअरों में दो नाम सबसे आगे थे। स्नोबॉल और नेपोलियन। मिस्टर जॉनस इन दोनों को बेचने के लिए पाल

17:31

Speaker A

रहे थे। नेपोलियन दिखने में बड़ा और थोड़ा डरावना लगता था। वह बातें कम करता था। पर अपना उल्लू सीधा करना और अपनी बात मनवाना बखूबी जानता था। स्नोबॉल थोड़ा जिंदा दिल था। वह बातें तेज करता था और नईनई चीजें सोचता था। पर नेपोलियन के मुकाबले उसे लोग

17:52

Speaker A

बहुत गहरा खिलाड़ी नहीं मानते थे। खेत के बाकी सब मेल सूअर तो बस खाने के लिए पाले गए थे। उनमें एक छोटा और गोलमटोल सूअर था। स्क्वलर उसके गाल गोल थे। आंखें चमकती थी और आवाज बहुत तीखी थी। वह बातें बनाने में उस्ताद था। जब वह किसी मुश्किल

18:15

Speaker A

बात पर बहस करता तो यहां वहां फुदकता और अपनी पूंछ हिलाता। उसकी बात करने का अंदाज ऐसा था कि कोई भी उसकी बातों में आ जाए। खेत के बाकी जानवर कहते थे कि स्क्वलर तो काली चीज को भी सफेद साबित कर सकता है। इन तीनों ने मिलकर बूढ़े मेजर की बातों से

18:36

Speaker A

एक नया तरीका निकाला। उन्होंने इसे जानवरों की सोच का नाम दिया एनिमलिज्म। हफ्ते में कई रातें जब मिस्टर जोंस सो जाता तो तबेली में छोरी छिपे मिलते थे। वे सबको इस जानवरों की सोच का मतलब समझाते थे। शुरू में बहुत से जानवर उनकी बात नहीं

18:57

Speaker A

समझते थे। कुछ को तो कोई मतलब ही नहीं था। कुछ जानवर कहते कि मिस्टर जों्स हमारा मालिक है। वे कहते मालिक हमें खाना देता है। अगर वह चला गया तो हम तो भूखे मर जाएंगे। कुछ पूछते हमें क्या फर्क पड़ता है कि हमारे मरने के बाद क्या होगा या अगर

19:15

Speaker A

बगावत अपने आप ही होनी है तो हम मेहनत क्यों करें? बड़े सूअर को उन्हें यह समझाने में बहुत पसीना बहाना पड़ता था। यह सोच गलत है। सबसे अजीब सवाल सफेद घोड़ी मौली पूछती थी। उसने स्नोबॉल से पहला सवाल यही पूछा कि क्या बगावत के बाद भी चीनी

19:34

Speaker A

मिलेगी? स्नोबॉल ने कड़क आवाज में कहा, नहीं इस खेत में चीनी बनाने का कोई तरीका नहीं है और तुझे चीनी की जरूरत भी नहीं है। तुझे पेड़ भर चारा और घास मिलेगी। मौली ने फिर पूछा क्या मैं अपनी गर्दन के बालों में

19:49

Speaker A

रिबन बांध पाऊंगी? स्मोबल बोला साथी यह रिबन जिसे तू इतना पसंद करती है यह गुलामी की निशानी है। क्या तू इतना भी नहीं समझती कि आजादीन रिबन से कहीं ज्यादा कीमती है?

20:02

Speaker A

मौली ने हां तो कह दिया पर वह पूरी तरह मान गई हो ऐसा लगा नहीं। वह बस अपना उल्लू सीधा करना चाहती थी। बड़े सूअर को मोजिज नाम के पालतू खोवे के झूठ से भी लड़ना पड़ता था। मोजिज मालिक का बहुत खास था। वह जासूस था और इधर की बात उधर करता था। पर

20:24

Speaker A

वह बातें बड़ी मजेदार करता था। वह सबको एक जादुई देश मीठे पहाड़ की कहानियां सुनाता। वह कहता कि मरने के बाद सब जानवर वही जाते हैं। मोजज कहता है कि वह पहाड़ आसमान में बादलों के पार है। वहां सातों दिन इतवार रहता है। वहां साल भर बढ़िया घास मिलती है

20:45

Speaker A

और झाड़ियों पर चीनी के टुकड़े उगते हैं। जानवर उस कौवे से नफरत करते थे क्योंकि वह काम नहीं करता था और बस गप्पे मारता था। पर कुछ जानवरों को उसकी मीठे पहाड़ वाली बात पर यकीन होने लगा था। इसलिए बड़े सूअर को उन्हें यह समझाने में बहुत मगजमारी

21:05

Speaker A

करनी पड़ती थी कि ऐसी कोई जगह नहीं है। सबसे पक्के चेले दो घोड़े थे। बॉक्सर और क्लोअर। उन्हें खुद से कुछ सोचना बहुत मुश्किल लगता था। पर उन्होंने एक बार बड़े सूअर को अपना गुरु मान लिया तो वे उनकी हर बात मान लेते थे। फिर वे बड़ी आसानी से

21:25

Speaker A

दूसरे जानवरों को भी वही बातें समझाते थे। वे तबेले की हर छोरी छिपे होने वाली मीटिंग में पहुंचते थे। मीटिंग के आखिरी में वे ही सबसे ज्यादा जोर से इंग्लैंड के जानवर वाला गाना शुरू करते थे। फिर वह बगावत जितनी सोची थी उससे बहुत पहले और

21:45

Speaker A

आसानी से हो गई। पुराने जमाने में मिस्टर जों्स एक कड़क पर अच्छे किसान थे और अब उनके बुरे दिन शुरू हो गए थे। एक कचहरी के मामले में उनके बहुत पैसे डूब गए थे। वे बहुत दुखी रहने लगे थे और जरूरत से ज्यादा शराब पीने लगे थे। वे दिन भर रसोई में

22:04

Speaker A

अपनी कुर्सी पर बैठे रहते, अखबार पढ़ते, शराब पीते और कभी-कभी कौवे मोजिश को शराब में डूबी रोटी खिला देते। उनके नौकर कामचोर और बेईमान थे। खेतों में घास फूस भर गया था। तबेली की छतें टूट रही थी। बाढ़ खराब हो गई थी और जानवरों का पेट

22:24

Speaker A

भूख से जल रहा था। जून का महीना आया। घास काटने के लिए तैयार थे। शनिवार के दिन मिस्टर जों्स शहर गए और वहां इतनी शराब पी कि रविवार दोपहर तक घर नहीं लौटे। उनके नौकरों ने सुबह-सुबह गायों का दूध तो निकाला पर फिर वे मौज

22:45

Speaker A

मस्ती करने निकल गए। उन्होंने जानवरों को चारा देने की परवाह तक नहीं की। जब मिस्टर जों्स वापस आए तो वे फौरन सोफे पर सो गए। शाम हो गई पर जानवरों को खाना नहीं मिला। आखिर में उनका सब्र टूट गया। एक गाय ने अपने सींग से अनाज के गोदाम का दरवाजा

23:03

Speaker A

तोड़ दिया। सब जानवर भूखे थे। वे टूट पड़े और खाना खाने लगे। तभी मिस्टर जूस की आंख खुल गई। अगले ही पल वे और उनके चार आदमी कोड़े लेकर गोदाम में आ गए। वे बेहिसब कोड़े बरसाने लगे। भूखे जानवरों के लिए यह बर्दाश्त के बाहर था।

23:24

Speaker A

उन्होंने पहले से कुछ नहीं सोचा था। पर वे सब एक साथ अपने मालिकों पर झपट पड़े। जोस और उसके आदमियों को हर तरफ से लाते और टक्करें पड़ने लगी। अब बात उनके हाथ से निकल चुकी थी। उन्होंने कभी जानवरों को ऐसा करते नहीं देखा था। जिन जानवरों को वे

23:43

Speaker A

हमेशा मारते पीटते थे, उन्हें आज इस तरह लड़ते देख उनके हाथपांव फूल गए। थोड़ी ही देर में उन्होंने हाथ खड़े कर दिए और वहां से दुम दबाकर भागे। पांचों आदमी सड़क की तरफ जान बचाकर भागे और जानवर अपनी जीत का शोर मचाते हुए उनके पीछेछे

24:02

Speaker A

दौड़ने लगे। मिज जों्स ने खिड़की से बाहर देखा। उन्हें समझ आ गया कि क्या हो रहा है। उसने जल्दी से अपना थोड़ा सा सामान एक झोले में भरा और दूसरे रास्ते से चुपचाप खिसक गई। पालतू कौवा मोजिज भी कावका करता उसके पीछे उड़

24:22

Speaker A

गया। इधर जानवरों ने जों्स और उसके आदमियों को सड़क पर खदेड़ दिया। उन्होंने खेत का बड़ा फाटक जोर से बंद कर दिया। पता भी नहीं चला और इतनी जल्दी बगावत सफल हो गई। जस को बाहर निकाल दिया गया। अब पुराना खेत जानवरों का था।

24:43

Speaker A

पहले कुछ मिनट तो जानवरों को अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हुआ। वे सब एक साथ दौड़कर पूरे खेत के चक्कर लगाने लगे। वे देखना चाहते थे कि कहीं कोई इंसान छिपा तो नहीं है। इसके बाद वे उन इमारतों की तरफ भागे जहां जोस का सामान रखा था। वे उसकी हर याद

25:02

Speaker A

को मिटा देना चाहते थे। उन्होंने घोड़ों के सामान वाले कमरे का ताला तोड़ दिया। लगाम, नाक की कीलें, कुत्तों की जंजीरें और वे तेज चाकू जिनसे जोंस जानवरों को काटता था और तकलीफ देता था। सब कुछ कुएं में फेंक दिया गया। रस्सियां, पट्टे और

25:23

Speaker A

आंखों पर बांधने वाली पट्टियां आंगन में जल रही आग में फेंक दी गई। कोड़े भी आग के हवाले कर दिए गए। जब कोड़ों को जलते देखा तो सब जानवर खुशी से नाचने लगे। स्नोबॉल ने वे रिबन भी आग में डाल दिए जो बाजार के दिनों में घोड़ों की गर्दन पर सजाने के

25:42

Speaker A

लिए बांधे जाते थे। उसने कहा यह रिबन कपड़ों जैसे हैं जो इंसानों की निशानी है। हम जानवरों को बिना कपड़ों के ही रहना चाहिए। जब बॉक्सर ने यह सुना तो वह दौड़कर अपना वह तिनखे वाला छोटा हेड ले आया जिसे वह

25:59

Speaker A

गर्मियों में कान बचाने के लिए पहनता था। उसने उसे भी आग में फेंक दिया। थोड़ी ही देर में उन्होंने जों्स की हर चीज खत्म कर दी। फिर नेपोलियन सबको अनाज के गोदाम ले गया। उसने सबको दुगना खाना दिया। कुत्तों को दो-दो बिस्कुट मिले। फिर सब ने सात बार

26:19

Speaker A

इंग्लैंड के जानवर वाला गाना गाया। उस रात वे ऐसी चैन की नींद सोए जैसे पहले कभी नहीं सोए थे। अगली सुबह जब सूरज निकला तो उन्हें अपनी जीत याद आई। वे सब भागकर चारागाह की तरफ गए। वहां एक ऊंचा टीला था जहां से पूरा खेत दिखता था। वे टीले के

26:42

Speaker A

ऊपर चढ़ गए और सुबह की साफ रोशनी में अपने खेत को देखने लगे। हां, अब यह सब उनका था। जो कुछ भी आंखें देख सकती थी, वह सब उनका अपना था। वे खुशी के मारे हवा में उछलने लगे। वे ओस वाली घास में लोटपोट हुए। उन्होंने मीठी घास के मुंह भरभर कर ग्रास

27:05

Speaker A

लिए। उन्होंने काली मिट्टी को खुरच कर उसकी खुशबू सूंघी। फिर वे पूरे खेत में घूमने निकले। वे जुते हुए खेतों, घास के मैदानों, बागों और तालाब को ऐसे देख रहे थे जैसे पहली बार देख रहे हो। उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब सच में

27:25

Speaker A

उनका अपना है। फिर वे सब वापस मकानों की तरफ आए और जों्स के घर के दरवाजे पर चुपचाप खड़े हो गए। वह घर भी अब उन्हीं का था। पर अंदर जाने में उन्हें डर लग रहा था। थोड़ी देर बाद स्नोबॉल और नेपोलियन ने अपने कंधों से

27:44

Speaker A

धक्का देकर दरवाजा खोल दिया। सब जानवर एक के पीछे एक अंदर गए। वे बहुत संभाल कर चल रहे थे ताकि कुछ टूटे फूटे नहीं। वे दबे पांव एक कमरे से दूसरे कमरे में गए। वे बस धीरे-धीरे फुसफुसाकर बात कर रहे थे। वे वहां कैशो आराम देखकर दंग रह गए। मुलायम

28:04

Speaker A

बिस्तर, बड़े-बड़े शीशे, रेशमी सोफे, कीमती कालीन और दीवार पर लगी महारानी की तस्वीरें देखकर उन्हें यकीन नहीं हो रहा था। जब सीढ़ियों से नीचे आ रहे थे तब पता चला कि मौली गायब है। जब जानवर उसे ढूंढने वापस गए तो देखा कि वह सबसे अच्छे कमरे में रुकी हुई थी। उसने मिज जों्स की मेज

28:30

Speaker A

से एक नीला रिबन उठा लिया था। वह उसे अपने कंधे पर रखकर शीशे में खुद को निहार रही थी। बाकी जानवरों ने उसे खूब डांटा और फिर वे सब बाहर आ गए। रसोई में जो मांस लटका था उसे बाहर ले जाकर मिट्टी में दबा दिया

28:48

Speaker A

गया। बॉक्सर ने एक जोरदार लात मारकर शराब का पीपा तोड़ दिया। इसके अलावा घर की किसी चीज को हाथ नहीं लगाया गया। सब ने मिलकर उसी वक्त फैसला किया कि इस बड़े घर को बस याद के तौर पर रखा जाएगा। सब इस बात पर मान गए कि कोई भी जानवर कभी भी इस घर में

29:09

Speaker A

नहीं रहेगा। सब जानवरों ने नाश्ता किया। फिर स्नोबॉल और नेपोलियन ने सबको दोबारा बुलाया। स्नोबॉल ने कहा, साथियों, सुबह के 6:30 बज गए हैं। आज दिन बहुत लंबा है। आज से हमें घास काटने का काम शुरू करना है। पर उससे

29:27

Speaker A

पहले एक और जरूरी काम निपटाना है। बड़े सूअर ने अब एक राज की बात बताई। पिछले तीन महीनों में उन्होंने खुद ही पढ़ना लिखना सीख लिया था। उन्होंने मिस्टर जों्स के बच्चों की एक पुरानी किताब कूड़े के ढेर से उठा ली थी और उसी से अक्षर

29:45

Speaker A

[हंसी] सीखे थे। नेपोलियन ने काला और सफेद रंग मंगवाया। वह सबको उस बड़े फाटक के पास ले गया जो सड़क की तरफ खुलता था। स्नोबॉल लिखने में बहुत तेज था। उसने अपने खुर के बीच ब्रश फंसाया। उसने फाटक के सबसे ऊपर वाले डंडे से पुराना खेत नाम मिटा दिया।

30:06

Speaker A

उसकी जगह उसने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा एनिमल फार्म जानवरों का खेत। अब से इस जगह का यही नाम होगा। इसके बाद वे वापस आए। स्नोबॉल और नेपोलियन ने एक सीढ़ी मंगवाई। उन्होंने उसे बड़े तबेले की ऊंची दीवार पर टिकवाया। उन्होंने सबको

30:26

Speaker A

समझाया कि पिछले तीन महीनों की पढ़ाई के बाद उन्होंने जानवरों की सोच यानी एनिमलिज्म को खेत के सात नियम यानी सेवन कमांडमेंट्स में बदल दिया है। यह सात नियम अब दीवार पर लिखे जाएंगे। खेत के हर जानवर को हमेशा हमेशा के लिए इन नियमों को मानकर

30:45

Speaker A

चलना होगा। स्नोबॉल बड़ी मुश्किल से सीढ़ी पर चढ़ा। एक सूअर के लिए सीढ़ी पर संभलना और खुद को रोकना आसान नहीं था। स्कूलर पेंट का डिब्बा पकड़े उसके पीछे कुछ पायदान से खड़ा था। स्नोबॉल ने काली दीवार पर

31:04

Speaker A

बड़े-बड़े सफेद अक्षरों में सात बातें लिखी। वे इतनी साफ थी कि बहुत दूर से भी पढ़ी जा सकती थी। वे नियम यह थे। खेत के सात नियम। [संगीत] जो भी दो पैरों पर चलता है वह दुश्मन है। जिसके चार पैर हो या जिसके पास पंख हो वह

31:24

Speaker A

दोस्त है। कोई भी जानवर कपड़े नहीं पहनेगा। कोई भी जानवर बिस्तर पर नहीं सोएगा। कोई भी जानवर शराब नहीं पिएगा। कोई भी जानवर किसी दूसरे जानवर की जान नहीं लेगा। सब जानवर बराबर हैं। लिखावट बहुत साफ और सुंदर थी। बस एक दो

31:45

Speaker A

जगह अक्षरों की थोड़ी गलती थी। स्नोबॉल ने सबको जोरजोर से नियम पढ़कर सुनाए। सब जानवरों ने हां में सिर हिलाया। जो समझदार थे उन्होंने तो फौरन नियमों को रटना शुरू कर दिया। स्नोबॉल ने ब्रश नीचे फेंक दिया। वह

32:03

Speaker A

चिल्लाया। चलो साथियों, अब घास के मैदान की तरफ। हमें यह दिखा देना है कि हम जों्स और उसके आदमियों से भी तेज काम कर सकते हैं। पर तभी तीनों गाय जोरजोर से रमभाने लगी। उन्हें पूरे एक दिन से दूहा नहीं गया था। उनके थन दूध से भरे थे और फटे जा रहे

32:23

Speaker A

थे। बड़े सूअर ने थोड़ा सोचा और फिर बाल्टियां मंगवाई। उन्होंने गायों का दूध निकाला। उनके खुर इस काम के लिए एकदम फिट थे। देखते ही देखते ताजा दूध की पांच बाल्टियां भर गई। सब जानवर ललचाए नजरों से उस दूध को देख रहे थे। किसी ने पूछा इस

32:42

Speaker A

दूध का क्या होगा? एक मुर्गी ने कहा जोस कभी-कभी इसे हमारे दलिए में मिला दिया करता था। नेपोलियन बाल्टियों के आगे आकर खड़ा हो गया। वह बोला दूध की चिंता छोड़ो साथियों। उसका इंतजाम हो जाएगा। अभी काम ज्यादा

32:59

Speaker A

जरूरी है। साथ ही स्नो बॉल आगे चलेगा। मैं बस 5 मिनट में तुम्हारे पीछे आता हूं। चलो बहादुरों घास हमारा इंतजार कर रही है। सब जानवर काम के लिए खेतों की तरफ चल दिए। पर जब वे शाम को थके हारे वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि दूध गायब हो चुका था।

33:23

Speaker A

जानवरों ने घास इकट्ठा करने के लिए इतना पसीना बहाया कि पूछो मत। पर उनकी मेहनत रंग लाई। फसल इतनी अच्छी हुई कि किसी ने सोचा भी नहीं था। काम कभी-कभी बहुत भारी पड़ता था। खेती के औजार इंसानों के लिए बने थे। जानवरों के लिए नहीं। सबसे बड़ी

33:42

Speaker A

मुश्किल यह थी कि कोई भी जानवर पिछले पैरों पर खड़े होकर औजार नहीं चला सकता था। पर बड़े सूअर इतने तेज दिमाग के थे कि वे हर मुश्किल का हल निकाल लेते थे। जहां तक घोड़ों की बात है वे तो खेत के चप्पे-छप्पे को जानते थे। वे ज्स और उसके

34:00

Speaker A

आदमियों से कहीं बेहतर जानते थे कि घास कैसे काटनी है और कैसे बटोरनी है। बड़े सूअर खुद कोई मेहनत वाला काम नहीं करते थे। वे बस दूसरों को बताते थे कि क्या करना है और सब पर नजर रखते थे। वे खुद को दूसरों से ज्यादा समझदार समझते थे।

34:20

Speaker A

इसलिए वे खुद ही मालिक बन बैठे। बॉक्सर और क्लोअर खुद को घास काटने वाली मशीन में जोत लेते थे। अब किसी लगाम या रस्सी की जरूरत नहीं थी। वह चुपचाप खेत के चक्कर काटते और उनके पीछे एक सूअर चलता जो आवाज लगाता शाबाश साथी आगे बढ़ या पीछे हट

34:41

Speaker A

साथी। हर छोटा बड़ा जानवर घास पलटने और उसे इकट्ठा करने में जुट गया। यहां तक कि मुर्गियां और बत्तखे भी दिन भर चिलचिलाती धूप में अपनी चोंच में तिनके भरभर कर यहां वहां दौड़ती रही। आखिर में उन्होंने जो से दो दिन पहले ही सारा काम निपटा लिया। ऊपर

35:01

Speaker A

से खेत में इतनी ज्यादा फसल हुई कि पहले कभी नहीं हुई थी। जरा भी बर्बादी नहीं हुई। मुर्गियों और बत्तखों ने अपनी तेज नजरों से एक-एक दाना चुन लिया। किसी भी जानवर ने मुंह मारने या चोरी करने की कोशिश भी नहीं की।

35:19

Speaker A

पूरी गर्मी खेत का काम घड़ी की सुई की तरह एकदम सही चलता रहा। जानवर इतने खुश थे कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। खाने का हर निवाला बहुत स्वाद लगता था क्योंकि यह उनका अपना खाना था जिसे उन्होंने खुद उगाया था। अब कोई कंजूस मालिक उन्हें नाप

35:40

Speaker A

तोल कर खाना नहीं देता था और वे निकम्मे और मुफ्तखोर इंसान चले गए थे। इसलिए हर किसी के लिए पेट भर खाना था। जानवरों को काम का अनुभव नहीं था। फिर भी अब उन्हें आराम करने का ज्यादा समय मिल जाता था। मुश्किलें तो बहुत आई। जैसे जब

35:59

Speaker A

अनाज काटने की बारी आई तो उनके पास मशीन नहीं थी। उन्हें पुराने जमाने की तरह अनाज को अपने पैरों से रौंदना पड़ा और फूंक मार मार कर कचरा उड़ाना पड़ा। [संगीत] पर बड़े सूअर की चालाकी और बॉक्सर की ताकत ने सब संभाल लिया।

36:17

Speaker A

हर कोई बॉक्सर की तारीफ करता था। वह जोस के समय भी बहुत मेहनती था। पर अब तो वह अकेला तीन खोड़ों के बराबर काम करता था। ऐसा लगता था कि पूरे खेत का काम उसके बाहरी कंधों पर ही टिका है। वह सुबह से रात तक बस खींचने और धक्का देने में लगा

36:37

Speaker A

रहता। जहां सबसे मुश्किल काम होता बॉक्सर वहीं खड़ा मिलता। उसने एक मुर्गे से कह रखा था कि उसे रोज सुबह सबसे आधा घंटा पहले जगा दे ताकि वह सबका काम शुरू होने से पहले ही जरूरी मेहनत कर सके। हर मुसीबत और हर परेशानी का उसके पास बस एक ही जवाब

36:58

Speaker A

था। मैं और ज्यादा मेहनत करूंगा। उसने इसी बात को अपना गुरु मंत्र बना लिया था। हर जानवर ने अपनी किस्मत और ताकत के हिसाब से काम किया। जैसे मुर्गियों और बतखों ने फसल कटने के बाद खेतों से गिरे हुए दाने चुन चुनकर बहुत सारा अनाज बचा लिया। अब

37:20

Speaker A

कोई चोरी नहीं करता था। कोई अपने खाने के राशन के लिए रोताधोता नहीं था। पुराने दिनों में जो आपस में लड़ाई झगड़ा, काटखोट और जलन होती थी, वह अब लगभग खत्म हो गई थी। कोई भी काम से जी नहीं चुराता था या कहिए कि लगभग कोई नहीं।

37:40

Speaker A

मौली की बात अलग थी। उसे सुबह जल्दी उठना अच्छा नहीं लगता था। वह यह बहाना बनाकर अक्सर काम से खिसक जाती थी कि उसके खुर में पत्थर चुब गया है और बिल्ली का तरीका तो बहुत अजीब था। सबको जल्दी ही दिखने लगा कि जब भी काम की बारी आती बिल्ली कभी नहीं

37:58

Speaker A

मिलती थी। वह घंटों तक गायब रहती और फिर खाने के वक्त या काम खत्म होने के बाद ऐसे प्रकट होती जैसे कुछ हुआ ही ना हो। पर वह इतने प्यार से बहाने बनाती और म्याओ म्याऊ करती कि उसकी नियत पर शक करना मुश्किल था। बूढ़ा बेंजामिन जो कि एक गधा था वह बगावत

38:20

Speaker A

के बाद भी बिल्कुल नहीं बदला। वह वैसे ही धीरे-धीरे और अपने धुन में काम करता था जैसे जोस के समय करता था। वह ना तो काम से जी छुड़ाता था और ना ही खुद से कोई फालतू काम करने को कहता था। बगावत और उसके नतीजे के बारे में वह अपनी

