**अमित शाह का केस सुन रहे Judge Loya के साथ क्या हुआ?। Shyam Meera Singh — Transcript & Summary | SozAI**
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सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में जज लोया की रहस्यमयी मौत और अमित शाह से जुड़े दबावों की जांच।

## Key Takeaways

- जज लोया की मौत को प्राकृतिक नहीं माना जाता, बल्कि इसमें साजिश की संभावना है।
- अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए जज लोया पर भारी दबाव और रिश्वत की पेशकश हुई।
- सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में कई राजनीतिक और न्यायिक गड़बड़ियां शामिल हैं।
- जज लोया की मौत से जुड़े रहस्यों को उजागर करने के लिए पत्रकारों और परिवार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल उठाता है।

## What the video covers

- 2014 में सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस की सुनवाई मुंबई की सीबीआई कोर्ट में हो रही थी।
- जज उत्पट के तबादले के बाद जज लोया ने अमित शाह को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।
- जज लोया की 1 दिसंबर 2014 को कथित हार्ट अटैक से मौत हुई, जो संदिग्ध मानी गई।
- जज लोया की मौत के बाद उनके परिवार और पत्रकारों ने कई दबावों और धमकियों का खुलासा किया।
- मुंबई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने जज लोया को अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए रिश्वत और प्रलोभन देने की कोशिश की।
- सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में हरेन पांड्या की हत्या और उससे जुड़े राज भी उजागर किए गए।
- जज लोया की मौत के बाद उनके दो करीबी मित्रों की भी रहस्यमयी मौत हुई।
- कारवां मैगजीन और पत्रकार निरंजन टाकले ने जज लोया की मौत की गहन जांच कर कई खुलासे किए।
- फॉरेंसिक रिपोर्ट्स ने जज लोया की मौत को हार्ट अटैक नहीं माना, जिससे मौत की साजिश की आशंका बढ़ी।
- यह मामला राजनीतिक दबाव, फर्जी एनकाउंटर और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।

## Chapters

1. 00:00 सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस की शुरुआत और जज उत्पट का तबादला
2. 01:16 जज लोया का केस संभालना और अमित शाह की गैरहाजिरी
3. 02:37 सोहराबुद्दीन केस के राजनीतिक और हत्या से जुड़े राज
4. 04:06 जज लोया की रहस्यमयी मौत और उसके बाद की घटनाएं
5. 06:44 जज लोया के परिवार और पत्रकारों द्वारा किए गए खुलासे
6. 08:07 मुंबई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह द्वारा दबाव और रिश्वत की कोशिश
7. 09:34 जज लोया की मौत की फॉरेंसिक जांच और रिपोर्ट
8. 12:08 मृत्यु के बाद की घटनाएं और राजनीतिक प्रभाव

Answers

## Questions about this video

जज लोया की मौत कब और कैसे हुई थी?

जज लोया की मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में कथित तौर पर हार्ट अटैक से हुई थी, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिवार के बयानों के अनुसार यह मौत संदिग्ध है।

अमित शाह इस केस में क्यों कोर्ट में पेश नहीं हुए थे?

अमित शाह कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिसके कारण जज उत्पट और बाद में जज लोया ने उन्हें कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था।

जज लोया पर किस तरह का दबाव था?

जज लोया पर मुंबई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह द्वारा अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए रिश्वत और प्रलोभन देने का दबाव था, जिसे जज लोया ने स्वीकार नहीं किया।

## Full Transcript — Download SRT & Markdown

00:00

Speaker A

साल 2014 की बात है। सरकार किसकी बनेगी और किसकी नहीं, इस सवाल के अलावा पूरे देश की नजरें एक फर्जी एनकाउंटर के मामले की अदालती सुनवाई पर टिकी हुई थीं। इस मामले की सुनवाई हो रही थी मुंबई स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में।

00:14

Speaker A

और जज थे जेटी उत्पट। मामले की कई तारीख पड़ीं, लेकिन आरोपी अमित साहब पेश नहीं हुए। इस पर जज ने अमित शाह के वकीलों को फटकार लगाई, और कहा कि बिना किसी बहाने की अगली तारीख यानी 26 जून 2014 के दिन

00:28

Speaker A

अमित शाह हर हाल में कोर्ट में पेश हों। जेटी उत्पट के इन तेवरों को देख कोर्ट में हड़कंप मच गया है। इस मामले से जुड़े सभी लोग 26 जून का इंतजार करने लगे, लेकिन 26 जून की तारीख से ठीक एक दिन पहले ही

00:42

Speaker A

जज साहब का तबादला कर दिया गया। जज का तबादला सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी उल्लंघन था, जिसमें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस पूरे मामले की सुनवाई शुरू से लेकर एंड तक सिर्फ और सिर्फ एक जज करेगा।

00:56

Speaker A

लेकिन बावजूद इसके अमित शाह से जुड़े इस केस की सुनवाई करने वाले जज का तबादला कर दिया गया। इसके बाद अगले जज जस्टिस ब्रजगोपाल हरिकिशन लोया यानी जस्टिस लोया, शुरुआत में जस्टिस लोया ने कोर्ट में अमित शाह के पेश न होने पर नरम रुख रखा, लेकिन एक दिन हारकर उन्होंने भी अमित शाह के वकीलों को फटकार लगाई

01:16

Speaker A

और कहा कि अमित शाह हर हाल में कोर्ट में पेश हों। लेकिन इसके बावजूद अमित शाह अगली तारीख पर कोर्ट में नहीं पहुंचते हैं। नाराज लोया ने पंद्रह दिसंबर की तारीख रखते हुए आदेश दिया कि अमित शाह पेश हों।

01:30

Speaker A

लेकिन जज लोया की जिंदगी में वह पंद्रह तारीख फिर कभी नहीं आई। इस तारीख के 15 दिन पहले ही यानी एक दिसंबर 2014 के दिन अमित शाह के इस मामले की सुनवाई करने वाले जज लोया की रहस्मयी ढंग से कथित तौर पर

01:44

Speaker A

दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इस बहुचर्चित केस का नाम था सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस। जज लोया की मौत के बारे में कहा गया कि नागपुर में एक शादी में भाग लेने गए लोया को हार्ट अटैक आ गया था, जिससे उनकी जान चली गई।

01:58

Speaker A

लेकिन क्या वाकई जज लोया की मौत हार्ट अटैक से हुई थी? जिस हालत में उनके परिवार वालों को लोया का शव मिला, जिस तरह उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से छेड़छाड़ हुई, जिस तरह उनके मोबाइल से कॉल और मैसेज डिलीट किए गए,

02:11

Speaker A

और जिस तरह का प्रलोभन और धमकियां उन्हें अमित शाह के केस में फेवरेबल जजमेंट देने के लिए दी जा रहीं थीं, उससे इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि जज लोया की मौत एक प्राकृतिक मौत थी। इसलिए जज लोया की मौत से जुड़ी सीरीज में हम टटोलेंगे कि Who Killed Judge Loya? यानी जज लोया को किसने मारा?

02:37

Speaker A

नमस्कार, मैं श्याम मीरा सिंह। साल 2006 में गुजरात में हुए इस सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई पहले जज जेटी उत्पट कर रहे थे और बाद में जज लोया करने लग रहे थे। वो सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामला सिर्फ सोहराबुद्दीन की हत्या का मामला नहीं था। सोहराबुद्दीन तो दरअसल

02:57

Speaker A

राजनीतिक खिलौना भर था, जिसकी बंदूक से उसके मालिकों ने अपने ना जाने कितने प्रतिद्वंद्वियों को निपटाया था। सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले की जड़े सोहराबुद्दीन ना शुरू होकर भाजपा नेता और गुजरात के गृहमंत्री रहे हरेन पांड्या की मौत से शुरू होती हैं। हरेन पांड्या भाजपा में होते हुए भी