38:38

Speaker A

जुबान नहीं खोलता था। जब उससे पूछते कि क्या वह अब खुश है कि जोस चला गया तो वह बस यही कहता गधे बहुत लंबी उम्र जीते हैं। तुम में से किसी ने कभी मरा हुआ गधा देखा है क्या? बाकी जानवरों को इसी अजीब जवाब से संतोष

38:57

Speaker A

करना पड़ता था। इतवार के दिन कोई काम नहीं होता था। नाश्ता रोज से एक घंटा देर से मिलता। नाश्ते के बाद हर हफ्ते एक जलसा होता था जो कभी नहीं रुकता था। सबसे पहले झंडा फहराया जाता। स्नोबॉल को घोड़ों के सामान

39:16

Speaker A

वाले कमरे में मिसेज जो्स की एक पुरानी हरी मेजपश मिली थी। उसने उस पर सफेद रंग से एक खुर और एक सींग बना दिया था। हरतवार की सुबह इसे घर के बगीचे में ऊंचे डंडे पर चढ़ाया जाता। स्नोबॉल ने समझाया कि हरा रंग इंग्लैंड के

39:35

Speaker A

हरे खेतों की निशानी है और खुर और सींग जानवरों के उस राज की निशानी है जो इंसानों के पूरी तरह खत्म होने के बाद बनेगा। झंडा फहराने के बाद सब जानवर बड़े तबेले में इकट्ठा होते जिसे वे पंचायत कहते थे।

39:54

Speaker A

यहां अगले हफ्ते के काम तय होते और नई बातों पर बहस होती। बातें हमेशा बड़े सूअर ही शुरू करते थे। बाकी जानवर हाथ उठाना यानी वोट देना तो जानते थे पर खुद से कोई नई बात कभी नहीं सोच पाते थे। स्नोबॉल और नेपोलियन पंचायत में सबसे ज्यादा बोलते

40:15

Speaker A

थे। पर सबको दिखने लगा कि इन दोनों की आपस में कभी नहीं बनती। एक जो भी बात कहता दूसरा उसका उल्टा ही बोलता। यहां तक कि जब बाघ के पीछे वाली छोटी जगह को बूढ़े जानवरों के आराम के लिए रखने की बात हुई तभी वे इस बात पर भिड़ गए कि किस

40:35

Speaker A

जानवर को कितनी उम्र में काम छोड़ देना चाहिए। पंचायत हमेशा इंग्लैंड के जानवर गाने के साथ खत्म होते और दोपहर का समय मौज मस्ती के लिए होता था। बड़े सूअर ने घोड़ों के सामान वाले कमरे को अपना दफ्तर बना लिया। यहां वे शाम को

40:57

Speaker A

उन किताबों से लोहार और बढ़ का काम सीखने लगे जो वे घर से उठा लाए थे। स्नोबॉल ने जानवरों को अलग-अलग टोलियों में बांटना शुरू किया। जिसे वह जानवरों की टोलियां या एनिमल कमिटीज कहता था। वह इस काम में दिन रात एक कर देता था। उसने मुर्गियों के लिए

41:18

Speaker A

अंडा बनाओ टोली, गायों के लिए साफ पछ टोली और जंगली चूहों और खरगोशों को सुधारने के लिए जंगली साथी टोली बनाई। साथ ही उसने सबको अक्षर सिखाने के लिए पढ़ने लिखने की क्लास भी शुरू की। सच तो यह है कि इनमें से ज्यादातर टोलियां

41:38

Speaker A

फेल हो गई। जंगली जानवरों को सुधारने का काम बिल्कुल नहीं चला। वे पहले जैसे ही रहे। जब उन्हें प्यार से पास बुलाया गया तो उन्होंने बस अपना उल्लू सीधा करना चाहा। बिल्ली भी इस टोली में शामिल हुई और कुछ दिन बहुत मेहनत दिखाई। एक दिन वह छत

41:56

Speaker A

पर बैठकर कुछ चिड़ियों को फुसला रही थी जो उसकी पहुंच से बस थोड़ी दूर थी। वह उनसे कह रही थी कि अब सब जानवर साथी बन गए हैं और कोई भी चिड़िया आकर उसके पंजे पर बैठ सकती है। पर चिड़िया समझदार थी। वे दूर ही रही।

42:14

Speaker A

लेकिन पढ़ने लिखने की क्लास बहुत कामयाब रही। साल खत्म होने तक लगभग हर जानवर थोड़ा बहुत पढ़ना सीख गया था। बड़े सूअर तो अब पढ़ने लिखने में एक्सपर्ट हो चुके थे। कुत्तों ने भी थोड़ा बहुत सीख लिया था। पर उन्हें सात नियम के अलावा कुछ

42:33

Speaker A

और पढ़ने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। बकरी म्यूरियल कुत्तों से बेहतर पढ़ लेती थी। वह कभी-कभी कूड़े के ढेर से मिले अखबार के टुकड़े बाकी जानवरों को पढ़कर सुनाती थी। गधा बेंजामिन भी सूअरों जितना ही अच्छा पढ़ सकता था। पर वह अपने इस ताकत का

42:53

Speaker A

इस्तेमाल नहीं करता था। वह कहता कि दुनिया में ऐसा कुछ लिखा ही नहीं है जिसे पढ़ने के लिए मेहनत की जाए। क्लोअर ने सारे अक्षर तो सीख लिए पर वह उन्हें जोड़कर शब्द नहीं बना पाती थी। बॉक्सर तो डी अक्षर से आगे पढ़ ही नहीं

43:11

Speaker A

पाया। वह अपने भारी खुर्से धूल पर ए बी सी डी लिखता और फिर कान पीछे लटका कर उन्हें घूरता रहता। वह याद करने के लिए बहुत दिमाग खपाता कि आगे क्या आता है। पर कभी याद नहीं आता। कई बार उसने ई एफ जी एच याद भी किया। पर

43:32

Speaker A

जब तक वह वहां पहुंचता तब तक ए बी सी डी उसके दिमाग से निकल जाते। आखिर में उसने तय किया कि वह बस पहले चार अक्षर ही याद रखेगा। वह रोज एक दो बार धूल पर उन्हें लिखकर दोहराता था। मौली ने अपने नाम के छह अक्षरों के अलावा कुछ भी सीखने से मना कर

43:52

Speaker A

दिया। वह टहनियों के टुकड़ों से अपना नाम बड़े करीने से लिखती और उस पर फूल सजाकर बड़े गर्व से उसे निहारती रहती। खेत के बाकी जानवर तो ए अक्षर से आगे बढ़ ही नहीं पाए। भेड़, मुर्गी और बतख जैसे कम

44:12

Speaker A

अकल जानवरों के लिए खेत के सात नियम याद करना बहुत मुश्किल था। वे उन्हें रट ही नहीं पा रहे थे। तब स्नोबॉल ने बहुत सोच विचार के बाद एक रास्ता निकाला। उसने कहा कि इन सातों नियमों को एक छोटे से नारे में समेटा जा सकता है।

44:30

Speaker A

चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। उसने समझाया कि यही जानवरों की सोच का असली तरीका है। उसने कहा कि जो इस बात को गांठ बांध लेगा, वह इंसान की बुरी आदतों से बचा रहेगा। शुरू में चिड़ियों को बुरा लगा। उन्हें लगा कि उनके भी तो दो ही पैर

44:50

Speaker A

हैं। पर स्नोबॉल ने उन्हें पट्टी पढ़ा दी। उसने कहा, साथियों, पंछियों के पंख उड़ने के लिए होते हैं। वे हाथ की तरह नहीं है। इंसान की सबसे खराब चीज उसका हाथ है। वह अपने हाथ से ही सारी बेईमानी और शरारत करता है।

45:09

Speaker A

चिड़ियों को स्नोबॉल की भारी भरकम बातें समझ तो नहीं आई। पर उन्होंने उसकी बात मान ली। अब तबेली की दीवार पर सात नियमों के ऊपर और भी बड़े अक्षरों में लिख दिया गया। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। बहनों को यह नारा इतना पसंद आया कि वे

45:28

Speaker A

खेतों में लेटेेटे घंटों तक चिल्लाती रहती। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। वे इसे बार-बार बोलकर कभी थकती नहीं थी। इधर नेपोलियन को स्नोबॉल की टोलियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसका कहना था कि बड़ों को सिखाने से ज्यादा जरूरी बच्चों

45:52

Speaker A

को पालना और पढ़ाना है। घास कटने के कुछ समय बाद जेसी और ब्लू बेल के नौ तगड़े पिल्ले हुए। जैसे ही बच्चों ने मां का दूध पीना छोड़ा, नेपोलियन उन्हें उनके पास से चुपके से उठा ले गया। उसने कहा कि वह खुद इनकी पढ़ाई लिखाई की

46:12

Speaker A

जिम्मेदारी लेगा। वह उन्हें तबेले के ऊपर एक ऐसे गुप्त जगह पर ले गया जहां किसी का आना जाना नहीं था। उसने उन्हें वहां दुनिया से एकदम अलग रखा। धीरे-धीरे खेत के बाकी जानवर भूल ही गए कि वे बच्चे कहां है।

46:29

Speaker A

दूध कहां गया इसका राज जल्दी ही खुल गया। पता चला कि हर रोज दूध को बड़े सूअर के दलिए में मिला दिया जाता था। अब सेब पकने लगे थे। बाग की घास पर गिरे हुए सेबों का ढेर लगा था। जानवर को लगा था कि यह सेब सब में बराबर बांटे जाएंगे। पर एक दिन हुक्म

46:49

Speaker A

आया कि जमीन पर गिरे सारे सेब इकट्ठा करके घोड़ों के सामान वाले कमरे में पहुंचा दिया जाए। यह सिर्फ बड़े सूअर के खाने के लिए थे। इस पर कुछ जानवरों ने दबी जबान में शिकायत की पर कोई फायदा नहीं हुआ।

47:06

Speaker A

सब बड़े सूअर इस बात पर एक थे। यहां तक कि स्नोबॉल और नेपोलियन भी मान गए थे। स्कूलर को सबको समझाने के लिए भेजा गया। वह चिल्लाया। साथियों, मुझे उम्मीद है कि तुम ऐसा नहीं सोच रहेगे कि हम अपना उल्लू सीधा करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। सच तो यह है

47:26

Speaker A

कि हम में से कईयों को दूध और सेब पसंद ही नहीं है। मुझे खुद यह अच्छे नहीं लगते। [संगीत] हम यह चीजें बस इसलिए ले रहे हैं ताकि हमारी सेहत ठीक रहे। दूध और सेब। साथियों, यह जानकारी ने साबित किया है कि सूअरों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हम

47:42

Speaker A

बड़े सूअर दिमाग चलाने वाले लोग हैं। इस पूरे खेत को चलाने की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। हम दिन रात आपकी भलाई के लिए जागते हैं। हम आपकी खातिर ही वह दूध पीते हैं और वे सेब खाते हैं। क्या आपको पता है कि अगर हम अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं

47:59

Speaker A

निभा पाए तो क्या होगा? जॉंस वापस आ जाएगा। हां, मैं सच कह रहा हूं। जॉन्स वापस आ जाएगा। स्क्वलर यहां वहां फुदकते और अपनी पूंछ हिलाते हुए लगभग गिड़गिड़ाने लगा। साथियों क्या तुम में से कोई भी ऐसा है जो जों्स

48:16

Speaker A

को वापस देखना चाहता है। अब जानवर चाहे किसी भी बात पर शक करें पर वह जों्स को वापस कभी नहीं चाहते थे। जब उन्हें जों्स का डर दिखाया गया तो उनके पास बोलने को कुछ नहीं बचा। उन्हें समझ आ गया कि सूअरों की सेहत का ठीक रहना बहुत जरूरी है। इसलिए

48:36

Speaker A

बिना किसी बहस के यह मान लिया गया कि सारा दूध और गिरे हुए सेब और आगे पकने वाले सेब भी सिर्फ बड़े सूअर के लिए ही रखे जाएंगे। गर्मी खत्म होते-होते जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म की खबर आधे इलाके में फैल गई

48:56

Speaker A

थी। रोज स्नोबॉल और नेपोलियन कबूतरों की टोलियां भेजते थे। उनका काम था कि वे पास के खेतों के जानवरों से मिले। उन्हें बगावत की कहानी सुनाएं और उन्हें इंग्लैंड के जानवर वाला गाना सिखाएं। मिस्टर जों्स अपना ज्यादातर समय शराब खाने में बैठकर

49:15

Speaker A

बिताता था। वह हर किसी को अपनी दुख भरी कहानी सुनाता। वह रोता कि कैसे निकम्मे जानवरों ने उसे उसके ही घर से निकाल दिया और उसके साथ कितनी बड़ी बेईमानी हुई है। दूसरे किसान ऊपर से तो उसका साथ देते पर शुरू में उन्होंने उसकी कोई मदद नहीं की।

49:34

Speaker A

सच तो यह है कि हर कोई मन ही मन सोच रहा था कि जों्स की इस बर्बादी से वह अपना उल्लू सीधा कैसे कर सकता है। किस्मत की बात थी कि जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म इसके आसपास वाले दोनों खेतों के मालिक आपस में कुत्ते बिल्ली की तरह

49:52

Speaker A

लड़ते रहते थे। एक खेत का नाम था फक्सवर्ड। वह बहुत बड़ा और पुराना था। वहां जंगली झाड़ियां उगाई थी और चारागाह की हालत बहुत खराब थी। उसका मालिक मिस्टर पकिंटन एक बेफिक्र और आलसी आदमी था। वह बस मौसम के हिसाब से मछली पकड़ने या शिकार

50:13

Speaker A

करने में मगन रहता था। दूसरा खेत पिंच फील्ड छोटा था पर अच्छी हालत में था। उसका मालिक मिस्टर फ्रेडरिक बहुत तेज और कड़क आदमी थे। वह हमेशा के चेहरे के चक्कर काटते और सौदेबाजी में बहुत पक्के थे। यह दोनों एक दूसरे को इतना नापसंद करते थे कि

50:33

Speaker A

अपनी भलाई के लिए भी कभी हाथ मिलाने को तैयार नहीं होते। फिर भी वे दोनों जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म की बगावत से अंदर तक डरे हुए थे। वे बहुत घबराए हुए थे कि कहीं उनके अपने जानवर भी यह सब ना सीख जाए। शुरू में तो उन्होंने मजाक उड़ाया।

50:52

Speaker A

उन्होंने कहा कि जानवर कभी अपना खेत खुद नहीं चला सकते। यह सब दो हफ्तों में खत्म हो जाएगा। वे जानबूझकर उसे पुराना खेत ही कहते थे। उन्हें जानवरों का खेत नाम जहर लगता था। उन्होंने झूठ फैलाया कि वहां जानवर आपस में लड़ रहे हैं और भूख के मारे

51:11

Speaker A

तड़प रहे हैं। पर जब काफी समय बीत गया और जानवर नहीं मरे तो फेडरिक और पिल्लकिंटन ने अपनी चाल बदल ली। और वे वहां की बुराइयां करने लगे। उन्होंने खबर फैलाई कि वहां जानवर एक दूसरे को मार कर खा रहे हैं। वह कहते कि वहां जानवर एक दूसरे को

51:30

Speaker A

जलती हुई नाल से तपाकर दुख दे रहे हैं। फेडरिक और पिल्किंगटन कहते कि नेचर के खिलाफ जाने का यही डरावना अंजाम होता है। इंसानों के फैलाए उन झूठों पर किसी ने पूरा यकीन नहीं किया। हर जगह बस उसी अनोखे खेत की चर्चा थी जहां जानवरों ने इंसानों

51:52

Speaker A

को खदेड़ दिया था और खुद राज कर रहे थे। उस साल आसपास के गांव में बगावत की लहर दौड़ गई। जो बैल हमेशा सीधे रहते थे वे अचानक बिगड़ गए। भेड़े बाढ़ तोड़कर घास चरने लगी। गायों ने दूध की बाल्टियां मार दी। सबसे बड़ी बात इंग्लैंड के जानवर वाला

52:14

Speaker A

गाना सबको याद हो गया था। यह आग की तरह फैला। इंसान जब यह गाना सुनते तो गुस्से से लाल हो जाते। वे मजाक उड़ाते कि जानवर इतना घटिया गाना कैसे गा सकते हैं। जो भी जानवर यह गाता पकड़ा जाता उसे फौरन डंडे मारे जाते। फिर भी गाना रुका नहीं।

52:35

Speaker A

चिड़िया पेड़ों पर इसे गुनगुनाती। कोल्हू के शोर में भी यही धुन सुनाई देती। जब इंसान यह सुनते तो वे अंदर ही अंदर कांप उठते। उन्हें इस गाने में अपनी मौत साफ दिख रही थी। अक्टूबर की शुरुआत थी। अनाज कटकर ढेर लग

52:54

Speaker A

चुका था। तभी कुछ कबूतर तेजी से उड़ते हुए आए। वे जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म के आंगन में शोर मचाने लगे। जों्स अपने आदमियों और दूसरे पड़ोसियों के साथ वापस आ गया था। वे सब बड़े फाटक के अंदर घुस चुके थे और खेत की तरफ बढ़ रहे थे। सबके हाथों

53:14

Speaker A

में डंडे थे। बस जो सबसे आगे था और उसके हाथ में बंदूक थी। साफ था कि वह अपना खेत वापस छीनने आए हैं। जानवरों को इस हमले का पहले से डर था। उन्होंने पूरी तैयारी कर रखी थी। स्नोबॉल ने घर से मिली एक पुरानी किताब से लड़ाई के दांव पेच सीखे थे। वही

53:34

Speaker A

इस पूरी लड़ाई का मुखिया था। उसने फौरन हुक्म सुनाया। बस दो ही मिनट में हर जानवर अपनीप जगह पर मोर्चा लेकर खड़ा हो गया। जैसे ही इंसान मकानों के पास पहुंचे, स्नोबॉल ने पहली लड़ाई शुरू की। 35 कबूतर आदमियों के सिर के ऊपर उड़ने लगे।

53:54

Speaker A

उन्होंने हवा से ही उन पर बीट करना शुरू कर दिया। जब आदमी खुद को साफ करने में लगे थे। तभी बाढ़ के पीछे छिपी बतखों ने बाहर निकलकर उनकी पिंडलियों पर जोर-जोर से चोंच मारी। यह तो बस उन्हें परेशान करने का एक तरीका था। आदमियों ने डंडों से बतखों को

54:14

Speaker A

आसानी से भगा दिया। अब स्नोबॉल ने दूसरा हमला किया। म्यूरियल, बेंजामिन और सारी भेड़े आगे बढ़ी। स्नोबॉल सबसे आगे था। उन्होंने आदमियों को हर तरफ से टक्कर मारी। बेंजमिन ने घूमकर अपनी छोटी लातों से उन पर वार किया। पर आदमियों के पास डंडे और भारी जूते थे। वे जानवरों पर भारी

54:41

Speaker A

पड़ रहे थे। तभी स्नोबॉल ने जोर से चिल्लाकर पीछे हटने का इशारा किया। सब जानवर भागकर आंगन के अंदर चले गए। आदमियों को लगा कि वह जीत गए। वे खुशी से चिल्लाए। उन्होंने देखा कि जानवर डर कर भाग रहे हैं। वे बिना सोचे समझे उनके पीछे दौड़

54:59

Speaker A

पड़े। स्नोबॉल यही तो चाहता था। जैसे ही आदमी आंगन के बीच में पहुंचे, तीन घोड़े, तीन गाय और बाकी बड़े सूअर बाहर निकल आए। वे गौशाला में छिपे थे। उन्होंने आदमियों का पीछे का रास्ता बंद कर दिया। अब स्नोबॉल ने हमला करने का हुक्म दिया। वह

55:19

Speaker A

सीधा जों्स की तरफ झपटा। जों्स ने उसे आते देखा और बंदूक चला दी। गोली के छर्रों से स्नोबॉल की पीठ पर खून की लकीरें बन गई। एक भेड़ वही मरकर गिर गई। पर स्नोबॉल रुका नहीं। उसने अपने भारी शरीर से जस की टांगों पर जोरदार टक्कर मारी। जस गोबर के

55:40

Speaker A

ढेर पर जा गिरा। बंदूक उसके हाथ से छूट गई। पर सबसे डरावना नजारा तो बॉक्सर का था। वह अपने पिछले पैरों पर खड़ा हो गया और अपने भारी लोहे जैसे खुरों से आदमियों पर हमला करने लगा। उसकी पहली ही चोट फक्सवुड के एक लड़के के सिर पर लगी। वह लड़का वहीं कीचड़ में बेदम

56:03

Speaker A

होकर गिर गया। यह देखकर कई आदमियों ने डंडे फेंक दिए और भागने लगे। सब आदमी बुरी तरह डर गए। अगले ही पल सब जानवर उन्हें पूरे आंगन में दौड़ाने लगे। उन्हें सींग मारे गए, लातें मारी गई और दांतों से काटा गया। खेत का हर जानवर अपना बदला ले रहा

56:22

Speaker A

था। यहां तक कि बिल्ली भी छत से एक आदमी के कंधे पर कूद गई। उसने अपने नाखून उसकी गर्दन में गड़ा दिए। वह आदमी दर्द के मारे बुरी तरह चिल्लाने लगा। जैसे ही मौका मिला आदमी जान बचाकर सड़क की तरफ भागे। हमला करने के 5 मिनट के अंदर ही

56:41

Speaker A

वे दुम दबाकर उसी रास्ते से भाग खड़े हुए जिससे आए थे। बतखे उनके पीछे शोर मचाती रही और उनकी पिंडलियों पर चोंच मारती रही। सब आदमी भाग गए। बस एक वहीं रह गया। आंगन में बॉक्सर कीचड़ में ओंधे मुंह पड़े उस लड़के को अपने खुर से पलटने की कोशिश कर

57:02

Speaker A

रहा था। लड़का बिल्कुल नहीं हिला। यह तो मर गया। बॉक्सर ने बहुत दुखी होकर कहा। मेरा इरादा इसे मारने का नहीं था। मैं भूल गया था कि मैंने लोहे की नाल पहनी है। अब कौन यकीन करेगा कि मैंने यह जानबूझकर नहीं किया।

57:20

Speaker A

ज्यादा मत सोचो साथी। स्नो बॉल चिल्लाया। उसके जख्मों से अभी भी खून टपक रहा था। जंग तो जंग होती है। हमारे लिए तो वही इंसान अच्छा है जो मर गया हो। पर मैं किसी की जान नहीं लेना चाहता। चाहे वह दुश्मन ही क्यों ना हो। बॉक्सर ने दोबारा कहा।

57:38

Speaker A

उसकी आंखों में आंसू थे। तभी कोई चिल्लाया। मौली कहां है? मौली सच में गायब थी। सब बहुत घबरा गए। लगा कि शायद आदमी उसे नुकसान पहुंचाकर अपने साथ ले गए। आखिर में वह अपने तबेले में मिली। उसने घास के ढेर में अपना मुंह

57:57

Speaker A

छिपा रखा था। जैसे ही बंदूक की आवाज हुई थी, वह डर कर भाग गई थी। जब बाकी जानवर उसे ढूंढकर लौटे, तो देखा कि वह लड़का जिसे बॉक्सर ने मारा था, वह बस बेहोश था। वह होश में आते ही वहां से 9 2 11 हो गया। अब सब जानवर फिर से जमा हुए। सब बहुत खुश

58:20

Speaker A

थे। हर कोई जोरजोर से बता रहा था कि उसने लड़ाई में कैसे दुश्मनों के छुड़ाए। फौरन जीत का जश्न मनाया गया। झंडा फहराया गया और इंग्लैंड के जानवर गाना कई बार गाया गया। फिर उस मरी हुई भेड़ को मिट्टी दी गई। उसकी कब्र पर एक छोटा पेड़ लगाया

58:39

Speaker A

गया। स्नोबॉल ने वहां सबको समझाया कि जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म के लिए अगर जान भी देनी पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। सब जानवरों ने एक राय होकर तय किया कि बहादुरी के लिए एक इनाम दिया जाएगा। इसका

58:58

Speaker A

नाम रखा गया जानवर वीर पहला दर्जा। यह इनाम उसी वक्त स्नोबॉल और बॉक्सर को दिया गया। यह पीतल का एक मेडल था। असल में वे घोड़े के कमरे में मिले पीतल के पुराने टुकड़े थे। इन्हें इतवार और छुट्टी के दिनों में

59:16

Speaker A

पहनना तय हुआ। एक और इनाम जानवर वीर दूसरा दर्जा भी बनाया गया। यह उस भेड़ को दिया गया जो जंग में मर गई थी। इस बात पर खूब बहस हुई कि इस जंग को क्या नाम दिया जाए?

59:31

Speaker A

आखिर में इसका नाम इंसानों की लड़ाई रखा गया। बैटल ऑफ द काऊ शेड। क्योंकि जानवरों ने यही गौशाला में छिपकर हमला किया था। कीचड़ में मिस्टर जों्स की बंदूक पड़ी मिली थी। सबको पता था कि घर में गोलियां भी रखी हैं। तय हुआ कि इस बंदूक को झंडे

59:51

Speaker A

के नीचे एक तोप की तरह रखा जाएगा। इसे साल में दो बार चलाया जाएगा। एक बार 12 अक्टूबर को इंसानों की लड़ाई की याद में और एक बार गर्मी के उस दिन जब पहली बगावत हुई थी। जैसे-जैसे कड़ाके की ठंड पड़ी, मौली के नखरे और भी ज्यादा बढ़ गए। वह रोज सुबह

60:15

Speaker A

काम पर देरी से आती। वह बहाना बनाती कि उसकी आंख नहीं खुली। वह कहती कि उसके शरीर में अजीब सा दर्द है। पर उसका खाना पीना पहले जैसा ही तगड़ा था। वह किसी ना किसी बहाने काम छोड़कर भाग जाती और पानी के तालाब के पास जाकर खड़ी हो जाती। वहां वह

60:34

Speaker A

पागलों की तरह पानी में बस अपना ही चेहरा निहारती रहती। पर कुछ और भी डरावनी बातें सुनने में आ रही थी। एक बार जब मौली मजे में अपनी पूंछ हिलाती और घास चबाती हुई आंगन में आई तो क्लोवर उसे एक तरफ ले गई। क्लोअर बोली

60:52

Speaker A

मौली मुझे तुझसे एक बहुत जरूरी बात करनी है। आज सुबह मैंने तुझे उस बाढ़ के पास देखा जो हमारे जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म और फक्सवूड को अलग करती है। वहां मिस्टर पकिंटन का एक आदमी खड़ा था। मैं दूर थी पर मुझे पक्का यकीन है कि वह तुझसे

61:10

Speaker A

बात कर रहा था और तू उसे अपनी नाक सहलाने दे रही थी। इसका क्या मतलब है मौली?

61:16

Speaker A

मौली जमीन पर पैर पटकने लगी और चिल्लाई। नहीं वह मेरा नाम नहीं ले रहा था। मैं वहां नहीं थी। यह सब झूठ है। मौली मेरी आंखों में आंखें डालकर देख। क्या तू कसम खाकर कह सकती है कि वह आदमी तेरी नाक नहीं सहला रहा था। मौली ने फिर कहा कि यह झूठ

61:34

Speaker A

है। पर वह क्लोअर से आंख नहीं मिला पाई। अगले ही पल वह वहां से भाग खड़ी हुई और खेत की तरफ निकल गई। क्लोअर को कुछ शक हुआ। उसने किसी से कुछ नहीं कहा और चुपके से मौली के तबेले में चली गई। उसने अपने खुर से वहां बिछी घास

61:53

Speaker A

को हटाकर [संगीत] देखा। घास के नीचे चीनी के टुकड़ों का एक छोटा सा ढेर और ढेर सारे रंग बिरंगे रिबन छिपे हुए थे। तीन दिन बाद मौली गायब हो गई। हफ्तों तक किसी को नहीं पता था कि वह कहां है। फिर

62:11

Speaker A

कबूतरों ने खबर दी कि उन्होंने उसे शहर की दूसरी तरफ देखा है। वह एक बढ़िया लाल काली घोड़ा गाड़ी खींच रही [हंसी] थी। वह गाड़ी एक शराब खाने के बाहर खड़ी थी। एक मोटा लाल मुंह वाला आदमी मौली की नाक सहला रहा था और उसे छीनी खिला रहा था। मौली के बाल

62:32

Speaker A

संवारे हुए थे और उसने माथे पर लाल रिबन बांध रखा था। कबूतर बोले कि वह बहुत मजे में लग रही थी। उसके बाद खेत के किसी जानवर ने कभी मौली का नाम नहीं लिया। जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड पड़ी। जमीन लोहे जैसी सख्त हो गई थी। मिट्टी

62:53

Speaker A

इतनी कड़ी थी कि खेत में कोई काम नहीं हो सकता था। सब जानवर बड़े तबेले में मीटिंग करते थे। बड़े सूअर अगले मौसम के काम की योजना बनाने में लगे रहते। अब यह सबने मान लिया था कि बड़े सूअर ही खेत के सारे फैसले करेंगे। क्योंकि वे बाकी जानवरों से

63:12

Speaker A

कहीं ज्यादा चालाक थे। बस उनके हर फैसले पर सबकी राय ली जाती थी। यह तरीका अच्छा चल सकता था। पर स्नोबॉल और नेपोलियन की आपस में कभी नहीं पड़ती थी। वे हर बात पर एक दूसरे को उल्टा ही बोलते थे। अगर एक कहता कि इस खेत में जॉब बोना

63:31

Speaker A

है तो दूसरा पक्का कहता कि नहीं यहां कुछ और बोना चाहिए। हर किसी के अपने मानने वाले थे और मीटिंग में खूब बहस होती थी। स्नोबॉल अपनी बातों से सबको मना लेता था। पर नेपोलियन पीछेछे लोगों को अपनी तरफ करने में लगा रहता।

63:52

Speaker A

उसने भेड़ों को अपनी तरफ करने में बड़ी कामयाबी पाई थी। अब भेड़ों को जब देखो तब चिल्लाने की आदत पड़ गई थी। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। वे अक्सर मीटिंग के बीच में ही चिल्लाना शुरू कर देती थी। देखा गया कि जब भी स्नोबॉल कोई बहुत जरूरी

64:10

Speaker A

बात कह रहा होता तभी भेड़े शोर मचाने लगती। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। स्नोबॉल ने घर में मिली पुरानी किताबों को पढ़कर खेती सुधारने के नए-नए तरीके सोचे थे। वह नालियों और खाद के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करता। उसने एक ऐसा तरीका

64:29

Speaker A

सोचा था जिससे सारा गोबर सीधे खेत में गिरे ताकि ढोने की मेहनत बच सके। नेपोलियन के पास अपनी कोई योजना नहीं थी। वह बस चुपचाप कहता कि स्नोबॉल की बातें किसी काम की नहीं है। वह बस सही मौके का इंतजार कर रहा था। पर उनकी सबसे बड़ी और कड़वी लड़ाई

64:50

Speaker A

विंड मिल यानी पवन चक्की को लेकर हुई। घास के बड़े मैदान में घर से थोड़ी ही दूर एक ऊंचा टीला था। वह पूरे खेत की सबसे ऊंची जगह थी। स्नोबॉल ने वहां की जमीन को अच्छे से देखा। उसने कहा कि यह जगह विंडमिल बनाने के लिए सबसे बढ़िया है।

65:10

Speaker A

उसने बताया कि इससे बिजली बनेगी। कोठरियों में रोशनी आएगी और सर्दियों में सब गर्म रहेंगे। उसने यह भी कहा कि बिजली से मशीनें चलेंगी। लकड़ी काटने, चारा [संगीत] काटने और गाय का दूध निकालने के लिए मशीनें आ जाएंगी। जानवरों ने ऐसी बातें

65:29

Speaker A

पहले कभी नहीं सुनी थी। उनका खेत पुराना था और वहां कोई मशीन नहीं थी। वे सब हैरानी से उसकी बातें सुनने लगे। स्नोबॉल उन्हें जादुई मशीनों के सपने दिखा रहा था। वह कहता कि मशीनें सारा काम कर देंगी। जानवर मजे से खेत में घूमेंगे,

65:49

Speaker A

बातें करेंगे और पढ़ाई करेंगे। कुछ ही हफ्तों में स्नोबॉल ने विंडमिल का पूरा नक्शा तैयार कर लिया। उसने जस के पुराने किताबों से यह सब सीखा था। उसने मुर्गियों वाले एक पुराने कमरे को अपना दफ्तर बना लिया था। वहां का फर्श लकड़ी का

66:08

Speaker A

और एकदम चिकना था। उस पर लकीरें खींचना आसान था। वह घंटों उस कमरे में बंद रहता। वह पत्थरों से किताबों को खुला रखता। अपने खुर के बीच चौक फंसाकर वह यहां वहां दौड़ता। वह फर्श पर एक के बाद एक लकीरें

66:25

Speaker A

खींचता और खुशी से चिल्लाता। धीरे-धीरे फर्श पर बहुत सारे पहिए और पुरजे दिखने लगे। बाकी जानवरों को कुछ समझ तो नहीं आता था पर वे बड़े खुश होते थे। वे रोज स्नोबॉल के नक्शे देखने आते। मुर्गियां और बत्तखे भी बहुत ध्यान से

66:44

Speaker A

चलती ताकि लकीरें ना मिट जाए। बस नेपोलियन ही दूर रहता था। उसने शुरू से ही कह दिया कि वह विंडमिल के खिलाफ है। पर एक दिन वह अचानक नक्शों को देखने पहुंच गया। वह भारी कदमों से कमरे में घूमा। उसने एक-एक लकीर को गौर से देखा। उन्हें एक दो बार सूंघा।

67:07

Speaker A

फिर चुपचाप खड़ा होकर उन्हें तिरछी नजरों से देखने लगा। अचानक उसने अपना पैर उठाया और उन नक्शों पर पेशाब कर दिया। फिर बिना एक शब्द बोले वहां से बाहर चला गया। पूरा खेत इस विंडमिल की बात को लेकर दो हिस्सों में बट गया था। स्नोबॉल ने यह

67:26

Speaker A

नहीं छिपाया कि इसे बनाना बहुत टेढ़ी खीर है। पत्थर तोड़कर लाने होंगे और उसे ऊंची दीवारें खड़ी करने होंगी। फिर बिजली बनाने वाली मशीनें और तार भी चाहिए होंगे। यह मशीनें कहां से आएंगी? यह स्नोबॉल ने साफ नहीं बताया। पर उसका दावा था कि एक साल

67:45

Speaker A

में सब तैयार हो जाएगा। उसका कहना था कि उसके बाद मेहनत इतनी कम हो जाएगी कि जानवरों को हफ्ते में सिर्फ तीन दिन काम करना पड़ेगा। दूसरी तरफ नेपोलियन का कहना था कि अभी सबसे ज्यादा जरूरत ज्यादा अनाज उगाने की

68:04

Speaker A

है। उसने डराया कि अगर विंडमिल के चक्कर में समय खराब किया तो सब भूख से मर जाएंगे। जानवरों की दो टोलियां बन गई और नए नारे लगने लगे। एक टोली कहती स्नोबॉल को चुनो और हफ्ते में तीन दिन आराम पाओ। दूसरी टोली कहती नेपोलियन को चुनो और भरा

68:23

Speaker A

हुआ पेट पाओ। सिर्फ गधा बेंजमिन ही था जो किसी की तरफ नहीं था। उसे ना तो ज्यादा खाने की उम्मीद थी और ना ही यह यकीन था कि विंडमिल से काम कम होगा। उसका कहना था कि विंडमिल बने या ना बने जिंदगी वैसे ही चलेगी जैसी हमेशा

68:42

Speaker A

से चली है। यानी कि बहुत ही बुरी। झगड़ा सिर्फ विंडमिल का नहीं था। खेत को बचाने का भी था। सबको पता था कि भले ही इंसानों की लड़ाई में आदमी हार गए थे पर वे मिस्टर जों्स को वापस लाने के लिए फिर से हमला कर सकते

68:59

Speaker A

हैं। इंसानों के मन में डर और गुस्सा और भी बढ़ गया था क्योंकि उनके हारने की खबर हर गांव में फैल गई थी। इससे दूसरे खेतों के जानवर भी बगावत करने के लिए उतावले हो रहे थे। यहां भी नेपोलियन और स्नोबॉल की आपस में

69:16

Speaker A

ठन गई। नेपोलियन का कहना था कि हमें बंदूके ढूंढनी चाहिए और उन्हें चलाना सीखना चाहिए। पर स्नोबॉल का कहना था कि हमें और भी ज्यादा कबूतर भेजने चाहिए ताकि हर खेत के जानवर बगावत कर दें। एक का कहना था कि अगर हम अपनी रक्षा नहीं कर पाए तो

69:36

Speaker A

कोई भी हमें जीत लेगा। दूसरे का कहना था कि अगर हर जगह बगावत हो गई तो हमें अपनी रक्षा करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बेचारे जानवर कभी नेपोलियन को सुनते तो कभी स्नो बॉल को। उन्हें समझ ही नहीं आता था कि कौन सही बोल रहा है। सच तो यह था कि

69:57

Speaker A

जो जानवर उस वक्त बोल रहा होता उन्हें उसी की बात सही लगती थी। आखिर वह दिन आ ही गया जब स्नोबॉल ने अपना सारा नक्शा पूरा कर लिया। अगले इतवार की पंचायत में इस बात पर वोट डलने थे कि विंडमिल का काम शुरू हो या नहीं। जब सब

70:17

Speaker A

जानवर बड़े तबेले में जमा हुए स्नो बॉल खड़ा हुआ। बीच-बीच में भड़े में मियां आकर शोर कर रही थी। पर उसने सबको समझाया कि वह विंड मिल बनाना क्यों जरूरी है। फिर नेपोलियन खड़ा हुआ। उसने बहुत धीरे से कहा कि यह विंड मिल बेकार की चीज है और कोई भी

70:35

Speaker A

इसके लिए वोट ना दे। वह बस 30 सेकंड बोला और फिर बैठ गया। ऐसा लगा जैसे उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि कोई उसकी बात मान रहा है या नहीं। यह देखकर स्नो बॉल झपट कर खड़ा हुआ। उसने शोर मचा दी भेड़ों को चुप कराया और विंडमिल के

70:54

Speaker A

हक में बहुत जोरदार बात कही। अब तक जानवर आधे-आधे बटे थे। पर स्नोबॉल की बातों ने सबका दिल जीत लिया। उसने ऐसी दुनिया का सपना दिखाया जहां जानवरों की पीठ से कमर तोड़ मेहनत का बोझ उतर जाएगा। उसने बताया कि बिजली से चारा काटने और

71:13

Speaker A

अनाज साफ करने की मशीनें चलेंगी। हर कोठरी में रोशनी होगी और सर्दियों में सबको गर्माहट मिलेगी। जब उसने अपनी बात खत्म की तो साफ था कि जीत स्नोबॉल की ही होगी। पर तभी नेपोलियन खड़ा हुआ। उसने स्नोबॉल को तिरछी नजर से

71:31

Speaker A

देखा और एक ऐसी अजीब और तेज आवाज निकाली जो पहले कभी किसी ने नहीं सुनी थी। तभी बाहर से कुत्तों के भौकने की डरावनी आवाजें आई। नौ बहुत बड़े और खूंखार कुत्ते जिनके गले में पीतल के पट्टे थे दौड़ते हुए तबेले के अंदर घुस आए। वे सीधे

71:51

Speaker A

स्नोबॉल की तरफ झपटे। [संगीत] स्नोबॉल बस बाल-बाल बचा और अपनी जगह से कूदा। अगले ही पल वह दरवाजे से बाहर था और कुत्ते उसके पीछे पड़े थे। सब जानवर इतने डर गए कि किसी के मुंह से आवाज नहीं निकली। वेब बस दरवाजे पर खड़े

72:09

Speaker A

होकर उस भागदौड़ को देखने लगे। स्नोबॉल सड़क की तरफ जाने वाले मैदान में अपनी जान बचाकर भाग रहा था। वह पूरी ताकत लगाकर दौड़ रहा था। पर कुत्ते उसके एकदम पीछे थे। अचानक उसका पैर फिसल गया और लगा कि अब उसकी मौत पक्की है। पर वह फिर से उठा और

72:29

Speaker A

पहले से भी तेज भागा। कुत्ते फिर उसके पास पहुंच गए। एक कुत्ते ने तो स्नोबॉल की पूंछ पकड़ ही ली थी। पर उसने झटके से अपनी पूंछ छुड़ाई। आखिर में उसने अपनी पूरी जान झोंक दी और एक बाढ़ के एक छेद से बाहर निकल गया।

72:47

Speaker A

उसके बाद वह दोबारा कभी नहीं दिखा। सब जानवर डर के मारे चुपचाप तबेले में वापस रेंग आए। कुछ ही पल में वे कुत्ते भी छलांगे मारते हुए वापस आ गए। पहले तो किसी को समझ नहीं आया कि यह आदमखोर जीव कहां से आए। पर जल्दी ही सारा भेद खुल गया। यह वही

73:08

Speaker A

पिल्ले थे जिन्हें नेपोलियन उनकी मांओं से अलग ले गया था और चुपके से पाला था। वे भी पूरी तरह जवान नहीं हुए थे। पर दिखने में भेड़ियों जैसे खूंखार और बड़े थे। वे नेपोलियन के पैरों के पास ही रहे। देखा गया कि वे नेपोलियन को देखकर वैसे ही

73:27

Speaker A

अपनी पूंछ हिला रहे थे जैसे पुराने कुत्ते मिस्टर जों्स के आगे हिलाया करते थे। नेपोलियन उन कुत्तों के साथ उस ऊंची जगह पर चढ़ा जहां पहले मेजर बैठा करता था। उसने ऐलान किया कि अब सेतवार की पंचायत खत्म। उसने कहा कि यह सब बेमतलब की बातें

73:48

Speaker A

हैं और इनमें सिर्फ वक्त बर्बाद होता है। [संगीत] आगे से खेत का जो भी काम होगा उसे बड़े सूअर की एक खास मंडली तय करेगी और उसका मुखिया वह खुद होगा। वे बंद कमरे में मिलेंगे और बाद में दूसरों को अपना फैसला सुना देंगे।

74:05

Speaker A

जानवर अब भी इतवार की सुबह झंडा फहराने और गाना गाने के लिए जमा होंगे और हफ्ते भर का हुक्म सुनेंगे। पर अब कोई बहस नहीं होगी। स्नोबॉल को भगाए जाने से जानवर पहले ही सदमे में थे और अब इस नई बात से उनका मन

74:21

Speaker A

और भी बैठ गया। अगर उन्हें अपनी बात कहनी आती तो कई जानवर इसका विरोध जरूर करते। यहां तक कि बॉक्सर भी थोड़ा परेशान दिखा। उसने अपने कान पीछे किए और कई बार अपना सिर झटक कर सोचने की कोशिश की। पर आखिर में उसे कुछ सूझा ही नहीं।

74:42

Speaker A

लेकिन कुछ छोटे सूअरों ने हिम्मत दिखाई। आगे की लाइन में बैठे चार सूअर चीख-चीख कर इसका विरोध करने लगे। पर तभी नेपोलियन के पास बैठे कुत्तों ने बहुत ही डरावनी आवाज निकाली और वे बुरी तरह घुर्राने लगे। उन सुरों के मुंह पर ताला लग गया और वे डर

75:01

Speaker A

के मारे दुम दबाकर बैठ गए। फिर बहनों ने जोरजोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। वे करीब 15 मिनट तक यही चिल्लाती रही और किसी के भी बोलने का कोई मौका नहीं बचा। इसके बाद इस क्वीलर को पूरे खेत में भेजा

75:22

Speaker A

गया ताकि वह सबको नए तरीके के बारे में समझा सके। उसने कहा साथियों मुझे यकीन है कि यहां हर जानवर यह समझ रहा होगा कि साथी नेपोलियन ने अपने ऊपर यह भारी काम लेकर कितनी बड़ी कुर्बानी दी है। साथियों ऐसा मत सोचना कि मालिक बनना कोई मजे का काम

75:42

Speaker A

है। इसके उलट यह तो बहुत गहरी और भारी जिम्मेदारी है। नेपोलियन इस बात को सबसे ज्यादा मानता है कि सब जानवर बराबर हैं। वह तो बहुत खुश होता अगर तुम अपने फैसले खुद ले पाते। पर साथियों कभी-कभी तुम गलत फैसला भी तो ले सकते हो। फिर हमारा क्या

76:01

Speaker A

होगा? सोचो अगर तुमने उस स्नोबॉल की बात मान ली होती जो अपनी विंडम के झूठे सपने दिखा रहा था। वही स्नोबॉल जिसके बारे में अब हमें पता चला कि वह एक अपराधी से कम नहीं था। किसी ने धीरे से कहा, पर वह इंसानों की

76:21

Speaker A

लड़ाई में बहुत बहादुरी से लड़ा था। स्कूलर बोला, सिर्फ बहादुरी काफी नहीं है। वफादारी और बात मानना उससे भी ज्यादा जरूरी है। और जहां तक उस लड़ाई की बात है, मुझे यकीन है कि एक दिन हमें पता चलेगा कि स्नोबॉल का काम उतना बड़ा भी नहीं था

76:39

Speaker A

जितना बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है। साथियों, अब हमें लोहे जैसी सख्ती चाहिए। बस यही आज का मंत्र है। हमारा एक गलत कदम और दुश्मन हम पर चढ़ जाएंगे। प्यारे साथियों तुम जोस को तो वापस देखना नहीं चाहते है ना।

77:00

Speaker A

एक बार फिर इस बात का कोई जवाब नहीं था। जानवर जस को वापस नहीं चाहते थे। अगर इतवार की पंचायत में बहस करने से जस के आने का खतरा था तो बहस बंद होनी ही चाहिए थी। बॉक्सर ने जिसे अब सोचने का थोड़ा समय मिल गया था सबकी तरफ से कहा अगर साथी

77:22

Speaker A

नेपोलियन कह रहे हैं तो वह ठीक ही होगा और उसी दिन से उसने एक नया मंत्र अपना लिया नेपोलियन हमेशा सही होता है और उसका पुराना नारा तो था ही मैं और ज्यादा मेहनत करूंगा अब मौसम बदल गया था खेतों में हल चलाने का

77:41

Speaker A

काम शुरू हो गया था वह कमरा जहां स्नोबॉल ने विंडमिल का नक्शा बनाया था। अब बंद कर दिया गया। सब ने मान लिया कि फर्श से वे सारे निशान मिटा दिए गए होंगे। हर इतवार की सुबह 10:00 बजे सब जानवर बड़े तबेले में जमा होते। वहां उन्हें हफ्ते भर

78:01

Speaker A

के हुक्म सुनाए जाते। बूढ़े मेजर की खोपड़ी अब जमीन से बाहर निकाल ली गई थी। उस पर से सारा मांस गल चुका था। उसे झंडे और बंदूक के पास एक लकड़ी के खूंटे पर रख दिया गया। अब तबेले में जाने से पहले हर जानवर को उस खोपड़ी

78:21

Speaker A

के सामने बहुत इज्जत से झुक कर निकलना पड़ता था। अब बैठने का तरीका भी बदल गया था। नेपोलियन स्क्वलर और मिनीस नाम का एक और सूअर जो बहुत अच्छे गाने और कविताएं लिखता था। उसी जगह पर सबसे आगे बैठते।

78:40

Speaker A

उनके चारों तरफ वे नौ खूंखार कुत्ते घेरा बनाकर खड़े रहते। बाकी बड़े सूअर उनके पीछे बैठते। खेत के बाकी सब जानवर उनके सामने नीचे बैठते। नेपोलियन एक कड़क फौजी की तरह हुक्म सुनाता। बस एक बार इंग्लैंड के जानवर गाना गाया जाता और सबको काम पर भेज दिया जाता।

79:05

Speaker A

स्नोबॉल के जाने के तीसरे हफ्ते नेपोलियन ने सबको चौंका दिया। उसने ऐलान किया कि आखिर विंड मिल बनाई ही जाएगी। उसने यह नहीं बताया कि उसने अपना मन क्यों बदला। उसने बस जानवरों को चेतावनी दी कि इस फालतू काम की वजह से उन्हें बहुत खटना

79:24

Speaker A

पड़ेगा और उनकी कमर टूट जाएगी। उसने यहां तक कहा कि शायद सबका राशन भी कम करना पड़े। उसने बताया कि सारा नक्शा तैयार है। पिछले तीन हफ्तों से बड़े सूअर की एक टोली इस पर काम कर रही थी।

79:41

Speaker A

उसी शाम स्कूलर ने चुपके से सबको समझाया कि नेपोलियन ने कभी भी विंडमिल का विरोध नहीं किया था। सच तो यह है कि सबसे पहले यह बात नेपोलियन के दिमाग में ही आई थी। स्नोबॉल ने तो नेपोलियन के कागजों से यह नक्शा चुराकर फर्श पर बनाया था। असल में

80:01

Speaker A

विंडमिल नेपोलियन की ही देन थी। किसी ने धीरे से पूछा तो फिर नेपोलियन ने इसके खिलाफ इतनी बातें क्यों की थी? तब स्क्वलर ने बहुत ही चालाकी से सबको देखा। उसने कहा कि यही तो साथी नेपोलियन की चाल थी। उन्होंने बस स्नोबॉल को रास्ते

80:20

Speaker A

से हटाने के लिए यह नाटक किया था। क्योंकि स्नोबॉल एक बुरा जानवर था और सबको बिगाड़ रहा था। अब जब स्नोबॉल का पत्ता कट चुका है तो काम बिना किसी रोक-टोक के चलेगा। स्कूलर हंसते हुए और अपनी पूंछ हिलाते हुए बार-बार कहता रहा, यह तो बस एक चाल थी

80:40

Speaker A

साथियों, बस एक चाल। बेचारे जानवरों को इस चाल का मतलब तो समझ नहीं आया। पर स्क्वलर इतनी चिकनी चुपड़ी बातें कर रहा था और उसके साथ खड़े तीन खूंखार कुत्ते इतनी बुरी तरह घुरा रहे थे कि किसी ने दोबारा मुंह खोलने की हिम्मत

80:59

Speaker A

नहीं की। उस पूरे साल जानवरों ने गुलामों की तरह काटा पर वे अपने काम में खुश थे। उन्होंने अपनी जान लगा दी। उन्हें पता था कि वे जो भी कर रहे हैं, वह उनके अपने और उनके बच्चों के भले के लिए है। और वे उन आलसी और चोर इंसानों के लिए काम नहीं कर रहे

81:24

Speaker A

थे। पूरी बसंत और गर्मी में उन्होंने हफ्ते में 60 घंटे काम किया। अगस्त के महीने में नेपोलियन ने ऐलान किया कि अब इतवार की दोपहर को भी काम करना होगा। कहने को तो यह काम अपनी मर्जी से करना था। पर जो जानवर काम पर नहीं आता उसका राशन आधा कर दिया जाता था। मिट्टी