03:18

Speaker A

नरेंद्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी थे। उन्होंने साल 2002 में हुए दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर भी गवाही दी कि गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी का हाथ था, ऐसा उन्होंने कहा था। लेकिन इसके कुछ महीने बाद ही

03:31

Speaker A

हरेन पांड्या की रहस्यमई ढंग से हत्या कर दी गई। हरेन पांड्या की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि सोहराबुद्दीन ने की थी, लेकिन करवाई किसने थी यह अब तक का एक बड़ा रहस्य है। गुजरात दंगों में गवाही देने के कुछ महीने बाद ही

03:45

Speaker A

सोराबुद्दीन ने अपने साथी तुलसीराम प्रजापति के साथ मिलकर हरेन पांड्या को निपटा दिया था। बाद में फर्जी एनकाउंटरों के माध्यम से हरेन पांड्या की हत्या में शामिल सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति को भी गुजरात पुलिस ने निपटा दिया था। यहां तीन महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं। पहला सवाल ये कि सोहराबुद्दीन की

04:06

Speaker A

हरेन पांड्या से कोई दुश्मनी नहीं थी तो आखिर उसने हरेन पांड्या की हत्या क्यों की और किसके कहने पर? दूसरा सवाल ये कि आखिर सोहराबुद्दीन हरेन पांड्या की मौत से जुड़े कौन सी राज जानता था, जिसके कारण की

04:20

Speaker A

फर्जी एनकाउंटर करके उसे और उसके साथी तुलसीराम प्रजापति दोनों को ही निपटा दिया गया। तीसरा सवाल सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई करने वाले जज लोया की मौत का कि क्या वाकई में जज लोया की एक हार्ट अटैक से हुई थी या इसके पीछे भी कोई कहानी है? अगर इन कहानियों के तार पकड़ेंगे तो पाएंगे कि जज लोया की

04:41

Speaker A

मौत सिर्फ एक जज की मौत तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी हत्या के तार उस अंतिम आदमी की गलेबान तक जाते हैं जिसने कि गुजरात दंगों में गवाही देने वाले हरेन पांड्या को मरवाया था और हरेन पांड्या की हत्या के लिए

04:55

Speaker A

जिम्मेदार उस असली आदमी को बचाने के लिए एक हत्या के बाद दूसरी हत्या और दूसरी हत्या के बाद तीसरी हत्या की गई। जैसा कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह कहती हैं कि हत्याओं का यह सिलसिला उस वक्त तक चलता रहा जब तक कि राजनेता, आम स्त्री-पुरुष, गवाह और अंत में जज समेत

05:15

Speaker A

सभी लोगों की मौत नहीं हो जाती। जज लोया की मौत को एक अकेली घटना के रूप में देखना उस पूरी कड़ी को नजरअंदाज करने जैसा है, जिसमें सबसे पहले हरेन पांड्या की मौत होती है, फिर जिनसे उनकी हत्या करवाई गई, उन तुलसीराम प्रजापति और सोहराबुद्दीन को भी फर्जी एनकाउंटर में मार दिया जाता है।

05:34

Speaker A

फिर इस मामले में सुनवाई करने वाले जज का तबादला कर दिया जाता है और अंत में उस जज की भी रहस्यमय ढंग से मौत हो जाती है, जिसमें कि अमित शाह को अदालत में पेश होने का फरमान सुना दिया था और उसके ठीक

05:47

Speaker A

एक महीने के अंदर ही अमित शाह को नए जज साहब के द्वारा बाइज्जत रिहा कर दिया जाता है। शुरू में जज लोया की मौत को प्राकृतिक मौत तो करार दे दिया गया, लेकिन जज लोया के मौत के बाद दो और मौत हुई।