81:47

Speaker A

ढोते ढोते सबकी कमर टूट गई थी। फिर भी बहुत से काम अधूरे रह गए। इस बार फसल पिछले साल जितनी अच्छी नहीं हुई। दो खेतों में तो बुवाई ही नहीं हो पाई क्योंकि हल चलाने का काम समय पर पूरा नहीं हुआ था। साफ दिख रहा था कि आने वाली सर्दी बहुत

82:07

Speaker A

मुश्किल होगी और पेट भूख से जलेगा। विंडमिल बनाने में ऐसी मुसीबतें आई जिनके बारे में किसी ने सोचा नहीं था। खेत में चूने के पत्थर की एक बड़ी खान थी। एक कोठरी में रेत और सीमेंट भी मिल गया था। यानी सामान तो सब पास ही था। पर बड़ी

82:27

Speaker A

समस्या यह थी कि पत्थरों को छोटे टुकड़ों में कैसे तोड़ा जाए। पत्थरों को तोड़ने के लिए जो औजार चाहिए थे उन्हें चलाने के लिए पिछले पैरों पर खड़ा होना पड़ता था और कोई भी जानवर ऐसा नहीं [संगीत] कर सकता था। हफ्तों की बेकार मेहनत के बाद किसी को एक

82:47

Speaker A

तरकीब सूझी। खान में पत्थरों के बहुत बड़े-बड़े टुकड़े पड़े थे। जानवरों ने उन पर रस्सियां बांधी। फिर सब मिलकर गाय, घोड़े, भेड़े और जो भी रस्सी पकड़ सकता था [संगीत] उन्हें धीरे-धीरे खींच कर ख्यान के ऊपर ले आते। बड़े स्वर भी कभी-कभी

83:06

Speaker A

मुश्किल समय में मदद के लिए आ जाते। पत्थर को छोटी तक ले जाने में जानवरों का कछू मर निकल जाता था। वे ऊपर ले जाकर पत्थर को नीचे गिरा देते। नीचे गिरते ही पत्थर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते। एक बार पत्थर टूट गया तो उसे ढोना आसान था। घोड़े

83:27

Speaker A

गाड़ियों में पत्थर ले जाते। भेड़े एक-एक पत्थर खींचती। यहां तक कि म्यूरियल और बेंजामिन ने भी एक पुरानी गाड़ी में खुद को जोत लिया। गर्मी खत्म होते-होते काफी पत्थर जमा हो गए। फिर बड़े सूअर की देखरेख में विंडमिल

83:44

Speaker A

बनाने का काम शुरू हुआ। काम बहुत धीमा था। मेहनत करते करते सबकी कमर टूट गई थी। एक बड़े पत्थर को ऊपर तक खींचने में ही पूरा दिन बीत जाता। कभी-कभी पत्थर नीचे गिरने पर भी नहीं टूटता था। तब सब जानवरों की हिम्मत जवाब दी जाती थी। पर

84:05

Speaker A

बॉक्सर की ताकत सब जानवरों के बराबर थी। उसके बिना कुछ भी नहीं हो पाता। जब पत्थर फिसलने लगता और सब डर जाते तब बॉक्सर ही रस्सी को कसकर थाम लेता। उसे धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते देखकर सब हैरान रह जाते। उसकी सांस तेजी से चलती। उसके

84:25

Speaker A

खुर जमीन को खुरशते। उसका पूरा बदन पसीने से भीग जाता। क्लोअर उसे समझाती कि भाई इतनी मेहनत मत कर। पर बॉक्सर किसी की नहीं सुनता। उसके पास हर मुश्किल का बस एक ही जवाब था। मैं और ज्यादा मेहनत करूंगा। और नेपोलियन हमेशा सही होता है। उसने मुर्गे

84:47

Speaker A

से कह दिया था कि उसे अब और भी जल्दी जगाए। जब भी उसे थोड़ा खाली समय मिलता वह अकेला ही पत्थर ढूंढने निकल जाता। पूरी गर्मी में जानवरों ने बहुत घटा। पर उनका हाल उतना बुरा नहीं था। खाना लगभग उतना ही मिल रहा था जितना जूस के समय

85:06

Speaker A

मिलता था। बस एक ही सुख था कि अब उन्हें पांच निकम्मे और चोर इंसानों का पेट नहीं भरना पड़ता था। जानवरों का काम करने का ढंग इंसानों से कहीं बेहतर था। घास-फूस साफ करने में वे एक्सपर्ट [संगीत] थे। अब कोई चोरी नहीं होती थी। इसलिए खेत की

85:26

Speaker A

घेराबंदी करने और दरवाजों की मरम्मत की मेहनत भी बच गई। पर जैसे-जैसे दिन बीते कुछ चीजों की कमी होने लगी। मिट्टी का तेल, कीलें, रस्सी और कुत्तों के बिस्किट खेत में नहीं बनते थे। आगे चलकर बीज और खाद की भी जरूरत पड़ने वाली थी। और सबसे

85:46

Speaker A

बड़ी बात विंड मिल की मशीनें कहां से आएंगी। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कैसे होगा। एक इतवार की सुबह जब सब जानवर हुक्म सुनने आए तो नेपोलियन ने एक नई बात कही। उसने ऐलान किया कि अब से जानवरों का खेत यानी

86:04

Speaker A

एनिमल फार्म पड़ोस के खेतों के साथ लेनदेन करेगा। उसने सफाई दी कि यह कोई मुनाफा कमाने के लिए नहीं है। यह तो बस उन चीजों को पाने के लिए है जो विंडमिल बनाने के लिए बहुत जरूरी है। नेपोलियन ने कहा कि विंडमिल का काम सबसे ऊपर है। इसलिए वह घास का एक बड़ा ढेर और

86:26

Speaker A

इस साल के गेहूं का कुछ हिस्सा बेचने जा रहा है। अगर और पैसों की जरूरत पड़ी तो मुर्गियों के अंडे भी शहर के बाजार में बेचे जाएंगे। नेपोलियन ने कहा कि मुर्गियों को विंडमिल के लिए खुशी-खुशी यह कुर्बानी देनी चाहिए।

86:43

Speaker A

यह सुनकर जानवरों के मन में फिर से खलबली मच गई। क्या जोस को भगाने के बाद पहली पंचायत में यह तय नहीं हुआ था कि हम इंसानों से कोई नाता नहीं रखेंगे?

86:55

Speaker A

क्या यह नहीं कहा गया था कि हम कभी व्यापार नहीं करेंगे और पैसों को हाथ नहीं लगाएंगे। सबको धुंधला धुंधला ऐसा याद आ रहा था। वेचार छोटे सूअर फिर से विरोध में कुछ बोलने के लिए खड़े हुए। पर नेपोलियन के

87:12

Speaker A

कुत्तों ने इतने जोर से घुर्राया कि उनके मुंह पर ताला लग गया। फिर हमेशा की तरह भेड़ों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे, चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। इससे सारा माहौल फिर से वैसा ही हो गया।

87:32

Speaker A

आखिर में नेपोलियन ने अपना खुर उठाकर सबको चुप कराया। उसने कहा कि उसने सारा इंतजाम कर लिया है। किसी भी जानवर को इंसानों के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह सारा बोझ खुद अपने कंधों पर उठाएगा। शहर का एक आदमी मिस्टर विमपर हमारे और

87:53

Speaker A

बाहर की दुनिया के बीच बिछौलिया बनेगा। वह हमारे काम के लिए हर सोमवार सुबह यहां आएगा और हुकुम लेकर जाएगा। नेपोलियन ने जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म जिंदाबाद का नारा लगाया। इंग्लैंड के जानवर गाना गाकर सबको छुट्टी दे दी गई।

88:16

Speaker A

बाद में स्कूलर पूरे खेत में घूमा। उसने सबको समझाया कि डरो मत। उसने यकीन दिलाया कि व्यापार करने या पैसा इस्तेमाल ना करने का कोई फैसला कभी हुआ ही नहीं था। उसने कहा कि यह सब तुम्हारी सोच है। यह सब स्नोबॉल के फैलाए झूठ है। कुछ जानवरों को

88:36

Speaker A

अब भी शक था। पर स्कूल ने चालाकी से पूछा। साथियों, क्या तुम्हें पक्का पता है कि तुमने यह सपना नहीं देखा? क्या इसका कोई लिखा हुआ सबूत है? क्या यह कहीं लिखा है?

88:49

Speaker A

अब क्योंकि कहीं कुछ लिखा नहीं था तो जानवरों ने मान लिया कि उनसे ही गलती हुई होगी। तबाद के अनुसार हर सोमवार मिस्टर व पर खेत पर आने लगा। वह छोटा और बहुत चालाक आदमी था। वह एक मामूली वकील था। पर वह इतना तेज था कि वह समझ गया था कि जानवरों

89:09

Speaker A

का खेत यानी एनिमल फार्म को एक बिचोलिए की जरूरत पड़ेगी। वह अपना हिस्सा अपना कमीशन पाने के लिए यहां आता था। जानवर उसे देखकर डर जाते थे। वे उससे दूर रहते थे। फिर भी जब वे देखते कि चार पैरों

89:26

Speaker A

वाला नेपोलियन दो पैरों वाले विंपर को हुक्म दे रहा है तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता। उन्हें लगा कि यह नया तरीका बुरा नहीं है। इंसानों के साथ अब रिश्ते बदल रहे थे। इंसान अब भी जानवरों का खेत यानी एनिमल

89:44

Speaker A

फार्म से जलते थे। बल्कि अब जब खेत फल फूल रहा था तो वे और भी ज्यादा जलने लगे। हर इंसान को लगता था कि यह खेत आज नहीं तो कल डूब जाएगा। वे कहते कि यह विंड मिल कभी नहीं बन पाएगी। वे शराबखानों में बैठकर एक दूसरे को बताते

90:03

Speaker A

कि विंड मिल गिर जाएगी। फिर भी वे मन ही मन जानवरों की मेहनत देखकर हैरान थे। और वे उसे पुराना खेत नहीं बल्कि उसके सही नाम एनिमल फार्म या जानवरों का खेत से बुलाने लगे थे। उन्होंने जों्स की मदद करना भी छोड़ दिया था। जस अब अपना खेत

90:24

Speaker A

वापस पाने की उम्मीद छोड़ चुका था और कहीं दूर जाकर रहने लगा था। बाहर की दुनिया से बस विमपर के जरिए ही बात होती थी। पर ऐसी खबरें आती रहती थी कि नेपोलियन अब किसी इंसान के साथ बड़ा सौदा करने वाला है। या तो वह फक्सवुड के मिस्टर

90:46

Speaker A

प्लिंकिंगटन के साथ हाथ मिलाएगा या फिंच फील्ड के मिस्टर फेडरी के साथ। पर वह एक साथ दोनों से बात नहीं करता था। इसी समय के करीब बड़े सूअर अचानक उस बड़े घर में रहने चले गए। जानवरों को फिर से धुंधला सा याद आया कि शुरू में इसके खिलाफ

91:07

Speaker A

एक फैसला हुआ था। पर स्कूलर ने फिर से उन्हें पट्टी पढ़ा दी कि ऐसा कुछ नहीं था। उसने कहा कि बड़े सूअर इस खेत का दिमाग है। उनके लिए शांति से काम करने की जगह होना बहुत जरूरी है। उसने अपने नेपोलियन को मालिक कहना शुरू कर दिया था। उसने कहा

91:26

Speaker A

कि मालिक के लिए एक गंदे बाड़े के बजाय घर में रहना ही ठीक है। इससे उनकी शान बढ़ती है। फिर भी कुछ जानवरों को बहुत बुरा लगा। उन्हें पता चला कि सूअर अब रसोई में खाना खाते हैं। वे बड़े कमरों में आराम करते

91:43

Speaker A

हैं। हद तो तब हो गई जब पता चला कि वह बिस्तरों पर सोते हैं। बॉक्सर ने हमेशा की तरह कह दिया नेपोलियन हमेशा सही होता है। पर क्लूअर को पक्का याद था कि बिस्तरों के खिलाफ कोई नियम था। वह तबेली की दीवार के पास गई। उसने वहां लिखे खेत के सात नियम

92:04

Speaker A

पढ़ने की कोशिश की। वह बस अलग-अलग अक्षर ही पढ़ पा रही थी। इसलिए उसने म्यूरल को बुलाया। उसने कहा, म्यूरल, अब मुझे चौथा नियम पढ़कर सुनाओ। क्या इसमें यह नहीं लिखा कि कोई जानवर कभी बिस्तर पर नहीं सोएगा।

92:21

Speaker A

म्यूरियल ने बड़ी मुश्किल से अक्षर जोड़े। उसने आखिर में सुनाया। लिखा है, कोई भी जानवर चादर वाले बिस्तर पर नहीं सोएगा। अजीब बात थी। क्लोअर को चादर वाली बात याद नहीं थी। पर अब जब दीवार पर साफ-साफ लिखा था तो उसे मानना ही पड़ा। तभी स्कूलर

92:41

Speaker A

दो-तीन खूंखार कुत्तों के साथ वहां से गुजरा। उसने सबको अपनी बातों के जाल में फंसाना शुरू कर दिया। स्क्वलर ने कहा तो साथियों, क्या तुमने सुना है कि हम बड़े सूअर अब घर के बिस्तरों पर सोते हैं और इसमें बुरा क्या

92:57

Speaker A

है? तुम्हें क्या लगा कि बिस्तरों के खिलाफ कभी कोई नियम था? बिस्तर का मतलब तो बस सोने की जगह होता है। अगर देखा जाए तो तबेले में विष घास भी एक बिस्तर ही है। नियम तो सिर्फ चादर के खिलाफ था क्योंकि वह इंसानों की बनाई चीज है। हमने घर के

93:16

Speaker A

बिस्तरों से चादर हटा दी है और कंबल में सोते हैं। वह बहुत आरामदेह बिस्तर हैं। पर साथियों हमें उतने आराम की जरूरत भी है। क्योंकि आजकल हमें सारा दिमाग चलाने का काम करना पड़ता है। तुम नहीं चाहोगे कि हम आराम ना करें।

93:35

Speaker A

क्या तुम चाहोगे कि हम इतने थक जाए कि अपना काम ना कर पाए? क्या तुम में से कोई भी चूस को वापस देखना चाहता है? जानवरों ने तुरंत उसकी बात मान ली। इसके बाद फिर किसी ने बिस्तरों की बात नहीं उठाई। जब कुछ दिनों बाद यह पता चला कि बड़े सूअर

93:53

Speaker A

बाकी जानवरों से एक घंटा देर से सोकर उठेंगे तो इस पर भी किसी ने कोई शिकायत नहीं की। सालकांत आते-आते जानवर थक कर चूर हो गए थे। पर वे खुश थे। पूरा साल बहुत भारी रहा। घास और अनाज का कुछ हिस्सा बेच दिया

94:10

Speaker A

गया था। इसलिए सर्दियों के लिए खाना बहुत कम बचा था और सबका पेट भूख से जलने लगा था। पर विंडमिल को देखकर सब अपना दुख भूल जाते थे। वह लगभग आधे बन चुकी थी। कटाई के बाद मौसम साफ था और जानवर पहले से भी ज्यादा मेहनत करने लगे। पत्थर ढोते ढोते

94:30

Speaker A

उनकी कमर टूट जाती थी। पर उन्हें लगता था कि दीवारों को एक फुट और ऊंचा करने के लिए यह मेहनत सही है। बॉक्सर तो रातों को भी चांद की रोशनी में घंटों अकेले काम करता था। जब भी थोड़ा खाली समय मिलता जानवर उस आधी बनी चक्की के चक्कर लगाते। वे उसकी

94:50

Speaker A

मजबूत दीवारों को देखकर हैरान होते कि उन्होंने इतनी बड़ी चीज कैसे बना ली। सिर्फ बूढ़ा बेंजमिन ही खुश नहीं होता था। [संगीत] वह हमेशा की तरह बस एक ही पहेली जैसा बात बोलता। गधे बहुत लंबी उम्र जीते हैं।

95:07

Speaker A

नवंबर का महीना आ गया। बहुत तेज हवाएं चलने लगी। बारिश इतनी थी कि सीमेंट मिलाना मुश्किल हो गया। काम रोकना पड़ा। फिर एक ऐसी रात आई जब तूफान बहुत भयानक था। खेत के मकान कांपने लगे। तबेले की छत से खपरेल उड़ गए। मुर्गियां डर के मारे चीखते हुए

95:28

Speaker A

जाग गई। उन्हें सपने में बंदूक चलने की आवाज सुनाई दी थी। सुबह जब जानवर बाहर आए तो उन्होंने देखा कि झंडा गिर गया है। बगीचे का एक बड़ा पेड़ मूली की तरह उखड़ गया था। तभी सबके गले से एक दुख भरी चीख निकल गई। उनकी

95:48

Speaker A

आंखों के सामने एक बहुत डरावना नजारा था। उनकी विंड मिल उनकी पवन चक्की टूट कर ढेर हो चुकी थी। सब जानवर पागलों की तरह वहां दौड़े। नेपोलियन जो हमेशा धीरे चलता था, वह सबसे आगे दौड़ रहा था। हां, उनकी सारी मेहनत

96:08

Speaker A

मिट्टी में मिल चुकी थी। जिन पत्थरों को उन्होंने अपनी कमर तुड़वाकर ढोया था, वे सब यहां वहां बिखरे पड़े थे। सब चुपचाप खड़े होकर उस मलबे को दुखी होकर देख रहे थे। नेपोलियन वहां चुपचाप टहलने लगा। वह जमीन को सूंघ रहा

96:26

Speaker A

था। उसकी पूंछ गुस्से में तन गई थी और जोरजोर से हिल रही थी। साफ था कि उसके दिमाग में कुछ चल रहा था। अचानक वह रुका जैसे उसने कोई फैसला कर लिया हो। उसने धीरे से कहा। साथियों क्या तुम्हें पता है यह सब किसने किया? क्या तुम उस

96:48

Speaker A

दुश्मन को जानते हो जो रात के अंधेरे में आया? और हमारे विंडमिल गिरा दी। फिर वह अचानक बिजली की तरह गरजा। स्नोबॉल। यह सब स्नोबॉल ने किया है। वह बेईमान हमें नीचा दिखाने और अपनी हार का बदला लेने के लिए रात को यहां रेंगते हुए आया। उसने हमारी

97:07

Speaker A

साल भर की मेहनत बर्बाद कर दी। साथियों मैं इसी वक्त स्नोबॉल को मौत की सजा सुनाता हूं। जो उसे पकड़वाएगा उसे इनाम में ढेर सारे सेब दिए जाएंगे। सब [नाक से की जाने वाली आवाज़] जानवर यह सुनकर सुन्न रह गए कि स्नोबॉल इतनी बड़ी

97:24

Speaker A

बेईमानी कर सकता है। सब गुस्से में शोर मचाने लगे। हर कोई उसे पकड़ने के नए-नए उपाय सोचने लगा। तब टीले से थोड़ी दूर घास पर एक सूअर ने पैरों के निशान देखे। वे निशान बस कुछ ही कदम तक थे और बाढ़ के एक छेद की तरफ जा रहे थे। नेपोलियन ने उन्हें

97:43

Speaker A

जोर से सूंघा। उसने कहा कि यह पक्का स्नोबॉल के ही पैर हैं। उसे लगा कि स्नोबॉल फक्सवुड खेत की तरफ से आया था। नेपोलियन चिल्लाया। साथियों, अब और देर नहीं। हमें बहुत काम निपटाना है। आज सुबह से ही हम फिर से विंड मिल खड़ी करना शुरू

98:03

Speaker A

करेंगे। चाहे सर्दी हो, बारिश हो या धूप, काम चलता रहेगा। हम उस गद्दार को सबक सिखा देंगे। उसे पता चलना चाहिए कि वह हमारी मेहनत को इतनी आसानी से खराब नहीं कर सकता। याद रखो साथियों, काम वैसे ही होगा जैसे

98:20

Speaker A

हमने तय किया था। एक भी दिन की देरी नहीं होगी। आगे बढ़ो साथियों। विंडमिल जिंदाबाद। जानवरों का खेत जिंदाबाद। कड़ाके की ठंड थी। बहुत बर्फ गिरी और पाला पड़ा। फरवरी तक बुरा हाल रहा। जानवरों ने विंडमिल को फिर से बनाने के लिए अपनी जान लगा दी।

98:51

Speaker A

उन्हें पता था कि बाहर की दुनिया और जलने वाले इंसान उन पर नजर रखे हुए हैं। वे जानते थे कि अगर काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो इंसान खुश होंगे और उनका मजाक उड़ाएंगे। जलन के मारे इंसान यह मानने को तैयार ही

99:07

Speaker A

नहीं थे कि स्नोबॉल ने विंडमिल तोड़ी है। वे कह रहे थे कि दीवारें बहुत पतली थी इसलिए गिर गई। जानवरों को पता था कि यह सच नहीं है। फिर भी उन्होंने तय किया कि इस बार दीवारें 3 फुट मोटी बनाई जाएंगी। पहले यह सिर्फ 18 इंच की थी। इसका मतलब था कि

99:28

Speaker A

अब बहुत ज्यादा पत्थर जमा करने थे। बहुत समय तक तो खान में बर्फ जमी रही और काम रुका रहा। जब मौसम थोड़ा खुला तब काम तो शुरू हुआ पर मिट्टी ढूंढते ढोते सबकी कमर टूट गई। जानवरों की हिम्मत टूटने लगी थी। वे हमेशा

99:47

Speaker A

ठंड से ठठुरते रहते और उनका पेट भूख से जलता रहता। बस बॉक्सर और क्लोअर ने हार नहीं मानी। स्कूलर मेहनत करने के मजे पर बड़े-बड़े भाषण देता था। पर जानवरों को बॉक्सर की ताकत और उसके नारे मैं और ज्यादा मेहनत

100:05

Speaker A

करूंगा से। इससे ही थोड़ी हिम्मत मिलती थी। जनवरी के महीने में अनाज कम पड़ गया। सबको मिलने वाला राशन बहुत कम कर दिया गया। कहा गया कि इसकी जगह आलू दिए जाएंगे। पर तभी पता चला कि आलू की ज्यादातर फसल पाले में सड़ गई है। उन्हें ठीक से ढका

100:25

Speaker A

नहीं गया था। आलू नरम और काले पड़ गए थे। खाने लायक कुछ बचा ही नहीं था। कई दिनों तक जानवरों को सिर्फ भूसा और पशु चारा खाकर गुजारा करना पड़ा। ऐसा लग रहा था जैसे मौत उनके सामने खड़ी हो। बाहर की दुनिया से यह सच छुपाना बहुत

100:44

Speaker A

जरूरी था। विंडमिल गिरने के बाद इंसानों ने जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म के बारे में नए-नए झूठ फैलाने शुरू कर दिए थे। वे कह रहे थे कि सब जानवर भूख और बीमारी से मर रहे हैं। वे यह भी कह रहे थे कि जानवर आपस में ही लड़ रहे हैं और एक

101:02

Speaker A

दूसरे के बच्चों को खा रहे हैं। नेपोलियन को पता था कि अगर असली सच्चाई बाहर चली गई तो बहुत बुरा होगा। इसलिए उसने मिस्टर विमपर को अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस्तेमाल करने का सोचा। अब तक जानवर विंपर से दूर रहते थे। पर अब

101:20

Speaker A

कुछ चुनी हुई भेड़ों को सिखाया गया कि वे विंपर के सामने धीरे से बोले कि उनका राशन बढ़ गया है। इसके अलावा नेपोलियन ने एक और चालाकी की। उसने अनाज रखने वाले खाली डिब्बों में ऊपर तक रेत भरवा दी। फिर उस रेत के ऊपर बचा

101:38

Speaker A

कुशा अनाज और आटा बिछा दिया। किसी बहाने से विंर को उस गोदाम में ले जाया गया ताकि उसकी नजर उन डिब्बों पर पड़े। उसे धोखा हो गया और उसे लगा कि डिब्बे अनाज से भरे हैं। उसने बाहर जाकर सबको बताया कि एनिमल फार्म यानी जानवरों का खेत में खाने की

101:57

Speaker A

कोई कमी नहीं है। पर जनवरी के आखिर तक अनाज की बहुत कमी हो गई। उन दिनों नेपोलियन बहुत कम बाहर निकलता था। वह अपना सारा समय उस बड़े घर के अंदर ही बिताता। हर दरवाजे पर खौंखार कुत्ते पहरा देते थे। जब वह कभी बाहर निकलता तो बड़े ठाड़ से

102:16

Speaker A

निकलता। छह कुत्ते उसे चारों तरफ से घेरे रहते और अगर पास आने की कोई कोशिश करता तो वे घुर्राने लगते। कभी-कभी वह इतवार की सुबह भी नहीं आता था। वह स्क्वलर के जरिए ही अपना हुक्म भेजता था। खेत पर अब धीरे-धीरे डंडे का राज शुरू

102:35

Speaker A

हो गया था। एक इतवार की सुबह स्कूलर ने बड़ा ऐलान किया। उसने कहा कि मुर्गियों को अब अपने अंडे देने होंगे। नेपोलियन ने विपर के साथ मिलकर एक सौदा किया था। अब हर हफ्ते 400 अंडे देने थे। इन अंडों के बदले में खेत के लिए अनाज आना था ताकि किसी का