06:02

Speaker A

एक वकील श्रीकांत खंडालकर की और दूसरे रिटायर्ड जज प्रकाश थ्रोमबे की। दोनों ही मृतक जज लोया के दोस्त थे और इन दोनों ही दोस्तों को जज लोया ने अमित साह के केस से जुड़ा एक बड़ा राज बताया था। यह बड़ा राज क्या था

06:16

Speaker A

जिसे जज लोया की मौत के बाद छुपाने के लिए इन दोनों लोगों को धमकियां दी जा रही थीं और अंत में इन दोनों ही लोगों की रहस्मय ढंग से मौत हो गई। जज लोया की मौत पर गहराई से पड़ताल करने से पहले और

06:30

Speaker A

इस राज से पर्दा उठाने से पहले जज लोया के परिवार ने जो गंभीरा लगाए उनको जानना जरूरी है। जज लोया की मौत के बाद एक जज का परिवार इतना सहम गया कि उन्होंने अगले तीन साल तक मीडिया में कोई बात नहीं की, लेकिन

06:44

Speaker A

लोया का परिवार उनकी मौत के किन रहस्यों को जानता है यह पहली बार तब बाहर आया जब देश के जाने-माने इन्वेस्टिगेटिव पत्रकार निरंजन टाकले ने नवंबर 2017 में अपनी पहली स्टोरी ब्रेक की। कारवां मैगजीन पर छपी इस स्टोरी में निरंजन टाकले ने उन रहस्यों का खुलासा किया कि पूरे देश में हड़कंप मच गया। इस स्टोरी के लिए

07:06

Speaker A

निरंजन टाकले ने साल भर के करीब ग्राउंड रिपोर्ट पर काम किया, लोया के परिवार से बातचीत की, उनकी बहन से बातचीत की, उनके पिता से बात की। जज लोया की एक बहन अनुराधा बियानी ने खुलासा किया कि अमित शाह से

07:19

Speaker A

जुड़े इस मामले में अमित शाह के फेवर में फैसला सुनाने के लिए मुंबई हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह ने लोया को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की पेशकश की थी और साथ ही मुंबई में घर देने का प्रलोभन दिया था। जज लोया की बहन अनुराधा बियानी ने आगे बताया कि जिन दिनों जज लोया

07:40

Speaker A

इस मामले की सुनवाई कर रहे थे, तभी उनका परिवार गाटे गांव में स्थित अपने पैतृक निवास पर दीवाली मनाने के लिए इकट्ठा हुआ था। उसी वक्त लोया ने अपने परिवार के सामने यह बात बताई थी और साथ ही

07:53

Speaker A

यह भी बताया था कि इस मामले में अमित शाह के फेवर में फैसला देने के लिए उन पर कितना दबाव था। लोया की बहन अनुराधा बियानी के मुताबिक मुंबई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह देर रात उन्हें फोन करके

08:07

Speaker A

साधारण कपड़ों में मिलने के लिए कहते थे और उनके ऊपर जल्द से जल्द फैसला देने का दबाव बनाते थे और यह सुनिश्चित करने को कहते थे कि फैसला अमित शाह के फेवर में हो। जज मोहित शाह द्वारा जज लोया को दी जाने वाली रिश्वत की पेशकश वाली सेम बात जज लोया के पिता हरिकिशन ने कही। उन्होंने कहा

08:27

Speaker A

उनके बेटे को पैसे की पेशकश की जा रही थी और पूछा जाता था कि क्या आपको मुंबई में मकान चाहिए, कितनी चाहिए? हमें यह सब बताता था और बाकायदा उसे एक ऑफर था, लेकिन उनके बेटे ने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