102:55

Speaker A

पेट भूख से ना जले। जब मुर्गियों ने यह सुना तो वे बहुत चिल्लाई। उन्हें पहले थोड़ा इशारा मिला था पर उन्हें लगा नहीं था कि ऐसा सच में होगा। वे बस अपने चूजे निकालने वाली थी। मुर्गियों ने कहा कि इस समय अंडे छीनना बच्चों की जान लेने जैसा

103:13

Speaker A

है। जूस को भगाने के बाद पहली बार खेत में छोटी सी बगावत शुरू हो गई। तीन जवान मुर्गियों ने नेपोलियन की बात को ठुकरा दिया। वे उड़कर छत की ऊंची कड़ियों पर बैठ गई। वह वही अंडे देती और अंडे नीचे गिरकर चकनाचूर हो जाते। नेपोलियन ने इसे

103:32

Speaker A

रोकने के लिए डंडे का राज दिखाया। उसने फौरन मुर्गियों का दाना पानी बंद करने का हुक्म दिया। उसने साफ कह दिया कि अगर किसी ने एक मुर्गी को एक दाना भी दिया तो उसे फौरन मार दिया जाएगा। कुत्तों ने यह पक्का किया कि कोई चोरी

103:49

Speaker A

छिपे खाना ना दे सके। मुर्गियां पांच दिन तक बिना खाए पिए डटी रही। आखिर में वे हार गई और वापस घोंसलों में लौट आई। इस बीच भूख से तड़प कर नौ मुर्गियां मर गई। उनकी लाशों को चुपचाप मिट्टी में दबा दिया गया। सबको यह झूठ बोला गया कि वे बीमारी से मरी

104:09

Speaker A

है। बाहर वाले विपर को कुछ पता नहीं चला। हर हफ्ते एक गाड़ी आती और ले जाती। इतने समय से स्नो बॉल कहीं दिखाई नहीं दिया था। खबर उड़ी थी कि वह पड़ोस के किसी खेत में छिपा है। नेपोलियन के रिश्ते अब दूसरे किसानों के साथ पहले से थोड़े बेहतर

104:30

Speaker A

थे। आंगन में पुरानी लकड़ी का एक बड़ा ढेर पड़ा था। विपर ने नेपोलियन को सलाह दी कि इसे बेच देना चाहिए। मिस्टर प्लिंटन और मिस्टर फेडरिक दोनों इसे खरीदना चाहते थे। नेपोलियन अपना उल्लू सीधा करने के लिए सोच में पड़ा था कि किसे बेचे। एक अजीब बात

104:53

Speaker A

देखी गई। जब भी लगता कि नेपोलियन फेडरी को लकड़ी बेचेगा तो कह दिया जाता कि स्नोबॉल प्लिंटन के यहां छिपा है। और जब प्लिंटन की तरफ झुकता तो खबर फैल जाती कि स्नोबॉल फर्डिक के यहां छिपा है। अचानक वसंत के शुरू में एक डरावनी बात पता चली। कहा गया

105:13

Speaker A

कि स्नो बॉल रात के अंधेरे में चुपके से खेत पर आता है। डर के मारे जानवरों की नींद उड़ गई थी। कहा जाता है कि वह हर रात अंधेरे का फायदा उठाकर आता है और बेईमानी करता है। वह अनाज चुराता, दूध की बाल्टियां पलट देता और अंडे फोड़ देता। वह

105:33

Speaker A

पेड़ों की छाल तक चबा जाता। अब खेत में कुछ भी गलत होता तो सारा इल्जाम स्नो बॉल पर ही मढ़ा जाता। अगर खिड़की टूटती या नाली बंद होती तो सब कहते कि स्नोबॉल ने किया है। एक बार गोदाम की चाबी खो गई। पूरे खेत को यकीन हो गया कि स्नोबॉल ने

105:52

Speaker A

उसे कुएं में फेंक दिया था। ताज्जुब की बात तो यह है कि चाबी मिल जाने के बाद भी सब यही मानते रहे कि यह स्नो बॉल की ही चाल थी। गायों ने तो यहां तक कह दिया कि स्नोबॉल रात को चुपके से आता है और सोते में उनका

106:09

Speaker A

दूध निकाल ले जाता है। चूहों को भी स्नोबॉल का साथी बताया जाने लगा। नेपोलियन ने हुक्म दिया कि स्नोबॉल की सब करतूतों की पूरी जांच होगी। वह अपने खूंखार कुत्तों को साथ लेकर निकला। उसने खेत के एक-एक मकान की जांच की। बाकी सब

106:28

Speaker A

जानवर कुछ दूरी बनाकर उसके पीछेछे चल रहे थे। नेपोलियन हर दो कदम पर रुकता और जमीन को सूंघता। वह कहता कि उसे स्नोबॉल के पैरों की गंध आ रही है। उसने तबेले में, गौशाला में, मुर्गियों के दड़वे में और सब्जी के

106:47

Speaker A

बगीचे के हर कोने में सूंघा। उसे हर जगह स्नो बॉल के निशान मिले। वह अपनी नाक जमीन पर टिका देता और गहरी सांसे लेता। फिर वह बहुत डरावनी आवाज में चिल्लाता। स्नोबॉल वह यही था। मुझे उसकी साफ महक आ रही है। जैसे ही वह

107:08

Speaker A

स्नोबॉल का नाम लेता, सारे कुत्ते जोर-जोर से घुराते और अपने डरावने दांत दिखाते। बेचारे जानवर बुरी तरह कांप रहे थे। उन्हें ऐसा लगने लगा जैसे स्नोबॉल कोई भूत है जो हवा की तरह हर जगह मौजूद है। उन्हें लगने लगा कि वह कभी भी उन पर हमला कर सकता

107:27

Speaker A

है। शाम को स्कूलर ने सब कुछ जमा किया। उसके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। उसने कहा कि उसे एक बहुत जरूरी और बुरी बात बतानी है। साथियों स्क्वलर घबराते हुए उछलउछल कर चिल्लाया। साथियों एक बहुत ही डरावनी बात पता चली है। स्नोबॉल ने खुद को पिंच फील्ड खेत के

107:52

Speaker A

फ्रेडरिक को बेच दिया है। वे अभी हम पर हमला करने और हमारा खेत छीनने की चाल चल रहे हैं। जब हमला होगा तो स्नोबॉल उन्हें रास्ता दिखाएगा। पर बात इससे भी ज्यादा बुरी है। हमें लगा था कि स्नोबॉल ने बगावत सिर्फ अपने घमंड में आकर की थी। पर हम गलत

108:10

Speaker A

थे साथियों। क्या तुम जानते हो असली वजह क्या थी? स्नोबॉल तो शुरू से ही जों्स के साथ मिला हुआ था। वह हर वक्त जों्स का जासूस बनकर काम कर रहा था। हमें उसके छोड़े हुए कागज मिले हैं। जिनसे यह साबित हो गया है। अब मुझे सब समझ आ रहा है

108:28

Speaker A

साथियों। क्या हमने अपनी आंखों से नहीं देखा कि कैसे उसने इंसानों की लड़ाई में हमें हरवाने की पूरी कोशिश की थी? जानवर यह सुनकर सन्न रह गए। यह तो विंड मिल तोड़ने से भी बड़ी बेईमानी थी। उन्हें इस बात को समझने में कुछ मिनट लगे। सबको

108:48

Speaker A

याद था [संगीत] या कम से कम उन्हें लगता था कि उन्हें याद है कि कैसे स्नोबॉल इंसानों की लड़ाई में सबसे आगे होकर लड़ रहा था। उसने कैसे सबको हिम्मत दी थी। जों्स की बंदूक की गोली उसकी पीठ को चीर गई थी। फिर भी वह एक पल के लिए नहीं रुका

109:06

Speaker A

था। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि वह जों्स के साथ कैसे मिला हो सकता है। यहां तक कि बॉक्सर भी उलझन में पड़ गया। वह लेट गया और अपने अगले खुरों को मोड़कर आंखें बंद कर ली। वह बहुत जोर लगाकर अपनी बात सोचने

109:22

Speaker A

की कोशिश करने लगा। मुझे इस बात पर यकीन नहीं है। बॉक्सर ने कहा, इंसानों की लड़ाई में स्नोबॉल बहुत बहादुरी से लड़ा था। मैंने खुद उसे देखा था। क्या हमने उसे लड़ाई के तुरंत बाद जानवर वीर पहला दर्जा का इनाम नहीं दिया

109:39

Speaker A

था? वह हमारी गलती थी साथी। हमें अब सब पता चल गया है। हमें कुछ गुप्त कागज मिले हैं। उनमें लिखा है कि असल में वह हमें मौत के मुंह में धकेलना चाहता था। स्कूलर ने उसे समझाते हुए कहा। पर वह तो घायल हो गया था।

109:57

Speaker A

बॉक्सर ने फिर कहा हम सब ने उसे खून से लथपथ भागते देखा था। यह तो बस एक नाटक था। स्क्वलर चिल्लाया जो उसकी गोली तो उसे बस छू कर निकल गई थी। अगर तुम्हें पढ़ना आता तो मैं तुम्हें उसके खुद के लिखे कागजों में यह दिखा देता। उसकी चाल यह थी कि जब

110:16

Speaker A

लड़ाई सबसे मुश्किल मोड़ पर हो तब वह भागने का इशारा कर दे और खेत दुश्मनों के लिए छोड़ दे। वह लगभग कामयाब ही हो गया था। मैं तो यह कहूंगा साथियों कि अगर हमारे बहादुर मालिक नेपोलियन ना होते तो वह जीत जाता। क्या तुम्हें याद नहीं कि जब

110:33

Speaker A

जॉन्स और उनके आदमी आंगन के अंदर घुस आए थे तब स्नोबॉल अचानक मुड़ा और भाग खड़ा हुआ और उसके पीछे बहुत से जानवर भी भागने लगे। क्या तुम्हें यह भी याद नहीं कि उसी समय जब सब डर रहे थे और लग रहा था कि सब खत्म हो गया। तब साथी नेपोलियन इंसानों को

110:50

Speaker A

खत्म करो चिल्लाते हुए आगे बढ़े और जों्स की टांग में अपने दांत गड़ा दिए। क्या तुम्हें याद नहीं साथियों? स्क्वलर यहां वहां उछलते हुए बोला। जब स्कूलर ने इस तरह पूरी कहानी सुनाई तो जानवरों को [गला साफ़ करने की आवाज़] लगने

111:06

Speaker A

लगा कि शायद उन्हें ऐसा ही याद है। कम से कम उन्हें यह तो याद था कि लड़ाई के सबसे जरूरी समय पर स्नोबॉल वहां से भागा था। पर बॉक्सर का मन अब थोड़ा बेचैन था। [संगीत] उसने आखिर में कहा, "मुझे नहीं लगता कि स्नोबॉल शुरू में गद्दार था। उसने बाद में

111:25

Speaker A

जो किया, वह अलग बात है। पर मुझे लगता है कि इंसानों की लड़ाई के समय वह एक अच्छा साथी था। स्कूलर बहुत धीरे और मजबूत आवाज में बोला। हमारे मालिक साथी नेपोलियन ने साफ-साफ कहा है कि स्नोबॉल शुरू से ही जों्स का आदमी था। हां, बगावत के बारे में

111:45

Speaker A

सोचने से भी बहुत पहले से वह उनके साथ मिला हुआ था। ओ फिर तो बात ही अलग है। बॉक्सर ने तुरंत कहा, "अगर साथी नेपोलियन कह रहे हैं तो वह ठीक ही होगा।" बहुत अच्छे साथी। स्क्वलर चिल्लाया। पर

112:02

Speaker A

सबने देखा कि उसने अपनी छोटी और चमकती आंखों से बॉक्सर को बहुत गंदी नजर से देखा। वह जाने के लिए मुड़ा। फिर रुका और बोला, "मैं इस खेत के हर जानवर को चेतावनी देता हूं कि अपनी आंखें खुली रखें। हमें लगता है कि स्नोबॉल के कुछ जासूस अभी भी

112:20

Speaker A

इसी वक्त हमारे बीच छुपे बैठे हैं। चार दिन बाद शाम का वक्त था। नेपोलियन ने सब जानवरों को आंगन में जमा होने का हुक्म दिया। जब सब जुट गए तो नेपोलियन उस बड़े घर से बाहर निकला। उसने अपने सीने पर

112:39

Speaker A

दोनों मेडल अ लटका रखे थे। उसने हाल ही में खुद को ही जानवर वीर पहला दर्जा और जानवरवी दूसरा दर्जा का इनाम दे दिया था। उसके नौ खूंखार कुत्ते उसके चारों तरफ उछल कूद कर रहे थे। वे ऐसी डरावनी आवाजें निकाल रहे थे कि सब जानवर की रूह कांप

112:58

Speaker A

जाए। सब अपनी-अपनी जगह पर चुपचाप दुबक गए। उन्हें पहले ही पता चल गया था कि अब कुछ बहुत बुरा होने वाला है। नेपोलियन बहुत गुस्से में सबको घूर रहा था। फिर उसने एक तेज आवाज निकाली। आवाज सुनते ही कुत्ते आगे झपटे। उन्होंने चार बड़े सूअर को कान से पकड़ [संगीत] लिया।

113:23

Speaker A

वे सूअर दर्द और डर के मारे चीख रहे थे। कुत्ते उन्हें घसीट कर नेपोलियन के पैरों के पास ले आए। सूरों के कानों से खून टपक रहा था। कुत्तों को खून का चसका लग गया था। वे बिल्कुल पागल हो गए थे।

113:38

Speaker A

[गला साफ़ करने की आवाज़] सबको हैरान करते हुए उनमें से तीन कुत्ते बॉक्सर पर भी झपट पड़े। बॉक्सर ने उन्हें आते देख लिया। उसने अपना भारी खुर हवा में उठाया और एक कुत्ते को बीच से ही दबोचकर जमीन पर दबा दिया। कुत्ता जान बखशने के

113:55

Speaker A

लिए चिल्लाने लगा। बाकी दो कुत्ते दुम दबाकर वहां से भाग खड़े हुए। बॉक्सर ने नेपोलियन की तरफ देखा। वह पूछ रहा था कि क्या वह इस कुत्ते को जान से मार दे या छोड़ दे? नेपोलियन का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने बॉक्सर को

114:12

Speaker A

हुक्म दिया कि कुत्ते को छोड़ दे। बॉक्सर ने अपना पैर उठा लिया और वह चोटिल कुत्ता रोता हुआ भाग गया। थोड़ी देर में शोर थमा। वे चारों सूअर थरथर कांप रहे थे। नेपोलियन ने उनसे अपनी बेईमानी कबूल करने को कहा। यह वही चार सूअर थे जिन्होंने पहले पंचायत बंद करने

114:35

Speaker A

पर आवाज उठाई थी। उन्होंने फौरन मान लिया कि वे स्नोबॉल के जाने के बाद से ही उसके साथ चुपके से मिले हुए थे। उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने ही स्नोबॉल के साथ मिलकर विंडमिल गिराई थी। उन्होंने यह भी कहा कि वे एनिमल फार्म यानी जानवरों का खेत को

114:54

Speaker A

मिस्टर फ्रेडरिक को सौंपने वाले थे। उन्होंने बताया कि स्नोबॉल ने उनसे खुद कहा था कि वह बरसों से जोस का जासूस है। जैसे ही उनकी बात खत्म हुई कुत्तों ने फौरन उनके गले फाड़ दिए। फिर नपोलियन ने बहुत डरावनी आवाज में पूछा कि क्या किसी

115:12

Speaker A

और जानवर को भी अपनी बेईमानी कबूल करनी है। वे तीन मुर्गियां आगे आई जिन्होंने अंडों वाली बगावत शुरू की थी। उन्होंने कहा कि स्नोबॉल उनके सपने में आया था। उसने उन्हें नेपोलियन की बात ना मानने को उकसाया था। उन्हें भी फौरन काट दिया गया। फिर एक बखागी आई। उसने माना कि पिछली फसल

115:35

Speaker A

में उसने अनाज की छह बालियां चुराई थी और रात में चुपके से खा ली थी। फिर एक भेड़ ने कबूल किया कि उसने पीने के पानी वाले तालाब में पेशाब किया था। उसने कहा कि स्नोबॉल ने ही उसे ऐसा करने को कहा था। दो और भेड़ों ने माना कि उन्होंने एक बूढ़े

115:52

Speaker A

[संगीत] मेढ़े को मार डाला था जो नेपोलियन का बहुत बड़ा चेला था। उन्होंने उस बीमार मेढ़े को आग के चारों तरफ तब तक दौड़ाया जब तक वह खांसी के मारे मर नहीं गया। उन सबको वहीं मार दिया गया। एक-एक करके जानवर अपनी बेईमानी मानते रहे और मारे

116:14

Speaker A

जाते रहे। नेपोलियन के पैरों के पास लाशों का ढेर लग गया। पूरे खेत में खून की ऐसी महक फैल गई जैसी ज्स के जाने के बाद कभी नहीं आई थी। हवा भारी हो गई थी और सब जानवरों का दिल बैठा जा रहा था। जब यह खूनी खेल खत्म हुआ तो बड़े सूअर और

116:35

Speaker A

कुत्तों को छोड़कर बाकी सब जानवर वहां से दुम दबाकर चले गए। वे सब बुरी तरह कांप रहे थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या ज्यादा डरावना है। जानवरों की गद्दारी या यह डरावनी सजा। पुराने दिनों में भी खून बहा था। पर अब यह

116:54

Speaker A

ज्यादा बुरा लग रहा था। क्योंकि अब जानवर आपस में ही एक दूसरे का गला काट रहे थे। जब से जूस गया था, आज तक किसी जानवर ने दूसरे जानवर को नहीं मारा था। यहां तक कि एक चूहे की भी जान नहीं ली गई थी। सब भागकर उस टीले पर चले गए जहां आधे

117:14

Speaker A

विंडमेल खड़ी थी। क्लोवर, म्यूरियल, बेंजामिन, गाय, भेड़े और बत्तखे सब एक दूसरे से सट कर बैठ गए। जैसे ठंड और डर के मारे एक दूसरे में छिप रहे हो। बस मिल्ली गायब थी। वह खेल शुरू होने से पहले ही कहीं 9 2 11 हो गई थी। काफी देर तक कोई

117:37

Speaker A

कुछ नहीं बोला। सन्नाटा इतना था कि सबकी सांसों की आवाज आ रही थी। सिर्फ बॉक्सर ही खड़ा रहा। वह बेचैनी में यहां वहां टहल रहा था। उसने दुखी होकर कहा, "मुझे यह सब समझ नहीं आ रहा। मुझे यकीन नहीं होता कि हमारे जानवरों का खेत, हमारा एनिमल फार्म

117:57

Speaker A

पर ऐसा कैसे हो सकता है?" पक्का हम में ही कोई कमी होगी। मुझे तो बस एक ही इलाज दिखता है और ज्यादा मेहनत करना। अब से मैं सुबह एक घंटा और जल्दी जागूंगा। वह अपने भारी कदमों से पत्थर की खान की तरफ चल दिया। मिट्टी ढोते ढोते उसकी कमर

118:14

Speaker A

टूटी जा रही थी। फिर भी उसने पत्थर की दो गाड़ियां भरी। उन्हें अकेले खींचकर वह विंडमिल तक लाया। इसके बाद ही वह रात को सोने गया। सब जानवर क्लोअर के पास सटकर बैठ गए। कोई कुछ नहीं बोला। उस ऊंचे टीले से पूरा खेत

118:33

Speaker A

साफ दिख रहा था। दूर तक फैली सड़क, घास के मैदान, पीने के पानी का तालाब और गेहूं के हरेभरे खेत। सब कुछ नजर आ रहा था। शाम का वक्त था। ढलते सूरज की रोशनी में घास सोने की तरह चमक रही थी। जानवरों को पहली बार एहसास हुआ कि यह पूरा

118:56

Speaker A

खेत उनका है। एक-ए इंच जमीन उनकी अपनी है। उन्हें अपना खेत इतना प्यारा पहले कभी नहीं लगा था। यह सब देखकर क्लूवर की आंखों में आंसू आ गए। उसने सोचा कि जब उन्होंने इंसान के खिलाफ बगावत शुरू की थी, तब ऐसा कुछ नहीं सोचा

119:15

Speaker A

था। खून और लाशों का यह नजारा देखने के लिए उन्होंने मेहनत नहीं की थी। जब बूढ़े मेजर ने पहली बार उन्हें सपना दिखाया था, तब क्लोअर ने कुछ और ही सोचा था। उसने सोचा था कि एक ऐसी दुनिया होगी जहां कोई भूखा नहीं रहेगा। जहां किसी पर कोड़ा नहीं

119:34

Speaker A

बरसेगा। सब बराबर होंगे। ताकतवर जानवर कमजोर की रक्षा करेगा। पर अब सब बदल गया था। अब किसी में सच बोलने की हिम्मत नहीं थी। हर तरफ खूंखार और घुर्राने वाले कुत्ते घूम रहे थे। अपनी आंखों के सामने साथियों के टुकड़े होते

119:54

Speaker A

देखना पड़ रहा था। मिट्टी ढोते-ढोते कमर टूट गई थी। फिर भी डर कम नहीं हो रहा था। क्लोअर के मन में बगावत करने का कोई ख्याल नहीं था। उसे पता था कि जोस के दिनों से तो अब भी हालात थोड़े बेहतर हैं। सबसे जरूरी यह था

120:13

Speaker A

कि इंसान वापस ना आ जाए। उसने तय किया कि वह वफादार रहेगी। वह नेपोलियन का हर हुक्म मानेगी। पर उसके दिल में एक टीस थी। उसने और बाकी सब ने इस दिन के लिए अपनी कमर नहीं तुड़वाई थी। इस दिन के लिए उन्होंने विंड

120:31

Speaker A

मिल नहीं बनाई थी और जस की गोलियां नहीं खाई थी। उसके पास शब्द नहीं थे पर उसका दिल भारी था। आखिर में जब क्लोअर को अपनी बात कहने के लिए शब्द नहीं मिले तो उसने इंग्लैंड के जानवर गाना शुरू कर दिया। उसके आसपास बैठे बाकी जानवर भी साथ गाने

120:52

Speaker A

लगे। उन्होंने इसे तीन बार गाया। सुर तो ठीक थे पर वे बहुत धीमे और दुखी होकर गा रहे थे। उन्होंने पहले कभी इसे इतने गम के साथ नहीं गाया था। अभी उन्होंने तीसरी बार गाना खत्म ही किया था कि स्कूलर दो कुत्तों के साथ वहां आ

121:11

Speaker A

पहुंचा। उसे देखकर लग रहा था कि वह कोई बहुत जरूरी बात कहने आया है। उसने ऐलान किया कि साथी नेपोलियन के खास हुक्म से इंग्लैंड के जानवर गाने पर अब से पाबंदी लगा दी गई है। अब से इसे गाना मना है। यह सुनकर सब जानवर

121:31

Speaker A

सन्न रह गए। पर क्यों? म्यूरियल चिल्लाई। अब इसकी कोई जरूरत नहीं है साथी। स्कूलर ने कड़क कर कहा। बगावत का गाना था यह। पर अब बगावत पूरी हो चुकी है। आज दोपहर को गद्दारों को मारना इस काम का आखिरी हिस्सा था। बाहर के और अंदर के सब दुश्मन अब हार

121:51

Speaker A

चुके हैं। इस गाने में हम आने वाले अच्छे दिन का सपना देखते थे। पर अब तो वे अच्छे दिन आ चुके हैं। अब इस गाने का कोई काम बचा नहीं। जानवर बहुत डरे हुए थे। फिर भी शायद कुछ जानवर इसका विरोध करते। पर तभी भेड़ों ने अपना वही शोर शुरू कर दिया। चार

122:10

Speaker A

पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। वे कई मिनट तक यही चिल्लाती रही और [संगीत] बात करने का सारा मौका खत्म हो गया। उस दिन के बाद इंग्लैंड के जानवर फिर कभी नहीं सुनाई दिया। उसकी जगह मिनीस नाम के कवि ने एक नया गाना बनाया जिसके बोल कुछ

122:31

Speaker A

ऐसे थे। जानवरों का खेत, जानवरों का खेत। मेरी वजह से तुझ पर कभी आंच ना आए। जानवरों का खेत, जानवरों का खेत। अब हर इतवार को झंडा फहराने के बाद यही गाना गाया जाने लगा। पर जानवरों को ना तो इसके बोल अच्छे लगते थे और ना ही इसकी

122:52

Speaker A

धुन। उन्हें तो अपना वही पुराना गाना याद आता था। कुछ दिन बाद जब उस कत्लेआम का डर थोड़ा कम हुआ तो कुछ जानवरों को याद आया या उन्हें लगा कि उन्हें याद है कि छठे नियम में लिखा था कोई जानवर दूसरे जानवर को नहीं

123:15

Speaker A

मारेगा। हालांकि बड़े सूअर या कुत्तों के सामने किसी के मुंह खोलने की हिम्मत नहीं थी। पर सबको लग रहा था कि जो खून खराबा हुआ वह नियम के खिलाफ था। क्लोवर ने बेंजामिन से वह नियम पढ़ने को कहा। बेंजामिन ने हमेशा की तरह कह दिया कि वह

123:32

Speaker A

इन पछड़ों में नहीं पड़ता। फिर क्लोवर ने म्यूरियल को बुलाया। म्यूरियल ने उसके लिए नियम पढ़ा। वहां लिखा था कोई जानवर दूसरे जानवर को बिना वजह के नहीं मारेगा। जानवरों के दिमाग में वे आखिरी दो शब्द बिना वजह न जाने कैसे निकल गए थे। पर अब