08:42

Speaker A

उन्होंने मुझे बताया कि मैं तबादला ले लूंगा या इस्तीफा दे दूंगा, मैं गांव जाकर खेती करूंगा, लेकिन गलत जजमेंट नहीं दूंगा। कारवां की रिपोर्ट में जज लोया के भतीजे ने एक बयान दिया है। उनके अनुसार वे जब कोर्ट से घर आते थे तो कहते थे बहुत टेंशन है, तनाव काफी था, यह मुकदमा बहुत बड़ा था, इससे कैसे निपटते

09:03

Speaker A

हर कोई इसमें शामिल है। जज लोया की बहन के अनुसार चीफ जस्टिस मोहित शाह जज को यहां से कहते थे कि अमित शाह के फेवर में दिया यह फैसला तीस दिसंबर से पहले आ गया तो उस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं जाएगा क्योंकि

09:18

Speaker A

उसी के आसपास एक धमाकेदार स्टोरी आने वाली है जो लोगों का ध्यान इससे हटा देगी। जज लोया ने दबाव और प्रलोभन में आने से इनकार कर दिया था और इस मामले पर सुनवाई की अगली तारीख पंद्रह दिसंबर रखी थी कि

09:34

Speaker A

पंद्रह दिसंबर से पहले ही यानी एक दिसंबर की।

09:49

Speaker A

सुनवाई शुरू कर दी और तीन दिन तक उन्होंने सिर्फ अमित शाह को बरी करने की मांग करने वाले यानि कि डिफरेंस के वकीलों की दलीलें सुनी जबकि उनके खिलाफ मुकदमा लड़ रही सीबीआई की दलीलों को मात्र 15 मिनट सुना

10:03

Speaker A

पंद्रह दिसंबर को शुरू हुई सुनवाई को तीन दिन में ही सत्रह दिसंबर को पूरा कर लिया गया और आदेश सुरक्षित रख लिया गया सत्रह दिसंबर को सुरक्षित रखें इस आदेश को तीस दिसंबर 2014 के दिन सुनाते हुए अमित शाह को

10:19

Speaker A

बाइज्जत बरी कर दिया गया इस केस में सालों से सुनवाई चल रही थी और इस केस में 10,000 से अधिक पन्नों की केवल चार्ज शीट थी यह विचार करने की बात है कि जज लोया की जगह आये नए जज ने कैसे इतने कम समय में इतनी बड़ी

10:33

Speaker A

चार्ज शीत को पढ़ लिया होगा और नए जज ने साल 2005 से 2014 तक चल रहे इस मामले को तीन दिन की मामूली से सुनवाई में कैसे निपटा दिया और फैसला सुनाने की तारीख भी वही तीस दिसंबर को रखा जिस दिन की बात जज लोया का

10:49

Speaker A

परिवार कर रहा था कि मोहित शाह जज लोया से कहते थे कि अगर वे अमित शाह के फेवर में फैसला सुना देंगे तो 30 दिसंबर के दिन कोई धमाकेदार स्टोरी होगी जिससे के लोगों का ध्यान इस फैसले से हटकर उस खबर पर चला जाएगा

11:03

Speaker A

नए जज ने जज लोया की मौत के एक महीने के भीतर ही अमित शाह को रिहा कर दिया इधर अमित शाह रिहा होते हैं और उधर देश में खबर आती है कि एमएस धौनी ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से लिया संन्यास हमेशा की खबर टिकर पर आई

11:19

Speaker A

छोटी सी खबर आई कि अमित शाह निर्दोष और पूरी टीवी स्क्रीन पर छा गए इन एमएस धौनी और उनके रिटायरमेंट का फैसला नागपुर में जज लोया की रहस्यमय ढंग से मौत हो गई तो उनके परिवार को बताया गया हार्ट अटैक से मौत हुई है

11:35

Speaker A

लेकिन जब जज लोया शव नागपुर से लातूर स्थित उनके पैतृक गांव गाटे गांव लाया गया तो जिन परिस्थितियों में शव था उससे हार्ट अटैक वाली बात पर शक होता है जज लोया की बहन अनुराधा बियानी के अनुसार जज लोया का शव

11:51

Speaker A

रात साढे ग्यारह बजे के आसपास वह लाया गया था लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि नागपुर से लाई गई लाश के साथ जज लोया का कोई भी कलिग या उनका दोस्त उनके साथ नहीं था केवल एंबुलेंस का ड्राइवर था चौकाने वाली बात थी

12:06

Speaker A

कि जिन दो जजों के आग्रह पर वे शादी में भाग लेने के लिए नागपुर गए थे उनमें से कोई भी उनके साथ नहीं था और जज गोढ़े ने उनको खबर दी थी परिवार को खबर दी थी वह भी उनकी लाश के साथ नहीं था इस सारी बातें

12:21

Speaker A

जज लोया की बहन अनुराधा बियानी ने अपनी डायरी में लिखी हुई हैं इस डायरी में अनुराधा बियानी ने एक चौंकाने वाला यह तथ्य भी लिखा है कि लोहिया के कॉलर पर खून का धब्बा था उनकी बेड उलटी दिशा में मुड़ी हुई थी

12:35

Speaker A

पेंट की क्लिप टूटी हुई थी मेरे चाचा यानी जज लोया के चाचा को भी महसूस हुआ था कि कुछ संदिग्ध हैं और यही सेम बात जज लोया के पिता ने भी कई की जज लोया के कपड़ों पर खून के दाग थे जज है कि दूसरी बहन

12:49

Speaker A

सरिता मान्धा ने जो औरंगाबाद में ट्यूशन सेंटर चलाती हैं उनका भी सेम कहना है कि जज जोया के सर पर चोट थी और गर्दन पर खून के धब्बे थे शर्ट पर खून के निशान थे जज लोया के कपड़ों पर खून के धब्बों के बयान

13:03

Speaker A

हार्ट अटैक से हुई मौत पर सवाल खड़े करते हैं कारवां मैगजीन के लिए लिखी निरंजन टाकले की इस रिपोर्ट के बाद देशभर की राजनीति में हंगामा मच गया राहुल गांधी के नेतृत्व में 100 से अधिक सांसद राष्ट्रपति कोविंद से मिले दिल्ली में ही वकीलों ने प्रदर्शन किए और न्याय की मांग की कई याचिका अदालत में

13:24

Speaker A

डाली गई एक याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानी सीपीआईएल की तरफ से डाली गई सीपीआईएल की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने 2 रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखीं उन्होंने अदालत से कहा कि उनके पास दो रिपोर्ट हैं जिन्हें सरकार ने अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया

13:44

Speaker A

क्योंकि यह दो रिपोर्ट उस बात को खारिज कर देती हैं कि जज लोया की मौत किसी हार्ट अटैक से हुई थी चूकि महारष्ट्र की भाजपा सरकार इसे हार्ट अटैक की तरह पेश करना चाहती थी इसलिए उसने इन दो रिपोर्ट को

13:56

Speaker A

अदालत के सामने पेश नहीं किया गया था यह दो रिपोर्ट हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट दूसरी थी ECG रिपोर्ट दरअसल पोस्टमार्टम के अलावा डॉक्टरों द्वारा मृतक के शरीर के अलग-अलग अंगों से टीसुस्स यानी वोतक निकाल लिए जाते हैं जिन्हें अलग से फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए भेजा जाता है जिससे की मौत के असली कारणों का

14:18

Speaker A

पता लगाने में मदद मिलती है इसे हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट कहते हैं हिंदी में इसे विसरा रिपोर्ट कहा जाता है जिसमें कि माइक्रोस्कोप से शरीर की सभी कोशिकाओं का परीक्षण किया जाता है केमिकल एनालिसिस की जाती है और मौत के असली कारणों का पता लगाया जाता है महाराष्ट्र सरकार ने जो अपनी कथित जांच की थी