123:51

Speaker A

उन्होंने देखा कि नियम नहीं टूटा था। क्योंकि उन गद्दारों को मारने की तो बड़ी वजह थी जो स्नोबॉल के साथ मिलकर बेईमानी कर रहे थे। पूरे साल जानवरों ने पिछले साल से भी ज्यादा जी तोड़ मेहनत की। मिट्टी और भारी

124:07

Speaker A

पत्थर ढोते ढोते उनकी कमर टूट गई थी। इस बार विंडमिल की दीवारें पहले से दो गुनी मोटी बनानी थी और उसे तय समय पर पूरा करना था। इसके साथ ही खेत का रोज का काम भी करना था। यह बहुत भारी बोझ था। कई बार जानवरों को लगता कि वे ज्स के जमाने से भी

124:28

Speaker A

ज्यादा घंटे खट रहे हैं और उनका पेट भी पहले से ज्यादा भूख से जल रहा है। हरितवार की सुबह स्क्वलर अपने खुर से एक लंबा कागज थामे रहता और ढेरों नंबर पढ़कर सुनाता। वह कागजों पर यह साबित कर देता कि खानेपीने की हर चीज 200, [संगीत]

124:48

Speaker A

300 या 500 गुना बढ़ गई है। जानवरों ने उसकी बात पर यकीन कर लिया क्योंकि वे अब ठीक से भूल चुके थे कि बगावत से पहले क्या हाल था। फिर भी कुछ दिन ऐसे होते जब उन्हें लगता कि काश यह नंबर थोड़े कम होते और पेट भरने

125:08

Speaker A

के लिए खाना थोड़ा ज्यादा होता। अब सारे हुक्म स्क्वलर या दूसरे बड़े सूअर के जरिए ही आते थे। नेपोलियन खुद तो अब 15 दिनों में एक बार ही बाहर निकलता था। जब वह आता तो उसके साथ सिर्फ उसके खूंखार कुत्ते ही नहीं होते थे। बल्कि उसके आगे

125:26

Speaker A

एक काला मुर्गा भी चलता था। नेपोलियन के बोलने से पहले वह मुर्गा बिगुल की तरह जोर से कुकड़ू कु करता। कहा जाता है कि नेपोलियन अब घर में सबसे अलग कमरों में रहता है। वह अकेले खाना खाता और दो कुत्ते उसकी सेवा में लगे रहते। वह उन कीमती

125:45

Speaker A

बर्तनों में खाता था जो शीशे की अलमारी में रखे होते थे। यह भी ऐलान हुआ कि अब नेपोलियन के जन्मदिन पर भी हर साल बंदूक चलाई जाएगी। नेपोलियन को अब कोई सिर्फ नाम से नहीं बुलाता था। उसे हमेशा हमारे मालिक, साथी

126:03

Speaker A

नेपोलियन यही सब कहा जाता। बड़े सूअर उसके लिए नए-नए नाम सोचते थे। उसे सब जानवरों का पिता, इंसानों के लिए खौफ, भेड़ों का रखवाला और बतख के बच्चों का दोस्त जैसे नामों से बुलाया जाता। स्कूलर जब भाषण देता तो उसकी आंखों से टप

126:24

Speaker A

टप आंसू बहने लगते। वह नेपोलियन की अकल और उनके बड़े दिल की बातें करता। वह कहता कि नेपोलियन उन बेचारे जानवरों से भी बहुत प्यार करते हैं जो दूसरे खेतों में गुलामी और बेईमानी झेल रहे हैं। वह खेत में जो भी अच्छा होता सब कहते कि यह नेपोलियन की ही

126:44

Speaker A

कृपा है। एक मुर्गी दूसरे से कहती हमारे मालिक नेपोलियन की वजह से ही मैंने छ दिन में पांच अंडे दिए हैं। दो गाय तालाब पर पानी पीते हुए कहती साथ ही नेपोलियन की मेहरबानी है कि यह पानी इतना मीठा लग रहा है।

127:03

Speaker A

मिनिममस नाम के कवि ने नेपोलियन की तारीफ में एक कविता लिखी। वह दीवार पर बड़े अक्षरों में लिखी गई। वह कविता कुछ ऐसी थी। अनाथों के दोस्त, खुशियों के झरने, खाने की बाल्टी के मालिक। आपको देखकर मेरा मन झूम उठता है। आपकी

127:22

Speaker A

आंखें सूरज की तरह चमकती हैं। साथी नेपोलियन, अनाथों के दोस्त आप ही हमें वह सब देते हैं जो हमें प्यारा है। दिन में दो बार भरा पेट और सोने के लिए साफ घास। चाहे छोटा हो या बड़ा। हर

127:40

Speaker A

जानवर चैन की नींद सोता है क्योंकि आप सब पर नजर रखते हैं। साथ ही नेपोलियन। अगर मेरे पास सूअर का कोई छोटा बच्चा होता तो बड़ा होने से पहले ही वह आपकी वफादारी सीख लेता। साथी नेपोलियन हां उसके मुंह से निकलने वाली पहली आवाज यही होती। साथी

128:02

Speaker A

नेपोलियन नेपोलियन को वह कविता बहुत भाई। उसने उसे बड़े तबेले की दीवार पर लिखवा दिया। जहां खेत के सात नियम लिखे थे। यह उसके ठीक सामने थी। स्कूल ने सफेद सफेदी से दीवार पर नेपोलियन की एक फोटो भी बनवा दी। इसी बीच विं के जरिए नेपोलियन लकड़ी बेचने का सौदा करने

128:27

Speaker A

में लग गया था। लकड़ी का वह ढेर अब तक बिका नहीं था। फ्रेडरिक और विलिंगटन दोनों उसे लेना चाहते थे। फ्रेडरिक उसे लेने के लिए बहुत उतावला था। पर वह सही दाम नहीं लगा रहा था। साथ ही यह खबर भी उड़ी कि फ्रेडरिक अपने

128:44

Speaker A

आदमियों के साथ हमला करने वाला है। उसे विंड मील देखकर बहुत जलन हो रही थी। कहा गया कि स्नोबॉल अब भी उसी के खेत में दुबका बैठा है। गर्मी के बीच में तीन मुर्गियों ने कबूल किया कि वे स्नोबॉल के साथ मिलकर नेपोलियन

129:02

Speaker A

को मारने की चाल चल रही थी। उन्हें फौरन मौत के घाट उतार दिया गया। हम नेपोलियन की जान बचाने के लिए नए इंतजाम किए गए। रात को उसके बिस्तर के चारों कोनों पर चार खूंखार कुत्ते पहरा देते। पिंकी नाम का एक छोटा सूअर नेपोलियन के

129:20

Speaker A

खाने को पहले चखता था। ताकि कोई जहर देकर उसे मार ना दे। तभी सबको बताया गया कि नेपोलियन ने लकड़ी मिस्टर प्लिंटन को बेचने का मन बना लिया है। नेपोलियन और पल्किंगटन के बीच दोस्ती होने लगी थी। जानवरों को किसी इंसान पर भरोसा

129:41

Speaker A

नहीं था। पर वे फेडरिक से बहुत डरते थे। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ी और विंड मिल पूरी होने वाली थी। हमले का डर और बढ़ गया। कहा गया कि फेडरिक 20 बंदूकधारी आदमियों के साथ आने वाला है। उसने पुलिस को भी पैसे खिला दिए हैं।

130:00

Speaker A

फेडरिक के खेत से बहुत डरावनी खबरें आ रही थी। वह अपने जानवरों पर बहुत जुल्म करता था। उसने एक बूढ़े घोड़े को पीट-पीट कर मार डाला था। उसकी गाय भूख से जल रही थी। उसने एक कुत्ते को जलती भट्टी में फेंक दिया। वह शाम को मुर्गों के पैरों में उस

130:18

Speaker A

तरुरे बांधकर उन्हें लड़ाता और मजा लेता। यह सब सुनकर जानवरों का खून खोल उठा। वे चाहते थे कि सब मिलकर फ्रेडरिक पर हमला कर दें और वहां के जानवरों को आजाद कराएं। पर स्क्वलर ने उन्हें शांत रहने को कहा। उसने कहा कि साथी नेपोलियन अपना उल्लू सीधा

130:36

Speaker A

करना जानते हैं। बस उनकी चाल पर भरोसा रखो। फ्रेडरिक के खिलाफ सबके मन में बहुत गुस्सा भरा था। एक इतवार की सुबह नेपोलियन तबेले में आया। उसने सबको समझाया कि उसने कभी फ्रेडरिक को लकड़ी बेचने की नहीं सोची

130:55

Speaker A

थी। उसने कहा कि ऐसे बेईमान आदमी के साथ सौदा करना उसकी शान के खिलाफ है। नेपोलियन ने कबूतरों को हुक्म दिया कि वे अब फोकस वुड की तरफ ना जाए। उनका नारा भी बदल दिया गया। अब वे इंसानों को खत्म करो की जगह फ्रेडरिक को खत्म करो चिल्लाने लगे।

131:15

Speaker A

गर्मी खत्म होते-होते स्नोबॉल की एक और बेईमानी सामने आई। गेहूं के खेत में बहुत फालतू घास उगा आई थी। पता चला कि रात के अंधेरे में स्नोबॉल ने बीजों में घास के बीज मिला दिए थे। एक हंस इस चाल में उसके साथ था। उसने

131:35

Speaker A

स्कूलर के सामने सच कबूल किया और फिर जहर खाकर अपनी जान दे दी। जानवरों को अब यह भी बताया गया कि स्नोबॉल को कभी जानवर वीर पहला दर्जा का मेडल नहीं मिला था। स्कूलर ने कहा कि यह तो बस एक झूठी कहानी थी जो स्नोबॉल ने खुद फैलाई

131:54

Speaker A

थी। सच तो यह है कि इंसानों की लड़ाई में वह डर के मारे भाग रहा था। कुछ जानवर यह सुनकर उलझन में पड़ गए। पर स्कूलर ने उन्हें ऐसी पट्टी पढ़ाई कि उन्हें लगा उनकी याददाश्त ही कमजोर है। पतझड़ आते-आते हाड़तोड़ मेहनत के बाद

132:13

Speaker A

विंडमिल पूरी हो गई। फसल काटने और चक्की बनाने के दोहरे काम में जानवरों का कछूमर निकल गया था। भारी पत्थर ढोते ढोते सबकी कमर टूट गई थी। पर उन्होंने हार नहीं मानी। बिना किसी सही औजार के उन्होंने विंड मिल खड़ी कर दी। थके होने के बावजूद

132:33

Speaker A

जानवर बहुत खुश थे। वे अपने इस सुंदर विंड मिल के चक्कर काटने लगे। इसकी दीवारें अब पहले से दो गुनी मोटी थी। उन्हें लगा अब कोई इसे गिरा नहीं पाएगा। नेपोलियन खुद अपने कुत्तों और काले मुर्गे के साथ वहां आया। उसने सबको शाबाशी दी और ऐलान किया कि

132:53

Speaker A

इस विंडमिल का नाम नेपोलियन विंडमिल होगा। दो दिन बाद सब जानवरों को तबेले में एक पंचायत के लिए बुलाया गया। नेपोलियन ने जब अपनी बात बताई तो सबके मुंह खुले के खुले रह गए। उसने कहा कि उसने लकड़ी का ढेर आखिर में फ्रेडरिक को ही बेच दिया है। कल

133:13

Speaker A

ही फ्रेडरिक की गाड़ियां आएंगी और लकड़ी ले जाएंगी। इतने दिनों से प्लिकिंगटन के साथ जो दोस्ती दिख रही थी, वह तो बस एक नाटक था। नेपोलियन तो असल में चुपके से ट्रेड्री के साथ अपनी गोटी सेट कर रहा था। अब फक्सवर्ड के सारे रिश्ते तोड़ लिए गए।

133:33

Speaker A

प्लेकिंटन को खरीखोटी सुनाई गई। कबूतरों को हुकुम मिला कि अब नारा बदल दो। अब चिल्लाओ। प्लिंकिंगटन को खत्म करो। नेपोलियन ने सबको यकीन दिलाया कि फेडरिक के हमले वाली बातें कोरी अफवाह थी। उसने यह भी कहा कि फेडरिक अपने जानवरों पर जुल्म करता है। यह बात भी झूठ थी। यह सारी बेईमानी वाली

133:55

Speaker A

खबरें स्नोबॉल ने फैलाई थी। अब पता चला कि स्नोबॉल कभी फ्रेडरी के यहां था ही नहीं। वह तो प्लिकिंगटन के यहां बड़े मजे में रह रहा है। बड़े सूअर नेपोलियन की इस चालाकी पर फूले नहीं समा रहे थे। प्लिकिंगटन को घास डालकर उन्होंने

134:14

Speaker A

फ्रेडरिक से भारी रकम वसूल ली थी। स्क्वलर ने बताया कि नेपोलियन ने अपनी अकल से सबको मात दे दी। फ्रेडरिक शेक नाम का कागज का टुकड़ा देना चाहता था। पर नेपोलियन ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए उससे असली नोट मांगे। उसने कहा कि लकड़ी हटाने से

134:32

Speaker A

पहले नगद पैसे चाहिए। फेडरिक ने पैसे दे दिए थे। अब इतने पैसे आ गए कि विंडमिल की सारी मशीनें खरीदी जा सके। इस बीच लकड़ी तेजी से ढोई जा रही थी। जब सारी लकड़ी चली गई तो तबेले में फिर से सबको बुलाया गया ताकि सब जानवर फ्रेडरी के

134:53

Speaker A

दिए नोट देख सके। नेपोलियन अपने दोनों मेडल लगाकर घास पर बैठे ठाट से लेटा था। उसके पास ही वह पैसे एक प्लेट में सजे रखे थे। सब जानवर एक-एक करके वहां से गुजरे और उन नोटों को जी भर कर देखा। बॉक्सर ने जब अपने नाक नोटों के पास ले जाकर उन्हें

135:12

Speaker A

सूंघा तो उसकी सांस की हवा से वे पतले सफेद कागज हिलने लगे। तीन दिन बाद बहुत बड़ा हंगामा हुआ। विंपर का चेहरा डर के मारे पीला पड़ गया था। वह अपनी साइकिल दौड़ाता हुआ आया और सीधे उस बड़े घर के अंदर भागा। अगले ही पल

135:30

Speaker A

नेपुलियन के कमरे से गुस्से में चिल्लाने की भयानक आवाज आई। खबर पूरे खेत में आग की तरह फैल गई। वे सारे नोट नकली थे। फ्रेडरिक ने बड़ी बेईमानी की थी। उसने धोखे से लकड़ी भी ले ली और एक पैसा भी नहीं दिया। उसने तो जानवरों को ठग कर अपना

135:48

Speaker A

उल्लू सीधा कर लिया था। नेपोलियन ने फौरन सबको जमा किया और गुस्से में फ्रेडरी को मौत की सजा हुई। उसने कहा कि जब भी वह पकड़ा जाए उसे जिंदा उबाल देना चाहिए। उसने सबको चेतावनी दी कि इस धोखे के बाद अब कुछ भी हो सकता है।

136:06

Speaker A

फ्रेडरिक और उसके आदमी कभी भी हमला कर सकते हैं। खेत के चारों तरफ पहरेदार बिठा दिए गए। प्लिंटन से फिर से दोस्ती करने और माफी मांगने के लिए चार कबूतर भेजे गए। अगले ही सुबह हमला हो गया। जानवर नाश्ता कर रहे थे। तभी पहरेदार भागते हुए आए।

136:26

Speaker A

उन्होंने खबर दी कि फेडरिक और उसके आदमी फाटक के अंदर घुस आए हैं। जानवर बड़ी हिम्मत से उसका सामना करने निकले। पर इस बार जीत उतनी आसान नहीं थी जितनी पहले इंसानों की लड़ाई में मिली थी। 15 आदमी थे और उनके पास छह बंदूके थी। जैसे ही वे

136:46

Speaker A

करीब आए उन्होंने गोलियां चलाना शुरू कर दिया। बंदूकों के वे धमाके और शरीर को चीर देने वाले छर्रे जानवरों से झेले नहीं जा रहे थे। नेपोलियन और बॉक्सर ने बहुत कोशिश की कि सब डटे रहे पर जानवरों को पीछे हटना पड़ा। बहुत से जानवर बुरी तरह घायल हो गए।

137:06

Speaker A

वे सब डरकर मकानों के अंदर छिप गए। वे दीवारों के छेदों से बाहर झांकने लगे। अब विंड मिल और सारा मैदान दुश्मनों के हाथ में था। उस पल्तु नेपोलियन को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह बिना कुछ बोले यहां वहां टहलने

137:24

Speaker A

लगा। उसकी पूछ गुस्से में तन गई थी। सब जानवर बड़ी उम्मीद से की तरफ देख रहे थे। उन्हें लगा कि अगर प्लकिंगटन मदद भेज दे तो बात बन सकती है। तभी वे चार कबूतर वापस आए जिन्हें कल भेजा गया था। पल्किंगटन ने एक छोटा सा कागज भेजा था। उस

137:44

Speaker A

पर लिखा था तुम्हारे साथ ऐसा ही होना चाहिए। यानी पल्लकिंटन ने भी अपना उल्लू सीधा करने के लिए जानवरों को मरने के लिए छोड़ दिया था। इसी बीच फ्रेडरिक और उसके आदमी विंडमिल के पास रुक गए। जानवरों ने उन्हें देखा और

138:02

Speaker A

घबरा गए। दो आदमी एक भारी छड़ और हथौड़ा लेकर आए थे। वे विंडमिल को गिराने की कोशिश कर रहे थे। नेपोलियन चिल्लाया यह नहीं हो सकता। हमने दीवारें बहुत मोटी बनाई है। वे इसे एक हफ्ते में भी नहीं गिरा सकते। हिम्मत रखो साथियों।

138:21

Speaker A

पर बेंजामिन उन आदमियों को बड़े गौर से देख रहा था। वे दोनों आदमी विंडमिल के नीचे एक छेद कर रहे थे। बेंजामिन ने अपना मुंह हिलाया और धीरे से बोला। मुझे पता था क्या तुम देख नहीं रहे वे क्या कर रहे हैं। वे उस छेद में अब बारूद भरने वाले

138:38

Speaker A

हैं। डर के मारे सब जानवर सुन्न पड़ गए। अब घर से बाहर निकलने की हिम्मत किसी में नहीं थी। कुछ ही मिनटों में वे आदमी इधर-उधर भागने लगे। फिर एक बहुत जोरदार धमाका हुआ। कबूतर हवा में उड़ने लगे। नेपोलियन को छोड़कर बाकी सब जानवर जमीन पर

138:56

Speaker A

औंधे मुंह गिर गए और अपना चेहरा छिपा लिया। जब वे दोबारा उठे तो जहां विंडमिल खड़ी थी, वहां बस काले धुएं का पहाड़ दिख रहा था। धीरे-धीरे हवा से धुआ छटा। उनकी साल भर की मेहनत व विंडमिल अब मिट्टी में मिल चुकी थी।

139:18

Speaker A

विंडमिल को टूटते देख जानवरों का खून खल उठा और वे डर के मारे छिपने वाले नहीं थे। उनका गुस्सा इतना बढ़ गया कि वे बदला लेने के लिए पागल हो गए। बिना किसी हुक्म का इंतजार किए वे सब एक साथ दुश्मनों पर टूट पड़े।

139:35

Speaker A

गोलियां ओलों की तरह बरस रही थी। पर इस बार जानवरों ने अपनी जान की परवाह नहीं की। यह बहुत ही डरावनी और खूनी लड़ाई थी। इंसान बंदूकों से गोलियां दाग रहे थे और पास आने पर लाठियों और भारी जूतों से मार रहे थे। एक गाय, तीन भेड़े और दो बतखें

139:57

Speaker A

मारी गई। लगभग हर जानवर लहूलुहान था। यहां तक कि पीछे खड़े नेपोलियन की पूंछ पर भी एक छर्रा लग गया। परेशानों का भी कचूमर निकल गया। बॉक्सर ने अपने भारी खुरों से तीन आदमियों के सिर फोड़ दिए। एक गाय ने अपने सींग से एक आदमी

140:14

Speaker A

का पेट फाड़ दिया। जैसी और ब्लू बिल ने एक की पतलूून ही फाड़ डाली। तभी नेपोलियन के वे नौ खंखार कुत्ते झाड़ियों के पीछे से अचानक निकल आए। वे इतनी बुरी तरह भौक रहे थे कि इंसान के हाथपांव फूल गए। फ्रेडरिक और उसके आदमियों को लगा कि वे चारों तरफ

140:33

Speaker A

से घिर गए हैं। वे अपनी जान बचाकर दुम दबाकर भागने लगे। जानवरों ने उन्हें खेत के बाहर तक खदेड़ा। झाड़ियों से निकलते वक्त जानवरों ने उन्हें जाते-जाते कुछ आखिरी लातें भी जमाई। जानवर जीत तो गए थे पर वे थककर चूर हो गए

140:52

Speaker A

थे। सबके घावों से खून टपक रहा था। वे लंगड़ाते हुए धीरे-धीरे वापस खेत की तरफ आए। अपने मरे हुए साथियों की लाशें देखकर सबकी आंखें भर आई। वे उस जगह पर रुके जहां उनकी विंड मिल खड़ी थी और वहां कुछ नहीं बचा था। [संगीत]

141:10

Speaker A

उनकी बरसों की मेहनत का एक एक निशान मिट चुका था। विंडमिल की नींव तक उखड़ गई थी। इस बार तो मलबे में पत्थर भी नहीं बचे थे। धमाका इतना जोरदार था कि पत्थर सैकड़ों गज दूर जा गिरे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वहां कभी कोई विंड मिल थी ही नहीं।

141:30

Speaker A

जब वे खेत के करीब पहुंचे तो स्कूलर उनकी तरफ उछलता हुआ आया। वह पूरी लड़ाई के दौरान कहीं गायब था। पर अब बहुत खुश दिख रहा था। तभी घर की तरफ से एक जोरदार धमाका हुआ। वह बंदूक क्यों चलाई जा रही है? बॉक्सर ने

141:47

Speaker A

पूछा। हमारी जीत का जश्न मनाने के लिए स्क्वलर चिल्लाया। कैसी जीत? बॉक्सर ने धीरे से कहा। उसके घुटनों से खून बह रहा था। उसकी नाल गिर चुकी थी और खुर फट गया था। उसकी टांग में बंदूकों के 101 छर्रे घुसे हुए थे। जिनसे बहुत तेज जलन हो रही

142:07

Speaker A

थी। कैसी जीत सा थी? क्या हमने दुश्मन को अपनी जमीन से बाहर नहीं खदेड़ दिया? यह एनिमल फार्म या जानवरों का खेत की अपनी मिट्टी है। पर उन्होंने विंडमिल तोड़ दी। हमने उस पर दो साल तक अपनी कमर तोड़ी थी। उससे क्या फर्क पड़ता है? हम एक और विंड मिल बना

142:28

Speaker A

लेंगे। हम तो छह विंड मिल बना लेंगे। तुम नहीं समझ रहे साथी कि हमने कितना बड़ा काम किया है। जहां हम खड़े हैं वहां दुश्मन का कब्जा था। और अब मालिक नेपोलियन की अकल की वजह से हमने अपनी एक-ए इंच जमीन वापस ले ली है।

142:46

Speaker A

इसका मतलब हमने बस वही वापस पाया है जो पहले से हमारा था। बॉक्सर ने कहा स्क्वलर ने कहा यही तो हमारी जीत है। वे लंगड़ाते हुए आंगन में आए। बॉक्सर के घाव बहुत दुख रहे थे। उसे दिख रहा था कि अब फिर से जीरो से विंड मिल बनानी होगी।

143:05

Speaker A

मिट्टी और भारी पत्थर ढोते ढोते फिर से जान निकल जाएगी। पहली बार उसे एहसास हुआ कि वह 11 साल का हो गया है। उसे लगा कि अब उसके शरीर में वैसी ताकत नहीं रही जैसी पहले थी। पर जब जानवरों ने हरा झंडा लहराते देखा और बार-बार बंदूक की आवाज

143:24

Speaker A

सुनी। कुल सात बार बंदूक चलाई गई तो उन्हें भी लगने लगा कि शायद वे बहुत बड़ी लड़ाई जीत गए हैं। नेपोलियन ने सबको शाबाशी दी। जो जानवर मारे गए थे उनकी अर्थी बड़े ठाट से निकाली गई। बॉक्सर और क्लोअर ने ही वह गाड़ी खींची। नेपोलियन

143:43

Speaker A

खुद सबसे आगे चल रहा था। दो दिन तक बस जश्न चला। गाने गाए गए और भाषण हुए। हर जानवर को इनाम में एक-एक सेब मिला। चिड़ियों को थोड़ा अनाज और कुत्तों को तीन-तीन बिस्किट मिले। ऐलान हुआ कि इस लड़ाई को विंडमिल की लड़ाई कहा जाएगा।

144:04

Speaker A

बैटल ऑफ द विंडमिल नेपोलियन ने खुद को ही एक नया मेडल दे दिया। इस नाच गाने के शोर में वे नकली नोट वाली बेईमानी सब भूल गए। कुछ दिन बाद बड़े सूअर को उस बड़े घर के तहखाने में विस्की की एक पेटी मिली। जब पहली बार घर पर कब्जा हुआ था तब किसी की