14:39

Speaker A

और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी उसमें इस रिपोर्ट को छुपा लिया गया था कारवां मैगजीन ने इस रिपोर्ट पर एक विस्तृत स्टोरी पब्लिश की थी जिसमें उसने आरटीआई से प्राप्त हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट को लेकर दिल्ली के एम्स अस्पताल की फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के हेड रहे डॉक्टर आरके शर्मा से

15:00

Speaker A

बात की आरके शर्मा फॉरेंसिक रिपोर्ट के मामले में देश की सबसे अधिक अनुभव रखने वाले एक्सपर्ट में से एक हैं कारवां मैगजीन के अनुसार डॉ आरके शर्मा ने जज लोया की हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट की जांच करने के बाद कहा कि कहीं से भी यह मामला हार्ट अटैक का मालूम नहीं पड़ता उनके अनुसार यह कागजात दिखाते हैं

15:19

Speaker A

कि जज लोया के मस्तिष्क को संभव है कोई आघात पहुंचा था और यह भी मुमकिन है कि उन्हें जहर दिया गया हो डॉ आरके शर्मा के अनुसार हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में मायोकार्डियल इन्फॉर्मेशन का कोई साक्ष नहीं मिलता इस रिपोर्ट के नतीजे दिल के दौरे की ओर इशारा नहीं करती इतना बदलाव दर्शाए गए हैं लेकिन

15:41

Speaker A

यह दिल के दौरे से नहीं जुड़ा हुआ है उन्होंने आगे कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट यह भी कहती है कि उनकी धमनियों में कैल्सी कारण दिखाई दे रहा है जहां कैल्सी कारण होता है वहां दिल का दौरा नहीं हो सकता

15:55

Speaker A

साफ है फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ आरके शर्मा का मत सरकार के उस दावे को खारिज करता है जिसमें सरकार कहती हैं कि जज लोया की मौत दिल के दौरे से हुई इस रिपोर्ट को वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में पेश किया

16:09

Speaker A

इसके अलावा प्रशांत भूषण ने दूसरी रिपोर्ट यानि कि सीएजी की रिपोर्ट को पेश किया जिसे सरकार ने अपनी रिपोर्ट सौंपते समय अदालत में पेश नहीं किया था दरअसल हार्टअटैक के शुरुआती लक्षणों में जैसे कि सीने में जलन होना सांस लेने में तकलीफ होना नसों में कोई ब्लॉक होना तो उसमें सबसे पहले मरीज का ECG टेस्ट

16:28

Speaker A

ही किया जाता है दरअसल जज लोया के मामले में इसीजी टेस्ट की भी अपनी एक कहानी है सरकार का कि नागपुर के डांडे अस्पताल में जहां जज लोया को सबसे पहले ले जाया गया था वहां जज लोया का सबसे पहले ECG कराया गया था

16:43

Speaker A

लेकिन कारवां मैगजीन का कहना है कि ECG कराया ही नहीं गया था इस कथित ECG की रिपोर्ट को कई मीडिया संस्थानों में प्रकाशित किया गया था माना जाता है कि इस कथित ईसीजी रिपोर्ट को सरकार के द्वारा प्लांट किया गया था ताकि कारवां मैगजीन की रिपोर्ट को गलत ठहराया जा सके जो ठीक कह रही थी कि ECG

17:04

Speaker A

नहीं कराया गया लेकिन कमाल की बात है कि जब लोया मामले की जांच रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की तो इस ECG रिपोर्ट को पेश नहीं किया गया लेकिन प्रशांत भूषण ने इस रिपोर्ट को अदालत के सामने रखा और कहा कि मैंने इस कथित ECG रिपोर्ट को ढेर सारे हृदय रोग विशेषज्ञों को दिखाया

17:25

Speaker A

एक प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ जाने के डॉक्टर उपेंद्र कौल को भी दिखाया उनके राय ली गई उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार क्विक हार्ट अटैक के लक्षण नजर नहीं आते प्रशांत भूषण ने अदालत में तर्क रखा कि अगर यही ECG रिपोर्ट है तो यह मौत के पीछे दिल के दौरे की बात को खारिज करती हैं और अगर यह जज लोया की

17:48

Speaker A

ईसीजी रिपोर्ट नहीं है और किसी और की ECG रिपोर्ट है और इसे प्लांट किया गया है तो यह गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर किसने फर्जी तरीके से ECG रिपोर्ट बनाई और क्यों बनाई और किसने इसे इंडियन एक्सप्रेस

18:02

Speaker A

में छपवाया दरअसल कारवां की रिपोर्ट छपने के बाद जज लोया की मौत के पीछे का इशारा कहीं न कहीं अमित शाह की तरफ जा रहा था जज लोया की मौत पर आई इस रिपोर्ट के बाद सरकार दबाव में आ गई इसके बाद

18:17

Speaker A

पीएम सतर्क हो गया कारवां मैगजीन की एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल को यह काम दिया गया कि स्टोरी किसी भी टीवी चैनल पर छपने ना पाएं इसके लिए बाकायदा टीवी मालिकों को कॉल की गई

18:31

Speaker A

जब कारवां मैगजीन ने जज पर की अपनी स्टोरी का दूसरा पार्ट अगले दिन पब्लिश कर दिया और जज लोया के परिवार के बयानों की वीडियो भी जारी कर दी तो पीयूष गोयल परेशान हो गए सरकार की तरफ से काउंटर करने केलिए

18:45

Speaker A

विकल्प तलाशे जाने लगे इसके बाद अमित साह अरूण जेटली देवेंद्र फड़नवीस और पीयूष गोयल को मिलाकर चार सदस्यों की टीम गठित की गई और इसी कड़ी में एक ईसीजी रिपोर्ट प्लांट की गई ताकि कारवां मैगजीन को झूठा ठहराया जा सके जो कि कह रही थी ECG रिपोर्ट हुई नहीं थी लेकिन सरकार द्वारा प्लांट की गई

19:09

Speaker A

इस फर्जी ECG रिपोर्ट में एक चूक हो गई जिसे कि अलग-अलग अखबारों के द्वारा प्रकाशित किया गया था वह चुकी क्या थी जिसने कि ECG कि इस फर्जी रिपोर्ट का भंडा फोड़ दिया इस पर अगले एपिसोड में बात करेंगे

19:22

Speaker A

और इस पर भी बात करेंगे कि जज लोया की मौत का असली कारण क्या था और इस कारण का राज जानने वाले उनका दोस्त वकील श्रीकांत खंडालकर और रिटायर्ड जज प्रकाश थ्रोबय की भी बात करेंगे कि जिनकी जज लोया की ही तरह

19:38

Speaker A

रहस्यमय ढंग से मौत हो गई थी एक की मौत को आत्महत्या बता दिया गया था और एक की मौत को दुर्घटना लेकिन वह राज आज तक बाहर नहीं आने दिया गया जिस राज ने जज लोया वकील श्रीकांत खंडालकर और रिटायर्ड जज प्रकाश थ्रोम्बय

19:54

Speaker A

की जान ले ली यह राज एक ड्राफ्ट जजमेंट का जिसमें जज लोया को कहा गया था कि यह जजमेंट है इस पर सिर्फ साइन करने हैं और अमुक तारीख को फैसला सुनाना है यह बना बनाया जजमेंट जज लोया को किसने दिया था

20:09

Speaker A

इस ड्राफ्ट जजमेंट की पूरी कहानी क्या है इसे जानेंगे नेक्स्ट एपिसोड में तब तक बने रहिए नमस्कार

Topics: जज लोया अमित शाह सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर राजनीतिक दबाव मुंबई सीबीआई कोर्ट रिश्वत न्यायपालिका मौत का रहस्य निरंजन टाकले कारवां मैगजीन

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