144:24

Speaker A

नजर इस पर नहीं पड़ी थी। उस रात घर के अंदर से जोरजोर से गाने की आवाजें आ रही थी। सबको बहुत हैरानी हुई क्योंकि उन आवाजों में इंग्लैंड के जानवर के सुर भी सुनाई दे रहे थे। रात के करीब 9:30 बजे नेपोलियन को देखा गया। उसने जों्स की

144:42

Speaker A

पुरानी गोल टोपी पहन रखी थी। वह पिछले दरवाजे से निकला और आंगन में तेजी से चक्कर लगाकर फिर अंदर चला गया। पर अगली सुबह उस बड़े घर में सन्नाटा पसरा था। कोई भी सूअर हिलता डुलता नहीं दिख रहा था। 9 बजने वाले थे जब स्कूलर बाहर आया। वो बहुत

145:02

Speaker A

धीरे चल रहा था। उसकी आंखें पथराई हुई थी और पूंछ ढीली लटक रही थी। वह बहुत बीमार लग रहा था। उसने सब जानवरों को इकट्ठा किया और एक बहुत डरावनी खबर सुनाई। उसने कहा कि साथी नेपोलियन अब मरने वाले हैं। पूरे खेत में रोना पिटना मच गया। घर के

145:24

Speaker A

दरवाजों के बाहर घास बिछा दी गई ताकि चलने से शोर ना हो। जानवर दबे पांव चल रहे थे। सबकी आंखों में आंसू थे। वे एक दूसरे से पूछ रहे थे कि अगर उनका मालिक चला गया तो वे क्या करेंगे? खबर उड़ गई कि पक्का स्नोबॉल ने ही नेपोलियन के खाने में जहर

145:44

Speaker A

मिलाकर दिया होगा। 11:00 बजे स्कूलर फिर बाहर आया। उसने कहा कि मरतेमरते साथी नेपोलियन ने एक आखरी हुक्म दिया। शराब पीने वाले को मौत की सजा दी जाएगी। पर शाम तक नेपोलियन की तबीयत थोड़ी सुधर गई। अगली सुबह स्कूलर ने बताया कि मालिक

146:03

Speaker A

अब ठीक हो रहे हैं। उसे शाम तक नेपोलियन काम पर लौट आया। अगले दिन पता चला कि उसने विंपर को शहर से शराब बनाने के तरीके वाली किताबें लाने को कहा है। एक हफ्ते बाद नेपोलियन ने हुक्म दिया कि बगीचे के पीछे वाला छोटा मैदान जोत दिया जाए। पहले यह

146:24

Speaker A

जगह उन बूढ़े जानवरों के लिए रखी गई थी जिनकी काम करते-करते कमर टूट गई थी। सबको लगा कि वहां नई घास बोई जाएगी। पर असल में नेपोलियन वहां जॉब बोना चाहता था [संगीत] ताकि वह अपनी शराब बना सके। इसी समय एक बड़ी अजीब घटना हुई जिसे कोई

146:43

Speaker A

समझ नहीं पाया। एक रात 12:00 बजे के करीब आंगन में जोर से कुछ गिरने की आवाज आई। सब जानवर घबराकर बाहर निकल आए। शांत की रोशनी फैली हुई थी। बड़े तबेले के उस दीवार के पास जहां खेत के साथ नियम लिखे थे। एक सीढ़ी टूटी पड़ी थी।

147:03

Speaker A

स्क्वलर वहीं जमीन पर गिरा हुआ था। उसे थोड़ा चक्कर आ रहा था। उसके पास ही एक लालटेन, एक पेंट ब्रश और सफेद सफेदी का डिब्बा पलटा पड़ा था। कुत्तों ने फौरन उसे घेर लिया और उसे उस बड़े घर में ले गए। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि स्कूलर

147:24

Speaker A

वहां रात को क्या कर रहा था। बस बूढ़ा बेंजामिन चुपचाप अपना मुंह हिला रहा था। वह समझ गया था पर उसने किसी को कुछ नहीं बताया। पर कुछ दिन बाद म्यूरियल ने एक और बेईमानी पकड़ी। वह जब दीवार पर लिखे खेत के साथ

147:40

Speaker A

नियम पढ़ रही थी तो उसने देखा कि जानवर एक और नियम गलत याद कर रहे थे। उन्हें लगा था कि पांचवा नियम कहता है कोई जानवर शराब नहीं पिएगा। पर दीवार पर तो कुछ और ही लिखा था। वहां लिखा था कोई जानवर हद से ज्यादा शराब नहीं पिएगा।

147:59

Speaker A

बॉक्सर का फटा हुआ खुर ठीक होने का नाम नहीं ले रहा था। जैसे ही जीत का जश्न खत्म हुआ, अगले ही दिन विंडमिल का काम फिर शुरू हो गया। बॉक्सर ने एक भी दिन आराम नहीं किया। वह किसी को यह जाहिर नहीं होने देना चाहता था कि वह दर्द से तड़प रहा है। रात

148:19

Speaker A

को वह चुपके से क्लोअर को बताता कि उसका पैर बहुत दुख रहा है। क्लोअर जड़ी बूटियां चबाकर उसके खुर पर लेप लगाती। वह और बेंजमिन उसे समझाते कि इतनी हारतोड़ मेहनत मत करो। फ्लोअर कहती घोड़े का शरीर हमेशा साथ नहीं देता पर बॉक्सर नहीं माना। वह

148:40

Speaker A

चाहता था कि काम से छुट्टी लेने से पहले वह विंडमिल को आधा बनते देख ले। शुरू में एनिमल फार्म के जो नियम बने थे, उनमें काम छोड़ने की उम्र तय थी। घोड़ों और बड़े सूअर के लिए 12 साल की उम्र तय की गई थी। गायों के लिए 14 और भेड़ों के लिए सात

149:00

Speaker A

सात। तय हुआ था कि काम छोड़ने के बाद सबको अच्छा खाना और आराम मिलेगा। अब तक किसी जानवर ने काम नहीं छोड़ा था। पर अब इसकी बातें होने लगी थी। जिस मैदान में बूढ़े जानवरों को रखा जाना था, वहां तो अब

149:15

Speaker A

नेपोलियन ने अपनी शराब के लिए जॉब बोने के लिए हल चलवा दिया था। इसलिए अब खेत के एक कोने में बाड़ा बनाने की बात चल रही थी। कहा गया कि रिटायर होने के बाद घोड़े को रोज अनाज और घास मिलेगी। अगले साल की गर्मी में बॉक्सर पूरे 12 साल

149:35

Speaker A

का होने वाला था। उन दिनों जीना दुभ हो गया था। पिछला जाड़ा तो बुरा था ही। यह वाला और भी जानलेवा निकला। खाने के लाले पड़ गए थे। एक बार फिर सबका दाना पानी कम कर दिया गया। पर हां बड़े सूअर और कुत्तों के लिए खाने की

149:54

Speaker A

कोई कमी नहीं थी। स्कूलर ने सबको समझाया कि सबको एक बराबर खाना देना नियम के खिलाफ होगा। स्कूलर कभी यह नहीं कहता था कि खाना कम हुआ है। वह कहता था कि खाना बस ठीक किया जा रहा है। वह जोर-जोर से चिल्लाकर ढेरों

150:12

Speaker A

नंबर सुनाता। वह कहता कि पुराने खेत के जमाने से तो अब बहुत अच्छा खाना मिल रहा है। वह कहता कि अब जानवर ज्यादा साल जी रहे हैं और पीने का पानी भी अब पहले से साफ है। बेचारे जानवरों ने उसकी हर बात मान ली। सच तो यह है कि जोंस के दिनों की

150:31

Speaker A

बातें वे अब लगभग भूल चुके थे। अब जानवरों का पेट अक्सर भूख से जल रहा होता और वे ठंड से ठिठठठठठठठठठठठठठठठठठठठठोरते रहते। जब वे सो नहीं रहे होते तो मिट्टी ढोते ढोते उनकी कमर टूट जाती थी। पर स्क्वलर ने उन्हें ऐसी पट्टी पढ़ाई [संगीत] कि वे खुद

150:49

Speaker A

को आजाद समझने लगे। उन्हें लगता कि कम से कम अब वे गुलाम तो नहीं है। अब खेत में खाने वाले मुंह और बढ़ गए थे। चार सुवर्णियों ने मिलकर 31 बच्चे दिए थे। वे सब नेपोलियन के ही बच्चे थे। नेपोलियन ने उनके लिए घर में ही स्कूल खोलने का

151:09

Speaker A

सोचा और तब तक खुद उन्हें रसोई में पढ़ाने लगा। उन छोटे सूअरों को दूसरे जानवरों के बच्चों के साथ खेलने की मनाही थी। उसी समय एक नया नियम भी बना दिया गया। अगर रास्ते में कोई सूअर मिल जाए तो दूसरे जानवर को फौरन किनारे हटकर उसे रास्ता देना होगा।

151:28

Speaker A

और तो और अब नेपोलियन ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए एक और नया तरीका निकाला। अब हरितवार को सारे बड़े सूअर अपनी पूंछ पर हरे रंग की पट्टी बांधने लगे थे। खेत पर अब पूरी तरह डंडे का राज दिखने लगा था।

151:47

Speaker A

खेत का साल तो ठीक निकला पर पैसे की बहुत तंगी थी। स्कूल बनाने के लिए ईंट, रेत और विंड मिल की मशीनों के लिए पैसे जोड़ने थे। नेपोलियन की मेज के लिए चीनी और घर के लिए तेलबत्ती का खर्चा भी था। नेपोलियन ने दूसरे बड़े सूअर को चीनी खाने

152:06

Speaker A

से मना कर दिया था। वह कहता था कि इससे वे मोटे हो जाएंगे। पैसे के लिए घास का ढेर और आधे आलू बेच दिए गए। मुर्गियों के साथ सौदा और बढ़ा दिया गया। अब उन्हें हर हफ्ते 600 अंडे देने पड़ रहे थे। अब तो इतने चूजे भी पैदा

152:25

Speaker A

नहीं हो पा रहे थे कि मुर्गियों की गिनती पूरी रहे। दिसंबर में दाना पानी कम किया गया था। फिर फरवरी में और कम कर दिया गया। तेल बचाने के लिए तबेले में लालटेन जलाना भी मना था। जानवरों की मिट्टी ढोते ढोते कमर टूट गई थी और पेट भूख से जल रहा था।

152:45

Speaker A

पर बड़े सूअर बड़े मजे में थे। वे पहले से ही ज्यादा मोटे होते जा रहे थे। फरवरी की एक दोपहर रसोई के पीछे वाले छोटे घर से एक बहुत ही सौंधी और लजीज खुशबू आई। ऐसी महक जानवरों ने पहले कभी नहीं सूंघी थी। किसी ने बताया कि यह जौ पकने की खुशबू है।

153:07

Speaker A

बेचारे जानवरों के पेट भूख से जल रहे थे। उन्होंने महक सूंघी और उम्मीद लगाई कि शायद रात के खाने में उन्हें कुछ अच्छा मिलेगा। पर उन्हें कुछ नहीं मिला। अगले इतवार को ऐलान कर दिया गया कि अब से सारा जौ सारा बारली सिर्फ बड़े सूअर के लिए ही

153:26

Speaker A

रखा जाएगा। बाद में पता चला कि नेपोलियन ने अपनी अय्याशी के लिए नया तरीका निकाला है। अब हर सूअर को रोज पीने के लिए बियर मिलती थी। नेपोलियन खुद तो रोज आधा गैलन पीता था। वह भी उस कीमती कटोरी में जिसमें पहले जों्स के घर वाले सूप पीते थे।

153:47

Speaker A

जीना बहुत मुश्किल था। पर जानवरों को लगता था कि अब उनकी इज्जत बढ़ गई है। अब खेत पर गाने, भाषण और जुलूस ज्यादा होने लगे थे। नेपोलियन ने हुक्म दिया कि हफ्ते में एक बार खुशी का जुलूस निकाला जाए। इसका मकसद जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म की जीत

154:08

Speaker A

का जश्न मनाना था। तय समय पर सब जानवर अपना काम छोड़ देते। वे फौजियों की तरह लाइन बनाकर खेत में टहलते। सबसे आगे बड़े सूअर चलते। फिर घोड़े, फिर गाय, फिर भेड़े और आखिर में मुर्गियां। कुत्तों का पहरा रहता और सबसे आगे नेपोलियन का काला मुर्गा चलता। बॉक्सर और

154:31

Speaker A

क्लोवर एक हरा झंडा थामे रहते जिस पर लिखा था साथ ही नेपोलियन अमर रहे। इसके बाद नेपोलियन की तारीफ में कविताएं पढ़ी जाती। स्कूलर ढेरों नंबर सुनाकर बताता कि खाने की पैदावार कितनी बढ़ गई है। कभी-कभी बंदूक भी चलाई जाती। भेड़े इस जुलूस की

154:51

Speaker A

दीवानी थी। अगर कोई जानवर दबी जुबान में शिकायत करता कि ठठुरती ठंड में खड़े-खड़े वक्त बर्बाद हो रहा है तो भेड़े फौरन चिल्लाने लगती। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले बुरे। इन गानों, झंडों और शोर, शराबे में जानवर थोड़ी देर के लिए यह भूल

155:09

Speaker A

जाते कि उनका पेट भूख से जल रहा है। अप्रैल के महीने में जानवरों का खेत यानी एनिमल फार्म को एक अपना राज घोषित कर दिया गया। अब एक बड़ा मालिक चुनना जरूरी था। चुनाव में सिर्फ एक ही उम्मीदवार खड़ा हुआ। नेपोलियन। सबने मिलकर उसे ही चुन

155:31

Speaker A

लिया। उसी दिन यह खबर दी गई कि स्नोबॉल के बारे में कुछ नए कागज मिले हैं। अब बताया गया कि स्नोबॉल ने इंसानों की लड़ाई में सिर्फ हमें हरवाने की चाल ही नहीं चली थी बल्कि वह तो खुलकर जोस की तरफ से लड़ रहा था। असल में वही इंसानों की फौज का असली

155:49

Speaker A

मालिक था और इंसान अमर रहे के नारे लगा रहा था। स्नोबॉल की पीठ पर जो जख्म कुछ जानवरों को याद थे, वे जॉस की गोली के नहीं थे। स्कूल ने कहा कि वे जख्म तो नेपोलियन के दांतों के निशान थे। नेपोलियन ने अपनी बहादुरी से

156:06

Speaker A

उसे काटा था। गर्मी के बीच मोजिस नाम का कौवा अचानक खेत पर लौट आया। वह कई सालों से गायब था। वह पहले जैसा ही था। वह कोई काम नहीं करता था और बस मीठे पहाड़ की बातें करता रहता। वह एक सूखी लकड़ी पर बैठता और अपने पंख

156:27

Speaker A

फड़फड़ाता। वह घंटों बोलता रहता। वह अपनी चोंच से आसमान की तरफ इशारा करके कहता साथियों ऊपर देखो। उस काले बादल के पार मीठा पहाड़ है। वहां हम बेचारे जानवरों को हमेशा के लिए आराम मिलेगा। वह कहता कि वहां उड़कर जा चुका है। वहां

156:48

Speaker A

हर जगह खाने की अच्छी-अच्छी चीजें और चीनी उगती हैं। बहुत से जानवरों ने उसकी बात मान ली। उनका पेट भूख से जल रहा था और काम करते-करते कमर टूट रही थी। उन्हें लगा कि कहीं ना कहीं तो ऐसी जगह होगी जहां मेहनत ना करनी पड़े। बड़े सूअर ऊपर से तो कहते

157:08

Speaker A

थे कि मोजिस झूठ बोल रहा है। पर फिर भी उन्होंने उसे खेत पर रहने दिया। उसे बिना काम किए रोज थोड़ी बियर भी दी जाती थी। खुर ठीक होने के बाद बॉक्सर ने जी तोड़ मेहनत की। उस साल सब जानवरों ने गुलामों की तरह काम किया। खेत का रोज का काम, विंड

157:29

Speaker A

मिल बनाना और छोटे सोरों का स्कूल बनाना सब एक साथ चल रहा था। कम खाने और ज्यादा काम की वजह से जीना दुभ था। पर बॉक्सर कभी नहीं डगमगाया। वह अपनी कमजोरी किसी को नहीं दिखाता था। बस वह थोड़ा दुबला हो गया था और उसकी खाल की चमक चली गई थी। दूसरे

157:49

Speaker A

जानवर कहते जब नई घास आएगी तब बॉक्सर ठीक हो जाएगा। पर वसंत आया और बॉक्सर वैसा ही रहा। पत्थर की खान से भारी पत्थर खींचते वक्त उसके पैर कांपते थे। अब उसके मुंह से आवाज नहीं निकलती थी। बस उसके होंठ हिलते और कहते मैं और ज्यादा मेहनत करूंगा।

158:11

Speaker A

क्लअर और बेंजामिन ने उसे बहुत समझाया पर उसने नहीं सुना। वह बस 12 साल का होने से पहले काम पूरा करना चाहता था। गर्मी की एक देर शाम पूरे खेत पर खबर फैल गई कि बॉक्सर के साथ कुछ बुरा हुआ है। वह

158:29

Speaker A

अकेला ही भारी पत्थर खींचकर विंडमिल तक ले जा रहा था। खबर एकदम सच निकली। दो कबूतर उड़ते हुए आए और बोले बॉक्सर गिर गया है। वह जमीन पर लेटा है और उठ नहीं पा रहा है। आधे से ज्यादा जानवर उस टीले की तरफ दौड़े जहां विंड मिल बन रही थी। बॉक्सर वहां

158:48

Speaker A

गाड़ी के जुए के बीच गिरा पड़ा था। उसकी गर्दन जमीन पर फैली थी। वह अपना सिर तक नहीं उठा पा रहा था। उसकी आंखें पथरा गई थी। मिट्टी ढोते ढोते उसकी कमर पहले ही टूट चुकी थी और अब उसका शरीर पसीने से लथपथ था। उसके मुंह से खून की एक पतली धार

159:09

Speaker A

निकल रही थी। क्लोअर उसके पास घुटनों के बल बैठ गई। बॉक्सर वह चिल्लाई। क्या हुआ तुम्हें? मेरे फेफड़े जवाब दे गए हैं। बॉक्सर ने बहुत ही कमजोर आवाज में कहा। कोई बात नहीं। मुझे लगता है तुम लोग मेरे बिना भी

159:26

Speaker A

विंडमिल पूरी कर लोगे। वैसे भी मेरा बस एक ही महीना काम का बचा था। सच कहूं तो मैं अब आराम करना चाहता था। शायद बेंजामिन भी बूढ़ा हो गया है तो हम दोनों को एक साथ छुट्टी दे दो। हमें फौरन मदद चाहिए। क्लोअर ने कहा, कोई

159:44

Speaker A

भागकर स्कूलर को खबर दो। सब जानवर उस बड़े घर की तरफ भागे। सिर्फ क्लोअर और बेंजामिन वहीं रुके। बेंजामिन चुपचाप बॉक्सर के पास बैठ गया। वह अपनी लंबी पूछ से उसकी मक्खियां उड़ाने लगा। थोड़ी देर में स्कूलर वहां पहुंचा। वह

160:01

Speaker A

बहुत ही दुखी होने का नाटक कर रहा था। उसने कहा कि साथी नेपोलियन को यह सुनकर बहुत दुख हुआ है। नेपोलियन ने तय किया है कि बॉक्सर को शहर के हॉस्पिटल भेजा जाएगा। जानवरों को यह सुनकर थोड़ा डर लगा। वे अपने बीमार साथी को इंसानों के हाथों में

160:18

Speaker A

नहीं देना चाहते थे। पर स्कूलर ने उन्हें पट्टी पढ़ा दी। उन्हें यकीन दिलाया कि शहर के डॉक्टर बॉक्सर का ज्यादा अच्छा इलाज करेंगे। आधे घंटे बाद बॉक्सर किसी तरह अपने पैरों पर खड़ा हुआ। वह लंगड़ाते हुए अपने तबेले तक

160:34

Speaker A

आया। जहां दोस्तों ने उसके लिए नरम घास बिछा दी थी। अगले दो दिन तक बॉक्सर अपने तबेले में ही पड़ा रहा। बड़े सूअर ने गुलाबी रंग की एक बड़ी दवा की बोतल भेजी थी। क्लवर उसे रोज दो बार दवा पिलाती। शाम को क्लोवर उसके पास ही लेट जाती और बातें

160:53

Speaker A

करती। बेंजमिन उसकी मक्खियां उड़ाता रहता। बॉक्सर कहता कि उससे कोई मतलब नहीं है। उसे लगा कि वह तीन साल और जिएगा। वह अपना बचा हुआ जीवन उस मैदान के कोने में आराम से बिताना चाहता था। उसने सोचा था कि अब वह फुर्सत में बसा हुआ कहरा यानी अल्फाबेट

161:13

Speaker A

सीखेगा। पर बेंजामिन और क्लोअर सिर्फ काम खत्म करने के बाद ही उसके पास आ सकते थे। दोपहर का समय था जब उसे ले जाने के लिए गाड़ी आई। सब जानवर एक बड़े सूअर की निगरानी में खेत की घास साफ कर रहे थे। मिट्टी ढोते

161:32

Speaker A

ढोते सबकी कमर टूटी जा रही थी। तभी अचानक बेंजामिन दौड़ता हुआ आया। वह जोर-जोर से चिल्ला रहा था। जानवरों ने आज तक बेंजमिन को इतना परेशान और इतनी तेज दौड़ते कभी नहीं देखा था। जल्दी करो। जल्दी करो। वह चिल्लाया। वे बॉक्सर को ले जा रहे हैं। सब

161:51

Speaker A

जानवर काम छोड़कर भागने लगे। आंगन में एक बड़ी बंद गाड़ी खड़ी थी। दो घोड़े उसे खींच रहे थे। गाड़ी चलाने वाला आदमी बहुत शातिर लग रहा था। बॉक्सर का तबेला अब एकदम खाली था। सब जानवर गाड़ी के चारों तरफ जमा हो गए। वे खुशी-खुशी चिल्लाए नमस्ते

162:11

Speaker A

बॉक्सर विदा दोस्त मूर्ख हो तुम सब एकदम बुद्धू बेंजमीन जमीन पर खुर मारते हुए चीखा क्या तुम्हें दिख नहीं रहा कि इस गाड़ी पर क्या लिखा है यह सुनकर सब चुप हो गए म्यूरियल ने पढ़ने की कोशिश की पर बेंजमिन ने उसे धक्का देकर हटा दिया भारी

162:30

Speaker A

सन्नाटे के बीच उसने पढ़कर सुनाया अल्फ्रेड सिमंड्स घोड़ा काटने वाला और सरिस बनाने वाला खाल और हड्डियों का सौदागर बेंजमिन दहाड़ मारकर बोला क्या अब भी नहीं समझे वे बॉक्सर को कसाई के पास ले जा रहे हैं सब

162:50

Speaker A

जानवरों के मुंह से डर के मारे चीख निकल गई उसी पल गाड़ी वाले आदमी ने घोड़ों पर कूड़ा मारा गाड़ी तेजी से आंगन के बाहर निकलने लगी सब जानवर चीखते चिल्लाते उसके पीछे भागे क्लोअर ने अपनी पूरी जान लगा दी और सबसे आगे दौड़ने लगी गाड़ी की रफ्तार

163:07

Speaker A

बढ़ने लगी थी। क्लोअर चिल्लाई बॉक्सर बॉक्सर बॉक्सर जैसे ही अंदर शोर पहुंचा गाड़ी की छोटी खिड़की पर बॉक्सर का चेहरा दिखाई दिया। क्लोअर ने बहुत डरावनी आवाज में चीख कर कहा। बॉक्सर बाहर निकलो। जल्दी बाहर निकलो। वे तुम्हें जान से मारने ले जा रहे हैं। सब जानवर एक साथ चिल्लाने लगे। बाहर

163:31

Speaker A

आ जाओ। बॉक्सर बाहर आ जाओ। पर गाड़ी अब बहुत दूर निकल चुकी थी। पता नहीं बॉक्सर ने क्लोअर की बात समझी या नहीं। पर अगले ही पल उसका चेहरा खिड़की से हट गया। गाड़ी के अंदर से खुरों के चलने की जोरदार आवाज आई। वह लात मार मार कर बाहर निकलने की

163:49

Speaker A

कोशिश कर रहा था। एक वक्त था जब बॉक्सर की एक लात उस लकड़ी की गाड़ी के परखच्चे उड़ा देती। पर अब उसका शरीर साथ नहीं दे रहा था। मिट्टी ढोते ढोते उसकी कमर पहले ही टूट चुकी थी। धीरे-धीरे गाड़ी के अंदर से आने वाली आवाज

164:07

Speaker A

कम हो गई और फिर सन्नाटा छा गया। जानवरों ने गाड़ी खींचने वाले घोड़ों से मिन्नतें की। साथियों अपने भाई को मौत के मुंह में मत ले जाओ। पर वे बेचारे जानवर कुछ समझ ही नहीं पाए और गाड़ी तेजी से

164:27

Speaker A

सड़क पर ओझल हो गई। बॉक्सर फिर कभी दिखाई नहीं दिया। तीन दिन बाद बताया गया कि हॉस्पिटल में बॉक्सर की मौत हो गई। स्कूलर यह खबर सुनाने आया। उसने कहा कि वह आखिरी समय में बॉक्सर के पास ही था। स्कूलर ने अपना खुर

164:44

Speaker A

उठाकर एक नकली आंसू पोछा और कहा, "मैंने ऐसा दुख भरा नजारा पहले कभी नहीं देखा।" वह मरते समय इतना कमजोर था कि बोल भी नहीं पा रहा था। उसने मेरे कान में धीरे से कहा कि उसे बस इस बात का दुख है कि वह विंडमिल पूरी होते नहीं देख पाया। उसने आखिरी सांस

165:02

Speaker A

लेते हुए कहा आगे बढ़ो साथियों बगावत का नामोछा करो एनिमल फार्म अमर रहे मालिक नेपोलियन अमर रहे नेपोलियन हमेशा सही होते हैं साथियों यह उसके आखिरी शब्द थे तभी अचानक स्कूलर का चेहरा बदल गया वह थोड़ी देर के लिए चुप हो गया उसने अपनी

165:23

Speaker A

छोटी-छोटी आंखों से सबको शक की निगाहों से यहां वहां घूरना शुरू किया उसे लग रहा था कि कोई उसकी की बेईमानी पकड़ ना ले। स्कूलर ने कहा कि उसे एक बहुत ही गंदी अफवाह का पता चला है। उसने बताया कि जब बॉक्सर को ले जाया जा रहा था तब कुछ

165:41

Speaker A

जानवरों ने गाड़ी पर घोड़ा काटने वाला लिखा देख लिया था। उन्हें लगा कि बॉक्सर को कसाई के पास भेजा जा रहा है। स्कूलर गुस्से में उछलने लगा और अपनी पूंछ हिलाकर बोला कि क्या जानवर इतने बुद्धू हो सकते हैं? क्या उन्हें अपने प्यारे मालिक

165:58

Speaker A

नेपोलियन पर इतना भी भरोसा नहीं है? उसने सफाई दी कि वह गाड़ी पहले कसाई की ही थी जिसे डॉक्टर ने खरीदा था। डॉक्टर अभी पुराना नाम मिटाना भूल गया था। बस इसी वजह से सबको धोखा हो गया। यह सुनकर जानवरों की जान में जान आई।

166:17

Speaker A

जब स्क्वलर ने बॉक्सर की मौत का झूठा और बढ़ा चढ़ाकर हाल सुनाया तो जानवरों का सारा शक दूर हो गया। उसने बताया कि नेपोलियन ने महंगी दवाओं के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। जानवरों को लगा कि चलो कम से कम उनका साथी खुशी-खुशी मरा। अगले

166:36

Speaker A

इतवार को नेपोलियन खुद पंचायत में आया। उसने बॉक्सर की याद में एक छोटा सा भाषण दिया। उसने कहा कि बॉक्सर की लाश को खेत पर वापस लाना मुमकिन नहीं था। पर उसने उसके लिए फूलों का एक बहुत बड़ा हार भेजा है। नेपोलियन ने सबको बॉक्सर के दो नारों

166:54

Speaker A

की याद दिलाई। मैं और ज्यादा मेहनत करूंगा और मालिक नेपोलियन हमेशा सही होते हैं। उसने कहा कि हर जानवर को यही बातें माननी चाहिए। जिस दिन बॉक्सर की याद में दावत होनी थी, उस दिन शहर से एक गाड़ी आई। उसने उस बड़े

167:11

Speaker A

घर में एक बड़ा लकड़ी का डिब्बा पहुंचाया। उस रात घर के अंदर से जोरजोर से गाने की आवाज आई। फिर ऐसा लगा जैसे कोई बहुत बड़ा झगड़ा हो रहा हो। रात के 11:00 बजे शीशा टूटने का बहुत जोरदार धमाका हुआ। अगले दिन दोपहर तक उस घर में कोई हलचल नहीं हुई।

167:31

Speaker A

खबर फैल गई कि बड़े सूअर ने न जाने कहां से पैसा जुगाड़कर शराब की एक और पेटी मंगवा ली है। साल गुजरते गए। मौसम आते रहे और जाते रहे। जानवरों की छोटी सी जिंदगी बीतती गई। अब खेत पर कोई ऐसा नहीं बचा था जिसे बगावत से पहले के दिन याद हो। बस क्लोवर, बेंजामिन,

167:54

Speaker A

मोजेस, कोवा और कुछ बड़े सूअर ही पुराने दिनों को जानते थे। म्यूरियल मर चुकी थी। पुराने कुत्ते भी मर चुके थे। जों्स भी अब इस दुनिया में नहीं था। वह कहीं दूर शराबियों के हॉस्पिटल में मर गया था। स्नोबॉल का नाम अब कोई नहीं लेता था।

168:12

Speaker A

बॉक्सर को भी लोग भूल चुके थे। बस कुछ पुराने साथी ही उसे याद करते थे। क्लोवर अब बहुत बूढ़ी हो गई थी। उसके जोड़ों में हमेशा दर्द रहता और आंखों से पानी बहता था। वह काम छोड़ने की उम्र से 2 साल ऊपर हो चुकी थी। पर असल में यहां किसी को भी

168:31

Speaker A

आराम नहीं मिला था। बूढ़े जानवरों के लिए घास का मैदान छोड़ने की बात तो अब कोई करता ही नहीं था। नेपोलियन अब बहुत तगड़ा और भारी सूअर हो गया था। स्कूलर इतना मोटा हो गया था कि चर्बी की वजह से उसकी आंखें भी ठीक से नहीं खुलती थी। बस बूढ़ा

168:49

Speaker A

बेंजमीन पहले जैसा ही था। बस अब उसका मुंह थोड़ा ज्यादा सफेद हो गया था। बॉक्सर के जाने के बाद वह और भी चुप रहने लगा था। खेत पर अब बहुत से नए जानवर आ गए थे। कई तो यहीं पैदा हुए थे। उनके लिए बगावत बस एक पुरानी कहानी थी। कुछ जानवर बाहर से

169:09

Speaker A

खरीद कर लाए गए थे। जिन्होंने इसके बारे में कभी सुना भी नहीं था। क्लोअर के अलावा अब खेत में तीन और घोड़े थे। वे बहुत मेहनती थे और मिट्टी ढोते ढोते अपनी जान लगा देते थे। पर वे अकल के थोड़े कच्चे थे। वे बी अक्षर के आगे अल्फाबेट का गहरा

169:26

Speaker A

सीख ही नहीं पाए। बड़े सूअर उन्हें जो भी पट्टी पढ़ाते वे उसे सच मान लेते। वे क्लूवर की बहुत इज्जत करते थे। पर उन्हें खुद कुछ ज्यादा समझ नहीं आता था कि उनके साथ कैसी बेईमानी हो रही है। अब खेत पहले से ज्यादा मालदार हो

169:44

Speaker A

गया था। सब काम कायदे से होने लगा था। पिल्किंग से दो और मैदान खरीद कर खेत को बड़ा कर लिया गया था। आखिर में विंडमिल बनकर तैयार हो गई थी। खेत के पास अब अपनी अनाज निकालने वाली मशीन भी थी और कई नई कोठे भी बन गए थे। विपर ने अपने लिए एक

170:03

Speaker A

घोड़ा गाड़ी खरीद ली थी। पर वह विंडमिल बिजली बनाने के काम नहीं आई। उसे तो बस अनाज पीसा जाता था। जिससे नेपोलियन की मोटी कमाई होती थी। अब बेचारे जानवर एक और नई विंड मिल बनाने में जुटे थे। मिट्टी ढोते ढोते उनकी कमर टूट गई थी। कहा गया कि

170:24

Speaker A

जब यह दूसरी विंड मिल बन जाएगी तब बिजली आएगी। स्नोबॉल ने जिन सुख सुविधाओं के सपने दिखाए थे जैसे बिजली की बत्ती और हफ्ते में बस तीन दिन काम उनके बारे में अब कोई बात नहीं करता था। नेपोलियन ने ऐसी बातों को बेकार बताया।

170:41

Speaker A

उसने कहा कि असली खुशी तो जी तोड़ मेहनत करने और रूखा सूखा खाकर जीने में है। ऐसा लग रहा था कि खेत तो अमीर होता जा रहा है। पर जानवरों की गरीबी नहीं जा रही। उनका पेट अब भी भूख से जल रहा था। बस बड़े सूअर और कुत्ते ही मौज में थे। शायद ऐसा

171:01

Speaker A

इसलिए था क्योंकि खेत पर अब बहुत सारे सूअर और कुत्ते हो गए थे। स्कूलर हमेशा समझाता कि खेत को चलाने और देखरेख करने में बहुत मगजपच्ची करनी पड़ती है। वह कहता कि बड़े सूअर दिन भर फाइल और कागजों पर कुछ ना कुछ लिखते रहते हैं।

171:20

Speaker A

जैसे ही कागज भर जाता उसे भट्टी में जला दिया जाता। वह कहता कि खेत की भलाई के लिए यह बहुत जरूरी है। पर सच तो यह था कि ना तो सूअर कोई अनाज उगाते थे और ना ही कुत्ते। फिर भी वे सबसे ज्यादा खाते थे और खूब मोटे हो रहे थे।

171:40

Speaker A

बाकी जानवरों की जिंदगी वैसी ही थी जैसी हमेशा रही थी। पेट भूख से जल रहा होता था। वे सूखी घास पर सोते थे। तालाब से पानी पीते थे। खेतों में खटतेखटते उनकी कमर टूट जाती थी। जाड़ों में हाड़ कांपने वाली ठंड लगती और गर्मियों में मक्खियां खून पीती।

172:01

Speaker A

कभी-कभी जो पुराने जानवर थे, वह अपनी कमजोर याददाश्त पर जोर डालते। वे सोचने की कोशिश करते कि जब बगावत शुरू हुई थी और जो उसको भगाया गया था तब दिन अच्छे थे या अब उन्हें कुछ याद नहीं आता था। उनके पास अपनी आज की हालत को परखने के लिए कुछ था

172:21

Speaker A

ही नहीं। उनके पास बस स्क्वलर के वे नंबर थे जो हमेशा यही बताते थे कि सब कुछ अच्छा हो रहा है। बेचारों के पास इन बातों को सोचने का वक्त भी नहीं था। बस बूढ़ा बेंजामिन कहता था कि उसे सब याद है। वह कहता था कि जीना ही मेहनत, भूख और दुख का

172:41

Speaker A

नाम है। यही जिंदगी का कड़वा सच है। फिर भी जानवरों ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्हें इस बात पर बहुत नाज था कि वे एनिमल फार्म का हिस्सा है। पूरे देश में यही एक खेत था जिसे जानवर खुद चलाते थे। चाहे कोई छोटा बच्चा हो या

172:59

Speaker A

कोई नया जानवर। सब इस बात को देखकर खुश होते थे। जब बंदूक चलती और हरा झंडा लहराता तो उनका सीना चौड़ा हो जाता था। वे पुरानी कहानियां याद करते जो उसको भगाने और खेत के साथ नियम लिखने की बातें करते। उन्हें आज भी मेजर के उस सपने पर पूरा

173:18

Speaker A

भरोसा था कि एक दिन हर तरफ जानवर ही होंगे और इंसान का साया तक नहीं होगा। कभी-कभी वे चोरी छिपे इंग्लैंड के जानवर की धुन भी गुनगुना लेते थे। भले ही मेहनत करतेकरते उनकी हड्डियां घिस गई थी। पर उन्हें लगता था कि वे दूसरों से अलग हैं।

173:38

Speaker A

कम से कम वे किसी जालिम इंसान की गुलामी तो नहीं कर रहे थे। वे जो भी कर रहे थे अपने लिए कर रहे थे। वहां कोई दो पैर पर नहीं चलता था। कोई किसी को मालिक नहीं कहता था। सब जानवर बराबर थे। गर्मी की शुरुआत थी। एक दिन स्कूलर ने भेड़ों को

173:55

Speaker A

अपने पीछे आने को कहा। वह उन्हें खेत के एक दूर के कोने में ले गया जहां जंगली झाड़ियां उगी हुई थी। भेड़े सारा दिन वहीं पत्ते चरती और स्क्वलर उन पर नजर रखता। स्क्वलर तो रात को घर लौट आता। पर उसने भेड़ों को वहीं रुकने को कहा। देखतेदेखते

174:14

Speaker A

पूरा हफ्ता बीत गया। बाकी जानवरों ने भेड़ों की सूरत तक नहीं देखी। स्कूलर रोज घंटों उनके साथ रहता। उसने कहा कि वह उन्हें एक नया गाना सिखा रहा है और इसके लिए अकेले में रहना जरूरी है। अभी भेड़े वापस ही आई थी। एक सुहानी शाम

174:34

Speaker A

जब सब जानवर काम खत्म करके थके हारे लौट रहे थे। तभी आंगन से किसी घोड़े के जोर से हिनहिनाने की डरावनी आवाज आई। सब जानवर ठिठक गए। वह क्लोअर की आवाज थी। वह फिर से चिल्लाई। सब जानवर सर पर दौड़ते हुए आंगन में पहुंचे। तब [संगीत] उन्होंने वह देखा

174:53

Speaker A

जिसे देखकर क्लोअर की रूह कांप गई थी। वहां एक बड़ा सूअर अपने पिछले दो पैरों पर चल रहा था। हां, वह स्क्वलर ही था। वह थोड़ा लड़खड़ा रहा था क्योंकि उसका शरीर भारी था और उसे दो पैरों पर चलने की आदत नहीं थी। पर वह अपना संतुलन बनाकर

175:14

Speaker A

आंगन में टहल रहा था और तभी उस बड़े घर के दरवाजे के सारे बड़े सूअर एक के बाद एक बाहर निकले। वह सब के सब अपने पिछले दो पैरों पर चल रहे थे। कुछ तो बहुत अच्छे से चल रहे थे। पर कुछ को देखकर लग रहा था कि उन्हें किसी लाठी के सहारे की जरूरत है।

175:33

Speaker A

पर वे सब आंगन का पूरा चक्कर लगाने में कामयाब रहे। आखिर में कुत्तों के भौकने और काले मुर्गे के चिल्लाने के बीच खुद नेपोलियन बाहर आया। वह एकदम सीधा खड़ा होकर चल रहा था और अकड़ कर सबको घूर रहा था। उसके कुत्ते उसके चारों तरफ उछल कूद

175:52

Speaker A

कर रहे थे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] नेपोलियन ने अपने खुर में एक कोड़ा थाम रखा था। आंगन में सन्नाटा पसर गया। सब जानवर हक्के भक्के रह गए। वे डर के मारे एक दूसरे से सट कर खड़े हो गए। उनकी आंखों के सामने बड़े सूअर दो पैरों पर मटक रहे

176:09

Speaker A

थे। ऐसा लग रहा था मानो दुनिया ही पलट गई हो। इतने सालों से जानवर चुप थे। वे कभी किसी बात की शिकायत नहीं करते थे। पर आज उनका जी भर आया था। वे कुछ बोलना चाहते थे। पर तभी जैसे बड़े सूअर ने कोई इशारा किया हो। सारी भेड़ों ने अपना नया राग

176:30

Speaker A

अलापना शुरू कर दिया। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले और भी अच्छे। चार पैर वाले अच्छे, दो पैर वाले और भी अच्छे। 5 मिनट तक बस यही शोर होता रहा। जब भेड़े रुकी तब तक बोलने का समय निकल चुका था। सारे बुरे सूअर वापस घर के अंदर जा चुके थे। वे अब

176:52

Speaker A

जानवरों की पहुंच से दूर थे। बेंजामिन ने देखा कि क्लोअर उसके कंधे पर नाक टिकाए खड़ी है। क्लोअर की बूढ़ी आंखों में अब रोशनी बहुत कम बची थी। वह उसे चुपचाप उस दीवार के पास ले गई जहां खेत के साथ नियम लिखे हुए थे। वे दोनों कुछ देर तक उस काली

177:12

Speaker A

दीवार को देखते रहे। क्लोअर ने धीरे से कहा, बेंजामिन, मेरी आंखों से अब ठीक से दिखता नहीं। मिट्टी धोते ढोते शरीर भी थक गया है। पर मुझे लग रहा है कि यह दीवार बदल गई है। क्या नियम अभी वही है जो पहले थे?

177:30

Speaker A

बेंजमिन ने दीवार पर लिखा हुआ पढ़ा और वहां सात नियम नहीं थे। सुरों ने अपनी बेईमानी छुपाने के लिए सब मिटा दिया था। और वहां बस एक ही बात लिखी थी। सब जानवर बराबर हैं पर कुछ जानवर दूसरों से ज्यादा बराबर हैं। अगले दिन जब बड़े सूअर खेत पर

177:50

Speaker A

हाथ में कोड़े लेकर पहरा देने लगे तो किसी को ताज्जुब नहीं हुआ। उन्होंने रेडियो मंगा लिया था और फोन लगवाने की तैयारी कर रहे थे। वे अब जब अखबार भी मंगाकर पढ़ने लगे थे। नेपोलियन मुंह में पाइप दबाकर बगीचे में टहलने लगा। हद तो तब हो गई जब

178:08

Speaker A

बड़े सूअर ने जों्स की अलमारी से कपड़े निकालकर पहन लिए। नेपोलियन काला कोट और चमड़े के जूते पहनकर शान से निकला। उसकी सबसे प्यारी सुनी ने रेशमी कपड़े पहन रखे थे। एक हफ्ते बाद पड़ोसी किसान खेत देखने आए। उन्होंने विंडमिल देखकर बहुत तारीफ

178:27

Speaker A

की। बेचारे जानवर खेत में घास साफ कर रहे थे। उनका पेट भूख से जल रहा था और वे डर के मारे सिर उठाकर देख भी नहीं पा रहे थे। मिट्टी ढोते ढोते उनकी कमर पहले ही टूट चुकी थी। वे समझ नहीं पा रहे थे कि उन्हें सूअरों से ज्यादा डरना चाहिए या इन

178:45

Speaker A

इंसानों से। शाम को उस बड़े घर से जोर-जोर से हंसने और गाने की आवाजें आने लगी। जानवरों को बड़ी हैरानी हुई कि अंदर क्या हो रहा है। वे सब दबे पांव बगीचे में घुसे। क्लोवर सबसे आगे चली। जो जानवर ऊंचे थे उन्होंने खिड़की से अंदर झांका। वहां

179:03

Speaker A

मेज के चारों तरफ छह किसान और छह बड़े सूअर बैठे थे। नेपोलियन सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठा था। सब बड़े मजे में ताश खेल रहे थे और बीियर पी रहे थे। किसी ने खिड़की पर जानवरों के मासूम और थके हुए चेहरे नहीं देखे। तभी फॉक्सवुड का मालिक पिल्किंगटन

179:24

Speaker A

हाथ में गिलास लेकर खड़ा हुआ। उसने कहा कि वह कुछ बोलना चाहता है और फिर सबके साथ मिलकर एक जाम पीना चाहता है। पिकिंग ने अपना गिलास उठाकर कहा कि उसे आज बहुत तसल्ली मिली है। उसने कहा कि अब पुराने सारे झगड़े और शक खत्म हो गए हैं। एक समय

179:42

Speaker A

था जब हम इंसानों को इस एनिमल फार्म पर बड़ा शक होता था। हमें लगता था कि बड़े सूअर का राज पड़ोस के लिए खतरा है। हमें डर था कि यहां के जानवर बगावत करके कहीं हमारे जानवरों को भी ना बिगाड़ दें। पर आज हमने अपनी आंखों से सब देख लिया। यहां तो

180:01

Speaker A

गजब का इंतजाम है। पूरे इलाके में यहां के जानवर सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं और सबसे कम खाना खाते हैं। पिल्किंग ने कहा कि वह भी अपने यहां यही सब शुरू करेगा। उसने कहा कि सूअरों और इंसानों का दुख एक ही है। दोनों को ही काम करने वालों से निपटना

180:19

Speaker A

पड़ता है। पकिंगन हंसते-हंसते लोटपोट हो गया। उसका चेहरा बैगने पड़ गया। उसने एक मजाक किया। जैसे तुम्हें इन छोटे जानवरों को सीधा रखना पड़ता है, वैसे ही हमें अपने गरीब मजदूरों को डंडे से चलाना पड़ता है। यह सुनकर मेज पर बैठे सब लोग जोर-जोर से हंसने लगे। पिल्लकिंगटन ने बड़े सूअर को

180:40

Speaker A

फिर से बधाई दी। उसने कहा कि यहां जानवरों को कम खाना देने और उनसे ज्यादा काम लेने का तरीका बहुत बढ़िया है। आखिर में उसने सबको खड़े होने को कहा और चिल्लाया। साथियों एनिमल फार्म की कमाई बढ़ती रहे इसका जाम पियो। मेज पर खूब तालियां बजी और

180:58

Speaker A

सबने पैर पटके। नेपोलियन इतना खुश हुआ कि वह अपनी जगह से उठकर पकिंटन के पास गया। उसने अपना गिलास उससे टकराया और पूरी शराब एक बार में गटक गया। जब शोर कम हुआ तो नेपोलियन ने कहा कि वह भी कुछ कहना चाहता है। नेपोलियन का भाषण हमेशा की तरह छोटा

181:19

Speaker A

और काम का था। उसने कहा कि वह भी खुश है कि अब पड़ोसियों के बीच कोई अनबन नहीं रही। उसने बताया कि किसी दुश्मन ने यह अफवाह उड़ाई थी कि वह दूसरे खेतों में बगावत फैलाना चाहता है। नेपोलियन बोला कि यह एकदम झूठ है। वह तो बस शांति से अपना

181:37

Speaker A

धंधा करना चाहता है। उसने यह भी साफ कर दिया कि अब खेत के सारे कागजात बड़े सूअर के पास ही हैं और वही इसके मालिक हैं। नेपोलियन ने कहा कि पुरानी बातों को मिटाने के लिए उसने कुछ और बदलाव किए हैं। अब से कोई भी जानवर एक दूसरे को साथी नहीं

181:55

Speaker A

कहेगा। यह पुरानी और बेकार बात अब बंद होगी। इतवार को जो पुराने सूअर की खोपड़ी के सामने परेड होती थी, वह भी खत्म कर दी गई है। उस खोपड़ी को जमीन में गाड़ दिया गया है। उसने बताया कि उनके हरे झंडे पर जो सफेद खुर और सींग के निशान थे, उन्हें

182:14

Speaker A

भी पछ दिया गया है। अब से वह सिर्फ एक सादा हरा झंडा रहेगा। नेपोलियन ने कहा कि उसे पल्किंगटन की बात में बस एक बात सुधारनी है। पल्किंगटन बार-बार इसे एनिमल फार्म कह रहा था। जानवरों का खेत। नेपोलियन ने ऐलान किया कि

182:34

Speaker A

अब यह नाम मिटा दिया गया है। अब से इस खेत को फिर से पुराना खेत ही कहा जाएगा। उसने कहा कि यही इसका असली और पुराना नाम है। नेपोलियन ने अपना गिलास ऊपर उठाया और कहा साथियों अपने गिलास ऊपर तक भर लो। अब हम पुराना खेत की तरक्की के नाम पर पिएंगे।

182:54

Speaker A

अंदर खूब शोर मचा और सबने अपनी शराब गटक ली। बाहर खड़े बेचारे जानवर यह सब देख रहे थे। उन्हें लगा कि कुछ बहुत अजीब हो रहा है। बड़े सूअर की शक्लें बदलती जा रही थी। बूढ़ी क्लोवर अपनी दुधली आंखों से एक-एक करके सबको देख रही थी। किसी सूअर की तीन

183:14

Speaker A

ठु थी तो किसी की पांच। पर उनकी शक्लें पिघल कर कुछ और ही बनती जा रही थी। फिर अंदर सब फिर से ताश खिलने लगे और जानवर चुपचाप वहां से हटने लगे। वे भी थोड़ी ही दूर गए थे कि अचानक रुक गए। अंदर से जोर-जोर से चिल्लाने की

183:32

Speaker A

आवाजें आ रही थी। वे भागकर फिर खिड़की के पास आए। अंदर बहुत भयानक झगड़ा हो रहा था। मेजें पीटी जा रही थी और सब एक दूसरे को शक से देख रहे थे। झगड़ा इस बात पर था कि नेपोलियन और पकिंटन दोनों ने एक साथ हुकुम का इक्का फेंक दिया था। दोनों ही बेईमानी

183:51

Speaker A

करके अपना उल्लू सीधा करने में लगे थे। मेज पर 12 लोग गुस्से में चिल्ला रहे थे और सबकी आवाज एक जैसी थी। अब कोई शक नहीं रह गया था कि सूअरों के चेहरों को क्या हुआ है। बाहर खड़े जानवरों ने एक बार सूअर को

184:07

Speaker A

देखा। फिर इंसान को। फिर इंसान को देखा और फिर सूअर को। पर अब यह बताना नामुमकिन था कि कौन सूअर है और कौन इंसान। दोनों एक जैसे हो चुके थे। डंडे का राज चलाने वाले अब वही बन चुके थे। जिनसे उन्होंने बगावत की थी।

184:30

Speaker A

इसके साथ जॉर्ज औरवेल की यह कहानी एनिमल फार्म यहीं खत्म होती है। हम फिर मिलेंगे आपसे एक नए एपिसोड में एक नई किताब के साथ। मेरा नाम है रोहित और आप सुन रहे थे सिलेबस वि रोहित। धन्यवाद। ओम

184:59

Speaker A

ओम

Topics: एनिमल फार्म बगावत जानवरों की आज़ादी मेजर का सपना मिस्टर जोंस इंसान और जानवर शोषण हिंदी कहानी सामाजिक संदेश कहानी

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